भीमा कोरेगांव के जश्न से ब्राह्मण महासंघ में कुलबुलाहट

महार रेजीमेंट के सैनिकों के साथ डॉ. अम्बेडकर

पुणे। हर साल की पहली तारीख दलितों के लिए नए साल के साथ एक और जश्न मनाने का होता है. इस दिन दलित समाज के लोग साल 1818 में पेशवाओं पर अछूतों के जीत का जश्न भी मनाते हैं. इस साल इस विजयगाथा के दो सौ साल पूरे हो रहे हैं. दलित समाज के लोग अपने जश्न की तैयारी कर रहे हैं तो वहीं ब्राह्मण समाज को दलितों का यह जश्न खटकने लगा है.

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने पुणे पुलिस से मांग की है कि दलितों को पेशवाओं की ड्योढ़ी ‘शनिवार वाडा’ में प्रदर्शन करने की अनुमति न दी जाए. ब्राह्मण महासंघ के आनंद दवे का कहना है कि “ऐसे उत्सवों से जातीय भेद बढ़ेगा.” हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसे रोकने की कोई बात नहीं कही है, लेकिन ब्राह्मण महासभा की इस मांग से उनकी कुलबुलाहट का साफ पता चल रहा है.

इसी बीच कई इतिहासकार महारों और पेशवा फ़ौजों के बीच हुए इस युद्ध को विदेशी अँग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारतीय शासकों के युद्ध के तौर पर देखते हैं. उनका तर्क होता है कि अछूत पेशवा के खिलाफ लड़े थे, इसलिए आजाद भारत में इस तरह का जश्न ठीक नहीं है. तथ्यात्मक रूप से वो ग़लत नहीं हैं. पर सवाल यह है कि आखिर महार अँग्रेज़ों के साथ मिलकर ब्राह्मण पेशवाओं के ख़िलाफ़ क्यों लड़े?

असल में भीमा कोरेगांव की लड़ाई महारों के लिए अँग्रेज़ों के लिए लड़ी लड़ाई नहीं थी, बल्कि अपनी अस्मिता की लड़ाई थी. ये उनके लिए चितपावन ब्राह्मण व्यवस्था से प्रतिशोध लेने का एक मौक़ा था क्योंकि उस दौर में पेशवा शासकों ने महारों को जानवरों से भी निचले दर्जे में रखा था. उन्हें गले में हांडी और कमर पर झाड़ू बांध कर रखना पड़ता था, ताकि जमीन से उनके पैरों के निशान साफ होते रहें और उनके द्वारा थूके जाने और उस पर पैर लगने से कोई सवर्ण अपवित्र न हो जाए.

असल में ऐसी अमानवीय व्यवस्था में रहने वाले महार दलित ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की फ़ौज में शामिल होकर लड़े तो वो पेशवा के सैनिकों के साथ साथ चितपावन ब्राह्मण शासकों की क्रूर व्यवस्था के ख़िलाफ़ प्रतिशोध भी ले रहे थे.

जेल में लालू के लिए होगी ये खास सुविधाएं

बिरसा मुंडा जेल जाते लालू यादव

रांची। चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद लालू यादव को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद इस दिग्गज नेता को रांची के बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया है. हालांकि जेल में होने के बावजूद लालू यादव के लिए स्पेशल सुविधा होगी. उन्हें वीआईपी कैदियों की तरह रखा जाएगा. लालू यादव को यहां अपर डिवीजन सेल में रखा जाएगा. लालू यादव यहां कैदी नंबर 3351 के रूप में रहेंगे.

जेल में लालू यादव को जो कमरा दिया गया है, उसमें अटैच टॉयलेट बाथरूम है. इस कमरे में एक चौकी के अलावा तकिया, कंबल और मच्छरदानी भी है. कमरे में एक टीवी का भी इंतजाम है. रात के खाने में लालू को पालक की सब्जी और रोटी दिए जाने की खबर है. लालू यादव को भोजन बनाने की भी सुविधा मिलेगी. लालू चाहेंगे तो वे बाहर से भी खाना मंगा सकते हैं.

इससे पहले लालू के पीछे पीछे राजद की दर्जन भर गाड़ियां जेल तक आईं. इसमें लालू के दोनों बेटे भी मौजूद थे. तेजस्वी यादव ने जेल प्रबंधन को लालू को पहनने के लिए कुर्ता-पायजामा और गर्म कपड़े के अलावा दवाई भी दी.

 

तो क्या सच में लालू यादव खत्म हो जाएंगे?

खुद को सामाजिक न्याय और गरीबों का मसीहा कहने वाले लालू प्रसाद यादव की राजनीति और परिवार खतरे में है. कई घोटाले और वित्तिय अनियमितता के लिए लालू यादव का पूरा परिवार ही जांच एजेंसियों के शिकंजे में है. तो ताजा घटनाक्रम में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया है. फैसला तीन जनवरी को होगा.

