भाजपा सांसद ने की चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर विविदित टिपप्णी!

नई दिल्ली। एग्जिट पोल्स में पिछड़ने के बाद से ही लोकसभा चुनाव के लिए आशंकित विपक्ष ईवीएम पर सवाल उठा रहा है. अब इस विवाद में भाजपा से सांसद रहे और हाल ही में कांग्रेस ज्वाइन करने वाले नेता उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट को भी घसीट लिया है. हाल ही में बीजेपी से कांग्रेस में शामिल हुए उदित राज ने शीर्ष अदालत पर विवादित टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया है. अपनी टिप्पणी में उदित राज ने कहा है- ‘सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं चाहता की वीवीपैट की सारी पर्चियों को गिना जाए. क्या वह भी धांधली में शामिल है. चुनावी प्रक्रिया में जब लगभग तीन महीने से सारा सरकारी काम मंद पड़ा हुआ है तो गिनती में दो-तीन दिन लग जाएं तो क्या फर्क पड़ता है.

उदित राज ने इस ट्वीट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी को भी टैग किया है. उदित राज ने सुप्रीम कोर्ट के साथ ही चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह बिक चुका है. आयोग पर ट्वीट करते हुए उदित राज ने लिखा, ‘बीजेपी को जहां-जहां ईवीएम बदलनी थी, बदल ली होगी. इसीलिए तो चुनाव 7 चरणों मे कराया गया. आप की कोई नहीं सुनेगा चिल्लाते रहिए, लिखने से कुछ नहीं होगा, रोड पर आना पड़ेगा. अगर देश को इन अंग्रेजों के गुलामों से बचाना है तो आंदोलन करना पड़ेगा साहब चुनाव आयोग बिक चुका है.’

सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद 21 विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग से 100 ईवीएम से वीवीपैट के मिलान की मांग को लेकर मिले थे. इसके अलावा कई जगहों पर ईवीएम की सुरक्षा का सवाल उठाया गया था. इस पर आयोग ने नेताओं से अपील की थी कि वे ईवीएम को लेकर भरोसे में रहें और मशीनें पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

सामने आया नया एग्जिट पोल, भाजपा को लग सकता है झटका

नई दिल्ली। एग्जिट पोल के अनुमानों को लेकर बीजेपी में जश्न का माहौल है. विपक्ष हालांकि अनुमानों को लेकर सहमा हुआ है लेकिन उसको यकीन है कि नतीजे एग्जिट पोल से अलग होंगे. इस बीच कांग्रेस पार्टी का अपना एग्जिट पोल भी सामने आ गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस एग्जिट पोल में भाजपा के 200 से कम सीटों पर सिमटने की बात कही जा रही है, जबकि एनडीए 230 सीटों पर रुक जाएगा. इस एग्जिट पोल में कांग्रेस को 140 सीटें मिलने का अनुमान बताया जा रहा है जबकि यूपीए 195 से अधिक सीटें जीत रहा है.

कांग्रेस ने यह आंकड़े देश के अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में मौजूद अपने 260 पर्यवेक्षकों, राज्य के प्रभारियों और स्थानीय नेताओं से इकट्ठा किए हैं. कांग्रेस को दक्षिण भारत से अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है, जबकि उत्तर भारत में उसे पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन करने का अनुमान है.

पार्टी के इस आंतरिक सर्वे के हिसाब से कांग्रेस को उम्मीद है कि यूपीए तमिलनाडु, केरल और पंजाब में अच्छा प्रदर्शन करेगी. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी को महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और हरियाणा में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है. कांग्रेस का मानना है कि यूपीए बिहार में 15, गुजरात में 7, तमिलनाडु में 34, केरल में 15, महाराष्ट्र में 22-24, कर्नाटक में 11-13, पश्चिम बंगाल में 2, हरियाणा में 5-6, राजस्थान में 6-7 और मध्य प्रदेश में 8-10 सीटें जीतेगी.

इसके अलावा कांग्रेस और यूपीए को उत्तर प्रदेश में 5, दिल्ली में 2, पंजाब में 9, चंडीगढ़ की सीट, छत्तीसगढ़ में 9, ओडिशा में 2, तेलंगाना में 2, जम्मू एवं कश्मीर में 2, हिमाचल प्रदेश में एक, गोवा में एक, झारखंड में 5, उत्तराखंड में 2, पूर्वोत्तर के राज्यों में 9-10, असम में 6, अरुणाचल प्रदेश में एक, मेघालय में 2 और नगालैंड में 1 सीट पर जीत दर्ज करने का अनुमान है.

कांग्रेस के सर्वे को एक बार सच के करीब माना जाए तो भाजपा को 200 से भी कम सीटें मिलने की बात कही गई है जबकि एनडीए के 230 सीट तक पहुंचने की संभवना जताई जा रही है. एग्जिट पोल के बाद अब कांग्रेस के अपने अनुमान सामने आने के बाद नतीजों को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है. हकीकत क्या रहने वाला है और नतीजे क्या होंगे यह 23 मई को दोपहर तक साफ हो जाएगा.

रिजल्ट के एक दिन पहले राहुल गांधी ने ट्विट कर दिया कार्यकर्ताओं को संदेश, देखिए क्या कहा

नई दिल्ली। 17वीं लोकसभा में किसकी सरकार बनने जा रही है, इसको सामने आने में अब 24 घंटे से भी कम समय बचा है. ऐसे में अब तक एग्जिट पोल पर चुप्पी साधे रहने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्विट कर कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष ने बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ‘फर्जी एग्जिट पोल’ से निराश नहीं हों और सतर्क रहें. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के लोग खुद और पार्टी पर विश्वास रखें क्योंकि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी.

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस पार्टी के प्रिय कार्यकर्ताओं, अगले 24 घंटे महत्वपूर्ण हैं. सतर्क और चौकन्ना रहें. डरे नहीं. आप सत्य के लिए लड़ रहे हैं. फर्जी एग्जिट पोल के दुष्प्रचार से निराश न हों. खुद पर और कांग्रेस पार्टी पर विश्वास रखें, आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी. जय हिन्द.’

इससे पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया था कि वे अफवाहों और एग्जिट पोल पर ध्यान ना दें और स्ट्रांग रूम तथा मतगणना केंद्रों पर डटे रहें. कार्यकर्ताओं को जारी ऑडियो संदेश में प्रियंका ने कहा था, ‘आप लोग, अफवाहों और एग्जिट पोल से हिम्मत मत हारिये. यह अफवाहें आपका हौसला तोड़ने के लिए फैलाई जा रही हैं. इस बीच आपकी सावधानी और भी महत्वपूर्ण बन जाती है. स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्रों पर डटे रहिए और चौकन्ने रहिए.’ उन्होंने कहा था, ‘ हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी और आपकी मेहनत का फल मिलेगा.’

गौरतलब है कि 19 मई को आए तकरीबन सभी प्रमुख एक्जिट पोल में एनडीए को बहुमत मिलने का अनुमान लगाया गया है. लेकिन नतीजे क्या होंगे यह 23 मई को सामने आ पाएगा.

