61 लाशें, मगर कहानी सबकी एक जैसी

अंग्रेजी में एक कहावत है, जिसका कामचलाऊ तर्ज़ुमा कुछ इस तरह होगाः “जो लोग मर गए हैं, वे अपनी कहानी नहीं कह पाते.”

अब आते हैं हकीकत पर. क्या वह 61 लोग, जो उत्तर प्रदेश में 20 मार्च 2017 से 7 जुलाई 2018 के बीच तथाकथित पुलिस मुठभेड़ों में मार डाले गए, अपनी-अपनी कहानी कह पाएंगे…? जाहिर है नहीं. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि 90 प्रतिशत से ज़्यादा इस तरह की मुठभेड़ें नकली व फ़र्ज़ी हैं और इनका मक़सद कानून व व्यवस्था की स्थिति सुधारने की आड़ में पुलिस द्वारा मुठभेड़ दिखाकर लोगों की हत्या कर देना रहा है.

ऐसी मुठभेड़ हत्याओं के संबंध में मानवाधिकार संगठन पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज़ (पीयूसीएल) की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2 जुलाई 2018 को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर उससे दो हफ़्ते के भीतर जवाब मांगा है. इसे राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार के लिए गंभीर झटके के रूप में देखा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया, इसका मतलब कि उसे पहले नज़र में याचिका में दम दिखायी दिया.

अपनी याचिका में पीयूसीएल ने मांग की है कि मार्च 2017 से लेकर, जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, इस साल अब तक जितनी मुठभेड़ हत्याए हुई हैं, उनकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करे, और इस जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट का कोई अवकाशप्राप्त जज करे. याचिका में कहा गया है कि जिस बेलगाम छूट के साथ पुलिस मुठभेड़ की घटनाएं हो रही हैं, उससे पता चलता कि इन्हें राज्य सरकार का खुला समर्थन मिला हुआ है. इसमें कहा गया है कि कई मौक़ों पर योगी आदित्यनाथ के ऐसे बयान आये हैं, जो इन मुठभेड़ हत्याओं को जायज ठहराते हैं और इन्हें प्रोत्साहित करते हैं. पीयूसीएल का कहना है कि ऐसी स्थिति में राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इन हत्याओं की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दे.

पीयूसीएल की याचिका में 31 मार्च 2018 तक की मुठभेड़ हत्याओं के आंकड़े दिये गए हैं. इसमें कहा गया है कि सार्वजनिक तौर पर जो जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक राज्य में पिछले साल मार्च 2017 से लेकर इस साल मार्च 2018 तक 1100 से ज़्यादा मुठभेड़ें (एनकाउंटर) हुईं, जिनमें 49 लोग मारे गये और 370 लोग घायल हुए. याचिका में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिये गये आंकड़े का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2018 के बीच इन मुठभेड़ों में 45 लोग मारे गए.

उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जारी किये गए ब्यौरे के अनुसार, 20 मार्च 2017 से लेकर 7 जुलाई 2018 तक पुलिस मुठभेड़ या एनकाउंटर की घटनाएं 1400 से उपर हो चुकी हैं, जिनमें 61 लोग मारे जा चुके हैं. पुलिस की निगाह में ये सभी शातिर बदमाश थे. हर जगह मुठभेड़ की कहानी व तौर-तरीक़ा लगभग एक जैसा था और पैटर्न भी एक-दूसरे से मिलता-जुलता था. इन मुठभेड़ों में से हर एक की जो विधि-सम्मत जांच-पड़ताल सरकार को करानी चाहिये थी, जिसके बारे में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है, वह नहीं हुई. न एफ़आरआई लिखी गयी, न मिजिस्ट्रेटी जांच हुई, न मुक़दमा दर्ज़ हुआ.

जो 61 लोग इन मुठभेड़ हत्याओं के शिकार हुए उनमें से 27 मामलों में पुलिस विभाग ने जांच कर अपने को पाक साफ़ घोषित कर दिया. शेष 34 मामलों की जांच अभी होनी है. जिन मामलों की अभी जांच होनी है, वह कुल मुठभेड़ हत्याओं का 50 प्रतिशत से ज़्यादा है.

