5 चुनावी राज्यों में 2 महीने के अंदर 30 रैलियां करेंगी मायावती

मायावती (फाइल फोटो)

लखनऊ। पांच चुनावी राज्यों (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना) में अपनी छाप छोड़ने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की चीफ मायावती हर जतन कर रही हैं. ऐसे में अगले दो महीने में मायावती इन चुनावी राज्यों में ताबड़तोड़ रैलियां करेंगी. पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती इन राज्यों में 30 रैलियां करेंगी. इन रैलियों की शुरुआत नवंबर से होगी और दिसंबर तक लगातार जारी रहेंगी, जब तक राजस्थान और तेलंगाना में मतदान नहीं हो जाते.

बीएसपी के एक नेता ने बताया कि 4 नंवबर को मायावती छत्तीसगढ़ पहुंचेंगी. यहां वह दो रैलियों को संबोधित करेंगी. दो रैलियों में से एक रैली अंबिकापुर में आयोजित की जाएगी. वहां से वापस आकर वह फिर से 16 नवंबर को यहां आएंगी और दो दिनों के अंदर नवागढ़, बिलाईगढ़, रायपुर और जांजगीर चम्पा में आयोजित चार रैलियों में हिस्सा लेंगी.

अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन

छत्तीसगढ़ चुनाव में मायावती की पार्टी बीएसपी का पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ है. यहां के जांजगीर चम्पा विधानसभा सीट से बीएसपी ने जोगी की बहू ऋचा को टिकट दिया है.

छत्तीसगढ़ के बाद मायावती राजस्थान की जनसभाओं को संबोधित करेंगी. राज्य में 7 दिसंबर को चुनाव होने हैं. उसके पहले मायावती पूरे प्रदेश में आठ बड़ी रैलियां करेंगी. मध्य प्रदेश में मायावती की 10-12 रैलियां प्रस्तावित हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित मिजोरम में बीएसपी अकेले चुनाव लड़ रही है.

तेलंगाना में बीएसपी ने 20-25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. यहां पर मायावती की पवन कल्याण की पार्टी जन सेना पार्टी से गठबंधन की बात चल रही है. मायावती का सारा जोर अभी छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश है इसलिए फिलहाल उन्होंने मिजोरम और तेलंगाना में कोई रैली तय नहीं है. हालांकि सूत्रों ने बताया कि पांचों राज्यों में उनकी 30 रैलियां प्रस्तावित हैं.

इन राज्यों में होने हैं चुनाव

चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ में दो चरणों में चुनाव कराने की घोषणा की है. इसके अलावा मध्य प्रदेश, मिजोरम, राजस्थान और तेलंगाना में एक चरण में ही चुनाव कराए जाएंगे. छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 18 सीटों पर 12 नवंबर को वोटिंग होगी. इसके बाद दूसरे चरण में 72 विधानसभा क्षेत्रों में 20 नवंबर को चुनाव होंगे.

आयोग ने मध्य प्रदेश और मिजोरम में एक ही चरण में 28 नवंबर को वोटिंग कराने का ऐलान किया है. राजस्थाना और तेलंगाना में सात दिसंबर को वोटिंग होगी. मतगणना 11 दिसंबर को होगी और उसी दिन परिणाम आ जाएंगे. चुनावों की घोषणा के साथ ही सभी 5 राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है.

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दलित साहित्य में पत्र-पत्रिकारिता

पत्राचार ही एक ऐसा साधन है, जो दूरस्थ व्यक्तियों को भावना की एक संगमभूमि पर ला खड़ा करता है और दोनों में आत्मीय सम्बन्ध स्थापित करता है. व्यावहारिक जीवन में पत्राचार वह सेतु है, जिससे मानवीय सम्बन्धों की परस्परता सिद्ध होती है. अतएव पत्राचार का बड़ा महत्व है. साहित्य में भी इनका उपयोग होने लगा है. जिस पत्र में जितनी स्वाभाविकता होगी, वह उतना ही प्रभावकारी होगा. पत्र लेखन के विविध रूप होते हैं… जैसे: सामाजिक, व्यावसायिक, शासकीय और प्रशासकीय आदि.  जैसे-जैसे भाषा का विकास हुआ, उसी के साथ पत्र लेखन का भी विकास होता गया. इस प्रकार यह माना जा सकता है की पत्र लेखन का इतिहास बहुत पुराना है. आज के युग में मोबाइल, इंटरनेट जैसे संचार के साधन होने के बावजूद भी पत्र लेखन का महत्व वैसे ही बना हुआ है. समय के साथ पत्र लेखन की कला में भी अनेक परिवर्तन आये हैं. ई-मेल भी इन्हीं परिवर्तनों में से एक है. उल्लेखनीय है कि पत्रिकारिता भी एक प्रकार का पत्र लेखन ही है. इसलिए पत्र लेखन को पत्रिकारिता से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

यथोक्त की आलोक में, दलित साहित्य में भी पत्र लेखन की महत्वपूर्ण भूमिका देखने को मिलती है. दलित लेखकों ने नाना प्रकार से पत्र लेखन की विधा को अपनाया है. पत्र-पत्रिकारिता के जरिए दलित लेखकों ने सामाजिक/ आर्थिक/ धार्मिक मुद्दों को आवाज देने का जो काम किया है वह उल्लेखनीय है. जब कभी राष्ट्रीय अखबारों मे दलित उत्पीडन/ नरसंहार या अन्य प्रकार की घटनाएं देश के किसी कोने मे घटित होती थीं तो कुछ लेखक अपनी प्रतिक्रिया टिप्पणी स्वरुप समाचार पत्रों में भेजते थे और उनके प्रतिक्रियात्मक पत्र पाठको के कालम मे प्रमुखता से छपते थे, जिन्हें मैं अपने कालेज छात्र जीवन अर्थात 1972 से ही पढ़ता चला आ रहा था. जिनमें हिमांशु राय/ एन.आर.सागर/ आनंद स्वरूप/ धनदेवी/ जसवंत सिंह जनमेजय/ राजपाल सिंह ‘राज’/ डा.सोहनपाल सुमनाक्षर/ इन्द्र सिंह धिगान/ आर.सी.विवेक/ डा.के.के.कुसुम/ शेखर पंवार आदि प्रमुख रहे थे. हिमांशु राय जी ने ‘भारतीय पत्र लेखक संघ’ भी बनाया था जिसकी बैठक अम्बेडकर भवन, नयी दिल्ली व आर.के.पुरम में स्थित निर्वाण बुध्द विहार/ रविदास टेम्पल पर तो कभी बोट क्लब पर हुआ करती थी. किंतु हिमांशु राय जी के निधन के बाद भारतीय पत्र लेखक संघ चल न सका. बाद के दिनों में  तेजपाल सिंह ‘तेज’ अपनी तीखी टिप्पणियों के लिए जाने-पहचाने जाने लगे| इतना ही नहीं उनके गद्य लेखन में भी उनकी गजलों/गीतों/कविताओं जैसा ही तेवर मौजूद पाया. उनकी लेखन शैली और तीक्षणता कुछ अलग ही दिखती है. ‘तेज’ ने प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च-शिक्षा का सवाल हो या हिन्दी को राजभाषा बनाने का सवाल या दलितों, पिछड़ों, महिलाओं के उत्थान के नाम पर सरकारी मशीनरी के रवैये पर  ईमानदारी से व्यंग्यात्मक रूप में बराबर सवाल उठाएं हैं.

1984 के बाद सभी उपरोक्त लेखक ‘भारतीय दलित साहित्य मंच दिल्ली’ (रजि.) से जुड़ गये और डा. राज के संगठनात्मक प्रयास से नये-नये कवि/लेखक जुड़ते रहे और दलित साहित्य आंदोलन अपना व्यापक आधार तैयार करता रहा जिसके संरक्षक बतौर आचार्य जनकवि बिहारी लाल हरित की भूमिका प्रमुख थी.

पत्रकारिता में डा.सोहनपाल सुमनाक्षर अपना ‘हिमायती’ पत्र स्वंय निकालते थे तो मोहनदास नैमिशराय ने अपने संपादकत्व में 1978 ‘बहुजन अधिकार’ अखबार निकलता था. बाद के दिनों में वे काशीराम साहब की बामसेफ यूनिट की अंग्रेजी पत्रिका The Oppressed India व हिंदी अखबार बहुजन संगठक से जुडे हुए थे, जिनमे हम स्वयं लेख व समाज हित कविताएं लिखा करते थे.  इधर ‘भीम भारती’  पाक्षिक अखबार भी हमारे द्वारा निकाला जाता था जिसके मुख्य संपादक प्रो. डा.एल.बी.राम अनंत व मैं स्वंय तथा प्रो. आर.डी.जाटव उप-संपादक रहे थे. उन्हीं दिनों ‘काला भारत’  पाक्षिक खजान सिंह गौतम के संपादन मे निकलता था. इसके बाद ‘ग्रीन सत्ता’ अखबार के संपादक/ उप संपादक खजान सिंह गौतम व तेजपाल सिंह ‘तेज’ रहे. डा. तेज सिंह के सम्पादकत्व में निकलने वाली ‘अपेक्षा’ काफी चर्चित रही.  ईशकुमार गंगानिया के प्रयासों से जून 2008 में ‘आजीवक विजन’ (मासिक व बाईलिंग्विल) नामक पत्रिका निकाली गई जिसके अपेक्षित लेखकीय और आर्थिक सहयोग न मिलने के कारण केवल पांच अंक ही प्रकाशित हो पाए. विदित हो कि तेजपाल सिंह ‘तेज’ इस पत्रिका के भी प्रधान संपादक रहे. इसी क्रम में  दलित  इंटेलेक्चुयल  फोरम  फार  ह्यूमन  राइट्स के अध्यक्ष परमजीत सिंह की प्रधानता में ‘अधिकार दर्पण’ नामक पत्रिका का मार्च 2012 में प्रकाशन आरम्भ किया गया जिसके संपादक तेजपाल सिंह ‘तेज’ व उपसंपादक ईश कुमार गंगानिया रहे. यद्यपि इस पत्रिका का प्रकाशन भी मार्च 2015 तक ही हो पाया तथापि मानवाधिकारों को उठाने वाली पत्रिका के रूप में खासा काम किया. आज और भी अनेक पत्र-पत्रिकाएं का प्रकाशन हो रहा है, लेकिन एक लेख में सबका उल्लेख करना संभव नहीं है. आने वाले दिनों में उनपर भी काम किया जाएगा.

