मध्यप्रदेश के स्कूलों में दलित बच्चों के साथ भयंकर भेदभाव, रिपोर्ट

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के स्कूलों में दलित समाज के बच्चों से भेदभाव को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक आज भी मध्य प्रदेश के स्कूलों में 92 प्रतिशत बच्चों के साथ भेदभाव होता है.चाइल्ड राइट ऑब्सरवेट्री और मध्यप्रदेश दलित अभियान संघ के हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि 92फीसदी दलित बच्चों को आज भी स्कूलों में हैंडपंप और टंकी छूने पर पाबंदी है.

सर्वे के दौरान दलित बच्चों ने कहा कि जब गैरदलित बच्चे उन्हें ऊपर से पानी पिलाते हैं, तभी उनको पानी पीने को मिलता है. जबकि 28 फीसद बच्चों ने कहा कि वह घर जाकर ही पानी पीते हैं. यही नहीं, सर्वे के मुताबिक स्कूल में दलित बच्चों को क्लास में आगे बैठने की भी मनाही है. उन्हें पीछे और बीच की लाइन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, चाहे वह पढ़ने में कितना भी तेज हो.

इस सर्वे में शिक्षकों का दलित बच्चों के प्रति व्यवहार भी सामने आया है. 88 फीसद दलित बच्चों का कहना था कि शिक्षक उनके साथ भेदभाव करते हैं. तो 23 प्रतिशत बच्चों का यह भी कहना है कि शिक्षक उनसे ज्यादा सख्ती से पेश आते है.

यह सर्वे बुंदलेखंड, चंबल, महाकौशल एयर निमाड़ के 10 जिलों के 30 गाँवों के 412 दलित परिवारों के बीच किया गया है. बता दें कि मध्य प्रदेश और केंद्र में दोनों ही जगह भाजपा सरकार है. इस सर्वे का मानवीय पहलू यह भी है कि जब स्कूलों में बच्चों के साथ इतना भेदभाव होता है तो आखिर वो कैसे आगे बढ़ेंगे. आरक्षण के खिलाफ बहस करने वाले लोगों को पहले इस भेदभाव के खिलाफ लड़ना होगा.

 

आज ही के दिन पैदा हुआ था वीरप्पन, जानिए उससे जुड़े अनसुने सच

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18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार हाथी का शिकार किया था. हाथी को मारने की उसकी पसंदीदा तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना.

एक बार वन अधिकारी श्रीनिवास ने वीरप्पन को गिरफ़्तार भी किया था. लेकिन उसने सुरक्षाकर्मियों से कहा उसके सिर में तेज़ दर्द है, इसलिए उसे तेल दिया जाए जिसे वो अपने सिर में लगा सके. उसने वो तेल सिर में लगाने की बताए अपने हाथों में लगाया. कुछ ही मिनटों में उसकी कलाइयाँ हथकड़ी से बाहर आ गईं. हालांकि वीरप्पन कई दिनों तक पुलिस की हिरासत में था लेकिन उसकी उंगलियों के निशान नहीं लिए गए.

वीरप्पन की ख़ूंख़ारियत का ये आलम था कि एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फ़ुटबॉल खेली थी. ये वही श्रीनिवास थे जिन्होंने वीरप्पन को पहली बार गिरफ़्तार किया था.

अपराध जगत में क्रूरता के आपने कई उदाहरण सुने होंगे लेकिन ये नहीं सुना होगा कि किसी लुटेरे या डाकू ने अपने आप को बचाने के लिए अपनी नवजात बेटी की बलि चढ़ा दी हो.

1993 में वीरप्पन की एक लड़की पैदा हुई थी. तब तक उसके गैंग के सदस्यों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी थी. जंगल में बच्चे के रोने की आवाज़ रात के अंधेरे में ढाई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है. एक बार वीरप्पन उसके रोने की वजह से मुसीबत में फ़ंस चुका था. इसलिए उसने अपनी बच्ची की आवाज़ को हमेशा के लिए बंद करने का फ़ैसला किया और उसे मार डाला.

सन् 2000 में वीरप्पन ने दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता राज कुमार का अपहरण कर लिया. राजकुमार 100 से अधिक दिनों तक वीरप्पन के चंगुल में रहे. इस दौरान उसने कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्य सरकारों को घुटनों पर ला दिया.

जून, 2001 में तामिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार को स्पेशल टॉस्क फोर्स का प्रमुख बताया. जिन्होंने तगड़ी रणनीति तैयार की और वीरपन्न को मार गिराया.

