नहीं रहें ‘ब्राह्मणों’ को चुनौती देने वाले दलित कवि मलखान सिंह

0
मलखान सिंह जी

कमलेश वर्मा ने फारवर्ड प्रेस में लिखा है कि मलखान सिंह की कविताएं आत्मकथा है। वे आत्मकथा हैं, इसलिए सच्ची हैं। इनकी शैली आत्मकथात्मक है, इसलिए कथन में विश्वसनीयता है। मलखान जी पर भरोसा हो जाता है कि इनकी कविताओं के चित्र सच्चे हैं। सच्ची कविता कहने वाले मलखान सिंह आज सो गए। हमेशा के लिए। न टूटने वाली नींद में। आज 9 अगस्त 2019 को सुबह 4 बजे उनका निर्वाण हो गया। वह आगरा में रहते थे।

मलखान सिंह के गुजर जाने के बाद तमाम दलित लेखकों और साहित्यकारों ने उनको याद करते हुए सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है। तमाम दिग्गज दलित साहित्यकारों ने मलखान सिंह के निधन को दलित साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति कहा है।

हमारे बीच से जब कोई ओमप्रकाश वाल्मीकि, तुलसी राम या फिर मलखान सिंह चला जाता है तो अचानक से समझ में नहीं आता कि उनके बारे में क्या कहा जाए। इसलिए बेहतर है कि उन्हीं की कही बातों को दोहरा दिया जाए। अपनी रचनाओं से वो समाज को जो देना चाहते थे, वही बात एक बार फिर कह दी जाए। वही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मलखान सिंह की ‘सुनो ब्राह्मण’ कविता ने दलित साहित्य में जो प्रतिष्ठा अर्जित की है वह अपने आप में एक उपलब्धि मानी जाएगी. ये कविता वर्ण-व्यवस्था, ब्राह्मणवादी, सामंती–व्यवस्था पर तीखेपन के साथ हमला करती है. साथ ही उन तमाम मिथकों, बिम्बों और प्रतीकों को भी चेतावनी देती है जो साहित्य में जड़ जमाए बैठे हैं.

सुनो ब्राह्मण / मलखान सिंह सुनो ब्राह्मण, हमारे पसीने से बू आती है, तुम्हें। तुम, हमारे साथ आओ चमड़ा पकाएंगे दोनों मिल-बैठकर। शाम को थककर पसर जाओ धरती पर सूँघो खुद को बेटों को, बेटियों को तभी जान पाओगे तुम जीवन की गंध को बलवती होती है जो देह की गंध से।

———————-

ज्वालामुखी के मुहाने तुमने कहा — ‘मैं ईश्वर हूँ’ हमारे सिर झुका दिए गए।

तुमने कहा — ‘ब्रह्म सत्यम, जगत मिथ्या’ हमसे आकाश पुजाया गया।

तुमने कहा — ‘मैंने जो कुछ भी कहा — केवल वही सच है’

हमें अन्धा हमें बहरा हमें गूँगा बना गटर में धकेल दिया ताकि चुनौती न दे सकें तुम्हारी पाखण्डी सत्ता को।

मदान्ध ब्राह्मण धरती को नरक बनाने से पहले यह तो सोच ही लिया होता कि ज्वालामुखी के मुहाने कोई पाट सका है जो तुम पाट पाते !

—————————

आजादी वहाँ वे तीनों मिले धर्मराज ने कहा पहले से दूर हटो — तुम्हारी देह से बू आती है सड़े मैले की उसने उठाया झाड़ू मुँह पर दे मारा ।

वहाँ वे तीनों मिले धर्मराज ने कहा दूसरे से दूर बैठो — तुम्हारे हाथों से बू आती है कच्चे चमड़े की उसने निकाला चमरौधा सिर पर दे मारा

वहाँ वे तीनों मिले धर्मराज ने कहा तीसरे से नीचे बैठो — तुम्हारे बाप-दादे हमारे पुस्तैनी बेगार थे उसने उठाई लाठी पीठ को नाप दिया

अरे पाखण्डी तो मर गया ! तीनों ने पकड़ी टाँग धरती पर पटक दिया खिलखिलाकर हँसे तीनों कौली भर मिले अब वे आज़ाद थे।

——————————–

पूस का एक दिन सामने अलाव पर मेरे लोग देह सेक रहे हैं।

पास ही घुटनों तक कोट हाथ में छड़ी, मुँह में चुरट लगाए खड़ीं मूँछें बतिया रही हैं।

मूँछें गुर्रा रही हैं मूँछें मुस्किया रही हैं मूँछें मार रही हैं डींग हमारी टूटी हुई किवाड़ों से लुच्चई कर रही हैं।

शीत ढह रहा है मेरी कनपटियाँ आग–सी तप रही हैं।

मलखान जी ने अपनी जाति और अपने टोले-मुहल्लेवाले गाँव को ‘सफ़ेद हाथी’ शीर्षक कविता तथा अन्य कविताओं में याद किया है। उनकी माँ मैला कमाती थीं और यह भी लिखा है कि मेरी जोरू मैला कमाने गयी है। गाँव के अपने टोले के बारे में लिखा है कि ‘यह डोम पाड़ा है’। आप खुद सुनिए।

सफेद हाथी गाँव के दक्खिन में पोखर की पार से सटा, यह डोम पाड़ा है – जो दूर से देखने में ठेठ मेंढ़क लगता है और अन्दर घुसते ही सूअर की खुडारों में बदल जाता है।

यहाँ की कीच भरी गलियों में पसरी पीली अलसाई धूप देख मुझे हर बार लगा है कि- सूरज बीमार है या यहाँ का प्रत्येक बाशिन्दा पीलिया से ग्रस्त है। इसलिए उनके जवान चेहरों पर मौत से पहले का पीलापन और आँखों में ऊसर धरती का बौनापन हर पल पसरा रहता है। इस बदबूदार छत के नीचे जागते हुए मुझे कई बार लगा है कि मेरी बस्ती के सभी लोग अजगर के जबड़े में फंसे जि़न्दा रहने को छटपटा रहे है और मै नगर की सड़कों पर कनकौए उड़ा रहा हूँ । कभी – कभी ऐसा भी लगा है कि गाँव के चन्द चालाक लोगों ने लठैतों के बल पर बस्ती के स्त्री पुरुष और बच्चों के पैरों के साथ मेरे पैर भी सफेद हाथी की पूँछ से कस कर बाँध दिए है। मदान्ध हाथी लदमद भाग रहा है हमारे बदन गाँव की कंकरीली गलियों में घिसटते हुए लहूलूहान हो रहे हैं। हम रो रहे हैं / गिड़गिड़ा रहे है जिन्दा रहने की भीख माँग रहे हैं गाँव तमाशा देख रहा है और हाथी अपने खम्भे जैसे पैरों से हमारी पसलियाँ कुचल रहा है मवेशियों को रौद रहा है, झोपडि़याँ जला रहा है गर्भवती स्त्रियों की नाभि पर बन्दूक दाग रहा है और हमारे दूध-मुँहे बच्चों को लाल-लपलपाती लपटों में उछाल रहा है। इससे पूर्व कि यह उत्सव कोई नया मोड़ ले शाम थक चुकी है, हाथी देवालय के अहाते में आ पहुँचा है साधक शंख फूंक रहा है / साधक मजीरा बजा रहा है पुजारी मानस गा रहा है और बेदी की रज हाथी के मस्तक पर लगा रहा है। देवगण प्रसन्न हो रहे हैं कलियर भैंसे की पीठ चढ़ यमराज लाशों का निरीक्षण कर रहे हैं। शब्बीरा नमाज पढ़ रहा है देवताओं का प्रिय राजा मौत से बचे हम स्त्री-पुरूष और बच्चों को रियायतें बाँट रहा है मरे हुओं को मुआवजा दे रहा है लोकराज अमर रहे का निनाद दिशाओं में गूंज रहा है… अधेरा बढ़ता जा रहा है और हम अपनी लाशें अपने कन्धों पर टांगे संकरी बदबूदार गलियों में भागे जा रहे हैं / हाँफे जा रहे हैं अँधेरा इतना गाढ़ा है कि अपना हाथ अपने ही हाथ को पहचानने में बार-बार गच्चा खा रहा है।

