लोकसभा चुनाव के छठें चरण में गठबंधन का ‘गणित’ मजबूत,

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 12 मई को होने वाले अगले चरण के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महागठबंधन की सबसे कठिन चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि चुनावी गणित इस चरण की लगभग सभी 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन के पक्ष में बैठता है.भाजपा ने 2014 में इन सीटों में से आजमगढ़ को छोड़कर सभी पर कब्जा जमाया था. लेकिन, इस बार इन सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे को असर दिखाना होगा क्योंकि महागठबंधन यहां मजबूत विकेट पर खेल रहा है, कम से कम कागजों पर तो यही प्रतीत होता है.

फूलपूर में, जहां से गठबंधन ने अपने प्रयोग की शुरुआत की थी, भाजपा को यहां पहले ही गठबंधन की मजबूती का एहसास हो चुका है. 2018 उपचुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था.अगर सपा व बसपा उम्मीदवारों को 2014 में मिले वोट को देखें और अगर दोनों पार्टियों के पारंपरिक मतदाताओं ने उनका साथ नहीं छोड़ा तो भाजपा संभवत: प्रतापगढ़ को छोड़कर सभी 14 सीटों पर हारने की स्थिति में है.भाजपा इन सीटों पर काफी हद तक प्रधानमंत्री मोदी के वोट को अपने पक्ष में करने की शक्ति पर निर्भर है, क्योंकि उनका धुआंधार चुनाव प्रचार पारंपरिक वोट बैंक की सीमाओं को तोड़ने वाला साबित हो सकता है.पांच चरण के चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की 80 में से 53 सीटों पर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है.

आजमगढ़ से अखिलेश यादव का सामना प्रसिद्ध भोजपुरी कलाकार दिनेश लाल यादव निरहुआ से है। इस सीट पर 2014 में मुलायम सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी.इस चरण में भाजपा नेता मेनका गांधी के भी भाग्य का फैसला होगा.वह इस बार सुलतानपुर से चुनाव लड़ रही हैं जहां से उनके बेटे वरुण गांधी मौजूदा सांसद हैं.

छठे चरण के चुनाव के अंतर्गत सीटों का विश्लेषण इस प्रकार है.

श्रावस्ती (2014)

विजेता                     :    ददन मिश्रा : भाजपा : वोट प्राप्त 3,45,964 अतीक अहमद             :    सपा : 2,60,051 लालजी वर्मा               :    बसपा : 1,94,890 सपा और बसपा मिलाकर :    4,54,890 फायदा                     :    महागठबंधन को

2019 में प्रत्याशी ददन मिश्रा : भाजपा धीरेंद्र प्रताप सिंह : संप्रग राम शिरोमणी वर्मा : महागठबंधन

डुमरियागंज(2014)

विजेता                  :    जगदंबिका पाल : भाजपा : 2,98,845 माता प्रसाद पांडे        :    सपा : 1,74,778 मुहम्मद मुकीम         :    बसपा : 1,95,257 फायदा                   :    महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी जगदंबिका पाल : भाजपा आफताब आलम : महागठबंधन

                               सुलतानपुर (2014) विजेता                       :     फिरोज वरुण गांधी : भाजपा : 4,10,348 पवन पांडे                    :     बसपा  2,31,446 शकील अहमद               :     सपा 2,28,114 सपा और बसपा मिलाकर   :     4,59,590 फायदा                       :     महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी मेनका गांधी : भाजपा संजय सिंह : संप्रग चंद्रभद्र सिंह : महागठबंधन कमला यादव : पीडीए

                               प्रतापगढ़ (2014) विजेता                          :     कुंवर हरिवंश सिंह : भाजपा : 3,75,789 आसिफ निजामुद्दीन            :     बसपा : 2,07,567 प्रमोद कुमार सिंह पटेल        :     सपा : 1,20,107 सपा और बसपा को मिलाकर  :     3,27,674 फायदा                          :     भाजपा

                                लालगंज (2014) विजेता                          :      नीलम सोनकर : भाजपा : 3,24,016 डॉ. बलिराम                    :       बसपा 2,33,971 बेचाई सरोज                    :      सपा2,60,930 सपा और बसपा को मिलाकर  :      4,94,901 फायदा                          :      महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी  नीलम सोनकर : भाजपा पंकज मोहन सरकार : संप्रग संगीता : महागठबंधन हेमराज पासवान : पीडीए

                                 आजमगढ़ (2014) विजेता                          :    मुलायम सिंह यादव : सपा : 3,40,306 रामाकांत यादव                 :    भाजपा : 2,77,102 शाह आलम                     :    बसपा : 2,66,528 सपा और बसपा को मिलाकर  :    6,06,834 फायदा                          :    महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी दिनेश लाल यादव निरहुआ : भाजपा अखिलेश यादव : महागठबंधन

                                  जौनपुर (2014) विजेता                             :   कृष्ण प्रताप : भाजपा-3,67,149 पारसनाथ यादव                   :   सपा-1,80,003 सुभाष पांडेय                       :   बसपा-2,22,0839 सपा और बसपा को मिलाकर     :   4,00,842 फायदा                             :   महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी के.पी. सिंह : भाजपा देवव्रत मिश्रा : संप्रग श्याम सिंह यादव : महागठबंधन संगीता यादव : पीडीए

                                मछलीशहर (2014) विजेता                           :    राम चरित्र निषाद – भाजपा : 4,38,210 तूफानी                           :    सपा-1,91,387 भोलानाथ                        :    बसपा – 2,66,055 सपा और बसपा को मिलाकर   :    4,57,442                                फायदा                           :   महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी वीपी सरोज : भाजपा त्रिवेणी राम : महागठबंधन

                                 भदोही (2014) विजेता वीरेंद्र सिंह              :       भाजपा-4,03,695 सीमा मिश्रा                     :       सपा-2,38,712 राकेश धर त्रिपाठी              :       बसपा- 2,45,554 फायदा                          :       महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी रमेश बिंद-भाजपा रमाकांत यादव- संप्रग रंगनाथ मिश्रा-महागठबंधन

                                   बस्ती (2014) विजेता हरीश द्विवेदी                  :   भाजपा- 3,57,680 बृजकिशोर सिंह                         :   सपा-3,24,118 रामप्रसाद चौधरी                       :   बसपा – 2,83,747 सपा और बसपा को मिलाकर          :   6,07,865 फायदा                                  :   महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी हरीश द्विवेदी : भाजपा राजकिशोर सिंह : संप्रग रामप्रसाद चौधरी : महागठबंधन रामकेवल यादव : पीडीए

                               संतकबीर नगर (2014) विजेता                               :   शरद त्रिपाठी : भाजपा-3,48,892 भीष्म शंकर उर्फ कौशल तिवारी    :   बसपा-2,50,914 भालचद्र यादव                       :   सपा – 2,40,169 फायदा                               :   महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी प्रवीण कुमार निषाद : भाजपा परवेज खान : संप्रग भीष्म शंकर उर्फ कौशल तिवारी : महागठबंधन

                                  इलाहाबाद (2014) विजेता श्याम चरण गुप्ता             :   भाजपा- 3,13,772 केशरी देवी                              :   बसपा – 1,62,073 कुंवर रेवती रमण सिंह                 :   सपा – 2,51,763 सपा और बसपा को मिलाकर         :   4,13,836                            फायदा                                 :   महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी रीता बहुगुणा : भाजपा राजेंद्र सिंह पटेल : महागठबंधन योगेश शुक्ला : संप्रग

                                 अंबेडकर नगर (2014) विजेता                           :    हरि ओम पांडेय : भाजपा-4,32,104 राकेश पांडेय                     :    बसपा-2,92,675 राममूर्ति वर्मा                    :    सपा-2,34,467 सपा और बसपा को मिलाकर   :    5,22,142 फायदा                           :    महागठबंधन

2019 में प्रत्याशी मुकुट बिहारी वर्मा : भाजपा उम्मेद सिंह निषाद : संप्रग रितेश पांडेय : महागठबंधन प्रेम निषाद : पीडीए

                                फूलपुर (2014) विजेता                           :   केशव प्रसाद मौर्या : भाजपा : 5,03,564 कपिल मुनी करवारिया          :   बसपा : 1,63,710 धर्म राज सिंह पटेल             :   1,95,082 सपा बसपा को मिलाकर        :   3,58,792                                    फायदा                           :    भाजपा

2019 में प्रत्याशी केशरी पटेल : भाजपा पंकज निरंजन : संप्रग पंधेरी यादव : महागठबंधन प्रिया सिंह : पीडीए

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गठबंधन की रैली में बोलीं मायावती, भाजपाई बौखलाहट में अपना रहे हर तरह के हथकंडे

बसपा सुप्रीमो मायावती आजमगढ़ की संयुक्त रैली में भाजपा पर जमकर बरसीं. उन्होंने कहा कि भाजपा ने षडयंत्र के तहत ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति पर चलते हुए अखिलेश के खिलाफ प्रत्याशी उतारा है. इसलिए इन्हें ऐसा सबक सिखाना जरूरी है कि फिर कभी कोई चुनाव लड़ने की हिम्मत न कर सके. अब तक हुए पांच चरणों के मतदान में महागठबंधन को जनता का अपार जनसमर्थन मिला है. अगले चरण में परिणाम और भी ज्यादा बेहतर रहने वाले हैं. यह गठबंधन सामाजिक महापरिवर्तन लाने का रिश्ता है जो टिकाऊ और लम्बे समय तक चलेगा.

रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने आजमगढ़ की जनता से सपा प्रत्याशी अखिलेश यादव को ऐतिहासिक मतों से जीत दर्ज कराने की अपील की. उन्होंने कहा कि यहां से अखिलेश यादव नहीं, मैं ही चुनाव लड़ रही हूं. जनसभा में लालगंज से महागठबंधन की प्रत्याशी संगीता आजाद को भी जिताने की अपील की गई.

‘भाजपा के लोग अपना रहे हर तरह के हथकंडे’

भाजपा पर हमलावर होते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा-आरएसएस के लोग जाति, धर्म, आतंकवाद और देशभक्ति के नाम पर कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. भाजपाई बौखलाहट में हैं और हमारी संस्कृति सभ्यता के हिसाब से संस्कारी रिश्तों पर तंज करते हैं. यह रिश्ता सभ्यता संस्कृति के हिसाब से बना है, जिसका सम्मान करना चाहिए. बहुजन समाज पार्टी-समाजवादी पार्टी का गठबंधन आगे बढ़कर सदियों से उपेक्षा के शिकार लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाने का रिश्ता बना है. बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का समाज के कमजोर और वंचित लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने में विशेष योगदान रहा है.

‘प्रधानमंत्री नहीं प्रचारमंत्री’

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इतना प्रचार किया कि जनता उन्हें प्रचारमंत्री समझ रही है. पांच साल में यह भारत के एक प्रतिशत लोगों के हीआ प्रधानमंत्री हैं. प्रधानमंत्री पुराने मुद्दे भूल गये हैं. बनारस में भाजपा के लोग सेना के एक जवान से डर गए. प्रधानमंत्री आतंकवाद हटाने की बात करते हैं, लेकिन पांच साल के कार्यकाल में आतंकवाद रोकने के लिए कोई काम नहीं किया.

उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग एक-दूसरे से झगड़ा लगाते हैं. महागठबंधन एक दूसरे के बीच जो दूरी है उसे खत्म करना चाहता है. हमारी सोच है कि आबादी के हिसाब से सबको हिस्सेदारी मिलनी चाहिए. जबकि भाजपा सरकार आरक्षण छिनने की साजिश कर रही है. संविधान से मिले अधिकारों पर हमला हो रहा है. इनसे सावधान रहने की जरूरत है. आज पूरे देश में भाजपा को महागठबंधन ही रोक रहा है.

‘जनता के नहीं भाजपा नेताओं के आए अच्छे दिन’

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने कहा कि जनता के अच्छे दिन तो आए नहीं, भाजपा नेताओं के अच्छे दिन आ गए हैं. नौजवानों को दो करोड़ नौकरियां नहीं मिलीं. प्रधानमंत्री झूठ बोलते हैं. वे खुद को चौकीदार कहते हैं, पर वह उन बड़े लोगों के चौकीदार हैं जो बैंकों से धन लूटकर विदेश भाग गए. उनके भाषण के दौरान चौकीदार चोर है, के नारे भी लगे. उन्होंने महागठबंधन के प्रत्याशियों की जीत की अपील की.

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जानिए, आईएनएस विराट से जोड़कर राजीव गांधी की किस छुट्टी की बात कर रहे हैं मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली के रामलीला मैदान से एक बार फिर गांधी परिवार पर निशाना साधा. पीएम मोदी ने गांधी परिवार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि 1987 में राजीव गांधी जिस समय प्रधानमंत्री थे, उस समय वे 10 दिन की छुट्टी मनाने के लिए एक खास द्वीप पर गए थे. पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि गांधी परिवार ने छुट्टी मनाने के लिए युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया था. पीएम मोदी ने उस द्वीप का नाम नहीं बताया, लेकिन इंडिया टुडे ने 31 जनवरी 1988 को गांधी परिवार की उस ‘छुट्टी’ का पूरा ब्यौरा बता दिया था. अनीता प्रताप ने अपनी रिपोर्ट में सिलसिलेवार तरीके से उस पिकनिक की कई बातें लिखी थीं.

कैसा है वो द्वीप, जहां गांधी फैमिली ने बिताई छुट्टी

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1987 में नए साल का जश्न मनाने के लिए अपने पूरे परिवार और खास मित्रों के साथ एक बेहद खूबसूरत द्वीप गए थे. राजीव गांधी के मित्रों में अमिताभ बच्चन और उनका परिवार भी शामिल था.पहले इस द्वीप के बारे में जान लीजिए. दक्षिण भारत में कोचीन से 465 किलोमीटर पश्चिम की ओर लक्षद्वीप के पास स्थित एक बेहद खूबसूरत आईलैंड है, जिसका नाम बंगाराम है. यह पूरा द्वीप निर्जन है. 0.5 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में फैले इस द्वीप का चयन भी सोच-समझकर किया गया था. यहां विदेशी नागरिकों के आने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. लक्षद्वीप के तत्कालीन पुलिस चीफ पीएन अग्रवाल का कहना था कि ये बंगाराम द्वीप बेहद सुरक्षित और दुनिया से एक तरह से कटा हुआ इलाका है. इस इलाके की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह बेहद सुरक्षित है.

मीडिया से छिपाने की भरसक कोशिश, फिर भी भनक लग गई

गांधी परिवार के इस नितांत गोपनीय दौरे को मीडिया से छिपाने की भरसक कोशिश की गई थी. फिर भी मीडिया को 26 को ही इसकी भनक लग गई, जब राहुल गांधी ने अपने चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप प्रशासन के नारंगी और सफेद रंग के एक हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी थी. छुट्टी पर अलग-अलग कई समूहों में लोग इस द्वीप पर पहुंचे थे, जिनमें राहुल गांधी का ग्रुप पहला था. सरकार ने उस समय राजीव गांधी के इस दौरे को पूरी तरह छिपाने की कोशिश की थी. मीडिया को इससे दूर रखने की नाकाम कोशिश की गई थी. सरकार ने इस राजीव गांधी की छुट्टी की प्राइवेसी को पूरी तरह बनाए रखने के लिए समुद्री और हवाई दोनों ही मार्गों से निगरानी की थी.

बच्चन फैमिली समेत कौन-कौन था आलीशान पार्टी में शामिल

लेकिन इस छुट्टी में जो लोग शामिल थे, वे सभी खुद इतने हाईप्रोफाइल थे कि यह खबर दब न सकी. राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गांधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, सोनिया की मां आर माइनो, उनके भाई और मामा शामिल थे. ये तो थे गांधी परिवार के रिश्तेदार. इस दौरे में राजीव गांधी के बेहद खास दोस्त अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया बच्चन और 3 बच्चे शामिल थे. तीन बच्चों में अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी भी शामिल थीं, अजिताभ खुद फॉरेन एक्सचेंज रेग्यूलेशन एक्ट (FERA) का उल्लंघन करने के मामले में फंसे थे. इसके अलावा एक और परिवार इस टूर में शामिल था, जिनका नाम बिजेंद्र सिंह था. बिजेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई थे. इसके अलावा दो विदेशी मेहमान भी इस आलीशान पार्टी में शामिल थे.

30 दिसंबर को पहुंचे थे राजीव और सोनिया गांधी

राजीव और सोनिया 30 दिसंबर की दोपहर में ही इस खूबसूरत द्वीप पर छुट्टी मनाने पहुंच गए थे, जबकि अमिताभ बच्चन एक दिन के बाद यहां कोचीन-कावारत्ती हेलिकॉप्टर से पहुंचे थे. जया बच्चन चार दिन पहले प्रियंका और अपने बच्चों के साथ पहुंची थीं.

ईंधन भराने के लिए दूसरे द्वीप पर उतरा था अमिताभ का हेलिकॉप्टर

बंगाराम द्वीप पर अमिताभ बच्चन के आने की खबर को भी छिपाने की कोशिश की गई थी. लेकिन 31 दिसंबर को बंगाराम से कुछ दूरी पर स्थित एक अन्य आईलैंड कावारत्ती पर अमिताभ के हेलिकॉप्टर को ईंधन भराने के लिए उतरना पड़ा. इसमें 50 मिनट लगे. इसके बाद ये बात जगजाहिर हो गई. छुट्टियां मनाकर वापस लौटते वक्त अमिताभ बच्चन को इंडियन एक्सप्रेस के फोटोग्राफर ने कैप्चर कर लिया. इस पर अमिताभ नाराज हो गए. उन्होंने फोटोग्राफर को चेतावनी भी दी, लेकिन फोटोग्राफर तब तक अपना काम कर चुका था.

अमिताभ के भाई की चल रही थी FERA में जांच

राजीव गांधी का यह टूर अपने इटली के रिश्तेदारों और बच्चन परिवार की मौजूदगी के चलते खासी सुर्खियों में रहा था. राजीव की मुश्किलें इसलिए और बढ़ गई थीं क्योंकि FERA की जांच के दायरे में आए अमिताभ बच्चन के भाई अजिताभ की बेटी भी इस छुट्टी में घुमने गई. उस समय विपक्ष का सवाल था कि ऐसा करके राजीव गांधी उन अधिकारियों को क्या संदेश देना चाह रहे थे जो अमिताभ के भाई अजिताभ बच्चन की स्विट्जरलैंड की संपत्ति की जांच कर रहे थे.

