तो इस बात पर लालू ने बीजेपी को दिए 100 में से 100 अंक

पटना। आरजेडी सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव यूं तो इस वक्त जेल में सज़ा काट रहें हैं लेकिन उनके आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर समय समय पर ट्विट्स देखने को मिलते रहते हैं. जेल में होने के बावजूद भी वे सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूकते, इस बार फिर बजट पेश होते ही लालू ने ट्वीटर के ज़रिए भाजपा सरकार को सवालों के कठधरे में खड़ा कर दिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बजट पेश करने के बाद सरकार पर तंज कसते हुए लालू यादव ने ट्विट किया ‘जैसे हरिद्वार से बंगाल की खाड़ी तक गंगा मैया क्लीन होकर अविरल हो गईं, जैसे देश में 100 स्मार्ट सिटी बनकर तैयार है, 15 लाख रुपये मिल गए, वैसे ही किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी, वैसे ही गरीबों को मेडिक्लेम मिलेगा।’ ट्विट के साथ ही लालू ने भाजपाइयों को झूठ बोलने के लिए 100 में से 100 अंक दे डाले. लालू के इन तीखे सवालों से साफ है कि वह विरोधियों पर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ते. हाल ही में पेश हुए बजट में 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर लालू ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने वर्तमान सरकार को बहुमत 2019 तक दिया है ना कि 2022 तक, सरकार इसका रोडमैप दे. केवल हवाई बातों और मुंह जुबानी खर्च से आय दोगुनी हो जायेगी क्या?

पियूष शर्मा  

सिद्धारमैया ने दिया पीएम मोदी को भ्रष्टाचार पर चर्चा का चैलेंज

कर्नाटक। इस साल कर्नाटक में होने वाले चुनाव कि तैयारी में भाजपा सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है. इसके चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कर्नाटक में रैली की थी. रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने बहुत लूट मचाई है, अब कर्नाटक में बीजेपी की सरकार राज्य के विकास को21वीं सदी में ले जाएगी और सबकी जिंदगी को आसान बनाएगी.

उनके इस भाषण पर पलटवार करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने ट्वीट के ज़रिए पीएम मोदी को वॉक द टॉल्क (चलते चलते बातचीत) करने के लिए निमंत्रण दिया. उन्होने ट्वीट किया वह खुश हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार पर बात कर रहे हैं. मैं उन्हें वॉक द टॉल्क (चलते चलते बातचीत) करने के लिए निमंत्रण देना चाहूंगा. शुरुआती मुद्दे कुछ इस तरह हो सकते हैं:

1.लोकपाल की नियुक्तिब 2.दूसरा, जज लोया केस की जांच 3.तीसरा, जय शाह की संपत्तिं अचानक बढ़ जाना 4. आपकी पार्टी की तरफ से बेदाग चेहरे को सीएम पद का उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया पर चर्चा की जा सकती है.

उनकी नाराज़गी इतने पर ही खत्म नहीं हुई, पीएम मोदी के इस भाषण की निंदा करते हुए सिद्दारमैया ने यह भी कहा कि “देश के प्रधानमंत्री होने के नाते आपके शब्दों में विश्वसनीयता होनी चाहिए, इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इन आरोपों को सिद्ध करें. क्यों न हम ये चुनाव राजनैतिक गरिमा को बचाने और तथ्यों के आधार पर लड़ें”.

पियूष शर्मा

क्या भारत बिटकोइन पर पूर्ण नियंत्रण कर पायेगा

पूरी दुनिया में जो भी मुद्रा है उस पर किसी ना किसी सरकार का उस पर नियंत्रण होता है पर बिटकोइन ऐसी मुद्रा है जिस पर किसी भी सरकार का नियंत्रण नही है.

बिट कोइन एक क्रिप्टोकरेंसी है जो पैसे के आसानी से लेन देन में सहूलियत देता है. इसका प्रयोग पैसे भेजने के लिए वैलेट एप का इस्तेमाल किया जाता है.

आप को जो भी रूपया भेजना है वो वैलेट एप में टाइप कीजिए जिसको भेजना है उसका अकाउंट नंबर टाइप करिए और उसे पैसे भेज दिए जायेंगे यानि बिटकोइन भेज दिए जायेंगे.बाद में वह व्यक्ति उस बिट कोइन को अपनी मुद्रा में बदल सकता है. एक बिटकोइन 13000 डालर के बराबर होता है.

बिटकोइन नेटवर्क में दो KEY होती है एक प्राइवेट KEY होती है और एक पब्लिक KEY होती है जो निजता को बना कर रखती है.

बिटकोइन एक डिजिटल करेंसी है जो किसी बैंक या सरकार से जुडी हुई नही होती है.जैसे हमारा भारतीय रुपया भारतीय रिज़र्व बैंक से जुडा हुआ है जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक विनियमित करता है. बिटकोइन, सरकार या बैंक से ना जुडी होने कि वजह से कोई भी गुपचुप तरीके से बिना कर दिए हुए पैसा खर्च कर सकता है.

बिटकोइन कैश का ऑनलाइन संस्करण है जिससे आप बहुत सी वस्तुयें खरीद सकते है जैसे हार्डवेयर के सामान ,पेंट ,कुछ खाने कि वस्तुयें. पर यह ज्यादा अभी भारत में प्रचलित नही है जिससे हर जगह इस तरह की दुकानों की उपलब्धता मुश्किल है.

बिटकोइन नेट्वर्क को कोई भी संस्था अपने नियंत्रण में नही रखती है बिटकोइन नेटवर्क से कोई भी जुड़ सकता है. बिटकोइन से जितने भी लेन देन अब तक हुए है वो सारे PUBLIC LEDGER में जमा है. PUBLIC LEDGER की साइज़ 107 GB (गीगाबाइट) होती है इस PUBLIC LEDGER में सिर्फ खाताधारक का नंबर व कितने बिटकोइन का लेन देन हुआ ही रिकॉर्ड में रहता है.

1 नवम्बर 2008 को एक ऑनलाइन फोरम था जिस पर लोग बात कर रहे थे एक डिजिटल करेंसी के बारे में तभी वहां सातोशी नाकामोटो नाम का एक यूजर आता है. जो लोगों के सामने एक प्लान बताया की हम लोग एक डिजिटल करेंसी बनाते है बिटकोइन के नाम से. सातोशी नाकामोटो नाम का कोई व्यक्ति है या नही कहाँ का था कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है.

बिटकोइन कि खोज करने के बाद सातोशी नाकामोटो सिर्फ एक साल तक ही ईमेल का जवाब दिए उसके बाद उन्होंने इसका जवाब देना बंद कर दिए.

असली पैसे को बिटकोइन से खरीदा जा सकता है.चूँकि पहले से ही हम लोग रूपये के जगह सोना चांदी का प्रयोग लेन देन में करते आ रहे है. जैसे अमेरिका में पहले AZTECKS कोकाबिन (COCOA BEANS ) का प्रयोग करते थे. हाल ही में बिटकोइन का महत्व 60% तक बढ़ गयी है. इन दिनों ज्यादातर देश इसका प्रयोग कर रहे है जल्दी और सस्ती लेन देन के लिए.