मलखान सिंह का जाना दलित साहित्य के एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर का चले जाना है। उनको विनम्र श्रद्धांजलि। साहित्य जगत आपके निशान ढूंढ़ेगा।

कविता संदर्भ-  रश्मि प्रकाशन से प्रकाशित कविता संग्रह से

बसपा में बड़ा फेरबदल

मायावती (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संगठन में भारी फेरबदल करते हुये पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है. वहीं अब बसपा की ओर से लोकसभा में पार्टी के नेता अब श्याम सिंह यादव होंगे, इस जिम्मेदारी को अब तक दानिश अली निभा रहे थे. बसपा द्वारा बुधवार को जारी एक बयान में कहा गया कि बहुजन समाज पार्टी, देश व ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की पार्टी है और राज्य की प्रदेश स्तरीय बसपा संगठन की कमेटी में कुछ जरूरी तब्दीली की गई है

बयान में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य का बसपा संगठन का प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सांसद मुनकाद अली को नियुक्त किया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि इसके साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष रहे आर.एस. कुशवाहा को अब बसपा केंद्रीय इकाई का महासचिवबना दिया गया है. बयान के मुताबिक बसपा के जौनपुर के सांसद श्याम सिंह यादव को लोकसभा में नेता बनाया है जबकि रितेश पाण्डेय को लोकसभा में उप नेता नियुक्त किए गए हैं. गिरीश चन्द्र जाटव लोकसभा सांसद पार्टी के लोकसभा में मुख्य सचेतक बने रहेंगे.

इसे भी पढ़िये-जानिए, क्या है कश्मीर का ताजा हाल

यूपीः तो क्या समाजवादी पार्टी के कोर वोट बैंक पर मायावती की नजर!

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद बीएसपी प्रमुख मायावती ने भले ही एसपी से नाता तोड़ लिया हो, लेकिन अब उनकी नजर एसपी के ही कोर वोटरों पर है. लोकसभा में दानिश अली की जगह, जिस तरह से मायावती ने जौनपुर के श्याम सिंह यादव को नेता बनाया है, उससे उन्होंने यादव वोटरों में यह संदेश देने की कोशिश की है, बीएसपी का जुड़ाव यादव वोटरों के प्रति भी है.

मायावती ने लोकसभा चुनाव के बाद एसपी से नाता तोड़ते समय यह कहा भी था कि यादव वोटरों पर एसपी का होल्ड नहीं रह गया है. लिहाजा, अब वह इन वोटरों को साधने की जुगत में हैं.

लोकसभा में पास हुए अनुच्छेद 370 खत्म करने के बिल पर मायावती ने जिस तरह से भाजपा का समर्थन किया, उससे उनके बदले अंदाज का इशारा मिल ही गया था. बुधवार को जिस तरह से उन्होंने लीडरशिप में बदलाव किए हैं, उससे अब उनकी नीति साफ हो गई है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीएसपी यह समझ रही है कि फिलहाल किसी भी राजनीतिक पार्टी के पास अपने कोर वोटबैंक इतने मजबूत नहीं रह गए हैं.

ऐसे में जो भी पार्टी आगे बढ़ना चाहती है, उसे सभी जातियों और वर्गों के वोटों की जरूरत होगी. ऐसे में मायावती की पहली नजर एसपी से छिटक रहे यादव वोटरों पर है. 2014 के बाद प्रदेश में हुए हर चुनाव में यादव अपना वोट एसपी के अलावा दूसरे दलों को ट्रांसफर करते रहे हैं. भाजपा इसमें फेवरेट रही, बावजूद एसपी के पास ही बड़ा शेयर रहा है. हालांकि 2019 के चुनाव में यादव वोटरों में भाजपा ने बड़े पैमाने पर सेंधमारी की.

वहीं, एसपी, जिसका यह कोर वोटबैंक था, वह 2019 के बाद भी ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रही है. जमीन पर संघर्ष फिलहाल थम सा गया है. ऐसे में इस बात के कयास ज्यादा पुख्ता हैं कि यादव वोटरों में बिखराव अभी और होगा. लिहाजा मायावती ने चाल चल दी है. उन्होंने यादवों में संदेश साफ कर दिया है कि बीएसपी में भी उनकी सुनी जाएगी. अहम पद भी दिए जाएंगे.

जानकार मानते हैं कि अनुच्छेद 370 पर मायावती ने जिस तरह से भाजपा का साथ दिया, उससे कहीं न कहीं मायावती को डर सता रहा है कि कहीं मुसलमान उनसे न छिटके. लिहाजा जहां अनुच्छेद 370 समाप्त करने को जहां मायाने लद्दाख में बौद्ध अनुयायियों के हक की जीत बताया था, वहीं अब उन्होंने मुस्लिम प्रदेश अध्यक्ष देकर इस समीकरण को बैलेंस करने की कोशिश की है.

दानिश अली की जगह मुनकाद वेस्ट यूपी में ज्यादा प्रभावी नाम हैं. माना यह भी जा रहा है कि मायावती अपना दखल वेस्ट यूपी के मुसलमानों में ज्यादा मजबूत करना चाहती हैं. साथ ही पार्टी ने जिस तरह से लोकसभा में नेता पूर्वांचल से बनाया है, उससे यह भी मायने निकाले जा रहे हैं कि पश्चिम और पूरब के समीकरणों को भी काफी बेहतर सोच के साथ साधने की कोशिश की गई है.

मायावती यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों को लुभाने में भी कसर नहीं रखना चाहती हैं. राज्यसभा में जहां ब्राह्मण चेहरे के तौर पर सतीश चंद्र मिश्र हैं, वहीं लोकसभा में रितेश पांडेय को डिप्टी लीडर बनाकर मायावती ने साफ कर दिया है कि उनके अजेंडे से ब्राह्मण बाहर नहीं हैं. वह अपनी सोशल इंजिनियरिंग में ब्राह्मणों को अहम मान रही हैं.

Read it also-मुसलमानों-दलितों की लिंचिंग से नाराज 49 दिग्गज, PM मोदी से मांग- सख्त सजा दी जाए

राजनीति में हैं तो दाग अच्छे हैं

हिंदू शास्त्रों के अनुसार भागीरथ ने कठोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर उतारा था ताकि उनके साठ हजार पूर्वजों का तारण हो सके. गंगा जीवनदायिनी के साथ साथ मोक्ष दायिनी, मुक्ति दायिनी भी है. आज भी गंगा के प्रति लोगों की आस्था उतनी ही बनी है जितनी भागीरथ की थी. अस्थियों की राख विसर्जन आज भी आस्था की रीढ़ बनी है. गंगा में नहाने से पाप धुले या नहीं, मुक्ति मिले, या नहीं यह रहस्य है मगर भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व  चुनाव में कई दागियों, अपराधियों और गुनाहगारों  के सारे गुनाह धुल जाते हैं. कल तक जिनके ऊपर अपराधों के गंभीर मामले होते हैं जेल की सलाखों में होते हैं राजनीतिक पार्टियां उनको हाथों-हाथ पार्टी से टिकट  देकर उनके सारे गुनाहों पर पर्दा डाल देते हैं. ऐसा लगता है कि देश में योग्य और सभ्य,बुद्धिजीवी, ईमानदार, निरपराधी लोगों का अकाल पड़ गया है. बयान कड़वा और आपत्तिजनक देकर नेता बड़ी सफाई से पार्टी का बचाव करती हैं. निंदा होने पर निजी बयान कहा जाता है और पार्टी से कोई संबंध नहीं है ऐसा कहा जाता है.