 

भाजपा मंत्री के दफ्तर पर एक करोड़ का खर्च कितना जायज

नई दिल्ली। सरकारें पांच साल के लिए बनती हैं. जो सरकार अभी है, वह पांच साल बाद आएगी या नहीं, कोई नहीं जानता, बावजूद इसके मंत्रियों द्वारा अपने दफ्तरों पर करोड़ों का खर्च कर दिया जाता है, गोया उन्हें अब ताउम्र वहीं रहना है और ये पैसे उनके घर के हों.

भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का किस्सा भी ऐसा ही है. गोयल अपने सरकारी दफ्तर को बेहतर बनाने के लिए एक करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च कर चुके हैं, लेकिन अभी भी काम बाकी ही है. नई दिल्ली के सरदार पटेल भवन में स्थ‍ित स्टाफ कैंटीन को पिछले साल ही 52 लाख रुपये खर्च कर मॉडर्न बनाया गया था, लेकिन अब इसे केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का ऑफिस बनाने के लिए तोड़ दिया गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि मंत्री जी के लिए ऑफिस बनाने पर अब तक 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आ चुकी है, लेकिन अब भी यह पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है और बिल बढ़ता ही जा रहा है.

बीजेपी नेता विजय गोयल पांच महीने पहले ही केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्य मंत्री बनाए गए हैं. सितंबर 2017 तक गोयल खेल एवं युवा मामलों के मंत्री थे.

इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में लगे सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गोयल खुद दो बार इस ऑफिस के काम का मुआयना कर चुके हैं. उन्होंने इसमें कुछ बदलाव के सुझाव भी दिए जिसको अंजाम देने के लिए और रकम लगेगी यानी लागत में संशोधन होगा. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दफ्तर के लिए खर्च होने वाले करोड़ों रुपये भारत की जनता के हैं, न की भाजपा के पार्टी फंड के पैसे.

 

बिहार में नौकरी करना चाहते हैं तो यह पढ़िए

अगर आप बिहार से ताल्लुक रखते हैं या फिर बिहार में नौकरी करना चाहते हैं तो आपके लिए एक बेहतर मौका है. बिहार के मत्स्य निदेशालय ने 35 पदों पर भर्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किया है. ये भर्तियां प्रदेश के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, दरभंगा एवं मधुबनी जिले के 35 प्रखंडो में मत्स्य प्रसार पदाधिकारी के पद पर की जाएंगी. नियुक्तियां एक साल के अनुबंध पर होगी. आरक्षण से जुड़े सभी लाभ केवल बिहार के मूल निवासियों को प्राप्त होगा. अन्य राज्यों के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी के माने जाएंगे. मत्स्य प्रसार पदाधिकारी के लिए उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा. पद, योग्यता और आवेदन की जानकारी इस प्रकार हैं :

मत्स्य प्रसार पदाधिकारी, कुल पद : 35 (सामान्य- 13) योग्यता : मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से मत्स्य विज्ञान में स्नातक की डिग्री या सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एडुकेशन, मुंबई से मत्स्य विज्ञान में दो वर्षीय पीजी डिप्लोमा किया हो.

आयु सीमा : न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष. अधिकतम आयु सीमा में आरक्षित वर्ग को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार छूट मिलेगी.

वेतन : 15,000 रुपये प्रति माह.

चयन प्रक्रिया : शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा.

आवेदन शुल्क : किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होगा.

आवेदन प्रक्रिया : वेबसाइटलॉगइन करें.

आवेदन भेजने का पता : निदेशक मत्स्य, मत्स्य निदेशालय, ऑफिसर्स हॉस्टल, ब्लॉक-ए, बेली रोड, पटना डाक से आवेदन फॉर्म स्वीकार होंगे : 09 फरवरी 2018 अधिक जानकारी के लिए आप यहां फोन या ईमेल कर सकते हैं. फोन : (0612)-2535800 ई-मेल : directorfisheries-bihnic.in

   

गवास्कर को क्यों याद आएं धोनी

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भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, सुनील गवास्कर और महेन्द्र सिंह धोनी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर भारतीय टीम के चयन और एक के बाद एक फैसलों ने क्रिकेट के जानकारों को हैरान कर दिया है. चाहे वो टीम के उप कप्तान और विदेशी ज़मीं पर सबसे सफल भारतीय बल्लेबाज़ों में से एक अजिंक्य रहाणे को बाहर रखना हो या पहले टेस्ट के अपने सबसे सफल गेंदबाज़ भुवनेश्वर को दूसरे टेस्ट में ना खिलाना हो या फिर मैच के चौथे दिन तीसरा विकेट गिरने के बाद रोहित शर्मा को बल्लेबाजी के लिए ना भेजना हो.

एक के बाद एक फैसलों से अब क्रिकेट के दिग्गज सुनील गवास्कर को टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की याद आने लगी है. हालिया फैसलों पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट से जुड़े हम सभी लोगों को दुआ करनी चाहिए कि ये जो कर रहे हैं वो काम कर जाए. पहले टेस्ट में वो काम नहीं किया. दूसरे टेस्ट में भी अब तक वो काम नहीं किया है.

