इंग्लैंड ने रचा इतिहास, पहली बार बना विश्व चैंपियन

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आखिरकार इंग्लैंड ने 2019 क्रिकेट विश्व कप जीत ही लिया. रविवार को खेला गया विश्व कप का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा. न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच हुआ यह मैच टाई रहा जिसके बाद मैच का नतीजा निकालने के लिए सुपर ओवर करवाया गया और सुपर ओवर भी टाई हो गया. आईसीसी के नियम के मुताबिक इस स्थिति में मैच में ज्यादा चौके लगाने वाली टीम को विजेता घोषित किया जाता है. इस मैच में इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड के मुकाबले ज्यादा चौके लगाए थे जिस आधार पर उसे विजेता घोषित कर दिया गया. इंग्लैंड ने इस मैच में कुल 24 चौके लगाए, जबकि न्यूजीलैंड की टीम ने अपनी पारी में कुल 14 चौके ही लगाए थे.

इससे पहले न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 8 विकेट खोकर 241 रन बनाए. जवाब में उतरी इंग्लैंड की टीम ने भी 50 ओवर में 10 विकेट खोकर 241 बना लिए. इंग्लैंड ने सुपर ओवर में 15 रन बनाए और न्यूजीलैंड की टीम भी सुपर ओवर की 6 गेंदों में 15 रन ही बना सकी.

न्यूजीलैंड द्वारा दिए गए 242 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मेजबान इंग्लैंड को पहला झटका जेसन रॉय के रूप में लगा. जेसन रॉय 20 गेंदों में 17 रन बनाकर मैट हेनरी की गेंद पर विकेट के पीछे टॉम लेथम के हाथों कैच आउट हुए. इसके बाद जो रूट को कॉलिन डी ग्रैंडहोम ने सात रन पर चलता किया. इसके कुछ देर बाद ही जॉनी बेयरस्टो को लॉकी फर्ग्युसन ने क्लीन बोल्ड कर दिया. बेयरस्टो ने 55 गेंदों पर 36 रन बनाए.

इंग्लैंड को चौथा झटका कप्तान इयोन मोर्गन के रूप में लगा. मोर्गन 22 गेंदों में 9 रन बनाकर जिमी नीशम की गेंद पर फर्गुसन के हाथों कैच आउट हुए. इसके बाद जोस बटलर और बेन स्टोक्स ने पारी को संभाला और पांचवें विकेट के लिए 110 रन की साझेदारी की. लेकिन, जोस बटलर (59 रन) के आउट होने बाद कोई भी ज्यादा देर नहीं टिक सका. इसके बाद क्रिस वोक्स दो रन, लियाम प्लंकेट दस, जोफ्रा आर्चर, मार्क वुड और आदिल राशिद बिना कोई रन बनाए आउट हो गए. इंग्लैंड की तरफ से बेन स्टोक्स ने सबसे ज्यादा 84 रन बनाए और अंत तक नाबाद रहे.

न्यूजीलैंड की ओर से तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन और जेम्स नीशम ने तीन-तीन बल्लेबाजों को आउट किया. जबकि मैट हेनरी कॉलिन डी ग्रैंडहोम ने एक-एक इंग्लिश बल्लेबाज को अपना शिकार बनाया.

इससे पहल लार्ड्स के मैदान में खेले जा रहे इस फाइनल मैच में न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था. न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल और हेनरी निकोलस ने संभलकर शुरुआत की. लेकिन, सातवें ओवर में गुप्टिल पगबाधा आउट हो गए. उस समय टीम का स्कोर 29 रन था. उसके बाद आए कप्तान विलियमसन और निकोलस ने पारी को बढ़ाना शुरु किया और स्कोर को 103 तक पहुंचाया. लेकिन 103 रन के स्कोर पर प्लंकेट ने विलियमसन को बटलर के हाथों आउट करा न्यूजीलैंज का दूसरा विकेट झटका. विलियमसन ने 53 गेंदों में 30 रन बनाए. इसके बाद न्यूजीलैंड के विकेट जल्दी-जल्दी गिरे. निकोलस 27 वें ओवर में उस समय आउट हुए जब टीम का स्कोर 118 रन था. उन्होंने 77 गेंदों में 55 रन बनाए. इसके बाद रॉस टेलर भी 15 रन बनाकर आउट हो गए और टीम का स्कोर 141 रन पर चार विकेट हो गया.

इसके बाद लेथम और नीशम ने कुछ अच्छे शॉट्स खेलकर दबाव कम करने की कोशिश की. लेकिन रन गति बढ़ाने के प्रयास में नीशम प्लंकेट की गेंद पर आउट हो गए. न्यूजीलैंड की आधी टीम पैवेलियन वापस लौट चुकी थी और स्कोर 173 रन था. इसके बाद लेथम और ग्रैंडहोम ने पारी को संभाला. खासतौर, पर लेथम ने तेजी से रन बटोरने शुरु किए. लेकिन, मैच के 47 वें ओवर में ग्रैंडहोम, वोक्स की गेंद पर आउट हो गए. उस समय तक न्यूजीलैंड ने छह विकेट खोकर 219 रन बनाए थे. इसके बाद लेथम रन गति बढ़ाने के प्रयास में 49 ओवर में क्रिस वोक्स की गेंद पर आउट हो गए. इस समय तक न्यूजीलैंड का स्कोर 232 पर सात हो चुका था. पारी के आखिरी ओवर में आर्चर ने मैट हेनरी को बोल्ड कर दिया और न्यूजीलैंड आठ विकेट खोकर 241 रन ही बना सके.

इंग्लैंड की ओर से प्लंकेट ने 10 ओवर में 42 रन खर्च कर तीन विकेट लिए. क्रिस वोक्स को तीन और वुड को एक विकेट मिला. ज्योफ आर्चर ने किफायती गेंदबाजी करते हुए एक विकेट झटका.

इंग्लिश बल्लेबाज बेन स्टोक्स को उनकी 84 रन की पारी के लिए इस मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया. न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियमसन को टूर्नामेंट में 578 रन बनाने के लिए विश्व कप 2019 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया.

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बहुजन विद्यार्थियों को आरक्षण के मुताबिक दाखिला नहीं दे रहा दिल्ली विश्वविद्यालय

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Delhi university

देश के बड़े विश्वविद्यालयों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय में इन दिनों दाखिले का दौर चल रहा है। देश भर से तमाम युवा दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन की चाह लिए अपने भविष्य के सपने बुन रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों के सपने पूरे भी कर रहा है, लेकिन सिर्फ एक खास जाति वर्ग के। जबकि यही विश्वविद्यालय कमजोर वर्ग के युवाओं के डीयू में पढ़ने के सपने को कुचलने पर अमादा है।

8 जुलाई को एडमिशन की तीसरी कट ऑफ लिस्ट जारी होने के बाद विश्वविद्यालय के इंफर्मेशन बुलेटिन के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले में 61.11 फीसदी सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है, जबकि आरक्षण होने के बावजूद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग का कोटा तक पूरा नहीं किया गया है। इस खबर को समाचार पत्र द हिन्दू ने भी प्रकाशित किया है। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक अब तक हुए दाखिले में दलित, आदिवासी वर्ग और पिछड़े वर्ग के साथ बहुत बड़ा धोखा सामने आया है। अनुसूचित जनजाति के लिए संविधान में 7.5 फीसदी आरक्षण दिया गया है लेकिन डीयू ने इस वर्ग के सिर्फ 3 फीसदी विद्यार्थियों को ही दाखिला दिया है।

Photo Courtesy: The Hindu

इसी तरह अनुसूचित जाति के लिए संविधान के तहत नौकरियों और विश्वविद्यालयों में दाखिले में 15 फीसदी आरक्षण दिया गया है, लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय ने नियमों को ताक पर रख कर इस वर्ग के सिर्फ 10.94 फीसदी विद्यार्थियों को ही मौका दिया है। पिछड़े वर्ग का हाल भी इससे जुदा नहीं है। नियम के मुताबिक पिछड़े वर्ग को मिलने वाले 27 फीसदी आरक्षण को भी विश्वविद्यालय ने नजरअंदाज किया है और इस वर्ग के सिर्फ 20.96 फीसदी छात्रों को दाखिला दिया है। यानि दिल्ली विश्वविद्यालय ने अनुसूचित जनजाति यानि शिड्यूल ट्राइब के हक का साढे चार (4.5) प्रतिशत, अनुसूचित जाति यानि शिड्यूल कॉस्ट का चार प्रतिशत (4.06) और पिछड़े वर्ग यानि ओबीसी समाज का 6 फीसदी आरक्षण हड़प कर दूसरे वर्ग को दे दिया है।

‘द हिन्दू’ की खबर में अनुसूचित जनजाति की खाली सीटों को लेकर जब डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर राजीव गुप्ता से पूछा गया तो उनका कहना था कि देश भर में कई विश्वविद्यालय हैं और तमाम तरह के प्रोफेशनल कोर्सेस हैं, इसलिए यह नंबर पूरा नहीं हो पाता। हालांकि अगर एक पल को उनकी बात पर यकीन कर भी लिया जाए तो अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग को लेकर उनकी यह दलील काफी कमजोर लगती है। क्योंकि इस वर्ग के तमाम छात्र डीयू में दाखिला न मिल पाने के कारण परेशान हैं।

आखिर आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों की अनदेखी की वजह क्या है, इसे वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की उस प्रतिक्रिया से समझा जा सकता है जो उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा है, दिलीप मंडल कहते हैं- दिल्ली यूनिवर्सिटी खास है क्योंकि इसी से देश भर के विश्वविद्यालयों की नीति तय होती है. ये देश की सबसे बड़ी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है जिसमें रेगुलर कोर्स में हर साल 52,000 से ज्यादा सीटें आती हैं. यहां के ग्रेजुएट कोर्स से अक्सर तरक्की की राह खुलती है. कई कॉ़लेजों में शानदार प्लेसमेंट होता है. विदेश जाने का रास्ता भी यहां से आसान हो जाता है. इसलिए जातिवाद का सबसे निर्मम खेल यहीं होता है ताकि एससी-एसटी-ओबीसी के स्टूडेंट यहां न आ पाएं. ज्यादा खेल यहां के टॉप 10 कॉलेजों में है. वहां सबसे ज्यादा जातिवाद है.