जापान ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मुद्रा मान ली है. रूस भी कानूनी मुद्रा घोषित करने पर विचार कर रहा है. जापान इस समय दुनिया का सबसे बड़ा बिटकोइन बाजार बन चुका है. अभी हाल ही में हम लोगों ने सुना था की रैमसमवेयर(RANSOMWARE) नामक वायरस ने दुनिया भर के कम्पूटर को हैक कर लिया था और लोगो से फिरौती मांग रहे थे और वो सारी फिरौती बिटकोइन में मांग रहे थे क्योंकि बिटकोइन में फिरौती मांगने वाले को पकड़ना मुश्किल है.

बिटकोइन के प्रयोग के फायदे भी बहुत है अगर आप को दुनिया में कहीं भी जल्दी से जल्दी पैसा पहुँचाना है तो सस्ते और आसानी से बिटकोइन के द्वारा संभव है.

बिटकोइन के प्रयोग के नुकसान भी है चूँकि ज्ञात है की भारत में 90% इंटरनेट यूजर को बिटकोइन के प्रयोग के बारे में पता ही नही है ,बिटकोइन कभी भी घट बढ़ सकता है , 21 मिलियन से ज्यादा बिटकोइन नही हो सकते. गूगल के पूर्व सीईओ ERIC SCHMIDT ने कहा “बिटकोइन एक असाधारण क्रिप्टोग्राफिक उपलब्धि है यह एक अच्छी चीज है जो दुनिया को अच्छा प्रभाव देगी”.

PAYPAL के सह संस्थापक पीटर थिएल ने कहा “ बिटकोइन दुनिया को बदल सकता है”. अभी हाल में क्या हुआ की भारत ने उन लोगो को नोटिस भेज दिया जो लोग क्रिप्टोकरेंसी में व्यापार कर रहे थे और कर नही दे रहे थे.

आज के समय भारत में क्रिप्टोकरेंसी की व्यापार दर 3.5 मिलियन पहुँच गई है. इसका प्रयोग कंप्यूटर जानकार युवा निवेशक, रियल इस्टेट व्यवसायी ,सोना व्यवसायी कर रहे हैं व जिसके पास पैसे है वो लोग बिटकोइन और आभासी मुद्रा (VIRTUAL CURRENCY ) का प्रयोग बड़े धलल्ले से कर रहे है.

भारत में सबसे ज्यादा बिटकोइन का प्रयोग मुंबई ,दिल्ली ,बेंगलोर , पुणे जैसे बड़े शहरों में काफी बढ़ गया है.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने कई बार इस प्रकार के लेन देन करने वाले निवेशकों को हिदायत दी थी.वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तो यहाँ तक कह दिया की बिटकोइन भारत में लीगल टेंडर नही है आप यहाँ निवेश मत करिए यहाँ आपको नुकशान हो सकता है. भारत में हर महीने बिटकोइन का प्रयोग करने वाले करीब 2000 यूजर बढ़ रहे हैं.

आयकर अधिनियम 1961 की धारा 55 जो कहता है की स्व उत्पन्न CAPITAL ASSESTS पर कर नही लगेगा पर वह बिटकोइन अगर खरीददारी में प्रयोग में लाया गया तो कर देना पड़ेगा. इस तरीके की बड़ी लेनदेन करने पर 20% तक कर चुकाना पड़ता है.

आजकल जिसके भी पास बेहिसाब पैसा(BLACK MONEY) है वे लोग बिटकोइन के प्रयोग की तरफ काफी तेजी से बढ़ रहे है इसलिये आज की तारीख में बहुत जरूरी हो गया था इस पर पाबंदी लगाना. जो भी भारत की खुफिया विभाग हैं वो सब पहले ही पाबंदी लगाने के लिए कह चुकी थी. खुफिया विभाग का मानना है की अपहरण/व्यपहरण जैसी घटनाएँ बढ़ सकती हैं. इससे और भी अपराध बढ़ सकते हैं जिससे राष्ट्रिय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.

जो भी भारत के आपराधिक सिंडीकेट ,नशीली दवावों के तस्कर ,कर चोर हैं इससे आसानी से रुपये को बिटकोइन में बदल सकते हैं.

भारत के लोग भी इस तरीके के क्रियायों में आगे बढ़ रहें है क्योंकि डिजिटल पैसे पर टैक्स छापे मारना मुश्किल है. आज भारत दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी के प्रयोग में 19 वें स्थान पर है.

ZEBPAY जो भारत का सबसे बड़ा बिटकोइन लेन देन का फोरम है उसके रिपोर्ट के अनुसार 2017 में एक लाख से बढ़ कर पांच लाख तक इसके यूजर हो गये हैं.

अमेरिका ने बिटकोइन के प्रयोग को कानूनी बना दिया है और वहां कि सरकार इस तरीके के व्यापार और निवेशकों पर कर लगाने पर विचार कर रही है.

कनाडा ने भी बिटकोइन के प्रयोग को कानूनी मान्यता दे दी है, ऑस्ट्रेलिया ने भी काफी हद तक बिटकोइन को मान्यता दे दी है और कानूनी रूप भी दे दिया है.

लगभग पूरे यूरोप में जैसे बेल्जियम ,साइप्रस ,यूके ,स्विट्ज़रलैंड ,इटली ,नीदरलैंड ,फ्रांस सारे देश बिटकोइन को कानूनी रूप दे दिया गया है.सिंगापुर में भी बिटकोइन कानूनी है, जापान ने भी बिटकोइन को कानूनी कर दिया है यहाँ की सरकार ने बिटकोइन को डिजिटल मुद्रा मान ली है और यहाँ के लोग बढ़ चढ़ कर निवेश कर रहे हैं. इसराइल ने भी बिटकोइन को कानूनी मान्यता दे दी है.

रूस ने अभी कानूनी मान्यता नही दी है उसे लग रहा है उसकी मुद्रा रूबल को प्रभावित करने के लिए बिटकोइन मुद्रा अमेरिका की साजिश हो सकती है. रूस ने एक क्रिप्टो सिक्का बना दिया है और इसे अपने देश में लागू कर दिया है. जो आगे चल कर भारत भी कर सकता है पूरी तरीके से नियन्त्रण के लिए.जो उस मुद्रा को भारत सरकार विनियमित करेगी.जिसमे काफी नियम और विनियमन होंगे जो लोगों को निवेश करने के लिए आकर्षित करेंगे.

जैसा की हम लोग जानते हैं की बांग्लादेश और नेपाल ने बिटकोइन को बैन कर रखा है पर आज भी बांग्लादेश और नेपाल के लोग बिटकोइन से व्यापार कर रहे हैं उसको पूरी तरीके से नियन्त्रण में नही कर पा रहे हैं.

