दलित से मारपीट और जातिसूचक गाली देने के मामले में AAP नेता संजय सिंह की 26 को पेशी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता और प्रवक्ता संजय सिंह 24 अगस्त को अचानक एससी-एसटी कोर्ट पहुंचे. संजय सिंह दलित उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पिछले 10 साल से फरार चल रहे थे. गुरूवार को उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया.  एससी-एसटी कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए 26 अगस्त को फिर से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है.

दरअसल, संजय सिंह ने अपने साथियों के साथ दस साल पहले सदर तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में कार्यरत दलित लिपिक रामसागर के साथ मारपीट की और उन्हें जातिसूचक गालियां भी दी. रामसागर ने संजय सिंह और उनके साथ अनिल द्विवेदी और आशुतोष सिंह पर सरकारी कार्यालय में घुसकर मारपीट करने और दलित उत्पीड़न का मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज करवाया था.

पुलिस दर्ज एफआईआर के मुताबिक पांच जून 2007 को रजिस्ट्री कार्यालय में संजय सिंह अपने भाई की शादी का प्रमाण पत्र बनवाने गए थे. औपचारिकताएं अपूर्ण होने के कारण लिपिक ने दस्तावेज पूरा करने की बात कही. इसी बात पर रामसागर को संजय और उनके साथ में अनिल और आशुतोष ने जातिसूचक गालियां देकर पिटाई की.

तीनों के खिलाफ पुलिस ने 29 अगस्त 2007 को चार्जशीट दाखिल की थी. उसके बाद कोर्ट में उन्हें समन भेज कर तलब किया था. आरोपितों के हाजिर नहीं होने पर बीते साल तीन फरवरी से कोर्ट ने गभड़िया निवासी संजय सिंह, अनिल द्विवेदी तथा निरालानगर निवासी आशुतोष सिंह पर गैर जमानती वारंट जारी किया है.

घटना के समय संजय सिंह, सपा के पूर्व विधायक अनूप सण्डा के पीआरओ थे. संजय ने वारंट के बाद अधिवक्ता रुद्र प्रताप सिंह, अरविन्द सिंह राजा के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर किया. विशेष कोर्ट के जज उत्कर्ष चतुर्वेदी ने उन्हें अन्तरिम जमानत दी. साथ ही 26 अगस्त को फिर से हाजिर होने का आदेश दिया है. उस दिन नियमित जमानत पर सुनवाई होगी. मामले में अनिल द्विवेदी और आशुतोष सिंह अब भी हाजिर नहीं हुए हैं.

यौन शोषण मामले में राम रहीम दोषी करार, सेना की निगरानी में जाएंगे जेल

पंचकुला। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के मामले में सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने बाबा राम रहीम को दोषी करार दे दिया है. इस महीने की 28 तारीख को सजा का ऐलान होगा. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राम रहीम को अंबाला जेल में रखा जाएगा. हालांकि कोर्ट आने के दौरान राम रहीम के अंबाला समर्थकों ने पुलिस से झड़प की थी.

अब राम रहीम को सेना कड़ी सुरक्षा के बीच अंबाला जेल लेकर जाएगी. लेकिन अंबाला में समर्थकों के व्यवहार को देखते हुए राम रहीम को किसी अन्य जेल में भी बंद किया जा सकता है.

गौरतलब है कि हरियाणा के सिरसा और पंचकुला में हालात को देखते हुए गुरुवार रात से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 72 घंटों के लिए इंटरनेट, डाटा सर्विस सस्पेंड कर दी गई है. रेलवे ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान जाने वाली 74 ट्रेनों को रद्द कर दिया. रोडवेज ने कई रूट्स की बसें बंद कर दीं.

आज सुबह बाबा की गाड़ियां जैसे ही डेरे से कोर्ट के लिए निकलीं, कई भक्त उनकी गाड़ियों के आगे लेट गए, लोगों ने उन्हें आगे से हटाया. इसके बाद डेरे से काफिला रवाना हुआ. सिरसा से राम रहीम के रवाना होने के बाद उनके कई भक्त रो रहे थे तो कई बेहोश हो गए. शुक्रवार को जम्मू से पंजाब जाने वाली सभी ट्रेनों को अगले आदेश तक रद्द कर दिया गया है.

पंचकुला में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आर्मी के हेलिकॉप्टर से नजर रखी जा रही थी. कैथल में राम रहीम के समर्थकों ने करीब 40 मिनट तक काफिले को रोके रखा था. वे सड़क पर लेट गए और सुरक्षाकर्मियों को उन्हें हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.

