दलित बच्ची को मैला उठाने के लिए किया मजबूर
छतरपुर। भारत में समानता की बातें तो की जा रही हैं लेकिन वास्तविक रूप में दलितों के साथ आज भी भेदभाव जारी है. देश में जहां स्वच्छ भारत की बात और हाथ से मैला उठाने का विरोध हो रहा है. ऐसे में मध्यप्रदेश के छतरपुर में दलित लड़की से मल उठवाने का मामला सामने आया है.
छतरपुर जिसे के लवकुश नगर तहसील के गुधोरा में स्थित स्कूल के बाहर एक ऊंची जाति के व्यक्ति ने छह साल की दलित लड़की को उसी का मल उठाने का मजबूर किया.
दरअसल, सोमवार (21 अगस्त) को शासकीय प्राथमिक पाठशाला में पहली कक्षा में पढ़ने वाली नत्थू अहिरवार की बेटी को विद्यालय में शौचालय न होने की स्थिति में खाली स्थान पर शौच के लिए जाना पड़ा. इसे गांव के उच्च जाति के पप्पू सिंह ने देखा तो वह बालिका पर भड़क उठा. पप्पू ने बालिका से हाथों से मैला उठाकर दूसरे स्थान पर फेंकने को कहा. पहले बालिका काफी रोई, मगर बाद में उसने मैला अपने हाथों से उठाकर फेंका.
इस घटना की जानकारी बच्ची ने अपने माता-पिता को दी. इसके बाद दलित समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ वे पुलिस स्टेशन पहुंचे और पप्पू सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में पप्पू सिंह के खिलाफ गैरकानूनी अनिवार्य श्रम, जानबूझकर अपमान, अशांति भड़काने का उद्देश्य और किशोर न्याय के प्रासंगिक कानूनों (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.
लवकुश नगर पुलिस स्टेशन प्रभारी जेडवाई खान ने बताया कि यह घटना सोमवार शाम की है. बच्ची अपने स्कूल शिक्षक से अनुमति लेकर सरकारी प्राथमिक स्कूल के पास खुले में शौच के लिए गई थी. आरोपी के खिलाफ एससीएससी एक्ट और किशोर अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है, आरोपी की तलाश जारी है
सरकारी गौशाला में गायों की मौत पर चुप क्यों है भाजपा-संघः मायावती
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि यूपी में सुशासन के बुरे हाल के कारण इंसानी जान-माल खतरे में है. यहां तक की गायों को भी दयनीय स्थिति हो गई. भ्रष्टाचार के कारण उन्हें भूखा-प्यासा तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है. अब आरएसएस या अन्य संगठन सरकार से इसका हिसाब क्यों नहीं मांग रहा है?
हाल ही में भाजपा शासित दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकारी गौशालाओं में सैकड़ों गायें मरने पर मायावती ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संघ और भाजपा के अत्याचरी लोग गौ संरक्षण के नाम पर दलित-मुस्लिम समाज के लोगों के साथ मारपीट करते हैं. यही नहीं गौ संरक्षण के नाम पर वे लोग हत्याएं भी कर देते है. भाजपा और संघ के लोग इसे ही धर्म की सेवा समझते हैं. भाजपा और संघ के लोगों ने देश में आतंक का माहौल बना रखा है.
बसपा सुप्रीमों ने सवाल उठाया है कि भाजपा शासित राज्यों हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि में सरकारी धन का गबन करके बेजुबान ‘‘गौमाताओं‘‘ पर जो क्रूरता की जा रही है, उसके प्रति भाजपा सरकार जवाबदेह क्यों नहीं है? ऐसी सरकारों की जवाबदेही आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेतागण क्यों नहीं कर रहे है? उन्होंने आगे सवाल उठाया है कि वैसे तो ’गौमाता’ को भी राममंदिर की तरह राजनीतिक, साम्प्रदायिक और जातिवादी मुद्दा बना दिया है, लेकिन गौसेवा के मामले में इतनी क्रूरता और लापरवाही क्यों?
मायावती ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की निंदा भी की. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यालय में प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. उस बैठक की मोदी ने अध्यक्षता भी की. लेकिन देशहित के मुद्दों और गौसेवा मुद्दों पर चर्चा नहीं की. यह बहुत निंदनीय और दुखद है.बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार गौसेवा से संबंधित योजनाओं की स्थिति और इसमें हो रहे भ्रष्टाचार की समीक्षा करें. उन्होंने भाजपा सरकारों को नसीहत कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाकर गौशालाओं को बूचड़खाना बनने से रोके. भाजपा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों की धार्मिक भावनायें आहत होने से रोके.
