प्रमोशन में आरक्षण के लिए उत्तराखंड के शिक्षकों ने ऐसे बनाया दबाव

नई दिल्ली। आरक्षण के आधार पर एससी एसटी कर्मचारियों को जल्द प्रमोशन देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. इसके लिए उत्तराखंड के 13 जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया. शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए 15 जून, 2018 के पत्र जो कि पदोन्नति में आरक्षण विषयक हैं. इस क्रम में उत्तराखंड के अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन ने प्रांतीय अध्यक्ष संजय भाटिया के आह्वान पर ज्ञापन दिए गए.

बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार को पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने संबंधी ज्ञापन प्रेषित किया गया. साथ ही मानसून सत्र में 117 वें संविधान संशोधन विधेयक जो कि पदोन्नति में आरक्षण से सम्बंधित है, को पारित करने एवं एससी एसटी एट्रोसीटी एक्ट, 1989 को पुनः पूर्व रूप में लाने हेतु आवश्यक बिल लाने के सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया.

संगठन ने दबाव डालते हुए कहा कि 10 दिन में बहाल न करने की स्थिति में पुनः स्मरण दिलाया जायेगा. यदि फिर भी बहाल नहीं किया गया तो 15 दिन बाद अग्रिम रणनीति बनाकर जन आंदोलन का स्वरूप देकर आंदोलन किया जायेगा. जिसकी जिम्मेदार सरकार स्वयं होगी. निर्णय एवं क्रियान्वयन में भागीदारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में आवश्यक है.

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महाराष्ट्र में बसपा की डिमांड, शरद पवार मिलकर लड़ना चाहते हैं चुनाव

नई दिल्ली। देश चुनावी मोड में आ चुका है. भाजपा ने जहां कश्मीर में गठबंधन तोड़ कर चुनाबी बिसात में अपनी पहली चाल चल दी है तो बिहार से लेकर बंगाल तक में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर हलचल साफ महसूस की जा रही है. इस बीच कर्नाटक चुनाव के बाद बसपा देश की राजनीति में महत्वपूर्ण होकर उभरी है. आलम यह है कि तमाम राजनीतिक दल अपने राज्य में बसपा से गठबंधन करना चाहते हैं.

महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव से पहले एक नया गठजोड़ बनता दिख रहा है. और इसे जमीन पर उतारने की कोशिश में जुटे हैं महाराष्ट्र के दिग्गज और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार. महाराष्ट्र में शिवसेना के अकेले लड़ने की घोषणा के बाद पवार अब भाजपा को घेरने में जुट गए हैं. इसके लिए पवार महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके में बसपा का साथ चाहते हैं.

विदर्भ में लोकसभा की 11 सीटें हैं. 2014 लोकसभा चुनावों में इन सीटों पर भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने जीत हासिल की थी. इन 11 सीटों को अपने पाले में लाने के लिए राकांपा यहां कांग्रेस और बसपा के साथ मिलकर महागठजोड़ बनाना चाहती है.

हालांकि, बसपा ने महाराष्ट्र में कोई विधानसभा या लोकसभा सीट पिछले चुनाव में नहीं जीता था पर दोनों चुनावों में उसका वोट प्रतिशत ढाई फीसदी के आसपास रहा है. इसमें पिछले चुनाव में एनसीपी-कांग्रेस के वोटों को जोड़ा जाए तो यह गठजोड़ बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है. हाल के दिनों में जिस तरह कोरेगांव और 2 अप्रैल को दलित उभार दिखा है, उसको बसपा के पक्ष में वोट में बदलने की संभावना है. इसी संभावना ने कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र में भी विपक्षियों के लिए बसपा को महत्वपूर्ण कर दिया है.

अकेले चुनाव लड़ने पर अड़ी शिवसेना अगर भाजपा के खिलाफ कोई निर्णायक कदम उठाएगी तो विपक्ष की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. अगर पवार की कोशिश रंग ले आई और अगर वो कांग्रेस और बसपा के साथ मिलकर महागठजोड़ बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो महाराष्ट्र में भाजपा की राह आसान नहीं होगी.

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क्या दलितों की हितैषी पार्टियां कानपुर दुष्कर्म काण्ड का राष्ट्रव्यापी विरोध करेंगी?

भारत 15 अगस्त, 1947 को राजे-रजवाड़ों, बादशाहों-नवाबों, ठाकुरों-जागीरदारों और ब्रिटिश राज की गुलामी से आजा़द हो गया. बाबा साहेब चाहते थे कि राजनैतिक आजादी से पहले सामाजिक आजादी मिले, लेकिन तत्कालीन नेताओं ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया. इसका नतीजा यह रहा कि न केवल आज भी सामाजिक असमानता मौजूद है, अपितु छूआछूत भी मौजूद है.

इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं वे अखबार जो इन घटनाओं को जनता तक रोज पहुँचा रहे हैं.

ऐसा कोई दिन, सप्ताह या माह नहीं जाता जिस दिन दलित का अपमान नहीं हुआ हो, चाहे दबंगों द्वारा अपमानित करने के रूप में हों, चाहे इनके घर-खेतों पर कब्जा करने को लेकर हो, इनके सामाजिक-राजनैतिक अधिकारों के हनन के रूप में हो अथवा दलित समाज की बालिकाओं-स्त्रियों की इज्जत पर हमले के रूप में हो, आज भी बेरोकटोक जारी है.

इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता कि शासन किस पार्टी का है, क्योंकि दोनों ही प्रमुख पार्टियों में दबंगों का वर्चस्व है और दलितों के हितों का दावा करने वाली तथा दलितों के वोटों के बल पर उत्तर प्रदेश में, जहाँ यह काण्ड हुआ, सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी आज बहुजन को भूलकर सर्वजन के पीछे लगी हुई है.