आलिया भट्ट को लेकर सलमान खान ने कही दिल की बात

इस साल ईद पर सलमान खान, फिल्म भारत के साथ धमाका करने के लिए तैयार बैठे हैं। सलमान की इस साल की ये सबसे बड़ी फिल्म साबित होने वाली है। फिल्म का ट्रेलर और कई गाने रिलीज हो चुके हैं। फिल्म को लेकर लोगों का क्रेज देखने लायक है। आपको बता दें कि भारत की रिलीज के बाद सलमान खान, दबंग 3 में व्यस्त हो जाएंगे। इसके बाद सलमान खान जय लीला भंसाली की फिल्म ‘इंशाल्लाह’ में आलिया भट्ट के साथ नजर आएंगे। ‘इंशाल्लाह’ में सलमान-आलिया की जोड़ी पहली बार देखी जाएगी। इसी बीच हालिया में सलमान खान ने आलिया भट्ट के साथ काम करने लेकर एक सवाल किया गया, जिसका जवाब देते हुए एक्टर ने आलिया की जमकर तारीफ की। सलमान की नजर में आलिया के अंदर काफी टैलेंट है जो सलमान खान में उतना नहीं है।

मुंबई मिरर के साथ बातचीत में सलमान ने आलिया के बारे में कहा, ‘देखिए, वह कहां से कहां आ गई हैं। इस बात का क्रेडिट कोई और नहीं ले सकता है। अगर कोई कहे कि आलिया को मैंने बनाया है तो यह झूठ है। आलिया ने अपना टैलंट खुद चमकाया है।’ आलिया के साथ काम करने के बारे में पूछे जाने पर सलमान ने कहा कि आलिया टैलंट की गोदाम है जबकि उनके पास कोई टैलंट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘टैलंट की गोदाम और टैलंट के बंडल का मिलन होगा। असल में यहां कोई टैलंट नहीं है।’ इसके बाद सलमान ने कहा कि आलिया ने शानदार तरीक से खुद को स्टूडेंट से एक बेहतरीन एक्ट्रेस में तब्दील किया है। उसकी ग्रोथ का क्रेडिट सिर्फ उसी को जाता है। जो कोई यह कहे कि हमने उसको बनाया है, उसका विश्वास मत करना। आलिया ने खुद को तराशा है।

  • साभारः हिन्दुस्तान

जानिए, एग्जिट पोल और EVM को लेकर दिन भर कहां-कहां क्या हुआ

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Photo Credit- Patrika

एग्जिट पोल के बाद अब देश भर में evm को लेकर बवाल मचा हुई है. विपक्षी दलों के प्रत्याशी परेशान हैं और ईवीएम को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं. इस बीच पूरे दिन गहमा-गहमी का माहौल रहा. जानिए की आखिर evm और एग्जिट पोल को लेकर दिन भर क्या-क्या.

  • उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर में सोमवार को गठबंधन के उम्मीदवार अफजल अंसारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे. उनका आरोप था कि गाजीपुर लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभा आती हैं और हर विधानसभा की ईवीएम 5 अलग-अलग जगहों पर है. इसके बाद पांच लोगों को ईवीएम की निगरानी करने की अनुमति दे दी गई है. यूपी केचंदौली (Chandauli Lok sabha Seat) में भी ईवीएम को लेकर गठबंधन समर्थक धरने पर बैठ गए. आरोप है कि गाड़ी से लाई गई कुछ ईवीएम को काउंटिंग स्थल के एक अलग कमरे में रखा गया.
  • वहीं उत्तर प्रदेश के डुमरियागंज में सपा-बसपा कार्यकर्ताओं ने पिछले मंगलवार को ईवीएम से भरा एक मिनी ट्रक पकड़ा. इनका आरोप है कि इस ट्रक को ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाया जा रहा था. साथ ही इनका आरोप है कि बीजेपी के लोगों ने इन ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ की है.
  • बिहार में भी कुछ जगहों पर ईवीएम की ‘संदिग्ध आवाजाही’ का आरोप लगाया गया है. लेकिनचुनाव आयोग (Election Commission)का कहना है कि सभी मामलों को सुलझा लिया गया है, ये आरोप बेबुनियाद हैं.
  • विपक्षी दलों के तमाम नेता भी पूरे दिन सक्रिय रहें. 19 विपक्षी दलों ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक की. यह बैठक आंध्र प्रदेश के सीएम और टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई. बैठक में कांग्रेस से अहमद पटेल, अशोक गहलोत, गुलाम नबी आजाद व अभिषेक मनु सिंघवी, माकपा से सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओब्रायन, टीडीपी से चंद्रबाबू नायडू, आम आदमी पार्टी से अरविंद केजरीवाल, सपा से रामगोपाल यादव, बसपा से सतीश चंद्र मिश्रा व दानिश अली, द्रमुक से कनिमोई, राजद से मनोज झा, राकांपा से प्रफुल्ल पटेल व माजिद मेमन और कई अन्य पार्टियों के नेता शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक इस मीटिंग में ईवीएम के साथ वीवीपैट के 100 फीसदी मिलान की मांग को लेकर विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग से मुलाकात पर चर्चा हुई. तमाम दलों के नेता अपनी शिकायतों और मांगो को लेकर चुनाव आयोग पहुंचे.

एग्जिट पोल को लेकर मामला सिर्फ राजनीतिक दलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग में भी इसको लेकर दिन भर हलचल रही. पहले बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट की-

  • चेन्नई के एक एनजीओ की ओर से दाखिल जनहित याचिका जिसमें ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की 100 फीसदी मिलाने की मांग की गई थी, उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की बेंच पहले ही इस पर फैसला कर चुकी है.

चुनाव आयोग में भी अफरा-तफरी का माहौल रहा. चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों ने हलचल मचा दी है. बीते दिनों चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को लगातार मिली क्लीन चिट और विपक्षी नेताओं को भेजे गए नोटिस पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने कहा था कि आचार संहिता से जुड़े सभी कागजों को सार्वजनिक किया जाए. इसी मुद्दे पर आज चुनाव आयोग में बड़ी बैठक हुई थी, जिसमें अशोक लवासा की आपत्तियों को खारिज कर दिया गया.  इस बैठक में 2-1 के नतीजों से तय हुआ है कि अशोक लवासा ने जो आचार संहिता से जुड़े मसले को सार्वजनिक करने की मांग की थी, वह पूरी नहीं होगी.

इन सबके बीच एग्जिट पोल से सबसे ज्यादा सकते में आई समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मतगणना के लिए अपने प्रत्याशियों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं. बसपा ने अपने प्रत्याशियों से कहा कि काउंटिग एजेंट को पीठासीन अधिकारी के द्वारा प्राप्त की गई EVM को काउंटिग के दौरान खुलने से पहले हर हाल में (EVM,  BUCU और VVPAT) नंबर का मिलान कराएं. इसके साथ यह सुनिश्चित कर लें कि इस्तेमाल की गई ग्रीन पेपर सील व स्पेशल टैक का नंबर वही है जो EVM,  BUCU और VVPAT में पीठासीन अधिकारी द्वारा अंकित किए गए हैं. ऐसे में दोनों नंबर सही पाए जाने पर ही EVM को खुलने की अनुमति प्रदान की जाए. यही बात समाजवादी पार्टी ने भी अपने प्रत्याशियों से कही है.