 मगर जब ऐसे आरोपित और गुनाहगार और गुनाहगार नेताओं के बयान तो निजी होते हैं पर वह पार्टियों के मोहरे होते हैं. चुनाव आयोग भी इस इस पर कठोर कदम उठाने चाहिए जब पार्टी अपराधी को अपना टिकट देती है तब वह पार्टी का होता है मगर जुबान फिसलने, मर्यादा तोड़ने पर व्यक्तिगत कैसे हो जाता है?व्यक्तिगत गलती के लिए उसे पार्टी से बाहर कर देना चाहिए. राजनीति विज्ञान में लोकतंत्र की परिभाषा इस प्रकार व्यक्त की गई है “जनता का शासन जनता द्वारा जनता के लिए ” लेकिन आज के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस प्रकार की परिभाषा का विलोम होता हुआ नजर आ रहा है यूं कहा जाए कि- “जनता द्वारा पार्टी का शासन पार्टी के लिए” ही काम करता दिखाई दे रहा है जनता द्वारा सरकारें चुनी तो जा रही हैं मगर जनता का शासन जनता के लिए नहीं हो रहा है .ऐसा लोकतंत्र किस काम का? जहां व्यक्तियों की आवाजों को अनसुना कर दिया जाता है. जितनी तीव्र गति से भारतीय राजनीति में परिवर्तन हुआ है उसका स्वरूप बदल गया है उतनी तीव्र गति से राजनीति के तीव्र गति से राजनीति के लिए खाद का काम करने वाले वोटरों की जिंदगी में या उनकी हालातों में, स्थिति में परिवर्तन देखने में शायद ही आया हो. आजादी के चंद दशकों बाद ही भारतीय राजनीति प्रदूषित होने लगी थी और उस प्रदूषण का मुख्य कारण था राजनीति में अपराधियों का बढ़ता हुआ ग्राफ.

इस चिंता को  देखते हुए तथा लोकतंत्र के पवित्र मंदिर संसद में सदाचारी और ईमानदार लोगों की पहुंच हो तथा दागी प्रत्याशी हो तथा दागी प्रत्याशी संसद और राज्य विधानसभाओं में नहीं पहुंच सके नहीं पहुंच सके 25सितंबर 2018 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण पर फैसला देते हुए कहा कि संसद कानून बनाने की जिम्मेदारी ले. मगर खुद कानून बनाने वाले कानून की अवहेलना करें, उसको कुचल डाले तो फिर लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कहां होंगी? यथा धीरे-धीरे खोखली होती जाएंगे होती जाएंगे 2004 में अपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या 128 थी जो वर्ष 2009 में 162 और 2014 में यह संख्या 184 हो गई.

 चुनाव विश्लेषण संस्था एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2019 के आम चुनाव में सत्रहवीं लोकसभा के लिए चुने गए 542 सांसदों में से 233 अर्थात 43 प्रतिशत सांसद दागी छवि के हैं. एडीआर रिपोर्ट के अनुसार 159 यानी29% सांसदों के विरुद्ध हत्या, बलात्कार और अपहरण जैसे गंभीर आरोप लंबित हैं सत्रहवीं  लोकसभा में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने आपराधिक मुकदमों में फंसे गुनाहगारों को पार्टी से टिकट देने में कोई कमी नहीं की है. रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा के 303 सांसदों में 116 सांसद दागी हैं जिनके नामों के विश्लेषण में पाया गया कि शाध्वी प्रज्ञा सहित 116 सांसदों के विरुद्ध आपराधिक केस चल रहे हैं. इसी कड़ी में कांग्रेस के सांसद कुरियाकोस  पर 204 मुकदमे दर्ज हैं. 52 सांसदों में से 29 कांग्रेसी सांसद आपराधिक मामलों में घिरे हैं, बसपा के10 में से 5, जेडीयू के 16 में से 13, तृणमूल कांग्रेस के 22 में से नौ, और माकपा के तीन में से दो सांसदों के विरुद्ध विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में केस चल रहे हैं.

इतना ही नहीं बाहुबली के साथ-साथ 88% सांसद धन बलि भी हैं. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम  1951 की  धारा8 दोषी राजनेताओं को चुनाव लड़ने से रोकती है. इस नियम की धारा 8 (1)और (2) के अंतर्गत प्रावधान है कि यदि कोई संसद या विधानसभा सदस्य हत्या’ बलात्कार, अस्पृश्यता, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के उल्लंघन, धर्म भाषा या क्षेत्र के आधार पर शत्रुता पैदा पैदा करना, भारतीय संविधान का अपमान करना,प्रतिबंधित वस्तुओं का आयात या निर्यात करना, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना जैसे अपराधों में लिप्त हो तो उसे इस धारा के अंतर्गत अयोग्य माना जाएगा एवं 6 वर्ष की अवधि के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. संविधान के अनुच्छेद 102 (1) के अनुसार संसद इस मामले पर कानून बनाने के लिए बाध्य है. लेकिन कोई भी सरकारें अभी तक इस पर कानून लाने के लिए साहस नहीं कर पाई हैं आखिर क्यों? तीन तलाक के लिए सरकार ने ताबड़तोड़ कोशिशें की लगातार दो कार्यकाल में इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी मगर राजनीति में दागी और फसादी लोगों के लिए अभी तक किसी भी प्रकार का न कोई कानून बनाने की ओर पहल की और  नहीं उनको पार्टी में आने से रोका गया है.

देश को दहलाने वाली घटना जो उन्नाव में घटित हुई है उसके पीछे भी इसी प्रवृति के लोगों की छया दृष्टिगोचर होती है. कुलदीप सेंगर जो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का यूपी से विधायक है  लगभग 2 साल के बाद उसको पार्टी से तब निकाला गया जब देश की मीडिया और जन समुदाय का बहुत ज्यादा दबाव बन गया था आखिर ऐसा लगता है की राजनीति वह गंगा के समान हो गयी है  जहां कितना भी बागी ,दागी,पापी और दुष्कर्मी इंसान क्यों न हो वह संसद और विधानसभा में पहुंच जाता है तो उसके सारे दाग मिट जाते हैं इसलिए यह कहना अनुचित नहीं होगा कि “राजनीति में है तो दाग अच्छे हैं” लेकिन इन दागों को धोने के लिए न तो कोई ऐसा डिटर्जेंट ही सरकार खोज पाई है और ना ही कोई ऐसा गंगा का पवित्र जल इन पर डालने की कोशिश की है जो संविधान की धाराओं से निकलता हुआ सीधे ऐसे अपराधियों को जेल की सलाखों तक पहुंचाए.

आई. पी.  ह्यूमन

Read it also-दिल की बात- बिहार और कथित डबल इंजन

विश्व की महान लेखिका टोनी मॉरीसन का निधन

0

 ”नेल्सन मंडेला की तरह सारी उम्र अश्वेतों के लिए लड़ने वालीं 88 वर्षीय नोबल पुरस्कार विजेता महान लेखिका टोनी मॉरीसन का निधन हो गया है.अमेरिकी लेखक टोनी मॉरिसन का 88 साल की उम्र में 5 अगस्त 2019 को निधन हो गया. मॉरिसन ऐसी इकलौती अमेरिकी अफ्रीकी महिला हैं जिनको साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला. मॉरिसन ने अपने छह दशक लम्बे करियर में 11 उपन्यास, पाँच बाल-उपन्यास और दो नाटक लिखे. उनका पहला नॉवेल The Bluest Eye 1970 में प्रकाशित हुआ था, जिसने साहित्य की दुनिया में तहलका मचा दिया. उस समय वह 40 साल की थीं. इस उपन्यास में मॉरिसन ने एक अफ्रीकी-अमेरिकी महिला की कहानी कही थी.

मॉरिसन का जन्म 18 फरवरी 1931 को अमेरिका को ओहायो में हुआ था. उनके परिवार को भारी नस्लभेद का सामना करना पड़ा था. इन सब घटनाओं का उनकी जिंदगी में सीधा प्रभाव पड़ा और उनके उपन्यास अश्वेतों पर गोरों की जुल्म की दास्तान थीं. वह ताउम्र अमेरिका में काले लोगों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाती रहीं.