पर्सनल लॉ बोर्ड पर बरसे बुखारी, कहा- मुसलमानों और शरिया का बनाया मजाक

नई दिल्ली। तीन तलाक पर कोर्ट का फैसला आ चुका है, जिसके बाद ही लोगों ने फैसले के ऊपर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को ‘असंवैधानिक’ करार दिया है. जिसके बाद बुधवार को जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को फटकार लगाई है. शाही इमाम ने कहा कि लॉ बोर्ड ने अदालत में दोहरा रूख अपनाया है.

बुखारी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भ्रम पैदा किया है. उन्होंने कहा कि एक तरफ तो उनका कहना है कि तलाक-ए-बिद्दत गुनाह है तो दुसरी तरफ उसने इसे वैसे ही रहने दिया. उन्होंने कहा कि पहले तो एक बार मे तलाक दुरस्त नहीं है ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाएगा.

शाही इमाम ने कहा है कि जब कोई चीज गुनाह है तो उसे शरिया द्वारा कैस अनुमति दी जा सकती है? बुखारी ने कहा कि इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए एआइएमपीएलबी ने अदालत में पक्ष रखने से पहले परामर्श लिया था? इस्लाम के जानकारों से बात की थी? बुखारी ने हालांकि अदालत के फैसले का स्वागत किया.

दलितों के सामाजिक बहिष्कार पर हाईकोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को लगाई फटकार

हांसी। भाटला में दलितों के साथ सामाजिक बहिष्कार के मामले में हाइकोर्ट जस्टिस एबी चौधरी की अदालत में आज (24 अगस्त) को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान जब हाइकोर्ट में अदालत ने सरकारी वकील से गांव भाटला में दलितों के सामाजिक बहिष्कार के बारे रिपोर्ट तलब की तो सरकारी वकील कोई रिपोर्ट पेश नही कर सके. जिस पर हाइकोर्ट के न्यायधीश गुस्सा हो गए तथा उन्होंने सरकारी वकील को कड़ी फटकार लगाई और कहा की प्रशासन को गांव में सामाजिक बहिष्कार रोकने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए थे.

कोर्ट ने कहा कि मौके पर डीसी और एसपी को किसी जन प्रतिनिधि के साथ जाना चाहिए था. पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि गांव में अभी तक सामाजिक बहिष्कार जारी है. उन्हें रोजमर्रा का सामान भी नहीं मिल पा रहा है. बच्चो को स्कूल जाने में भी परेशानी हो रही है. दलित कार्यकर्ताओ पर जूठे मुकदमे दर्ज किये जा रहे है.

हाइकोर्ट के 12 अगस्त के आदेश के बाद गांव में 19 अगस्त को केवल एसडीएम और डीएसपी नरेंद्र कादियान गये थे. पीड़ित पक्ष ने बताया कि गांव में वह डीएसपी गए थे जिनके खिलाफ दलित समुदाय ने पक्षपात की शिकायत कर रखी है. हाईकोर्ट ने सरकारी वकील पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह गलत है. आदेश दिए की अब इस मामले में हिसार के जिला और सत्र न्यायाधीश को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर उनसे ज्यूडिशल इन्क्वारी कराई जाएगी.

इस मामले में 25 अगस्त को जिला और सत्र न्यायाधीश गांव में जाकर रिपोर्ट तैयार करके सोमवार 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेंगे. ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क और नेशनल अलायन्स फॉर ह्यूमन राइट्स के संयोजक और अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि भाटला का अजय दहिया जो सामाजिक बहिष्कार के मामले में शिकायतकर्ता है, की और से ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क ने एक याचिका दायर की थी.

इस याचिका में अजय ने सामाजिक बहिष्कार के मामले में हांसी सदर थाना में दर्ज मुकदमे में हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिमल कुमार के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमे सामाजिक बहिष्कार के भाटला निवासी एक आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी थी. अधिवक्ता कल्सन ने बताया कि याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट जनरल को अदालत में तलब कर सामाजिक बहिष्कार मामले को सामाजिक मध्यस्था से सुलझाने के आदेश दिए थे जिस पर एडवोकेट जनरल ने भी मामले को उच्चतम स्तर पर संज्ञान में लाकर सुलझने की बात कही थी.

अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि इसके बाद गांव में अगस्त को उपमंडल अधिकारी नागरिक हांसी और डी एस पी नरेंद्र कादियान गांव में आये थे और ग्रामीणों से बातचीत करके चले गए थे. इस आदेश के संज्ञान में आने के बाद आज हांसी अदालत परिसर में भाटला के दलित समाज को अपने चैम्बर में अधिवक्ता रजत कल्सन ने इस फैसले की जानकारी दी .

कल्सन ने दलित ग्रामीणों को बताया कि हिसार के सत्र और जिला न्यायाधीश इस बारे में जल्द ग्रामीणों से संपर्क कर सकते है. दलित ग्रामीणों ने कहा कि वे भाटला प्रकरण में हांसी पुलिस जिला के एसपी, एएसपी, डीएसपी और एसएचओ थाना सदर हांसी की नकारात्मक भूमिका की जानकारी देंगे जिन्होंने जात-पात की आग भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. दलित ग्रामीणों ने कहा कि तीनों मुकदमो के आरोपियो की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.

