दलित-मुस्लिम एकता चाहता था मुंबई का वह मशहूर डॉन

हाजी मस्तान

मुंबई के अंडरवर्ल्ड में हाजी मस्तान का नाम कई दशकों तक गूंजता रहा था. अंडरवर्ल्ड माफिया होने के बावजूद हाजी मस्तान दूसरों से अलग था. जैसे माना जाता है कि उसने कभी बंदूक नहीं उठाई न कभी किसी पर गोली चलाई. वह अन्य माफियाओं की तरह झूठ और फरेब की बजाय ईमानदारी पसंद था. अंडरवर्ल्ड से ऊबने के बाद एक वक्त उसने राजनीति की राह भी पकड़ी थी जहां उसने दलितों और मुस्लिमों की एकता की बात कही थी.

कई दशक तक मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर राज करने के बाद 80 के दशक की शुरुआत में हाजी मस्तान की ताकत में कमी आना शुरू हो गई थी, क्योंकि मुंबई अंडरवर्ल्ड में नई ताकतें उभरने लगी थी. नए ‘गैंग्स’ ने हाजी मस्तान की प्रासंगिकता को काफी कम कर दिया था. 1974 में इंदिरा गांधी ने हाजी मस्तान को पहली बार ‘मीसा’ के अंतर्गत गिरफ़्तार करवाया था. 1975 में आपातकाल के दौरान भी हाजी मस्तान को सलाखों के पीछे रखा गया.

फाइल फोटो- हाजी मस्तान (फोटो क्रेडिट- गूगल इमेज)

तब देश के सबसे बड़े ‘क्रिमिनल’ लायर राम जेठमलानी को अपना मामला देने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो पाई थी. जेल से छूटने के बाद उनकी जयप्रकाश नारायण से मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात ने हाजी मस्तान का राजनीति में आने का रास्ता तैयार किया. इसके बाद मस्तान ने ‘दलित मुस्लिम सुरक्षा महासंघ’ नाम की एक पार्टी भी बनाई. मस्तान ने इस पार्टी को खड़ा करने के लिए काफी पैसे खर्च किए और महीनों तक मेहनत की. उनकी सोच थी कि वो एक दिन शिव सेना का स्थान ले लेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. ये पार्टी कुछ ख़ास नहीं कर सकी. हाजी मस्तान अंडरवर्ल्ड की दुनिया में जितने सफल हुए, राजनीति में नहीं हो पाए.

मायावती के दांव से गोरखपुर पर टिकी देश भर की निगाह

लखनऊ। देश की राजनीति में जब भी कोई बदलाव आया है, उसकी सुगबुगाहट बिहार और उत्तर प्रदेश से ही शुरू हुई है. यहां तक की केंद्र में सरकार बनाने का सपना देखने वाली भाजपा को भी उत्तर प्रदेश में सारा जोर लगाना पड़ा तो वहीं मोदी को गुजरात छोड़कर चुनाव लड़ने बनारस जाना पड़ा. एक बार फिर उत्तर प्रदेश से ही देश की राजनीति में हलचल पैदा होने की संभावना जोर पकड़ने लगी है. गोरखपुर और फुलपूर सीट पर होने वाले उपचुनाव में बसपा द्वारा समाजवादी पार्टी को समर्थन दिए जाने के बाद इन सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर अब देश भर की नजरें टिक गई हैं.

गोरखपुर की सीट भाजपा नेता और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा देने से खाली हुई है. यह उनके लिए प्रतिष्ठा की सीट है. लेकिन सपा ने उन्हें घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ा है. गोरखपुर संसदीय सीट पर निषाद समुदाय काफ़ी प्रभावी हैं. सपा ने निषाद समुदाय से उम्मीदवार खड़ा करके पहले ही माइलेज ले लिया था. दूसरी ओर बीएसपी का साथ मिलने से बीएसपी का कैडर वोट जुड़ गया है. माना जा रहा है कि सपा-बसपा के साथ आने से अल्पसंख्यक वोट एकमुश्त इस गठबंधन को जाना तय है. तो वहीं ज़मीनी स्तर पर राज्य सरकार के क़रीब एक साल का और केंद्र सरकार के चार साल का प्रदर्शन भी उपचुनाव पर असर डालेगा.

सपा-बसपा के साथ आने से भाजपा जहां सकते में है तो वहीं प्रदेश भर में एक बार फिर दलित-पिछड़ा गठबंधन की मांग जोर पकड़ने लगी है. खासकर दलित और पिछड़ा समाज इस गठबंधन से काफी उत्साहित है. हालांकि बसपा प्रमुख मायावती ने इसे सपा के साथ गठबंधन से ज्यादा भाजपा को हराने की बात कह कर प्रचारित किया है लेकिन जाहिर है कि इस प्रयोग के परिणाम पर उनकी नजर रहेगी.

गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा के खिलाफ साथ आई सपा और बसपा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सालों बाद वह हुआ, जिसकी कल्पना फिलहाल राजनीति के बड़े-बड़े पंडितों ने नहीं की होगी. गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा के लिए होने वाले उपचुनाव में बसपा ने समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है. दोनों जगहों पर बसपा के जोन-कोऑर्डिनेटरों ने प्रेस कांफ्रेंस कर सपा को समर्थन देने की घोषणा की है. गोरखपुर सीट सीएम योगी के सांसद पद से इस्तीफ़ा देने के बाद खाली हुई है तो फूलपुर सीट से यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सांसद थे.

दोनों धुरविरोधियों के साथ आने से जहां भाजपा सकते में है तो वहीं इन दोनों जगहों के दलित और पिछड़े समाज ने इस गठबंधन का समर्थन किया है. बहुजन समाज पार्टी अपनी रणनीति के तहत उपचुनाव से दूर ही रहती है. गोरखपुर औऱ फूलपुर के उपचुनाव में उसने यही रणनीति अपनाई लेकिन बसपा ने सपा को समर्थन देने का ऐलान कर दोनों चुनावों को रोचक मोड़ दे दिया है.

गोरखपुर लोकसभा सीट से बीजेपी ने उपेन्द्र शुक्ला को टिकट दिया है तो वहीं समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया है. वहीं कांग्रेस ने सुरहिता करीम चैटर्जी को अपना उम्मीदवार बनाया है. दूसरी ओर फूलपुर लोकसभा सीट की बात करें तो बीजेपी ने युवा नेता कौशलेंद्र पटेल को टिकट दिया है, जबकि सपा ने नागेन्द्र पटेल व कांग्रेस ने मनीष मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर जेल में बंद माफिया डॉन अतीक अहमद ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है.

दोनों सीटों पर सपा-बसपा के एक साथ आने के बाद यह उपचुनाव बेहद खास हो गया है. यह महज उपचुनाव तक सीमित न होकर 2019 लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि भी तैयार करने में मददगार होगा. जाहिर है कि इन दोनों सीटों पर बसपा प्रमुख मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव की सहमति के बाद ही समझौता हो पाया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार इन दोनों सीटों पर बसपा से समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे थे. अखिलेश 2019 चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के पक्षधर हैं.

बौद्धों के कार्यक्रम में बजरंग दल ने किया हंगामा

सीतापुर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर जिले में बजरंग दल के लोगों द्वारा बौद्ध धर्म के अनुयायियों पर हमले की खबर है. बजरंग दल के लोगों ने कार्यक्रम में घुसकर न सिर्फ हंगामा और मारपीट की, बल्कि बाबासाहेब की फोटो को नुकसान पहुंचाया और तथागत बुद्ध की प्रतिमा को उठा ले गए. बुद्धवार 28 फरवरी को घटी घटना सीतापुर के मिश्रिख की है.

मिश्रिख में पिछले कई सालों से हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा 84 कोस की परिक्रमा की जाती है. इस दौरान यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग भी पहुंचते हैं. मेले में पिछले चार दशक से बौद्ध धर्म के लोग भी आते रहे हैं, जो अपने पांडाल लगाकर महामानव तथागत बुद्ध के संदेश की चर्चा करते थे. इस साल भी प्रशासन की अनुमति से मेले में पांडाल लगाया गया था.

भंते स्वरूपानंद जी ने बताया कि बुद्धवार को भी रोज की तरह कार्यक्रम चल रहा था. इसमें करीब 250 लोग मौजूद थे और 6-7 भिक्खुगण भी बैठे थे. दोपहर साढ़े तीन बजे जब बौद्ध विचारक कन्हैया लाल लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी बजरंग दल के लोग हाथों में डंडा और बंदूक लिए पीछे से स्टेज पर चढ़ गए. उन्होंने कन्हैया लाल को वहीं गिरा दिया और उनके साथ मारपीट की. उन्होंने बाबासाहेब की फोटो हटा दी जबकि गौतम बुद्ध की प्रतिमा को उठा ले गए. अचानक हुए इस हमले से बौद्ध प्रवचन सुन रहे लोगों में भगदड़ मच गई.

भंते स्वरूपानंद ने बताया कि स्टेज पर चढ़ने वाले गुंडों के हाथ में बंदूके थी, जिस कारण किसी ने उनका विरोध नहीं किया और वो कोहराम मचाते रहें. उन्होंने पूरा स्टेज तोड़ दिया. पुलिस से मामले की शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने आनाकानी की लेकिन बाद में सिटी मजिस्ट्रेट राकेश पटेल के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने तीन दिन के भीतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

बोनी कपूर ने यूं किया श्रीदेवी को याद

नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो गया. श्रीदेवी के अंतिम संस्कार के बाद उनके ट्विटर पेज पर पति बोनी कपूर द्वारा एक संदेश जारी किया गया है. एक्ट्रेस के निधन के बाद पहली बार बोनी कपूर ने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए बताया कि उनकी जिंदगी में श्रीदेवी कितने मायने रखती हैं.