स्वीमिंग, सनबाथ से लेकर फिशिंग तक, हर सुविधा मौजूद

लेकिन इस पूरे आलीशान सप्ताह के दौरान आलोचनाओं को अनसुना कर दिया गया. छुट्टी मना रहे सभी लोग इसे पूरी तरह एंजॉय कर रहे थे. स्वीमिंग, सनबाथ से लेकर फिशिंग तक, सभी इस शानदार द्वीप पर अपना पूरा समय बेहद इत्मिनान के साथ और लुत्फ उठाते हुए बिता रहे थे. पिकनिक मनाने के लिए पास ही मौजूद दो और द्वीप थिन्नकारा और पारिल में भी ये लोग गए थे. राजीव, राहुल और प्रियंका जहां बेहद साफ नीले पानी का आनंद उठा रहे थे, वहीं सोनिया गांधी अस्थमा के डर से अपनी मां और जया बच्चन के साथ नारियल के पेड़ की छांव में बातें करती थीं.

1985 में भी आए थे राजीव गांधी

राजीव गांधी इस द्वीप से पहले से वाकिफ थे. उन्होंने यहां एक डाल्फिन को बचाने के लिए पानी में छलांग लगा दी थी. नवंबर 1985 में राजीव गांधी यहां एक दिन के लिए रुके थे. तभी उन्हें ये बेहद पसंद आ गया था.

बच्चों की पार्टी का बिल 18 हजार राजीव ने चुकाया था

लक्षद्वीप के प्रशासक वजाहत हबीबुल्लाह जो कि उस समय राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री सचिवालय में थे, उन्होंने बताया कि राजीव गांधी को यहां बहुत अच्छा लगा था. पिछले सितंबर में भी राहुल और प्रियंका अपने चार दोस्तों के साथ लक्षद्वीप में छुट्टियां बिताईं थीं. राजीव गांधी ने बाद में उनके 18 हजार रुपये के बिल का भुगतान किया था.

गांधी फैमिली का कुक गया था

लक्षद्वीप प्रशासन की ओर से सभी के लिए खाने का इंतजाम किया गया था. बंगाराम द्वीप पर दो रसोइयों समेत पांच लोग रुके थे. गांधी परिवार के खाने की पसंद का ख्याल रखने के लिए दिल्ली से उनका पर्सनल कुक भी गया था, जो दिशा-निर्देश दे रहा था.

दिल्ली से गई थी शराब, पास के द्वीप से आया था चिकन

इतना ही नहीं, नई दिल्ली से शराब भी ले जाई गई थी. पास में मौजूद एक अन्य द्वीप में 100 चिकन की भी व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा लक्षद्वीप से ताजे फल जिनमें पपीता, सपोता, केले और अमरूद भेजे गए थे. कावारत्ती से 100 ब्रेड और बटर मंगाए गए थे. इसके अलावा कोचीन से कैडबरी की चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स की 40 क्रेट, मिनरल वाटर की 300 बोतल, अमूल चीज, काजू, 20 किलो आटा, 105 किलो चावल और कुछ ताजी सब्जियां मंगाई गई थीं. इन सामानों की पहली खेप 23 दिसंबर को, दूसरी खेप तीन दिन के बाद और फिर 1 जनवरी को कुछ सामान भेजा गया.

खेल अधिकारियों के मुताबिक प्रशासन को सभी बिलों का भुगतान करने को कह दिया गया था, ताकि बाद में राजीव गांधी पैसा दे सकें. लक्षद्वीप के कलेक्टर केके शर्मा के मुताबिक उन्होंने वीआईपी हॉलीडे के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया था. वहीं हबीबुल्लाह भी कह चुके थे कि उनकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री को बंगाराम द्वीप तक पहुंचाने भर की थी. उसके बाद वे वहां स्वच्छंद रहना चाहते थे.

10 दिन अरब सागर में खड़ा रहा INS विराट

इस दौरान भारत के प्रमुख युद्धपोत INS विराट के गांधी परिवार को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने की खबरें रहीं, जिस पर सवाल उठे. INS विराट को पूरे 10 दिनों के लिए अरब सागर में तैनात किया गया. कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने राजीव गांधी की छुट्टियों में नौसेना के इस्तेमाल करने पर सवाल भी उठाया था. बताया जाता है कि पूरी छुट्टियों के दौरान अगत्ती में स्पेशल सेटेलाइट का सेटअप भी लगाया गया था.

लक्षद्वीप के पर्यटन को मिला फायदा

लक्षद्वीप के सांसद पीएम सईद ने तब कहा था कि इस हॉलीडे का लक्षद्वीप को बहुत फायदा होगा, जो कि पूरे भारत में संदरतम स्थानों में से एक है. गांधी परिवार की छुट्टी के बाद फौरन इसका असर भी दिखाई दिया. 8 जनवरी को इस पर्यटन स्थल के बारे में आमदिनों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा पूछताछ की गई.

सबसे पहले प्रियंका और आखिरी में गईं थीं सोनिया

6 जनवरी को गांधी परिवार की यह आलीशान छुट्टी खत्म हुई थी. वहां से रवाना होने वाली मेहमानों की पहली खेप में प्रियंका थीं, जो अपने दोस्तों के साथ गोवा चली गईं. उसके बाद विदेशी मेहमान रवाना हुए और फिर अमिताभ बच्चन और उनका परिवार रवाना हुआ. उसी दिन राजीव गांधी राहुल के साथ नेवी के हेलिकॉप्टर से एमिनी आइलैंड गए, जहां उनका नए साल 1988 में पहला आधिकारिक कार्यक्रम होने वाला था. राहुल गांधी को INS विराट में ही छोड़ दिया गया था, ताकि वे बाद में राजीव के साथ मंगलौर जा सकें. बंगाराम द्वीप से सबसे अंत में निकलने वालों में सोनिया गांधी और उनके रिश्तेदार थे.

साभार- आजतक राहुल विश्वकर्मा इसे भी पढ़ें-चौथे चरण में भाजपा की साख दांव पर

बहनजी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता हूं- अखिलेश यादव

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नई दिल्ली। 2019 चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव बहनजी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं. अखिलेश यादव ने अपनी यह मंशा अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर से बात करते हुए जाहिर की. हालांकि साथ ही अखिलेश ने यह भी जोड़ा की बहनजी उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने में मदद करेंगी.

बसपा प्रमुख मायावती ने हाल ही में एक जनसभा में संकेत दिए थे कि अगर सब कुछ अच्छा रहा तो वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगी और प्रधानमंत्री भी बन सकती हैं. मायावती के बयान के दो दिन बाद ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर मुहर लगा दी है और उन्होंने कहा है कि मैं भी उन्हें प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहता हूं.

अंग्रेजी अखबार मुंबई मिरर से बात करते हुए अखिलेश ने कहा, ‘गठबंधन होने के बाद मुझे उनके बारे में जानने का काफी मौका मिला है, मैंने उनमें काफी अच्छाईयां भी देखी हैं. वह काफी अनुशासित हैं और मुझसे अनुभवी भी हैं.’

सपा प्रमुख ने कहा, ‘उनके और हमारे बीच में एक जेनरेशन गैप है, उन्हें प्रधानमंत्री बनता देख मुझे खुशी होगी, इसके लिए मैं पूरी मेहनत करने के लिए भी तैयार हूं. वहीं, वह भी मुझे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री देखने के लिए तैयार हैं.’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी भारतीय जनता पार्टी विपक्ष पर इसी बात का तंज कसते हैं कि मोदी नहीं तो कौन? और विपक्ष इसी बात पर हर बार पिछड़ता नज़र आ रहा था, लेकिन अब पांच चरण पूरे होने के बाद मायावती ने खुले तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है. और उनका साथ अखिलेश यादव ने भी दे दिया है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां 80 लोकसभा सीटें हैं. सपा-बसपा और रालोद मिलकर इन सीटों पर लड़ रहे हैं. यूपी में जिस तरह से मुकाबला है उसमें यह दिख रहा है कि यहां गठबंधन को बड़ा फायदा हो सकता है. ऐसे में अगर लोकसभा चुनाव बाद परिस्थियां बनती हैं तो बसपा प्रमुख मायावती को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिल सकता हैं. विपक्ष के तमाम नेताओं के बीच उनके ज्यादा अनुभवी होने के कारण उनके नाम पर सहमति बन सकती है.

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”न्यायपालिका में हमेशा न्याय नहीं होता. कभी-कभी सिर्फ जजमेंट होता है”- पूर्व न्यायाधीश

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बाम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी जी कोलसे पाटिल कहते हैं: ”न्यायपालिका में हमेशा न्याय नहीं होता. कभी-कभी सिर्फ जजमेंट होता है.’ विख्यात न्यायविद पाटिल ने यह टिप्पणी ‘सत्ता की सूली’ शीर्षक पुस्तक की भूमिका में दर्ज की है. पुस्तक के लेखक हैं: महेंद्र मिश्र, प्रदीप सिंह और उपेंद्र चौधरी. इसे ‘शब्दलोक प्रकाशन’ दिल्ली ने छापा है.

