बड़े हिट की ओर आर्टिकल 15, पहले सात दिन में हुई इतनी कमाई

नई दिल्ली। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी आर्टिकल 15 ने पहले हफ्ते में शानदार बिजनेस किया है. कम स्क्रीन्स के बावजूद फिल्म के कंटेंट को लेकर लगातार हो रही चर्चा की वजह से सामान्य बजट की फिल्म ने अपने पहले सात दिन में बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की है.

ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुमानों की मानें तो फिल्म बने सातवें दिन यानी शुक्रवार को करीब 3 करोड़ रुपये की कमाई की है. आयुष्मान खुराना स्टारर फिल्म ने पहले दिन 5.02 करोड़ का बिजनेस किया था. फिल्म वीकेंड में ही निर्माण लागत वसूलने में कामयाब हो गई थी. आर्टिकल 15 आयुष्मान के करियर की लगातार पांचवीं हिट फिल्म है.

ट्रेड एनालिस्ट तरन आदर्श के मुताबिक़ आर्टिकल 15 ने पहले दिन यानी शुक्रवार को 5.02 करोड़, शनिवार को 7.25 करोड़, रविवार को 7.77 करोड़, सोमवार को 3.97 करोड़, मंगलवार को 3.67 करोड़ और बुधवार को 3.48 करोड़ कमाए थे. गुरुवार की अनुमानित कमाई को जोड़ लें तो आर्टिकल 15 ने अब तक करीब 34.16 करोड़ की कमाई कर ली है.

आर्टिकल 15 न सिर्फ भारत बल्कि ओवरसीज में भी अच्छा बिजनेस कर रही है. एक इंटरव्यू में अनुभव सिन्हा ने बताया कि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म अच्छा कर रही है. ओवरसीज में भी अच्छे कलेक्शन की जानकारी मिली है. फिल्म लोगों को पसंद आ रही है.

आर्टिकल 15 में पहली बार आयुष्मान खुराना ने एक आईपीएस अफसर का रोल किया है. आयुष्मान फिल्म में दलित लड़कियों के उत्पीड़न की गुत्थी सुलझा रहे हैं. फिल्म में दिखाया गया है कि समाज किस हद तक जातीय भेदभाव व्याप्त है.

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निर्मला सीतारमण ने किया कुछ ऐसा कि बदल गई बजट की परंपरा

नई दिल्ली। पुरानी परंपरा को बदलते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में रखने के बजाए एक लाल रंग के कपड़े में रखा है जिस पर ‘अशोक चिन्ह’ बना हुआ है. इस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन का कहना है कि वित्त मंत्री ने लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज को रखा है. यह एक भारतीय परंपरा है. यह पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतीक है. यह बजट नहीं है, ‘बही खाता’ है. गौरतलब है कि 11 बजे निर्मला सीतारमण बजट पेश करने जा रही हैं. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला बजट है और इस बजट से जनता को काफी उम्मीदें हैं. लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार को प्रचंड बहुमत मिला है तो इसमें सबसे बड़ा हाथ कल्याणकारी योजनाओं का भी रहा है. लेकिन इन योजनाओं के लिए पैसा काफी कम है और उम्मीद है कि इसमें फंड बढ़ाने की घोषणा होगी. लेकिन आर्थिक हालात और राजकोषीय घाटा कम करने का भी लक्ष्य रखा है, इसको देखते हुए सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती होगी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करने से पहले शुक्रवार को शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत हुई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 82.34 अंकों की तेजी के साथ 39,990.40 पर जबकि निफ्टी 18 अंकों की मजबूती के साथ 11,964.75 पर खुला। शुरुआती कारोबार में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.47 बजे 95.83 अंकों की मजबूती के साथ 40,003.89 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी लगभग इसी समय 25.40 अंकों की बढ़त के साथ 11,972.15 पर कारोबार करते देखे गए.

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गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस

नई दिल्ली। गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान शुक्रवार को गांधीनगर स्थित विधानसभा भवन में शुरू हो गया. सबसे पहले मतदान करने वालों में राज्य के मंत्री सौरभ पटेल, प्रदीपसिंह जडेजा और भाजपा विधायक अरुणसिंह राणा शामिल रहे. भाजपा ने जहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ओबीसी नेता जुगलजी ठाकोर को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने चंद्रिका चूड़ासमा और गौरव पांडा को उम्मीदवार बनाया है. दो सीटों पर सुबह नौ बजे मतदान शुरू हुआ और यह शाम चार बजे तक चलेगा. मतों की गिनती शाम पांच बजे की जाएगी.

दोनों सीटों के लिए अलग-अलग मतदान होने के कारण एक प्रत्याशी को जीतने के लिए सामान्य तौर पर 50 प्रतिशत मतों की जरूरत होगी. वर्तमान स्थिति में प्रत्येक प्रत्याशी को जीतने के लिए 88 मतों की जरूरत होगी. कांग्रेस अपने 71 विधायकों में से 65 को दो दिन पहले बनासकांठा स्थित रिसॉर्ट में ले गयी थी. पार्टी के एक नेता ने कहा कि ये विधायक सुबह 10.30 बजे मतदान के लिए यहां पहुंचेंगे.

इस साल मई में गांधीनगर और अमेठी निर्वाचन क्षेत्रों से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद केंद्रीय मंत्रियों अमित शाह और स्मृति ईरानी के इस्तीफा देने के कारण गुजरात से राज्यसभा की दो सीटों के लिए उपचुनाव कराए जाने की जरूरत पड़ी है. 182 सदस्यीय विधानसभा में अपनी संख्या बल के कारण भाजपा दोनों सीटों पर जीतने में सक्षम है. चुनाव आयोग (ईसी) की अधिसूचना के अनुसार यहां अलग-अलग मतदान हो रहा है. कुल 182 विधायकों में से इस बार 175 अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए योग्य हैं. भाजपा के पास 100 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 71 विधायक हैं.

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राहुल गांधी, आपकी लडाई मोदी से नहीं, खुद से है

आपने इस्तीफा दे दिया. अच्छा किया. पीएम बनने के लिए प्रेसीडॆंट के पोस्ट पर रहना कहां जरूरी होता है. अब, आप क्या करेंगे? आपने कहा, 10 गुना ताकत से अब मोदी से लड सकेंगे. यही गलती आप बार-बार कर रहे है. आपका मुकाबला मोदी से नहीं है. आपका मुकाबला शाह से भी नहीं है. आपका मुकाबला भाजपा से भी नहीं है. भाजपा तो कांग्रेस हो चुकी है. अब कांग्रेस क्या कांग्रेस से लडेगी?

आपका मुकाबला है खुद से. आपका मुकाबला है पर्सेप्शन से. आपका मुकाबला है आरएसएस के संगठन से. तो आपको क्या करना चाहिए? क्योंकि, आप अपने सेवा दल या एनएसयूआई के मौजूदा ताकत के जरिए कभी इनसे लड नहीं पाएंगे. फिर रास्ता क्या बचता है?

एक ही रास्ता है.

सबसे पहले तो ये शपथ लीजिए कि अगले 5 साल तक, बिना चुनाव का इंतजार किए, मैं पूरा भारत घूमूंगा. अब ये भी सवल उठेगा कि कहां जाए, कहां से शुरु करे? तो आप शुरु से शुरु करें. जहां मन हो, वहां से शुरु करे. अमेठी से करे या वायनाड से करे, लेकिन करें. बिना वोट पाने और संगठन मजबूत बनाने के लालच के यह यात्रा शुरु करें.

वैसे मेरी सलाह है कि आप अभी अपनी अखिल भारतीय यात्रा का शुभारंभ मुजफ्फरपुर से कर सकते है. 250 बच्चे की मौत हो चुकी है और आपनी हार के गम से अब तक नहीं उबर सके है. जाइए, जा कर उन बच्चों के माता-पिता से मिलिए. उन्हें सांत्वना दीजिए. इसके बाद, आप किसी भी राज्य के हेड पोस्ट ऑफिस में पहुंच जाइए, जहां पोस्टल बैंकिंग की सुविधा है. महीने की पहली तारीख को जाना बेहतर रहेगा. वहां आपको गांव की कई गरीब और शिक्षित-अशिक्षित-अर्द्धशिक्षित महिलाएं/पुरुष मिल जाएंगे जो इस आशा में अपने पोस्टल बैंकिंग खाते के साथ आते है, कि उनके खाते में दिल्ली से पैसा आने वाला है. उनसे मिलिए. उन्हें सच बताइए.

