बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी पर हमला

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पटना। बिहार के पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष और जदयू के नेता उदय नारायण चौधरी पर हमले की खबर है. नवादा जिले में कुछ असमाजिक तत्‍वों ने हमला कर दिया. चौधरी नवादा जिले के अपसड़ गांव में महादलित टोले में एक मांझी की हत्‍या के बाद मामले की जांच के सिलसिले में वहां पहुंचे थे. चौधरी के मुताबिक इस दौरान उन्‍हें पीड़ित परिजनों से बातचीत करने से रोका गया और उन पर हमला हुआ. चौधरी वहां से किसी तरह बच कर निकले.

पूर्व विस अध्यक्ष उदय नारायण ने कहा कि उनपर हमला किया गया. पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया गया. मेरे साथ के सुरक्षा कर्मी ने बीच बचाव किया, अन्‍यथा कोई बड़ी घटना हो सकती थी. जान भी जा सकती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए की सरकार में महादलित असुरक्षित हैं.

असल में नवादा में दलित समाज की एक लड़की के साथ बलात्‍कार करने की कोशिश की गई. इसका विरोध करने पर टाला मांझी को जलाकर मार दिया गया. उदय नारायण चौधरी उसी से मिलने गए थे. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि इस दौरान उन्हें पीड़ितों से बात करने से मना किया गया. इसके बावजदू मैंने बात करने की कोशिश की. तब मुझे गाली दी गई. हाथ उठाया गया. स्‍थानीय पुलिस के सामने ऐसा किया गया. यदि मैं वहां से बचकर नहीं निकलता, तो मेरी हत्‍या हो जाती.

उन्‍होंने कहा कि पूरे देश में दलितों पर हमला बढ़ा हुआ है. चाहे बात रोहित वेमुला की हो, भीम आर्मी के चंद्रशेखर की या फिर सहारनपुर की, हर जगह दलितों पर अत्‍याचार बढ़ गये हैं. बिहार के खगडि़या में दीवाली के दिन 86 दलितों का घर जला दिया गया. जब मैं विधानसभा का अध्‍यक्ष रहा और मेरे साथ इस तरह की वारदात हुई तो आम दलितों के साथ क्‍या होता है,  इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है. हालांकि इस मामले पर नवादा के एसपी विकास बर्मन ने किसी तरह का हमला होने से इंकार किया है.

स्पर्म बेहतर चाहिए तो ये काम न करें

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नई दिल्ली। तमाम देशों में पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या में आ रही गिरावट डाक्टरों की चिंता का कारण बना हुआ है. उत्तरी अमरीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के पुरुषों में तो पिछले 40 सालों से कम वक़्त के दौरान स्पर्म काउंट आधा हो गया है. जाहिर है कि शुक्राणुओं की संख्या में गिरावट का सीधा संबंध प्रजनन क्षमता से है. असल में स्पर्म कैसा होगा, यह कई चीजों पर निर्भर करता है. मसलन, आपका स्पर्म काउंट यानी शुक्राणु की संख्या कितनी है इसका संबंध खान-पान से भी है.

अगर आपके खाने में वसा की मात्रा ज़्यादा है तो स्पर्म काउंट में कमी आ जाती है. शोध में सामने आया है कि जो जंक फूड ज़्यादा खाते हैं उनके शुक्राणु की गुणवत्ता काफ़ी कमज़ोर थी. इस स्टडी के अनुसार जो ज़्यादा वसा खाते हैं उनका स्पर्म काउंट 43 फ़ीसदी कम होता है और शुक्राणु की सघनता भी कम होती है. तो वहीं जिनके शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा पर्याप्त होती है उनके शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतरीन होती है. यह एसिड मछली और वनस्पतियों के तेल में पाया जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति मिलीलीटर वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 1.5 से 3.9 करोड़ हो तो उसे सामान्य माना जाता है. इसलिए स्पर्म काउंट दुरुस्त रखना है तो ये काम ज़रूर करें-

(1)   शराब पीना बिल्कुल बंद करें. शराब के सेवन आपके टेस्टास्टरोन हॉर्मोन्स की सेहत में गिरावट आती है. इस हॉर्मोन का सीधा संबंध यौन क्षमता से होता है.

(2)   बहुत टाइट अंडरवेयर नहीं पहनें और गर्म पानी से भी नहाने से बचें.

(3)   यौन संक्रमण से बचकर रहें.

(4)   ख़ुद को फिट रखें. कसरत करेंलेकिन बहुत ज़्यादा नहीं करें.

(5)   हर दिन सात से आठ घंटे नींद लेना भी जरूरी है.

(6)   गर्म पानी से नहाने से बचें. गर्म पानी से नहाते वक़्त आपके अंडकोष का तापमान बाधित होता और इससे स्पर्म काउंट पर सीधा असर पड़ता है.

