मायावती ने मोदी से पूछा क्या हुआ आपका वादा

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक प्रकरण में अब भाजपा और पीएम मोदी चारो ओर से घिरने लगे हैं. बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पीएम मोदी को उनका वह बयान याद दिलवाया है, जिसमें मोदी ने कहा था कि ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा.’

एक बयान जारी कर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की नाक के नीचे 20 हज़ार करोड़ रूपये का बैंक महाघोटाला हो गया और सरकार सोती रही, यह कैसी जनहितैषी सरकार है. उन्होंने कहा कि मोदी द्वारा देश को दिये गये इस आश्वासन का क्या हुआ कि ना खायेंगे और ना खाने देंगे? मोदी पर सवाल दागते हुए उन्होंने कि क्या जनधन योजना के अन्तर्गत करोड़ों गरीबों व मेहनतकश लोगों की गाढ़ी कमाई का हजारों करोड़ रूपया अपने चहेते उद्योगपतियों व धन्नासेंठों को ग़बन करने के लिये ही सरकारी बैंकों में जमा कराया गया था?

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक महाघोटालों व अर्थव्यवस्था में मज़बूती के दावों के बावजूद रोज़गार के अवसर उपलब्ध नहीं होने आदि से यह साफ तौर पर लगता है कि मोदी सरकार में सरकारी व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है.

इधर महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भी मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि नीरव मोदी जो पैसा लेकर भाग गया वह राष्ट्रीय खजाने का था, जिसे उसने स्पष्ट रूप से लूट लिया. अब इस घोटाले से उजागर होता है कि पीएम मोदी का प्रसिद्ध नारा ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ खोखला वादा था. शिवसेना ने सवाल उठाया कि क्या उसका आधार कार्ड बैंक खातों से जुड़ा था? इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना था कि बिडंबना यह है कि आम आदमी को आधार कार्ड के बिना अस्पताल में इलाज भी नहीं मिल सकता है, लेकिन नीरव मोदी जैसा आदमी बिना आधार कार्ड के भी किसी बैंक से 11,500 करोड़ रुपये बेईमानी से निकाल सकता है.’ ठाकरे ने घोषणा की है कि भविष्य में वह मोदी के साथ कोई भी मंच साझा नहीं करेंगे.

गुजरात में दलितों के सामने बैकफुट पर भाजपा, माननी पड़ी सारी मांगे

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अहमदाबाद। थानगढ़ और ऊना में दलित उत्पीड़न की घटना के बाद पाटण में दलित सामाजिक कार्यकर्ता के आत्मदाह ने गुजरात सरकार को मुश्किल में डाल दिया है. दलितों को जमीनों के पट्टे व कब्जे दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर ने 15 फरवरी को जिला कलेक्ट्रेट के सामने आत्महत्या कर लिया था. इसके बाद शुरू हुए आंदोलन के बाद आखिरकार गुजरात सरकार को दलितों के सामने झुकना पड़ा. रविवार को जिग्नेश मेवाणी और तमाम अन्य दलित संगठनों द्वारा बुलाए बंद और देर शाम तक चले ड्रामे के बाद आखिरकार सरकार और प्रशासन ने दलितों के विद्रोह के आगे सरेंडर कर दिया और उनकी सारी मांगे मान ली.

इससे पहले मामला तब बिगड़ गया जब भानुभाई के घर वालों ने उनके द्वारा की जा रही मांगे नहीं माने जाने तक उनका शव लेने से मना कर दिया था. तो घटना के बाद दलित संगठनों और जिग्नेश मेवाणी ने 18 फरवरी को अहमदाबाद व गांधीनगर बंद का आवाह्न किया था, जिससे दलित समाज के लोग सड़क पर आ गए. पति की मौत के बाद से ही उपवास पर बैठी भानुभाई वणकर की पत्नी इंदूबेन की भी रविवार को हालत बिगड़ गई.

गुजरात सरकार के लिए मामला इसलिए भी पेंचिदा हो गया था कि 19 फरवरी से गुजरात विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है. तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ गुजरात यात्रा पर आ रहे थे. ऐसे में दलित आंदोलन के चलते सरकार व प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. जिग्नेश मेवाणी द्वारा भी एक के बाद एक ट्विट से सारी जानकारियां सामने आती रही. मेवाणी की टीम ने जब उनकी गिरफ्तारी का वीडियो शेयर किया तो देश भर में गुजरात पुलिस की ज्यादती पर बहस होने लगी, इससे भी प्रशासन दबाव में आ गया.

मेवाणी का कहना है कि गुजरात के 50 लाख दलितों का भरोसा अब गुजरात सरकार पर नहीं रह गया है. यह सरकार दलित विरोधी है. उन्होंने गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की.

भानूभाई के आत्मदाह के बाद मामला शांत करने के लिए गुजरात सरकार ने फिलहाल तो सारी शर्ते मान ली है, लेकिन मेवाणी के तेवर देखते हुए और विधानसभा सत्र के कारण यह मामला अभी और जोर पकड़ सकता है.

चंद्रशेखर की रिहाई के लिए आंदोलन शुरू, जेल से भेजी चिट्ठी में योगी सरकार को निशाने पर लिया

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नई दिल्ली। जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई को लेकर भीम आर्मी ने सहारनपुर से एक बड़े आंदोलन का आगाज कर दिया है. 18 फरवरी को सहारनपुर में भीम आर्मी के एससी-एसटी व ओबीसी एवं अल्पसंख्यक महासम्मेलन में सामूहिक रूप से रावण की रिहाई की मांग की गई. इस दौरान चंद्रशेखर की रिहाई की मांग को लेकर भीम आर्मी के साथ तमाम अन्य संगठन भी आ गए हैं. आंदोलनकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा.

महासम्मेलन में उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी महक सिंह ने चंद्रशेखर रावण के भेजे गए आठ पेज का संदेश पढ़ा, जिसमें चंद्रशेखर ने वर्तमान सरकार को काले अंग्रेजों की सरकार घोषित करते हुए इससे मुक्ति की बात कही थी. रावण ने संदेश में कहा कि जब तक भगवा सरकार को खत्म नहीं कर दिया जाएगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा.