हमारी न्यायिक व्यवस्था कैसे अनेक सनसनीखेज और अपराध के भयानक षड्यंत्रों को बेपर्दा नहीं कर पाती और न्यायालयों में सिर्फ फैसला(जजमेंट) हो जाता है, न्याय नहीं हो पाता; यह पुस्तक ऐसे कई बड़े मामलों को ठोस साक्ष्यों के साथ सामने लाती है. लेकिन पुस्तक का केंद्रीय विषय है: मुंबई स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट के जज बी एच लोया की कथित संदिग्ध मौत.

जज लोया की कथित संदिग्ध मौत के बारे में दो कहानी सामने आई: नागपुर के एक गेस्ट हाउस में वह अचानक अस्वस्थ हुए और उनकी मौत हो गई. दूसरी बात सामने आई कि उनकी बड़े षड्यंत्रपूर्वक हत्या कर दी गई. वह एक बहुत बड़े मुकदमे की सुनवाई कर रहे थे. यह मामला था: गुजरात से जुड़ी कुछ रहस्यमय मुठभेड़ हत्याओं का. बहुचर्चित सोहराबुद्दीन मुठभेड़ कांड इसमें सबसे अहम था. सोहराबुद्दीन, उसकी बीवी कौसर बी और उस केस के एक गवाह तुलसीराम प्रजापति मार डाले गए थे . पहले इन्हें मुठभेड़ माना गया. बाद में सवाल उठे कि यह तो योजनाबद्ध हत्या के मामले थे. इस मामले की सीबीआई जांच हुई, इसमें तकरीबन एक हजार पेज की चार्जशीट दाखिल हुई. इसमें पुलिस अफसर डी जी वंजारा और उसकी टीम के सदस्यों के अलावा राजनीतिक-प्रशासनिक पदों पर आसीन रहे लोगों के भी नाम अलग-अलग संदर्भ में दर्ज हुए. इनमें एक नाम था: गुजरात के तत्कालीन मंत्री अमित शाह का. सीबीआई ने 25 जुलाई, 2010 को इस मामले में षड्यंत्रकर्ता होने के कथित आरोप में उन्हें गिरफ्तार भी किया था. बाद में उन्हें सशर्त जमानत मिली. कुछ वर्ष बाद बाद यह केस भी खत्म .

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ हत्या कांड के तार एक दूसरे हाई प्रोफाइल मर्डर से जुड़े बताए गए. यह मर्डर था: भाजपा नेता और गुजरात के गृह राज्यमंत्री रहे हरेन पंड्या का. ठोस तथ्यों के साथ पुस्तक में बताया गया है कि जिस वक्त जज लोया की संदिग्ध मौत हुई, वह सीबीआई स्पेशल कोर्ट, मुंबई में सोहराबुद्दीन और अन्य के एनकाउंटर कांड का मामला चल रहा था. जज लोया ने इस मामले में भाजपा नेता अमित शाह को भी समन किया था. उसी दौर में एक दिन जज लोया नागपुर जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है. काफी वक्त बाद जज लोया की मौत की स्वतंत्र जांच का मामला एक याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में आता है. पर कोर्ट केस में मेरिट नहीं देखता और इस तरह मामला खत्म हो जाता है. लेकिन कोर्ट के स्तर पर खत्म समझे जाने वाले उसी मामले से जुड़ी पूरी कथा को ‘सत्ता की सूली’ में दस्तावेजों के साथ सामने लाया गया है. सभी जानते हैं कि जज लोया की संदिग्ध मौत पर पहली खोज-पड़ताल अंग्रेजी की मशहूर पत्रिका ‘द कैरवान’ ने छापी थी.

इस किताब के बारे में विख्यात न्यायविद प्रशांत भूषण और इंदिरा जयसिंह ने भी आमुख लिखे हैं. इंदिरा जयसिंह की यह टिप्पणी इस किताब की महत्ता और भूमिका रेखांकित करती है: भारत में अनेक अनसुलझी हत्याओं के दृष्टांत मिल जाते हैं. अनेक बार ‘अपराध न्याय प्रणाली’ विफल हुई है और यह किताब उस श्रेणी की है, जो अन्याय की कड़वी यादों को हमारे जेहन में जीवित रखती है.’

– उर्मिलेश Read it also-पहाड़ के दलितों को इस परंपरा पर फिर से सोचना होगा

दलित पर अत्याचार, जबरदस्ती पिलाया मल-मूत्र, 2 गिरफ्तार

तमिलनाडु के  तिरुवरूर जिले के मन्नारगुडी इलाके में एक दलित व्यक्ति को कुछ गैर दलित लोगों द्वारा जबरन मलमूत्र खाने पर विवश करने के आरोप में दो गैर दलित व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. पीड़ित का आरोप है कि कुछ गैर-दलित युवकों ने न केवल उसे जबरन मल-मूत्र खाने पर विवश किया बल्कि शरीर पर पेशाब भी किया. कोर्ट ने दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. एक आरोपी अभी भी फरार चल रहा है.

पीड़ित पी कोल्लिमलाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके साथ मारपीट की गई और जबरन मल-मूत्र खाने के लिए मजबूर किया गया. इस नामजद एफआईआर में आरोपियों के नाम शक्तिवेल, राजेश और राजकुमार का जिक्र किया गया है. तीनों आरोपी कल्लार समुदाय से संबंध रखते हैं.

पीड़ित व्यक्ति ने शिकायत की तीन साल पहले हुए एक कार्यक्रम के दौरान एक मंदिर के पास दो पक्षों में हुए विवाद में हस्तक्षेप करने के बाद उसे निशाना बनाया गया. गांव वालों का कहना है तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल पहुंचाने की जगह एक आरोपी आसानी से भागने में कामयाब हो गया और पुलिस स्टेशन के बाहर जाकर धरना प्रदर्शन करने लगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी व्यक्तियों पर एससी/एसटी प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट 2015 के तहत मुकदमा नहीं दर्ज किया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस घटना के बाद पीड़ित व्यक्ति आत्महत्या करना चाहता था और बेहद शर्मिंदगी महसूस कर रहा था.

क्या है मामला?

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब तीन साल पहले अय्यनार मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान आरोपियों ने पीड़ित व्यक्ति के परिवार और दलित समुदाय  के अन्य लोगों के साथ मारपीट की. इस झड़प में उनके वाहनों को तोड़ दिया गया. इसी घटना को आधार बनाकर पीड़ित पर हमला किया गया.

साभार- आजतक इसे भी पढ़ें-IPL में कोहली की RCB के खराब प्रदर्शन पर माल्या का तंज, बताया- कागजी शेर

दलित युवक से प्रेम करने वाली मराठा लड़की पहुंची कोर्ट

दलित युवक से प्रेम करने वाली मराठा लड़की पहुंची कोर्ट

क़ानून की पढ़ाई करने वाली महाराष्ट्र के पुणे ज़िले की एक छात्रा अपने माता-पिता के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट चली गई है.

छात्रा का आरोप है कि वो किसी दूसरी जाति के युवक से प्रेम करती है और उसे अपने परिवार से ही जान को ख़तरा है.

अंतरजातीय प्रेम विवाह का विरोध कोई नई बात नहीं है.

मशहूर मराठी फ़िल्म सैराट में भी इसी तरह की एक प्रेम कहानी दिखाई गई थी, जिसमें दलित युवक से प्रेम करने वाली युवती की उसके पति के साथ हत्या कर दी जाती है.

मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाली लड़की ने कहा है कि वो मराठा जाति से है और मातंग जाति के युवक से प्यार करती है. उसका हश्र सैराट जैसा न हो इसलिए उसे सुरक्षा दी जाए.

19 साल की इस छात्रा ने अपने और प्रेमी के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग भी की है. मुंबई हाई कोर्ट में इस याचिका पर आज सुनवाई हुई.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लड़की को सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं और उससे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा है.

सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से कहा गया की लड़की ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है. वहीं लड़की के अधिवक्ता नितिन सतपुते ने दावा किया है कि लड़की ने लिखित शिकायत पुलिस को दी थी लेकिन पुलिस ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया था.

लड़की ने ईमेल के ज़रिए भी अपनी शिकायत पुलिस को भेजी थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया था.

उनका कहना है कि अगली सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर दायर किए गए झूठे बयान के बारे वो अपना हलफ़नामा पेश करेंगे. अब इस मामले में अगली सुनवाई 21 मई को होनी है.

अपने माता-पिता के ख़िलाफ़ अदालत पहुंची इस लड़की का मामला महाराष्ट्र में सुर्ख़ियों में है.

अपनी याचिका में युवती ने कहा है कि कॉलेज में पढ़ाई के दौरान तीन साल पहले उसे मातंग समुदाय के युवक से प्रेम हुआ था. तीन महीने पहले इस बारे में परिवार को पता चला गया और तब से ही उसके लिए हालात मुश्किल होते चले गए.

छात्रा ने बीबीसी से कहा, “हमें जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं. मुझे कहा गया कि अगर तुमने इस लड़के से शादी करने के बारे में सोचा तो तुम्हें मार डालेंगे. मेरा मोबाइल फ़ोन छीन लिया गया. मेरा कॉलेज जाना बंद कर दिया. उन्हें दूसरी जाति का लड़का मेरे लिए नहीं चाहिए था.”

छात्रा ने कहा, ”जात के भेदभाव को मैं नहीं मानती. मैंने अपने माता-पिता को समझाने की कोशिश की कि आज के ज़माने में जाति का कोई महत्व नहीं है. लेकिन उन्होंने मेरी कोई बात नहीं सुनी. उल्टे मेरी आज़ादी ही पूरी तरह से छीन ली.”