अगर आप भाजपा समर्थक हैं तो ये सवाल देखिए…

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  यदि भाजपा के समर्थक हैं तो ख़ुद से नीचे लिखे सवाल पूछिए और जवाब ना हो तो अपनी सरकार से ये सवाल ज़रूर पूछिए..!!! तीन साल में 1– कितने करोड़ युवाओं को रोजगार दिया? 2– गंगा मैया कितनी साफ हुई? 3– बुलेट ट्रेन के कितने कोच तैयार हुए? 4– मेक इन इंडिया का क्या परिणाम रहा? 5– कितने दागी नेता जेल गए? 6– धारा 370 पर क्या हुआ ? 7– कितने कश्मीरी पंडितों का घर मिला? 8– डीजल पेट्रोल कितना सस्ता हुआ? 9– मंहगाई कितनी कम हुई? 10– आम जनता के लिए क्या किया? 11– लाहौर और करांची पर कहाँ तक कब्जा किया? 12– सेना को कितनी छूट मिली? 13– चीन थर-थर कांपा क्या? 14– देश ईमानदार देशों की श्रेणी में आ गया? 15– स्टार्ट-अप इंडिया का क्या हाल है? 16– जवानों का खाना सुधरा क्या? 17– बिहार को 175 लाख करोड़ का पैकेज मिला? 18– अलगाववादी नेताओं की सुविधाएं बंद की क्या? 19– ओवैसी और वाड्रा जेल गए क्या ? 20– मोदी के विदेशी दौरों से क्या मिला? 21– राम मन्दिर बना क्या? 22– गुलाबी क्रांति गौ हत्या रुकी क्या? 23– डॉलर का मूल्य रूपये के मुकाबले कितना कम हुआ? 24– कितने स्मार्ट सिटी तैयार हो गये? 25– सांसद आदर्श ग्राम योजना में कितने गाँव खुशहाल हुए? 26– महिलाओं पर अत्याचार रुक गया क्या ? 27– बीफ एक्सपोर्ट में भारत को एक नम्बर किसने बनाया? 28– 100 दिन में विदेशों से काला धन आया क्या? 29– कितने लोगों को 15 लाख मिले ? 30– नोटबन्दी से आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर टूट गई क्या? 31– देश में घूसखोरी बंद हो गई क्या? 32– देश में कितनी खुशहाली आई ? 33– स्वच्छता अभियान कितना सफल रहा ? 34– मुस्लिम आबादी कितनी कम हुई? 35– हिन्दू आबादी कितनी बढ़ी? 36– टैक्स सुधार कितना हुआ? 37- इंस्पेक्टर राज कितना कम हुआ? 38– बैंक का अरबों डकारने वाले कितने पूंजीखोर जेल गए? 39– पार्टी के नाम पर काली कमाई वाले कितने नेता जेल गए? 40– कितने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल खुले? 41– हिंदी का उपयोग कितना बढ़ा? 42– सिंचाई की सुविधा कितनी बढ़ी? 43– किसानों की आत्महत्या रुक गई क्या? 44– कितने नए वैज्ञानिक प्रयोग हुए? 45– सबको आवास मिल गया? 46– अदालतों में कितने जज बहाल हुए? 47– भारत कितने दिन में विश्वगुरू बनेगा? 48– कॉमन सिविल कोड लागू हो गया? 49– बलूचिस्तान को भारत में मिला लिया? 50– नेपाल से रिश्ते अच्छे हुए, कि ख़राब? 51– देश की इकॉनोमी कैशलेस हो गई? 52– हिन्दू तिथि से नववर्ष को सरकारी मान्यता मिल गई? 53– कितने बंगलादेशी खदेड़े गए? 54– रामसेतु को ऐतिहासिक स्थल बनाया कि नहीं? 55– संसद, विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिला? 56– लोकपाल नियुक्त हुआ या नहीं? 57– कितनी नदियों को जोड़ा गया? 58. तीन तलाक पर रोक लगी या नहीं? 59– प्रॉपर्टी के दाम कितने कम हुए? 60– अच्छे दिन आ गए क्या? . विचार करें और उचित कदम उठांए जवाब मिलें तो मुझे भी बताइएगा..!!! – सोशल मीडिया से प्राप्त

पीएनबी घोटाले में मुकेश अंबानी के भाई का नाम

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11 हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले की जांच में कई नाम सामने आने लगे हैं. सीबीआई की जांच में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं. इनमें फ़ायरस्टार इंटरनेशनल की कविता मनकिकर और नक्षत्र-गीतांजलि ग्रुप के चीफ़ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर शामिल हैं.लेकिन जिस नाम को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है वो हैं फ़ायरस्टार इंटरनेशनल के प्रेसिडेंट फ़ाइनेंस विपुल अंबानी. विपुल अंबानी असल में मुकेश अंबानी के चचेरे भाई हैं. वो धीरूभाई अंबानी के छोटे भाई नट्टूभाई अंबानी के बेटे हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक वो साल 2014 से फ़ायरस्टार का वित्तीय कामकाज देख रहे हैं. ज़ाहिर है नीरव मोदी की फ़्लैगशिप कंपनी के इतने बड़े ओहदे पर बैठे होने के कारण इस बात की आशंका काफ़ी बढ़ जाती है कि उन्हें इस मामले के बारे में काफ़ी जानकारी रही होगी. उनके पास यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैसाच्युसेट्स से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री है.ब्लूमबर्ग के मुताबिक विपुल अंबानी ने अपना करियर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के साथ शुरू किया. पढ़ाई के बाद वो इंडस्ट्री में उतरे और फिर कुछ साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर के एग्ज़िक्यूटिव असिस्टेंट रहे और साल 1993 तक अलग-अलग ग्रुप में बड़े पदों पर काम किया.

साल 2014 में उन्होंने नीरव मोदी से हाथ मिलाया और फ़ायरस्टार का कामकाज देखने लगे. फ़ायरस्टार की वेबसाइट के मुताबिक ये कंपनी अमरीका, यूरोप, मिडल ईस्ट, सुदूर पूर्व और भारत में कारोबार करती है और उसके पास 1200 से ज़्यादा प्रशिक्षित प्रोफ़ेशनल हैं. फिलहाल इस मामले में देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के भाई का नाम आने से मामला दिलचस्प हो गया है.

तो क्या मोदी को छोड़ कांग्रेस के करीब आ रहे हैं अमिताभ बच्चन!

