रेलवे के खानपान ठेकों पर चुनिंदा माफियाओं का कब्जा

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नई दिल्ली। कैग की रिपोर्ट में रेलवे की पोल खुलने के बाद कैटरिंग विभाग की जांच शुरू हो गयी है जिसमें बड़ी बड़ी खामियां सामने आ रही हैं. संसद में पेश अपनी हालिया रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इन कैटरिंग माफिया की कलई खोली है जिसके बाद पता लगा है कि रेलवे के खानपान के ज्यादातर ठेकों पर कैटरिंग माफिया का कब्जा हो गया है. जांच में पता लगा है कि ज्यादातर स्टेशनों और ट्रेनों की कैटरिंग चुनिंदा फर्मो को मिलती है. ये वही कैटरिंग फर्म हैं जिनके खाने को कैग ने इंसानों लायक मानने से इन्कार कर दिया है.

संसद में पेश अपनी हालिया रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने इन कैटरिंग माफिया की कलई खोली है. कैग ने अपनी पड़ताल में पाया कि कुल मिलाकर आठ-दस फर्मो के पास रेलवे के ज्यादातर कैटरिंग ठेके हैं. आईआरसीटीसी की कैटरिंग में भी इन्हीं का वर्चस्व दिखाई देता है. इसका एकमात्र कारण टेंडर की यह शर्त है कि रेलवे कैटरिंग के लिए केवल वही कैटरर आवेदन कर सकते हैं जिनके पास रेलवे की कैटरिंग का पूर्व अनुभव हो. इस शर्त के कारण पहले से जमी-जमाई फर्मो को ही फिर से ठेके मिल जाते हैं जिस कारण नए कैटरर रेस से बाहर रहते हैं.

रेलवे कैटरिंग के सबसे ज्यादा ठेके हासिल करने वाली फर्म आरके एसोसिएट्स है. इसके पास 54 ठेके हैं. इनमें से 21 स्टेशनों के, जबकि 33 ट्रेनों के हैं. इनमें 6 ठेके आईआरसीटीसी द्वारा तथा बाकी जोनल रेलों द्वारा दिए गए हैं. इसके बाद दूसरे नंबर पर है एरेंको कैटरिंग, जो 44 ठेकों की मालिक है. इनमें से 29 ठेके स्टेशनों के तथा 15 ठेके ट्रेनों के हैं. इनमें से सात ठेके इसे आईआरसीटीसी ने और शेष जोनल रेलों ने दिये हैं. वृंदावन फूड प्रॉडक्ट्स के 39 ठेकों के जखीरे में 14 स्टेशनों के तथा 25 ट्रेनों के हैं. इसे आईआरसीटीसी से 11 तथा जोनल रेलों से बाकी ठेके मिले हैं.

 

झुग्गी-बस्तियों के बच्चे डीयू में संवारेंगे सपने

नई दिल्ली। एक तरफ संसाधनो की बहुलता के बावजूद भी सफलता नहीं मिल पाती है तो वहीं दूसरी औऱ कठिन परिस्थितियों से लड़कर दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के होनहारों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की ऊंची कटऑफ लिस्ट की दीवारों को भेद दाखिला पाने में सफलता पाई है. दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा बने यह होनहार भविष्य में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक व पत्रकार बन देश की सेवा करना चाहते हैं.

देश के सबसे बड़े कबाड़ बाजार मायापुरी की झुग्गी बस्ती में रहने वाले 17 वर्षीय प्रिंस का दाखिला डीयू के प्रतिष्ठित किरोड़ीमल कॉलेज में हुआ है. वह बताते हैं कि उन्हें 12वीं कक्षा में 94 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं, लेकिन इतने अंक प्राप्त करना उनके लिए आसान नहीं था. प्रिंस ने बताया कि रेलवे लाइन के पास उनका घर होने के कारण वह रात को पढ़ाई करते थे, क्योंकि रात में कम ट्रेनें गुजरती हैं.कई बार शोर से बचने के लिए उन्हें कानों में रूई लगाकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. प्रिंस प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी बनते ही सबसे पहले वह अपने परिवार को यहां से किसी अच्छी जगह ले जाना चाहेंगे.

उत्तर पश्चिम दिल्ली की तिगड़ी झुग्गी बस्ती में रहने वाले देवेंद्र की कहानी भी कम प्रेरणादायक नहीं है. देवेंद्र को शहीद भगत सिंह कॉलेज में दाखिला मिला है. 12वीं कक्षा में 90.7 फीसदी अंक प्राप्त हुआ. इनके पिता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं और मां नीबू-मिर्च बेचती हैं. दोनों एक माह में 10 हजार रुपये कमाते हैं. इस बजट के साथ जीवनयापन करना कई बार बेहद मुश्किल होता है, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा पढ़ाई जारी रखने की प्रेरणा दी है.

इंदिरा कैंप झुग्गी में रहने वाली मधु ने 12वीं कक्षा में 88 फीसदी अंक प्राप्त कर हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया है. मधु ने बताया कि झुग्गी बस्ती में हर वक्त लाउडस्पीकर बजने के कारण कई बार पढ़ना बेहद मुश्किल होता था. इसके अलावा झुग्गी का माहौल भी बेहद खराब होता है. अगर आस-पास का माहौल अच्छा होता तो मेरे और ज्यादा नंबर आते. भविष्य में पत्रकार या शिक्षक बनकर देश की सेवा करने की चाहत रखने वाली मधु अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता को देती हैं. इनके पिता जूते की फैक्ट्री में काम करते हैं.

ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा का बेहतर मंच प्रदान करने के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन आशा कम्यूनिटी हेल्थ एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के एक पदाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष इन बच्चों के अलावा झुग्गी बस्ती के कुल 130 बच्चों को डीयू के विभिन्न कॉलेजों मे दाखिला मिला है जो दूसरे गरीब छात्रों के लिए प्रेरणा बन उभरे हैं.