मायावती ने कहा कि भाजपा अपने गुप्त एजेंडे पर काम कर रही है. भाजपा सरकारों की जातिवादी और सांप्रदायिक नीतियां पूरे देश के दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों को गुलाम बनाकर डर के साये में रखना चाहती है. लेकिन दलित और मुस्लिम समाज के लोग अपना रास्ता खुद निकालने में सक्षम है क्योंकि उन्हें भाजपा से इंसाफ मिलने की उम्मीद न तो पहले थी और ना तो अब है. उन्होंने कहा कि भाजपा से मुकाबला करने के लिए बसपा संघर्षरत है और आने वाले दिनों में अपने इस संघर्ष को गति देगी. आने वाले बसपा भाजपा का डट के मुकाबला करेगी.
जातिवादी गुंडो ने की दलित किसान की हत्या, दलितों ने किया चक्का जाम
बक्सर। बक्सर के लक्ष्मीपुर गांव में कुछ जातिवादी गुंडों ने दलित किसान की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी. हत्या की सूचना से इलाके में सनसनी मच गयी है. हत्या की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाने की पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची. दलित समुदाय ने इस नृशंस हत्या के विरोध में सड़क पर जाम कर दिया.
लक्ष्मीपुर गांव के रहने वाले गुलाब राम (60) का मंगलवार की रात से अपहरण कर लिया गया था. जिसका शव गांव के ही बाजार में एक बोरिंग के पास क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया है. मृतक के बेटे बृजबिहारी राम का कहना है कि गांव के ही कुछ जातिवादियों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. यह घटना उसी विवाद में अंजाम दिये जाने की बात कही जा रही है.
हत्या की खबर पाकर सैकड़ों दलित एकत्रित हो गये. निर्मम तरीके से की गयई हत्या से लोग आक्रोशित हो उठे. इसके बाद बक्सर-चौसा मार्ग को जामकर नारेबाजी की. सड़क जाम को खाली कराने के लिए सदर एसडीओ गौतम कुमार व टाउन डीएसपी शैशव यादव पहुंचे हैं. दलित ग्रामीणों ने मांग की कि पुलिस प्रशासन जल्द से जल्द आरोपी का पता लगाकर गिरफ्तार करें.
बहरहाल पुलिस इस हत्या के कारणों के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर रही है. थानाध्यक्ष आदित्य पासवान का कहना है कि मृतक के बेटे के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की खोज की जा रही है.
पुजारी ने पोस्टर लगवा दलितों को दी धमकी- रामायण पाठ के दौरान घर से बाहर न निकले
हमीरपुर। दलितों के साथ हमेशा से भेदभाव होता आया है और अब भी हो रहा है. लेकिन हर बार भेदभाव के तरीके अलग होते हैं. कभी दलितों को खेत में घुसने नहीं दिया जाता, कभी सवर्णों के मोहल्ले से गुजरने पर पाबंदी होती है तो कभी मंदिर में जाने से रोका जाता है. इसके अलावा भी कई तरीके से दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है.
यूपी के हमीरपुर में कुछ इसी तरह का भेदभाव सामने आने आया है. घटना हमीरपुर जिले के मौदाहा कस्बे के गदाहा गांव की हैं, जहां 10 दिन तक रामायण पाठ होना है. लेकिन इस पाठ के शुरू होने से पहले ही विवाद हो गया है.
दरअसल, इस गांव के राम जानकी मंदिर के पुजारी ने मंदिर के बाहर पोस्टर चिपका दिया है, जिसमें दलितों को रामायण पाठ के दौरान मंदिर में न आने चेतावनी दी गई है. इस पर गांव के दलित समुदायों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक कार्य से उन्हें दूर रहने को कहा गया हो. इस पर विस्तार से बताते हुए दलित समुदाय के लोगों का कहना था कि ऐसी मान्यता है कि दलित बुरा संयोग लेकर आएंगे.
मंदिर के पुजारी ने इससे पहले भी मंदिर के बाहर चेतावनी भरे अंदाज में 10 दिनों तक रामायण पाठ के दौरान घर से बाहर नहीं निकलने के लिए कहा था. इस विवाद पर बात करते हुए एक स्थानीय गुरु प्रसाद आर्य का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब दलितों को मंदिर में आने से रोका गया हो.
एसडीएम सुरेश कुमार ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जाएगी. पुजारी की भूमिका अगर इसमें पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी.
दिल्ली, गोवा और आंध्र प्रदेश की 4 सीटों पर उपचुनाव आज, केजरीवाल-पर्रिकर मैदान में
नई दिल्ली। देश के राज्यों में 4 विधानसभा सीटों पर बुधवार को उपचुनाव हो रहे हैं. आज आंध्र प्रदेश में नंदयाल, गोवा में पणजी व वालपोई और दिल्ली में बवाना विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. बवाना और पणजी सीटों पर पूरे देश की नजर रहेगी. बुधवार को मतदान शाम पांच बजे तक होगा और इसके नतीजे 28 अगस्त को आएंगे.
