जयंती विशेष: दीनाभाना न होते तो बहुजन आंदोलन को कांशीराम न मिलते

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यह शख्स हैं जयपुर, राजस्थान में 28 फरवरी 1928 को जन्मे बामसेफ के संस्थापक सदस्य मा० दीना भाना जी. इन्होने बामसेफ संस्थापक अध्यक्ष मान्यवर कांशीराम साहब को बाबासाहब के विचारो से प्रेरित किया. मा० कांशीराम साहब ने बाबा साहब के विचारो को पूरे भारत में फैलाया.

आज पूरे देश मे जय भीम, जय मूलनिवासी की जो आग लगी है उसमे चिंगारी लगाने का काम वाल्मीकि समाज के महापुरूष मा० दीना भाना जी ने किया. दीनाभाना जी जिद्दी किस्म के शख्स थे. बचपन मे उनके पिताजी सवर्णों के यहां दूध निकालने जाते थे इससे उनके मन मे भी भैंस पालने की इच्छा हुई उन्होने पिताजी से जिद्द करके एक भैस खरीदवा ली लेकिन जातिवाद की वजह से भैस दूसरे ही दिन बेचनी पडी. कारण ? जिस सवर्ण के यहा उनके पिताजी दूध निकालने जाते थे उससे देखा नहीं गया उनके पिताजी को बुलाकर कहा तुम छोटी जाति के लोग हमारी बराबरी करोगे तुम भंगी लोग सुअर पालने वाले भैस पालोगे यह भैस अभी बेच दो उनके पिता ने अत्यधिक दबाब के कारण भैस बेच दी. यह बात दीनाभाना जी के दिल मे चुभ गयी उन्होने घर छोड दिया और दिल्ली भाग गए.

वहां उन्होने बाबासाहब के भाषण सुने और भाषण सुनकर उन्हे यह लगा कि यही वह शख्स है जो इस देश से जातिवाद समाप्त कर सकता है.दीनाभानाजी ने बाबासाहब के विचार जाने समझे और बाबासाहब के निर्वाण के बाद भटकते भटकते पूना आ गये और पूना मे गोला बारूद फैक्टरी (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन – DRDO) मे सफाई कर्मचारी के रूप मे सर्विस प्रारंभ की. जहां रामदासिया चमार मा० कांशीराम साहब (15.03.1934 – 09.10.2006) रोपड़ (रूपनगर) पंजाब निवासी क्लास वन आॅफिसर थे लेकिन कांशीराम जी को बाबासहाब कौन हैं ? यह पता नही था. उस समय अंबेडकर जयंती की छुट्टी की वजह से दीनाभाना जी ने इतना हंगामा किया कि जिसकी वजह से दीनाभाना जी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. इस बात पर कांशीराम जी नजर रखे हुये थे उन्होने दीनाभाना जी से पूछा कि यह बाबासाहब कौन हैं जिनकी वजह से तेरी नौकरी चली गयी. दीनाभाना जी व उनके साथी विभाग में ही कार्यरत महार जाति में जन्मे नागपुर, महाराष्ट्र निवासी मा० डी०के० खापर्डे जी (13.05.1939 – 29.02.2000) जो बामसेफ के द्वितीय संस्थापक अध्यक्ष थे, ने कांशीराम जी को बाबासाहब की ‘जाति विच्छेद’ नाम की पुस्तक दी जो कांशीराम जी ने रात भर में कई बार पढ़ी और सुबह ही दीनाभाना जी के मिलने पर बोले दीना तुझे छुट्टी भी और नौकरी भी दिलाऊगा और इस देश मे बाबासाहब की जयंती की छुट्टी न देने वाले की जब तक छुट्टी न कर दूं तब तक चैन से नही बैेठूगा क्योकि यह तेरे साथ साथ मेरी भी बात है तू चुहड़ा है तो मैं भी रामदासिया चमार हूं. कांशीराम साहब ने नौकरी छोड दी और बाबासाहब के मिशन को ‘बामसेफ’ संगठन बनाकर पूरे देश मे फैलाया उसके संस्थापक सदस्य दीनाभाना जी थे. इस महापुरुष का परिनिर्वाण पूना में 29 अगस्त 2006 को हुआ. यदि दीनाभाना जी न होते तो न बामसेफ होता और न ही व्यवस्था परिवर्तन हेतु अंबेडकरवादी जनान्दोलन चल रह होता. इस देश में जय भीम! का नारा भी गायब हो गया होता और न आज ब्राह्मणों की नाक में दम करने वाला जय मूलनिवासी! का नारा होता. सभी वाल्मीकि भाईयो से निवेदन है कि तथाकथित अपने महापुरुष रामायण के रचयिता वाल्मीकि एवं मा० दीनाभान जी संस्थापक सदस्य बामसेफ से प्रेरणा लेकर गंदे और नीच समझे जाने वाले कर्मों को छोड़ने का प्रयास करते हुए शिक्षित बनो! संगठित रहो! संघर्ष करो! के सिध्दांतो पर चल कर अपनी व अपने मूलनिवासी समाज की उन्नति में एक मिसाल कायम करने का भरसक प्रयास करें.

अब फांसी पर चढ़ेंगे बच्चियों के बलात्कारी

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चंडीगढ़। हरियाणा में अब 12 साल या उससे कम उम्र की लड़की के साथ रेप करने वाले को ‘मौत की सजा’ मिलेगी. खट्टर सरकार ने बच्चियों के बलात्कारियों को मौत की सजा देने के प्रावधान से संबंधित कानून लाने के एक प्रस्ताव को कल मंजूरी दे दी. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के नेतृत्व में हुई राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक में यौन अपराधों से जुड़े मौजूदा आपराधिक कानूनों को और कड़ा करने का भी फैसला किया गया.

 

बिहारः पुलिस की गिरफ्त में पहुंचा नशेड़ी भाजपा नेता

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पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में 9 स्कूली बच्चों की मौत के आरोपी मनोज बैठा ने आज 28 फरवरी को पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. मनोज बैठा ने मंगलवार की देर रात एक बजे के करीब मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार के सरकारी आवास पर आत्मसर्पण कर दिया. दुर्घटना में आरोपी को भी चोटें आने की बात कह कर उसे श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज से पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है.