गौरतलब है कि हांसी के गांव भाटला में 15 जून को सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दलित और ब्राह्मण लड़कों के बीच झगड़ा हुआ था. दलित समुदाय ने जब मारपीट और झगड़े की शिकायत पुलिस थाने में की तो ब्राह्मणों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. ब्राह्माणों ने दलितों के गली में चलने से, पशुओं को खेत में चराने से, तालाब में पशुओं को पानी पीने से रोक दिया. एक तरह से दलित समुदाय के लोगों का किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाने से प्रतिबंध लगा दिया.

रजत कल्सन की रिपोर्ट

‘झारखंड में बनेगा आदिवासी स्वयंसेवक संघ’

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रांची। आदिवासी सरना महासभा का वार्षिक सम्मेलन 21 अगस्त को हुआ. यह सम्मेलन रांची के संगम गार्डेन मोरहाबादी में आयोजित हुआ. सम्मेलन का आयोजन पूर्व विधायक देवकुमार धान ने किया.

देवकुमार धान ने सम्मेलन में कहा कि आदिवासियों की रक्षा के लिए आदिवासी स्वयंसेवक संघ बनाने की जरूरत है, जो शिक्षा, अंधविश्वास उन्मूलन, आर्थिक विकास, राजनीतिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर काम करेगा. संघ के गठन के बाद इसमें समाज के युवाओं को जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड और इसके लिए किसी एक नाम पर सहमति बनाने के लिए 14 नवंबर 2017 को रांची तथा तीन एवं चार फरवरी 2018 को दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. पांच फरवरी 2018 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर में महाधरना देंगे. सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में गलत संशोधन करने का प्रयास कर रही है. देवकुमार धान ने कहा कि किसी परियोजना की शुरूआत से पहले सोशल इंपैक्ट के मूल्यांकन का प्रावधान समाप्त करना चाहती है. इसके खिलाफ लड़ेंगे. विश्वनाथ तिर्की ने कहा कि आदिवासियों को अपना अधिकार जानना होगा. मौके पर मांग की गई कि सरकार राजधानी रांची और दिल्ली में आदिवासी भवन बनवाये.

25 अगस्त से मार्केट में आएगा 200 रूपए का नोट

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कल (25 अगस्त) को 200 रुपए का नया नोट जारी कर देगा. यह महात्मा गांधी की नई सीरीज वाला नोट होगा. माना जा रहा है कि यह नोट नकदी की समस्या को हल करने के साथ साथ 100 रुपए के नोट पर पड़ रहे दबाव को भी कम करने की कोशिश करेगा.

आरबीआई ने एक रिलीज के जरिए जानकारी दी है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 25 अगस्त 2017 को महात्मा गांधी की नई सीरीज वाले 200 रुपए के नए नोट जारी कर देगा. इस नोट में गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.

माना जा रहा है कि 200 रुपए का नया नोट बाजार में फुटकर की किल्लत को खत्म कर सकता है. क्योंकि 500 और 2000 रुपए के नोट के बीच कोई अन्य मूल्यवर्ग का नोट नहीं होने के कारण छोटे नोटों की उपलब्धता को लेकर परेशानियां सामने आ रही हैं. वहीं आरबीआई का यह भी मानना है कि 200 रुपए का नया नोट तेजी से पापुलर हो जाएगा.

जानिए कैसा दिखेगा 200 रुपए का नया नोट:

  • महात्मा गांधी की नई सीरीज के साथ जारी किए जाने वाले 200 रुपए के नोट में उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.
  • यह नोट हल्के पीले रंग का होगा.
  • इसमें देवनागरी लिपि में 200 रुपए लिखा हुआ होगा.
  • केंद्र में महात्मा गांधी की तस्वीर होगी.
  • माइक्रो लेटर में ‘RBI’, ‘भारत’, ‘India’ और ‘200’ लिखा हुआ होगा.
  • सिक्योरिटी थ्रेड पर भारत और आरबीआई लिखा होगा, जो रंग बदलने वाला होगा.
  • गारंटी क्लाज, गवर्नर के सिग्नेचर, प्रॉमिस क्लॉज और आरबीआई का एंबलम महात्मा गांधी की तस्वीर के बाईं तरफ होंगे.
  • दाहिनी ओर अशोक स्तंभ की छवि होगी.
  • 200 रुपए के नोट में इस्तेमाल होने वाली स्याही कलर बदलने वाली होगी.
  • नंबर पैनल में अंक छोटे से बड़े आकार में होंगे, जो कि ऊपरी हिस्से में बाईं ओर निचले हिस्से में बाईं ओर होंगे.
  • नेत्रहीनों के लिए महात्मा गांधी के चित्र की इटैग्लिओ छपाई, अशोक स्तंभ का प्रतीक, 200 रुपए के साथ पहचान चिह्न एच को उठाया गया है.

