विश्व पुस्तक मेले में अम्बेडकरी आवाज

विश्व पुस्तक मेले में दलित दस्तक का स्टॉल, हॉल नं-12, स्टॉल- 97

नई दिल्ली। दिल्ली के प्रगति मैदान में किताबों की दुनिया सजी है. दिल्ली के प्रगति मैदान में विचारों की दुनिया सजी है. तरह-तरह के लोग, अलग-अलग विचारों के लोग यहां मौजूद हैं. पुस्तक मेले में बीते एक दशक में तेजी से फैले अम्बेडकरी आंदोलन का भी खासा जोर है. हॉल नंबर 12 में स्टॉल नंबर 97 पर भी खासी हलचल है. यहां हर साल की तरह दलित दस्तक भी अपनी मैगजीन और किताबों के साथ विश्व पुस्तक मेले में दस्तक दे रहा है. जहां देश के तमाम हिस्सों से लोग पहुंच रहे हैं.

राकेश कबीर के काव्य संग्रह नदियां बहती रहेंगी का विमोचन दलित दस्तक के स्टॉल पर हुआ.

अम्बेडकरी आंदोलन के प्रमुख प्रकाशन सम्यक प्रकाशन औऱ गौतम बुक सेंटर का स्टॉल भी हॉल नंबर 12 में ही सजा है, जहां अम्बेकरवादियों का तांता लगा हुआ है. तमाम स्टॉल पर पाठकों की भीड़ है. तो साहित्य के दिग्गज भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. दलित दस्तक के स्टॉल पर लोग पत्रिका की वार्षिक सदस्यता भी ले रहे हैं, ताकि उन्हें दलित दस्तक पूरे साल घर बैठे मिल सके. दलित दस्तक के स्टॉल पर दलित साहित्य की चर्चा भी जोरो पर है.

दलित दस्तक के स्टॉल पर वरिष्ठ साहित्यकार मोहनदास नैमिशराय, अनिता भारती, एच.एल. दुसाध, कौशल पंवार, शांति स्वरूप बौद्ध, हीरालाल राजस्थानी, डॉ. पूरन सिंह, राकेश कबीर और चित्रकार लाल रत्नाकर जैसे साहित्यकार अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं. विश्व पुस्तक मेला लेखकों के लिए भी एक खास मौका होता है. इस दौरान तमाम नई किताबों का विमोचन होता हैं. उभरते कवि राकेश कबीर भी इनमें से एक हैं. दलित दस्तक के स्टॉल पर उनके पहले कविता संग्रह ‘नदियां बहती रहेंगी’ का विमोचन हुआ. युवा लेखिका कौशल पंवार की पुस्तक जोहड़ी का विमोचन भी इसी पुस्तक मेले में हुआ. खास यह है कि स्त्री विमर्श के इस कहानी संग्रह का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट ने किया. इसका विमोचन अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन के दिन खुद एनबीटी ने ही किया.

दलित दस्तक के प्रकाशन ‘दास पब्लिकेशन’ की नई पुस्तक ‘करिश्माई कांशीराम’ के साथ दलित दस्तक के संपादक अशोक दास

हालांकि इस बीच अम्बेडकरी साहित्य छापने वालों पर एक खास वर्ग की नजर टेढ़ी है. अम्बेडकरी साहित्य के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग आडंबर और अंधविश्वास से बाहर आ रहे हैं. हिन्दुवादी विचारधारा के वाहकों को यह खटकने लगा है. और उन्हें धमकियां मिलने लगी है. कुल मिलाकर विश्व पुस्तक मेले में वैचारिक बहस जारी है. और हॉल नंबर 12 में दलित दस्तक का स्टॉल नंबर 97 भी इस बहस के केंद्र का एक हिस्सा है, जहां पाठक पहुंच रहे हैं. पुस्तक मेला 6 जनवरी से शुरू है और 14 जनवरी तक चलेगा.

बौद्ध धर्म अपनाएंगे उना के पीड़ित

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Una Dalit Victimनई दिल्ली। गुजरात के उना तहसील में गौरक्षकों द्वारा पीटे जाने वाले दलित परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाने का फैसला किया है. उना के मोटा समधियाला गांव के सात दलितों को मरी हुई गाय की खाल उतारने के बाद उन्मादी गौ-रक्षकों ने काफी बर्बरता से पीटाई की थी. खास तौर पर चार दलितों को शहर ले जाकर उन्हें गाड़ी से बांध कर पीटा गया था.

गोरक्षकों के समूह ने जिन चार लोगों की पिटाई की थी, उसमें तीन भाई थे. उनमें से सबसे बड़े भाई वशराम सरवैया ने बौद्ध धर्म अपनाने के बारे में फैसला किया है. सरवैया का कहना है कि मरे पशुओं की खाल उतारने के पेशे की वजह से हमें काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के जरिए आई खबर के हवाले से सरवैया ने इस संबंध में घोषणा की है. हालांकि उन्होंने धर्म परिवर्तन की तारीख तय नहीं की है लेकिन समुदाय के सदस्यों के साथ आने के बाद बड़ी संख्या में बौद्ध धर्म अपनाने को कहा है.