इससे पूर्व 1976 में दिल्ली की एक मात्र त्रैमासिक पत्रिका ‘धम्म-दर्पण’ भारतीय बौध्द महासभा के मातहत प्रो. कैन के संपादन मे निकलती थी. महासभा का जो भी दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष होता था, वह इस पत्रिका का मुख्य संपादक तथा अन्य चार सदस्य संपादन मंडल में हुआ करते थे. जिसका वैचारिक केन्द्र डा. अम्बेडकर भवन, रानी झांसी रोड, नयी दिल्ली हुआ करता था. इसी स्थल से दिल्ली की सामाजिक, सांस्कृतिक व बौध्द आंदोलन की गतिविधियों का संचालन होता था. दलित सांसद मंत्रियों का आना-जाना निरन्तर लगा रहता था. वैसे भी अम्बेडकर भवन भूमि स्वयं बाबासाहब डा.अम्बेडकर ने ‘शैडयूल्ड कास्ट वेलफेयर एसोसिएशन’ के नाम से खरीद कर समाज को सौंप दी थी, जंहा से अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र बना करते थे, रोजगार कार्यालय व हायर सैकेंडरी स्कूल भी खुला जो आजतक चल रहा है. पत्रिका का संपादक कार्यालय,भारतीय बौद्ध महासभा का आफिस ही होता था जो अम्बेडकर भवन पर ही था. आज महासभा में आपसी गुटबाजी के कारण दो गुट हो गए फलत: धम्म-दर्पण अब मृतप्रायः है.

महासभा के फाड़ होने के कारण सी.एम.पीपल के संपादन मे ‘सधम्म दर्पण’ निकालने का 2017 में पुन: प्रयास हुआ जिसका पहला अंक अक्टूबर, 2017 – मार्च 2018 (संयुक्तांक) छपा. देखना यह है कि यह पत्रिका कब तक चलेगी. स्मरणीय है कि सी.एम.पीपल भारतीय बौध्द महासभा का नया रजिस्ट्रेशन दिल्ली से कराकर महासभा पर काबिज हो गए. पूर्व ‘धम्म-दर्पण’ में पाठकों के लेख, पत्र व प्रतिक्रियाएं  लगातार छपती थीं. पत्र लेखन की जो स्वस्थ परम्परा दलित साहित्य आंदोलन मे उभरी, उसका श्रेय बाबा डा.अम्बेडकर के पत्र-लेखन को जाता है. डा.अम्बेडकर की पत्र-पत्रकारिता से पढ़ा-लिखा समाज अधिक प्रभावित हुआ और सरकारी नौकरियों में रहते स्वयं ही पढ़े-लिखे लोग दलित लेखन मे उतरते गये और इस तरह दलित साहित्य आंदोलन खड़ा होता चला गया. पत्र लेखन में एक महत्वपूर्ण नाम का उल्लेख ना करना मेरे लिए एक बडा अपराध होगा… वह शीर्षस्थ नाम है रतनलाल कैन. पत्र लेखन व सरकार की किसी भी अप्रसांगिक कार्यशैली पर  टिप्पणी करने में रतन लाल कैन जो स्वयं दानिक्स अधिकारी रहे थे, आज भी लिखते-लिखाते रहते हैं. रतन लाल कैन भारतीय संविधान के मर्मज्ञ ही नही अपितु प्रख्यात आर.टी.आई.एक्टीविस्ट भी हैं. सभी सरकारों से जितना पत्र-व्यवहार भारत में रतन लाल कैन ने किया है, शायद ही किसी और ने किया हो. पत्र लेखन समझदार व जागरुक व्यक्ति ही कर सकता है अन्य कोई नहीं.

यद्यपि व्यक्तिगत पत्र लेखन की परम्परा आज दिन-प्रतिदिन अपना बजूद खोती जा रही है तथापि पत्रकारिता अपने चर्म पर हो रही है. पिछले वर्ष साहित्यकारों के आपसी पत्र-व्यवहारों का संपादन ” संवादों का सफर” डा.सुशीला टांकभोरे ने किया जो दलित साहित्य आंदोलन की दिशा और दशा समझने मे काफी महत्वपूर्ण कृति है. वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार मोहनदास नैमिशराय भी साहित्यकारों द्वारा किए गये आपसी पत्र व्यवहार का वृहत स्तर पर संपादन कार्य में जुटे हुए हैं. कहना अतिशयोक्ति न होगा कि दलित लेखकों में दिन प्रतिदिन पत्र-पत्रिकारिता के प्रति रुचि बलबती जा रही है और अब तो सोशल मीडिया के जरिए भी पत्रिकारिता भी अपने कदम जमाती जा रही है जो निसंदेह उत्साहवर्धक और प्रशंसनीय है.

डा.कुसुम वियोगी Read it also-सहारनपुर में फिर दलित-राजपूतों में विवाद, तीन युवकों की जमकर पिटाई

INDvsWI: भारत की उम्मीदों पर ‘शे हाप’ ने फेरा पानी, अंतिम गेंद पर मैच हुआ टाई

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भारत और वेस्टइंडीज के बीच विशाखापट्टनम वनडे टाई पर खत्म हुआ. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 50 ओवर में 321 रन बनाए. लक्ष्य का पीछा करने उतरी विंडीज की टीम एक समय आसानी से जीत हासिल करती दिख रही थी. हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने वापसी तो की लेकिन वो मैच जीत नहीं सके. आखिरी गेंद पर शे होप ने उमेश यादव की गेंद पर चौका लगाकर अपनी टीम को हार से बचा लिया. शे होप ने नाबाद 123 रनों की पारी खेली. हेटमायर ने भी 94 रन बनाए. सीरीज में भारत अब भी 1-0 से आगे है.

मैच ऐसे हुआ टाई

आखिरी ओवर में वेस्टइंडीज को 14 रनों की दरकार थी. उमेश यादव की पहली गेंद पर शे होप सिर्फ एक रन बना पाए. दूसरी गेंद पर एश्ले नर्स के पैड पर लगकर गेंद बाउंड्री पार चली गई. वेस्टइंडीज को 4 रन मिले. तीसरी गेंद पर नर्स ने दो रन लिए. आखिरी तीन गेंदों पर विंडीज को 7 रनों की जरूरत थी. इसके बाद चौथी गेंद पर नर्स आउट हो गए. आखिरी दो गेंदों पर विंडीज टीम को 6 रन की दरकार थी. शे होप ने पांचवीं गेंद पर दो रन बटोरे. आखिरी गेंद पर विंडीज टीम को जीत के लिए 5 रन चाहिए थे. वो 5 रन तो नहीं बना सके लेकिन आखिरी गेंद पर उन्होंने चौका लगाकर मैच टाई करा दिया.

वेस्टइंडीज के लिए शाई होप ने 134 गेंदों में 10 चौके और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 123 रन बनाए. उनके अलावा शेमरोन हेटमायेर ने 94 रनों की पारी खेली. उन्होंने 64 गेंदों की अपनी पारी में चार चौके और सात छक्के लगाए. इससे पहले, भारत के लिए कप्तान विराट कोहली ने सबसे ज्यादा नाबाद 157 रन बनाए. अंबाती रायडू ने 73 रनों की पारी खेली. कोहली ने वनडे में 37वां शतक जड़ा. इसी के साथ वह वनडे में सबसे तेजी से 10,000 रन बनाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं.

कोहली ने अपनी पारी में 130 गेंदों का सामना किया और 13 चौकों के अलावा चार छक्के लगाए. रायडू ने 80 गेंदों की पारी में आठ चौके मारे. इन दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 139 रनों की साझेदारी की. विंडीज के लिए एशले नर्स और ओबेड मैक्कोय ने दो-दो विकेट अपने नाम किए. कीमार रोच और मार्लन सैमुएल्स को एक-एक सफलता मिली.

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पहले चरण के चुनाव में जीत के लिए बसपा ने कसी कमर

छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़विधानसभा के पहले चरण के लिए राजनीतिक पार्टियों पूरी तरह से चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हो गई हैं. इस बार बसपा भी अपने दम-खम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी में है. पहले चरण में बसपा के गठबंधन को बंटवारे से मिली 33 सीटों में से 6 सीटों पर अपनी किस्मत अजमा रही है, जिसमें से 4 बस्तर संभाग और 2 राजनांदगांव जिले की सीटों पर बसपा ताल ठोक रही है.

पहले चरण के अलावा दूसरे चरण के लिए बसपा ने 14 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. और शेष बची सीटों पर बसपा सुप्रीमों मायावती और गठबंधन के साथ मंथन करके जल्द घोषणा करेगी. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ओपी बाजपेयी का कहना है कि इस बार बसपा को पिछले चुनावों की अपेक्षा ज्यादा सीटें मिलेंगी. इसके लिए बसपा पूरा जोर लगा रही है.

सूबे में गठबंधन की ताकत को मजबूत करने के लिए फायरब्रांड नेता अजीत जोगी लगातार बस्तर का दौरा कर रहे हैं. बस्तर संभाग की सभी 12 सीटों पर अपना तूफानी दौरा करके गठबंधन के पक्ष में प्रचार करने की कमान अपने हाथों में ले ली है. पहले चरण के चुनाव के लिए जोगी ने भी अपनी कमर कस ली है. बहरहाल चुनावी समर में राजनीतिक दल अपनी जीत के लिए चुनावी मैदान में पसीना खूब पसीना बहा रहे हैं, लेकिन यह तो जनता ही तय करेगी कि कौन सा दल उनके लिए कितना पसीना बहाया है.

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1500 लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म, ज्यादातर दलित, एक मुस्लिम

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मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी में बुधवार को सैकड़ों लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया. इस आयोजन में छह हजार लोगों ने हिस्सा लिया. सुभारती यूनिवर्सिटी के मालिक डॉक्टर अतुल कृष्ण ने जहां इसे अहिंसा और प्रेम के संदेश देने के मसकद से उठाया गया कदम बताया. वहीं बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने आए कई लोगों ने इसको दलित हिंसा में हुए उत्पीड़न से जोड़ा. उनका कहना था कि दलितों पर हुए अत्याचार खासकर दो अप्रैल की हिंसा से वह परेशान हैं. बौध विद्वान डॉक्टर चंन्द्रकीर्ति भंते का कहना है कि लोगों ने स्वेच्छा से बौध धर्म की दीक्षा ली है. जातिविहीन समाज की स्थापना की कोशिश सरकार को करनी चाहिए.

दरअसल, सुभारती यूनिवर्सिटी के बौद्ध उपवन में बुधवार मेरठ और आसपास के जिलों से सैकड़ों लोग पहुंचे. हिंदू धर्म से ताल्लुक रखने वाले इन लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. सुभारती यूनिवर्सिटी के सर्वेसर्वा डॉक्टर अतुल कृष्ण ने कई महीने पहले धर्मांतरण का यह अभियान छेड़ा था. आज डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बौद्ध धम्म दीक्षा कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी में हिंदू धर्म से अलग होकर डॉक्टर अतुल कृष्ण और उनके परिवार की अगुवाई में बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया.