आज दलित अपने को ठगा-सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि इन्होनें जिस पार्टी को वोट दिया, उसने इनका जमकर उपयोग किया और काम निकल जाने के बाद दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया और जिस पार्टी को वोट और नोट दिया, आज वह भी वोट के खातिर इनको भूल ब्राह्मण, बनियों और राजपूतों अर्थात् दबंगों के साथ हाथ मिला चुकी है. ऐसे में दलित चैराहे पर खड़ा है कि आखिर जाये तो कहां जाये? यह लिखते कोई संकोच नहीं कि दलितों के नेता या तो बिकाऊ होते हैं या दल-बदलू. थोड़ा सा भी फायदा देखा कि डगमग डोल जाते हैं और अपने सिद्धान्तों को ताक में रख देतें हैं.

बाबा साहेब के सिद्धान्त त्रयी में उक्त घटनाओं का समाधान नजर आता है. शिक्षा के जरिये हमें अपने-पराये की पहचान होनी चाहिये. प्रयास यह करना चाहिये कि जो लोग किसी भी प्रकार के लालच अथवा दबाव में आकर अपने वर्ग के हितों को छोड़ रहे हैं, उनको समाज से जोड़े रखा जाये. इसके बाद जो सबसे महत्त्वपूर्ण बात है वो यह कि दलित समाज के प्रबुद्ध जनों को जातीय हितों की अपेक्षा वर्ग हितों को प्राथमिकता देना चाहिये.

आज भी दलित जातियों में संगठन का भारी अभाव है और इसके नतीजे सामने हैं. संगठन के ही अभाव में अत्याचारियों को उचित सबक नहीं मिल पाता, रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो पाती, ढंग से तफ्तीश नहीं होती और कई मामलों में तो एफ आर लगा दी जाती है. दलितों में आज तक जो संगठन हुआ है वह सतही और अधिकतर राजनैतिक फायदे के लिये है. जो संगठन है वह स्वार्थों के चलते इतने खण्डों में बंट गया है कि दलितों का ही विश्वास नहीं जीत पा रहे हैं. आज दलित समाज के दुख-दर्द को विश्व पटल पर रखने वाला और इनके पक्ष में खड़ा होकर दोषियों को सजा दिलवाने वाला कोई संगठन नहीं है. जो संगठन हैं वे अपने-अपने दायरे में सीमित हैं. इसी कारण आज भी पुरानी वर्जनायें जारी हैं, दलितों को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है और मनचाहा दुव्यर्वहार कर लिया जाता है. चूंकि सारे मीडिया पर कब्जा भी इनका ही है, अतः इस प्रकार की घटनाओं को बहुत कम प्रकाश में लाया जाता है अथवा तोड़-मरोड़ कर पेश किया जाता है. कहीं गौवध का संभावित आरोपी मानकर हत्या कर दी जाती है तो कही दूल्हे को घोड़ी पर से उतारा और पीटा जाता है. कहीं बहिन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया जाता है तो कहीं जमीनें हड़प ली जाती है और ट्रैक्टर के पहियों तले रौंद दिया जाता है. जैसे कि यह रोज का नियम हो गया है.

इन सबके पीछे कारण एक ही है कि दलित समाज संगठित नहीं है. और जो हजारों संगठन बने हुए हैं उनको अपनी-अपनी दुकानें चलाने से ही फुर्सत नहीं है. चुनावों के दिन आने वाले हैं, सबके-सब दोनों राजनैतिक पार्टियों के तलवे चाटने में व्यस्त हैं कि कहीं से टिकट मिल जाये तो जीत कर एमपी एमएलए बन जाये फिर पुश्तों का इंतजाम हो जायेगा. दलितों की कौन सोचता है?

अभी हाल ही में 11 जून, 2018 के राजस्थान पत्रिका में 12 मई, 2018 की घटना की खबर ठीक एक महीने बाद छपी है. खबर के अनुसार कानपुर देहात में दलित समाज की एक लड़की का उसी की शादी के दिन पांच रसूखदारों ने अपहरण कर बन्धक बना आठ घण्टे तक कई बार रेप किया जबकि उसकी बारात उसके दरवाजे पर पंहुच चुकी थी. उसकी मां सिर पटती रही, लेकिन दरिन्दों ने उसकी एक नहीं सुनी. उसकी शादी होने के बाद अगले ही दिन ससुराल वालों ने उसके जिस्म पर घाव देखकर मामला पूछा और उसे निकाल दिया. रसूलाबाद थाने में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. जब युवती ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में गुहार की तब जाकर महीने भर बाद मुकदमा दर्ज हुआ और कार्रवाही शुरु हुई.

क्या दलितों के वोट और नोट के बल पर यूपी में पांच बार सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी का दायित्व नहीं बनता कि इस घटना के विरोध में आंदोलन करे, पीड़िता को सुरक्षा दे और अपराधियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाये? समाजिक कार्यों में हमें मिशनरी भावना से कार्य करना होगा. वह मिशनरी भाव यह है कि दलित का वोट उसी पार्टी को जाये, जो वास्तव में हमारा भला करे. रोटी बेटी का रिश्ता दलित समाज में ही हो. समाज का हर व्यक्ति हार्दिक रूप से यथा संभव दूसरों की सहायता करे. राजनैतिक पार्टियां स्थाई नहीं होती हैं ये तो आती जाती रहती हैं. अगर सामाजिक रुप से सशक्त हो गये तो सरकारें बनाना कोई बड़ी बात नहीं है.