भारत ने भी इसी की तर्ज़ पर बिटकोइन को बैन कर दिया है अब देखना यह है की क्या भारत इस पर पूर्ण नियन्त्रण रख पायेगा या बांग्लादेश और नेपाल की तरह ही इसका भी नियन्त्रण इस पर संभव नही हो पायेगा.अगर पूर्ण नियन्त्रण कर पाता है तो यह फैसला आपराधिक सिंडीकेट, नशीली दवावों के तस्कर, कर लुटेरों पर जोरदार हमला साबित होगा.

चीनी Box Office की नंबर वन फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार

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मुंबई। आमिर खान फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार ने चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर अब बड़ा तहलका करने जा रही है. फिल्म ने अपनी जबरदस्त कमाई का सिलसिला जारी रखा है और अब कलेक्शन 100 मिलियन डॉलर से बस कुछ ही दूर हैं.

चीन की बाहुबली यानि बॉक्स ऑफ़िस पर नंबर वन के स्थान पर जा बैठी अद्वैत चंदन निर्देशित इस फिल्म ने चीन में अपनी रिलीज़ के 17वें दिन 11.63 मिलियन डॉलर यानि 74 करोड़ 97 लाख रूपये का कलेक्शन किया. आमिर खान प्रोडक्शन में बनी ज़ायरा वसीम स्टारर फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार अब तक चीन में 91.29 मिलियन डॉलर यानि 584 करोड़ 60 लाख रूपये का कलेक्शन कर चुकी है और जिस रफ़्तार से चल रही है फिल्म को 100 मिलियन डॉलर तक पहुंचने में एक दो दिन और लगेंगे. वैसे आपको बता दें कि फिल्म के कलेक्शन की रफ़्तार थोड़ी गिरी है क्योंकि वहां के बॉक्स ऑफ़िस पर अब चीन की अपनी फिल्म ‘Till the End of the World’ रिलीज़ हुई हैl वैसे सीक्रेट सुपरस्टार का आमिर खान की पिछली फिल्म दंगल के चीनी बॉक्स ऑफ़िस के कलेक्शन तक पहुंचना मुश्किल होगा. दंगल ने 17 दिनों में 125. 39 मिलियन डॉलर यानि 804 करोड़ 31 लाख रूपये का कलेक्शन किया था. हाल के दिनों में चीन के बॉक्स ऑफ़िस पर रिलीज़ दुनिया की कई बेहतरीन फिल्मों को पटखनी दे कर आमिर खान की सीक्रेट सुपरस्टार पहले ही नंबर वन का स्थान हासिल कर चुकी है.

सीक्रेट सुपरस्टार एक ऐसी लड़की की इमोशनल कहानी है जो अपने भीतर के गायकी के हुनर को दुनिया के सामने लाना चाहती है लेकिन उसके पिता, समाज के डर से उसे ऐसा करने से रोकते हैं. बाद में वो इंटरनेट पर वीडियो डाल कर फेमस हो जाती है. और इसी कारण फिल्म चीन वालों के दिल को छू गई.

दिल्ली के कार्यकर्ता सम्मेलन में दो बातें कहने से चूक गईं मायावती

बहुजन समाज पार्टी की दिल्ली यूनिट की ओर से 4 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में प्रदेश स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यकर्ता सम्मेलन को बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने संबोधित किया. इस दौरान मायावती ने तमाम मुद्दों पर दिल्ली के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इसमें हर बार की तरह मायावती ने बाबासाहेब और मान्यवर कांशीराम के सपने और राजनीति का जिक्र किया. साथ ही राज्यसभा से इस्तीफा देने के कारणों को लेकर एक बार फिर चर्चा की.

कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान बसपा प्रमुख मायावती ने खास कर तीन नई बातें कहीं. उन्होंने पहली बार विपक्षी दलों में मौजूद दलित नेताओं पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाजपा में बैठे दलित और ओबीसी नेता असल में बंधुआ मजदूर हैं. दलित ओबीसी नेताओं पर तंज कसते हुए मायावती ने कहा कि विरोधी पार्टियां दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के नेताओं को भले ही कितना भी महत्पूर्ण पद क्यों न दे दें वो वहां बंधुआ मजदूर ही रहेंगे.

जो दूसरी बात है, वह यह रही कि मायावती ने दिल्ली के उपचुनाव को लड़ने की घोषणा की, जिसका सभी कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया. आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद दिल्ली में उपचुनाव की संभावना तेज हो गई है. ऐसे में आमतौर पर उप चुनावों से दूर रहने वाली बसपा की मुखिया मायावती ने कहा कि वह इस उपचुनाव में अपने कैंडिडेट उतारेंगी. इस कार्यकर्ता सम्मेलन की तीसरी महत्वपूर्ण बात यह रही कि बसपा प्रमुख ने अपने उपर पैसे लेने के इल्जाम को फिर से नकारा. उन्होंने विस्तार से यह बताया कि आखिर बसपा कार्यकर्ताओं से पैसे क्यों लेती है.

हालांकि इस कार्यकर्ता सम्मेलन में दो और बातें कही जा सकती थी. लगभग एक घंटे के भाषण में मायावती ने 25वें मिनट में बजट पर चर्चा की. हालांकि वो बजट को लेकर सरकार को घेरने से चूक गईं. बजट में दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के हक को लेकर वह सरकार को घेर सकती थीं. तो वहीं सम्मेलन में बहुजन समाज के तमाम युवा मौजूद थे. बसपा प्रमुख ने एक बार भी उन युवाओं को सीधे संबोधित नहीं किया. अगर वो युवाओं का आवाह्न करतीं तो जाहिर सी बात है कि इससे एक बड़ा मैसेज जाता और युवा वहां से ऊर्जा लेकर जातें.

 

अमित शाह ने राज्यसभा में दिया पहला भाषण, देखिए क्या कहा

amit-shahनई दिल्ली। हाल ही में राज्यसभा पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना पहला भाषण दिया. अपने पहले भाषण में शाह ने एनडीए सरकार की उपल्ब्धि गिनाई और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्हों ने माना कि बेरोजगारी है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि 55 साल कांग्रेस ने शासन किया. हम पिछले आठ साल से सत्ता में हैं.

इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के पकौड़े वाले बयान का भी बचाव किया. शाह ने कहा, “ कोई व्यक्ति मेहनत करके, पकोड़े बेचकर कोई रोजगार करता है,क्या हम उसकी तुलना भिखारी से करेंगे.” उन्हों ने कहा कि देश की जनता ने कांग्रेस को हराया है. आजादी के बाद पहली बार किसी गैर कांग्रेसी दल को पूर्ण बहुमत मिला. अपने पूरे भाषण के दौरान शाह एनडीए सरकार की उपलब्धियों को गिनवाते रहें.