महासम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी चंद्रशेखर की रिहाई का समर्थन किया, तो वहीं समर्थन के लिए पूर्व आइपीएस एसआर दारापुरी, हिमाचल प्रदेश के पूर्व डीजीपी पृथ्वीराज, रालोद के जिला अध्यक्ष राव केसर सलीम, के अलावा चंद्रशेखर की मां कमलेश, जेएनयू से आए प्रदीप नरवाल भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे. सम्मेलन में यूपी, महाराष्ट्र, उत्तराखंड आदि प्रदेशों से बड़ी तादाद में लोग पहुंचे.

हालांकि इस कार्यक्रम को लेकर पुलिस का रवैया ठीक नहीं रहा. पहले तो पुलिस ने कार्यक्रम को लेकर इजाजत नहीं दी, लेकिन भीम आर्मी के लोगों के तेवर को देखते हुए और किसी भी हाल में आंदोलन पर अड़े रहने के बाद प्रशासन को इसकी इजाजत देनी पड़ी.

बिहार में गूंजा ‘नीतीश-सुशील चोर’ है का नारा

बिहार। पटना में आज से शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के दौरान आरजेडी के विधायकों ने जमकर बवाल मचाया और कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी की. नाराज आरजेडी के विधायकों ने सम्मेलन का बीच में ही बहिष्कार कर दिया और निकल गए.

सम्मेलन को संबोधित करते समय उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक टिप्पणी की जहां उन्होंने कहा कि आज के दिन देश के तीन मुख्यमंत्री जेल की हवा खा रहे हैं. बात साफ है, सुशील मोदी का इशारा कहीं ना कहीं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तरफ था और यह टिप्पणी सुनते ही सम्मेलन में मौजूद आरजेडी के सभी विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और नारेबाजी करते हुए कार्यक्रम छोड़ कर बाहर आ गए.

सम्मेलन से बाहर निकलने के दौरान आरजेडी के विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी के विरोध में नारेबाजी भी की और कहा कि नीतीश-सुशील चोर हैं.

आरजेडी के विधायकों ने आरोप लगाया कि सुशील मोदी ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को राजनीतिक मंच बना दिया और लालू प्रसाद के खिलाफ टिप्पणी की.

आजतक से बातचीत करते हुए आरजेडी विधायक शक्ति सिंह यादव ने कहा कि सुशील मोदी ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन जैसे कार्यक्रम को और बिहार को बदनाम किया है, जहां पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अगर चर्चा ही करनी है तो सुशील मोदी भाजपा के भ्रष्टाचार की चर्चा करते और बताते कि डायमंड कारोबारी नीरव मोदी देश से 11 हजार करोड़ लेकर कैसे फरार हो गया

फिर पुराने खेमे में लौटे लवली, फिर कांग्रेस में आएं

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नई दिल्ली। नौ महीने पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले अरविंदर सिंह लवली ने शनिवार को दोबारा कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। लवली ने ठीक एमसीडी चुनाव से पहले नाराजगी की वजह से बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। लवली ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अपने दिल की बात बताई और कहा कि भाजपा में जाने का निर्णय लेना मेरे लिए कोई खुशी का निर्णय नहीं था। पीड़ा में लिया हुआ डिसिजन था वो। वैचारिक रूप से मैं वहां मिसफिट था।

अरविंदर सिंह लवली के दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की बात पर मुहर लगाते हुए खुद कांग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष अजय माकन ने जानकारी दी है कि लवली ने दोबारा कांग्रेस ज्वाइन कर ली है।

कहा जा रहा है कि लवली की वापसी के पीछे राहुल गांधी का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि लवली और राहुल गांधी की एक मीटिंग हुई थी और उन्हीं के समझाने पर लवली ने कांग्रेस में शामिल होने का कदम उठाया है।

कल से बदल जाएगा बीजेपी मुख्यालय का पता

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नई दिल्ली। अब भारतीय जनता पार्टी का नया पता होगा 6 दीन दयाल मार्ग. BJP के पुराने दफ्तर 11 अशोक रोड को रविवार को खाली कर दिया जाएगा और पार्टी नए पते 6 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर चली जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और तमाम टॉप बीजेपी नेतृत्व बीजेपी के नए दफ्तर के उद्घाटन के मौके पर मौजूद रहेंगे. इससे पहले बीजेपी का मुख्यालय 34 साल तक 11 अशोक रोड रहा है.

8000 वर्ग मीटर में फैले BJP के इस नए दफ्तर की बिल्डिंग बनने में करीब डेढ़ साल का समय लगा. आधुनिक सुविधाओं के तहत बनाए गए पार्टी का मुख्यालय बहुमंजिला इमारत में होगा, जिसमें तीन ब्लॉक होंगे. मुख्य इमारत सात-मंजिला होगी, और उसके आसपास मौजूद दोनों इमारतें तीन-तीन मंजिल की होंगी. सभी तरह की आधुनिक सुविधाओं से लैस इस दफ्तर के ग्राउंड फ्लोर पर बीजेपी और जनसंघ से जुड़े महापुरुषों की प्रतिमा लगाई गई है. ग्राउंड फ्लोर पर ही आठ प्रवक्ताओं के लिए कमरे होंगे.

बीजेपी अध्यक्ष का दफ्तर बिल्डिंग के सबसे ऊपर के हिस्से यानी तीसरी मंजिल पर होगा. दूसरी मंजिल पर पार्टी के दूसरे नेता, महासचिव, सचिव, उपाध्यक्षों की बैठने की व्यवस्था की गई है. मीडिया के लिए ग्राउंड फ्लोर पर एक हॉल बनाया गया है और वक्ताओं के लिए भी अलग-अलग रूम बनाए गए हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल भी ग्राउंड फ्लोर पर ही बनाया गया है, जिसमें पार्टी की नियमित ब्रीफिंग होगी.

पार्टी दफ्तर में खाने पीने के लिए एक बड़ी कैंटीन की व्यवस्था की गई है. नए पार्टी मुख्यालय में काफी बड़े हिस्से में गार्डेन बनाया गया है. बहुत बड़ी लाइब्रेरी भी पढ़ने लिखने के लिए बनाई गई है. पार्टी दफ्तर में दो बेसमेंट पार्किंग की व्यवस्था की गई है.

बीजेपी के नए मुख्यालय की खास बात यह है कि पार्टी अध्यक्ष के लिए पूरा सचिवालय बनाया गया है. अध्यक्ष के रूम के साथ उनके स्टाफ के लिए एक कार्यालय बनाया गया है. साथ ही में बड़ी बैठकों के लिए बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल बनाए गए हैं. वहीं उसी फ्लोर पर ही आम बैठक की भी व्यवस्था की गई है. अब BJP 2019 के चुनावों के लिए नए पते से ही रणनीति बनाएगी.