आप पंजाब जाते है तो कैप्टन साहब की आवास के बजाए उस जिले में जाइए, जहां कैंसर ट्रेन चलती है. उस जिले में जाइए, जहां रिवर्स बोरिंग ने पूरे शहर को कैंसर के दोजख में तब्दील कर दिया है. यूपी के सोनभद्र/मिर्जापुर जाइए. वहां देखिए कि देश कापावर बैंक माने जाने वाला इलाका कैसे पीनेके साफ पानी को तरस रहा है और फ्लोराइड वाला पानी पी कर असमय बूढा/बीमार हो रहा है.

आपको छत्तीसगढ जाना चाहिए. सरगुजा जिला. जैसा मैंने कहा कि कांग्रेस भाजपा और भाजप अकांग्रेस हो चुकी है. इसका शानदार मुजायरा देखने को वहां मिलेगा. सरगुजा में जा कर अपने सीएम को बुलाइए और पूछिए कि जब आदिवासी और स्थानीय लोग नहीं चाहते है तब भी क्यों अडानी को आपकी सरकार वहीं सारी सुविधाएं दे रही है जो रमन सिंह की सरकार ने दी थी? पता कीजिए वहां कि क्यों लाखों पेड कटने वाले है, जिससे एक भरापूरा एलीफैंट रिजर्व उज़ड जाएगा.

आप महाराष्ट्र जाइए. एक बार कलावती से आप मिले थे. आज सुना है सैकडों “कलावती” womb-less women बन चुकी है. पता है, क्यों? क्योंकि गन्ना कटाई कराने वाले ठेकेदार ऐसी महिला मजदूर नहीं चाहते जिनका मासिक धर्म होता हो. जा कर पता कीजिए ऐसी हजारों कलावती का जीवन आज किस स्थिति में है. आप फिर से एमपी जाइए, मिलिए उन युवाओं से जिनसे आपने वादा किया था कि मोबाइल बनाने की फैक्ट्री एमपी में लगाएंगे. क्या वादे पूरे हुए, उन पर कितना काम हुआ? आपके सीएम कमलनाथ कर क्या रहे है?

कुल मिला कर ये कि किसी विद्वान ने कहा था, भारत की हर गली में 10 खबर है, और अगर कोई खबर नहीं है तो यह अपने आप में बडी खबर है. जाइए. जा कर गुजारिए भारत की गांवों में अपनी रातें. दीजिए चुनौती उस पर्सेप्शन को जिसमें कहा जाता है कि आप गांवों में पॉलिटिकल टूरिज्म करते है. तोडिए इस पर्सेप्शन को.

एक अंतिम बात. आपके एक सलाहकार ने मेरे एक मित्र से कहा था कि भला किताब से भी कहीं चुनाव जीता जाता है. अब चुनाव कैसे जीता जा सकता है, इसकेलिए कोई लिखित नियम होता तो आप कब के चुनाव जीत कर पीएम बन गए होते. इसलिए, एक मुफ्त की सलाह है.

ये मत कहिएगा कि पानी पर भी कहीं चुनाव जीता जाता है. तो ऐसा है कि मल के बाद जल, मोदी जी ने इस बात को समझ लिया है. शौचालय बना-बना कर वे घर-घर तक पहुंच गए थे और इस बर जल के नाम पर फिर एक बार घर-घर पहुंचने की तैयारी में है. संकेत समझिए. पानी के असल मुद्दों को उठाइए. कम से कम यहे एबोल कर पर्सेप्शन को चुनौती दे दीजिए कि आज से मैं बोतलबन्द पान्दे पीना बन्द कर रहा हूं. देखिए, क्या बदलाव आता है?

कम ही लिखा है, ज्यादा समझिएगा. बाकी, आपके पास दर्जनों हवार्ड्धारी तो हइये है. शशि शेखर

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अन्य पिछड़ा वर्ग में से अलग आरक्षण कोटा ही है लाभप्रद और संवैधानिक समाधान

इधर कई दिनों से अखबार की सुर्खियों में खबर बन रही है कि प्रदेश सरकार ने उ0 प्र0 की कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिन्द, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी, मछुआ को अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित कर लिया है और इस सम्बंध में जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मण्डलायुक्तों और जिलाधिकारियों को कहा गया है. यह आरएसएस और भाजपा के चरित्र के अनुरूप ही अति पिछड़े समाज के साथ की गयी बड़ी धोखाधड़ी का ही एक और उदाहरण है.

24 जून 2019 को प्रमुख सचिव समाज कल्याण द्वारा जारी किए गए शासनादेश को आप गौर से देखें, शासनादेश कहता है कि ‘नियमानुसार जाति प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए‘. शासनादेश में कहीं भी इन जातियों को सीधे तौर पर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नहीं कहा गया है. शासनादेश में सब कुछ हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका 2129/2017 डा0 बी0 आर0 अम्बेडकर ग्रन्थालय एवं जन कल्याण बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य में करीब दो साल पहले 29 मार्च 2017 अंतरिम आदेश के सम्बंध में है. यह याचिका सपा सरकार द्वारा 2016 में इन जातियों को एससी की सूची में डालने के शासनादेश के विरूद्ध दाखिल की गयी थी. जिसमें हाईकोर्ट ने शासनादेश के विरूद्ध स्थगनादेश दिया हुआ है.

29 मार्च के इस आदेश में भी हाईकोर्ट इन जातियों को अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नहीं कहता है. आदेश में हाईकोर्ट ने कहा है कि इस अवधि में यदि इनमें से किसी जाति को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी हो गया था तो वह कोर्ट के अंतिम आदेश के अतंर्गत रहेगा. महज उपचुनाव में राजनीतिक लाभ के लिए दो साल पूर्व आए हाईकोर्ट के आदेश को आधार बनाकर किए इस शासनादेश से आरएसएस-भाजपा सरकार द्वारा इन अति पिछड़ी जातियों को अधर में लटका दिया गया है न तो यह अनुसूचित जाति में संवैधानिक रूप से जा पायेगी और न ही इनको मिल रहा अन्य पिछड़ा वर्ग का लाभ ही इन्हें मिल पायेगा.

दरअसल उ0 प्र0 में इन सत्रह जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने के नाम पर भ्रमित करने का खेल पिछले करीब पंद्रह वर्षो से चल रहा है. सबसे पहले मुलायम सरकार में यह शासनादेश जारी किया गया जिसे हाईकोर्ट ने इस आधार पर रद्द किया था कि संविधान की धारा 341 के तहत अनुसूचित जाति की सूची में किसी जाति को जोड़ने व हटाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है. इसके बाद बनी मायावती सरकार ने इन जातियों को एससी की सूची में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को अपनी संस्तुति भेजी और यहीं काम अखिलेश सरकार ने भी किया. जिस पर आरएसएस की मोदी सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधीर भार्गव ने दिनांक 24 दिसम्बर 2014 को उ0 प्र0 के मुख्य सचिव आलोक रंजन को लिखे पत्र में कहा कि गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त की है और इसे पुर्नसमीक्षा के लिए भेज दिया था.

इसके बाद दिनांक 1 अप्रैल 2015 को पुनः भारत सरकार को पुर्नसमीक्षा कराकर अखिलेश सरकार द्वारा प्रस्ताव भेजा गया. जिसे फिर मोदी सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने 22 जुलाई 2015 के पत्र द्वारा अस्वीकार कर दिया और साथ ही यह भी कहा कि यदि अनुसूचित जाति की सूची में संशोधन के राज्य सरकार के प्रस्ताव से भारत के महारजिस्ट्रार दूसरी बार भी सहमत नहीं होते तो भारत सरकार ऐसे प्रस्तावों को निरस्त कर सकती है और इस अनुसार इस प्रस्ताव को सक्षम अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया गया. इस तथ्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्रावली पर अवगत करा दिया गया था. बावजूद इसके अखिलेश सरकार ने 2016 में इन जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का अवैधानिक आदेश दिया. जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगायी हुई है.

यह सच है कि इनमें से कई जातियां जैसे बिंद आदि की आर्थिक स्थिति दलितों से भी बदतर है. लेकिन इन जातियों को आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद संवैधानिक रूप से एससी में शामिल नहीं किया जा सकता. क्योंकि अनुसूचित जाति में वहीं जातियां आती है जो मूलतः अछूत जातियां रही है. अति पिछड़े वर्ग की यह सभी जातियां अपने चरित्र और ऐतिहासिक विकास में श्रमिक जातियां रही है और अछूत नहीं रही है. इसलिए वास्तव में इन जातियों के सामाजिक न्याय और इनकी भागेदारी के लिए यह जरूरी है कि इनका आरक्षण कोटा अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण कोटे में से अलग कर दिया जाए, जैसा कि बिहार में कपूर्री ठाकुर फार्मूले के अनुसार पिछड़ा वर्ग में है.

