इस वजह से अंडर 19 में शामिल हो पाया सचिन तेंदुलकर का बेटा अर्जुन

नई दिल्ली । भारतीय टीम के खिलाड़ियों की सूची में अब फिर ‘तेंदुलकर’ उपनाम शामिल हो जाएगा क्योंकि सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन को श्रीलंका के खिलाफ दो चार दिवसीय मुकाबलों के लिए अंडर-19 टीम में शामिल किया गया है. अर्जुन तेंदुलकर पूर्व भारतीय कप्तान और मौजूदा अंडर 19 कोच और अपने पिता सचिन तेंदुलकर के साथ तमाम रिकार्ड बनाने वाले राहुल द्रविड़ को रिपोर्ट करेंगे.

हालांकि अर्जुन को टीम में शामिल होने को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं, क्योंकि पिछले दिनों हुए कूच बिहार ट्राफी में उनका परफॉर्मेंस खास नहीं था और इस ट्रॉफी में विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में वह 43वें स्थाप पर थे. हालांकि इस सवाल पर चयनकर्ताओं का अपना तर्क है. कहा जा रहा है कि ज्यादा विकेट लेने वाले तमाम गेंदबाज स्पिनर थे, जबकि अर्जुन तेज गेंदबाज हैं और उन्होंने 15 विकेट लिए. अर्जुन ऑलराउंडर भी हैं.

अर्जुन के चयन के लिए हाल ही में हुए वेस्ट और साउथ जोन के जोनल मैच में अर्जुन के शानदार प्रदर्शन का हवाला भी दिया जा रहा है. यहां एक मैच में अर्जुन ने 37 रन देकर 4 विकेट लिया था. इस बार अंडर- 19 में चयन को लेकर भी बीसीसीआई और कोच राहुल द्रविड़ ने पहले ही साफ कर दिया था कि 19 से ज्यादा उम्र वाले खिलाड़ियों का चयन नहीं होगा और वो रणजी के लिए पसीना बहाए. इस लिहाज से अर्जुन तेंदुलकर से आगे रहने वाले कई खिलाड़ी डिस्क्वालीफाई कर गए.

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सामाजिक न्याय विरोधी ‘आप’ नेताओं को डूटा क्यों बुलाती है?

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दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) लगातार आन्दोलनरत हैं . हम उनके आन्दोलन का समर्थन करते हैं और हर मार्च या धरने में शामिल होते हैं . सरकार केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में नया रोस्टर लागू करके आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान को कमजोर करना चाहती है . यह सरकार का सामाजिक रूप से पिछड़े तबकों के लिए विश्वविद्यालय का दरवाजा बंद करने का एक तरीका है . असल में नवउदारवाद के समर्थकों द्वारा आरक्षण के खिलाफ लगातार मुहिम चलाई जा रही है .अन्ना हजारे जैसे लोग बार-बार आरक्षण ख़त्म करने का आह्वान करते हैं. अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे लोग ‘यूथ फॉर इक्वलिटी’ की मार्फ़त आरक्षण ख़त्म करने का आंदोलन चलते रहे हैं. ऐसे माहौल में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) का आंदोलन सामाजिक न्याय का आन्दोलन विशेष महत्व रखता है . लेकिन डूटा नेतृत्व आरक्षण और सामाजिक न्याय के विरोधी आम आदमी पार्टी के नेताओं को हमेशा डूटा के मंच पर बुला कर सारे संघर्ष को गुमराह करने की कोशिश करता है .

डूटा के निर्वाचित प्रतिनिधि कभी मनीष सिसोदिया से गुहार लगाते दिखाई पड़ते हैं कभी केजरीवाल से . जबकि केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दोनों आरक्षण विरोधी और सवर्णवादी हैं. आम आदमी पार्टी में प्रतिक्रियावादी तत्वों की भरमार किसी से छिपी नहीं है. 2006 में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों,आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, और प्रबंधन संस्थानों में पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के सरकार के फैसले का विरोध करने के लिए बने संगठन’यूथ फॉर इक्वलिटी, के गठन, फंडिंग और नेतृत्व में इन दोनों की संलिप्तता जगजाहिर है .

हमारा मानना है कि डूटा के आन्दोलन में विचारधाराहीनता की खुले आम बात करने वाले आम आदमी पार्टी के नेताओं को बुलाना, उनसे गुहार लगाना सामाजिक न्याय के आन्दोलन के साथ अन्याय है. इस तरह की कवायद से सामाजिक न्याय का आन्दोलन और कमजोर होगा .

नीरज (लेखक सोशलिस्ट युवजन सभा के अध्यक्ष हैं )

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प्रतिपूरक वनीकरण या जंगल का विनाश

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वनों के विनाश की क्षतिपूर्ति के लिए एकप्राधिकरण बनाया गया था, जिसका नाम है – प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण(सीएएमपीए). बांध, खनन और कारखाने आदि परियोजनाओं की मंजूरी से पहले केंद्रीय पर्यावरणमंत्रालय इसप्रकार की परियोजना से होने वाली वन्‍य क्षतियों का आंकलन करके उस नुकसान का एक वर्तमान शुद्ध मौद्रिक मूल्‍य तय करता है और क्षतिपूर्ति के रूप में इसकी वसूली करता है. इस राशि का इस्‍तेमाल वैकल्पिक भूमि के वनीकरण के लिए किया जाता है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्‍य मंत्री महेश शर्मा द्वारा संसद में जो आधिकारिक सूचना दी गई है, उसके मुताबिक केंद्रीय प्रतिपूरक वनीकरण कोष के अंतर्गत उनकेमंत्रालय ने पचास हजार करोड़ से भी ज्‍यादा रुपये एकत्रित कर लिये हैं. इस पैसे का इस्‍तेमालप्रतिपूरक वनीकरण कोष अधिनियम 2016 के प्रावधानों के अनुसार होना अपेक्षित है.