सवर्ण महिलाओं से 14 साल कम जीती हैं दलित महिलाएः UN Report

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महिलाओं को लेकर हाल ही में आई यूएन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. यह रिपोर्ट भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति का आंकलन करती है. साथ ही दलित और उच्च वर्ग की महिलाओं के बीच के अंतर को भी सामने लेकर आती है. साथ ही इस बहस को और गहरा करती है कि महिला होने के बावजूद दलित औऱ सवर्ण समाज की महिलाओं की स्थिति अलग है.

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक दलित समाज की महिलाएं सवर्ण समाज की महिलाओं से कम जीती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि दलित महिला सवर्ण महिला से 14.6 यानि करीब साढे 14 साल कम जीती हैं. इसकी वजह पूरी स्वच्छता का न होना, पूरी तरह से साफ पानी की सप्लाई नहीं होना और स्वास्थ सुविधाओं की कमी है. यूएन ने इस स्थिति को बेहतर करने के लिए सन् 2030 तक लैंगिक समानता को अपना एजेंडा घोषित किया है.

इस रिपोर्ट पर राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन की संयोजक रजनी तिलक कहती हैं-

देश में दलित महिलाओं का बहुत शोषण होता है. वह आर्थिक औऱ सामाजिक रूप से बहुत पिछड़ी हैं. मध्यमवर्गीय महिलाएं भी एक दबाव में अपनी जिंदगी जीती है. सफाईकर्मी समाज की महिलाओं की हालत तो बहुत खराब है. उनके पास इतनी सहूलियत भी नहीं होती कि वह ठीक से खाना भी खा पाए, इसलिए वो कुपोषण की शिकार हो जाती हैं. साथ ही शिक्षा के अभाव के कारण वह जागरूक नहीं होती और बीमारियों का शिकार हो जाती है. झुग्गियों और ठेठ गांव में रहने वाली महिलाओं के सामने तो स्वच्छता की चुनौतियां बढ़ जाती है. मेरा मानना है कि अगर और जमीनी स्तर पर सर्वे किया जाए तो स्थिति इससे भी बुरी मिलेगी.

 सर्वे के मुताबिक दलित महिलाओं की औसत उम्र 39.5 जबकि उच्च जाति की महिलाओं की औसत उम्र 54.1 साल है. इस रिपोर्ट में 89 देशों का सर्वे किया गया है. य़ही नहीं विकासशील देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा शहरी महिलाओं और लड़कियों को साफ पानी, स्वच्छता और जरूरत के हिसाब से रहने की जगह में से किसी न किसी समस्या से गुजरना पड़ता है.

असल में इस अहम रिपोर्ट के पीछे की सच्चाई की ओर झांकना भी जरूरी है. आज भी दलित समाज की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गांवों में घोर गरीबी में जीती है. वहां न उनको साफ पानी मिल पाता है और न ही स्वच्छता. खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को शौच की समस्या का सामना करना पड़ता है. इस रिपोर्ट से भारतीय महिलाओं के अंतर की एक बड़ी सच्चाई सामने आती है.

क्या कांग्रेस की तरफ लौट रहे हैं दलित

तीन दशक पहले तक दलित समाज को कांग्रेस के परंपरागत वोटर के रूप में देखा जाता था. लेकिन यूपी में बसपा के उभार औऱ बिहार में लालू यादव के उदय के साथ ही दलित वोटर कांग्रेस को छोड़कर बसपा और समान विचारधारा वाली दूसरी पार्टियों में जाने लगा. बीते चुनाव में यूपी को छोड़कर देश के तमाम राज्यों के दलितों ने भाजपा को वोट दिया. यही वजह रही कि भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद तमाम प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा से दलितों का मोहभंग हो गया है.

हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए विश्वविद्यालयों के चुनाव के साथ ही राजस्थान के उपचुनाव से भी इस बात के संकेत मिल गए हैं कि दलित वोटर अब वापस कांग्रेस की ओर देखने लगे हैं. खासकर राजस्थान में तो इस बात के साफ संकेत मिल चुके हैं. सवाल है कि आखिर इतनी जल्दी दलितों का मोहभंग कांग्रेस से क्यों हो गया है?

परेशान भाजपा खुद इसकी वजह तलाशने में जुट गई है. फीडबैक में दलितों की नाराजगी की तीन वजह सामने आयी है. पहली वजह डांगावास काण्ड है, जिसमें पांच दलितों समेत छह लोगों की बर्बर हत्या कर दी गई थी. दूसरी वजह नोखा-बीकानेर के डेल्टा मेघवाल कथित आत्महत्या प्रकरण में तमाम आंदोलन के बावजूद सीबीआई जांच न होना और तीसरी वजह भाजपा की ही दलित विधायक चंद्रकांता मेघवाल के साथ पुलिस अधिकारियों द्वारा थाने में बदसलूकी की घटना पर पर्दा डालने और आरोपी आईपीएस चूनाराम जाट की बीच चुनाव में दौसा के पुलिस अधीक्षक के पद पर की गयी ताजपोशी मानी जा रही है.

दलितों के भीतर इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकार ने जाट समुदाय के वोट बैंक के लिए दलितों के साथ हुई बर्बरता पर चुप्पी साध ली, ताकि जाट नाराज न हो जाए. हालांकि इस बड़े मामले में कांग्रेस की चुप्पी भी दलितों को खल गई. लेकिन उनके लिए भाजपा को सबक सिखाना ज्यादा जरूरी था. दलितों का रुख आने वाले दिनों में बिहार और यूपी के उपचुनाव और कर्नाटक औऱ राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद और स्पष्ट हो जाएगा.