ट्विटर पर शेयर किए गए लंबे पत्र में बोनी लिखते हैं-

 “एक दोस्त, पत्नी और दो युवा बेटियों की मां को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. मैं अपने दोस्त, परिवार, सहयोगी, शुभचिंतक और अनगिनत फैन्स का आभार जताना चाहूंगा, जो इस घड़ी में मेरे साथ खड़े रहे. मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे अर्जुन और अंशुला का सपोर्ट और प्यार मिला. वे स्तंभ की तरह ताकत बनकर मेरे, जाह्नवी और खुशी के साथ खड़े रहे. हमने बतौर एक परिवार इस असहनीय घटना को झेलने की कोशिश की है.”

बोनी कहते हैं, “दुनिया के लिए वह उनकी ‘चांदनी’ थी, कमाल की एक्ट्रेस थी, उनकी श्रीदेवी थी, लेकिन मेरे लिए मेरा प्यार थी, मेरी दोस्त, मेरी बेटियों की मां, मेरी पार्टनर. मेरी बेटियों के लिए वो सबकुछ और उनकी जिंदगी थी. वो धुरी थी जिसके आसपास हमारा परिवार चलता था. मेरी सबसे गुजारिश है कि हमारी निजता की जरूरतों का सम्मान करें और हमें दुख मनाने दें.”

बोनी ने चिंता जताते हुए कहा कि अब उनकी दोनों बेटियों की हिफाजत कैसे होगी? अब श्रीदेवी के बिना आगे वे कैसे अपना रास्ता तलाशेंगी? उन्हें जिंदगी जीने और हंसने की ताकत कैसे मिलेगी? ख़त के आखिर में बोनी कपूर लिखते हैं, “भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें. हमारी जिंदगी उनके बिना हमेशा अधूरी रहेगी.”

बसपा ने कानपुर के दो दिग्गज नेताओं को निकाला

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कानपुर। बसपा ने दो पूर्व विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. बसपा सुप्रीमो मायावती के आदेश के बाद पूर्व विधायक कमलेश दिवाकर और राम प्रकाश कुशवाहा को पार्टी से निष्काषित कर दिया गया है. इन पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है. दोनों पूर्व विधायक कानपुर के ग्रामीण क्षेत्र के सबसे दमदार नेता रहे हैं. इसके साथ ही कानपुर की नई कार्यकारणी की भी घोषणा भी कर दी गई है.

 बहुजन समाज पार्टी के सक्रिय नेता रहे कमलेश दिवाकर 2012 में बिल्हौर विधान सभा से जीते थे.  वहीं राम प्रकाश कुशवाहा घाटमपुर विधान सभा से विधायक बने थे.  बिल्हौर विधानसभा में कमलेश दिवाकर की अच्छी पकड़ थी.  वहीं बैकवर्ड और मुस्लिम बहुल क्षेत्र वाले घाटमपुर विधान सभा क्षेत्र के बैकवर्ड वोट बैंक में राम प्रकाश कुशवाहा की काफी धमक है.  बसपा जिलाध्यक्ष राम शंकर कुरील ने स्पष्ट किया कि दोनों ही पूर्व विधायको को अनुशासनहीनता एवं विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्काषित किया गया है.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कानपुर नगर संगठन की नई कार्यकारणी की घोषणा की है, जिसमें रामशंकर कुरील को जिलाध्यक्ष, सुनीता शुक्ला को जिला उपाध्यक्ष, नत्थू लाल दिवाकर को जिला सचिव, योगेन्द्र कुशवाहा कोषाध्यक्ष, मो. इमरान को जिला सचिव, गिरधारी लाल को जिला संयोजक बनाया गया है.

 

जेल में ऐसे होली खेलेंगे लालू

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की होली निराली होती थी. लालू जमकर होली खेलते हैं, खुद ढोल बजाते और फगवा गाते हैं, लेकिन इस साल की होली के समय लालू रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं. हालांकि जेल में भी जेल प्रशासन ने कैदियों के लिए होली की विशेष व्यवस्था की है. वैसे तो लालू यादव अपर डिवीजन सेल में बंद हैं, लेकिन उन्हें सामान्य कैदियों के साथ होली खेलने की छूट होगी. जेल में बंद कैदियों में भी होली को लेकर इस बार खासा उत्साह है क्योंकि लालू प्रसाद यादव उनके साथ हैं.