इससे पहले पिछले ही दिनों ईडी यानि प्रवर्तन निदेशालय ने लालू परिवार की पटना स्थित तीन एकड़ भूमि जब्त कर ली है. करीब 45 करोड़ रुपये कीमत वाली इसी जमीन पर बिहार का सबसे बड़ा मॉल बन रहा था. हालांकि जमीन जब्त करने की कार्रवाई अस्थायी तौर पर की गई है. इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय लालू की पत्नी एवं पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव से पूछताछ कर चुकी है. लालू यादव से भी पूछताछ हुई है. इस मामले में अगर लालू यादव गलत साबित होते हैं तो ईडी जमीन को जब्त कर लेगी. लालू यादव का परिवार और भी कई मामलों में जांच एजेंसियों के निशाने पर है. ऐसे में चारा घोटाले पर फैसला आने के बाद क्या लालू यादव की राजनीति खत्म होने के कगार पर है?

 बीते बिहार चुनाव के बाद लालू यादव जिस मजबूती से उभरे थे, वह इतनी जल्दी धाराशायी हो जाएंगे, इसकी कल्पना बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों ने भी नहीं की होगी. राजनीति को जानने वाले सभी लोगों को लगा कि तमाम बाधाओं को चीरते हुए लालू यादव फिर से सामने आ गए हैं. तेजस्वी यादव के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद लगा कि उन्होंने अपनी अगली पीढी को स्थापित कर दिया है, लेकिन अचानक सब धाराशायी होता दिख रहा है.

लालू यादव जितनी तेजी से और जितने मजबूत होकर बिहार की सियासत में उभरे थे, बिहार में शायद ही कोई दूसरा उभरा होगा. गरीबों के मसीहा, सामाजिक न्याय के पुरोधा, मुसलमानों के हितैषी जैसे तमाम उपाधि लालू यादव को बिहार की जनता ने दी. सत्ता में आने के बाद लालू यादव अक्सर यह दावा करते थे कि वह बिहार में बंगाल के वामदलों से लंबा शासन चलाकर उसका रिकार्ड तोड़ेंगे. और बिहार की राजनीति को समझने वाले जानते थे कि लालू सच बोल रहे हैं. लालू यादव में वो सारी काबिलियत थी, जिसके बूते वह बिहार की सत्ता पर सालों तक रह सकते थे. लेकिन लालू की ताकत कब उनका अहंकार बन गई, उनको खुद पता नहीं चला. वह भूल गए कि लोकतंत्र में सरकारें वोट से बनती हैं और वोट देने वाली जनता को अहंकार पसंद नहीं है. रही सही कसर चारा घोटाले ने निकाल दी.

लालू यादव अदालत द्वारा दोषी ठहराए जा चुके हैं. नियम के मुताबिक अब वह चुनाव नहीं लड़ सकते. कहते हैं किस्मत दुबारा मौका नहीं देती. लेकिन लालू यादव को बिहार की जनता ने दुबारा मौका दिया. हालांकि वह इस मौके को संभाल नहीं पाएं. राजनैतिक विरोधी लालू की हर उस कमजोरी को ढूंढ़ कर सामने ला रहे हैं जिससे वो उन्हें नुकसान पहुंचा सके. शायद राजनीति का यही चरित्र है. लालू यादव के सामने अपने परिवार और अपनी राजनीति दोनों को बचाने की चुनौती है.  लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव का आरोप है कि सभी जांच एजेंसियां दबाव में काम कर रही हैं. वह मामले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कह रहे हैं. तेजस्वी का कहना है कि लालू एक व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा हैं, जिन्हें खत्म करना मुश्किल है. तेजस्वी की बातों में कितनी सच्चाई है यह तो वक्त बताएगा, लेकिन सच्चाई यह है कि फिलहाल पूरा लालू कुनबा खतरे में है.

ब्राह्मणों को भिखारी कहने वाला मंत्री बर्खास्त

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ओडिशा। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कृषि मंत्री दामोदर राउत को सरकार से बर्खास्त कर दिया है. बर्खास्तगी का यह फरमान शुक्रवार 22 दिसंबर को आया. पहले राउत से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था लेकिन ऐसा नहीं करने पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उन्हें बर्खास्त कर दिया.

अपने बयान में मुख्यमंत्री पटनायक का कहना था कि ‘किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति को मैं सख्ती से नामंजूर करता हूं. असल में दामोदर राउत की बर्खास्तगी का फैसला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि वह बीजू जनता दल (बीजद) के उपाध्यक्ष भी हैं.

यह पूरा विवाद 17 दिसंबर को मल्कानगिरि में एक कार्यक्रम में राउत के दिए एक बयान से शुरू हुआ. इस दौरान ओडिसा के पारादीप से विधायक दामोदर राउत ने कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से में कोई भी आदिवासी भीख नहीं मांगता, वहीं जगह-जगह पर ब्राह्मण भीख मांगते दिख जाते हैं. मंत्री के इस बयान के बाद ब्राह्मणों ने जमकर हंगामा काटा. जिसपर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने मंत्री को बर्खास्त कर दिया. ओडिशा में 9 फीसदी ब्राह्मण आबादी है.