यह काम संवैधानिक रूप से राज्य सरकार कर सकती है. इन्द्रा साहनी के केस में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसको माना है. इस मांग को स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में लम्बे समय से उठाया जाता रहा है. कई बार इस सवाल पर सम्मेलन और धरना प्रदर्शन किए गए. खुद अखिलेन्द्र जी ने लखनऊ और दिल्ली में किए अपने दस दिवसीय उपवास में इस सवाल को मजबूती से उठाया था और तत्कालीन मनमोहन की केन्द्र सरकार व प्रदेश की अखिलेश सरकार को पत्रक दिए गए थे. लेकिन इस संवैधानिक काम को करने की जगह महज अति पिछड़ी इन श्रमिक जातियों को गुमराह किया जाता रहा जिसमें उ0 प्र0 के सभी शासकवर्गीय दल शामिल रहे है. इसलिए आज जनराजनीति ही अति पिछड़ों के सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करेगी और अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण कोटे में से अति पिछड़े वर्ग का आरक्षण कोटा दिलायेगी.

दिनकर कपूर

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नहर किनारे विकसित बूंदों की संस्कृति

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असंतुलित पर्यावरण धीरे धीरे धरती को गर्म भट्टी की तरफ धकेल रहा है. इस साल की गर्मी ने देश के कई शहरों में एक नया रिकॉर्ड बनाया है. स्वयं देश की राजधानी दिल्ली ने इतिहास का सबसे गर्म दिन भी देखा है. समूचा यूरोप प्रचंड गर्मी का प्रकोप झेल रहा है. ऐसी परिस्थिती में रेगिस्तानी क्षेत्रों का क्या हाल होता होगा इसका अंदाज़ा केवल वहां के रहने वाले ही लगा सकते हैं. मानसून की देरी और सामान्य से कम होना आग में घी का काम कर रहा है. वैसे भी थार के रेगिस्तान में बादलों से गिरने वाली बूंदों को घी से भी महंगा माना गया है. यह गए जमाने की बात हो सकती है कि रेगिस्तान के किसी गांव में राहगीर या मेहमान द्वारा पीने का पानी मांगे जाने पर यह कहा जाता था कि घी मांग लो, पानी मंत मांगो. इसे गुजरे जमाने की बात मान लेना शायद भूल होगी. भले ही आज रगिस्तान में इंदिरा गांधी नहर के पानी को देख कर लोग इतराएं, लेकिन भविष्य में वह दिन आने वाले हैं, जब जेब में पैसे तो होंगे, लेकिन पानी नहीं होगा.

पूर्वजों ने आकाश में छाए बादलों से टपकने वाली एक-एक बूंद को मोतियों से महंगी मान कर उसे संजोने की संस्कृति विकसित की और आने वाली पीढ़ी को पारंपरिक जल स्रोतों का एक बहुमूल्य खजाना सौंपा था. उन्हें अपनी आंखों से सामने उजड़ते देख कर चुप रहना और संकट को देखकर कबूतर की तरह आंख मूंद लेना विकसित होती मानव सभयता की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है. एक तरफ सरकार, राजनेताओं, स्वार्थी तत्वों की छत्रछाया में भू-माफिया, खदान माफिया और पानी माफिया पूर्वजों द्वारा हजारों सालों से विकसित किए गए इन अमूल्य खजानों को लूटने में मशगूल हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग और संस्थाएं पारंपरिक तरीकों व नई तकनीकों को जोड़कर ऐसे उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे थार के मरूस्थल में बूंदों की संस्कृति का अस्तित्व बना रहे.

ऐसा ही एक उदाहरण पिछले कई वर्षों से बीकानेर जिले में कार्यरत एक स्वैच्छिक संगठन उरमूल ट्रस्ट नेटवर्क से जुड़ी उरमूल सीमांत संस्था ने प्रस्तुत किया है. कोलायत ब्लॉक के बज्जू स्थित इस संस्था का कैंपस जल संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण है, जिसे देख कर नहर किनारे बसे लोगों को सीख मिल रही है वहीं सरकार की पानी को लेकर बनी बड़ी-बड़ी भीमकाय योजनाएं इसके उदहारण के सामने छोटी दिखने लगती है. उरमूल के कैंपस में बने स्टाफ क्वाटर्स, मेस, छात्रावास और कार्यालय की इमारतों की छतों पर बरसने वाली वर्षा की एक-एक बूंद को बड़े कुंडों में सहेज कर जैविक खेती व बागवानी के कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रणाली से तक़रीबन 400 फलदार पौधों को सिंचित कर बड़ा किया गया है. इसके अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट खाद की यूनिट स्थापित की गई है. दूसरी ओर पांच थार नस्ल की राठी गाएं पाली जा रही हैं, जिनका दूध कैंपस की मेस में काम आता है और गोबर से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर पौधों को दी जाती है. गायों के लिए हरा चारा और अजोला घास भी बरसात से एकत्रित किए गए पानी से उगाई जाती है. उरमूल सीमांत के इंन्चार्ज हरबंश सिंह बताते हैं कि बरसात के बेकार बहकर जाने वाली पानी को उपयोग कर खेती, पशुपालन और बागवानी मिश्रित टिकाऊ खेती का ऐसा माडल विकसित करने का प्रयास किया गया है, जिसको देखकर कर हमारे क्षेत्र के किसान प्रेरित होकर इसे अपना सकें.

उरमूल ट्रस्ट के सचिव अरविंद ओझा बताते हैं कि बज्जू का हमारा कैंपस नहर किनारे है. लेकिन कैंपस को हरा-भरा बनाने के लिए हमने नहर के पानी का उपयोग नहीं किया, बल्कि रेगिस्तान की जल संग्रहण की परंपरा से प्रेरित हो कर यह मॉडल बनाने का विचार आया. उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में नहर आने के बाद लोग यह सोचने लगे कि अब पानी का संकट खत्म हो गया. पारंपरिक फसलों को छोड़कर नकदी फसलो का उत्पादन करने लगे. सरकार द्वारा मुहैया कराई गई खाला पद्धति से जरूरत से ज्यादा सिचाई करने लगे. 1991 में उरमूल ट्रस्ट के बैनर तले की गई नहर यात्रा के दौरान नहर के अच्छे प्रभाव के साथ वाटरलागिंग जैसी समस्या भी सामने आई.

नहर यात्रा के अनुभव सरकार के साथ बांटे. सरकार ने भी सिंचाई पद्धति में कई बदलाव किए. किसानों के खेतों में डिग्गियां बनाकर फव्वारा सिंचाई को बढ़ावा दिया गया. पर बरसात के पानी को सहेजने की बात भूल गए. नहर का पानी आना इस क्षेत्र के लिए नेक कार्य है. लेकिन नहर आने के बाद पारंपरिक जलस्रोतों की अनदेखी का खामियाजा नहर बंदी के दौरान देखने को मिला. नहरी क्षेत्र में पेयजल संकट उन क्षेत्रों से ज्यादा देखा गया जहां समुदाय की निर्भरता आज भी पारंपरिक जलसंग्रहण पर निर्भर है. इसे फिर से जिंदा रखने के लिए ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करना जरूरी है. जिससे समुदाय को परिणाम देखकर प्रेरित किया जा सके.

यह वही नहरी क्षेत्र है, जहां लोग बूंद-बूंद पानी को सहेज कर पेयजल की व्यवस्था करते थे. पशुपालन मिश्रित खेती करते थे. अकालों की मार झेल कर परेशान होते थे, लेकिन टूटते नहीं थे. नहर आने के बाद सब कुछ बदल गया. ऐसे में हमने एक मॉडल विकसित किया जो वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, पेयजल संकट और कृषि पर आने वाले संकट के प्रभाव को कम कर सकता है. आज सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है. रेगिस्तान में बूंदों की संस्कृति के उदाहरणों की भरमार है. अलग-अलग क्षेत्रों में समुदाय व संस्थाओं ने ऐसे मॉडल खड़े किए हैं जिनसे सीख लेकर रेगिस्तान में सदैव के लिए पानी की समस्या को दूर किया जा सकता है.