सरवैया ने आरोप लगाया कि सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल द्वारा किये गए वादे के अनुरूप मुकदमा चलाने के लिये विशेष अदालत का गठन नहीं किया. राज्य सरकार ने पीडि़तों को नौकरी और जमीन का एक टुकड़ा देने का अपना वादा भी पूरा नहीं किया. आरोपी जमानत पर रिहा होने के बाद खुला घूम रहे हैं और मामला खिंच रहा है. सरवैया ने कहा कि ज्यादातर आरोपियों के जमानत पर बाहर होने की वजह से परिवार के सदस्यों को अपने घर से बाहर निकलने में डर लगता है.

घटना 11 जुलाई 2016 की है. मामला तब सामने आया था जब गोरक्षकों द्वारा कोड़े से कथित तौर पर इन लोगों की पिटाई किये जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इसमें इन तीन भाइयों के साथ उनके पिता की पिटाई की थी गई.

दिल्ली में मेवाणी ने की हुंकार रैली

दिल्ली में जिग्नेश मेवाणी की हुंकार रैली

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की मनाही के बावजूद गुजरात के वडगांव के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने मंगलवार को दिल्ली में रैली की. हुंकार रैली के नाम से की गई यह रैली दिल्ली के संसद मार्ग पर हुई. इस दौरान मेवाणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी सरीखे असल मुद्दे केंद्र सरकार ने दबा दिए औऱ घर वापसी, लव जिहाद और गाय जैसे मसलों को जगह दी गई. मेवाणी ने कहा कि वे इसके खिलाफ हैं.

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए मेवाणी ने कहा कि “हम पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया क्योंकि हम चुनाव लड़े और जीते. मेवाणी की रैली को लेकर पुलिस काफी सजग दिखी. सुरक्षा के लिहाज से आयोजन स्थल के आसपास भारी पुलिस तैनात किया गया था. अधिकारी अंतिम वक्त तक बोलते रहे कि मेवाणी को रैली करने के लिए अनुमति नहीं मिली थी. हालांकि, उन्होंने परमिशन के बिना रैली की. हालांकि रैली में उतनी भीड़ नहीं जुट सकी, जैसी मेवाणी उम्मीद कर रहे थे.

दलित डॉक्टर से मंगवाते थे चाय, करवाते थे चौकीदारी, आत्महत्या की कोशिश

पीड़ित डॉक्टर मरिराज

अहमदाबाद। किसी भी युवा के लिए डॉक्टर बन जाना, उसके सपने के साकार होने जैसा होता है. कोई भी युवा ऐसे ही अचानक डाक्टर नहीं बन जाता. वह दिन-रात पढ़ता है. प्रतियोगी परीक्षा में बैठता है, उसे पास करता है, तब जाकर डॉक्टर बनता है. लेकिन क्या हो जब डॉक्टर बन जाने के बावजूद उसे उसका काम न करने दिया जाए. उसे चाय लाने को कहा जाए, ऑपरेशन थियेटर के बाहर वॉचमैन की तरह खड़ा कर दिया जाए.

मामला देश के प्रधानमंत्री मोदी और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के राज्य गुजरात का है. गुजरात के अहमदाबाद के बीजे मेडिकल कॉलेज के पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्र डॉ. मरिराज ने अपने साथ हो रहे बर्ताव से दुखी होकर 5 जनवरी को आत्महत्या करने की कोशिश की. तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रहने वाले मरिराज ने खुद के साथ जातिगत भेदभाव होने का आरोप लगाया है. मरिराज का कहना है- ‘वे लोग मुझसे चाय सर्व करवाते हैं. मुझे सर्जरी नहीं करने दी जाती. वे लोग मुझे रोज ही टॉर्चर करते हैं. वे लोग मुझे वार्ड से बाहर कर देते हैं. आपरेशन थियेटर के बाहर वॉचमैन की तरह खड़ा रखते हैं. जिस दिन से मैं यहां आया, उसी दिन से मुझे जाति संबंधी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. वे लोग मेरी डिग्री जांचते रहते हैं, उन्हें लगता है कि मेरी डिग्री फेक है. मुझे गुजराती में भला-बुरा कहा जाता है. हर किसी के सामने मेरी बेइज्जती की जाती है.”

इस बारे में मरिराज ने विभाग के एचओडी को भी सूचना दी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही. उसकी मां इंदिरा ने पिछले साल सितंबर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग (एनसीएससी) में इस बात की शिकायत भी की थी, बावजूद इसके मरिराज के साथ भेदभाव बंद नहीं हुआ. इससे परेशान मरिराज ने 5 जनवरी को नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की.

हालांकि मरिराज बच गया और अब खतरे से बाहर है. उसने एक वीडियो जारी कर पूरी आपबीती सुनाई है. हालांकि अब मामला बढ़ने के बाद कॉलेज प्रशासन पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहा है. लेकिन मरिराज का वीडियो वायरल होने के बाद विजय रूपाणी सरकार के सामाजिक न्याय विभाग के मंत्री ईश्वर पटेल ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. हालांकि इस घटना ने समाज के एलीट क्लास के भीतर के जातिवाद को एक बार फिर उजागर कर दिया है. सवाल यह है कि क्या सिर्फ दलित होने की वजह से एक मेडिकल कॉलेज को अपने छात्र के साथ ऐसा भेदभाव करना चाहिए था.

अनंतनाग में सुरक्षाबलों ने मार गिराए 2 आतंकी , मुठभेड़ जारी

मंगलवार सुबह से ही जम्मू कश्मीर के अनंतनाग मे सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठबेड़ जारी है. कोकरनाग के लारनू इलाके में आतंकियों के छिप्पे होने की सुचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके मे कासो चलाया. सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की और जंगल की ओर भाग गए. सुरक्षाबलों ने आतंकियों का पिछा कर उन्हें घेर लिया और 2 आतंकियों को मार गिराया. सेना ने मुठभेड़ में मारे गए एक आतंकी के शव को बरामद कर लिया है.