चुनाव आयोग इन सभी सीटों पर ईवीएम और वीवीपैट के जरिए मतदान करा रहा है. दिल्ली की बवाना सीट पर जहां कांग्रेस के लिए एक बड़ा मौका है, वहीं आप आदमी पार्टी के लिए खुद को साबित करने की कड़ी चुनौती है. आम आदमी पार्टी के विधायक वेद प्रकाश के इस्तीफा देने के कारण बवाना सीट खाली हुई है. इस्तीफा देने के बाद वेद प्रकाश ने भाजपा का दामन थाम लिया है. आप ने इस सीट पर रामचन्द्र को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेन्द्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है.
सबसे मजेदार जंग इन उपचुनाव में गोवा में देखने को मिल रही है. यहां मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर पणजी विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार है. पर्रीकर के खिलाफ सीट से कांग्रेस के गिरीश चोडांकर और गोवा सुरक्षा मंच (जीएसएम) के आनंद शिरोडकर खड़े हैं. भाजपा विधायक सिद्धार्थ कुनकालीनेकर के हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने के कारण पणजी विधानसभा खाली हुई है. वहीं कांग्रेस विधायक विश्वजीत राणे के त्यागपत्र देने के कारण वालपोई विधानसभा सीट रिक्त हुई है.
वोट डालने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर सुबह ही पहुंच गए और लाइन में लगकर वोट दिया. वोट डालने के बाद जब उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा, ‘कोई अनुमान नहीं है, लेकिन हमें अपनी जीत पर विश्वास है.’ हालांकि कुछ दिनों पहले जब उनसे पूछा गया, अगर वह चुनाव हार गए तो क्या करेंगे, तो उन्होंने कहा था कि फिर से केंद्र में रक्षा मंत्रालय संभाल लेंगे.
इधर आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम पार्टी के विधायक भुमा नागिरेड्डी के निधन होने के कारण नांदयाल सीट खाली हुई, जिसकी वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है. यहां उपचुनाव में मतदाताओं के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. मतदान केंद्रों के बाहर लंबी-लंबी कतारे नजर आ रही हैं.
यूपी में एक हफ्ते में दो बड़े ट्रेन हादसेः रेल के 12 डिब्बे पटरी से उतरे, 74 यात्री घायल
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के औरैया जिला स्थित अछल्दा और पाता रेलवे स्टेशन के बीच कैफियत एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. मानव रहित फाटक पर फंसे डंपर से टकराने के चलते कैफियत एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे में 74 लोग घायल हो गए हैं, जिसमें 4 की हालत गंभीर बनी हुई है.
रेलवे बुलेटिन के अनुसार आज हुए ट्रेन हादसे की वजह से हावड़ा नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को दूसरे मार्ग से भेजा गया है. और कानपुर नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस समेत सात रेलगाड़ियों का संचालन निरस्त कर दिया गया है. इस हादसे के बाद इस रूट से गुजरने वाली 40 रेलगाड़ियों के रूट बदले गए हैं.
रेलवे ट्रैक पर से कैफियत एक्सप्रेस के डिब्बे हटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू करा दिया जाएगा. आइए कैंसिल और रूट डायवर्ट हुए ट्रेनों की लिस्ट देखते हैं.
सुबह गृह विभाग के सचिव भगवान स्वरूप ने लखनऊ में कहा था कि यह हादसा फाटक रहित रेलवे क्रॉसिंग पर नहीं हुआ बल्कि पटरी के समानांतर सड़क पर डंपर के पलटने की वजह से हुआ है.
पिछले एक हफ्ते में उत्तर प्रदेश में यह दूसरी ट्रेन दुर्घटना है. इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर में कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी. उस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई थी और 156 यात्री घायल हो गए थे.
भाजपा विधायक के बिगड़े बोल- बोला हिंदू इलाकों में मुसलमानों को नहीं दिया जाए घर
नई दिल्ली। गुजरात की एक भाजपा विधायक ने अपने जिलाधिकारी को पत्र लिख एक विवादित मांग की है. विधायक ने पत्र में लिखा है कि किसी भी मुस्लिम व्यक्ति को हिंदुओं के पड़ोस में घर नहीं दिया जाए.
भाजपा विधायक संगीता पाटिल ने अपने विधानसभा क्षेत्र लिम्बयात में ‘डिस्टर्बड एरिया एक्ट’ लागू करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि इस इलाके के लोगों ने जनप्रतिनिधि के तौर पर मुझे चुना है, इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, यह मेरा दायित्व बनता है.