मनरेगा के तहत अपना खेत-अपना काम योजना, बोर्डर एरिया डवलपमेंट प्रोजेक्ट, वित्त आयोग, मरू विकास, जलग्रहण, कृषि विस्तार विभाग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आदि सभी को मिलकर ऐसे मॉडल को विस्तार रूप देने की आवश्यकता है जिससे थार का रेगिस्तान जैविक खेती और बागवानी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है. समय आ गया है कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाये, ताकि पेयजल संकट, आकाल और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम किया जा सके. आखिर बूंद-बूंद भरने की संस्कृति ही सागर को जन्म देती है. (चरखा फीचर्स)

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अपकमिंग /ट्राएंगुलर लव स्टोरी होगी ‘दबंग 3’

सलमान खान के फैंस को उनकी हर आगामी फिल्म के बारे में जानने की गजब की उत्सुकता रहती है. उनकी अपकमिंग मूवी ‘दबंग 3’ को लेकर भी कुछ ऐसा ही है. उनके फैंस की एक्साइटमेंट को शांत करने के लिए इस फिल्म से जुड़ी ऐसी ही कई रुचिकर इंपोर्टेंट इंफॉर्मेशन निकालकर लाए हैं आपके सामने.

सलमान इस फिल्म के लिए अपने वजन और फिजिक में उतनी ही भारी तब्दीली लाएंगे, जितनी दंगल के लिए आमिर खान ने की थी.

‘दबंग 3’ में वह अपना वजन 7-8 नहीं, बल्कि पूरे 15 किलो कम करने जा रहे हैं. ऐसा वे अपने किरदार चुलबुल पांडे के 20 साल की उम्र से पहले के दृश्यों की खास तैयारी के तहत कर रहे हैं. फिल्म से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है.

खुद सलमान की तरफ से इस रोल को खास रखने के बाकायदा निर्देश दिए गए हैं. जैसे ‘भारत’ में अपने बुजुर्ग अवतार से सलमान ने अपने चाहने वालों को सरप्राइज किया था वैसे ही इस बार वह अपने दुबले-पतले अवतार से फैंस को चौंकाएंगे.

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कॉलेज की दलित स्टूडेंट के साथ 5 छात्रों ने किया गैंगरेप, वीडियो हुआ वायरल तो पुलिस ने लिया ये एक्शन

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नई दिल्ली। दक्षिण कन्नड़ जिले के एक निजी कॉलेज के पांच छात्रों को अपने ही कॉलेज की एक दलित छात्रा का इस साल मार्च में दुष्कर्म करने के मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने यह जानकारी दी. इस वारदात का वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला प्रकाश में आया. पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और सभी आरोपी 19 वर्ष के हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

पुलिस ने बताया कि पांच छात्रों ने लड़की को अपने कार में जंगल में ले जाकर कथित तौर पर दुष्कर्म किया था. पुलिस ने बताया कि इन छात्रों ने इस वारदात का वीडियो भी बनाया और लड़की को इसके बारे में किसी से जिक्र करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी.

वीडियो वायरल होने के बाद जिला पुलिस ने पुटुर महिला पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया और अपराधियों को पकड़ने के लिए दो टीम गठित की, जिसके बाद यह गिरफ्तारी हुई. वहीं जिला पुलिस अधीक्षक बी एम लक्ष्मी प्रसाद ने लोगों से इस वीडियो को नहीं साझा करने के लिए कहा है और ऐसा करनेवालों पर मामला दर्ज करने की बात की है.

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मध्यप्रदेशः चलते ट्रक में दलित महिला से गैंगरेप, विरोध करने पर पति को नीचे फेंका

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प्रतीकात्मक चित्र

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लिफ्ट देने के बहाने महिला से गैंगरेप के मामले में पीड़ित महिला ने आरोपियों की पहचान कर ली है. पुलिस गुरुवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी. आरोपियों की पहचान आकाश मालवीय, बट्टू विश्वकर्मा और शुभम नागर के रूप में हुई है. घटना खजूरी इलाके इंदौर-भोपाल हाईवे की है.

आपको बता दें कि ट्रक में लिफ्ट देने के बहाने दलित महिला से गैंगरेप करने वाले तीनों आरोपियों की पहचान हो गई है. पीड़ित महिला ने आरोपियों की पहचान की है. मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार की रात आरोपियों ने लिफ्ट देने के बहाने महिला और उसके पति को ट्रक में बैठाया. इसके बाद बीच रास्ते में आरोपियों ने पति से मारपीट कर उसे रास्ते में उतार दिया.

मामले में महिला ने अगले दिन मंगलवार को खजूरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. इसके बाद पुलिस ने मंगलवार रात को ही तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. महिला से आरोपियों की पहचान कराई गई. अब पुलिस उन बदमाशों को कोर्ट में पेश करेगी.

वहीं पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किए गए ट्रक को भी बरामद कर लिया है. पुलिस सभी आरोपियों को गुरुवार को जिला कोर्ट में पेश करेगी.

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बड़ा सवाल…राहुल गांधी के बाद अब कौन होगा नया कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा? राहुल गांधी पद पर बने रहेंगे या नया कोई बनेगा? भगवान जाने. दो सवालों पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल का यही जवाब है. यह जवाब केवल सिब्बल का नहीं है, बल्कि कांग्रेस का हर बड़ा नेता इससे अनजान है. कांग्रेस शासित पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलने, उन्हें सुनने, अपनी चिंता जताने के बाद भी राहुल गांधी पद से हटने के अपने फैसले पर कायम हैं.

उन्होंने बड़े सुधार का संकेत दिया है और शुरुआत अपने सचिवालय से की है. राहुल गांधी के सचिवालय में महत्वपूर्ण किरदार वाले कई लोग हैं. के. राजू भी उनमें से एक हैं और राहुल ने उनसे थोड़ी दूरी बनाई है. सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी के कार्यालय को अब के. राजू की रिपोर्टिंग नहीं है. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से आने वाले संदीप सिंह अपनी जगह बनाए रखने में सफल हैं.

वह प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भाषण तैयार करने के साथ-साथ उन्हें सलाह अभी दे रहे हैं. प्रियंका गांधी के सचिवालय के धीरज श्रीवास्तव का दबदबा बना हुआ है. राहुल गांधी, पीएल पूनिया के मशविरों को काफी मानते थे. लेकिन अब खबर है कि इसमें थोड़ी सी कमी आई है.

बुधवार को राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी में जल्द से जल्द अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना चाहिए, वह अब इस पद पर नहीं हैं. राहुल गांधी ने साफ कहा कि पार्टी का नया अध्यक्ष एक महीने पहले ही चुना जाना चाहिए था. राहुल ने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द से जल्द बुलाया जाना चाहिए ताकि इस पर फैसला हो सके.

अगला लोकसभा चुनाव 2024 में होना है. 2022 तक करीब 18 राज्यों के चुनाव होने हैं. इसलिए राहुल गांधी चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी युवा हो. 2014-19 तक लोकसभा में उनके आसपास की युवा हल्ला ब्रिगेड अपना चुनाव हार चुकी है. राहुल गांधी को लोकसभा चुनाव में हार की खीझ है और वह चाहते हैं कि पार्टी में सुधार के कदम उठाए जाएं.

कांग्रेस सेवादल, महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, एनएसयूआई और अन्य विभागों में भी करीब 60-70 प्रतिशत युवा चेहरे आएं. यहां तक कि प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर तक की कमान युवा हाथों में हो. राहुल के अनुसार युवा का अर्थ 45 साल से कम आयु के नेताओं से है.

प्रियंका गांधी वाड्रा के एक करीबी से मिली जानकारी के अनुसार युवा नेता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रतिनिधि के तौर पर काम करते हैं. इस कारण पार्टी कुछ नया नहीं कर पा रही है. बताते हैं कुछ इसी तरह की सोच कांग्रेस अध्यक्ष की भी बन रही है. वीरप्पा मोइली का मानना है कि राहुल के अध्यक्ष पद पर बने रहने की संभावना एक प्रतिशत भी नहीं है.

क्या अगला कांग्रेस अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल, अशोक गहलोत, शुशील कुमार शिंदे, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी में कोई बनेगा? चर्चा मे यही नाम हैं. कहा जा रहा है कि एंटनी का नाम यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने सुझाया है, लेकिन राहुल गांधी ने कोई प्रतिक्रिया या अपनी सहमति नहीं दी है. क्या होगा यह किसी को पता नहीं है.

यह सभी नाम कांग्रेस अध्यक्ष, यूपीए चेयरपर्सन और उनसे गहरी समझ रखने वाले नेताओं के नाम हैं. लेकिन माना जा रहा है कि राहुल गांधी किसी युवा चेहरे के पक्ष में खड़े हो सकते हैं. वह किसी युवा व्यक्ति को पार्टी की कमान सौपने, संगठन में उसी आधार पर सुधार को बल देने पर सहमति जता सकते हैं. सब कुछ इसी जुलाई महीने में तय हो जाने के आसार हैं.