दलित जातियों को आपस में संगठित होकर एक वर्ग का रूप लेना चाहिये. रैगर, भाम्बा, बैरवा, मोची, जीनगर, मेघवाल, खटीक, कोली, धोबी, मेहतर आदि को यह समझना होगा कि अब पुराने विवादों को त्यागना होगा, नये विवाद खत्म करने होंगे और आपस में संगठित रहना होगा. किसी एक की विपत्ति सबकी विपत्ति समझी जाये और इसका उसी तरह विरोध हो जिस तरह कि खुद की विपत्ति का होता है. यदि आज किसी रैगर या धोबी समाज के दूल्हे को घोड़ी पर से उतारा जाता है तो अन्य जातियों का दायित्व है कि सब आपस में मिलकर विरोध करें और दोषियों को कठोरतम दण्ड दिलवायें. शक्ति प्रदर्षन करना हो तो सब साथ में करें. आश्चर्य है कि कानपुर दुष्कर्म काण्ड में अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ जो कि जागृत प्रदेश कहा जाता है! शीर्ष नेतृत्व समाजिक-राजनैतिक संगठनों को करना चाहिये और विरोध प्रदर्शन सारे देश में ठीक उसी तरह हो जैसा कि 2 अप्रैल, 2018 को किया गया था. अपराधियों को नये कानून के तहत सरेआम फांसी पर लटकाया जाये, ताकि अपराधियों को सजा मिलने के साथ साथ इस तरह के विचार रखने वालों को भी नसीहत मिल सके और आगे इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

श्याम सुन्दर बैरवा

सहायक प्रोफेसर (वस्त्र रसायन)

माणिक्यलाल वर्मा टेक्सटाईल्ज एवं

इंजीनियरिंग कॉलेज, भीलवाड़ा

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कश्मीर में आजादी, आजादी का शोर, भड़की बीजेपी

नई दिल्ली। कश्मीर की आजादी को लेकर विवाद नया नहीं है. लेकिन कश्मीर में बीजेपी व पीडीपी की सरकार गिरने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा आजादी को लेकर बयानबाजी करने पर जमकर बवाल मचा है. इसको लेकर शिवसेना व बीजेपी ने जमकर हमला बोला है. गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज के बयानों पर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है.

आजाद के बयान से आंतकी खुश

शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसाद ने कहा कि आजाद और सोज के बयानों पर सोनिया और राहुल गांधी को जवाब देना चाहिए. तो वहीं गुलाम नबी आजाद और सैफुद्दीन सोज इनकी सोच व आतंकी संगठन लश्कर में कोई फर्क नहीं है. इन बातों को लेकर भारत की राजनीति गरमा गई है. आजाद के बयान से आंतकी खुश हैं. पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने आजाद के बयान के समर्थन में अपना बयान जारी किया है.

लश्कर के प्रवक्ता अब्दुल्ला गजनवी का कहना है कि महमूद शाह आजाद के बयान से सहमत हैं. निर्मला सीतारमण द्वारा शहीद औरंगजेब के परिवार से मिलने जाने को कांग्रेस ने ड्रामा बताया था. इस पर पलटवार करते हुए प्रसाद ने पूछा कि औरंगजेब से मिलने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण गईं तो क्या यह ड्रामा है. अगर यह ड्रामा है तो 120 करोड़ लोग खड़े होकर कहेंगे कि मरहूम औरंगजेब के जज्बे को सलाम.

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आतंकी बेटे की कश्मीरी मां का दर्द, जिसे देश सुन रहा है

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। बेटा मां के लिए हमेशा बेटा ही रहता है, चाहे दुनिया उसे चोर-बदमाश, आतंकी ही क्यों ना कहे. एक ऐसे ही मां का दर्द जिसका बेटा आतंकी बन चुका है. इस बात को बखूबी जानती है लेकिन फिर भी उसको बेटा, बेटा कहकर बुला रही है, उसके घर आने की राह ताक रही है. इस इंतजार में टूट चुकी मां बेटे रोशन जमीर से लौट आने का आश लगाए जिंदगी काट रही है.

पिता की हिम्मत…

दरअसल, करीब एक माह पहले अनंतनाग में रहने वाले एक कश्मीरी लड़के रोशन जमीर के लापता होने की घटना सामने आई थी. रोशन के पिता ने उसके गायब होने की एफआईआर दर्ज करवाई. बाद में उन्हें पता चला कि रोशन एक आतंकवादी ग्रुप हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो चुका है. इसके बाद पिता की हिम्मत ही टूट गई और परिवार बिखरता चला गया.

मैं खत्म हो…

एक मां अपने घर को टूटता व बेटे को मौत के मुंह में समाता देख उसने एक वीडियो मैसेज जारी किया. उस वीडियो के जरिए मां बेटे से गुहार लगा रही है. बेटे के वियोग में टूट चुकी मां कहती है कि “मेरे बेटे अल्लाह के वास्ते लौट आओ… मेरे बेटे घर वापस आ जाओ, तुम्हारे जाने से हम सब मुसीबत में आ गए हैं, क्या इस दिन के लिए ही तुम्हें पाल पोसकर बड़ा किया था.. ख़ुदा के वास्ते वापस आ जाओ. मेरे बेटे मैं टूट चुकी हूं, मैं खत्म हो चुकी हूं… मुझे किसके सहारे छोडकर गए हो तुम.”

रोंगटे खड़े कर देने वाले मां के अल्फाज को देश सुन रहा है. वीडियो सुनने के बाद हर कोई बेटे के लौट आने की कामना कर रहा है. लेकिन पता नहीं वह आतंकी बन चुका बेटा उस रास्ते से लौटेगा या नहीं. रोशन के पिता गुलाम मोहम्मद भी इसी उम्मीद में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया है. सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो रहे है.

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सेना के रेल टिकट में घपला, छह माह के लिए काउंटर बंद

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। बीजेपी के शासन काल में रेल व सेना से जुड़ी घालमेल की खबर सामने आई है. सेना के जवानों के लिए रेल टिकट बुकिंग में गड़बड़ी का मामला बताया जा रहा है. रेलवे की जांच में पाया गया है कि लखनऊ छावनी में सेना के लिए विशेष बुकिंग सुविधा का दुरुपयोग करके दो करोड़ रुपये का रेलवे को नुकसान पहुंचाया गया है.