गावस्कर टीम से इतने निराश दिखे कि उन्हें पूर्व भारतीय कप्तान महेंदर सिंह धोनी की याद आ गई. उन्होंने कहा, “काश उन्होंने संन्यास नहीं लिया होता. उन्होंने कहा कि अगर धोनी चाहते तो वो खेल सकते थे. लेकिन साफ़ है कि उन पर कप्तानी का बहुत दबाव था.” गवास्कर ने कहा कि धोनी को कप्तानी छोड़ कर बतौर विकेट कीपर बल्लेबाज़ टीम में बने रहना चाहिए था. क्योंकि ड्रेसिंग रूम में उनकी सलाह अनमोल है. शायद उन्होंने सोचा कि उनका चले जाना ही ठीक है.

तारक मेहता में आएंगे दो नए चेहरे, जानिए कौन हैं वो

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मुंबई। टीवी की दुनिया में टीआरपी में सबसे ऊपर चलने वाले धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा की गोकुलधाम सोसाइटी में दो नए किरदार नजर आने वाले हैं. गोकुलधाम में टप्पू सोनू, गोगी और गोली सभी के माता पिता हैं. पर टप्पू सेना के एक सदस्य पिंकू के माता पिता कभी भी धारावाहिक में नज़र नहीं आये. धारावाहिक में अब इन्हीं दोनों को लाने की तैयारी चल रही है.

इस कहानी को दिखाने का ट्रैक 17 जनवरी से शो में प्रारम्भ होगा. असित का कहना है, “पिंकू, टप्पू सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे सभी प्यार करते हैं. वह गोकुलधाम में सभी की मदद करता रहता है. पर अभी तक हमने उसके माता-पिता या परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को नहीं दिखाया है. दर्शक हमसे इसके बारे में पूछ- ताछ करते रहते हैं. तो हमने निर्णय लिया कि अब इस रहस्य से पर्दा उठा दिया जाये. तो कौन हैं पिंकू के माता पिता? क्यों छुपाता रहा वह उनकी पहचान? क्या है ये रहस्य? इन सब सवालों के जवाब अब जल्द मिलने वाली हैं.

 

दस रूपये के सिक्के पर फैले भ्रम पर रिजर्व बैंक आया सामने

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नई दिल्ली। दस रुपये के सिक्के को लेकर काफी भ्रम फैला हुआ है. इस भ्रम की चपेट में सबसे ज्यादा अशिक्षित और गांव के लोग आ जाते हैं और अक्सर दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार कर देते हैं. इसको लेकर अब रिजर्व बैंक सामने आया है. बैंक ने 10 रुपये के सिक्कों के सभी 14 डिजाइन को लेनेदेन के लिए वैध और मान्य बताया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को यह जानकारी दी है. आरबीआई की ओर से यह बयान उस समय आया है जब कुछ व्यापारियों ने ये सिक्कें स्वीकार करने से इनकार कर दिये थे.

आरबीआई ने सिक्कों के विभिन्न डिजाइन की वैधता और मान्यता दोहराया है. अपने बयान में केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह बाजार में उन्हीं सिक्कों को डालता है जो सरकारी टकसालों में बनते हैं. साथ ही यह भी कहा कि इन सिक्कों में विशिष्ट फीचर्स होते हैं जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को दर्शाते हैं. इन्हें समय समय पर पेश किया जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक अब तक 10 रुपये के सिक्कों के 14 डिजाइन जारी कर चुका है. यह सभी वैध तथा मान्य हैं. रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों व शाखाओं से वित्तीय लेनदेन और एक्सचेंज के लिए इन्हें स्वीकार करने के लिए कहा है.

करण

   