हालांकि लालू यादव के जेल में होने के कारण राजद के कार्यकर्ता होली नहीं मनाएंगे. उनका कहना है कि लालू प्रसाद के जेल से छूटने के बाद ही होली होगी. इन सबके बावजूद लालू यादव अपने अंदाज में मस्त हैं. चारा घोटाले के दुमका कोषागार के मामले में फैसले की तारीख सीबीआई कोर्ट जल्द मुकर्रर करेगी. इस मामले में सुनवाई चल रही है. इस मामले में लालू प्रसाद यादव कभी कोर्ट पहुंचते हैं तो कभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी हाजिरी लगाते हैं. विशेष अदालत में लालू ने जज से कहा कि ‘अब दुमका मामले में थोड़ा बढ़िया लिखिएगा’. साथ ही लालू यादव ने जज को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘हुजूर, होलिका के साथ आपके दुश्मनों का नाश हो जाए.’ जिस पर जज के साथ कोर्ट में मौजूद लोग भी मुस्करा उठे.

धर्म छोड़ने का आवेदन देने में 90 फीसदी हिन्दू

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गुजरात। हिन्दुत्व के हीरो बनें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के राज्य गुजरात से हिन्दू धर्म के लिए ही बुरी खबर है. गुजरात में हिन्दू धर्म को छोड़ने वालों की संख्या में काफी तेजी आई है. गुजरात के विभिन्न जिलों में प्रशासन को धर्म परिवर्तन के 447 आवेदन मिले हैं, जिसमें 90 फीसदी हिन्दू धर्म के लोग हैं, जो अब यह धर्म छोड़ना चाहते हैं.

 27 फरवरी को गुजरात सरकार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब के दौरान खुद इस आंकड़े का जिक्र किया है. हिन्दू धर्म छोड़ने को तैयार इन लोगों में सबसे ज्यादा लोग उत्तर गुजरात के बनासकांठा जिले के हैं. इस जिले के 194 लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़ने के लिए आवेदन दिया है. इसके अलावे सरकार को सुरेन्द्र नगर से 55 और जूनागढ़ से 26 आवेदन मिले हैं. साल 2016-17 में राज्य सरकार को हिन्दू धर्म छोड़ने के संबंध में 402 अप्लीकेशन मिले हैं.

असल में गुजरात सरकार ने धर्म परिवर्तन की सूचना जिला कलेक्टर को देने के लिए नियम बना रखा है. इसके मुताबिक किसी को भी अपना धर्म छोड़ कर दूसरा धर्म ग्रहण करने से पहले जिला कलेक्टर को इसकी सूचना देनी पड़ती है. इससे पहले अप्रैल 2010 से मार्च 2015 के दौरान राज्य सरकार को धर्म परिवर्तन के लिए 1838 आवेदन मिला था, जिसमें 1735 हिन्दू धर्म के थे.

हिन्दू धर्म छोड़ने वालों में ज्यादातर दलित समाज के लोग हैं. गुजरात में लगातार दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं. उना की घटना ने तो पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थी. अपने उत्पीड़न से परेशान दलित समाज के लोग अब हिन्दू धर्म से ही अलग हो जाना चाहते हैं. गुजरात सरकार और हिन्दू धर्म के ठेकेदारों के लिए यह बड़ा झटका है.

जयंती विशेष: दीनाभाना न होते तो बहुजन आंदोलन को कांशीराम न मिलते

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यह शख्स हैं जयपुर, राजस्थान में 28 फरवरी 1928 को जन्मे बामसेफ के संस्थापक सदस्य मा० दीना भाना जी. इन्होने बामसेफ संस्थापक अध्यक्ष मान्यवर कांशीराम साहब को बाबासाहब के विचारो से प्रेरित किया. मा० कांशीराम साहब ने बाबा साहब के विचारो को पूरे भारत में फैलाया.

आज पूरे देश मे जय भीम, जय मूलनिवासी की जो आग लगी है उसमे चिंगारी लगाने का काम वाल्मीकि समाज के महापुरूष मा० दीना भाना जी ने किया. दीनाभाना जी जिद्दी किस्म के शख्स थे. बचपन मे उनके पिताजी सवर्णों के यहां दूध निकालने जाते थे इससे उनके मन मे भी भैंस पालने की इच्छा हुई उन्होने पिताजी से जिद्द करके एक भैस खरीदवा ली लेकिन जातिवाद की वजह से भैस दूसरे ही दिन बेचनी पडी. कारण ? जिस सवर्ण के यहा उनके पिताजी दूध निकालने जाते थे उससे देखा नहीं गया उनके पिताजी को बुलाकर कहा तुम छोटी जाति के लोग हमारी बराबरी करोगे तुम भंगी लोग सुअर पालने वाले भैस पालोगे यह भैस अभी बेच दो उनके पिता ने अत्यधिक दबाब के कारण भैस बेच दी. यह बात दीनाभाना जी के दिल मे चुभ गयी उन्होने घर छोड दिया और दिल्ली भाग गए.