सीबीआई जांच

जांच प्रक्रिया करने के लिए संबंधित काउंटर को छह माह के लिए बंद कर दिया गया है. रेलवे ने इस मामले की जांच के लिए सीबीआई को भेजा है, जबकि सेना भी आंतरिक तौर पर छानबीन कर रही है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे एक विशेष समझौते के तहत सेना को टिकट मुहैया कराती है.

आरोप है कि लखनऊ छावनी में बैठे सेना के अधिकारियों ने टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी कर घोटाला किया. लखनऊ में रिजर्वेशन काउंटर पर बैठे रक्षा विभाग के कर्मचारी को इस कथित घोटाले में आरोपी बताया गया है. जांच पड़ताल में पता चला है कि टिकट काउंटर पर बैठे लोगों ने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम में एक पीएनआर नंबर बनाया और उसे जीरो वैल्यू टिकट बताया. समझाने के लिए कहा जाए तो सिस्टम को धोखा देने के लिए इस पर फर्जी टिकट नंबर दर्ज किया गया. इस तरह से सॉफ्टवेयर व पीएनआर नंबर की हेरफेर आदि का दुरूपयोग कर गड़बड़ी करी गई है. फिलहाल मामले की जांच जारी है.

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बच्चों के आंसूओं ने रूकवाया भगवान टीचर का ट्रांसफर

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नई दिल्ली। एक शिक्षक के मेहनत व मोहब्बत ने ऐसा असर दिखाया कि बच्चे शिक्षक की ट्रांसफर की खबर पाकर इतना रोए इतना रोए… कि आखिरकार शिक्षक का ट्रांसफर रोकना पड़ा. बच्चों को जैसे ही खबर पता चली और वे टीचर को जाता देख घेर-पकड़कर रोने लगे. इस नजारा को देखकर स्कूल के आसपास लोगों का हुजूम उमड़ आया और नजारा देखकर लोगों की आंखे भी भर आईं. वाकई ऐसा नजारा विरले ही देखने को मिलता है.

फिर क्या था चेन्नई के तिरुवल्लूर में विलियाग्राम सरकारी स्कूल के करीब सौ बच्चों व एक अंग्रेजी टीचर की मार्मिक तस्वीर सोशल मीडिया पर दौड़ने लगी. शिक्षक व शिष्य प्रेम को देखकर सोशल मीडिया पर भी जमकर तारीफ हो रही है.

बच्चों के साथ अभिभावक भी

प्राप्त जानकारी के मुताबिक विलियाग्राम सरकारी स्कूल के लगभग 100 से ज्यादा बच्चों ने अपने टीचर के ट्रांसफर का विरोध शुरु कर दिया. बच्चों के साथ-साथ अभिवावकों ने भी टीचर के ट्रांसफर का विरोध किया. इसके बाद स्कूल प्रशासन को अपने अधिकारियों से भगवान के ट्रांसफर ऑर्डर को दस दिनों के लिए रोकने को कहना पड़ा.

प्रिंसीपल ए अरविंदन ने बताया कि भगवान उनके स्कूल के सबसे बेहतरीन टीचर हैं. 28 साल से जी. भगवान स्कूल के अंग्रेजी टीचर हैं. सरकारी स्कूलों में टीचर-स्टूडेंस के अनुपात को बनाए रखने के लिए सामान्य ट्रांसफर प्रक्रिया के तहत जी भगवान के नाम की भी घोषणा हुई. स्कूल प्रिंसीपल ने बताया कि भगवान स्कूल में क्लास 6 से 10 तक के बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते हैं. उनके ट्रांसफर ऑर्डर के बाद स्कूल में उनकी जगह नया टीचर आया और उसने 10 बजे स्कूल ज्वाइन कर लिया.

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चीफ जस्टिस की खिलाफत करने वाले न्यायमूर्ति चेलमेश्वर का आखिरी दिन

नई दिल्ली। न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए हमेशा हमें याद रहेंगे. इन्होंने अपने कार्यकाल में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ आवाज उठाई थी. चेलमेश्वर के साथ सुप्रीम कोर्ट के तीन और जजों ने चीफ जस्टिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. जे. चेलमेश्वर शुक्रवार, 22जून को रिटायर हो रहे हैं.

वरिष्ठतम न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने देश की सबसे बड़ी अदालत में करीब सात साल तक सेवा दीं. न्यायाधीश चेलमेश्वर आज 65 साल के हो गए. वह नौ न्यायाधीशों की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था.

बता दें कि आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मोव्या मंडल के पेड्डा मुत्तेवी में 23 जून 1953 को जन्मे चेलमेश्वर की शुरुआती पढाई कृष्णा जिले के मछलीपत्तनम के हिन्दू हाईस्कूल से हुई. उन्होंने स्नातक चेन्नई के लोयोला कॉलेज से भौतिक विज्ञान में किया. उन्होंने कानून की डिग्री 1976 में विशाखापत्तनम के आंध्र विश्वविद्यालय से ली.

वह तीन मई 2007 को गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे और बाद में केरल हाईकोर्ट में स्थानान्तरित हुये. न्यायमूर्ति चेलमेश्वर 10 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए थे. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, एम बी लोकुर और कुरियन जोसेफ के साथ मिलकर चेलमेश्वर ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बीएच लोया की रहस्यमय मौत के संवेदनशील मामले सहित अन्य मामलों के चुनिंदा आवंटन पर सवाल उठाए थे. लोया की एक दिसंबर 2014 को मौत हो गई थी.