हॉस्पिटल के जनरल वार्ड में भर्ती मनोज बैठा के चेहरे पर चोट के निशान हैं. मीडिर्किमयों द्वारा चोट के संबंध में सवाल पूछे जाने पर वह चुप्पी साधे रहा. यह पूछे जाने पर कि जिस वाहन से बच्चों की मौत हुई, उसे वह खुद शराब पीकर चला रहा था? मनोज ने इशारों में इनकार कर दिया और कहा कि वह शराब नहीं पीता है. तीन दिनों तक फरार रहने और आत्मसमर्पण में देरी पर पूछे गए सवाल का भी उसने कोई जवाब नहीं दिया. हादसे में घायल एक बच्ची के पिता मोहम्मद शाहिद अंसारी ने मनोज बैठा के लिए उम्रकैद की मांग की है. इस हादसे में उनके पांच भतीजे-भतीजियों की भी मौत हो गई थी. शाहिद के मुताबिक घायल बच्ची ने मनोज बैठा द्वारा ही गाड़ी चलाने की बात कही है. गौरतलब है कि मनोज बैठा ने एक बूढ़ी महिला को धक्का मारने के बाद फरार होने के क्रम में सड़क पार करने के लिए किनारे खड़े स्कूली बच्चों को कुचल दिया था.

सीबीआई की कैद में चिदंबरम के बेटे कार्ति, भाजपा नेता बोला सोनिया, रॉबर्ट वाड्रा की बारी

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नई दिल्ली। मनी लॉन्डरिंग के आरोप में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया है. मनी लॉन्डरिंग केस की जांच में सहयोग न करने के मामले में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के बेटे कार्ति चिदम्बरम को गिरफ्तार किया है. सीबीआई ने बुधवार को कार्ति चिदम्बरम की गिरफ्तारी चेन्नई एयरपोर्ट से की है. कार्ति की गिरफ्तारी के बार भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है तो वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वह इन सब से डरने वाली नहीं है.

कार्ति चिदम्बरम की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ऐलान किया कि यह तो अभी केवल झांकी है. तजिंदर बग्गा ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा “कार्ति चिदम्बरम तो झांकी है, सोनिया, रॉबर्ट बाकी हैं.”

वहीं कार्ति की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस नाखुश है और इसे प्रतिशोध की राजनीति बता रही है. इस पर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं की गई है. यह एक कानूनी मामला है और संविधान से बढ़कर कुछ नहीं है. जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं.

करन 

DU की लड़की पर गुब्बारे में वीर्य भरकर फेंका

नई दिल्ली। होली के पहले आई एक खबर ने होली के बदलते चरित्र को लेकर चिंता पैदा कर दी है. दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज की एक छात्रा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि अज्ञात लोगों के एक समूह ने उसके ऊपर हाल में ‘‘वीर्य से भरा’’ गुब्बारा फेंका था.

 पूर्वोत्तर की रहने वाली लड़की ने 24 फरवरी को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, ‘‘मैं अमर कालोनी मार्केट में अपने एक मित्र के साथ एक कैफे में दोपहर भोज के लिए गई थी. जब मैं रिक्शे में बैठकर वापस आ रही थी तो कुछ लोग आए और मेरी तरफ तरल पदार्थ से भरा गुब्बारा फेंक दिया जो मेरे कूल्हे से टकराया और यह फट गया तथा इसमें भरी चीज के अंश मेरी ड्रेस पर फैल गए.’’

उसने कहा, ‘‘मेरी काली लैगिंग पर सफेद निशान पड़ गए. मैं अनुमान नहीं लगा सकी कि असल में यह क्या था. जब मैं हॉस्टल पहुंची तो मैंने अपनी एक अन्य मित्र को वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके जाने की बात करते सुना.’’

इस बारे में पुलिस ने कहा कि मामला उसके संज्ञान में आया है और वह लड़की से संपर्क करने की कोशिश कर रही है जिससे कि जांच शुरू हो सके. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें अभी तक इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है.’’

यूपी उपचुनावों में गठबंधन का दौर शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्षी दल गोलबंद होने लगे हैं. महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों में समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया है. साथ ही साथ पार्टी ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों से अपील की है कि वे भाजपा-संघ के सांप्रदायिक गठजोड़ को हराने के लिए एकजुट हो जाएं.

राकापा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीक्षित ने एक बयान जारी कर समर्थन देने की बात कही. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में सभी धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भाजपा-संघ के गठजोड़ को परस्त करने में अपनी पूरी ताकत लगा दें. उन्होंने कांग्रेस पार्टी से भी अपील किया कि कांग्रेस नेतृत्व को समझदारी से काम लेते हुए अपने दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस ले लेने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक दलों की एकता के आगे फासीवादी भाजपा हार जाए.

 

यूपीः मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह’ में दुल्हनों को दिए लोहे के जेवर!

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औरेया जिले में 18 फरवरी को कराए गए ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ में प्रशासन पर धोखा देने का आरोप लगा है. असल में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत औरेया प्रशासन ने 48 जोड़ों की शादी करायी थी. इस कार्यक्रम में दुल्हनों को प्रशासन की ओर से चांदी की बिछिया और पायल दी गई थी. लेकिन जब इन नवविवाहिताओं ने इन बिछिया और पायलों की सुनार से जांच करायी तो पता चला कि ये आभूषण चांदी के नहीं बल्कि लोहे के हैं. सच्चाई पता लगने के बाद महिलाओं ने इसकी शिकायत औरेया के जिलाधिकारी से की जिसके बाद मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

वहीं मामले के सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने बिछिया और पायल की आपूर्ति करने वाली फर्म की जांच और इसके बाद फर्म को प्रतिबंधित कर उसके भुगतान पर रोक लगाने की बात कही है. जिला समाज कल्याण अधिकारी का कहना है कि ई-टेंडरिंग के जरिए इटावा की एक फर्म को सामूहिक विवाह के लिए बिछिया, पायल, बर्तन, डिनर सेट, बक्सा और लहंगा चुनरी की आपूर्ति का ठेका दिया गया था. फिलहाल फर्म की जांच की जा रही है.