सेना के एक अधिकारी ने इस खबर की पुष्टी करते हुए बताया, ‘अनंतनाग जिले में कोकेरनाग के लारनू इलाके में आतंकवाद रोधी अभियान में अभी तक दो आतंकवादी मारे गए हैं.

मारे गए आतंकी की पहचान मोहम्मद फरहान वानी के तौर पर हुई है. बताया जा रहा है के मारा गया आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन संगठन का है. आतंकी के पास से 1 एके 47 बरामद हुई है और इससे C कैटेगरी का आतंकी बताय जा रहा है. इस ऑपरेशन को आर्मी, CRPF और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (जम्मू और कश्मीर) द्वारा अंजाम दिया जा रहा है. आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों में यह दूसरा एनकाउंटर है. फिलहाल सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है.

गन्धर्व गुलाटी

गुजरात में भाजपा को झटका

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पाला बदल भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के दस पार्षदों ने छोड़ा साथ

गुजरात: गुजरात में मेहसाणा नगरपालिका सीट पर हार ने सत्‍तारूढ़ भाजपा का धमंड चूर-चूर कर दिया है. पिछले साल भाजपा, कांग्रेस के दस पार्षदों को पर्टी में शामिल कर मेहसाणा नगरपालिका पर कब्‍जा जमाने में सफल रही थी. इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस के रायबेन पटेल को अध्‍यक्ष भी बनाया था लेकिन अब पश्चिम बंगाल और मेहसाणा में  हुई बीजेपी की किरकिरी के बाद इन पार्षदों ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है.

इससे पहले पश्चिम बंगाल के नोआपाड़ा उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक मंजू बसु के सामने अपना उम्‍मीदवार बनने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन उन्होने यह कहते हुए प्रस्‍ताव ठुकरा दिया कि वह अभी भी ममता बनर्जी की सिपाही हैं. हलांकि इस पर भाजपा का कहना है कि मंजू ने खुद सदस्‍यता के लिए पार्टी के टॉल फ्री नंबर पर मिस कॉल दिया था. बरहाल मंजू बसु ने निजी फैसला बताते हुए भाजपा का प्रस्‍ताव ठुकरा दिया.

मेहसाणा में मिली इस हार से भाजपा को करारा झटका लगा है क्योकि मेहसाणा नगरपालिका का गुजरात की राजनीति में खासा महत्व है. इसे भाजपा विधायक और राज्‍य के उपमुख्‍यमंत्री नितिन पटेल का गड़ माना जाता है. इस हार के बाद भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के दस पार्षद तो वापस कांग्रेस में चले गए हैं लेकिन मामला टालने के लिए गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि कांग्रेस के पार्षद भाजपा में कभी शामिल ही नहीं हुए थे.

पीयूष शर्मा

सीएम केजरीवाल ने लॉन्च किया कॉमन मोबिलिटी कार्ड, मेट्रो और बस का सफर होगा आसान

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दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने सोमवार (08 जनवरी, 2018) को दिया दिल्ली वालों को ‘कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ (CMC) का तोहफा. इसे शहर के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है. इस कार्ड का इस्तेमाल दिल्ली मेट्रो के इलावा राज्य की 200 दीटीसी और 50 क्लस्टर बसों में किया जायेगा. इस सुविधा का लाभ अभी दिल्ली के कुछी छेत्रों में उठाया जा सकता है जिसमे दिल्ली परिवहन निगम के राजघाट डिपो-1 और रोहिणी डिपो-1 की बसें और कलस्टर बस सेवा के बीबीएम डिपो-2 शामिल हैं.

इस अवसर पर डीटीसी की एक बस में थोड़ी दूर का सफर करने के बाद केजरीवाल ने कहा, ‘‘परिवहन क्षेत्र में यह एक बड़ा कदम है जिससे दिल्ली में लोगों को सहज यात्रा की सुविधा मिल सकेगी.’’ इस कार्ड का इस्तेमाल एक अप्रैल से सभी डीटीसी और क्लस्टर बसों में डेबिट कार्ड की तरह किया जा सकेगा.

राजधानी दिल्ली में इस समय करीब 3,900 डीटीसी और 1,600 क्लस्टर बसें हैं. इससे दिल्ली सरकार और डीएमआरसी बसों में किराये के भुगतान की खातिर मेट्रो स्मार्ट कार्ड को कॉमन मॉबिलिटी कार्ड के रूप में इस्तेमाल के लिए अधिकृत करने पर सहमत हो गए थे. स्मार्ट कार्ड दिल्ली मेट्रो के किसी भी स्टेशन से खरीदे जा सकते हैं.

दिल्ली सरकार ने बताया की कार्ड के लिए डीएमआरसी के साथ मेमरैन्डम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन हो चुका है. कॉमन मॉबिलिटी कार्ड सभी अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, रेलवे स्टेशनों और दिल्ली परिवहन विभाग के पर्यटक सूचना केंद्रों में आने वाले महीनों में उपलब्ध कराए जाएंगे. इस परियोजना की शुरूआत के मौके पर परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत और दिल्ली सरकार एवं दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद थे.