सड़क पर लड़की को छेड़ा, शोर मचाया तो तलवार से काट दिया हाथ

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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बुधवार को एक मनचले ने युवती से छेड़छाड़ की कोशिश की जिसका विरोध करने पर मनचले ने युवती का तलवार से हाथ काटकर अलग कर दिया. मौके पर मौजूदा भीड़ ने मनचले की पिटाई करने के पुलिस के हवाले कर दिया.

जिसके बाद खून से लथपथ युवती को पुलिस ने इलाज के लिए जिला अस्पताल मे भर्ती करया. हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित लड़की निघासन रोड पर किसी काम से जा रही थी.

इस बीच रोहित चौरसिया ने लड़की से छेड़छाड़ की. यवती ने जब विरोध किया तो युवक आग बबूला हो गया. उसने लड़की को दौड़ाया और तलवार से उसका हाथ कलाई के पास से काट दिया.

सीओ सिटी ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि मोबाइल के चार्जर को लेकर पीड़िता का युवक से विवाद हुआ है. पुलिस अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है.

केजीएमयू के डॉ. ने बताया डॉक्टरों ने रात को ही उसका कटा हाथ जोड़ने के लिए सर्जरी शुरू कर दी. प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एके.सिंह ने बताया कि लड़की का हाथ जोड़ने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. न्यूरो विभाग से क्लियरेंस का इंतजार है.

BJP सरकार की दलित-मुस्लिम विरोधी नीतियों के खिलाफ BSP का विरोध पदर्शन

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जयपुर। केन्द्र सरकार की मुसलमानों एवं दलितों विरोधी नीतियों के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जयपुर कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन किया. लोगों ने बसपा अध्यक्ष मायावती के समर्थन में धरने नारेबाजी भी की.

बसपा कार्यकर्ताओं ने धरने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पार्टी अध्यक्ष मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा भी भारतीय जनता पार्टी की साम्प्रदायिक एवं दलित विरोधी नीतियों को उजागर करने के लिए दिया था. उन्होंने कहा कि दलित उनके साथ है और आज उनके समर्थन में धरना दिया गया है.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दलितों की लड़ाई लड़ने के लिए मायावती के आगे आने से लगने लगा है कि अब दलित अपने हको की लड़ाई लड़ सकेंगे और मजबूत बनेगें. भाजपा दलितों को दबा नहीं सकेगी.

गौरतलब है कि मायावती ने 18 जुलाई को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. मायावती राज्यसभा में सरहानपुर हिंसा पर अपनी बात रख रहीं थी लेकिन उपसभापति ने उन्हें बोलने से रोक दिया. राज्यसभा में भी हल्ला होने लगा था. इसके बाद मायावती ने तुरंत इस्तीफे की पेशकश की.

योगी सरकार दलित अफसर को कर रही है साइड लाइन

लखनऊ। लगता है योगी सरकार में दलित अफसरों को साइड लाइन कर दिया गया है! जानकारी के अनुसार, मौजूदा सरकारी विभाग में कोई भी दलित अफसर महत्वपूर्ण विभाग में तैनात नहीं है. पिछली सरकारों की अपेक्षा योगी सरकार ने उच्च जाति के अफसरों पर भरोसा जताया है. जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.

यूपी की नौकरशाही में बीते दो दशक के इतिहास में नजर डालने पर पता चलता है कि जितनी भी प्रदेश में सरकारें रहीं, उन्होंने बगैर भेदभाव के दलित आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी. पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार में कुछ दलित अफसरों को महत्वपूर्ण पदों का चार्ज मिला था.

उच्च पदों पर काम कर चुकें हैं कई दलित अफसर दलितों में पूर्व आईएएस अफसर राय सिंह, पी.एल. पुनिया, नेतराम, डी.सी. लाखा, एस.आर. लाखा, स्वर्गीय कालिका प्रसाद, फतेह बहादुर, एस.डी. बागला, राम कृष्ण, श्रीकृष्ण, चंद्रपाल, हरीश चंद्रा, जे.एन. चेम्बर, गंगाराम बरूवा, एस.पी. आर्या, किशन सिंह अटोरिया आदि नाम हैं, जो अपनी कार्यप्रणाली से हर दल के अजीज हुए दलित अफसरों के महत्वपूर्ण पदों पर रहने से दलित समाज को न्याय मिलने की आशा रहती है.

