Friday, February 13, 2026

ओपीनियन

अनुसूचित जाति का अर्थ तो हमको पता है, लेकिन अनुसूचित का मतलब जानते है क्या?

आज हमारे समाज में हर तरफ आरक्षण को केवल आर्थिक उन्नति के नज़रिये से देखा जा रहा है. जबकि भारतीय संविधान में आरक्षण का उद्देश्य समाज में हर वर्ग को बराबरी का प्रतिनिधित्व देने के लिए किया गया था परंतु समझने वाली बात ये...

नोटबंदी के आर्थिक आपातकाल से दूर क्यों हैं पूंजीपति-नेता?

तय  तो  ये था  ज़ुल्म के  नाख़ून  काटे  जायेंगे लोग नन्ही तितलियों के  पर क़तर कर आ गये -कुँवर बेचैन कितनी सटीक बैठती है ये 2 लाइने मौजूदा सरकार पर. भाजपा नरेंद्र मोदी की अगुआई में ये ही लाईन बोलकर तो सत्ता में आई थी. रामदेव बाबा...

नास्तिक ही असली पात्र हैं- ओशो

मैं नास्तिकों की ही तलाश में हूं, वे ही असली पात्र हैं. आस्तिक तो बड़े पाखंडी हो गए हैं. आस्तिक तो बड़े झूठे हो गए हैं. अब आस्तिक में और सच्चा आदमी कहां मिलता है? अब वे दिन गए, जब आस्तिक सच्चे हुआ करते...

यह उत्सवी देश परम पीड़ा से गुजर रहा है

मैंने कई कारपोरेट घरानों के बड़े लोगों से निजी तौर पर बात की. सबको छह माह पहले से पता था कि हजार और पांच सौ के नोट खत्म किए जाने हैं. मुझसे किसी एक ने संपर्क नहीं किया कि उसके यहां करोड़ दो करोड़...

ओशो-विचारः क्या बु‍द्ध भगवान के अवतार हैं?

ओशो रजनीश ने तथागत बुद्ध पर दुनिया के सबसे सुंदर प्रवचन दिए हैं. इस प्रवचन माला का नाम है "एस धम्मो सनंतनो". लाखों देशी और विदेशी लोग हैं, जो बौद्ध नहीं है लेकिन वे तथागत बुद्ध से अथाह प्रेम करते हैं और उनकी विचारधारा...

धन पर ओशो की इस सटीक और खरी टिप्पणी को पढ़ें

धन का शास्त्र समझना चाहिए. धन जितना चले उतना बढ़ता है. चलन से बढ़ता है. समझो कि यहां हम सब लोग हैं, सबके पास सौ-सौ रुपए हैं. सब अपने सौ-सौ रुपए रखकर बैठे रहें! तो बस प्रत्येक के पास सौ-सौ रुपए रहे. लेकिन सब...

कौन-कौन से ‘ऐसे मामले’ हैं जिनमें राजनीति नहीं, कीर्तन होना चाहिए

आए दिन कोई न कोई नेता या संवैधानिक प्रमुख, अपने ठोंगे से मूंगफली की तरह उलट कर ये सुझाव बांटने लगता है कि ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए. हम कंफ्यूज़ हैं कि वो कौन से ‘ऐसे मामले’ हैं जिनपर राजनीति नहीं हो...

शोषण के गढ़ हैं भारत के शैक्षिक संस्थान

बाबासाहेब ने कहा था कि हम किसी भी दिशा में मुड़े जातिवाद का राक्षस आगे खड़ा मिलेगा. समाज में व्याप्त जातिवाद आज एक नये रूप-रंग में हमारे सामने आ गया है. जातिवाद ने अपना चेहरा समय के साथ साथ बदल लिया है, अगर गांव...

डॉ. अम्बेडकर की राजनीति

डॉ. अम्बेडकर दलित राजनीति के जनक माने जाते हैं क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले दलितों के लिए राजनैतिक अधिकारों की लडाई लड़ी थी. उन्होंने ही भारत के भावी संविधान के निर्माण के संबंध में लंदन में 1930-32 में हुए गोलमेज़ सम्मलेन में दलितों को...

जाति: भारत से ब्रिटेन तक

रिटेन में जातिगत भेदभाव के विरूद्ध कानून बनाने की मांग और इसकी कोशिशों के विरोध ने एक बार फिर जाति-व्यवस्था और इसके पोषकों, समर्थकों के बारे में सोचने को विवश किया है. भारतीय, विशेष रूप से हिंदू समाज में जाति, जातिवाद, जातिगत भेदभाव और...

