ओपीनियन

Why Celebrate the Independence Day of India – 15 August

A question that is often raised in some circles is, "Why should one celebrate Independence Day of India?" Although this is a rather complex topic that can't be answered simply, a broader reflection on pre-independence and post-independence is needed. Upon reflecting, the following...

क्या चंद्रशेखर आजाद और केसीआर ने सेल्फ गोल कर लिया है?

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद अपने तेलंगाना दौरे के दूसरे दिन तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव यानी केसीआर से मिले। इससे पहले चंद्रशेखर आजाद केसीआर की बेटी कविता राव से भी मिल चुके हैं। इस दौरान चंद्रशेखर लगातार केसीआर सरकार की तारीफें करते...

इंफाल का उनका घर मैतेइयों ने जला दिया है

(10 मई,  2022) मणिपुर से रोज हिंसा और आगजनी की खबरें आ रही हैं। मेरी एक मित्र का घर पूर्वी इंफाल में था। मणिपुर पुलिस बल में कार्यरत रहे उनके पति का निधन कई वर्ष पहले हो चुका है। वे स्वयं चिकित्सा के क्षेत्र...

मणिपुर को लेकर लंबी चुप्पी के पीछे यह है भाजपा की साजिश!

लेखक- बिलक्षण रविदास। मणिपुर में हो रही हिंसा पर लंबी चुप्पी के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तब जुबान खोली, जब दो महिलाओं के साथ हैवानियत हुई और सरकार की थू-थू होने लगी। इसके बाद अब बीजेपी के दो सांसद और सरकार के मंत्रियों...

निष्पक्ष सुनवाई के लिए गैर सवर्ण और गैर ओबीसी जज की अपील करने पर 10 लाख का जुर्माना कितना सही?

ओबीसी आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई से सवर्ण समाज के और ओबीसी समाज के जज को नहीं रखने संबंधित याचिका दायर करने वाले लोकेन्द्र गुर्जर पर अदालत ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। दरअसल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में...

बाबासाहेब के चरणों में: डॉ. अम्बेडकर से मुलाकात

मेरे पिता को अखबार पढ़ने का बहुत शौक था. जब 43-44 साल की छोटी सी उम्र में ही उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी तो मुझे रोजाना शाम को उनके लिए एक पेपर पढ़ना पड़ता था। जब उनकी मृत्यु हुई तब मैं लगभग सोलह वर्ष...

अंबेडकरी आंदोलन के सजग प्रहरी और भीम पत्रिका के संपादक एल. आर. बाली का निधन

 अंबेडकरी आंदोलन के सजग प्रहरी और मासिक पत्र भीम पत्रिका, जालंधर के संपादक एवं लेखक एल.आर. बाली का छह जुलाई को दोपहर एक बजे निधन हो गया। आने वाले 20 जुलाई को वह 94 साल के होने वाले थे। इस उम्र में भी एल...

डा. तुलसीराम : कुछ यादें

21 जनवरी 1996 को साउथ एवेन्यु, दिल्ली में विमल थोरात की पीएचडी पुस्तक ‘मराठी दलित और साठोत्तरी हिन्दी कविता में सामाजिक और राजनीतिक चेतना’ के लोकार्पण-कार्यक्रम में मैंने पहली दफा डा. तुलसीराम को देखा और सुना था। चेचक के दागों से भरा उनका श्याम...

युनिफॉर्म सिविल कोड के रूप में क्या भाजपा को मिल गया 2024 का मुद्दा?

2019 का लोकसभा चुनाव याद है न। भाजपा सत्ता में वापसी के लिए जोर लगा रही थी, कांग्रेस पार्टी भाजपा को रोकने के लिए जोर लगा रही थी। तमाम गठबंधन किये जा रहे थे। भाजपा के मुकाबले में कांग्रेस पार्टी टक्कर देती हुई दिख...

चंद्रशेखर ने जारी किया बयान, “आप चंद्रशेखर को गोली और बंदूकों से न तो झुका सकते हैं न डरा सकते हैं और न ही...

(चंद्रशेखर आजाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष आजाद समाज पार्टी) कल घात लगाकर मेरे ऊपर किए गए जानलेवा हमले की निंदा करने और मेरे प्रति संवेदना प्रकट करने वाले मित्रों, नेताओं व शुभचिंतकों का दिल से आभार प्रकट करता हूं। कल की तरह की घटना आज भले हीं...

बसपा की राजनीतिक चुनौतियां और समाधान

पिछले दिनों आए उत्तर प्रदेश निकाय चुनावों के परिणामों ने बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया. बसपा इस बार दलित मुस्लिम समीकरणों को साधने का सीधा प्रयास कर रही थी लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुकूल नहीं रहे. भारतीय जनता पार्टी ने...