लड़की ने अपनी याचिका में कहा है कि उसका उत्पीड़न इस क़दर बढ़ गया कि उसने 26 फ़रवरी को आत्महत्या करने का प्रयास भी किया.

इसके बाद वो कुछ समय के लिए अस्पताल में भी भर्ती रही. घर आने के बाद भी उस पर दबाव बनाया जाता रहा.

याचिका के मुताबिक़ 22 मार्च को इस लड़की के चाचा ने सिर पर पिस्तौल रख गोली मारने की धमकी दी और कहा कि उसने ये रिश्ता नहीं तोड़ा तो उसके प्रेमी को भी मार देंगे. लड़की के चाचा पेशे से वकील हैं.

लड़की का आरोप है कि उसकी पिटाई भी की गई. वो घर से बाहर निकलने का मौक़ा तलाश रही थी.

27 मार्च को परिवार के साथ तिरुपति जाते हुए उसे मौक़ा मिल गया और वो फ़रार हो गई. तब से वो अपने घर वापस नहीं लौटी.

उसका कहना है कि उन दोनों ने बालिग़ होते ही तुरंत शादी करने का फ़ैसला किया है पर तब तक उनकी जान को घरवालों से ख़तरा है.

इसलिए उन्होंने पुलिस सुरक्षा की मांग की है.

लड़की के घरवालों ने इन सभी आरोपों को नकारा है. इस लड़की के चचेरे भाई ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उसने मीडिया से जो बातें कही हैं, जो भी उसने अपनी याचिका में कहा है वो सब ग़लत है.

लड़की के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा, “उसका किसी ने भी उत्पीड़न नहीं किया है या उसे पिस्तौल दिखाकर डराया नहीं गया है. उसके माता-पिता ने उसे अच्छे से पढ़ाया लिखाया है और उनका कहना था कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी के बारे में सोचेंगे. ये सब होने के बाद उसके माता-पिता भी बहुत दुखी हैं. पर उनका कहना है कि आगे जो होगा ये अब अदालत ही तय करेगी.”

लड़की की ओर से अधिवक्ता नितिन सातपुते हाई कोर्ट में मुक़दमा लड़ रहे हैं.

सातपुते का कहना है, “भारत के संविधान ने भारत के हर नागरिक को अपनी मर्ज़ी से विवाह करने का अधिकार दिया है और इस लड़की की जान को ख़तरा है इसलिए हमने ये याचिका दायर की है. हमारा कहना है कि इस लड़की के माता-पिता और रिश्तेदारों से कोई अपराध न हो इसलिए सरकार से कार्रवाई करने की मांग की है.”

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मोदी के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने जारी किया सार्वजनिक बयान, जानिए क्या है मामला

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जिस तरह चुनाव के बीच राजीव गांधी को घसीटा गया है, उसने प्रबुद्ध वर्ग के बीच पीएम मोदी की छवि को धूमिल कर दिया है. देश भर में प्रबुद्ध समाज द्वारा मोदी के बयानों की आलोचना हो रही है. इसी क्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने तो मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली विश्वविद्यालय के 207 प्रोफेसर्स ने पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की निंदा करते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया है. इन प्रोफेसर्स ने अपने बयान में मोदी के बयान को ‘अपमानजनक और झूठा’ करार दिया है.

गत शनिवार को उत्तर प्रदेश के बस्ती में एक रैली के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर राफेल मुद्दे को लेकर निशाना साधा. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा था- ‘देश आपके पिता को बेशक ‘मिस्टर क्लीन’ के नाम से जानता है, लेकिन मिस्टर क्लीन का जीवनकाल ‘भ्रष्टाचारी नंबर 1′ के रूप में खत्म हुआ था.’

मोदी के इसी बयान को लेकर तमाम लोगों ने उनकी आलोचना की थी. इसमें कई पूर्व नौकरशाह से लेकर पत्रकार और शिक्षक शामिल हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा है कि, ‘देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले दिवंगत राजीव जी के बारे में नरेंद्र मोदी ने अपमानजनक और झूठा बयान जारी कर प्रधानमंत्री कार्यालय की प्रतिष्ठा कम की है. कोई भी प्रधानमंत्री इस पर स्तर तक ‘नीचे’ नहीं आया.’

सार्वजनिक बयान में साल 1999 के कारगिल युद्ध और टेलिकम्यूनिकेशन रिवॉल्यूशन का भी जिक्र है. बयान में कहा गया है- ‘जब कारगिल से हमारे जवानों ने घुसपैठियों को खदेड़ा तो वह बोफोर्स गन के लिए राजीव गांधी की प्रशंसा करते हुए नारे लगा रहे थे.’ बयान में कहा गया है कि आज अगर रेल की यात्रा ज्यादा आसान है तो वह पूरी तरह से राजीव गांधी की वजह से है क्योंकि उन्होंने रेल रिजर्वेशन को कंप्यूटराइज्ड किया था. इस बयान पर दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स असोसिएशन के आदित्य नारायण मिश्रा, DU के दो एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेंबर, तीन एकडमिक काउंसिल मेंबर्स, डूटा के वाइस प्रेसिडेंट और ज्वाइंट सेक्रेटरी का नाम शामिल है.

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3 पेपर में पाए 98% लेकिन, चौथा पेपर देने से पहले लाइलाज बीमारी से हुई विनायक की मौत!

नोएडा। 16 वर्षीय विनायक श्रीधर के भी आसमान में उड़ने के सपने थे. वे अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनकर दुनिया को देखना चाहते थे. उनका 26 मार्च को ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी की बीमारी से निधन हो गया. वह सेक्टर-44 स्थित एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में दसवीं के छात्र थे. उन्होंने हाल ही में हुए सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में हिस्सा लिया था. तीन विषयों के पेपर भी दिए. चौथे पेपर से पहले उनका देहांत हो गया. सोमवार को जारी परिणामों में उनको अंग्रेजी में 100, विज्ञान में 96 और संस्कृत में 97 अंक मिले. बाकि, कंप्यूटर साइंस और सोशल स्टडीज की परीक्षा नहीं दे पाए. वह वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को आदर्श मानते थे.

विनायक का परिवार सेक्टर-45 में रहता है. पिता श्रीधर जीएमआर कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं. मां ममता गृहणी हैं. बड़ी बहन वैष्णवी यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया से पीएचडी की पढ़ाई कर रही हैं. विनायक जब दो वर्ष के थे, तब से उनको ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी की समस्या थी. दुनिया भर में 3500 बच्चों में से एक बच्चा इस रोग से ग्रस्त होता है. यह लाइलाज बीमारी है.

श्रीधर बताते हैं कि इसमें बच्चा जैसे बड़ा होता जाता है, बीमारी बढ़ने लगती है. विनायक जब सात वर्ष का हुआ, उसने चलना छोड़ दिया था. व्हील चेयर के जरिये ही वह सारा काम करते थे. हाथ भी बहुत धीरे-धीरे काम करते थे. वह बताते हैं कि विनायक को पढ़ाई का बहुत शौक था. वह बड़े होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनना चाहते थे. हाईस्कूल की परीक्षा के लिए उन्होंने काफी तैयारी की थी.

उन्होंने परीक्षा में सामान्य श्रेणी के चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड (सीडब्ल्यूएसएन) वर्ग में हिस्सा लिया था. लिखने में हाथ की गति काफी धीमी थी लेकिन दिमाग बहुत तेज था. संस्कृत उनका पसंदीदा विषय था. इसे उन्होंने खुद अपने हाथों से लिखा. जबकि, बाकि के अंग्रेजी और विज्ञान के लिए सहायक का सहारा लिया. पिता ने बताया कि विनायक काफी धार्मिक थे. वह परीक्षा खत्म होने के बाद कन्याकुमारी स्थित रामेश्वरम मंदिर दर्शन को जाना चाहते थे. वह अक्सर कहते थे जब स्टीफन हॉकिंग दिव्यांग होकर ऑक्सफोर्ड जा सकते हैं और विज्ञान की दुनिया में इतिहास रच सकते हैं तो वह भी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनेंगे. वह आश्वस्त थे कि परिणाम आने पर वह टॉपरों में अपनी जगह बनाएंगे. श्रीधर ने बताया कि वह विनायक की इच्छा को पूरा करने के लिए हाईस्कूल के परिणाम के दिन रामेश्वरम पहुंच गए थे.

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IPL में कोहली की RCB के खराब प्रदर्शन पर माल्या का तंज, बताया- कागजी शेर

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आईपीएल के मौजूदा सीजन में खराब प्रदर्शन के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टूर्नामेंट (आरसीबी) से बाहर हो चुकी है. हार के बाद विराट कोहली की टीम की दिग्गजों ने आलोचना भी की है. इसी कड़ी में आईपीएल बेंगलुरु टीम के पूर्व मालिक विजय माल्या ने भी आरसीबी पर तंज कसा है.

माल्या ने कहा कि विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम हमेशा कागजों पर अच्छी रही है. विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, मार्कस स्टोइनिस और शिमरॉन हेटमेयर व टिम साउदी जैसे स्टार खिलाड़ियों से सजी बेंगलुरु का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा.