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पेट्रोल उड़ेलकर दलित किसान को जिंदा जलाया

प्रतीकात्मक फोटो

भोपाल। राजधानी से सटे एक गांव में सिंह परिवार के दबंगों ने दलित किसान पर पेट्रोल उड़ेलकर उसे जिंदा जला दिया. किसान के परिवार वाले खौफनाक मंजर को देखकर छटपटाते-चिल्लाते रहे लेकिन गांव में कोई डर के मारे बचाने नहीं आया. 70 साल के बुजुर्ग दलित किसान को 90 फीसदी तक जिंदा जला डाला. किसान को तत्काल सरकारी अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया.

जमीन हड़पने को लेकर…

बताया जा रहा है कि घटना भोपाल से सटे बैरसिया तहसील के परसोरिया घाटखेड़ी गांव की है. मृतक किसान किशोरी लाल जाटव ने अपने जमीन को दबंगों से बचाने के कारण उसे मौत मिली. इस सनसनीखेज हत्या के बाद बैरसिया पुलिस ने दोपहर में चार आरोपियों के खिलाफ हत्या, खेत पर कब्जे की कोशिश और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया, पर आरोपियों की रात तक गिरफ्तारी नहीं होने से गांव में तनाव बढ़ता दिखा. बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज लोग अस्पताल में इकट्ठा हो जमकर हंगामा किया. भीड़ बढ़ते देख बैरसिया पुलिस को भोपाल से बल बुलवाना पड़ा.

किसान के बेटे का कहना

मृतक किसान के बेटे कैलाश जाटव ने बताया कि, “2002 में सरकार ने हमें परसोरिया जोड़ स्थित 3.5 एकड़ जमीन पर पट्टा दिया था. तब से ही हम यहां खेती कर रहे थे. इस साल गांव के दबंग तीरन सिंह यादव ने इस पर कब्जा कर लिया. कल सुबह जब मां तंखिया और पिता किशोरी लाल खेत पर पहुंचे तो देखा कि तीरन, उसका बेटा प्रकाश, भतीजे संजू और बलबीर खेत को ट्रैक्टर से जोत रहे थे. पिता ने विरोध करने पर वे भड़क गए. इसके बाद प्रकाश, संजू और बलबीर ने उनके हाथ-पैर पकड़ लिए और तीरन ने पेट्रोल उड़ेलकर जिंदा जला दिया. इस घटना के बाद किसान परिवार सदमे में है.

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सनी लियोन का बेकाबू होने वाला वीडियो वायरल

नई दिल्ली। पोर्न स्टार बनने के बाद हिंदी फिल्मों में धमाल मचाने वाली सनी लियोन एक बार फिर चर्चा में है. सनी लियोन का एक ऐसा बेकाबू होने वाला वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद आप भी खुद को रोक ना सकेंगे. इस वीडियो को बार-बार देखा जा रहा है. साथ ही फैंस इसे काफी पसंद कर रहे हैं.

सनी लियोन ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो में सनी लियोन पूरी मस्ती में डांस कर रही हैं. मस्त वाला उनका डांस देखकर लोग खूब तारीफ कर रहे हैं, हालांकि गाना भी उतना ही दिलचस्प है. वैसे इस पूरी वीडियो को देखने के लिए सनी लियोन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर देखा जा सकता है.

एनडीटीवी खबर के अनुसार सनी लियोन एक बनियान के विज्ञापन पर डांस कर रही है. ये विज्ञापन हैः ये लंबा टिकेगी. बनियान के इस विज्ञापन में अजय देवगन आते हैं, और वे कहते हैं ‘ये लंबा टिकेगी.’ लेकिन सनी लियोन ने बनिया के इस विज्ञापन पर बहुत ही क्यूट डांस किया है, और इसे खूब पसंद भी किया जा रहा है. वैसे सनी लियोन सिनेमा में अपनी इमेज को बदलने की जुगत में भी लगी हैं, और साउथ की फिल्म ‘वीरमा देवी’ में काम भी कर रही हैं.

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फरार माल्या को गिरफ्तार करने का आदेश

नई दिल्ली। देश के बाहर मौज काट रहे फरार शराब कारोबारी विजय माल्या को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया गया है. संभावना जताई जा रही है कि कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज होगी. पुलिस जल्द ही विजय माल्या तक पहुंचने की कोशिश करेगी.

जानकारी के मुताबिक मुंबई की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने बुधवार को फरार शराब कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ एक गैरजमानती वॉरेंट जारी कर विजय माल्या को गिरफ्तार करने के आदेश दिए. नेटवर्क 18 की खबर की मानें तो कोर्ट ने हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर किए गए चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किया है.

ईडी ने माल्या, उनकी कंपनियों किंगफ़िशर एयरलाइन (KFA) और यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग लिमिटेड (UBHL) और अन्य के खिलाफ प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत नया आरोप पत्र दायर किया है. इसी आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने बुधवार को माल्या के खिलाफ गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए. ईडी द्वारा दायर चार्जशीट में माल्या के खिलाफ करीब 6000 करोड़ रुपये की धोखधड़ी करने के आरोप लगाया गया है.

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पहले गैंगरेप फिर गर्भपात, पीड़िता मरी

प्रतिकात्मक फोटो

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में रेप को लेकर एक दिल को दहलाने वाली घटना सामने आई है. पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के बानरहाट इलाके में एक युवती ने गर्भपात के दौरान दम तोड़ दिया. मृतका के परिवार का कहना है कि चार माह पहले युवती के साथ रेप हुआ था. इसकी जानकारी पुलिस को दी गई थी लेकिन किसीने ध्यान नहीं दिया.

सूत्रों का कहना है कि परिवार वालों के दबाव के चलते उसका गर्भपात करवाया जा रहा था लेकिन इस दौरान उसकी मौत हो गई. चार माह पहले ही इस इलाके के कुछ दबंग युवकों ने युवती के साथ गैंगरेप किया. दबंगों ने परिवार को घटना की जानकारी पुलिस को न देने की धमकी दी जिस कारण परिवार गैंगरेप की लिखित शिकायत भी नहीं कर पाए. हालांकि परिवार का कहना है कि पुलिस को मौखिक रूप से घटना की जानकारी दे दी गई थी. लेकिन पुलिस की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई. घटना के बाद परिवार सदमा में है.