संगीता पाटिल ने मांग करते हुए लिखा कि इस एक्ट के लागू होने के बाद कोई भी मुस्लिम हिंदू के पड़ोस में घर नहीं खरीद सकेगा. फाइनेंशियल एक्सप्रेस में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक इसके पीछे इलाके में घटी कुछ घटनाओं को बताया जा रहा है. अन्य राजनीतिक पार्टियां पाटिल की इस मांग को गलत ठहरा रही हैं. अपनी इस मांग का बचाव करते हुए पाटिल ने आरोप लगाया कि मुसलमान हिंदू सोसायटी में घर खरीदने के लिए हर प्रकार की चालाकी का उपयोग करते हैं. इतना ही नहीं घर बुक करने के लिए वे लोगों को धमकी भी देते हैं.
पाटिल ने लिखा कि हिंदू एरिया में घर लेने के लिए मुसलमान हिंदू इलाकों में घर लेने के लिए काफी ऊंचे दाम भी देते हैं. उन्होंने लिखा कि सूरत के कई इलाकों में यह कानून लागू हैं, शेष इलाके में इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सूरत का लिम्बयात इलाका पहले केवल एक हिंदू इलाका हुआ करता था लेकिन अब वहां पर मुसलमानों का प्रभुत्व है.
पाटिल ने कहा कि जिस तरह से घर लेने के लिए मुस्लिम चालाकी दिखाते हैं और हिंदुओं को प्रताड़ित करते हैं इसलिए ही मैं चाहती हूं कि हिंदू इलाकों में डिस्टर्बड एरिया एक्ट लागू किया जाए, ताकि हिंदुओं के खिलाफ कोई हिंसा न हो पाए. उन्होंने लिखा कि मैं जिलाधिकारी महोदय से निवेदन करती हूं कि वे इस एक्ट को लागू करें क्योंकि इन इलाकों के रहने वालों ने मुझे अपना प्रतिनिधी बनाया है इसलिए उनकी परेशानी दूर करना मेरा कर्तव्य है.
ब्रांड Nike पर फूटा विराट कोहली का गुस्सा
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) और कप्तान विराट कोहली ने टीम के आधिकारिक प्रायोजक नाइकी द्वारा मुहैया कराई गयी निम्न स्तरीय किट पर नाखुशी व्यक्त करते हुए इस मुद्दे को सीओए के समक्ष उठाया है. भारतीय क्रिकेट टीम के साथ नाइकी 2006 से जुड़ा हुआ है और दुनिया की सबसे बड़ी खेल सामान बनाने वाली कंपनी है. बीसीसीआई के अधिकारियों राहुल जौहरी और रत्नाकर शेट्टी ने सर्वाेच्च अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के समक्ष नाइकी की शिकायत की है.
वहीं समिति के अध्यक्ष विनोद राय ने इस मसले पर ङ्क्षचता व्यक्त की है. नाइकी इंडिया ने 2016 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने प्रायोजन को 2020 तक बरकरार रखने के लिए 370 करोड़ रूपये की राशि भुगतान की थी. नाइकी का करार एक जनवरी 2016 से 30 सितंबर 2020 तक का है और वह प्रति मैच टीम को 87 लाख 34 हजार रूपये का भुगतान करती है.
बोर्ड ने भी कहा है कि वह जल्द ही इस मसले पर नाइकी के अधिकारियों से मुलाकात कर मामले को सुलझाने का प्रयास करेगी. इस बीच भारतीय टीम की जर्सी पर स्मार्ट फोन बनाने वाली चाइनीका कंपनी ओप्पो का नाम बतौर प्रायोजक रहेगा जिसने टीम को पांच वर्षाें के लिए 1079 करोड़ रूपये का भुगतान किया है.
यहां पेड़ों पर रहते हैं आदिवासी…
पापुआ। दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों में कई जनजातियां मौजूद हैं, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए किसी रहस्य से कम नहीं हैं. चाहे वो अफ्रीकन आदिवासी हों या फिर अमेजन की अलग-अलग जनजातियां.
ऐसी ही एक रहस्यमय जनजाति इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत के घने जंगलों में पेड़ों पर घर बनाकर रहने वाली कोरोवाई है. इस जनजाति को नरभक्षी भी कहा जाता है. बता दें कि कोरोवाई जनजाति जिस क्षेत्र में निवास करती है, वो अराफुरा सागर से तकरीबन 150 किमी की दूरी पर स्थित है.
इन लोगों पर कई डॉक्युमेंट्री भी बनाई गई है. ऐसा कहा जाता है कि इस जनजाति के लोग अंधविश्वास को बहुत मानते हैं, जिसकी वजह इंसानों को भी खा जाते हैं. हालांकि, अब ऐसा कहा जाने लगा है कि एरिया में टूरिस्ट के आने के बाद अब इंसानी मांस खाने की प्रथा बंद हो चुकी है.