आयोजकों का दावा है कि यह एक अराजनीतिक आयोजन था और लोगों ने स्वेच्छा से बौद्ध धर्म स्वीकार किया. सुभारती की मीडिया टीम के सदस्य अनम कान शेरवानी ने बताया कि कुल छह हजार लोगों ने प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिसमें से 1500 से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. अतुल कृष्ण का कहना है कि बौद्ध धर्म अनत्व, मैत्री, भाईचारे, करूणा प्रेम का है, यहां भेदभाव नहीं होता. इसमें इंसान का इंसान के प्रति प्रेम पर महत्व दिया गया है. उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने परिवार के साथ इस धर्म को अपनाया है. करीब 1500 और लोगों इसे अपनाने वाले शामिल रहे हैं. देश और समाज की एकता के लिए इस धर्म को अपनाया जाना चाहिए.’

बौद्ध धर्म अपनाने वाले एक बुजुर्ग मामराज ने कहा, ‘हम स्वेच्छा से धर्म बदल रहे हैं. हम दलित हैं. दो अप्रैल को हमारे समाज के लोगों के खिलाफ झूठे मुकदमे लिखकर जेल भेजा गया. उत्पीड़न किया गया.’ वहीं एक अन्य व्यक्ति रमेश का कहना था, ‘समाज में हमें हीन भावना से देखा जाता था. चंद साल पहले हमारे समाज के लोगों ने सिख धर्म स्वीकार कर लिया था. तब हर कोई सम्मान से सरदार जी कहकर पुकारता था. नहीं तो जातिवादी मानसिकता रखते हैं.’ बाकी लोगों के साथ मुजफ्फरनगर जिला निवासी सरदार अली ने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली है.

धर्मांतरण अनुष्ठान का नेतृत्व कर रहे बौध विद्वान डॉ चंन्द्रकीर्ति ने कहा कि हालंकि इस आयोजन में लोग स्वेच्छा से शामिल हुए. लेकिन पिछले दिनों अनुसूचित जाति के लोगों पर हुए अत्याचार का असर भी धर्मांतरण के तौर पर दिखा है. उनका मानना है कि इतनी बड़ी तादात में हिंदुओं के धर्मांतरण के बाद सरकार पर भी इसका असर पड़ेगा और सरकार सोचने को मजबूर होगी. देश को विकसित करने के लिए सरकार और रातनीतिज्ञों को जातिविहीन समाज की स्थापना करनी चाहिए. विदेशों में नस्लभेद आदि कम हुआ है, कुछ जगह मिट गया है, ऐसे आयोजन से भारत में भी भेदभाव की स्थित में कमी आएगी.

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DU: पाठ्यक्रम से ‘दलित’ शब्द हटा, पीजी कोर्स से कांचा इलैया की किताबों को भी किया बाहर

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षिक मामलों को देखने वाली स्थाई समिति (स्टैंडिंग कमेटी)की कांउन्सिल हॉल में बुधवार को बैठक हुई. इस बैठक में स्नाकोत्तर पाठ्यक्रमों में यूजीसी के निर्देशों को स्वीकार करते हुए चयन आधारित क्रेडिट पद्धति (सीबीसीएस)के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करके इसे स्टैंडिंग कमेटी के बाद एकेडेमिक कांउन्सिल में पास करने के बाद ही लागू किया जा सकता है. आज की बैठक में विभिन्न विभागों में स्नाकोत्तर स्तर पर पढ़ाए जाने लगभग 9 विषयों को पास किया गया.

स्टैंडिंग कमेटी ऑन एकेडेमिक मेटर की मीटिंग में बुधवार को स्नातकोत्तर (एमए)के जिन विषयों पर चर्चा की गई, उनमें विषयों में अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, आधुनिक भारतीय भाषा और साहित्यिक अध्ययन, लायब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस, बुद्धिस्ट स्ट्रडिज हिस्ट्री, एलएलबी, एलएलएम आदि विषयों पर चर्चा करने के बाद ही पाठ्यक्रम को पास किया गया.

दरअसल सबसे ज्यादा बहस राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम को लेकर हुई. इसमें लेखक कांचा इलैया की तीन किताबें लगी हुईं थीं. लेकिन पिछले दिनों इन पर गम्भीर आरोप लगने की वजह से इनकी पुस्तकों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया. इन पुस्तकों में व्हाय आई एम नॉट ए हिन्दू, पोस्ट हिन्दू इंडिया को रीडिंग मैटीरियल (संदर्भ ग्रन्थ सूची) से हटा दिया गया है.

वहीं, बैठक में कई नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों पर विचार किया गया.जिन पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई. अंग्रेजी विभाग का एक अपनी तरह का नवीनतम पाठ्यक्रम ‘विकलांगता अध्ययन एवं इसका साहित्यिक निरूपण’ (डिसेब्लड स्टडीज एंड लिटरेरी रिप्रजेंटेशन) को स्वीकृति प्रदान की गई.

प्रो.सुमन ने कहा कि इस पाठ्यक्रम में लुई ब्रेल और हेलेन केलर जैसे विकलांगता के आधार स्तम्भों के विचारों को भी शामिल किया जाना चाहिए. स्वतंत्रता उपरांत विकलांग व्यक्रियों, विशेषत: दृष्टिबाधित व्यक्तियों की उपलब्धियों को भी इसमें शामिल किया जाए.

पाठ्यक्रम को और उपयोगी एवं व्यवसायों उन्मुखी बनाने के लिए इसमें परियोजना कार्य (प्रोजेक्ट वर्क) भी सम्मिलित किया जाना चाहिए. आने वाले समय में यह पाठ्यक्रम कैरियर की दृष्टि से उपयोगी सिद्ध होगा, इसलिए छात्रों को इंटर्नशिप भी कराएं, जिसे कमेटी ने स्वीकार कर लिया.

राष्ट्रवाद से सम्बंधित पाठ्यक्रमों पर सुझाव देते हुए प्रो. सुमन ने ऐसे पाठ्यक्रमों में गांधी और अम्बेडकर के विचारों को विशेष स्थान देने की बात की. उन्होंने शिक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीक जैसे की ऑडियो-विजुअल लैब की स्थापना पर भी जोर दिया.

स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने राजनीति विज्ञान विभाग के पाठ्यक्रम में दलित बहुजन पॉलिटिकल थॉट में दलित शब्द पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि पिछले दिनों दलित शब्द के प्रयोग को लेकर कई राज्यों में प्रतिबंध लगा दिया गया है. इसलिए इस शब्द को पाठ्यक्रम से तुरंत हटाया जाए.

कमेटी चेयरमैन और विभाग शिक्षकों ने अपने पाठ्यक्रम से दलित शब्द हटाने को स्वीकार कर लिया है और कहा कि अब इस शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा. साथ ही दलित बहुजन क्रिटिक से भी दलित शब्द हटा दिया गया. इसके साथ ही मॉडर्न थिंकर इकाई में अंबेडकर को भी जोड़ लिया गया.

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नगर निकाय चुनाव में बसपा ने खेला अल्पसंख्यक कार्ड, 14 को दिए टिकट

देहरादून।  निकाय चुनाव में बसपा ने अल्पसंख्यक कार्ड खेला है. प्रदेश में सक्रिय राजनीतिक दलों में अल्पसंख्यकों को सबसे ज्यादा टिकट बसपा की ओर से दिये गये हैं. बसपा ने मैदान से लेकर पहाड़ तक अल्पसंख्यकों पर भरोसा जताया है.

प्रदेश में 84 नगर निकायों में चुनाव हो रहे हैं. बसपा की ओर से नगर निगम मेयर के साथ ही नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष की 45 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किये गये हैं. बसपा ने 45 में से 14 टिकट अल्पसंख्यकों को दिये हैं. खास बात यह है कि मैदानी जिलाें के निकायों के अलावा बसपा ने पर्वतीय जिलों के कईं निकायों में भी अल्पसंख्यक उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है. इन निकायों में जीत के लिए बसपा को दलित-मुस्लिम गठजोड़ को सहारा है.

हालांकि बसपा के प्रदेश पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय समीकरणों के लिहाज से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को टिकट दिये हैं. कांग्रेस की ओर से 9 सीटों पर अल्पसंख्यक प्रत्याशी उतारे गये हैं. वहीं भाजपा ने दो अल्पसंख्यकों को टिकट दिये हैं. भाजपा ने यह दोनों टिकट हरिद्वार जिले के निकाय मंगलौर और पिरान कलियर में दिये हैं.

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शिवपाल यादव की पार्टी को मिला नया नाम, चुनाव आयोग में पंजीकृत

लखनऊ। सपा से अलग होकर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी का चुनाव आयोग में पंजीयन हो गया है और उसे ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ नाम मिला है. शिवपाल ने यहां आयोजित मोर्चा के एक कार्यक्रम में कहा ‘‘हमारी पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो गया है. अब हमारी पार्टी का नाम प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया होगा.”जसवंतनगर सीट से अब भी सपा के विधायक शिवपाल ने सपा से अलग होने के कारणों का जिक्र करते हुए किसी का नाम लिये बगैर कहा कि वह हमेशा सपा में एकजुटता चाहते थे, लेकिन कुछ ‘चुगलखोरों और चापलूसों’ की वजह से उन्हें मजबूरन पार्टी से किनारा करना पड़ा.

उन्होंने कहा ‘‘हम तो हमेशा से परिवार और पार्टी में एकता चाहते थे. हमने लम्बे समय तक इंतजार किया लेकिन ना तो मुझे और ना ही नेताजी (सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव) को उचित सम्मान मिला. हमें तो धकेल कर निकाल दिया गया.‘‘ शिवपाल ने अपने समर्थकों से कहा ‘‘मैं आप सबसे कहता हूं कि चापलूसी ना करें. अगर कहीं कुछ गलत हो रहा है तो उसके बारे में बताने के लिये आप स्वतंत्र हैं. मैं अपनी पार्टी को यह आजादी दूंगा.‘‘ मालूम हो कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सपा अध्यक्ष बनने के बाद हाशिये पर पहुंचे शिवपाल ने ‘उपेक्षा’ से नाराज होकर पिछली 29 अगस्त को समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का गठन किया था. उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का एलान किया था.

लखनऊ छावनी विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर पिछला चुनाव लड़ चुकी मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने पिछले दिनों शिवपाल के साथ मंच साझा करते हुए कहा था कि वह ‘चाचा‘ के साथ हैं. व्यापक जनसमर्थन मिलने का दावा करने वाले शिवपाल ने कहा कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश, दोनों ही जगह जनविरोधी सरकार है. उनकी गलत नीतियों और फैसलों से जनता परेशान है. नोटबंदी और जीएसटी ने व्यापारियों के साथ-साथ पूरी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है.

उन्होंने कहा कि भाजपा ने जनता से किये गये वादे पूरे नहीं किये हैं. अवाम उसे चुनाव में जवाब देगी. कार्यक्रम में पूर्व मंत्री शारदा प्रताप शुक्ला ने शिवपाल का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में बड़ी सियासी ताकत बनेगी.