मौजूदा सरकार में कई दलित अफसर कार्यरत मौजूदा योगी सरकार में अधिकतर दलित अफसर महत्वहीन पदों पर तैनात कर दिए गए हैं. दलित अफसरों में सुखलाल भारती, छोटे लाल, मनमोहन चौधरी, आनंद कुमार सिंह, राम केवल, अनिल सागर, पिंकी जोवल, प्रकाश बिन्दु, गौरव दयाल, पवन कुमार, ओ.पी. आर्या, सुरेन्द्र राम, उदई राम, के.के. सिंह, सूर्य मणि लाल चंद, सुधा वर्मा, केदार नाथ, विद्या सागर, भगेलू राम शास्त्री, रेनू भारती, चंद्र प्रकाश, सुरेश चंद्रा, एन.एस. रवि हैं. सुरेश चंद्रा को छोड़कर अधिकतर अफसर महत्वहीन पद पर तैनात किए गए हैं.

पीएल पुनिया ने साधा सरकार पर निशाना एससी-एसटी आयोग के पूर्व अध्यक्ष पी.एल. पुनिया के मुताबिक सबका साथ, सबका विकास का दावा करने वाली भाजपा सरकार भेदभाव पूर्ण रवैया अपना रही है. यूपी में सबसे अधिक दलितों की उपेक्षा हो रही है. उन्होंने कहा कि योगी सरकार जानबूझ कर दलितों अफसरों को साइड लाइन कर रखा है, जो सैद्धांतिक न्याय के प्रतिकूल है.

क्या कहते हैं जानकार पूर्व आईजी और दलित चिंतक एस.आर. दारापुरी के मुताबिक अब राजनीतिक दल दलित अफसरों को राजनीतिक चश्मे से देखने लगे हैं, उनकी काबलियत देखने के बजाए द्वेश भावना से महत्वहीन पदों पर तैनाती दी जाती है. यह अच्छी परम्परा नहीं है. उन्होंने योगी सरकार में अधिकतर दलित अफसर साइड लाइन हैं.

राजनीतिक जानकर विजय गौतम के नज़र में अब राजनीतिक दल अफसरों को उनकी जाति और वोट बैंक के हिसाब से महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती देते हैं. अफसर भी अपने फायदे के लिए राजनीतिक दलों का कार्यकर्ता बनने से गुरेज नहीं करते हैं. इसी कमजोरी के चलते अफसरों को उनकी योग्यता का न तो समाज को लाभ मिल नहीं सरकारों की नीतियां जनता के पास जाती हैं.

साभारः ईनाडु इंडिया

राम रहीम पर फैसले से पहले 5 राज्यों में हाईअलर्ट, 3 में धारा 144

 

चंडीगढ़। साध्वी यौन शोषण केस में राम रहीम पर कल फैसला आना है. डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर नाबालिग से बलात्कार के मामले में 25 अगस्त (शुक्रवार) को पंचकुला सीबीआई कोर्ट का फ़ैसला आना है. लेकिन दो दिन पहले से ही उनके समर्थक बड़ी संख्या में चंडीगढ़ से लेकर पंचकुला तक इकट्ठा हो गए हैं. पांच राज्यों में हाईअलर्ट और तीन में धारा 144 लागू है. पुलिस प्रशासन और सरकार भी हाई अलर्ट पर है. हरियाणा-पंजाब के कई जगहों पर कर्फ्यू जैसे हालात हैं.

हरियाणा के पंचकुला, सिरसा, चंडीगढ़ छावनी में तब्दील हो चुका है. किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए अर्धसैनिक बलों की 167 कंपनियों की तैनाती की गई है. सभी बड़े अधिकारियों की छुट्टियां रद्द होने का आदेश जारी कर दिया गया है. फ़ैसले के बाद अगर राम रहीम के समर्थक हंगामा करते हैं तो उनको काबू कर चंडीगढ़ क्रिकेट स्टेडियम में बंद कर दिया जाएगा. स्टेडियम को अस्थाई जेल में बदल दिया गया है.

इसके साथ ही ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से लोगों पर नज़र रखी जा रही है. एसएसबी के जवान और पुलिस हर चप्पे-चप्पे की तलाशी कर रहे हैं. वहीं पंजाब, हरियाणा के अलावा हिमाचल प्रदेश और यूपी की सीमा को भी सील कर दिया गया है. हरियाणा और पंजाब के सभी स्कूल और कॉलेजों को फैसला आने तक बंद कर दिया गया है. इस बीच खट्टर सरकार ने अपने सभी मंत्रियों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहने और डेरा सच्चा सौदा के प्रतिनिधियों से मिलकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करने के निर्देश दिए हैं.