 

‘उनको जवाब नहीं देंगे तो विश्व भर में नामर्द कहलाएंगे’

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नई दिल्ली। पाकिस्तान की तरफ से बार-बार हो रही गोलीबारी और सीज फायर के उल्लंघन को लेकर केंद्र सरकार विपक्ष के निशाने पर है. महाराष्ट्र में भाजपा की प्रमुख सहयोगी पार्टी शिवसेना के नेता अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं. खासकर हिन्दुत्व और पाकिस्तान को लेकर वो काफी कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. रविवार को भारत के एक कैप्टन सहित 4 जवानों के शहीद होने पर शिवसेना ने बड़ा बयान दिया है.

शिवसेना ने पाकिस्तान की कार्रवाई को युद्ध बताया है। एएनआई के अनुसार शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा “सीज़फायर उल्लंघन की बात छोड़ दीजिए, यह सीधा युद्ध है, यह हमला है और उसका जवाब उसके तरीके से देना चाहिए. अगर आप उसका जवाब नहीं देंगे तो इस देश को पूरे विश्व में नामर्द कहा जाएगा. रविवार को पाकिस्तान ने हमारे जवानों पर हमला करने के लिए मिसाइल्स का इस्तेमाल किया. क्या हमारी मिसाइल केवल राजपथ की शोभा बढ़ाने और प्रदर्शनी के लिए रखी हुई हैं. क्या वे केवल 26 जनवरी को विदेशी प्रमुखों को दिखाने के लिए रखी गई हैं.”

कौन नहीं चाहता कासगंज में सब सामान्य हो जाए

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कासगंज। सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहे उत्तर प्रदेश के कासगंज में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो ही रही थी, लेकिन सोमवार 5 फरवरी को एक बार फिर से माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आज यहां गंजडुंडवारा कस्बे में एक धार्मिक स्थल का दरवाजे जला मिला, जिसके बाद भीड़ इकट्ठी हो गई. जानकारी के मुताबिक, सुबह पांच बजे गंजडूंडवारा कस्बे में स्थित धार्मिक स्थल के लकड़ी के दरवाजे में आग लगने की खबर मिली. आनन-फानन में पुहंची पुलिस ने आग को बुझाया. घटना की सूचना मिलते ही डीएम, एसपी और कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया. घटना के बाद इलाके में ऐहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती कर दी गई है. बता दें कि कासगंज में गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा यात्रा निकालने को लेकर हुए विवाद के बाद हिंसा में चंदन गुप्ता नाम के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद वहां के हालात बिगड़ते चले गए. हर दूसरे दिन जैसे ही लग रहा है कि स्थिति सामान्य है, वहां कुछ न कुछ घटित हो जा रहा है. सवाल है कि आखिर वो कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि कासगंज में हालात बिगड़े.  

मोहल्ले से शवयात्रा निकलने पर जातिवादियों ने मृत महिला के बेटे को पीटा

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सांकेतिक तस्वीर 

पंचमहल (गुजरात)। गुजरात में जातिवादियों के हौंसले लगातार बुलंद हैं. लेकिन वहां पिछले कई सालों से मौजूद सरकार उनको रोक नहीं पा रही है. ताजा मामला गुजरात के पंचमहल जिले का है, जहां पर जातिवादियों ने दलित समाज की एक महिला की शवयात्रा को रोक दिया और उसके बेटे के साथ मारपीट की. यह मामला पिंगली गांव का है.

दिनेश सोलंकी द्वारा कालोल पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, दिनेश की मां गंगा का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया था। शनिवार की सुबह गंगा के परिजन उसके शव को लेकर दरबार समुदाय के प्रभुत्व वाले इलाके से गुजर रहे थे कि तभी जातिवादियों के कुछ लोगों ने उनका रास्ता रोक दिया. उन्होंने शव यात्रा को वहां से निकलने नहीं दिया. इसे लेकर दोनों पक्षों के बीच बहसबाजी हुई और जातिवादी गुंडों ने दिनेश की पिटाई कर दी, जिसके बाद इसकी शिकायत पुलिस से की गई. सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और पुलिस की मौजदगी में मृतक महिला का अंतिम संस्कार कराया गया. फिलहाल पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आईपीसी के प्रावधानों के तहत 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है.

दिल्ली उपचुनावों के बारे में मायावती की बड़ी घोषणा

नई दिल्ली। आमतौर पर उप चुनावों से दूर रहने वाली बहुजन समाज पार्टी दिल्ली के उप चुनाव लड़ेगी. यह घोषणा बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने दिल्ली में आज कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान किया. मायावती ने कहा कि बसपा उप चुनाव नहीं लड़ती है लेकिन दिल्ली में 20 विधानसभा सीटों पर विधायकों के अयोग्य होने की स्थिति में होने वाले चुनाव में बसपा उप चुनाव लड़ेगी.

दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है. ऐसे में होने वाले उप चुनाव में पार्टी चुनाव मैदान में उतरेगी. इस दौरान मायावती ने चुनाव होने वाले विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं और नेताओं को तैयार रहने की अपील की. मायावती की इस घोषणा का बसपा कार्यकर्ताओं ने जमकर स्वागत किया.

अंडर 19 वर्ल्डकपः भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर किया विश्वकप पर कब्जा

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नई दिल्ली। अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हरा कर भारत ने चौथी बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया.इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान जेसन सांघा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया. भारतीय गेंदबाज़ों के दमदार प्रदर्शन के चलते ऑस्ट्रेलिया की टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सकी और 47.2 ओवर में ही 216 रन पर सिमट गई. 217 रन की चुनौती का पीछा करते हुए भारत ने 38.5 ओवर में सिर्फ 02 विकेट खोकर ही लक्ष्य को हांसिल कर लिया

भारत ने सधी हुई गेंदबाजी करते हुए सब से पहले को ब्रयांट 14 रन के निजी स्कोर पर तेज़़ गेंदबाज़ ईशान पोरेल की गेंद पर अभिषेक शर्मा के हाथों कैच आउट किया. इसके बाद दूसरे सलामी बल्लेबाज एडवर्ड भी 28 रन के निजी स्कोर पर पोरेल का शिकार बने. तीसरा विकेट कप्तान जेसन सांघा (13 रन) का गिरा, जिन्हें नागरकोटी की गेंद पर देसाई ने कैच आउट किया. इसके बाद जे. मर्लो और पी. उप्पल ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन उप्पल 34 रन के स्कोर पर रॉय की गेंद पर उन्हीं को कैच दे बैठे. 23 रन बनाकर मैकस्वीनी स्पिनर शिवा के हाथों कॉट एंड बोल्ड आउट हो गए और भारत को मिली पांचवीं सफलता. इसके बाद अपने अगले ओवर में शिवा ने विकेटकीपर देसाई के हाथों कैच आउट करवा कर विल सदरलैंड को पवेलियन भेज दिया. इसके बाद 76 रन पर खेल रहे मर्लो ने रॉय की गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की, लेकिन गेंद गई शिवा सिंह के हाथों में और भारत को मिली सातवीं सफलता. अगले ही ओवर की पहली ही गेंद पर नगरकोटी ने इवांस (01) को बोल्ड कर दिया. 13 रन पर खेल रहे होल्ट रन आउट हो गए और भारत को मिली नौवीं सफलता. शिवम मावी ने रेयान हेडली (01) को विकेटकीपर देसाई के हाथों कैच आउट करवाकर कंगारुओं की पारी को समेट दिया.