 

स्मृति ईरानी के आदर्श गांव में दलितों के लिए अलग पानी और श्मशान|

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने जब सभी सांसदों से एक-एक गांव गोद लेने की अपील की थी, तब भाजपा नेताओं में जैसे इसकी होड़ लग गई थी. पीएम मोदी के गुड बुक में शामिल होने के लिए तमाम सांसदों ने ऐसा किया भी. स्मृति ईरानी भी उनमें से एक थीं. मोदी की करीबी माने जाने वाली गुजरात से राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गुजरात के आनंद जिले के मघरोल गांव को चुना. ईरानी ने सन् 2015 में इस गांव को गोद लिया था, लेकिन इसके दो साल बाद भी यहां की हालत सुधरी नहीं है. यहां जोर-शोर से कार्यक्रमों की घोषणा तो हुई लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा.

इस क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधी से 7 करोड़ रुपये दिए गए. ये पैसे यहां पानी को शुद्ध करने, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार पैदा करने के लिए खर्च होना था, लेकिन ऐसा हो न सका. इसी तरह स्मृति ईरानी के गोद लिए इस गांव में दलितों के साथ भेदभाव भी चरम पर है. इस गांव के दलितों के लिए अलग पानी है. इसी तरह इस गांव के दलित गांव के श्मशान में अपने परिजनों का अंतिम संस्कार नहीं कर सकतें. उन्हें इसके लिए गांव से अलग एक दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है.

इस गांव के विकास के लिए जारी 7 करोड़ रुपये से 41 योजनाओं पर काम होना था. इसके तहत पानी की सुविधा का विकास करना,स्कूल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, अंतिम संस्कार के लिए ग्राउंड, सड़क और पंचायत की बिल्डिंग बननी थी. लेकिन ये सारी घोषणाएं पूरी नहीं हो सकी. तुर्रा यह कि सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए बिना काम के पूरा हुए ही सारा भुगतान कर दिया गया. औऱ आनन फानन में मई 2017 में ही स्मृति ईरानी ने मघरोल को आदर्श गांव घोषित कर दिया. हैरत की बात तो यह है कि बिना पहले की योजनाओं के पूरा हुए 15 करोड़ रुपये की लागत से वाई-फाई कनेक्टिविटी औऱ स्किल डेवलपमेंट सेंटर की योजनाओं की आधारशिला रख दी, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा है.

पिछले साल जुलाई में कांग्रेस के विधायक अमित चावड़ा ने गुजरात हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इसे सांसद निधी का दुरुपयोग का मामला बताया था, जिसके बाद मामले ने तूल भी पकड़ा था. फिलहाल सच्चाई यह है कि गुजरात के आनंद जिले का यह मघरोल गांव आज भी स्मृति ईरानी के विकास के वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहा है. औऱ जो थोड़ा बहुत विकास पहुंचा भी है, वह दलितों से कोसो दूर एक खास समाज के लोगों की जागीर बना हुआ है.

 

अध्यक्ष बनने के बाद मोदी को ऐसे हराएंगे राहुल गांधी

अहमदाबाद। कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गुजरात विधानसभा चुनाव में भले ही मामूली अंतर से पिछड़ गई हो, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात को लेकर अब भी गंभीर है. विधानसभा चुनाव में पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी की नजर अब 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर टिक गई है. इसके लिए उन्होंने अपनी रणनीति पर काम करना भी शुरू कर दिया है.

राहुल गांधी आज से गुजरात के दौरे पर हैं. इस दौरान गांधी राज्य में पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और नए विधायकों से मुलाकात करेंगे.लेकिन गुजरात पहुंचते ही राहुल सबसे पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए गए. हाल में संपन्न गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान भी राहुल विभिन्न मंदिरों में गए थे जिनमें सोमनाथ मंदिर भी शामिल था.

मंदिर दर्शन के बाद राहुल अहमदाबाद के गुजरात विश्वविद्यालय सभागार में पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होंगे. यहां वह उत्तर गुजरात, मध्य गुजरात, कच्छ, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के नेताओं से अलग-अलग बैठक करेंगे. असल में यह चिंतन शिविर गुरुवार से चल रहा था. इसके आखिरी दिन अहमदाबाद में बैठक हो रही है, जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे.

असल में राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनाव में मिले वोटों को पार्टी से जोड़कर रखना चाहते हैं, ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा मिल सके. गुजरात में लोकसभा की 26 सीटे हैं और सभी की सभी सीटों पर फिलहाल भाजपा का कब्जा है. जाहिर सी बात है कि राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव में इसे भाजपा से छीनकर कांग्रेस की झोली में डालना चाहते हैं. यह मोदी और अमित शाह के लिए भी बड़ा झटका होगा.

   

सलमान की ‘जातिगत’ टिप्पणी पर भड़का वाल्मीकि समाज, थियेटर में तोड़फोड़

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नई दिल्ली. वाल्मीकि समाज को लेकर जातिगत टिप्पणी करते हुए सलमान खान ने कभी नहीं सोचा होगा कि वह इस कदर मुसीबत में फंस जाएंगे. इस मामले में जहां उन पर एफआईआर दर्ज हो चुका है तो वहीं उनकी नई फिल्म का देश के कई शहरों में विरोध शुरू हो गया है. जयपुर में सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का विरोध हो रहा है. लोग इतने भड़के हुए थे कि उन्होंने जयपुर के राज सिनेमाहॉल के बाहर तोड़फोड़ की. प्रदर्शनकारियों ने सलमान खान के पुतले भी जलाए और उनके खिलाफ नारेबाजी की.