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मायावती आज भी दलितों की सबसे बड़ी नेता, 2019 के लिए होगा गठबंधन : जिग्नेश मेवाणी

नई दल्ली। गुजरात के फायरब्रांड दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का कहना है कि देश में आज भी दलितों की सबसे बड़ी नेता मायावती ही हैं. 2019 के चुनाव में बीएसपी को लेकर उन्हें बहुत उम्मीदें हैं. चुनाव से पहले गठबंधन होगा. इसे कोई रोक नहीं सकता. मेवाणी मानते हैं कि भाजपा, संघ देश के संविधान पर संकट हैं.

मध्यप्रदेश में चुनाव अभियान शुरू कर चुके मेवाणी ने न्यूज 18 से खास बातचीत में कहा कि पूरे देशभर में दलित चेतना की शुरुआत हो चुकी है. जगह-जगह आंदोलन हो रहे हैं. ये भविष्य की तस्वीरें हैं. आज़ादी के बाद पहली बार दलितों में एक किस्म का अंडर करंट दिख रहा है. ये एक नया बदलाव लेकर आएगा.

मेवाणी दावा करते हैं कि आने वाले 10 साल में दलित समाज पूरी तरह से भाजपा से दूर हो जाएगा. हम इस पर काम कर रहे हैं. एट्रोसिटी एक्ट पर हुए संशोधन का कोई असर दलित समाज पर नहीं है. भाजपा भले ही उन्हें इस एक्ट के माध्यम से लुभाने का प्रयास कर रही है लेकिन इसका कोई असर 2019 के चुनाव पर नहीं होगा. इसका कारण है भाजपा के शासन में दलितों पर जितने जु़ल्म हुए हैं, उन्हें बांटने की कोशिश की गई है. ये सब बातें उनके ख़िलाफ जा रही हैं.

2019 के चुनाव और राजनीतिक हालातों पर मेवाणी कहते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बसपा अपने फैसले को फिर बदलेगी. महागठबंधन होगा. आज भी जो चुनावी ताकत उनके पास है, दलितों वोट ट्रांसफर करने का जो पावर उनके पास है वो बहुत अहम भूमिका अदा करेगा. यह खुलकर स्वीकार करने वाली बात है कि आज भी दलितों के पास बहुत कम विकल्प हैं. और वे फिर घूमकर बसपा तक ही पहुंचते हैं.

जिग्नेश मेवाणी मानते हैं कि बसपा सुप्रीमो इस बात को समझती हैं और वो जानती हैं कि उन्हें वक्त के साथ बदलना होगा, वरना बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. इस सवाल पर कि देश भर में दलितों के आंदोलन हो रहे हैं कई नेता उभर रहे हैं लेकिन देश के सारे दलित नेता एक मंच पर क्यों नहीं दिखाई देते? इस पर वे कहते हैं कि ये आंदोलन कई लोगों और नेताओं का हो चुका है. सबके अपने-अपने व्यक्तिगत अहंकार हैं. जिसे कथित तौर पर सैद्धांतिक लड़ाई बताया जा रहा है. हर कोई यह जताने का प्रयास भी कर रहा है कि वो बाबा साहेब का सच्चा उत्तराधिकारी है.

जिग्नेश मेवाणी राजस्थान की ही तरह मध्यप्रदेश में भी अपना कैंपेन शुरू कर रहे हैं. उनका कहना है राजस्थान में भाजपा के खिलाफ 23 हज़ार से ज़्यादा दलितों ने झंडा उठा लिया है और वो भाजपा को वोट ना देने की बात कर रहे हैं. यही ताकत हम मध्यप्रदेश में पैदा कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य 50 हजार दलितों को एकजुट करने का है. ये सोशल मीडिया का ज़माना है और इसने देश के तमाम दलित युवाओं को आव्हान करते हुए एकजुट कर दिया है. मेवाणी कहते हैं कि उनका कैंपेन भाजपा-संघ जैसी फासीवादी ताकतों के ख़िलाफ है. वो कांग्रेस के लिए नहीं दलितों, दबे हुए वर्ग के लिए अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं.

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जोगी व मायावती की शहर में 4 को चुनावी सभा

अंबिकापुर| विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के नेता पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 4 नवंबर को यहां एक साथ चुनावी सभा को संबोधित करेंगे. कलाकेंद्र ग्राउंड में सभा के लिए अनुमति मांगी गई है. यहां अनुमति नहीं मिलने पर पीजी काॅलेज ग्राउंड में सभा होगी. पार्टी नेताओं के अनुसार जोगी और मायावती अलग-अलग हेलीकाॅप्टर से यहां आ रहे हैं. जोगी कांग्रेस ने सरगुजा सहित सूरजपुर व बलरामपुर जिले की आठ में से पांच सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है जबकि अंबिकापुर, लुंड्रा व सामरी में अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं. तीनों सीटें गठबंधन में बीएसपी को दी गई हैं.

सीतापुर में मुन्ना टोपो की जगह सेतराम बड़ा पर दांव: जोगी कांग्रेस ने सरगुजा जिले की सीतापुर विधानसभा सीट पर अपने घोषित प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य मुन्ना टोप्पो को बदल दिया है. तीन दिन पहले ही प्रत्याशी की घोषणा हुई थी. मुन्ना टोप्पो की जगह मैनपाट क्षेत्र के कोटछाल पंचायत के उप सरपंच सेतराम बड़ा को प्रत्याशी बनाया गया है.

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“मैं गुजरात आया हूँ”

न्यू इंडिया की भयावह तस्वीर देखने आया हूँ, उत्तर भारतीयों के लिए बन रहा दूसरा कश्मीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… सुना है मराठियों के बाद, गुजरातियों ने भी स्वतंत्र भारत के एक स्वतंत्र राज्य पर अपना दावा ठोंक दिया है, मैं तुम्हारी वही कथित जागीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… हमेशा से सुनता आया था कि बहुत मीठे होते हैं गुजराती, लेकिन मैं उनकी यह नई कड़वी तासीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… जो लक्ष्मण रेखा तुमने हम यू०पी०-बिहारियों के लिए गुजरात की बाहरी सीमा पर खींच रखी है, लाओ दिखाओ मुझे भी, मैं वो लकीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… एक ज़माने में अंहिसा का पुजारी एक फ़कीर पैदा हुआ था यहाँ, अब वो अहिंसा रूपी गाँधी तो बचा नहीं गुजरात में, मैं तो बस अब उनकी अश्क बहाती तस्वीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… देश की सीमा पर लड़ने वाले, खेतों में हल चलाने वाले और मजबूरी में यहाँ रहकर अपना पेट पालने वाले हम लोगों को तुम जो मार भगा रहे हो, लाओ दिखाओं मुझे गुजरातियों, तुम्हारी बपौती में ये गुजरात कहाँ लिखा है ? मैं वो तहरीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 कि जो तुम धज्जियाँ उड़ा रहे हो, अखंड भारत को खंड-खंड जो तुम बना रहे हो, कानून को अपने हाथों का खिलौना बनाए तुम गुजरातियों की भारतीय संविधान से हो रही हिंसक तकरीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… हमारे मेहनतकश मजदूरों और मजबूरों के जिस्मों को छलनी कर रही हैं जो तुम्हारी तलवारें, कितनी धार है उसमें, ज़रा दिखाओ मुझे भी, मैं वो पूँजीवादी शमशीर देखने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… तुम्हारे शोषण और अत्याचार के दमन चक्र की बेड़ियों में जो जकड़े रहें हैं हमारे लोग, इंतेहा हो गई है अब तुम्हारे ज़ुल्म की, इसलिए मैं वो जंज़ीर तोड़ने आया हूँ, मैं गुजरात आया हूँ… प्रतीक सत्यार्थ Read it also-हिंदी दलित साहित्य का धारावी केन्द्र शाहदरा-दिल्ली

कुशवाहा का भाजपा पर हमला, ‘चंद्रशेखर’ ‘देवगौड़ा’ ‘गुजराल’ प्रधानमंत्री बने…तो मायावती क्यों नहीं

यूपी के महोबा जिले में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आर एस कुशवाहा ने शहर के गुलाब पैलेस में बसपा के सेक्टर और बूथ कमेटी की बैठक समीक्षा की. एक घंटे तक चली समीक्षा के दौरान बूथस्तर के कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव में टीम बनाकर जुटें. बिना नाम लिए भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमारी लड़ाई एक ताकतवर से है. पता नहीं, वह कौन सा जुमला लेकर लोकसभा चुनाव में आए जाएं. इसलिए हमें होशियार रहने की जरूरत है. कहा कि भाजपा ने किसानों को कर्जमाफी के नाम पर धोखा दिया है. प्रदेश अध्यक्ष गुलाब पैलेस में बसपा के विशाल कार्यकर्ता सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर, देवगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल के पास थोड़े सांसद होने के बाद भी वह देश के प्रधानमंत्री बने तो मायावती देश की प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकती.

पूर्व राज्यमंत्री एवं बुंदेलखंड प्रभारी जीसी दिनकर ने कहा कि कुछ दल हिंदू-मुस्लिम भाइयों को लड़ाकर राजनैतिक रोटियां सेकने का काम कर रही है जबकि मायावती ने सभी जातियों का आपसी भाईचारा बनाने का काम किया है.

IGNOU से करना चाहते हैं B.Ed तो 15 नवंबर तक भरें फॉर्म

IGNOU B.Ed 2018: इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी(इग्नू) ने जनवरी 2019 सेशन के दो वर्षीय बीएड प्रोग्राम के लिए आवेदन मंगाए हैं. आवेदन इग्नू की ऑफिशियल वेबसाइट ignou.ac.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. इग्नू के इस पाठ्यक्रम में एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से एडमिशन होगा. ये एंट्रेंस टेस्ट दिसंबर महीने में आयोजित किया जाएगा. बीएड पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आप 15 नवंबर तक अप्लाई कर सकते हैं.

योग्यता

आवेदक को साइंस/सोशल साइंस/कॉमर्स/आर्ट्स में 50 फीसदी अंकों को साथ बैचलर्स या मास्टर्स डिग्री होना जरूरी है. साइंस या मैथ्स के स्पेशलाइजेशन के साथ बीटेक किए हुए उम्मीदवारों के लिए 55 फीसदी अंक निर्धारित किए गए हैं. इसके अलवा प्राथमिक शिक्षण के लिए प्रशिक्षण प्राप्त और एनसीटीई से अधिकृत संस्थान से शिक्षक शिक्षण कार्यक्रम पूरा किए हुए उम्मीदवार भी अप्लाई कर सकते हैं.

इन्हें मिलेगी छूट

केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक एससी, एसटी, ओबीसी(नॉन क्रिमी लेयर) और दिव्यांग उम्मीदवारों को न्यूनतम शैक्षिक योग्यता में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक कश्मीरी माइग्रेंट्स और युद्ध विधवाओं को इसमें आरक्षण दिया जाएगा. आवेदन यूविरव्सिटी के पोर्टल पर केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे.

बता दें इग्नू का बीएड प्रोग्राम एनसीटीई(नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) द्वारा संचालित किया जाता है. ये पाठ्यक्रम हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों से आयोजित होता है. इग्नू के ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक इग्नू से बीएड करने की फीस 50 हजार रुपए निर्धारित किया गया है.