वहां उन्होने बाबासाहब के भाषण सुने और भाषण सुनकर उन्हे यह लगा कि यही वह शख्स है जो इस देश से जातिवाद समाप्त कर सकता है.दीनाभानाजी ने बाबासाहब के विचार जाने समझे और बाबासाहब के निर्वाण के बाद भटकते भटकते पूना आ गये और पूना मे गोला बारूद फैक्टरी (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन – DRDO) मे सफाई कर्मचारी के रूप मे सर्विस प्रारंभ की. जहां रामदासिया चमार मा० कांशीराम साहब (15.03.1934 – 09.10.2006) रोपड़ (रूपनगर) पंजाब निवासी क्लास वन आॅफिसर थे लेकिन कांशीराम जी को बाबासहाब कौन हैं ? यह पता नही था. उस समय अंबेडकर जयंती की छुट्टी की वजह से दीनाभाना जी ने इतना हंगामा किया कि जिसकी वजह से दीनाभाना जी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. इस बात पर कांशीराम जी नजर रखे हुये थे उन्होने दीनाभाना जी से पूछा कि यह बाबासाहब कौन हैं जिनकी वजह से तेरी नौकरी चली गयी. दीनाभाना जी व उनके साथी विभाग में ही कार्यरत महार जाति में जन्मे नागपुर, महाराष्ट्र निवासी मा० डी०के० खापर्डे जी (13.05.1939 – 29.02.2000) जो बामसेफ के द्वितीय संस्थापक अध्यक्ष थे, ने कांशीराम जी को बाबासाहब की ‘जाति विच्छेद’ नाम की पुस्तक दी जो कांशीराम जी ने रात भर में कई बार पढ़ी और सुबह ही दीनाभाना जी के मिलने पर बोले दीना तुझे छुट्टी भी और नौकरी भी दिलाऊगा और इस देश मे बाबासाहब की जयंती की छुट्टी न देने वाले की जब तक छुट्टी न कर दूं तब तक चैन से नही बैेठूगा क्योकि यह तेरे साथ साथ मेरी भी बात है तू चुहड़ा है तो मैं भी रामदासिया चमार हूं. कांशीराम साहब ने नौकरी छोड दी और बाबासाहब के मिशन को ‘बामसेफ’ संगठन बनाकर पूरे देश मे फैलाया उसके संस्थापक सदस्य दीनाभाना जी थे. इस महापुरुष का परिनिर्वाण पूना में 29 अगस्त 2006 को हुआ. यदि दीनाभाना जी न होते तो न बामसेफ होता और न ही व्यवस्था परिवर्तन हेतु अंबेडकरवादी जनान्दोलन चल रह होता. इस देश में जय भीम! का नारा भी गायब हो गया होता और न आज ब्राह्मणों की नाक में दम करने वाला जय मूलनिवासी! का नारा होता. सभी वाल्मीकि भाईयो से निवेदन है कि तथाकथित अपने महापुरुष रामायण के रचयिता वाल्मीकि एवं मा० दीनाभान जी संस्थापक सदस्य बामसेफ से प्रेरणा लेकर गंदे और नीच समझे जाने वाले कर्मों को छोड़ने का प्रयास करते हुए शिक्षित बनो! संगठित रहो! संघर्ष करो! के सिध्दांतो पर चल कर अपनी व अपने मूलनिवासी समाज की उन्नति में एक मिसाल कायम करने का भरसक प्रयास करें.

अब फांसी पर चढ़ेंगे बच्चियों के बलात्कारी

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चंडीगढ़। हरियाणा में अब 12 साल या उससे कम उम्र की लड़की के साथ रेप करने वाले को ‘मौत की सजा’ मिलेगी. खट्टर सरकार ने बच्चियों के बलात्कारियों को मौत की सजा देने के प्रावधान से संबंधित कानून लाने के एक प्रस्ताव को कल मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के नेतृत्व में हुई राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक में यौन अपराधों से जुड़े मौजूदा आपराधिक कानूनों को और कड़ा करने का भी फैसला किया गया.

 

बिहारः पुलिस की गिरफ्त में पहुंचा नशेड़ी भाजपा नेता

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पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 9 स्कूली बच्चों की मौत के आरोपी मनोज बैठा ने आज 28 फरवरी को पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. मनोज बैठा ने मंगलवार की देर रात एक बजे के करीब मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार के सरकारी आवास पर आत्मसर्पण कर दिया. दुर्घटना में आरोपी को भी चोटें आने की बात कह कर उसे श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज से पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है.

हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में भर्ती मनोज बैठा के चेहरे पर चोट के निशान हैं. मीडिर्किमयों द्वारा चोट के संबंध में सवाल पूछे जाने पर वह चुप्पी साधे रहा. यह पूछे जाने पर कि जिस वाहन से बच्चों की मौत हुई, उसे वह खुद शराब पीकर चला रहा था? मनोज ने इशारों में इनकार कर दिया और कहा कि वह शराब नहीं पीता है. तीन दिनों तक फरार रहने और आत्मसमर्पण में देरी पर पूछे गए सवाल का भी उसने कोई जवाब नहीं दिया. हादसे में घायल एक बच्ची के पिता मोहम्मद शाहिद अंसारी ने मनोज बैठा के लिए उम्रकैद की मांग की है. इस हादसे में उनके पांच भतीजे-भतीजियों की भी मौत हो गई थी. शाहिद के मुताबिक घायल बच्ची ने मनोज बैठा द्वारा ही गाड़ी चलाने की बात कही है. गौरतलब है कि मनोज बैठा ने एक बूढ़ी महिला को धक्का मारने के बाद फरार होने के क्रम में सड़क पार करने के लिए किनारे खड़े स्कूली बच्चों को कुचल दिया था.

सीबीआई की कैद में चिदंबरम के बेटे कार्ति, भाजपा नेता बोला सोनिया, रॉबर्ट वाड्रा की बारी

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नई दिल्ली। मनी लॉन्डरिंग के आरोप में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया है. मनी लॉन्डरिंग केस की जांच में सहयोग न करने के मामले में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के बेटे कार्ति चिदम्बरम को गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने बुधवार को कार्ति चिदम्बरम की गिरफ्तारी चेन्नई एयरपोर्ट से की है. कार्ति की गिरफ्तारी के बार भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है तो वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वह इन सब से डरने वाली नहीं है.

कार्ति चिदम्बरम की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ऐलान किया कि यह तो अभी केवल झांकी है. तजिंदर बग्गा ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा “कार्ति चिदम्बरम तो झांकी है, सोनिया, रॉबर्ट बाकी हैं.”

वहीं कार्ति की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस नाखुश है और इसे प्रतिशोध की राजनीति बता रही है. इस पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं की गई है. यह एक कानूनी मामला है और संविधान से बढ़कर कुछ नहीं है. जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं.

करन 

DU की लड़की पर गुब्बारे में वीर्य भरकर फेंका

नई दिल्ली। होली के पहले आई एक खबर ने होली के बदलते चरित्र को लेकर चिंता पैदा कर दी है. दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज की एक छात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि अज्ञात लोगों के एक समूह ने उसके ऊपर हाल में ‘‘वीर्य से भरा’’ गुब्बारा फेंका था.

 पूर्वोत्तर की रहने वाली लड़की ने 24 फरवरी को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ‘‘मैं अमर कालोनी मार्केट में अपने एक मित्र के साथ एक कैफे में दोपहर भोज के लिए गई थी. जब मैं रिक्शे में बैठकर वापस आ रही थी तो कुछ लोग आए और मेरी तरफ तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा फेंक दिया जो मेरे कूल्हे से टकराया और यह फट गया तथा इसमें भरी चीज के अंश मेरी ड्रेस पर फैल गए.’’

उसने कहा, ‘‘मेरी काली लैगिंग पर सफेद निशान पड़ गए. मैं अनुमान नहीं लगा सकी कि असल में यह क्या था. जब मैं हॉस्टल पहुंची तो मैंने अपनी एक अन्य मित्र को वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके जाने की बात करते सुना.’’

इस बारे में पुलिस ने कहा कि मामला उसके संज्ञान में आया है और वह लड़की से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिससे कि जांच शुरू हो सके. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है.’’

यूपी उपचुनावों में गठबंधन का दौर शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दल गोलबंद होने लगे हैं. महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों में समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है. साथ ही साथ पार्टी ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों से अपील की है कि वे भाजपा-संघ के सांप्रदायिक गठजोड़ को हराने के लिए एकजुट हो जाएं.

राकापा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीक्षित ने एक बयान जारी कर समर्थन देने की बात कही. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सभी धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भाजपा-संघ के गठजोड़ को परस्त करने में अपनी पूरी ताकत लगा दें. उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी अपील किया कि कांग्रेस नेतृत्व को समझदारी से काम लेते हुए अपने दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस ले लेने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक दलों की एकता के आगे फासीवादी भाजपा हार जाए.

 

यूपीः मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह’ में दुल्हनों को दिए लोहे के जेवर!

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औरेया जिले में 18 फरवरी को कराए गए ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ में प्रशासन पर धोखा देने का आरोप लगा है. असल में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत औरेया प्रशासन ने 48 जोड़ों की शादी करायी थी. इस कार्यक्रम में दुल्हनों को प्रशासन की ओर से चांदी की बिछिया और पायल दी गई थी. लेकिन जब इन नवविवाहिताओं ने इन बिछिया और पायलों की सुनार से जांच करायी तो पता चला कि ये आभूषण चांदी के नहीं बल्कि लोहे के हैं. सच्चाई पता लगने के बाद महिलाओं ने इसकी शिकायत औरेया के जिलाधिकारी से की जिसके बाद मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

वहीं मामले के सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने बिछिया और पायल की आपूर्ति करने वाली फर्म की जांच और इसके बाद फर्म को प्रतिबंधित कर उसके भुगतान पर रोक लगाने की बात कही है. जिला समाज कल्याण अधिकारी का कहना है कि ई-टेंडरिंग के जरिए इटावा की एक फर्म को सामूहिक विवाह के लिए बिछिया, पायल, बर्तन, डिनर सेट, बक्सा और लहंगा चुनरी की आपूर्ति का ठेका दिया गया था. फिलहाल फर्म की जांच की जा रही है.