विरोध कर रहे लोगों ने सिनेमाहॉल में लगे फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ का होर्डिंग्स हटाकर उसे तोड़ दिया. आगरा और मुरादाबाद में भी फिल्म का विरोध हो रहा है. इससे पहले मामले में नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल ट्राइब ने नोटिस जारी कर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली-मुंबई के पुलिस कमिश्नर्स से 7 दिन में जवाब मांगा है. उधर, वाल्मीकि समाज का कहना है कि पब्लिकली गलत शब्द का इस्तेमाल करने से हमारे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है. इस बात से गुस्साए वाल्मीकि समाज ने केस दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

 दरअसल, सलमान खान ने अपनी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ के प्रमोशन के दौरान नेशनल टीवी पर अपने डांस स्टाइल को ‘भंगी जैसा’ करार दिया था. हालांकि यह वीडियो पुराना है लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी वजह से वह मुसीबत में फंस गए हैं. इसी तरह की टिप्पणी शिल्पा शेट्टी भी कर चुकी हैं. हालांकि फिलहाल फिल्म रिलिज होने के कारण सलमान खान वाल्मीकि समाज के निशाने पर हैं.

     

लालू की जिंदगी का फैसला कल

नई दिल्ली। 1996 का चारा घोटाला मामला जिसने राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेर लिया था, उस पर जल्द ही फैसला आने वाला है. यह फैसला 23 दिसंबर यानि कल सुनाया जाएगा. इस अहम फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद व डॉ. जगन्नाथ मिश्र सहित अन्य 22 आरोपीयों के साथ साथ पूरे देश की नजर होगी.

आपको बता दें कि यह मामला 1996 का है जिसमें बिहार में पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे, जिसके बाद से लालू यादव को मुख्यमन्त्री के पद से त्याग पत्र देना पड़ा था. इस घोटाले के कई आरोपियों का निधन हो चुका है तो वहीं दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए हैं.

देखा जाए तो सीबीआई की विशेष अदालत में आने वाले इस अहम फैसले पर बिहार की राजनीति पूरी तरह से टिकी हुई है. अगर लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने दोषी ठहराया तो उन्हें तत्काल जेल जाना पड़ सकता है जिससे राजद में बिखराव आने की आशंका जताई जा रही है, यूँ तो तेजस्वी यादव लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी के रूप में आरजेडी की कमान संभालेंगे लेकिन कई नेताओं का कहना ये भी है कि तेजस्वी को अभी राजनीति की उतनी समझ नहीं है, ऐसे में उनके लिए भी पार्टी की कमान को संभालना चुनौतियों से भरा होगा.

इस पूरे मामले में लालू प्रसाद यादव का कहना है कि हम पर और हमारे बच्चों पर केस कर के हमको नीचा दिखाने की कोशिश की गई, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, बीजेपी और आरएसएस जानते हैं कि लालू से मुकाबला नहीं हो सकता है, इसलिए इसे रोक दो. साथ ही कल आने वाले फैसले पर उन्होने कहा कि उन्हे न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और जो भी फैसला आएगा वो उन्हे मंजूर होगा.

पीयूष शर्मा  

मोदी के खिलाफ मोर्चा बनाएंगे जिग्नेश और कन्हैया 

नई दिल्ली। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ही उसकी राजनीति से इत्तेफाक नहीं रखने वाले तमाम संगठन उससे नाराज हैं. हैदराबाद में रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या और उसके बाद जेएनयू में कन्हैया कुमार के नेतृत्व में भड़के आंदोलन से इसमें तेजी आई है. तो जिस तरह से गौरी लंकेश की हत्या हुई, उससे विचारों की आजादी की वकालत करने वाले तमाम लोगों को काफी झटका लगा. इस घटना ने विरोधी विचारों को निशाना बनाए जाने के कारण भी भगवा राजनीति की आलोचना को मजबूत किया है.

बीते वक्त में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल औऱ जिग्नेश मेवाणी जैसे तमाम युवा खुलकर भाजपा के खिलाफ उतर आए हैं और भाजपा और मोदी के लिए चुनौती बन चुके हैं. अब ये तमाम युवा नेता एक साझा मंच बनाने पर विचार कर रहे है. जिग्नेश मेवाणी ने बीजेपी और मोदी के खिलाफ अभियान चलाने वाले युवा नेताओं के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाने की बात कही हैं. इसमें कन्हैया कुमार के अलावा शहला रशीद और मोहित पांडेय जैसे युवा नेताओं को शामिल किया जाएगा.