 

खनन माफिया के हमले के बाद, धरने पर बैठे बीजेपी विधायक

लखीमपुर। योगीराज में आम आदमियों का तो बुरा हाल है ही उनकी पार्टी के विधायक तक सुरक्षित नहीं है. लखीमपुर के सदर विधायक योगेश वर्मा व उनके प्रतिनिधियों पर शनिवार देर रात खनन माफिया ने फायरिंग कर दी. विधायक व उनके प्रतिनिधि का कहना है कि हमले की ये घटना अवैध खनन का विरोध के कारण हुई. विधायक के प्रतिनिधि शांतनु तिवारी की तहरीर पर तीन के खिलाफ नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है.

जानकारी देते हुए छाउछ निवासी शांतनु तिवारी ने बताया कि शनिवार रात 11 बजे वह सदर विधायक योगेश वर्मा के साथ जिला अस्पताल से उनके राजगढ़ स्थित घर गाड़ी से जा रहे थे. ओवरब्रिज के पास बालू भरी सात ट्रैक्टर-ट्रॉली आईं, जिसमें एक ट्रैक्टर चालक ने उनकी गाड़ी में टक्कर मारने का प्रयास किया. इसमें उनके चालक राजू ने गाड़ी किनारे कर ली. तभी खनन माफिया प्रेम वर्मा निवासी कार से वहां आ गए और शांतनु तिवारी व सदर विधायक योगेश वर्मा पर अवैध खनन का विरोध करने को लेकर लाइसेंसी व अवैध असलहों से फायर कर दिए.

इसी बीच शांतनु व चालक राजू वर्मा के शोर मचा देने पर कुछ लोग व पुलिस आ गई और तीनों को पकड़कर कोतवाली ले आई. साथ ही बालू भरे उक्त सातों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी कब्जे में ले लिया पर कुछ समय बाद ही तीनों आरोपी रात में ही कोतवाली से भाग गए. पुलिस की लापरवाही पर विधायक समर्थकों के साथ रात में ही कोतवाली गेट पर धरने पर बैठ गए. विधायक ने बताया कि अवैध खनन का मामला और विधायक पर जानलेवा हमले जैसी घटना के बाद भी मामले पर बोलने से एसपी दिन भर बचते रहे. शनिवार देर रात से लेकर रविवार सुबह तक इतना सब हो गया, लेकिन एसपी डॉ. एस चन्नप्पा ने मामले में किसी भी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी. रविवार दोपहर एसपी डॉ. एस चन्नप्पा को उनके सरकारी आवास परिसर से ही फोन मिलाया गया, लेकिन कई बार घंटी जाने पर भी फोन नहीं उठाया.

 

लोकतंत्र के सिर पर बंधा गरीबी का कफन

पिछले दिनों की बात है. उत्तर प्रदेश में एक महिला ने गरीबी और भूख के कारण दम तोड़ दिया. मृत महिला के चार बच्चों के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि अपनी मां का अंतिम संस्कार भी कर सकें. बच्चों ने भीख मांगकर अंतिम संस्कार के लिए पैसे जुटाए तब जाकर मां का अंतिम संस्कार किया. बच्चों को भीख देने वाला समाज अगर सामाजिक दायित्व समझ कर मृत महिला का अंतिम संस्कार अपने पैसों से कर देता तो समाज में एक अच्छा संदेश जाता. भीख के पैसे से हुआ अंतिम संस्कार समाज और हमारे सिस्टम दोनों को लानत कर रहा है. आजकल मीडिया में ‘‘जीरो टोलरेंस‘‘ की बातें बहुत सुनने को मिलती हैं. पर हैरत एवं गैरत की बात ये है कि हमारा समाज, लोकतांत्रिक सिस्टम और लोकतंत्र का तथाकथित चौथा स्तम्भ माना जाने वाला मीडिया ऐसी घटनाओं को ‘‘फुल टोलरेंस‘‘ के साथ पचा जाता है. ‘‘के न्यूज चैनल‘‘ जरूर साधुवाद का पात्र है जिसने इस घटना को प्राइम टाइम में डिबेट के रूप में बहुत प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया. अन्य चैनल ने इस घटना को प्रमुखता से दिखाया हो ऐसी जानकारी नहीं है. मुझे लगता है कि उक्त घटना अगर बिहार या बंगाल जैसे किसी राज्य में घटित हुई होती तो, हफ्ते भर मीडिया की सुर्खियों में रहती. भारत का संविधान सभी नागरिकों को गरिमा पूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है. पर भूख और गरीबी से अभिशप्त जीवन को किसी भी दृष्टि गरिमापूर्ण नहीं माना जा सकता. हम भारत के महाशक्ति एवं बड़ी अर्थव्यवस्था होने के चाहे लाख दावे करें पर इन दावों के बीच आंकड़े बयां कर रहे हैं कि दुनिया के कुल भूखे लोगों में एक तिहाई भूखी आबादी भारत में जिल्लत की जिन्दगी जी रही है. रोजाना करीब बीस करोड़ गरीब लोग दो जून की रोटी जुटाने में असमर्थ रहते हैं देश में एक तरफ रसोई गैस सिलंडर बांटने की योजना के प्रचार-प्रसार में लाखों रूपये खर्च किए जा रहे है तो दूसरी तरफ इन गरीबों के यहां चूल्हा तक नहीं जल पाता है परिणामस्वरूप इन्हें रात को भूखे पेट ही सोना पड़ता है. भारत में प्रतिवर्ष करीब पच्चीस लाख गरीब लोग भूख के कारण दम तोड़ देते हैं. भूख से दम तोड़ने वाले लोगों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अति पिछड़ी जातियों के लोगों की संख्या अधिक होती है. संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट ‘‘द स्टेट ऑफ फू्ड इनसिक्यूरिटी इन द वर्ल्ड‘‘ के अनुसार भारत दुनिया के भूखे देशों की सूची में शीर्ष पर शामिल है. गरीबों की गरीबी और भुखमरी दूर करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, टारगेटिड डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, अनाज बैंक योजना और अन्त्योदय जैसी अनेकों सरकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. जो राजनीतिक उदासीनता के कारण नाकाफी साबित हो रही हैं. देखा यह गया है कि गरीबों में बांटने के लिए अनाज गोदामों एवं अनाज बैंकों में रखा अनाज सड़-गल जाता है लेकिन गरीबों तक नहीं पहुंच पाता. भुखमरी का कारण गरीबी और गरीबी का कारण बेरोजगारी है और गांवों में बेरोजगारी का मुख्य कारण भूमिहीनता है. एक तरफ धर्म की दुकानें चलाने वाले तथाकथित साधू-संतों, बापू और बाबाओं को सत्संग आदि के लिए हजारों एकड़ जमीन सरकारों द्वारा दे दी जाती है. लेकिन भूमिहीन गरीबों को भूमि आवंटित करने में सरकारें उदासीनता दिखाती हैं. जबकि हमारा संविधान बापू-बाबाओं के बजाए गरीबों के हितों के प्रति अति प्रतिबद्ध है. फिर ऐसी क्या वजह है कि हमारी लोकतांत्रिक सरकारों को गरीबों के बजाए बाबाओं की चिंता अधिक रहती है. भूख से मरने का यूपी का मामला अकेला मामला नहीं हैं. प्रतिदिन देश भर में ऐसी घटनाएं घटित होती रहती रहती हैं, वह बात अलग है कि शासन-प्रशासन के दबाव में ऐसी घटनाएं चर्चा का विषय नहीं बन पाती. देश में भ्रष्टाचार आदि के नाम पर बड़े-बड़े आन्दोलन हुए. आन्दोलनों के साथ राजसत्ताओं का आना-जाना भी हुआ. देश से गरीबी-भुखमरी खत्म करने के राजनीतिक वायदे भी होते रहे हैं. पर गरीबी-भुखमरी की समस्या अभी भी कायम है. फिर भी ताज्जुब की बात है कि गरीब हितों का ढ़िंढोरा पीटने वाले संगठन भी भुखमरी से होने वाली मौतों पर चुप रहते है. क्या इस मुद्दे पर देश में कोई आन्दोलन नहीं होना चाहिए. आखिर भुखमरी से मृत किसी गरीब के अंतिम संस्कार के लिए भीख मांगने का सिलसिला कब तक चलता रहेगा. यूपी की उक्त घटना को देखकर लगता है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने सिर पर गरीबी कफन बंधा है. यह लेख ओपी सोनिक ने लिखा है. लेखक के निजी विचार है.