ऐसे करें IGNOU B.Ed 2018 के लिए अप्लाई

इसके लिए आपको ऑनलाइन माध्यम से ही अप्लाई करना होगा. ऑनलाइन अप्लाई करने के लिए इग्नू के ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिशन टैब onlineadmission.ignou.ac.in/admission पर जाएं.

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विराट-रोहित के आतिशी शतकों से भारत की जीत आसान

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गुवाहाटी। रोहित शर्मा के नाबाद 152 रन और कप्तान विराट कोहली की 140 रन की पारी की मदद से भारत ने कठिन लक्ष्य का पीछा करते हुए पहले एक दिवसीय क्रिकेट मैच में वेस्ट इंडीज को आठ विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 1-0 से बढत बना ली.

वेस्ट इंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए शिमरोन हेटमायेर की 106 रन की पारी की मदद से आठ विकेट पर 322 रन बनाये थे . जवाब में रोहित और विराट ने इस कठिन लक्ष्य को भी एकदम आसान बनाते हुए भारत को 47 गेंद बाकी रहते ही जीत दिला दी . रोहित ने 43वें ओवर की पहली गेंद पर चंद्रपाल हेमराज को छक्का लगाकर भारत को 326 रन तक पहुंचाया .

गुवाहाटी के नये बारसपारा क्रिकेट स्टेडियम पर भारत की यह पहली वनडे जीत है. वनडे क्रिकेट में यह तीसरी बार हुआ है जब किन्हीं दो भारतीय बल्लेबाजों ने 140 के पार का स्कोर बनाया है. रोहित 117 गेंद में 15 चौकों और आठ छक्कों की मदद से 152 रन बनाकर नाबाद रहे. वहीं विराट ने अपना बेहतरीन फॉर्म बरकरार रखते हुए 107 गेंद में 140 रन बनाए जिसमें 21 चौके और दो छक्के शामिल थे. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 246 रन की साझेदारी की. कोहली का यह 36वां वनडे शतक है जबकि रोहित का 20वां शतक है. दोनों के बीच 15वीं बार शतकीय साझेदारी हुई है जिसमें पांचवीं बार 200 से अधिक रन बने. कोहली को अब एक दिवसीय क्रिकेट में 10000 रन का आंकड़ा छूने के लिए सिर्फ 81 रन की जरूरत है.

कोहली ने इसके साथ ही एक कैलेंडर वर्ष में 2000 अंतरराष्ट्रीय रन भी पूरे कर लिए. उन्होंने सचिन तेंदुलकर के लगातार तीन साल 2000 से अधिक रन बनाने के रेकॉर्ड की बराबरी भी की. कोहली लेग स्पिनर देवेंद्र बिशू की गेंद पर स्टम्प आउट हुए जिसके बाद रोहित ने अंबाती रायुडू (22) के साथ मिलकर भारत को जीत तक पहुंचाया.

भारत ने पहला विकेट दूसरे ओवर में 10 रन पर ही गंवा दिया था जब सलामी बल्लेबाज शिखर धवन (4) को थॉमस ने बोल्ड किया . इसके बाद कैरेबियाई गेंदबाजों को हताशा ही हाथ लगी क्योंकि ना तो उन्हें विकेट मिली और ना ही वे आग उगलते रोहित और विराट के बल्लों पर अंकुश लगा सके.

इससे पहले हेटमेयर (106) के शानदार शतक की बदौलत वेस्ट इंडीज ने टेस्ट श्रृंखला के लचर प्रदर्शन से वापसी करते हुए आठ विकेट पर 322 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया. बायें हाथ के 21 वर्षीय खिलाड़ी ने वेस्ट इंडीज को बांग्लादेश में 2016 में पहला अंडर-19 विश्व कप खिताब दिलाने में अहम भूमिका अदा की थी.

उन्होंने भारत के गेंदबाजी आक्रमण का डटकर सामना करते हुए अपना तीसरा वनडे शतक जड़ा. उन्होंने 78 गेंद की अपनी रोमांचक पारी के दौरान छह चौके और इतने ही छक्के लगाये. भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति (पहले दो वनडे में इन्हें आराम दिया गया है) में भारत कैरेबियाई टीम के खिलाफ रन गति को रोकने में जूझता दिखा.

गेंदबाजी लचर दिख रही थी जबकि क्षेत्ररक्षण भी अच्छा नहीं रहा. ऐसा लगता है कि टेस्ट सीरीज जीतने के बाद आत्मविश्वास से लबरेज भारत ने अपनी प्रतिद्वंद्वी टीम को हल्के में लिया. हेटमेयर ने 41 गेंद में अपना अर्धशतक पूरा किया और रोवमैन पावेल (22) और कप्तान जेसन होल्डर (38) के साथ 50-50 रन से ज्यादा की भागीदारियां निभायीं. देवेंद्र बिशू ने नाबाद 22 और केमार रोच ने नाबाद 26 रन बनाए.

हेटमेयर ने मोहम्मद शमी की गेंद को एक्सट्रा कवर में छक्के के लिए भेजकर अपना शतक पूरा किया. उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ तो तेजी से रन जुटाये ही, पर युजवेंद्र चहल और रविंद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी के खिलाफ भी अच्छी बल्लेबाजी की. लेकिन शतक पूरा करने के तुरंत बाद जडेजा की गेंद पर आउट हो गए. छह दिन के अंदर टेस्ट सीरीज 0-2 से गंवाने क बाद वापसी की कोशिश में जुटी वेस्ट इंडीज ने घरेलू कप्तान विराट कोहली द्वारा बल्लेबाजी का न्योता दिए जाने के बाद शानदार प्रदर्शन किया.

सलामी बल्लेबाज कीरान पावेल ने 39 गेंद में छह चौके और दो छक्के से 51 रन की अर्धशतकीय पारी खेली. उन्होंने शाई होप (32) के साथ दूसरे विकेट के लिये 67 रन की भागीदारी निभाई. वेस्ट इंडीज ने तीन विकेट जल्दी गंवा दिए लेकिन मर्लोन सैमुअल्स के अपने 200वें मैच में शून्य पर आउट होने के बाद गयाना के युवा बल्लेबाज ने जिम्मेदारी से बल्लेबाजी की.

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छत्तीसगढ़ में त्रिकोणीय संघर्ष से गठबंधन की सरकार बनने के आसार

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छत्तीसगढ़ के सियासी हालात को देखें तो प्रदेश में कुल सीटों की संख्या 90 हैं, जहां दो चरणों में 12 नवम्बर को 18 सीटों पर और 20 नवंबर को 72 सीटों पर चुनाव कराये जायेंगे. सीटों की अगर बात करें तो सामान्य वर्ग के लिए 51, एससी की 10 और एसटी की 29 सीटें है.राजनैतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को चुनावी धरातल पर अमल लाने में पूरी तैयारी के साथ जुटे नजर आ रहे हैं.वैसे छ.ग.धान का कटोरा कहलाता है धान कटाई के समय चुनावी सुतक लग चुका है चौक, चौराहों, खेत खालिहानों से लेकर हर जगह अब चुनावी चर्चा ही प्रमुखता से देखी सुनी जा रही हैं.तीन पंचवर्षीय से भाजपा सरकार सत्ता पर काबिज होने के कारण उसे सत्ता से दूर करने कांग्रेस कई दाव पेच आजमा रही है.इन सब के बीच अजीत जोगी की नयी पार्टी ने हाथी पर सवार होकर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है.मायावती के हाथी का बल पाकर जोगी का हल प्रदेश के सियासी धरातल में खूब चलेगा.छ.ग.राज्य गठन के बाद पहली बार यहां त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति इस बार निर्मित हो रही है.प्रदेश की जनता के बीच तीसरा मजबूत विकल्प बसपा-छजकां गठबंधन सामने आया.बीएसपी सुप्रीमो मायावती जी ने अजीत जोगी को इस गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा प्रस्तुत कर रमन सिंह के समक्ष अपने गठबंधन का मजबूत चेहरा पेश कर दिया है.भाजपा के रमन सिंह सत्ता पर लंम्बे समय तक बने रहने के कारण एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर बड़ी समस्या होगी वही उनके सामने अजीत जोगी की चुनावी रणनीति कौशल व कुशल नेतृत्व से प्रदेश की जनता भली भांति वाकिफ है जिसका फायदा गठबंधन को मिलना तय माना जा रहा है.अब यह तो 11 दिसम्बर के दिन मतगणना के दौरान पता चलेगा.

अभी हाल ही में 13 अक्टूबर को न्यायधानी बिलासपुर सरकंडा खेल परिसर में बहुजन समाज पार्टी और छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी गठबंधन की संयुक्त समुंद्री महारैली में दोनों दलों की संयुक्त बड़ी सभा हुई .दोपहर करीब डेढ़ बजे बसपा चीफ मायावती व राज्यसभा संसद सतीशचंद्र मिश्रा हेलीकॉप्टर से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे. .जिसमें मंच से छजकां सुप्रीमो अजीत जोगी ने बसपा सुप्रीमो मायावती जी को देश का प्रधानमंत्री बनाने और मायावती जी ने जोगी को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाने की हूंकार लगाई.इस संयुक्त महारैली में प्रदेशभर से लाखों की भीड़ और भीतर जगह कम पड़ने पर बड़ी संख्या में लोग मैदान के बाहर सड़कों पर LED स्किनों के माध्यम से अपने नेताओं को देखने व सुनने पहुंचे थे. मायावती व अजीत जोगी जहां उत्साहित नजर आ रहे हैं.वही भाजपा व कांग्रेस के लिए यह चिंता का विषय बन गया है.

बसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा छत्तीसगढ़ में बसपा-छजकां गठबंधन को ऐतिहासिक बताया. केन्द्र की सरकार व भाजपा शासित राज्यों में आदिवासी दलित अल्पसंख्यक गरीब मजदूर किसान और व्यापारियों के साथ अन्याय शोषण उत्पीड़न बड़ रहा है.भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा केंद्र की सरकार चुनावी वायदे को पूरा करने में नाकाम रही है.भाजपा के राज में जनता का विकास व पिछड़ापन दूर नहीं हुआ और दलित पिछड़ा वर्ग का उपेक्षा हुई है.मंहगाई,गरीबी, बेरोजगारी कम करने, विदेशों से काला धन लाने हर गरीब के खाते में 15 से 20 लाख जमा करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक गरीबों के खाते में पैसा नहीं आया इसके अलावा किसानों के आय दोगुनी बेरोजगारों को रोजगार देने के चुनावी वायदा को पूरा नहीं किया . बल्कि स्थिति और भी बदतर बिगड़ गई. जल्दबाजी में नोटबंदी के आर्थिक फैसले ने ज्यादा शोषण उत्पीड़न किया है.बिना तैयारी के जीएसटी लागू करने से अर्थब्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है.बोफोर्स सौदे की तरह ही राफेल घोटाला के आरोप का भाजपा सरकार से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.