केंद्र सरकार ने लिया हज सब्सिडी ख़त्म करने का फैसला

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हज सब्सिडी पूर्ण रूप से खतम करने का ऐलान कर दिया है. सरकार के इस फैसले से सियासत गरमाती दिखाई दे रही है. हालांकि, हज सब्सिडी को खत्म करने की शुरुआत 2012 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से हो गयी थी जिसके मुताबिक 2022 तक सब्सिडी खतम हो जानी चाहिए थी. खास बात यह है कि ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन करते नज़र आ रहे हैं. अपनी प्रतिक्रिया में औवेसी ने कहा है कि वो तो सन 2006 से ही कह रहे हैं कि हज सब्सिडी ख़त्म कर देनी चाहिए और इसका इस्तेमाल मुस्लिम बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए, खास तौर पर लड़कियों की शिक्षा पर. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में काम शुरू कर देना चाहिए. गरीब नवाज फाउंडेशन के अध्यीक्ष मौलाना अंसार रजा ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा “हज सब्सिडी को खत्मे करना एक अच्छाल कदम है. अब इस राशि का बच्चों की पढ़ाई पर इस्तेोमाल करने की भी बात कही गई है. लेकिन, ये जो तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं, जैसे कभी तीन तलाक तो कभी बिना मेहरम के हज…ये सब ठीक नहीं है. मुस्लिम समुदाय को जिस तरह से खौफजदा करने की कोशिश की जा रही है वह ठीक नहीं है. हज सब्सिडी को खत्मम करने में कोई हर्ज नहीं है. वैसे भी यह सिर्फ नाम के लिए था. इसका कोई फायदा नहीं मिलता था.” अल्पसंख्यक मामलों के केंद्र मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने मंगलवार को हज सब्सिडी ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले की पुष्टि की. मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, आज़ादी के बाद पहली बार 1.75 लाख मुसलमान बिना सब्सिडी के हज करेंगे. पिछले साल 1.25 लाख लोग हज गए थे. उन्होंने कहा कि सब्सिडी हटाने के फ़ैसले से सरकार के 700 करोड़ रुपये बचेंगे और ये पैसा अल्पसंख्यक की शिक्षा ख़ासकर लड़कियों की तालीम पर खर्च किया जाएगा.
   

गन्धर्व गुलाटी

तीन तलाक देकर मोदी के खिलाफ क्या बोला शख्स

बरेली। तीन तलाक पर भले ही सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने कानून बनाकर रोक लगा दिया हो, इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है. बरेली की एक घटना ने तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार और कोर्ट के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. असल में उत्तर प्रदेश के बरेली में शौहर ने बीच सड़क पर पत्नी को तीन बार तलाक देकर सारे रिश्ते खत्म कर लिए और धमकी दी की मोदी सरकार मेरा कुछ नहीं बिगाड़ेगी.

शहर के मोहल्ला कटघर निवासी नाजरीन का निकाह वसीम के साथ हुआ था. शादी के 4 साल बाद जब नाजरीन ने बेटी को पढ़ाना चाहा तो वसीम ने इसका विरोध कर दिया. दोनों के बीच अनबन ऐसी हुई के सारे रिश्ते टूटने लगे. वसीम ने नाज़रीन को घर से बाहर निकाल दिया और बेटी को ना पढ़ाने की जिद करते हुए तलाक देने की धमकी देने लगा.

हाल ही में जब नाजरीन अपनी बेटी के साथ रिश्तेदारों के यहां से आ रही थी तभी मोटरसाइकिल पर सवार वसीम ने नाजरीन को रोका और मारपीट करने लगा. और तीन बार तलाक देकर भाग गया. इस दौरान उसने कहा कि कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

फिलहाल पीड़िता ने मेरा हक फाउंडेशन से मदद की गुहार लगाई है. फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने बताया कि पीड़िता ने आपबीती बता कर इंसाफ की गुहार लगाई है. इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी पत्र भेजा गया है. इस पूरे मामले में अब केंद्र की मोदी सरकार की परीक्षा की घड़ी आ गई है कि वह पीड़िता को कैसे इंसाफ दिला पाती है.

धर्म के नाम पर युवाओं की लड़ाई में जीत किसकी

 हिन्दुत्व का झंडा बुलंद करने वाले राजनीतिक दल अपने एजेंडे में सफल होते दिख रहे हैं. देश में हिन्दुत्व के एजेंडे की सफलता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी दिखी, जब एक दलित युवक द्वारा दलितों के घरों से देवी-देवताओं के पोस्टर हटाकर उनकी जगह डॉ. अम्बेडकर और रविदास जी की फोटो लगाने से नाराज कुछ युवकों ने युवक को लाठी डंडे से पीटा.

 यही नहीं हिन्दुत्व का झंडा बुलंद किए युवकों ने दलित युवक से ‘जय माता दी’ के नारे लगवाएं. मामला तब सामने आया जब इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वाइरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पिटाई करने वाले युवकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 295 ए (किसी की भी धार्मिक भावनाओं का अपमान) और एससी / एसटी अधिनियम और आईटी अधिनियम के तहत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

घटना के बारे में एसएसपी अनंत देव का कहना है कि पुखराजी में रहने वाले चार युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया. उन्हें पकड़ने के लिए टीमें भेजी गई हैं. आरोपियों का संबंध मुख्यमंत्री योगी के संगठन हिंदू युवा वाहिनी से है.