दिलीप मंडल का सवाल जायज है। हालांकि इस खबर के सामने आने के बाद भी बहुजनों के खेमें में छाई चुप्पी और बड़े विरोध की कमी चिंता की बात है।

सेमीफाइनल में हार के बाद हो सकता है टीम इंडिया के इन खिलाड़ियों का वर्ल्ड कप करियर खत्म

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भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप 2019 के सेमीफाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. न्यूजीलैंड ने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में हुआ ये मुकाबला 18 रन से अपने नाम किया. न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया के सामने 240 रन का लक्ष्य रखा था, लेकिन भारतीय टीम 49.3 ओवर में 221 रन ही बना सकी.

भारतीय टीम की वर्ल्ड कप से विदाई के साथ ही अब हार का पोस्टमार्टम भी शुरू हो गया है. कोई सेमीफाइनल में हार के लिए विराट कोहली के फैसलों को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो कोई टीम में दिनेशन कार्तिक की जगह को लेकर भी सवाल उठा रहा है. हार की वजह जो भी हो, वर्ल्ड कप के बाद एक बात तो तय हो गई कि कुछ खिलाड़ी अब कभी भारतीय टीम के लिए वर्ल्ड कप खेलते नजर नहीं आएंगे. ऐसे हुए कुछ खिलाड़ियों पर नजर डालते हैं जिनका अगले वर्ल्ड कप में न खेलना या तो तय है या इस बात की पूरी उम्मीद है.

महेंद्र सिंह धोनी

अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को दो वर्ल्ड कप जिताने वाले महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. 37 साल के धोनी 2023 का वर्ल्ड कप नहीं खेलेंगे, यह बात लगभग तय ही है. बल्कि धोनी अगर इंग्लैंड से लौटकर कुछ ही दिन में संन्यास का ऐलान कर दें तो भी किसी को हैरान नहीं होना चाहिए. धोनी ने अपने करियर में सब कुछ हासिल कर लिया है. ऐसे में अब शायद सिर्फ ये देखना बाकी है कि भारतीय टीम के इस हीरो की विदाई कैसी होती है.

वर्ल्ड कप 2019 में प्रदर्शन : 9 मैचों में 273 रन, सर्वाधिक 56 बनाम वेस्टइंडीज

वनडे करियर : 350 मैच, 10773 रन, 10 शतक, सर्वाधिक 183*, औसत 50.57

दिनेश कार्तिक

टीम इंडिया के इस विकेटकीपर बल्लेबाज की उम्र 34 साल है और अगले वर्ल्ड कप में वह 38 साल की उम्र पार कर जाएंगे. उम्र व ऋषभ पंत और नए विकेटकीपरों की खेप देखते हुए दिनेश कार्तिक का टीम में जगह मुश्किल है. ऐसे में दिनेश कार्तिक का वर्ल्ड कप करियर यहीं खत्म हो गया है. इस बात की भी उम्मीद बेहद कम ही है कि वे टीम इंडिया के आगामी मुकाबलों में भी टीम में शामिल किए जाएं.

वर्ल्ड कप 2019 में प्रदर्शन : 3 मैचों में 14 रन. सर्वाधिक 8 रन बनाम बांग्लादेश.

वनडे करियर : 94 मैच, 1752 रन, 30.20 का औसत, सर्वाधिक 79 रन

शिखर धवन

भारतीय दिग्गज ओपनर शिखर धवन ने मौजूदा वर्ल्ड कप में केवल दो ही मैच खेले. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच में उन्होंने आठ रन बनाए और इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार 117 रन जड़कर टीम इंडिया को जीत दिलाई. इसी मैच में उनके बाएं हाथ के अंगूठे में चोट लग गई, जिसके बाद वे वर्ल्ड कप से बाहर हो गए. धवन की उम्र अभी 33 साल 218 दिन हैं. 2023 वर्ल्ड कप तक वे करीब 38 साल की दहलीज पर खड़े होंगे. उनका करियर चोटों से भी प्रभावित रहा है. ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि 2023 वर्ल्ड कप टीम में धवन दिखाई न दें.

वर्ल्ड कप 2019 में प्रदर्शन : दो मैचों में 125 रन. सर्वाधिक 117 बनाम ऑस्ट्रेलिया.

वनडे करियर : 130 मैच, 5480 रन, 17 शतक, 44.91 का औसत

केदार जाधव

टीम इंडिया के इस बैटिंग ऑलराउंडर की उम्र फिलहाल 34 साल है. अगले वर्ल्ड कप तक वे 38 साल के हो जाएंगे. ऐसे में इस बात में कोई शक नहीं कि वे अगला वर्ल्ड कप खेलने नहीं जा रहे हैं. जाधव से हालांकि मौजूदा वर्ल्ड कप में काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वे उन पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके. जाधव को छह मैचों में मैदान में उतारा गया.

वर्ल्ड कप 2019 में प्रदर्शन : 6 मैचों में 80 रन. विकेट एक भी नहीं. सर्वाधिक 52 रन बनाम अफगानिस्तान.

वनडे करियर : 65 वनडे, 1254 रन, 2 शतक, 43.24 का औसत

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बड़े नेताओं के विरोध पर क्यों उतारू हैं बसपा कार्यकर्ता

लोकसभा चुनाव में आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिलने और फिर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने के बाद बसपा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. देश भर से पार्टी के भीतर से ही विरोध की खबरें आ रही हैं. पिछले दिनों महाराष्ट्र के अमरावती और यूपी के हाथरस से भरी बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के समर्थकों के बीच मारपीट की खबर तक आई थी. नई सूचना गोरखपुर से है, जहां क्षेत्र के एक कद्दावर युवा नेता श्रवण कुमार निराला के समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर जूतम पैजार हुई है.

दरअसल मंगलवार 9 जुलाई को बहुजन समाज पार्टी की समीक्षा बैठक चल रही थी. इस बैठक में गोरखपुर मंडल के कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था. मुख्य अतिथि के रूप में प्रमुख जोन इंचार्ज घनश्याम खरवार मौजूद थे. इस दौरान हर लोकसभा सीट की समीक्षा शुरू होने लगी. बांसगांव लोकसभा की समीक्षा के दौरान पदाधिकारियों ने श्रवण कुमार निराला को बताया कि बहनजी उनको वापस संगठन में लेना चाहती हैं और उनको महाराजगंज का प्रभारी बनाया जा रहा है.

बस फिर क्या था, निराला नाराज हो गए. नाराज होने की वजह यह थी कि बसपा मुखिया ने ही निराला को बांसगांव विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था. जहां पिछले दो साल से निराला मेहनत भी कर रहे थे. लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र से बसपा को सबसे अधिक 85 हजार वोट भी मिले थे. निराला क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे और विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारियों में लगे थे. ऐसे में अचानक उन्हें संगठन में लगाने का मतलब था, उनका टिकट काटा जाना.

श्रवण कुमार निराला

इस सूचना के मिलते ही निराला मंच पर चढ़ गए और अपने समर्थकों को जानकारी दी कि बांसगांव से पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है. निराला यहीं नहीं रुके और लगे हाथ मंच से ही बसपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. इस दौरान उनका कहना था कि चूकि वो पैसे नहीं दे सकते, इसलिए उनका टिकट काटा जा रहा है. इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से न सिर्फ जमकर नारेबाजी शुरू हो गई, बल्कि नौबत मारपीट तक पहुंच गई. हाथा-पाई में कई कार्यकर्ताओं के कपड़े फट गए.

जहां तक श्रवण कुमार निराला की बात है तो वह पिछले दो दशक से ज्यादा समय से बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए हैं. गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति करने वाले और विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने वाले निराला ने जब सक्रिय राजनीति में कदम रखने की सोची तो अम्बेडकरी विचारधारा से जुड़े होने के कारण उन्होंने बहुजन समाज पार्टी को चुना. उनकी काबिलियत को पहचानते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें संगठन के भीतर कई पदों पर भी रखा. 2008 में उन्हें जोनल को-आर्डिनेटर बनाया गया था. पिछले दो साल से वह बांसगांव विधानसभा के प्रभारी या यूं कहें कि प्रत्याशी के रूप में सक्रिय थे. लेकिन अब अचानक उनका टिकट काटने की खबर आ गई.