गन्धर्व गुलाटी

मेरठ में दलित और ठाकुर छात्र भिड़े

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मेरठ: कोरेगांव हिंसा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे   कैंपस में दलित और ठाकुर छात्रों के बीच मुतभेड़ हो गई, जिसके चलते दो छात्रों के सिर फूट गए हैं. दरअसल विश्वविध्यालय के डेमोक्रेटिक स्‍टूडेंट फ्रंट  के छात्र डॉ.सुशील गौतम के नेतृत्‍व में शांतिपूर्वक जुलूस निकाल रहे थे. इस मार्च के दौरान डीएसएफ के छात्र सेंट्रल लाइब्रेरी पहुंचे जहां कुछ ठाकुर छात्रों ने अंबेडकर पर टिप्‍पणी कर दी. इस पर गुस्साए दलित छात्रों ने आरोपीयों की पिटाई कर दी.

इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए ठाकुर छात्रों ने कहा कि हम लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ रहे थे. इस दौरान कुछ छात्र हमें जबरन मार्च में ले जाने लगे और जैसे ही हमने उनको रोकने की कोशिश की, डीएसएफ कार्यकर्ताओं ने हमसे मारपीट शुरू कर दी, उन्होने सरिया से हमारी पिटाई की और बदला लेने के लिए नारेबाज़ी करते रहे.

वहीं डेमोक्रेटिक स्‍टूडेंट फ्रंट के लीडर डॉ.सुशील गौतम ने इस मामले में ठाकुर छात्रों पर अंबेडकर पर टिप्‍पणी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ठाकुर समझते हैं कि योगी राज में उनकी ही चलेगी लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे. दलित छात्र अब चुप नहीं बैठेंगे.

पीयूष शर्मा

कोरेगांव को लेकर अब पूरा हुआ डॉ अम्बेडकर का सपना

भीमा-कोरेगांव आज ऐसा नाम है, जिसे हर कोई जान गया है. देश में आज हर कोई यह जान गया है कि भीमा-कोरेगांव की लड़ाई क्या थी, और इसमें क्या हुआ था. खासकर दलित-बहुजन तबका जो आज तक अपने इस इतिहास से अंजान था, आज इस पर फख्र कर रहा है. वह अब इस बात को जान गया है कि जिस मूलनिवासी तबके को भारत में लगातार दबाने की कोशिश की गई थी, उसी के 500 पुरखों ने 28 हजार अत्याचारियों को रौंद डाला था. 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव की 200वीं बरसी पर जो भी हुआ, इस घटना के बाद बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर का वह सपना पूरा हो गया, जो उन्होंने 1927 में इस जगह को देखने के बाद देखा था.

असल में बाबासाहेब इस स्तंभ को दलितों के स्वाभिमान के रूप में स्थापित करना चाहते थे. महारों ने पेशवाओं के ख़िलाफ़ लड़ाई 1818 में की थी. महार रेजीमेंट ने इस लड़ाई में जमकर बहादुरी दिखाई थी. भीमा-कोरेगांव में जो विजय स्तंभ है उस पर इस रेजीमेंट के लोगों के नाम हैं. बाबा साहेब अम्बेडकर जब 1927 में भीमा-कोरेगांव गए तो उन्होंने ये सारी चीज़ें वहां देखीं. उन्होंने देखा कि 1818 के बाद का जो इतिहास है उसमें दलितों के लिए भीमा-कोरेगांव एक प्रतीक बन सकता है. यही वजह रही कि उन्होंने इस लड़ाई को प्रतीक बनाने के लिए प्रयास शुरू किया.

बाबासाहेब देश के वंचित तबके के मन में स्वाभिमान और अस्मिता की भावना पैदा करना चाहते थे. बाबासाहेब जानते थे कि देश के दलितों के लिए इस लड़ाई का महत्व क्या है. वो यह जानते थे कि अगर इस लड़ाई के इतिहास के बारे में दलित समाज को पता चल जाए तो फिर उनमें आत्मविश्वास आ जाएगा. इस इतिहास के बूते वो आगे की लड़ाई लड़ने के लिए खुद को तैयार कर पाएंगे.

डॉ. अम्बेडकर की मेहनत का नजीता यह हुआ कि पूरे महाराष्ट्र के लोगों को इस युद्ध के इतिहास की जानकारी हो गई. लेकिन चूंकि प्रचार के माध्यम सवर्णों के हाथ में थे औऱ इतिहास के लेखक भी सवर्ण थे, इसलिए यह इतिहास देश भर में नहीं पहुंच सका. देश के मूलनिवासियों के इस इतिहास की लगातार अनदेखी हुई. हालांकि आखिरकार स्थिति ऐसी बन गई कि उसी प्रचार तंत्र को पूरे देश में इस इतिहास का प्रचार करना पड़ा. हालांकि उन्होंने महारों को अंग्रेजों के पाले में खड़ा कर इस युद्ध के महत्व को कम करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके.

1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव के 200 साल पूरा होने पर वहां मौजूद देश के बहुजनों पर पत्थरबाजी की जो घटना हुई, वह अचानक नहीं थी. वह एक सुनियोजित चाल थी. हालांकि इस घटना से उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना इस घटना के साजिशकर्ताओं ने सोचा होगा. हां, इससे एक फायदा यह जरूर हुआ कि इसकी आग इतनी भड़की कि देश भर की मीडिया को इसका संज्ञान लेना पड़ा. और बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर जिस भीमा-कोरेगांव के विजय स्तंभ को देश के मूलनिवासियों के स्वाभिमान के रूप में स्थापित करना चाहते थे, वह हो चुका है.