ये लोग जमीन से 6 से 12 मीटर ऊंचाई पर पेड़ों पर बने घरों में रहते हैं, ताकि इन पर कोई आक्रमण न कर सके और ये लोग बुरी आत्माओं से भी बचे रहें. इस जनजाति के लोग जीवनयापन करने के लिए शिकार करते हैं.
इनका निशाना बहुत बेहतर होता है. ये मछली पकड़ने में महारत हासिल किए होते हैं. पहली बार एक डच मिशनरी ने इस जनजाति की खोज 1974 में की थी, इससे पहले इनके बारे में कोई नहीं जानता था.
इसके बाद यहां पर लोगों का आना-जाना बढ़ता चला गया, जिसकी वजह से 90 के दशक में यहां वेश्यावृत्ति भी बढ़ने लगी. महिलाओं को जबरदस्ती खाना या किसी तरह की मूल्यवान चीज एक बदले टूरिस्ट के साथ सोने पर मजबूर किया जाता था.
हालांकि, सरकार की पहल के बाद 1999 में ये सब कुछ बंद हो गया. आज भी यहां महिलाएं मात्र बच्चे पैदा करने और घर में खाना बनाने के लिए ही रखी जाती हैं. लोगों के आने जाने के बावजूद भी इस जनजाति से जुड़े लोगों का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है.
हरिभूमि के मुताबिक यहां के लोगों को पता भी नहीं था कि उनके जंगल से बाहर भी और लोग रहते हैं. आज के समय में कुल तीन हजार कोरोवाई लोगों के होने का आंकड़ा मौजूद है.
भारत की जीडीपी में आ सकता है 6.6 फीसद सुधार: नोमुरा
नई दिल्ली। अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर में 6.6 फीसद की दर से मामूली सुधार दिखने की उम्मीद है. जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान यह 6.1 फीसद रही थी, जो कि नोटबंदी के चलते प्रभावित थी. यह बात जापानी कंपनी नोमुरा की एक रिसर्च नोट में कही गई है.
नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में आर्थिक गतिविधियों, जिसने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) रोलआउट के चलते कुछ गति खो दी थी अब फिर से अपने ट्रैक पर आ रही हैं. इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जब उपभोग और सेवाओं के विकास सूचकांक (विशेषकर परिवहन) जुलाई में वापस अपनी लय में लौट आए थे तब निवेश और बाहरी क्षेत्र (एक्सटर्नल सेक्टर) के आंकड़े कमजोर रहे या उनका मार्जिन धीमा रहा. हालांकि, साल के अंत तक ग्रोथ के रिकवरी करने की उम्मीद है, क्योंकि इसे पुनर्निर्माण और बेहतर वित्तीय स्थितियों से सहायता मिलती दिख रही है.
रिसर्च नोट में कहा गया है कि जीएसटी के प्रभाव को देखते हुए और हमारे संकेतकों के अनुसार हम अप्रैल से जून तिमाही के दौरान जीडीपी विकास दर में 6.6 फीसद के साथ बेहतर रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं. यह जनवरी से मार्च के दौरान 6.1 फीसद रही थी जो कि नोटबंदी की वजह से प्रभावित हुई थी. हालांकि साल 2017 की दूसरी छमाही में हम उम्मीद कर रहे हैं कि विकास दर तेज बढ़ोतरी के साथ 7.4 फीसद हो सकती है.
अमेरिकी सेना के हवाई हमले में 42 लोगों की मौत, अधिकतर बच्चे और महिलाएं
रक्का। सीरिया के रक्का शहर में लंबे समय से आईएसआईएस के खिलाफ तमाम देशों ने जंग छेड़ रखी है. यहां आईएस के खिलाफ जंग की अमेरिका अगुवाई कर रहा है. अमेरिका की ओर से जारी हवाई हमले में मंगलवार को रक्का शहर में तकरीबन 42 लोगों की मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार रक्का में कुल 42 नागरिकों की अमेरिकी हवाई हमलों में मौत हुई है, जिसमें मरने वाले अधिकतर महिलाएं और बच्चें हैं.
सीरियन ऑब्जरवेटरी ने बताया कि इस हवाई हमलों में कम से कम 42 लोगों की मौत हुई है, जिसमें 19 बच्चे और 12 महिलाएं शामिल हैं. हालांकि, अमेरिका के नेतृत्व में अब इस शहर का 60 प्रतिशत हिस्सा आईएस के कब्जे से छुड़ा लिया गया है. अमेरिका के विशेष दूत ब्रैट मैकगर्क का कहना है कि अभी भी इस क्षेत्र में 2 हजार आईएस लड़ाके मौजूद हैं. आपको बता दें कि आईएस के खिलाफ यहां लड़ रही एसडीएफ को अमेरिकी सेना भारी समर्थन दे रही है, जिसके चलते लगातार जिहादियों पर हवाई हमले जारी हैं.