माल्या ने ट्वीट कर कहा, ‘इस टीम के पास अच्छी लाइन-अप थी, लेकिन यह केवल पेपर पर ही नजर आई.’ बता दें कि बेंगलुरु को आईपीएल के 12वें सीजन में शुरुआती 6 मैचों में हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि टीम ने इसके बाद 5 मैच जीते थे.

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु भले ही आईपीएल के 12वें सीजन में 7वें पायदान पर रही हो, लेकिन कप्तान विराट कोहली मानते हैं कि उनकी टीम ने प्रतियोगिता के दूसरे हाफ में अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके कारण यह सीजन ज्यादा खराब नहीं रहा.

बेंगलुरु के कप्तान कोहली ने अपने फैंस के लिए एक भावुक संदेश भेजा, जिसमें उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘आपके समर्थन और प्यार के लिए सबको धन्यवाद. फैंस, ग्राउंड स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ वादा करें कि अगले साल मजबूती के साथ वापसी करेंगे.’

कोहली ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ टूर्नामेंट का अंतिम मैच जीतने के बाद कहा, ‘अगर हम दूसरे हाफ को देखें तो हम पहले हाफ में ऐसा प्रदर्शन करना चाहते थे. छह मैच हारने के बाद आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में वापसी करना मुश्किल होता है.’

कोहली ने कहा, ‘हम उस स्थान पर नहीं रहे जहां हम रहना चाहते थे, लेकिन दूसरा हाफ बेहतरीन रहा और ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यह सीजन खराब गया. हमने आखिरी के सात में से पांच मैचों में जीत दर्ज की और एक मैच में कोई नतीजा नहीं निकला. हमें इस पर गर्व है.’ बेंगलोर की टीम ने इस सीजन 14 मैचों में कुल 11 अंक अर्जित किए.

कोहली भले ही टीम प्रदर्शन के समर्थन में हों लेकिन माल्या ने टीम के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठा दिया है. अब देखने वाली बात होगी कि विराट कोहली की बेंगलुरु की तरफ से कोई जवाब आता है या नहीं.

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नामांकन रद्द मामला: तेज बहादुर की अपील पर आज सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

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वाराणसी। सुप्रीम कोर्ट आज पूर्व बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव की याचिका पर सुनवाई करेगा. तेज बहादुर ने वाराणसी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी.

बता दें कि नामांकन पत्रों की जांच के बाद तेज बहादुर यादव द्वारा दाखिल दो नामांकन पत्रों में बीएसएफ से बर्खास्तगी की दो अलग-अलग जानकारी सामने आई थी. इसके बाद उन्हें 24 घंटे के अंदर बीएसएफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेकर जवाब देने को कहा गया था. तेज बहादुर से नोटिस में कहा गया था कि वह बीएसएफ से एनओसी लेकर आएं, जिसमें यह साफ किया गया हो कि उन्हें किस वजह से नौकरी से बर्खास्त किया गया था.

तेज बहादुर की मुश्किलें इस समय बढ़ी हुई हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर ऐसा विडियो वायरल हुआ था जिसमें कथित तौर पर तेज बहादुर ने पैसा लेकर पीएम मोदी को मारने की बात कही थी. इस पर एडवोकेट कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने तेज बहादुर के खिलाफ कार्रवाई के लिए मंगलवार को एसएसपी आनंद कुलकर्णी को प्रार्थना पत्र दिया था.

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यूपी के 68,500 शिक्षकों की भर्ती का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, यूपी सरकार को नोटिस

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उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली का मामला उच्चतम न्यायालय पहुंच चुका है. मंगलवार को मामले की जांच सीबीआई से कराने वाली अर्जी पर न्यायालय ने यूपी सरकार को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. न्यायालय में यह याचिका मामले की सीबीआई जांच पर रोक लगाने के आदेश के खिलाफ लगाई गई है. पिछले साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था.

फरवरी में उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच ने सीबीआई जांच पर रोक लगाई थी. परीक्षा में असफल रहे अभ्यर्थियों ने अदालत में याचिका दायर करके सीबीआई जांच को बरकरार रखने की मांग की है. यूपी में 68,500 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं.

परीक्षा में मिली धांधलियों की जांच के लिए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी. लेकिन इसमें दो सदस्य परीक्षा प्रक्रिया तय करने वाले बेसिक शिक्षा विभाग से होने के तर्क पर इलाहबाद उच्च न्यायालय की एकल जज ने एक नवंबर 2018 को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे. इसे खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि केवल इस आधार पर कि जांच कर रहे अधिकारी दागी पाए जा रहे विभाग से हैं. मामले की जांच सीबीआई को नहीं दी जानी चाहिए. एक नजर में मामला इस परीक्षा में शामिल सोनिका देवी ने याचिका दायर कर परीक्षा प्रक्रिया पर आपत्तियां जताई गईं. सुनवाई के दौरान परीक्षा नियामक प्राधिकरण इलाहाबाद से मंगवाए गए दस्तावेजों की जांच हुई. इसमें सामने आया कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को बदला गया है.

सरकार ने जांच के लिए समिति बनाई, जिसमें प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी को अध्यक्ष और सर्व शिक्षा अभियान निदेशक वेदपति मिश्रा व बेसिक शिक्षा के डायरेक्टर सर्वेंद्र विक्रम सिंह को सदस्य बनाया गया. प्राधिकरण सचिव सुतता सिंह को निलंबित किया गया. समिति ने बताया कि 12 अभ्यर्थियों की कॉपियां में गड़बड़ियां सामने आई.

23 अभ्यर्थियों को परीक्षा परिणाम की दूसरी लिस्ट में योग्य घोषित किया गया, वे पहली लिस्ट में फेल थे. वहीं 24 अभ्यर्थियों को योग्य होते हुए भी आयोग्य घोषित किया गया. इस याचिका पर एक नवंबर को दिए निर्णय में हाईकोर्ट ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे.

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दिल्ली में फिर जनाधार तलाश रही बसपा

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नई दिल्ली। राजधानी में बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) एक बार फिर अपना जनाधार तलाश रही है. आप के उदय के बाद खासा नुकसान झेल रही पार्टी लोकसभा चुनाव में दमखम के साथ उतरी है. पार्टी यहां प्रचार के अंतिम दिन 10 मई को दोपहर दो बजे पूर्व मुख्यमंत्री और सुप्रीमो मायावती की रैली भी कराएगी. पूर्वी दिल्ली क्षेत्र के जीटीबी एन्क्लेव रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली में प्रदेश नेतृत्व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी लाने की कवायद में जुटा है.

उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में प्रत्याशी राजवीर सिंह के समर्थन में प्रचार अभियान में कार्यकर्ता जुटे हुए हैं. उत्तर प्रदेश से सटा इलाका होने के कारण वहां के काडर भी रोड शो में जुट रहे हैं. पार्टी ने सातों सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन नई दिल्ली और उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से दो प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हो गए. बसपा रणनीतिकार मानते हैं कि आप के घटते जनाधार का लाभ उसे मिल सकता है. 2008 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 14 प्रतिशत से भी अधिक वोट मिले थे. उस समय इस पर कई रणनीतिकार हैरान थे. इस चुनाव में पार्टी को उम्मीद है कि दिल्ली में दलित वर्ग की बड़ी संख्या में मौजूदगी से उसे फायदा मिल सकता है. हालांकि पार्टी सभी वर्गों से संपर्क साध रही है.

पार्टी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली से राजवीर सिंह, चांदनी चौक से शाहिद अली, पूर्वी दिल्ली से संजय कुमार, पश्चिमी दिल्ली से सीता सरन सेन और दक्षिणी दिल्ली सिद्घांत गौतम को टिकट दिया है. वर्ष 2007 में पार्टी के 17 पार्षद चुने गए थे. 2012 में इनकी संख्या 12 रही. 2017 में पार्टी के महज 3 पार्षद चुने गए. 2006 के विधानसभा चुनाव में बसपा के 2 विधायक चुने गए थे.

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मीडिया पर क्यों भड़के हैं अनुपम खेर

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चंडीगढ़। फिल्म अभिनेता अनुपम खेर मीडिया से काफी नाराज हैं. दरअसल अनुपम खेर की नाराजगी की वजह अखबारों में प्रकाशित वो रिपोर्ट है, जिसमें भीड़ नहीं होने के चलते भाजपा को अनुपम खेर की रैली को कैंसिल करना पड़ा. अनुपम खेर चंडीगढ़ से भाजपा की अपनी प्रत्याशी किरण खेर के समर्थन में सोमवार को रैली करने पहुंचे थे, लेकिन रैली स्थल पर भीड़ नहीं होने की वजह से भाजपा और खेर को यह रैली कैंसिल करनी पड़ी. इसी की खबर अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित कर दी, जिससे दिग्गज अभिनेता नाराज है.

इसके बाद मंगलवार को खेर ने एक और रैली को संबोधित किया जिसमें अच्छी खासी भीड़ थी. वहां अनुपम खेर ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि मैंने 515 फिल्में की हैं, सारी फिल्में हिट नहीं होती. उन्होंने कहा कि अखबारों में जो खबर छपी है वो ठीक है लेकिन मुझे खुशी होगी अगर अखबारों में आज भी भीड़ वाली रैली की खबर भी प्रकाशित होगी. गौरतलब है कि भाजपा को पूरे देश में विपक्ष से इस चुनाव में कड़ी टक्कर मिल रही है. 2014 में जिस तरह मोदी लहर थी, इस बार वह गायब है.