गुजरात में जातिवादी गुंडों को खटकी दलितों की रौबिली मूंछे

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गुजरात में जातिगत भेदभाव का एक और मामला सामने आया है. साबरकांठा जिले के इडार तालुका में ठाकुर समुदाय के आठ युवकों ने जबर्दस्ती एक दलित युवक की मूंछ मुड़वा दी और उसके साथ मारपीट की. 23 साल के इस पीड़ित युवक का नाम अल्पेश पांड्या है और वह सोशल वर्क में पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहा है. युवक की न सिर्फ मूंछ मुंडवाई गई, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

एफआईआर के मुताबिक पांड्या अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से मंदिर जा रहा था, तभी रास्ते में ठाकुर समुदाय के युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया और उन्हें गाली देना शुरू कर दिया. लाठी-डंडों और लोहे की छड़ों से लैस युवकों ने उससे कहा कि वह ऐसी रौबीली मूंछ कैसे रख सकता है. इतने में कुछ युवक आगे आए और उसे डंडों से पीटने लगे. पांड्या ने भागने की कोशिश की तो आरोपी युवक उसे पास के एक घर में घसीटकर ले गए और उसकी मूंछें रेजर से मूड़ दीं.

पांड्या ने कहा, ‘मुझे बेरहमी से पीटा गया और मेरी मूंछ हटा दी गईं क्योंकि मैं दलित हूं.’ पांड्या ने कहा कि मेरी गांव में किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और न ही ठाकुर समुदाय के किसी व्यक्ति से कभी झगड़ा किया. उन्होंने बताया, ‘मैं दो साल से मूंछ बढ़ा रहा था लेकिन अब मेरे मूंछ पर ताव देने और चश्मा लगाकर गांव में घूमने से उन्हें दिक्कत होने लगी. मेरे माता-पिता को भी मेरी मूंछ के लिए मारा-पीटा गया.’

गोरल गांव में हुई घटना को लेकर साबरकांठा पुलिस ने आठों युवकों के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. पिछले साल अक्टूबर में दो दलित युवकों को भी गुजरात के ही लिंबोदरा और गांधीनगर में मारपीट और भेदभाव का सामना करना पड़ा था.

बिहार की राजनीति से बड़ी खबर, लालू खेमे में पहुंचे मांझी

बिहार। भाजपा और जदयू के गठबंधन और लालू यादव के जेल जाने के बाद बिहार की राजनीति में तेजी से बदलाव आना शुरू हो गया है. गठबंधन में अपनी अनदेखी से नाराज प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने अब लालू खेमें में जाने की घोषणा कर दी है. राबड़ी देवी के साथ हुई बैठक के बाद हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने एनडीए छोड़ने की घोषणा की. माझी ने कहा कि वे औपचारिक रूप से गुरूवार 1 मार्च को महागठबंधन में शामिल हो जाएंगे.

जीतन राम मांझी गठबंधन में खुद को महत्व नहीं दिए जाने के कारण पिछले काफी वक्त से एनडीए से नाराज चल रहे थे. बिहार की जहानाबाद सीट पर हो रहे उपचुनाव के लिए भी मांझी ने टिकट की मांग की थी लेकिन उनकी पार्टी को टिकट नहीं मिला. नीतीश कुमार के एनडीए का हिस्सा बनने के बाद मांझी की मुश्किलें और बढ़ गई है.

नीतीश कुमार से अलगाव के बाद मांझी ने जेडीयू से अलग हो कर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा बनाया था. 2015 के बिहार विधानसभा से पहले वह लालू-नीतीश के महागठबंधन के खिलाफ एनडीए में शामिल हो गए थे. एनडीए ने विधानसभा चुनाव में जीतन राम मांझी की पार्टी को 20 सीट दिया, लेकिन उन्हें सिर्फ एक सीट पर ही जीत मिल पाई थी. मांझी खुद दो सीटों पर चुनाव लड़े थे लेकिन एक ही सीट पर जीत पाए थे.

दूसरी ओर लालू यादव के जेल जाने के बाद राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव लगातार महागठबंधन को मजबूत करने में लगे हैं. और भाजपा-नीतीश विरोधी खेमें को एकजुट करने में जुटे हैं. मांझी का महागठबंधन में आना ऐसी ही कवायद है.

कांग्रेस ने बसपा को दिया छत्तीसगढ़ में गठबंधन का ऑफर

नई दिल्ली। आमतौर पर गठबंधन से दूर रहने वाली बसपा ने लंबे समय के बाद कर्नाटक में जेडीएस के साथ समझौता किया है. इस गठबंधन की जहां काफी चर्चा हो रही है तो वहीं अब अन्य दल भी दूसरे राज्यों में बसपा का साथ चाहने लगे हैं. इस साल के आखिर में छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनाव में भी एक प्रमुख पार्टी बहुजन समाज पार्टी से गठबधन करना चाहती है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बसपा (बहुजन समाज पार्टी) को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का आफर दिया है. इस बारे में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि बसपा के नेता व कार्यकर्ताओं से चर्चा हुई है. साथ में चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है. हालांकि इस बारे में दोनों पार्टियों का शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता भाजपा को रोकने के लिए इस गठबंधन को जरूरी बता रहे हैं.

असल में कांग्रेस पार्टी छत्तीसगढ़ में लगातार हार का सामना कर रही है. प्रदेश में दलितों के बीच बहुजन समाज पार्टी लोकप्रिय है और बसपा भी दलित वोटों को हासिल करने में सफल रही है. यही कारण है तीन बार से हार झेलने वाली कांग्रेस पार्टी इस बार जीत के लिए हर दांव लगाने के लिए तैयार है.

योगी ने लखनऊ चमकाया लेकिन दलित आइकन्स की मूर्तियों पर अंधेरा छाया

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लखनऊ। इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों को लुभाने के लिए लखनऊ चमक रहा है, मायावती के दौर में बने स्मारकों को भी बेहतरीन ढंग से सजाया गया है. लेकिन इन्हीं स्मारकों और चौराहों पर लगी दलित महापुरुषों की मूर्तियां अंधेरे में रह गई हैं या फिर छोड़ दी गई हैं. चलिये योगी सरकार सबको भूल गई, लेकिन कम से कम भीम राव अंबेडकर को तो ध्यान में रखते. जिन्हें वक्त बेवक्त दलिट वोटों को जोड़ने के लिए याद करते रहते हैं.