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अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद कोर्ट पहुंचे राहुल गांधी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े एक मानहानि केस में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अग्रिम जमानत मिल गई है. राहुल गांधी के खिलाफ एक आरएसएस कार्यकर्ता ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है. आरोप है कि राहुल गांधी ने पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा से जोड़ा था.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने अपने आपको बेकसूर बताया. इसके बाद कोर्ट ने 15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दिया. पूर्व सांसद एकनाथ गायकवाड़ ने राहुल गांधी की जमानत ली. बता दें कि गौरी लंकेश की सितंबर 2017 में बेंगलुरु में उनके घर के गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

इस दौरान, राहुल गांधी की अगुआई में पार्टी नेता कृपाशंकर सिंह, बाबा सिद्दीकी, मिलिंद देवड़ा, संजय निरूपम अदालत के अंदर मौजूद रहे. जब राहुल गांधी कोर्ट में पेशी के लिए मुंबई पहुंचे तो एयरपोर्ट के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में नारे लगाए. कांग्रेस समर्थकों ने ‘राहुल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे लगाए.

शिकायतकर्ता ध्रुतिमन जोशी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी पर भी ऐसे मामले दायर किए थे जिन्हें खारिज कर दिया गया था. जोशी ने अपनी याचिका में कहा कि लंकेश की हत्या के मुश्किल से 24 घंटों के बाद ही राहुल गांधी ने हत्या के लिए आरएसएस और उसकी विचारधारा को जिम्मेदार ठहरा दिया था.

महाराष्ट्र में राहुल गांधी के खिलाफ किसी आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा दायर की गई यह दूसरी याचिका है. इससे पहले 2014 में, एक स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंते ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए कथित रूप से आरएसएस पर आरोप लगाने के लिए राहुल के खिलाफ याचिका दायर की थी. वह मामला ठाणे में भिवंडी अदालत में लंबित है.

वहीं, खबर है कि राहुल गांधी आगामी हफ्ते में कई केसों पर सुनवाई के चलते अपनी अमेरिका यात्रा को रद्द कर सकते हैं. उन पर पटना और अहमदाबाद में भी केस दर्ज हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि राहुल कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक से दूरी बना सकते हैं.

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. राहुल गांधी के मुताबिक, उन्हें लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए क्योंकि पार्टी 542 में से केवल 52 सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई. राहुल ने कहा कि बीजेपी की व्यापक जीत ने यह साबित कर दिया है कि देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा करने का आरएसएस का लक्ष्य अब पूरा हो गया है.

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ओपन लेटर जारी कर राहुल गांधी ने दिया कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा

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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे ही दिया. एक ओपन लेटर जारी कर कांग्रेस अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा दे दिया है. इस ओपन लेटर में राहुल गांधी ने लिखा, ‘कांग्रेस पार्टी के लिए काम करना मेरे लिए सम्मान की बात थी’. उन्होंने पत्र में 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली हार का जिक्र करते हुए लिखा ‘अध्यक्ष के नाते हार के लिए मैं जिम्मेदार हूं. इसलिये अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं’.

उन्होंने आगे लिखा, पार्टी को जहां भी मेरी जरूरत पड़ेगी मैं मौजूद रहूंगा. बता दें कि बुधवार को राहुल गांधी ने कहा कि एक महीने पहले ही नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाना चाहिए था. राहुल गांधी ने कहा, ‘बिना देर किए हुए नए अध्यक्ष का चुनाव जल्द हो. मैं इस प्रक्रिया में कहीं नहीं हूं. मैंने पहले ही अपना इस्तीफा सौंप दिया है और मैं अब पार्टी अध्यक्ष नहीं हूं. सीडब्ल्यूसी को जल्द से जल्द बैठक बुलाकर फैसला करना चाहिए.’

गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस्तीफे की पेशकश की थी. तब से तमाम तरह की अटकलें लगनी शुरू हो गई थी. हालांकि राहुल गांधी ने साफ कर दिया था कि वो अब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर नहीं रहेंगे और आखिरकार आज एक ओपन लेटर जारी कर उन्होंने पद छोड़ने की घोषणा कर दी. राहुल के इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी मुसीबत में दिख रही है. देखना यह है कि अब पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा.

लूटे हुए धन लौटाएं, फिर देश से बाहर जाएं शरीफ और जरदारी – इमरान खान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के मामलों के आरोपियों- पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ जैसे नेताओं को कोई क्षमादान नहीं देगी लेकिन यदि वे लूटे हुए धन को गुनाह कबूलने संबंधी समझौते के तहत लौटा देते हैं तो वे देश से जा सकते हैं. इमरान खान ने यह भी खुलासा किया कि जेल में बंद शरीफ (69) के बेटों ने दो मित्र राष्ट्रों की मदद से अपने पिता की रिहाई कराने का प्रयास किया. प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के नाम तो नहीं बताए लेकिन कहा कि उन्होंने मुझे केवल संदेश दिया, शरीफ की रिहाई के लिए दबाव नहीं बनाया.

इमरान खान खान ने कहा, “उन्होंने मुझे कहा कि हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे.” इस दौरान प्रधानमंत्री के साथ वित्त सलाहकार हाफीज शेख और फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अध्यक्ष शब्बार जैदी मौजूद थे. शरीफ 24 दिसंबर 2018 से लाहौर के कोट लखपत जेल में सात साल की कैद की सजा काट रहे हैं. जवाबदेही अदालत ने पनामा पेपर्स मामले में शीर्ष अदालत के 28 जुलाई, 2017 के आदेश के आलोक में दर्ज किये गये तीन मामलों में से एक में उन्हें दोषी ठहराया था. हालांकि शरीफ और उनके परिवार ने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है.

इमरान खान ने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराए गए लोगों को तब तक बाहर नहीं जाने दिया जाएगा जब तक कि वे चोरी किय गया धन लौटा नहीं देते. उन्होंने कहा, “यदि नवाज इलाज के लिए बाहर जाना चाहते हैं तो उन्हें पहले लूटे हुए धन को लौटाना चाहिए. यदि अली जरदारी के साथ भी ऐसी बात है तो उन्हें भी धन लौटाना चाहिए.” उन्होंने राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश जैसे सौदे का जिक्र करते हुए कहा, “एनआरओ नहीं दी जाएगी.”

न्यायपालिका में जातिवाद पर ब्राह्मण जज का बड़ा बयान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंगनाथ पांडेय

 नई दिल्ली। न्यायपालिका एक ऐसा क्षेत्र है, जहां दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को मौका नहीं मिल पाया है. लोअर कोर्ट में वंचित समुदाय के जज दिख भी जाते हैं तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी और ओबीसी जजों का नहीं होना हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है. वंचित समाज के तमाम वकील और एक्टिविस्ट इसका कारण उच्च न्यायालयों में फैले जातिवाद और परिवारवाद बताते हैं. यही आरोप इस बार इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ने लगाया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रंगनाथ पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में पत्र लिख कर यह मामला उठाया है. उन्होंने पत्र में लिखा है कि ‘न्यायपालिका दुर्भाग्यवश वंशवाद और जातिवाद से बुरी तरह ग्रस्त हैं और जजों के परिवार से होना ही अगला न्यायधीश होना सुनिश्चित करता है. जस्टिस रंगनाथ पांडे ने अपने खत में लिखा है, ‘भारतीय संविधान भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र घोषित करता है तथा इसमें सबसे अहम न्यायपालिका दुर्भाग्यवश वंशवाद और जातिवाद से बुरी तरह ग्रस्त हैं. यहां न्यायधीशों के परिवार का सदस्य होना ही अगला न्यायधीश होना सुनिश्चित करता है.’

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज द्वारा पीएम मोदी को लिखी गई चिट्ठी

उन्होंने उस बहस को भी हवा दी है जिसमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त होने के लिए प्रतियोगी परीक्षा को अनिवार्य करने की बात की जाती है. प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘राजनीतिक-कार्यकर्ता का मूल्यांकन अपने कार्य के आधार पर ही चुनाव में जनता द्वारा किया जाता है. प्रशासनिक अधिकारी को सेवा में आने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओँ की कसौटी पर उतरना होता है. अधीनस्थ न्यायालय के न्यायाधीशों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में योग्यता सिद्ध करके ही चयनित होने का अवसर मिलता है. लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में जजों की नियुक्ति के लिए हमारे पास कोई निश्चित मापदंड नहीं है. प्रचलित कसैटी है तो केवल परिवारवाद और जातिवाद.’

