Friday, February 13, 2026

ओपीनियन

गांधीजी की चलती तो संविधान सभा नहीं पहुंच पाते डॉ. अम्बेडकर

यह आम धारणा है कि गांधी की कृपादृष्टि के कारण ही डॉ. अंबेडकर का संविधान सभा में प्रवेश सम्भव हो सका था. इतना ही नहीं यह भी प्रचारित है कि गांधी ने ही उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला कानून मंत्री बनवाया था. इस धारणा...

पिंडदान, श्राद्ध और मृत्युभोज ब्राह्मणों का ढोंगी विधान!

मेरे एक मित्र गया में अपने पितरों का पिंडदान करने के बाद कल ब्रह्मभोज देने वाले हैं. मेरे मन में कुछ शंकाए उमड़-घुमड़ रही हैं, उसे आपके समक्ष बिना लाग-लपेट के प्रस्तुत कर रहा हूं. पिंडदान का विस्तृत वर्णन गरुण पुराण, अग्नि पुराण और...

अंधराष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार के दौर में शहीद होते जवान!

हर युद्ध,गृहयुद्ध की कीमत जैसे देश काल परिस्थिति निर्विशेष स्त्री को ही चुकानी पड़ती है, उसी तरह दुनिया में कहीं भी युद्ध हो तो उससे आखिरकार हिमालय लहूलुहान होता है. उत्तराखंड के कुमायूं गढ़वाल रेजीमेंट या डोगरा रेजीमेंट,नगा रेजीमेंट या असम राउफल्स सबसे कठिन...

नहीं चाहिए ऐसा विकास जो सेना के जवानों को शहीद कर दे!

70 वर्ष की आजादी के बाद भी जिस देश की 85 प्रतिशत आबादी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पायी हो और उसमें भी हम जैसी अधिकांश आबादी की जुबान पर यह जुमला "कोई होहिं नृप हमें का हानि" घर कर...

इतिहास के आइने में दलित-आदिवासी महिलाएं

मेरे दिमाग में कई बार आया कि आदिवासी औरतों के चित्र ही निर्वस्त्र ही क्यों देखने को मिलते हैं...कुछ इलाकों में आज भी आदिवासी औरतें लगभग निर्वस्त्र सी रहती हैं. क्यों?  यह भी सोचा कि शायद धनाभाव इसका कारण रहा हो... कभी यह भी...

वैवाहिक रीतियों में सामाजिक बुराइयां

बुन्देलखण्ड क्षेत्र जिसे कहते है वो उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश को मिला के बना हुआ है और एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर शादी किसी यज्ञ से कम नहीं होती है. इस क्षेत्र में कन्यादान सबसे बड़ा दान माना जाता है. यहां लड़की का जन्म...

शुक्र है मेरे बिजनौर ने खुद को संभाल लिया

मेरे बिजनौर ने ख़ुद को तुरंत संभाल लिया इसके लिए उसे सलाम. वरना साज़िश तो बड़ी थी. बिजनौर का मूल स्वभाव अमन पसंद है, हालांकि बीच-बीच में कुछ लोग माहौल ख़राब करने की कोशिश करते रहते हैं. इस बार भी यही कोशिश हुई. पेदा...

एक देश एक चुनाव: लोकतंत्र की हत्या का प्रस्ताव

2014 में हुए लोकसभा चुनावों में यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति और नीयत पर भरोसा करने वालों की देश में कमी होती,  तो वे 282 सीटों पर कब्ज़ा कर के लोकसभा में न पहुंचे होते. किंतु उनके प्रधानमंत्री बनने के पहले और बाद...

मनुवाद के कंधों पर मानवतावाद का जनाजा

घटना पिछले दिनों की है। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के एक गांव में दबंग जातियों के लोगों ने एक मृतक दलित महिला का शमशान घाट पर अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। क्योंकि शमशान घाट की जमीन पर दबंग जातियों के लोगों का कब्जा...

शाकाहार और मांसाहार की बहस

शाकाहार और मांसाहार में तुलनात्मक मेरिट की ही बात है तो ध्यान रखियेगा कि दुनिया में सारा ज्ञान विज्ञान तकनीक मेडिसिन चिकित्सा यूनिवर्सिटी शासन प्रशासन संसदीय व्यवस्था व्यापार उद्योग इत्यादि यूरोप के मांसाहारियों ने ही दिया है. भारत सहित अन्य मुल्कों को भी लोकतन्त्र,...