60 साल की उम्र तक उनके छह उपन्यास प्रकाशित हो चुके थे. इस बीच वर्ष 1993 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला. साहित्य का नोबेल पाने वाली पर पहली अश्वेत महिला बन गईं. अपने उपन्यास “बिलव्ड” (Beloved) के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. तो साल 2012 में उन्हें अमेरिका के प्रेंसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया गया. Beloved के अलावा Song of Solomon और The Bluest Eye उनके सर्वाधिक चर्चित उपन्यास हैं. मॉरिसन पेशे से प्रोफेसर थीं.

उनका कहना था कि ‘मौन मुझे लिखने के लिए प्रेरित करता है.’ स्वीडिश एकेडमी ने उनके “विजनरी फोर्स” और खासकर उसकी भाषा की बड़ी प्रशंसा की थी. वह ताउम्र अश्वेतों की मजबूत आवाज बनकर जिंदा रही. जब संपादक बनीं तो ब्लैक राइटर को खूब बढ़ाया. जब भी बोलने का मौका मिलता अमेरिकी ब्लैक के साथ होने वाले भेदभाव के बारे में खुलकर बोलतीं. चाहे भारतीय दलित हों या फिर अमेरिकी अफ्रीकी ब्लैक, दोनों से उन्हें समान सहानुभूति थी. वह अपनी तमाम रचनाओं में नस्लभेद के दर्द की दास्तां सुनाती रहीं.

मॉरीसन पुरस्कार की राशि व प्रोफेसर के रूप में मिलने वाली पूरी तनख्वाह विश्व के अलग अलग हिस्सों के अश्वेत बच्चों की शिक्षा पर खर्च करती थीं.इसी वर्ष उनके बेटे की कैंसर से मौत हो गई थीं.मॉरीसन अपना उपन्यास होम लिख रहीं थीं. लेकिन बेटे की मौत के गम के चलते वो उसे कभी पूरा नहीं कर सकीं.”

  • सुनील कुमार ‘सुमन’

T20: भारत ने 3-0 से किया इंडीज का सफाया

0

दीपक चाहर की घातक गेंदबाजी के बाद कप्तान विराट कोहली (59) और ऋषभ पंत (नाबाद 65) की शानदार पारियों के दम पर भारत ने मंगलवार देर रात खेले गए तीसरे और आखिरी टी20 मैच में वेस्टइंडीज को सात विकेट से हरा दिया. इसी के साथ भारत ने तीन मैचों की टी20 सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली. टॉस जीतकर कोहली ने गेंदबाजी चुनी थी और चाहर ने शुरुआती तीन विकेट ले विंडीज को दबाव में ला दिया.

केरन पोलार्ड ने 58 और रोवमैन पावेल ने नाबाद 32 रनों की पारी खेल विंडीज को 20 ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 146 रनों का सम्मानजनक स्कोर प्रदान किया. इस लक्ष्य को भारत ने 19.1 ओवरों में तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया. ओशाने थॉमस ने शिखर धवन (3) का विकेट ले भारत का स्कोर 10 रनों पर एक विकेट कर दिया.

फाबियान ऐलान, लोकेश राहुल (20) को 27 के कुल स्कोर पर पवेलियन भेजने में सफल रहे. अभी तक अपनी गैरजिम्मेदाराना बल्लेबाजी के लिए आलोचनाओं का शिकार हो रहे पंत ने कप्तान कोहली के साथ भारतीय पारी को आगे बढ़ाया और तीसरे विकेट के लिए 106 रनों की साझेदारी कर टीम को जीत की दहलीज पर पुहंचा दिया. कोहली ने अपनी पारी में 59 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए.

भारत को जब जीत के लिए 15 गेंदों पर 14 रनों की जरूरत थी तब कोहली थॉमसी गेंद पर इविन लुइस के हाथों लपके गए. कोहली ने अपनी पारी में 59 गेंदों का सामना करते हुए छह चौके लगाए. पंत ने फिर मनीष पांडे (नाबाद 2) के साथ मिलकर टीम को जीत दिलाई. पंत ने ही भारत के लिए विजयी छक्का मारा. पंत ने अपनी नाबाद पारी में 42 गेंदों का सामना किया और चार छक्कों के साथ चार चौके भी लगाए.

Read it also-अब अंपायर की इस गलती से नहीं होगा कोई बल्लेबाज आउट

अब अंपायर की इस गलती से नहीं होगा कोई बल्लेबाज आउट

0

क्रिकेट के मैदान पर अक्सर अंपायरों से गलती होती रहती है, जिसका खामियाजा कभी बल्लेबाजी या कभी गेंदबाजी करने वाली टीम को भुगतना पड़ता है. कई बार ऐसा होता है कि अंपायर (Umpire) गेंदबाजों के पांव की नो बॉल तक नहीं पकड़ पाते और इस एक गलती की वजह से पूरे मैच का नतीजा बदल जाता है. हालांकि अब आईसीसी (ICC) ने इस गलती पर लगाम लगाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. दरअसल आईसीसी ने टीवी अंपायरों को पांव की नो बॉल पर फैसला लेने का अधिकार देने का निर्णय लिया है. हालांकि इसे अभी वनडे और टी20 क्रिकेट में ट्रायल के तौर पर लागू किया जाएगा.

आईसीसी के जनरल मैनेजर जोफ एलरडाइस ने बताया, ‘तीसरे अंपायर को आगे का पांव पड़ने के कुछ सेकेंड के बाद फुटेज दी जाएगी. वह मैदानी अंपायर को बताएगा कि नो बॉल की गई है. इसलिए गेंद को तब तक मान्य माना जाएगा जब तक अंपायर कोई अन्य फैसला नहीं लेता.’

2016 में हुआ था इसका ट्रायल आपको बता दें इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच 2016 में हुई वनडे सीरीज में इसका ट्रायल किया गया था. इस ट्रायल के दौरान थर्ड अंपायर को फुटेज देने के लिए एक हॉकआई ऑपरेटर का उपयोग किया गया था. इस तकनीक को नो बॉल टेक्नोलॉजी भी कहा जाता है.

क्या है नो बॉल टेक्नोलॉजी? नो बॉल टेक्नोलॉजी एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए गेंदबाज के पांव पर नजर रखी जा सकेगी. गेंदबाज जब क्रीज पर अपना पांव लैंड करेगा तो उस पर थर्ड अंपायर कैमरे से नजर रखेगा. अगर वो पांव क्रीज से आगे होगा तो थर्ड अंपायर तुरंत मैदान में खड़े अंपायर को इसकी जानकारी देगा. आमतौर पर थर्ड अंपायर डीआरएस के दौरान ही गेंदबाज के पांव पर निगाह डालता है, लेकिन नो बॉल टेक्नोलॉजी के तहत ऐसा नहीं होगा.

वैसे नो बॉल टेक्नोलॉजी काफी महंगी है. एक मैच में इसके इस्तेमाल पर हजारों डॉलर का खर्च आ सकता है, इसीलिए आईसीसी इसे लागू करने में हिचकिचा रही थी. हालांकि बीसीसीआई की मांग पर अब आईसीसी इसके ट्रायल के लिए तैयार हो गई है. जल्द ही इसे इंडिया में होने वाले मैचों में इस्तेमाल किया जाएगा.

Read it also-भारत की जीत और रोहित शर्मा के रिकॉर्ड्स

घाटी में तनाव के बीच जम्मू-कश्मीर में 100 से अधिक राजनेता और कार्यकर्ता गिरफ्तार

0

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने और आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने के फैसले के बाद से ही घाटी में तनावपूर्ण शांति बरकरार है. कश्मीर घाटी में संचार-व्यवस्था ठप होने और तमाम प्रतिबंधों के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने राजनेताओं, कार्यकर्ताओं सहित 100 से अधिक लोगों को शांति के लिए खतरा होने का हवाला देते हुए गिरफ्तार किया है. इन सभी को सरकार के फैसले के बाद घाटी में शांति व्यवस्था बरकरार रखने के लिहाज से गिरफ्तार किया गया है.