एक जुलाई को लिखे अपने पत्र में जस्टिस पांडेय ने लिखा है कि उन्हें 34 वर्ष के सेवाकाल में बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को देखने का अवसर मिला है जिनमें कई न्यायाधीशों के पास सामान्य विधिक ज्ञान तक नहीं था. कई अधिवक्ताओं के पास न्याय प्रक्रिया की संतोषजनक जानकारी तक नहीं है. कोलेजियम सदस्यों का पसंदीदा होने के आधार पर न्यायाधीश नियुक्त कर दिए जाते हैं. यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. अयोग्य न्यायाधीश होने के कारण किस प्रकार निष्पक्ष न्यायिक कार्य का निष्पादन होता होगा, यह स्वयं में विचारणीय प्रश्न है. अपने इस पत्र में न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय न्यायिक चयन आयोग स्थापित करने का प्रयास करने की मांग की है.

दो दिन में UP समेत Delhi-NCR पहुंचेगा मानसून

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नई दिल्ली। बंगाल की खड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र ने उत्तर भारत में असर दिखाना शुरू कर दिया है. निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से मानसून की चाल तेज हो चुकी है. मानसून ने मंगलवार दोपहर राजस्थान में दस्तक दे दी है. अगले दो-तीन दिन में मानसून उत्तर भारत के आठ राज्यों को भिगोने के लिए बढ़ रहा है.

भारतीय मौसम विभाग के मौसम वैज्ञानिक नरेश के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत के हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों में अगले 72 घंटे में मानसून की झमाझम बारिश होने वाली है. उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी अगले दो दिन में मानसून की अच्छी बारिश होने की उम्मीद है. अगले चार-पांच दिनों में उत्तराखंड में भी बहुत अच्छी बारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग ने इस पूरे सप्ताह मुंबई समेत चार राज्यों में लगातार बारिश होने का अनुमान जताया है.

मालूम हो कि पिछले कुछ दिनों से मुंबई, ओडिशा और गुजरात में मानसून की बारिश बहुत से लोगों के लिए आफत बनी हुई है, दूसरी तरफ उत्तर भारत समेत देश के ज्यादातर इलाके में अब भी लोगों को राहत की बूंदों का इंतजार है. उत्तर भारत व देश के ज्यादातर राज्य अब भी लू और भीषण उमस का सामना कर रहे हैं. उधर, मानसून की वजह से मुंबई व झारखंड में कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. मौसम विभाग ने सात जुलाई तक मुंबई, ओडिशा, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई इलाकों में लगातार बारिश होने का अनुमान जताया है.

मौसम विभाग व स्काईमेट के अनुसार मानसून बंगाल की खाड़ी से उठकर द्वारका, अहमदाबाद, भोपाल, जबलपुर, पेंड्रा, सुल्तानपुर, लखीमपुरी खेरी, मुक्तेश्वर होते हुए उत्तर भारत की तरफ बढ़ रहा है. साथ ही बंगाल की खाड़ी के उत्तर व आसपास के क्षेत्र जैसे उत्तरी ओडिशा, पश्चिमी बंगाल और बांग्लादेश के तटीय इलाकों व पश्चिम बंगाल के उत्तर-पश्चिम एरिया में एक निम्न दबाव क्षेत्र भी बन रहा है. अगले 24 घंटे में इसके और सघन होने की उम्मीद है. मानसून राजस्थान तक पहुंच चुका है और अगले दो-तीन दिन में इसके यूपी-दिल्ली समेत शेष भारत के ज्यादातर हिस्सों तक पहुंचने की उम्मीद है.

मौसम विभाग का अनुमान है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के कुछ हिस्से में भी दो से चार जुलाई तक मानसून की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से सघन हो रहे कम दबाव क्षेत्र से हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में अगले कुछ दिनों में मौसम करवट लेगा.

3 से 7 जुलाई तक दिल्ली-एनसीआर पहुंचेगा मानसून मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है. पहले मानसून के 7 जुलाई तक एनसीआर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही थी. अब बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र सघन होने से मानसून की रफ्तार बढ़ने का अनुमान है. लिहाजा मौसम वैज्ञानिकों को उम्मदी है कि 3 जुलाई तक मानसून दिल्ली-एनसीआर में दस्तक दे सकता है. हालांकि इसे पूरे दिल्ली-एनसीआर व आसपास के इलाकों तक फैलने में सात जुलाई तक का समय लग सकता है. मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से मानसूनी हवाएं उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली की तरफ आएंगी. इसलिए दो जुलाई के बाद दिल्ली आसपास बारिश होने की उम्मीद है. दिल्ली में आमतौर पर मानसून के दौरान मूसलाधार बारिश 15 के बाद होती है. ऐसे में 20 जुलाई के बाद दिल्ली में झमाझम बारिश के आसार बन रहे हैं.

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यूपीः OBC जातियों को SC में शामिल करने के फैसले पर केंद्र के बयान से आया ट्विस्ट

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के राज्य सरकार के फैसले में केंद्र के बयान से नया ट्विस्ट आ गया है. माना जा रहा था कि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार होने से मामला आसान होगा, लेकिन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत के बयान से मामले में नया मोड़ आ गया है.

केंद्र ने मंगलवार को कहा कि उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना, अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 17 समुदायों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं करना चाहिए था. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान यह बात कही. दरअसल शून्यकाल में यह मुद्दा बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्र ने उठाया. संविधान के अनुच्छेद 341 के उपवर्ग (2) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 17 समुदायों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला असंवैधानिक है क्योंकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की सूचियों में बदलाव करने का अधिकार केवल संसद को है.

इस पर सहमति जताते हुए गहलोत ने भी कहा कि किसी भी समुदाय को एक वर्ग से हटा कर दूसरे वर्ग में शामिल करने का अधिकार केवल संसद को है. उन्होंने कहा कि पहले भी इसी तरह के प्रस्ताव संसद को भेजे गए लेकिन सहमति नहीं बन पाई. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को समुचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए अन्यथा ऐसे कदमों से मामला अदालत में पहुंच सकता है.

इससे पहले बसपा के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र ने कहा ‘‘बीएसपी चाहती है कि इन 17 समुदायों को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए लेकिन यह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए और आनुपातिक आधार पर अनुसूचित जाति का कोटा भी बढ़ाया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि संसद का अधिकार संसद के पास ही रहने देना चाहिए, यह अधिकार राज्य को नहीं लेना चाहिए. बसपा नेता ने केंद्र से राज्य सरकार को यह ‘‘असंवैधानिक आदेश” वापस लेने के लिए परामर्श जारी करने का अनुरोध किया.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 जून को जिला मजिस्ट्रेटों और आयुक्तों को आदेश दिया था कि वे अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल 17 समुदायों कश्यप, राजभर, धीवर, बिंद, कुम्हार, कहार, केवट, निषाद, भार, मल्लाह, प्रजापति, धीमर, बठाम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मचुआ को जाति प्रमाणपत्र जारी करें.

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जब संसद में सोनिया गांधी ने उठाया बड़ा सवाल

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नई दिल्ली। यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को संसद में मोर्चा संभाला. इस दौरान उन्होंने को जमकर घेरा और सरकार पर रेलवे की बहुमूल्य संपत्तियों को निजी क्षेत्र के चंद हाथों को कौड़ियों के दाम पर बेचने का आरोप लगाया. रायबरेली के रेल कोच फैक्ट्री का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि सरकार ने निगमीकरण के प्रयोग के लिए रायबरेली के माडर्न कोच कारखाने जैसी एक बेहद कामायाब परियोजना को चुना है. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने निगमीकरण को निजीकरण की शुरुआत करार दिया.

लोकसभा में शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एक योजना के तहत उनके संसदीय क्षेत्र रायबरेली के मॉडर्न कोच कारखाने समेत रेलवे की कुछ उत्पादन इकाइयों का निगमीकरण करने जा रही है जो इन इकाइयों के निजीकरण की शुरूआत है. उन्होंने कहा, ‘जो निगमीकरण का असली मायने नहीं जानते, उन्हें मैं बताना चाहती हूं कि यह दरअसल निजीकरण की शुरुआत है. यह देश की बहुमूल्य संपत्तियों को निजी क्षेत्र के चंद हाथों को कौड़ियों के दाम पर बेचने की प्रक्रिया है.’ गांधी ने कहा कि इससे हजारों लोग बेरोजगार हो जाते हैं. सोनिया गांधी ने कहा कि इस कारखाने में आज बुनियादी क्षमता से ज्यादा उत्पादन होता है. यह भारतीय रेलवे का सबसे आधुनिक कारखाना है. सबसे अच्छी इकाइयों में से एक है. सबसे बेहतर और सस्ते कोच बनाने के लिए मशहूर है.