जी हां, चमार चमार होते हैं

मई 2019 के दूसरे सप्ताह में फेसबुक पर एक पोस्ट वायरल होती रही, जिसमें एक लड़की अपने दोस्तों से बात करते दिख रही थी। इस बातचीत में इस लड़की ने जो कहा था उसे यहां ज्यों का त्यों रखा जा रहा है :

‘पहला लड़का – अ अब बोलो दूसरा लड़का – मैं मनीष सर को बोल दूंगा, ऐसा बोला। पहला लड़का – बोलो, बोलो, बोलो। लड़की (जिसका नाम बाद में पता चला रूचि सिंह है)- मनीष सर के सामने बोला था एक दिन। मैंने कहा सर, मैंने कहा या तो वो थे, अरे.. वह तो अनमोल सर थे। मैंने कहा, यार गवर्नमेंट जॉब नहीं लग रही है, साला चमार पैदा होना चाहिए था। गवर्नमेंट जॉब तो मिल जाती है एटलिस्ट। (अपने सिर की तरफ इशारा करते हुए) चमारों को यहां बिठा दिया, जरनल वालों को नीचे कर दिया।’ फिर इसने कहा, ‘चमार चमार होते हैं। उनकी कोई औकात नहीं होती है।’ ‘पहला लड़का – और? रूचि सिंह – मेरे को कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे काम बहुत करे हैं।’

सर्वप्रथम, इस लड़की के बोलों पर बात की जाए। इस ने सीधे-सीधे चमार का नाम लेकर अपनी घृणा दिखाई है। इस ने किसी अन्य दलित जाति का नाम नहीं लिया। इस का क्या अर्थ है? इस बात का केवल और केवल एक ही अर्थ है की दलित का अर्थ चमार होता है और कुछ नहीं। यह बात की सभी दलितों को गांठ लेनी चाहिए। दरअसल, बाकी अन्य दलित जातियां पेशागत हैं। तभी घृणा से ओत – प्रोत इस लड़की सहित हर वर्णवादी चमार का प्रयोग गाली के तौर पर करता पाया जाता है। इसमें सामंत के मुंशी का नाम सबसे ऊपर है।

असल में हुआ क्या है, आरक्षण से दलितों को कुछ नौकरियां मिलने लगी हैं और यही वर्णवादियों को सहन नहीं हो पा रहा। आए दिन ये आरक्षण को कोसते पाए जाते हैं। इस संदर्भ में कुछ दलितों का यह तर्क स्वीकार करने लायक नहीं है कि ‘इसे चमार से शादी कर लेनी चाहिए गवर्नमेंट जॉब मिल जाएगी।’ यह कथन अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

सोचा जाए, अगर यह लड़की प्रेम विवाह के नाम पर किसी चमार लड़के से विवाह कर ले तो उस घर का माहौल कैसा बनेगा? यह कभी भी अपने पति सहित परिवार वालों को गाली के रूप में चमार संबोधित कर बैठेगी। ऐसे में उन की क्या हालत होगी? इस का चमार पति आत्महत्या कर लेगा या मानसिक अवसाद का शिकार हो जाएगा।

ऐसे ही, अगर कोई चमार की बेटी इस लड़की के भाई से विवाह कर बैठे तो इस के जैसी ननद तो सीधे-सीधे उसे चमारी कह कर संबोधित करेगी। ऐसे में उस लड़की की ऐसी मानसिक स्थिति कैसी बनेगी, क्या वह पागल नहीं हो जाएगी? अपनी आलोचना की पुस्तक ‘चमार की बेटी रुपा’ में महान आजीवक चिंतक डॉ. धर्मवीर ने इस का अच्छे से खुलासा किया हुआ है।

तो जाति के विनाश के नाम पर प्रेम और अंतरजातीय विवाह का समर्थन करने वाले दलितों की मानसिक स्थिति का भी अध्ययन करना ही चाहिए। ये दलित बच्चों को मानसिक अवसाद में धकेलना चाहते हैं। ऐसे प्रेमवादियों और गैर दलितों से स्वैच्छिक रोटी- बेटी के रिश्ते की बात करने वालों से दलितों को सावधान रहने की जरूरत है।

असल में, इस लड़की और वर्णवादियों की ऐसी सोच एक दिन में नहीं बनी है। वर्णवादियों के हर घर की कमोवेश यही स्थिति है। इन के घर नफरत की पाठशाला हैं, जिनमें इन के बच्चों को भेदभाव का पाठ पढ़ाया जाता है। इन वर्णवादियों -अछूतवादियों के घर नाज़ियों के घरों के समान हैं जहां यहूदियों के प्रति जहर घोला जाता था‌। अब सोचना दलितों को है कि इन भारतीय नाज़ियों से कैसे निपटा जाए? हां, यह पक्का है कि केवल कानून बना कर इस तरह की नफरत से निपटा नहीं जा सकता। वैसे भी घृणा से भरी इस लड़की ने गवाही दी है कि ‘ऐसे काम बहुत करे हैं।’

इस द्विजवादी लड़की का यह कहना कि ‘चमारों को सिर पर बिठा रखा है’ आपत्तिजनक है। इसलिए, क्योंकि चमारों ने नौकरियों में जो कुछ हासिल किया है वह अपनी मेहनत और ईमानदारी से हासिल किया है। सरकार से जुड़े हर क्षेत्र में चमारों की उपस्थिति इनकी लगन और मेहनत का परिणाम है। इसी बात को समझ कर वर्णवादियों ने उदारीकरण के नाम पर प्राइवेटाइजेशन का जुमला छेड़ा हुआ है, जहां पूरी तरह से लालावाद चलता है। क्योंकि, इन की नालायक औलादें प्रतियोगी परीक्षाओं में चमारों से मुकाबला नहीं कर सकतीं। यह बात शर्त लगा कर कही जा रही है कि इस नफरत से भरी लड़की को किसी भी हालत में सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती। इसी को ही नहीं बल्कि प्राइवेट स्कूलों की टीचरों को प्रतियोगिता के माध्यम से लिया जाए तो दूध का दूध – पानी का पानी हो जाएगा। इन परीक्षाओं का जिम्मा अगर किसी निष्पक्ष एजेंसी को दे दिया जाए तब इन की सारी मेरिट की पोल खुल जाएगी।

सभी दलितों ने इस बात को अच्छे से पहचाना है कि इसके जैसी टीचर के कारण रोहित वेमुला को आत्महत्या करनी पड़ी। यह सच है कि विद्यालयों- महाविद्यालयों में रूचि सिंह जैसे नस्लवादी अध्यापक भरे पड़े हैं। जो हर साल हजारों दलित छात्र – छात्राओं को स्कूल – कॉलेज छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं। इस पर अगर सर्वे किया जाए तो भारतीय शिक्षा व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो सकती है।

इधर कुछ इसी तरह के और भी वीडियो आ रहे हैं, जिन में चमार का नाम ले कर गालियां दी गई हैं। यह नए कहे जा रहे भारत की असली तस्वीर है। कुछ घृणावादी यह कहते पाए गए हैं कि ‘चमार को चमार नहीं तो क्या कहेंगे?’, पूछना यह है कि चमार तो किसी को जातिगत संबोधन से पुकारता नहीं तब इन के पेट में मरोड़ क्यों उठ रही है? इन की इस घृणा के पीछे क्या वजह है? आरक्षण तो इस का कारण हो नहीं सकता, क्योंकि घृणा तो वर्णवादियों के दिलो-दिमाग में हजारों वर्षों से भरी पड़ी है। फिर, असली बात क्या है? असल में यहां जारकर्म का सिद्धांत लागू किया जा सकता है, जिस में चमार तो चमार ही होता है।

बताया जाए, चमार चमार ही होते हैं। इनके मनों में किसी के प्रति घृणा, नफरत और हिंसा के भाव नहीं होते‌। चमार पूरी मानवता में विश्वास करते हैं। यही वजह है कि वर्णवादी – नस्लवादी द्विज चमारों से खार खाए बैठे रहते हैं।

फिर, जो लोग यह कहते हैं कि आजकल के युवा जात-पात नहीं मानते तो इन्हें इस लड़की का दिमाग और चेहरा अच्छे से देख लेना चाहिए। यह द्विज युवा का प्रतिनिधि चेहरा है। तो जिस किसी को यह वहम है कि वर्णवादी अर्थात जातिवादी सुधर जाएंगे उन्हें यह बात अपने दिमाग से निकाल ही देनी चाहिए।

इस में आखरी बात जो बतानी है वह यह है, चमार शब्द को इतनी ताकत दे दो कि इस के अर्थ बदल जाएं। इस रूप में चमार शब्द आजीवक में बदल रहा है। इसके बाद क्या होगा किसी को बताने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

  • लेखकः कैलाश दहिया 

शरद पवार ने किया फोन लेकिन जगन मोहन रेड्डी ने नहीं की बात

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वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल जिस पार्टी को बढ़त लेता हुआ दिखाई दे रहा है, वह पार्टी जहां जश्न में डूबी है तो जिन्हें सीटें नहीं मिलती दिख रही हैं, वो पार्टियां परेशान हैं. इसी बीच विपक्षी पार्टियां अन्य दलों के नेताओं से लगातार संपर्क में हैं. लेकिन बढ़त ले रहे दल फिलहाल किसी खेमे में दिखना नहीं चाह रहे हैं. खबर है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को यूपीए की ओर से वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी से फोन पर बात करने की कोशिश की. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जगन रेड्डी ने पवार से बात नहीं की.