बुधवार को राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य में 100 से अधिक राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को अभी तक घाटी में गिरफ्तार किया गया है. हालांकि उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने से इनकार नहीं दी. उन्होंने बताया कि ‘जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस’ के नेता सज्जाद लोन और इमरान अंसारी को भी गिरफ्तार किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि नेताओं को उनके गुप्कर निवास से कुछ मीटर की दूरी पर हरि निवास में रखा गया है. उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी में उनकी गतिविधियों से शांति एवं सौहार्द में खलल पैदा होने के डर के चलते मैजिस्ट्रेट ने उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए थे.

इंटरनेट और रेल सेवाएं अब भी बंद बता दें कि मंगलवार को राष्ट्रति द्वारा आर्टिकल 370 के कानून को हटाने की मंजूरी दिए जाने के बाद से ही कश्मीर घाटी में तनाव का वातावरण बना हुआ है. एक ओर जहां दक्षिण कश्मीर के तमाम जिलों में सख्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, वहीं इंटरनेट और रेल सेवाएं अब भी बंद ही हैं. राज्य में कानून व्यवस्था के लिहाज से सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी लगातार हालातों पर नजर बनाए हुए हैं.

बुधवार को जम्मू स्थित राज्य सचिवालय की एक विडियो क्लिप में इमारत पर दो झंडे लगे नजर आए. इमारत पर जम्मू-कश्मीर का झंडा और तिरंगा साथ लहराते नजर आए, जिसके बाद इसकी एक क्लिप भी सोशल साइट्स पर शेयर की गई. माना जा रहा है कि जल्द ही राज्य की सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के झंडे को इमारत से हटा दिया जाएगा और अब से यहां पर तिरंगा लहराने की ही व्यवस्था की जाएगी.

Read it also-क्या है कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मायने

सुषमा ने मंगलवार को ही हरीश साल्वे से की थी बातचीत और कहा…

0

नई दिल्ली। सुषमा स्वराज ने मंगलवार को अपने निधन से महज चंद मिनट पहले ही इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण जाधव का केस जीतने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से बातचीत की थी. उनसे आखिरी बातचीत को याद कर साल्वे काफी भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि सुषमा जी ने उन्हें कल यानी बुधवार को मिलने के लिए बुलाया था और कहा था कि अपनी 1 रुपये की फीस आकर ले लो.

बता दें कि पूर्व सॉलिसिटर जनरल साल्वे ने जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे कुलभूषण जाधव केस को ICJ में लड़ने के लिए महज रुपये की प्रतीकात्मक फी ली थी, जबकि पाकिस्तान ने 20 करोड़ रुपये खर्च किए थे. ICJ में साल्वे की दलीलों से भारत के पक्ष में फैसला आया तो पाकिस्तान को जाधव तक कंसुलर ऐक्सेस देने का आदेश पारित हुआ.

हरीश साल्वे ने हमारे सहयोगी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में कहा कि उनकी मंगलवार को ही रात 8 बजकर 50 मिनट पर सुषमा स्वराज से बातचीत हुई थी. उन्होंने याद किया, ‘आज (सोमवार) 8:50 पर मैंने उन्हें फोन किया था. अब जब यह खबर सुना तो मैं सन्न रह गया. बहुत ही भावुक बातचीत हुई. उन्होंने मुझे कहा कि तुम कल 6 बजे आओ अपना एक रुपये का फीस लेने के लिए.’ चैनल से बातचीत में साल्वे काफी भावुक हो गए. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं सूझ रहा कि मैं क्या बोलूं. वह कद्दावर और ताकतवर मंत्री थीं. मेरे लिए उनका निधन एक बड़ी बहन के खो जाने जैसा है.’

Read it also-सैलरी में कटौती से परेशान चंद्रयान भेजने वाले वैज्ञानिक

भारतीय डाक में 10वीं पास के लिए 10,066 पदों पर वैकेंसी

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए भारतीय डाक  ने बंपर वैकेंसी निकाली हैं. भारतीय डाक ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) के पदों पर भर्ती करेगा. भारतीय डाक द्वारा असम, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल और पंजाब में कुल 10066 पदों पर भर्तियां की जाएगी. इन पदों पर आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. आवेदन करने की आखिरी तारीख 4 सितंबर है. ग्रामीण डाक सेवक को डाक टिकटों और स्टेशनरी की बिक्री, मेल की डिलीवरी और पोस्टमास्टर/ सब पोस्टमास्टर द्वारा दिए गए अन्य कार्य को पूरा करना होगा. इस नौकरी में भारतीय डाक भुगतान बैंक (IPPB) का काम भी शामिल है.

पद का नाम ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस)

कुल पदों की संख्या 10,066 पद

योग्यता इन पदों पर 10वीं पास आवेदन कर सकते हैं. उम्मीदवार 10वीं तक स्थानीय भाषा पढ़ा होना चाहिए.

आयु सीमा आवेदक की आयु 18-40 वर्ष के बीच होनी चाहिए. ओबीसी श्रेणी के लोगों को अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष और एससी और एसटी वर्ग के लोगों को 5 साल की छूट दी जाएगी. साथ ही उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त कम्प्यूटरप्रशिक्षण संस्थान से कम से कम 60 दिनों का कम्प्यूटर ट्रेंनिंग सर्टिफिकेट होना चाहिए. केंद्र सरकार/ राज्य सरकार/ विश्वविद्यालय/ बोर्ड आदि से प्राप्त प्रमाण पत्र भी स्वीकार किए जाएंगे.

ऐसे करें आवेदन इच्छुक लोग www.appost.in/gdsonline/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. ऑफिशियल नोटिफिकेशन भी इस वेबसाइट पर जाकर चेक किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें-UGC ने इन 23 यूनिवर्सिटी को फर्जी घोषित किया

सुषमा स्वराज के अंतिम दर्शन को भाजपा दफ्तर में उमड़े कार्यकर्ता, मंगलवार देर रात निधन

0

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में एम्स में निधन हो गया. मंगलवार रात दिल का दौरा पड़ने के बाद बेहद नाजुक हालत में उन्हें रात 9 बजे एम्स लाया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके घर पहुंच श्रद्धांजलि दी. BJP मुख्यालय में भी उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया.

सुषमा का जन्म 14 फरवरी 1952 को हुआ था. उनका जन्म अंबाला कैंट, हरियाणा में हुआ था. सुषमा स्वराज हरदेव शर्मा और लक्ष्मी देवी की बेटी थीं. सुषमा स्वराज के माता-पिता पाकिस्तान के लाहौर के धर्मपुर से थे. बाद में वे हरियाणा में आकर बस गए थे. पाकिस्तान के अपने आखिरी दौरे में सुषमा धर्मपुर भी गई थीं. सुषमा ने अंबाला कैंटोनमेंट के सनातन धर्म कॉलेज से शुरुआती शिक्षा पूरी की. उन्होंने संस्कृत और राजनीति विज्ञान में बैचलर डिग्री ली थी, उसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से कानून की पढ़ाई की थी. 1973 में सुषमा स्वराज ने सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की. वह बड़ौदा डायनामाइट मामले (1975-77) में स्वराज कौशल के साथ जॉर्ज फर्नांडीस की लीगल टीम का हिस्सा थीं. सुषमा स्वराज ने 13 जुलाई 1975 को स्वराज कौशल के साथ शादी की थी.