नई दिल्ली। गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी के साथ सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का रिश्ता अजब-गजब रहा है. अमिताभ कभी गांधी परिवार के पास रहें तो कभी दूर हो गए. अमिताभ की राजीव गांधी से दोस्ती, बोफोर्स काण्ड, फिर अमिताभ का इलाहबाद से सांसद पद छोड़ना कोई कैसे भूल सकता है. हालांकि मतभेदों के बावजूद राजीव गांधी की हत्या का वक़्त हो या प्रियंका गांधी की शादी का, अमिताभ गांधी परिवार के साथ ही दिखे. एक बार फिर अमिताभ बच्चन गांधी परिवार और कांग्रेस के करीब आने लगे हैं.

अमिताभ के कांग्रेस और गांधी परिवार के करीब आने की बात को हवा 2 फरवरी को मिली. जब बिग बी ने 2 फरवरी को अचानक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ट्विटर पर फॉलो करना शुरू कर दिया. बिग बी यहीं नहीं रुके, बल्कि इसके बाद कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को भी फॉलो किया. 9 फरवरी को कांग्रेस पार्टी के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल को भी अमिताभ बच्चन ने फॉलो कर लिया. इसके बाद हाल में बिग बी ने पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सीपी जोशी, अजय माकन और मनीष तेवारी सरीखे नेताओं को भी अपने ट्विटर हैंडल पर फॉलो कर डाला.

बदले में कई कांग्रेस नेताओं ने भी अमिताभ बच्चन को फॉलो किया. हालांकि इसके बावजूद राहुल गांधी ने अब तक बिग बी को ट्विटर पर फॉलो नहीं किया, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अपने ऑफिसियल हैंडल पर सीनियर बच्चन को धन्यवाद देकर फॉलो कर लिया. पिछले कुछ सालों में नरेन्द्र मोदी के करीब माने जाने वाले अमिताभ बच्चन के इस कदम को लोग मोदी से दूरी और कांग्रेस से नजदीकी के तौर पर देखने लगे हैं.

रोहित वेमुला की मां ने दो साल बाद लिए हैदराबाद विवि से पैसे

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नई दिल्ली। रोहित वेमुला की आत्महत्या के दो साल बाद आखिरकार उनकी मां राधिका वेमुला ने हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा दी गई 8 लाख की रकम को स्वीकार कर लिया है. इससे पहले उन्होंने बेटे रोहित वेमुला की मौत के लिए विश्वविद्ययालय को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि कुलपति इन पैसों से उन्हें खरीदना चाहते हैं.

पैसे स्वीकार करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले मैंने इसलिए इंकार कर दिया था, क्योंकि मुझे लगा था कि कुलपति मुझे पैसे के बल पर खरीदना चाहते हैं. उस वक्त मुझे मेरे बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़ना ज्यादा जरूरी था. लेकिन बाद में मुझे पता चला कि यह पैसे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दिया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष पी.एल पुनिया थे. उन्होंने दोहराया कि वह तब तक आराम से नहीं बैठेंगी जब तक अपूर्वाराव को उनके किए गुनाह के लिए सजा नहीं मिल जाती. रोहित वेमुला की मां ने पी.एल पुनिया का धन्यवाद देते हुए कहा कि वो सच के साथ खड़े हुए जबकि उन पर केंद्र सरकार का बहुत दबाव था. गौरतलब है कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में पी.एचडी के छात्र रोहित वेमुला ने 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी.

करण कुमार

बसपा से बर्खास्त नसीमुद्दीन सिद्दीकी होंगे कांग्रेस में शामिल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी में कद्दावर नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं. खबरों के मुताबिक सिदद्की 22 फरवरी यानि कल कांग्रेस में शामिल होंगे. सिद्दीकी के समर्थकों की माने तो इस दौरान उनके साथ करीब एक दर्जन पूर्व सांसद और विधायक भी कांग्रेस का दामन थामेंगे. दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में सिद्दीकी के पार्टी में शामिल होने के वक्त कांग्रेस के महासचिव और यूपी के प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर भी मौजूद रहेंगे.

एक वक्त में बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर और बसपा प्रमुख मायावती के बेहद करीब रहे सिद्दीकी को मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बसपा से बाहर कर दिया था. इससे पहले ही विधानसभा चुनाव में बसपा की हार के लिए तमाम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा गलत लोगों को टिकट दिलवाए जाने की बात से नाराज थे. बसपा के खराब प्रदर्शन के लिए भी सिद्दीकी के गलत टिकट वितरण को ही जिम्मेदार ठहराया गया था.

बसपा से निकाले जाने के बाद सिद्दीकी ने मायावती पर पलटवार करके कई आरोप लगाए थे. उन्होंने मायावती के साथ बातचीत के रिकार्डिंग भी जारी की थी और आरोप लगाया था कि इसमें मायावती उनसे पैसे पहुंचाने की बात कर रही हैं. हालांकि उस टेप में ऐसा कुछ भी नहीं था. बसपा से निकाले जाने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा नाम से एक मोर्चा बनाया था और बसपा से निकाले गए लोगों को एकजुट कर रहे थे. लेकिन कोई सफलता नहीं मिलने के बाद आखिरकार उन्होंने कांग्रेस का दामन थामने का फैसला किया है. हालांकि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के बीच सिद्दीकी की कोई खास पकड़ नहीं है और वह जननेता नहीं है. ऐसे में कांग्रेस को सिद्दीकी से बसपा की कमजोरी पता करने के अलावा कोई और फायदा होने की उम्मीद कम है.

यूपी पुलिस के निशाने पर क्यों हैं दलित, पिछड़े और मुसलमान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में दलितों से भेदभाव चरम पर है. आमतौर पर या तो दलितों के मामले दर्ज नहीं किए जा रहे हैं या फिर उन्हें कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. यूपी में एक के बाद एक हो रहे एनकाउंटर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. दलित अधिकारों के लिए काम करने वाले लोगों का कहना है कि इन एनकाउंटर में मारे जाने वाले ज्यादातर लोग दलित, पिछड़े या फिर अल्पसंख्यक समाज के हैं.