श्रवण निराला के इस्तीफे के बाद आनन-फानन में गोरखपुर के बसपा जिलाध्यक्ष ने एक विज्ञप्ति जारी कर बसपा प्रमुख मायावती के निर्देश पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की बात कह कर निराला को पार्टी से निष्कासन की बात कही, हालांकि पहले के तमाम मिशनरी नेताओं की तरह पार्टी की ओर से इस बार भी नहीं बताया कि आखिर निराला ने क्या काम किया था जो पार्टी विरोधी था. इस तरह पार्टी को अपने जीवन के कीमती साल देने के बावजूद पार्टी से निकाले जाने वाले नेताओं की सूची में एक और नाम जुड़ गया है.

लेकिन यहां एक सवाल यह है कि आखिर बसपा की समीक्षा बैठकों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से कार्यकर्ताओं के हंगामा करने की खबरें क्यों आ रही है. आखिर क्यों महाराष्ट्र के अमरावती में समीक्षा बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं के गुस्से का शिकार होने के बाद पदाधिकारियों को बैठक से भागना पड़ा. सवाल है कि आखिर देश के तमाम हिस्सों से पार्टी के भीतर विरोध की खबरें क्यों आ रही हैं.

दरअसल तमाम जगहों पर विरोध की वजह यह है कि बैठक के दौरान कार्यकर्ता पार्टी पदाधिकारियों के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं, जिसे सुनने में कुछ बड़े पदाधिकारियों की कोई दिलचस्पी नहीं दिखती है. तो वहीं सालों से पार्टी के भीतर लगे कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन में तो खूब इस्तेमाल करती है लेकिन जब इसमें से तमाम लोग टिकट की मांग करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगती है. ऐसे में कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस करता है और विरोध पर उतर जाता है. इस तरह की खबरों से पार्टी की छवि को लगातार धक्का लग रहा है. इस बारे में बसपा नेतृत्व को गंभीरता से सोचने की जरूरत है.

बुलंदशहर DM के घर CBI रेड, नोट गिनने के लिए मंगाई गई मशीन

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उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित खनन घोटाला मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बुधवार को छापेमारी की. ये छापे बुलंदशहर के जिलाधिकारी (DM) अभय कुमार सिंह के निवास पर मारे गए हैं. खनन मामले में अभय कुमार सिंह भी रडार पर थे, ऐसे में सीबीआई ने अब कार्रवाई की है. बता दें कि ये मामला तबका है जब राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे.

डीएम आवास पर हुई छापेमारी में बड़ी संख्या में नोट बरामद होने की जानकारी है. जिसके चलते सीबीआई टीम ने अब नोट गिनने की मशीन भी मंगाई है. सीबीआई की टीम बुलंदशहर के डीएम के घर पूरी तैयारी के साथ छापा मारने गई थी. इस दौरान 4 गाड़ियां वहां पहुंची थी, जिनमें से दो गाड़ियां जरूरी दस्तावेज़ को अपने साथ ले गई है. अभी भी दो गाड़ियां घर में हैं और पूछताछ जारी है.

अवैध खनन का मामला 2012 से 2016 के बीच का है, इस वक्त राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. तब खनन मंत्रालय का जिम्मा खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ही संभाल रहे थे. ऐसे में उनपर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं.

अभय सिंह, सितंबर 2013 से लेकर जून 2014 तक फतेहपुर के डीएम रह चुके हैं. अभय कुमार सिंह 2007 बैच के यूपी कैडर के IAS अधिकारी हैं. वह बुलंदशहर के अलावा फतेहपुर, रायबरेली और बहराइच के भी डीएम रह चुके हैं.

सूत्रों की मानें तो 2012 और 2016 के बीच कुल 22 टेंडर पास किए गए थे, जो विवाद में आए. इन 22 में से 14 टेंडर तब पास किए गए थे, जब खनन मंत्रालय अखिलेश यादव के पास ही था. बाकी के मामले गायत्री प्रजापति के कार्यकाल के हैं.

अब एजेंसियों का मानना है कि अखिलेश यादव और गायत्री प्रजापति के अप्रूवल के बाद ही इन्हें लीज पर दिया गया था. क्योंकि 5 लाख से ऊपर का कोई भी मसला हो, उसके लिए मुख्यमंत्री की इजाजत जरूरी है. इससे पहले जून में इसी मामले में सीबीआई ने गायत्री प्रजापति के घर पर भी छानबीन की थी.

इस मामले में सीबीआई काफी एक्टिव है और देश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी कर चुकी है. जिसमें गायत्री प्रजापति के अलावा IAS अधिकारी बीएस चंद्रकला के घर पर भी छापे पड़े थे. बीएस चंद्रकला बिजनौर और मेरठ की डीएम भी रह चुकी हैं.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. हाई कोर्ट ने जनहित याचिकाओं के दाखिल होने के बाद इस मामले में जांच का आदेश दिया था.

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इस्तीफा स्वीकार न होने के चलते सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बागी विधायक, कहा- स्पीकर जानबूझकर देर कर रहे

कर्नाटक का राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. अब इस्तीफा स्वीकार नहीं किए जाने के बाद बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. विधायकों ने स्पीकर पर आरोप लगाया है कि रमेश कुमार अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं. वह जानबूझकर इस्तीफे की स्वीकृति में देरी लगा रहे हैं. इस मामले की गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है.

विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने मंगलवार को 13 में से 8 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए थे. उन्होंने कहा था, ‘‘13 में से 8 विधायकों के इस्तीफे कानूनन तौर पर सही नहीं है. इस बारे में राज्यपाल वजुभाई पटेल को भी जानकारी दे दी है. किसी भी बागी विधायक ने मुझसे मुलाकात नहीं की. मैंने राज्यपाल को भरोसा दिलाया है कि मैं संविधान के तहत काम करूंगा. जिन पांच विधायकों के इस्तीफे ठीक है, उनमें से मैंने 3 विधायकों को 12 जुलाई और 2 विधायकों को 15 जुलाई को मिलने का वक्त दिया है.”

वहीं, कांग्रेस-जेडीएस के 10 बागी विधायक मुंबई के रेनेसां होटल में हैं. बुधवार को उनसे मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता शिवकुमार को मुंबई पुलिस ने होटल में जाने से रोक दिया गया. इस पर शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने यहां रूम बुक किया है. कुछ दोस्त यहां रुके हुए हैं. उनके बीच छोटी सी समस्या हो गई है. विधायकों से बातचीत करना चाहता हूं. यहां डराने-धमकाने की कोई बात नहीं है. वे एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. वहीं, जेडीएस नेता नारायण गौड़ा के समर्थकों ने होटल के बाहर शिवकुमार गो बैक के नारे लगाए.

कर्नाटक सरकार में मंत्री शिवकुमार ने कहा, ‘‘वे अपना काम कर रहे हैं. हम अपने दोस्तों से मिलने आए हैं. हमने एक साथ राजनीति शुरू की और एक ही साथ राजनीति में मरेंगे. वे हमारी पार्टी के लोग हैं और हम उनसे मिलने आए हैं. मैं अपने दोस्तों से बिना मिले नहीं जाऊंगा.’’

वहीं, कांग्रेस के बागी विधायक रमेश जारकिहाली ने कहा कि हम उनसे नहीं मिलना चाहते. भाजपा का कोई भी नेता हमसे मिलने यहां नहीं आया है. बी. बस्वराज ने भी कहा कि हमारा शिवकुमार का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है. हमें उनपर भरोसा है, लेकिन ऐसा कदम उठाने का कारण है. हम उनसे आग्रह करते हैं कि वे यह समझने का प्रयास करें कि हम उनसे आज नहीं मिल सकते.’’

मुंबई के रेनेसां होटल में ठहरे कांग्रेस और जेडीएस के 10 विधायकों को मनाने के लिए कर्नाटक सरकार में मंत्री डीके शिवकुमार और जेडीएस विधायक शिवलिंगे गौड़ा बुधवार को विशेष विमान से बेंगलुरु से मुंबई पहुंचे. बागी विधायकों ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार से खतरा है. इसे लेकर विधायकों ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की.

पत्र के मुताबिक, ‘‘हमने सुना है कि सीएम और डीके शिवकुमार होटल आने वाले हैं. इस कारण हम डरे हुए हैं. हम उनसे नहीं मिलना चाहते. पुलिस से आग्रह है कि उन्हें होटल में न आने दिया जाए.’’ पत्र में 10 विधायकों शिवराम हेबर, प्रताप गौड़ा पाटिल, बीसी पाटिल, एसटी सोमशेखर, रमेश जारकिहोली, बी बस्वराज, एच विश्वनाथ, गोपालैया, नारायण गौड़ा और महेश कुमुताली के हस्ताक्षर हैं.