1970 में सुषमा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हुई थीं और यहीं से उनका सियासी सफर शुरू हुआ था. सुषमा स्वराज के पिता भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख सदस्य थे. 1977 में जनता पार्टी की सरकार में 25 वर्षीय सुषमा स्वराज सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बन गई थीं. 27 वर्ष की उम्र में सुषमा जनता पार्टी की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं. वह किसी राजनीतिक पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता भी बनीं. इसके अलावा, बीजेपी की पहली महिला मुख्यमंत्री, विपक्ष की पहली महिला महासचिव, केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, प्रवक्ता और विदेश मंत्री बनने का भी खिताब उनके नाम ही है. 1998 में (13 अक्टूबर-3 दिसंबर) तक काफी कम समय के लिए वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

अयोध्या विवाद में जब CJI ने पूछा- रामजन्मभूमि में एंट्री कहां से होती है?

अयोध्या में रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर 6 अगस्त से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हो गई है. मंगलवार को पहले दिन निर्मोही अखाड़े ने अपनी बात रखी. इस दौरान निर्मोही अखाड़े ने वहां पर पूजा का अधिकार मांगा, इसी बीच चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने निर्मोही अखाड़े से पूछ लिया कि रामजन्मभूमि में एंट्री कहां से होती है?

दरअसल, इस मसले पर जब सुनवाई शुरू हुई तो सबसे पहले निर्मोही अखाड़े ने वहां पर अपनी बात रखनी शुरू की. निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि उन्हें वहां पूजा का अधिकार मिलना चाहिए. लेकिन तभी चीफ जस्टिस ने इस मामले से जुड़े कुछ बेसिक सवाल पूछने शुरू किए, CJI के साथ-साथ जस्टिस नजीर ने भी निर्मोही अखाड़े से कहा कि आप सबसे पहले अपनी बात रख रहे हैं, इसलिए पूरे मामले को शुरू से बताएं.

निर्मोही अखाड़े ने अदालत से कहा कि हमसे पूजा का अधिकार छीना गया है. सुप्रीम कोर्ट ने बहस के दौरान निर्मोही अखाड़े से पूछा कि क्या कोर्टयार्ड के बाहर सीता रसोई है? इसके अलावा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमारे सामने वहां के स्ट्रक्चर पर स्थिति साफ करें.

चीफ जस्टिस ने पूछा कि वहां पर एंट्री कहां से होती है? सीता रसोई से या फिर हनुमान द्वार से? इसके अलावा CJI ने पूछा कि निर्मोही अखाड़ा कैसे रजिस्टर हुआ?

आपको बता दें कि निर्मोही अखाड़ा जब अपनी बात अदालत में रख रहा था, उसी समय मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने उन्हें टोक दिया. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आपको आपका समय मिलेगा, बीच में ना टोकें और कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखें.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मसले पर पहले मध्यस्थता करने का वक्त दिया था, लेकिन मध्यस्थता से इस मसले का हल नहीं निकल पाया. जिसके बाद अदालत ने इस पर रोजाना सुनवाई का आदेश दिया था.

Read it also-खेत की बाड़ उखाड़ रहे थे दबंग, विरोध करने पर दलित महिला को जिंदा जलाया

जानिए, क्या है कश्मीर का ताजा हाल

जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35A खत्म होने के बाद पूरी दुनिया की नजर कश्मीर पर है. 5 अगस्त को भारत सरकार द्वारा इस मामले पर बड़ा फैसला लेने के बाद हर कोई जानना चाहता है कि आगे क्या होगा. हम आपको इस खबर में बताएंगे कश्मीर का ताजा हाल. साथ ही यह भी बताएंगे कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर क्या हो सकता है.

  • आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
  • कश्मीर में कर्फ्यू लगा दिया गया है, जबकि जम्मू में धारा 144 लागू है.
  • पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अबदुल्ला के गिरफ्तारी की खबर आ रही है. पहले उनको नजरबंद किया गया था.
  • अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर घाटी के पास तीन महीने से ज्यादा का चावल, गेहूं, मीट, अंडे और ईंधन है. प्रदेश में किसी भी तरह के खाने की कमी नहीं होगी.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल खुद श्रीनगर में मौजूद हैं और हालात पर नजर रखे हुए है. कहा जा रहा है कि अजित डोभाल केंद्र के फैसले को सही तरीके से लागू होने तक वहीं रहेंगे.
  • संसद में इस बिल को पेश करने और फिर इसे पारित करा लेने के बाद गृहमंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय कश्मीर दौरे पर जाने की खबर है. अमित शाह संसद का सत्र खत्म होने के बाद घाटी का दौरा करेंगे.
  • कश्मीर घाटी के नेता इस बिल को असंवैधानिक बताकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं. उनका तर्क है कि संविधान में आर्टिकल 370 को खत्म करने के लिए कुछ विशिष्ट प्रावधान तय हैं और सरकार ने इसकी अनदेखी की है.

आम लोगों की बात करें तो देश के आम नागरिकों में सरकार के इस कदम से उत्साह है. अनुच्छेद 370 को रद्द करना सही है या गलत इस बहस से इतर ज्यादातर लोग सरकार के फैसले के साथ दिख रहे हैं. सोशल मीडिया के जरिए लोग अपनी प्रतिक्रियाएं जारी कर रहे हैं, जिससे साफ पता चल रहा है कि लोगों के बीच इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है. इससे पहले गृहमंत्री द्वारा संसद में इस बिल के पेश करने के बाद बहुजन समाज पार्टी ने इस फैसले का समर्थन किया. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले का स्वागत किया है.

हालांकि सरकार की नजर जम्मू कश्मीर में हालात पर बनी हुई है. देखना यह होगा कि जब जम्मू कश्मीर में कर्फ्यू में ढील होगी और वहां के आम लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू होगी, तब आम कश्मीरी इस फैसले को लेकर क्या कहते हैं.

Read it also-वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को रैमॉन मैग्सेसे अवार्ड

क्या है कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मायने

0

जम्मू कश्मीर को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा कर दी है. आज 5 अगस्त को राज्य सभा में अपने एक बयान में अमित शाह ने भारी हंगामे के बीच अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश कर दिया. हालांकि गृह मंत्री ने अपनी घोषणा में अनुच्छेद 370 को पूरी तरह हटाने की बजाय भाग (1) को कायम रखा है. सरकार के नए फैसले के मुताबिक जम्मू कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा. इसके साथ ही सरकार ने लद्दाख को भी जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है. लद्दाख भी अब अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा.

जाहिर है कि यह सरकार का एक बड़ा फैसला है और इस फैसले के बाद तमाम बहस शुरू हो गई है. इस खबर में हम आपको बताएंगे अनुच्छेद 370 से जुड़े तमाम सवालों के जवाब. हम आपको बताएंगे वो इतिहास जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर अब तक तमाम अन्य राज्यों से अलग था और उसको विशेष राज्य का दर्जा मिला था.

सबसे पहले बात अनुच्छेद 370 की. आखिर अनुच्छेद 370 है क्या, जिसको लेकर इतना बवाल मचा है. और यह जम्मू कश्मीर को देश का हिस्सा होने के बावजूद देश से अलग कैसे करता है.

दरअसल गोपालस्वामी आयंगर ने अनुच्छेद 306-ए का प्रारूप पेश किया था. बाद में यही अनुच्छेद 370 बनी. इस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से अलग अधिकार हासिल हुआ. 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई. नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का काम पूरा हुआ और 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया.

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू होने के बाद यहां कई चीजें भारत के अन्य राज्यों से अलग हो गई. एक नजर इस पर भी डालते हैं-

Ø अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है. इसके मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है. इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है.

Ø संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत 35A जोड़ा गया था जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर के लोगों को दोहरी नागरिकता हासिल होती थी.

Ø अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान चलता है.

Ø इसके कारण कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है, जबकि अन्य राज्यों में 5 साल का होता है.

Ø इसके कारण भारतीय संसद के पास जम्मू-कश्मीर को लेकर कानून बनाने के अधिकार बहुत सीमित हैं.

Ø अनुच्छेद 370 के कारण संसद में पास कानून जम्मू कश्मीर में तुरंत लागू नहीं होते हैं. शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, मनी लांड्रिंग विरोधी कानून, कालाधन विरोधी कानून और भ्रष्टाचार विरोधी कानून कश्मीर में लागू नहीं है. इससे यहां ना तो आरक्षण मिलता है, ना ही न्यूनतम वेतन का कानून लागू होता है.