यहां बड़ा सवाल यह है कि अपना भविष्य बेहतर बनाने की उम्र में दोनों पक्ष के युवा धर्म को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं. वो न साथ आकर इस देश की गरीबी पर लड़ते हैं न ही नासूर बने जातिवाद पर. न तो खराब शिक्षा व्यवस्था पर और न स्वास्थ सिस्टम पर. फिलहाल युवाओं की लड़ाई धर्म को लेकर है, जिसकी एक इंसान की बेहतरी में कोई भूमिका नहीं होती है. जाहिर सी बात है कि यह उन लोगों की जीत है, जो सालों से धर्म के नाम पर राजनीति करते आ रहे हैं और इसी के बूते भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का दम भरते हैं.

दलित परिवार को धर्म ना बदलने पर जान से मारने की धमकी

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 नूंह। नूंह जिले के नगीना खंड के मोहलाका गांव में धर्म ना बदलने पर दलित परिवार से मार पीट का मामला सामने आया है. इस मामले में पीड़ित श्रीकिशन ने नगीना थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई है. उन्होंने गांव में ही रहने वाले इस्लाम पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है.

श्रीकिशन की शिकायत के अनुसार, वह सपरिवार पंचायत से मिली बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) प्लाट में बने घर में रह रहा है. गांव के ही रहने वाले इस्लाम ने पास में अवैध कब्जा कर रखा है. वह धमकी देता है कि अगर इस कॉलोनी में रहना है, तो इस्लाम धर्म कुबूल करना होगा. जब उन्होंने विगत 15 जनवरी को इसका विरोध किया तो इस्लाम ने अपने कुछ साथियों के साथ लाठी-डंडों से श्रीकिशन के पुरे परिवार पर हमला कर दिया और साथ ही साथ इस्लाम धर्म ना कबूलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी.

इस गांव की आबादी लगभग 3000 है, जिसमें से सिर्फ सात परिवार दलित है और बाकी सभी परिवार मुस्लिम हैं. इससे पहले भी हुकुमचंद नाम के व्यक्ति को  गांव छोड़ कर जाना पड़ा था. उनपर भी दबाव बनाया गया था के वह इस्लाम धर्म कबूल कर लें.

  • संपादन- गन्धर्व गुलाटी

बसपा से फिर निकाले गए दद्दू प्रसाद

दद्दू प्रसाद

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद को एक बार फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. दद्दू प्रसाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा कर निकाला गया है. इससे पहले 28 जनवरी 2015 को भी बसपा सुप्रीमों ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था. लेकिन बाद में 28 मार्च 2017 को दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती के आवास पर उन्हें पुन: बसपा में शामिल कर लिया गया.

बांदा जनपद के मूल निवासी दद्दू प्रसाद कांशीराम जी से प्रभावित रहे हैं. वह खुद को कांशीरामवादी कहते रहे हैं. कांशीराम जी से प्रभावित होकर ही वो बसपा में शामिल हो गए थे. बसपा की पांच साल की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री थे. साथ ही बुंदेलखंड सहित कई राज्यों के प्रभारी भी रहे. दद्दू प्रसाद पार्टी की रणनीति में बदलाव के पक्षधर रहे हैं. इसलिए वह फिर से खटकने लगे थे.

इसके बाद 10 जनवरी को बसपा के बांदा जिलाध्यक्ष ने प्रेस नोट जारी कर दद्दू प्रसाद को बसपा से निष्कासित करने की सूचना दी. उन पर आरोप लगाया गया कि वह अपने को पार्टी का बड़ा नेता बताकर बसपा के पदाधिकारियों और समर्थकों को गुमराह कर रहे हैं. पार्टी ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि दद्दू प्रसाद का बसपा से कोई लेना-देना नहीं है. बसपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा गया है कि वह दद्दू प्रसाद से कोई संबंध रखें. न ही पार्टी के कार्यक्रमों या बैठकों में बुलाएं.

अपने निष्काषन पर दद्दू प्रसाद ने दलित दस्तक से बात करते हुए कहा कि मैं 28 मार्च 2017 को बसपा को बचाने वापस गया था. बसपा मेरे खून पसीने और श्रम से बनी है. मैं सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के लिए काम करता रहूंगा. बाबासाहेब अम्बेडकर और कांशीराम जी के मिशन के लिए काम करता रहूंगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा के अंदर के लोग पार्टी को बचाना नहीं चाहते हैं और जो पार्टी को आगे बढ़ाना चाहता है, उसे निकाल दिया जा रहा है.

लालू परिवार की फिर बड़ी मुश्किले, दामाद को ED का समन

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नई दिल्ली। आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं. लालू को जेल गए 15 दिन भी पूरे नहीं हुए थे कि उनके दूसरे दामाद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोटिस जारी कर दिया. ईडी ने उन पर पटना की विवादित जमीन को खरीदने के लिए बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 1 करोड़ रुपये का लोन देने को आरोप लगाया है.