इसके बाद पुलिस ने होटल के बाहर कड़ी सुरक्षा लगाई गई है. महाराष्ट्र रिजर्व पुलिस फोर्स और रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ) को होटल के बाहर तैनात कर दिया गया है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी क्षेत्र) दिलीप सावंत भी पवई के होटल रेनेसां पहुंचे.

जेडीएस विधायक गौड़ा ने कहा कि हम गठबंधन सरकार से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि दोनों पार्टियों में कोई एकता नहीं है. कांग्रेस ने एचडी कुमारस्वामी को बहुत परेशान किया है. उन्होंने वह नहीं करने दिया जाता जो वह चाहते हैं. जब वह हमें बुलाएंगे तो हम स्पीकर से मिलेंगे, हमने पार्टी नहीं छोड़ी, केवल विधायकी से इस्तीफा दिया है.

एक विधायक ने हॉर्स ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) के आरोपों पर कहा कि हम यहां पैसों के लिए नहीं आए. हमें कोई पैसे नहीं दे रहा. हमने पार्टी को सौ बार अपनी समस्याएं बताईं, लेकिन उन्होंने नहीं सुनी. कुछ मंत्री हमारा मजाक उड़ाते थे. विधायक नारायण गौड़ा ने कहा कि किसी ने हमें सूचना दी थी कि मुख्यमंत्री और शिवकुमार यहां विधायकों से बात करने आने वाले हैं. उनके साथ कोई बैठक नहीं करना चाहते है, इसलिए पुलिस से सुरक्षा देने के लिए कहा है.

इससे पहले कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा था कि हम स्पीकर से दलबदल कानून के तहत बागी विधायकों पर कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध करते हैं. हम अनुरोध करते हैं कि उन्हें न केवल अयोग्य घोषित करें बल्कि 6 साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोकें. विधायकों ने भाजपा से समझौता कर लिया है.

उमेश कामतल्ली, बीसी पाटिल, रमेश जारकिहोली, शिवाराम हेब्बर, एच विश्वनाथ, गोपालैया, बी बस्वराज, नारायण गौड़ा, मुनिरत्ना, एसटी सोमाशेखरा, प्रताप गौड़ा पाटिल, मुनिरत्ना और आनंद सिंह इस्तीफा सौंप चुके हैं. वहीं, कांग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बेग ने भी मंगलवार को इस्तीफा दे दिया.

शनिवार को कांग्रेस-जेडीएस के 14 विधायकों ने स्पीकर को इस्तीफा दे दिया था. अगर 14 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो विधानसभा में कुल 210 सदस्य रह जाएंगे. विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर ये संख्या 209 रह जाएगी. ऐसे में बहुमत के लिए 105 विधायकों की जरूरत होगी. कुमारस्वामी सरकार के पास केवल 102 विधायकों का समर्थन रह जाएगा. ऐसे में सरकार अल्पमत में आ जाएगी.

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रिजर्व डे पर जानें कौन-सी टीम फायदे में और किसको हो सकता है नुकसान

इस विश्व कप में यह दूसरा मौका है, जब भारत और न्यूजीलैंड के मैच में बारिश की वजह से खेल में बाधा आई है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच मंगलवार (9 जुलाई) को मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल की शुरुआत हुई. भारतीय गेंदबाजों ने टाइट गेंदबाजी करते हुए न्यूजीलैंड को खुलकर स्ट्रोक नहीं खेलने दिए. न्यूजीलैंड ने 46.1 ओवर में 211 रन बनाए, जब बारिश शुरू हो गई. इसके बाद लगातार बारिश होती रही, जिसकी वजह से मैच सस्पेंड करना पड़ा. वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल और फाइनल के लिए रिजर्व डे रखे गए थे, इसलिए भारत और न्यूजीलैंड का यह मैच बुधवार (10 जुलाई) को खेला जाएगा.

आज मैच वहीं से शुरू होगा, जहां कर रुका था. यानि न्यूजीलैंड पांच विकेट पर 211 रन के स्कोर से अपनी पारी आगे बढ़ाएगा और 50 ओवर पूरे करेगा. वर्ल्ड कप के पहले चरण में पिच तेज थी लेकिन दूसरे चरण में पिच सूखी और धीमी होती गई. बारिश का असर ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच पर हो रहा है. पिच स्लोअर होती जा रही है.

आज मैच हुआ तो भारत रहेगा फायदे में हालांकि छोटा स्कोर ट्रिकी हो सकता है, लेकिन भारत के पास लंबी बैटिंग है. भुवनेश्वर कुमार भी जरूरत पड़ने पर अच्छी बल्लेबाजी कर सकते हैं. भारत के लिए दूसरी फायदेमंद स्थिति यह होगी कि भारत को रनों का पीछा कैसे करना है इसको सोचने के लिए काफी समय मिलेगा.

ओवर कम मिले तो हो सकता है नुकसान यदि मैच कुछ ओवर कम का होता है तो भारत से ये फायदा छिन सकता है. न्यूजीलैंज के पास शानदार गेंदबाज हैं, जो किसी भी बैटिंग लाइनअप को ध्वंस कर सकते हैँ. यदि मैच बुधवार को वहां से शुरू होता है और आज बारिश नहीं होती तो 240 के आसपास का स्कोर तो भारत के लिए उतना मुश्किल नहीं होगा. भारतीय ओपनर पहले 10 ओवरों में परंपरागत ढंग से खेलते हैं. छोटे स्कोर का पीछा करने में यह नजरिया एकदम परफेक्ट है.

बहुत बुरी स्थिति होती है और भारत का टॉप ऑर्डर असफल हो जाता है तब भी भारत के पास पर्याप्त बल्लेबाजी है. ऋषभ पंत और हार्दिक पांड्या, अनुभवी महेंद्र सिंह धौनी और दिनेश कार्तिक आसानी से इतने रनों का पीछा कर सकते हैं. इसके अलावा रवींद्र जडेजा और भुवनेश्वर कुमार भी निचले क्रम में आत्मविश्वास से बल्लेबाजी कर सकते हैं.

पूरा मैच हुआ तो न्यूजीलैंड के लिए घाटे का सौदा न्यूजीलैंड निश्चित रूप से चाहेगा कि बुधवार को खेल हो, और कम ओवरों का खेल हो. लेकिन यदि बुधवार को खेल वहीं से शुरू होता है तो बुमराह और भुवनेश्वर बचे हुए चार ओवर फेंकेंगे. उस स्थिति में न्यूजीलेंड अधिक रन नहीं जोड़ पाएगा. तब उन्हें डकवर्थ लुईस स्कोर से भी कम स्कोर दिया जाएगा. ऐसे में न्यूजीलैंड के लिए नुकसानदेह रहेगा.

डकवर्थ लुईस से फैसला यदि बुधवार को भी बारिश की वजह से अगर ओवर घटाए गए और न्यूजीलैंड आगे बल्लेबाजी नहीं कर पाया तो डकवर्थ लुईस के नियमों के आधार पर भारत का लक्ष्य निर्धारित होगा. -डकवर्थ लुईस के नियमों के आधार पर भारत को 20 ओवर मिले तो उसे जीत के लिए 148 रन बनाने होंगे.

  • 25 ओवरों में टारगेट 172 रन होगा
  • 30 ओवरों में टारगेट 192 रन होगा
  • 35 ओवरों में टारगेट 209 रन होगा
  • 40 ओवर में टारगेट 223 रन होगा
  • 46 ओवरों में भारत को जीत के लिए 237 रन बनाने होंगे.
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कांग्रेस-जेडीएस कर रही सरकार बचाने की हर कोशिश

नई दिल्ली। कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार का संकट गहराता जा रहा है. निर्दलीय विधायक एच नागेश ने भी गठबंधन का साथ छोड़ दिया है, जिन्हें हाल में मंत्री बनाया गया था. बीजेपी नेता येदियुरप्पा के निजी सचिव पहले दिन से बाग़ी विधायकों के साथ देख रहे हैं और सोमवार को कांग्रेस के नेता डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि नागेश को बीजेपी के लोग ज़बरदस्ती उठा ले गए. इस बीच कांग्रेस और जेडीएस के सभी मंत्रियों से इस्तीफ़ा लिया गया ताकि विद्रोहियों को जगह दी जा सके. वहीं असंतुष्ट विधायक मुंबई से गोवा के लिए निकल गए.