गुरमीत राम रहीम की कोर्ट मे पेशी को लेकर अब तक चंडीगड़, हरियाणा और पंजाब में पैरामिलिट्री की 167 कंपनिया तैनात की गई हैं. 10 और कंपनियों की मांग की गई है. एक कंपनी में 100 जवान और अफसर हैं. हर कंपनी मे करीब 35 गन और बाकी नॉन लीथल गन होती हैं. नॉन लीथल गन में डंडा, टियर गैस , मिट्टी वाला ग्रेनेड, वाटर कैनन जैसे हथियार आते हैं. हर कंपनी में महिलाएं भी तैनात की गयी हैं.

चंडीगढ़ में 10 कंपनियां तैनात की गई हैं. इनमें 6 कंपनियां रैपिड एक्शन फोर्स की हैं. 40 कंपनियां रिज़र्व रखी गयी हैं. आपात हालात से निपटने के लिए पंचकुला में यहीं से जवान भेजे गए हैं. हरियाणा में 35 कंपनियां तैनात हैं. पंजाब में 75 कंपनियां तैनात हैं. वहीं सेना को तैनात करने पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है. प्रशासन सेना के संपर्क में है और हर हालात की जानकारी दी जाएगी. फिलहाल पंचकुला में दो लाख से ज्यादा डेरा समर्थक आ चुके हैं. पंचकुला के बाहर डेरा में 40 से 50 हज़ार समर्थक जमा हैं. दो से तीन दिन का रेडीमेड खाना लेकर आए हैं.

मायावती और सोनिया गांधी ने लालू यादव की रैली से क्यों बनाई दूरी

नई दिल्ली। 27 अगस्त को लालू प्रसाद यादव द्वारा बिहार में पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश को झटका लगा है. असल में लालू यादव इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बसपा प्रमुख मायावती को शामिल करना चाहते थे. लालू लगातार इन दोनों दिग्गज नेताओं के संपर्क में भी थे. लेकिन बुधवार को लालू यादव ने साफ कर दिया कि ये दोनों दिग्गज नेता रैली में शामिल नहीं होंगे.

भाजपा विरोधी इस रैली में मायावती की ओर से पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा जबकि सोनिया गांधी की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और बिहार प्रभारी सी.पी जोशी शामिल होंगे.

सवाल यह है कि आखिर मायावती और सोनिया गांधी ने लालू यादव के इस बहुप्रचारित रैली से दूरी क्यों बना ली?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इन दोनों नेताओं के लालू की रैली में शामिल होने से इसका सीधा फायदा लालू यादव को मिलेगा. जबकि बसपा और कांग्रेस को इसका कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. क्योंकि बिहार में कांग्रेस जिस हालात में है, फिलहाल उससे आगे बढ़ने की उसे कोई उम्मीद नहीं है. जबकि बसपा की भी हालत बिहार में कुछ खास नहीं है. और न ही लालू यादव का प्रभाव बिहार से बाहर अन्य राज्यों में है. संभव है कि अपने इन्हीं राजनैतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए मायावती और सोनिया गांधी फिलहाल लालू यादव की रैली को दूर से देख कर ही अपनी राजनैतिक संभावना तलाश करना चाहती हैं.

आपकी प्राइवेसी है आपका मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

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राइट टू प्राइवेसी यानी निजता का अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है. नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है. नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मसले पर 6 दिनों तक मैराथन सुनवाई की थी. जिसके बाद 2 अगस्त को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस जेएस खेहर कर रहे हैं. इस मामले में याचिकाकर्ता और मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से बाहर आकर बताया कि कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है और कहा है कि ये अनुच्छेद 21 के तहत आता है.

हालांकि, आधार कार्ड वैध है या अवैध है, इस पर अभी कोर्ट ने कुछ नहीं बोला है. आधार कार्ड के संबंध में मामला छोटी खंडपीठ के पास जाएगा. प्रशांत भूषण ने बताया कि इस फैसले का मतलब ये है कि अगर रेलवे, एयरलाइन जैसे रिजर्वेशन के लिए जानकारी मांगी जाती है, तो ऐसी स्थिति में नागरिक अपने अधिकार के तहत उससे इनकार कर सकेगा. केंद्र सरकार के मसले पर भूषण ने बताया कि निश्चित तौर पर कोर्ट का ये फैसला केंद्र सरकार को बड़ा झटका है. क्योंकि केंद्र सरकार निजता को मौलिक अधिकार मानने के विरोध में थी.इस फैसले के बाद अब एक अलग बेंच गठित की जाएगी. ये बेंच आधार कार्ड और सोशल मीडिया में दर्ज निजी जानकारियों के डेटा बैंक के बारे में फैसला लेगी.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने इस मसले पर सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा था. केंद्र का पक्ष रखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि आज का दौर डिजिटल है, जिसमें राइट टू प्राइवेसी जैसा कुछ नहीं बचा है.तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को ये बताया था कि आम लोगों के डेटा प्रोटेक्शन के लिए कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में दस लोगों की कमेटी का गठन कर दिया है. उन्होंने कोर्ट को बताया है कि कमेटी में UIDAI के सीईओ को भी रखा गया है.