माना जा रहा है कि आंध्र प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन कर रहे जगन मोहन रेड्डी 23 मई को आने वाले नतीजों से पहले किसी भी दल के साथ खड़े नजर नहीं आना चाहते. रेड्डी नतीजों से पहले अपना पत्ता नहीं खोलना चाहते हैं. हालांकि, एग्जिट पोल में वाईएसआर कांग्रेस को टीडीपी से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि जगन को अपने साथ लाया जाए.

कांग्रेस के साथ एनसीपी का गठबंधन है और यूपीए की ओर से ही शरद पवार जगन मोहन से फोन कर बात करना चाहते थे, लेकिन जगन इसके लिए तैयार नहीं हुए. ऐसा लग रहा है कि वे चुनाव नतीजे आने का इंतजार कर रहे हैं और तब तक किसी से बात करना नहीं चाहते हैं. बता दें कि टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने पिछले सप्ताह अपने दिल्ली दौरे पर शरद पवार से दो बार मुलाकात की थी.

पुण्यतिथि पर प्रियंका ने किया पिता राजीव गांधी को याद, शेयर की बचनप की तस्वीर और कविता

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पिता राजीव गांधी के साथ प्रियंका गांधी ने अपने बचपन की फोटो शेयर की है

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री और देश में कंप्यूटर क्रांति के जनक राजीव गांधी की आज 28वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर पूरा देश उनको याद कर रहा है. मंगलवार को सुबह ही राजीव गांधी की पत्नी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा राजीव गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

इस मौके पर राजीव गांधी की बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार सुबह अपने पिता की याद में ट्वीट करते हुए एक पुरानी तस्वीर साझा की. प्रियंका ने इस तस्वीर का कैप्शन दिया ‘आप हमेशा मेरे हीरो रहेंगे’. अपनी इस तस्वीर के साथ प्रियंका गांधी ने मशहूर कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता भी साझा की.

प्रियंका ने जिस तस्वीर को साझा किया है, वह काफी पुरानी है. जिसमें प्रियंका की तस्वीर काफी छोटी उम्र वाली है. प्रियंका ने तस्वीर के साथ हरिवंश राय बच्चन की ‘अग्निपथ..अग्निपथ..अग्निपथ’, वाली कविता साझा की है.

आपको बता दें कि राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें याद कर रहा है. गांधी परिवार के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अलावा कांग्रेस के कई दिग्गजों ने राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी. इन सभी के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर राजीव गांधी को श्रद्धांजलि दी.

मायावती ने बड़े ब्राह्मण नेता को पार्टी से निकाला

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नई दिल्ली। एग्जिट पोल आने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने एक बड़ी कार्रवाई की है. पार्टी ने अपने पुराने सिपाहसलार रहे रामवीर उपाध्याय को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इसके साथ ही उन्हें पार्टी के मुख्य सचेतक पद से भी हटा दिया गया है. उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है.

पार्टी महासचिव मेवालाल गौतम ने कहा कि रामवीर उपाध्याय लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधि गतिविधियों में शामिल थे. उन्हें हिदायत दी गई थी, लेकिन रामवीर ने आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़ समेत कई सीटों पर खड़े किए गए पार्टी प्रत्याशियों का खुलकर विरोध किया और विरोधी पार्टी के प्रत्याशियों का समर्थन किया.

जिन सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशियों के विरोध का आरोप रामवीर उपाध्याय पर लगा है, उनमें से अधिकतर सीटें आजतक और एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल में बीजेपी के पास जाती दिख रही है. सर्वे में आगरा, फतेहपुर सीकरी, अलीगढ़, हाथरस में बीजेपी सबसे अधिक पॉपुलर पार्टी दिख रही है. बीते कई दिनों से रामवीर उपाध्याय के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन ऐसा करने पर उनकी विधायकी जा सकती थी. अब माना जा रहा है कि रामवीर उपाध्याय बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. रामवीर उपाध्याय के भाई मुकुल उपाध्याय पिछले साल बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे.

इस  कार्रवाई के पीछे वे तस्वीरें भी मानी जा रही हैं, जो लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. ये तस्वीरें आगरा लोकसभा सीट पर मतदान से पहले की हैं, जिसमें रामवीर उपाध्याय आगरा से भाजपा प्रत्याशी एस.पी. सिंह को गले लगाते दिखे थे.

एग्जिट पोल की बहस और ग्राउंड रिपोर्टिंग का मेरा अनुभव

एग्जिट पोल के नतीजों की बहस के बीच मुझे पिछले दिनों चुनाव के दौरान अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के किस्से याद आ रहे हैं. पहले दो सच्ची घटनाएं, फिर बाकी बात.

एग्जिट पोल को लेकर मुझे एक अनुभव गोरखपुर में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हुआ. मैं एक छोटे कस्बे के बाजार पर रुका. वहां चार-पांच गांव के लोग जरूरत का सामान लेने आते हैं. उन गांवों में ज्यादातर निषाद समाज के लोगों की आबादी थी. चूंकि गोरखपुर में निषाद वोट बड़ा फैक्टर था, सो वह मेरे लिए अहम था. मैंने एक सब्जी का दुकान लगाने वाली महिला से पूछा- “अम्मा किसको वोट दोगी?” अम्मा ने बोला- “मोदी के देम” मेरे साथ मेरे बड़े भाई राजकुमार थे। जब मैं वहां से हटकर किसी और से बात कर रहा था, भाई ने उस महिला से जानना चाहा कि आखिर वो मोदी को वोट क्यों देगी? उसने कहा- “देब त हम साईकिल पर, लेकिन इ चैनल वाला सब मोदिए के हउवन ओही से मोदी के कह दिहली ह.” (दूंगी तो मैं साईकिल पर ही लेकिन ये चैनल वाले सब मोदी के आदमी हैं इसलिए उनको मोदी बोल दिया।)

दूसरी घटना भी गोरखपुर जिले के ही बांसगांव लोकसभा क्षेत्र की है. बांसगांव लोकसभा गोरखपुर के कुछ विधानसभा क्षेत्र और देवरिया के कुछ विधानसभा क्षेत्र को लेकर बनाया गया है. यहां के कौड़ीराम बाजार पर जब मैं लोगों से यह जानने की कोशिश कर रहा था कि इस लोकसभा क्षेत्र में किसकी जीत होगी, तब एक दिलचस्प वाकया हुआ. जब मैंने एक युवा से पूछा कि कौन जीत रहा है, तो उसने भाजपा का नाम लिया. तब उसके ठीक बगल में खड़े एक अधेड़ ने उसकी बात  बीच में ही काटते हुए कहा कि “नहीं-नहीं गठबंधन जीत रहा है.” उसके अपने तर्क भी थे कि गठबंधन के प्रत्याशी (सदल प्रसाद, बसपा) आखिर क्यों जीतेंगे.