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के दौर में डायन प्रथा !

देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चलाया जा रहा है, ऐसे अभियानों का समाज पर प्रभाव भी पड़ता है. परिणामस्वरूप समाज में बेटियों के प्रति नजरिया बदल रहा है. आज देश में ऐसे सैकड़ों स्कूल मिल जाएंगे, जहां लड़कों की अपेक्षा लड़कियां अधिक...

बाबा साहेब की अंगुली का इशारा संसद की तरफ है

बाबा साहेब ने ''कांग्रेस और गांधी ने अछूतों के लिये क्या किया’ में कहा है कि सत्ता ही जीवन शक्ति है. अतः उन्हें (दलितों को) शासक जमात बनाना है और सत्ता अपने हाथ में  लेनी है, वरना जो अधिकार मिले हैं, वे कागजी रह...

क्रान्तिकारी परिवर्तन का दस्तावेज़ है ‘गुलामगिरी’

दरअसल हिंद स्वराज एक ऐसी किताब है, जिसने भारत के सामाजिक राजनीतिक जीवन को बहुत गहराई तक प्रभावित किया. बीसवीं सदी के उथल पुथल भरे भारत के इतिहास में जिन पांच किताबों का सबसे ज़्यादा योगदान है, हिंद स्वराज का नाम उसमें सर्वोपरि है....

दलित-मुसलमानों को अखबार पढ़ना छोड़ देना चाहिए!

उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधान सभा चुनाव तक क्या दलित-मुसलमानों को अख़बार पढ़ना छोड़ देना चाहिए? क्या उन्हें सवर्ण नेताओं और मीडिया से दुरी बना लेनी चाहिए? क्या दलितों और मुसलमानों को ऐसी किसी रैली या जनसभा में नहीं जाना चाहिए, जहां...

सिर्फ आरएसएस और मनुवादी लोग ही राष्ट्रवादी हैं?

24 अगस्त 2016 को मोदी जी ने बयान दिया कि दलित-पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं और राष्ट्रवादियों के अलावा कोई भाजपा के साथ नहीं. मोदी जी के इस बयान पर अनुसूचित जातियों की तीखी प्रतिक्रिया लाजिमी है. तीखी प्रतिक्रिया हुई भी. लेकिन प्रतिक्रिया उनके बयान के...

बाबा रामदेव का देश प्रेम!

मल्टीनेशनल कंपनियां तो लुटेरी ठहरी. वह तो आयी ही हैं लाभ कमाने. भला बिना लाभ के लालच में कोई व्यापार करता है? गोलगप्पे वाला भी खोमचा नहीं लगाता बिना लाभ की उम्मीद में. लाखों का विज्ञापन दे कर रामदेव जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ...

क्रिकेट में दलित हिस्सेदारी

ब्रिटिश शासन के समय क्रिकेट के इतिहास में भारतीयों की हिस्सेदारी जितनी अजीबोगरीब तरीके से हुई, उतने ही अजीबोगरीब तरीके से क्रिकेट में राजनीति की घुसपैठ से परिस्थितियों का निर्माण होने लगा था. माना जा सकता है कि क्रिकेट खिलाड़ियों में भयंकर प्रतिस्पर्धा होने...

बसपा की रैलियों पर प्रो. विवेक कुमार की टिप्पणी

  बसपा सुप्रीमो मायावती यूपी में अब तक दो चुनावी रैलियां कर चुकी हैं. इन दोनों चुनावी रैलियों में लाखों की संख्या में समर्थक इकट्ठा हुए. चुनावों के नजरिए से बसपा का रूख सकारात्मक है. बसपा अपना एजेंडा सेट कर रही है. आगरा रैली और...

दयाशंकर मुद्दे पर यूपी के महिला आयोग में चुप्पी क्यों?

क्या किसी ने इस बात पर ध्यान दिया है कि दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा अध्यक्ष मायावती को अपशब्द कहने पर भी देश और उत्तर प्रदेश के महिला आयोगों ने अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है? ऐसा क्यों? जो राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य...

जाति का एशियाई संदर्भ

एक पत्रिका के लेख में प्रसिद्ध उद्योगपति वॉरेन बफेट ने एक सवाल उठाया था कि “एक ही मां के गर्भ से जन्में जुड़वों का समान रुप से चुस्ती, शक्ति-सामर्थ्य है. उनमें से एक का जन्म बांग्लादेश में और दूसरे का अमेरिका में होगा तो...
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ओपीनियन

January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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