झुग्गियों के बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं आईआईटी छात्र

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नई दिल्ली। कॉलेज जाने वाले छात्रों का समूह जिस तरह गरीब बच्चों को झुग्गी बस्तियों में जाकर शिक्षा दे रहा है इस तरह की पहल को कई लोग मन में सपने लिए सोचते रह जाते हैं. मगर, आयुष, मोनिका, अभिषेक, पूजा जैसे कई छात्रों की पहल बताती है कि कड़ी लग्न और मेहनत से काम किया जायें तो कुछ भी संभव है.

ग्रुप के युवा आयुष की पहल पर 7 वर्ष पहले झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया गया था जो एक कड़ी के रूप में शुरू हुआ. आज यह काम मजबूत जंजीर बन चुका है. कॉलेज जाने वाले इन छात्रों ने ‘यंग एसोसिएशन’ नाम का समूह बनाकर दिल्ली में पांच जगहों पर झुग्गी-झोपड़ी और अनाथालय के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रखा है. छात्रों के इस समूह में आईआईटी दिल्ली सिहित विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेज, पत्रकारिता के साथ-साथ डीयू के कई कॉलेज के छात्र शामिल है. जानकारी देते हुए छात्र आयुष केसरी बतातें हैं कि वर्ष 2010 की बात थी जब वह उत्तम नगर से नोएडा मेट्रो से कॉलेज जाते थे तब वह अक्सर इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन के पास झुग्गी झोपड़ी में बच्चों को खेलते देखा करते थे. एक दिन उसके मन में इस बस्ती में जाने का विचार आया, दूसरे दिन वह अपने एक साथी शशांक के साथ बस्ती में गए. आयुष ने बताया कि इसके बाद उसने अपने कॉलेज में दोस्तों से इन बच्चों के लिए कुछ करने के लिए कहा, तो सबने कहा कि क्यों न शानिवार-रविवार को इन बच्चों को पढ़ाया जाए.

छात्रों के समूह की एक कोर टीम है जिसमें हर वर्ष सितंबर में बदलाव किया जाता है. मौजूदा टीम में पांच लोग हैं पूजा मिश्र, मोनिका गुप्ता, वर्षा कुटील, ऋचा त्रिपाठी और अभिषेक कुमार. इसके अलावा समूह में करीब 25 छात्र हैं. जिसमें आईआईटी दिल्ली के तीन छात्र भी शामिल हैं.

इसमें आयुष केसरी अब निगरानी की काम देखते हैं. उनकी साथी मोनिका ने बताया कि समूह के सदस्य झंडेवालान के पास स्थित कत्यानी बालिका आश्रम की अनाथ बच्चियों के अलावा इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन के पास अन्ना बस्ती, उत्तम नगर के पास काली बस्ती, पूर्वी दिल्ली के दल्लूपुरा और ललिता पार्क में शानिवार और रविवार को दो घंटा पढ़ाने का काम करते हैं. इसको अलावा नोएडा सेक्टर 12-22 और गाजियाबाद में भी एक जगह पाठशाला लगाई जाती है. इन सभी छात्रों का एक ही मकसद है गरीब छात्रों को शिक्षित करके उनकी जिंदगी में बदलाव लाना .