इस मामले में आगे की कार्यवाही में ईडी राहुल से जानने की कोशिश करेगी कि राहुल यादव के पास अपनी सास को देने के लिए इतने रूपये कहा से आए. आरोपों के मुताबिक यह मामला मनी लॉंडरिंग का है जिसमें मिस मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्रईवेट लिमिटेड नाम की फर्म का इस्तेमाल किया गया था. आपको बता दें कि इस कंपनी में लालू यादव की बेटी मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार का नाम भी जुड़ा है और ईडी पहले भी इस मामले में इन दोनो से पूछताछ कर चुकी है.

  • संपादन- पीयूष शर्मा

दलित युवक को मिली थी प्यार करने की सजा

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 नासिक। महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले में तीहरे हत्याकांड का मामला सुलझ गया है. नासिक की अदालत ने इस मामले में 6 व्यक्तियों को दोषी करार दिया है. कोर्ट ने सभी अपराधियों को हत्या, सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश,अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराधी धोषित किया है. सजा का ऐलान 18 जनवरी 2018 को विशेष जज आर आर वैश्नव करेंगे. तीनों युवकों के हत्या की वजह उनकी जाति थी. मामला अंतरजातीय प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ था.

मामला 2013 का है, जिसमें 22 वर्षीय सचिन घारू नाम के छात्र के साथ 26 वर्षीय संदीप थनवर और 20 वर्षीय राहुल खंड़रे की हत्या कर दी गई थी. इस छात्र का गुनाह सिर्फ इतना था कि उसे मराठा समुदाय की एक लड़की से प्यार हो गया था. 2015 में संदीप थनवर के छोटे भाई पंकज ने कोर्ट में इस मामले पर दलील की. पंकज ने बताया कि उनको कई बार इस मामले को दबाने के लिए धमकी दी गई. इतना ही नहीं दबाव के चलते उनकी माँ को राज्य छोड़ कर मध्य प्रदेश में जाकर रहना पड़ा. और अब वे न्याय चाहते हैं.

पंकज के वकील उज्जवल निकम के मुताबिक सचिन घारू और उसकी प्रेमिका एक ही संस्थान में साथ पढ़ते थे. इस दौरान उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया लेकिन लड़की के घरवालों को उनका ये रिश्ता मंजूर नहीं था. लड़की के पिता ने अन्य अपराधियों के साथ मिलकर अपनी बेटी के प्रेमी को उसके साथियों संग बहाने से बुलाकर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद उन्होंने थनवर के शव को सड़े हुए नाले में फेक दिया और उसके साथियों के शरीर के टुकड़े कर बोरवेल में डाल दिया था. हालांकि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह तो नहीं था लेकिन कोर्ट ने अन्य सुबूतों और बयानो के मद्देनज़र लड़की के पिता सहित 5 अन्य व्यक्तियों को अपराधी घोषित किया है.

  • रिपोर्ट- पीयूष शर्मा

दलित कार्यकर्ताओं ने फिर की रामदास अठावले की हूटिंग

नागपुर। रामदास अठावले जब से भारतीय जनता पार्टी के साथ आए हैं, अम्बेडकरवादी संगठन से जुड़े कार्यकर्ता उनसे नाराज चल रहे हैं. पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अठावले को विरोध के कारण एक कार्यक्रम से बैरंग वापस लौटना पड़ा था, तो अब उन्हें महाराष्ट्र में विरोध का सामना करना पड़ा है. महाराष्ट्र में मराठावाड़ा यूनिवर्सिटी के नामांतर दिवस की सालगिरह के अवसर पर दलित कार्यकर्ताओं ने अठावले का विरोध किया. अठावले विश्वविद्यालय परिषद में एक समारोह को संबोधित कर रहे थे. इसी दौरान कुछ दलित कार्यकर्ता उनके खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. दरअसल अठावले द्वारा संचालित रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के कर्मियों ने उनके भाषण के लिए एक अलग मंच तैयार किया था, जिससे नाराज़ दलित कार्यकर्ताओं ने विरोध में कुर्सियां उछालनी शुरू कर दी और उनके खिलाफ जमकर नारेबाज़ी करने लगे. हालांकि हंगामे के बावजूद भी अठावले ने अपना भाषण जारी रखा और उनके समर्थक बचाव में उनके चारों तरफ घेरा बनाकर खड़े रहे. इससे पहले गाजियाबाद में भी भाजपा नेता द्वारा संविधान के खिलाफ दिए गए बयान से गुस्साए दलित समाज के युवकों ने एक कार्यक्रम से भाजपा सरकार में मंत्री रामदास अठावले को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था.