गुजरात में जातिवादी गुंडों को खटकी दलितों की रौबिली मूंछे

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गुजरात में जातिगत भेदभाव का एक और मामला सामने आया है. साबरकांठा जिले के इडार तालुका में ठाकुर समुदाय के आठ युवकों ने जबर्दस्ती एक दलित युवक की मूंछ मुड़वा दी और उसके साथ मारपीट की. 23 साल के इस पीड़ित युवक का नाम अल्पेश पांड्या है और वह सोशल वर्क में पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहा है. युवक की न सिर्फ मूंछ मुंडवाई गई, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

एफआईआर के मुताबिक पांड्या अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से मंदिर जा रहा था, तभी रास्ते में ठाकुर समुदाय के युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया और उन्हें गाली देना शुरू कर दिया. लाठी-डंडों और लोहे की छड़ों से लैस युवकों ने उससे कहा कि वह ऐसी रौबीली मूंछ कैसे रख सकता है. इतने में कुछ युवक आगे आए और उसे डंडों से पीटने लगे. पांड्या ने भागने की कोशिश की तो आरोपी युवक उसे पास के एक घर में घसीटकर ले गए और उसकी मूंछें रेजर से मूड़ दीं.

पांड्या ने कहा, ‘मुझे बेरहमी से पीटा गया और मेरी मूंछ हटा दी गईं क्योंकि मैं दलित हूं.’ पांड्या ने कहा कि मेरी गांव में किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और न ही ठाकुर समुदाय के किसी व्यक्ति से कभी झगड़ा किया. उन्होंने बताया, ‘मैं दो साल से मूंछ बढ़ा रहा था लेकिन अब मेरे मूंछ पर ताव देने और चश्मा लगाकर गांव में घूमने से उन्हें दिक्कत होने लगी. मेरे माता-पिता को भी मेरी मूंछ के लिए मारा-पीटा गया.’

गोरल गांव में हुई घटना को लेकर साबरकांठा पुलिस ने आठों युवकों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. पिछले साल अक्टूबर में दो दलित युवकों को भी गुजरात के ही लिंबोदरा और गांधीनगर में मारपीट और भेदभाव का सामना करना पड़ा था.

बिहार की राजनीति से बड़ी खबर, लालू खेमे में पहुंचे मांझी

बिहार। भाजपा और जदयू के गठबंधन और लालू यादव के जेल जाने के बाद बिहार की राजनीति में तेजी से बदलाव आना शुरू हो गया है. गठबंधन में अपनी अनदेखी से नाराज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने अब लालू खेमें में जाने की घोषणा कर दी है. राबड़ी देवी के साथ हुई बैठक के बाद हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने एनडीए छोड़ने की घोषणा की. माझी ने कहा कि वे औपचारिक रूप से गुरूवार 1 मार्च को महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे.

जीतन राम मांझी गठबंधन में खुद को महत्व नहीं दिए जाने के कारण पिछले काफी वक्त से एनडीए से नाराज चल रहे थे. बिहार की जहानाबाद सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए भी मांझी ने टिकट की मांग की थी लेकिन उनकी पार्टी को टिकट नहीं मिला. नीतीश कुमार के एनडीए का हिस्सा बनने के बाद मांझी की मुश्किलें और बढ़ गई है.

नीतीश कुमार से अलगाव के बाद मांझी ने जेडीयू से अलग हो कर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा बनाया था. 2015 के बिहार विधानसभा से पहले वह लालू-नीतीश के महागठबंधन के खिलाफ एनडीए में शामिल हो गए थे. एनडीए ने विधानसभा चुनाव में जीतन राम मांझी की पार्टी को 20 सीट दिया, लेकिन उन्हें सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिल पाई थी. मांझी खुद दो सीटों पर चुनाव लड़े थे लेकिन एक ही सीट पर जीत पाए थे.

दूसरी ओर लालू यादव के जेल जाने के बाद राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव लगातार महागठबंधन को मजबूत करने में लगे हैं. और भाजपा-नीतीश विरोधी खेमें को एकजुट करने में जुटे हैं. मांझी का महागठबंधन में आना ऐसी ही कवायद है.

