Pulwama Encounter: सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को किया ढेर, एक जवान शहीद, ऑपरेशन जारी

सांकेतिक चित्र

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार सुबह से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया है और इसमें एक जवान शहीद हो गया है. बताया जा रहा है कि दलीपोरा में सुरक्षाबलों की घेराबंदी तथा तलाश अभियान (कासो) के दौरान गुरुवार सुबह आतंकवादियों से मुठभेड़ हो गई.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय राइफल (आरआर), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल ने गुरुवार तड़के पुलवामा के दलिपोरा गांव में कासो शुरू किया. सुरक्षा बलों के जवानों ने गांव के सभी निकास मार्गों को बंद कर दिया. इसके बाद सुरक्षा बलों के जवान जब गांव में एक विशेष क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, तो वहां छिपे हुए आतंकवादियों ने स्वाचालिक हथियारों से गोलीबारी शुरू की. सुरक्षा बलों के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलायीं.

सूत्रों के अनुसार इस दौरान सुरक्षा बलों के दो जावन तथा एक स्थानीय निवासी घायल हो गए. इसमें एक जवान शहीद हो गया है जबकि बाकी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बलों तथा राज्य पुलिस के जवानों को किसी तरह के प्रदर्शन को रोकने के लिए मुठभेड़ वाली जगह के आसपास वाले क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है. अंतिम सूचना मिलने तक मुठभेड़ जारी थी. प्रशासन ने पुलवामा में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवा स्थगित कर दी है.

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ममता के समर्थन में उतरी मायावती

नई दिल्ली। ममता बनर्जी और भाजपा के बीच छिड़ा युद्ध चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस मामले में ममता बनर्जी का समर्थन किया है. ममता बनर्जी के समर्थन में बसपा प्रमुख मायावती भी सामने आ गई हैं और उन्होंने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को आड़े हाथों लिया है. आखिरी चरण के प्रचार पर एक दिन पहले ही बैन लगाने के चुनाव आयोग के फैसले का जिक्र करते हुए बसपा प्रमुख ने इस पर सवाल उठाया है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि आज बंगाल में पीएम मोदी की दो रैलियों के कारण प्रचार पर सुबह से बैन नहीं लगाया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है. मायावती ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में प्रचार पर गुरुवार रात 10 बजे से प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि प्रधानमंत्री की दिन के वक्त दो रैलियां हैं… अगर उन्हें प्रतिबंध लगाना ही था, तो आज सुबह से ही क्यों नहीं…? यह पक्षपातपूर्ण है, और चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है…”

साथ ही मायावती ने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, BJP प्रमुख अमित शाह तथा उनके नेता (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख) ममता बनर्जी को निशाना बना रहे हैं, योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है… यह बेहद खतरनाक और अन्यायपूर्ण ढर्रा है, जो देश के प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता…’ मायावती ने अमित शाह और नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए दोनों को गुरु और चेला कह कर संबोधित किया. दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने इसे ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ कहा. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आयोग ने प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को रैलियों की इजाजत दी.

दरअसल भारत के चुनावी इतिहास में इस तरह की पहली कार्रवाई में चुनाव आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के नौ लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार (Lok Sabha Election) गुरुवार को रात 10 बजे समाप्त करने का आदेश दिया है. निर्धारित समयानुसार प्रचार एक दिन बाद शुक्रवार शाम को समाप्त होना था. लेकिन आयोग ने मंगलवार को कोलकाता में भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच झड़पों के बाद यह फैसला किया है.

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चुनाव खत्म होने से पहले ही बोली कांग्रेस, PM पद के बगैर गठबंधन सरकार में शामिल होने को तैयार

पटना। आम चुनाव में भले ही अभी एक चरण का मतदान बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने बहुमत न मिलने की स्थिति में गठबंधन के संकेत दिए हैं. यही नहीं कांग्रेस का कहना है कि यदि उसे गठबंधन में पीएम का पद नहीं मिलता है, तब भी उसे कोई समस्या नहीं होगी. कांग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य एनडीए को केंद्र में एक बार फिर से सरकार गठन से रोकना है.

आजाद ने कहा, ‘हम पहले ही अपना स्टैंड क्लियर कर चुके हैं. यदि कांग्रेस के पक्ष में सहमति बनती है तो हम नेतृत्व स्वीकार करेंगे. लेकिन, हमारा लक्ष्य हमेशा यह रहा है कि एनडीए की सरकार सत्ता में वापस नहीं लौटनी चाहिए. हम सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के साथ जाएंगे.’ कांग्रेस लीडर का यह कहना इस बात का संकेत है कि पार्टी आम चुनाव के नतीजों को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिख रही है और बीजेपी को रोकने की कीमत पर गठबंधन में बड़े त्याग के लिए भी तैयार है.

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘जब तक हमें पीएम का पद ऑफर नहीं किया जाता है, हम इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे और किसी के भी जिम्मेदारी संभालने पर ऐतराज नहीं होगा.’ बता दें कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि उसे आम चुनाव में जीत का भरोसा है तो पीएम पद के अपने उम्मीदवार का ऐलान करे.

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चुनाव 2019: प्रचार के दौरान कमल हासन पर फेंकी गई चप्पलें,

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चेन्नई। अभिनेता से नेता बने कमल हासन पर बुधवार शाम तिरुप्परनकुंदरम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान मदुरै में चप्पलें फेंकी गईं. कमल हासन ने तीन दिन पहले बयान दिया था कि ‘आजाद भारत का पहला चरमपंथी हिंदू’ था, उन्होंने नाथुराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या की ओर इशारा करते हुए यह बात कही थी. पुलिस ने बताया कि चप्पलें हासन को नहीं लगीं, वह भीड़ पर ही गिर गईं. पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में भाजपा कार्यकर्ता, हनुमान सेना और अन्य संगठन के सदस्यों पर आरोप लगाया गया है. अरवाकुरिचि और तिरुप्परनकुंदरम विधानसभा सीट पर रविवार को उपचुनाव होंगे. कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

वहीं दूसरी ओर विवादों में घिरने के बाद कमल हासन ने बुधवार को कहा कि उन्होंने वही कहा है जो एक ऐतिहासिक सच था. हासन ने मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की है. इससे पहले अदालत ने हासन की पूर्व याचिका पर गौर करने से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने की अपील की थी. मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति वी पुगलेंधी ने कहा कि प्राथमिकी रद्द करने की याचिकाओं को अवकाश के दौरान तत्काल सुनवाई की याचिकाओं के तौर पर नहीं लिया जा सकता. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर अग्रिम जमानत याचिका दायर की जाती है तो उस पर सुनवाई हो सकती है.

अरवाकुरिचि पुलिस ने मंगलवार को हासन के खिलाफ भादसं की धाराएं 153 ए और 295 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. एमएनएम ने दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद विकास मंत्री के टी राजेंद्र भालाजी के खिलाफ चेन्नई एवं तिरुचिरापल्ली में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. मंत्री ने कहा था कि हासन के इस बयान के लिए उनकी जीभ काट ली जानी चाहिए. हासन की पार्टी ने दावा किया कि रविवार को उनके दिये गये बयान को ‘संदर्भ से पूरी तरह हटाकर’ पेश किया गया.

रविवार के बयान के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए फिल्मी दुनिया से राजनीति में उतरे हासन ने अपने विरोधियों से बस ‘जायज आरोप’ लगाने को कहा है और पूछा कि राजनीति में कदम रखने के बाद क्या वह समाज के बस एक ही तबके की बात करें. हासन ने मदुरै के समीप तिरूपुरकुंदरम में उप चुनाव के प्रचार के दौरान कहा, ‘मैं अरवाकुरिचि में जो कुछ कहा, उससे वे नाराज हो गये. मैंने जो कुछ कहा है वह ऐतिहासिक सच है. मैंने किसी को झगड़े के लिए नहीं उकसाया.’

उन्होंने कहा कि सच विजयी होता है न कि जाति और धर्म, तथा ‘मैने ऐतिहासिक सच कहा है.’ हासन ने कहा, ‘शब्द का अर्थ समझिए. मैं (गोडसे के खिलाफ) आतंकवादी या हत्यारा शब्द का इस्तेमाल कर सकता था. हम सक्रिय राजनीति में हैं, कोई हिंसा नहीं होगी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण को चुनिंदा ढंग से संपादित किया गया . उन्होंने यह कहते हुए विरोधियों पर निशाना साधा कि उनके खिलाफ लगाये गये आरोप के लिए हमारे मीडिया के दोस्त भी जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि क्या उनके आलोचक उनके बयान में ऐसा कुछ दिखा सकते हैं जो हिंसा भड़काए और कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोपों से उन्हें पीड़ा पहुंची है.