देखिय कुछ महत्वपूर्ण तथ्य…
  • राज्य की 13 महीने पुरानी सरकार को बचाने के प्रयास में मंत्रिमंडल में फेरबदल के कदम पर विद्रोही खेमे से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. कांग्रेस की राज्य इकाई के नेता राजीव गौड़ा के अनुसार यूपीए अध्यक्ष और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा है कि उन्हें ‘‘पूरा पूरा विश्वास” है कि अगले दो दिनों में चीजें सामान्य हो जाएंगी.
  • उधर, कर्नाटक में गठबंधन सरकार के बागी विधायक और निर्दलीय विधायक सोमवार को मुंबई छोड़ गोवा के लिये रवाना हो गए. कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अब सबकी निगाहें गोवा पर टिक गई हैं.
  • सूत्रों ने बताया कि उनके साथ मुंबई भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष मोहित भारतीय भी हैं. बेंगलुरू में जेडीएस के सूत्रों के अनुसार पार्टी विधायकों को शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित एक रिसॉर्ट ले जाया गया है.
  • विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार यदि 13 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लेते है तो सत्तारूढ़ गठबंधन को बहुमत खोने के खतरे का सामना करना पड़ सकता है.
  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने 13 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद राज्य की कांग्रेस- जेडीएस सरकार के संकट में आने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में सोमवार को कहा कि उन्हें ‘‘राजनीतिक घटनाक्रमों” को लेकर ‘‘कोई भय” नहीं है और वह अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने पर ध्यान दे रहे हैं.
  • इस बीच बीजेपी ने कुमारस्वामी के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उनकी सरकार ‘अल्पमत’ में है. पूर्व उपमुख्यमंत्री आर अशोक ने कहा, ‘‘अगर उनमें कोई सम्मान और आत्मसम्मान बचा है, या अगर उन्हें कर्नाटक की संस्कृति और परंपराओं के बारे में पता है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.
  • कांग्रेस ने सरकार बचाने के लिए कदम बढ़ाते हुए उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर के निवास पर यहां बैठक की जिसमें कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
  • बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय ने ट्विटर पर बताया, ‘‘जद (एस) के सभी मंत्रियों ने भी कांग्रेस के 21 मंत्रियों की तरह इस्तीफे दे दिये हैं. मंत्रिमंडल में जल्द ही फेरबदल होगा.”
  • गठबंधन सरकार में में 34 मंत्री पदों में से कांग्रेस और जद (एस) के पास क्रमश: 22 और 12 मंत्री पद थे. वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी हर चीज पर चर्चा के लिए तैयार है और जिन विधायकों ने इस्तीफे दिये है, उन्हें लौट आना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ हमें विश्वास है कि वे लौटेंगे.”
  • यह मामला संसद में भी उठाया गया जहां केंद्र सरकार ने इस राजनीतिक गतिरोध में अपनी भूमिका से इनकार किया जबकि कांग्रेस ने उस पर साजिश रचने का आरोप लगाया. लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस्तीफा अभियान शुरू किया गया था. उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के बड़े नेता इस्तीफा दे रहे हैं.”
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चमार रेजिमेंट की बहाली को लेकर जंतर-मंतर पर जुटे देशभर के लोग

28 जून को हरिद्वार से शुरू हुई थी अखिल भारतीय चमार रेजिमेंट बहाल संघर्ष समिति की पदयात्रा

नई दिल्ली। अखिल भारतीय चमार रेजिमेंट बहाल संघर्ष समिति ने चमार रेजिमेंट बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा. समिति के अध्यक्ष महात्मा ज्ञान दास ने बताया कि 1 मार्च 1943 को अंग्रेजों द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों की तत्कालीन 1108 उपजातियों को शामिल करके चमार रेजिमेंट की स्थापना की गई थी.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भारत के नागालैंड में जापानी सेना आगे बढ़ रही थी, जिसे रोकने के लिए नागालैंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में महापराक्रमी चमार रेजिमेंट को लगाया गया. चमार रेजिमेंट ने वीरता से लड़ते हुए सात हजार जापानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. जिसमें चमार रेजिमेंट के 917 बहादुर सैनिक शहीद हुए. जापानी सेना 31 मई 1944 को रात में तीन बजे जवानों की लाशों व हथियार को छोड़कर चमार रेजिमेंट के डर से भागने पर मजबूर हुई.

चमार रेजिमेंट द्वारा बर्मा व रंगून को भी फतेह किया गया. चमार रेजिमेंट को द्वितीय युद्ध में सर्वोच्च अवार्ड बैटल ऑनर ऑफ कोहिमा से सम्मानित किया गया. 1946 में अंगे्रजों ने चमार रेजिमेंट को आजाद हिंद फौज से लडऩे को बाध्य किया, लेकिन देशभक्ति के कारण चमार रेजिमेंट ने लडऩे से इनकार कर दिया. जिस पर अंग्रेजों ने चमार रेजिमेंट को भंग करके विद्रोही घोषित किया. तत्कालीन डिफेंस एडवाईजरी कमेटी ने भी जिसमें प्रतिनिधित्व भी शामिल था, ने जातीय कारणों से इस बहादुर रेजिमेंट की बहाली का प्रयास नहीं किया. देश आजाद होने के बाद भी चमार रेजिमेंट को इतिहास में स्थान नहीं दिया गया. इस मौके पर मांग की गई कि जिस प्रकार अन्य जातियों के नाम पर रेजिमेंट हैं, इसी प्रकार चमार रेजिमेंट को भी बहाल किया जाए. उन्होंने बताया कि रेजिमेंट की बहाली के लिए 28 जून को हरिद्वार के गुरु रविदास मंदिर से पैदल यात्रा शुरू की गई थी. यात्रा का समापन दिल्ली में हुआ और जंतर-मंतर पर चमार रेजिमेंट की मांग को लेकर धरना दिया गया. इस अवसर पर महासचिव रामकुमार असनावड़े, विक्रम रविदासिया, रेणू किशोर झारखंड, मित्रसेन रविदासी, मनोरंजन राठी, अमित जस्सी पंजाब, ओंकार सिंह, विकास कुमार, महात्मा विजेश दास, गंगा प्रसाद नेपाल, डॉ. जयराजू आन्ध्र प्रदेश, प्रमोद तेलंगाना, जनार्दन राम बिहार, पीसी चौधरी मध्य प्रदेश, नरेन्द्र चौहान पश्चिम बंगाल, अनिल रांची, भीम शंकर कर्नाटक समेत भारी संख्या में देशभर से लोग मौजूद थे.

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कर्नाटक में सत्ता के लिए शह-मात का खेल जारी

कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने के कगार पर है. एक के बाद एक विधायकों के इस्तीफे ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया है. तो वहीं कई विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने की पुष्टि हुई है. एक निर्दलीय विधायक को येदुरप्पा के पीए के साथ देखे जाने के बाद हलचल और तेज हो गई है. हालांकि कांग्रेस नेता सिद्धारमैया और जद (एस) के नेता और मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी हर कीमत पर सरकार बचाने के लिए जुट गए हैं.

एक बड़ा दाव चलते हुए कांग्रेस पार्टी के कोटे से उप मुख्यमंत्री सहित तमाम मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है. तो वहीं ताजा खबर के मुताबिक कांग्रेस के बाद जेडीएस के भी सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि ऐसा कर के रुठे विधायकों को वापस लाने और उन्हें मंत्रीपद देकर मनाने की कोशिश की जा रही है. दरअसल मई 2018 में सत्ता की कमान मिलने से अब तक उनका सफर बेहद चुनौतियों भरा रहा है. वर्तमान हालात यह है कि कांग्रेस के 10 और जेडीएस के 3 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि एक निर्दलीय ने सरकार से समर्थन वापस लेते हुए बीजेपी के समर्थन का ऐलान कर दिया है. इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बाद विधानसभा के समीकरण ऐसे हो गए हैं कि भारतीय जनता पार्टी बहुमत की स्थिति में नजर आ रही है.

इस्तीफे स्वीकार होने की स्थिति में मौजूदा समीकरण देखे जाएं तो कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के पास 105 विधायक रह जाएंगे. जबकि बीजेपी के पास पहले से ही 105 विधायक हैं. अब कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस लेने वाले निर्दलीय विधायक नागेश ने भी बीजेपी को सपोर्ट का ऐलान कर दिया है. इस तरह बीजेपी की संख्या 106 हो जाएगी, जो मौजूदा स्थिति में बहुमत का आंकड़ा है. इस तरह अगर कांग्रेस-जेडीएस विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो बीजेपी सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएगी. लेकिन सिद्धारमैया और कुमारस्वामी ने इस्तीफा देने वाले विधायकों को जिस तरह अपने पाले में लाने के लिए चाल चल दी है, उससे सरकार बचने के आसार बढ़ गए हैं.

BSP प्रमुख मायावती बोलीं, मोदी सरकार का बजट धन्नासेठों के लिए

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया. बसपा अध्यक्ष मायावती  ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट बड़े पूंजीपतियों को राहत पहुंचाने वाला है. मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘यह बजट प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देकर कुछ बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों की ही हर प्रकार से मदद करने वाला है. इससे दलितों व पिछड़ों के आरक्षण को ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, किसान व ग्रामीण समस्या और भी जटिल होगी. देश में पूंजी का विकास भी इससे संभव नहीं है.’