जिग्नेश जिन युवा नेताओं के सहारे अभियान चलाने की योजना बना रहे हैं, ये सभी 2014 से मोदी और बीजेपी सहित आरएसएस के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. लोकसभा चुनाव में अभी करीब18 महीने का वक्त बचा हुआ है. अगर ऐसा कोई मोर्चा बनता है तो यह आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

 

फिर बाहर आया आरक्षण का जिन्न|

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नई दिल्ली। आरक्षण ऐसा विषय है जिसको लेकर आंदोलन अब आम हो गया है. संविधान में अनुसूचित जाति और जनजाति को आरक्षण मिलने के बाद पिछड़ी जातियों को भी आरक्षण मिला, लेकिन अब आए दिन अन्य जातियां भी आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन करती रहती हैं. राज्यों के चुनाव के दौरान यह आंदोलन और उग्र हो जाता है. गुजरात में पाटीदारों का आंदोलन ताजा उदाहरण है तो अब राजस्थान चुनाव को सामने देख आरक्षण का जिन्न फिर बाहर निकल आया है.

राजस्थान में लंबे समय से पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर समुदाय को राजस्थान सरकार ने आरक्षण देने की घोषणा की है. लेकिन ठहरिए, राज्य सरकार द्वारा दिए आरक्षण को जानकर आप चौंक जाएंगे. सरकार ने उन्हें केवल एक फीसदी आरक्षण देने का निर्णय किया है. और ये एक फीसदी आरक्षण भी गुर्जरों को अकेले नहीं मिला है, बल्कि इसमें गुर्जर सहित पांच जातियां शामिल हैं.

सरकार के इस निर्णय से गुर्जर नेताओं में नाराजगी है. हालांकि इससे पहले राज्य सरकार ने विधानसभा में लाए एक बिल के जरिए गुर्जरों को पांच फीसदी आरक्षण देने का प्रयास किया था, लेकिन सरकार के इस विधेयक पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. इसके बाद चुनावी तैयारियों में लगी भाजपा सरकार ने 21 दिसंबर को गुर्जर सहित पांच अन्य जातियों को एक प्रतिशत आरक्षण देने को निर्णय किया. सर्कुलेशन के जरिए के इस निर्णय को केबिनेट की मंजूरी मिल गई है. हालांकि देखना होगा कि गुर्जर इस हिस्सेदारी वाले आरक्षण से संतुष्ट हो जाते हैं या फिर विधानसभा से पहले फिर से आंदोलन शुरू करेंगे.

क्या फिर होने वाली है नोट बंदी ?

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नई दिल्ली: नोट बंदी हुए अभी एक साल भी नहीं हुआ था जिसने पुरे देश को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़ा होने पर मजबूर कर दिया था . जिस नोट बंदी ने बहुत से मासूम लोगों की भी जान ली थी , माना जा रहा है की वह नोट बंदी फिर से हो सकती है. कुछ अखबारों में प्रकशित हुई खबरों के मुताबिक 8 नवंबर 2016 को हुई नोटेबंदी के बाद चलन में आये 2000 के नोट को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बंद कर सकती है .

“द मिंट” अख़बार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 2000 के नोट की छपाई बंद करदी गयी है और “द हिन्दू” में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक आर बी आई नोट वापिस ले सकती है या इसकी छपाई बंद कर सकती है और बाजार में सप्लाई कम कर सकती है. एस बी आई की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गयी की आर बी आई 2000 का नोट वापिस ले सकती है या फिर उसकी छपाई पर रोक लगा सकती है. हालांकि इस बारे में अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

गन्धर्व गुलाटी

दलित जज जस्टिस कर्णन को लेकर बड़ी खबर

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के आरोप में छह महीने की सजा पाने वाले कोलकाता हाई कोर्ट के पूर्व दलित जज जस्टिस कर्णन अदालत से रिहा हो गए हैं. अपनी सजा पूरी करने के बाद कर्णन कल 20 दिसंबर को रिहा हो गए. सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर जेल अधिकारियों और पुलिस की सुरक्षा के बीच कर्णन को रिहा कर दिया गया. कर्णन कोलकाता के प्रेसीडेंसी जेल में बंद थे.

जस्टिस कर्णन को लेने के लिए उनकी पत्नी सरस्वती कर्णन और बेटा पहले से मौजूद थे. तामिलनाडु के कोयम्बटूर के रहने वाले जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में 9 मई को छह महीने की सजा सुनाई गई थी. कुछ दिन पुलिस की पकड़ से दूर रहने के बाद 20 जून को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. जस्टिस कर्णन के खिलाफ यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जस्टिस कर्णन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जज भ्रष्टाचार में लिप्त हैं इसलिए उनकी जांच कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के उठाए सवालों पर संज्ञान लेने की बजाय उनके खिलाफ ही अवमानना का मामला चलाने का फैसला लिया.

केंद्र सरकार की ओर से अटॉनी जनरल ने भी उनके खिलाफ मामला चलाने की वकालत की थी. अदालत में सुप्रीम कोर्ट के जजों और जस्टिस कर्णन के बीच कई बार झड़पें भी हुई. आखिरकार तमाम घटनाक्रम होते हुए पूर्व जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने 9 मई 2017 को 6 महीने कैद की सजा सुनाई थी. पूर्व जस्टिस कर्णन हाई कोर्ट के ऐसे पहले सिटिंग जज थे जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने जेल की सजा सुनाई गई. हाल ही में रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनने के बाद जस्टिस कर्णन ने अपनी सजा माफ करने की गुहार लगाई थी, लेकिन राष्ट्रपति ने इसका कोई संज्ञान नहीं लिया था.