दरअसल लखनऊ में हो रहे इन्वेस्टर्स समिट के लिए योगी सरकार ने अच्छी खासी तैयारी की. एयरपोर्ट से लेकर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान तक और हर उन इलाकों को सजाया गया जहां इन्वेस्टर्स को घुमाया जा सके. इसमें कोई शक नहीं है कि सरकार ने इसके लिए अच्छी खासी मेहनत औऱ पैसा खर्च किया. समिट सफल भी माना जा रहा है. इस साज सज्जा में सबसे बड़ा योगदान मायावती के मुख्यमंत्री काल में बने स्मारकों और पार्कों का भी है, जो लखनऊ की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं.

योगी सरकार ने पार्कों स्मारकों को तो खूब सजाया, दीवार से लेकर खंभे तक रोशनी से नहा गए. लेकिन स्मारकों और पार्कों के बीच लगी अंबेडकर, नारायण गुरु, ज्योतिबा फूले जैसे महापुरुषों की मूर्तियां रोशनी को तरस गईं. मूर्तियों के प्लेटफार्म तक पर स्ट्रिप लाइट लगाई गई. लेकिन मूर्तियों पर एक भी ऐसी लाइट नहीॆ लगी जिससे कम से कम उनके चेहरे तो दिख सके.

मुख्यमंत्री काल में मायावती ने दलित उत्थान के लिए काम करने वाले महापुरुषों की प्रतिमाएं चौराहों और पार्कों में लगवाई थीं. यही नहीं मायावती ने इनके बीच अपनी और कांशीराम की भी मूर्तियां लगवा दी थीं, जो काफी चर्चा में रही. शायद ये पहला मामला रहा जब किसी ने खुद की मूर्तियां लगवाईं.

योगी सरकार का मायावती से तो परहेज करना लाजिमी है लेकिन दलित महापुरुषों की मूर्तियों को रोशनी से महरूम करने का तुक समझ नहीं आता.

उपचुनावः मौर्या की सभा में लोगों ने फेंके टमाटर

इलाहबाद। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि फूलपुर और इलाहबाद लोकसभा सीट पर उपचुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आएगा. 11 मार्च को होने वाले मतदान को लेकर उन्होंने दावा किया है कि पार्टी इस बार पहले के मुकाबले ज्यादा मतों से जीत दर्ज करेगी. हालांकि डिप्टी सीएम की सभा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें लोग उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.

वीडियो इलाहाबाद का बताया जाता है, जहां मौर्य चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे. एक टीवी चैनल द्वारा जारी किए इस वीडियो में लोग उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. बताया जाता है कि छात्रों ने उनके खिलाफ ना सिर्फ नारेबाजी की बल्कि टमाटर और कुर्सियां भी फेंकी. इसपर मौर्य ने नाराज छात्रों को मंच बुलाकर उनसे बातचीत की और उनकी समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया.

गौरतलब है कि इससे पहले उप मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि लोग भाजपा के जीत के अंतर की बात कर रह हैं. इससे साफ की दोनों सीटों पर भाजपा ही जीत दर्ज करेगी. यहां 60 फीसदी वोटर भाजपा के साथ है. उपचुनाव में भाजपा को मिलने वाली जीत साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए मजबूत नींव रखेगी.

आंकलन तो आपको करना है

भारत में सरकार तो भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी की भी बनी थी… बेशक झटके खा-खाकर. किंतु अटल जी ने चुनावी भाषणों में कांग्रेस के कार्यकाल की निन्दा तो जरूर की किंतु सरकार बनने के बाद वाजपेई जी ने खुले मन से स्वीकार किया कि स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद कांग्रेस के शासनकाल में देश हित में जो भी काम किए, उन्हें भुलाया जा ही नहीं सकता… उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए.

किंतु भाजपा के ही मोदी जी के आज के शासन में क्या हो रहा है? हिन्दू को मुसलमान से भिडाना/लड़ाना, किसानों के हक में भाषण तो करना पर करना कुछ नहीं, नौकरियां देने की एवज पकौड़े तलने के सुझाव, अतार्किक रूप से अचानक नोटबन्दी लागू करना, देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी और चौकसी को बा-ईज्जत देश से बाहर भेजना ही आज की भाजपा सरकार की उपलब्धि है. कमाल तो ये है जो शर्मनाक है, सब उसकी वकालत कर रहे हैं. मोदी जी और अमित शाह के तानाशाही रवैये के आगे भाजपा के तमाम शीर्ष नेताओं का नतमस्तक हो जाना, भाजपा के लिए तो अंतिम यात्रा जैसा ही सिद्ध होगा. बेहतर है भाजपा के ये तथाकथित शीर्ष नेता राजनीतिक मैदान से बाहर ही हो जाएं, अन्यथा इनका नाम लेवा तक भी कोई नहीं बचेगा.

आडवाणी हों, मुरली मनोहर जोशी या फिर यशवंत सिन्हा हों और शत्रुघ्न सिन्हा और उन जैसे न जाने और भी कितने ही भाजपाई हैं जो मोदी जी और शाह के रवैये से परेशान हैं.

आज की भाजपा सरकार सबकुछ बदल देना चाहती है. वो ये सिद्ध करना चाहती है कि भारत में सबसे पहले ट्रेन लाने वाली भाजपा है. कहना अतिशयोक्ति न होगा कि अब तो ये लगने लगा कि जिस व्यक्ति को अपने घर, अपने परगने, अपने जिले, अपने राज्य, अपने देश के हितों के इतर केवल अपनी और अपनी ही शानो-शौकत बनाए रखने की चिंता हो, ऐसा आदमी एक तानाशाह के अलावा कुछ और हो नहीं सकता. जो राजा शानो-शौकत के लिए दिन में चार-पाँच बार लिबास बदलता हो, वह देश का वफादार कैसे हो सकता है? यहां मोदी जी हिन्दुत्व की इस धारणा को नकारते हुए लगते है कि जो जैसे अपराध करेगा,उसे वैसा ही दंड मिलेगा. शायद मोदी जी को पुनर्जन्म वाली धारणा में कोई विश्वास नहीं है.