जब हम सवाल नहीं पूछ पाएंगे, तो क्या करेंगे?

दिल्ली में सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसला किया गया है. गुड़गांव के भी कुछ स्कूलों को बंद करने का फैसला किया गया है. हवा ही कुछ ऐसी है कि अब जाने क्या क्या बंद करने का फैसला किया जाएगा. हम जागरूक हैं....

कॉलेजियम सिस्टमः 85 प्रतिशत लोगों को न्याय से वंचित रखने का षडयंत्र

हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट के जजों द्वारा बनायी गयी 3-4 हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट के जजों की कमिटी का नाम ही कॉलेजियम है. शुरू में सोचा गया कि यह व्यवस्था ''मोहि ले चल'' की बिमारी से भिन्न होगी. लेकिन इसने भी ऐसा करना...

महिलाओं को हर कदम पर देेनी पड़ती है अग्निपरीक्षा!

इस महान देश में विवाह के माध्यम से पितृसत्ता का वर्चस्व तमाम रीति रिवाज, कायदा कानून से लेकर साहित्य और संस्कृति, धर्म कर्म में संस्थागत है. तो अब लगता है कि बलात्कार भी बहुत तेजी से विवाह की तरह संस्थागत है. अभी हाल में...

संविधान में संशोधन पर्याप्त नहीं, समाज को सोच बदलने की जरूरत

आज कल देश में समान नागरिक संहिता की बहस संसद से लेकर धर्मगुरूओं की पंचायत तक डिबेट का विषय बना हुआ है. लेकिन भारत में संविधान का कानून तो है, मगर जो संविधान धर्मनिरपेक्षता और अस्पृश्यता की बात करता है उसी देश में धर्म...

डॉ. लोहिया के समाजवाद को यादव परिवार ने कलंकित कर दिया

देश के महान समाजवादी विचारक और राजनीतिज्ञ डॉ. राममनोहर लोहिया के जीवन में विचार ही नहीं बल्कि चरित्र और प्रजातांत्रिक मूल्यों का सर्वाधिक महत्व था. वे राजनीति में शुद्ध आचरण के सबसे बड़े पैरोकार थे. उनके विचारों में अवसरवादिता को कोई जगह नहीं थी....

जन्मदिन विशेषः मैकाले की शिक्षा पद्धति ने दिया बहुजनों को आगे बढ़ने का अवसर

भारत में ऐसे विद्धानों की कमी नहीं है जो प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति का गुणगान करते नहीं थकते और लॅार्ड मैकाले की आधुनिक शिक्षा पद्धति को पानी-पी पीकर गालियां देते हैं. लेकिन इन्हीं लार्ड मैकाले की वजह से दलितों के लिए शिक्षा का रास्ता...

सब बेपेंदी के लोटे

पत्रकारिता और राजनीति की थोड़ी-बहुत समझ होने के बावजूद मुझे आज भी रीता बहुगुणा जैसे दल-बदल पर हैरत और खीज होती है. गुस्सा आता है कि कोई ऐसा अवसरवादी कैसे हो सकता है कि बिल्कुल उलट विचारधारा के साथ चला जाए. हालांकि कांग्रेस और...

करवा चौथः महिलाओं की भूख से पति को मिलेगी अमरता!

जम्बूद्वीप में दीर्घकाल तक रामराज्य स्थापित रहा, जहां पर पुरूषों को शक करने ,पत्नियों की अग्नि परीक्षा लेने तथा गर्भावस्था में भी उन्हें त्याग देने जैसे विशेषाधिकार प्राप्त थे. रामजी की कृपा से तब पुरूष शक्ति का आज जैसा क्षरण नहीं हुआ था. तब...

पढ़िए, बिग बॉस के प्रतिभागी ओम जी महाराज के बारे में एक पत्रकार का खुलासा

इसे पहचानिये, यह है ओम जी महाराज बिग बॉस का प्रतिभागी है. इसे मैं तबसे जानता हूं जबसे इसका दिल्ली में अवतरण हुआ था. उस वक्त मैं नई दुनिया दिल्ली में स्टेट कोआर्डिनेटर हुआ करता था. यह ओम जी महाराज जंतर-मंतर पर आशाराम बापू...

मीडिया से अछूता है आदिवासी समाज

पिछले महीने आई एक खबर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा. ये खबर थी एक आदिवासी दाना माझी की. वीडियो में अपनी पत्नी की लाश ढोता हुआ दाना मांझी अचानक से ही पूरे देश का सबसे अभागा और चर्चित व्यक्ति बन गया....
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ओपीनियन

January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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