तोगड़िया को कौन मारना चाहता है

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नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया घंटों तक लापता रहने के बाद सामने आ गए हैं. सामने आते ही अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तोगड़िया ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया. तोगड़िया ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो लगातार उन्हें डराने की कोशिश कर रही है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोते हुए तोगड़िया ने कई ऐसे दावे किए जो सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करती है. साथ ही उन्होंने राम मंदिर और हिंदुओं की आवाज उठाने के लिए परेशान किए जाने की साजिश का भी आरोप लगाया. तोगड़िया ने कहा कि कुछ समय से मेरी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने इशारों में पीएम मोदी और अमित शाह को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि मुझे डराने का काम गुजरात से शुरू हुआ.

आपबीती सुनाते हुए तोगड़िया ने कहा- “कल (सोमवार) मैं कार्यालय में था और मेरे मोबाइल पर फोन आया कि 16 पुलिस स्टेशन से राजस्थान पुलिस का काफिला आ रहा है और गुजरात पुलिस भी उन्हें सहयोग कर रही है. मैंने राजस्थान की सीएम और गृह मंत्री को फोन किया तो उन्होंने कहा ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जबकि आज सुबह क्राइम के चीफ ने मुझे बताया कि राजस्थान पुलिस ही उनकी गिरफ्तारी के लिए आई थी. राजस्थान की मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और आईजी को पुलिस आने की जानकारी नहीं थी. इसका मतलब ये सब किसके इशारे पर हो रहा है.

पूरे प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हिन्दू नेता प्रवीण तोगड़िया के चेहरे पर मौजूद डर साफ देखा जा सकता था. उन्होंने कहा कि वो समय आने पर सबूतों के साथ इसका खुलासा करेंगे. हालांकि यहां सवाल यह उठ रहा है कि राम मंदिर की वकालत करने वाले एक हिन्दू नेता को हिन्दू राष्ट्र बनाने का दम भरने वाली भाजपा की सरकार में ही जान का खतरा क्यों है?

जन्मदिन पर पहली बार जिग्नेश मेवाणी पर मायावती का बड़ा बयान

 नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमों मायावती का 62वां जन्मदिन आज लखनऊ में धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान लखनऊ में बसपा मुख्यालय में केक काटने के बाद उन्होने अपनी किताब बीएसपी की ब्लू बुक ‘मेरे संघर्षमय जीवन और बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा भाग-13 का विमोचन भी किया. यह पुस्तक हिंदी और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। जन कल्याण में उनका योगदान देखते हुए पार्टी उनका जन्मदिन जन कल्याणकारी दिवस के रुप में मनाती है.

अपने जन्मदिन के अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए मायावती ने कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जी इस बार तो गुजरात में बेघर होने से बच गए लेकिन अब उन्हे सतर्क रहना होगा, कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ही सांप्रदायिकता तथा जातिवाद को बढ़ावा देकर समाज को बांटने का काम कर रही हैं। औऱ बसपा ही एक ऐसी अकेली पार्टी जो बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के रास्ते पर पूरी तरह चलती आ रही है। इतना ही नहीं अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की सराहना करते बहन जी ने कहा कि बसपा ने हमेशा गरीबों, दलित, पिछड़ों के लिए काम किया है औऱ इसके लिए पार्टी कुर्बान होने के लिए हमेशा तैयार रहती है.

इसके साथ ही गुजरात में जिगनेश मेवाणी की जीत पर उन्होने कहा कि एक दलित समाज के व्यक्ति श्री जिग्नेश मेवाणी ने अाज़ाद उम्मीदवार के रूप में जो यह चुनाव जीता है तो यह चुनाव उसने केवल अकेले दलितों के वोटों से नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी व श्री हार्दिक पटेल के समर्थन से ही जीता है और इनकी इस सीट पर कांग्रेस पार्टी ने एक सोची समझी रणनीति के तहत ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार भी खड़ा नहीं किया था. अब यह पार्टी पर्दे के पीछे से फायदे उठाना चाहती है जिससे दलित वर्ग के लोगों को सावधान रहना होगा.

पियूष शर्मा

योगी राज में दलितों को “मैं गाय चोर हूं” की तख्ती पहना कर घुमाया

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बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में एक पंडित के नेतृत्व में 2 दलित युवकों को गाय चोरी के आरोप में पहले उनका सर मुंडवाया गया और फिर उनके गले में “मैं गाय चोर हूँ” की तख्ती टांगकर गाँव में भर में घुमाया और पीटा गया. ये घटना सुबह 5 बजे की है, जब स्थानीय पंडित ने दलित युवकों उमा और सोनू को दो बछड़े ले जाते हुए देखा. पंडित ने तुरंत ही गाँव वालों इकठ्ठा कर लिया. इसके बाद सबने मिलकर दोनों दलित युवकों को जमकर पीटा और उनका सर भी मुंडवा दिया.