आगे कहा कि प्रदेश में चुनाव की घोषणा हो चुकी है इसलिए ज्यादा से ज्यादा सीट जीतकर लाए ताकि गठबंधन अकेले बहुमत की सरकार बना सके तभी दलित पिछड़ा वर्ग गरीब किसानों का उत्थान हो सकता है और नक्सलवादी गतिविधि भी काफी हद तक खत्म हो सकती है . यहां आदिवासी दलित विरोधी सरकारें रही है तथा अन्य राज्यों की तरह यहां भी मेहनत कस लोगों का शोषण होते आ रहा है.इसके लिए बीजेपी व कांग्रेस दोनों ही पार्टी कसूरवार है.मायावती ने बसपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन नही करने के विषय में कहा कि कांग्रेस हमारी पार्टी को कम सीट देकर कमजोर करना चाहती थी.कांग्रेस द्वारा अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं कर पाया घबराई हुई है वह षंड्यंत्र ,भ्रामक प्रचार करने लगी पार्टी को ऐसे साजिशों से बचना है.बसपा कोई भी चुनाव नफे नुकसान को ध्यान में रखकर नही लड़ती बल्कि महापुरुषों के विचार व जनता के हितों के लिए लड़ती है.

जोगी सरकार चलना चलवाना भी जानते हैं

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो कांग्रेस पार्टी को अच्छा नहीं लगा लेकिन जोगी को जो सम्मान कांग्रेस में नहीं मिला और कांग्रेस का दामन छोड़कर बसपा के साथ आने पर वह सम्मान मिलेगा. इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री छजकां चीफ अजीत जोगी ने भी विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाजपा का रथ को रोकने लिए गठबंधन किया है. और कांग्रेस तो मेरे छोड़ने के बाद खण्डहर की तरह कमजोर हो गई है . आज मोर छोटे भाई आदिवासी नेता रामदयाल उइके ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया.यह तो शुरुवात है 2019 के महागठबंधन का आंचलिक, क्षेत्रीय पार्टियों का गठबंधन किया जाएगा और जो शुरुआत छत्तीसगढ़ से हुई है उसका अंत दिल्ली में बहन मायावती जी को प्रधानमंत्री का शपथ दिलाकर किया जाएगा. हमारा गहरा संबंध व प्यार मान्यवर कांशीराम से रहा है. जोगी जी मंच से ही भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टी पर हमला छत्तीसगढ़ी हाना के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.इस अवसर पर बसपा प्रदेश अध्यक्ष ओ पी बाचपेयी,जैजैपुर विधायक केशव चन्द्रा,पूर्व विधायक दाऊ राम रत्नाकर,बसपा के प्रदेश प्रभारी संसद अशोक सिद्धार्थ,यूपी विधानसभा के पूर्व कैविनेट मंत्री व नेता प्रतिपक्ष लालजी वर्मा,एम एल भारती,अजय साहू,भीमराजभर, आज मरवाही विधायक अमित जोगी,विधायक आर के राय,छग.जनता कांग्रेस के उपाध्यक्ष पूर्व विधायक धर्मजीत सिंह विधायक सियाराम कौशिक,समीर अहमद,गीतांजलि पटेल,बृजेश साहू आदि उपस्थित थे.

बहन कुमारी मायावतीजी नवम्बर में CM रमन सिंह के गढ़ से चुनावी कैम्पेन की करेंगी शुरुआत 4 नवंबर को सुबह 10 बजे डोंगरगढ़, जिला-राजनांदगांव और उसी दिन दोपहर 12 बजे भिलाईनगर, जिला-दुर्ग में होगा. इसके बाद 16 नवंबर की सुबह 10 बजे आमसभा जिला मुख्यालय जांजगीर चाम्पा और उसी दिन दोपहर 12 बजे रायपुर में आमसभा करेंगी. इसके बाद 17 नवंबर की सुबह 10 बजे आमसभा नवागढ़, जिला-बेमेतरा और उसी दिन दोपहर 12 बजे आमसभा कसडोल, जिला-बलौदाबाजार में धुंआधार दौरा .

बसपा ने प्रथम चरण के लिए 6 उम्मीदवारों के नामों की सूची आज जारी कर दिया है. बसपा प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश बाचपेयी, प्रदेश प्रभारी एमएल भारती व लालजी वर्मा ने प्रदेश कार्यालय न्यू राजेन्द्र नगर में गुरुवार की शाम को नामों का एलान कर दिया है. बसपा व जनता कांग्रेस से गठबंधन के बाद बसपा ने 6 सीट में नामों की सूची जारी कर दी है. अंतागढ़ हेमंत पोयाम, डोंगरगांव अशोक वर्मा, कांकेर से ब्रम्हचन्द ठाकुर, केशकाल से जुगल किशोर बोध, कोंडागांव से नरेंद्र नेताम, डोंगरगढ़ से मिश्री मारकंडेय को बसपा ने मैदान से उतारा है.इसी गठबंधन में शामिल सीपीआई को दंतेवाड़ा व कोंटा की सीट पर बसपा ने घोषित किए हैं.

19 अक्टूबर 2018 को बहुजन समाज पार्टी ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी . पहले चरण के 6 प्रत्याशी के नामों के एलान के बाद दूसरी सूची में 12 प्रत्याशी के नाम शामिल है. जिन प्रत्याशी के नाम दूसरी सूची में है. उनके नाम है… नवागढ़ से बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश बाचपेयी चुनाव लड़ेंगे. जैजैपुर से केशव चंद्रा, बिलाईगढ़ से श्याम टंडन, कसडोल से रामेश्वर कैवर्त्य, सारंगढ़ से अरविंद खटकर, अकलतरा से ऋचा जोगी, चंद्रपुर से गीतांजलि पटेल, कुरूद से कन्हैयालाल साहू, रायपुर पशिचम से भोजराम गौरखडे, पंडरिया से चैतराम राज, सरायपाली से छबिलाल रात्रे, भिलाई नगर से दीनानाथ प्रसाद.

बसपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ओपी बाचपेयी को पार्टी ने नवागढ़ से उम्मीदवार घोषित कर दिया है. इस वजह से पार्टी की कमान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एड.सदानंद मारकंडेय सम्भालने की जिम्मेदारी दी गई है. श्री मारकंडेय चुनाव तक शासकीय कार्य व प्रदेश कार्यालय की सभी कामकाज का दायित्व सौंपा गया है. इसके अलावा महासचिव की जिम्मेदारी डॉ प्रदीप कुमार को सौंपी गई है. प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत पोयाम को अंतागढ़ सीट से चुनाव लड़ाने के चलते महासचिव राधेश्याम सूर्यवंशी को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

जोगी कांग्रेस के प्रत्याशी रामपुर फूलसिंह राठिया, चित्रकोट टण्केश्वर भारद्वाज, धरमजयगढ़ नवल राठिया, सीतापुर मुन्ना टोप्पो, बसना त्रिलोचन नायक,आरंग संजय चेलक, राजिम रोहित साहू,.इन सीटों के घोषणा के साथ 46 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा चुके हैं .गठबंधन में उन्हें 55 सीटें व बसपा को 35 सीटें मिला जिसमें अपने खाता से 2 सीट सीपीआई को दिया है.इसप्रकार देखा जाए तो अब छत्तीसगढ़ में बसपा छजकां व सीपीआई तीनों पार्टी की संयुक्त गठबंधन ने राजनैतिक मैदान में रोचक पैदा कर दिया है. एड. डगेश्वर खटकर

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झूठ की फैक्टरी का सामना झूठ की फैक्टरी खड़ी करके जीत हासिल की जा सकती है?