 

‘पद्मावत’ 25 जनवरी को रिलीज पक्की, अक्षय की ‘पैडमैन’ से होगी टक्कर’

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संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ (पहले नाम पद्मावती था) काफी समय से विवादों में बनी हुई थी जिससे ‘करनी सेना’ रिलीज़ नहीं होने देना चाहती थी,आज उससे हरी झंडी मिल गयी है।  ट्रेड एनलिस्‍ट तरण आदर्श ने आज ट्वीट कर बताया की ‘पद्मावत’ 25 जनवरी 2018 को रिलीज़ होगी। इसकी भिड़ंत अक्षय कुमार की ‘पैड मैन’ के साथ होगी और साथ ही साथ 26 जनवरी, 2018 जनवरी को सिद्धार्थ मल्होत्रा और मनोज वाजपेयी की फिल्म ‘अय्यारी’ भी रिलीज होगी .

अक्षय कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह स्पर्धा की बात नहीं है, यह बड़ा दिन है, बड़ा सप्ताह है, इसलिए सभी फिल्में साथ में रिलीज हो सकती हैं. दोनों फिल्में उस दिन रिलीज हो सकती हैं.’ पिछले लंबे समय से विवाद और सेंसर बोर्ड में अटकी ‘पद्मावत’ को सेंसर बोर्ड की अनुमति मिल गयी है.

सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पांच कट्स के साथ यू/ए सर्टिफिकेट दिया है। सेंसर बोर्ड ने मेकर्स को फिल्म का नाम बदलने की हिदायत भी दी थी और अब इसका नाम ‘पद्मावत’ कर दिया गया है।  साथ ही साथ निर्माताओं को एक डिस्क्लेमर जोड़ने के लिए कहा है।

भले ही फिल्म को ‘पद्मावत’ को हरी झंडी दे दी हो, लेकिन इस फिल्म के साथ जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस फिल्म का शुरू से ही विरोध कर रही करणी सेना ने फिर से चेतावनी देते हुए कहा है कि “अगर फिल्म को प्रदर्शित किया गया तो वह पूरे देश में धरने-प्रदर्शन करेगी। करणी सेना ने फिल्म में लगे पैसे की भी जांच कराने की मांग की है.”

गन्धर्व गुलाटी

दिल्ली में ठंड ने तोड़ी 44 लोगों की सांसों की डोर

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नई दिल्ली। उत्तर भारत में ठंड ने तो काफी समय पहले ही दस्तक दे दी थी लेकिन अब सर्द, ठंडी हवाएं सांसों की डोर को काट रही है. दिल्ली पुलिस ने गृहमंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी जिसके मुताबिक, राजधानी दिल्ली में ठंड के कारण करीब 44 बेघर लोगों की मौत हुई है. सबसे बड़ी बात मौत के ये वो आंकड़े है जिसमें दिल्ली पुलिस ने शवों को सड़क के किनारे से उठाया हैं और सभी मौतें ठंड की वजह से बताई जा रही है. मगर इन मासूमों की चिता पर भी राजनीतिक पार्टियां अपनी रोटियां सेंकने से बाज़ नहीं आरही हैं.

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ट्विटर पर वीडियो जारी कर आम आदमी पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और कहा “सड़क से आंदोलन की शुरुआत करने वाले महलों में सो गए हैं और सड़क पर लोग मौत के मुंह में समा रहे हैं”.

 

इसके जवाब में, हाल ही में राज्यसभा के लिए नामांकन करने वाले आप नेता संजय सिंह ने कहा है कि “दिल्ली सरकार बेघरों के लिए शेल्टर होम का इंतजाम कर रही है. इस बीच ठंड से किसी की भी मौत होना बेहद दुखद है. संजय सिंह यह भी बोले कि बीजेपी अपने राज्यों की चिंता करे, जहां पर बच्ची भात-भात कहकर मर जाती है.”

ये आंकड़े सीएचडी सेंटर फॉर होलिस्टिक डिवेलपमेंट संस्था ने जारी किए थे. सीएचडी के सुनील अलीदा ने बताया कि जोनल पुलिस रात में सड़क से शवों को उठाती है और अब तक केवल जनवरी में 44 बेघरों के शव को उठाया गया है, जिसके आंकड़े पब्लिक डोमेन में जारी हैं. मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल हाड़ कंपाती सर्दी से निजात के आसार नहीं है. अगले कुछ दिनों तक सर्दी का सितम जारी रहेगा.

गन्धर्व गुलाटी    

आधार लीक रिपोर्ट करने वाली पात्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज: पत्रकारों ने जताया विरोध

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प्रतिष्ठित अखबार ‘दि ट्रिब्यून’ की पत्रकार रचना खैरा के खिलाफ यूनीक आईडेन्टिफिकेशन अथौरिटी ऑफ इंडिया ने दिल्ली क्रईम ब्रांच में विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर दी है. उनके ऊपर आरोप है कि उन्होने मीडिया का इस्तेमाल कर सरकार के खिलाफ लोगों तक गलत संदेश पहुचाया है.

दरअसल, ‘दि ट्रिब्यून’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार केवल 500 रूपये में 10 मिनट के अंदर एक ऐजेन्ट ने इस पत्रकार को आधार डेटाबेस में ल़गइन करने के लिए लॉगइन आईडी और पासवर्ड देने की बात कही है, जिससे कोई भी आधार नंबर अंकित करने पर उस व्यक्ति का नाम, पता, पोस्टल कोड, फोटो, फोन नंबर निकाला जा सकता है. हलांकि यूआईडीएआई ने आधार डेटाबेस में किसी तरह के सेध लगाए जाने की ख़बरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि आधार कार्ड से जुड़ा बायोमेट्रिक डेटा पूरी तरह सुरक्षित है.