Ø इस अनुच्छेद के कारण जम्मू-कश्मीर पर संविधान का अनुच्छेद 356 लागू नहीं होता है. जिस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था.

Ø जम्मू-कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते थे.

Ø जम्मू-कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू होता था.

Ø जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी.

Ø जम्मू-कश्मीर में भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं था. और यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी मान्य नहीं होते थे.

Ø अनुच्छेद 370 के चलते कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी.

अब हम इस सवाल पर आते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब क्या बदल जाएगा

Ø अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब कश्मीर में अलग झंडा नहीं, बल्कि भारतीय तिरंगा फहराएगा.

Ø अब कश्मीर में अलग संविधान नहीं होगा, बल्कि जो संविधान पूरे देश के लिए वही कश्मीर के लिए भी.

Ø अब दोहरी नागरिकता नहीं होगी.

Ø अनुच्छेद 370 हटने के बाद विधानसभा का कार्यकाल 6 साल की बजाय अन्य राज्यों की तरह 5 साल का होगा.

Ø कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब कश्मीर में कोई भी जमीन खरीद सकेगा.

अनुच्छेद 370 को हटाने पर जिस तरह से बवाल हो रहा है, ऐसे में यह देखना होगा कि क्या यह आर्टिकल स्थायी था और इसे हटाया नहीं जा सकता था? असल में ऐसा नहीं है.

 
  •  Article 370 को हटाने को लेकर संविधान में दो बातें कहीं गई है. पहली बात ये है कि अनुच्छेद 370 को जम्मू कश्मीर विधानसभा की सहमति से संसद हटा सकती है, जबकि दूसरा प्रावधान है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद दो तिहाई बहुमत से इसको समाप्त कर सकती है.
  •  Article 370 और Article 35A को लेकर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 पूरी अस्थायी है और इस बात का जिक्र अनुच्छेद में ही किया गया है. सुभाष कश्यप के मुताबिक अनुच्छेद 368 संसद को संविधान के किसी भी अनुच्छेद में संशोधन करने या उसको हटाने का अधिकार देती है. ये ही अनुच्छेद 370 के बारे में कई गुत्थियां सुलझाता है.

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा क्यों मिला और अनुच्छेद 370 अस्तित्व में कैसे आया. क्योंकि बिना उस इतिहास को जाने बिना इस पूरे मामले पर राय बनाना आसान नहीं है. इसके लिए हम आपको इतिहास में ले चलते हैं.

तीन जून, 1947 को भारत के विभाजन की घोषणा के समय तमाम राजे-रजवाड़े यह फैसला ले रहे थे कि उन्हें किसके साथ जाना है. उन्हें यह चुनना था कि वह भारत के साथ बने रहना चाहते हैं या फिर भारत से अलग हुए हिस्से पाकिस्तान के साथ जाना चाहते हैं.

उस वक़्त जम्मू-कश्मीर दुविधा में था. 12 अगस्त 1947 को जम्मू-कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने भारत और पाकिस्तान के साथ ‘स्टैंड्सस्टिल एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर किया. इस एग्रीमेंट के मुताबिक महाराजा हरि सिंह ने निर्णय किया कि जम्मू कश्मीर न भारत में समाहित होगा और न ही पाकिस्तान में, बल्कि जम्मू-कश्मीर स्वतंत्र रहेगा. दोनों पक्षों ने इस समझौते को मान लिया लेकिन पाकिस्तान ने इसका सम्मान नहीं किया और उसने कश्मीर पर हमला कर दिया. पाकिस्तान में जबरन शामिल किए जाने से बचने के लिए महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को ‘इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर किया.

इसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा होगा लेकिन उसे ख़ास स्वायत्तता मिलेगी. इसमें साफ़ कहा गया है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के लिए केवल रक्षा, विदेशी मामलों और संचार माध्यमों को लेकर ही नियम बना सकती है.अनुच्छेद 35-ए 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के बाद आया. यह ‘इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ की अगली कड़ी थी. ‘इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के कारण भारत सरकार को जम्मू-कश्मीर में किसी भी तरह के हस्तक्षेप के लिए बहुत ही सीमित अधिकार मिले थे.

कश्मीरियों के साथ-साथ भारत के तमाम उदारवादी बुद्धिजीवी कहते हैं कि चूंकि जम्मू-कश्मीर भारत में इसी शर्त पर आया था इसलिेए इसे मौलिक अधिकार और संविधान की बुनियादी संरचना का हवाला देकर चुनौती नहीं दी जा सकती है. उनका मानना है कि यह भारत के संविधान का हिस्सा है कि जम्मू-कश्मीर में भारत की सीमित पहुंच होगी.

उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर का भारत में पूरी तरह से कभी विलय नहीं हुआ और यह अर्द्ध-संप्रभु स्टेट है. यह भारत के बाक़ी राज्यों की तरह नहीं है. अनुच्छेद 35-ए ‘इन्स्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ का पालन करता है और इस बात की गारंटी देता है कि जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता बाधित नहीं की जाएगी.

जबकि दूसरा पक्ष जिसमें भाजपा भी शामिल है, का मानना है कि अनुच्छेद 35-ए को संविधान में जिस तरह से जोड़ा गया वो प्रक्रिया के तहत नहीं था. संविधान में अनुच्छेद 35-ए को जोड़ने के लिए संसद से क़ानून पास कर संविधान संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि तात्कालिक राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का यह फैसला विवादित होने की बात कही जाती है. इसी को आधार बनाकर गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा कर दी है और अब जम्मू कश्मीर केंद्र शासित राज्य होगा.

हालांकि जैसा कि हमने खबर की शुरुआत में ही बताया था कि अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है बल्कि गृहमंत्री ने अपनी घोषणा में कहा है कि अनुच्छेद 370 का खंड एक मान्य होगा. दरअसल अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है. जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई प्रावधान है; जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है. गृह मंत्री के बयान के अनुसार अनुच्छेद 370 (2) और (3) को ही हटाया गया है, जबकि 370(1) अब भी कायम है. 370(1) के प्रावधान के मुताबिक जम्मू कश्मीर सरकार से सलाह करके राष्ट्रपति के आदेश द्वारा संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू किया जा सकता है. जबकि 370 (3) में प्रावधान था कि 370 को बदलने के लिए जम्मू और कश्मीर संविधान सभा की सहमति चाहिए. अब चूंकि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू है और अधिकार राज्यपाल के हाथ में है ऐसे में राष्ट्रपति आसानी से राज्यपाल के सलाह से जम्मू कश्मीर में संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को लागू कर सकती है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 35A के बारे में यह तय नहीं है कि वह खुद खत्म हो जाएगा या फिर उसके लिए संशोधन करना पड़ेगा. अनुच्छेद 370 को लेकर सरकार का फैसला कश्मीर और देश के लिए सही होगा या गलत यह तो आने वाला वक्त बताएगा.

Read it also-गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफारिश

भारत की जीत और रोहित शर्मा के रिकॉर्ड्स

0

नई दिल्ली। कप्तान विराट कोहली से अनबन की खबरों से ‘बेखबर’ उप कप्तान रोहित शर्मा वने अपनी शानदार फॉर्म बरकरार रखी है. भारत के इस स्टार ओपनर ने रविवार को वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में शानदार अर्धशतक बनाया. इसके साथ ही उन्होंने तीन विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए. रोहित शर्मा के नाम टी20 क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी है. वे अब क्रिकेट के इस सबसे छोटे फॉर्मेट में सबसे अधिक छक्के लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए हैं.

भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 क्रिकेट का यह मुकाबला अमेरिकी शहर लॉडरहिल में खेला जा रहा है. भारत ने दूसरे मैच में टॉस जीतकर पहले बैटिंग की. रोहित शर्मा और शिखर धवन ने 67 रन जोड़कर भारत को बेहतरीन शुरुआत दी. धवन 23 रन बनाकर आउट हुए.