हासन ने कहा, ‘वे कह रहे हैं कि मैंनें हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई. मेरे परिवार में भी कई हिंदू हैं. मेरी बेटी भी हिंदू धर्म को मानती है.’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन से बेटी, क्योंकि उनकी दो बेटियां हैं. हासन ने कहा, ‘मुझे अपमानित करने के लिए मेरी विचारधारा का ढोल मत पीटिए. आपके हाथ कुछ नहीं आएगा. दरअसल ईमानदारी मेरी विचारधारा का आधार है जबकि आपके साथ ऐसा नहीं है.’ उन्होंने बिना किसी का नाम लिये कहा, ‘आपने अपने बुनियाद को झूठा बना लिया है, आप कहीं भी हों, चाहे दिल्ली या चेन्नई में, आप लंबे समय तक झूठ बोलकर लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते.’

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मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड 2017, अब बनेंगी इस एक्टर की पत्नी!

नई दिल्ली। साल 2017 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीत चुकी हैं मानुषी छिल्लर जल्द बॉलीवुड में एंट्री कर सकती हैं. मानुषी ने जब से मिस वर्ल्ड का खिताब जीता है उसके बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि वो अब फिल्मों में भी हाथ आजमाएंगी. पहले खबर थी की वो रणवीर सिंह के साथ बॉलीवुड में डेब्यू कर सकती हैं. लेकिन अब खबर आ रही है कि वो अक्षय कुमार से साथ इंडस्ट्री में उतरेंगी वो भी उनकी पत्नी बनकर. हालांकि इसको लेकर अभी तक मेकर्स की तरफ से किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है

वैसे ये तो रही मानुषी के फिल्मी करियर की बात. लेकिन क्या आपको याद है कि मानुषी ने मिस वर्ल्ड का खिताब कैसे जीता था? अगर नहीं याद तो हम आपको याद दिला देते हैं. साल 2017 में चीन के सान्या शहर एरीना में मिस वर्ल्ड समारोह का आयोजन हुआ था. मानुषी के साथ दुनिया की 108 सुंदरियां भी कॉम्पटिशन में थीं. ग्रैंड फिनाले में मानुषी से सवाल पूछा गया कि किस प्रोफेशन को सबसे ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए और क्यों?

इस पर मानुषी ने जो जवाब दिया था उसके बाद वहां मौजूद हर शख्स के हाथ तालियों के लिए उठ गए थे. इस सवाल के जवाब में मानुषी ने कहा था, मेरे हिसाब से एक मां को सबसे ज्यादा इज्जत मिलनी चाहिए. वहीं, सैलरी की बात है तो मतलब रुपयों से नहीं होना चाहिए बल्कि सम्मान और प्यार से है. मानुषी के इसी जवाब ने ना सिर्फ उन्हें इज्जत दिलाई बल्कि वर्ल्ड कप का खिताब भी दिला दिया. आपको बता दें कि 2017 में मानुषी ने 17 साल बाद भारत की झोली में ये खिताब डाला था. उनसे पहले प्रियंका चोपड़ा मिस वर्लड बनी थीं.

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मेरे पास जो कुछ है शुभचिंतकों ने दिया है, मैंने कुछ छुपाया नहीं: मायावती

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होगा. इसके लिए प्रचार अभियान तेज हो गया है. इस बीच बुधवार सुबह बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बीएसपी को बहन जी संपत्ति पार्टी कहते हैं. उन्होंने कहा कि बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जो कुछ भी है. यह उनके शुभचिंतकों और समाज द्वारा दिया गया है और सरकार से कुछ भी नहीं छुपाया गया है.

मायावती ने कहा कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहुत फिट हैं और इनकी तुलना में मोदी बहुत ज्यादा अनफिट हैं. उन्होंने कहा ‘बीएसपी की सरकार ने विकास के मामले में हर स्तर पर उत्तर प्रदेश का नक्शा बदल दिया. लखनऊ की खूबसूरती को जिस तरह चार चांद लगाए गए, उससे यह समझा जा सकता है कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कितनी ज्यादा फिट हैं तथा इनकी तुलना में पीएम मोदी कितने ज्यादा अनफिट हैं.

मायावती ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी वास्तम में जब मैं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री था उससे अधिक समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. लेकिन उनकी विरासत बीजेपी और देश की सांप्रदायिकता पर काला धब्बा है. जब हमारी सरकार थी तब उत्तर प्रदेश दंगों और अराजकता से मुक्त था.

उन्होंने कहा, मोदी सरकार दलित विरोधी है. दलितों को गुमराह करने का हथकंडा अपना रही है. पीएम मोदी शालीनताओं को तार-तार कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि बेनामी संपत्ति वाले बीजेपी से जुड़े हैं, बीजेपी शाही खर्च वाली पार्टी है. क्या मोदी सरकार विदेश से काला धन वापस ला पाई? साथ ही उन्होंने कहा कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है.

मायावती ने फिर किया पलटवार

लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमो मायावती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच इन दिनों बहसबाजी तीखी हो गई है. इससे यह साफ नजर आ रहा है कि मायावती खुद को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में प्रॉजेक्ट कर रही हैं. इसका अंदाजा पीएम मोदी और उनके बीच इन दिनों चल रही बहसबाजी में भी नजर आता है. यूपी की चुनावी रैलियों में मायावती और गठबंधन पर हमला बोलते हैं तो बीएसपी चीफ भी उन पर पलटवार करने से पीछे नहीं हटतीं.

पीएम मोदी के बेनामी संपत्ति के आरोप के जवाब पर मायावती ने कहा कि सबसे ज्यादा बेनामी संपत्ति वाले लोग बीजेपी से जुड़े हैं. इनका हिसाब-किताब कालीन के अंदर छिपा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी अध्यक्ष फिट हैं और इसकी तुलना में मोदी अनफिट हैं. राष्ट्रीय स्तर पर खुद को पेश करने की कोशिश में जुटी मायावती इन दिनों खुलकर पीएम मोदी पर निशाना साध रही हैं.

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘पीएम मोदी शालीनताओं को पार कर चुके हैं, वह बीएसपी को बहनजी की संपत्ति पार्टी कहने में घबराते नहीं है. बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जो कुछ भी है वह शुभचिंतकों और समाज के लोगों ने दिया है और सरकार से कुछ भी छिपा नहीं है.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा बेनामी संपत्ति वाले भ्रष्ट लोग बीजेपी से जुड़े हैं.

‘सिर्फ कागजों पर ईमानदार हैं मोदी’ मायावती ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘मोदी सिर्फ कागजों पर ही ईमानदार नजर आते हैं, ठीक ओबीसी के दावे की तरह. मोदी वास्तव में कुछ हैं और जनता के सामने कुछ और बनने की कोशिश करते हैं. इनका हिसाब-किताब कालीन के अंदर छिपा रहता है.’ मायावती ने कहा कि बीजेपी और पीएम मोदी ने पिछले 5 साल में बीएसपी को बदनाम करने की हर कोशिश लेकिन विफल रही, क्योंकि उनका हिसाब खुली किताब की तरह है.

‘दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते मोदी’ मायावती ने यह भी कहा, ‘विदेशों से कालाधन न ला पाने के पीछे इनकी क्या राजनीति है, यह देश अच्छी तरह जानता है. मायावती ने पीएम मोदी के दलित की नहीं दौलत की बेटी के आरोप पर कहा, यह उनका असली चेहरा दिखाता है जिनकी मानसिकता दलितों के प्रति घोर जातिवादी है. ये लोग सदियों से पीड़ित शोषित समाज को थोड़ा भी आगे बढ़ना नहीं देखना चाहते. आरक्षण का विरोध करते हैं जिसमें बीजेपी नंबर एक पर है.’

‘पीएम के रूप में मोदी की विरासत काला धब्बा जैसी’ मायावती ने आगे कहा, ‘मैं यूपी की चार बार सीएम रही हूं लेकिन मेरी शानदार विरासत रही है. बीएसपी सरकार के समय यूपी की कानून और शासन व्यवस्था की लोग आज भी तारीफ करते नहीं थकते.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी मुझसे ज्यादा समय तक सीएम रहे लेकिन उनकी विरासत ऐसी रही कि जो बीजेपी और देश की संप्रभुता पर काला धब्बा है.’

‘पब्लिक ऑफिस होल्ड करने में विफल मोदी’ मायावती ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी अध्यक्ष कितनी फिट हैं और इसकी तुलना में मोदी कितने अनफिट हैं. हमारी सरकार में यूपी दंगा और अराजकता से मुक्त रहा है जबकि मोदी का गुजरात में ही नहीं पीएम के रूप में भी कार्यकाल नफरत, घृणा और अराजकता से भरा रहा है. वह पब्लिक ऑफिस होल्ड करने में विफल रहे हैं.’