यूपी पुलिस दलितों के मामले को किस तरह दबाने की कोशिश कर रही है, उसकी बानगी आप खुद देखिए. बीते 17 फरवरी को बांदा के अतर्रा थाना के महुटा गांव में एक 14 साल की दलित लड़की से गैंगरेप का आरोप लगाते हुए उसकी मां थाने पहुंची. उसने गांव के ही दो सवर्ण गुंडों पर बेटी के साथ गैंगरेप का आरोप लगाया. दूसरे दिन बेटी बेहोशी की हालत में बरामद हुई थी. इस मामले में होना यह चाहिए था कि पुलिस तुरंत पीड़ित युवती का मेडिकल कराती और मामला दर्ज कर आरोपियों को पकड़ती, लेकिन हुआ इसका उल्टा.

आरोप है कि पुलिस ने गैंगरेप जैसे संगीन मामले को रफादफा करने की कोशिश की और FIR दर्ज करने की बजाय NCR दर्ज कर दिया. बता दें कि एनसीआर पुलिस तब दर्ज करती है जब कोई मामला पुलिस के हस्तक्षेप करने योग्य नहीं होता. अमूमन मामूली झगड़े या छोटी-मोटी चोरी के मामले में पुलिस NCR दर्ज करती है. पुलिस ने पीड़ित महिला का मेडिकल भी नहीं कराया और कहा कि अगर आरोपी यह स्वीकार करेगा कि उसने रेप किया है, तब पीड़िता का मेडिकल कराया जाएगा.

इसी तरह बीते 10 महीनों में 1200 से अधिक पुलिस एनकाउंटर और उनमें 40 के करीब कथित अपराधियों की मौत को लेकर भी सवाल उठने लगा है. पुलिसिया एनकाउंटर की एक तस्वीर यह भी है कि मथुरा में 18 जनवरी को एक बच्चे की गोली लगने से मौत हुई थी तो वहीं 15 सितंबर को नोएडा में हुई एक कथित मुठभेड़ में भी एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति को गोली लगी थी. नोएडा में ही एक जिम ट्रेनर और अम्बेडकरनगर क्षेत्र में राजभर समाज के एक आम युवक का एनकाउंटर किए जाने पर भी पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं.

रिटायर्ड आईपीएस अफ़सर और उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईजी एस.आर. दारापुरी का बयान गौर करने लायक है. दारापुरी कहते हैं-

“पुलिस एनकाउंटर अधिकतर राज्य प्रायोजित होते हैं और 90 फ़ीसदी एनकाउंटर फ़र्ज़ी होते हैं. जब राजनीतिक रूप से प्रायोजित एनकाउंटर होते हैं तो उनमें उस तबके के लोग होते हैं जो सत्ताधारी दल के लिए किसी काम के नहीं हैं या जिन्हें वो दबाना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश में सरकार को यहां आंकड़ा जारी करना चाहिए कि एनकाउंटर में मारे गए लोग किस समुदाय के थे और जिन लोगों के सिर्फ़ पैर में गोली मारकर छोड़ दी गई है, वे किस समुदाय के थे. मेरी जानकारी के अनुसार एनकाउंटर में जितने लोग मारे गए हैं, उनमें अधिकतर संख्या मुसलमानों, अति पिछड़ों और दलितों की है,सवर्णों में शायद ही कोई हो.”

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का यह बयान यूपी पुलिस के रवैये को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है. सवाल उठता है कि आखिर यूपी पुलिस के निशाने पर दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के लोग ही क्यों हैं?

अखिलेश कृष्ण मोहन

दलितों को जगाने बिहार में घूम रही है दलित चेतना रथयात्रा

गोपालगंज। भारत भर में दलित समाज के लोग अपने ऊपर हो रहे अन्याय से परेशान हैं. जाहिर सी बात है, इससे बचने और मुकाबला करने के लिए समाज के लोगों को सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक आधार पर सजग होना होगा. जगह जगह पर तमाम अम्बेडकरी संगठन और वंचित समाज के जागरूक लोग पीछे छूट गए लोगों को जगाने की कोशिश करने में जुटे हैं.

बुद्धभूमि बिहार के गोपालगंज से इसी कोशिश के तहत एक रथयात्रा की शुरुआत की गई है. 11 फरवरी को शुरू हुई यह रथयात्रा प्रदेश के विभिन्न जिलों में वंचित समाज के बीच जाकर उन्हें जागरूक करने का काम करेगी. इस रथ यात्रा को “बिहार दलित चेतना रथ यात्रा” का नाम दिया गया है. यह यात्रा जिले के जय भीम फाउंडेशन के जरिए निकाली गई है. दलित चेतना रथयात्रा का उद्देश्य बिहार के अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों में सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति पर चेतना लाना है.

यात्रा को शहर के वरिष्ठ डॉक्टर आलोक कुमार सुमन ने नीला झंडा दिखाकर रवाना किया. मनोज कुमार रंजन, डाक्टर रंजय कुमार पासवान एवं चंदन अम्बेडकर को यात्रा को सफल करने के लिए शुभकामनाएं दी. गोपालगंज से निकली यह चेतना रथयात्रा सिवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी विभिन्न जिलों में जाएगी. 23 मार्च 2018 को पटना में इसका समापन होगा.

विराट कोहली ने रचा एक और इतिहास

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नई दिल्ली। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ और धुरंदर  बल्लेबाजों में शुमार विराट कोहली ने 27 साल में पहली बार आईसीसी की सर्वाधिक वनडे रेटिंग (909) हासिल कर इतिहास रच डाला है. विराट वनडे में 900 से ज्यादा रेटिंग हासिल करने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं. इसके साथ ही विराट दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स के बाद एक साथ वनडे और टेस्ट रैंकिंग में 900 अंक के आंकड़े को पार करने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं.