शौचालय में सोने को मजबूर है ओडिशा का यह आदिवासी परिवार

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केओनझर। ओडिशा के केओनझर जिले में एक बेघर आदिवासी परिवार स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत बनाए गए शौचालय में रहने पर मजबूर है. इछिंदा गांव के दक्तर नायक, ओडिशा माइनिंग कारपोरेशन द्वारा बनवाये गए शौचालय में रह रहे हैं क्योंकि उनके पास कोई पक्का मकान नहीं है. परिवार के हालात के बारे में ओडिया डेली के द्वारा बताए जाने के कुछ घंटो के बाद ही अधिकारियों ने बताया कि परिवार को एक पक्के घर में ले जाया गया है. केओनझर जिले के कलेक्टर ने कहा कि “नायक के परिवार को यहां ओएमसी द्वारा घर का निर्माण समाप्त होने तक रहना होगा. ओडिशा के एक अखबार संबाद से मिली एक तस्वीर में नायक शौचालय के दरवाजे के पास बैठे हुए है. वहीं दूसरी तरफ शौचालय के ठीक बगल में नायक की बेटी निशा सो रही है. जो नायक के परिवार के हालात को बयां कर रहे हैं. दक्तर नायक एक श्रमिक हैं.ये और इनका परिवार बेहद बुरी परिस्थितियों में रह रहे हैं. कभी ये किसी के जर्जर मकान में रहते तो कभी पॉलिथीन के नीचे. बारिश के दिनों में इनके लिए कई परेशानियां खड़ी हो गईं. नायक ने अखबार को बताया कि पिछले कुछ दिनों से वो और उनका परिवार इस शौचालय के अंदर ही सो रहे हैं. उनकी पत्नी नंदिनी बाहर खाना बनाती हैं और शौच के लिए उनका परिवार जंगल में जाता है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव के 40 आदिवासी परिवारों को बीपीएल श्रेणी में घर दिया गया है. लेकिन नायक को घर नहीं मिला. यहां तक कि माइन्स एंव मिनीरल संशोधन अधिनियम के अंतर्गत खनिज-प्राप्ति वाले क्षेत्रों में आदिवासियों के विकास के लिए गठित डिस्ट्रीक्ट मिनीरल फाउंडेशन उनके हालात में बहुत सुधार नहीं कर पाए हैं.

शौचालय बनवाने के लिए डीएम ने दी पत्नी को बेचने की नसीहत

औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद के डीएम कंवल तनुज अपने एक बयान से विवाद में फंस गए हैं. डीएम कंवल तनुज जम्होर में स्वच्छता अभियान पर भाषण दे रहे थे. औरंगाबाद कलेक्टर कंवल तनुज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. वीडियो में दिख रहा है कि कलेक्टर जम्होर पंचायत में स्वच्छता महाभियान सभा को संबोधित कर रहे हैं. इस दौरान वह बेहद गुस्से में थें. कलेक्टर ने मंच से सभी को अपने घर में शौचालय बनाने की सीख दे रहे थे, तभी एक शख्स ने उन्हें टोक दिया. उसने कहा कि हुजूर रहने के लिए घर नहीं है शौचालय बनवाने के लिए पैसे कहां से लाऊं. कलेक्टर ने कहा कि पैसे नहीं है तो जाओ बेच दो अपनी पत्नी को और शराब पीओ. अगर ये मानसिकता है तो जाकर नीलाम कर दीजिए अपने घर की इज्जत और कह दीजिए सरकार से कि नहीं बनेगा हमसे शौचालय. डीएम कंवल तनुज ने कहा, ‘’ऐसा कौन सा गरीब आदमी है जो मुझे कह दे कि मेरी बीवी की इज्जत ले लो और मुझे 12 हजार रुपए दे दो. कोई ऐसा नहीं होगा. जाकर देखिए कितनी गरीबी है. ’अरे जाओ बेच दो अपनी बीवी को. अगर ये मानसिकता है तो जाकर नीलाम कर दी जाए घर की इज्जत और कह दीजिए सरकार से कि नहीं बनेगा शौचालय.’’ वीडियो वायरल होने के बाद कलेक्टर ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है. घर में शौचालय न होने की वजह से महिलाओं की इज्जत पर आंच आती है. सरकार शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपए दे रही है. नियम है कि 12 हजार रुपए तभी मिलेगा जब लाभ पाने वाला व्यक्ति घर में शौचालय बना लेगा. मैं यही बात ग्रामीणों को समझा रहा था.

निठारी कांड: मनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा

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नई दिल्ली। नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरिंदर कोली को मृत्युदंड का फैसला सुना दिया है. यह सजा युवती का अपहरण कर रेप और मर्डर के मामले में सजा सुनाई गई है. गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने पिंकी सरकार हत्याकांड में पंधेर और सुरेंद्र कोली को शनिवार को रेप और मर्डर दोषी पाया था. असल मेें निठारी कांड दिसंबर 2006 में राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था. निठारी कांड के एक अन्य मामले में पहले भी कोली को फांसी की सजा मिल चुकी है. पंधेर को कोर्ट ने हत्या और रेप की कोशिश समेत सबूत मिटाने और साजिश रचने का दोषी पाया गया. बता दें की 12 साल पहले 20 जून, 2005 को आठ साल की एक बच्ची ज्योति नोएडा के निठारी इलाके से अचानक गायब हो गई थी. इसके बाद से इस इलाके में लगातार बच्चे गायब होने लगे. एक साल तक लगातार बच्‍चों के गायब होने यह सिलसिला चलता रहा और करीब दर्जनभर बच्चे गायब हो गए. मामला राष्ट्रीय स्तर पर आने के बाद पुलिस की अलग-अलग टीमों ने एनसीआर समेत देश के कई इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया. 7 मई 2006 को 21 साल की लड़की पायल जब गायब हुई तो पुलिस को अहम सुराग उसके मोबाइल से मिला. पुलिस ने उस नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई. उसके बाद जब उसमे से एक नंबर पर कॉल की गई तो उसका नाम मनिंदर सिंह पंधेर का था. जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में पंधेर और उसके नौकर कोली को आरोपी बनाया. इसके बाद पूरे निठारी मामले का खुलासा हुआ था, जिसमें ज्योति, पुष्पा विश्वास, नंदा देवी, पायल, रचना, हर्ष, कुमारी निशा, रिम्पा हलधर, सतेंद्र, दीपाली, आरती, पायल, पिंकी सरकार, अंजली, सोनी, शेख रजा खान और बीना का रेप किया गया था. रेप के बाद उन्हें मारकर पंढेर के घर में दफन कर दिया गया था. गौरतलब है की निठारी कांड के 6 मामलों में कोर्ट सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुना चुकी है. पिछले साल अक्टूबर में कोर्ट ने कोली को नंदा देवी मर्डर केस में किडनैपिंग, रेप और सबूत मिटाने का दोषी पाया था. इससे पहले के भी पांच मामले में सीबीआई कोर्ट ने कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी पर इस बार फांसी पर पुख्ता मोहर लग गयी है.