‘महामिलावटी लोगों के पास नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार’ बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विपक्षियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि महामिलावटी लोगों के पास नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार लगा हुआ है. मोदी ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि महामिलावटी लोगों ने राजनीति के नाम पर अपने और अपने रिश्तेदारों के लिए बंगले खड़े किए. नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार लगाया. एजेंसियां इसका हिसाब ले रही हैं. इसीलिए ये लोग एक-दूसरे के साथ आने को मजबूर हो गए हैं.

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कोलकाता में कल रात से अबतक क्या-क्या हुआ

नई दिल्ली। कोलकाता में मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में बवाल के बाद से पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है. इस हंगामे की वजह से आखिरी चरण की वोटिंग से पहले टीएमसी और बीजेपी का टकराव गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है. ममता बनर्जी ने जहां हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं बीजेपी ने चुनाव आयोग से ममता के चुनाव प्रचार पर बैन की मांग की है. आइए सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कोलकाता में कल से अबतक क्या-क्या हुआ.

ममता को चुनौती दे शाह ने शुरू किया रोड शो जाधवपुर में रैली की इजाजत रद्द करने और हेलिकॉप्टर उूसमतारने की अनुमति नहीं मिलने से भड़के बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ममता बनर्जी को चुनौती दी कि वह कोलकाता आ रहे हैं, हिम्मत है तो दीदी गिरफ्तार करें. मंगलवार को कोलकाता में अमित शाह के रोड शो से पहले कुछ जगहों पर पीएम मोदी और शाह के पोस्टरों को कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया. शाम को शाह का रोड शो शुरू हुआ. सड़क पर भगवा जनसैलाब दिख रहा था. ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारों के साथ अमित शाह का रोड शो आगे बढ़ रहा था.

शाम 6.20 पर कलकत्ता यूनिवर्सिटी गेट पहुंचे शाह शाम 6 बजकर 20 मिनट के आस-पास शाह कलकत्ता यूनिवर्सिटी गेट पहुंचे. वहां तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए. पुलिस ने तत्काल हालात को संभाला.

विद्यासागर कॉलेज के सामने रोड शो पर पत्थरबाजी 10 मिनट के भीतर ही विद्यासागर कॉलेज के सामने रोड शो पर पत्थरबाजी हुई. आरोप है कि इसके बाद कुछ बीजेपी समर्थकों ने 2 मोटरसाइकलों और एक साइकल में आग लगा दी. हालांकि बीजेपी ने इसके लिए तृणमूल को जिम्मेदार ठहराया. शाह ने बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनके कार्यकर्ता अपनी ही गाड़ियां क्यों जलाते. इस अग्निकांड के बाद मंगलवार देर शाम हिंसा और तेजी से भड़की और पुलिस को हालात संभालने में पसीने छूट गए. बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई.

शाह पर फेंके गए डंडे और बोतल, ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा खंडित हालात तब और खराब हो गए जब टीएमसी के कुछ समर्थकों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर झंडों के डंडे और बोतल फेंकने लगे. सुरक्षा कर्मियों ने अमित शाह को बचाया. बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने का प्रयास किया. विद्यासागर कॉलेज पास बीजेपी और तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प के दौरान समाज सुधारक ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा टूट गई. इसके लिए बीजेपी और टीएमसी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. करीब सवा 7 बजे पुलिस हालात को संभाल पाई.

विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने पर आरोप-प्रत्यारोप अमित शाह के रोड शो में बवाल के बाद बीजेपी ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया. बीजेपी ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की गई है और सूबे में संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है. जवाब में ममता बनर्जी ने भी मोर्चा संभाल लिया और हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा खंडित करने का आरोप लगाया. ममता ने विद्यासागर कॉलेज का दौरा कर हालात का जायजा लिया. टीएमसी चीफ ने कहा कि बाहरी लोगों को लाकर बीजेपी ने हिंसा कराई है.

टीएमसी नेताओं चेंज की ट्विटर पर डीपी, विद्यासागर की तस्वीर लगाई ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा टूटने पर आक्रामक रुख अपनाते हुए टीएमसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल की डीपी में महान समाज सुधारक की तस्वीर लगा दी. बाद में टीएमसी के सभी प्रमुख नेताओं ने ट्विटर पर अपनी-अपनी डीपी के तौर पर ईश्वर चंद विद्यासागर की तस्वीर को लगा लिया.

मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ पैदल मार्च का ममता का ऐलान टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने बुधवार को बेलाघाट से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है. वह विद्यासागर कॉलेज के छात्रों को भी संबोधित करेंगी. उनका यह मार्च बेलाघाट से शुरू होगा. इस बीच, बुधवार को ही विद्यासागर कॉलेज के छात्रों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है. टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में प्रोटेस्ट मार्च निकाला है. वहीं, बीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर में मूक-विरोध शुरू किया है. केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, हर्षवर्धन, विजय गोयल समेत कई बीजेपी नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए.

अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ममता और टीएमसी पर बोला हमला बुधवार 11 बजे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईश्वर चंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के लिए टीएमसी को जिम्मेदार बताया. शाह ने कहा कि रोड शो के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं ने 3 बार हमले किए. टीएमसी पर ईश्वर चंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाते हुए अमित शाह ने सवाल किया कि कॉलेज का गेट बंद था, उनके समर्थक सड़क पर थे तो गेट किसने खोला? इस आधार पर उन्होंने कहा कि मूर्ति को अंदर से तोड़ा गया. उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अबतक ममता के चुनाव प्रचार पर रोक क्यों नहीं लगी है. शाह ने कहा कि चुनाव में संभावित हार देख ममता बौखला गईं हैं और चुनाव में गड़बड़ी कर रही हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि अगर सीआरपीएफ नहीं होती हमारा बचना मुश्किल था.

…तो इसलिए मायावती को आया नरेंद्र मोदी पर ‘गुस्सा’!

लखनऊ। बीएसपी प्रमुख मायावती की सियासी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव देखने को मिला है. छठे चरण तक रैलियों के मंच से ही पीएम नरेंद्र मोदी उनके निशाने पर थे. सातवें चरण में अब उनकी सुबह का आगाज भी मोदी पर हमले से हो रहा है. मोदी पर माया के आक्रमक तेवर निजी हमलों में बदल चुका है. जानकारों का कहना है कि आखिरी चरण की नजदीकी लड़ाई में मायावती की चिंता कोर वोटों में सेंध बचाने की है. साथ ही मोदी से सीधे मुकाबला होना 23 मई के बाद त्रिशंकु नतीजों की स्थिति में ‘विकल्प’ बनने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

यूपी में अब आखिरी चरण की 13 सीटों पर चुनाव बचा हुआ है. यह सभी सीटें पूर्वांचल की हैं. इसमें अधिकतर सीटें पिछड़ा, सवर्ण व दलित बहुल हैं. पिछड़े में गैर यादव अति-पिछड़ी जातियां अधिकतर सीटों पर प्रभावी हैं. वहीं दलितों में भी गैर जाटव वोटर कई सीटों पर अच्छी तादाद में हैं. 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दलित वोटों में भी अच्छी सेंधमारी की थी. अब एक बार फिर पूर्वांचल के जातीय कुरुक्षेत्र में मोदी की अगुआई में बीजेपी ने बीएसपी के इन कोर वोटों पर नजर गड़ा रखी है. पीएम मोदी जिस तरह से राजस्थान के अलवर में हुई सामूहिक बलात्कार की वीभत्स घटना पर मायावती की ‘जवाबदेही’ तय कर रहे हैं, यह इसकी नजीर है.

सीधी लड़ाई में परसेप्शन अपने वोटरों को जोड़ने के साथ ही फ्लोटिंग वोटरों को भी पाले में करने में अहम भूमिका निभाता है. महागठबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मायावती का मोदी पर तीखा हमला इसी रणनीति का हिस्सा है. आम तौर पर केंद्रीय एजेंसियों के दबाव या अपनी स्थानीय मजबूरियों में दबे क्षेत्रीय दलों (इक्का-दुक्का) ने मोदी पर इतने तीखे हमले नहीं किए है, जितना मायावती ने किया है. खुद मायावती पर कांग्रेस सीबीआई के दबाव में काम करने का आरोप लगा चुकी है. बीएसपी के एक नेता का कहना है कि मोदी पर सीधा व निजी हमला बोलकर मायावती की रणनीति अपने वोटरों को यह संदेश देने की है कि वह अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और बीजेपी चुनाव हार रही है. कोर वोटरों को जोड़े रखने और जमीनी पर गठबंधन की गणित को और मजबूत करने के लिए यह संदेश जरूरी भी है. इसका असर हुआ तो बीजेपी के पाले में छिटकने वाली गैर-जाटव व अति पिछड़े जाति के वोटरों को भी गठबंधन के पाले में वापस लाना आसान होगा.

