भारतीय ऑटो सेक्टर में मंदी की आहट, दो दशकों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

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सिआम वाहन बनाने वाली कंपनियों की संस्था है. उसकी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस साल जुलाई महीने में वाहनों की बिक्री में पिछले साल की तुलना में 18.71% की गिरावट दर्ज की गई है. साथ ही सवारी वाहनों की बिक्री में पिछले साल की तुलना में जुलाई में 30.98% की गिरावट दर्ज की गई है. ये गिरावट दो और अधिक पहिया वाले सभी तरह के वाहनों में देखी गई है. इस साल जुलाई महीने में 18,25,148 गाड़ियां बिकीं जबकि पिछली साल यह संख्या 22,45,223 थी. भारत के लिहाज से देखें तो गिरावट आर्थिक मंदी की ओर इशारा कर रही है क्योंकि ऑटो सेक्टर भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का लगभग आधा हिस्सा है.

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार के सामने अर्थव्यवस्था की मंदी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. सिआम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर के मुताबिक आंकड़े बताते हैं कि इस इंडस्ट्री को सरकार से तुरंत एक राहत पैकेज की जरूरत है. अगर सरकार ने कुछ कदम नहीं उठाए तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

माथुर कहते हैं, “पिछली बार ऐसा संकट दिसंबर, 2000 में देखा गया था. पिछले 2-3 महीने में कम से कम 15 हजार अस्थायी कर्मचारियों की नौकरियां गई हैं. अब लाखों नौकरियां जाने की कगार पर हैं. हाल में करीब 300 डीलरों ने अपने शोरूम बंद कर दिए हैं और कई बंद करने की कगार पर हैं. इस सबके होने से नौकरियों पर संकट पैदा होगा.”

वाहनों की गिरती बिक्री के बीच वाहन निर्माता कंपनियों ने अपने वाहनों को बेचने के लिए बड़े डिस्काउंट देना शुरू किया है. ऐसे में जानकारों के मुताबिक यह वाहन खरीदने के लिए खरीददारों के पास सबसे उपयुक्त समय है. ये डिस्काउंट इतना है कि वाहनों की बिक्री बढ़ाने के लिए अगर सरकार जीएसटी में भी कटौती करती है तो भी कीमतों में ज्यादा अंतर नहीं आएगा क्योंकि कीमतें बहुत नीचे पहुंच चुकी हैं. जीएसटी में कटौती करने पर अपना मुनाफा बचाने के लिए कंपनियां डिस्काउंट कम करेंगी.

इस कमी के पीछे एक बड़ा कारण अगले साल से बीएस-6 वाहन मानकों का लागू होना भी है. 31 मार्च 2020 के बाद बीएस-4 वाहनों की बिक्री पर रोक लग जाएगी. इसका मतलब अगर तब तक ये वाहन नहीं बिके तो ये सब कबाड़ हो जाएंगे. यही वजह है कि मारुति, ह्युंडई और होंडा जैसी बड़ी कार निर्माता कंपनियां अपनी कारों पर 50 हजार रुपये से ज्यादा की छूट दे रही हैं. एक कार पर डीलर कमीशन करीब तीन से छह प्रतिशत होता है. लेकिन इस गिरावट की वजह से डीलरों ने भी अपना कमीशन छोड़ नेट कीमत पर वाहनों को बेचना शुरू किया है.

आर्थिक मंदी की खबरों के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कई अखबारों में छपी खबरों को अपने ट्वीट में दिखाया और सरकार से जवाब मांगा. अखबारों की इन रिपोर्टों में नोटबंदी से 1 करोड़ 10 लाख लोगों की नौकरी जाना, ऑटो सेक्टर में गिरावट से नौकरियां जाना, पढ़े-लिखे लोगों में बेरोजगारी बढ़ने जैसी खबरें हैं.

इससे पहले एनएसएसओ के आंकड़े के मुताबिक 1993-94 के बाद पहली बार कामकाजी पुरुषों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. आंकड़े बताते हैं कि भारत में फिलहाल 28.6 करोड़ कामकाजी पुरुष हैं. 1993-94 में यह संख्या 21.9 करोड़ थी. 2011-12 में यह संख्या बढ़कर 30.4 करोड़ पहुंच गई. लेकिन अब यह संख्या घटकर 28.6 करोड़ रह गई है. इस आंकड़े का मतलब यही है कि भारत में पिछले कुछ सालों में नौकरियों में कमी आई है.

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भीम आर्मी ने बनाया अपना स्टूडेंट विंग, लड़ेंगे छात्र संघ चुनाव

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उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में नया आगाज हुआ है. भीम आर्मी ने अपना स्टूडेंट विंग बनाया है. लखनऊ में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने यह ऐलान करते हुए कहा कि भीम आर्मी के स्टूडेंट विंग का नाम भीम आर्मी स्टूडेंट फेडरेशन (बीएएसएफ) होगा. यह संगठन कई विश्वविद्यालयों में छात्र संघ का चुनाव भी लड़ेगा.

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि छात्रसंघ के जरिये एससी/एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक युवाओं में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना है. उन्होंने कहा, “युवा देश का भविष्य हैं और हमें उन्हें सशक्त बनाने की जरूरत है.”

चंद्रशेखर ने कहा कि इन वर्गों के छात्रों से ज्यादा फीस वसूलने के लिए कहा जा रहा है. इसके अलावा उन्हें परिसर में भी प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. उन्होंने कहा, “बीएएसएफ युवाओं को अनुसरण करने के बजाय नेता बनने के लिए तैयार करेगा. साथ ही यह राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों को भी बताएगा.”

चंद्रशेखर ने कहा कि लखनऊ के बाद बीएएसएफ को पुणे, महाराष्ट्र सहित अन्य सभी राज्यों में लांच किया जाएगा.

एक सवाल का जवाब देते हुए भीम आर्मी के नेता ने कहा कि पहले दलित छात्रों के लिए 630 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई थी जो अब घटकर 283 करोड़ रुपये हो गई है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में युवा हालात को बदलने की भूमिका के तौर पर उभरेंगे.

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चांद की कक्षा में पहुंचा Chandrayaan-2, वैज्ञानिकों ने 90% स्पीड घटाकर पाई सफलता

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज यानी मंगलवार को Chandrayaan-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करा दिया है. इसरो वैज्ञानिकों ने सुबह 8.30 से 9.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा LBN#1 में प्रवेश कराया. अब चंद्रयान-2, 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा. इस दौरान चंद्रयान की गति को 10.98 किमी प्रति सेकंड से घटाकर करीब 1.98 किमी प्रति सेकंड किया गया.

चंद्रयान-2 की गति में 90 फीसदी की कमी इसलिए की गई है ताकि वह चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर चांद से न टकरा जाए. 20 अगस्त यानी मंगलवार को चांद की कक्षा में चंद्रयान-2 का प्रवेश कराना इसरो वैज्ञानिकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था. लेकिन, हमारे वैज्ञानिकों ने इसे बेहद कुशलता और सटीकता के साथ पूरा किया. 7 सितंबर को चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा. चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट बाहुबली के जरिए प्र‍क्षेपित किया गया था. इससे पहले 14 अगस्त को चंद्रयान-2 को ट्रांस लूनर ऑर्बिट में डाला गया था. उम्मीद जताई जा रही है कि 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग को लाइव देखेंगे.

1 सितंबर तक चार बार चांद के चारों तरफ चंद्रयान-2 बदलेगा अपनी कक्षा

LBN#2- 21 अगस्त की दोपहर 12.30-1.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को 121×4303 किमी की कक्षा में डाला जाएगा. LBN#3- 28 अगस्त की सुबह 5.30-6.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को 178×1411 किमी की कक्षा में डाला जाएगा. LBN#4- 30 अगस्त की शाम 6.00-7.00 बजे के बीच चंद्रयान-2 को 126×164 किमी की कक्षा में डाला जाएगा. LBN#5- 01 सितंबर की शाम 6.00-7.00 बजे के बीच चंद्रयान-2 को 114×128 किमी की कक्षा में डाला जाएगा.

2 सितंबर को यान से अलग हो जाएगा विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर

चांद के चारों तरफ चार बार कक्षाएं बदलने के बाद चंद्रयान-2 से विक्रम लैंडर बाहर निकल जाएगा. विक्रम लैंडर के साथ प्रज्ञान रोवर भी ऑर्बिटर से अलग होकर चांद की तरफ बढ़ना शुरू करेगा. विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर चांद के चारों तरफ दो चक्कर लगाने के बाद 7 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे.