ग़ौर करने की बात है कि राज्य में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के ठीक पहले के तीन सालों (2014, 2015 और 2016) में मुठभेड़ की घटनाएं कुल 16 हुईं. योगी सरकार बनने के बाद इन घटनाओं में जिस तरह अचानक बेतहाशा बढोतरी हुई है, उसमें लोकसभा में भी चिंता जताई जा चुकी है. पीयूसीएल ने अपनी याचिका में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा बार-बार दिये गए इस बयान को उद्धत किया है कि अपराधी या तो जेल जायेंगे या मुठभेड़ों में मार डाले जायेंगे. याचिका में पिछले साल 19 नवंबर को दिये गए मुख्यमंत्री के बयान का हवाला दिया गया है कि जो लोग समाज की शांति को भंग करना चाहते हैं और बंदूक में विश्वास करते हैं, उन्हें बंदूक की भाषा में जवाब दिया जाएगा. पीयूसीएल का कहना है कि यह कानून और विधि-विधान की भाषा नहीं है.

एक अन्य मानवाधिकार संगठन रिहाई मंच ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में, ख़ासकर आज़मगढ़ ज़िले और उससे सटे इलाक़े में, फ़र्ज़ी पुलिस मुठभेड़ की व्यापक जांच-पड़ताल की है. रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव के मुताबिक पिछले दिनों जिस तरह 5 लोगों– मोहन पासी, रामजी पासी, जयहिंद यादव, मुकेश राजभर और राकेश पासी—को पुलिस ने मुठभेड़ दिखाकर मार डाला, वह पुलिस की पोल-पट्टी खोल देता है. इन सभी तथाकथित मुठभेड़ों का तौर-तरीक़ा कमोबेश एक जैसा था, और यह पुलिस के हाथों की गई निर्मम हत्याएं थीं.

पता चला है कि आज़मगढ़ ज़िले के कंदरापुर थाने के दारोग़ा ने राजीव यादव को टेलीफ़ोन पर गालियां दी हैं और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है. राकेश पासी की मुठभेड़ हत्या इसी इलाक़े में हुई थी.

अजय सिंह

इसे भी पढ़े-योगी के प्रदेश में एक और मासूम की रेप के बाद हत्या
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

शर्मनाकः फीस के लिए स्कूल ने मासूमों को बनाया बंधक

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से एक स्कूल से जुड़ी चौंकाने वाली खबर आई है. खबर है कि एक स्कूल ने फीस जमा नहीं होने के कारण स्कूल की 50 बच्चियों को बेसमेंट में बंद कर दिया. बच्चों को 4 से 5 घंटे तक स्कूल में बंद रखा गया. यह मामला दिल्ली के चांदनी चौक इलाके के राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल का है. सभी बच्चे केजी के छात्र हैं.

अभिभावकों के आरोप के मुताबिक बच्चियां जब स्कूल पहुंची तभी उन्हें सुबह 7.30 बजे से ही स्कूल के बेसमेंट में रखा गया था. छुट्टी के समय जब छात्र बाहर नहीं निकले तब यह मामला सामने आया. अभिभावकों का आरोप है कि इस दौरान बच्चों को कुछ खाने-पीने को भी नहीं दिया गया. हद तो यह है कि स्कूल ने बच्चों को बेसमेंट में भेजने के बाद स्कूल में उनकी उपस्थिति को भी नहीं दर्शाया गया और उनकी अनुपस्थिति मार्क कर दी गई. क्योंकि स्कूल मैनेजमेंट को उनकी फीस प्राप्त नहीं हुई थी.

हालांकि हंगामे के बाद स्कूल प्रशासन बच्चों को बेसमेंट में बंद करने की बात से इंकार कर रहा है. मामले को बढ़ता देख स्कूल प्रिंसिपल ने आरोपों का खंडन किया है. प्रिंसिपल का कहना है कि बेसमेंट सजा देने का स्थान नहीं है और यह एक एक्टिनिटी रूम है जहां बच्चे खेलते हैं और उन्हें म्यूजिक सिखाया जाता है. यह एक क्लासरूम की तरह ही है.

दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी है. साथ ही सचिव और शिक्षा निदेशक को सभी जानकारी के साथ बुलाया है. इस मामले में पुलिस ने भी प्राथमिकी दर्ज कर ली है.

करण कुमार

इसे भी पढे़-भारत की शिक्षा व्यवस्थाः एक सॉफ्ट आतंकवाद
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

किसानों को लुभाने पंजाब जाएंगे मोदी

मुक्तसर (पंजाब)। पीएम मोदी 2019 में वापसी को लेकर खासे परेशान है. मोदी ऐसे किसी मौके का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे हैं जो उन्हें आगामी चुनाव में फायदा पहुंचा सकता है. इसी सिलसिले में खरीफ की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने के बाद पीए मोदी पंजाब जाएंगे. मोदी की यह पंजाब में पहली रैली होगी. यह रैली मुक्तसर के मलोट में होगी, जहां मोदी की नजर किसानों पर रहेगी.