 

काबुल में बम धमाके में 35 लोगों की मौत, 42 घायल

काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के गुलाई दावा खाना इलाके में बम धमाका हुआ. इस बम धमाके में 35 लोगों की मौत हो गई. धमाके में 42 लोग घायल भी हुए. रिपोर्ट्स के मुताबिक एक आत्मघाती हमलावर ने कार में बम विस्फोट कर दिया. अभी तक इस की आतंकी गुट ने जिम्मेदारी नहीं ली है. मौके पर रेस्क्यू किया जा रहा है. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है. काबुल में बीते दो महीने में हुआ यह दूसरा बड़ा हमला है. इससे पहले 31 मई को इंडियन एंबेसी के पास हुए ब्लास्ट में 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. बम धमाके में 35 लोगों की मौत हो गई है. शुरू में 12 लोगों की मौत की खबर सामने आई थी लेकिन मरने वालों की संख्या का आंकड़ा बढ़कर अब 35 हो गया है. वहीं घायलों की संख्या भी 10 से बढ़कर 42 हो गई है. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि हमलावर के निशाने पर कौन था. पुलिस ने धमाके की जगह की घेराबंदी कर ली है. वहीं अभी तक किसी संगठन ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. गौरतलब है साल 2017 की शुरुआत से अभी तक अफगानिस्तान में हुए बम धमाकों में लगभग 1662 लोग मारे जा चुके हैं. यह आंकड़ें यूएन द्वारा दिए गए हैं. इस बम धमाके से दो हफ्ते पहले आईएस ने भी एक काबुल की एक मस्जिद में हुए बम धमाके की जिम्मेदारी ली थी. मस्जिद में हुए बम धमाक में 4 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं यूएन के आंकड़ों के मुताबिक बीते मई महीने में एक ट्रक पर हुए बम धमाके में 150 लोगों की मौत हो गई थी.

अमित शाह का सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक

नई दिल्ली। पिछले दिनों मीडिया में खबर आई थी कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने सादगी का उदाहरण पेश करने के लिए चार्टर्ड प्लेन (विशेष विमान) और फाइल स्टार होटल से बचते हैं. विभिन्न रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शाह सामान्य हवाई जहाज से सफर करते हैं और जहां जाते हैं वहां भाजपा नेताओं या कार्यकर्ताओं के घर पर रुकना पसंद करते हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने वास्तविकता दिखाने के लिए अमित शाह की तस्वीरें शेयर करते हुए इन खबरों को बीजेपी का प्रोपगैंडा बताया. Sidmtweets हैंडल से सिड नामक यूजर ऐसी ही एक खबर को शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा, “ये हालिया समय में पेड और फेक न्यूज का सबसे हास्यास्पद उदाहरण हैं. मीडिया की विश्वसनीयता को क्या हो रहा है? बस गूगल भर करने की जरूरत थी?” सिड ने अपने ट्वीट के साथ अमित शाह की चार्टर्ड विमान में एक पत्रकार को इंटरव्यू देने वाली तस्वीर भी लगाई. पत्रकार निखिल वागले ने अमित शाह को ट्वीट करते हुए लिखा कि अगर उन्हें पारदर्शिता में भरोसा है तो वो बीजेपी द्वारा पिछले तीन सालों में मीडिया को दिए गए विज्ञापनों इत्यादि का ब्योरा सार्वजनिक करें, तब उनकी सादगी नजर आयेगी.    

भाजपा की दलित राजनीतिः अमित शाह ने दलित के घर किया भोजन

जयपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार (23 जुलाई) को जयपुर में बारिश के बीच पार्टी के बूथ स्तर के एक दलित कार्यकर्ता के घर जाकर भोजन किया. उनके साथ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी और कुछ अन्य नेता मौजूद थे. जयपुर की सुशील पुरा कॉलोनी में अमित शाह और भाजपा के अन्य नेताओं ने बूथस्तर के कार्यकर्ता रमेश पचारिया के घर में जमीन पर बैठ कर पत्तल के दोने में भोजन किया. पानी के लिए मिट्टी से बना सिकोरा रखा गया था. परिवार के लोगों ने सभी मेहमानों की पूरी आवभगत की. भाजपा दिग्गजों का पारंपरिक स्वागत किया गया और उन्हें देखने के लिए पचारिया के घर के चारों ओर सैकड़ों स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा. भाजपा के एक कार्यकर्ता ने बताया कि अमित शाह ने पचारिया के घर 25-30 मिनट बिताए. भाजपा अध्यक्ष को भोजन में चावल, दाल, चपाती, भिंडी की सब्जी, राजस्थान की मशहूर गट्टे की सब्जी और खीर परोसी गई. इसके अलावा हलवे का भी इंतजाम था. पचारिया ने कहा कि मेहमानों के लिए खाना उनकी मां ने पकाया. सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र से विधायक और सामाजिक अधिकारिता मंत्री डॉ अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष एक बूथ स्तर के कार्यकर्ता के घर भोजन करने आए, इससे पार्टी, विशेष तौर पर निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा. चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी ने अपने इस बूथ लेवल के कार्यकर्ता के घर का चयन उसके सक्रिय कार्यों के आधार पर किया, न कि उसकी जाति या वर्ग को देखकर. उन्होंने कहा, हम अपने कार्यकर्ताओं को उनके कामों के आधार पर पहचान देते हैं, न कि उनकी जाति या उनके वर्ग को देखकर. पार्टी के कामों में पचारिया की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए उसके घर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भोजन करने का कार्यक्रम बनाया गया. अमित शाह का तीन-दिवसीय जयपुर दौरा रविवार को संपन्न हो गया. उनके इस दौरे का मकसद राज्य में पार्टी को बूथ स्तर पर और मजबूती प्रदान करना था. राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव दिसंबर, 2018 तक होने की उम्मीद है.