पिछले कुछ दिनों से संयुक्त सेना ने रक्का शहर में अपने हमलों को तेज किया है. सेना की कार्रवाई में कई लोगों की जानें गई हैं. आईएस को यहां से खदेड़ने के लिए यहां के कुर्दों के नेतृत्व वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस यानि एसडीएफ ने अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है. इस कार्रवाई में अभी तक सीरिया में कुल 3,30,000 लोग मारे जा चुके हैं. सीरिया में यह संघर्ष मार्च 2011 में शुरू हुआ था, यह संघर्ष सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था.
शिक्षामित्रों ने नहीं मानी बात, कल से करेंगे आमरण अनशन

यूपी की राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में अपनी मांगों को लेकर डटे शिक्षा मित्रों के तेवर कड़े हैं. मंगलवार(22 अगस्त) को शिक्षा मित्रों ने सरकार के फैसले को मानने से इनकार करते हुए आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि रणनीति में परिवर्तन करते हुए बुधवार से हम आमरण अनशन करेंगे. सड़कों पर उतरेंगे.
इस बीच मंगलवार दूसरे दिन प्रदेश के अन्य जिलों से भी तमाम शिक्षा मित्रों के आंदोलन स्थल पर पहुंचने से प्रशासन और सतर्क हो उठा है. सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास पुलिस बल बढ़ा दिया गया है. शिक्षा मित्रों के भारी जमावड़े के कारण लक्ष्मण मेला मैदान और निशातगंज के इर्द-गिर्द जाम की स्थिति है.
आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कहा कि ‘समान कार्य, समान वेतन से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं. सरकार ने हमारे साथ धोखा किया है. शिक्षा मित्र समान कार्य, समान वेतन की मांग रख चुके हैं. वहीं हम टीईटी से छूट के लिए केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं. शिक्षा मित्र नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार केंद्र पर दबाव बना कर इस संबंध में अध्यादेश लाए और शिक्षा मित्रों को शिक्षकों के तौर पर समायोजित करें. उन्होंने कल से आमरण अनशन करने की चेतावनी दी है.
सोमवार को राज्य सरकार ने शिक्षा मित्रों के संबंध में फैसला लिया है कि एक अगस्त से उन्हें शिक्षा मित्र मानते हुए 10 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा. वहीं उनके लिए शिक्षक की सेवा संबंधी नियमावली में संशोधन की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है. उन्हें प्रतिवर्ष ढाई अंक वेटेज देने का नियम बनाया है. यह वेटेज अधिकतम 25 अंकों का हो सकता है. शिक्षा मित्रों ने चेतावनी दी है और कहा है यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो शिक्षा मित्र सड़कों पर उतर आएंगे.
ध्यान रहे प्रदेश में आंदोलनरत शिक्षा मित्र अपने ऐलान के मुताबिक सोमवार को लखनऊ पहुंच गए थे. उन्होंने लक्ष्मण मेला मैदान पर डेरा डाल दिया था. हालांकि उनकी कोशिश विधानसभा तक पहुंचने की थी, पर पुलिस प्रशासन की तैयारियों के कारण इसमें वे सफल नहीं हो सके थे. इसके बावजूद उनके भारी जमावड़े के चलते पूरे दिन जाम की स्थिति बनी रही.
जानिए, बॉलीवुड में तीन तलाक का सफ़र
लखनऊ। एक बार में तीन तलाक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को संसद में तीन तलाक पर नियम बनाने का आदेश भले ही दे दिया हो लेकिन तीन तलाक के मामले में आज से 35 साल पहले ही मशहूर लेखिका अचला नागर ने अपनी कहानी के माध्यम से मुस्लिम समाज में फैली इस प्रथा का विरोध किया था.
1982 में आई फिल्म निकाह में तीन तलाक के मामले को उठाया जा चुका है. निर्देशक बीआर चोपड़ा के कहने पर अचला नागर ने ये पटकथा लिखी थी. इस फिल्म की खास बात ये थी कि रिलीज से पहले इस फिल्म का नाम तलाक, तलाक, तलाक रखा गया था लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से फिल्म का नाम निकाह रखा गया. सिर्फ निकाह ही नहीं और भी बॉलीवुड फिल्मों में तीन तलाक का जिक्र किया गया है.