आम आदमी अपनी सही और गलत की समझ मीडिया को सुन, पढ़ या देख कर बनाता है. एक समय था जब टेलीविजन पर रातको 9:20 पर खबर आती थी. सुबह अखबार आता था. देश-विदेश या किसी जगह हुई घटना की जानकारी का माध्यम सिर्फ ये ही था. यहाँ से मिली जानकारी को एकदम सच माना जाता था. लेकिन आज के दौर का मीडिया 24 घण्टे हमको खबरे दिखाता है. खबरे न हो तो भी खबरें बनाई जाती है. घण्टो-घण्टो झूठी खबरों पर रिपोर्टिंग होती रहती है. पल-पल हमको झूठ दिखाकर हमारे दिमाक में वो सब भरा जारहा है जो पूंजीवादी सत्ता के फायदे के लिए जरूरी है. बहुमत आवाम आज भी अखबार, टेलीविजन या इंटरनेटपर आई खबर को सच मानता है. गांव में तो कहावत है कि “ये खबर अखबार में आ गयी इसलिए झूठ हो ही नही सकती.”
अब जहां अखबार या न्यूज चैनल पर इतना ज्यादा विश्वास हो. वहाँ आसानी से मीडिया अपने मालिक पूंजी औरसत्ता के फायदे के लिए हमको झूठ परोस सकता है. सत्ता की नीति “फुट डालो और राज करो”पर काम करते हुए मीडिया 24घण्टे मुश्लिमो, दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरों, कश्मीरियोंऔर महिलाओं के खिलाफ झूठ उगलता रहता है. हम उस झूठ पर आंखे बन्दकर विश्वास कर लेते है. इस झूठ के कारण ही हम आज भीड़ का हिस्सा बन एक दूसरे का गला काट रहे है.
मीडिया जिसको हम सिर्फ न्यूज चैनलों और न्यूज पेपरों तक सीमित करके देखते है. जबकि मीडिया का दायरा बहुत ही व्यापक है. वर्तमान में फ़िल्म, सीरियल, गानेसब पूंजी औरसत्ता के फायदे को ध्यान में रख कर बनाये जाते है.
मीडिया जिस पर कार्पोरेट पूंजी का कब्जा है और इसी पूंजी का सत्ता परभी कब्जा है. जो हमारी पकड़ औरजद से मीलोंदूर है. लेकिन जब शोशल मीडिया आया तो बहुतों को लगा कि अब आम आदमी को अपनी आवाजव अपने शब्दो को एक-दूसरे के पास ले जाने का प्लेटफार्म मिल गया. एक ऐसा हथियार मिल गया जो कार्पोरेट मीडिया को ध्वस्त कर देगा. बहुतों को तो यहाँ तक लगने लगा और आज तक भी लगता है कि शोशल मीडिया के प्लेटफार्म को इस्तेमाल करके क्रांति की जा सकती है. लेकिन वो भूल गए थे कि शोशल मीडिया को किसने और क्यो पैदा किया. शोशल मीडिया किसका औजार है.
आज शोशल मीडिया पर दिन-रात झूठी और नफरत भरी पोस्ट घूमती रहती है. इन्ही झूठी पोस्टो के कारण ही कितनी ही जगह दलितों-मुश्लिमो पर हमले हुए है. कितनो को मौत के घाट उतार दिया गया. सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ने वालों के खिलाफ झूठा प्रचार तो आम बात है. सभी पार्टियों ने अपने-अपने आई टी सेल स्थापित किये हुए है जिनका काम ही दिन रात झूठ फैलाना है.
ये आई टी सेल इतिहास की घटनाओं को इतिहासिक पात्रों को अपनी पार्टी व उसकी विचारधारा के अनुसार तोड़-मरोड़ कर, झूठ का लेप लगा कर आपके सामने पेश करते हैं. हम भी उस झूठ की चमकदार परत को ही सच मान लेते है.
अक्सर आपके सामने ऐसी झूठी पोस्ट आती है कि –
एक गायों से भरा ट्रक फैलानी जगह से चलकर फैलानी जगह के लिए निकला है इसका ये नम्बर है. इस ट्रक ने इतने गऊ भक्तों कोकुचल दिया या इतनो को गोली मार दी.
  • फैलानी जगह मुश्लिमो ने हिन्दू लड़की से बलात्कार कर दिया.
  • मुस्लिम झंडे को पाकिस्तान का झंडा बताना तो आम बात है. इसी अफवाह के कारण पिछले दिनों हरियाणा के गुड़गांव में एक बस को रोक कर सवारियों और ड्राइवर से मारपीट की गईक्योकिबस पर मुस्लिम झंडा लगा थाजो मुस्लिम धर्म स्थल पर श्रदालुओं को लेकर जा रही थी.
  • शहीद भगत सिंह आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर से राय लेता था. भगत सिंह वीर सावरकर को अपना आदर्श मानता था.
  • भगत सिंह के खिलाफ फैलाने ने गवाही दी. किसी का भी नाम डालकर परोस देते है.
  • गांधी और नेहरू ने भगत सिंह को फांसी दिलाई.
  • गांधी महिलाओं के साथ नंगे सोते थे. नेहरू अय्यास थे. नेहरू को एड्स थी. जिसके कारण उसकी मौत हुई. फोटोशॉप से दोनो के हजारो फोटो बनाये हुए है.
  • सोनिया बार डांसर थी, वेटर थी.
  • भगत सिंह ने कहा था कि अगर जिंदा रहूंगा तो पूरी उम्र डॉ अम्बेडकर के मिशन केलिए काम करूंगा.
  • डॉ अम्बेडकर ने अपने जीवन मे 2 लाख बुक्सपढ़ी.
  • साइमन कमीशन का विरोध करने वाले दलित विरोधी और डॉ अम्बेडकर विरोधी थे.
  • वेद के फैलाने पेज पर लिखा है कि हिन्दू गाय खाते थेया कुरान के उस जगह लिखा है कि ये होता था.
पोस्ट इस प्रकार बनाई जाती है कि उस पर शक न किया जा सके. ये बड़े ही प्रोफेसनल तरीके से किया जाता है. इसके पीछे सिर्फ एक ही मकसद है वो है पूंजी की रक्षा, जिसमें वो कामयाब होते भी जा रहे है.
झूठ को अगर हजारो मुँह से बोला जाए तो वो सच लगने लगता है. यहाँ तो लाखों मुँह से बोला जा रहा है.
राहुल गांधी पप्पूहै?, जवाहरलाल नेहरू के पूर्वज मुस्लिम थे?या प्रशांत भूषण, रवीश कुमार, अरविंद केजरीवाल, स्वामी अग्निवेश, योगेंद्र यादव या दूसरे बुद्विजीवी देश द्रोही है?
बहुमत लोगो से बात करोगे तो बोलेगें हा है. क्यों बोल रहे है ऐसा लोग
क्योकि इनके खिलाफ व्यापक झूठा प्रचार बार-बार किया गया है.
इन झूठ फैलाने वाले आई टी सेल के हजारो फेंक अकाउंट होते है. जिनकी कोई जवाबदेही भी नही होती.
उन झूठी पोस्ट्सके खिलाफ प्रगतिशिल बुद्धिजीवी लड़ रहे है. इन झूठी पोस्ट्स से कितना नुकशान होरहा है ये जनता के सामने ला रहे है. इनके पीछे कौनसी ताकत काम कर रही है ये सामने ला रहे है.
लेकिन पीड़ित आवाम कीहक की बात करने वाले तबके भी ऐसी झूठी पोस्ट्स बना रहे है ये बहुत ज्यादा खतरनाक है.
झूठ का सामना झूठ पेश करके कभी नही किया जा सकता है.
पिछले कुछ दिनों से एक पोस्ट शोशल मीडिया पर घूम रही है.
पोस्ट के अनुसार इंडिया गेट पर  95300 नाम स्वतंत्त्रा सेनानियों के लिखे हुए है जिनमे 61395 नाम मुश्लिमो के हैऔर अच्छी बात ये है की एक नाम भी संघियो का नही है.
अब जो संघ विरोधी है. संघ के खिलाफ और उसकी झूठ की फैक्टरी के खिलाफ लड़ने की बात करते है. उनको ऐसी पोस्ट दिखते ही वो उसकी सत्यता जांचे बिना उसको शेयर, फारवर्ड या लाइक कर देते है. ऐसा करना बहुत ही खतरनाक है क्योंकि इसके पीछे भी पूंजी और उसकी विचारधारा काम कर रही होती है.
अब इस पोस्ट की सच्चाई क्या है इसको भी जान लेना चाहिए. इंडिया गेट का निर्माण अंग्रेज सरकार ने अपने उन हजारों भारतीय सैनिकों के लिए करवाया था जिन सैनिकों ने अंग्रेज सरकार के लिए पहले विश्व युद्धव अफगान युद्ध में जान दी.
यूनाइटेड किंगडम के कुछ सैनिकों और अधिकारियों सहित 13300 सैनिकों के नाम, गेट पर लिखे हुए है.
ये झूठी पोस्ट अंग्रेजो के लिए लड़ने वाले उन हजारो लोगो को जिन्होंने अंग्रेज सरकार का भारत परकब्जा बनाये रखने में मजबूती से साथ दिया. उन सैनिकों को क्रांतिकारी साबित कर रही है. क्या वो क्रांतिकारी थे?
लेकिन ऐसे ही धीरे-धीरे झूठे इतिहास को सच बनाकर लोगो के दिमाक में बैठाया जाता है.
इनझूठी पोस्ट्स को देख कर लग रहा है कि झूठ की फैक्टरी सिर्फ संघी ही नही लगाए हुए है. झूठ की फैक्टरी का निर्माण संघ के खिलाफ लड़ने की बात करने वाले भी लगाए हुए है. जैसे संघ या मोदी के अंधभक्त झूठी पोस्ट्स को आगे से आगे बिना सच्चाई सरकाते रहते है वैसे ही दूसरे प्रगतिशील, कलाकार, वामपंथी, अम्बेडकरवादी भी झूठी पोस्ट्स को आगे से आगे सरका रहे है. बस पोस्ट उनके मतलब की होनी चाहिए, वो चाहे झूठी ही क्यो न हो.
लेकिन क्या ये सही होगा. क्या पीड़ितों की लड़ाई झूठ के सहारे लड़ी जाएगी. क्या आप इतने कमजोर हो कि झूठ का सहारा ले रहे हो.
अगर आप ऐसा कर रहे हो तो आपकी हार निश्चित है.
UDay Che

RRB Group D Exam 2018: आज जारी होगा 29 अक्टूबर से होने वाली परीक्षा का शेड्यूल

नई दिल्ली। आरआरबी ने 29 अक्टूबर से 17 दिसंबर तक की रेलवे ग्रुप डी भर्ती परीक्षा की तिथि, शहर व शिफ्ट की डिटेल्स जारी  कर दी है. पहले ये डिटेल 18 अक्टूबर को जारी होनी थी, फिर 19 की डेट आई, लेकिन इसे फिर आगे बढ़ाकर 20 अक्टूबर यानी आज कर दिया गया था. आखिरकार रेलवे ने यह आज जारी कर दी.

गौरतलब है कि अभी तक रेलवे ने ग्रुप डी के उन्हीं उम्मीदवारों की परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की डिटेल्स जारी की थी जिनकी परीक्षा 26 अक्टूबर तक निर्धारित की गई है. 27 और 28 अक्टूबर को परीक्षा नहीं होगी. 29 अक्टूबर को और उसके बाद किस उम्मीदवार की परीक्षा किस दिन, किस शहर, किसी शिफ्ट में होगी, ये जानकारी संबंधित रेलवे बोर्डों की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है.

उम्मीदवार परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की डिटेल्स को अपना एडमिट कार्ड न समझें. परीक्षा तिथि से चार-चार दिन पहले उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड जारी हो रहे हैं. कल सिर्फ परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की डिटेल्स जारी होंगी. परीक्षा हर दिन तीन-तीन शिफ्टों में हो रही है.

परीक्षा तिथि के अलावा कल SC/ST उम्मीदवार ट्रेन ट्रैवल अथॉरिटी भी डाउनलोड कर सकेंगे. यह सिर्फ यात्रा प्रबंध के लिए है.

रेलवे ग्रुप डी (लेवल 1 ट्रैक मेंटेनर्स, असिस्टेंट पॉइंट्समेन आदि) की करीब 63 हजार वैकेंसी है. इसके लिए करीब 1 करोड़ 90 लाख उम्मीदवार मैदान में हैं. ग्रुप सी के रिजल्ट का इंतजार

उधर, ग्रुप सी असिस्टेंट लोको पायलट व टेक्नीशियन की परीक्षा देने वाले उम्मीदवार अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं. आंसर-की जारी हो चुकी है. अब फर्स्ट स्टेज सीबीटी के रिजल्ट का इंतजार है.

rrb group d admit card 2018 exam date city details: यूं कर सकेंगे चेक स्टेप 1- चेक करने के लिए उम्मीदवार अपने आरआरबी (जिस आरआरबी के लिए आवेदन किया है) की वेबसाइट पर जाएं. RRB के Direct Link जिस पर क्लिक कर आप अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं.

स्टेप 2- वहां दिए गए गए ”परीक्षा शहर तथा दिनांक की जानकारी” या ”Login Link for Exam City and Date intimation” ( CEN No. 02/2018 for various posts in Level 1 of 7th CPC ) के लिंक पर क्लिक करें. स्टेप 3- मांगी गई डिटेल्स ( यूजर आईडी व जन्मतिथि) डालकर लॉग इन करें. आपकी परीक्षा तिथि, केंद्र और शिफ्ट की जानकारी आपके सामने आ जाएगी.