आर्मी टैंक खड़ा करने से जागेगी जेएनयू में देशभक्ति: जेएनयू VC

नई दिल्ली। दिल्ली के चर्चित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में रविवार को कारगिल विजय दिवस का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में भाषण देते हुए जेएनयू के कुलपति एम. जगदीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जनरल वीके सिंह से विश्वविद्यालय को एक सैन्य टैंक दिलवाने में मदद का अनुरोध किया.

जगदीश कुमार ने कहा कि टैंक को विश्वविद्यालय में डिस्प्ले के लिए रखा जाएगा जिससे छात्रों में राष्ट्रभक्ति जगाने के लिए प्रेरित किया जायेगा. कुलपति जगदीश कुमार ने अनुरोध किया कि अगर टैंक विश्वविद्यालय परिसर में रखा जाता है तो छात्रों को लगातार सैनिकों के बलिदान और साहस का स्मरण होता रहेगा.

बता दें की जेएनयू में पहली बार कारगिल विजय दिवस का आयोजन किया गया था. जेएनयू कैंपस में एक सैन्य टैंक को रखने का विचार 9 फरवरी, 2016 को आयोजित उस कार्यक्रम के बाद ही आया है जिसमें कथित रूप से भारत विरोधी नारे लगने के कारण छात्रों को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

जेएनयू में रविवार को ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया गया था. साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों की शहादत की याद में ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जाता है. गौरतलब है कि पिछले साल कथित भारत-विरोधी नारेबाजी के कारण जेएनयू विवादों में घिरा रहा था.

जेएनयू के शिक्षकों और छात्रों ने कारगिल के शहीदों के परिजन और पूर्व सैनिकों के संगठन ‘वेटरंस इंडिया’ के सदस्यों के साथ 2,200 फुट लंबा तिरंगा लेकर एक मार्च निकाला. कार्यक्रम में थलसेना बैंड का भी एक कार्यक्रम हुआ. इस मौके पर, कारगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिवार की महिला सदस्यों को सम्मानित किया गया.

जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार ने कार्यक्रम को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और कहा कि यह थलसेना और देश के अन्य सुरक्षा बलों के बलिदान को याद करने के लिए एक अहम दिन था.

जेएनयू के मेन गेट से शुरू हुए तिरंगा मार्च में दो केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और जनरल वी के सिंह ‘वेट्रंस इंडिया’ के मेंटर मेजर जनरल जी डी बख्शी और क्रिकेटर गौतम गंभीर भी शामिल हुए. कार्यक्रम में तमाम लोगों ने हिस्सा लिया और 2,200 फीट लंबे तिरंगे को मेन गेट से कन्वेंस सेंटर तक करीब दो किलोमीटर लेकर गए. मार्च में 23 शहीदों के परिजनों ने भी भाग लिया.

 

जातिवादी गुंडों ने दलित को नंगा कर पीटा, कुकर्म का भी किया प्रयास

हिसार। भाजपा राज में दलितों पर अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है. यूपी, एमपी के बाद अब घटना हरियाणा के हिसार की है. हांसी-बरवाला मार्ग पर घिराय गांव के खेतों में चैनत गांव के एक दलित युवक की जातिवादी गुंडे द्वारा खेत से गुजरने पर नंगा करके पिटाई करने का मामला सामने आया है. जातिवादियों की मारपीट से घायल युवक ने हांसी के सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान जातिवादी गुंडों पर कुकर्म के प्रयास का भी आरोप लगाया है. पीड़ित की गंभीर हालत को देखते हुए उसे हिसार रेफर कर दिया गया है. चैनत गांव के रहने वाले दलित ने अस्पताल में उपचार के दौरान घटना की जानकारी दी. उसने बताया कि वह खेतीबाड़ी का काम करता है. वह शनिवार(22 जुलाई) की शाम को खेत से चारा लेकर घर आ रहा था. रास्ते में उच्च जाति के लोगों ने खेत से निकलने की बात कहकर उसे पकड़ लिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी. युवक ने बताया कि जातिवादी गुंडों ने उसके कपड़े उतारकर उसे निर्वस्त्र कर दिया. युवक ने आरोप लगाया कि उसके साथ कुकर्म का प्रयास भी किया गया. जातिवादियों के चंगुल से निर्वस्त्र अवस्था में निकलकर वह किसी तरह गांव में पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी. युवक के भाई ने बताया कि पीड़ित भाई को घायल हालत में सरकारी अस्पताल में ले जाया गया जहां गंभीर हालत होने पर उसे हिसार रेफर कर दिया गया. नजदीक के घिराय गांव में दलित युवक से मारपीट की घटना के बाद घायल युवक को इलाज के लिए हांसी व सिसाय गांव के सरकारी अस्पताल में दो-तीन घंटे तक भटकना पड़ा. इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में पहुंचे युवक को सिसाय गांव के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र का क्षेत्र होने की बात कर हांसी के सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने सिसाय भेज दिया. सिसाय के डाक्टरों ने घटना का क्षेत्र हांसी के अंतर्गत होने की बात कर हांसी भेज दिया. इसके बाद घायल युवक इलाज के लिए फिर हांसी के सरकारी अस्पताल में पहुंचा. ड्यूटी पर तैनात डाक्टरों द्वारा इलाज करने से इंकार करने के बाद मीडिया के दबाव के बाद डाक्टरों ने करीब तीन घंटे बाद युवक का प्राथमिक उपचार किया और गंभीर हालत होने पर उसे हिसार रेफर कर दिया. पंजाब केसरी के मुताबिक सदर थाना प्रभारी उदयभान ने बताया कि घिराय गांव में दलित युवक को निर्वस्त्र कर मारपीट के मामले को लेकर कोई लिखित या मौखिक शिकायत थाने में नहीं पहुंची है. अब जानकारी मिली है तो पुलिस खुद अस्पताल में उपचाराधीन युवक के बयान दर्ज कर अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्रवाई करेगी.