मोदी की इस रैली को पार्टी ‘किसान कल्याण रैली’ कह रही है, लेकिन असल में यह रैली पूरी तरह से राजनैतिक है, जिसमें किसानों को लुगाने की कोशिश होगी. क्योंकि सरकार द्वारा हाल ही में एमएसपी को लेकर की गई घोषणा के बाद यदि किसी राज्य के किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा तो वो पंजाब के किसान हैं.

ऐसा इसलिए है क्योंकि पंजाब में पैदा होने वाले धान और गेहूं का 90 फीसदी हिस्सा सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदा जाता है. ऐसे में हाल ही में एमएसपी को लेकर हुई घोषणाओं का सीधा असर यहां के किसान वोट बैंक पर दिखेगा. हालांकि एमएसपी की सच्चाई यह भी है कि सरकार की इस घोषणा का फायदा उन्हीं इलाकों के किसानों को मिलेगा, जहां उनकी उपज सीधे सरकारी क्रय केंद्रों में जाती है. तो वहीं कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक एक सच्चाई यह भी है कि देश में होने वाले गेहूं और धान की कुल उपज का केवल 35 फीसदी ही सरकारी क्रय केंद्रों में जाता है. दलहन और तिलहन के मामले में तो यह औसत और भी खराब होकर 20-25 फीसदी पर ठहर जाता है. पंजाब में बेस्ट क्वालिटी का खाद्यान्न उत्पादन होने की वजह से यहां का अधिकतर अनाज सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद लिया जाता है.

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने देश में किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन 2014 में सरकार गठन के तीन साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने इसको लेकर कोई रोडमैप नहीं बनाया था. अब आनन-फानन में सरकार ये सब कर तो रही है लेकिन मोदी का दावा झूठा साबित होना तय है. अगर इस लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश सरकार ने 2015 में शुरू कर दी होती तो 2022 तक किसानों की वार्षिक आमदनी में लगातार 7 वर्षों तक 12 फीसदी का इजाफा होता और तय लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

इसे भी पढ़े-तोगड़िया बनाम मोदीः मोदी से खफा 14 हजार बजरंग दल व विहिप कार्यकर्ता का इस्तीफा
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

भारतीय सिनेमा में जातीय चरित्र

हिंदी पट्टी में बॉलीवुड के अस्पृश्य व अस्पृश्यता पर फिल्मों का भीषण अकाल रहा है. किसी भी सुपरस्टार जैसे दिलीपी कुमार, राजकुमार, राजेश खन्ना, मनोज कुमार या आज के हिंदी सिनेमा जगत के सुपरस्टार सलमान, आमिर, अमिताभ, धर्मेंद्र किसी ने भी अस्पृश्य समाज के व्यक्ति का किरदार नहीं निभाया है. ना ही किसी निर्देशक ने फिल्म बनाने की हिम्मत की और ना ही सवाल तक उठाया.

काला, आक्रोश, दामूल जैसी फिल्मों ने सामंतवाद की ज्यातदी पर फिल्म बनाई लेकिन कभी अस्पृश्य व अस्पृश्यता (सामाजिक व्यवस्था) पर फिल्म नहीं बनाई. पहली बार 1930 में सुजाता एवं अछूत कन्या जैसी फिल्म बनतीं हैं इनमें नायिकाएं अछूत हुआ करतीं थीं लेकिन नायक सवर्ण समाज का होता था. यह भी समाज में स्थापित मूलसंगत था क्योंकि समाज में अनुलोम विवाह जायज था. इससे स्थापित हुआ कि निम्न वर्ग की कन्याओं का उत्थान उच्च वर्ग का पुरुष कर सकता है.

यही धर्म सम्मत व्यवस्था 1980 में सौतन जैसी फिल्म में देखने को मिली. इसमें निम्न जाति की लड़की सवर्ण जाति के लड़के लिए न्यौछावर कर देती है. किंतु कोई भी सुपरस्टार निम्न जाति के रोल में नहीं दिखता है. 1980 के दशक फिल्म गुलामी में पुलिस वाला था जिसके बच्चे को घोड़े पर बारात नहीं निकालने दी क्योंकि वह निम्न वर्ग का था. हालांकि साफ तौर जाति तो नहीं दिखाई लेकिन फिल्म में कुलभूषण खरबंदा एक साइड कैरेक्टर थे जबकि लीड रोल में धर्मेंद्र थे.