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‘भाजपा है आतंकी संगठन, हिंदूओं पर कर रही हमला’

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा सरकार पर करारा हमला किया है. ममता बनर्जी ने साफ तौर पर बताया कि भाजपा आंतकी संगठन है. भाजपा हिंदूओं को बांटने व मारने का काम कर रही है. इस बयान के बाद बीजेपी बौखला गई है.

उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “हम भाजपा की तरह आतंकी संगठन नहीं है. वे (भाजपा के नेता) न सिर्फ ईसाई, मुस्लिमों को लड़वा रहे हैं बल्कि हिंदुओं के बीच भी दरार डाल रहे हैं.” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भाजपा के नेता काफी घमंडी हो गये हैं. वह मुस्लिमों, ईसाइयों और सिखों को नापसंद करते हैं. इतना ही नहीं, वह हिंदुओं को बांट रहे हैं.

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर पक्ष-विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी भी जारी है. इससे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने ममता बनर्जी को मारने की धमकी थी. इसको लेकर श्री घोष पर केस दर्ज किया गया है.

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भाजपा अध्यक्ष पर केस, लाशें बिछाने की दी थी धमकी

नई दिल्ली। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पर केस दर्ज किया गया है. पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया है. पुलिस ने घोष के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143/186/188/506 के तहत केस दर्ज किया.

बता दें कि घोष ने मंगलवार को जलपाईगुड़ी में कथित तौर पर ऐसा भाषण दिया. इस दौरान श्री घोष ने कहा था कि हमने कोई बॉन्ड लिखकर नहीं दिया है कि जो हम पर हमला करेगा हम उसे मुफ्त में रसगुल्ले खिलाएंगे. उन्हें बम के बदले बम, गोली के बदले गोली से जवाब दिया जाएगा. लाशें बिछा देंगे. साथ ही कहा था कि मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि संभल कर रहें. किसी को नहीं पता के आने वाले तीन सालों में दीदी के साथ क्या होगा. या तो नबाना में होंगी या फिर कालीघाट में खाना बना रही होंगी.’

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लाइव ना हो पाया PM का योगा, PIB का यू-ट्यूब चैनल ब्लॉक

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का योग वीडियो लाइव ना हो सका. पीआईबी का यू-ट्यूब चैनल ब्लॉक होने के कारण ऐसा हुआ. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो का यू-ट्यूब चैनल ब्लॉक होने से किसी भी वीडियो को नहीं देख पाएंगे. इस वजह से इस चैनल पर विश्व योग दिवस के कार्यक्रमों का लाइव टेलिकास्ट भी नहीं किया जा सका.

मोदी सरकार की…

वीडियो पर क्लिक करने पर तकनीकी खराबी के चलते एरर मैसेज लिखा आ रहा है कि यह वीडियो प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो से संबंधित है. यह आपके देश में उपलब्ध नहीं है. खबरों के मुताबिक, पीआईबी का आधिकारिक यू-ट्यूब अकाउंट 16 जून से ब्लॉक है और इस वजह से पीआईबी के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है. गौर करने वाली बात यह है कि पीआईबी का यू-ट्यूब चैनल ऐसे समय पर ब्लॉक हुआ है जब केंद्र सरकार के मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार की चार सालों की उपलब्धियां जनता तक पहुंचा रही है.

पीआईबी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के पास 1.5 लाख सब्सक्राइबर मौजूद हैं. वह अब तक 3,500 से ज्यादा वीडियो शेयर कर चुका है. साल 2011 में यह चैनल शुरू किया गया था और इसे अब तक 14 मिलियन लोग देख चुके हैं. यू-ट्यूब की टीम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रही है.

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‘राइजिंग कश्मीर’ के संपादक के बेटे का लेख पढ़कर रो पड़ोगे

नई दिल्ली। 14 जून को श्रीनगर में ‘राइजिंग कश्मीर’ के प्रधान संपादक शुजात बुखारी की उनके कार्यालय के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बुखारी की हत्या के एक हफ्ते बाद ‘राइजिंग कश्मीर’ में 10वीं क्लास में पढ़ रहे उनके बेटे तहमीद शुजात बुखारी का लेख छपा है. लेख का शीर्षक है- “पापा सिद्धान्तों वाले इंसान थे”

अपने पिता को याद करते हुए तहमीद ने क्या लिखा है आप भी पढ़िए…

14 जून मेरे और मेरे परिवार के लिए एक भयानक दिन था. इस दिन मैंने अपने पिता के असमय मौत की क्षुब्ध करने वाली खबर सुनी. पीसीआर में बैठकर जब मैं श्रीनगर हॉस्पिटल पहुंचा तब मैंने किसी को कहते हुए सुना, “अब वह नहीं रहे.” जिस वक्त मैंने यह सुना मेरे पांव कांपने लगे लेकिन मैं अब भी सबकुछ सही होने की उम्मीद कर रहा था.

मेरे दिमाग में एक साथ हजारों विचार चल रहे थे. क्या पता वो अब भी ऑपरेशन थिएटर में हो? क्या पता वो भागते हुए मेरे पास आएंगे और मुझे गले लगा लेंगे. हालांकि उनका भाग्य घटित हो चुका था, उनकी आत्मा ने उनका साथ छोड़ दिया था. मुझे अबतक भी समझ नहीं आ रहा कि मेरे पिता जैसे सच्चे आदमी के साथ किसी ने ऐसा क्यों किया. उस वक्त हजारों लोगों ने पीसीआर के अंदर इक्ट्ठा होना शुरू कर दिया. दोस्तों, शुभचिंतकों और परिवारवालों के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी. मैं तब भी उदासी में था और अपना दर्द छिपाने का प्रयास कर रहा था जब हम अपने पैतृक गांव से अपने पिता के शव के साथ निकले.