गुजरात में प्रशासन के सामने दलित ने खुद को जला डाला, मेवाणी ने किया बंद का ऐलान

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​प्रतीकात्मक फोटो​

अहमदाबाद। गुजरात के पाटन में एक दलित कार्यकर्ता भाबु वणकर ने कलेक्टर कार्यालय के परिसर ख़ुद को आग लगा ली. घटना गुरुवार दोपहर एक बजे की है. आत्मदाह करने के बाद 95 फीसदी तक जल चुके वणकर की मौत हो गई. वणकर दादुखा गांव में दलितों को खेती के लिए ज़मीन आवंटन करवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

वणुभाई पिछले तीन साल से समी तहसील पर दुदखा गांव में सरकारी जमीन पर दलित परिवार को कब्जा दिलवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. हफ्तेभर पहले ही उन्होंने पत्र लिखकर प्रशासन को आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी. इसको देखते हुए गुरुवार को कलेक्टर ऑफिस में भारी पुलिस बंदोबस्त था. फायर ब्रिगेड भी बुलवाई गई थी. इसके बावजूद भानुभाई ने खुद को आग लगा ली. घटना के बाद पाटन कलेक्टर आनंद पटेल ने कहा कि जिस जमीन पर कब्जा मांगा जा रहा है, वह 1955 से सरकार के पास है. सरकार को सिफारिश भेजी गई है. फैसला सरकार को करना है.

इस घटना के बाद दलित कार्यकर्ता और गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने शुक्रवार को पाटन बंद का ऐलान किया है. साथ ही मेहसाणा ज़िले के पुलिस प्रमुख के निलंबन की भी मांग की है. सामाजिक कार्यकर्ता की मौत के बाद स्थानीय दलित एकजुट होने लगे हैं और आंदोलन की तैयारी में है. इसको देखते हुए पाटन और आस-पास के ज़िलों से दो सौ पुलिसकर्मी और करीब सौ रिज़र्व बल के पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है.

योगी सरकार ने पेश किया धार्मिक बजट, जानिए जरूरी बिन्दु

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज 16 फरवरी को अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया. इस बजट को राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट बताया गया है. वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने 4 लाख 28 हजार करोड़ रुपये का मेगा बजट पेश किया. यह बजट पिछले साल की तुलना में 11.4 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले साल 3.84 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था. वहीं इस बजट में 7 हज़ार 485 करोड़ 6 लाख का अनुमानित घाटा बताया गया है.

बजट के महत्पूर्ण बिन्दुओं की बात करें तो वह यूं है-

1. बजट में नई योजनाओं के लिए 14,341.89 करोड़ रुपये रखा गया है. 2. इस साल बजट में धार्मिक कार्यों के लिए ज्यादा पैसा आवंटन किया गया है. कुंभ के लिए 1500 करोड़ रुपय आवंटित किए गए हैं. 3. धर्मार्थ कार्य के लिए कैलाश मानसरोवर भवन और गाजियाबाद में इस भवन के निर्माण के लिए 94.26 करोड़ आवंटित किया गया है. ब्रज तीर्थ विकास परिषद के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन. 4. मदरसा अनुदान के मद में सरकार ने 215 करोड़ रुपये दिया है. इसके अलावा अरबी फारसी मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 404 करोड़ रुपये और अरबिया फारसी पाठशालाओं के लिए 486 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. 5. गरीबों को 5 लाख घर देने का लक्ष्य रखा गया है. वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट को 250 करोड़ आवंटित हुए हैं. 6. स्वच्छ भारत मिशन को 1100 करोड़ और कान्हा गौशाला के लिए 98 करोड़ का बजट आवंटन. 7. किसानों का आय दोगुना करने के दावे के साथ किसानों को खाद के लिए 100 करोड़ रुपए. 8. शिक्षा के क्षेत्र में सर्व शिक्षा मिशन को 18167 करोड़ रुपये का बजट आवंटन हुआ है. माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए 480 करोड़ रुपये दिए गए हैं. दीनदयाल राजकीय मॉडल विद्यालय के लिए 26 करोड़ रुपये. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के लिए 167 करोड़. अहिल्याबाई निःशुल्क शिक्षा योजना को 21 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है. मेडिकल कॉलेजों के लिए 126 करोड़ रुपये दिए गए हैं. ग्रेटर नोएडा एम्स को MBBS की 100 सीटें एलॉट. 9. बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए 650 करोड़ रूपए जारी. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए 550 करोड़ रुपये और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए 1000 करोड़ आवंटित किए गए हैं.

अनिल अंबानी ने आप नेता पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का दावा

नई दिल्ली। राफेल डील में खुद को बदनाम किए जाने का आरोप लगाते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी ने आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर पांच हजार करोड़ रुपये का मानहानि दावा ठोक दिया है. अनिल अंबानी ने संजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजा है. अनिल अंबानी ने कहा कि संजय सिंह के आरोपों से उनकी छवि को नुकसान हुआ है.

अंबानी के केस के जवाब में संजय सिंह ने राफेल डील के मामले में अनिल अंबानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख से समय मांगा है. आप नेता ने 13 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि भारत और फ्रांस में 36 राफेल विमानों को लेकर 56,000 करोड़ रुपये की डील हुई है. इसमें रिलायंस डिफेंस लिमिटेड फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन को 22,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिलने का आरोप लगाया गया है.

साथ ही मानहानि के नोटिस पर संजय सिंह ने भी पलटवार किया है. इस बारे में ट्विट का सहारा लेते हुए संजय सिंह ने लिखा है, ‘उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है. पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि का केस करेंगे. उन्होंने कहा कि वह अपनी बात पर कायम है. ये बंदर घुड़की नहीं चलेगी.’

करन कुमार

आंख मारने वाली सीन पर वायरल हुई प्रिया प्रकाश ने दी सफाई

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नई दिल्ली। मलयालम फिल्म ओरू अदार लव के एक गाने मनिक्य मलाराया पूवी से रातो रात हिट हुई मलयालम एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वॉरियर हर तरफ छाई हुईं हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद जहां प्रिया के परेशान घरवालों द्वारा उसे हॉस्टल भेजने की खबर आई तो वहीं सोशल मीडिया पर भी तरह तरह के कमेंट आए. अब अभिनेत्री प्रिया प्रकाश ने खुद ही इस दृश्य को लेकर सफाई दी है.