1960 में आई गुरूदत्त और वहीदा रहमान की फिल्म चौदहवीं का चांद भी तलाक के मुद्दे को लेकर ही बनी थी. फिल्म को लोगों ने पसंद भी किया था. साल 1958 में फिल्म तलाक में राजेंद्र कुमार के जबर्दस्त अभिनय लोगों के दिलों पर छाप छोड़ गया. इस फिल्म में भी तीन तलाक का जिक्र किया गया था. इस फिल्म के लिये निर्देशक महेश कौल को फिल्मफेयर अवार्ड के लिये नामांकित भी किया गया था.तलाक के मामले को लेकर 29 सितंबर 2017 को फिल्म हलाल भी रिलीज की जायेगी. फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिवाजी लोटन पटेल बना रहे हैं. ये फिल्म रिलीज होने के पहले ही कई पुरस्कार अपने नाम कर चुकी है. तलाक जैसे संवेदन शील मुद्दों पर बनी ये फिल्म 53 वें महाराष्ट्र फिल्म समारोह में भी 6 पुरस्कार जीत चुकी है. वहीं एक शार्ट फिल्म जुल्म में भी तलाक जैसे मुद्ददे को उठाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक के मामले पर 6 महीने की रोक लगाते हुए संसद में तीन तलाक पर नियम बनाने का आदेश दिया है. वहीं तीन न्यायाधीशों ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया है. तो न्यायमूर्ति जेएस खेहर और अब्दुल नजीर असंवैधानिक घोषित होने के पक्ष में नहीं है.
तीन तलाकः मायावती ने किया फैसले का स्वागत, केंद्र से तय समय में कानून बनाने की मांग

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार को नसीहत दी है कि बिना कोई संकीर्ण और आरएसएस के एजेंडे की राजनीति किए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समय सीमा में ही तीन तलाक पर कानून बनाए.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 3-2 के बहुमत के फैसले से तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया है. उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से इस संबंध में छह महीने के भीतर कानून बनाने के लिये कहा है, जिसका समय से अनुपालन किया जाना चाहिये.
मायावती ने कहा कि यह अच्छा होता, यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड खुद ही तीन तलाक के मामले में कार्यवाही करता. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस बुराई की रोकथाम के लिये जितनी तत्परता से इस पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी वह नहीं की गई. इस कारण ही सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्द पर हस्तक्षेप करना पड़ा है. इस फैसले का सभी मुस्लिम महिलाओं के हित में स्वागत किया जाना चाहिए.
मायावती ने कहा कि देश में तीन तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला किया है, उसका बसपा दिल से स्वागत करती है.
पत्नी का दो कदम आगे चलना नहीं हुआ बर्दाश्त, सड़क पर ही पति ने दिया तलाक
रियाद। सऊदी अरब के एक आदमी ने अपनी पत्नी को इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि वह उसके आगे चल रही थी. पति ने उसे कई बार चेतावनी भी दी थी.
सऊदी अरब में पिछले कुछ वक्त में ऐसी अजीबोगरीब वजहों से तलाक के अधिक मामले सामने आए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जिस शख्स ने हाल में तलाक दिया है, उसकी पहचान सामने नहीं आई है, लेकिन उसने पत्नी को कई बार पीछे चलने को कहा.
कुछ वक्त पहले एक पुरुष ने पत्नी को इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि उसने डिनर के वक्त एक आइटम नहीं परोसा था. डिनर उसके पति ने अपने दोस्तों के लिए आयोजित किया था. दोस्तों के जाने के बाद पति, पत्नी पर गुस्सा हो गया और तलाक दे दिया.
एक अन्य मामले में पति ने इसलिए तलाक दे दिया था क्योंकि उसकी पत्नी हनीमून के वक्त पायल पहनना भूल गई थी. शादी कराने वाले हुमूद अल शिम्मरी के मुताबिक, पिछले दो सालों में तलाक के मामलों में बढ़ोतरी हुई है. उनके मुताबिक, तलाक कराने में मॉडर्न तकनीक की भी काफी भूमिका सामने आ रही है.
सऊदी अरब की एक सोशल कंसल्टेंट लतीफा हामिद के मुताबिक, परिवारों को अपने बच्चों को अच्छी तरह एजुकेट करना चाहिए. ताकि उनके भीतर साइकोलॉजिकल, सोशल और धार्मिक जागरुकता हो. इससे परिवार में होने वाले दिक्कतें कम होंगी.
अयोध्या मंदिर विवाद में जमीन मिले तो बनेगी ‘मस्जिद-ए-अमन’
लखनऊ। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने अयोध्या मामले एक और नया बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनी थी. शरीयत इजाजत नहीं देता कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनायी जाए. हमने विवादित परिसर से अलग जमीन मांगी है ताकि वहां मस्जिद बनायी जा सके.