यह मेरे लिए एक सुखद अहसास इसलिए भी था क्योंकि गठबंधन को सपोर्ट करने वाला व्यक्ति एक औसत व्यक्ति था जो अपने अधिकारों को लेकर जागरुक था और अब तर्क करना सीख रहा था.

इन दोनों घटनाओं का जिक्र मैंने इसलिए किया क्योंकि एग्जिट पोल करने वालों की पहुंच क्या इन लोगों तक हो पाती है? क्या सर्वे करने के दौरान ऐसा करने का दावा करने वाले लोग इन लोगों की राय जानने की कोशिश करते हैं? ऐसा होता होगा, यह संभव नहीं लगता. मैंने खुद पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के तकरीबन दर्जन भर लोकसभा क्षेत्रों का सर्वे किया. इसके लिए मैं सिर्फ उन जगहों को चुन रहा था, जहां एक मिली जुली आबादी मिल जाए. जैसे शहर का प्रमुख चौराहा, बस स्टैंड और छोटे कस्बों के बाजार जहां कई गांवों के लोग हाट-बाजार करने पहुंचते हैं. जाहिर है कि इन जगहों पर हर जाति और धर्म के लोग मिल रहे थे. भारत में एक सुविधा है कि आप किसी के पूरे नाम से स्थानीयता को देखते हुए उसकी जाति के बारे में समझ सकते हैं. मैं भी यही कर रहा था. और मुझे यह साफ दिखा कि समाज जाति और धर्म के हिसाब से खानों में बंटा था.

साफ महसूस हो रहा था कि  बेसिक तौर पर दलित, पिछड़े और मुसलमान गठबंधन के साथ थे तो अगड़ी जातियां भाजपा के साथ. मैं जातियों के भीतर जाति में नहीं जा रहा, लेकिन शुरूआती सच्चाई यही देखने को मिली. ऐसे में उत्तर प्रदेश का आंकलन करने पर ज्यादातर एग्जिट पोल का आंकलन कि गठबंधन को 18-20 सीटें मिलेंगी, समझ से परे है. यह ऐसा बयान है जिसका कोई आधार समझ में नहीं आ रहा.

इसी तरह बिहार में 80 फीसदी सीटें एनडीए जीत जाएंगी यह भी बात समझ से परे है, क्योंकि 2014 में विजयी रथ पर सवार भाजपा को सबसे पहले बिहार ने ही रोका. और पिछले सालों में राष्ट्रीय जनता दल और तेजस्वी यादव की लोकप्रियता बिहार में जिस तरह बढ़ी है, उसने नीतीश कुमार की सत्ता को बड़ी चुनौती दी है. कुछ एग्जिट पोल वाले तो बिहार की सभी सीटें एनडीए को दे रहे हैं. यह एक अनोखी बात है, वह भी तब जब विपक्ष राफेल, बेरोजगारी, पंद्रह लाख और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरने में कामयाब रहा है.

एग्जिट पोल को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हर जागरूक और राजनीतिक समझ रखने वाला व्यक्ति इस बात को लेकर परेशान है कि भाजपा को आखिर इतनी सीटें आएंगी तो आएंगी कहां से? खैर 23 मई को सारी बात साफ हो जानी है, लेकिन अगर उस दिन भी नतीजे ऐसे ही रहें जैसे कि एग्जिट पोल दिखा रहे हैं तो देश में एक नई राजनैतिक बहस शुरू हो जाएगी.

 

UP Exit Poll 2019: के बाद आज का मायावती का दिल्ली दौरा रद, लखनऊ में ही रहेंगी

लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 की सात चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब मतदाताओं से ज्यादा राजनीतिक पार्टियों को 23 मई को होनी वाली मतगणना का बेसब्री से इंतजार है. रविवार को अंतिम चरण के बाद आए तमाम एग्जिट पोल के रुझानों ने राजनीतिक दलों की बेचैनी और बढ़ा दी है. विशेष तौर पर विपक्षी पार्टियों को 23 मई की मतगणना के दौरान किसी चमत्कार का इंतजार है.

एग्जिट पोल के रुझानों के बाद राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी भी शुरू कर दी है. वहीं कुछ दल वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं. इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती का आज दिल्ली जाने का कार्यक्रम था. कल देर शाम एग्जिट पोल आने के बाद उनका दिल्ली जाने का यह कार्यक्रम रद हो गया.

दिल्ली में आज मायावती की संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुलाकात होनी थी. दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने एग्जिट पोल के रुझान आने के बाद सभी विपक्षी पार्टियों से एकजुट रहने की अपील की है.

बसपा प्रमुख मायावती की आज दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात होनी थी. इनके बीच मुलाकात की खबरों के बीच बसपा ने कहा है कि उनकी कोई बैठक नहीं है. पहले बताया जा रहा था कि मायावती सोमवार को राहुल और सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगी. लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कांग्रेस पर मायावती के तीखे हमलों के बाद इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा था, लेकिन बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि मायावती जी का आज दिल्ली में कोई प्रोग्राम या बैठक नहीं है. वह लखनऊ में रहेंगीं.

मायावती ने लोकसभा में प्रचार के दौरान भाजपा व कांग्रेस दोनों पर लगातार हमला बोला था. मायावती ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ा है. यूपी के गठबंधन में कांग्रेस को बाहर रखने के बाद भी मायावती ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली में कांग्रेस को वोट दें. सपा-बसपा ने इन दोनों सीटों से अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.

देश में गैर भाजपा व कांग्रेस की सरकार के गठन का प्रयास करने में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सबसे सक्रिय हैं. लखनऊ में अखिलेश यादव व मायावती से मिलने के बाद दिल्ली में राहुल गांधी व अन्य नेताओं से मिले. लखनऊ आने से पहले वह शरद पवार, सीताराम येचुरी, शरद यादव तथा अरविंद केजरीवाल से भी मिले थे. नायडू विपक्षी पार्टियों के नेताओं से मुलाकात कर विपक्ष को एक करने में प्रयास में लगे हैं. माना जा रहा है कि कांग्रेस अब तीसरे मोर्चे के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश में जुट गई है.

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रैलियों में खूब दिखी गठबंधन की एकजुटता, मायावती और अखिलेश ने की 21 साझा रैली

बसपा, सपा व रालोद गठबंधन की एका केवल उम्मीदवार उतारने तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके पक्ष में चुनावी माहौल बनाने के लिए मायावती, अखिलेश व अजित सिंह ने तपती गर्मी में खूब पसीना बहाया. यूपी में मायावती व अखिलेश ने कुल 21 साझा चुनावी रैलियां कीं. यूपी में साझा रैली की शुरुआत पश्चिमी यूपी के देवबंद सहारनपुर से शुरू हुई और समापन पूर्वांचल के चंदौली सीट से हुआ.

मायावती की नजर प्रदेश के बाहर भी रही: बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी में सपा व रालोद से गठबंधन किया. बसपा यूपी में 38 सीटों पर मैदान में उतरी. बसपा ने यूपी के बाहर अन्य प्रदेशों में भी उम्मीदवार उतारे. मायावती ने चुनावी अभियान की शुरुआत 2 अप्रैल को भुवनेश्वर ओडिसा से की थी. वह लगातार पांच दिनों तक यूपी के बाहर चुनावी सभाओं को संबोधित करती रहीं.

यूपी लौटने के बाद पहली संयुक्त साझा रैली देवबंद में हुई. पश्चिमी यूपी की यह पहली चुनावी सभा 7 अप्रैल को सहारनपुर में हुई. इसमें मायावती के साथ सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद मुखिया अजित सिंह ने उनके साथ मंच को साझा किया.