2019 के चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मोदी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इस बार यूपी बनता नजर आ रहा है. 2014 में इसी ने मोदी को शीर्ष पर बिठाया था. यूपी से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए बीजेपी को सबसे अधिक उम्मीद ममता बनर्जी की अगुवाई वाले पश्चिम बंगाल से है. ममता बनर्जी का मोदी के खिलाफ विरोध तो लोकतंत्र के ‘थप्पड़’ तक पहुंच चुका है. विपक्षी एकता के सूत्रधारों के लिए ममता और मायावती दोनों ही सबसे अहम किरदारों में हैं. मायावती के प्रधानमंत्री बनने के सपनों को उनके गठबंधन पार्टनर अखिलेश यादव से लेकर बिहार में आरजेडी के अगुआ लालू प्रसाद यादव भी दे चुके हैं.

हाल में ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मायावती को संघर्षों का नैशनल सिंबल बताया. दिल्ली में तीसरे मोर्चे के लिए संभावना तभी बनेगी तब यूपी में महागठबंधन बीजेपी के आंकड़ों को काफी नीचे पहुंचा दे. ऐसी स्थिति में मायावती एसपी-बीएसपी गठबंधन के मुखिया के तौर पर दिल्ली की राजनीतिक फैसलों में भी अहम भूमिका निभाएंगी इसलिए भी नतीजों की घड़ी में मायावती ने खुद को मोदी के मुखर विरोधी के तौर पर स्थापित करना शुरू कर दिया है. रणनीतिक तौर पर रिजल्ट के पहले विपक्षी दलों की बैठकों से भी एसपी-बीएसपी की दूरी भी सभी विकल्पों को खुले रखने की ओर इशारा कर रही है.

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उत्तर प्रदेश में दलित दूल्हे को मंदिर जाने से रोका

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उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित एक दलित परिवार ने इलाके के कथित उच्च जाति के लोगों पर उन्हें एक मंदिर में जाने से रोकने का आरोप लगाया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को एक दलित युवक शोभित जाटव की शादी थी. इसके लिए बारात निकलने से पहले आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर जाना था. शोभित के पिता का कहना है कि न केवल उनके लिए रास्ता रोका गया बल्कि, दूल्हे की अंगूठी और पैसे भी लूटने की कोशिश की गई. बताया जाता है कि इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति है. हालांकि. बाद में पुलिस की निगरानी में दूल्हे को मंदिर में प्रवेश कराया गया. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, स्थानीय पुलिस अधिकारी ने इस घटना को केवल दो परिवारों के बीच का विवाद बताया. उनका कहना है कि इसका जातिगत हिंसा से कोई संबंध नहीं है.

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दलित महिला से छेड़छाड़ के बाद घर में घुसकर की मारपीट

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सांकेतित चित्र

बल्लभगढ़। तिगांव बाजार से सामान खरीदकर ऑटो में घर लौट रही एक दलित महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है. महिला के विरोध करने पर आरोपित ने अपने रिश्तेदारों को बुलाकर महिला व उसके भाई पर हमला कर दिया. घायल बहन-भाई को अस्पताल में दाखिल कराया गया. पुलिस ने इस मामले में आरोपित युवक सहित 5 के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

थाना छांयसा पुलिस के अनुसार, एक गांव में रहने वाली दलित समुदाय की 26 साल की महिला ने दी शिकायत में बताया कि वह इन दिनों अपने मायके में आई हुई है. सोमवार को कुछ सामान खरीदने के लिए तिगांव बाजार में गई थी. दोपहर के समय सामान की खरीददारी करने के बाद वह घर जाने के लिए ऑटो में सवार हो गई. इसी ऑटो में उसके बराबर एक युवक बैठ गया. आरोप है कि युवक ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. महिला के विरोध करने पर वह गाली गलौज करने लगा. महिला जब अपने गांव में पहुंची, तो उसे उसका भाई मिल गया. उसने सारी बात अपने भाई को बताई. आरोपित युवक को ऑटो को नीचे उतारने की कोशिश की. हल्की हाथापाई के बाद मामला शांत हो गया. महिला और उसका भाई अपने घर चले गए. आरोप है कि थोड़ी ही देर में युवक महिला के गांव में ही रहने वाले अपने रिश्तेदारों को फोन कर बुला लाया. आरोपित युवक सहित 5 अन्य महिला के घर में घुस गए और उसे वह उसके भाई को लाठी-डंडों व रॉड से पीटा. इसके बाद फरार हो गए. एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि महिला की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस की टीम गांव में गश्त कर रही है. आरोपित पुलिस की पकड़ से अभी बाहर हैं.

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अब इस नेता ने भी कहा, दिल्ली की कुर्सी पर दलित की बेटी बैठेगी

Omprakash Rajbhar
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (फाइल फोटो)

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय सीट वाराणसी में मंगलवार को चुनाव प्रचार करने पहुंचे योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा बयान दिया है. पिछड़े समाज के इस नेता ने कहा है कि इस बार दिल्ली की कुर्सी पर एक दलित की बेटी बैठेगी. हालांकि उन्होंने खुल कर किसी की नाम नहीं लिया लेकिन उनके इस बयान से समझा जा सकता है कि ओमप्रकाश राजभर का इशारा किस ओर है. उन्होंने यह बात समाचार चैनल ‘न्यूज 18’ से बातचीत के दौरान कही.

लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा से नाराज सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने यह भी दावा किया कि यूपी से बीजेपी को महज 15 सीटें मिलेगी, जबकि सपा-बसपा गठबंधन को 55 से 60 सीटें हासिल होंगी. ओमप्रकाश राजभर ने जिस तरह ‘दलित की बेटी’ के दिल्ली की कुर्सी पर बैठने की बात कही है उससे साफ है कि उनका इशारा बसपा प्रमुख मायावती की तरफ है. इससे एक बात यह भी सामने आ रही है कि बहुजन समाज के तमाम अन्य नेता भी चाहते हैं कि मायावती देश की प्रधानमंत्री बनें.

भाजपा से नाराज राजभर ने कहा कि पूर्वांचल की कम से कम 30 सीटों पर हमारा साथ न मिलने से बीजेपी को प्रभाव पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि गोरखपुर, गाजीपुर और बलिया सीट बीजेपी हार रही है. 12 मई को वोटिंग के दिन मैं बहुत खुश था. चंदौली में मेरी सभा से बीजेपी को पसीना छूट गया. सपा-बसपा गठबंधन में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति में विकल्प हमेशा खुले रहते हैं.

खुद को जलाने के बाद गैंगरेप पीड़िता ने बताया दहलाने वाला सच

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

यूपी के हापुड़ में गैंगरेप की शिकार हुई महिला की खुदकुशी की कोशिश के बाद जो सच्चाई सामने आई है वह एक आम इंसान को परेशान करने वाली है. महिला ने जो सच्चाई बतायी है; वह दहलाने वाली और झकझोड़ने वाली है. आग की वजह से 75 से 80 फीसदी जल चुकी महिला ने जो कहा है उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. पीड़िता ने कहा, ‘मेरी इच्छा थी की मैं मर जाऊं. कोई भी इस दर्द से नहीं गुजरना चाहेगा. लेकिन गनीमत है अब लोग मेरा रेप नहीं करेंगे क्योंकि मैं पूरी तरह जल चुकी हूं.’

बाबूगढ़ थाने में दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक महिला की 10 साल पहले हापुड़ में शादी कराई गई. उस वक्त महिला की उम्र 14 वर्ष की थी. शादी के सालभर बाद यह रिश्ता टूट गया जिसके बाद महिला अपने पहले पति से हुए बच्चे के साथ अपने पिता के घर रहने आ गई.

कुछ महीने के बाद महिला के पिता और चाची ने उसे 10,000 रुपए में एक व्यक्ति को बेच दिया. जिस व्यक्ति ने महिला को खरीदा था उसके साथ साल 2011 में उसकी शादी हो गई.

महिला को दूसरे पति के साथ भी एक बच्चा हुआ. एफआईआर रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में महिला के साथ ज्यादती होनी शुरू हुई. महिला के मौजूदा पति ने एक व्यक्ति से 10% ब्याज पर कर्ज लिया था जिसे वह चुका नहीं पा रहा था. गरीबी का लाभ उठाते हुए कर्ज देने वाले व्यक्ति ने महिला के साथ कई बार रेप किया. उसने यह भी धमकी दी कि उसे गांव में बदनाम कर देगा. उस व्यक्ति के साथ महिला को तीसरा बच्चा हुआ.

महिला ने शिकायत में कहा है कि इस मामले के बारे में उसने अपने पति को कई बार बताया. पति ने उसे चुप रहने को कहा और दूसरे घरों में मजदूर के तौर पर काम करते रहने को कहा. 2016 में भी महिला के साथ शम्मु नाम के एक व्यक्ति ने फर्म में अकेला पाकर रेप किया. 2017 में महिला ने एफआईआर में कहा है कि उसके साथ 14 अलग-अलग लोगों ने रेप किया. इन 14 लोगों में गुड्डु, मधु, विपिन, गरुमीत, रम्मू, अनुज, गोपाल, डॉक्टर सुभाष, नगीनू, केदार और कुछ अन्य लोगों के नाम शामिल हैं.

महिला ने अपने साथ हुए रेप के बारे में एसएचओ से शिकायत की तो कोई कार्रवाई नहीं की गई. महिला ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नबंर(1076) पर भी कॉल किया लेकिन उसे नहीं सुना गया.

महिला की मुलाकात एक भंडारे में एक व्यक्ति से हुई जिससे उसने अपने आपबीती सुनाई. वह महिला की मदद करने को तैयार हो गया. महिला और उसके दोस्त को आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी. महिला अपने दोस्त के साथ गांव छोड़कर जाने पर मजबूर हो गई. नवंबर 2018 में महिला उस व्यक्ति के साथ मुरादाबाद में रहने लगी. महिला को वहां भी आरोपियों से धमकी मिलती रही. महिला ने धमकियों से तंग आकर खुद को आग के हवाले कर लिया. महिला को पहले मुरादाबाद में भर्ती कराया गया, जहां हालत गंभीर होने के चलते उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया.

इस मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 366(अपहरण), 328, 376, 376डी और 506 के तहत 16 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

भारत में चार प्रकार के बौद्ध हैं

पहले, परम्परागत बौद्ध हैं जो अधिकतर लद्दाख, अरुणाचल, सिक्किम, असम, नागालैण्ड, पश्चिम बंगाल आदि प्रांतों में रहते हैं- चकमा, बरुआ, ताईआदि. ये वे बौद्ध हैं जो भारत के बुद्ध धम्म के विपत्तिकाल में स्वयं को बचा सके और बुद्ध धम्म की धरोहर को मुसीबतों में संरक्षित रख सके. इन बौद्धों के पास बुद्ध धम्म की बड़ी अनमोल धरोहरें संरक्षित हैं- गौरवशाली बौद्ध संस्कृति व दुर्लभ ग्रंथ. इनके पास भगवान बुद्ध के वास्तविक चीवर तक संरक्षित हैं, पूरे भी और टुकड़ों में भी, भगवान के द्वारा उपयोग मे ली गई वस्तुएं जैसे पात्र, आसन, नख आदि. अधिकतर पारम्परिक बौद्ध अनुसूचित जनजाति में हैं लेकिन आधुनिक शिक्षा की कमी के कारण जनजाति का लाभ नहीं ले पा रहे हैं . इनके रीति-रिवाज, तीज-त्योहार, पूजा-संस्कार, आस्था-विश्वास सब के केन्द्र में भगवान बुद्ध और बुद्ध धम्म होता है. उनकी नैतिक कथाओं, कहानियों और कहावतों में भी सिर्फ बुद्ध होते हैं. उनके सपनों में भी बुद्ध और उनका धम्म होता है.यानीकि उनकी कल्पना और दैनिक जीवन का ताना बाना भी बुद्धमय होता है. इन बौद्धों की संख्या सिन्धी, सिक्ख, जैन, पारसी, ईसाइयों की तरह अल्पसंख्या में है लेकिन इन समुदायों का राजनैतिक महत्व भी नहीं के बराबर है क्योंकि इनमें राजनैतिक जागरूकता बहुत कम है.हालांकि पूर्वोत्तर राज्यों में इनके मत निर्णायक होते हैं लेकिन इनको शासन व संसाधनों की मुख्यधारा से अलग थलग पटका गया है. यही नहीं इनके साथ तो भारतीयों जैसा व्यवहार ही नहीं किया जाता हैं .ये बहुत मेहनकश, भोले सरल स्वभाव के, ईमानदार व वफादार होते हैं.

दूसरे, वे बौद्ध हैं जो ओशो के अनुयायी या ओशो के विचारों को बहुत पसंद करते हैं. ये घोषित रूप में बौद्ध नहीं हैं लेकिन बौद्धिक स्तर पर तथागत बुद्ध के प्रति उनकी गहरी वैज्ञानिक श्रद्धा है. बुद्ध के प्रति गर्व की भावना है, बुद्ध की खोज विपस्सना ध्यान साधना को जीवन में उतारते है ,बुद्ध और बौद्ध धम्म को भारत का गौरव मानते हैं.

तीसरे, वे बौद्ध हैं जो विपस्सना आचार्य सत्यनारायण गोयनका जी द्वारा दुनिया भर में चलाए जा रहे विपस्सना ध्यान साधना शिविरों में गए हुए हैं. विपस्सना के निष्ठावान ये साधकगण भी घोषित रूप में बौद्ध नहीं हैं लेकिन भगवान बुद्ध के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा है. सच यह है कि वे बुद्ध व उनके धम्म के परिपूर्ण व सच्चे बौद्ध हैं लेकिन दैनिक जीवन में वे सवर्ण-अवर्ण, हिन्दू मुस्लिम,सिख, ईसाई आदि सब लोग हैं. संसार में बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार कर फिर से बौद्ध शासन लाने में गोयनका जी का महान योगदान है. हालांकि गोयनका जी के देहांत के बाद घालमेल शुरू हो गई है.

चौथे प्रकार के बौद्ध हैं जो बोधिसत्व बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए स्वयं को बौद्ध मानते हैं. उनमें से भी अधिकतर ने धार्मिक अंधविश्वासों व कर्मकांड को भी छोड़ दिया है. ये अनुसूचित जाति के हैं लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हिन्दू हैं लेकिन अधिकतर निष्ठावान बौद्ध हैं. ये न हिनयान व महायान दोनों शाखाओं का सम्मान करते हैं लेकिन बाबासाहेब ने जो बुद्ध की शिक्षाओं का मानवतावदी व वैज्ञानिक पक्ष सामने लाए थे, उसको मानते है.ये नवयानी है.

इस प्रकार अघोषित रूप से भारत की एक बहुत बड़ी जनसंख्या बौद्ध है अथवा बुद्धानुयायी है.

चारों प्रकार के बौद्ध अनुयायियों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं.

परम्परागत बौद्ध भाषा, बोली,क्षेत्रीयता, रीति रिवाजों में बाकी बौद्धों से अलग हैं ,कौतुहल और अभी भी जिज्ञासा का विषय हैं. उनके साथ शेष बौद्धों की न घनिष्ठ मैत्री है और न सामाजिक धार्मिक सम्पर्क.

ओशो से प्रभावित बुद्ध अनुयायियों के लिए बुद्ध व धम्म एक दार्शनिक चर्चा का विषय भर है. संस्कारिक तल पर कई लोग रूढिवादी व अंधविश्वासी होते हैं. भारत की सामाजिक,साम्प्रदायिक, आर्थिक ,धार्मिक विषमताओं से उनका सरोकार न के बराबर है. बुद्ध प्रेमी-ओशो प्रेमी नामक एक समुदाय-सा है जिनके बीच उनकी गहरी मैत्री है. शेष बुद्धानुरागियों से उनकी मैत्री नहीं के बराबर है.इनमें भी कई देवी देवताओं की आराधना, नृत्य, मनोरंजन आदि के शामिल होने से ओशो ने बताई बुद्ध मूल धारा अब भोथरी हो गई है.

विपस्सना करने वाले ध्यानी बौद्धों के जीवन केन्द्र विपस्सना ज्यादा महत्वपूर्ण है.दस ,बीस दिवसीय,सतिपट्ठान आदि शिविर करने में ज्यादा लगन रहती है. विपस्सना के प्रति उनकी लगन कमाल की है. एक तरह से वे धम्म को व्यवहारिक तल पर जीने का पूरा प्रयास कर रहे हैं. . ये विपस्सी साधक स्वयं को बौद्ध तो घोषित नहीं करते लेकिन घोषित बौद्धों से अधिक निष्ठावान बौद्ध हैं. लेकिन सामाजिक सरोकारों से इनका भी कोई ज्यादा वास्ता नहीं है. खास बात यह भी है कि अधिकतर लोग शरीर व मन के सुख शांति के लिए बुद्ध की खोजी विपस्सना का ध्यान तो करते हैं लेकिन दैनिक जीवन में अपने अपने संप्रदाय धर्म के अंधविश्वासपूर्ण सारे कर्मकांडों ,पूजापाठ आदि में उलझे रहते है ध्यान के प्रति श्रद्धा है लेकिन बुद्ध के प्रति नहीं.घर में तो वही भेरोजी की ही पूजा करते है.

चौथे प्रकार के बौद्ध हैं जो बोधिसत्व बाबासाहेब के प्रभाव में स्वयं को बौद्ध मानते हैं. उनके लिए सामाजिक सुधार व वैज्ञानिक सोच प्राथमिक है, यह समुदाय 14 अक्टूबर 1956 के बाद अस्तित्व में आया है.भारत की सामाजिक राजनैतिक धार्मिक विसंगतियों के निराकरण के लिए यह नवयान सर्वाधिक उत्साही और सक्रिय है .भारत के बौद्धों की जनसंख्या में 13 % पारम्परिक बौद्ध हैं और शेष 87% में नवयानी बौद्ध हैं. भारत को बुद्धमय बनाने का सबसे प्रबल सपना इन्हीं नवयानियों का है. जाति विहीन समाज बनाना उनकी प्राथमिकता है. लेकिन इन नवयानियों में भी चार प्रकार के बौद्ध हैं:

1. पड़े हुए बौद्ध 2. खड़े हुए बौद्ध 3. बढ़े हुए बौद्ध 4. चढ़े हुए बौद्ध

पड़े हुए बौद्ध

पड़े हुए बौद्ध वे हैं जो किसी भी लिहाज से बौद्ध नहीं हैं. बस बाबा साहेब या बुद्ध जयंती के अवसर पर धुम धड़ाका ,समारोह में वेभाषण, ‘नमो बुद्धाय जय भीम’ का जयकारा लगाते हैं. साल के बाकी दिनों में वे उन्हीं संस्कारों में लिप्त रहते हैं जिन संस्कारों से बाबा साहेब ने मुक्त करने का आह्वान किया था.

खड़े हुए बौद्ध

खड़े हुए बौद्ध सबसे ज्यादा मुखर हैं. घर,चर्चा में या बंद पंडालों में हिन्दुत्व, ब्राह्मणवाद, मनुवाद, अंधविश्वास, पाखण्ड आदि की सुबह से शाम निन्दा करना, कर्मकांडों की सर्जरी करना, उपहास करना उनकी प्राथमिकता में है.बुद्ध धम्म के बारे में उनकी जानकारी व रूचि नहीं होती है. उनकी दिनचर्या, संस्कार, आचार में बुद्ध धम्म की छाया भी नहीं है. बस पानी पी पी कर दूसरी जाति,धर्म की आलोचना व स्वयं का महिमामंडन को ही वे अंबेडवाद व बुद्ध धम्म समझते हैं. उन्हें यह तो मालूम है कि मनुस्मृति या रामचरितमानस में कौनसी बातें निन्दनीय हैं लेकिन यह नहीं मालूम कि धम्मपद में कितने पद हैं या बुद्ध और उनका धम्म में क्या लिखा हुआ है. उन्हें विपस्सना या आरएसएस का एजेंडा तो दिखता है,त्रिपिटक की अट्ठकथाओं में भी ब्राह्मणवाद दिखता है, ध्यान,साधना आदि सब कुछ मनुवाद लगता है, उनका सारा सरोकार 22 प्रतिज्ञाओं से है,उनमें भी सिर्फ पहली तीन प्रतिज्ञाओं पर सारा जोर रहता है, शेष प्रतिज्ञाओं का वे स्वयं भी पालन नहीं करते हैं. उन्हें यह तो अच्छे से मालूम है कि गलत क्या है, लेकिन सही क्या इस बात की जानकारी लगभग नहीं ही है या है तो पालन नहीं करते.

ऐसा मुस्लिम ढूढ़ना मुश्किल है जिसे नमाज़ न आती हो, ऐसा सिक्ख ढूँढ़ना मुश्किल है जिसे गुरूग्रंथ साहेब के शबद न याद हों, ऐसा इसाई ढूंढ़ना लगभग नामुमकिन है जिसे बाइबिल के कुछ सानेट न याद हों, ऐसा हिन्दू तो ढूँढ़ना असम्भव है जिसे कोई आरती-चालीसा-स्तुति-भजन न आता हो लेकिन ऐसे कथित बौद्ध लाखों की संख्या में मिल जाएंगे जिन्हें त्रिशरण,पंचशील, बुद्ध वन्दना कुछ नहीं आता लेकिन मंचों पर दावे से अपने को बौद्ध कहते हैं. इन खड़े हुए बौद्धों की सोच क्रान्तिकारी है, तार्किक है. ये ही बौद्ध बाबासाहेब और भगवान बुद्ध की जयंती मनाने के प्रति सर्वाधिक सक्रिय हैं.

बढ़े हुए बौद्ध

बढ़े हुए बौद्ध वे हैं जो निन्दा,आलोचना,सर्जरी ,विवाद से थोड़ा आगे बढ़ कर सच्चे अर्थों में धम्म का व्यवहारिक रूप से पालन कर रहे हैं. उन्हें त्रिशरण,पंचशील,बुद्ध त्रिरत्न वन्दना सुत्तपाठ आता है. जन्मदिन, विवाह, गृहप्रवेश इत्यादि अवसरों पर पूज्य भन्ते या बोधाचार्यों से संस्कार सम्पन्न कराते हैं. पुराने संस्कारों को छोड़ कर उन्होंने बौद्ध संस्कारों को जीवन में आत्मसात करना शुरू कर दिया है. वे सच्चे अर्थों में बुद्धमय भारत बनाने की दिशा में अग्रसर हैं. यह सही है कि सिर्फ निन्दा-आलोचना करते रहने भर से बुद्धमय भारत नहीं बनेगा. सकारात्मक विकल्प पर व्यावहारिक काम करने से भारत बुद्धमय होगा. नवयानी बौद्धों में यह बढ़े हुए बौद्ध ही उम्मीद की मशाल हैं.

चढ़े हुए बौद्ध

चढ़े हुए बौद्ध, इन्हें धम्म के वास्तविक नायक कहिये, जो धम्म के मूल तक पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं. ध्यान,साधना,विपस्सना करते हैं, बुद्ध वचनों को मूल रूप में अध्ययन करते हैं, त्रिपिटक में धम्म खंगालते हैं, शून्यागारों में ध्यान करते हैं. उपोसथ धारण करते हैं. धम्म के आध्यात्मिक पक्ष को सर्वोपरि प्राथमिकता देते हैं और सामाजिक सरोकारों में भी सकारात्मक व रचनात्मक योगदान देते हैं. उन्हें धम्म का मर्मज्ञ कहा जा सकता है. सातवीं संगीति भारत में आयोजित करना इन बौद्धों का सपना और महत्वाकांक्षा है. वे इसके लिए प्रयासरत भी हैं. दान भी करते हैं और धम्म का प्रचार भी करते हैं.शेष बौद्धों के मन में यह बात अभी कल्पना में भी नहीं है. भारत को सच्चे अर्थों में बुद्धमय यही बौद्ध बनाएंगे, चढ़े हुए बौद्ध.

बुद्ध के अनुयायियों के ये चार समूह अलग अलग नहीं हैं बल्कि उद्देश्य के लिहाज से चारों एक ही हैं. पड़ा हुआ बौद्ध ही एक दिन खड़ा हुआ बौद्ध बनता है. खड़ा हुआ बौद्ध ही कभी बढ़ा हुआ बौद्ध बनता है और यह बढ़ा हुआ बौद्ध ही एक दिन चढ़ा हुआ बौद्ध बनता है. यह भी सम्भव है कि अभी कोई पड़ा बौद्ध और खड़ा बौद्ध के बीच के दौर से गुजर रहा हो. यह परस्पर निरंतर विकास की प्रक्रिया है. यह विकास स्वयं के प्रयास से भी होता है तथा प्रशिक्षण से भी होता है. जबरन कुछ नहीं होता. स्वैच्छिक विकास बहुत क्रांतिकारी परिणाम देता है.

जो खड़े हुए हैं उन्हें पड़े हुए लोगों पर कटाक्ष नहीं करना है बल्कि याद यह रखना है कि कभी वे स्वयं भी वहीं थे. बढ़े हुए लोगों को खड़े हुए लोगों को बढ़ने के लिए प्रेरित करना है क्योंकि वे धम्म की ओर बढना चाहते है. चढ़े हुए बौद्धों को शेष तीन के प्रति भी मैत्री भाव से बर्ताव करना है. बढ़े और चढ़े हुए बौद्धों की संख्या जैसे-जैसे बढ़ती जाएगी, भारत बुद्धमय होता जाएगा.

भारत तीव्र गति से बुद्धमय होगा लोगों में तर्क विवेक और वैज्ञानिक चेतना निरंतर बढ रही हैं.अब भारत के सभी प्रगतिशील,वैज्ञानिक सोच व मानवतावदी लोगों मैत्री व आपसी समझ बढ़ती जाएगी. क्योंकि बुद्ध वचन हैं कि मैत्री ही सम्पूर्ण धम्म है. …. भवतु सब्ब मंगल…..

लेखक- डॉ. एम.एल. परिहार Read it also-आप लोग बहक गए, इसलिए कमजोर पड़ा आंदोलन : मायावती

अलवर गैंगरेप मुद्दे पर भिड़ें मोदी और मायावती

सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली। अलवर में पति के सामने महिला से गैंगरेप की शर्मनाक वारदात का मुद्दा देश भर में छाया हुआ है. इस पूरे घटनाक्रम में जिस तरह महिला को चोट पहुंचाई गई और इस घटना को लेकर राजस्थान पुलिस का रवैया जिस तरह असंवेदनशील रहा उससे दलित समाज और न्याय पसंद लोगों में काफी गुस्सा है. तो दूसरी ओर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बसपा प्रमुख मायावती आपस में भिड़ गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलित युवती के साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए बीएसपी सुप्रीमो मायावती को राजस्थान की कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेने की चुनौती दे डाली। 12 मई को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी ने मायावती पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘एक दलित की बेटी के साथ राजस्थान के अलवर में गैंगरेप हुआ लेकिन उनपर राजनीति करने वाली बहनजी चुप हैं. अगर वास्तव में देश की बेटियों के प्रति आप ईमानदार हैं तो आज ही तत्काल प्रभाव से राजस्थान में कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस लीजिए.’

पीएम मोदी के इस बयान से भड़की बहनजी ने मोदी को करारा जवाब दिया है. समर्थन वापस लेने वाले बयान को बसपा प्रमुख ने घृणित कांड की आड़ में घृणित राजनीतिक करने का आरोप लगाया है. मायावती ने कहा कि “बीएसपी राजस्थान में उचित और सख्त कार्रवाई न होने पर राजनीतिक फैसला जरूर लेगी साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के ऊना और रोहित वेमुला जैसे कांड के बाद भी अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं देते हैं.?”

 बता दें कि राजस्थान के अलवर में दलित महिला के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है, जिसकी चर्चा पूरे देश में है. मायावती खुद इस केस में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर देरी से कार्रवाई करने का आरोप लगा चुकी हैं.

मायावती का मोदी पर जोरदार वार, राजनीतिक फायदे के लिए पत्नी को छोड़ा

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि भाजपा की महिला नेता उनके पतियों के पीएम मोदी से करीबी से घबराती हैं. उनका कहना है कि उन महिलाओं को डर है कि कहीं पीएम मोदी उन्हें भी अपनी पत्नी की तरह अपने पतियों से अलग ना करवा दें.

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक मायावती ने कहा, ‘मुझे तो यह भी मालूम चला है कि भाजपा में खासकर विवाहित महिलाएं अपने आदमियों को श्री मोदी के नजदीक जाते देखकर, यह सोच कर भी काफी ज्यादा घबराती रहती हैं कि कहीं ये मोदी अपनी औरत की तरह हमें भी अपने पति से अलग ना करवा दे.’ दरअसल अलवर गैंगरेप मामले में मोदी द्वारा मायावती पर की गई टिप्पणी को लेकर बहनजी पीएम मोदी पर भड़की हुई हैं. उन्होंने कहा, ‘नरेंद्र मोदी ने अलवर गैंगरेप मामले पर चुप्पी साधी हुई थी. वह इस मुद्दे पर गंदी राजनीतिक करने की कोशिश कर रहे हैं. यह बेहद शर्मनाक है. वह कैसे किसी की बहन और पत्नियों की इज्जत कर सकते हैं, जब राजनीतिक फायदे के लिए उन्होंने अपने पत्नी को ही छोड़ दिया.’

कमल हासन ने गोडसे को कहा पहला हिन्दू अतिवादी, भाजपा भड़की

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kamal hassanतामिलनाडु। लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण के चुनाव के लिए सारी पार्टियां जोर लगा रही हैं. आखिरी चरण के लिए बची 59 सीटों पर तमाम दल अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए कमर कसे हुए हैं. इस बीच फिल्म अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने हिन्दू आतंकवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. कमल हासन ने तमिलनाडु में चुनावी प्रचार के दौरान कहा कि भारत का पहला अतिवादी हिन्दू ही था. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत का पहला अतिवादी हिन्दू था, जिसका नाम है नाथूराम गोडसे. बता दें कि नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी थी. तमिलनाडु के अरावाकुरुची विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान कमल हासन ने कहा कि ‘मैं यह इसलिए नहीं बोल रहा हूं क्योंकि यहां काफी मुस्लिम हैं. मैं यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कह रहा हूं. स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी हिन्दू है और उसका नाम है नाथूराम गोडसे.’ बता दें कि कमल हासन ने राजनीति में कदम रखा है और उन्होंने पिछले साल ही मक्कल निधि मैय्यम पार्टी की स्थापना की थी.

साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद बनाम सामाजिक न्याय और कन्हैया

दलित आंदोलन (फाइल फोटो)

कन्हैया की संभावनाओं को लेकर बहस तेज है. नामचीन हस्तियों ने बेगूसराय में कन्हैया के पक्ष में चुनाव प्रचार किया. चुनाव बाद भी बहस जारी है. अब अपूर्वानंद जैसे बड़े नाम खुलकर इनके पक्ष में मुहिम चला रहे हैं. वहीं, कुछ लोग कन्हैया को शक की नजर से देखते हैं. यह शक क्यों? राजनीति में युवा नेतृत्व को आगे आना ही चाहिए. फिर साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद के विरोध में झंडा बुलंद करने वाला एक तबका कन्हैया का विरोध क्यों कर रहा है? वह भी तब जब कन्हैया देश स्तर पर राजनीतिक दिशा दशा में बड़े बदलाव की तरफ उम्मीद जगाता है. यह सही है कि कन्हैया मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी के साम्प्रदायिक मंसूबों को बहुत मजबूती से चुनौती देते हैं.

 कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास साम्प्रदायिक मुद्दों पर बेहतरीन रहा है. इससे असहमत नहीं हुआ जा सकता है. पर सवाल उठता है कि क्या इस सिर्फ तर्क से कन्हैया का समर्थन किया जाना चाहिए? इस पर आगे कुछ कहा जाए, उससे पहले कुछ अपना अनुभव और उनके एक हालिया फेसबुक पोस्ट पर चर्चा करना चाहता हूं. मेरे कुछ अनुभव रहे हैं जिससे लगता है कि कन्हैया के भीतर का सच आने में समय नहीं लगेगा. साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद के साथ साथ एक और पहलू है जिस पर नरेंद्र मोदी की सरकार ने खुलकर हमला किया है. वह है सामाजिक न्याय और आरक्षण की पूरी अवधारणा. इन दोनों ही मसलों पर कन्हैया की पार्टी सीपीआई में गजब का दोहरापन है. सीपीआई में करीब डेढ़ दशक सक्रिय रहने के दौरान दर्जनों ऐसे नेताओं से सामना हुआ है जो जाति के सवाल पर भले सार्वजानिक रूप से अपने को वर्णविहीन समाज के सबसे बड़े समर्थक के तौर पर पेश करते रहे हों, लेकिन निजी व्यवहार में वो बहुत बड़े जातिवादी रहे हैं. वो सामाजिक न्याय, आरक्षण, दलित उत्पीड़न, यूनिवर्सिटी में पिछड़े-दलितों की भागीदारी बढ़ाने जैसे सवालों पर बहुत ही चालाकी से किनारा कर लेते रहे हैं. सामाजिक न्याय को बहुत ही आसानी से परिवारवाद की राजनीति बोलकर ख़ारिज कर देते हैं.

 चाहे दिल्ली का अजय भवन हो या पटना का जनशक्ति भवन, दोनों जगहों पर एक खास समाज से आने वाले नेता ही क्रांति कर सकते हैं यह समझ बहुत साफ साफ है. “जर जमीन बंट कर रहेगा अपन अपन छोड़ कर” पता नहीं यह कहावत किसने और कैसे गढ़ा होगा, लेकिन यह सच के काफी करीब है. सीपीआई में ज्यादातर पिछड़े और दलित नेताओं को नेतृत्व क्षमता होने के बावजूद हाशिये पर रखा गया या उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया.

 अब बात फायरब्रांड और वामपंथ के नए दुलारे कन्हैया के फेसबुक पोस्ट की. इन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर रोशन सुचान नाम के किसी व्यक्ति का पोस्ट डाला है. जिसमें वो बहुत खुलकर नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने और उसके बिहार की राजनीति में फायदे गिना रहे हैं. जाहिर है कन्हैया सुचान जी की राय से सहमत होते होंगे, तभी तो उन्होंने इसे अपने पोस्ट पर डाला है. ऐसे में यह मानना कतई अनुचित नहीं होगा कि ये पोस्ट कन्हैया की सहमति से ही लिखा गया होगा, ताकि आप अपने को दूसरे के माध्यम से एंडोर्स किया जा सके. पोस्ट के लेखक की दिली इच्छा है कि तेजस्वी जेल जाएं और कन्हैया विपक्ष के सर्वमान्य नेता हो जाएं. इसके लिए अगर बीजेपी की सरकार भी आ जाए तो कोई दिक्कत नहीं है. इसका मतलब जो लोग यह समझते थे कि ये अपने भाषणों में नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हैं और साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद पर बहुत खुलकर अपनी बात रखते हैं. ये सब छलावा था. दरअसल, ये बहुत सोच समझकर साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद के सवाल को उठाते हैं ताकि सामाजिक न्याय के मुद्दों को काउंटर किया जा सके. बीजेपी का कमंडल से मंडल को कुंद करने का पुराना इतिहास रहा है.

 फेसबुक पोस्ट में एक नए राजनीतिक समीकरण (मुस्लिम-भूमिहार-दलित) का सुझाव पेश किया जा रहा हैं. इस परिकल्पना में अति पिछड़ा और पिछड़ा कहीं नहीं है. पिछले 5 साल में नरेंद्र मोदी सरकार के फैसलों का सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी का हुआ है तो वो दलितों के साथ साथ पिछड़े समाज का हुआ है. हर रैली में अपने को पिछड़ा-अति पिछड़ा बताने वाले नरेंद्र मोदी सामाजिक न्याय के मुद्दों को लगातार सांप्रदायिक राष्ट्रवाद से काउंटर कर रहे हैं. दरअसल, कन्हैया अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को पूरा करने के लिए सामाजिक न्याय और आरक्षण के मुद्दों पर सबसे मुखर और उभरते नेता तेजस्वी को जेल भेजने की मंशा रखने वाले पोस्ट को साझा करने से नहीं चुकते हैं. जाहिर है उद्देश्य बहुत साफ है. कन्हैया सांप्रदायिक शक्तियों से लड़ने के नाम पर दरअसल सामाजिक न्याय की धारा को कुंद करना चाहते हैं. इसी महीन बारीकी को समझना पड़ेगा.

  • लेखक राहुल कुमार पत्रकारिता से जुड़े हैं।

बिहार की जनता के नाम तेजस्वी यादव का इमोशनल खत

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लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर आज यानि रविवार को देश के 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान हो रहा है. बिहार में 8 सीटों के लिए मतदान होना है. इस मौके पर आरजेडी नेता और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव  ने बिहारवासियों के नाम एक पत्र लिखा है. इस पत्र में तेजस्वी ने अपने पिता के साथ हुए अन्याय का जिक्र किया है तो वहीं पिता की गैरमौजूदगी के बावजूद समर्थन देने के लिए बिहार की जनता का धन्यवाद किया है. तेजस्वी यादव ने इस पत्र को फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा किया है. आप खुद पढ़िए तेजस्वी यादव का खत-

मेरे प्रिय बिहारवासियों,

आज जब देश में छठे चरण का चुनाव हो रहा है। मैं हर एक बिहारवासी को दिल से धन्यवाद करना चाहता हूँ। यह पहला चुनाव है जब मेरे पिता को साज़िशन चुनाव प्रचार से दूर किया गया है। साम्प्रदायिक ताकतों से उनकी लड़ाई अभी भी जारी है … हाँ वो शारीरिक रूप से साथ नहीं इसलिए दिल थोड़ा सा भारी है लेकिन वैचारिक रूप से हर कण-हर क्षण वो हम सबों के संग है।

मैं आपका धन्यवाद इसलिए भी करना चाहता हूँ कि आपने इस चुनाव में मेरी हिम्मत, हौसले और जुनून को बनाए रखा है ठीक वैसे ही जैसे मेरे पिता के लिए करते हैं। आपकी पहनाई एक-एक माला, आपकी ओजस्वी आवाज में लगा एक-एक नारा, अन्याय के अन्धेरे को जड़ से मिटाने का… लालटेन जलाने का आपका प्रण… मुझपर ऋण है।

एक नया बिहार बनाने में आपने जो बढ़-चढ़ कर मेरा साथ दिया है उससे मुझे भी शक्ति मिली है कि अपनी हर एक सांस को बिहार की सेवा के लिए समर्पित करूं। हर उस इंसान के दुख दर्द को दूर करूं जो नीतीश-मोदी राज के नकारेपन का शिकार हुआ है।

वो नियोजित शिक्षक जिनकी परवाह नीतीश चाचा को नहीं है। वो पीड़ित बच्चियां जिनके साथ घिनौने जुर्म और ज्यादतियों का अन्तहीन सिलसिला रहा। वो व्यापारी जो आए दिन रंगदारी, लूट डकैती से परेशान हैं, जी.एस.टी. नोटबन्दी की मार से बेहाल है। वो दलित, पिछड़े और वंचित लोग जिनके आरक्षण को खत्म करने की साजिशें की जा रहीं है। वो हाशिए पर डाल दिए गए इंसान जो लगभग 14 साल के नीतीश चाचा के शासन के बाद भी ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाने को मजबूर है। वो घर चलाने वाली हमारी माताएं बहनें जिन्हें रसोई गैस और राशन मंहगा होने से घर चलाने में दिक्कत आ रही है।

वो छात्र, शिक्षा व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार जिनकी योग्यता का मखौल उड़ा रहा है। वो बहन, बेटियां जिन पर घर में घुसकर एसिड अटैक हो रहा है। वो अल्पसंख्यक भाई जिनके खिलाफ नीतीश मोदी सरकार के मंत्री खुलेआम नफरत फैलाने वाले भाषण दे रहें है। वो प्रशासन के ईमानदार अधिकारी जिन्हें अपना फर्ज निभाने पर मोदी-नीतीश के मंत्रियों द्वारा गाली मिल रहीं है। वो मतदाता जिसका वोट पहले धोखे से छीना गया और अब चुनावों में धोखे से भाजपा और जदयू के पक्ष में डलवाने की असफल कोशिश हो रही है।

वो किसान जो सुसाईड नोट में ‘मोदी को वोट मत देना’ लिखकर मरने को मजबूर है। वो मजदूर जो 14 साल के नीतीश चाचा के राज के बाद भी घर छोड़ने को मजबूर है वो रिक्शेवाला जो 14 साल के नाकाम राज के बोझ को अभी तक भी खींचे जा रहा है। वो बेरोजगार जिसे दो करोड़ नौकरियों का झांसा देकर उसे पकौड़े बेचने का ज्ञान दे दिया गया। वो गरीब जिसके खाते में 15 लाख तो क्या 15 रूपये भी नहीं आए और बिहार का वो एक-एक नागरिक जो अभी भी बिहार के स्पेशल पैकेज और विशेष राज्य के दर्जे के वादे के पूरा होने का इन्तजार कर रहा है।

हम सब साथ मिलकर इस अन्यायी सत्ता को जड़ से उखाड़ेंगे, अत्याचारी अन्धेरों को घर में घुसकर हटाएँगे पर हिंसा से ‘तीर’ चलाकर नहीं, प्यार से ‘लालटेन’ जलाकर। याद रखिएगा हमारा एक वोट बिहार के एक-एक नागरिक को इंसाफ देगा… बिहार को एक नई प्रभात देगा।

अंधेरों को हराते हैं, चलो लालटेन जलाते हैं

लालटेन का बटन दबाएं… राष्ट्रीय जनता दल को जिताएं… तानाशाही हटाएं… अपनी सरकार बनाएं

आपका,

तेजस्वी यादव

6वें चरण में 59.70 फीसदी मतदान, बंगाल में वोटिंग 80 फीसदी पार

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वोट डाल कर बाहर आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

नई दिल्ली। छठे चरण में 7 राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान संपन्‍न हो गया है. वोटिंग प्रतिशत की बात है तो देशभर में 59.70 फीसदी मतदान हुई. पश्चिम बंगाल में एक बार फिर बंपर वोटिंग हुई. बंगाल में इस चरण में लगभग 80.13 फीसद मतदान हुआ. इसके अलावा दिल्ली में 55.44 फीसदी, हरियाणा में 62.14 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 50.82 फीसदी, बिहार में 55.04 फीसदी, झारखंड में 64.46 फीसदी और मध्य प्रदेश में 60.12 फीसदी मतदान हुआ.

इस चरण में तमाम दिग्गज मैदान में हैं. इसमें केन्द्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, हर्षवर्धन और मेनका गांधी के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल हैं. लोकसभा चुनाव के इस चरण को भाजपा के लिये कड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि 2014 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से 45 सीटें जीतीं थीं जबकि तृणमूल कांग्रेस को आठ, कांग्रेस को दो और समाजवादी पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी को एक-एक सीट पर जीत मिली थी. भाजपा ने 2014 के चुनाव में इस चरण में उत्तर प्रदेश की 14 में से 13 सीटों पर जीत हासिल की थी. सिर्फ यूपी के आजमगढ़ में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को जीत मिली थी.

दिल्ली की सभी 7 सीटों के लिए भी आज ही मतदान हो रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, शीला दीक्षित, भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर आदि ने इस दौरान दिल्ली में अपने-अपने बूथ पर वोट डाला.