गाने में प्रिया के आंखों मारने वाले सीन पर प्रिया ने एनडीटीवी से कहा है कि आंख वाला सीन हमारा कोई पहले से तय सीन या प्रैक्टिस किया हुआ सीन नहीं था. यह सीन अच्छा हुआ और हमारे डायरेक्टर ने एक बार में ही ओके कर दिया था. बता दें कि प्रिया एक क्लासिकल डांसर हैंसाथ ही कर्नाटक म्यूजिक भी सीख रही हैं. गाना उनका डांस के बाद दूसरा लव है

राहुल गांधी ने बनाई संचालन समिति, इन दो अहम लोगों को किया शामिल

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के अगले सत्र के लिए नई संचालन समिति (Steering Committee) का गठन किया है. 34 सदस्यीय इस कमेटी में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विशेष रूप से शामिल किया गया है. इसके साथ ही पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी, अहमद पटेल,राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम समेत अन्य को शामिल किया गया है.

यह संचालन समिति कांग्रेस की कार्यसमिति की जगह लेगी. राहुल गांधी द्वारा गठित इस समिति की बैठक 17 फरवरी को कांग्रेस मुख्यालय में होगी. अभी तक कांग्रेस अध्यक्ष समेत कार्यसमिति में कुल 25 सदस्य होते थे, जिसमें 12 का चुनाव होता था और 12 सदस्य पार्टी अध्यक्ष द्वारा मनोनीत होते थे. नई संचालन समिति का गठन होने से राहुल गांधी की टीम सामने आ गई है. इस समिति के जरिए राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वह पार्टी में सीनियर नेताओं की अहमियत को बनाए रखेंगे.

थिएटर ओलंपिक में पाक के नाटक को जगह नहीं

नई दिल्ली। आठवां थिएटर ओलंपिक 17 फरवरी को दिल्ली के लाल किला मैदान से शुरू होगा. रंगमंच की दुनिया का अपनी तरह का यह सबसे खास ओलंपिक 51 दिनों तक चलेगा. इसमें दुनिया के 30 देशों के कलाकार 30 अलग-अलग भाषाओं में नाटक पेश करेंगे. यह पहली बार है जब भारत थिएटर ओलंपिक आयोजित कर रहा है. इस महोत्सव के लिए थीम तय किया गया है “फ्लैग ऑफ फ्रेंडशिप”. लेकिन दोस्ती के इस कारवां में पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्ले को जगह नहीं मिली है.

पाकिस्तान की तरफ से इस रंगमंच महोत्सव में चार थिएटर ग्रुप ने नाटक मंचन का प्रस्ताव भेजा था. लेकिन एक भी नाटक का चयन नहीं हुआ है. कुछ थिएटर ने इसे स्वीकार कर लिया है तो कुछ ने विरोध जताया है. ‘हुसैन’ नाम का नाटक भेजने वाले आजाद थिएटर के क्रिएटिव डॉयरेक्टर सरफराज अंसारी ने कहा कि ‘उनको भारत से ऐसी ही उम्मीद थी.’ उन्होंने कहा, “बहुत उम्मीद से इस एंट्री को हमने भेजा था. ये पाकिस्तान की कहानी नहीं थी. ये भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाली कहानी थी.”

नीरव मोदी ने पीएनबी में ऐसे किया अरबों का घोटाला

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11,360 करोड़ रुपये के घोटाले से देश हिल गया है. इस घोटाले के पीछे जिस शख्स का नाम आ रहा है, वह जाना माना हीरा व्यपारी नीरव मोदी है. यह घोटाला यह बताने के लिए भी काफी है कि अगर भारत में आपका रसूख है तो आप बैंक के अरबों का गबन कर चुपचाप देश छोड़कर जा सकते हैं. हालांकि भारत के सबसे बड़े बैंकों में से एक पंजाब नैशनल बैंक ने इस मामले में लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन बैंक ने इस बात को स्वीकार किया है कि इसमें बैंक के कर्मचारी और खाताधारकों की मिली-भगत है.

2011 से चल रहा यह घोटाला 2018 में सामने आया है. और इसके सामने आने से पहले ही आरोपी नीरव मोदी जनवरी में परिवार सहित देश छोड़कर जा चुका था. पीएनबी का जो घोटाला हुआ है उसमें जो आधारभूत चीज़ है वो है एलओयू यानि कि लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग. जो कि बैंकों में प्रचलित है और आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. असल में जो देश के बाहर से सामान आयात करता है उसे देश के बाहर मौजूद निर्यातकर्ता को पैसे चुकाने होते हैं. इसके लिए अगर आयात करने वाले के पास पैसे नहीं हैं तो बैंक आयातकर्ता के लिए विदेश में मौजूद किसी बैंक को लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग दे देता है. व्यवसायी के लिए बैंक वायदा करता है कि वो निश्चित तारीख को ब्याज के साथ उस बैंक के दिए गए पैसे चुका देगा. बैंकों में आम तौर पर ऐसा होता है.

अब अगर पीएनबी ने विदेश के बैंक को एलओयू दिया है तो वो विदेशी बैंक पीएनबी की गारंटी के ऊपर उस निर्यातकर्ता को जितने पैसे की पेमेंट के बारे में कहा गया है वो कर देता है. एक साल या निश्चित तारीख पर आयातकर्ता पीएनबी को पेमेंट देगा और फिर पीएनबी आगे विदेशी बैंक को ब्याज समेत उनका पैसा लौटा देगा.

नीरव मोदी के मामले में क्या हुआ?

नीरव मोदी के मामले में बैंक ने एलओयू जारी नहीं किए, बल्कि बैंक के दो कर्मचारियों ने फर्जी एलओयू बनाकर दे दिया. इसके लिए इन कर्मचारियों ने स्विफ्ट सिस्टम कंट्रोल का इस्तेमाल किया, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय कम्यूनिकेशन सिस्टम है और दुनिया भर के सभी बैंकों को आपस में जोड़ता है. इस सिस्टम के जरिए संदेश को कोड में भेजा जाता है. एलओयू भेजना, खोलना, उसमें बदलाव करने का काम इसी सिस्टम के ज़रिए किया जाता है. यही वजह है कि जब इस सिस्टम के ज़रिए ये संदेश किसी बैंक को मिलता है तो उन बैंक को पता होता है कि ये आधिकारिक और सही संदेश है. और कोई इस पर शक़ नहीं करता.

बैंक की कमी

सबसे पहले तो जिन दो लोगों ने ये किया, उन्हें लंबे समय तक एलओयू डेस्क पर काम नहीं करना चाहिए था. बैंक अक्सर इस डेस्क पर लोगों की अदला-बदली करता रहता है. पीएनबी की ओर से जो एक और कमी हुई वह यह थी कि भेजा गया संदेश स्विफ्ट सिस्टम कोर बैंकिंग से जुड़ा नहीं लगता. क्योंकि कोर बैंकिंग में पहले एलओयू बनाया जाता है और फिर वो स्विफ्ट के मैसेज से चला जाता है. और इस कारण कोर बैंकिंग में दिन, तारीख और राशि को लेकर एक एंट्री बन जाती है. लेकिन इस मामले में स्विफ्ट कोर बैंकिंग से जुड़ा हुआ नहीं था. इन दोनों ने फर्जी मैसेज को स्विफ्ट से भेजा, मैसेज को ग़ायब भी कर दिया और इसकी कोर बैंकिंग में एंट्री नहीं की जिससे कुछ भी पता नहीं चला.

बैंक का सिस्टम बाईपास कैसे हो गया?

अब सवाल उठता है कि बैंक का पूरा सिस्टम बाईपास कैसे हो गया? इसके लिए आपको यह समझना होगा कि अगर कोई चोर कोई निशान या सबूत ना छोड़े तो उसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है. ख़ास कर तब जब कोई संदेह भी नहीं कर रहा है.

असल में आरोपी एक बैंक से पैसे लेते रहे और दूसरे को चुकाते रहें. जैसे कि एक वक्त में पचास मिलियन का एलओयू खोला गया, जब तक अगले साल इसे चुकाने की बारी आई तब तक आरोपियों ने सौ मिलियन का एलओयू और करा लिया. इस तरह उन्होंने पहले लिए गए पचास मिलियन चुका दिए और अगला कर्ज़ किसी और बैंक से खड़ा हो गया. इस प्रकार से ये लेनदेन महीनों तक चलता रहा. इस तरह कर्ज़ की रकम साल दर साल बढ़ती रही.

नियम के मुताबिक इसमें होता यह है कि विदेशी बैंक, भारतीय बैंक के वायदे के मुताबिक पैसे देगा और फिर पैसों के वापिस पाने के लिए दी गई तारीख़ का इंतज़ार करेगा. वो पैसा आ गया तो कोई बात नहीं लेकिन अगर नहीं आया तो उसी सूरत में वो भारतीय बैंक से संपर्क करेगा.

इस मामले में जैसा समझ में आ रहा है कि कुछ साल तक शायद पैसा चुकाने के लिए जो तारीख निर्धारित की जाती होगी, उस दिन या उसके एक दो दिन पहले ही पेमेंट कर दिया जाता होगा. इसीलिए यह घोटाला सामने नहीं आया, और जब ऐसा नहीं हुआ तो यह मामला सामने आ गया. तब तक मामला इतना बड़ा हो गया था कि देश में हड़कंप मच गया.

अब क्या होगा?

जिन कंपनियों ने ये घोटाला किया है उसकी जितनी संपत्ति जब्त होगी, वही पीएनबी को मिलने की उम्मीद है. बताया जा रहा है कि नीरव मोदी ने चिट्ठी दी है और कहा है कि वो पांच-छह हज़ार करोड़ की पेमेंट कर देंगे. लेकिन अगर मोदी के इरादों में इतनी ईमानदारी होती तो वो पहले ही ऐसा कर सकते थे और यह घोटाला होता ही नहीं. जहां तक आगे की बात है तो नीरव मोदी बड़े व्यवसायी और ग्लोबल सिटिज़न हैं. उनकी संपत्ति पूरे विश्वभर में फैली हुई है. उन्हें ढ़ूढ़ना, ज़ब्त करना और फिर उससे पैसों की उगाही करना बेहद मुश्किल है. फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय ने नीरव मोदी के ठिकानों पर छापा मारकर 5 हजार 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. इसलिए जो वसूल हो पाएगा उसके बाद जो रकम नहीं मिल पाएगी, वो एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एस्सैट हो जाएगा. सीधे तौर पर कहें तो यह बैंक का नुक़सान होगा लेकिन अगर दूसरे तरीके से देखें तो बैंकों के पास मौजूद पैसा ग्राहक का होता है. यानि नीरव मोदी देश के आम आदमी को हजारों करोड़ की चपत लगाकर फरार हो चुके हैं.

कंटेंट साभार बीबीसी

सत्ता के लिए फिर रथयात्रा के मोड में भाजपा

भारत के लोगों ने कभी यह नहीं सोचा होगा कि राम को लेकर एक वक्त देश की राजनीति इतनी गरमा जाएगी कि कोई राजनीतिक दल राम का इस्तेमाल राजनीति और सत्ता के लिए करेगा. राम और रथयात्रा के जरिए पहले ही तमाम प्रदेशों और देश की केंद्रीय राजनीति पर कब्जा कर चुकी भाजपा एक बार फिर रथयात्रा मोड में आ गई है. इसका नाम रामराज्य रथयात्रा दिया गया है, हालांकि इस बार सीधे तौर पर इस यात्रा से न जुड़कर इसको परोक्ष रूप से शुरू किया गया है.

इस बार किसी नेता की जगह महाराष्ट्र स्थित एक कथित धार्मिक संगठन श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसायटी और विश्व हिन्दू परिषद जैसे संगठनों के नेता इसके मुख्य रथयात्री हैं. 12 फरवरी को अयोध्या से विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री ने झंडी दिखाकर इसे रवाना किया. एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि पहले इस यात्रा को मुख्यमंत्री योगी को रवाना करना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. तो वहीं इस यात्रा को लेकर जितने समर्थन की संभावना जताई जा रही थी, वह भी नहीं मिला.

यहां देखने वाली बात यह है कि यह यात्रा तब शुरू कि गई है जब कुछ समय बाद ही केरल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में चुनाव होने हैं. तो वहीं 2019 में लोकसभा चुनाव भी तय है. यह महज संयोग नहीं है कि इस रथयात्रा का रास्ता इस तरह तय किया गया है कि यह उन सभी रास्तों से गुजरेगी जहां विधानसभा चुनाव होने हैं. जहां तक भाजपा की बात है तो यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान से उसका दोहरा चरित्र उजागर होता है. मौर्या ने एक बयान में कहा है कि रथयात्रा सरकार की नहीं है लेकिन वह शहर आए तो उसका स्वागत करिए.

यह यात्रा तब शुरू की गई है जब हाल ही में एक अन्य यात्रा के नाम पर यूपी के कासगंज में सांप्रदायिक दंगा हो चुका है. ऐसे में क्या गारंटी है कि राम मंदिर के नाम पर आयोजित इस नई रथ यात्रा में सब ठीक रहेगा. इसी दौरान दिल्ली से एक और रथयात्रा निकाली गई, जिसे इंडिया गेट से हरी झंडी के बजाय भगवा झंडा दिखाकर देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रवाना किया. इस दूसरी रथ यात्रा का नाम ‘जल-मिट्टी रथ यात्रा’ रखा गया है. देश के कोने-कोने से यह रथ-यात्रा जल और मिट्टी लेकर दिल्ली पहुंचेगी, जहां 18 से 25 मार्च के बीच लालकिले पर महायज्ञ होगा. इस महायज्ञ का नाम ‘राष्ट्र रक्षा महायज्ञ’ रखा गया है.

20वीं सदी में इस तरह के महायज्ञ के जरिए देश की रक्षा की बात करना मजाक के सिवा कुछ नहीं है. यह भारत के लोगों को यह उसी सदी में ले जाने की कोशिश है, जिसके बारे में यह प्रचारित किया जाता है कि किसी तपस्वी द्वारा किसी महिला को देख लेने भर से वह गर्भवती हो जाती थी. हालात तब और बुरे हो जाते हैं जब इस तरह के आयोजनों से सीधे सरकार या फिर उसके संगठन जुड़े होते हैं. हालांकि यह तय है कि यह भाजपा द्वारा फिर से सत्ता हासिल करने की एक कोशिश भर है. अपने तमाम वादों औऱ दावों को पूरा करने में फेल हो जाने वाली भाजपा की कोशिश एक बार फिर देश के लोगों को रथयात्रा और महायज्ञ के जरिए बेवकूफ बनाने और उनकी आस्था से खिलवाड़ करने की है.

2019 के लिए मायावती का EBM फार्मूला

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बसपा प्रमुख मायावती

नई दिल्ली। चुनाव चाहे कोई हो बहुजन समाज पार्टी इसकी तैयारी अपने विपक्षियों से पहले शुरू कर देती है. जहां तमाम दल अपनी रणनीति, घोषणा पत्र और प्रत्याशियों के बीच उलझे रहते हैं, बसपा ज्यादातर वक्त सबसे पहले प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर देती है. अब जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में काफी कम वक्त रह गया है, बसपा ने अपनी रणनीति तय कर ली है. खबर है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए बसपा ने EBM फार्मूला तैयार किया है.

EBM यानी अति पिछड़ा, ब्राह्मण और मुस्लिम. दलितों के अलावा इन तीनों समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ने के लिए बसपा प्रदेश भर में भाईचारा सम्मेलन करेगी. अभियान को सफल बनाने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कई टीमें बनाई गई हैं. पार्टी ने अपने इस अभियान की शुरुआत पीलीभीत से राजा सुहेलदेव राजभर की 1009वीं जयंती और रविदास जयंती से कर दी है. इन दोनों कार्यक्रम में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.

पार्टी सूत्रों के अनुसार बहुजन समाज पार्टी ने दलित वोटबैंक के साथ ही सर्वसमाज को जोड़ने के लिए मुहिम तेज कर दी है. इसमें सबसे ज्यादा ध्यान अति पिछड़ा वर्ग, ब्राह्मण और मुस्लिम वर्ग पर है. इसके लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं की एक टीम बनाई है, जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर और विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा जैसे पिछड़े समाज के नेता पिछड़े वर्ग को पार्टी से जोड़ने के अभियान की अगुवाई करेंगे. तो वहीं ब्राह्मण समाज को जोड़ने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा कमान संभालेंगे. इनके अलावा मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी के समर्थन में लाने की कमान राज्यसभा सांसद मुनकाद अली और नौशाद अली सहित अन्य मुस्लिम नेता संभालेंगे. अपने इस फार्मूले के जरिए बसपा 2019 में अपनी स्थिति बेहतर करने की तैयारियों में जुट गई है. वह कितना सफल होगी यह चुनाव के बाद आने वाला परिणाम बताएगा.

भाजपा मुझे जेल से बाहर नहीं आने देगी – चंद्रशेखर रावण

भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के संयोजक प्रदीप नरवाल का एक लेख चिट्ठी चर्चित वेबसाइट ‘द वायर’ में प्रकाशित हुई है. उसका जिक्र करना इसलिए जरूरी है कि यह लेख आपको जेल जाने के बाद से अब तक चंद्रशेखर रावण के बारे में बताते हैं. वैसे जो चंद्रशेखर के जेल जाने के बाद उनसे कई लोग मिलने गए लेकिन प्रदीप उन कुछ एक लोगों में हैं, जिन्होंने हर महीने चंद्रशेखर रावण से जेल में मुलाकात की. इस आलेख में प्रदीप ने उन सारी बातों का जिक्र किया है, जो इन बीते महीनों में चंद्रशेखर औऱ प्रदीप के बीच हुई.

चंद्रशेखर को शेखर बुलाने वाले प्रदीप ने लिखा है- हमारी ये लड़ाई और हमारी दोस्ती 9 मई के बाद शुरू हुई थी. 8 जून 2017 को चंद्रशेखर आजाद को जेल हुई थी, तब से मैं लगभग हर महीने चंद्रशेखर से मिलता रहा हूं. जब पहली बार 18 जून को मैं शेखर से जेल में मिलने गया तो लगा जल्द सब ठीक हो जाएगा, शायद सब जल्द जेल से बाहर आ जाएंगे. तब भीम आर्मी के लगभग 42 कार्यकर्ता और शब्बीरपुर गांव के सोनू पहलवान जेल में थे. देखते-देखते 5 महीने बीते और धीरे-धीरे लगभग सभी लोगों को जमानत मिल गई. आखिरी में बस तीन व्यक्ति जेल में थे, सोनू पहलवान, कमल वालिया और चंद्रशेखर.

1 नवंबर 2017 को चंद्रशेखर और कमल वालिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन 2 नवंबर को साथी शेखर पर रासुका लगा दी. रासुका सोनू पहलवान पर भी लगी थी. 25 जनवरी 2018 को मैं आखिरी बार चंद्रशेखर से मिला था, तब उसे एक चिट्ठी मिली थी जिसमें लिखा था कि एडवाइजरी बोर्ड ने साथी शेखर पर 6महीने तक रासुका पक्की कर दी है और ये आगे भी बढ़ाई जा सकती है. साथ ही सोनू सरपंच पे भी रासुका पक्की हो गई है. हर बार की तरह चंद्रशेखर के चेहरे पर वही हंसी थी, जो 18 जून से मैं लगातार देख रहा हूं, चेहरे पर कोई शिकस्त नहीं, मिलते ही मुस्कान और देखते ही जोर से जय भीम बोलना.