         प्रतिपूरक वनीकरणके तहत पिछले एक दशक में इतनी बड़ी राशि का वसूलीकरण अपने आप में इस बात का सूचक है कि हमारे देश में विकास परियोजनाओं के लिए व्‍यापक पैमाने पर जंगलों का विनाश जारी है. यह वसूलीकरण इस बात का भी व्‍यंजक है कि वनों में और वनों के इर्दगिर्द रहने वाले आदिवासी और वनवासी जैसे हाशिये के समुदायों के प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट भी बड़े स्‍तर पर चल रही है जिसे राज्‍य की स्‍वीकृति प्राप्‍त है. उदाहरण हेतु 2014-2017 के दौरान केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 1419 विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई जिनके तहत 36575 हैक्‍टेयर वन भूमि को गैर वन भूमि में रूपांतरित कर दिया गया और बदले में 9700.50 करोड़ वसूले गये.प्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम अपने आप में कानून का मखौल उड़ाता है क्‍योंकि यह विकास परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और दूसरे वनवासियों के विस्‍थापन, दु:ख-दर्द, आजीविका के विनाश और खाद्यान्‍न संसाधनों की छीनत आदि को मौद्रिक मूल्‍य के तराजू पर तोलता है और यह मौद्रिक मूल्‍य भी राज्‍य के खजाने में क्षतिपूर्ति के रूप में जमा होता है

         प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण अधिनियम और इसके तहत अभी हालिया जारी प्रावधानों के अध्‍ययन से पता चलता है कि राष्‍ट्र राज्‍य अपने राष्‍ट्रीय लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए राज्‍य नियंत्रित वन प्रबंधन के जाल में ही फिर फंस गया है. निजी क्षेत्र के खिलाड़‍ियों के वन प्रबंधन पर वह आदिवासियों और वन आधारित ग्रामवासियों की अपेक्षा ज्‍यादा भरोसा कर रहा है.गैर वन प्रयोजन के लिए आवंटित वन भूमि के एवज में प्रतिपूरक वनीकरण कोषके तहत क्षतिपूर्ति के नाम पर जुटाई जाने वाली राशि को इस हस्‍तांतरण से प्रभावित आदिवासियों और स्‍थानीय ग्रामवासियों के पुनर्वास आदि पर खर्च किया जाना चाहिए था किंतु इस बावत कोई बात नई वन नीति के मसौदे में नहीं रखी गई है. ध्‍यातव्‍य है कि अभी हाल में देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी पर्यावरण संरक्षण के नाम पर जमा की गई राशि के दुरुपयोग और इस्‍तेमाल न किये जाने पर विधायिका को फटकार लगाई है कि वह वन संरक्षण के नाम पर मूर्ख बना रही है. केंद्र और राज्‍य सरकारों के पास लंबित यह धन राशि कुल मिलाकर एक लाख करोड़ बताई जाती है.इस अधिनियम का आदिवासी और वनवासी विरोधी चरित्र यहीं खत्‍म नहीं होता अपितु प्रतिपूरक वनीकरण के नाम पर वनाधिकार कानून को ताक पर रखकर हाशिये के लोगों की जमीन हड़पी जा रही है.

         2006 में लागू किया गया वनाधिकार कानून वनों पर निर्भर समुदायों का वन्‍य संसाधनों पर अधिकार स्‍थापित करता है. वनों के संरक्षण और प्रकृति विषयक परंपरागत अनुभव और ज्ञान को भी इसमें स्‍वीकार किया गया है. इसनेवन भूमि को वनों पर आधारित समुदायों को हस्‍तांतरित करने का एक ऐतिहासिक अवसर मुहैया कराया था. महाराष्‍ट्रऔर उड़ीसा में वनाधिकार कानून ने आदिवासियों और वनों पर निर्भर ग्रामीणों के सशक्तिकरण में काफी प्रगतिशील भूमिका निभाई भी है. सामुदायिक वन संसाधन वाले इसके प्रावधान ने वनों तक पहुँच और वनों पर नियंत्रण का अधिकार वनों पर निर्भर समुदायों को दिया. किंतु एक दशक के बाद भी वनाधिकार कानून का क्रियान्‍वयन मोटे तौर पर अब भी लंबित है. ग्रामीण समुदायों को आज भी वन भूमि के वैधानिक अधिकार हस्‍तांतरित नहीं किये जा सके हैं. प्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम वनाधिकार कानून के मार्ग में अलग रोड़ा बना हुआ है. जंगलात विभाग की नौकरशाही को इकतरफा ढंग से प्रतिपूरक वनीकरण कोष का अधिकार सौंप देना और निजी या सामूहिक भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण का असीमित अधिकार दे देना वास्‍तव में संस्‍थाबद्ध रूप में वनाधिकार कानून को निष्क्रिय करने का काम है.

  प्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम में नौकरशाही की मनमर्जी और भ्रष्‍टाचार पर अंकुश लगाने के प्रावधान रखे ही नहीं गये हैं. अध्‍ययनों से पता चलता है कि वनाधिकार कानून के तहत जिन सघन वन क्षेत्रों में वन संसाधनों और वन भूमि पर आदिवासी लोगों और वनों पर निर्भर दूसरे लोगों ने अपने दावे किये होते हैं, उन्‍हीं सघन वन क्षेत्रों में वन विभाग के अफसर प्रतिपूरक वनीकरणकी परियोजनाओं का क्रियान्‍वयन करने लगते हैं. जहाँ वनाधिकार कानून में वनों पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की सहमति को अनिवार्य रखा गया था, वहींप्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम में स्‍थानीय समुदायों से परामर्श मात्र की बात कही गई है. स्‍पष्‍ट है कि वनाधिकार कानून की अनिवार्य सहमति सेप्रतिपूरक वनीकरणअधिनियममें पीछे हटा गया है.भूमि अधिग्रहण, पुनर्स्‍थापना और पुनर्वास अधिनियम के अंदर भी अधिग्रहण से पूर्व सह‍मति की अनिवार्यता है. इसका मतलब साफ है किप्रतिपूरक वनीकरणअधिनियमभूमि अधिग्रहण कानून का भी सम्‍मान नहीं करता. प्रतिपूरक वनीकरणकी हर परियोजना में परामर्श का भी अनुबंध नहीं किया जाता और प्राय: प्रभावित लोगों को इस परामर्श में आमंत्रित ही नहीं किया जाता.