 

भारत ने दर्ज की श्रीलंका पर 93 रनों की बड़ी जीत, जानिए मैच से जुड़ी ये खास बातें

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कटक: बुधवार को कटक के बाराबती स्टेडियम में खेले गये T-20 के पहले ही मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए श्रीलंका को 93 रनों से बड़ी मात दी. भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में श्रीलंका के सामने जीत के लिए 181 रनों का लक्ष्य रखा था, जिस पर लगातार विकेट खोते हुए श्रीलंकाई टीम 16 ओवरों में 87 रनों पर ही ढेर हो गई. इसी के साथ भारत ने तीन टी-20 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली है. मैच के दौरान जहां श्रीलंकाई टीम के लिए उपुल थरंगा ने सबसे ज्यादा 23 रन बनाए वहीं उनके तीन बल्लेबाज ही दहाई के आंकड़े तक पहुंच सके. भारत की तरफ से युजवेंद्र चहल ने चार, कुलदीप यादव और हार्दिक पांड्या ने दो-दो और जयदेव उनादकट ने एक विकेट लेकर श्रीलंकाई टीम को धूल चटा दी. दिलचस्प बात ये रही की इस मैच में एक ऐसी गेंद भी फेंकी गई जिसमें मनीष पांडे ने 11 रन बटोर लिए. दरअसल, श्रीलंकाई गेंदबाज नुवान प्रदीप ने अपने ओवर की अंतिम गेंद को मनीष पांडे की कमर से ऊपर फेंक दी जिस पर पांडे ने एक शानदार छक्का जड़ दिया. लेकिन अंपायर ने प्रदीप की इस गेंद को नो-बॉल करार कर दिया और पांडे जी को एक और बड़ा शॉट लगाने का मौका मिल गया, मौके का फायदा उठाते हुए मनीष पांडे ने अलगी गेंद पर चौका मार कर 11 रन हासिल कर लिए. आइये नज़र डालते हैं मैच से जुड़ी कुछ खास बातों पर. 1. महेंद्र सिंह धोनी एक T20 मैच में चार विकेट लेने वाले भारतीय विकेटकीपरों में संयुक्‍त रूप से पहले स्‍थान पर आ गए हैं. 2. श्रीलंकाई गेंजबाज एंजेलो मैथ्‍यूज ने अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में 10वीं बार रोहित शर्मा को पवेलियन का रास्‍ता दिखाया है. मैथ्‍यूज सात बार एकदिवसीय और दो बार टेस्‍ट मैच में उन्‍हें आऊट कर चुके हैं 3. श्रीलंका का T20 मैच में यह दूसरा सबसे कम स्‍कोर है. इससे पहले पिछले साल विशाखापत्‍तनम में श्रीलंकाई टीम भारत के खिलाफ कुल 82 रन बनाए थे. 4. रोहित शर्मा T20 मैच में कप्‍तान के तौर पर 50 मैच जीत चुके हैं. ऐसा करने वाले वह भारत के तीसरे और दुनिया के सातवें खिलाड़ी हैं.

पीयूष शर्मा

 

GST के दायरे में आ सकते हैं पेट्रोल और डीजल

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार जल्द ही दे सकती है देशवासियों को राहत, पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली नें पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के संकेत दिये लेकिन साथ ही साथ ये भी कहा की जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ही इस पर जीएसटी ली जा सकती है.

उन्होंने कहा, ‘ हम भी पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी की व्यवस्था के तहत लाने के पक्ष में हैं और इस मामले में राज्य सरकारों से बात कर रहे हैं. हम उम्मीद करते हैं इस पर राज्यों की सहमति होगी.’  पूर्व वित्त मंत्री ने राज्य सभा में प्रश्न पूछते हुए कहा की सरकार का क्या इरादा है , इस वक़्त भाजपा की सरकार 19 राज्यों में हैं तो फिर कौन सी समस्याएँ आ रही हैं. जेटली ने कहा की पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स जीएसटी कानून का ही हिस्सा हैं मगर इसका फैसला काउंसिल की 75 फीसदी की सहमति के बाद ही लिया जाएगा और हमे इससे लागु करने के लिए किसी कानून में फेर बदल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि 115वें संवैधानिक संशोधन में पहले से ही इसकी अनुमति है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कमी आने के बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल दरें कम न होने के सवाल पर वित्त मंत्री जेटली ने कहा की राज्यों में अलग अलग टैक्स दरें हैं. उदाहरण के लिए, डीजल पर मुंबई में वैट 28.51 फीसदी है और दिल्ली में यह 16.75 फीसदी है. विपक्षी पार्टियां लगातार कोशिश कर रही हैं के पेट्रोलियम पदार्थों को GST में शामिल किया जाये. बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने भी इस बात के संकेत दिए हैं.