यूपी में हर दिन दो-दो सभाएं :मायावती व अखिलेश ने लोकसभा चुनाव में अगर देखा जाए तो प्रत्येक दिन अमूमन दो-दो चुनावी सभाएं की. दूसरे चरण में 16 अप्रैल को अगरा में संयुक्त रैली हुई. तीसरे चरण में बदायूं, मैनपुरी, रामपुर, फिरोजाबाद व बरेली में रैलियां हुईं.

चौथे चरण में कन्नौज व जालौन के साथ 30 अप्रैल को लखीमपुर खीरी व लखनऊ में अकेले रैलियां कर माहौल बनाया. इसके बाद के चरणों में बाराबंकी, जौनपुर, भदोही, आजमगढ़ में संयुक्त चुनावी रैलियां करके मायावती व अखिलेश ने गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाया.

पूर्वांचल की सीटों पर खासा ध्यान :बसपा सुप्रीमो व सपा प्रमुख ने गठबंधन उम्मीदवारों के पक्ष में उम्मीदवार बनवाने के लिए पूर्वांचल पर खासा ध्यान दिया. किसी जमाने में पूर्वांचल सपा-बसपा का गढ़ हुआ करता था, लेकिन 2014 के चुनाव में आजमगढ़ को छोड़ दिया जाए तो सभी सीटों पर भाजपा जीती. इसीलिए 13 से 17 मई तक गठबंधन की साझा रैलियां अमूमन रोजाना हुईं. प्रचार बंद होने से एक दिन पहले 16 मई को गठबंधन के तीनों प्रमुख नेता मायावती, अखिलेश व अजित सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रैली की और प्रचार समाप्त होने के अंतिम दिन यानी 17 मई को मिर्जापुर व चंदौली में गठबंधन ने रैलियां की.

आयोग के प्रतिबंध पर 48 घंटे रहीं मौन देवबंद सहारनपुर में मायावती द्वारा दिए गए एक बयान के बाद चुनाव आयोग ने 48 घंटे का प्रतिबंध भी लगाया. मायावती को इसके चलते 48 घंटे खामोश भी रहना पड़ा, लेकिन प्रतिबंध शुरू होने से पहले रात में 9 बजे पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि साजिश के तौर पर प्रतिबंध लगाया गया है.

खूब दिखा तालमेल गठबंधन के तीनों नेताओं मायावती, अखिलेश व अजित सिंह के बीच चुनावी प्रचार के दौरान खूब तालमेल दिखा. चुनाव अभियान के दौरान मायावती गठबंधन की बड़ी नेता बनकर उभरीं. मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव की सभा हो या कन्नौज में डिंपल यादव या फिर कहें अखिलेश यादव की सीट पर आजमगढ़ में हुई चुनावी सभा, मायावती सभी में अहम रोल में नजर आईं.

मायावती ने यूपी के बाहर भी माहौल बनाया 2 अप्रैल ओडिसा के भुवनेश्वर 3 अप्रैल आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा 4 अप्रैल हैदराबाद 5 अप्रैल महाराष्ट्र नागपुर 6 अप्रैल हरिद्वार व उद्धमसिंह नगर 7 अप्रैल यूपी के देवबंद सहारनपुर में पहली साझा रैली 8 अप्रैल को हापुड़ व नोएडा साझा रैली 17 मई को चंदौली में हुई आखिरी सभा

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मायावती से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव

बसपा प्रमुख मायावती के आवास पर अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। 23 मई को मतगणना के बाद नतीजें चाहे जिसके पक्ष में आएं एक्जिट पोल ने विपक्ष की धड़कन बढ़ा दी है. विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जहां तमाम विपक्षी नेताओं से मिल रहे हैं तो इसी बीच सोमवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बसपा प्रमुख मायावती से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे की मुलाकात हुई. बैठक के बाद मीडियाकर्मियों ने अखिलेश यादव से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन अखिलेश यादव ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.

हालांकि जैसा कि समझा जा सकता है कि इस मुलाकात में दोनों के बीच एक्जिट पोल के बाद की स्थिति और आगामी 23 मई तक की रणनीति पर बात की गई. 21 मई को सोनिया गांधी ने भी विपक्ष की बैठक बुलाई है, खबर है कि दोनों नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई. एक्जिट पोल को लेकर दोनों नेताओं ने अब तक कोई भी अधिकारिक बयान नहीं दिया है.

इससे पहले दिल्ली में विपक्ष के नेताओं से मिलने के बाद तेदेपा अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने भी शनिवार शाम लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी के दफ्तर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की. नायडू लखनऊ एअरपोर्ट से सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलने उनके पार्टी ऑफिस पहुंचे थे, जहां अखिलेश यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इस मुलाकात के दौरान सपा के दफ्तर में पार्टी नेताओं की भीड़ रही.

गौरतलब है कि एग्जिट पोल में यूपी में भाजपा को सपा- बसपा- रालोद गठबंधन पर भारी पड़ता दिखाया गया है. छह सर्वे के हिसाब से देखें तो बीजेपी को औसतन 53 सीटें व गठबंधन को 25 सीटें मिलती दिख रही हैं. कांग्रेस को 2 सीटें मिलती दिख रही हैं. सर्वे में सिर्फ एबीपी निल्सन ने ही गठबंधन को एनडीए से ज्यादा 56 सीटें दी है. बताते चलें कि 2014 में भाजपा गठबंधन को उत्तर प्रदेश से 73 सीटें मिली थीं.

हंगामे के बीच मनुवादियों की बस्ती से लौटी दलित की बारात

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प्रतीकात्मक चित्र

श्योपुर। अनुसूचित जाति वर्ग के दूल्हे को दबंगों ने बस्ती के बाहर ही रोक दिया. श्योपुर तहसील की अड़वाड़ ग्राम पंचायत के खेड़री गांव में दलित की बारात को रास्ता देने पर विवाद हो गया. गांव के कुछ दबंग बारात को अपने मोहल्ले से गुजरने नहीं दे रहे थे. ऐसे में दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया.

विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस तक पहुंच गया लेकिन शिकायत करने के बाद भी ढाई घंटे तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची. मिली जानकारी के अनुसार रायपुरा गांव के धन्नालाल माहौर के बेटे मुकेश की शादी शनिवार को राजस्थान की सीमा से सटे खेड़ली गांव के अमरलाल माहौर की बेटी रीना के साथ होना तय की गई थी.

शादी के दिन बारात खेड़ली गांव पहुंचीं. मगर इतने में ही गुर्जर बस्ती के पास मौजूद लोगों ने बारात को रोक दिया और बारात क्षेत्र से न निकाले जाने पर कथित दबंग विवाद करते रहे. हांलाकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बारात में कुछ युवक जबरन घुस आए थे जिसके चलते विवाद हो गया. पुलिस के पहुंचने के दौरान बारात अन्य रास्ते से लड़की के घर पहुंच गई थी.

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मतदान से पहले दलितों की अंगुली में अमिट स्याही लगाने के मामले में पूर्व प्रधान गिरफ्तार

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उत्तर प्रदेश में चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के जीवनपुर गांव के दलित बस्ती में रविवार की सुबह सीओ सदर त्रिपुरारी पांडेय मय फोर्स पहुंचकर स्याही लगे मतदाताओं को बूथ पर ले जाकर मतदान कराया. वहीं आरोपित पूर्व प्रधान छोटेलाल तिवारी के घर दबिश दी, लेकिन वह फरार हो गया. हालांकि आरोपित को जीवनपुर चौराहे से गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि शनिवार की देर रात पूर्व प्रधान अपने समर्थकों के साथ दलित बस्ती में पैसा देकर लोगों को वोट न देने की अपील कर उंगली में स्याही लगा दिया. पुलिस जबतक मौके पर पहुंचती सभी फरार हो गये.

जीवनपुर गांव के दलित बस्ती में देर रात पूर्व प्रधान छोटेलाल तिवारी, अमन तिवारी व कतवारू तिवारी गठबंधन को वोट न देने की अपील करते हुए पैसा देने लगे. यहीं नहीं मतदाताओं की अगुंली में स्याही भी लगा रहे थे. इसकी जानकारी होने पर सकलडीहा विधायक प्रभुनारायण यादव अपने समर्थकों के साथ अलीनगर थाना परिसर में धरना पर बैठ गये. इस दौरान उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी व स्याही लगे सुदर्शन कुमार, नौरंगी देवी, बदामी देवी, बंशीधर, पनारू सहित आधा दर्जन लोगों को मतदान करने की मांग की. देर रात करीब डेढ़ बजे जिला निर्वाचन अधिकारी नवनीत सिंह चहल ने सभी को मतदान करने व आरोपित को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया, तब जाकर मामला शांत हुआ. इस क्रम में रविवार की सुबह नौ बजे सीओ सदर त्रिपुरारी पांडेय मय फोर्स जीवनपुर गांव पहुंचकर स्याही लगे लोगों को बूथ पर ले जाकर मतदान कराया. सीओ त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर स्याही लगे लोगों का मतदान करा दिया गया.

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गर्मी के मौसम में लू लगने और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाती है सौंफ, जानें- इसकी खूबी

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नई दिल्ली। गर्मी के दिनों में अत्यधिक गर्म हवा के झोंकों से लू लगना , पानी की कमी या डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं होने की अधिक संभावना होती है, ऐसे मौसम में स्वास्थ्य का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी है. सौंफ में कई औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जिनका सेवन करने से स्वास्‍थ्‍य को फायदा होता है. सौंफ हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद होती है. सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, आयरन, पोटैशियम जैसे तत्व पाये जाते हैं. सौंफ का फल बीज के रूप में होता है और इसके बीज को प्रयोग किया जाता है. पेट की समस्याओं के लिए सौंफ बहुत फायदेमंद होती है. गर्मी के इस मौसम में लू लगने से बचना है तो आपको सौंफ के पानी का सेवन करना चाहिए. सौंफ को बेल के गूदे के साथ सुबह-शाम चबाने से अजीर्ण समाप्त होता है और अतिसार में फायदा होता है. डायरिया होने पर सौंफ खाना चाहिए. आइए जानते हैं सौंफ खाना स्वास्‍थ्‍य के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है.

स्मरण शक्ति बढ़ाएं अगर आप इस बात से परेशान हैं कि आपको कोई बात याद नहीं रहती तो अपनी स्‍मरणशक्ति बढ़ाने के लिए सौंफ का सेवन करें. इसके लिए सौंफ और मिश्री का समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना कर रख लें. खाने के बाद इस मिश्रण के दो चम्मच सुबह शाम दो महीने तक सेवन करने से स्मरणशक्ति तेज होती है.

पेट के लिए फायदेमंद सौंफ के नियमित सेवन से पेट और कब्‍ज की शिकायत नहीं होती. इसके लिए सौंफ को मिश्री के साथ पीसकर चूर्ण बना लें और लगभग 5 ग्राम चूर्ण को सोते समय गुनगुने पानी के साथ सेवन करें. इससे गैस व कब्‍ज की समस्‍या सहित पेट की सभी समस्‍या दूरी होगी.

आंखों की रोशनी बढ़ाएं सौंफ का सेवन आंखों की रोशनी को बढ़ाता है. प्रतिदिन भोजन के बाद 1 चम्‍मच सौंफ खाएं या फिर आधा चम्‍मच सौंफ का चूर्ण एक चम्‍मच मिश्री के साथ मिलाकर रात को सोते दूध के साथ लें. सौंफ का चूर्ण दूध के स्‍थान पर पानी के साथ भी लिया जा सकता है.

खांसी को करें छूमंतर 10 ग्राम सौंफ के अर्क को शहद में मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी ठीक होती है. या फिर 1 चम्‍मच सौंफ और 2 चम्‍मच अजवाइन को आधा लीटर पानी में उबाल लें और फिर इसमें 2 चम्‍मच शहद मिलाकर छान लें. इस काढ़े की 3 चम्‍मच को 1-1 घंटे के अन्‍तर पर पीने से खांसी में लाभ मिलता है. सौंफ को मुंह में रखकर चबाते रहने से सूखी खांसी शांत होती है.

त्‍वचा में चमक बढ़ाएं स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ सौंफ त्‍वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. रोजाना सुबह-शाम केवल सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इसके नियमित सेवन से त्‍वचा में चमक आती है.

दूर करें नींद की समस्‍या सौंफ अनिंद्रा की समस्‍या में भी लाभकारी है. सौंफ का काढ़ा बना कर दस पंद्रह ग्राम घी व इच्छानुसार मिश्री मिलाकर रात को सोते समय सेवन करने से नींद अच्छी आती है. इससे बहुत अधिक नींद और सुस्‍ती की समस्‍या भी दूर होती है. हर समय नींद में या सुस्ती में रहने पर सौंफ का काढ़ा बना कर थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम एक हफ्ते तक पीने से सुस्ती दूर होती है तथा जरुरत से ज्‍यादा नींद भी नहीं आती.

गर्भपात रोकने के लिए गर्भधारण करने के बाद महिला को सौंफ और गुलकन्द मिलाकर पानी के साथ पीसकर हर रोज नियमित रूप से पिलाने से गर्भपात की आशंका समाप्त हो जाती है. गर्भधारण करने के बाद से ही बच्चे के जन्म तक सौंफ को नियमित पीने से भी गर्भ सुरक्षित रहता है.

साभार- जागरण Read it also-ममता के समर्थन में उतरी मायावती

अमेरिका की ईरान को धमकी, युद्ध लड़ा तो मिट जाएगा पूरा देश

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अमेरिका और ईरान क्या अब युद्ध के अंतिम मुहाने पर पहुंच चुके हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ युद्ध लड़ता है तो आधिकारिक तौर पर उसका अंत हो जाएगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में ईरान को धमकी देते हुए लिखा, अगर ईरान लड़ना ही चाहता है तो यह उसका आधिकारिक तौर पर अंत होगा. अमेरिका को फिर कभी धमकी मत देना.

वाशिंगटन में एक खुफिया रिपोर्ट आने के बाद दोनों देशों के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर बहस छिड़ने पर ट्रंप के इस ट्वीट ने अमेरिका में इस डर को और हवा दी है कि दोनों देश एक दूसरे से युद्ध लड़ सकते हैं. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अमेरिका के महत्वपूर्ण संस्थानों और संपत्ति को निशाना बना कर हमला कर सकता है.

एक रिपोर्ट में अमेरिका के सुरक्षा अधिकार के हवाले से दावा किया गया है कि फारस खाड़ी में ईरानी व्यापारिक जहाजों की जो तस्वीरें आई हैं उसके देखकर लगता है कि व्यापारिक जहाज की आड़ में युद्धपोत और मिसाइल ले जाया जा रहा है. हालांकि, अमेरिकी सरकार ने अब तक इसका कोई सबूत नहीं दिया है और हथियार ले जाने के अमेरिका के दावे की पुष्टि नहीं हुई है.

इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की जो रिपोर्ट सामने आई थी उसमें अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि जिस तरह फारस खाड़ी से बाहर ईरानी समर्थित सैन्य बलों के लिए जहाजों का मूवमेंट हो रहा है वो ईरान के पुराने परिवहन पैटर्न से मिलता-जुलता नहीं है. यह रिपोर्ट अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से उपजे खतरे के आकलन का हिस्सा था.