         प्रतिपूरक वनीकरणके इस कार्यक्रम में जहाँ व्‍यापक भ्रष्‍टाचार है, वहीं विभिन्‍न प्रकार के पारिस्थितकीय और सामाजिक दुष्‍परिणाम भी सामने आये हैं. इसके कारण वनों के अंदर की विविधता को अपूर्णनीय क्षति पहुँची है. पहले भी हिमालय में मिलने वाले ओक के प्राकृतिक जंगलों की जगह चीड़ के पेड़ लगाये गये, मध्‍यभारत में साल के प्राकृतिक जंगलों की जगह सागौन लगा दिया गया, पश्चिमी घाट के सदाबहार आर्द्रता वाले जंगलों में सफेदा और बबूल लगा दिया गया. उत्‍पादन केंद्रित इसप्रकार केएकल वृक्षारोपण से जहाँ जैव विविधता खत्‍म होती है, वहीं स्‍थानीय लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाती है. जंगल से जिस व्‍यक्ति का थोड़ा भी संबंध है, वह भी जानता है कि सागौन, सफेदा और जंगली पीपड़ जैसे वाणिज्यिक महत्‍व के वृक्षों का रोपण प्राकृतिक जंगल का विकल्‍प नहीं हो सकता. इस संदर्भ में यहाँ ध्‍यातव्‍य है कि ताजा भारतीय वन सर्वेक्षण में वन गणना की पद्धति बदलते हुए निजी जमीन पर किये गये वृक्षारोपण को भी वन अंतर्गत शामिल किया गया है जबकि यह कोई छिपी बात नहीं है कि निजी जमीन पर उन्‍हीं वृक्षों को लगाया जाता है, जो व्‍यावसायिक संभानाओं की दृष्टि से लाभप्रद समझे जाते हैं. कैसी विडंबना है कि जंगलात के जिन अधिकारियों के ऊपर वैज्ञानिक ढंग से वन संरक्षण और वन गणना की जिम्‍मेदारी है, वही अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए वन गणना की पद्धति ही बदल देते हैं.

      जंगल की जमीन पर नियंत्रण को लेकर जारी आदिवासियों के संघर्ष और तद्विषयक विद्यमान तनाव की जानबूझकरप्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम में उपेक्षा की गई है. वन विभाग एकपक्षीय ढंग से बिना स्‍थानीय लोगों के परामर्श के सामुदायिक वन भूमि कोप्रतिपूरक वनीकरणके लिए चिह्नित कर देता है. इसप्रकार के वृक्षारोपण का विरोध करने वाले लोगों पर राज्‍य द्वारा कानूनी-गैर कानूनी हिंसा की जाती है. जेलों में डालना और जबर्दस्‍ती भूमि छीनना आम है. पुराने विकसित वन क्षेत्रों तक को नहीं छोड़ा जाता. वास्‍तव में एक तरफ तो वन भूमि के गैर वन्‍य गतिविधियों के लिए इस्‍तेमाल से पहले वन विभाग से जुड़े मंत्रालय की स्‍वीकृति अनिवार्य है और इस स्‍वीकृति के लिए प्रतिपूरक वनीकरण भी जरूरी है जबकि दूसरी तरफ इस वनीकरण के लिए अपेक्षित जमीन है ही नहीं.

         वनीकरण के नाम परप्रतिपूरक वनीकरणअधिनियम के तहत जो तंत्र राज्‍य ने खड़ा किया है, वह इतना ज्‍यादा भ्रष्‍ट और अमानवीय है कि ढाई हजार से भी ज्‍यादा ग्राम सभायें प्रतिपूरक वनीकरणअधिनियमका विरोध कर चुकी हैं. लेकिन खेद की बात है कि आदिवासी औरदूसरे वनवासियों के आंदोलनों को मुख्‍यधारा का मीडिया कोई तवज्‍जो ही नहीं देता. सरकार भी हाशिये के लोगों के अधिकारों की उपेक्षा करती है. प्रतिपूरक वनीकरणअधिनियमभी आदिवासियों और वनों पर आधारित दूसरे समुदायों के अस्तित्‍व को कुचलने वाला अन्‍यायी अधिनियम है. इससे पारिस्थितीकीय असंतुलन की अन्‍यान्‍य समस्‍याएँभी उठ खड़ी हुई हैं. जैव विविधता खत्‍म हो रही है. प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन के कारण वैश्विक स्‍तर पर जलवायु में आ रहे बदलाव आज गंभीर खतरों के व्‍यंजक बन चुके हैं. प्राकृतिक जंगलों की रक्षा और पुनर्स्‍थापना इस पर्यावरण संकट से पार पाने का एकमात्र कारगर उपाय है किंतु प्रस्‍तावित नई वन नीति में प्राकृतिक जंगलों के स्‍थान पर निजी क्षेत्र द्वारा की जाने वाली व्‍यावसायिक वानिकी को स्‍वीकृति दी गई है. और सफेद झूठ देखिए कि वन संरक्षण के क्षेत्र में पैसे की कमी का रोना रोते हुए निजी क्षेत्र से निवेश की आवश्‍यकता पर बल दिया गया है जबकि देश भर में प्रतिपूरक वनीकरण कोष के तहत कुल मिलाकर वसूले गये 7 अरब बिना इस्‍तेमाल के यों ही पड़ेहैं. आज आवश्‍यकता इस पैसे के माध्‍यम से आदिवासी और वनवासी समुदायों के सशक्तिकरण की है.आज जरूरतवनाधिकार कानून के तहत जंगलों के संरक्षण और पुनर्स्‍थापन के लिए इन समुदायों की ग्राम सभाओं को संवैधानिक अधिकार प्रदान करने की है, न कि प्रस्‍तावित नई वन नीति के तहत वनों के प्रबंधन की राज्‍य नियंत्रित औपनिवेशिक व्‍यवस्‍था को नवउदारीकरण के झाड़ू-पोछे से झाड़-पोंछकर फिर खड़ा करने की.

