लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने मोदी सरकारी जनविरोधी नीतियों की निंदा की है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की निरंकुशता और कानून का अनुचित उपयोग लोकतंत्र की हत्या है.
मायावती ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करने पर विभिन्न धाराओं में मुकदमें दर्ज करने की नई परम्परा शुरु हो गयी है. यह लोकतन्त्र का गला घोंटने जैसा है. भाजपा सरकार की तानाशाही कर रही है. दक्षिणी भारत के मशहूर अभिनेता प्रकाश राज पर मुकदमा और उत्तर प्रदेश के शामली में दलित युवक की इसी संबंध में गिरफ्तारी यह साबित करती है कि भाजपा सरकार निरंकुश होती चली जा रही हैं.
मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार ने दूरदर्शन और आकाशवाणी को ’हिज़ मोदी वायस’ बनाकर उसका महत्व ही समाप्त कर दिया है. जबकि प्राइवेट मीडिया चैनलों पर अप्रत्यक्ष नियन्त्रण करके उसकी स्वतन्त्रता को खत्म करने का प्रयास लगातार जारी है. इतना ही नहीं निष्पक्ष विचार रखने वाले लेखकों, साहित्यकारों व पत्रकारों को अलग-अलग ढंग से निशाना बनाया जा रहा है.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यह सब ऐसी घातक प्रवृत्ति है, जिससे लोकतन्त्र को खतरा पैदा हो रहा है. इस संबंध में न्यायपालिका का हस्तक्षेप होना चाहिए ताकि भाजपा सरकार निरंकुशता के व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा और आरएसएस की संकीर्ण सोच का ही परिणाम है कि समाज के दबे-कुचले लोगों को पहले जातिवादी और धार्मिक निरंकुशता का शिकार बनाया जाता है. गुजरात में गरबा का कार्यक्रम देखने पर दलित युवक की हत्या कर दी जाती है. दलित युवकों द्वारा मूंछ रखे जाने पर उन्हें सरकारी संरक्षण में अनेकों प्रकार की जुल्म-ज्यादती का शिकार बनाया जाता है.
मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार के मुखिया की ग़लत नीतियों के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त करने पर सरकारी निरंकुशता के तहत उसे जेल भेज दिया जाता है. जबकि खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाने वालों व अन्य संगीन अपराध करने वाले भाजपाई तत्वों का सात खून माफ कर दिया जाता है और उनको संरक्षण देने वाले हर प्रकार के बयान दिये जाते हैं. देश में यह विनाशक प्रवृत्ति बहुत तेज़ी से पनपती चली जा रही है, जो समाज व देश के लिये अत्यन्त ही घातक है. भाजपा एण्ड कम्पनी के लोग अपने आपको कानून व संविधान से ऊपर समझने लगे हैं, जिसके खिलाफ संघर्ष व लोगों का जागरुक होना ज़रुरी है.
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकारों द्वारा जनहित व जनकल्याण की घोर अनदेखी करने की प्रवृति का ही परिणाम है कि इनके तमाम मंत्रीगण व इनके बड़े नेता आदि जनसेवा को राजधर्म मानकर उस खास बड़ी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ निभाने के बजाय अपना समय व सरकारी संसाधन अन्यत्र ऐसी जगह बर्बाद करते हुये नज़र आते हैं जिसका कोई भी लाभ गरीबों, किसानों, बेरोजगार युवाओं व देश की आमजनता को मिलने वाला नहीं है.

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