इसरो चेयरमैन बोले- अब कम करनी होगी चंद्रयान की गति

इसरो के चेयरमैन डॉ. के. सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में जाते समय कड़ी परीक्षा से गुजरेगा. चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति 65000 किमी तक रहता है. ऐसे में चंद्रयान-2 की गति को कम करना पड़ेगा. नहीं तो, चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव में आकर वह उससे टकरा भी सकता है. गति कम करने के लिए चंद्रयान-2 के ऑनबोर्ड प्रोपल्‍शन सिस्‍टम को थोड़ी देर के लिए चालू किया जाएगा. इस दौरान एक छोटी सी चूक भी यान को अनियंत्रित कर सकती है. यह सिर्फ चंद्रयान-2 के लिए ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी परीक्षा की घड़ी होगी.

चांद से न टकराए चंद्रयान-2 इसलिए गति की जाएगी कम

चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रभाव 65,000 किलोमीटर तक है. यानी चांद से इस दूरी तक आने वाले किसी भी वस्तु को चांद अपनी ओर खींच सकता है. मंगलवार को यानी 20 अगस्‍त को चंद्रयान-2, चांद से 65,000 किमी की दूरी करीब 150 किलोमीटर दूर होगा तब इसरो चंद्रयान-2 की गति को कम करना शुरू करेगा. इससे वह चांद की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के से संघर्ष करते हुए चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा.

हो सकता है कि ऑर्बिटर 2 साल तक काम करे

चंद्रयान-2 लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ तो चांद की सतह पर उतरकर प्रयोग करेंगे. लेकिन, ऑर्बिटर सालभर चांद का चक्कर लगाते हुए रिसर्च करेगा. इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार चांद की कक्षा में सारे बदलाव करने के बाद ऑर्बिटर में इतना ईंधन बच जाएगा कि वह दो साल तक काम कर सकता है. लेकिन यह सब 7 सितंबर के बाद तय होगा.

साभार- आजतक Read it also-नहीं रहें ‘ब्राह्मणों’ को चुनौती देने वाले दलित कवि मलखान सिंह

श्रीनगर में ढील मिलते ही जमकर हिंसा, पैलेट गन से जख्‍मी हुए 2 दर्जन

जम्‍मू। 14वें दिन श्रीनगर में अघोषित कफर्यू पाबंदियों में दी गई ढील में जमकर हिंसा हुई. करीब 12 स्‍थानों पर हुई हिंसा में 2 दर्जन के करीब प्रदर्शनकारी उस समय जख्‍मी हो गए, जब सुरक्षाबलों ने उन पर पैलेट गन से गोलियां दागीं.

कश्मीर के श्रीनगर में 1 दिन पहले हिंसा की घटनाओं के बाद रविवार को कुछ इलाकों में पाबंदियां कड़ी कर दी गईं. इस बीच अधिकारियों ने बताया कि सऊदी अरब से हज तीर्थयात्रियों का पहला बैच कश्मीर लौट आया है तथा रविवार को 14वें दिन घाटी के कई हिस्सों में पाबंदियां जारी हैं.

अधिकारियों ने बताया कि उन इलाकों में फिर से पाबंदियां लगा दी गई हैं, जहां शनिवार को हालात बिगड़ गए. शहर में कई स्थानों और घाटी में अन्य जगहों पर पाबंदियों में ढील दी गई थी जिसके बाद परेशानी पैदा हो गई थी.

अधिकारियों ने बताया कि करीब 12 स्थानों पर प्रदर्शन हुए जिसमें 2 दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारी जख्मी हो गए. करीब 300 तीर्थयात्रियों के साथ आ रहे विमान सुबह श्रीनगर हवाई अड्डे पहुंचे तथा तीर्थयात्रियों की सुचारु आवाजाही के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि हाजियों का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर परिवार के केवल 1 सदस्य को ही अनुमति दी गई है. हाजियों और उनके रिश्तेदारों की आवाजाही के लिए सभी जिला प्रशासनों के समन्वय के साथ राज्य सड़क परिवहन प्राधिकरण (एसआरटीसी) की बसों को तैनात किया गया है तथा सुरक्षाबलों को तीर्थयात्रियों और उनके रिश्तेदारों को उन इलाकों से गुजरने देने की अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं, जहां पाबंदियां लागू हैं.

DGP का दौरा : जम्मू-कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह ने आज राजौरी, उधमपुर और जम्मू का दौरा किया ताकि सुरक्षा परिदृश्य और कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की जा सके. बाद में उन्होंने जम्मू में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के साथ बातचीत की.

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बहुजन छात्र संघ के द्वारा काशी विद्यापीठ के कुलपति को ज्ञापन

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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के बहुजन छात्र संघ के छात्र नेता अरविंद कुमार(एम फिल- राजनीतिशास्त्र)के द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय को छात्रों कि मांग का ज्ञापन दिया गया. मुख्य मांगे इस प्रकार है –

1.वातानुकूलित लाइब्रेरी का निर्माण. 2.साईबर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना. 3.लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम के अनुसार नई किताबो की व्यवस्था किया जाना. 4.लाइब्रेरी द्वारा छात्रों को कम से कम एक बार में चार किताब दिया जाने का प्रावधान. 5.विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को सभी प्रकार के निशुल्क उपचार की व्यवस्था हेतु स्वास्थ्य डायरी की व्यवस्था किया. 6.विश्वविद्यालय के सभी छात्रों का एक्सिडेंट विमा की व्यवस्था किया जाना. 7.विश्वविद्यालय के चिकित्सा परिसर को आस पास के किसी अस्पताल से सम्बन्ध किया जाए जिससे छात्रों को बेहतर चिकित्सा व्यवस्था हो सके.

इन मांगों पर उचित कार्यवाही न किए जाने पर छात्रों ने आन्दोलन की प्रक्रिया में जाएंगे। इस बाबत छात्रों ने तैयारी शुरू कर दी है.

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उन्नाव गैंगरेप पीड़िता ने रिश्तेदार को बताया, ‘सामने से आकर ट्रक ने हमारी कार को रौंदा’

उन्नाव गैंगरेप पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे में अब एक नई और अहम जानकारी सामने आई है. नई दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान खुद रेप पीड़िता ने अपने एक रिश्तेदार को बताया कि बिल्कुल सामने से आकर ट्रक ने उनकी कार को रौंदा था. पीड़िता ने उन्हें यह भी बताया कि कार चला रहे उनके वकील ने रिवर्स गियर लेकर ट्रक के रास्ते में न आने की पूरी कोशिश की लेकिन ट्रक चालक ने इसके बावजूद उनकी कार को रौंद डाला. बता दें कि वकील की भी हालत गंभीर है और उनका भी एम्स में इलाज चल रहा है.

हादसे के बाद से ही पीड़िता के परिवार के साथ मजबूती से खड़े इस रिश्तेदार ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से फोन पर बातचीत में यह जानकारी दी. यह वही रिश्तेदार हैं, जिनकी मां भी हादसे की शिकार हुई थीं. उन्होंने बताया, ‘मैंने उससे (रेप पीड़िता) पूछा कि उस दिन क्या हुआ था? उसने बताया, ‘मैंने ट्रक को सामने से आते देखा. ट्रक को इस तरह से आते हुए देखकर हम डर गए. हमने अलार्म भी बजाया था, जब हमें महसूस हुआ कि ट्रक को जिस तरह से चलाया जा रहा था उसमें कुछ असामान्य है.’

CBI को अभी नहीं दी गई है यह जानकारी

रिश्तेदार के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि कार चला रहे वकील ने रिवर्स गियर में कार डालकर ट्रक के रास्ते से बचने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सके, क्योंकि ट्रक बिल्कुल उन्हीं की तरफ मुड़ गया और फिर यह हादसा हो गया. रेप पीड़िता की स्थिति हालांकि अभी नाजुक बनी हुई है लेकिन बीच में कुछ देर जब वह होश में रहीं, उन्होंने अपने रिश्तेदार से इस घटना के बारे में जिक्र किया. हालांकि मामले की जांच कर रही सीबीआई को इस ब्योरे के बारे में अभी तक जानकारी नहीं दी गई है.

‘CBI अधिकारियों से मिलने से किया इनकार’

रिश्तेदार ने कहा, ‘उसने मुझे अकेले में यह बात बताई. रेप कांड के बाद उन्नाव छोड़ने और इस हादसे तक लगातार मैं उसके साथ रहा हूं. ऐसे में शायद उसका भरोसा मुझ पर अधिक है. उसने सीबीआई अधिकारियों को भी मिलने से इनकार कर दिया, जो एम्स आए थे.’

सीबीआई पर से भी उठा पीड़िता का विश्वास’

रिश्तेदार के मुताबिक पीड़िता का अब सीबीआई से भी विश्वास उठ गया है. रिश्तेदार ने कहा, वह मुझसे कहती है कि यूपी सरकार से विश्वास खत्म होने के बाद अब उसका सीबीआई पर से भी भरोसा उठ गया है. ऐसा इसलिए भी है कि उसने सीबीआई को कई बार अपने जान के खतरे को लेकर आगाह किया लेकिन कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया.