217 रन की चुनौती का पीछा करते हुए, भारतीय ओपनर पृथ्वी शॉ और मनजोत कालरा ने अपनी टीम को अच्छी शुरुआत देते हुए मात्र  11.4 ओवरों में 71 बनाए, पृथ्वी शॉ के रूप में भारत का पहला विकेट गिरा जिन्होंने ने अपनी 29 रनो की पारी में 41 गेंदें  खेली और 4 चौके लगाए। भारत का दूसरा विकेट शुभम गिल के रूप में गिरा जिन्होंने 30 गेंदों का सामना कर 4 चौकों की सहायता से 31 रन बनाए, भारतीय ओपनर नवजोत कालरा ने नाबाद रहते हुए 102 गेंदों ने 8 चौकों और 3 छक्कों की सहायता  से 101 रन बनाए और वहीँ हार्विक देसाई ने विजयी चौका जड़ते हुए 61 गेंदों में 5 चौकों की सहायता से नाबाद 47 रनो की पारी खेली

हम आपको यह भी बताना चाहते है के विश्व क्रिकेट ये चौथा मौका रहा जब भारतीय टीम ने अंडर 19 विश्व कप की ट्रॉफी उठाई. भारतीय टीम अब इस खिताब को सबसे ज़्यादा बार जीतने वाली टीम भी बन गई है. 2018 से पहले भारत ने मुहम्मद कैफ (2002), विराट कोहली (2008) और उन्मुक्त चंद (2012) की कप्तानी मे ये खिताब अपने नाम किया था. भारत क बाद सबसे ज़्यादा बार अंडर 19 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया की टीम ने जीता है. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने तीन बार इस ट्रॉफी को उठाया है. ऑस्ट्रेलिया ने 1988, 2002 और 2010 में विश्व कप खिताब जीता था.

अंडर 19 विश्व कप के इतिहास में टीम इंडिया सबसे ज़्यादा फाइनल खेलने वाली टीम बन गई है. भारतीय टीम ने 6 बार अंडर 19 विश्व कप का फाइनल खेला है. 2002, 2006, 2008, 2012, 2016 और 2018 में इस टूर्नामेंट के फाइनल तक का सफर तय किया है. भारत ने 2000, 2008, 2012 और 2018 में ये खिताब अपने नाम किया. 2006 और 2016 में टीम इंडिया फाइनल में तो पहुंची थी, लेकिन वो इस ट्रॉफी को नहीं उठा पाई थी. भारत को बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा बार खिताबी मुकाबले खेले हैं. इन दोनों टीमों ने पांच-पांच बार अंडर 19 विश्व कप फाइनल में शिरकत की है.

 

यूपी के डीजी ने कहा, मंदिर वहीं बनाएंगे

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लखनऊ। यूपी के डीजी होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने अयोध्या में राममंदिर बनाने की शपथ ली है. एक अधिकारी के द्वारा राम मंदिर बनवाने के लिए शपथ लेने की घटना सामने आने के बाद सरकार और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. उनके इस बयान की केंद्रीय और यूपी की आईपीएस असोसिएशन ने निंदा की है.

शुक्ला 1982 बैच के आईपीएस अफसर हैं और अगस्त, 2018 में रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी होने के बावजूद उन्होंने यह शपथ सार्वजनिक रूप से क्यों ली? लोग कह रहे हैं कि कहीं रिटायरमेंट के बाद डॉ. सूर्य कुमार राजनीति की तैयारी तो नहीं कर रहे हैं? राम मंदिर के संकल्प को उनके राजनीति में संभावित एंट्री से भी जोड़ा जा रहा है.

डीजी (फायर सर्विस) प्रवीण सिंह के बाद वह सबसे वरिष्ठ अफसर हैं. तीन साल से डीजीपी की कुर्सी के लिए उनका नाम चर्चाओं में रहा. कुछ दिन पहले भी जब डीजीपी ओपी सिंह के केंद्र से रिलीव होने में अड़चने आईं थीं, तब भी सूर्य कुमार शुक्ला का नाम काफी चर्चा में आ गया था, लेकिन उन्हें फिर निराशा ही हाथ लगी.

 

दलित प्रोफेसर पर कमेंट पर एबीवीपी छात्र निष्कासित

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हैदराबाद। हैदराबाद विश्वविद्यालय ने पीएचडी के एक छात्र को सोशल मीडिया पर एक दलित प्रोफेसर के खिलाफ अपशब्द कहने पर एक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है. विश्वविद्यालय ने गुरुवार को कालूराम पल्सानिया को निष्कासित करने के आदेश जारी किया. पल्सानिया इतिहास विभाग का शोध छात्र था, साथ ही आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का नेता भी है. प्रोफेसर द्वारा सेमेस्टर परीक्षा में ‘शिक्षा के भगवाकरण’ के मुद्दे पर एक प्रश्न बनाने पर पल्सानिया ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक शब्द लिखे थे. इसके बाद विश्वविद्यालय ने सात सदस्यीय बोर्ड बनाया था. इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अलावा एक सेवानिवृत न्यायाधीश व एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. जांच के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी कर कहा- “विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्र को सोशल मीडिया पर अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के. लक्ष्मीनारायण को अपशब्द बोलने का दोषी पाया.” बोर्ड ने छात्र पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. पल्सानिया ने पिछले नवंबर में सोशल मीडिया पर लक्ष्मीनारायण पर आरोप लगाया था कि ‘वह केवल अपनी ब्लैकमेल करने वाली चालों की मदद से प्रोफेसर बने हैं.’यह पोस्ट बीते महीने चर्चा में आई और इसके बाद परिसर में तनाव फैल गया था. इसके बाद अंबेडकर छात्र समिति और अन्य दलित संगठनों ने पल्सानिया के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की थी. दलित छात्र रोहित वेमुला की द्वितीय पुण्यतिथि पर इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है.

 

करण कुमार

बीजेपी को तीन तलाक देने वाला पहला राज्य बना राजस्थान- शत्रुध्न सिन्हा

नई दिल्ली। राजस्थान में हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारा झटका लगा है. प्रदेश के दो लोकसभा और एक विधान सभा सीट पर हुए उप चुनावों में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया है. इस हार के बाद बीजेपी नेता और बिहार के पटना साहिब से लोकसभा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी ही पार्टी पर तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि राजस्थान बीजेपी को तीन तलाक देने वाला पहला राज्य बन गया है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा, ‘सारे रिकॉर्ड्स तोड़ने वाली सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के लिए ब्रेकिंग न्यूज़- बीजेपी को तीन तलाक देने वाला पहला राज्य बन गया है राजस्थान. अजमेर- तलाक, अलवर- तलाक, मांडलगढ़- तलाक. हमारे विरोधियों ने अच्छे मार्जिन से इस चुनाव को जीता है. हमारी पार्टी को जोरदार झटका दिया है.’ उन्होंने दूसरा ट्वीट करते हुए बीजेपी को जागने की हिदायत दे डाली.