यूपीए अध्यक्ष ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि सरकार ने संसद में अलग से रेल बजट पेश करने की परंपरा क्यों बंद कर दी? उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने इस फैसले को गहरा राज बनाकर रखा गया. कारखानों की मजदूर यूनियनों और श्रमिकों को विश्वास में नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसयू) का बुनियादी उद्देश्य लोक कल्याण है, निजी पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना नहीं. उन्होंने कहा कि सरकार से मेरा अनुरोध है कि रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्टरी और सार्वजनिक क्षेत्र की सभी संपत्तियों की पूरी रक्षा करे और इन्हें चलाने वाले मजदूरों और कर्मचारियों तथा उनके परिवारों के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखे.

बेमतलब है फिल्म ‘आर्टिकल 15’ का ब्राह्मण विरोध

28 जून को फिल्म आर्टिकल-15 देश भर में रिलीज हुई। रिलीज के पहले से ही इस फिल्म के विरोध की खबरें आ रही थी। वजह यह थी कि इस फिल्म में समाज के भीतर की जातीय व्यवस्था की बात थी। वजह यह थी कि फिल्म के केंद्र में जाति व्यवस्था और दलित समाज था। चाहे राजनीति हो, बिजनेस हो, साहित्य या फिर फिल्म… जैसे ही इसमें दलित शब्द आता है, एक खास समुदाय के तकरीबन 90 फीसदी लोगों का मुंह कसैला हो जाता है। मैं 10 फीसदी को इसलिए छोड़ रहा हूं क्योंकि उस खास समुदाय के कुछ लोग सुलझे भी हुए हैं। तो आर्टिकल 15 के केंद्रीय विषय में दलितों के होने के कारण फिल्म की रिलीज के बाद देश के कुछ हिस्सों में इसके विरोध की खबर है।

उत्तराखंड के रुड़की में फिल्म आर्टिकल 15 की स्क्रीनिंग को बैन कर दिया गया है। फिल्म रिलिज होने के दूसरे ही दिन 29 जून को जिला प्रशासन ने सिनेमाघरों में फिल्म को चलाने पर रोक लगा दिया। शहर के एसडीएम रविन्द्र सिंह नेगी की ओर से कहा गया कि फिल्म के कारण शहर में लॉ एंड आर्डर की समस्या खड़ी हो सकती है। एसडीएम साहब का कहना था कि शहर के हिन्दू सेना के लोग उनसे मिलने आए थे और उनका कहना था कि फिल्म आर्टिकल 15 में एक विशेष जाति समूह को गलत तरीके से पेश किया गया है। हिन्दू सेना ने जो कहा सो कहा, एसडीएम साहब नेगी जी को भी हिन्दू सेना की चिंता पर चिंता होने लगी और उन्होंने हिन्दू सेना को समझाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाने की बजाय आदेश दे दिया कि फिल्म नहीं चलेगी। रुड़की में यह फिल्म एकमात्र सिनेमा हॉल R.R Cinema में लगी थी और एसडीएम साहब के आदेश के बाद उसे हटा लिया गया है।

रूड़की के बाद अब कानपुर से भी फिल्म के विरोध की खबर है। यहां तो हिन्दूवादी संगठनों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाने की भी जहमत भी नहीं उठाई, बल्कि सीधे सिनेमाघर में जा घुसे और चलती फिल्म रोक दी। इस दौरान उन्होंने फिल्म बनाने वालों के खिलाफ जमकर नारे लगाएं और फिल्म के पोस्टर फाड़ डाले। कानपुर के आईनॉक्स मल्टीप्लेक्स और सपना पैलेस थिएटर में आर्टिकल 15 फिल्म लगी थी। इस हंगामे के बाद थिएटर मालिकों ने तय किया है कि जब तक प्रशासन सुरक्षा मुहैया नहीं कराता, वह फिल्म को नहीं दिखाएंगे। प्रशासन खामोश है।

उधर पटना में भी फिल्म को लेकर कहर बरपा हुआ है। फिल्म रिलीज होने के बाद से ही पटना के ब्राह्मण संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। पटना में भूमिहार ब्राह्मण एकता मंच के लोग फिल्म रिलीज होने के दूसरे ही दिन पटना के मोना सिनेमा और सिनेपोलिस के बाहर जमा हो गए और सड़क जाम कर दिया। विरोध के बाद दोनों जगह शो रद्द करना पड़ा। हालांकि यहां की घटना में थोड़ा ट्विस्ट है। फिल्म रोके जाने की खबर सुनकर पटना में दलित छात्र मोना सिनेमा हाल में पहुंच गए और फिल्म को शुरू करने की मांग करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने दलित छात्रों पर जमकर लाठियां बरसाई। ये वही पुलिस थी, जिसने सिनेमा बंद कराने आए लोगों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की थी। तो इलाहाबाद में भी राष्ट्रीय हिन्दू संगठन की ओर से फिल्म आर्टिकल-15 का विरोध किया गया।

अब आते हैं इस पर आखिर फिल्म का विरोध क्यों? तो विरोध करने वाले सभी संगठनों का कहना है कि फिल्म में ब्राह्मणों की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। तो हम आपको बताते हैं कि आखिर हकीकत क्या है…

यह सच है कि फिल्म जातीय व्यवस्था पर है और फिल्म में समाज में मौजूद जाति व्यवस्था को दिखाया गया है। लेकिन फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा सीधे तौर पर किसी जाति का विरोध करने से खुद को और फिल्म को बचाने में सफल रहे हैं। ब्राह्मण समाज के जो संगठन फिल्म का विरोध करने के लिए सड़कों पर हैं, दरअसल वो खुद की टीआरपी बढ़ा रहे हैं, क्योंकि फिल्म में ब्राह्मणों के बारे में कुछ है ही नहीं। स्वामी जी के किरदार के रूप में एक ब्राह्मण किरदार को दिखाया भी गया है तो वह राजनीति में मशगूल रहता है, न की दलित उत्पीड़न में।

निगेटिव कैरेक्टर की बात करें तो फिल्म में सिर्फ दो निगेटिव किरदार हैं। पुलिस थाने में ब्रह्मदत सिंह और कंट्रेक्टर। पुलिस अधिकारी को फिल्म में ठाकुर यानि राजपूत समाज का दिखाया गया है। वह दलितों के खिलाफ मामले को दबाता है और शहर के मजबूत लोगों की गलत कामों में मदद करता है। लेकिन इसकी जड़ में सिर्फ जातीय विद्वेष ही नहीं है, बल्कि डर भी है। क्योंकि एक बार वह कहता भी है कि हमें इसी शहर में रहना है। बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर होता है और हमारी हत्या हो जाती है।

दूसरा निगेटिव किरदार कांट्रेक्टर होता है जो पोलिटिशियन स्वामी जी का करीबी होता है और जो दोनों लड़कियों के गैंगरेप और फिर उनकी हत्या का दोषी होता है। और वह उसी किरदार को पेश करता है जिसकी चर्चा आपको हर रोज अखबारों में मिल जाएंगी। वह उन दोनों लड़कियों को उनकी औकात दिखाने के लिए पहले गैंगरेप और फिर हत्या करता है। और समाज के भीतर दलितों-पिछड़ों को औकात में रहने और उनकी हद दिखाने वाले डायलॉग हर रोज सुनने को मिल जाते हैं। और इसमें वह समाज अपनी शान समझता है।

इसलिए कथित सभ्य समाज के गुस्से की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि इस फिल्म में न तो सवर्ण वर्चस्ववाद को चुनौती दी गई है न ही दलितों और सवर्णों का संघर्ष दिखाया गया है। बल्कि यह फिल्म एक प्रगतिशील ब्राह्मण नायक के जरिए दलितों को इंसाफ दिलाने की कोशिश की कहानी भर है। हां, अगर ब्राह्मण समाज खुद को एक प्रगतिशील और अच्छे इंसान के तौर पर भी देखना पसंद नहीं करता तो फिर उनका विरोध जायज है।

गहरी खाई में गिरी मिनी बस, 35 लोगों की मौत

किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है. यहां एक मिनी बस एक गहरी खाई में गिर गई और हादसे का शिकार हो गई. इस हादसे में अबतक 35 लोगों की मौत हो चुकी हैं. वहीं, घायलों की संख्या 16 बताई जा रही है. घायल लोगों में से तीन को जम्मू एयरलिफ्ट किया गया है. घायलों को एयरलिफ्ट करने के लिए एक और हेलिकॉप्टर किश्तवाड़ रवाना हो चुका है.