मोदी जी बेशक तानाशाह बनते हों किंतु वो हैं तो आर एस एस के दम पर ही ..वो केवल और केवल आर एस एस का मुखौटे भर हैं और यह भी कि आर एस एस तभी तक भारत में शासन में देखे जा सकते हैं, तबतक मोदी जैसे चाटुकार और स्वहित साधने वाले ही नहीं, आर एस एस को मूर्ख बनाने वाले मोदी जैसे लोग मिलते रहेंगे… कोई शक?

 आज न केवल केन्द्र में अपितु देश के 20-22 राज्यों में भाजपा का शासन है. …इस पर भाजपा इतरा रही है. भाजपा को याद रखना चाहिए कि भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई भागीदारी नहीं रही है. सो वो ज्यादा इतराए नहीं. देश का वोटर इतना भी सुशुप्त नहीं है कि देर तक किसी को सहन कर पाए.

आज की भाजपा सरकार देश में सबकुछ बदल देना चाहती है, वह भी शिक्षा प्रणाली/विषयों के माध्यम से… सड़कों के नाम, इमारतों के नाम यानी कि इतिहास को बदलने की कवायद. पर ये सफल होने वाली कवायद नहीं है. हिम्मत है तो बदलो इंडिया गेट का नाम, तोड़ सकते हो तो तोड़ो… लाल किला, जामा मस्जिद, कुतुब मीनार, पुराना किला, तुगलक की मजार, मीर की मजार, गालिब की मजार, देश का सर्वोच्च भवन..’संसद भवन’, साथ ही राष्ट्रपति भवन जो भारतीय सम्पदा तो है किंतु देन तो मुगलों और अंग्रेजों की है….भारत कुछ अपने द्वारा बनाई गई सम्पदा के नाम तो गिनाए? भारत के नेताओं ने तो धर्मिक और जातीय दुराव फैलाने के अलावा कभी कुछ किया ही नहीं. यहाँ तक कि गांधी जी द्वारा लिखित किताब ‘स्वराज हिन्द’ न केवल समाज विरोधी है अपितु देश के विकास में एक अवरोधक भी है.

-तेजपाल सिंह ‘तेज’-

कैंसर और इरादा फ़िल्म

ऐंगल्स ने कहा था कि किसी लेखक को अगर मारना है तो उसकी रचना पर चर्चा बन्द कर दो. एक चुप्पी बना लो. उसके पक्ष या विपक्ष में कोई चर्चा ही न करो. लेखक और उसका लिखा सब मर जायेगा. उस समय ऐंगल्स के साथ पूंजीवादी लेखकों ने ये ही तरीका अपनाया था.

इरादा फ़िल्म जो फरवरी 2017 में आई. जो एक बेहतरीन फ़िल्म है. इरादा फ़िल्म के साथ भी ये ही हुआ.

इरादा फ़िल्म जो कैंसर, कैंसर होने के कारण पर बनी फिल्म है. कैंसर के इस खेल में किस-किसको फायदा है इसका बखूभी चित्रण है. फ़िल्म ने जो मुद्दा उठाया उस पर चर्चा आज वक्त की जरूरत है. लेकिन वक्त पर और चर्चा पर उन्ही लोगो का कब्जा है जिनके मुनाफे के कारण कैंसर महामारी का रूप ले चुका है. कैमिकल फैक्ट्रियों के कचरे को जमीन में रिवर्स बोरिंग के जरिये पहुँचाने के कारण जमीन का पानी जहरीला हो गया. जो पानी और फसलों के माध्यम से ये जहर हमारे अंदर तक पहुंच रहा है जिस कारण कैंसर होती है. लेकिन आम इंसान के दिमाक मेपूंजीपतियों ने प्रचार के माध्यम से बैठा दिया कि कैंसर धूम्रपान और तम्बाकू से होता है. कैंसर धूम्रपान ओर तम्बाकू से भी होता है. लेकिन कैमिकल कचरा जमीन में पहूंचाने से पानी और फसल जहरीली हो गयी जिस कारण कैंसर महामारीबन गयी. लुटेरे पूंजीपतियों की मुनाफे की चाहत ने जमीन के पानी को जहर बना दियाइस का विरोध न हो इसलिए ये चुप्पी बनाई गई. आप धूम्रपान ओर तम्बाकू छोड़ सकते हो ये आपके हाथ मे है लेकिन आप पानी पीना कैसे छोड़ सकते हो. ये तो आपकी मूल जरूरत है. इस जहरीले पानी पीने से आज कैंसर महामारी का रूप धारण कर चुकी है.

मैने 2 दिन पहले इरादा फ़िल्म देखी. जैसे-जैसे फ़िल्म देख रहा था वैसे-वैसे देश की भयंकर सच्चाई डरा रही थी.

हम एक ऐसी जगह रह रहे है जहां रोजाना कोई ना कोई इस कैंसर की चपेट में आकर तड़फ-तड़फ कर मर रहा है. तड़फने के साथ-साथ उसको एक पूरा संगठित गिरोह लूट भी रहा है. खून बेचने वालों से लेकर कीमो थेरैपी, इंशोरेंस, पानी बेचने वालो का एक बहुतबड़ा स्कैम है इसके पीछे.

पानी जो मौत की दलदल बन गयी.

यहाँ के लोगो के लिए पानी ही मौत बन गयी है. पानी किसी भी इंसान की जिंदगी की सबसे जरूरी पेय पदार्थ है. अब वो ही उसके लिए जहर बन गया है.

कोई अगर इस जहर पर रिसर्च करता भी है तो लुटेरा पूंजीपति उसको मरवा देता है. जिसने इस जहर को पैदा कियाऔर जिसकी इस जहर के कारण दुकानदारी चल रही है वो सब इस जहर के खिलाफ बोलने वालों का मुंह बंद कर देते है.