वसीम रिजवी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि हम मानते हैं कि वहां मंदिर था उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई. पुरातत्व विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में यही कहा है. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड के नियमों के अनुसार मस्जिद की जमीन किसी और को ट्रांसफर नहीं की जा सकती. मौजूदा समय में वहां मस्जिद नहीं है. उस परिसर में राम की मूर्ति स्थापित है. वहां पूजा पाठ भी हो रहा है. वहां मूर्ति स्थापित हो गई तो उस जगह पर अब मस्जिद कैसे हो सकती है.
वसीम ने कहा कि मुगलों ने जबरन वहां मस्जिद बनाई थी. मीर बाकी ने बल प्रयोग करके मस्जिद बनायी और बाबर का नाम दे दिया. उन्होंने कहा कि हम जो नई जमीन पर मस्जिद बनाएंगे उसे ‘मस्जिद-ए-अमन’ नाम देंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अगर हमारे सुझावों पर ध्यान दिया और हमें नई जमीन मिली तो हम मस्जिद का नाम किसी आक्रांताओं के नाम पर नहीं रखेंगे.
रिजवी ने कहा कि हम और फसाद नहीं चाहते मस्जिद शिया है या सुन्नी इस पर इस पर वसीम बोले जब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पंजीकरण को ही चुनौती दी है तो मस्जिद उनकी कैसे. मीर बाकी शिया था इसलिए भी यह शिया मस्जिद है.
अपहरणकर्ताओं से लोहा लेने वाले दलितों पर सवर्णों ने किया हमला
सागर। बीना के बसाहरा गांव में एक दलित किशोरी का किडनैप करने का मामला सामने आया है. सवर्ण जाति के तीन लड़के 20 अगस्त की रात किशोरी का अपहरण कर ले जा रहे थे. जब लड़की शोर मचाने लगी तो गांव के लोगों ने उन अपहरण करने वालों को धर दबौचा और पुलिस को सूचित किया. लेकिन पुलिस ने गाड़ी में डीजल कम होने की बात कहकर आने से मना कर दिया.
जब घटना की जानकारी किडनैपर्स के घर तक पहुंची तो सवर्ण जाति के लोग इकट्ठा होकर उन्हें छुड़ाने पहुंचे. सवर्णों ने किडनैपर्स को पकड़ने वाले दलित ग्रामीणों पर रॉड और लाठी से हमला कर दिया और किडनैपर्स को छुड़ा कर ले गए. हमले में एक महिला सहित चार लोग घायल हुए हैं. इस घटना से गांव के दलितों में आक्रोश है. उनका कहना है कि समय पर पुलिस पहुंच जाती तो मारपीट नहीं हो पाती. इधर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है.
सोमवार (21 अगस्त) को बसाहरा गांव के करीब 100 लोग बीना पहुंचे. उन्होंने बीना थाना प्रभारी को लिखित शिकायत करते हुए बताया कि रविवार रात करीब 10 बजे गांव के तीन सवर्ण जाति के युवक महेंद्र राजपूत, दिब्बू राजपूत और विजय कुशवाहा घर में अकेली सो रही किशोरी का अपहरण कर घर के बाहर ले जा रहे थे.
चीख पुकार सुनकर मुहल्ले वालों ने तीनों युवकों को पकड़कर किशोरी को मुक्त कराया. इसके बाद उन्होंने 100 डायल को सूचना दी. लेकिन व्यस्त होने की बात कहकर 100 डायल मौके पर नहीं पहुंची. फिर खिमलासा थाने फोन किया तो पुलिस ने गाड़ी में डीजल कम होने की बात कहकर आने से इनकार कर दिया.
ग्रामीणों का आरोप है कि जब पुलिस नहीं पहुंची तो तीनों अपहरणकर्ता के परिजन पप्पू ठाकुर, नवल ठाकुर, सुरेंद्र और कमल सिंह ने किशोरी को बचाने वाले लोगों पर रॉड और डंडों से हमला कर दिया और तीनों युवकों को छुड़ा ले गए. हमले से एक महिला सहित चार लोगों को चोटें आई है.
एक की गर्दन तथा पैर में गंभीर चोटें आने पर उसे बीना के सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है. ग्रामीणों ने बीना पुलिस से शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है. इधर बीना थाना प्रभारी ने पीड़ित लड़की तथा परिजनों के बयान लेकर डायरी खिमलासा पुलिस थाना भेजने की बात कही है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर पुलिस पहुंच जाती तो किशोरी की मदद करने वालों के साथ जातिवादी गुंडे मारपीट नहीं कर पाते.
बीना के एएसपी पीएल कुर्बे ने कहा कि पूरी घटना की जांच की जाएगी. पीड़ित परिवार के बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी. दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