विराट ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के छह मैचों में 186.00 की अद्भुत औसत के साथ 558 रन ठोक डाले थे, जिसका उन्हें इनाम मिला. इस दौरान वह तीन ही बार आउट हुए, जिसमें उनके तीन शतक शामिल हैं.

मंगलवार को जारी आईसीसी वनडे रैंकिंग में कोहली को 33 रेटिंग प्वाइंट हासिल हुए. नंबर-1 पर काबिज विराट अब अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी (दूसरे स्थान पर) एबी डिविलियर्स से 65 अंक आगे हो चुके हैं.

विराट की यह रेटिंग- 909 ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज डीन जोन्स के बाद सर्वाधिक हैं, जिन्हें 1991 में 918 की रेटिंग हासिल हुई थी. इसके साथ ही ओवरऑल रेटिंग में विराट को सातवीं उच्चतम रेटिंग मिली है. विव रिचर्ड्स (935), जहीर अब्बास (931), ग्रेग चैपल (921), डेविड गॉवर (919), डीन जोन्स (918) और जावेद मियांदाद (910) ही उनसे आगे हैं.

केजरीवाल सरकार के खिलाफ सचिवालय के अधिकारियों ने ठप्प किया काम

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नई दिल्ली। दिल्ली में केजरीवाल और राज्यपाल के बीच अक्सर मतभेद की खबरें सामने आती रहती हैं. तो तमाम अधिकारियों पर भी राज्यपाल के प्रति जवाबदेही की बात कह कर आप नेताओं को कमतर दिखाने का आरोप लगता रहता है. दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार एक बार फिर विवादों में घिरती दिख रही है. दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया है कि सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई एक मीटिंग के दौरान आप विधायकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और बदतमीजी की.

चीफ सेक्रेटरी ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से इस मामले को लेकर मुलाकात की और आप के दो विधायकों अजय दत्त और प्रकाश झारवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. उनका आरोप है कि सीएम केजरीवाल के सामने ही उनके साथ बदतमीजी की गई. इस बीच आप नेता आशीष खेतान ने आरोप लगाया कि सचिवालय में लोगों ने उनसे मारपीट की है. उन्होंने बताया कि भीड़ ने मंत्री इमरान हुसैन को भी घेर लिया था. सचिवालय में लगातार ‘मारो-मारो’ के नारे लगाए जा रहे थे. आशीष खेतान ने दिल्ली पुलिस को भी फोन कर इसकी शिकायत की, जिसके बाद पर मौके पर आई पुलिस ने मामले को शांत कराया.

वहीं इस मामले से भड़के दिल्ली के IAS असोसिएशन ने AAP विधायकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए सारा काम रोकने का ऐलान किया है. दिल्ली प्रशासनिक अधीनस्थ सेवा के अध्यक्ष डीएन सिंह, ‘हम तत्काल प्रभाव से हड़ताल पर जा रहे हैं. जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, हम काम पर नहीं लौटेंगे.’ दूसरी ओर केजरीवाल के ऑफिस ने इस तरह की किसी घटना से इंकार किया है.

झारखंड: अपनों ने ही डायन बताकर मां-बेटी के कपड़े उतरवाए

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रांची। झारखंड में डायन बता कर औरतों को प्रताड़ित करने का मामला कोई नया नहीं है. आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं और निशाना दलित और आदिवासी महिलाएं बनती हैं. डायन कह कर प्रताड़ित करने वाले कभी दूसरे लोग होते हैं तो कभी अपने ही, जो अपना हित साधने के लिए यह सारा प्रपंच रचते हैं. हद तो यह है कि लगातार इस तरह की खबरें आने के बाद भी प्रशासन इस कुप्रथा को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई कर इसे जड़ से खत्म करने की कोशिश नहीं कर रहा है.

रांची से करीब 60 किलोमीटर दूर सोनाहातू थाने के बोंगादार दुलमी गांव में एक ऐसी ही घटना घटी है, जिसमें गांव वालों ने एक महिला और उसकी बेटी को डायन करार देकर पहले तो उनके कपड़े उतरवा दिए और फिर मैला भी पिलाया. घटना 15 फरवरी की है. असल में पीड़ित महिलाओं की रिश्तेदारी में ही लंबे समय से बीमार महिला की मौत हो गई. इसके बाद परिवार के ही तीन लोग और बीमार हो गए. बजाय डॉक्टर को दिखाने के उनलोगों ने ओझा को बुला लिया, जिसने मां-बेटी को डायन करार दे दिया और यह सारी घटना घटी.

 बीबीसी की खबर में महिला के मुताबिक- “हम लोग अपने घर में थे. तभी मेरे भैयाद (पट्टीदारी) के लोग घर का दरवाज़ा पीटने लगे. इन लोगों ने हम माँ-बेटी पर डायन होने का आरोप लगाया. हमें जबरन श्मशान घाट ले गए. वहाँ हमारे कपड़ों पर इंसानी मल और पेशाब फेंका. फिर हमारे मुँह में भी डाल दिया. नाई से हमारा मुंडन करा दिया. हमारे कपड़े खुलवा दिए. इसके बाद हमें पहनने के लिए सफ़ेद साड़ी दी लेकिन ब्लाउज और पेटीकोट नहीं दिया. सिर्फ साड़ी से हमने अपना शरीर ढंका.

हमें उन्हीं कपड़ों में पूरे गाँव में घुमाया गया. बाद में उनलोगों ने हमें हमारे घर छोड़ दिया. अगली सुबह 16 फ़रवरी को मैं अपनी बेटी के साथ अपने मायके पीलित (ईचागढ़) चली गई. वहाँ भाई के बेटे को सारी बात बताई. उसने हमें हिम्मत दी. हमारे साथ थाने आया. हमलोगों ने सोनाहातू थाने में इसकी नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई.”