इस बीच जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने किश्तवाड़ सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों के लिए अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने मृतक के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और किश्तवाड़ सड़क दुर्घटना में घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा प्रदान करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिया.

इस बीच जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में सड़क दुर्घटना पर पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुआ हादसा दिल दहला देने वाला है. हम उन सभी लोगों के प्रति शोक व्यक्त करते हैं जिन्होंने अपना जीवन खो दिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने घायलों के जल्द से जल्द ठीक होने की कामना की.

गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे पर दुख जताया है. गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है. अमित शाह ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है.

जिन घायलों को एयरलिफ्ट कर जम्मू राजकीय मेडिकल कालेज लाया गया है उनमें प्रवीण बानो पुत्री अब्दुल गफार, तारिक हुसैन पुत्र गुलाम मोहम्मद, मोहम्मद अब्दुल्ल वानी पुत्र अब्दुल सुबान, दीपा पुत्री जोध राम, मोहम्मद इलियास पुत्र सुबान बट्ट, हमीद राथर पुत्र मोहम्मद वली, अजरा बानो पुत्री गुलाम मोहम्मद, कुलसुमा बानो पुत्री मोहम्मद अशरफ मीर, अब्दुल रहमान पुत्र अहमद बट्ट, हसीना बानो पुत्री गुलाम मोहम्मद, मुनीमा बेगम पत्नी याकीर हुसैन, प्रवीण बानो पुत्री मोहम्मद अशरफ, इरशाद पुत्र सरदारो सभी निवासी केशवान, लेख राज पुत्र बिदिया लाल सभी निवासी सरवान, अर्जुन पुत्र नेक राम निवासी अंजोल, रइस अहमद पुत्र गुलाम मोहिउदीन, अदिबा सहित तीन साल की बच्ची शामिल है, जिसकी पहचान नहीं हो पाई है.

सड़क दुर्घटना में मरने वालों के नाम

अमजद मीर पुत्र अब्दुल लतीफ निवासी केशवन, गुलाम मोहम्मद बट्ट, बेगामा बेगम पत्नी उस्मान खांडे निवासी नगनी केशवान, दीपक कुमार पुत्र नायब चंद, ताहिरा बेगम पत्नी स्वर्गीय अरशद अहमद, नूरदीन चौहान, शाफिया बानो पत्नी अख्तर हुसैन, बाल कृष्ण पुत्र देव आनंद, बिनोता देवी पत्नी बाल कृष्ण, ताजा बेगम पत्नी गुलाम हुसैन मीर, साजा बेगम पत्नी अहमदू वानी, नाहिदा बानो पुत्री बशीर अहमद, अख्तर हुसैन पुत्र अब्दुल समद, रूखसाना बेगम पत्नी अख्तर हुसैन व उसका 45 दिन का बच्चा, वसीम राजा पुत्र अब्दुल समद, बीरी बेगम पुत्री जम्वाल अहमद, जयतूना बेगम पुत्री शफी अहमद, नूर दीन पुत्र जवान अहमद, हाजिरा बेगम पत्नी बशीर अहमद, परमीला देवी पत्नी नेक राम, बशीर अहमद पुत्र गुलाम हुसैन, अश्विनी पुत्र जिया लाल, बशीर पुत्र कासिम दीन, हकनवाज बट्ट पुत्र गुलाम मोहम्मद बट्ट, तारिक हुसैन राथर पुत्र गुलाम मोहम्मद राथर, अब्दुल हमीद पुत्र मोहम्मद वली, मसूम अली पुत्र मोहम्मद शफी, साजन शर्मा, पुत्र राकेश शर्मा, जुनेद शेख पुत्र जावेद शेख, अाकीब हुसैन पुत्र अख्तर बट्ट, आसिया तबस्सुम पुत्री मोहम्मद उस्मान, नवाजा बेगम पत्नी जावेद अहमद शेख, वाहन चालक राकेश कुमार पुत्र दीनानाथ, गुलाबा बेगम पत्नी खेर दीन गुज्जर शामिल हैं.

बता दें, यह हादसा किश्तवाड़ के सिरगवारी केशवन इलाके में हुआ, जहां एक मिनी बस के एक गहरी खाई में गिर गई. मिनीबस का नंबर जेके-17-6787 बताया जा रहा है. यह हादसा सुबह करीब पौने आठ बजे हुआ. मिनीबस में क्षमता से कहीं ज्यादा यात्री सवार थे. यह मिनीबस यात्रियों को लेकर केशवन से किश्तवाड़ की तरफ आ रही थी.पुलिस और सेना के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं. राहत और बचाव अभियान चल रहा है और घायलों को अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है.

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बारिश से बेहाल हुई मुंबई

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मुंबई में रविवार देर रात से लगातार भारी बारिश हो रही है. कई इलाकों में लोग जलभराव की समस्या का सामना कर रहे हैं. पालघर में जल जमाव के कारण चार ट्रेनों को रद्द और पांच ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया गया है. रेलवे ट्रेक भी पानी में डूब हुए हैं. इस बीच, मौसम विभाग ने आज दिन में भी भारी बारिश की चेतावनी और हाई टाइड का अलर्ट जारी किया है.

बहरहाल, मुंबई में रात भर की बारिश से तमाम इलाकों में पानी भरा है. लोकल ट्रेन पर असर पड़ा है. स्कूल और दफ्तर जाने वालों को भारी परेशानी हो रही है. बारिश की वजह से बीएमसी के दावे की पोल खुल गई है. ये मुंबई की नियति है जहां बारिश होते ही जिंदगी डूबने-उतरने लगती है.

मुंबई में मॉनसून शबाब पर क्या आया पूरी मुंबई समंदर में तब्दील हो गई. निचले इलाके में जबदरस्त तेजी से पानी भरा और मायानगरी मुंबई त्राहि-त्राहि करने लगी. हर साल जुलाई-अगस्त का महीना आते ही सैलाब से सराबोर हो जाता है. इस साल भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है.

वहीं अंधेरी इलाके का हाल भी कुछ अलग नहीं है, जहां रात भर की बारिश से जिंदगी बेहाल हो गई. चंद घंटे बाद बारिश का पानी घटा जरूर लेकिन मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं. इसी तरह पालघर में भी बारिश के पानी ने इलाके की सूरत बदलकर रख दी. रात भर मुंबई में रुक-रूककर ठहर-ठहरकर बारिश होती रही..और इलाके जलमग्न होत रहे.

मुंबई में भारी बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि मुंबई के साथ-साथ महाराष्ट्र के कई इलाकों में भी भारी बारिश हो सकती है. महराष्ट्र के ठाकुरबाड़ी इलाके में बारिश की वजह से एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई तो पुणे की तरफ जाने वाली तमाम ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है.

पिछले दो दिनों से मुंबई में बारिश हो रही है. इस कारण गली-गली पानी के सिवा कुछ नहीं दिख रहा है. सड़कों पर खड़ी गाड़ियां डूबने लगी हैं. कई जगहों पर गाड़ी में पानी घुसने से वे बंद पड़ गई हैं. लोगों को पैदल उतरकर गाड़ी को धक्का देना पड़ रहा है, जिसकी वजह से ट्रैफिक की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. आने जाने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

मजबूर हो गए हैं. लगातार बारिश होने से पानी का बहाव नहीं हो पा रहा है. सोमवार होने की वजह से ऑफिस जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या पैदा हो गई, जिससे ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का सामना लोगों को करना पड़ा. इसके अलावा कई ट्रेनों और विमानों की उड़ान पर भी बारिश का असर पड़ा.

इन रास्तों में किया गया ट्रैफिक डायवर्जन

1. गांधी मार्केट के ट्रैफिक को भाऊदाजी रोड और सुलोचना शेट्टी रोड पर डायवर्ट किया गया.

2. नेशनल कॉलेज, एसवी रोड, बांद्रा रोड के ट्रैफिक को लिंक रोड पर डायवर्ट किया गया.

हेल्प डेस्क नंबर जारी 

मुंबई सेंट्र्ल रेलवे स्टेशन- 02267645526/02223087299 बांद्रा टर्मिनस- 02267647594/02226435756 दादर- 02267640704 अंधेरी- 02267630053 बोरीवली- 02267634146 भोइसर- 02267638062 विरार- 02267639014 नवसारी- 02267641731/02637250289 वापी- 02267649438/02602462341 वलसाड- 02267649453/026332241904 सूरत- 02267641178/02612401792 Read it also- सरकारी कर्मचारी से जूते पहनते कैमरे में कैद हुए योगी के मंत्री