रचना खैरा के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद से कई बड़े पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया, फ़ाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफ़ेशनल समेत कई संगठनों ने यूआईडीएआई की इस कार्यवाही की निंदा की . एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने अपने बयान में कहा है कि यह अनुचित और अन्यायपूर्ण क़दम है, यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है. यूआईडीएआई को रिपोर्ट के ख़िलाफ़ केस करने की बजाय खुद पर लगे आरोपों की जांच करनी चाहिए.” आधार को लेकर पिछले एक साल में यह चौथा मामला है जब अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश की जा रही है.” पीयूष शर्मा

हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ AMU का छात्र

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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पीएचडी के एक रिसर्च स्कॉलर मनान बशीर वानी की आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल होने की खबर सामने आई है. वानी की तस्वीर एके-47 राइफल के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. वानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में एप्लाइड जियोलॉजी (Applied Geology) में पीएचडी कर रहा था, लेकिन उसने कुछ दिन पहले यूनिवर्सिटी छोड़ दी थी.

26 साल का मनान वानी कुपवाड़ा जिले के लोलाब का रहने वाला है , वह तीन दिन पहले घर आने वाला था लेकिन उसने घर पर कोई खबर नहीं दी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वानी पिछले पांच साल से एएमयू में रह रहा था. वहां उसने एमफिल की डिग्री भी ली. पुलिस ने रविवार को उसके पिता की तहरीर पर लापता होने का मामला दर्ज किया था. मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि अभी वानी के आतंकी बनने की पुष्टि नहीं की जा सकती है. जो तस्वीर वायरल हो रही है, वह फोटोशॉप भी हो सकती है. पुलिस ने ये भी कहा कि स्कॉलर 3 जनवरी से लापता था, उसकी आखिरी लोकेशन दिल्ली पता चल पाई है.

बता दें की वानी एक अच्छे परिवार से राबता रखता है. सूत्रों ने बताया कि मनान के पिता लेक्चरार है और उसका भाई जूनियर इंजीनियर है. वानी ने क्लास 10 तक जवाहर नवोदय विद्यालय से पढ़ाई की है.

गन्धर्व गुलाटी

 

लालू की सज़ा पर गरमाई सियासत

रांची। 3 जनवरी से टलते टलते आखिरकार 6 जनवरी को चारा घोटाला मामले पर लालू प्रसाद यादव को सज़ा सुनाई गई. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बतौर सजा साढ़े तीन साल की जेल औऱ 5 लाख का ज़ुर्माना भुगतना होगा. सज़ा के सदमें से अब तक लालू बाहर नहीं आ पाए थे कि अगले दिन ही उन्हे इकलौती बड़ी बहन गंगोत्री देवी के निधन की सूचना मिली, जिसे सुनकर निराश लालू अपने आँसू नहीं रोक पाए. माना जा रहा है कि बहन की मौत के बाद लालू को पेरौल पर जेल से बाहर आने की इजाज़त मिल सकती है.

लालू प्रसाद यादव की सज़ा के ऐलान के बाद से ही देशभर में बयानबाज़ी शुरू हो गई है. एक तरफ जहां विपक्ष ने मौके का फायेदा उठाते हुए लालू पर जमकर निशाना साधा वहीं दूसरी तरफ कई हस्तियाँ लालू का समर्थन करती नज़र आईं. इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी ने उनके साथ अन्याय किया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार भी लालू के समर्थन में सामने आए और कहा कि चारा घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ निचली अदालत का फैसला अंतिम नहीं है और वह जमानत के हकदार है. लालू के जन सेवा के लम्बे रिकार्ड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

इतना ही नहीं कांग्रेस ने साफ किया कि लालू के जेल जाने से गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह का कहना है कि र्टी ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। जहां तक गठबंधन का सवाल है, वह आरजेडी के साथ है, किसी व्यक्ति के साथ नहीं। इस सब से जाहिर है कि लालू जेल में ही क्यों न हों, बिहार की राजनीति और पार्टी में उनका दबदबा अभी भी कायम है.

पीयूष शर्मा

 

दिल्ली पहुंचे जिग्नेश मेवाणी ने बोला पीएम मोदी पर हमला

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भीमा-कोरेगांव हिंसा में मामला दर्ज होने के बाद शुक्रवार को जिग्नेश मेवाणी दिल्ली पहुंचे. इस दौरान मेवाणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से महाराष्ट्र हिंसा पर बयान देने की मांग की. दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए मेवाणी ने कहा कि खुद को अंबेडकर का भक्त बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर महाराष्ट्र हिंसा पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मेवाणी ने साफ किया कि मैं ना ही कभी भीमा-कोरेगांव गया और न ही मैंने कोई भड़काऊ भाषण दिया. मुझ पर इस तरह के आरोप लगाकर भाजपा मुझसे गुजरात में हुई हार का बदला ले रही है. साफ है कि कहीं न कहीं 2019 में उनको मुझसे खतरा दिख रहा है. यही वजह है कि मुझ पर जानबूझकर इस तरह के इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं.