गाँव वालो की क्रूरता यहीं नहीं रुकी, इसके बाद दोनों युवकों को “मैं गाय चोर हूँ” की तख्ती टांगकर गाँव भर में घुमाया गया और इस पूरे वाकये का विडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी करा गया. दोनों युवकों के खिलाफ गाय चोरी का मामला दर्ज़ करवाया गया और गिरफ्तार भी कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक गाज़ीपुर की सड़क पर हुई इस घटना में 15 लोगों के खिलाफ SC/ST Act के अंतर्गत मामला दर्ज़ हुआ है जिनकी तलाश जारी है .

इनमें से एक युवक के पिता सुभाष राम ने बताया कि वो अपने रिश्देतार के यहां जा रहे थे. मठ के आदमियों ने उन्हें पकड़ा और पीट दिया. पुलिस ने वहां पहुंचकर दोनों को भीड़ के हाथों से बचाया. मठ के लोगों ने हमारी जात पूछी और जब उन्हें पता चला कि हम दलित हैं तो फिर बुरी तरह पीटा और हमारे पैसे, मोबाइल और अन्य सामान को छीन लिया.

अमेठी में लगे मोदी विरोधी पोस्टर, बताया ‘रावण’

अमेठी। राहुल गांधी के दो दिवसीय अमेठी दौरे से एक दिन पहले पीएम मोदी का एक विवादित पोस्टर सामने आया है. इस पोस्टर में राहुल गाँधी को ‘भगवान राम’ और पीएम मोदी को ‘रावण’ दिखाया गया है. यह पोस्टर राहुल गाँधी के दौरे से ठीक पहले गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर लगा हुआ दिखाई दिया.

इस पोस्टर में राहुल गांधी हाथों में तीर-कमान लिए पीएम मोदी पर निशाना साधे खड़े हैं, वहीं देश के प्रधानमंत्री मोदी को दस सिर वाला रावण बनाया गया है. पोस्टर पर लिखा है, ‘’राहुल के रूप में भगवान राम का अवतार. 2019 में आएगा राहुल राज (रामराज)’’. अपने अध्यक्ष के दौरे से अति उत्साहित कांग्रेसी कार्यकर्ता इस तरह के पोस्टर लगाकर राहुल गांधी का स्वागत कर रहे हैं.

जिले के कांग्रेसी दौरे को विराट बनाने में लगे हुए हैं.  वहां वे एक रोड शो भी करने वाले हैं. उनका क़ाफ़िला शहर में सात प्रमुख जगहों पर रुकेगा. वरिष्ठ कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह ने बताया कि अमेठी से पहले राहुल गांधी रायबरेली भी जाएंगे. अपनी मां सोनिया गांधी के इस संसदीय क्षेत्र में वे कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. यहां वे सालोन में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे.  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह पोस्टर अभय शुक्ला नामक एक स्थानीय निवासी ने लगाया है.

शुक्ला का कहना है कि ‘पीएम ने हम लोगों से विदेश में जमा काले धन को वापस लाने का वादा किया था जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ. उन्होंने किए सारे वादे झूठे साबित हुए। हमें भरोसा है कि राहुल गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. वे सभी वादे पूरे करेंगे’.

गन्धर्व गुलाटी

सीएम योगी ने दी मायावती को जन्मदिन पर बधाई, विपक्ष को दे डाली यह सलाह

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गोरखपुर: मकर संक्राति के मौके पर गोरखपुर के गोरक्षनाथ पीठ में महंत की भूमिका निभा रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी नेता राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव को सकारात्मक राजनीति करने की सलाह दी। साथ ही उन्होने बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती को उनके 62वें जन्मदिन पर बधाई दी. विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर मैं विपक्ष को यह सलाह देना चाहता हूं कि वे सुख संकल्प के साथ सकरात्मक राजनीति करें, अगर उन्होने ऐसा नहीं किया तो आने वाले समय में उनको खुद जनता बेनकाब करेगी. इतना ही नहीं राहुल गांधी के दो दिवसिय अमेठी दौरे पर भी तंज कसते हुए उन्होने कहा कि कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद आज पहली बार राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में आ रहे हैं और मैं उन्हे सलाह दुंगा कि वे बड़ी-बड़ी बातें छोड़कर पहले अपने संसदीय क्षेत्र के विकास पर ध्यान दें. भगवा रंग पर सियासत करने के अलावा विपक्ष के पास कोई और काम नहीं है. इसी दौरान योगी आदित्यनाथ ने आज बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को उनके जन्मदिन की बधाई भी दी और साथ ही यह भी कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि प्रदेश के विकास के लिए वह बसपा के अंदर एक सकारात्मक रवैया अपनाएगीं।   पीयूष शर्मा