डॉ. प्रमोदमीणा,

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नई दिल्ली। आरपीआई के एक धड़े के अध्यक्ष प्रकाश आम्बेडकर पर एक न्यूज चैनल के संपादक को गाली देने का आरोप लगा है. इस गाली गलौच का वीडियो भी सामने आया है. खबरों के मुताबिक एक न्यूज चैनल ने कुछ समय पहले भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा को लेकर एक रिपोर्ट दिखाई थी. इस रिपोर्ट में हिंसा को भड़काने वालों में कांग्रेसी नेताओं के शामिल होने की बात कही गई थी. इसी रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रकाश आम्बेडकर इस चैनल से नाराज हो गए थे

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चतरा। झारखंड स्थित चतरा के 27 वर्षीय आदिवासी एक्टिविस्ट सुरेश उरांव की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. सुरेश की हत्या गुरुवार 7 जून की सुबह हुई. सुरेश काफी समय से खनन माफिया के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. आशंका है कि सुरेश की हत्या के पीछे उन्हीं का हाथ है. पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में जल, ज़मीन, जंगल का मुद्दा ऊठाने वाले लोगों पर हमला बढ़ गया है.

सुरेश उराव भी हजारों आदिवासियों की तरह विस्थापन का दर्द झेल रहा था और मुवावजे की लड़ाई लड़ रहा था. विकासपरक विस्थापनों के संबंध में एक अवधारणा यह भी है कि मुख्यधारा के लोग सुरेश जैसे लोगों को विकास की राह में बाधा समझते हैं और सही बात के लिए लड़ते हुए भी इन्हें एक सिरे से नकार दिया जाता है. विकासात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोग आदिवासी समुदाय को हाशिये में ढकेल दिए जाने की प्रायः अनदेखी करते हैं.

छोटा नागपुर, नियामगिरी, बस्तर, सिंगरौली और अब दुद्धि (सोनभद्र) का अमवार सभी जगह प्राकृति के लिए लड़ाई लड़ने वालों की कहानी एक सी है, जबकि विस्थापितों के लिए ऐसी परियोजनाए अक्सर नकारात्मक परिणाम लाती है. उन्हें आर्थिक बदहाली और मानसिक अवरोध का सामना करना पड़ता है, जबकि यदि सरकार जमीनी स्तर पर ठोस कार्य करे तो निश्चय ही देश और विस्थापितों दोनों का ही विकास होगा.

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अहमदाबाद। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गुजरात में वहां के दरबार यानि की राजपूतों ने एक दलित महिला पर हमला कर दिया. आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता का कसूर बस इतना भर था कि वह पंचायत ऑफिस में कुर्सी पर बैठ गई थी. महिला पंचायत ऑफिस में आधार कार्ड बांटने के काम के लिए पहुंची थी. पीड़िता के मुताबिक आरोप है कि जब महिला कुर्सी पर बैठी तो दरबार समुदाय के लोगों ने उस पर हमला कर दिया.

इस मामले में एक चौंकाने वाली सच्चाई यह भी सामने आई है कि इस परिवार पर स्थानीय मनुवादी गुंडें पहले भी हमला कर चुके हैं. तब महिला के एक रिश्तेदार ने अपने नाम में ‘सिंह’ जोड़ लिया था. इस मामले में अहमदाबाद के कोठ पुलिस स्टेशन में 7 जून को एक एफआईआर दर्ज की गई थी. एफआईआऱ के मुताबिक जयराज सिंह वेगड़ नाम के शख्स ने पीड़िता के कुर्सी पर बैठने पर आपत्ति जताई और उसके बाद कुर्सी को धक्का दे दिया. विरोध करने पर दरबार समाज के और गुंडे वहां पहुंच गए और वहां मौजूद दलितों से मारपीट और गाली-गलौज करने लगे.

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एम्स में इतने पदों पर वैकेंसी, जल्द करें आवेदन

नई दिल्ली। एम्स नागपुर (AIIMS Nagpur) ने 30 पदों पर भर्तियां निकाली है. इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की अंतिम तारीख 18 जून है. उम्मीदवार एम्स की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

पदः विभाग ने जिन पदों पर भर्तियां निकाली हैं उनमें खास तौर पर पर्सनल असिस्टेंट, लाइब्रेरियन ग्रेड तीन, टेक्निकल असिस्टेंट, टेक्निशियन, स्टोर कीपर, वार्डन, कैशियर और अन्य पद शामिल हैं. आवेदक अन्य पदों की जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं.

योग्यताः आवेदन करने के लिए अलग-अलग पद के लिए आवेदकों का 12वीं पास और डिप्लोमा किया होना जरूरी है. हर पद के लिए विभाग ने योग्यता अलग तय की है. आवेदन करने से पहले आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इसे जांच सकते हैं.

उम्र सीमा- आवेदकों की उम्र 18 से 45 साल के बीच होनी चाहिए.

पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा. इन पदों पर चुने जाने वाले उम्मीदवारों को औसतन सैलरी 9,300 और 34,800 के बीच मिलेगी. पद के हिसाब से सैलरी अलग-अलग है. आवेदन करने से पूर्व दिशा-निर्देश ध्यान से पढें.