 

हरियाणा में बाबासाहेब की प्रतिमा को पहुंचाया नुकसान

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हरियाणा। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की खबर आए दिन आती रहती है. ताजा मामले में हरियाणा के जींद जिले के रानी तालाब इलाके में डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने की खबर है. यहां कुछ अज्ञात लोगों ने बाबासाहब की एक प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया है. पुलिस ने इसकी जानकारी दी है.

पुलिस को इस घटना की सूचना बहुजन समाज पार्टी और डॉ. बी आर आंबेडकर कल्याण संघर्ष समिति के सदस्यों ने शुक्रवार को दी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. बीएसपी और समिति के सदस्यों ने इलाके में विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मामले की जांच कर दोषियों को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है.

   

भाजपा को रोकने के लिए जेल में लालू से मिलेंगे शरद यादव

पटना। भाजपा के खिलाफ तमाम विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कवायद लालू प्रसाद यादव ने शुरू की थी. नीतीश कुमार से अलगाव के बाद बीते साल लालू यादव ने पटना में विशाल रैली आयोजित कर तमाम विपक्षी दलों को इकट्ठा किया था. अब जब बजट सत्र के बाद विपक्षी दलों ने बैठक कर भाजपा को रोकने की रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है तो सबको लालू यादव की कमी खलने लगी है. क्योंकि लालू यादव बिहार में विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा और सबसे बड़ी पार्टी भी हैं.

इस कमी को दूर करने के लिए विपक्षी दलों ने नया उपाय ढूंढ़ लिया है. अब लालू यादव से राजनैतिक सलाह-मशविरा करने के लिए जेल में ही बैठक होगी. इसकी जिम्मेदारी जनता दल यू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को दी गई है.

शरद यादव 5 फरवरी को लालू यादव से रांची जेल में मुलाकात करेंगे, जहां वह विपक्ष की रणनीति के बारे में लालू यादव से चर्चा करेंगे. इससे पहले बजट पेश होने के बाद सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक हुई थी. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, एनसीपी के शरद पंवार, राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह, सपा से रामगोपाल यादव, राष्ट्रीय जनता दल से लालू यादव की बेटी मीसा भारती सहित कुल 17 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए थे. इस दौरान सोनिया गांधी ने विभिन्न दलों के नेताओं से राज्यों के आपसी मतभेदों को भुलाकर केंद्र में भाजपा को रोकने के लिए साथ आने की अपील की. इस पर सभी दल सहमत दिखें. हालांकि इस दौरान लालू यादव की गैरमौजूदगी सबको खली.

इसी के बाद शरद यादव को लालू यादव से तमाम मुददों पर चर्चा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यादव जहां जेल में लालू यादव से मिलकर रणनीति पर चर्चा करेंगे तो वहीं लालू यादव की बात को सोनिया गांधी और तमाम विपक्ष तक पहुंचाएंगे. इससे पहले विपक्षी दलों को एक साथ लाने के लिए लालू प्रसाद यादव ने कई बार बैठक भी की थी लेकिन चारा घोटाले में फैसला आने के बाद से वह जेल में हैं. 2019 में चुनाव को लेकर विपक्षी दल अभी से गंभीर हैं और भाजपा को रोकने के लिए तमाम रणनीति पर चर्चा कर रहा है.

 

जीत से किया वन डे सीरीज का आगाज, द. अफ्रीका को 6 विकेट धोया

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नई दिल्ली। भारत ने पहले वनडे मुकाबले में द. अफ्रीका को 6 विकेट से हरा दिया। अब 6 वनडे मैचों की सीरीज में भारतीय टीम को 1-0 की बढ़त मिल गई है। इस मुकाबले में द. अफ्रीका के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने के फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए द. अफ्रीका के कप्तान डू प्लेसिस के शानदार शतक के दम पर निर्धारित 50 ओवर में 8 विकेट पर 269 रन बनाए। भारत को जीत के लिए 270 रन का लक्ष्य मिला था जिसे मेहमान टीम ने विराट के शानदार शतक के दम पर 45.3 ओवर में 4 विकेट पर हासिल कर लिया। डरबन में वनडे में ये भारतीय टीम की पहली जीत थी।

गेंदबाजी करते हुए भारत को पहली सफलता जसप्रीत बुमराह ने दिलाई। बुमराह ने 16 रन पर खेल रहे अमला को LBW आउट कर द. अफ्रीका को पहला झटका दे दिया। इसके बाद डि कॉक को 34 रन पर चहल ने LBW आउट कर भारत को दूसरी सफलता दिला दी। मार्करम (09) चहल की गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में पांड्या को कैच दे बैठे। पांड्या ने भी बेहतरीन कैच पकड़कर द. अफ्रीका को तीसरा झटका दे दिया। 12 रन बनाकर खेल रहे जे पी डुमिनी को कुलदीप यादव ने अपनी फिरकी से ऐसा चकमा दिया कि वो बोल्ड हो गए। 7 रन बनाकर डेविड मिलर कुलदीप यादव की गेंद पर विराट कोहली को कैच थमा बैठे। चाइनामैन कुलदीप यादव ने अपना तीसरा शिकार क्रिेस मॉरिस को बनाया और 37 रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। द. अफ्रीकी कप्तान डू प्लेसिस ने अपने वनडे करियर का 9 वां शतक लगाया। उन्होंने 101 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। प्लेसिस ने इस मैच में कुल 120 रन बनाए और 112 गेंदों का सामना किया। उनकी पारी का अंत भुवी ने किया। भुवी की गेंद पर प्लेसिस का कैच हार्दिक पांड्या ने पकड़ा। रबादा एक रन बनाकर रन आउट हो गए। फेलुकवायो ने नाबाद 27 रन की पारी खेली।

भारतीय स्पिनर्स ने इस मैच में कमाल की गेंदबाजी की। कुलदीप यादव ने 3 और युजवेंद्र चहल ने 2 विकेट लिए। भारतीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और हार्दिक पांड्या ने एक-एक विकेट लिए।

270 रनो का पीछा करते हुए भारतीय पारी के ओपनर बल्लेबाज रोहित शर्मा अच्छी लय में दिख रहे थे और उन्होंने कुछ अच्छे शॉट्स भी लगाए। पहले विकेट के लिए उन्होंने शिखर के साथ मिलकर 33 रन की साझेदारी की। रोहित 20 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर मोर्कल की गेंद पर विकेटकीपर डी कॉक के हाथों लपके गए। शिखर धवन अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। एक गेंद उनके पैड पर लगी और LBW का अपील किया गया। तब तक विराट ने उन्हें दूसरे एंड से आवाज लगाई और रन के लिए दौड़ा दिया लेकिन मार्करम का थ्रो सीधा विकेट पर लगा और धवन रन आउट हो गए। धवन ने 35 रन बनाए। रहाणे ने द. अफ्रीका के खिलाफ शानदार 79 रन की पारी खेली और तीसरे विकेट के लिए कप्तान विराट के साथ रिकॉर्ड 189 रन की साझेदारी की। रहाणे को फेलुकवायो की गेंद पर इमरान ताहिर ने लपका। विराट कोहली ने कप्तानी पारी खेलते हुए शतक लगाया। उन्होंने 119 गेंदों पर 112 रन की पारी खेली। फेलुकवायो की गेंद पर विराट को कैच रबादा ने पकड़ा। डरबन में ये विराट का पहला वनडे शतक था। धौनी 4 रन बनाकर जबकि पांड्या 3 रन बनाकर नाबाद रहे।