जिस वक्त मैं एबुलेंस के अंदर रो रहा था मैं उस वक्त भी उम्मीद कर रहा था कि वे उठ खड़े होंगे और मुझे गले लगा लेंगे. पापा सिद्धान्तों वाले आदमी थे. यह बात मैं अच्छी तरह जानता हूं. मेरे पिता हजारों नफरत करने वाले लोगों से घिरे रहते थे, लेकिन उन्होंने कभी कटुता का एक शब्द उनके खिलाफ नहीं कहा.

वह एक विचारक थे लेकिन उनमें अहंकार का एक भी कण नहीं था.

वह ज्ञान, उदारता, महिमा एवं अन्य हजारों महान गुणों के प्रतीक थे. पापा अपने ऑफिस के लोगों से कर्मचारियों की तरह नहीं बल्कि अपने परिवार की तरह व्यवहार करते थे. उन्होंने अपने कर्मचारियों को बेहतरीन बनने के लिए प्रेरित किया. वह परोपकारी थे. 2014 में जब कश्मीर में बाढ़ आई तब उन्होंने घर पर वक्त बिताने के बजाए बाढ़ में फंसे हजारों असहाय लोगों की मदद की. पापा ने हमें कभी नहीं बताया कि उन्होंने कई परिवारों की सहायता की. वह एक ऐसे बेटे थे जिन्होंने अपने माता-पिता को अच्छे कर्म करके और सच्चाई के मार्ग पर ढृढ़ रहकर गर्व महसूस कराया.

उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शांति के लिए काम किया और इसी के लिए अपनी जान भी दे दी. उन्हें आशा थी कि एक दिन कश्मीर में मासूम लोगों को अपनी जान नहीं गवानी पड़ेगी. वे कश्मीरी भाषा के बारे में भावकु थे. उन्हें अपनी मातृ-भाषा से प्रेम था. कश्मीर के स्कूलों में 10वीं तक के बच्चों को कश्मीरी पढ़ाई जाए उनका ये बुहप्रतिक्षित सपना जून 2017 में पूरा हुआ. वह परोपकारी थे और भौतिकवादी वस्तुओं की उनमें कोई इच्छा नहीं थी. कश्मीर में शांति लाने के लिए उन्होंने कई संगठनों के साथ दुनिया के हर महाद्वीप में हजारों सम्मेलनों में भाग लिया.

1990 में सेना और आतंकवादियों की क्रॉसफायरिंग में उनके दो चचेरे भाईयों की मौत हो गई थी और अब कश्मीर की उथल-पुथल में हमारे परिवार का तीसरा सदस्या मारा गया है. उनकी असंख्य विरासत हैं. मुझे नहीं पता कि मैं कैसे उनकी उम्मीदों पर खरा उतर पाऊंगा. वो हमेशा चाहते थे कि मैं उनके पिता सैय्यद रफिउद्दीन बुखारी की तरह बनू, पवित्र एवं उदार.

कश्मीर की अंग्रेजी पत्रकारिता ने कई महान रिपोर्टर, संपादक और कुछ हीरो दिए, लेकिन शहीद कभी नहीं. अब इसने ये भी कर दिखाया है. मेरे पिता हमेशा निष्पक्ष रहे, यहां तक कि उन्होंने अपने भाई का भी पक्ष नहीं लिया जो कि राजनीति में हैं. हर चीज से उनका एक भावनात्मक रिश्ता था, शायद यहीं वजह है कि लोग उन्हें इतना प्यार करते थे. यह सरप्राइज करने वाली बात नहीं होनी चाहिए कि मात्र 10 सालों में ही ‘राइजिंग कश्मीर’ जम्मू-कश्मीर का सबसे प्रख्यात और प्यार किया जाने वाले अखबार बन गया.

अगर ईश्वर चाहता तो उनका निधन दो साल पहले हो जाता, जब उन्हें एक आघात लगा था, लेकिन उसने उनकी विदाई के लिए ईद जैसा पवित्र दिन चुना. इस क्रूर दुनिया में वह फिट नहीं थे. उनके जैसे पवित्र इंसान को ईश्वर अपने साथ चाहता है. ईश्वर उन्हें जन्नत में सर्वोच्च स्थान दे. उन्हें ईश्वर का सर्वोच्च आशीर्वाद मिले.

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भाजपा के साथ नीतीश ने नहीं किया योगा

नई दिल्ली। भारत के साथ पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है लेकिन वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व इनके पार्टी के बड़े नेता योग कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चलाने के बावजूद भी नीतीश कुमार का कार्यक्रम में शामिल ना होना कई सवाल खड़ा कर रहा है.

गुरूवार को पटना के पाटलिपुत्र स्टेडियम में आयोजित योग समारोह में जदयू के कोई मंत्री या नेता नहीं दिखे. भाजपा नेता और बिहार सरकार में मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा है कि सभी को योग करने की जरूरत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे जन-जन तक पहुंचाया है. इसमें सभी लोगों को साथ आने की जरूरत है.

इस कार्यक्रम में भाजपा की ओर से उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, राम कृपाल यादव व अन्य ने हिस्सा लिया लेकिन जदयू का कोई दिग्गज चेहना नजर नहीं आया. इस मामले पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह का कहना है, ‘योग घर के अंदर भी किया जाता है और इसे किसी के भाग लेने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘लोग अपने घरों में भी योगा करते हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने साथ-साथ हाजीपुर में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में एक साथ भाग लिया. बता दें क पिछले साल भी जदयू ने योग कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था.