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डोली उठने से पहले प्रेमिका ने लगाई फांसी

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पटना। लड़की की प्रेम कहानी का खात्मा करने के लिए घरवालों ने शादी का रास्ता निकाला लेकिन लड़की ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. बिहार के शाहपुर थाना क्षेत्र में एक छात्रा ने फांसी लगाई है. युवती की आत्महत्या की वजह प्रेम प्रसंग बताई जा रही है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए दानापुर अनुमंडल अस्पताल भेजा गया है.

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार युवती प्रेम करती थी. वह अपने प्रेमी से शादी करना चाहती थी. लेकिन युवती के परिवार ने उसकी बात ना मानकर जबरन किसी दुसरे लड़के के साथ शादी तय कर दी. आगामी 23 जून को उसकी शादी भी थी. जब युवती को इस बारे में पता चला तो उसने शादी से इनकार किया तो परिजनों ने मारापीटा भी. ऐसे में युवती ने परिजनों के आगे हारकर खुदकुशी कर ली.

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अब राष्ट्रपति भवन में नहीं होगी इफ्तार पार्टी

नई दिल्ली। हर साल होने वाले इफ्तार के आयोजन को राष्ट्रपति ने बंद करवा दिया है. ऐसा कहा जा रहा है कि करीब एक दशक बाद इस तरह का फैसला लिया है. इससे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन कराते थे. लेकिन अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इस साल राष्ट्रपति भवन में इफ्तार पार्टी की मेजबानी नहीं करेंगे.

यह जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से दी गई है. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अशोक मलिक ने बताया कि पदभार ग्रहण करने के बाद राष्ट्रपति ने फैसला लिया था कि करदाताओं के पैसे से राष्ट्रपति भवन में कोई भी धार्मिक आयोजन नहीं होगा. इसके अनुसार दीपावली, होली, गुरुपर्व और क्रिसमस का भी आयोजन नहीं होगा. राष्ट्रपति भवन पूरे देश के लिए धर्मनिरपेक्ष भाव रखता है, इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति हर बड़े धार्मिक त्योहार पर देशवासियों को अपनी शुभकामना देते हैं. हालांति एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल के दौरान ऐसा नहीं हुआ. कलाम 2002 से 2007 तक राष्ट्रपति रहे थे.

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शिवसेना के बाद बिहार में बीजेपी को डबल झटका

PC- thehindu

पटना। ऐसा लग रहा है कि कर्नाटक के साथ ही बीजेपी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं. एक के बाद एक बीजेपी को झटका लगता दिख रहा है. खबर आ रही है कि जदयू सीट बंटवारे को लेकर अड़ गई है. तो दुसरी ओर रालोसपा के अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने आज पटना में आयोजित राजग के भोज में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है. मतलब कि अमित शाह के कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा शामिल नहीं होंगे.

उप चुनावों में मिली करारी हार के बाद एनडीए गठबंधन दलों को मनाने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह गुरूवार को पटना आ रहे हैं. वहीं रालोसपा के अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा राजग के भोज में शामिल नहीं होंगे. भोज से पहले ही भाजपा को उपेंद्र कुशवाहा ने झटका दे दिया है. तो वहीं जेडीयू के नेशनल जनरल सेक्रेटरी श्‍याम रजक ने गुरुवार को कहा कि नीतीश कुमार बिहार में महत्‍वपूर्ण भूमिका रहे हैं. हमने 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और 2019 के लोकसभा चुनाव में इससे कम सीटों पर चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है. उन्‍होंने कहा कि अगर एनडीए नीतीश कुमार की छवि का फायदा उठाना चाहता हैं तो उसे जेडीयू के साथ न्‍याय करना होगा. ऐसे में जदयू व रालोसपा की नाराजगी साफ दिख रही है.

बता दें कि उप चुनाव में मिली हार के बाद जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने भी बीजेपी पर भड़ास निकाली थी. तो वहीं पीडीपी भी कश्मीर में मुंह फूलाकर बैठी है. शिवसेना ने तो साफ तौर पर बीजेपी को नकार दिया है. ऐसे मेें बीजेपी की मुश्किल बढ़ती दिख रही है. भोज में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा नेता व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, केंद्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान हिस्सा लेंगे.

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दिन दहाड़े गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजी दिल्ली

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नई दिल्ली। देश की राजधानी में गुरूवार को उत्तम नगर इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा. जब दो कार सवार ने दोपहर में दिनदहाड़े बीच सड़क पर गोलियां चलानी शुरू की. इससे इलाके में दहशत फैल गई. हालांकि पुलिस पहुंचकर मामले को कंट्रोल करने में जुटी. साथ ही घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.

प्राप्त खबरों के अनुसार दो कार में सवार लोगों की किसी बात को लेकर बहस और फिर अचानक दोनों ओर से गोलियां चलने लगी. ऐसा बताया जा रहा है कि सात से आठ राउंड फायरिंग की गई. इस घटना में कार सवार एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है. जानकारी के अनुसार नजफगढ़ रोड पर उत्‍तम नगर के पास गुरुवार दोपहर दो करों में सवार लोगों के बीच बीच सड़क पर जमकर फायरिंग हुई. शुरुआती जांच में ये घटना गैंगवार की लग रही है.

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ब्राह्मणों के अत्याचार से परेशान 300 दलित परिवार बौध्द धर्म अपनाएंगे

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नई दिल्ली। ब्राह्मणों के अत्याचार के परेशान होकर हरियाणा के हिसार जिला के करीब 300 दलित परिवारों ने हिंदू धर्म छोड़ने की ठान ली है. इनका आरोप है कि गांव के ब्राह्मणों व पुलिस ने जीना हराम कर रखा है. मुख्यमंत्री तक फरियाद लेकर गए लेकिन कोई मदद नहीं मिली है. इनका कहना है कि ब्राह्मणों ने गांव में पानी तक पर कब्जा जमा रखा है. आए दिन मारपीट करते रहते हैं.