 

दलित राजनीति के तीन संकट

दुनिया भर में प्रतिरोध आंदोलनों का विकास अगर देखें, तो पता चलता है कि ये आंदोलन जिनके विरुद्ध प्रतिरोध कर रहे होते हैं, कुछ समय बाद उन्हीं के गुण-अवगुण अपने में शामिल कर लेते हैं। इसका कारण यह माना जाता है कि वे कोई वैकल्पिक संस्कृति नहीं बना पाते। और यहीं से उनका संकट शुरू हो जाता है। श्रमिक आंदोलन का नेतृत्व जिस मैनेजमेंट के खिलाफ लड़ रहा होता है, उसी की संस्कृति से उपजे प्रलोभनों का शिकार हो जाता है। राज्य के खिलाफ उभरे अनेक आंदोलन धीरे-धीरे राज्यसत्ता की संस्कृति में ही तिरोहित होते गए हैं। यही हश्र देश में दलित आंदोलनों का हुआ। दलित आंदोलन जिस वर्चस्व रखने वाली सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ शुरू हुआ था, धीरे-धीरे उसी में तिरोहित होता गया है। वर्चस्व रखने वाले राजनीतिक समूहों के गुण-अवगुण उसमें भी आते गए हैं।

भारत में विभिन्न राज्यों में दलित आंदोलन के कई रूप सक्रिय हैं, अत: इनकी संभावनाओं, समस्याओं और संकट के रूप भी भिन्न होंगे। बिहार में दलित उभार का एक बड़ा धड़ा जहां उग्र वामपंथी संस्थाओं से प्रभावित रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में स्वायत्त दलित राजनीतिक आंदोलनों का उभार हुआ है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कनार्टक जैसे दक्षिणी राज्यों में दलित उभार का नेतृत्व काफी कुछ कांग्रेस के प्रभाव में विकसित होता रहा है। लेकिन सबमें एक आकांक्षा समान रही- वह है शिक्षा व राजनीति के माध्यम से राज्यसत्ता की योजनाओं में हिस्सेदारी व सामाजिक सम्मान की चाह। राज्यसत्ता और लोकतांत्रिक संस्कृति से उन्हें सामाजिक बंधनों से मुक्ति व विकास की दिशा में बढ़ने में मदद भी मिली है।

देश में 90 का दशक दलित राजनीति के उभार का दशक था। तब उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान में प्रभावी ढंग से कांशीराम और मायावती के नेतृत्व में बहुजन राजनीति ने अपनी जगह बनाई। मगर पिछले दशक में उत्तर प्रदेश में बहुजन राजनीति कमजोर हुई और यह कई तरह से संकटग्रस्त दिखने लगी। अवसरवाद, धनाकांक्षा, स्वार्थों की टकराहट ने इसकी दूसरी पांत के नेतृत्व को काफी कमजोर किया। महाराष्ट्र में तो अंबेडकर की बनाई आरपीआई दो दशक पहले ही कई धड़ों में बंट गई थी। हालांकि इन विभाजनों का मानचित्र वैचारिक टकराहटों ने गढ़ा था, फिर भी इनके अनेक नेता कांग्रेस के गहरे प्रभाव में थे। कांग्रेस-आरपीआई गठबंधन की प्रक्रिया में धीरे-धीरे आरपीआई कांग्रेस में तिरोहित होती गई, फिर उसका एक बड़ा धड़ा शिवसेना से जुड़ा और फिर उस रास्ते कुछ धड़े भाजपा से जुड़ गए। रामदास अठावले आज भाजपा की केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं।

कांशीराम ने दलित नेतृत्व की इस प्रवृत्ति को ‘चमचा एज’ के रूप में समझा था और दलितों की एक स्वायत्त राजनीति विकसित करने का प्रण लिया था, जिसमें उन्होंने दलितों को ‘देने वाली राजनीतिक शक्ति’ के रूप में परिकल्पित किया था, न कि ‘लेने वाले’ समूह के रूप में। बहुजन राजनीति में उनका यह स्वप्न पूरा हो भी रहा था। दलित नेतृत्व के बैनर तले गैर-दलित तबकों को आकर सत्ता में भागीदारी स्वीकार करनी पड़ी। पर बहुजन राजनीति भी जिनके विरुद्ध वैकल्पिक राजनीति देने के एजेंडे पर काम कर रही थी, उसी के अवगुणों का शिकार हो गई। सीमांत से मुख्यधारा में आने की लड़ाई लड़ते-लड़ते वह खुद मुख्यधारा की सीमाओं में उलझ गई।

दलित राजनीति के संकट का दूसरा कारण दलित समूहों में राजनीतिक और सत्ता सुविधाओं के लिए स्पद्र्धा से बना टकराव है। पंजाब में बड़ी दलित आबादी रहती है, जिनकी संख्या लगभग 31 प्रतिशत है, किंतु वहां दो बड़े दलित समूहों- जाटव (चर्मकार) और वाल्मीकि में गहरा विभाजन है। एक समूह कांग्रेस के साथ जाता है, तो दूसरा अकाली दल की तरफ। उसी तरह, उत्तर प्रदेश में जाटव-पासी, बिहार में पासवान-हरिजन (चर्मकार) अलग-अलग राजनीतिक पक्ष तय करते हैं। आंध्र प्रदेश में माला-मादिगा, महाराष्ट्र में महार-मातंग अपने-अपने राजनीतिक हितों के लिए आपस में टकराते हैं। इससे एक संगठित दलित सामाजिक समूह का उभार नहीं हो पाता। यूं भी दलित समूह एक ‘होमोजेनियस’ समूह नहीं है, उसमें कई स्तर व टकराहटों से भरे जातीय, उप-जातीय चरित्र भी काम करते हैं। दलित संख्या के स्तर पर बड़े समुदायों के साथ कई छोटे-छोटे समुदाय भी हैं, जिन्हें अब भी राजनीतिक पहचान नहीं मिली है। दलित राजनीति की एक चुनौती ऐसे छोटे-छोटे समुदायों कोे राजनीति और विकास में भागीदारी दिलाना भी है।