आलम यह है कि न तो घटना के दौरान न तो उसके बाद गाँव का कोई भी आदमी मां-बेटी की मदद के लिए तैयार नहीं है. हालांकि मामला पुलिस के पास पहुंचने पर पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब भी वे दोनों गांव लौटने से डर रहे हैं. सबसे ज्यादा डर प्रतिष्ठा को लेकर है. क्योंकि महिला की बेटी शादीशुदा है. और जिस ओझा ने इन दोनों को डायन करार दिया, वह उसी गांव का है, जहां बेटी की शादी हुई है.

– साभार- बीबीसी हिन्दी

बंगाल भाजपा में घमासान, रुपा गांगुली ने लगाया बड़ा आरोप

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अपने पैर मजबूत करने में लगी बीजेपी को झटका लगा है. प्रदेश में पार्टी के भीतर ही विवाद हो गया है. पार्टी की सांसद और पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता रूपा गांगुली ने पार्टी के राज्य प्रभारी दिलीप घोष पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है. रूपा गांगुली के इस आरोप के बाद बंगाल भाजपा में बवाल मच गया है.

पूर्व अभिनेत्री और सांसद ने सोमवार 19 फरवरी को रात करीब साढ़े 12 बजे एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने प्रभारी दिलीप घोष पर खुद को सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत करने का आरोप लगाया. रूपा गांगुली ने यह कह कर भी घोष पर निशाना साधा कि वह पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से तो संपर्क कर सकती हैं, लेकिन दिलीप घोष से संपर्क करना मुश्किल हो गया है.

उन्होंने लिखा- ‘मैं मोदी जी को भी मैसेज कर सकती हूं. लेकिन मुझे आपको मैसेज करने से रोका गया है. मैं अमित भाईसाहब से भी बात कर सकती हूं… लेकिन आप मुझपर लोगों के बीच में चिल्लाए, मुझे गाली दी. मैं चुप रही, क्योंकि मेरे पापा ने मुझे सिखाया था कि बड़ों की बात सुन लो और उनका कहना मानो. आपने सार्वजनिक रूप से मुझ पर टिप्पणी की और परेशान किया.’ पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने के भाजपा के एजेंडे को झटका लग सकता है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपने पैर जमाने की कोशिश में है. बीजेपी के सामने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती है. तो वहीं 2021 विधानसभा चुनावों में भी भाजपा खुद को बंगाल में साबित करना चाहती है. ऐसे में राज्य स्तर पर अपने नेताओं में पड़ी फूट बीजेपी के लिए चिंता का सबब हो सकती है. पश्चिम बंगाल, ओडिसा और तामिलनाडु ही ऐसे प्रमुख राज्य हैं, जहां भाजपा अब भी कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई है और यहां मोदी-शाह का जादू बेअसर रहा है.

चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए फिल्म जगत भी आया सामने

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मुंबई। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए पिछले कई महीनों से तमाम संगठन अपने-अपने तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. इसमें दलित आंदोलन से जुड़े लोगों के अलावा अन्य एक्टिविस्ट, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सिविल सोसाइटी के लोग शामिल हैं. इसी कड़ी में अब चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए फिल्म जगत से जुड़े लोग भी सामने आ गए हैं. मशहूर फिल्म निर्माता और ‘जय भीम कामरेड’ सहित कई महत्वपू्र्ण डाक्यूमेंट्री बनाने वाले डाक्यूमेंट्री फिल्म मेकर आनंद पटवर्धन ने भी चंद्रशेखर रावण की रिहाई की मांग की है.

मुंबई में पटवर्धन ने चंद्रशेखर की रिहाई के लिए सिविल सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है. इस अभियान में आनंद पटवर्धन के अलावा सिविल राइट एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवार और जावेद आनंद, सीपीआईएम के नेता प्रकाश रेड्डी, ऑल इंडिया सेक्युलर फोरम के नेता और प्रख्यात लेखक राम पुनियानी के अलावा कई लोगों ने हिस्सा लिया और चंद्रशेखर की रिहाई के लिए अपना समर्थन दिया है.

असल में चंद्रशेखर आजाद रावण की गिरफ्तारी और उसके बाद उनपर दो बार रासुका लगाने की देश भर के एक्टिविस्टों ने निंदा की है. देश में नागरिक अधिकार और मानवाधिकार के पक्षधरों ने इसे बदले की भावना से लिया गया कदम बताते हुए भाजपा और योगी सरकार को निशाने पर लिया है. तीन महीने की रासुका की अवधि पूरी होने पर चंद्रशेखर के खिलाफ दुबारा रासुका लगाने पर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.

बसपा प्रमुख ने नेताओं से की अपील

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एक अहम अपील की है. पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि उनसे मुलाकात के दौरान वह उनके पैर न छुएं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से सिर्फ ‘जय भीम’ बोल कर अभिवादन करने का आग्रह किया है. बसपा सुप्रीमों की इस अपील के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता की इस अपील को सराहा है.

असल में आमतौर पर यह देखा गया है कि बसपा कार्यकर्ताओं में पार्टी अध्यक्ष मायावती का पैर छूने की होड़ मची रहती है. कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद तमाम कार्यकर्ता अपनी पार्टी अध्यक्ष के पहुंचते ही उनके पैर छूने लगते थे. यही नहीं, संसद भवन में भी मायावती के पहुंचने पर उनके राज्यसभा सांसद उनके पैर छूने लगते थे. कई बार विपक्षी इसकी आलोचना भी करते हैं.