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भोपाल में दिग्विजय और प्रज्ञा नहीं, साधु बनाम साध्वी की लड़ाई

भोपाल। मध्यप्रदेश लोकसभा सीट के लिए लड़ाई रोचक होती जा रही है. इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उतारा है तो भाजपा की ओर से आतंक की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को मैदान में उतारा गया है. इस सीट पर जिस तरह से संत समाज दिग्विजय सिंह के समर्थन में आ गया है, उसने मुकाबले को और दिलचस्प बनाते हुए लड़ाई को संत बनाम साध्वी का बना दिया है.

शिवराज सिंह की सरकार में जिस चर्चित कंप्यूटर बाबा को बीजेपी (BJP) की तत्कालीन सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था वही बाबा अब ‘चौकीदार’ को बदलने को लेकर मोर्चा खोल चुके हैं. लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से कांग्रेस के समर्थन में आगे आ चुके नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा तो भाजपा प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर को साध्वी भी नहीं मानते. उनका कहना है कि साधु समाज हत्याकांड, बम ब्लास्ट और आतंकवाद के साथ नहीं बल्कि धर्म के साथ रहेगा. गौरतलब है कि इस बयान के जरिए कंप्यूटर बाबा ने प्रज्ञा ठाकुर पर निशाना साधा है. दिग्विजय सिंह के समर्थन में कम्प्यूटर बाबा की अगुवाई में संतों ने भोपाल में अगले तीन दिनों के लिए डेरा जमा लिया है.

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VVPAT-EVM पर 21 दलों की याचिका खारिज, नायडू बोले- आज फिर शिकायत लेकर जाएंगे EC

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लोकसभा चुनाव के बीच 21 विपक्षी दलों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. VVPAT-EVM की 50 फीसदी पर्चियों के मिलान की मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. इस याचिका को टीडीपी और कांग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था.

इन दलों की मांग थी कि 50 फीसदी वीवीपैट (VVPAT) पर्चियों की ईवीएम से मिलान का आदेश चुनाव आयोग को दिया जाए. सुनवाई के लिए चंद्रबाबू नायडू, डी. राजा, संजय सिंह और फारूक अब्दुल्ला अदालत में मौजूद रहे. याचिका को खारिज करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अदालत इस मामले को बार-बार क्यों सुने. CJI ने कहा कि वह इस मामले में दखलअंदाजी नहीं करना चाहते हैं.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि जब चुनाव आयोग ने उनकी बात नहीं सुनी थी तो वह यहां आए, लेकिन अब वह फिर चुनाव आयोग जाएंगे. उन्होंने कहा कि तीसरा फ्रंट और चौथा फ्रंट सभी विपक्ष का ही हिस्सा है, हम पीएम उम्मीदवार का नाम चुनाव के बाद तय करेंगे.

वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर अभी नतीजों में कुछ गलती आती है तो चुनाव आयोग ने कोई नियम जारी नहीं किए हैं, हम इसीलिए अदालत आए थे. अब इस मसले को लेकर विपक्षी नेता आज ही चुनाव आयोग से मिल सकते हैं.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच बूथ के ईवीएम (EVM) और वीवीपैट की पर्चियों के औचक मिलान करने को कहा था. आयोग ने इसे मान भी लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस लोकसभा चुनाव में ईवीएम और वीवीपैट के मिलान को पांच गुना बढ़ाया. कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र मे 5 वीवीपैट का ईवीएम से मिलान किया जाएगा. अभी सिर्फ एक का वीवीपैट मिलान होता है.

गौरतलब है कि अभी तक चुनाव आयोग 4125 ईवीएम और वीवीपैट के मिलान कराता है जो अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़कर 20625 ईवीएम और वीवीपैट (EVM-VVPAT) का मिलान करना होगा. वर्तमान में वीवीपैट पेपर स्लिप मिलान के लिए प्रति विधानसभा क्षेत्र में केवल एक ईवीएम लिया जाता है. एक ईवीएम प्रति विधानसभा क्षेत्र के 4125 ईवीएम के VVPAT पेपर्स से मिलान कराया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को 20625 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियां गिननी हैं, यानी प्रति विधानसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम की जांच होगी. उधर 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपीएटी पेपर स्लिप के मिलान की मांग की थी.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (टीडीपी), शरद पवार (एनसीपी), फारूक अब्दुल्ला (एनसी), शरद यादव (एलजेडी), अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), अखिलेश यादव (सपा), डेरेक ओ’ब्रायन (टीएमसी) और एम. के. स्टालिन (डीएमके) की ओर से दायर की गई है. याचिका में उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि ईवीएम के 50 फीसदी नतीजों का आम चुनावों के परिणाम की घोषणा किए जाने से पहले वीवीपैट के साथ मिलान किया जाना चाहिए या दोबारा जांच की जानी चाहिए.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि दुनिया के 191 देशों में से मात्र 18 देशों ने ईवीएम को अपनाया है, जिनमें से 3 देश 10 सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल हैं. नायडू ने चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और उनमें गड़बड़ी भी पैदा होती है. इसके अलावा इनकी प्रोग्रामिंग भी की जा सकती है. उन्होंने यह जानने की मांग की कि नए वीवीपैट में वोटर स्लिप मात्र 3 सेकेंड में कैसे दिखाई देता है, जबकि इसे 7 सेकेंड में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ईवीएम से छेड़छाड़ कर वोट हासिल कर सकती है.

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EVM में VVPAT को लेकर विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट का झटका

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File Photo: PTI

नई दिल्ली। ईवीएम-वीवीपैट के मसले पर 21 विपक्षी दलों की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है. इन विपक्षी दलों की मांग ये थी कि चुनाव के दौरान क़रीब 50 फ़ीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट का इंतज़ाम होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कहा है कि हम अपने पुराने फ़ैसले को बदलना नहीं चाहते, एक ही मामले को कितनी बार सुनें. साथ ही भारत के मुख्य न्यायाधीश ने ये भी कहा कि अदालत इस मामले में दख़ल देना नहीं चाहती है.

फै़सले के बाद विपक्षी दलों के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से कहा, ”हम सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं. हमारी कोशिश पूरे देश के मतदाताओं को जागरूक करने की है. ईवीएम ख़राब हो रही हैं लेकिन चुनाव आयोग को कोई गाइडलाइंस नहीं मिली हैं.” आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को प्रत्येक एसेंबली सेगमेंट में एक के बदले पांच ईवीएम का वीवीपैट मिलने करने का निर्देश दिया था. वीवीपीटी की सुविधा होने पर ईवीएम मशीन से निकलने वाली पर्ची से वोट का मिलान करना संभव होता है.

दरअसल विपक्ष के नेता एन चंद्राबाबू नायडू की अगुवाई में पुनर्विचार याचिका में प्रति एसेंबली सेगमेंट की 50 फ़ीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट सुविधा लगाने की मांग कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने आठ अप्रैल को अपना फ़ैसला सुनाने से पहले चुनाव आयोग से 50 फ़ीसदी ईवीएम मशीनों में वीवीपैट लगाने के बारे में पूछा था तब चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा, ”वीवीपैट की पर्चियों के मिलान का वर्तमान तरीक़ा सबसे उपयुक्त है. हर विधानसभा क्षेत्र में 50 फ़ीसदी ईवीएम के वोटों की गणना वीवीपैट पर्चियों से करने में लोकसभा चुनाव के नतीजे पांच दिन की देरी से आएंगे.”

  • साभार- बीबीसी से

ब्रेकअप के 3 साल बाद Katrina Kaif ने Ranbir Kapoor को लेकर किया खुलासा, यूज करते हैं

नई दिल्ली। जेएनएन. बॉलीवडु एक्ट्रेस कटरीना कैफ इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ‘भारत’ के प्रमोशन में बिजी हैं. इसी सिलसिले में वो बॉलीवुड अभिनेता अरबाज़ खान के शो पिंच में पहुंचीं जहां उन्होंने अरबाज के हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. करटरीना कैफ एक सक्सेसफुल एक्ट्रेस होने के बाद भी सोशल मीडिया से कितने वक्त बाद जुड़ी हैं ये बात सभी जानते हैं. 2017 में उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया है.

अरबाज खान ने कटरीना कैफ से इसी से जुड़ा एक सवाल किया. एक्ट्रेस ने उस सवाल का जवाब तो खुलकर दिया ही साथ ही कुछ ऐसा भी बता दिया जो सुर्खियां बन गया. दरअसल, अरबाज ने उनसे पूछा, क्या वो लोगों पर नजर रखने के लिए कोई फेक अकाउंट इस्तेमाल करती हैं? तो कटरीना ने बताया- नहीं, बिल्कुल नहीं… हालांकि इसी के साथ उन्होंने अपने एक्स बॉयफ्रेंड के बारे में एक सीक्रेट बता दिया.

कटरीना ने कहा, मैं तो फेक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करती पर मुझे पता है रणबीर फेक अकाउंट यूज करते हैं ताकी वो सब पर नजर रख सकें. वैसे बता दूं कि रणबीर कपूर ही वो शख्स हैं जिसने मुझे इंस्टाग्राम सिखाया. बता दें कि कटरीना और रणबीर ने लंबे समय तक दूसरे को डेट किया था. दोनों के शादी तक कर लेने की अटकलें थीं. लेकिन ये रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और दोनों अलग हो गए. थोड़े दिन पहले ही ब्रेकअप को लेकर कटरीन का बयान भी सामने आया था. जिसमें उन्होंने ब्रेकअप की जिम्मेदारी ली थी.