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PoK पर राजनाथ सिंह के बयान से फिर तिलमिलाया पाकिस्तान

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पीओके वाले बयान से एक बार फिर पाकिस्तान तिलमिला गया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उस टिप्पणी पर भड़ास निकाली और निंदा की जिसमें उन्होंने कहा है कि इस्लामाबाद से बातचीत केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुद्दे पर होगी.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज हरियाणा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान से तब तक कोई बातचीत नहीं होगी जब तक कि वह आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देना बंद नहीं करता. राजनाथ सिंह ने कहा, ”यदि बात (पाकिस्तान से) होती है तो केवल पीओके पर होगी, न कि किसी अन्य मुद्दे पर.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने इस पर कहा कि कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदली है. उन्होंने कहा, ”हमने आज भारत के रक्षा मंत्री द्वारा की गईं टिप्पणियां देखी हैं. ये क्षेत्र और इससे परे शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाली अवैध और एकतरफा कार्रवाइयों के बाद भारत की दशा को दिखाती हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भारत द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद दोनों देशों के मध्य तनाव के बीच आई है. कुरैशी ने कहा, ”संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित विश्व समुदाय ने कश्मीर की स्थिति का संज्ञान लिया है.

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तेलंगाना में टीडीपी को बड़ा झटका, 60 बड़े नेताओं ने थामा बीजेपी का दामन

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हैदराबाद। तेलंगाना में तेलुगु देशम पार्टी को बड़ा झटका लगा है. राज्य के 60 बड़े नेताओं ने पार्टी से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. इन बड़े नेताओं के साथ हजारों कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थाम लिया.

इस अवसर पर जून माह में टीडीपी छोड़कर बीजेपी में आए लंका दिनकरन ने कहा, “जहां तक तेलंगाना बीजेपी का संबंध है तो यह बहुत ही अच्छा संकेत है. यह तेलंगाना के लिए भी सकारात्मक संकेत है.” दिनकरन ने कहा, “तीन तलाक और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद कई नए कार्यकर्ता पार्टी से जुड़े हैं.”

इस मौके पर नड्डा ने कहा, “सितंबर में 8 लाख बूथ पर चुनाव होंगे. अक्टूबर में मंडल चुनाव कराए जाएंगे और नवंबर में जिला स्तर के चुनाव होंगे. 15 दिसंबर तक सभी राज्यों में चुनाव पूरे करा लिए जाएंगे. 31 दिसंबर से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव संपन्न होगा.”

अरुण जेटली की हालत बेहद नाजुक

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी उनका हालचाल जानने के लिए एम्स पहुंचे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आडवाणी वहां आधे घंटे से ज्यादा तक रुके और परिवार को सांत्वना दी. एम्स में भर्ती जेटली को वेंटिलेटर से हटा कर एक्स्ट्राकॉरपोरेल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ईसीएमओ) और इंट्रा-ऑर्टिक बलून पंप (आईएबीपी) सपोर्ट पर रखा गया है. यहां उनका डायलिसिस भी किया जा रहा है.

जेटली का हालचाल लेने के लिए पक्ष और विपक्ष के नेताओं का एम्स तांता लगा हुआ है. इससे पहले केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी सोमवार सुबह एम्स पहुंचे हैं. वहीं सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका हाल जानने के लिए आज एम्स जा सकते हैं.

इससे पहले रविवार देर रात केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे थे.

सूत्रों के मुताबिक अरुण जेटली एक्सट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) पर हैं, जिसका उपयोग सांस लेने या दिल की समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है. उन्होंने पहले कहा था कि डॉक्टरों की एक मल्टी डिसिप्लिनरी टीम उनकी निगरानी कर रही है. रविवार को जेटली के हालचाल जानने के लिए स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे, भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर और गौतम गंभीर, और आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत पहुंचे थे.

अरुण जेटली को एम्स में डॉक्टरों ने उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए वेंटिलेटर से हटाकर ईसीएमओ (ECMO) यानी एक्सट्राकॉर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजिनेशन (Extracorporeal membrane oxygenation) पर शिफ्ट किया है. ईसीएमओ पर मरीज को तभी रखा जाता है, जब दिल और फेफड़े ठीक से काम नहीं करते और वेंटीलेटर का भी फायदा नहीं हो रहा होता है. तब इसकी मदद से मरीज के शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है.

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टूंडला उपचुनाव में बसपा का चेहरा बनेंगे सुनील चित्‍तौड़

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आगरा। टूंडला से विधायक रहे प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल के आगरा से सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई सीट पर बसपा पूर्व एमएलसी सुनील चित्तौड़ को चुनाव लड़ाएगी. शनिवार को बसपा प्रमुख ने सुनील को तैयार करने का आदेश दिया.

बीते लोकसभा चुनाव में आगरा और अलीगढ़ मंडल का सुनील चित्तौड़ को जोन कोऑर्डिनेटर बनाया गया था. हालांकि इन सीटों पर बसपा को जीत नहीं मिल सकी. संगठनात्मक फेरबदल में सुनील चित्तौड़ को आगरा-अलीगढ़ के बजाए फैजाबाद, बस्ती और देवीपाटन मंडल का कोऑर्डिनेटर बना दिया था. शनिवार को सुनील चित्तौड़ को टूंडला आरक्षित सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का आदेश दिया. खबर फैलते ही सुनील चित्तौड़ के मधुनगर स्थित आवास पर बधाई देने के लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ लग गई. सुनील चित्तौड़ ने बताया कि बसपा प्रमुख ने आज चुनाव लड़ने का आदेश दिया है. मैंने तैयारियां शुरू कर दी हैं. जल्द ही कार्यकर्ताओं के बीच इसका विधिवत ऐलान किया जाएगा. बता दें कि प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल टूंडला से विधायक रहे और फिर वह प्रदेश सरकार में मंत्री भी बने. बाद में आगरा से भाजपा की टिकट पर सांसद बनने के बाद उन्होंने टूंडला सीट से इस्तीफा दे दिया था. इस सीट पर अब उपचुनाव होना है.

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मायावती की मांग, आरक्षण कोटे के खाली पद जल्द भरे जाएं

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा है कि एससी-एसटी, पिछड़ों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों की स्थिति काफी खराब होती जा रही है. इसलिए सरकार को आरक्षित कोटे के पदों को भरने के लिए अभियान चलाना चाहिए.

मायावती ने रविवार को ट्विट कर कहा है कि एससी-एसटी, पिछड़ों के साथ सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए योजनाएं बनानी चाहिए. इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकारों से मांग है कि वे इन पीड़ित व उपेक्षित वर्गों पर विशेष ध्यान दें और गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं का सही लाभ उन्हें उपलब्ध कराया जाए.

उन्होंने कहा है कि इसके अलावा केंद्र और सभी राज्य सरकारों से भी यह मांग है कि इन वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण कोटे के रिक्त पड़े लाखों पदों को विशेष अभियान चलाकर भरा जाए. इससे इनकी आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार आएगा. देशहित में भी ऐसे कदम उठाने बहुत जरूरी हैं.

Article 370 हटाए जाने के बाद J&K के 5 जिलों में 2G इंटरनेट सेवा शुरू, व 50 हजार लैंडलाइन कनेक्शन भी शुरू किए गए

जम्मू-कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंध को चरणबद्ध तरीके से हटाना शुरू कर दिया है. शनिवार से कई इलाकों में 2जी इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई है. वहीं एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर घाटी के 17 एक्सचेंज में लैंडलाइन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं. आपको बता दें कि केन्द्र सरकार के जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधान हटाने के बाद पांच अगस्त से ही यहां मोबाइल फोन और लैंडलाइन सेवाओं सहित टेलीफोन सेवाएं स्थगित कर दी गई थीं

अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक टेलीफोन एक्सचेंज में से 17 को बहाल कर दिया गया. ये एक्सचेंज अधिकतर सिविल लाइन्स क्षेत्र, छावनी क्षेत्र, श्रीनगर जिले के हवाई अड्डे के पास है. मध्य कश्मीर में बडगाम, सोनमर्ग और मनिगम में लैंडलाइन सेवाएं बहाल की गई हैं. उत्तर कश्मीर में गुरेज, तंगमार्ग, उरी केरन करनाह और तंगधार इलाकों में सेवाएं बहाल हुई हैं. वहीं दक्षिण कश्मीर में काजीगुंड और पहलगाम इलाकों में सेवाएं बहाल की गई हैं.

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू, रियासी जिले, सांबा, कठुआ और उधमपुर में टूजी इंटरनेट सेवा शुरू कर दी है. राज्य के मुख्य सचिव बी.वी.आर.सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को यह घोषणा की थी कि सप्ताहांत के बाद कश्मीर घाटी के सभी स्कूलों फिर से खुलेंगे, जबकि सरकारी कायार्लयों में शुक्रवार से कामकाज हो गया. अधिकारी ने कहा था कि दूरसंचार लिंक धीरे-धीरे बहाल होंगे. उन्होंने कहा कि सीमा पार से आने वाले आक्रामक बयानों के मद्देनजर 14 व 15 अगस्त को कुछ प्रतिबंध जरूरी थे.

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को कहा कि बीते 12 दिनों से लॉकडाउन के दौरान कश्मीर घाटी में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई है. उन्होंने घोषणा की कि प्रतिबंध हटाए जाएंगे और अगले कुछ दिनों में हालात में सुधार होने के साथ ‘जीवन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा.’ विदेशी मीडिया रिपोर्ट का जवाब देते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रतिबंधों में ढील देने के लिए धीरे-धीरे कदम उठाए जा रहे हैं, ऐसा बन रहे हालात के साथ-साथ लोगों से शांति के लिए मिल रहे सहयोग के मद्देनजर किया जा रहा है.

सुब्रमण्यम ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा निष्प्रभावी किए जाने के बाद घाटी में प्रदर्शनों के दौरान मौत व गंभीर रूप से घायल होने की बात का खंडन किया. पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरार्ष्ट्रीय राय तैयार करने के लिए विदेशी मीडिया रिपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है. मुख्य सचिव ने कहा कि शुक्रवार की नमाज के बाद वहां अलगे कुछ दिनों में प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी, यह क्रमबद्ध तरीके से किया जाएगा.

सुब्रमण्यम ने घोषणा की कि सोमवार से ‘क्षेत्रवार’ स्कूल खुलेंगे, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान नहीं हो. उन्होंने कहा, “आवाजाही पर प्रतिबंंध क्षेत्र वार हटाए गए हैं, इन इलाकों में सार्वजनिक परिवहन शुरू होंगे.” उन्होंने घोषणा की कि सरकारी कायार्लय शुक्रवार से पूरी तरह से कामकाज करना शुरू कर दिया है.

मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल करने पर उन्होंने कहा कि यह चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे की जाएगी. ऐसा आतंकी संगठनों द्वारा मोबाइल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल संगठित रूप से आतंकी कार्रवाई करने के लगातार खतरे को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा. घाटी में मोबाइल कनेक्टिविटी 4 अगस्त से बंद है.

सुब्रमण्यम ने कहा कि 22 जिलों में से 12 में कामकाज सामान्य है. उन्होंने कहा, “ऐसे उपाय किए गए जिससे सुनिश्चित किया गया कि एक भी जान का नुकसान नहीं हो या कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हो. यह इंतजाम शांति व व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया. आतंकवादी संगठनों व कट्टरवादी समूहों के पुख्ता प्रयास के बावजूद हमने जनहानि को रोका. पाकिस्तान द्वारा हालात को अस्थिर करने का लगातार प्रयास किया गया.”

उन्होंने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों का सहयोग है, जिससे शांति व सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने में खासा मदद मिली. सुब्रमण्यम ने कहा कि प्रशासन का फोकस जल्द से जल्द सामान्य हालात बहाल करने पर है, जबकि यह भी सुनिश्चित करना है कि आतंकवादी ताकतों को कोई अवसर नहीं दिया जाए.

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पहलू खान मामले में गहलोत सरकार को मायावती ने घेरा

चर्चित पहलू खान मॉब लिंचिंग केस में निचली अदाल के फैसले के बाद राजस्थान की गहलोत सरकार ने बैठक बुलाई और गहलोत ने हाईकोर्ट में अपील के साथ जांच का आदेश दिया. वहीं, गहलोत के आदेश के बाद इस बात की जांच की जाएगी कि कहीं जानबूझकर जांच को प्रभावित तो नहीं किया गया.

उधर, राजस्थान में हुए पहलू खान हत्याकांड मामले में आरोपियों को बरी किए जाने पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को घेरते हुये इसे घोर लापरवाही बताया है .

मायावती ने शुक्रवार को किये गये ट्वीट में कहा ”राजस्थान की कांग्रेस सरकार की घोर लापरवाही और निष्क्रियता के कारण बहुचर्चित पहलू खान हत्याकांड मामले में सभी छह आरोपी वहां की निचली अदालत की तरफ से बरी कर दिए गए. यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है. पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वहां की सरकार अगर सतर्क रहती तो क्या यह संभव था ? शायद कभी नहीं .”

उधर, पहलू खान मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट करते हुए प्रतिक्रिया जाहिर की है और कहा कि इस केस में राजस्थान सरकार की तरफ से अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा.

प्रियंका ने ट्वीट करते हुए लिखा- ”राजस्थान सरकार द्वारा भीड़ द्वारा हत्या के खिलाफ कानून बनाने की पहल सराहनीय है. आशा है कि पहलू खान मामले में न्याय दिलाकर इसका अच्छा उदाहरण पेश किया जाएगा.”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा- “पहलू खान मामले में लोअर कोर्ट का फैसला चौंका देने वाला है. हमारे देश में अमानवीयता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और भीड़ द्वारा हत्या एक जघन्य अपराध है.”

गौरतलब है कि पहलू खान हत्याकांड मामले में अलवर की जिला अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया. राजस्थान के अलवर में अप्रैल 2017 में भीड़ ने गो तस्करी के शक में पहलू खान की पिटाई की और इसके दो दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी.

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बाटला हाउस ने पहले दिन की कमाई से ही निकाल ली लागत, और जानिये मिशन मंगल के बारे में

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स्वतंत्रता दिवस पर इस साल रिलीज हुई दोनों फिल्मों को पहले दिन दर्शकों का अच्छा रेस्पॉन्स मिला है. फिल्म मिशन मंगल जहां अक्षय कुमार के करियर की बेस्ट ओपनिंग लेने वाली फिल्म बन गई है. वहीं जॉन अब्राहम की फिल्म बाटला हाउस ने अपने निर्माण की लागत पहले दिन ही वसूल कर ली. फिल्म बाटला हाउस ने रिलीज के पहले दिन 15 करोड़ 55 लाख रुपये की कमाई की. फिल्म की मेकिंग का बजट 14 करोड़ रुपये है.

बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन की कमाई के आंकड़ों के लिहाज से भले जॉन अब्राहम की फिल्म बाटला हाउस अक्षय कुमार की फिल्म मिशन मंगल से पीछे रह गई हो लेकिन कारोबारी लिहाज से ये फिल्म मिशन मंगल से आगे दिख रही है. अक्षय कुमार की फिल्म की पहले दिन की 29 करोड़ रुपये की कमाई में फिल्म रिलीज करने वाले तीन हजार थिएटर्स का खर्चा भी बंटने वाला है. वहीं बाटला हाउस ने उससे कहीं कम थिएटर्स में जगह मिलने के बावजूद करीब 15 करोड़ रुपये कमा लिए.

फिल्म मिशन मंगल का मेकिंग बजट करीब 32 करोड़ और प्रिंट व एडवर्टाइजिंग (पी एंड ए) का खर्च करीब 10 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. वहीं बाटला हाउस का मेकिंग बजट 14 करोड़ रुपये और पी एंड ए खर्चर 5 करोड़ रुपये है. अक्षय कुमार और जॉन अब्राहम के बीच पिछले साल भी 15 अगस्त पर सीधा मुकाबला हुआ था. तब अक्षय कुमार की फिल्म गोल्ड ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन 25 करोड़ 25 लाख रुपये और जॉन अब्राहम की फिल्म सत्यमेव जयते ने 20 करोड़ 52 लाख रुपये की कमाई की थी.

बाटला हाउस के स्क्रीन्स शुक्रवार से और बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि रिलीज से ठीक पहले अदालत में चली लंबी सुनवाई के चलते तमाम फिल्म प्रदर्शकों ने फिल्म को अपने सिनेमाघरों से हटा लिया था. फिल्म को रिलीज के लिए ग्रीन सिगनल रिलीज से एक दिन पहले ही मिल सका.

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कवि मलखान सिंह दलित साहित्य के शेखस्पियर थे

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11 अगस्त 2019 जनमोर्चा सभागार, फैज़ाबाद, अयोध्या. प्रलेस, अयोध्या ने वरिष्ठ दलित कवि दिवंगत मलखान सिंह पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. सभा की अध्यक्षता शहर के वरिष्ठ कवि व गीतकार प्रलेस के अध्यक्ष श्री दयानंद सिंह मृदुल ने किया तथा संचालन प्रलेस के अध्यक्ष मंडल के वरिष्ठतम साथी श्री अयोध्या प्रसाद तिवारी ने किया.

सर्वप्रथम, प्रलेष के जिला सचिव कॉ. आर डी आनन्द ने दलित कवि मलखान सिंह के बारे में विस्तार से बताया कि श्री मलखान सिंह दलित साहित्य के आधुनिक शेखस्पियर थे. क्रांतिकारी और विद्रोही दलित कवि मलखान सिंह का जन्म 30 सितम्बर 1948 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाँव वसई काजी, जिला- हाथरस (अब अलीगढ़) के दलित परिवार में हुआ था. मलखान सिंह ने उच्च शिक्षा अलीगढ़ और आगरा से प्राप्त किया. मलखान सिंह के पिता का नाम श्री भोजराज सिंह और माता का नाम श्रीमती कलावती था. जब वे आठवीं के छात्र थे तभी उनकी मां का देहांत हो गया था. उनकी पत्नी श्रीमती चंद्रावती सिंह का देहांत 19 मार्चब2003 को हो गया था. है. इनके भाइयों में श्री पृथ्वी सिंह, श्री कुमर सिंह, श्री शेर सिंह,श्री नाहर सिंह, श्री अशोक सिंह, श्री विजय सिंह हैं. पुत्र श्री मानवेन्द्र सिंह और पुत्रबधू श्रीमती लता सिंह हैं. पुत्रियों और दामादों में श्रीमती प्रतिभा सिंह पत्नी डॉ. रामेश्वर दयाल, श्रीमती मीता सिंह पत्नी श्री विमल वर्मा, श्रीमती कृष्णा सिंह पत्नी श्री संदीप वर्मा और श्वेता सिंह हैं. पौत्र तपेन्द्र और पौत्री कृति हैं. इनका वर्तमान पता-कालिंदी विहार आगरा, निकट बुद्धा पार्क, सौ फुटा रोड, आगरा है. पहले ये ताजगंज, ताजमहल के निकट ही रहते थे. वह भी इनका निजी आवास था. बाद में उसको बेंचकर वे सौ फुटा रोड पर कालिंदी विहार में आवास निर्माण करवा लिया था. मलखान सिंह को मजदूर आंदोलनों में सक्रीय भागीदारी की वजह से दो बार तिहाड़ जेल जाना पड़ा था. वे 1979 से 2008 के मध्यावधि में आगरा के पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा एटा के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक रहे. सन 2012 के साहित्य सर्वेक्षण में ”आउटलुक” ने उन्हें सबसे अधिक लोकप्रिय दलित कवि करार दिया था. मलखान सिंह अपने पहले कविता संग्रह “सुनो ब्राह्मण” के साथ 1996 में चर्चा में आए और साहित्य जगत में सूर्य की तरह स्थापित हो गए. देहरादून में जिस मंच पर ओमप्रकाश वाल्मीकि जी को परिवेश (1996) सम्मान दिया गया था, उसी मंच पर डी. प्रेमपति ने मलखान सिंह के कविता-संग्रह “सुनो ब्राह्मण’’ का विमोचन भी किया था. लोकार्पण कार्यक्रम में काशीनाथ सिंह, अनिल चमड़िया और डॉ. रघुवंशमणि त्रिपाठी भी मौजूद थे. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने मलखान सिंह की कविताओं को जनवादी कविताएँ कहकर दलित कविताओं की पंगत से खारिज कर दिया था. ऐसा माना जाता है कि दलित कविता में जनवादी चेतना की बहस वहीं से प्रारम्भ हुई. कँवल भारती और बजरंग बिहारी तिवारी ने मलखान सिंह की कविता में ब्राह्मण और सामंतवाद के गठजोड़ की सार्थक अभिव्यक्ति को सर्वप्रथम स्थापित करने का काम किया था. बजरंग तिवारी ने कथादेश में मलखान सिंह पर विशेष सामग्री छापी थी.

तदन्तर, अपनी बात को जारी रखते हुए कॉ. आर डी आनंद ने बताया, मलखान सिंह दलित साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं. “सुनो ब्राह्मण” इनका बहुचर्चित दलित कविता संग्रह है. सर्वप्रथम यह 1996 में ‘परिवेश’ पत्रिका के संपादक मूलचंद गौतम द्वारा चंदौसी, मुरादाबाद से प्रकाशित किया गया. दूसरा संस्करण 1997 में मलखान सिंह ने स्वयं प्रकाशित किया. वर्तमान संस्करण 2018 में ‘रश्मि प्रकाशन’ लखनऊ से हरे प्रकाश उपाध्याय जी द्वारा प्रकाशित किया गया है. शुरू में इस संग्रह में 16 कविताएँ थीं और बहुत रद्दी पेपर पर प्रकाशित हुआ था. उस संग्रह को सुरक्षित रखना बहुत कठिन था, हलाकि, वह प्रथम संस्करण आज भी मेरे पास सुरक्षित है. दूसरे संस्करण में भी वही चित्र और वही 16 कविताएँ थीं. इस वर्तमान संग्रह में भी वही 16 कविताएँ हैं. इस संग्रह की एक नई विशेषता यह है कि इसमें मलखान सिंह की लेखकीय टिप्पणी के साथ ओम प्रकाश वाल्मीकि की “मलखान सिंह की कविताएँ”, कमला प्रसाद की “अधिकार संघर्ष की कविता”, कँवल भारती का “मलखान सिंह का कविता-संघर्ष”, अजय तिवारी की “अच्छी कविता की जमीन”, सूरज बडात्या का “महास्वप्न की महाभिव्यक्ति”, बजरंग बिहारी तिवारी की “दलित संवेदना और मलखान सिंह की कविताएँ”, और नमस्या का “फटी बंडी का बोध: जातिबोध का महाख्यान” जैसी सात समीक्षाएं, मूल्याङ्कन और अध्ययन सामिल किया गया है. इनका दूसरा काव्य-संकलन “ज्वालामुखी के मुहाने” को रश्मि प्रकाशन, लखनऊ ने 2019 में प्रकाशित किया, जिसे भी पाठकों ने खूब सराहा. मैंने भी उनकी कविताओं की समीक्षा में तकरीबन 75 पेज लिखा है जो मलखान सिंह को बहुत अच्छा लगा. उन्होंने लेख की बहुत सराहना की है.

भारतीय जीवन बीमा निगम, मंडल कार्यालय फैज़ाबाद में सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्य करने वाले राम सुरेश शास्त्री ने बताया कि महान कवि मलखान सिंह हमारे बीच नहीं रहे. यह बहुत दुखद है. 2006 में जब मैं ZTC आगरा में ट्रेनिंग हेतु गया था तो मेरे परम मित्र आर डी आनन्द जी के कहने पर डॉ राजाराम और मलखान सिंह जी के घर गया था. उस समय मलखान सिंह जी ताजगंज आगरा में अपने निजी मकान में रहते थे. लगभग 07 बजे सायं को उनके आवास पर पहुँचा और उनकी भारीभरकम शरीर और बुलंद मूँछ और कड़क आवाज़ से मैं सहमते हुए अन्दर प्रवेश किया . बातचीत के दौरान उनकी सहृदयता देखकर मैं दंग रह गया था . उनके साथ साहित्यिक चर्चा तीन घण्टे हुई और डिनर करने के उपरान्त रात्रि 10 बजे मैं ट्रेनिंग सेंटर सिकंदरा के लिए प्रस्थान किया . पुनः 27 मई 2019 को जब मैं उनसे मिला तो उनकी दुबली और मूँछ रहित शरीर को देखकर हैरान हो गया . मैंने पूँछा सर आप को क्या हो गया है ? जैसा मैंने आप को देखा था उसमें बदलाव है. उनके साथ बिताए गये एक एक पल मुझे उम्र भर प्रेरणा देते रहेंगे. मलखान सिंह साहब अपने व्यक्तित्व और अपनी कृति सुनो ब्राह्मण के कारण हमेशा याद किये जाएंगे . मेरी तरफ से उनको विनम्र अश्रुपूरित श्रद्धान्जलि .

वरिष्ठ दलित कवि श्री आशाराम जागरथ जी ने बताया कि वे एक महान दलित कवि थे. मुझे दुख हो रहा है कि मैं इतने बड़े कवि से नहीं मिल पाया. उन्होंने अपनी एक कविता “सुन बभना” पढ़कर श्रद्धांजलि अर्पित किया.

प्रलेस के संरक्षक व वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव ने बताया कि मलखान सिंह से मेरा परिचय बहुत पुराना था. उन्होंने कहा, मुरादाबाद चंदौसी में हमारे एक साथी आलोचक हैं मूलचन्द गौतम, उन्होंने परिवेश पत्रिका निकालना शुरू किया. उस प्लेटफार्म से उन्होंने मलखान सिंह का कविता संग्रह “सुनो ब्राह्मण” प्रकाशित किया था, उसमें कुछ सोलह कविताएँ थीं. पुस्तक का पेपर बहुत ही साधारण था लेकिन पुस्तक असाधारण हो गई. उनकी लिखी कविताएँ जन-सामान्य कविताओं से भिन्न हैं. दरअसल, वह समय दलित अस्मिताओं का समय था, दलित साहित्य के उभार का समय था तथा उनके समकालीन कई दलित कवि विभिन्न स्तर की कविताएँ लिख रहे थे लेकिन मलखान सिंह को कविताओं का वह तेवर व शिल्प पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने कुछ नए तेवर व शिल्प की कविताएं लिखीं जो कालांतर में लोकप्रिय हुईं और आज जेएनयू और लखनऊ जैसे विश्विद्यालय में उनकी कविताएँ पढ़ाई जा रही हैं. यह एक बड़ी उपलब्धि है. इससे उनके महत्व का पता चलता है.

श्रद्धेय मलखान सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वरिष्ठ आलोचक डॉ. रघुवंशमणि त्रिपाठी ने बताया कि उनकी कविताएँ परंपरावाद को नकारती हैं और स्थापित दर्शन से प्रश्न करती हैं. उनकी कविता में लालित्य की जादूगरी नहीं है बल्कि समाज का यथार्थ उभरता है. मलखान सिंह मजदूर आंदोलनों में भाग लेने के कारण दो बार जेल भी गए हैं. प्रारंभिक दौर में वे मार्क्सवादी थे. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने उन्हें दलित कवि नहीं जनवादी कहा था और कविताओं को जनवादी कविताएँ कहकर दलित खेमे से हटा दिया था किंतु वरिष्ठ आलोचक और चिंतक कँवल भारती ने मलखान सिंह को दलित कवि और उनकी कविताओं को दलित कविताओं के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि देहरादून की सभा में मैं भी था. वहाँ दलित साहित्य के मूल सवालों पर जोरदार बहस हुआ कि दलित साहित्य क्या है? क्या इसका कोई भविष्य है? इसका सौंदर्यबोध क्या होगा? इत्यादि. सभा के दौरान काशीनाथ सिंह को अपनी एक टिप्पणी पर श्योराज सिंफह बेचैन से माँफी मांगनी पड़ी. सौंदर्य का कोई एक पैमाना नहीं है. उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया, किसी स्त्री के सौंदर्य के बारे में भी कोई एक पैमाना नहीं है. अफ्रीकियों को अपनी स्त्रियों के मोटे होंठ अच्छे लगते हैं तो भारतीयों को अपनी स्त्रियों के पतले होंठ अच्छे लगते हैं. इसी तरह दलित साहित्यकारों ने अपने सत्य की अभिव्यक्ति के लिए अलग मापदंड तैयार किए. “सुनो ब्राह्मण” जातीय अस्मिता की अभिव्यक्ति है. मलखान सिंह के कविता संग्रह ने लोगों के ध्यान को आकृष्ट किया. उनकी कविताएँ मनुष्य को छूती हैं. उनकी कविताएँ जमीनी हक़ीक़त की समकालीन कविताएँ हैं.

डॉ. विशाल श्रीवास्तव जी ने बताया कि मलखान सिंह परंपरागत दायरे से बाहर थे. सौंदर्यबोध स्थिर चीज नहीं है, वह निरन्तर बदलता है. मलखान सिंह समकालीन सौंदर्यबोध के दायरे में रचते हैं. दलित जीवन मे परिवर्तन नहीं दिखता है. अँधेरा बहुत गहरा है. अपना हाथ अपने ही हाथ को खोजने में गच्चा खा जाता है. उनकी कविताएं आत्मकथात्मक कविताएँ है. वे नए प्रतीक और नए बिम्ब गढ़ते हैं.

अनीश चौधरी ने उनकी कविताओं को पढ़कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया.

अंत में, अध्यक्ष श्री दयानंद सिंह मृदुल ने कहा कि मलखान सिंह की कविताएं प्रगतिशील दलित कविताएँ हैं और दलित परिवेश की कविताएँ हैं. मलखान सिंह की कविता का मजदूर दलित है और दलित होने के नाते वह सर्वहारा भी है. मलखान सिंह का श्रमिक आम्बेडकर का श्रमिक है, वह मार्क्स का मजदूर नहीं है और न खाली-पीली सर्वहारा ही है. मलखान सिंह ने जनवादी दृष्टिकोण से सताए हुए मनुष्य का पड़ताल नहीं किया है बल्कि दलित जीवन के भोगे यथार्थ को चित्रित किया है. स्वानुभूति को चित्रित किया है परानुभूति को नहीं. मलखान सिंह ने मुहाबरों, छंदों, अलंकारों, रूपकों, बिम्बों, प्रतीकों का समुचित प्रयोग किया है. दलित साहित्य में दलित साहित्य का सौंदर्य दलित जीवन का सच है. मलखान सिंह ने अपनी कविताओं में दलित जीवन के यथार्थ को पाठकों के मानस पटल पर अंकित कर दिया है. उनकी भाषा सरल किन्तु मारक है. कविताओं के भाव इतिहास के मंजर उपस्थिति करने में समर्थ हैं. मलखान सिंह की कविता “मैं आदमी नहीं हूँ” दलित जीवन का दस्तावेज है. इस कविता में वह दलितों के शारीरिक दशा, संसाधन, रोटी, कपड़ा, मकान, जल, विस्तर, भय, परतन्त्रता को अणुओं के रूप में बम में संलयित करते हैं. मैं उनकी अमानिवियता के विरुद्ध समता और बन्दुत्व के लिए आवाज उठाने वाली कविताओं को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.

सभा में सर्वश्री दयानंद सिंह मृदुल, कॉ. अयोध्या प्रसाद तिवारी, श्री स्वप्निल श्रीवास्तव, कॉ. राम तीर्थ पाथक, डॉ. रघुवंशमणि, आर डी आनंद, संदीपा दीक्षित, सूर्यकांत पांडेय, रामानंद सागर, विशाल श्रीवास्तव, आशाराम जागरथ, सत्यभान सिंह जनवादी, धीरज द्विवेदी, राम सुरेश शास्त्री, शशिकांत पांडेय, खलीक अहमद खान, अनीश चौधरी, अतीक अहमद, आशीष अंशुमाली, निरंकार भारती, देवेश ध्यानी, रविन्द्र कुमार कबीर आदि ने अपना वक्तव्य रखा.

तत्पश्चात, सभी साथियों ने खड़े होकर दो मिनट का मौन रखकर श्री मलखान सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित किया और अध्यक्ष ने सभा को विसर्जित किया.

आर डी आनंद सचिव प्रलेस, अयोध्या 11.08.2019

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बात अब आगे बढ़ चुकी है! अब वे CBSE में ही पढ़ेंगे।

CBSE ने एससी एसटी छात्रों का परीक्षा शुल्क 24 गुणा बढ़ा दिया है, पहले 50 रूपये था अब 1200 कर दिया है.

मुझे आश्चर्य इस फ़ीस की बढ़ोतरी से नहीं है, बल्कि इस बात से है कि मुझे अभी पता लगा कि एससी एसटी की फ़ीस 50 रुपये थी, जबकि मेरे परिवार के जितने भी बच्चे सी.बी.एस.सी. में पढ़ते हैं, उनसे स्कूल वालों ने 2500 रुपये परीक्षा शुल्क मांगा है.

मेरी भतीजी व भतीजे की 12 वीं व 10 वीं की इस वर्ष परीक्षा है, उनसे 3000 व 2500 परीक्षा शुल्क मांगे गए हैं. हम दे भी देते, लेकिन यह अभी पता लगा कि पहले मात्र 50 रुपये था और बढ़कर भी 1200 हुआ, लेकिन स्कूल वाले लूट रहे हैं.

इसलिए सी.बी.एस.सी. को शिकायत वाला पत्र तैयार कर रहा हूँ. वैसे कितनों को यह पता था कि सी.बी.एस.ई. में एससी एसटी को परीक्षा शुल्क की छूट मिलती है?

बहन Vidya Gautam जी ने एक बार ऐसी ऐसी कई सरकारी योजनाओं के बारे में बताया, जिन्हें सुनकर में दंग रह गया कि यह सुविधा एससी एसटी को मिलती है, लेकिन हमें पता नहीं है.

अब बात करते हैं कि सी.बी.एस.ई ने ऐसा क्यों किया.

वास्तव में;

1.पिछले कुछ वर्षो में यह देखा गया है कि शहरी एरिया में दलित परिवारों में और विशेष तौर से अम्बेडकरवादी परिवारों में यह रुझान आया है कि वो अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं.

उन्हें आभास हो गया है कि सरकारी सेक्टर को प्राइवेट करने का जो कार्य कांग्रेस ने शुरू किया था, उसे पूर्ण भाजपा कर देगी. इसलिए अब अपने बच्चो को प्राइवेट के अनुसार तैयार कर रहे हैं.

2.मेरे परिवार में, खानदान में, रिश्तेदारों का एक भी बच्चा अब हिंदी मीडियम में नहीं जा रहा है, सभी इंग्लिश मीडियम में पढ़ रहे हैं!

ऐसा भी नहीं है कि मेरे परिवार, खानदान, रिश्तेदारों की फाइनेंशियल स्थिति अच्छी है. सिर्फ खर्चा चलाने लायक कमाई कर पाते हैं.

3.मेरी भांजी व भांजे ने 10 वीं परीक्षा में जिले के टॉपर में अपना नाम दर्ज करवाया, अखबारों में उनकी फोटो भी आई. जबकि मेरे जीजा फाईनेंसली इतने मजबूत नहीं हैं, खर्चा चला पाते हैं फिर भी बच्चो को सी.बी.एस.ई. में पढ़ाया और बच्चे भी अपने आप को सिद्ध कर रहे हैं.

इसलिए;

“मुख्य मुद्दा यह है कि सरकारी सेक्टर के खत्म होने का आभास होने के कारण शोषित समाज अपने बच्चो को सी बी एस सी में पढ़वा रहा है, वहाँ वो टॉपर बन रहे है, बस यह उन लोगो के लिए ज्यादा खतरनाक है जो यह सोचकर खुश हो रहे थे कि सरकारी सेक्टर की नौकरियां खत्म हो जाएँगीं और एससी-एसटी फिर से पुरानी स्थिति में आ जाएगा.

उन्हें समझ लेना चाहिए कि अम्बेडकरवादी विचारधारा स्थिति के अनुसार परिवर्तन करने की सीख देती है. इसलिए अब वे प्राइवेट के लिए तैयार हो रहे हैं. इसी से चिढ़कर ही अब;

“फीस बढ़ा दी गयी है, अब प्राइवेट सेक्टर के लिए तैयार होते हुए एससी व एसटी कैसे बर्दास्त होंगे”

लेकिन यह भूल गये कि;

“अम्बेडकरवादी विचारधारा वाला मजदूर थोड़ा और मेहनत करके मजदूरी कर लेगा लेकिन आप 24 गुणा की जगह 48 गुणा फीस बढ़ा दीजिये, फिर भी वो CBSE में ही बच्चों को पढ़ायेगा. इंग्लिश मीडियम में ही पढ़ाएगा.”

दूसरी फ़ोटो में हम सबके प्रेरणा स्रोत Abhiyan Humane सम्यक बुद्ध विहार, नालंदा, वर्धा में बच्चों को पढ़ाते हुए. वे अब नहीं रहे.

लेखक :- विकास कुमार जाटव  (Vikas Kumar Jatav)

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मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने किया अयोध्या मामले का विरोध

नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरे पांच दिन सुनवाई का फैसला किया है. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने इसका विरोध किया है. सुनवाई के दौरान धवन ने कहा कि ऐसी खबरें हैं कि कोर्ट सप्ताह के सभी पांच दिन इस केस की सुनवाई करेगा. धवन ने इसे लेकर कोर्ट में अपना विरोध दर्ज कराया.

मुस्लिम पक्ष के वकील रजीव धवन ने कहा, ‘ऐसी अफवाह हैं कि कोर्ट इस केस की सुनवाई के लिए सभी पांच दिन बैठेगी. यदि सप्ताह के पांच दिन केस की सुनवाई चलती है तो यह अमानवीय होगा और इससे कोर्ट को कोई मदद नहीं मिलेगी. मुझे केस छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा.’ धवन के इस विरोध पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा, ‘हमने आपकी चिंताओं को दर्ज कर लिया है, हम आपको जल्द जानकारी देंगे.’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला लिया था. इसके मुताबिक हफ्ते के मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुनवाई के लिए तय किया गया था. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार और शुक्रवार को नए मामलों की सुनवाई होती है. लेकिन गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तय किया कि इस केस की सुनवाई हफ्ते के पांचों दिन होगी.

ऐसा पहली बार हो रहा है, जब संवैधानिक बेंच किसी केस की सप्ताह में 5 दिन सुनवाई करेगी. परंपरा के मुताबिक संवैधानिक बेंच सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, बुधवार एवं गुरुवार को सुनवाई करती है. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने इस केस की हर वर्किंग डे पर सुनवाई की बात कही है.

कोर्ट का मानना है कि इससे दोनों पक्षों के वकीलों को अपनी दलीलें पेश करने का वक्त मिलेगा और जल्द ही इस पर फैसला आ सकेगा. गुरुवार को केस की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर की बेंच ने वकीलों को हैरान कर दिया, जब उन्होंने कहा कि वे इस केस की रोजाना सुनवाई करेंगे. संवैधानिक बेंच इस मामले को प्राथमिकता में रख रही है. जजों ने फैसला लिया है कि उन्हें केस पर फोकस बनाए रखना चाहिए, जिसका रिकॉर्ड 20,000 पेजों में दर्ज है.

सुप्रीम कोर्ट के एक सूत्र ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘सोमवार से शुक्रवार तक संवैधानिक बेंच के जजों को अलग-अलग मामले में बिठाने से उनका फोकस नहीं रहेगा, जो अयोध्या जैसे मामले में अहम है. जजों को मामले के दस्तावेजों को पढ़ना होगा, जिसमें वक्त लगेगा. ऐसे में हर सोमवार और शुक्रवार को 60 से 70 याचिकाओं की सुनवाई करने से जजों का फोकस डाइवर्ट होगा. अयोध्या केस से जुड़े दस्तावेजों को पढ़ने और उन पर फैसले लिखने के लिए वक्त चाहिए.’

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श्रीनगर एयरपोर्ट में हिरासत में लिए गए सीताराम येचुरी

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श्रीनगर। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई महासचिव डी राजा को शुक्रवार को श्रीनगर हवाईअड्डे पर हिरासत में ले लिया गया. दोनों को शहर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई. वाम दलों के नेता अपने पार्टी सहयोगियों से मिलने श्रीनगर गए थे. बता दें कि इससे पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को गुरुवार को हिरासत में लिया गया था और श्रीनगर एयरपोर्ट से ही दिल्ली वापस भेज दिया गया था.

येचुरी ने बताया,‘उन्होंने हमें एक कानूनी आदेश दिखाया जिसमें श्रीनगर में किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी. इसमें कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से पुलिस संरक्षण में भी शहर में जाने की अनुमति नहीं है. हम अब भी उनसे बातचीत की कोशिश कर रहे हैं.’

येचुरी और राजा ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक को गुरुवार को पत्र लिखकर अपनी यात्रा की सूचना दी थी और उनसे अनुरोध किया था कि उन्हें प्रवेश की अनुमति दी जाए. सीपीआई महासचिव येचुरी ने कहा, ‘हम दोनों ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि हमारी यात्रा में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए… इसके बावजूद हमें हिरासत में ले लिया गया. मैं अपने बीमार सहकर्मी और यहां मौजूद हमारे सहयोगियों से मिलना चाहता था.’

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विश्व आदिवासी दिवस 2019: मिलिए इन चेहरों से जिन्‍होंने पाया खास मुकाम !

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बुधमनी मिंज : आज विश्व आदिवासी दिवस है. इस दौरान आदिवासियों की मौजूदा हालात, समस्‍याएं और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है. प्रकृति के सबसे करीब रहनेवाले आदिवासी समुदाय ने कई क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाई है. संसाधनों के आभाव में भी इस समुदाय के लोगों ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. गीत-संगीत-नृत्‍य से हमेशा ही आदिवासी समुदाय का एक गहरा लगाव होता है. उनके गीतो-नृत्‍यों में प्रकृति से लगाव का पुट दिखता है. लेकिन मौजूदा समय में आदिवासी समुदाय अपनी भाषा-संस्‍कृति से विमुख हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के मौके पर हमने आदिवासी समुदाय के कुछ युवा वर्ग से बात की, जिन्‍होंने कला के क्षेत्र में नाम कमाया है. वे अपने गीतों और फिल्‍मों के माध्‍यम से अपनी संस्‍कृति को पुरी दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इनके वीडियोज खूब पसंद किये जाते हैं.