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव बना हुआ है. बीते दिनों ईरान पर प्रतिबंध लगाते हुए अमेरिका ने कई देशों को उनसे कारोबारी रिश्ते तोड़ने को कहा था जिसमें भारत भी शामिल है. अमेरिका ने भारत के ईरान से तेल खरीदने की छूट को भी खत्म कर दिया था.

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नहीं बताया जा सकता जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले राज्य सभा सदस्यों का नाम

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एक हाईकोर्ट जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने वाले और इसका समर्थन नहीं करने वाले राज्य सभा सदस्यों के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन हो सकता है.

केंद्रीय सूचना आयोग ने यह फैसला एक आरटीआई अपील के जवाब में दिया, जिसमें राज्य सभा सचिवालय से उन सांसदों की संख्या पूछी गई थी, जिन्होंने हाईकोर्ट के जज जस्टिस सीवी नागार्जुन रेड्डी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे. साथ ही उन सांसदों की भी जानकारी मांगी गई थी, जो इस प्रस्ताव से हट गए थे. जस्टिस रेड्डी पिछले साल हैदराबाद हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त हुए थे. एस. मल्लेश्वर राव की इस आरटीआई को राज्य सभा सचिवालय ने आरटीआई एक्ट की धारा 8(1)(सी) के तहत खारिज कर दिया था. इस धारा के तहत संसद या राज्य विधायिका के विशेषाधिकार का उल्लंघन करने वाली किसी भी ऐसी जानकारी को देने पर रोक लगाई गई है. राव ने राज्य सभा सचिवालय के फैसले के खिलाफ केंद्रीय सूचना आयोग में अपील दाखिल की थी. मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव ने इस अपील पर फैसला देते हुए कहा कि संसद या एक राज्य विधायिका या उनके सदस्यों को प्रभावी ढंग से किसी भी बाधा या हस्तक्षेप के बिना अपने कार्यों को करने में सक्षम करने के लिए संविधान में अनुच्छेद 105 और 194 के तहत कुछ विशेषाधिकार दिए गए हैं. भार्गव ने फैसले में मशहूर ब्रिटिश संविधान विशेषज्ञ थॉमस इर्स्िकन मे के एक कथन का भी हवाला दिया और अपील को खारिज कर दिया.

प्रभावित हो सकते हैं संसदीय कर्तव्य मुख्य सूचना आयुक्त ने फैसले में कहा कि महाभियोग प्रस्ताव देने वाले और जिन सदस्यों ने बाद में नाम वापस ले लिए, उनके विवरण के खुलासे से न केवल अप्रत्यक्ष रूप से सदस्यों को उनके संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन में प्रभावित किया जा सकता है, बल्कि भविष्य के प्रदर्शन में उनकी स्वतंत्रता भी प्रभावित हो सकती है.

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चुनाव खत्म होते ही सीएम योगी ने बागी ओमप्रकाश राजभर को किया बर्खास्त, जाने पूरा मामला

लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले और एग्जिट पोल के बाद देश की राजनीति में हलचल मचना शुरू हो गई है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल राम नाईक से उनके मंत्रिमंडल में शामिल ओमप्रकाश राजभर को बर्खास्त करने की सिफारिश कर दी है. इस फैसले का खुद ओमप्रकाश राजभर ने स्वागत किया है.

इतना ही नहीं ओपी राजभर के जिन नेताओं को राज्य में मंत्री पद का दर्जा दिया गया था, उन्हें योगी आदित्यनाथ ने वापस लेने की सिफारिश कर दी है. ओम प्रकाश राजभर के साथ-साथ उनके बेटे अरविंद राजभर की भी निगम के अध्यक्ष पद से छुट्टी कर दी है. ओमप्रकाश राजभर की पार्टी के अन्य सदस्य जो विभिन्न निगमों और परिषदों में अध्यक्ष व सदस्य हैं सभी को तत्काल प्रभाव से हटाया गया है.

किसको किस पद से हटाया?

  • मंत्री ओमप्रकाश राजभर के साथ 5 निगमों में भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी के 7 अध्यक्ष और सदस्यों को भी किया गया पद मुक्त.
  • ओमप्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर को सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के चेयरमैन पद से हटाया गया.
  • उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के अध्यक्ष पद से राणा अजीत सिंह को हटाया गया.
  • राष्ट्रीय एकीकरण परिषद से सुनील अर्कवंशी को हटाया गया और राधिका पटेल को हटाया गया.
  • उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद के सदस्य पद से सुदामा राजभर को हटाया गया.
  • उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग से गंगा राम राजभर और वीरेंद्र राजभर को भी हटाया गया.

ओपी राजभर योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण-दिव्यांग जन कल्याण मंत्री थे. योगी ने राज्यपाल से सिफारिश कर उन्हें तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है. बीते काफी लंबे समय से वह भारतीय जनता पार्टी और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोलते रहे हैं, जिसकी आलोचना होती

कई बार ओपी राजभर ने ऐसे बयान भी दिए हैं जो बीजेपी के लिए मुसीबत बने हैं तो वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के हक में गए हैं. ऐसे में अब जब एग्जिट पोल के नतीजे सामने हैं और चुनावी प्रक्रिया लगभग खत्म ही हो गई है तो यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने उनके खिलाफ एक्शन की बात की है.

पहले ही कर चुके थे मंत्रालय छोड़ने की सिफारिश

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले ही ओम प्रकाश राजभर ने पिछड़ा वर्ग मंत्रालय का प्रभार छोड़ने की पेशकश की थी. हालांकि, तब उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया था. लेकिन अब चुनाव खत्म होते ही एक्शन लिया गया है.

ओम प्रकाश राजभर राज्य सरकार के द्वारा पिछड़े वर्ग के छात्र/छात्राओं की छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति ना किए जाने पर और पिछड़ी जातियों को 27 फीसदी आरक्षण का बंटवारा सामाजिक न्याय समिति के रिपोर्ट के अनुसार ना करने पर रोष जताया था. इसी के बाद ही उन्होंने मंत्रालय छोड़ने की सिफारिश कर दी थी.

ओपी राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP के साथ आई थी. हालांकि, जब से सरकार बनी है तभी से ओम प्रकाश राजभर सरकार के खिलाफ बयान देते रहे हैं.

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की राजभर समुदाय के बीच पकड़ मजबूत है. दरअसल, ओम प्रकाश राजभर की मांग थी कि लोकसभा चुनाव में उन्हें दो से तीन सीटें दी जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

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सोनिया और राहुल गांधी से मिलने को मायावती तैयार!

PC-ndtv

नई दिल्ली। खबर है कि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगी. इस मुलाकात के सोमवार 20 मई को होने की खबरें आ रही है. कुछ दिन पहले ही मायावती ने यह कहा था कि वह चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद यानि 23 मई के बात ही किसी से मिलेंगी लेकिन अब नई सूचना यह है कि उन्होंने कांग्रेस नेताओं से मिलने पर हामी भर दी है.

जाहिर है कि काउंटिंग के पहले यह मुलाकात चुनाव के नतीजों के बाद सरकार बनाने से जुड़ी हुई होगी. बातचीत में चुनाव के बाद गठबंधन सरकार बनने की स्थिति में इसकी रूपरेखा क्या होगी, इस पर भी चर्चा होने की खबर है. बताया जा रहा है कि इन दोनों धड़ों को मिलाने के पीछे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू का बड़ा हाथ है. नायडू ने हाल ही में महागठबंधन बनाने को लेकर विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की थी. नायडू ने इस दौरान शनिवार को राहुल गांधी और मायावती के साथ ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि यदि मायावती इस गठबंधन का हिस्सा बनती हैं तो यह एक बड़ी बात होगी.