कांग्रेस ने बसपा को दिया छत्तीसगढ़ में गठबंधन का ऑफर

नई दिल्ली। आमतौर पर गठबंधन से दूर रहने वाली बसपा ने लंबे समय के बाद कर्नाटक में जेडीएस के साथ समझौता किया है. इस गठबंधन की जहां काफी चर्चा हो रही है तो वहीं अब अन्य दल भी दूसरे राज्यों में बसपा का साथ चाहने लगे हैं. इस साल के आखिर में छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनाव में भी एक प्रमुख पार्टी बहुजन समाज पार्टी से गठबधन करना चाहती है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बसपा (बहुजन समाज पार्टी) को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का आफर दिया है. इस बारे में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि बसपा के नेता व कार्यकर्ताओं से चर्चा हुई है. साथ में चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है. हालांकि इस बारे में दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता भाजपा को रोकने के लिए इस गठबंधन को जरूरी बता रहे हैं.

असल में कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में लगातार हार का सामना कर रही है. प्रदेश में दलितों के बीच बहुजन समाज पार्टी लोकप्रिय है और बसपा भी दलित वोटों को हासिल करने में सफल रही है. यही कारण है तीन बार से हार झेलने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार जीत के लिए हर दांव लगाने के लिए तैयार है.

योगी ने लखनऊ चमकाया लेकिन दलित आइकन्स की मूर्तियों पर अंधेरा छाया

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लखनऊ। इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों को लुभाने के लिए लखनऊ चमक रहा है, मायावती के दौर में बने स्मारकों को भी बेहतरीन ढंग से सजाया गया है. लेकिन इन्हीं स्मारकों और चौराहों पर लगी दलित महापुरुषों की मूर्तियां अंधेरे में रह गई हैं या फिर छोड़ दी गई हैं. चलिये योगी सरकार सबको भूल गई, लेकिन कम से कम भीम राव अंबेडकर को तो ध्यान में रखते. जिन्हें वक्त बेवक्त दलिट वोटों को जोड़ने के लिए याद करते रहते हैं.

दरअसल लखनऊ में हो रहे इन्वेस्टर्स समिट के लिए योगी सरकार ने अच्छी खासी तैयारी की. एयरपोर्ट से लेकर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान तक और हर उन इलाकों को सजाया गया जहां इन्वेस्टर्स को घुमाया जा सके. इसमें कोई शक नहीं है कि सरकार ने इसके लिए अच्छी खासी मेहनत औऱ पैसा खर्च किया. समिट सफल भी माना जा रहा है. इस साज सज्जा में सबसे बड़ा योगदान मायावती के मुख्यमंत्री काल में बने स्मारकों और पार्कों का भी है, जो लखनऊ की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं.

योगी सरकार ने पार्कों स्मारकों को तो खूब सजाया, दीवार से लेकर खंभे तक रोशनी से नहा गए. लेकिन स्मारकों और पार्कों के बीच लगी अंबेडकर, नारायण गुरु, ज्योतिबा फूले जैसे महापुरुषों की मूर्तियां रोशनी को तरस गईं. मूर्तियों के प्लेटफार्म तक पर स्ट्रिप लाइट लगाई गई. लेकिन मूर्तियों पर एक भी ऐसी लाइट नहीॆ लगी जिससे कम से कम उनके चेहरे तो दिख सके.

मुख्यमंत्री काल में मायावती ने दलित उत्थान के लिए काम करने वाले महापुरुषों की प्रतिमाएं चौराहों और पार्कों में लगवाई थीं. यही नहीं मायावती ने इनके बीच अपनी और कांशीराम की भी मूर्तियां लगवा दी थीं, जो काफी चर्चा में रही. शायद ये पहला मामला रहा जब किसी ने खुद की मूर्तियां लगवाईं.

योगी सरकार का मायावती से तो परहेज करना लाजिमी है लेकिन दलित महापुरुषों की मूर्तियों को रोशनी से महरूम करने का तुक समझ नहीं आता.

उपचुनावः मौर्या की सभा में लोगों ने फेंके टमाटर

इलाहबाद। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि फूलपुर और इलाहबाद लोकसभा सीट पर उपचुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आएगा. 11 मार्च को होने वाले मतदान को लेकर उन्होंने दावा किया है कि पार्टी इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा मतों से जीत दर्ज करेगी. हालांकि डिप्टी सीएम की सभा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें लोग उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.

वीडियो इलाहाबाद का बताया जाता है, जहां मौर्य चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे. एक टीवी चैनल द्वारा जारी किए इस वीडियो में लोग उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. बताया जाता है कि छात्रों ने उनके खिलाफ ना सिर्फ नारेबाजी की बल्कि टमाटर और कुर्सियां भी फेंकी. इसपर मौर्य ने नाराज छात्रों को मंच बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया.

गौरतलब है कि इससे पहले उप मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि लोग भाजपा के जीत के अंतर की बात कर रह हैं. इससे साफ की दोनों सीटों पर भाजपा ही जीत दर्ज करेगी. यहां 60 फीसदी वोटर भाजपा के साथ है. उपचुनाव में भाजपा को मिलने वाली जीत साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए मजबूत नींव रखेगी.