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तो इसलिए जेसीबी से दुल्हन को ले गया दुल्हा

PC-facebook

नई दिल्ली। कुछ शादियां दुनिया भर के लिए चर्चा का विषय बन जाती है. हालांकि ऐसा कम ही होता है लेकिन फिलहाल हम आपको एक ऐसे शादी के बारे में बता रहे हैं जिसमें दुल्हा ने दुल्हन को जेसीबी से विदाई कराई. इसे देखकर लड़की व लड़का के घर वाले तो हैरान हुए हीं आसपास के लोग भी फोटो खिंचकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से खुद को रोक ना पाए. सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के अनुसार कर्नाटक के संतयार गाँव के चेतन व ममता की शादी जेसीबी के कारण चर्चा का विषय बनी हुई है. चेतन ने अपने पड़ोसी गाँव परपुंजा की ममता से बीते सोमवार को शादी की.

जेसीबी से विदाई का कारण

दुल्हा ने पहले से ही प्लानिंग कर रखी थी कि वह अपनी दुल्हन को जेसीबी से घर लेकर आएगा. हालांकि इसकी जानकारी किसीको नहीं थी. पहले तो ममता शर्म के मारे बैठने से मना की लेकिन चेतन के प्यार ने उसे जेसीबी पर बैठने के लिए राजी करा लिया.

बता दें कि दूल्हा जेसीबी ड्राइवर है तो उसने अपनी दुल्हन को डोली, घोड़ी या कार की बजाय जेसीबी से लाने का फैसला किया. शुरू में चेतन ने जेसीबी चलाई कुछ दूर दुल्हन अकेली जेसीबी में बैठी रही फिर चेतन के दोस्त ने जब ड्राइविंग उससे ले ली तो वो भी अपनी दुल्हन ममता के साथ जेसीबी में आकर बैठ गया. फिर दोनों ने मजे से घर तक सफर किया.

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सेल्फी लेने के दौरान महिला की मौत

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। सेल्फी की क्रेज ने एक और महिला की जिंदगी निगल ली. मृतक महिला दिल्ली की बताई जा रही है जो कि अपने परिवार के साथ महाराष्ट्र घूमने गई थी. वहां पर पहाड़ों में फोटो लेने के दौरान घटना घटी. इस घटना के बाद परिवार सदमा में है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिल्ली की एक महिला की महाराष्ट्र में 900 फीट की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई. महिला अपने पति व तीन बच्चों के साथ माथेरान घूमने गई. मंगलवार की शाम माथेरान में पति के साथ सेल्फी लेने के दौरान घटना घटी.

और अचानक तेज हवा ने…

मृतका का नाम महिला सरिता चौहान (35) ज्ञात हुआ है. दअरसल महिला शाम 6.15 पर लाउईसा प्वाइंट से सेल्फी ले रही थी. उसी दौरान वहां कोहरा और तेज हवाएं चल रही थी और अचानक उसका पैर फिसलने से 900 फीट गहरी खाई में गिर गई. जबकि उसके बच्चे वहीं पास में खेल रहे थे. पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से आठ घंटों के बाद महिला की शव खोज के निकाली. माथेरन पुलिस ने हादसे में मौत का मामला दर्ज कर लिया है.

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ठाकुरों ने दलितों को बंधक बनाकर पीटा, पूर्व मंत्री पुलिस पर भी हमला

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ। योगी राज में दलितों के अत्याचार की एक और घटना सामने आई है. दबंग ठाकुरों से बकाया मांगने पर दलितों की जमकर पिटाई की. इस घटना की जानकारी मिलने पर गई पुलिस पर भी हमला बोल दिया. यूपी के गाजीपुर के रेवतीपुर थाना क्षेत्र के नवली गांव में मंगलवार की रात बकाए के विवाद को लेकर दलित और राजपूतों में जमकर लाठी-डंडे चले, पथराव और हवाई फायरिंग भी हुई.

मामला इतना भड़क गया कि काबू पाना मुश्किल भरा हो गया था. स्थिति को संभालने के लिए कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी. लेकिन इससे पहले गुस्साई भीड़ ने डायल 100 पुलिस और रास्ते से गुजर रहे पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह की गाड़ी को भी तोड़ दिया. साथ ही दो दर्जन से अधिक गुमटियों/दुकानों में तोड़फोड़ की. गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है. एहतियात के तौर पर पुलिस व पीएसी के जवान तैनात हैं.

राइस मिल में ले जाकर…

पुलिस की जानकारी के अनुसार नवली इंटर कालेज के सामने दलित बस्ती के बब्लू (20) और राजू (25) पुत्र जवाहर राम की मोबाइल रिपेयरिंग और रिचार्ज की दुकान है. मंगलवार की देर शाम ग्राम प्रधान के बेटे रिचार्ज कराने उनकी दुकान पर पहुंचे. लेकिन पहले से ही बकाया के कारण दुकानदार ने उधार चुकता करने को कहा. इस बात से प्रधान का बेटा प्रदीप सिंह गुस्सा में आपा खो बैठा और अपने साथियों के साथ दुकानदार राजू और बब्लू की पिटाई कर दी. इसके बाद उनको उठाकर राइस मिल में ले जा कर बंद कर दिया.

इस बात से नाराज दलित बस्ती वाले दोनों बच्चों को बचाने के लिए राइस मिल जाकर छुड़ा लाए. इस पर प्रधान के परिवार के लोगों ने दलितों को घेरकर मारने लगे और हवाई फायरिंग शुरू कर दी. साथ ही कुछ लोगों ने आसपास की गुमटियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी.

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार मारपीट में एक पुलिस कर्मी के साथ ही जोखू राम (50), गोलू राम (17), राजू राम (25), खुशी राम (16), मन्नू राम (18), अशोक सिंह (40), रमाशंकर सिंह (65), संजय सिंह (27), प्रदीप सिंह (22) घायल हो गए. पुलिस सभी घायलों को पहले रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर यहां से जिला अस्पताल लाया गया. प्रधान के पति लालबहादुर सिंह ने 15 लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है. पुलिस अधीक्षक सोमेन वर्मा ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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