27 अगस्त की रैली में भाजपा के खिलाफ जंग की बुनियाद रखेंगे लालू

पटना। लालू यादव द्वारा बहुप्रचारित रैली 27 अगस्त को पटना में होने जा रही है. ‘भाजपा भगाओ-देश बचाओ’ का नारा दे चुके लालू इस रैली के साथ ही भाजपा के खिलाफ अपने जंग का ऐलान करने को तैयार हैं. हालांकि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रैली में शामिल नहीं होने से लालू यादव को थोड़ी निराशा जरूर हुई होगी.

लालू यादव की इस रैली पर भाजपा की भी नजर है. शायद यही वजह है कि लालू यादव की रैली के असर को बेअसर करने के लिए रैली से ठीक एक दिन पहले 26 अगस्त को पीएम मोदी बिहार में बाढ़ के हालात का जायजा लेने जा रहे हैं. संभव है कि मोदी इस दौरान केंद्र की ओर से बड़ी मदद का ऐलान करेंगे.

राजद अध्यक्ष ने पीएम मोदी के इस दौरे को हवाखोरी ठहराते हुए सवाल उठाया कि आखिर पीएम मोदी अब क्यों आ रहे हैं जब बाढ़ से 400 लोग मारे जा चुके हैं. लालू ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है और मोदी साल 2015 और 2016 में क्यों नहीं आए?

जो भी हो, यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू यादव की 27 अगस्त की रैली क्या रंग लाती है.

बाहुबली बने तेजस्वी यादव, विधानसभा में धरने पर बैठे

पटना। सृजन घोटाले को लेकर राजद लगातार नीतीश सरकार को घेरने में लगी है. इसके चलते विधानसभा का मानसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है. सदन में तीसरे दिन भी कोई कार्यवाही नहीं हो पाई. घोटाले का विरोध करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने विधायकों के साथ विधानसभा परिसर में धरने पर बैठ गए. इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार की इस्तीफा भी मांग लिया.

अपने विधायकों के साथ धरने पर बैठे तेजस्वी ने सृजन घोटाले में संलिप्तता और आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के इस्तीफे की मांग की. उन्होंने कहा कि ये घोटाला 1000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है.

तेजस्वी ने कहा कि घोटाला भागलपुर, भोजपुर, बांका समेत बिहार के कई जिलों में हुआ है. अधिकारी घोटाले की लीपापोती करने में लगे हुए हैं. तेजस्वी यादव ने कहा कि सृजन घोटाले के कई आरोपी विदेश भाग गए है. गरीब जनता के पैसे जदयू और भाजपा नेताओं को दिया जा रहा है. सरकार आरोपियों को बचाने में जुटी हुई है.

सीएम नीतीश कुमार और सुशील मोदी को जानकारी होने के बाद भी 10 साल तक मामले को दबा कर रखा गया. सरकार मामले को रफा दफा कराने में लगी हुई है. कई जदयू नेता भी घोटाले में संलिप्त हैं. तेजस्वी यादव के साथ तेजप्रताप समेत कई राजद नेता भी प्रतिमा के पास बैठे.

27 अगस्त की रैली से पहले ‘बाहुबली’ बने तेजस्वी यादव बिहार में जारी सियासत के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का बाहुबली अवतार देखने को मिल रहा है. इसी महीने की 27 तारीख को राजधानी पटना में होने वाली आरजेडी की रैली को लेकर पटना शहर पोस्टर और बैनर से पटने लगा है. इस क्रम में आरजेडी के नेता धर्मेंद्र यादव ने एक ऐसा फ्लैक्स पटना शहर में लगाया गया है जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. इस फ्लैक्स में तेजस्वी सुपरहिट फिल्म बाहुबली के लीड किरदार वाले गेटअप में नजर आ रहे हैं. शहर में लगे इस बड़े से फ्लैक्स में तेजस्वी यादव को बाहुबली अवतार में दिखाया जा रहा है. 27 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में आरजेडी की ‘बीजेपी हटाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित होगी. इस रैली में गैर-एनडीए दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

अब 8 लाख सालाना आय पर मिलेगा ओबीसी आरक्षण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय कैबिनेट ने क्रीमी लेयर की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया है. सरकार के इस एलान के बाद अब 8 लाख रुपये सालाना तक कमाने वाली अन्य पिछड़ी जातियां (ओबीसी) क्रीमी लेयर में आएंगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी दी.

वित्त मंत्री ने कहा कि इस बारे में साल 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की थी. इस प्रकार की सबकैटगरी बनायी जाए. इसी प्रकार की सिफारिश पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी ने भी साल 2012-13 में की थी. मंत्री परिषद में चर्चा के बाद इसको स्वीकार किया गया. ओबीसी की सूची में सब-कैटिगरी बनाने की दिशा में एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी गई है.