मायावती ने कहा, ‘भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा बजट को हर मामले में और हर स्तर पर लुभावना बनाने की पूरी कोशिश की गई है. लेकिन देखना है कि इनका यह बजट जमीनी हकीकत में देश की आम जनता के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है. ऐसे में जबकि पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, बदतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा से पीड़ित व परेशान है.’ आपको बता दें कि कांग्रेस ने भी बजट को ‘‘नयी बोतल में पुरानी शराब” करार देते हुए दावा किया कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और सिर्फ पुराने वादों को दोहराया गया है. लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ””इसमें कुछ भी नया नहीं है. पुरानी बातों को ही दोहराया गया है. यह नयी बोतल में पुरानी शराब है.” Read it also-यहां जानिए, देश के आम लोगों के लिए बजट में क्या है

सजा काट रही नलिनी श्रीहरन को मिला 30 दिनों का परोल

चेन्नै। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या मामले में उम्र कैद की सजा काट रही नलिनी श्रीहरन को 30 दिनों को परोल दे दिया गया है. नलिनी ने अपनी बेटी की शादी करने के लिए हाई कोर्ट से छह महीने का परोल मांगने वाली याचिका दायर की थी. शुक्रवार को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका का निस्तारण करते हुए उन्हें एक महीने का परोल ही मंजूर किया है.

नलिनी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में छह अन्य दोषियों के साथ उम्रकैद की सजा काट रही हैं. उन्होंने अपनी बेटी की शादी की तैयारियों के लिए छह महीने का परोल मांगा था. उन्होंने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके अपनी पैरवी खुद करने की अनुमति मांगी थी. नलिनी की इस अनुमति पर हाई कोर्ट ने कहा था कि अदालत में उपस्थित होकर अपनी याचिका की पैरवी करने के अधिकार से नलिनी श्रीहरन को वंचित नहीं किया जा सकता है.

नलिनी की दलील नलिनी पिछले 27 साल से जेल में बंद हैं. उन्होंने कहा कि उम्रकैद की सजा पाने वाले किसी भी कैदी को दो साल में एक महीने का अवकाश लेने का अधिकार है, लेकिन उसने 27 साल तक जेल में बंद रहने के बावजूद इस सुविधा का कभी लाभ नहीं लिया. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की शादी की तैयारियों के लिए छह महीने की छुट्टी दी जाए. जिस पर जस्‍टिस एमएम सुंदरेश और जस्‍टिस एम निर्मल कुमार ने उन्हें परोल दे दी.

नलिनी को राजीव गांधी हत्याकांड में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में तमिलनाडु सरकार ने 24 अप्रैल, 2000 को इसे उम्रकैद की सजा में बदल दिया. उसका दावा है कि मौत की सजा उम्रकैद में बदलने के बाद से 10 साल या उससे कम समय की सजा काट चुके करीब 3,700 कैदियों को राज्य सरकार रिहा कर चुकी है.

नलिनी ने अपनी अपील में कहा कि उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों की समय पूर्व रिहाई की 1994 की योजना के तहत समय पूर्व रिहाई के उसके अनुरोध को राज्य मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी थी और नौ सितंबर, 2018 को तमिलनाडु मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल को उसे और मामले के छह अन्य दोषियों को रिहा करने की सलाह दी थी, लेकिन अभी तक उसका पालन नहीं हुआ है.

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राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग के बाद अल्पेश ठाकोर ने छोड़ी कांग्रेस

गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिए उपचुनाव हो रहा है. कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है. इसके बावजूद कांग्रेस के दो विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है. कांग्रेस बागी विधायक अल्पेश ठाकोर और धवन झाला ने बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में वोट किए हैं. क्रॉस वोटिंग करने के बाद अल्पेश ठाकोर ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

इस्तीफा देने के बाद अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मैंने राहुल गांधी पर भरोसा करके कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन की थी, लेकिन दुर्भाग्यवश उन्होंने हमारे लिए कुछ नहीं किया. पार्टी जनाधार खो चुकी है, और हमारे साथ द्रोह हुआ है. हर बार हमें बेइज्जत किया गया, इसलिए मैंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है और कांग्रेस छोड़ दी है.

वोटिंग करने के बाद अल्पेश ठाकोर ने कहा कि मैंने अंतर आत्मा की आवाज सुनकर और राष्ट्रीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर मतदान किया है. जो पार्टी (कांग्रेस) जन अधिकार खो चुकी है और जिस पार्टी ने हमारे साथ द्रोह किया है, उसे मद्देनजर रखकर वोटिंग किया है.

गुजरात में दो राज्यसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए बीजेपी से विदेश मंत्री एस जयशंकर और ओबीसी नेता जुगलजी ठाकोर मैदान में है. जबकि कांग्रेस की ओर से चंद्रिका चुड़ासमा और गौरव पांड्या उम्मीदवार हैं. बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गांधीनगर और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के अमेठी सीट से लोकसभा सदस्य चुने जाने की वजय से दोनों राज्यसभा सीटें रिक्त हुई है.

बता दें कि कांग्रेस के 76 में से कुल 71 विधायक बचे हैं जिनमें से 65 रिजॉर्ट में आए थे. कांग्रेस को डर था कि बीजेपी इनके विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है. कांग्रेस की शंका वोटिंग के दौरान देखने को मिली. अल्पेश ठाकोर और उनके करीबी धवन झाला ने कांग्रेस प्रत्याशी के बजाय बीजेपी उम्मीदवारों के पक्ष में वोटिंग किया.

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एसपी के बाद अब कांग्रेस से भी नाता तोड़ेंगी मायावती!

लखनऊ। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद समाजवादी पार्टी से गठबंधन तोड़ने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का कांग्रेस से मध्य प्रदेश और राजस्थान में चल रहा गठबंधन बहुत दिनों तक नहीं चलने वाला है. मायावती ने लखनऊ में आयोजित बीएसपी की मध्यप्र देश इकाई की बैठक में इशारों से इसके संकेत दे दिए. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि जिस तरह की उम्मीद कांग्रेस सरकार से की थी, वह उस पर खरी नहीं उतरी है. ऐसे में अब बीएसपी आंदोलन को नया रूप देने के लिए उनके कार्यकर्ता जुट जाएं, क्योंकि कांग्रेस और बीजेपी की सरकारें एक जैसा ही काम कर रही हैं.

गुरुवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित बीएसपी की मध्य प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में वहां की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने पार्टी के नेताओं से कहा कि बीजेपी सरकार के जाने के बाद भी कांग्रेस की सरकार ने पिछड़ों, दलितों, शोषितों से लेकर बेरोजगारों के लिए कुछ नहीं किया.

मायावती ने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी जातिवादी और सांप्रदायिक घटनाएं लगातार हो रहीं है. उन्होंने बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय की खुलेआम गुंडई को शर्मनाक बताया.

बैठक में मायावती ने मध्य प्रदेश की बीएसपी इकाई में बड़े फेरबदल तक कर दिए. इसमें जोनल को-ऑर्डिनेटरों से लेकर जिलों के अध्यक्ष तक की जिम्मेदारियां बदल दी है. इस लोकसभा चुनाव में बीएसपी की मध्यप्रदेश में सभी सीटों पर जमानत तक जब्त हो गई थी. इससे पहले राजस्थान के अलवर में दलित महिला के साथ हुए गैंगरेप के बाद मायावती ने कांग्रेस को घेरा था.

शनिवार को बीएसपी की लखनऊ मंडल की समीक्षा बैठक होगी. बैठक में लोकसभा चुनावों के नतीजों पर चर्चा होगी. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में लखनऊ मंडल के कई बड़े पदाधिकारियों को हटाया जा सकता है.

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एक पलंग, 4 लाशें, मौत का तरीका देखकर लोग कांप उठे

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नशे की लत का श‍िकार एक शख्स का नशा मुक्त‍ि केंद्र में इलाज चल रहा था, जहां उसकी पत्नी भी जॉब करती थी. काफी समय से बेरोजगार उस शख्स ने दो द‍िन पहले ही प्राइवेट जॉब पर जाना शुरू क‍िया था लेक‍िन शुक्रवार को उस शख्स ने पूरे पर‍िवार को क्रूर तरीके से मौत दे दी. पत्नी के स‍िर पर हथौड़ा मारा, तीन मासूम बच्चों के मुंह पर काला टेप बांधकर उनका गला घोंट द‍िया और खुद के भी मुंह पर टेप बांधकर मौत को गले लगा ल‍िया. द‍िल दहलाने वाली यह घटना द‍िल्ली-एनसीआर के गाज‍ियाबाद में घटी.

गाजियाबाद के थाना मसूरी इलाके के न्यू शताब्दीपुरम कॉलोनी में शुक्रवार की सुबह उस वक्त अफरातफरी का माहौल हो गया जब लोगों ने एक शख्स द्वारा अपने तीन बच्चों और पत्नी समेत आत्महत्या करने की खबर सुनी. जैसे ही इस खबर को लोगों ने सुना तो लोगों का भीड़ मौके पर पहुंच गई और इसकी सूचना आनन-फानन में स्थानीय पुलिस को दी गई.

सूचना के आधार पर मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे के अंदर से बंद दरवाजे को मुश्किल से तोड़ा तो पुलिसकर्मियों के भी होश उड़ गए क्योंकि बेड के पास पत्नी लहूलुहान हालत में तड़प रही थी और पति और उनके तीन बच्चे मृत अवस्था मे पड़े हुए थे. आनन-फानन में पुलिस ने तड़प रही महिला को अस्पताल पहुंचाया और उसके पति व तीनो बच्चों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. बाद में पत्नी की भी मौत हो गई.