क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा रोहित शर्मा ने इस मैच में 51 गेंदों पर 67 रन बनाए. भारतीय बल्लेबाज ने अपनी इस पारी में तीन छक्के जमाए. इसके साथ ही उन्होंने टी20 क्रिकेट में अपने छक्कों की संख्या 107 पहुंचा दी. वे अब टी20 क्रिकेट में सबसे अधिक छक्के लगाने के मामले में क्रिस गेल से आगे निकल गए हैं. वेस्टइंडीज के क्रिस गेल (Chris Gayle) ने 58 मैचों में 105 छक्के लगाए हैं. रोहित ने 96 मैचों में 107 छक्के लगाए हैं.

रोहित शर्मा की 17वीं फिफ्टी रोहित शर्मा ने इस मैच में 40 गेंद पर अर्धशतक बनाया. यह रोहित का टी20 क्रिकेट में 17वां अर्धशतक है. वे चार शतक भी लगा चुके हैं. इसके साथ ही वे 50 से अधिक रन की पारी खेलने के मामले में विराट कोहली से आगे निकल गए हैं. रोहित शर्मा की अब 50 रन से अधिक की 21 पारियां हैं. विराट कोहली ऐसी 20 पारियां खेल चुके हैं.

2400 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज रोहित शर्मा टी20 क्रिकेट में पहले ही सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज थे. उन्होंने इस मैच में अपने रनों की संख्या 2400 से अधिक पहुंचा दी है. वे यह आंकड़ा छूने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं. उन्होंने 96 मैचों की 88 पारियों में 32.72 की औसत से 2422 रन बनाए हैं.

Read it also-विराट व रोहित में वर्ल्ड कप के दौरान थी तनातनी

गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफारिश

0

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफारिश कर दी है। राज्य सभा में अपने एक बयान में अमित शाह ने भारी हंगामे के बीच संकल्प पेश करते हुए यह बात कही. शाह के इस बयान के बाद राज्यसभा में जमकर हंगामा शुरू हो गया. शाह ने कहा कि 370 के सभी खंड राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू नहीं होंगे.

सरकार ने कहा है कि जम्मू कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा. इसके साथ ही सरकार ने लद्दाख को भी जम्मू-कश्मी से अलग कर दिया गया है. लद्दाख अब अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा. सरकार ने फैसला किया है कि अब अनुच्छेद 370 का सिर्फ खंड एक रहेगा. सरकार के इस फैसले के बाद कश्मीर अब अति विशेष राज्य नहीं रहेगा.

इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों फारुख अब्दुल्ला, उमर अबदुल्ला और महबूबा मुफ्ती को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है. इसके बाद से ही अंदेशा जताया जा रहा था कि सरकार जम्मू कश्मीर को लेकर बड़ा फैसला करने वाली है. इस फैसले के पहले ही सरकार ने कश्मीर के हालात को काबू में रखने के लिए सुरक्षा बलों की कई कंपनियों को पहले ही कश्मीर रवाना किया जा चुका था.

भारतीय सैनिकों ने घुसपैठियों को किया ढेर, पाकिस्तान से बोले शव ले जाओ

0

जम्मू। भारतीय सेना ने एक बार फिर से भारत में घुसने की घुसपैठियों की कोशिश को नाकाम कर दिया. सेना ने जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में बॉर्डर एक्शन टीम की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया. इस दौरान दोनों ओर से जबरदस्त मुठभेड़ हुई, जिसमें भारतीय सेना पाकिस्तानी सेना के तकरीबन आधा दर्जन BAT कमांडो/आतंकियों को मार गिराया. इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को मारे गए आतंकियों का शव ले जाने का प्रस्ताव भेजा है. भारतीय सेना ने यह भी कहा कि शवों को ले जाने के लिए पाकिस्तानी सेना को सफेद झंडे के साथ आना होगा. हालांकि इस घटना से खार खाए पाकिस्तान की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. भारतीय सेना ने घुसपैठियों के शव की तस्वीर भी जारी की थी.

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को रैमॉन मैग्सेसे अवार्ड

नई दिल्ली। पत्रकारिता जगत में अपने अलग अंदाज के लिए आम लोगों में लोकप्रिय रवीश कुमार को वर्ष 2019 का रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रवीश एनडीटीवी इंडिया के मैनेजिंग एडिटर है. वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को ये सम्मान हिंदी टीवी पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए मिला है. ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है. इससे पहले रवीश कुमार को पत्रकारिता का प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवार्ड भी मिल चुका है।
पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रैमॉन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन ने इस संबंध में कहा, “रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह पुरस्कार मिल चुका है.
बता दें कि रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

आंगनवाड़ी में महिला पर्यवेक्षक के 3034 पदों पर निकली वैकेंसी, ऐसे करें आवेदन

समाज कल्याण विभाग (SWD) बिहार ने एकीकृत बाल विकास सेवा प्रोग्राम के तरह आंगनवाड़ी में महिला पर्यवेक्षक (लेडी सुपरवाइजर) के पदों पर बंपर वैकेंसी निकाली हैं. भर्ती कुल 3034 पदों पर होनी है. इन पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 29 जुलाई 2019 को शुरू हुई. आवेजन करने की आखिरी तारीख 5 अगस्त 2019 है. इस वैकेंसी के माध्यम से बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी निरीक्षण हेतु सुपरवाइजर की भर्ती की जाएगी अगर आप इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं तो नीचे दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ने के बाद ही अप्लाई करें.

   पद का नाम                                    कुल पदों की संख्या महिला पर्यवेक्षक                                    3034 पद

महत्वपूर्ण तारीख

  • ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तारीख- 29 जुलाई 2019
  • ऑनलाइन आवेदन बंद होने की तारीख- 5 अगस्त 2019

योग्यता

  • किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया हो.

चयन प्रक्रिया

  • उम्मीदवारों का चयन चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाएगा.

सैलरी

  • 12,000 रुपए प्रति माह

ऐसे करें आवेदन:- इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विस (ICDS) की आधिकारिक वेबसाइट fts.bih.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

Noida Metro में निकली भर्तियां

बीजेपी ने आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता

भारतीय जनता पार्टी ने उन्नाव रेप केस के आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निकाल दिया है. इससे पहले कुलदीप सिंह को बीजेपी ने निलंबित किया था लेकिन रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे के बाद विधायक सेंगर को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया है.

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की चाची का अंतिम संस्कार बुधवार को शुक्लागंज गंगाघाट में किया गया. पीड़िता के चाचा ने मुखाग्नि दी. इस दौरान जिला प्रशासन का पूरा अमला मौजूद रहा. इसके अलावा पीड़िता का पूरा परिवार गंगाघाट पर मौजूद रहा. चिता में आग लगते ही पुलिस ने चाचा को ले चलने का दबाव बनाया. इस पर पीड़िता के चाचा बिफर पड़े और पूरी चिता जलने के बाद ही जाने का आग्रह किया. मौके पर भारी बल के साथ पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी मौजूद थे. पुलिस ने घाट पर आए अन्य लोगों को शवों की अंत्येष्टि से फिलहाल रोक रखा था.

पीड़िता के चाचा ने घर वालों को हिम्मत बंधाई और कहा, “इस लड़ाई में हम पूरी मजबूती के साथ खड़े हैं. न्याय की लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे. विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सभी आरोपितों को सजा दिलाकर ही दम लेंगे.”

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की सड़क दुर्घटना की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने रायबरेली पहुंच कर जांच में पाया कि पीड़िता की कार से टकराने वाला ट्रक 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रहा था, वहीं स्विफ्ट डिजायर कार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा की रफ्तार से चल रही थी. दुर्घटना में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी और पीड़िता और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

Read it also-भाजपा नेता पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली लड़की को ट्रक ने मारी टक्कर