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दुर्घटनास्थल पर मौजूद थीं सिद्धू की पत्नी, लोगों ने कहा- हादसा होते ही निकल गईं

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अमृतसर। दशहरे के दिन पंजाब के अमृतसर में बड़ा रेल हादसा हो गया. रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रही भीड़ पर ट्रेन चढ़ गई जिससे 61 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों की तादाद और बढ़ सकती है. हादसे के बाद ट्रैक के दोनों ओर 150 मीटर तक शव बिखरे हुए नजर आ रहे थे. मौके पर राहत और बचाव दल तुरंत पहुंचा जिसके बाद घायलों को अस्पताल भेजा गया. पंजाब सरकार ने ऐलान किया है कि मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये दिए जाएंगे और घायलों का पूरा इलाज सरकार द्वारा किया जाएगा. पीएम नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी बड़े नेताओं ने इस घटना पर दुख जताया है. जानिए अब तक का अपडेट-

हालांकि अमृतसर में सिविल हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल अॉफिसर ने इस हादसे में मारे जाने वाले लोगों की संख्या 60 बताई है. आधिकारिक तौर पर करीब इतने ही लोगों के घायल होने की सूचना मिली है.

हादसे पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दुख जताया है. उन्होंने कहा, अमृतसर में दुखद रेल दुर्घटना के बारे सुनकर चौंक गया हूं. दुख के इस घड़ी में सभी प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों को खुले रहने के लिए कहा गया है. जिला अधिकारियों को युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया.जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताते हुए ट्वीट किया कि अमृतसर में ट्रेन दुर्घटना से बेहद दुखी हैं. उन लोगों के परिवारों के लिए मेरी गहरी संवेदनाएं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया और मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल जल्दी से ठीक हो जाए. अधिकारियों से तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए कहा है.

रेलवे ट्रैक के पास बने ग्राउंड में आस-पास के लोग दशहरे का उत्सव देख रहे थे. ये सभी लोग उत्सव देखते-देखते ट्रैक पर पहुंच गए और बड़ा हादसा हो गया. घटना अमृतसर के जौड़ा फाटक इलाके में हुई जो शहर के बीचोंबीच स्थित है.

ग्राउंड से लेकर ट्रैक तक सैकड़ों की संख्या में लोग खड़े थे इसी दौरान ये दर्दनाक हादसा हुआ. बताया जा रहा है कि भीड़ रावण दहन देखने में व्यस्त थी और पटाखों के शोर में रेल की आवाज दब गई जिससे ट्रेन के आने का पता ही नहीं चला. ट्रेन 74943 डीएमयू से यह हादसा हुआ.

खबरों के मुताबिक नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी कार्यक्रम में मौजूद थीं. राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है. बड़े अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या 61 से ज्यादा हो सकती है. इस हादसे के बाद पुलिस प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं. सवाल उठ रहे हैं कि इस जगह पर दशहरा कार्यक्रम की इजाजत क्यों दी गई. साथ ही रेलवे पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इस तरह की लापरवाही कैसे हुई कि सैकड़ों लोग ट्रैक पर आ गए और इन्हें हटाया भी नहीं गया.

ऐसा नही है कि इस प्रकार कि घटना देश मे पहली बार हुई हो. बता दे कि इस प्रकार की घटना ने पटना के गांधी मैदान वाले हादसे की याद दिला दी . हादसा 4 साल पहले 3 अक्टूबर 2014 को बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में हुआ था. ये सभी लोग रावण दहन देख रहे थे और तभी भगदड़ मच गई. बता दे कि इस भगदड़ में 33 लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे मे मारे गए लोगो में 27 महिलाएं और पांच पुरुष थे. यह घटना गांधी मैदान के दक्षिणी गेट (रामगुलाम चौक के सामने) के सामने हुआ था .गांधी मैदान के दक्षिणी गेट के नीचे बने लोहे के पाइप के चलते 33 लोगों की जान गयी थी. पहले एक अधेड़ उम्र की महिला का पैर इसी पाइप में फंस गया और वह जमीन पर गिर गयी. वहीं पर एक केबल का तार भी गिर गया था.

महिला को अचानक गिरता देख किसी ने करंट फैलने की अफवाह उड़ा दी. नतीजतन हजारों लोगों के बीच मे अफरातफरी मच गयी. जिसके कारण पहले तो लोगों को कुछ समझ नहीं आया लेकिन थोड़ी देर बाद ही भगदड़ मौत बनकर दौड़ने लगी. महिला के ऊपर सैकड़ो लोग गिर गए. कुछ लोग मौत के मुंह से सही सलामत निकलकर बाहर चले आए तो कुछ लोग हादसे का शिकार हो गए. इन दोनों घटनाओं ने देश को दहला दिया.

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अभिजात वर्गीय है मी टू कैंपेन

पिछले दिनों से मी टू कैंपेन सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक काफी चर्चित हो रहा है. इस मूवमेंट में महिलाएं #MeToo के साथ कडुवे अनुभव कुछ स्क्रीन शॉट्स भी शेयर कर रही हैं. भारत में इसकी शुरूआत 2017 से हुई थी लेकिन अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के मामले ने पहले पहल तूल पकड़ा . उन्होंने नाना पाटेकर पर आरोप लगाए थे.

सबसे पहले सोशल मीडिया पर इस #MeToo की शुरुआत मशहूर हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने की थी. उन्होंने बताया कि हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे विंस्टीन ने उनका रेप किया था. मी तू कैम्पेन की 2006 में शुरूआत अमेरिकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट तराना बर्क ने की थी. भारत में मी टू कैंपेन शुरू होने के बाद से अब तक कई बड़ी बॉलीवुड हस्तियों के नाम इसमें सामने आ चुके हैं इनमें विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, आलोक नाथ, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु और मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर शामिल हैं.

बता दूं कि बेसिकली यह कैंपेन सोशल मीडिया पर आधारित है और सोशल मीडिया के दबाव के कारण कुछ मामलों ने पुलिस ने संज्ञान लिया है.

कैंपेन को असहमति की सहिष्णुता नहीं है

इस कैंपेन की एक खास बात यह भी है की वे लोग जो इस कैंपेन से सहमत नहीं है उन्हें ट्रोल भी किया जा रहा है असहमति यों को बर्दाश्त नहीं किया जा रहा है कुछ साहित्यका,र लेखक, व्यक्ति, राजनैतिक लोगों ने अपनी असहमति जाहिर की है और वे ट्रोल का शिकार हो गए . आखिर यह लोकतंत्र है कोई ब्राह्मणवादी या तानाशाही तंत्र नहीं है. किसी एक जाति या लिंग के आधार पर किसी को गलत या सही नहीं ठहराया जा सकता . पुरुष सभी गलत होते हैं या महिलाएं सभी अच्छी होती हैं. इस मान्यता से ऊपर उठना होगा. असहमति की गुंजाईस होनी चाहिए.

इस कैंपेन से क्या हो रहा है

मीटू के इस कैंपेन से हो यह रहा है कि करीब 10 साल या 20 साल या उससे भी ज्यादा समय के बाद महिलाएं अपने साथ हुए शोषण को सोशल मीडिया पर रख रहे हैं और उन लोगों को बेनकाब कर रही हैं जिन्होंने उनके साथ शोषण किया है अमेरिका की तरह भारत में भी यह कैंपेन फिल्मी दुनिया के इर्द-गिर्द घूम रहा है जबकि फिल्मी दुनिया में यौन कर्म एक आम बात है ऐसा माना जाता रहा है कास्टिंग काउच हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक आम बात है. फिल्मी दुनिया में कामयाबी पाने के लिए अपने आप को और अपने संबंधों को इस्तेमाल करना कोई नया नहीं है . लेकिन इस कैम्पेन से लोगों की नींद उड़ी हुई है. और कई नकाबपोश बेनकाब हुए हैं. यही इस कैंपेन की उपलब्धि है. इस कैंपेन के कारण शोषण करता की बदनामी हो रही है और उसे जवाब देते नहीं बन रहा है. महिला वर्ग खासकर महिला वादी लोग इस कैंपेन पर बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. कानूनी पहलू

इस कैंपेन का कानूनी पहलू यह है कि इसे कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है. हालांकि किसी भी शिकायत को थाने में दर्ज कराया जा सकता है. या फिर सीधे कोर्ट में मामला लिया जा सकता है. लेकिन काफी समय हो जाने के कारण सबूत और गवाह नष्ट हो चुके हैं और परिस्थितियां बदल चुकी हैं इसीलिए शोषण करता को सजा के निकट ले जाने में मुश्किल आ सकती है.

काश वंचित वर्ग की महिलाओ को इस कैम्पेन में जगह मिलती.

जैसा कि इस कैंपेन से नाम से जाहिर है की यह एक निजी कैंपेन है. किसी और की पीड़ा को इस कैंपेन में शामिल नहीं किया जा रहा है. इसीलिए इस कैंपेन के दौरान हुई अन्य महिलाओं के साथ बदसलूकी बलात्कार हत्याओं को इस कैंपेन में नहीं उठाया गया है. अब तक यह मामला या इसे कैंपेन कहें अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित है या सेलिब्रिटी वर्ग तक सीमित है कह सकते हैं. कामवाली बियों समेत इसमें वे महिलाएं जो कमजोर और पीड़ित वर्ग की आती हैं उनकी बातों को तवज्जो नहीं दी जा रही है . ना ही वे ऐसा करने का हिम्मत कर पा रही है. यह इस कैंपेन का काला पक्ष है. काश दलित पिछड़ी और अल्पसंख्यक महिलाओं के साथ हुए शोषण को भी इस कैंपेन में जगह मिलती.

संजीव खुदशाह

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राजस्थान विधानसभा चुनाव : बसपा सभी 200 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी

मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान में भी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी 200 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी. पार्टी का दावा है कि गठजोड़ की बातचीत सिरे नहीं चढ़ने का नुकसान कांग्रेस को होगा. बसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डूंगरराम गेदर ने पार्टी की चुनावी तैयारियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि तैयारी चल रही है. पार्टी सभी 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. राज्य के विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं जनजाति मतदाताओं में अच्छी पैठ रखने वाली बसपा ने बीते कुछ चुनावों में धौलपुर, भरतपुर और दौसा के साथ साथ गंगानगर जिले की कुछ विधानसभा सीटों पर लगातार बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. जिन सीटों पर पार्टी जीत नहीं सकी, वहां उसने परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाई. 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन सीटें जीतीं और आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस को एक तरह से तीसरे नंबर पर धकेल दिया.

राज्य में बसपा 1990 से ही चुनाव लड़ रही है लेकिन उसे जीत का स्वाद 1998 में मिला जब उसके दो प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की. उस साल बसपा ने कुल 108 प्रत्याशी उतारे और उसे 2.17% वोट मिले. 2003 में बसपा 124 सीटों पर चुनाव लड़ी, दो पर जीती और उसे 3.98% वोट मिले. वहीं 2008 में विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा जब उसने 7.60 प्रतिशत वोटों के साथ छह सीटों पर जीत दर्ज की.

2013 में उसने 195 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन जगह उसे जीत भी मिली लेकिन उसका वोट प्रतिशत घटकर 3.37 प्रतिशत रह गया. राज्य में एससी की 34 और एसटी की 25 सीटें हैं. बसपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में 195 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. गेदर ने कहा कि इस बार सभी सीटों पर पार्टी प्रत्याशी खड़े करने की तैयारी है.

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