खुद को राष्ट्रीय दलित नेता के तौर पर स्थापित करने जुटे जिग्नेश मेवाणी ने 9 जनवरी को दिल्ली में युवा हुंकार रैली का आयोजन करने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि इस रैली के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने जाएंगे.

शादी करने जा रही हैं सोनम कपूर

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मुंबई। हाल ही में हुई विराट और अनुष्का की चर्चित शादी के बाद अब सोनम कपूर ने भी शादी के बंधन में बंधने का फैसला ले लिया है. सोनम इस साल बॉयफ्रैंड आंनद अहूजा से शादी कर सकती हैं. लंबे समय से एक-दूसरे को डेट कर रहे सोनम और आनंद कई बार साथ में अपनी तस्वीरें शेयर कर चुके हैं. हाल ही में सोनम ने बॉयफ्रैंड आंनद अहूजा के साथ पैरिस में नया साल मनाया था जिसकी तस्वीरें और विडियो उन्होंने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया था.

मुंबई मिरर के मुताबिक सोनम कपूर इस साल अप्रेल में जोधपुर में शादी कर सकती हैं. शादी को प्राईवेट रखा जाएगा और आयोजन में सिर्फ खास रिश्तेदारों के ही शामिल होने की खबर है. इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान शादी के प्लॉन्स के बारे में पूछे जाने पर सोनम ने कहा था कि उन्हे शादी की तैयारियां करना और दुल्हन के लिबाज़ में सजना बेहद पसंद है और वह अपने पेरेंट्स को आइडल कपल मानती हैं.

  • पीयूष शर्मा

भीमा-कोरेगांव पर ब्राह्मण औऱ दलित डायरेक्टर में ट्वीटर वार

विवेक अग्निहोत्री और नीरज धेवान

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव को लेकर चल रही बहस अब फिल्म जगत तक पहुंच गई है. घटना के बाद दलित उभार को लेकर चल रही बहस के बीच फिल्मी दुनिया के दो जाने माने डायरेक्टर आपस में उलझ गए हैं. ‘हेट स्टोरी’ और ‘चॉकलेट’ समेत कई फ़िल्मों के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री के एक हालिया ट्वीट पर बहस छिड़ गई है.

विवेक अग्निहोत्री ने 3 जनवरी को ट्विटर पर लिखा था कि ”कुछ वक्त पहले मैंने फ्लाइट में एक दलित नेता के पोते को बिजनेस क्लास में सफर करते हुए देखा था. तब मैंने लिखा था- एक निचली जाति के नेता के साथ सफर कर रहा हूं. लेकिन आज की तारीख़ में अगड़ी जाति कौन है? वो व्यक्ति जो बिजनेस क्लास में बैठा हुआ है और उसे ग्राउंड स्टाफ अटेंड कर रहा है. या वो जो फ्लाइट में सीट के हत्थे पर हाथ रखने के लिए आधा इंच जगह तलाशने की कोशिश कर रहा है. मैं ब्राह्मण परिवार में पैदा हुआ और ये नेता दलित परिवार में. लेकिन आज वो फर्स्ट क्लास 1ए में बैठा हुआ है और मैं सेकेंड क्लास 26बी में बैठा हुआ है. पिरामिड उलटा हो गया है.”

विवेक अग्निहोत्री के इस ट्वीट पर फिल्म मसान के जरिए कई अवार्ड जीतने वाले फिल्म डायरेक्टर नीरज घेवान ने करारा जवाब दिया है. नीरज घेवान ने विवेक अग्निहोत्री को जवाब देते हुए ट्विटर पर लिखा- ”मैं एक दलित हूं. अपने देश के लिए कान फ़िल्म और एडवरटाइजिंग अवॉर्ड भी जीता है. नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता है. ये सब मैंने अपनी दलित पहचान का इस्तेमाल किए बिना किया है. और हां, मैं अब बिजनेस क्लास में सफर करता हूं. अगली बार जब हम एक ही विमान में सवार हुए तो मैं आपको अपनी सीट पर बैठने का ऑफर दूंगा.” नीरज घेवान ने एक दूसरे ट्वीट में यह भी लिखा कि ”मैं कभी जाति कार्ड का इस्तेमाल नहीं करुंगा और न ही इसे नीची नज़रों से देखूंगा.”

नीरज के इस ट्वीट पर कई लोगों ने उनका समर्थन किया है. वरुण ग्रोवर ने इस मसले पर कई ट्वीट किए. वरुण नेअपने ट्वीट्स में सवाल उठाया है- ”एक शांतिपूर्ण रैली पर हमले के बाद दलितों ने ट्रैफिक रोककर प्रदर्शन किया. अपर कास्ट से ताल्लुक रखने वाले भारतीय कहते हैं- देखो इन अराजकतावादियों को, ये भारत तोड़ना चाहते हैं. लेकिन जब दलितों के कुएं में ज़हर मिलाया जाता है. दलितों को उनकी जगह दिखाने के लिए रेप और मर्डर किया जाता है, तब यही लोग कहते हैं कि भारत विविधताओं का देश है, झगड़े तो होंगे ही.”

योगेंद्र चौहान ने लिखा, ”किसी को विवेक से पूछना चाहिए कि ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने में उनका क्या योगदान है,जिस पर वो इतना फ़ख़्र कर रहे हैं.” तो पूर्व राज्यसभा सांसद तारिक अनवर लिखते हैं, ”आप चाहें तो उन्हें फिल्म बनाने के गुर भी सिखा सकते हैं.”