गन्धर्व गुलाटी

 

कुलभूषण जाधव के परिजनों को पाकिस्तान ने दिया वीजा

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नई दिल्ली: पाकिस्तान में कैद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के परिजनों को उनसे मिलने का मौका मिला है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने यह जानकारी दी है कि जाघव की पत्नी और माँ को इस्लामाबाद आने के लिए वीजा जारी कर दिया गया है. आधिकारिक सूत्रों की माने तो पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यह दिशा-निर्देश पिछले हफ्ते ही जारी किए हैं ताकि 25 दिसंबर को इस्लामाबाद में कुलभूषण जाधव की पत्नी और माँ उनसे मिल सकें.

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक जाधव के परिवार के लिए सुरक्षा की पूरी तैयारी की जा रही हैं. जाधव के परिवार से मुलाकात के दौरान भारतीय उच्चायोग के एक अधिकारी को उनके साथ आने की अनुमति भी दी जाएगी.आपको बता दें कि पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने पिछले साल तीन मार्च को अपने अशांत प्रांत बलूचिस्तान से जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल को ईरान से पाकिस्तानी सीमा में दाखिल होते समय गिरफ्तार किया था और उनका दावा है कि भारतीय नौसेना का कमांडर जाधव भारत की प्रमुख खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनलिसिस विंग(रॉ) के लिए काम कर रहे थे, जिसके चलते 47 साल के कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. इस पर भारत का कहना है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया और भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद वहां व्यापार के सिलसिले में गये थे. इस सजा के खिलाफ भारत सरकार ने मई के महीने में अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपील की थी. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय अदालत ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी थी हालांकि उस पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है.

पीयूष शर्मा

2 जी घोटाले पर सी बी आई की विशेष अदालत का फैसला, ए राजा समेत सभी आरोपी बरी

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नई दिल्ली:  सदी के सबसे बड़े घोटालों में से एक 2 जी सपैक्ट्रम केस पर सीबीआई की विशेष अदालत ने आज तीनों मामलों में अपना फैसला सुनाया है. 1.76 लाख करोड़ के घोटाले के मामले में सात साल से चली आ रही सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने  सीबीआई द्वारा आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश न कर पाने की वजह से यह फैसला सुनाया है. कोर्ट के फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील हरिहरन ने कहा कि सारा मामला धारणा पर आधारित था.

आपको बता दें कि यह मामला 2008 में सामने आया था जिसमें दूरसंचार विभाग द्वारा 2 जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनियमितता हुई थी. इसका खुलासा 2010 में कैग की रिपोर्ट में हुआ था जिसके तहत लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का अभाव रहा”. अब कोर्ट के इस फैसले के बाद से राजनैतिक माहौल गरमा गया है. एक तरफ जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत कई कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बीजेपी और तत्कालीन कैग प्रमुख विनोद राय पर अपने बयानों से पलटवार शुरु कर दिया है वहीं राज्यसभा सांसदसुब्रमनियन स्वामी अदि अन्य भाजपा नेता अभी इस मामले पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं.

फैसले के बाद मामले की मुख्य आरोपी, डीएमके पार्टी प्रमुख करुणानिधि की पुत्री कनिमोझी ने फैसले के बाद कहा, ‘न्याय हुआ है और मुझे इसकी खुशी है। मैं अपने समर्थकों और शुभचिंतकों की शुक्रगुजार हूं जो लगातार मेरे साथ खड़े रहे. इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि पूर्व सीएजी विनोद राय जो कि इस वक्त बीसीसीआई के प्रशासक समिति (सीओए) के प्रमुख हैं, उनको देश से माफी मांगनी चाहिए.

पीयूष शर्मा

 

जिग्नेश मेवाणी को भाजपा के खिलाफ दलित चेहरा बनाएगी कांग्रेस

 

नई दिल्ली. यूं तो गुजरात में आरक्षित सीटों पर तमाम दलित और आदिवासी विधायक जीते हैं लेकिन जितनी चर्चा जिग्नेश मेवाणी की हो रही है, उतनी किसी की नहीं हो रही है. गुजरात में दलित आंदोलन से निकले युवा नेता जिग्नेश मेवाणी विधायक बन चुके हैं. कांग्रेस सहित तमाम अन्य संगठनों के समर्थन के बाद मेवाणी गुजरात के वडगांव से चुनाव जीते हैं. कहा जा रहा है कि मेवाणी गुजरात में दलितों की आवाज बनकर उभरेंगे. मेवाणी का गुजरात प्लॉन क्या होगा, यह तो वो खुद बताएंगे लेकिन फिलहाल कांग्रेस पार्टी मेवाणी की इसी जीत और प्रसिद्धी को भुनाने का प्लॉन बना रही है.

आने वाले साल 2018 में देश के आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें प्रमुख रूप से कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़  शामिल हैं. इनमें से कर्नाटक छोड़कर तीन प्रमुख राज्यों में भाजपा की सरकार है. कयास है कि कांग्रेस पार्टी इन सभी राज्यों में दलित वोटों को एकजुट करने के लिए जिग्नेश मेवाणी को चेहरा बनाकर पेश कर सकती है. इस कयास को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि जिग्नेश ने बीजेपी और मोदी के खिलाफ देश के बाकी राज्यों में अभियान चलाने का बीड़ा उठाया है. कर्नाटक में तो जिग्नेश ने मोदी के खिलाफ प्रचार का ऐलान भी कर दिया है.