तीसरा संकट भाषा का है। मायावती अपना ‘मनुवाद विरोधी’ पोस्चर कब का खो चुकी हैं, उनकी सर्वजन की भाषा प्रभावी तो रही, किंतु उस पर उन्हें नई धार देनी है। पिछले दिनों दलित समूहों में भी एक नया मध्यवर्ग उभरा है। उससे संवाद के लिए मायावती को भी जाति, सर्वजन के प्रतीकों के साथ नई भाषा गढ़नी होगी। इस बीच दलितों में एक युवा नेतृत्व भी उभरा है, जो टेक्नोसेवी, सिविल सोसायटी आंदोलन की भाषा के साथ एक आक्रामक रुख वाला नेतृत्व है। गुजरात में जिग्नेश मेवाणी, उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर रावण को इसी कोटि में रखा जा सकता है। मायावती के लिए यह भी समस्या है कि कैसे इस नए उभरे नेतृत्व के साथ संवाद स्थापित कर या तो उन्हें अपने में समाहित करें या उनके साथ गठजोड़ करें। दलितों में उभर रहे इस युवा नेतृत्व के लिए एक समस्या यह है कि यह महाराष्ट्र में 70 में उभरे दलित पैंथर की भाषा को पुन: गढ़ने की कोशिश कर रहा है। दलित आकांक्षा और वामपंथी शब्दावलियों का मिला-जुला रूप जो प्रकाश अंबेडकर, नामदेव ढासाल में देखा गया था, उसी भाषा को फिर से इस युवा नेतृत्व ने गढ़ा है। यह भाषा प्रारंभ में तो आकर्षक लगती है, स्ट्रीट फाइट के लिए उत्तेजित भी करती है, पर इसमें बड़े सामाजिक परिवर्तन की कोई योजना अभी तो नहीं दिखती। जिग्नेश स्वयं कांग्रेस के समर्थन से गुजरात का चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने एक तरह से उन्हें अपनी सीट गुजरात में दी है।

जिस लोकतंत्र ने दलित राजनीति के विकास के लिए कैनवास प्रदान किया है, जिस चुनावी लोकतंत्र ने उन्हें उड़ने को आकाश दिया है, उसी तंत्र ने ऐसी काजल की कोठरी भी बना दी है, जिसमें उन्हें बच-बचकर यात्रा करनी पडे़गी। एक वैकल्पिक राजनीति का स्वप्न बनाए रखना है, जो भले पूरी तरह सच न हो, किंतु उसका आभास भी दलित राजनीति में नई जान फूंक सकता है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

साभारः हिन्दुस्तान

बजट को लेकर मायावती ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा अपना आखिरी बजट पेश किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इसे पिछले चार सालों की तरह ही केवल लच्छेदार बातों वाला बताया है. बजट पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में मायावती ने कहा कि यह केवल लच्छेदार बातों वाला छलावा व गरीब-विरोधी एवं धन्नासेठ समर्थक बजट है. पीएम मोदी को कठघरे में खड़ा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि मोदी सरकार को अपनी जुमलेबाजी बंद कर के तथ्यों व तर्कों के आधार पर देश को यह बताना चाहिए कि वह अच्छे दिन कहां हैं, जिसका वायदा उन्होंने देश की सवा सौ करोड़ जनता से सीना तानकर चुनाव के समय किया था. और अगर वो ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें देश से मांफी मांगनी चाहिए.

भाजपा सरकार इस बजट को जहां किसानों और गरीबों की हितैषी बता रही है तो वहीं मायावती ने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकताएं देश के करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों व अन्य मेहनतकश लोगों के हितों की रक्षक कतई नहीं है. इसी वजह से बेरोजगारी की महामारी है तथा अमीरों व गरीबों के बीच पहले से मौजूद खाई लगातार बढ़ती चली जा रही है. मायावती ने कहा कि केवल भाषणों व लच्छेदार बातों से गरीबों व मेहनतकश जनता का पेट नहीं भरने वाला है, बल्कि सरकार द्वारा जो भी वायदे किए गए हैं, उसका लेखा-जोखा बताना चाहिए.

युवाओं के रोजगार का मुद्दा उठाते हुए मायावती ने कहा है कि युवाओं और ग्रामीण भारत को उसकी अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर रोजगार के अवसर मुहैया कराने की जरूरत है. न कि पकौड़ा बेचकर रोजगार अर्जित करने के सरकारी सुझाव की. देश के करोड़ो शिक्षित युवा पहले ही मजबूरी में चाय-पकौड़ा बेचने का काम कर रहे हैं, जो कि ठीक नहीं है. उन्होंने इसे मोदी सरकार की विफलता का जीता-जागता प्रमाण कहा.

राजस्थान में भाजपा की हालत खराब, उप चुनाव में करारी हार

राजस्थान। एक फरवरी को अगर सरकार केंद्रीय बजट पेश न कर रही होती तो सुबह से लेकर शाम तक मीडिया में सिर्फ राजस्थान चुनाव की चर्चा चल रही होती, जहां कांग्रेस ने भाजपा को बड़ी शिकस्त दी है. राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हरा दिया है. अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा को इन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. अजमेर औऱ अलवर में जहां लोकसभा सीट पर चुनाव था तो मांडलगढ़ में विधानसभा सीट के लिए.

बीते दो सालों में भाजपा ने लोकसभा उप चुनावों में चौथी सीट गंवाई है. तो. 2014 लोकसभा चुनाव के बाद अब तक हुए 16 उप चुनाव में भाजपा को 14 में हार का मुंह देखना पड़ा है, जबकि कांग्रेस ने उससे चार सीटें जीत ली हैं. इन नतीजों के बाद लोकसभा में कांग्रेस की सीटें बढ़ गई है. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राजस्थान की 25 में से 25 सीटें हार गई थी, ऐसे में दो लोकसभा सीटों पर जीत के साथ राजस्थान में उसका खाता खुल गया है. इन नतीजों के बाद राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट का कद बढ़ गया है.

इसी साल दिसंबर में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं, उसके पहले यह हार भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर सवाल खड़ा करता है. असल में राजस्थान का उप चुनाव सिर्फ तीन सीटों और तीन प्रत्याशियों की जीत हार का मामला नहीं है. इन तीनों सीटों के लिए भाजपा ने अपने पंद्रह मंत्रियों और 14 विधायकों को लगा रखा था. उन पर इन तीनों सीटों को जिताने की जिम्मेदारी थी औऱ ऐसे में जब भाजपा की हार हुई है तो इसे इन सभी नेताओं की हार के रूप में देखा जा रहा है.

उपचुनावों में भजापा की लगातार होती हार ने अब पार्टी को परेशान करना शुरू कर दिया है. सिर्फ राजस्थान की बात करें तो पिछले चार साल में यहां 8 उपचुनाव हुए हैं, जिनमें छह में कांग्रेस विजयी रही है. पार्टी के सामने अभी 6 और उपचुनाव की चुनौती है. इसमें उत्तर प्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर के साथ महाराष्ट्र में गोंदिया और पालघर लोकसभा समेत अभी दो और सीटों पर उप चुनाव होना है. ऐसे में भाजपा के सामने अब उप चुनावों में इज्जत बचाने का सवाल खड़ा हो गया है