प्राप्त जानकारी के अनुसार जींद के बाद अब हिसार के भाटला गांव के 300 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन करने का फैसला लिया है. दलित समुदाय के लोगों का आरोप है कि दबंग ब्राह्मण समुदाय के लोग अत्याचार कर रहे हैं सरकार से भी किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिल रहा है. पीड़ित परिवार का कहना है कि जिस धर्म में उनको मान-सम्मान नहीं मिल रहा है उसके साथ जुड़ने से क्या औचित्य है. इसलिए 29 July को बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय लिया है.

बता दें कि इससे पहले जींद के दलितों ने बौध्द धर्म अपनाकर हिंदू धर्म का बहिष्कार कर दिया है. इतना ही नहीं हरियाणा में दलितों पर अत्याचार के कई मामले हालही में सामने आए हैं. लेकिन इनको लेकर सरकार कुछ खास कदम नहीं उठा रही है.

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आरएसएस कार्यक्रमः प्रणब मुखर्जी को बोलने से कोई रोक ना पाया, भाषण ने बढ़ा दी छटपटाहट

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नई दिल्ली। अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आरएसएस के कार्यक्रम में बोलने से कोई रोक नहीं सकता. यहां तक की प्रणब मुखर्जी ने अपनी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी के बात को दरकिनार कर दिया है. प्रणब मुखर्जी आज शाम को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे. इसके लिए प्रणब बुधवार को ही नागपुर पहुंच गए थे. प्रणब के भाषण को को लेकर सबकी धड़कन तेज हो गई है. कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर वो वहां पर क्या बोलेंगे.

प्रणब मुखर्जी के दफ्तर के सूत्रों की मानें तो प्रणब का 20 मिनट का भाषण मिला-जुला रहेगा. जिसमें प्रणब संघ का बखान करेंगे और राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर जोर होगा. संभावना है कि प्रणब आज के समय के राजनीतिक माहौल पर भी अपनी बात रख सकते हैं. हालांकि ये तो संभावित चीजें है लेकिन पता तो तभी चलेगा जब प्रणब का मुंह खुलेगा. इसको लेकर प्रणब मुखर्जी ने साफ तौर पर कहा है कि जो बोलूंगा नागपुर में बोलूंगा.

बता दें कि प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में जाने का विरोध उनकी ही बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी कर चुकी हैं. शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि आरएसएस उनके फोटो का गलत मतलब निकालकर प्रचार-प्रसार करेगी. इससे उनकी व कांग्रेस की छवि खराब हो सकती है.

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जिग्नेश की जान को खतरा !

नई दिल्ली। गुजरात के विधायक और दलित नेता जिग्‍नेश मेवाणी को एक बार फिर जान से मारने की धमकी दी गई है. जिग्नेश मेवाणी को लगातर इस तरह धमकी भरे कॉल मिल रहे हैं. फोन पर गोली मारने की धमकी दी जा रही है. लेकिन जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि इससे हम डरने वाले नहीं है. लल्‍लू पंजू समाज है क्‍या, परिणाम का इंतजार करो.

जिग्‍नेश मेवाणी ने ट्विटर पर धमकी की जानकारी देते हुए कहा कि एक बार फिर उसी नंबर से मुझे फोन आया जिसने कल मुझे जान से मारने की धमकी दी थी. बुधवार दोपहर को भी मेवाणी के एक दोस्‍त कौशिक परमार को किसी ने फोन पर जिग्‍नेश को जान से मारने की धमकी दी थी. इस मामले में बनासकांठा जिले के वडगामा में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है.

जानकारी के अनुसार गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्‍नेश मेवाणी को दो दिन से कोई गोली मारने की धमकी दे रहा है. राजवीर मिश्रा नाम के शख्‍स ने जिग्‍नेश मेवाणी के दोस्‍त को फोन कर गोली मारने की धमकी दी थी. पुलिस ने धारा 507 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

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तीन घंटे अमित शाह ने मनाया फिर भी शिवसेना ने कहा ना

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नई दिल्ली। उप चुनाव में मिली हार के बाद अमित शाह गठबंधन वाले दलों को मनाने के लिए निकले थे लेकिन बुधवार को शिवसेना से मिलने के बाद निराशा हाथ लगी. भाजपा के साथ चुनाव लड़ने से शिवसेना ने साफ तौर से मना कर दिया. इनका कहना है कि वे भाजपा के मंसूबों से वाकिफ हैं.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद शिवसेना ने एकबार फिर ऐलान कर दिया है कि वह 2019 का आमचुनाव अकेले अपने दम पर लड़ेगी. उद्धव ठाकरे और अमित शाह की मुलाकात के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि हम अमित शाह का एजेंडा जानते हैं. लेकिन हम कह देना चाहते हैं कि शिव सेना ने प्रस्ताव पारित किया है और हम चुनाव अपने दम पर ही लड़ेगे. भाजपा-शिवसेना के बीच गिले शिकवे दूर करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार की शाम शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ मातोश्री में मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में करीब सवा दो घंटे से अधिक चर्चा हुई जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे.

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कर्नाटकः बसपा के एन महेश ने मंत्री बनकर बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। कर्नाटक में 06 जून को बसपा विधायक एन महेश ने मंत्री पद की शपथ लेकर रिकॉर्ड कायम किया है जिसको इतिहास हमेशा याद रखेगा. कर्नाटक में मंत्री पद का शपथ ग्रहण करने के साथ ही एन महेश बसपा के पहले ऐसे मंत्री बने जो कि उत्तर प्रदेश से बाहर राज्य में मंत्री बनाए गए. राज्यपाल वाजुभाई वाला ने जेडीएस, कांग्रेस व बसपा सहित कुल 25 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. जिसमें जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में कांग्रेस के 14 और जेडीएस के 9 मंत्री भी शामिल हैं.