मिली जानकारी के अनुसार, 42 साल के प्रदीप कुमार नाम का शख्स अपने माता-पिता, बहन, पत्नी एवं तीन बच्चों के साथ थाना मसूरी इलाके की न्यू शताब्दीपुरम कॉलोनी में पिछले काफी समय से रह रहा था. प्रदीप और उनकी पत्नी एवं तीनों बच्चे अपने कमरे में सोए हुए थे. शुक्रवार की सुबह जब उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला और कोई हलचल नहीं दिखाई दी तो घर में मौजूद अन्य लोगों ने उनका दरवाजा खटखटाया लेकिन बाद भी उन्हें अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो परिवार वालों को शक हुआ.

उन्होंने खिड़की से अंदर देखा तो बिस्तर पर प्रदीप और उसके तीनों बच्चे 8 साल की मनस्वी, 5 साल की यशस्वी और 3 साल के ओजस्वी के शव पड़े थे. प्रदीप और तीनों बच्चों के मुंह पर करीब 4 इंच चौड़ा काले रंग का टेप बुरी तरह लिपटा हुआ था जबकि 40 वर्षीय पत्नी संगीता बिस्तर से नीचे लहूलुहान हालत में पड़ी हुई थी. उसके स‍िर में गंभीर चोट थी और वह तड़प रही थी. पास में ही खून से सना एक हथौड़ा पड़ा हुआ था. वह पूरी तरह बेहोशी की हालत में पड़ी हुई थी. पुलिस ने आनन-फानन में संगीता को अस्पताल पहुंचाया जहां उसकी मौत हो गई.

पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच में ऐसा लगता है कि प्रदीप ने पहले अपनी पत्नी के सि‍र में हथौड़े से वार किए उसके बाद तीनों बच्चों के मुंह पर टेप लगाकर उनकी हत्या की है. उसके बाद खुद ने भी अपने मुंह पर टेप लपेट कर आत्महत्या कर ली है क्योंकि जिस कमरे में यह पूरा परिवार था उस कमरे का अंदर की तरफ से दरवाजा बंद था. पुलिस के द्वारा ही दरवाजे को कड़ी मशक्कत के बाद तोड़ा गया.

बताया जा रहा है कि प्रदीप निजी कंपनी में जॉब किया करता था और इस मकान में उनके माता-पिता एक बहन और इनकी पत्नी एवं तीन बच्चे रहते थे. माता-पिता और बहन घर के दूसरे कमरे में थे. उनका भी कहना है कि उन्होंने किसी तरह की कोई चीख पुकार नहीं सुनी. सुबह जब रोजाना की तरह उनका दरवाजा नहीं खुला तो उन्हें खिड़की के माध्यम से देखा गया तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई और पुलिस ने ही दरवाजा तोड़कर सभी को बाहर निकाला है.

पुल‍िस का कहना है क‍ि मौके से सुसाइड नोट मिला जिसकी हम जांच कर रहे हैं. सुसाइड नोट में शक की बात की गई है और पार‍िवार‍िक क्लेश का मामला सामने आ रहा है. पड़ोसियों ने बताया कि प्रदीप शराब भी पीता था जिसको लेकर झगड़ा होता था. दो दिन पहले प्रदीप ने प्राइवेट जॉब पर जाना शुरू क‍िया था. पत्नी नशा मुक्त‍ि केंद्र में जॉब करती थी जहां उसके पत‍ि का इलाज भी चल रहा था.

उधर, घटना की जानकारी मिलते ही गाजियाबाद के एसएसपी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. फिलहाल, पुलिस अभी पूरे मामले की जांच में जुटी है कि आखिरकार प्रदीप ने ऐसा कदम किस लिए उठाया है. सुसाइड नोट में ल‍िखी बातों का भी परीक्षण किया जा रहा है.

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दलितों के हितैषी तो सभी बनते हैं लेकिन सैप्टिक टैंकों में हो रही मौतें कोई नहीं रोक पा रहा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुंभ के मेले में सफाई करने वाले पांच कर्मचारियों के पैर धोए थे. प्रधानमंत्री यह दिखाने का प्रयास कर रहे थे कि यह कार्य इतना महत्वपूर्ण है, इसमें कार्यरत श्रमिक भी उतने ही महत्वपूर्ण है, इसलिए ऐसे देश सेवकों का सम्मान किया जाना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा चलाए गए देश स्वच्छता अभियान में इन सफाईकर्मियों का सर्वाधिक योगदान रहा है. सवाल यह है कि जब सफाई श्रमिकों का काम इतना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री तक ने उनके चरण धोकर उनकी सराहना की है, तब सैप्टिक टैंक में श्रमिकों के मरने की घटनाएं रूक क्यों नहीं रही हैं. गुजरात में जून के दूसरे सप्ताह में सैप्टिक टैंक में गैस से दम घुटने से सात सफाई श्रमिकों की मौत हो गई. इस घटना को पन्द्रह दिन ही बीते कि रोहतक में चार श्रमिकों की सैप्टिक टैंक में मौत हो गई.

फिर आखिर ऐसे कौन-से हालात हैं कि गैरकानूनी घोषित होने के बाद भी श्रमिक सैप्टिक टैंक में सफाई के दौरान जान गंवा रहे हैं. इस कानून की हालत भी दूसरे ऐसे ही कानूनों की तरह कागज काले करने जैसी हो गई है. इस कानून को बनाते समय नीति नियंताओं ने यह ध्यान नहीं रखा कि आखिर कानून से पाबंदी लगा दी गई तो इस तरह के जोखिम भरे काम में लगे श्रमिकों के सामने आजीविका चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा. कानून में रोजगार के इंतजाम का वैकल्पिक उपाय नहीं किया गया. इस कानून के साथ रोजगार की गारंटी भी दी जानी चाहिए थी. केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान ढूंढ़ने की नेताओं की आदत हो गई है. उसके व्यवहारिक पक्षों और प्रभावों पर किसी का ध्यान नहीं जाता. दरअसल कानून बनाना आसान है और रोजगार का इंतजाम करना मुश्किल है. सफाई कमचारी आंदोलन का कहना है कि पिछले एक दशक में करीब 1800 सफाईकर्मियों की सैप्टिक टैंकों में सफाई के दौरान मौत हो चुकी है. इन मौतों से भी सरकारों की कुभंकर्णी नींद नहीं टूटी. दरअसल ये मौतें वोट बैंक बनाने में महत्वपूर्ण साबित नहीं हुईं. अलग−अलग समय पर हुई इन मौतों को चुनावों में भुनाया नहीं जा सका. ऐसे कामों से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सिर्फ कानून बनाकर सरकारों ने अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ लिया. यही वजह है कि कानून बनाने के बावजूद दुर्घटना होने पर आरोपी को सजा तो मिल सकती है किन्तु ऐसी घटनाओं की पुनरावृति नहीं हो, इसके उपायों को दरकिनार कर दिया गया. सफाई श्रमिकों को इससे फर्क नहीं पड़ता कि उनका काम सामाजिक दृष्टि से हेय होने के साथ ही खतरनाक भी है. ऐसे काम का जोखिम वे अपने परिवार पालने के लिए उठाते हैं. चुनिंदा शहरों को छोड़ भी दें तो कस्बों और गांवों में सैप्टिक टैंक खाली कराने के वाहन उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में इस काम को कराने के लिए सफाई श्रमिकों को ही बुलाया जाता है. यह श्रमिकों की किस्मत ही है कि इस काम को करने के बाद भी वे सही सलमात बच निकलते हैं.

आश्चर्य तो यह है कि आजादी के बाद से देश के हर क्षेत्र की सूरत−सीरत बदली है. नहीं बदला है तो सिर्फ दलित बस्तियों और श्रमिकों का सैप्टिक टैंक की सफाई का काम. देश के लगभग सभी हिस्सों में सार्वजनिक और निजी सफाई के कामों के लिए आज भी दलित वर्ग अभिशप्त है. केन्द्र और राज्यों में किसी भी दल की सरकार रही हो, राजनीतिक दल सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए इनके आरक्षण और संरक्षण की दुहाई देते हैं, इनकी दुश्वारियों से किसी को सरोकार नहीं हैं. अस्पृश्यता का कानून बना दिए जाने के बावजूद गांवों में दलित बस्तियों की हालत बेहद शोचनीय बनी हुई है. गांवों में मुख्य आबादी से दूर कोने में ऐसी दलित बस्तियां देखी जा सकती हैं. उनमें बिजली−पानी का इंतजाम भी रामभरोसे है. सार्वजनिक बोरिंग और नलों से दलित अभी भी आसानी से पानी नहीं भर सकते.