हालांकि ऐसा नहीं है कि अपने नेता का पैर छूने का रिवाज सिर्फ बसपा में ही है, बल्कि बसपा के पहले से मौजूद तमाम राजनैतिक दलों में बड़े नेताओं के पैर छूने की परंपरा रही है. लेकिन जब पहली बार बसपा सत्ता में आई और एक दलित महिला को मुख्यमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ तो नजारा कुछ और था. मायावती यूपी की जनता के साथ-साथ उस समाज का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जिसका हजारों सालों से शोषण हो रहा था. ऐसे में उनके मुख्यमंत्री बनते ही बड़े-बड़े धन्नासेठों और कथित ऊंची जाति के लोग अपना मतलब निकालने के लिए बसपा प्रमुख के पास पहुंचने लगे. इसमें यूपी के वो ब्राह्मण और ठाकुर भी शामिल थे, जिन्होंने दलितों का खूब शोषण किया था. स्वार्थवश इन्होंने सावर्जनिक तौर पर मायावती का खूब पैर पकड़ा और मायावती ने उन्हें मना भी नहीं किया. बल्कि माना जाता है कि उन्होंने इसका आनंद लिया.

इससे यूपी सहित देश के तमाम हिस्सों में मौजूद दलितों और पिछड़ों को खूब शांति मिली. असल में वो अपने शोषकों को अपने समाज की नेता के पैरों में देख रहे थे. यही वजह रही कि बसपा और मायावती को बहुत तेजी से देश के वंचित तबके का सहयोग मिला. लेकिन तब से तीन दशक बीत चुके हैं. ऐसे में मायावती का कार्यकर्ताओं से पैर न छूने की अपील से जाहिर है कि कार्यकर्ताओं के बीच साकारात्मक मैसेज जाएगा.

पीएम मोदी के परीक्षा पर चर्चा में दलित बच्चों को अस्तबल में बैठाया

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हिमाचल प्रदेश।16 फरवरी को जब देश भर में नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये गबन करने की खबर से हड़कंप मचा था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश भर के बच्चों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ कर रहे थे. लेकिन पीएम मोदी के इस कार्यक्रम पर कलंक लग गया है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में परीक्षा पर चर्चा के दौरान चेस्था ग्राम पंचायत में दलित बच्चों को घोड़े के अस्तबल में बैठाने की खबर है.

असल में कार्यक्रम को टीवी पर देखने के लिए बच्चों को गर्वनमेंट हाई स्कूल, कुल्लू के स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के हेड के घर बुलाया गया था. इस दौरान सामान्य वर्ग के बच्चे घर के अंदर चले गए जबकि दलित समाज के बच्चों को मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष के घर के बाहर अस्तबल में घोड़े की लीद के बीच बैठाया गया. बच्चों ने इस संबंध में शुक्रवार को कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर युनूस को लिखित शिकायत दी, जिसके बाद मामला गरमा गया.

बच्चों का आरोप है कि टीचर मेहरचंद ने उन्हें बाहर अस्तबल में बैठने को कहा. बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर ने उन्हें बीच से प्रोग्राम छोड़कर नहीं जाने को लेकर भी हिदायत दी. इस दौरान बच्चे अस्तबल के दुर्गंध से परेशान रहे. इस घटना के बाद बच्चों से भेदभाव के अन्य मामले भी खुलने लगे. बच्चों का आरोप है कि उन्हें मीड डे मिल के दौरान भी जातिगत भेदभाव झेलना पड़ता है और अलग बैठाया जाता है.

घटना सामने आने के बाद स्थानीय अनुसूचित जाति कल्याण संघ ने विरोध प्रदर्शन किया, और स्कूल के प्रधानाचार्य राजन भारद्वाज और कुल्लू के डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन जगदीश पठानिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रधानाचार्य राजन ने हालांकि घटना को लेकर मांफी मांगी है और भविष्य में ऐसा नहीं होने देने की बात कही है. मामला बढ़ने के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस बारे में शिक्षा विभाग के सचिव से रिपोर्ट मांगी है. जहां तक प्रधानमंत्री मोदी की बात है तो जैसे वो नीरव मोदी के मामले पर चुप हैं, वैसे ही अपने ही कार्यक्रम के दौरान दलित बच्चों के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार पर उनकी कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है.

गुजरात में दलितों ने भाजपा विधायक को दौड़ा कर पीटा

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अहमदाबाद। भाजपा और दलित समाज के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. दोनों के बीच एक रंजिश भरा माहौल बनता जा रहा है. इस माहौल से पार्टी अपने राजनीतिक गढ़ गुजरात में भी नहीं बच पा रही है. असल में इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हुआ है, जिसमें लोग एक विधायक को दौड़ा कर पीट रहे हैं. विधायक अपनी जान बचाकर जनता के बीच से पुलिस के पास जाता है. एक पुलिसकर्मी विधायक को सुरक्षा में लेकर वहां से ले जाता है.

घटना शुक्रवार की है. गुजरात में दलित कार्यकर्ता भानुभाई वानकर की मौत के बाद उनके परिवार वालों से मिलने गये बीजेपी विधायक कर्षण सोलंकी को लोगों को जबर्दस्त गुस्से का सामना करना पड़ा. सोलंकी गांधीनगर के सिविल अस्पताल गये थे. अस्पताल के बाहर कई लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान जब कर्षण सोलंकी ने भानुभाई के परिवार वालों से मुलाकात करने की कोशिश की तो प्रदर्शन कर रहे लोग काफी गुस्से में आ गये. लोगों को गुस्से को देखते हुए उन्हें वहां से दौड़कर भागना पड़ा. इस दौरान लोगों ने विधायक से हाथा-पाई भी की.

असल में देश में जिस तरह का माहौल बन रहा है और कट्टर हिंदुत्व के नाम पर गुजरात के ऊना से लेकर महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव तक में दलितों के साथ जो रहा है. उसकी प्रतिक्रियाएं अब देखी जाने लगी हैं.