कारपोरेट का मीडिया प्रचार करता है कि

“यहाँ का पानी पीने से आप नही बच सकते.”

सेफ रहो, अलर्ट रहो, साफ पानी पियो.

मतलब RO लगवावो. बोतल बन्द पानी खरीदो. जमीन का या नदियों के पानी से ये जहर खत्म हो इस पर कोई चर्चा नही.

फ़िल्म में लुटेरा पूंजीपति, खोजी ईमानदार पत्रकार को मारने से पहले कहता है कि –

रिवर्स बोरिंग किस चिड़िया का नाम हैये कोइ नही जानता

अमोनियम नाइट्रेट, क्रोमियम कैमिकल ये जहरीले है. किसी को कोई फर्क नही पड़ता है. इंजेक्सन लगा कर सब बेहोसी में जीये जा रहे है.

शनिवार-रविवार को बीबी के साथ डिनर, गर्ल फ्रेंड के साथ डिस्को बस ये जिंदगी है.

इस जहर की उनको आदत सी पड़ गयी है

इसलिए मेरा बिजनेस सही है. क्योकि कोई मेरे बिजनेस पर सवाल नही उठाता.

वैसे पूंजीपति ठीक कह रहा है. आज ये ही तो हालात है. पंजाब और पंजाब के लगते बार्डर इलाको में हर घर से कैंसर के कारण मौत हो चुकी है लेकिन क्या आपने कभी विरोध के स्वर सुने. सुनोगे भी नही.

कभी पंजाब की धरती क्रांति औरक्रांतिकारियों को पैदा करती थी लेकिन आज हालात क्या है.रोजाना इस बीमारी की चपेट में आकर लोग मरते हैं लेकिन पंजाब का आवाम पूंजीवाद के नशे में चूर है. बहुतो को कोकीन का नशा मार गया तो बहुतो को फ्री इंटरनेट, फैसन, शॉपिंगमार गया.

क्योकि पूंजीवाद ने आपकी नशों में बड़े शातिराना तरीके से अपने नशे को पहुंचा दिया है.

पिछले 20 साल में 3 लाख किसान आत्महत्या कर गए जिसका हम जब जगह जिक्र करते है. लेकिन पिछले 20 साल में कैंसर से भी लाखों लोग मर गए. कोई सर्वे नही, कोई जिक्र नही, कोई लड़ाई नही.

कुछ सालों में कैंसर के मरीजों को नजदीक से देखा है. कैंसर के कारण होने वाला असहनीय दर्द, गरीबपरिवार की रुपयों के अभाव में बेबसी, कैसे धीरे-धीरे घर से इंसान भी जाता है और जमीन, रुपया, गहने सब कुछ चला जाता है. ईमानदारी से सरकार कैंसर से मरने वालों का सर्वे करवाये तो एक बहुत बड़ी भयानक सच्चाई सामने आ सकती है.

बहुत पहले कहानियों में सुनते थे कि फ़ैलाने इलाके में एक जिन्न आ गया. जो गांव से दूर जंगल या पहाड़ में रहता है वो इलाके वालों से हर रोज एक इंसान को खाने के लिए लेता है. उसके साथ मे भेड़, बकरी, गाय, फल बहुत से सामान भी साथ मे लेता है. फिर एक दिन उस गांव में एक इंसान आता है और उस जिन्न को मार कर वहाँ के इंसानों को बचाता है.

ये कहानी बहुत सुनी है, फिल्मो में भी है, महाभारत मेऐसी कहानी का जिक्र मिलता है. लेकिन उस जिन्न को किसने पैदा कियाये उन कहानियों में नही है.

लेकिन जो ये कैंसर का जिन्न है जो हर रोज बहुत से इंसानों की बलि ले रहा है साथ मे उसकी भेड़, बकरी, गाय, भैंस, जमीन, गहनों को भी खा रहा है. इसको किसने पैदा किया ये जरूर मालूम है. पूंजीपति की पूंजी कमाने की हवस ने इस जिन्न को पैदा किया है. इस हवस पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी हमने जिनको सौंपी नेता, पोलिस, नोकरशाह, मीडिया, कानून वो सब इस लूट के हिस्सेदार बन बैठे है.

कुछ दिन पहले मेरे एक मित्र से लड़ने के तरीकों पर चर्चा चल रही थी  की इस कैंसर वाले मसले पर कैसे लड़ा जाए. क्योंकि ये मामला बहुत बड़ा है. 1 गांव या 10 गांव मिलकर भी इस लड़ाई को जीत नही सकते. मेरा दोस्त भी उन्ही गांव से था जिस गांव में प्रत्येक घर से ये बीमारी बलि ले चुकि है. वो साथी इस मुद्दे पर लड़ भी रहे है. इस फ़िल्म ने लड़ने का तरीका बता दिया. लड़ाई का एक ही तरीका है. वो है शहीद-ऐ-आजम भगत सिंह का रास्ता”बहरो को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है.”

मदारी फ़िल्म के बाद इरादा एक बेहतरीन फ़िल्म है जो समस्या को उठाती है. पूंजीपति-पोलिस-मीडिया-राजनीति के लूट के लिए बने नापाक गठबंधन को बेबाक तरीके से दिखाती है. व इसके साथ मे समस्या के समाधान के लिए क्रांतिकारी रास्ता दिखाती फ़िल्म है.

फ़िल्म में भटिंडा से बीकानेर के बीच एक पैसेंजर ट्रेन जिसमे 60% से ज्यादा कैंसर के मरीज आते और जाते है. इस ट्रेन का चित्रण रोंगटे खड़े करने वाला है. भारत की ट्रेनों में अक्सर नमकीन, छोले, पॉपकार्न, मूंगफली, पापड़ बेचने वाले मिलते है. लेकिन इस ट्रेन में खून बेचने वाले,इंशोरेंस बेचने वाले, कीमोथेरेपी का पैकेज बेचने वाले मिलते है जिसको फ़िल्म में बहुत ही अच्छे तरीके से दिखाया है. खून बेचने वाला आवाज लगा रहा है कि 2 के साथ 1 फ्री, आज का रेट 150-150

फ़िल्म ने रक्तदान कैम्पो पर भी सवाल उठाया है.

फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह की दमदार आवाज में दुष्यन्त की ये लाइने लाजवाब है-

“सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही, मेरा मकसद नही, मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए.

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,

शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए.

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,

हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए.

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,

सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.

– दुष्यन्त कुमार

“समुंद्र के किनारे मकान हो तो,

तूफान से होशियार रहना चाहिये.”

दमदार और असरदार डायलोक भी फ़िल्म की कहानी को बेहतरीन बनाते है –

“चूहे मारने वाली दवाई से आप बच जाओगे, लेकिन यहाँ के पानी से कभी नही बच पाओगे”

“लाशें दलदल में धँसती हुई.”

“कैमिकल के कारण यहाँ का पानी, यहाँ की मिट्टी, यहाँकि फसलों में जहर घुला है.”

“यहाँ का पानी ही नही खून भी लुटेरे पूंजीपति की जागीर है.”

“ये शहर जितना जमीन के ऊपर है उतना ही जमीन के नीचे है.”

“घुन ही गेंहू को मिटा सकता है.”

लेकिन पत्रकार जो अपनी सच्चाई के कारण मौत के मुआने पर खड़ा है. वो पूंजीपति को कहता है-

पत्रकार – तुम्हे लगता है तुम सच को दबा दोगे, कोई ना कोई सच को जरूर सामने लाएगा

सच छुपेगा नही. सच छुपेगा नही.

हमको भी लगता है कि आने वाले समय मे लोग लड़ेंगे मजबूती सेऔर इस लुटेरी कौम का सर्वनाश कर देंगे.

“जलते घर को देखने वालों

फुस का छपर आपका है.

आग के पीछे तेज हवा

आगे मुकद्दर आपका है.

उसके कत्ल पर मै भी चुप था.

मेरी बारी अब आयी.

मेरे कत्ल पर आप भी चुप हो.

अगला नम्बर आपका है.”

लेखक :- उदय छे

इस डायरेक्टर ने दी थी श्रीदेवी की बेटी को मॉम के मौत की खबर

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मुंबई। शनिवार रात को बॉलीवुड की टैलेंटेड और खूबसूरत अदाकारा श्रीदेवी का निधन हो गया. महज 54 साल की उम्र में उनका निधन होने से पूरे देश में शोक की लहर है. श्रीदेवी की मौत का सबसे बड़ा सदमा उनके परिवार को लगा है. श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कूपर अपनी फिल्म धड़क की शूटिंग में बिजी होने के कारण अपनी मां के साथ दुबई में मौजूद नहीं थी. जाहिर है कि उनको ताउम्र अफसोस रहेगा कि वो अंतिम पलों में अपनी मां के साथ नहीं थी.

मुंबई में जैसे ही श्रीदेवी की मौत की खबर पहुंची, सबको सबसे पहले जाह्नवी कपूर की याद आई. सवाल था कि जाह्नवी कपूर को सबसे पहले यह दुखद खबर कौन देगा. इसका जिम्मा करण जौहर ने उठाया. बॉलीवुड लाइफ की रिपोर्ट के अनुसार, करण जौहर श्रीदेवी की मौत की खबर जानकर तुरंत ही जाह्नवी कपूर के घर गए. इसके बाद वह जाह्नवी को उनके चाचा अनिल कपूर के घर पर लेकर गए.

बता दें, श्रीदेवी ने अपनी बेटी जाह्नवी के बॉलीवुड डेब्यू के लिए करण जौहर पर भरोसा जताया था. वह अपने बेटी को सिल्वर स्क्रीन पर देखना चाहती थीं. लेकिन एक्ट्रेस की मौत के बाद श्रीदेवी के दिल का एक अरमान अधूरा रह गया. बता दें, धड़क मराठी फिल्म सैराट की हिन्दी रीमेक है. इसका निर्माण करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन बैनर तले हो रहा है. यह 20 जुलाई 2018 को रिलीज होने वाली है.

मायावती ने ठुकराया तेजस्वी का ऑफर

नई दिल्ली। बीएसपी सुप्रीमो मायावती फिलहाल राज्यसभा वापस नहीं जाना चाहतीं. शायद यही वजह है कि उन्होंने तेजस्वी यादव द्वारा राज्यसभा भेजे जाने का ऑफर ठुकरा दिया है. असल में लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने आरजेडी के कोटे से उन्हें राज्यसभा सीट ऑफर की, लेकिन मायावती ने ये प्रस्ताव भी ठुकरा दिया. तेजस्वी ने कहा कि मायावती बीजेपी के केंद्र की सत्ता पर रहने तक राज्यसभा नहीं जाना चाहतीं.

पिछले साल सहारनपुर में दलित अत्याचार पर सदन में न बोलने देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी. अब वो अपनी पार्टी के विधायकों के बूते राज्यसभा पहुंच नहीं सकतीं. लालू यादव भी मायावती को राज्यसभा भेजने का ऑफर दे चुके हैं. फिलहाल राज्यसभा में बसपा के तीन सांसद हैं, जबकि लोकसभा में एक भी सदस्य नहीं हैं.

एक वजह यह भी हो सकती है कि राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती हर रैली में अपने इस्तीफे की बात कह रही हैं. उन्होंने यह भी संदेश दिया है कि उनको दलितों की परवाह है और उनके हक में आवाज उठाने से वह पीछे नहीं हटेंगी. संभव है कि मायावती का ये संदेश उन्हें अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में फायदा दिला सकता है. मायावती फिलहाल राज्यसभा सीट के चक्कर में फंसकर खुद का सियासी वजूद खत्म होते नहीं देखना चाहतीं. यही वजह है कि उन्होंने वापस राज्यसभा जाने का ऑफर ठुकरा दिया है.

गुजरात विधानसभा: मेवाणी का माइक 40 सेकेंड में बंद

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अहमदाबाद। गुजरात की विधानसभा में जिग्नेश मेवाणी को सोमवार को केवल 40 सेकेंड का समय ही मिल सका. मेवाणी सोमवार को विधानसभा में दलित सामाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर के केस पर बोल रहे थे. इससे पहले की मेवाणी अपनी पूरी बात रख पाते, विधानसभा के अध्यक्ष ने 40 सेकेंड बाद मेवाणी का माइक बंद करने का आदेश दे दिया.