अनिरूद्ध पूर्ति : खूंटी (चाडिद) के रहनेवाले अनिरुद्ध पूर्ति (27 वर्षीय) अपने दो छोटे भाई-बहन के साथ रांची में रहते हैं. वे सत्यभारती स्कूल ऑफ म्यूजिक आर्ट एंड ट्रेनिंग इंस्‍ट्यूट में डांस डिपार्टमेंट के एचओडी हैं. वे फिजिक्स ऑनर्स में ग्रेजुएशन करना चाहते थे, उन्‍होंने एडमिशन में भी ले लिया था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की कारण वे ग्रेजुएशन पूरी नहीं कर पाये. उन्‍हें बचपन से डांस का शौक था और एनिमेशन में रूचि थी. उन्‍होंने इसी को अपना करियर चुनने का फैसला किया. शुरुआती दिनों में उन्‍हें घर से कोई सपोर्ट नहीं मिला. अनिरुद्ध बताते हैं कि रिश्‍तेदार कहते थे कि डांस में कोई स्कोप नहीं है, सरकारी जॉब की तैयारी करो. मैंने परिवारवालों से 2 साल का वक्त मांगा. वे बताते है कि, पैसे कमाने के लिए उन्‍होंने शादियो में बजने वाले डीजे में काम किया क्‍योंकि घर से पैसे लेना बंद कर दिया था. डांस की प्रैक्टिस जारी रखी. साल 2013 में डीआइडी के ऑडिशन में मेरा सेलेक्‍शन हो गया. हालांकि मुंबई में दो रांउड के बाद मैं बाहर हो गया. इसके बाद परिवारवालों का सपोर्ट मिलने लगा. अनिरुद्ध आदिवासी टच के साथ हीपहॉप डांस करते हैं. उन्होंने कई आदिवासी फैशन शो को कोरियोग्राफ किया है. उन्‍होंने एक नया ग्रुप बनाया है जिसका नाम ‘आदिवासी गैंग’ है. उन्‍होंने नागपुरी में रैप शुरू किया है. उनके कुछ वीडियोज यूटूयूब पर मौजूद है जिसे बेहद पसंद किया जा रहा है. उनका कहना है कि हमारी संस्‍कृति ही हमारी पहचान है.

अंशु शिखा लकड़ा : नामकोम की रहनेवाली अंशु शिखा लकड़ा (29 वर्षीया) पेशे से एक मॉडल और न्यूज रीडर हैं. उन्हें साल 2018 में अमृत नीर हर्बल प्रोडक्ट का ब्रांड एंबेसेडर बनाया गया है. वे एविएशन फील्‍ड को अपना करियर चुनना चाहती थीं और दमदम एयरपोर्ट (कोलकाता) पर एयर एशिया में उन्हें नौकरी भी मिल गई थी. लेकिन पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें वापस लौटना पड़ा. अंशु बताती है कि छोटे भाई के इस दुनिया से चले जाने के बाद माता-पिता उन्‍हें कभी खुद से दूर भेजने के लिए राजी नहीं थे. इसलिए यहीं अपने लोगों के बीच कुछ अलग करने का निर्णय लिया. ग्रेजुएशन के दौरान उन्‍हें एक एनजीओ से जुड़ने का मौका मिला. इसके साथ मिलकर आदिवासी संस्कृति पर काम किया. अंशु बताती है कि उनकी संस्‍कृति कहीं खोती जा रही हैं और इसे बचाने के लिए हमें आगे आना होगा. इसी एनजीओं के माध्यम से दिल्ली जाने का मौका मिला. वहां ट्रेड फेयर में झारखंड को रीप्रेजेंट किया. इसके बाद दूरदर्शन में न्यूज रीडर की नौकरी मिली. खेती-किसानी से जुड़े कई विज्ञापन भी किये. अंशु बताती है उन्‍हें हमेशा से माता-पिता का सपोर्ट मिला. अंशु पेटिंग करने का भी शौक रखती हैं.

निरंजन कुजूर : लोहरदगा जिले के रहनेवाले निरंजन कुजूर (32 वर्षीय) डायरेक्टर और पटकथा लेखक हैं. अब तक कुड़ुख, हिंदी, चीनी और संताली भाषाओं में काम कर चुके है़ं. उन्हें डॉक्टर बनने का शौक था और दो साल तैयारी भी की लेकिन किस्‍मत को कुछ और ही मंजूर था. इसके बाद उन्‍होंने मास कम्युनेशन किया. इस दौरान फिल्म मेकिंग में मन रमने लगा. उस समय जानकारी नहीं थी कि हॉलीवुड (अंग्रेजी) और बॉलीवुड (हिंदी) के अलावा भी दूसरी भाषाओं में फिल्में बनती है. इसके बाद कई क्षेत्रीय भाषा की फिल्म देखी. उन्‍हें अपनी मातृभाषा कुडूख में फिल्म बनाने का ख्याल आया. उनकी कुडूख शॉर्ट फिल्म ‘एड़पा काना’ को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुका है. इस फिल्म ने कई दूसरे अवार्ड भी जीते हैं. उनकी फिल्‍में ‘पहाड़ा’ और ‘मदर’ (चाइनिज) फिल्म बनाई. संथाली में म्यूजिक वीडियो बनाये हैं. ‘दिबि दुर्गा’ उनकी चौथी फिल्म है. ‘दिबि दुर्गा’ संथाली दसई गीत पर आधारित एक गीतचित्र है. निरंजन कहते हैं,’ शहरों में रहनेवाले कुडूख समुदाय ने लगभग कुडूख बोलना छोड़ दिया है. गांवो में भी अब लोग अपनी मातृभाषा को भूलने लगे है. सिनेमा के माध्यम से मैं कोशिश कर रहा हूं कि अपनी मातृभाषा को संजो कर रख सकूं और लोगों को प्रेरित कर संकू क्‍योंकि यह हमारी पहचान है.

जोया एक्का : जोया अख्तर (28 वर्षीया) अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) की रहनेवाली हैं. वे उरांव जनजाति से हैं. बचपन से ही वे झारखंड के गायक पवन, पंकज और मोनिका मुण्डू से प्रेरित रही हैं. उन्हें अभिनेत्री बनने का शौक था और उनकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. वे आज एक सफल प्रोडयूसर है. वे कर्मा, सरहुल और आदिवासी पर्व-त्योहारों से संबंधित गीतों और वीडियो एल्बमों को बढ़ावा देती है और साथ ही नये कलाकारों को मौका देती हैं. जोया बताती हैं,’ शुरूआत दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पडा. यहां (अंबिकापुर) कुडूख और सादरी के सिंगर्स कम मिलते हैं. झारखंड के कलाकारों का खूब सहयोग मिला.’ वे आदिवासी समुदाय की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहती हैं और इसके बारे में लोगों को बताना चाहती हैं. उनका यूट्यूब पर एक चैनल भी है जिसका नाम ‘जोया सीरीज’ है.

डी विपुल लोमगा : यूट्यूब (YOUTUBE) पर नागपुरी वीडियो देखनेवाले दर्शकों के लिए ‘आशिक ब्‍वॉज़’ कोई नया नाम नहीं है. 5-6 लड़कों का यह ग्रुप ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के राउरकेला शहर से है, जिसमें एक लड़की भी शामिल है. यह ग्रुप साल 2015 से ही नागपुरी डांस वीडियो बनाने में जुटा है. इन युवाओं की कोरियोग्राफी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है. ग्रुप के सभी सदस्‍य आदिवासी हैं और सभी लोअर मिडिल क्‍लास से ताल्‍लुक रखते हैं. इस ग्रुप के लीडर डी विपुल लोमगा (25 वर्षीय) बताते हैं कि हम पढ़ाई के साथ-साथ डांस वीडियोज भी बनाते हैं और इससे जितना भी हम कमा पाते हैं उसे कॉस्‍ट्यूम और वीडियो के मेकिंग में खर्च करते हैं. इनके ग्रुप में पीके दीप, स्‍वीकर मुंडारी, एमडी मनु, दिनेश मुरमू , क्रिकेट टोप्‍पो, आयुष लेज़र, सुदीप, प्रिंस जस्टिन और एक लड़की जेसिका जेनी है. इन्‍हीं के ग्रुप के एक सदस्‍य स्‍वीकर मुंडा हैं जो फिलहाल अपनी आनेवाली नागपुरी फिल्‍म ‘साथिया’ की शूटिंग कर रहे हैं.

रोहित माइकल तिग्गा : रोहित (35 वर्षीय) ने बैंगलोर से बीबीएम में ग्रेजुएशन किया है. लेकिन इस क्षेत्र को छोड़कर उन्‍होंने म्‍यूजिक को अपना करियर चुना. उनके घर में संगीत का माहौल था. पिता सुधीर तिग्गा गाते थे तो इसी परंपरा को रोहित ने आगे बढ़ाने का फैसला किया. बैंगलोर में भी उनके सभी दोस्त मयूजिक और डांस से जुड़े थे. कुछ समय दिल्‍ली में रहने के बाद वे वापस रांची आये. उनका एक बैंड है और वे कई स्टेज परफॉरमेंस भी करते हैं. उनके वीडियोज को बेहद पसंद किया जाता है. उन्‍हें इंग्लिश गानों में ज्‍यादा रूचि है, लेकिन अपनी संस्कृति से पूरी तरह जुड़े हुए हैं.

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