कर्नाटक में अभी शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों के मंत्रालय की घोषणा अधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है लेकिन सूत्रों का कहना है कि बसपा की ओर से एन महेश के लिए माइनर इरिगेशन डिपार्टमेंट की मांग की जा रही है. बसपा को भरोसा है कि कांग्रेस-जेडीएस की ओर से लघु सिंचाई विभाग की मांग पूरी की जाएगी.

मोदी को भी दिया मात…

आपको बताते चलें कि जीतने के बाद एन महेश को भाजपा की ओर से भी लालच मिले थे लेकिन एन महेश ने साफ तौर पर मना कर दिया था और कहा था कि इस संबंध में बहन मायावती से सीधे संपर्क कर लें. इसके बाद भाजपा की किरकिरी हो गई थी. इतना ही नहीं एन महेश को हराने के लिए यहां पर 1 मई को पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार करने आए थे, लेकिन महेश की मेहनत के आगे मोदी का प्रचार भी काम नहीं आया और एन महेश सभी स्थितियों में खरे उतरे.

बसपा के प्रत्याशी एन महेश ने चामराजनगर जिले के कोल्लेगल विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल कर दक्षिण में बसपा का परचम बुलंद किया. बसपा उम्मीदवार ने कांग्रेस उम्मीदवार एआर कृष्णमूर्ति को 19,454 मतों के अंतर से पराजित किया. इस सीट पर बसपा को कुल 71,792 वोट मिले. भाजपा इस सीट पर तीसरे नंबर की पार्टी रही. महेश कर्नाटक में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. महेश ने कर्नाटक में जीतकर दक्षिण में बसपा को बड़ी संजीवनी दे दी. त्रिशंकु विधान सभा वाली सरकार बनाने में बसपा सुप्रीमो मायावती का सबसे अहम रोल रहा. इनको कर्नाटक का किंग मेकर भी कहा जा रहा है. जो कि 2019 में महागठबंधन की ओर से पीएम पद की उम्मीदवार हो सकतीं हैं.

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बिहार बोर्ड टॉपर घोटालाः रूबी के बाद कल्पना से सवाल…

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पटना। बिहार बोर्ड के रिजल्ट घालमेल को लेकर हर साल कुछ ना कुछ सामने आ रहा है. रूबी कुमारी की घटना की बीते बहुत दिन नहीं हुए हैं और एक बार फिर इस साल बिहार बोर्ड साइंस की टॉपर कल्पना सवालों के घेरे में हैं. खबरों के अनुसार इस मामले को भी टॉपर घोटाला की तरह देखा जा रहा है. हालांकि बिहार बोर्ड की गलती सबके सामने आ चुकी है. लेकिन फिलहाल बिहार बोर्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

कौन है कल्पना

बिहार बोर्ड की ओर से बुधवार को 12th के नतीजे जारी किए गए. साइंस में कल्पना कुमारी ने टॉप किया है. कल्पनी वही लड़की है, जिसने दो दिन पहले NEET में ऑल इंडिया टॉप किया है. कल्पना की पढाई-लिखाई पर कोई सवाल नहीं है लेकिन नियम-कानून की मानें तो कल्पना घिरते दिख रही हैं. इसको लेकर शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी गलती सामने आ रही है.

क्यों उठ रहे सवाल

जानकारी के मुताबिक, कल्पना ने दो साल दिल्ली रहकर आकाश इंस्टीट्यूट से कोचिंग की थी. लेकिन इसी दौरान उसने शिवहर के तरियानी में YKJM कॉलेज में रेगुलर एडमिशन लेकर पढी की. यहां ध्यान देने वाली बाता है कि, बिहार बोर्ड एग्जाम्स में बैठने के लिए स्टूडेंट को 75 फीसदी अटेंडेंस (उपस्थिति) दर्ज करानी होती है. अब सवाल ये है कि जब कल्पना कॉलेज ही नहीं गई, तो उसने 12th का एग्जाम कैसे दिया? मतलब साफ है कि इस टॉपर के लिए स्कूल ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया है. NEET में कल्पना को 720 में से मिले 691 मार्क्स मिले हैं इसलिए कल्पना के शिक्षा पर कोई शक नहीं है. अब देखना है कि बिहार का शिक्षा विभाग इसको लेकर क्या कार्रवाई करता है.

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो किसानों का फायदा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मंदसौर गोलीकांड की बरसी पर राहुल गांधी मंदसौर में हैं. इस दौरान राहुल गांधी किसानों के बीच एक रैली को संबोधित करने के साथ ही किसानों के हित की बात कही. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस हमेशा किसानों के बारे में सोचती व करती है. जबकि भाजपा किसानों के लिए जानलेवा साबित होती है. मंदौसर में आयोजित कांग्रेस ने इस रैली को किसान समृद्धि संकल्प रैली का नाम दिया है. बता दें कि मंदसौर में आज ही के दिन एक साल पहले किसानों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी, जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई थी.

किसानों के लिए फायदा बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, हमारी सरकार बनी तो हम किसानों का कर्ज माफ कर देंगे. हम अपने मन की बात नहीं बताना चाहते हैं, बल्कि हम आपके मन की बात और आपका दर्द सुनना चाहते हैं. राहुल ने पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि कर्नाटक में सिद्धारमैया की सरकार ने मुझसे कहा कि हम दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ करने जा रहे हैं. किसान का कर्जा माफ करने का हमारा रिकॉर्ड है. इसके अलावा हम किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री बनाएंगे, उसमें यहां के किसानों के बेटे को रोजगार देंगे. इस दौरान किसानों को कांग्रेस की ओर से सौगात दी गई.