कानून से बेशक उनको संरक्षण मिल गया हो, किन्तु इसका क्रियान्वयन और जागरूकता पूरी तरह आज तक नहीं हो पाई. हरिजन और दलितों को आरक्षण का भी नाममात्र का फायदा मिल सका है. जातिगत आधार पर सामाजिक विषमता के कारण निजी क्षेत्र में भी अपवादों को छोड़कर दलितों के लिए रोजगार के दरवाजे बंद हैं. नाम के पीछे जाति आते ही उन्हें टरका दिया जाता है. निजी क्षेत्र में उन्हें ज्यादातर सफाई जैसा कार्य ही नसीब होता है. ऐसी हालत में जब सरकारी रोजगार नाममात्र का हो और निजी क्षेत्र में भेदभाव हो, तब दलितों के पास सैप्टिक टैंक की सफाई जैसे कार्य की मजबूरी के अलावा कुछ नहीं बचता. जातिगत आधार पर रोजगार और काम के लिहाज से दलित वर्ग नगर निगमों, परिषदों और नगर पालिकाओं में सफाई के कामों से ही जुड़े हुए हैं. सरकारों ने कभी इस वर्जना को तोड़ने का प्रयास ही नहीं किया कि आखिर दलित ही क्यों सार्वजनिक सफाई के कामों में लगे. यदि दूसरी जातियों के आगे नहीं आने और मशीनों की कमी से सफाई कार्य संभव नहीं है तो दलित ही इन कामों को अंजाम क्यों दें. शहरों में दलितों के हालात बेशक कुछ बेहतर हो सकते हैं किन्तु गांवों में अभी नारकीय हालात बने हुए हैं. पशुपालन के जरिए आमदनी करने के नाम पर दलितों के हिस्से में सुअर ही आते हैं. गाय, बकरी, भैंस जैसे दुधारू जानवर पालना इनके बूते से बाहर है. सरकारों ने कभी इस दिशा में भी गंभीरता से प्रयास नहीं किए कि दलित केवल सुअरों के आधार पर आजीविका तक सीमित नहीं रहें. इस वर्ग का आर्थिक आधार ऊंचा उठाने के लिए दूसरे दुधारू जानवारों को पालने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. इसके लिए इन्हें ऋण−अनुदान दिया जाए. दलितों के सफाई कामों से जुड़े होने और सैप्टिक टैंक में होने वाले हादसों तब ही रूकेंगे जब पहले सरकारें पहले अपनी मानसिकता बदलें. जब तक सरकारों का नजरिया नहीं बदलेगा तब तक दलितों की दयनीय हालत भी नहीं बदलेगी. साभार- प्रभा साक्षी

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यहां जानिए, देश के आम लोगों के लिए बजट में क्या है

अपनी टीम के साथ बजट पेश करने जाती वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
देश का मीडिल क्लास सबसे पहले यह जानना चाहता है कि सलाना कमाई के टैक्स में उसको कोई छूट मिली है या नहीं. तो इस बार ऐसा नहीं हुआ है. बजट की बात करें इस बार बजट में बहुत कुछ खास दिखाई नहीं दे रहा है. पेट्रोल-डीजल में महंगाई की मार झेल रहे मीडिल क्लास के लिए सरकार ने इसके सेस मूल्य में बढ़ोतरी कर एक और झटका दे दिया है. टैक्स
  • सरकार ने इनकम टैक्स में कोई राहत नहीं दी है. पहले ही की तरह 5 लाख तक आय पर कोई टैक्स नहीं.
महंगाई
  • जब विश्व भर में पेट्रोल और डीज़ल के दाम गिर रहे हैं, तो उसका फ़ायदा आम आदमी तक पहुंचाने के बजाय सरकार 1 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क (excise duty) और उपकार (cess) लगाने जा रही है. यह निंदनीय कदम एक आम और गरीब इंसान के पेट पर लात मारने के बराबर है.
  • सोना और इसी तरह की कीमती धातुओं पर ड्यूटी 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने का प्रस्ताव. यह आम लोगों को झटका. क्योंकि सोना आम घरों में खरीदा-पहना जाता है.
  • सीसीटीवी और ऑटो पार्ट्स भी महंगे.
अपनी टीम के साथ बजट पेश करने जाती वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
राहत
  • घर खरीदने पर 3.5 लाख तक ब्याज पर आयकर छूट मिलेगी. 45 लाख तक का मकान लेने पर 1.5 लाख की अतिरिक्त छूट मिलेगी.
  • कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर ड्यूटी खत्म, लिस्ट की सूची उपलब्ध नहीं.
  • इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर ड्यूटी में छूट.
शिक्षा सुधार
  • देश के टॉप शिक्षण संस्थानों को वर्ल्ड क्लास इंस्टीट्यूशंस बनाने के लिए 400 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा.
  • रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाने की घोषणा.
गांव के लिए
  • गांव के सड़कों पर 80 हजार करोड़ का निवेश होगा
  • गांव में हर घर तक पानी पहुंचाने की घोषणा
  • आवासों में बिजली, शौचालय औऱ गैस कनेक्शन के साथ
किसानों के लिए
  • किसानों के दस हजार उत्पादक संघ बनाने की घोषणा
  • दो करोड़ किसानों को डिजिटल शिक्षा की घोषणा
  • कृषि इंफ्रा में निजी निवेश बढ़ाने की घोषणा
आपके मतलब की कुछ आम जानकारियां
  • अब आधार कार्ड से भी इंकम टैक्स भरा जा सकेगा। इसके लिए पैन जरूरी नहीं रहेगा।
  • जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया गया. सरकार का लक्ष्य 2024 तक हर घर तक जल पहुंचाना है.
  • छोटे उद्योगों को टैक्स में छूट का प्रावधान किया जा सकता है.
ऑटो सेक्टर
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए इन गाड़ियों की खरीद पर छूट दी जाएगी. इलेक्ट्रिक कार पर 4% टैक्स लगेगा.
  • लोगों की सुविधा के लिए देशभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग प्वाइंट बनाए जाएंगे
NRI को तोहफा
  • विदेश में बसे भारतीयों के लिए बड़ा ऐलान, भारत आते ही आधार कार्ड देंगे.
  • NRI के लिए 180 दिन भारत में रहने की बाध्यता खत्म की जाएगी.
रेल और सड़क
  • 80,250 करोड़ रुपए से अगले पांच सालों में सवा लाख किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाएगा.
  • 50 लाख करोड़ रुपए से रेलवे का आधुनिकीकरण किया जाएगा.

कुलभूषण जाधव मामले में 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय अदालत सुनाएगी फैसला

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पाकिस्तानी जेल में जासूसी के आरोप में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) 17 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगी. समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण कुलभूषण जाधव मामले में 17 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगा. बता दें कि कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की हिरासत में हैं और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है.

आईसीजे यानी संयुक्त राष्ट्र की अदालत ने गुरुवार को घोषणा की कि दोपहर 3 बजे द हेग स्थित पीस पैलेस में एक पब्लिक सिटिंग होगी. जिस दौरान न्यायालय के अध्यक्ष न्यायाधीश अब्दुलकवी अहमद यूसुफ अदालत के फैसले को पढ़ेंगे.

भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में मौत की सज़ा सुनाई थी. इसके बाद भारत ने जाधव तक राजनयिक पहुंच नहीं देने को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ मई 2017 में आईसीजे का रूख किया था.

भारत ने 48 वर्षीय जाधव के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य अदालत के’हास्यपद मुकदमे को भी चुनौती दी थी. आईसीजे ने 18 मई 2017 को पाकिस्तान को मामले का निर्णय आने तक जाधव की मौत की सज़ा की तामील पर भी रोक लगा दी थी.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फरवरी में चार दिन की सुनवाई की थी जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपनी अपनी दलीलें रखी थी. भारत ने आईसीजे से जाधव की मौत की सज़ा को रद्द करने तथा उनकी तुरंत रिहाई का आदेश देने का अनुरोध किया है और कहा है कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत का फैसला ‘हास्यपद मामलेपर आधारित है और वाजिब प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों तक को संतुष्ट नहीं कर पाता है.

भारत ने कहा कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था जहां उनके कारोबारी हित हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सवाल करने पर बताया कि आईसीजे इस महीने फैसला सुनाएगा.

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ट्यूनीशिया में प्रवासियों से भरी नाव पलटी, 80 लोगों के मारे जाने की आशंका

जिनेवा। ट्यूनीशिया के समुद्री इलाके में बुधवार देर रात प्रवासियों से भरी नाव पलटने से 80 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की आशंका है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने हादसे में बचे हुए लोगों के हवाले से गुरुवार को यह जानकारी दी. यूएनएचसीआर के मुताबिक, हादसे के बाद स्थानीय मछुआरों ने चार लोगों को बचाया भी था, जिनमें से एक की बाद में मौत हो गई.

यूएनएचसीआर के अधिकारियों ने बताया कि प्रवासियों से भरी दुर्घटनाग्रस्त नाव भूमध्य सागर पार कर इटली की और जा रही थी. हादसे में बचे हुए तीन में दो को शेल्टर होम में रखा गया. उनसे इस मामले में पूछताछ की जा रही है. जबकि एक का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

भूमध्यसागर के लिए यूएनएचसीआर के विशेष राजदूत विन्सेंट कोचटेल ने बताया कि यहां से बड़ी संख्या में लोग नाव में सवार होकर पलायन कर रहे हैं. वे अपने परिवार के साथ जान जोखिम में डाल रहे हैं. हमें जरूरत है कि हम लोगों को जरूरी विकल्प उपलब्ध कराएं, ताकि यह सब रोका जा सके.

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