महिला विश्वकपः फाइनल में इंग्लैंड ने भारत को 9 रन से हराया

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लोर्ड। महिला वर्ल्ड कप के रोमांचक फाइनल में इंग्लैंड ने भारत को 9 रन से मात देकर खिताब पर एक बार फिर अपना कब्जा जमा लिया. यह दूसरी बार है, जब भारत की टीम वर्ल्ड कप फाइनल में हारी है. इससे पहले 2005 में टीम इंडिया वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में हारी थी. भारतीय टीम इस मैच में इंग्लैंड पर हावी थी, लेकिन पूनम राउत (86) के आउट होने के बाद भारत के विकेट जल्दी-जल्दी गिर गए और भारत की टीम 219 पर ऑल आउट हो गई. इस तरह इंग्लैंड ने चौथी बार वर्ल्ड कप खिताब पर अपना कब्जा जमाया. इंग्लैंड की तेज गेंदबाज आन्या शर्बसोल ने इस मैच का रुख पूरी तरह से मोड़ दिया. उन्होंने इस मैच में 6 विकेट हासिल किए. भारत ने अपने अंतिम 7 विकेट 28 रन के अंतराल पर गंवा दिए. इससे पहले 229 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. भारत का स्कोर 5 रन ही था कि स्मृति मंधाना (0) खाता खोले बगैर पविलियन लौट गईं. इसके बाद पूनम राउत ने कैप्टन मिताली राज के साथ पारी को संभाला. लेकिन जब भारत का स्कोर 43 रन था, उस वक्त रन चुराने के प्रयास में कैप्टन मिताली राज (17) रन आउट हो गईं. इसके बाद स्टार बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर ने पूनम के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया. दोनों बल्लेबाजों ने अपना अनुभव झोंकते हुए तीसरे विकेट के लिए मिलकर 95 रन जोड़े. चौथे विकेट के रूप में हरमन (51) जब आउट हुईं, तो भारत की जीत लगभग तय लग रही थी. पूनम ने एक छोर को बेहतर ढंग से संभाल कर रखा हुआ था और वेदा के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ा रही थीं. इस बीच शर्बसोल की एक गेंद पूनम के पैड से जा लगी. अंपायर ने इस पर LBW आउट दे दिया. पूनम के आउट होने के बाद वेदा कृष्णमूर्ति पर भारत को जीत तक ले जाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाईं. भारत का लोअर ऑर्डर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुआ और उसने जीती हुई बाजी गंवा दी. पूनम के आउट होने के बाद भारतीय टीम के विकेट लगातार अंतराल के बाद गिरने लगे. 191 पर चौथा विकेट गंवाने वाली भारतीय टीम ने 201 तक पहुंचते- पहुंचते 7 विकेट गंवा दिए. इसके बाद 218 के स्कोर पर शिखा पांडे भी रन आउट हो गईं और भारत जीत से दूर रह गया. इससे पहले टॉस जीतकर पहले ब्ल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड ने 50 ओवर में 7 विकेट गंवाकर 228 रन बनाए. इंग्लैंड को लॉरेन विनफील्ड (24) और टैमी बेयुमोंट (23) ने सधी हुई शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए 47 रन जोड़े. मजबूत दिख रही इंग्लैंड अचानक से बिखर गई और उसने 63 के कुल स्कोर तक अपने 3 अहम विकेट खो दिए. भारत को पहली सफलता राजेश्वरी गायकवाड़ ने दिलाई. उन्होंने विन्फील्ड को पांव के पीछे से गेंद को घूमाते हुए बोल्ड मारा.

 मायावती ने 2019 के लिए बनाया महाप्लान 

नई दिल्ली। मायावती के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद उनका पूरा ध्यान अब पार्टी को मजबूत करने पर है. 23 जुलाई को दिल्ली में मायावती इसके लिए पार्टी के सभी दिग्गज नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक भी कर चुकी हैं. इस बैठक में बहन जी ने अपना महाप्लान तैयार कर लिया है.