मोदी सरकार से नहीं डरता भगोड़ा नीरव मोदी, देखिए क्या कि

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में घोटाला कर देश का हजारों करोड़ रुपये गबन करने वाला नीरव मोदी मजे में है. उसे इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि देश में उसके घोटाले से हड़कंप मचा हुआ है. असल में नीरव मोदी ने कुछ ही दिन पहले ही अपने दो नए स्टोर्स खोले हैं.

ये स्टोर्स मकाऊ और कुआलालंपुर में खोले गए हैं. ये दोनों नए स्टोर्स नीरव मोदी ने खुद पर एफआईआर दर्ज होने के बाद खोले हैं, जिससे साफ है कि देश का पैसा लेकर भागा मोदी बिना किसी चिंता के देश के बाहर अपने बिजनेस को बढ़ाने में जुटा है. दूसरी ओर सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए दुनिया के सभी एयरपोर्ट को अलर्ट कर दिया है. यानी देश से लेकर विदेश तक नीरव मोदी की तलाश जारी है. बता दें कि नीरव मोदी के खिलाफ एलओयू की मदद से बैंकों से लोन लेने का आरोप है.

विलुप्त होने के कगार पर 42 भारतीय भाषाएं

नई दिल्ली। भारत ऐसा देश है जहां माना जाता है कि हर 3 कोस यानि की 9 किलोमीटर के बाद भाषा बदल जाती है. एक ही राज्य में एक ही स्थानीयता में भी पचास सौ किलोमीटर की दूरी पर आपको बिल्कुल अलग भाषा सुनने को मिल सकती है. इस लिहाज से भारत देश में भाषाओं और उनसे जुड़ी संस्कृतियों का खजाना है. लेकिन भाषाओं के इसी खजाने में भारत में 42 बोलियां पर संकट मंडरा रहा है. ऐसा माना जाता है कि संकटग्रस्त इन भाषाओं को बोलने वाले कुछ हजार लोग ही हैं.

गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार इन 42 भाषाओं में से कुछ भाषाएं विलुप्त प्राय भी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी ऐसी 42 भारतीय भाषाओं या बोलियों की सूची तैयार की है. यह सभी खतरे में हैं और धीरे-धीरे विलुप्त होने की ओर बढ़ रही हैं. जिन भाषाओं पर संकट है, उनमें 11 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की हैं. ये भाषाएं ग्रेट अंडमानीज, जरावा, लामोंगजी, लुरो, मियोत, ओंगे, पु, सनेन्यो, सेंतिलीज, शोम्पेन और तकाहनयिलांग हैं. जबकि मणिपुर की सात संकटग्रस्त भाषाएं एमोल, अक्का, कोइरेन, लामगैंग, लैंगरोंग, पुरुम और तराओ हैं. तो वहीं हिमाचल प्रदेश की चार भाषाएं- बघाती, हंदुरी, पंगवाली और सिरमौदी भी खतरे में हैं.

अन्य संकटग्रस्त भाषाओं में ओडिशा की मंडा, परजी और पेंगो हैं. कर्नाटक की कोरागा और कुरुबा जबकि आंध्र प्रदेश की गडाबा और नैकी हैं. तमिलनाडु की कोटा और टोडा विलुप्त प्राय हैं. असम की नोरा और ताई रोंग भी खतरे में हैं. उत्तराखंड की बंगानी, झारखंड की बिरहोर, महाराष्ट्र की निहाली, मेघालय की रुगा और पश्चिम बंगाल की टोटो भी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं.

इस स्थिति को लेकर सरकार भी चिंतित है. सरकार मैसूर स्थित भारतीय भाषाओं के केंद्रीय संस्थान देश की खतरे में पड़ी भाषाओं के संरक्षण और अस्तित्व की रक्षा करने के लिए केंद्रीय योजनाओं के तहत कई उपाय कर रहा है. इन कार्यक्रमों के तहत व्याकरण संबंधी विस्तृत जानकारी जुटाना, एक भाषा और दो भाषाओं में डिक्शनरी तैयार करने के काम किए जा रहे हैं. इसके अलावा, भाषा के मूल नियम, उन भाषाओं की लोककथाओं, इन सभी भाषाओं या बोलियों की खासियत को लिखित में संरक्षित किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश में मतदाताओं को धमका रहे हैं शिवराज सरकार के मंत्री

भोपाल। राजस्थान के उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा बौखलाई और डरी हुई सी है. भाजपा के डर का आलम यह है कि अब उसके नेता जनता को यह कह कर धमकाने लगे हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन लोगों ने भाजपा को वोट दिया है.

मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा कोलारस में चुनाव प्रचार के दौरान सियासी बवाल मच गया है. मंत्रीजी ने वोटरों से कहा कि सरकारी योजना का फायदा कमल पर बटन दबाने वालों को ही मिलेगा, पंजे वालों को नहीं. इस बयान के बाद जहां कांग्रेस ने भाजपा को घेरा है तो वहीं भाजपा सफाई देने लगी है. बयान सामने आने के बाद भाजपा ने सफाई में कहा कि यशोधरा का मतलब धमकाना नहीं समझाना था कि बीजेपी विधायक के चुने जाने से तालमेल बेहतर होगा.

दूसरी ओर इस मामले में कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश की खेल एवं युवा विकास मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को नोटिस जारी कर 20 फरवरी तक उनसे जवाब मांगा गया है. असल में राजस्थान उपचुनाव में हार के बाद भाजपा डरी हुई है. राजस्थान के बाद अब मध्य प्रदेश की दो सीटों कोलारस-मुंगावली पर उपचुनाव होने हैं. ये दोनों क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आते हैं, इसलिए कांग्रेस के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न है. तो भाजपा ने भी इन दोनों सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को उतार दिया है. इन दिनों सीटों का परिणाम 24 फरवरी को आएगा.