वर्क फ्रंट की बात करें तो कटरीना जल्द ही सलमान खान के साथ फिल्म ‘भारत’ में नजर आने वाली हैं. भारत में वो लीड रोल में होंगी. फिल्म ईद के मौके पर 5 जून को रिलीज होगी. वहीं रणबीर कपूर फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र’ में नजर आएंगे. इस फिल्म में उनके साथ आलिया भट्ट लीड रोल में होंगी. रणबीर इस समय आलिया भट्ट को डेट कर रहे हैं. जबकि कटरीना कैफ अभी सिंगल हैं.

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लोकसभा चुनाव: मायावती की दिल्ली डगर वाया आंबेडकरनगर?

लखनऊ। न चुनाव हुआ और न अभी ‘अनुमान भरे’ नतीजे आए हैं लेकिन मायावती ने अभी से ‘उपचुनाव’ के लिए जमीन तैयार कर दी है. पिछले पंद्रह सालों से सीधे चुनाव से दूर रहने वाली मायावती ने आंबेडकरनगर की रैली में कह दिया कि दिल्ली का रास्ता तो यहीं से जाता है. इसलिए अगर जरूरत पड़ी तो वह आंबेडकरनगर से ही चुनाव लड़ेंगी. मायावती ने दिल्ली का तीन बार का रास्ता इसी सीट (तब अकबरपुर) से तय किया है. हालांकि पिछले चुनाव में पार्टी ने अपनी ‘परंपरागत सीट’ गंवा दी थी.

सेफ सीट रही है आंबेडकरनगर दरअसल आंबेडकरनगर मायावती की पुरानी सीट है. मायावती यहीं से चुनाव लड़ती रही हैं. या यूं कह लें कि जब मायावती इस सीट से चुनाव नहीं लड़ीं तब भी बीएसपी के खाते में ही यह सीट रही. तब आंबेडकरनगर लोकसभा सीट अकबरपुर के नाम से जानी जाती थी. मायावती सबसे पहले 1989 में बिजनौर लोकसभा सीट से संसद पहुंची थीं. उसके बाद 1998, 1999 और 2004 में मायावती अकबरपुर (अब आंबेडकरनगर) सीट से चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचीं. 2009 में भी यह सीट बीएसपी के पास ही रही.

इस बार आंबेडकरनगर में बीएसपी के विधायक रितेश पांडे को टिकट मिला है. रितेश पूर्व सांसद राकेश पांडे के पुत्र हैं. चूंकि बीएसपी और मायावती के लिए सबसे मुफीद सीट आंबेडकरनगर ही है ऐसे में उनका यहां से चुनाव लड़ने की अपील करना लोगों को जोड़ने सरीखा ही है. साथ ही बसपा की यह परंपरागत सीट उनकी ही होगी. मायावती ने रविवार को आंबेडकरनगर में आयोजित रैली में कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो वह इसी सीट से चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि सबको पता है कि दिल्ली का रास्ता आंबेडकरनगर की सीट से ही होकर जाता है.

जब 2014 के चुनाव चल रहे थे तब मायावती ने यह कहा था कि वह तो पहले से ही राज्यसभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 2018 में समाप्त होगा. इसलिए वह चुनाव नहीं लड़ेंगी.

इस लोकसभा चुनाव में माया ने कहा कि मेरे लिए महत्वपूर्ण है कि हमारा गठबंधन जीते. मेरे चुनाव लड़ने का सवाल है तो मैं कभी भी यूपी की किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकती हूं.

एक और रैली में मायावती ने कहा कि मुझे लगता है कि यह पार्टी के हित में नहीं होगा, इसलिए मैंने 2019 के लोकसभा चुनाव से दूर रहने का मन बनाया है. एक चुनावी सभा में मायावती ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर जब भी मेरा मन करेगा मैं किसी भी सीट को खाली कराकर वहां से चुनाव लड़ लूंगी.

आंबेडकरनगर का समीकरण आंबेडकरनगर में एक मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरे मंत्री अपनी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. सारे जातीय समीकरण गठबंधन के लिए मुफीद हैं. फिर भी यहां जोरदार जंग है. टांडा के मोहम्मद इश्तियाक कहते हैं कि यहां हाथी का जोर है. वह कहते हैं कि आंबेडकरनगर के लिए मायावती ने बहुत कुछ किया है. वहीं, राजेंद्र सिंह कहते हैं कि इस बार जातीय समीकरण टूट सकते हैं. ऐसे में जाति को जोड़कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं. मोदी का नाम चल रहा है. जिन लोगों को उनकी योजनाओं से लाभ मिला है, उनमें अधिकांश मोदी के साथ हैं.

बीएसपी ने पूर्व सांसद राकेश पांडे के पुत्र रितेश को उतारा है. पिछले चुनाव में राकेश बीएसपी के टिकट पर बीजेपी से दो लाख वोटों से हार गए थे. तब दो ब्राह्मणों की टक्कर थी. बीजेपी से हरिओम पांडे थे और बीएसपी से राकेश पांडे. बीजेपी ने इस बार प्रत्याशी बदला और राज्य सरकार के मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को बहराइच से लाकर मैदान में उतारा है. कांग्रेस प्रत्याशी उम्मेद सिंह का पर्चा ही खारिज हो गया.

साफ है यहां लड़ाई बीजेपी और गठबंधन के बीच है. बीएसपी के वरिष्ठ नेता लालजी वर्मा टांडा के हैं. बीएसपी के ही अन्य वरिष्ठ नेता राम अचल राजभर इसी जिले के हैं. ऐसे में बीएसपी को उम्मीद है कि गठबंधन के सहारे और जाति समीकरण के बल पर यहां पर हाथी जीत जाएगा. राकेश पांडे का ब्राह्मणों में प्रभाव है, लेकिन फिर भी यहां वोटों का बंटवारा है. यह कहना कठिन है कि कौन कितने प्रतिशत वोट ले जाएगा. बीएसपी कार्यकर्ता किशनलाल कहते हैं कि दलित वोट पार्टी को ही मिलेंगे. मुस्लिम पूरी तरह उनके साथ है. यादव मतदाता भी बीएसपी के साथ जा रहा है.

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मुसलमान, यादव व दलित में जो दो को साधेगा, वही जीतेगा आजमगढ़

पूर्वांचल में सबसे अहम और रोचक मुकाबला आजमगढ़ में है. यह जिला मऊ, गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, सुल्तानपुर और आंबेडकर जिले की सीमा से लगा हुआ है. भाजपा के टिकट पर दिनेश लाल यादव (निरहुआ) चुनावी मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ सपा-बसपा गठबंधन के सूत्रधार अखिलेश यादव इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. इस क्षेत्र में 19 फीसदी यादव, 16 दलित और 14 फीसदी मुसलमान हैं. आजमगढ़ की जनता लहर के विपरीत चलती है : इस सीट का इतिहास रहा है लहर के विपरीत चलने का. 2014 में मोदी लहर में भी यहां की जनता ने मुलायम सिंह यादव को चुना था. 1978 में कांग्रेस विरोधी लहर में यहां कांग्रेस की मोहसिना किदवई को जीत मिली थी. वीपी सिंह की लहर में यहां की जनता ने बसपा को जिताया था.

निरहुआ को प्रशंसकों के समर्थन का भरोसा बातचीत में निरहुआ से कहते हैं, अखिलेश प्रचार करने नहीं आ रहे हैं. अगर वह जीत गये, तो क्षेत्र की जनता का कितना साथ दे पायेंगे? क्या आप फिल्में छोड़ पायेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा, मैं यहीं फिल्में बनाऊंगा, मुंबई से चल कर मुझे आजमगढ़ आना पड़ता है. मेरी कई फिल्में यहीं बनी हैं. मैं यहीं रहूंगा. वोटर समीकरण कुल मतदाता         17.70 लाख महिला                8.08 लाख पुरुष                   9.63 लाख अन्य                  74 एक वोटर मुकेश जी कहते हैं, यही आजगढ़ की जनता का दुर्भाग्य कि उसके पास स्थानीय कोई नेता नहीं है. जो भी हैं, बाहरी हैं. जनता अपनी समस्या लेकर किसके पास जायेगी? सपा और बसपा के गठबंधन से भाजपा कमजोर हुई है, लेकिन निरहुआ के प्रचार और जनसभा में की जा रही मेहनत की भी सराहना करते हैं. इस क्षेत्र के चुनावी समीकरण को समझना हो, तो ऐसे समझिए, यादव, दलित, मुस्लिम में से किसी दो को जो अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा, जीत उसकी. 1962 से लगातार इस सीट पर या तो यादव प्रत्याशी विजयी हुआ है या दूसरे नंबर पर रहा है. वैसे इस बार एक यादव की टक्कर दूसरे यादव से है. अब तक हुए 14 आम चुनाव और दो उपचुनावों में से बारह बार यादव जाति के उम्मीदवार लोकसभा पहुंचे. तीन बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने कामयाबी हासिल की. विधानसभा सीटें:-गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ, मेंहनगर Read it alsoPM मोदी पर मायावती ने ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ का लगाया आरोप