संवैधानिक मूल्यों के प्रति कितने सजग है हम!

किसी भी आजाद देश की जनता के गरिमापूर्ण जीवन और विकास का मूल आधार उस देश का संविधान होता है। ठीक ऐसे ही हमारे देश का संविधान है। हमारे संविधान का मूल प्रस्तावना है। प्रस्तावना इसलिए मूल है क्योंकि, इसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय, बंधुता...

लोकतंत्र का बाभन विमर्श- बिना शर्म-हया के

‘लोकतंत्र का भविष्य’ शीर्षक से वाणी प्रकाश से एक किताब आई है। इसका संपादन अरूण कुमार त्रिपाठी ने किया है। इसमें कुल 12 लेख हैं। संपादकीय सहित 13 लेख। संपादक सहित 13 लेखकों में 10 बाभन हैं। करीब 72 प्रतिशत लेखक ब्रह्मा के मुंह से...

देश की सामाजिक व्यवस्था कब संवैधानिक मूल्यों को स्वीकार करेगी?

किसी भी स्वतंत्र देश की आवाम के गरिमामयी जीवन और विकास का मूल आधार उस देश का संविधान होता है। संविधान में वर्णित नियमावली से एक देश का कार्यान्वयन और संचालन होता है। दुनियाँ के विभिन्न देशों की भांति हमारे देश को भी चलाने...

पर्यावरण को पंगु करते कार्पोरेट निगमों की अकूत मुनाफे की लालच और उपभोक्ता जीवन शैली

फिदेल कास्त्रो ने 1992 में कहा था, “एक महत्वपूर्ण जैविक प्रजाति– मानव जाति – के सामने अपने प्राकृतिक वास-स्थान के तीव्र और क्रमशः बढ़ते विनाश के कारण विलुप्त होने का खतरा है… मानव जाति के सामने आज एक अनिश्चित भविष्य मुंह बाये खड़ा है,...

आंबेडकर ने कबीर को अपना गुरु क्यों माना

बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ने तीन लोगों को अपना गुरु माना था। ये थे, गौतम बुद्ध, कबीर और जोतिराव फुले को अपना गुरु माना। ये तीनों भारत के तीन युगों की सबसे क्रांतिकारी और प्रगतिशील वैचारिकी का प्रतिनिधित्व करते हैं और उसके मूर्त रूप हैं।...

पकड़ा गया Savarkar को हीरो बनाने को लेकर रचा गया झूठ

28 मई को विनायक दामोदर सावरकर की 140वीं जयंती के मौके पर फिल्म स्वातंत्र्य वीर सावरकर का टीजर रिलीज हुआ। लेकिन इसमें जो कुछ भी कहा गया, उसको लेकर जबरदस्त विवाद शुरू हो गया है। फिल्म के टीजर में कहा गया है कि सुभाष...

सरकार ने किया राष्ट्रपति का अपमान, आरोप लगाकर मोदी पर भड़के कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे

नए संसद भवन का उद्घाटन वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से कराए जाने को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस पार्टी ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साथ ही संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को निमंत्रण तक नहीं देने को भी कांग्रेस...

काले धन के विमर्श के भंवर से निकलने की जरुरत

8 नवम्बर की रात 12 से उठी नोटबंदी की सुनामी के तीन के तीन सप्ताह गुजर चुके हैं और इसकी चपेट में आने से देश का शायद एक भी नागरिक बच नहीं पाया है.विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक़ इससे राष्ट्र का जीवन जिस तरह...

दलित आत्मकथाओं की जुबानी, स्त्री शोषण की कहानी

आज स्त्री-विमर्श, दलित-विमर्श, पसमांदा विकलांगों का विर्मश अश्वेत साहित्य आदि के साहित्यिक राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक आदि मसविदे विश्लेषित विमर्श में दलित एवं गैर दलित के शोषणों में समानता होने के बावजूद उनमें कुछ भिन्नता होने के कारण दलित स्त्रियों की कुछ समस्यायें  छूट...
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भविष्य के अंबेडकर को पहचानने का वक्त

इंसानी सभ्यता की सेहत एक छोटे से सूत्र पर टिकी है। जब भी इंसानों ने मिलकर काम किया, जब भी श्रमिक को उसका उचित...

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अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने क्यों भेजा है 50 करोड़ का मानहानि नोटिस, जानिये पूरा मामला

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नीतीन गडकरी से जुड़ी ‘द कारवां’ की एक रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीफ कारोबार में गडकरी...
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