अरुण जेटली ने बताया कि ओबीसी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर एक आयोग का गठन किया जाएगा. ये आयोग ओबीसी कैटिगिरी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर विचार करेगी. आयोग का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद आयोग 12 हफ्ते में इससे संबंधित रिपोर्ट सौंपेगा.

आपको बता दें कि ओबीसी आरक्षण के लिए आखिरी समीक्षा 2013 में की गई थी. सरकार के इस फैसले के चलते अब ओबीसी वर्ग के ज्यादा लोगों को नौकरियों और भर्तियों में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा.

क्या है क्रीमी लेयर? सरकारी नौकरियों और केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी पदों को आरक्षित रखा गया है. लेकिन, आरक्षण का लाभ लेने परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए, जिसे बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है. तय सीमा से ज्यादा आय वाले लोगों को क्रीमी लेयर मान कर इससे बाहर कर दिया जाता है. मगर इस पाबंदी की वजह से कई मामलों में ओबीसी कोटा के पद उपयुक्त उम्मीदवार की कमी की वजह से खाली ही रह जाते हैं. काफी लंबे समय से क्रीमी लेयर की सीमा को बढ़ाने की मांग हो रही थी.

अब ‘खतने’ के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं ने उठाई आवाज, PM को लिखा खुला खत

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नई दिल्ली। तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं को 1400 साल पुरानी पंरपरा के नाम पर हो रहे शोषण से मुक्ति मिली है. लेकिन अभी भी इस्लाम में कई ऐसी प्रथाएं हैं जिनकी वजह से औरत को दर्द और तकलीफ झेलनी पड़ती है. इनमें हलाला और महिलाओं के खतने जैसी प्रथाएं प्रमुख हैं.

दुनिया भर के कई समुदाय इस कुप्रथा को सदियों से करते आ रहे हैं. लेकिन अब इस कुप्रथा को रोकने के लिए कुछ महिलाओं से मोर्चा खोल दिया है और इसके खिलाफ एक जुट होकर लड़ रही हैं. तीन तलाक पर आए फैसले के बाद बोहरा समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस खतने को रोकने की मांग की है.

मासूमा रानाल्वी ने अपने खत में लिखा स्वतंत्रता दिवस पर आपने मुस्लिम महिलाओं के दुखों और कष्टों पर बात की थी. ट्रिपल तलाक को आपने Anti-Women कहा था, सुनकर बहुत अच्छा लगा था. हम औरतों को तब तक पूरी आजादी नहीं मिल सकती जब तक हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें संस्कृति, परंपरा और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहेगा. हमारा संविधान सभी को समान अधिकार देने की बात करता है, पर असल में जब भी किसी बच्ची को गर्भ में मारा जाता है, जब भी किसी बहु को दहेज के नाम पर जलाया जाता है, जब भी किसी बच्ची की जबरन शादी करवा दी जाती है, जब भी किसी लड़की के साथ छेड़खानी होती है या उसके साथ बलात्कार किया जाता है, हर बार इस समानता के अधिकार का हनन किया जाता है.

ट्रिपल तलाक अन्याय है, पर इस देश की औरतों की सिर्फ यही एक समस्या नहीं है. मैं आपको Female Genital Mutilation (FGM) या खतना प्रथा के बारे में बताना चाहती हूं, मैं इस खत के द्वारा आपका ध्यान इस भयानक प्रथा की तरफ खींचना चाहती हूं. बोहरा समुदाय में सालों से ‘खतना प्रथा’ या ‘खफ्ज प्रथा’ का पालन किया जा रहा है. महिलाओं का खतना एक ऐसी कुप्रथा है, जिससे न सिर्फ महिलाएं अपना मानसिक संतुलन खो देती हैं, बल्कि उनके शरीर को बेहद नुकसान भी पहुंचता है. जो लड़कियां बच भी जाती हैं, इस कुप्रथा से जुड़ी दर्दनाक यादें ताउम्र उनके साथ रहती है. बोहरा, शिया मुस्लिम हैं, जिनकी संख्या लगभग 2 मिलियन है और ये महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बसे हैं. मैं बताती हूं कि मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है.

जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादी उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं. बच्ची को ये भी नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है. दाई या आया या वो डॉक्टर उसके Clitoris को काट देते हैं. इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है. इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के Sexual Desires को दबाना.

मासूमा ने बताया कि ‘FGM महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकार का हनन है. महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का ये सबसे बड़ा उदाहरण है. बच्चों के साथ ये अक्सर होता है और ये उनके अधिकारों का भी हनन है. इस प्रथा से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है.’