दिल्ली में सीबीआई हेडक्वार्टर के ठीक बगल में है सूचना भवन. सूचना भवन की 10वीं मंज़िल ही देश भर के न्यूज़ चैनलों पर सरकारी निगरानी का ग्राउंड ज़ीरो है. हर दिन 24 घंटे तमाम न्यूज़ चैनलों पर निगरानी रखने के लिए 200 लोगों की...
हिन्दूवादी शक्तियों को हिन्दू धर्म से निरंतर अलग होते जा रहे दलित जातियों के लोगों के हितों की चिंता आज भी नहीं है, चिंता है तो बस इतनी कि हिन्दू धर्म से विघटित हुए लोगों को वापिस हिन्दू धर्म में कैसे मिलाया जाय. इस...
10 मार्च 2007 वह मनहूस दिन था ,जब मेरे दो पत्रकार साथियों ( अब्दुल हमीद बागवान और योगेंद्र सिंह पंवार ) को भीलवाड़ा पुलिस द्वारा कईं गंभीर धाराओं में दर्ज कराए गए एक मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया. मुझे सुबह सुबह तत्कालीन जिला कलेक्टर...
काले सावले वर्ण का, दुबला-पतला, लगभग 5 फीट ऊंचे अण्णाभाऊ साठे के शब्दों और आवाज में वो करश्मिाई जादू था, जिसे सुनने के बाद आम लोगों के रगों में लहर दौड़ पड़ती थी. अण्णा भाऊ महाराष्ट्र की सर जमी पर 1 अगस्त 1920 में...
एससी-एसटी एक्ट को लेकर दलित समाज के रोष और एकजुटता के आगे केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने घुटने टेक दिए हैं. सरकार ने एक्ट को पुराने और मूल स्वरूप में लाने का फैसला किया है. इस बारे में बुधवार 01 अगस्त को कैबिनेट...
भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह व भारत के प्रधान सेवक अपनी किसी भी सभा में यह कहने से नहीं चूकते कि भाजपा दलितों के साथ है। किंतु वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा बजरिए सुप्रीम कोर्ट अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 को...
जब एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति थे जो स्वयं एक प्रख्यात वैज्ञानिक भी रहे हैं और जो मिसाइल मैन के नाम से विख्यात थे,उन्होंने विजन 2020 किताब के माध्यम से भारत को सन् 2020 तक एक महा शक्ति बनाने का सपना देखा था।महाशक्ति...
मुजफ्फरपुर में समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली उनतीस बालिकाओं के यौन शोषण का खुलासा पूरे बिहार के लिए शर्म का विषय है। यौन शोषण की शिकार सभी लड़कियों की उम्र अठारह साल से कम है। शर्म का...
भारतवर्ष आरक्षण का देश है.कारण,धर्माधारित जिस वर्ण-व्यवस्था के द्वारा यह देश सदियों से परिचालित होता रहा है,वह वर्ण-व्यवस्था मुख्यतः शक्ति के स्रोतों-आर्थिक ,राजनीतिक और धार्मिक- के बंटवारे की व्यवस्था रही है.चूंकि वर्ण-व्यवस्था के प्रवर्तक विदेशागत आर्य थे इसलिए उन्होंने इसमें ऐसा प्रावधान रचा कि...
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन फिर से आग पकड़ने लगा है. आशंका है कि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो हालात और बिगड़ सकते हैं. राज्य में अगले साल चुनाव होने हैं, ऐसे में सरकार की मुश्किल ये है कि वह सरकारी नौकरियों...
वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर चौबे के दिवंगत होने की खबर का अभी एक पखवाड़ा भी नहीं हुआ था की खबर आई, तेजिंदर गगन नहीं रहे. मुझे याद है तेजिंदर गगन से मेरी पहली मुलाकात एक कार्यक्रम में हुई थी. वह एक राज्य संसाधन केंद्र के द्वारा...
अफवाहों और सुनी-सुनाई झूठी बातों में विश्वास करना अज्ञान और अंधविश्वास में डूबे मध्यमं युगीन अशिक्षित समाज की एक आम प्रवृत्ति रही थी किंतु लगता है कि पढ़-लिखकर साक्षर हो जाने और स्माकर्टफोन जैसे आधुनिक यंत्र का इस्तेमाल करने पर भी हम वैज्ञानिक चेतना...
सुभाष के. महाजन बनाम महाराष्ट्रस राज्य वाले एक मुकदमे में 20 मार्च को सर्वोच्चष अदालत ने एक फैसले में अदालत ने अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्या चार निवारण) अधिनियम (एससी–एसटी एक्ट ) के तहत एफआईआर लिखने से पहले शिकायतकर्ता के आरोपों की पुलिस उप अधीक्षक स्त–र...
दलितों व अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचार के आँकड़े भी तो देते मोदी जी.
केंद्र में मोदी सरकार के चार साल पूरे हो गये हैं. वर्ष 2014 में जब इस सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब जनता की उम्मीदें यूं ही आसमान पर नहीं थीं, बल्कि...
Jio Institute of Reliance Foundation नाम जानते हैं इस संस्थान का? या कोई फ़ोटो है इस संस्थान की ? या किसी स्टूडेंट को जानते हैं जो वहाँ पढ़ रहा है?? यक़ीनन कुछ नहीं पता होगा इस संस्थान के बारे में. लेकिन अंबानी को बिकी...
मैंने जब से होश संभाला है, हमेशा यही सुना कि हरेक सरकार ने गरीबों के हक में जीजान से काम किया है.... करती रही हैं. गरीबी और जातियों को मिटाने के नाम पर न जाने हर सरकार ने कितनी ही योजनाएं बनाईं किंतु समझ...
झारखंड के गुमला जिले के घाघरा प्रखंड की एक खबर के मुताबिक अपने आदिवासी सरना धर्म और आस्था के केंद्र मड़ई (देवी मंडप) पर होने वाले हिंदुत्ववादी हमलों और इन हमलावरों को प्राप्त राज्य की भाजपा सरकार के मौन समर्थन से आदिवासी समाज आहत...
आज से बमुश्किल दस साल पहले तक जब लड़कियां दस-बारह साल की हो जाती थी तो उन्हें एक लड़की के तौर पर देखा जाता था. उनके कपड़े और हावभाव को समाज बतौर लड़की देखने लगता था. लेकिन इन कुछ सालों में सब कुछ बदल...
अंग्रेजी में एक कहावत है, जिसका कामचलाऊ तर्ज़ुमा कुछ इस तरह होगाः “जो लोग मर गए हैं, वे अपनी कहानी नहीं कह पाते.”
अब आते हैं हकीकत पर. क्या वह 61 लोग, जो उत्तर प्रदेश में 20 मार्च 2017 से 7 जुलाई 2018 के बीच...
हिंदी पट्टी में बॉलीवुड के अस्पृश्य व अस्पृश्यता पर फिल्मों का भीषण अकाल रहा है. किसी भी सुपरस्टार जैसे दिलीपी कुमार, राजकुमार, राजेश खन्ना, मनोज कुमार या आज के हिंदी सिनेमा जगत के सुपरस्टार सलमान, आमिर, अमिताभ, धर्मेंद्र किसी ने भी अस्पृश्य समाज के व्यक्ति का किरदार नहीं निभाया...