दलितों को सरकार की ओर से आवंटित जमीन के कब्जे की मांग को लेकर दलित सामाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर ने पिछले हफ्ते कलेक्टर ऑफिस में खुद को आग लगा ली थी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. मेवाणी ने खुद को बोलने से रोकने के बाद गुजरात सरकार पर आरोप लगाया कि वह दलितों के विरोध में काम कर रही है. उन्होंने थानगढ़ एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की. मेवाणी ने कहा कि सरकार के कदम से लगता है कि वह इस मामले में किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं करेगी. थानगढ़ में तीन दलित मारे गए थे.

मेवाणी ने कहा कि पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपये देने की घोषणा की गई थी, जो अब तक पूरी नहीं हुई है. मेवाणी ने आरोप लगाया कि सरकार का मानना है कि दलितों को दी जाने वाली जमीन पर दलितों का कोई हक नहीं है.

लालू यादव की बेटी का फार्म हाउस कुर्क

नई दिल्ली। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी व राज्यसभा सांसद मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार का दिल्ली स्थित फार्म हाउस प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कुर्क कर लिया है. ईडी ने फार्म हाउस पर कुर्की का नोटिस चस्पा कर दिया है. ईडी की इस कार्रवाई के बाद राजद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे भाजपा के इशारे पर उठाया गया कदम बताया है. तो वहीं खबर है कि पीएमए एक्ट के तहत ईडी इस मामले में मीसा भारती और शैलेश कुमार की कुछ और सपंत्ति को भी कुर्क कर सकता है. ईडी ने दक्षिण दिल्ली के बिजवासन में 12 बीघा में फैला यह फार्म हाउस पिछले साल सितंबर में जब्त किया था.

पीएमएलए के न्यायिक प्राधिकरण के सदस्य (विधि) तुषार वी शाह ने अपने आदेश में कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से पेश की गई शिकायत और सामग्री पर विचार करने पर उन्होंने पाया कि अंतरिम रुप से जब्त की गई संपत्ति धनशोन में शामिल थी, इसलिए अदालत में मामले की सुनवाई चलने तक यह संपत्ति कुर्क रहेगी.

ईडी का कहना है कि यह फार्म हाउस मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार की है. इस संपत्ति को मेसर्स मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रखा गया था. जांच के दौरान पता चला कि फार्म हाउस 2008-09 में धनशोधन में शामिल 1.2 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर खरीदा गया था. ईडी आठ हजार करोड़ रुपये के कथित धनशोधन मामले में मीसा भारती और शैलेश कुमार की जांच कर रही है.

करण कुमार

सीएम योगी के गढ़ में सड़क पर उतरे दलित

गोरखपुर। देश भर में दलित समाज पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अब देश के विभिन्न हिस्सों से विरोध की आवाज आने लगी है. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भी दलित संगठनों ने सीएम योगी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. 25 फरवरी को अम्बेडकर जागरण मंच के बैनर तले समाज के सैकड़ों लोगों ने दलितों पर अत्याचार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया. आरक्षण बचाओ, दलित सम्मान बचाओ, संविधान बचाओ महारैली के बैनर तले सैकड़ों लोग गोरखपुर की सड़कों पर उतर गए और प्रदेश भर में दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया. आंदोलनकारी आरक्षण के समर्थन में और दलित उत्पीड़न के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. विरोध प्रदर्शन के दौरान इलाहाबाद के वकालत के छात्र दिलीप सरोज को इंसाफ दिलाने को लेकर भी नारे लगाए गए. महारैली विष्णुपुर से बशारत पुर होते हुए गोलघर, फिर शास्त्री चौक से अम्बेडकर चौक तक पहुंची. इसका नेतृत्व संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर ने किया.

बीते वक्त में जिस तरह दलित उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं, उससे देश भर के दलितों में काफी गुस्सा है. हाल ही में गुजरात में भी एक दलित एक्टिविस्ट भानुभाई वणकर द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद गुजरात में भी दलित आंदोलन भड़क गया है. तो सहारनपुर से एक बार फिर चंद्रशेखर रावण की रिहाई को लेकर भीम आर्मी के सदस्य और उनके समर्थक बुद्धीजीवी आंदोलन का बिगुल फूंक चुके हैं. ऐसे में लखनऊ के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति का दूसरा गढ़ बन चुके गोरखपुर में दलितों का सड़क पर उतरना बड़ी घटना है. गोरखपुर में उपचुनाव से ठीक पहले इस तरह के आंदोलन के जरिए दलित समाज की गोलबंदी भाजपा के लिए मुसीबत बन सकती है.

श्रीदेवी की मौत से बॉलीवुड मौन, शूट, लॉन्च, इवेंट सब रद्द

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मुंबई। जानी मानी फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी के अचानक निधन से परिवार के बाद सबसे बड़ा झटका बॉलीवुड को लगा है. महीनों से जिन इवेंट और शूट्स की तैयारी चल रही थी उन सभी को अब रद्द करवा दिया गया है. बॉलीवुड के सूत्रों की मानें तो आज अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म के शुरुआती सीन की शुरुआत होनी थी, लेकिन श्रीदेवी की आकस्मिक मौत के कारण कलाकारों से लेकर फिल्म डायरेक्टर तक सभी ने काम करने से मना कर दिया.

खबरों की मानें तो बड़ी मुश्किल से बिग बी और ऋषि की डेट मिली थी, लेकिन श्रीदेवी के निधन की खबर सुनकर अब तक सभी सदमे में हैं. यहां तक कि जीटीवी ने भी अपने आने वाले बड़े रियलटी शो डीआईडी लिटिल मास्टर की लॉन्चिंग भी आज रद्द कर दी है. इस शो को बड़े पैमाने पर लॉन्च किया जाना है. चैनल ने इसके लिए काफी खर्चा भी कर दिया था. इसी के साथ कुछ फिल्मों का प्रोमोशन भी होना था जिसे भी रद्द कर दिया गया है.