संघ को देश का रक्षक मानते हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज

कोट्टयम। क्या आपको यह लगता है कि देश की सुरक्षा आरएसएस यानि की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के हाथ में है. क्या आप भी यह मानते हैं कि संविधान, लोकतंत्र और सेना के बाद इस देश की सुरक्षा संघ करती है. भले ही आप इससे इत्तेफाक न रखते हों लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज के लिए यही सच है.

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर्ड जस्टिस के.टी. थॉमस ने कहा है कि संविधान, लोकतंत्र और सशस्त्रआ सेनाओं के बाद, आरएसएस ने भारत में लोगों को सुरक्षित रखा है. 31 दिसंबर को कोट्टयम में संघ के प्रशिक्षण कैंप को संबोधित करते हुए पूर्व जज ने यह बात कही. जस्टिस थॉमस ने कहा- “अगर किसी एक संस्थाह को आपातकाल के दौरान देश को आजाद कराने का श्रेय मिलना चाहिए, तो मैं वह श्रेय आरएसएस को दूंगा. मैं समझता हूं कि आरएसएस का शारीरिक प्रशिक्षण किसी हमले के समय देश और समाज की रक्षा के लिए है.”

जस्टिस थॉमस ने आगे कहा कि- “अगर पूछा जाए कि भारत में लोग सुरक्षित क्यों हैं, तो मैं कहूंगा कि देश में एक संविधान है,लोकतंत्र हैं, सशस्त्रि बल हैं और चौथा आरएसएस है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंाकि आरएसएस ने आपातकाल के विरुद्ध काम किया.

हाल ही में केंद्रीय मंत्री अनंत हेगड़े के धर्मनिरपेक्षता को लेकर दिए गए विवादित बयान की तरह ही पूर्व जज ने भी धर्मनिरपेक्षता को लेकर सवाल उठाया. पूर्व जज ने कहा कि वह इस बात से इत्ते फाक नहीं रखते कि सेक्युसलरिज्म. धर्म की रक्षा के लिए है. जाहिर है कि देश के एक पूर्व जज के इस तरह के बयान से आने वाले दिनों में एक नई बहस छिड़ सकती है.

महाराष्ट्र के बाद गुजरात, मध्यप्रदेश, दिल्ली और यूपी पहुंची कोरेगांव की आहट

नई दिल्ली। भीमा-कोरेगांव की आग पुणे से निकल कर मुंबई और अब मुंबई से निकलकर महाराष्ट्र के तमाम क्षेत्रों के अलावा गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक में फैल गई है. महाराष्ट्र के औरंगाबाद में प्रदर्शनकारियों ने जमकर प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से वहां भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात करना पड़ा. इसी तरह नागपुर में तमाम स्कूल-कॉलेज और दुकानें बंद रही. पत्थरबाजी के कारण यहां एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है.

पुणे के नजदीक और एनसीपी नेता शरद पवार के गढ़ बारामती में भी विरोध का काफी असर रहा. यहां भी दुकाने बंद रही और प्रशासन ने बसों का संचालन रोक दिया. शरद पवार इस मुद्दे पर दलितों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं. दक्षिण महाराष्ट्र के सांगली और मिराज में भी विरोध देखने को मिला.

विरोध की यह आग महाराष्ट्र से होकर मध्यप्रदेश आ गई. भीमा-कोरेगांव की घटना के विरोध में दलित संगठनों ने यहां भी बंद रखा. गुजरात के जूनागढ़ मे भी प्रदर्शन हुए. महाराष्ट्र औऱ गुजरात में भड़की हिंसा को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. इससे पहले दिल्ली में भी भीमा-कोरेगांव की आग पहुंच गई. घटना के विरोध मे अम्बेडकरवादी सगठनों ने दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन पर जमकर प्रदर्शन किया.

आज 5 जनवरी को भी संसद मार्ग पर राष्ट्रीय दलित महासभा के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया गया. इस विरोध प्रदर्शन में भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण पर से रासुका हटाने और कोरेगांव में अम्बेडकरवादियों पर पत्थरबाजी के विरोध में अशोक भारती के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया.

कोरेगांव के आरोपी के साथ पीएम मोदी की फोटो वायरल

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मुंबई। भीमा-कोरेगांव में दलितों पर पथराव और महाराष्ट्र में हिंसा फैलाने के आरोप में जिन दो हिंदुवादी नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उनमें से एक की पीएम मोदी के साथ फोटो वायरल हो रही है. उस शख्स का नाम संभाजी भिड़े उर्फ गुरूजी है. गुरुजी नाम से पूरे महाराष्ट्र में विख्यात यह शख्स शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान का जाना माना नेता है.

जो तस्वीर वायरल हुई है, उसमें संभाजी भिड़े यानि की गुरूजी पीएम मोदी के साथ दिखाई दे रहा है. तस्वीर देखकर संभाजी की पीएम मोदी के साथ नजदीकी का साफ पता चल रहा है. यहां तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद संभाजी की तारीफ कर चुके हैं. 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सांगली में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा था कि भिड़े उनके लिए आदर्श हैं.

पीएम मोदी ने कहा था कि- ‘मैं भिड़े गुरुजी का बहुत आभारी हूं, क्योंकि उन्होंने मुझे निमंत्रण नहीं दिया था बल्कि उन्होंने मुझे हुकुम किया था.’ मीडिया में यह भी खबर है कि कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी गुरुजी से मुलाकात की थी. शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस पूरे मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं.