श्रीदेवी की याद में किसी ने स्क्रीन काला किया, किसी ने कहा- ‘मुझे उनसे नफरत है’

0

श्रीदेवी के अचानक निधन से बॉलीवुड ही नहीं सारा देश सदमे में है। हर तरफ शोक की लहर दौड़ गयी है। सब अपने-अपने तरीके से इस शानदार अभिनेत्री को याद कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर श्रीदेवी के लिए शोक संदेश का सैलाब उमड़ा हुआ है, जहां श्रीदेवी के प्रशंसक से लेकर फिल्म इंडस्ट्रीज के तमाम लोग उन्हें याद कर रहे हैं.

डायरेक्टर राम गोपाल वर्मा ने कई ट्विट किए. पहले उन्होंने लिखा-

“मेरी यह पुरानी आदत है कि मैं रात में कई बार सपने देखते हुए जाग जाता हूं और इस बीच अपना मोबाइल भी चेक करता रहता हूं। इसी दौरान रात को मैंने एक मैसेज पढ़ा कि श्री देवी अब हमारे बीच नहीं हैं। मुझे लगा यह कोई सपना है या फिर किसी ने कोई अफवाह उड़ाई है। यह सोच कर मैं फिर सो गया। लगभग एक घंटे के बाद फिर जब मैं जागा तो ऐसे पचासों संदेश थे जिसमें यह बताया गया कि श्रीदेवी अब हमारे बीच नहीं हैं और उनका निधन हो गया है।

फिर श्रीदेवी को याद करते हुए अपनी भावुक टिप्पणी में इस डायरेक्टर ने लिखा-

“मुझे नफरत है कि उनके पास भी ऐसा दिल था, जो सामान्य दिलों की तरह धड़कना बंद कर सकता था। मुझे नफरत है कि मैं उनकी मौत को देखने के लिए जिंदा था। मैं उनकी जान लेने वाले भगवान से नफरत करता हूं और वह नहीं रहीं, इसलिए मैं उनसे भी नफरत करता हूं। मैं आपसे प्यार करता हूं श्री, आप जहां भी हो..मैं हमेशा आपसे प्यार करता रहूंगा।” श्रीदेवी के साथ सदमा फिल्म में काम कर चुके जाने-माने एक्टर कमल हसन ने ट्वीट में लिखा, ‘मैंने श्रीदेवी की एक किशोरी से एक खूबसूरत महिला तक की जिंदगी देखी। वो स्टार बनने के योग्य थीं। उनके साथ बिताए कई खुशी के पल मेरे दिमाग में कौंध रहे हैं, जिसमें उनके साथ आखिरी मुलाकात भी शामिल है। सदमा की लोरी अब मुझे डरा रही है। हम उन्हें याद करेंगे।’

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने ट्वीट करके श्रीदेवी के आकस्मिक निधन पर हैरानी जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। तो वहीं निमृत कौर श्रीदेवी के निधन की ख़बर से सकते में हैं। उन्होंने लिखा है- चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात

श्रीदेवी के साथ चांदनी फिल्म में काम कर चुके ऋषि कपूर ने लिखा है कि सुबह इस दुखद ख़बर के साथ जागा। बेहद सदमे में हूं। दुखद है। बोनी और उनकी बेटियों को मेरी हार्दिक संवेदनाएं। अपने को-स्टर को खोने से ऋषि कपूर कितने दुखी हैं यह इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफ़ाइल से फोटो हटाकर वहां ब्लैक छोड़ दिया है।

हेडिंग- दिल्ली पुलिस से प्रताड़ित दलित परिवार ने बताया अपना दर्द

0

सेवा में, श्रीमान

विषय:- मैं वीना देवी धर्मपत्नी श्री रमेश चंद 21/02/2018 व 22/02/2018 की इस क्रूर घटना के बारे में आपको जानकारी दे रहीं हूं जो हमारे साथ रात के करीब 2:00 बजे व 12:30 बजे घटी थी. 6 संदिग्ध पुलिस वालों द्वारा दरवाजे की कुण्डी तोड़ कर घर में घुसकर मुझे व मेरे बेटों व मेरी बहुओं के साथ मार पीट करना, हमारे बाल नोचकर गालियां देना अश्लील टिप्पणियां करना जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करना व हमारे मोबाइल फोन को तोड़ कर फेंक देना यह कहकर कि हम लोग थाना फतेहपुर बेरी से आएं हैं और हम लोग पुलिस वाले हैं.

महोदय निवेदन इस प्रकार है कि मैं वीना देवी 21/02/2018 को समय करीब रात के 2:00 AM बजे अपने घर मकान नंबर 38 हरिजन मोहल्ला मांडी गांव नई दिल्ली 110047 में अपने दो बेटों व बहु के साथ सो रही थी. मेरे पति उस समय घर पर नहीं थे कि तभी कुछ शोर आवाजें आई. मैंने कमरे से बाहर निकलकर देखा तो वहां 4 संदिग्ध पुरुष खड़े थे जिन्होंने मेरे बड़े बेटे को बलों से पकड़ रखा था और उसे थप्पड़ व घूंसो से पीट रहे थे. तभी मैं भागी तो एक ने मेरे बाल पकड़कर मुझे थप्पड़ मारना शुरू कर दिया व अशलील गालियां कि तुम लोग ब्लैकमेलर हो गंदा काम करते हो साली कूतिया रण्डी… मेरी बहु ने जब कहा की महिलाओं से पुलिस का इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं तो उसे भी थप्पड़ मारकर दूर धकेल दिया तभी बाहर के कमरे से चिल्लाने की आवाज आई.

मैने जैसे तेसे अपने आपको छुड़वा कर बाहर वाले कमरे में गई तो वहां दो संदिग्ध लोगों द्वारा मेरे छोटे बेटे को बिस्तर पर ही दाबाए हुए देखा. वो उसे न जाने कब से पीट रहे थे हमारे बोहोत निवेदन करने पर उन्होंने हमें इस क्रूर व्यवहार के बारे में कोई जानकारी दी. सिर्फ इतना बताया की वे सब थाना फतेहपुर बेरी से आए है जबकि उन्होंने यूनिफॉर्म नहीं पहनी थी और शराब पी थी, ना उनके पास कोई search warren था ये सब उपद्रव उत्पात मचाकर वे सभी पुलिस जीप में बैठकर वहां से चले गए.

इसकी जानकारी देने के लिए जब हमने पुलिस को फोन करना चाहा तो उन्होंने हमारे फोन भी छीनकर जमीन पर पटक दिए जोकि हमारे फोन टूटने की वजह से हम उस वक्त 100 नंबर पर कॉल नहीं कर पाए अतः इस घटना की जानकरी 21/02/2018 को सुबह 08:00 AM बजे 100 नंबर पर की 1 घंटे बाद एक पुलिस अफसर आया जो कि अपना नाम मुरारी लाल बता रहा था जिसका कहना था कि में इस 100 नंबर की कॉल पर तुम्हारा (आईओ) हूं जिसके बाद वीना देवी का बयान लिया गया और एक लिखित शिकायत उन्हें दी गई और उन्होंने हमें आश्वाशन दिलाया कि में छानबीन करूंगा दीनांक 22/02/2018 को जब इनसे जवाब मांगा गया तो उन्होंने साफ तौर पर इनकार कर दिया के कोई मामला नहीं बनता. तुम्हारी शिकायत का और मुझे दोबारा परेशान मत करना हमारे बहुत आग्रह करने पर भी उसने कहा कि तुम्हारे कहने से कार्यवाही होगी क्या में को कहूंगा वहीं होगा तुम जो के रहे हो सब झूठ है तुम्हारे घर कोई नहीं गया फिर उसने हमें एक नाम बताया S.K.Singh और कहा इनसे मिलो ये ही तुम्हारे घर आए थे. जब हमने आग्रह किया की आपको जब ये पता चल ही गया के S.K.Singh नाम का ये व्यक्ति हमारे घर रात को 2:00 बजे हमारे घर गया था तो आप ये कैसे नकार सकते हैं कि हमारे साथ मार पीट नहीं हुई फिर उन्होंने कहा मुझे परेशान मत करो कल रात दिनांक 22/02/2018 को रात समय 12:30 बजे फिर 6 पुलिस वाले हमारे घर में दाखिल हुए फिर से हम औरतों को मारना पीटना शुरू कर दिया मेरे बेटों ने बचाव कि कोशिश की तो उसे पीटना शुरु कर दिया जबकि एक बेटा नाम सुमित जिसका पिछले साल एब्डॉमिनल आप्रेशन हुआ था उसका सिर डंडे से मारकर फोड़ दिया उसके पीट में लतें मारी जबकि हमने उनके हाथ जोड़े के इसको बख्श दो ये इस लायक नहीं की ये सब सह सके उन्होंने कहा के मर ही तो जाएगा फिर जाती शुचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उसे लगभग 100 मीटर तक घसीटते हुए लेकर गए जब वह बेहोश हो गया तो उसे वहां फेक दिया के लगता ये मर गया और मेरे दोनों बेटों दिनेश व मनीष को घसीटते हुए पुलिस जीप में ले गए

फिर हमने 100 नंबर पर फोन करके इसकी जानकारी पुलिस को दी फिर पुलिस सुमित को लेकर ट्रूमा सेंटर ले गए जिसके बाद मंडी गांव का दलित समुदाय एकत्रित होकर थाने पहुंचा तो पता चला कि यह किसी को नहीं लाया गया. पता नहीं उन्हें कहां ले जाया गया है कहकर थाना अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया फिर बाद में दिनेश व मनीष को ट्रौमा सेंटर में लाया गया जहां उनकी हालत खड़े रहने लायक भी नहीं थी. इन पुलिस वालो ने उन्हें इतना मारा है कि फिर न जाने उन्हें कहां ले गए हॉस्पिटल में सुमित का मेडिकल हुआ जिसमें पुष्ठी हुई कि सर में गहरी चोट है व अन्य चोटें है दिनेश व मनीष की मेडिकल रिपोर्ट उन्हीं के पास है.

अतः महोदय से हाथ जोड़कर निवेदन है कि S.K.Singh व उसके साथियों पर उचित कारयवाही करें और हमारी सुरक्षा करे.

वीना देवी, धर्मपत्नी श्री रमेश चंद दिनेश कुमार, पुत्र श्री रमेश चंद पुष्पा देवी, धर्मपत्नी श्री दिनेश कुमार मनीष कुमार, पुत्र श्री रमेश चंद सुमित कुमार पुत्र श्री रमेश चंद मकान नंबर 38, हरिजन मोहल्ला मांडी गांव नई दिल्ली 110047 नंबर 9999443833

भाजपा राज में दलित सब इंस्पेक्टर ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अमर सिंह नाम एक सब इंस्पेक्टर मरना चाहता है. उन्होंने मरने के लिए इजाजत मांगी है. और यह पंफलेट उन्होंने ही छपवाया है. असल में अमर सिंह को उनके अपने ही पुलिस विभाग द्वारा साल 2006 से परेशान किया जा रहा है, जिससे तंग होकर उन्होंने देश के राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु मांगी है.

6 दिसंबर 2006 में अमर सिंह पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा, जिसके बाद पुलिस महकमें ने दो दिन बाद ही 8 दिसंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया. चूंकि एक पुलिसकर्मी को विभाग द्वारा सस्पेंड किए जाने के लिए कुछ नियम कानून तय है, जिसकी पुलिस ने अनदेखी कर दी थी, जिसकी वजह से 6 महीने बाद ही जून 2007 में अमर सिंह को फिर बहाल कर दिया गया. मामला चूकि भ्रष्टाचार से जुड़ा था इसलिए मामला अदालत में चलता रहा. अदालत ने भी 12 अगस्त 2014 को अमर सिंह को दोषमुक्त कर दिया. लेकिन दोषमुक्त होने के बावजूद उन्हें निलंबन के दौरान की 8 महीने की सैलरी नहीं मिली तो वहीं उनके तीन इंक्रिमेंट को रोक दिया गया.

अमर सिंह का आरोप है कि उन्हें प्रोमोशन तो मिल गया है लेकिन पिछले आठ महीने के वेतन को लेकर हाईकोर्ट में भोपाल पुलिस की तरफ से जवाब पेश नहीं किया जा रहा है. इससे इस मामले में अदालत कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहा है. राष्ट्रपति ने प्रदेश के चीफ सेक्रेट्री को इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए पत्र लिखा, लेकिन राष्ट्रपति के पत्र को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इससे परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया है.

BBAU में सेमिनार के दौरान बाबासाहेब की फोटो हटाई गई, छात्रों का हंगामा

0

लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में 23 फऱवरी को शिक्षाविभाग और इनफार्मेशन एंड गाइडेंस ब्यूरो के तत्वाधान में “Higher Education in the new Century: Challenge and opportunity” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस दौरान कार्यक्रम केशुरू होने से पहले माल्यार्पण हेतु रखी भारतरत्न डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर की फोटो को हटा दिया गया.

छात्रों का कहना है कि शिक्षाविभाग और सेमिनार के डायरेक्टर प्रो अरविन्द कुमार झा एवं अन्य प्रोफेसर डॉ. सुभाष मिश्रा, डॉ. अंशू रूपेंनवार, डॉ. हरिशंकर सिंह, डॉ. शिल्पी वर्मा ने बाबासाहेब की फोटो को हटा दिया. इसके बाद बीएड के छात्र जयसिंह सहित अम्बेडकरवादी छात्रों ने इसका विरोध किया. बावजूद इसके डॉ. अम्बेडकर की तस्वीर नहीं लगाई गई. जब इसकी सूचना विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों को हुई तो उन्होंने सेमिनार हॉल पहुंचकर डायरेक्टर प्रो अरविंद कुमार झा, डॉ अंशू रूपेंनवार, डॉ सुभाष मिश्रा, डॉ शिल्पी वर्मा से बाबासाहेब की तस्वीर रखने का आग्रह किया, इस बात पर दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई. छात्रों का कहना है कि यह अपमान केवल बाबा साहेब डॉ बी आर अम्बेडकर जी का नही बल्कि ‘भारतरत्न’ और ‘संविधान निर्माता’ का अपमान है. इससे पूर्व भी विवि में कुलपति की सह पर समाजशात्र विभाग शिक्षिका डॉ जया श्रीवास्तवा ने बाबासाहेब और गौतम बुद्ध जी पर अभद्र टिप्पणी कर अपमान किया था, जिस पर कुलपति ने कोई कार्यवाही नही की थी. इससे जाहिर होता है ये सब कुलपति के आदेश पर किया जा रहा है.

छात्रों ने इस की शिकायत करते हुए भारतरत्न एवं संविधान निर्माता का अपमान करने वाले शिक्षकों के खिलाफ उचित दंडानात्मक कार्यवाही की मांग की. अम्बेडकरवादी छात्रों का कहना है कि अगर सोमवार तक दोषी शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो बहुजन छात्र विवि में आंदोलन करेंगे. साथ ही अम्बेडकरवादी छात्रों ने कुलपति से मांग कि है कि विश्वविद्यालय में ऐसा आदेश पारित किया जाए कि बाबासाहेब के नाम से चल रहे विश्वविद्यालय में किसी भी कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अम्बेडकर की तस्वीर पर माल्यार्पण के साथ होनी चाहिए.

यूपी में इंवेस्टर्स समिट पर मायावती का बड़ा बयान

0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हुए इंवेस्टर्स समिट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने योगी सरकार को निशाने पर लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे फैशन करार देते हुए कहा कि इंवेस्टर्स समिट कराना फैशन हो गया है, जिसके नाम पर बीजेपी सरकारें सरकारी धन पानी की तरह बहाती हैं. जबकि जनता के इसी गाढ़ी कमाई के धन से ग़रीबों, किसानों व बेरोज़गार युवाओं को काफी राहत मिल सकती है औऱ जनता के हित व कल्याण के अनेक महत्त्वपूर्ण काम तत्काल किये जा सकते थे.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘इन्वेस्टर्स समिट’ महंगाई व बेरोज़गारी सहित सरकार की अन्य विफलताओं पर से लोगों का ध्यान बांटने का एक माध्यम है. साथ ही बीजेपी की सरकारों द्वारा यह खाओ-पकाओ का एक नया साधन भी बन गया लगता है. बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी होगी तभी यहां उद्योग-धंधे आयेंगे.

बसपा प्रमुख ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट के लिये निवेशकों को आमंत्रित करने से पहले क़ानून- व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करके उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का अच्छा वातावरण पैदा किया जाना चाहिए. चाहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्र सरकार हो या यूपी में बीजेपी की सरकार इन पर जनता का अब भरोसा नहीं के बराबर ही रह गया है क्योंकि इनकी वादाखिलाफियों की सूची काफी लम्बी होती चली जा रही है.

सीएम का हेलिकॉप्‍टर उतारने के लिए कटवा दी किसान की फसल, अप्रैल में है बेटी की शादी

0

मथुरा।  यूपी का सरकारी महकमा कितना असंवेदनशील और गरीब विरोधी है, यह उसकी एक हड़कत से पता चलता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दर्जन भर सहयोगी मंत्रियों के साथ दो दिन तक विश्व प्रसिद्ध बरसाने की लट्ठमार होली और ब्रज संस्कृति का आनंद उठाएंगे. सीएम योगी शनिवार (24 फरवरी) को बरसाने आ रहे हैं. इस दौरान सीएम का हेलिकॉप्टर उतरना है, जिसके लिए प्रशासन के दबाव में एक किसान को अपनी खड़ी फसल पकने से पहले ही काटनी पड़ रही है. किसान के लिए यह इसलिए भी बड़ी मुसीबत है क्योंकि अप्रैल में उसकी बेटी की शादी है.

अपनी मेहनत की कमाई को यूं बर्बाद जाता देख किसान पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. दरअसल यह किसान लीज पर जमीन लेकर खेती करता है. पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र कुमार भारद्वाज नाम के इस किसान ने बताया कि उसने 60 हजार रुपये में पांच एकड़ जमीन ली है. किसान के पास आय का कोई दूसरा जरिया नहीं है. इसी साल अप्रैल में उसकी बेटी की शादी है. फसल नष्ट हो जाने की वजह से इससे होने वाली आय की सारी संभावनाएं भी खत्म हो गई है. नरेंद्र कुमार भारद्वाज का कहना है कि फसल काटने के बदले में उसे कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया है. किसान ने बताया कि जब उसने मुआवजे की बात प्रशासनिक अधिकारियों से की तो वहां उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इस किसान को उम्मीद है कि सीएम खुद उसकी मदद करेंगे.

कसाइयों ने नहीं दिया BJP को वोट, इसलिए 99 पर सिमटे- भाजपा मंत्री

0

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा को अब तक 99 पर सिमटने का गम सता रहा है. गुजरात की बीजेपी सरकार के एक मंत्री ने विधानसभा में कहा कि कसाइयों और शराब का धंधा करने वालों ने बीजेपी को वोट नहीं दिया, इसलिए पार्टी 99 सीटों तक सिमट गई. विधानसभा में राज्यपाल ओ.पी. कोहली के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने यह बात कही.

दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की कुल 182 सीटों में से बीजेपी को 99 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को सिर्फ 77 सीटें मिलीं थीं. विधानसभा में बजट सत्र के दौरान बीजेपी के चुनाव में खराब प्रदर्शन की बात होने लगी. कांग्रेस विधायक विक्रम ने कहा कि बीजेपी को इस पर विचार करना चाहिए कि वह 99 सीटों पर ही क्यों सिमट गई.

सरकार-अधिकारी टकरावः बुरे फंसे केजरीवाल, सलाहकार के बयान से घिरे

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार और अधिकारियों के बीच चल रहे टकराव के मामले में केजरीवाल बुरी तरह फंस गए हैं. केजरीवाल अपने सलाहकार के बयान से ही फंस गए हैं.

सीएम अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वी के जैन ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि मेरे आंखों के सामने अमानतुल्ला और जरवाल मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को पीट रहे थे. दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट मामले में आरोपी विधायकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

जैन ने अपने बयान में कहा, ‘मैं रात 11.30 बजे अपने महारानी बाग स्थित आवास से सोमवार को रवाना हुआ और मध्यरात्रि को सीएम के आवास पर पहुंचा. वहां मैंने देखा कि विधायक पहले से मौजूद थे और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी.’ जैन ने कहा, ‘मैं मीटिंग के दौरान उठकर वॉशरूम गया. जब मैं वहां से लौटा तो देखा कि विधायक अमानतुल्ला और जरवाल मुख्य सचिव को पीट रहे थे और कह रहे थे कि क्यों वह काम नहीं करते. उन्होंने अंजु प्रकाश को धक्का दिया और उनका चेहरा पकड़कर काम करने को कहा. तभी मुख्य सचिव का चश्मा गिर गया.’ गौरतलब है कि इससे पहले दिए गए अपने बयान में जैन ने पुलिस को बताया था कि इस घटना के दौरान वह वॉशरूम चले गए थे और उन्हें नहीं पता कि इस दौरान क्या हुआ था.

उधर, आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार को गिराने की साजिश हो रही है. AAP के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सलाहकार वी. के. जैन पर दबाव डालकर बयान बदलवाया गया है.

नीतीश सरकार को केंद्र से झटका

0

पटना। केंद्र सरकार ने नीतीश कुमार सरकार को तगड़ा झटका देते हुए प्रदेश की तांती ततवा जाति को अनुसूचित जाति की सूची में पान स्वासी जाति के रूप में अधिसूचित करने की अधिसूचना को खारिज कर दिया है. दलित एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता राजीव कुमार पूसा समस्तीपुर के द्वारा दायर किए गए एक आरटीआई आवेदन के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार ने यह जानकारी दी है.

केंद्र सरकार के द्वारा बिहार राज्य के अनुसूचित जाति वर्ग के सूची में तांती ततवा जाति का नाम शामिल नहीं किया गया है. भारतीय संराविधान के अनुच्छेद 341 का हवाला देते हुए यह भी बताया कि राज्य सरकारों तथा न्यायालयों को अनुसूचित जाति की सूची में किसी भी प्रकार का संशोधन करने का अधिकार नहीं है. क्योंकि अनुसूचित जातियों की सूची सर्वप्रथम राष्ट्रपति के द्वा अधिसूचित की गई है इसलिए इसमें कोई भी संशोधन केवल संसद के अधिनियम के द्वारा ही किया जा सकता है.

आपको बता दें कि इस कार्रवाई से नीतीश कुमार के बिहार सरकार को तगड़ा झटका लगा है केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से और इस कार्रवाई का बिहार की राजनीति पर असर दिखना लाजिमी है.

 राजीव कुमार

चावल चुराने पर भीड़ ने भूखे आदिवासी युवक को मार डाला

0

पलक्कड़। केरल के पलक्कड़ जिले में एक भूखे आदिवासी युवक को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला. आदिवासी युवक पर एक किलो चावल चुराने का आरोप लगा था. हैरान करने वाली बात तो यह कि युवक की पीटाई करने वाले लोगों ने पीड़ित से साथ सेल्फी ली और वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर डाला. इसके बाद सोशल मीडिया पर यह मामला वायरल हो गया.

वीडियो वायरल होने के बाद देश भर में लोगों ने इस घटना को अमानवीय बताते हुए विरोध किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है और बाकियों की तलाश की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, 27 वर्षीय मधु कडुकुमन्ना के आदिवासी क्षेत्र का रहने वाला था. उस पर लोगों ने चावल चुराने का आरोप लगाया और उसकी डंडों से पिटाई कर दी. जब पुलिस को इस घटना के बारे में पता लगा तो उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया. लेकिन कोट्टाथारा के गर्वमेंट ट्राइबल स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल ले जाते वक्त मधु की पुलिस जीप में ही मौत हो गई.

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने फेसबुक पोस्ट लिखकर इस घटना की निंदा की है. साथ ही राज्य पुलिस प्रमुख से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने को कहा है. गौरतलब है कि भारत में आदिवासी समाज की स्थिति काफी खराब है. आज भी तमाम आदिवासी जंगलों में दो जून की रोटी के लिए जूझ रहे हैं.

जयंती विशेषः बहुजन क्रान्ति के अग्रदूत संत थे गाडगे बाबा

0

भारत में यूं तो तमाम संत महात्मा हुए हैं, जिन्होंने समाज सुधार के लिए काम किया, लेकिन उनमें संत गाडगे बाबा का अपना अलग ही अंदाज था. जिस दौर में संत गाडगे बाबा का जन्म हुआ तब वर्णवाद चरम पर था. बहुजन समाज में शिक्षा का घना अंधेरा था और गुलामी की जंजीरे उनके पैरों में पड़ी हुई थी. संत गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी सन 1876 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेगांव नामक गांव में धोबी समाज में हुआ.

बाबा गाडगे उर्फ डेबूजी हमेशा अपने साथ मिट्टी के मटके जैसा एक पा़त्र रखते थे. इसी में वो खाना खाते और उसी में पानी पीते थे. महाराष्ट्र में मिट्टी के टुकड़े को गाडगा कहा जाता है. शायद इस कारण भी उनके समर्थक उन्हें गाडगे महाराज के नाम से पुकारने लगे थे. वह समाज में फैले कुप्रथाओं और अंधविश्वासों के घुर विरोधी थे और शिक्षा के प्रबल समर्थक थे. वह संत रैदास और कबीर की परंपरा के संत थे और इन दोनों संतों से काफी प्रभावित भी थे. गाडगे जी को उच्च शिक्षा ना पाने का अंत समय तक दुःख रहा इसलिए वो चाहते थे कि बहुजन समाज पूर्ण रूप से शिक्षित हो जाये. गोडगे बाबा डॉ. आंबेडकर जी के समकालीन भी थे हालांकि गाडगे बाबा डॉ. आंबेडकर से उम्र में बड़े थे. बाबागाडगे जब बाबा साहब आंबेडकर जी के संर्पक में आये तो उनके विचारों में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुआ और वो इस बात से पूर्ण सहमत हो गये कि बहुजन समाज को गुलामी से छूटकारा पाने के लिए शिक्षा का होना बेहद जरूरी है. बाबासाहब भी गाडगे जी के प्रशंसकों में से एक थे. जहां बाबासाहब आंबेडकर जी शिक्षा और सत्ता के लिए लोगों को जगा रहे थे वहीं गोडगे जी संत कबीर दास जी और चोखामेला जी से प्रेरित होकर अज्ञान, अंधविश्वास और पाखण्डवाद के खिलाफ बिगुल बजा रहे थे.

भारतीय समाज में अगर किसी को स्वच्छता का प्रतीक कहा जाए तो वो संत गाडगे बाबा ही हैं. उन्होंने झाड़ू, श्रमदान और पुरूषार्थ को अपना हथियार ही नहीं बल्कि उद्देश्य भी बनाया, जिसको लोगों ने सराहा और अपनाया भी. वह अचानक किसी गांव में पहुंच जाते और वहां झाड़ू से सफाई करने लगते, गांव के लोग कौतूहलवश उनके पास आकर मदद करने लगते. इस तरह वह एक गांव की सफाई कर दूसरे गांव की ओर निकल पड़ते थे और स्वच्छता का संदेश देते रहते. आज जब सरकारें तमाम स्वच्छता अभियान चला रही है और उसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब आप कल्पना कर सकते हैं कि संत गाडगे उस दौर में ही स्वच्छता को लेकर कितने सजग थे.

गोडगे बाबा का परिनिर्वाण 20 दिसम्बर सन 1956 को हुआ. रेडियो आकाशवाणी से उनकी मृत्यु की घोषणा सुन पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गयी. महाराष्ट्र सरकार ने सन् 1983 में 1 मई को नागपुर विश्वविधालय को विभाजित कर संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविधालय की स्थापना की, जो उनके संघर्ष की याद दिलाता है. उनकी 42वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सन् 1998 में 20 दिसम्बर को एक डाक टिकिट जारी किया गया. महाराष्ट्र सरकार ने बाबा गाडगे की याद में सन 2001 में ‘बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान’ शुरू कर उन्हें श्रद्धांजलि भेंट की जिसके वो हकदार भी थे. बाबा गाडगे को नमन।

महाराष्ट्र में भाजपा के खिलाफ बना बड़ा गठबंधन

मुंबई। महाराष्ट्र में भाजपा के लिए आने वाला चुनाव काफी मुश्किल भरा होने वाला है. शिवसेना जहां भाजपा से खार खाई हुई है तो अब दो प्रमुख पार्टियों ने भी भाजपा के खिलाफ गठबंधन का ऐलान कर दिया है. कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने अगला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का फैसला किया है. बीते कुछ दिनों से दोनों दलों के बीच गठबंधन पर बातचीत के लिए बैठकों का दौर जारी था जिसपर गुरुवार देर शाम मुहर लग गई है. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के आवास पर महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख अशोक चव्हाण और राज्य में एनसीपी प्रमुख सुशील तटकरे के बीच हुई बैठक के बाद यह एलान किया गया है. सीटों की साझेदारी को लेकर बातचीत के लिए दोनों दल फिर से बात करेंगे. इससे पहले बुधवार को ही एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि देश में कांग्रेस ही वो पार्टी है जो बीजेपी को चुनौती दे सकती है. महाराष्ट्र के दिग्गज नेता ने यह भी कहा कि कांग्रेस के अच्छे दिन जल्द लौटने वाले हैं. कांग्रेस अध्यक्ष की तारीफ करते हुए पवार ने कहा कि राहुल गांधी खुद को तेजी से बदल रहे हैं और उन्हें पूरा यकीन है कि कांग्रेस फिर से मजबूती के साथ वापसी करेगी. एनसीपी और कांग्रेस इससे पहले भी महाराष्ट्र में और केंद्र में मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं. चुनाव से पहले ही कांग्रेस और एनसीपी द्वारा गठबंधन की घोषणा भाजपा को परेशान करने वाली खबर है. क्योंकि महाराष्ट्र में पहले ही एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टियां का एक साथ आना बीजेपी की दिक्कतों को और बढ़ा सकता है. शिवसेना पहले ही एलान कर चुकी है कि वो 2019 के आम चुनाव में एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी. करण

दिल्ली पुलिस ने बिना आरोप बताए तीन दलितों को जबरन घर से उठाया

1

नई दिल्ली। दिल्ली के थाना फतेहपुर बेरी की पुलिस ने कल देर रात इलाके से पिता और दो पुत्रों को जबरन घर से उठा लिया है. पीड़ित के घरवालों का कहना है कि पुलिस वाले आंधी रात को घर में घुस गए और पहले तीनों को जमकर पीटा फिर घर से उठा ले गए. इस दौरान घर की महिलाओं के साथ भी गाली-गलौच की गई. पड़ोसी पवन के मुताबिक जिन तीन लोगों को उठाया गया है, उसमें रमेश छोटा मोटा काम करते हैं, जबकि उनके दोनों बेटे सुमित और दिनेश ड्राइवर हैं. सुबह होते ही आस-पास के तकरीबन 100 से ज्यादा लोग थाने पर इकट्ठा हो गए और मामला जानने की कोशिश की. पहले तो पुलिस वालों ने थाने का दरवाजा बंद कर दिया और लोगों को अंदर घुसने नहीं दिया, लेकिन भीड़ इकट्ठा और दबाव बढ़ने पर पुलिस ने उन्हें अंदर आने दिया. हालांकि इनलोगों का कहना है कि पुलिस यह नहीं बता रही है कि आखिर उन्हें क्यों उठाया गया है. अरेस्ट किए गए रमेश की पत्नी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पुलिस वाले रात को जबरन घर में घुस गए और मेरे और बहुओं के साथ गाली-गलौच की. हमें जातिसूचक शब्द कहे.

इस बारे में जब दलित दस्तक ने जब फतेहबेरी थाने में संपर्क किया तो एसआई से बात करने को कहा गया. जब एसआई जय भगवान से बात किया तो उन्होंने SHO से बात करने को कहा. इस पर जब दलित दस्तक ने एसएचओ से मामले की जानकारी चाही और यह पूछा कि आखिरकार रमेश और उनके बेटों को किस आरोप में बंद किया गया है और उनपर कौन सी धारा लगाई गई है तो एसएचओ अनिल जी ने पहले टाल-मटोल की फिर मीटिंग में होने की बात कह कर बाद में जानकारी देने को कहा. हालांकि आधी रात को पुलिस द्वारा तीन लोगों को बिना कोई कारण बताए घर से उठा लेना और फिर उन पर लगे आरोप भी न बताना, पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बना रहा है.

टाटा इंस्टीट्यूट में एससी-एसटी विद्यार्थियों की आर्थिक मदद रोकने और फीस बढ़ाने के खिलाफ कैंपस जाम

मुंबई। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के स्टूडेंट्स ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ये छात्र इंस्टीट्यूट का निजीकरण करने और एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद होने का विरोध कर रहे हैं. कैंपस के भीतर होने वाला यह सबसे बड़ा प्रदर्शन है क्योंकि बुधवार से चल रहा आंदोलन अब भी जारी है. और इसमें पूरे इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट शामिल हैं.

इससे पहले पिछली रात को भी स्टूड़ेंट ने रात को कैंपस में मार्च किया था. फिर बुधवार की सुबह से ही छात्र कैंपस में विरोध प्रदर्शन के लिए निकल गए थे. 500 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने इंस्टीट्यूट के मेन गेट पर इकट्ठा होकर गेट बंद कर दिया. वहां तीन घंटे के लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद इंस्टीट्यूट प्रशासन ने गेट पर जाकर ही छात्रों से मुलाकात की, हालांकि प्रशासन ने तुरंत कुछ भी कहने से इंकार कर दिया और चौबीस घंटे का वक्त मांगा है.

छात्रों का आरोप है कि इंस्टीट्यूट की फीस लगातार बढ़ाई जा रही है, ताकि गरीब बच्चे यहां दाखिला नहीं ले पाएं. इससे पहले ओबीसी छात्रों को मिलने वाली आर्थिक मदद 2015 में बंद की जा चुकी है, जिसके बाद संस्थान में ओबीसी विद्यार्थियों की संख्या तेजी से गिरी है.

इधर इंस्टीट्यूट के पूर्व डायरेक्टर परशुरामन का कहना है कि इंस्टीट्यूट पिछले 14 सालों से छात्रों को फंड दे रही है. उन्होंने छात्रों से बात करते हुए गलत भाषा का भी इस्तेमाल किया जिस पर छात्र भड़क गए. इसके बाद स्टूडेंट्स ने कहा है कि वह मांगे माने जाने तक विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे.

इधर एससी-एसटी विद्यार्थियों का कहना है कि जिस तरह से ओबीसी छात्रों की आर्थिक मदद रोकने के बाद इंस्टीट्यूट में अब ओबीसी स्टूडेंट्स की संख्या घट गई है. अगर एससी-एसटी स्टूडेंट्स की आर्थिक मदद बंद की गई तो उनका भी वही हाल होगा. एससी-एसटी स्टूडेंट्स ने सामाजिक न्याय मंत्रालय और ट्राइबल मंत्रालय तक इस बारे में अपनी गुहार पहुंचाई लेकिन इन दोनों जगहों से छात्रों को झूठे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला. फिलहाल छात्रों ने अपनी लड़ाई खुद लड़ने का बीड़ा उठा लिया है.

यूपी में सरकारी सिस्टम से परेशान कारगिल का वीर

0

मेरठ। उत्तर प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार है. भाजपा सरकार राष्ट्रवाद का ढिढ़ोरा पीट कर सत्ता में पहुंची थी और आज भी खुद को राष्ट्रवाद और देशभक्ति का ब्रांड एम्बेसडर मानती है. लेकिन इसी भाजपा सरकार में करगिल में देश की सरहद को दुश्मन से आजाद कराने वाला सिपाही परेशान है.

असल में BSF में तैनात मेरठ के रहने वाले नायब सूबेदार जगबीर सिंह करगिल की जमीन पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है. भू-माफियाओं का कब्जा हटाने के लिए प्रशासन, पुलिस से कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई. आखिरकार तंग आकर उन्होंने कहा है कि अब वो खुद हथियाए उठाएंगे और अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे. गुजरात में पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात जगबीर सिंह मेरठ जिला के इंचौली थाना क्षेत्र के जलालाबाद उर्फ जलालपुर गांव के निवासी हैं. उनके पिता का नाम मंगलू सिंह है. गांव में ही खसरा नंबर 486 पर 4820 मीटर जमीन है, जबकि खसरा नंबर 485 की जमीन उनकी पत्नी सीमा सिंह के नाम पर है. इसी जमीन पर दबंगों का कब्जा है.

भाजपा से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है यह राजनैतिक दल

नई दिल्ली। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानि की AIUDF एक ऐसा राजनीतिक दल है जो तेजी से बढ़ रहा है. इसके बढ़ने की गति ऐसी है कि इसने भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया है. एआईयूडीएफ की यह तेजी कई लोगों के लिए चिंता का सबब बन गई है. आलम यह है देश के सेना प्रमुख ने भी इसको लेकर बयान दे दिया, जिसके बाद सियासी घमासान छिड़ गया है. AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने सेना प्रमुख के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी बढ़ रही है तो सेना प्रमुख को चिंता क्यों हो रही है?

अजमल ने कहा कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने एक राजनीतिक बयान दिया है, जो चौंकाने वाला है. सेना प्रमुख को चिंता क्यों है कि बीजेपी की तुलना में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित एक राजनीतिक पार्टी तेजी से बढ़ रही है? उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियों के गलत रवैए की वजह से AIUDF और AAPजैसी वैकल्पिक पार्टियां तेजी से आगे बढ़ी हैं. बदरुद्दीन अजमल ने आरोप लगाया कि इस तरह का बयान देकर सेना प्रमुख क्या खुद को राजनीति में शामिल नहीं कर रहे हैं? जो कि संविधान के खिलाफ है.

AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के समर्थन में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी भी आ गए हैं. ओवैसी ने ट्वीट कर कहा है कि आर्मी चीफ को राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, किसी राजनीतिक पार्टी के उदय पर बयान देना उनका काम नहीं है.

तो वहीं कांग्रेस नेता मीम अफजल और एनसीपी नेता माजिद मेनन ने भी आर्मी चीफ के बयान पर आपत्ति जताई है. असल में सेना प्रमुख बिपिन रावत ने एक सेमिनार में कहा था कि जितनी तेजी से देश में बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ बढ़ी है.

बीएचयू में नाथू राम गोडसे को लेकर बवाल

वाराणसी। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और नाथू राम गोडसे से जुड़े एक विवादित नाटक के मंचन को लेकर विवाद शुरू हो गया है. इस मामले पर छात्र दो फाड़ हो गए हैं. मामला बढ़ने के बाद बात लंका थाने में पहुंच गई है. बीएचयू के दो छात्रों ने लंका थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए इसे राष्ट्रपिता का अपमान बताया है. साथ ही बीएचयू कैंपस में आरएसएस की विचारधारा थोपने का आरोप लगाया है.