कर्नाटक में करीब 23 फीसदी दलित मतदाता हैं. ऐसे में मेवाणी यहां बड़ा फैक्टर हो सकते हैं. गुजरात चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस से नजदीकी के कारण जाहिर तौर पर मेवाणी कांग्रेस के लिए प्रचार करेंगे. कर्नाटक में तीन प्रमुख पार्टियां कांग्रेस, बीजेपी और जनता दल (सेक्लूयर) हैं. ऐसे में जिग्नेश का बीजेपी के खिलाफ अभियान चलाने का सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है.

 

यूपीकोका के खिलाफ मायावती ने खोला मोर्चा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती योगी सरकार द्वारा लाए गए यूपीकोका यानि की उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक के खिलाफ उतर आई हैं. मायावती का कहना है कि यूपीकोका का इस्तेमाल सर्व समाज के गरीबों, दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होगा. मायावती ने एक बयान में कहा कि बसपा इस नए कानून का विरोध करती है तथा जनहित में इसे वापस लेने की मांग करती है.

मायावती ने आरोप लगाया कि प्रदेश में वर्तमान भाजपा सरकार की द्वेषपूर्ण और जातिवादी नीति के कारण पूरे प्रदेश में कानून का बहुत बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा है और खासकर निर्दोष दलितों, पिछड़ों और अन्य को झूठे मामलों में जेल भेजा जा रहा है. बसपा प्रमुख का कहना है, “भाजपा सरकार द्वारा अपराधियों और माफियाओं को चिह्नित करने का जो काम किया गया है, उसमें भी इसी प्रकार का राजनीतिक द्वेष और जातिगत भेदभाव किया गया है. इससे यह आशंका प्रबल होती है कि यूपीकोका का अनुचित और राजनीतिक इस्तेमाल अवश्य ही किया जाएगा. आज उत्तर प्रदेश में कानून का बहुत अधिक दुरुपयोग हो रहा है.”

हिमाचल में जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं का दलित बस्ती पर हमला

बद्दी।बद्दी दो-दो राज्यों में मिली चुनावी जीत ने शायद भाजपा कार्यकर्ताओं का दिमाग खराब कर दिया है. जीत के बाद आपस में खुशियां मनाने की बजाय भाजपा कार्यकर्ता दूसरों को परेशान कर जश्न मना रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं के गुंडागर्दी का मामला सामने आया है.

खबर के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में चुनाव जीतने के बाद कथित भाजपा कार्यकर्ताओं ने बद्दी की एक दलित बस्ती में घुसकर वहां जानलेवा हमला किया. इसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

घटना सोमवार को चुनाव नतीजों के बाद की है. खबर के मुताबिक सोमवार को चुनाव नतीजे आने के बाद वहां जश्न मनाया जा रहा था. इसी दौरान नशे में धुत कुछ लोग पास की दलित बस्ती में घुस गए और डंडों, पत्थरों और तेजधार हथियारों से हमला किया. हमलवारों ने एक दर्जन से ज्यादा कारों में भी तोड़फोड़ की है.मामले में पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है.

 

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार एनजीटी के अध्यक्ष पद से रिटायर

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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने जितनी सुर्खियां एनजीटी अध्यक्ष रहते बटोरी उतनी चर्चा उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कार्यकाल के दौरान भी नहीं मिली. 20 दिसंबर 2012 को न्यायमूर्ति सवतंत्र कुमार ने एनजीटी में पद स्मभाला था.  पर्यावरण संरक्षण के लिए ‌जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने ऐसे कई कड़े फैसले लिए जिससे वह पर्यावरण प्रेमियों के चहेते बन गए.  एक दिन में 209 मामलों का निपटारा करने और 56 केस में फैसला सुनाने वाले जस्टिस स्वतंत्र कुमार एनजीटी यानि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण  से सेवानिवृत्त हो गए .

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण आदेश और फ़ैसले लिये. हाल ही में, अमरनाथ पर जाने वाले यात्री अब पवित्र गुफा में जयकारे और मंत्रोच्चार नहीं कर पाएंगे और ना ही घंटियां बजा पाएंगे. राजधानी दिल्ली और एनसीआर में 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर बैन लगा था. इससे पहले एनजीटी तब चर्चा में आयी जब श्री श्री रवि शंकर के आर्ट ऑफ़ लिविंग पर 5 करोड़ का जुरमाना ठोका था. ये मुद्दा इसलिए भी बड़ा हैं क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी समेत तमाम बड़ी हस्तियों ने भी शिरकत की थी . 2015 में फरीदाबाद के क्यूआरजी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर एनजीटी नें 12 करोड़ का जुरमाना ठोक कर बाकि अस्पताल प्रंबंधनो के होश उड़ा दिए थे. यह जुरमाना तय मानक से ज़्यादा निर्माण करने पर लगाया गया था. आखिरी फैसला जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने 8 दिसंबर को वायु प्रदूषण पर सुनाया था. गन्धर्व गुलाटी