18 जून से आज तक करीब 7 महीने से अधिक समय हो चुका है, बीच में कई बार शेखर के परिवार से मिला, उनके भाई से मिला. उनकी मां बहुत हिम्मत वाली है पर वक्त की कठोरता कई बार उनकी आंखों में भी आंसू ला देती है. लगभग 2 महीने पहले शेखर को खराब सेहत के चलते मेरठ अस्पताल में भर्ती कराया गया था पर वहां से भी बिना ठीक इलाज के उन्हें वापस जेल भेज दिया गया.

आज तक शेखर ने कभी कोई शिकायत नहीं की, जब मिलता हूं तो बाबा साहेब की, साहेब कांशीराम, भगत सिंह और नेल्सन मंडेला की बात होती है. हर बार हंसते-हंसते कब मुलाकात का समय खत्म हो जाता है कि पता ही नहीं चलता. लेकिन इस बार बात कुछ और थी. 9 मई के बाद शेखर पर 27 मुकदमे लगे थे जिसमें से उनको सब में जमानत मिल गयी है.

शेखर ने हंसते-हंसते बताया कि उसके आखिरी केस की जमानत का ऑर्डर और रासुका की चिट्ठी एक ही दिन आई. रासुका का लेटर तो पढ़ने से पहले ही उसने दस्तखत कर दिया और बाद में पढ़ा क्योंकि उसे पता था कि इसमें क्या लिखा होगा. उसने कहा, ‘ जो मैंने सोचा था वही लिखा था, दलितों के लिए हुक्मरानों की एक चुनौती और धमकी की दास्तान कि अपने हक मत मांगो वरना ऐसे ही जेल में सड़ोगे.’

आज पूरे देश का शोषित समाज चंद्रशेखर आजाद की रिहाई का इंतजार कर रहा है, लेकिन रिहाई तो दूर है, सवाल आज इस लड़ाई में जिंदा रहने का है. शेखर पिछली बार बोले कि उनकी जेल का तबादला किया जा सकता है. बात ही बात में कई बार शेखर कहते हैं, ‘समाज के लिए काम करने का बहुत मन है लेकिन भाजपा कभी मुझे जेल से बाहर आने नहीं देगी, मैं मायूस नहीं दिख सकता, किसी के सामने आंखों में आंसू लाकर टूट नहीं सकता क्योंकि मेरे समाज को लोगों ने बहुत तोड़ा है, अभी तो बस एक चारा है वो है समाज के लिए संघर्ष.’

अब मेरा भी जेल में जाने का मन नहीं होता क्योंकि जब आप जेल में किसी राजनीतिक साजिश से आरोपी बनाए व्यक्ति से मिलते हैं तो उसे आपसे बड़ी उम्मीद होती है कि आप कुछ करेंगे और उनकी बेगुनाही साबित करेंगे. – द वायर में प्रकाशित प्रदीप नरवाल के आलेख का अंश

इस दिग्गज नेता को फूलपुर से चुनाव लड़वाना चाहते हैं कांग्रेसी

नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू की संसदीय सीट फूलपुर में उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है. इस बीच सभी दलों के उम्मीदवार की चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में स्थानीय कांग्रेसियों ने भी अपने उम्मीदवार के तौर पर प्रियंका गांधी को उतारने की मांग तेज कर दी है.

इलाहाबाद की कांग्रेस कमेटी ने फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने के लिए बकायदा प्रस्ताव पास किया है. इलाहाबाद जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने पार्टी दफ्तर में बैठक कर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से न सिर्फ प्रियंका वाड्रा को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की है, बल्कि इस मांग का प्रस्ताव भी पेश कर उसे पार्टी हाईकमान को भेजा है. बैठक में आम सहमति से यह दलील दी गई है कि पंडित नेहरू का चुनावक्षेत्र रही फूलपुर सीट पर प्रियंका वाड्रा को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस न सिर्फ यह सीट जीत लेगी, बल्कि 2019 के आम चुनाव से पहले मोदी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का बिगुल भी फूंक सकती है. फूलपुर की सीट यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने से खाली हुई थी. गौरतलब है कि फूलपुर सीट पर नेहरू गांधी परिवार के सदस्य पांच बार चुनाव जीते हैं. प्रियंका के परनाना पंडित नेहरू यहां से तीन बार सांसद रहे हैं जबकि उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित दो बार.

छत्तीसगढ़ में मनरेगा मजदूरों को नहीं मिल रहा है पैसा

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छत्तीसगढ़। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मनरेगा का मजाक उड़ाया था. उन्होंने कांग्रेस का मजाक उड़ाते हुए कटाक्ष किया था कि वह मनरेगा को जिंदा रखेंगे, ताकि लोगों को पता चल सके कि कांग्रेस ने कैसी योजना शुरू की थी. लेकिन वही भाजपा की सरकार अब मनरेगा मजदूरों से काम तो करवा रही है, लेकिन उनको पैसे नहीं दे रही है. छत्तीसगढ़ से खबर है कि वहां मनरेगा मजदूरों को 2015 से पैसे नहीं मिले.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह सवाल खुद भाजपा के विधायक ने उठाया. प्रश्नकाल के दौरान बिलाईगढ़ से भाजपा विधायक डॉ. सनम जांगड़े ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के कम से कम 20 ग्राम पंचायतों में काम पूरा होने के बाद भी मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ है. जांगड़े ने कहा कि 2015 से 20 ग्राम पंचायतों में मजदूरों को मजदूरी नहीं मिली है. भाजपा विधायक के सवाल उठाने के बाद विपक्ष ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. इसके बाद और भी कई अन्य विधायक जांगड़े के प्रश्न के समर्थन में उतर आये और दावा किया कि पूरे प्रदेश मे यही हाल है. विधायकों ने विधानसभा की समिति बनाकर जांच की मांग की. साथ ही मजदूरों को ब्याज समेत भुगतान की मांग करते हुए सदन से वाक आउट कर दिया.