विश्वविद्यालय के कला संकाय में चल रहे वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम संस्कृति 2018 में विवादित मराठी नाटक मी नाथू राम गोडसे बोलतोय” के हिन्दी संस्करणमैं नाथूराम गोडसे बोल रहा हूं का मंचन किया गया. आरोप है कि नाटक मंचन के माध्यम से महात्मा गांधी को गलत बताया गया जबकि उनके हत्यारे नाथू राम गोडसे को हीरो के तौर पर सामने रखा गया. इससे नाराज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शोध छात्र ने लंका थाने में इसकी शिकायत की है. एक पक्ष के छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में संघ की विचारधारा को प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है और उसी के तहत इस कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान किया गया.

इस भारतीय क्रिकेटर के नाम दर्ज हुआ शर्मनाक रिकार्ड

0

नई दिल्ली। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज के दूसरे मैच में युजवेंद्र चहल के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया. युजवेंद्र ने दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर एकदिवसीय सीरीज में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाते हुए 6 मैचों की सीरीज में 16 विकेट लेकर हीरो बने थे. लेकिन वह बुधवार को हुए दूसरे T-20 मैच के विलन बन गए हैं.

उन्होंने 11 साल पुराना जोगिंदर शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ते हुए कुछ ऐसा कारनामा कर दिया, जो कोई भी भारतीय गेंदबाज दोहराना नहीं चाहेगा. युजवेंद्र चहल ने चार ओवर के अपने स्पेल में 64 रन खर्च डाले. T-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी भी भारतीय गेंदबाज का ये सबसे महंगा स्पेल था. इससे पहले ये परेशान करने वाला रिकॉर्ड जोगिंदर शर्मा के नाम था, जिन्होंने 2007 में डरबन में इंग्लैंड के खिलाफ चार ओवर में 57 रन दिए थे. युजवेंद्र के लिए ये मैच किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. उन्होंने ने 16 के इकॉनमी रेट से रन लुटाए. चहल की गेंद पर दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने सात छक्के जड़े. हाल ये था कि 24 में महज चार ऐसी गेंद थी,जिसपर कोई रन नहीं बना.

 

विधायकों की गिरफ्तारी के खिलाफ आप ने घेरा गृहमंत्री राजनाथ सिंह का घर

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्य सचिव और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस मामले में आप के दो विधायकों अमानतुल्ला और प्रकाश जारवाल को तिहाड़ जेल में रात गुजरनी पड़ी. इसके खिलाफ गुरुवार को सुबह ही आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतर गए हैं. विधायकों की गिरफ्तारी के खिलाफ पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन किया. तो जवाब में बीजेपी ने भी इस मुद्दे को लेकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर के बाहर प्रदर्शन किया.

आप नेता अलका लांबा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर आप के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया. इससे पहले दोनों विधायकों के खिलाफ केस दर्ज कराने के बाद मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय में मीटिंग की और अपना पक्ष रखा. मीटिंग के बाद शाम करीब साढ़े बजे दिल्ली के मुख्य सचिव पीएमओ से बाहर निकले. मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के बाद दिल्ली सरकार के कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया.

गौरतलब है कि मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया है कि सोमवार देर रात मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर उन्हें मीटिंग के लिए बुलाया गया था. इस दौरान आम आदमी पार्टी विधायकों ने सरकारी विज्ञापन रिलीज करने का दबाव बनाया और उनके साथ मारपीट की. इस घटना के बाद मुख्य सचिव ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस में शिकायत दी, जिसके बाद ओखला विधायक अमानतुल्ला समेत अन्य विधायकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया.

करण कुमार

यूपी में बसपा की राह चली कांग्रेस

उत्तर प्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी भले ही सत्ता में न आ पाई हो, बसपा प्रमुख मायावती द्वारा दलित-मुस्लिम गठबंधन की कोशिश ने सबके होश उड़ा दिए थे. विपक्षी भी मायावती के इस राजनीतिक पैतरे से परेशान थे. माना जा रहा था कि बसपा बहुमत से सरकार बनाने की होड़ में है. हालांकि बसपा के समर्थन में दलित समाज के लोग तो आए लेकिन मुस्लिम समाज ने बसपा से परहेज किया, नतीजा 22 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद बसपा सीटों के नंबर नहीं बढ़ा सकी.

कांग्रेस पार्टी भी अब यूपी में बहुजन समाज पार्टी के उसी फार्मूले पर चलने को तैयार है. और कांग्रेस की ओर से इस फार्मूले के मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी बनेंगे. पूर्व बीएसपी नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को शामिल करने के पीछे कांग्रेस की मंशा यही है.

असल में कांग्रेस की नजर एक बार फिर से तीन दशक पुराने दलित-मुस्लिम जातीय गठजोड़ पर है. कांग्रेस जिग्नेश मेवाणी के बहाने जहां दलितों का साथ हासिल करने में जुटी है वहीं नसीमुद्दीन के बहाने सूबे में मुस्लिमों को जोड़ने का प्लान है.

तीन दशक पहले तक कांग्रेस दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समाज के बल पर सत्ता हासिल करती रही. सन् 1984 में बसपा के उदय के बाद कांग्रेस का यह गठबंधन धाराशायी हो गया. तब से कांग्रेस संभल नहीं पाई, वह यूपी से लेकर देश की सत्ता तक में बाहर हो गई. अब कांग्रेस जान गई है कि अगर उसे सत्ता में आना है तो दलित और मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर लेकर आना होगा. इसी के लिए कांग्रेस जहां जिग्नेश मेवाणी को दलित चेहरे के तौर पर देश भर में पेश कर रही है तो मुस्लिम चेहरे के रूप में बसपा के ही पूर्व नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस के इशारे पर काम करेंगे. इन दोनों नेताओं के जरिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से दलित-मुस्लिम गठबंधन बनाने को बेताब है.