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कर्नाटकः बसपा विधायक समेत 25 विधायकों को मंत्री पद मिला

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नई दिल्ली। लंबे इंतजार के बाद कर्नाटक में बुधवार को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के मंत्रीमंडल में 25 विधायकों को जगह मिली है. बसपा के एकमात्र विधायक को मंत्री पद मिला है. कहा जा रहा है कि यह बसपा के पहले विधायक हैं जिनको यूपी के बार मंत्री पद मिला.

वर्नर वाजुभाई वाला ने जेडीएस, कांग्रेस बसपा सहित कुल 25 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई. जेडीएस-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार में जेडीएस के 9 मंत्री तो वहीं कांग्रेस के सबसे ज्यादा 14 मंत्रियों ने शपथ ली. बसपा विधायक एन महेश को भी मंत्री पद दिया गया.

बता दें कि 23 मई को दूसरी बार कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. कर्नाटक विधान सभा चुनाव में बीजेपी को सबसे ज्यादा 104 सीट मिलने के बावजूद भी बहुमत साबित ना करने पर कांग्रेस व जेडीएस ने मिलकर सरकार बनाई. त्रिशंकु विधानसभा वाली सरकार बनाने के लिए बसपा प्रमुख मायावती का रोल सबसे अहम रहा.

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बिहार के निवासी को इस सरकारी नौकरी में मिलेगी छूट, ऑनलाइन आवेदन करें

नई दिल्ली। बेरोजगार युवा यहां पर जॉब के लिए आवेदन कर सकते हैं. बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने बिहार सरकार में अवर निरीक्षदक उत्‍पाद (Excise Sub Inspector) पदों पर 126 वैकेंसी निकाली है. इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन एप्‍लाई करना होगा. ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख 30 जून 2018 है. मूल रूप से बिहार के रहने वाले आवेदनकर्ता को आरक्षण और उम्र में छूट का लाभ मिलेगा. वहीं, दूसरे राज्‍यों के उम्‍मीदवार अनारक्षित श्रेणी में एप्‍लाई कर सकते हैं.

पद का नाम: एक्साइज सब-इंस्पेक्टर

योग्यता: इच्‍छुक उम्‍मीदवार को 1 जनवरी 2018 या इससे पहले किसी मान्‍यता प्राप्‍त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन या राज्‍य सरकार से मान्‍यता प्राप्‍त उसके समकक्ष परीक्षा में पास व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं.

आयु सीमा

  • सामान्‍य श्रेणी के पुरुष उम्‍मीदवार की न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम 37 साल होनी चाहिए.
  • पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के पुरुष उम्‍मीदवारों के लिए न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम उम्र 40 साल.
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के पुरुष और महिला उम्‍मीदवार के लिए न्‍यूनतम उम्र 20 साल और अधिकतम 42 साल होनी चाहिए.

सैलरी: 9300 से 34800 रुपये प्रतिमाह के साथ ग्रेड-पे 4200 रुपये मिलेगा.

चयन प्रक्रिया

उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा/शारीरिक मापदंड और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. लिखित परीक्षा दो चरणों में होगी- प्रारंभिक और मुख्‍य परीक्षा. लिखित परीक्षा में वैकल्पिक यानी कि ऑप्‍शनल सवाल पूछे जाएंगे. और प्रारंभिक परीक्षा दो घंटे की होगी जिसमें 200 अंकों के 100 सवाल पूछे जाएंगे. इसमें जनरल नॉलेज और करंट अफेयर्स के सवाल आएंगे. मुख्य परीक्षा के लिए दो पेपर होंगे, जिसमें पहला पेपर सामान्‍य हिन्दी का होगा. वहीं, दूसरे पेपर में सामान्य अध्ययन, सामान्य विज्ञान, इतिहास, भूगोल, गणित और रीजनिंग के सवाल आएंगे. इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग सिस्‍टम लागू होगा.

शारीरिक मापदंड

  • सामान्य और ओबीसी पुरुष उम्मीदवारों की लंबाई न्यूनतम 165 सेंटीमीटर होनी चाहिए. SC/ST उम्मीदवारों की लंबाई न्यूनतम 160 सेंटीमीटर होनी चाहिए. वहीं, सभी वर्गों के महिला उम्मीदवारों की लंबाई 160 सेंटीमीटर और वजन 48 किलोग्राम होना चाहिए.
  • सामान्य और ओबीसी पुरुष उम्मीदवारों का सीना बिना फुलाए कम से कम 81 सेंटीमीटर और फुलाने के बाद न्‍यूनतम 86 सेंटीमीटर होना चाहिए. वहीं, SC/ST उम्मीदवारों का सीना बिना फुलाए कम से कम 79 सेंटीमीटर और फुलाने के बाद न्‍यूनतम  84 सेंटीमीटर होना चाहिए.

शारीरिक दक्षता परीक्षा

पुरुष उम्मीदवारों को एक मील की दौड़ छह मिनट में पूरी करनी होगी. महिला उम्मीदवारों को एक किलोमीटर की दौड़ छह मिनट में पूरी करनी होगी. ऊंची कूद पुरुष उम्मीदवारों के लिए कम से कम चार फीट और महिला उम्मीदवारों के लिए कम से कम तीन फीट. लंबी कूद पुरुष उम्मीदवारों के लिए कम से कम 12 फीट और महिला उम्मीदवारों के लिए कम से कम नौ फीट. गोला फेंक पुरुष उम्मीदवारों को 16 पाउंड का गोला कम से कम 16 फीट तक फेंकना होगा. महिला उम्मीदवारों को 12 पाउंड का गोला कम से कम 10 फीट तक फेंकना होगा.

आवेदन फी

सामान्य और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 700 रुपये और SC/ST और महिला उम्मीदवारों के लिए 400 रुपये.  फीस का भुगतान क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए होगा.

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