मायावती 18 सितंबर से प्रदेश भर के दौरे पर निकलने जा रही हैं. इस दौरान वह पार्टी के कार्यकर्ताओं और सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों से मिलेंगी. बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने राज्यसभा से 18 जुलाई को इस्तीफा दिया था, इसलिए भी 18 तारीख को चुना गया है. इस कार्यकर्ता सम्मेलन को ‘जनचेतना और सत्ता प्राप्त करो’ मंडल स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का नाम दिया गया है. असल में बसपा सुप्रीमो मायावती के राज्यसभा से इस्तीफे के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर से गर्माहट आ गयी है. तो मायावती के प्रदेश भर के दौरे की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी भारी उत्साह है. बसपा कार्यकर्ता काफी पहले से बहनजी से पार्टी के छोटे-बड़े कार्यकर्ता के बीच जाने की मांग कर रहे थे. मायावती का यह दौरा प्रदेश में पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह फूंकने के लिए है. 18 सितंबर को मायावती मेरठ से अपने दौरे की शुरुआत करेंगी. हम महीने में दो मंडलों को मिलाकर एक सम्मेलन होगा, इस तरह कार्यकर्ता सम्मेलन का यह सिलसिला लगातार नौ महीने तक चलेगा. मायावती के महाप्लॉन का एजेंडा कुछ यूं है- कार्यकर्ता सम्मेलन का आगाज मेरठ औऱ सहारनपुर मंडल की संयुक्त बैठक से होगा. यह सम्मेलन मेरठ में होगा. दूसरे चरण में 18 अक्टूबर को मायावती वाराणसी-आजमगढ़ मंडल की बैठक लेंगी. यह वाराणसी में होगा. 18 नवंबर को तीसरे चरण में आगरा-अलीगढ़ मंडल की बैठक आगरा में होगी. चौथा सम्मेलन 18 दिसंबर को फैजाबाद-देवीपाटन मंडल को लेकर किया जाएगा. यह बैठक फैजाबाद के अयोध्या में बुलाई गई है. पांचवे चरण में बहनजी 18 जनवरी, 2018 को झांसी और चित्रकूट मंडल की बैठक लेंगी. यह झांसी में बुलाई गई है. 6वें चरण में मायावती 18 फऱवरी को इलाहाबाद-मिर्जापुर मंडल के कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलेंगी. यह बैठक इलाहाबाद में होगी. सातवीं बैठक मुरादाबाद-बरेली मंडल को लेकर बरेली में 18 मार्च, आठवीं बैठक गोरखपुर-बस्ती मंडल को लेकर 18 अप्रैल को गोरखपुर में जबकि नौवां और आखिरी कार्यकर्ता सम्मेलन लखनऊ-कानपुर मंडल को लेकर होगा. यह सम्मेलन लखनऊ में होगा. असल में 2019 में लोकसभा का चुनाव मायावती और बसपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है. 2014 में लोकसभा में कोई भी सीट नहीं जीत पाने की वजह से पार्टी का ग्राफ काफी तेजी से गिरा था तो विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद कार्यकर्ता भी निराश होने लगे थे. ऐसे में 2019 में बसपा प्रमुख और पार्टी के सभी दिग्गज नेताओं के सामने पार्टी के खोए हुए सम्मान को वापस लाने की चुनौती होगी. साथ ही उन तमाम पुराने सहयोगियों को करारा जवाब भी देना होगा, जो पार्टी के बुरे वक्त में पार्टी का साथ छोड़कर चले गए थे.

12% जीएसटी के विरोध में पीएम मोदी को भेजा सैनेटरी नैपकिन

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नई दिल्ली। सैनेटरी नैपकिन पर 12 प्रतिशत जीएसटी को लेकर विरोध जारी है. अब तमिलनाडु के कोयंबट्टूर में रेवोल्यूशनरी यूथ फ्रंट के सदस्यों ने जीएसटी का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को सैनेटरी नैपकिन के पार्सल भेजे हैं.

बता दें कि कुछ संस्थानों द्वारा और सोशल मीडिया पर सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी लगाने का विरोध किया जा रहा है. इस मसले को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब भी मांग है.

सैनेटरी नैपकिन पर टैक्स कम करने की मांग करने वालों का कहना है कि यह महिलाओं की मूलभूत जरूरत है. अगर ये महंगे होंगे तो महिलाएं इसे नहीं खरीद पाएंगी.

अप्रैल में शी सेज नाम की एक संस्थान ने सोशल मीडिया पर ‘लहू का लगान’ नाम से एक कैंपेन भी शुरू किया था. इसमें सैनेटरी नैपकिन को कर मुक्त करने की मांग की गई थी.

कई राजनीतिक दलों ने भी सैनेटरी नैपकिन पर लगने वाले कर का विरोध किया था. एमएनएस नेता शालिनी ठाकरे ने इस इस मसले को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात भी की थी.

वहीं, इस बीच देश में कई जगहों पर सैनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाने का भी फैसला किया गया है. 17 मई को केरल सकार ने फैसला किया है कि हर स्कूल में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाई जाएंगी.

लालू-राबड़ी की सुविधा में हुई कटौती

पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक ओर परिवार के सदस्‍यों पर सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग बेनामी संपत्ति व भ्रष्टाचार मामले में शिकंजा कस रहा है, वहीं अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी लालू प्रसाद यादव एवं उनकी पत्नी राबड़ी देवी को एयरपोर्ट पर दिये विशेषाधिकार को वापस ले लिया.

दोनों नेताओं को बिहार का पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण अब तक पटना हवाई अड्डे पर सीधे पहुंचने के लिए ‘विशेषाधिकार’ प्राप्त था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की इस कार्रवाई के बाद अब लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को पटना एयरपोर्ट के ‘टारमैक’ तक जाने के लिए आम लोगों की तरह सुरक्षा जांच के बीच से गुजरना होगा. यानी एयरपोर्ट पर उन्हें एक वीवीआइपी होने का लाभ नहीं मिलेगा.

इनकम टैक्स ने 16 मई को सुबह लालू प्रसाद यादव के 22 ठिकानों पर छापेमारी की थी. यह छापे बेनामी संपत्ति के मामले में मारे गए हैं. इनकम टैक्स ने सुबह 8.30 बजे से छापेमारी कर रही थी. इनकम टैक्स ने दिल्ली, गुड़गांव के इलाकों में छापेमारी की, इस दौरान लगभग 1000 करोड़ की संपत्ति पर छापेमारी की गई थी. जिसके बाद मीसा भारती से घंटो पूछताछ भी की गई थी.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती भी कई आरोपों में घिरी हुई है. उनके पति के सीईओ राजेश पर शेल कंपनियो के जरिए काले से सफेद धन करने का आरोप है. इसमें कई कंपनियों के जरिए काला धन घुमाया जाता था. वहीं पैसों को काले से सफेद करने के बदले कमीशन लिया जाता था. लालू के दामाद शैलेश और बेटी मीसा की कंपनी मिशेल को भी शेल कंपनियों के जरिए पैसा दिलाया था. इसके तहत 90 लाख रुपये की रकम राजेश अग्रवाल ने शेल कंपनियो में नगद जमा कराई थी.

इससे पहले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव को फिर से तगड़ा झटका लगा है. आवंटित पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद्द कर दिया गया था. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने साल 2011 में तेज प्रताप यादव को पटना के बाईपास इलाके में पेट्रोल पंप चलाने का लाइसेंस दिया था.