नब्बे के दशक में पहली बार बाबा साहेब बीआर अंबेडकर पर ममूति ने किरदार निभाया जो कि साउथ के हीरो थे और वह फिल्म बनी लेकिन मुख्यधारा के सिनेमाघरों में लगाई ना जा सकी. मुझे याद है कि 1992-93 में रिलीज होने यूपी में आई जब मायावती का शासन था लेकिन काफी कोशिश के बाद उत्तर प्रदेश के कुछ सिनेमाघरों में लगाई गई लेकिन सिनेमा मालिकों के साजिशन जल्द ही उतार दी गई. यानी कुछ ही हफ्तों में निकाल दी गई. अस्पृश्य समाज के नायक पर जब फिल्म बनती है तो समाज कैसे उसे स्वीकार नहीं करता है. 2000 के आसपास लगान फिल्म के अंदर आमिर खान ने कचरा एक अस्पृश्य कैरेक्टर को दिखाया लेकिन वह मुख्य किरदार नहीं था यहां पर भी साइड कैरेक्टर के तौर दिखाया गया.

एकलव्य फिल्म बनी जिसमें पन्नालाल जौहार जिसमें पहली बार किसी उत्तर भारत के सुपरस्टार ने अस्पृश्य नायक का किरदार निभाया था लेकिन यहां पर मुख्य कलाकार के तौर अमिताभ बच्चन व सैफ अली खान को दिखाया गया और संजय दत्त के रोल को साइड हीरो के तौर पर प्रस्तुत किया गया. आक्रोश एक ऐसी पिक्चर है जिसमें जिसमें विधिवत सुपस्टार अजय देवगन अस्पृश्य समाज के हीरो हैं व कैरेक्टर हैं. लेकिन यहां भी अजय देवगन अपने शिक्षक की लड़की को छोड़ देते हैं तो यहां पर भी दिखाया गया कि अस्पृश्य समाज को हीं कुर्बानी देनी पड़ी. लगातार हमनें देखा कि फिल्म के आरंभ से धर्म, परंपरा, राजा-रजवाड़ों, सामंतवाद पर अधारित फिल्म बनीं लेकिन अस्पृश्य समाज के किरदार पर फिल्मों का भारी अकाल रहा है.

21 वीं सदी में पहली बार साउथ का सुपस्टार रजनीकांत फिल्म काला में दलित समाज के चिन्हों (बुध्द धम्म, नीला झंडा, काला निशान) को लिए हुए आता है. आरक्षण में सैफ अली खान छोटी जात को प्रदर्शित करते हैं और दलित चिन्हों के साथ दिखाए जाते हैं लेकिन उनको साम्यावाद का रंग दे दिया जाता है. लेकिन लीड रोल में अमिताभ बच्चन का रोल इसे छुपा देता है. दलितों को आज भी नेपथ्य में रखा जाता है. काला फिल्म को आज भी दलितों या निम्न समाज को दिखाती है लेकिन सवर्ण समाज को नागवार गुजर रहा है. इससे पता चलता है कि आज भी उच्च जाति वाला समाज दलितों को किस नजरिए से देखता है.

Read It Also नवाजुद्दीन ने राजीव गांधी को कहा अपशब्द, मचा बवाल
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

नवाजुद्दीन ने राजीव गांधी को कहा अपशब्द, मचा बवाल

नई दिल्ली। अपनी दमदार एक्टिंग के लिए लोकप्रिय एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी विवादों में घिर गए हैं. नवाज पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर अपशब्द कहने का आरोप लगाया गया है. इसको लेकर नवाज पर एफआईआर दर्ज कराने की बात सामने आई है. नवाज पहली बार अपनी एक्टिंग को लेकर विवादों में घिरे दिख रहे हैं.

दरअसल 6 जुलाई को सैफ अली खान और नवाजुद्दीन की वेब सीरीज सैक्रेड गेम्स रिलीज हुई. जो कि राजनीति पर आधारित है. इसमें राजनीतिक कारणों से विवादों में घिर चुकी है. अमर उजाला खबर के मुताबिक पश्चिम बंगाल के एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने यह कहते हुए नवाजुद्दीन और सीरीज के निर्माताओं पर एफआईआर दर्ज कराई है कि इस सैक्रेड गेम्स में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खिलाफ अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया है.

37 वर्षीय राजीव सिन्हा की माने तो सैक्रेड गेम्स के एक एपिसोड में नवाज राजीव गांधी को ‘फट्टू’ कहते हुए दिखाई देते हैं. सिन्हा ने इस पर पुलिस स्टेशन जाकर नवाजुद्दीन और निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांगी की है. बता दें कि यह वेब सीरीज विक्रम चंद्रा के नॉवेल पर आधारित है.

इसे भी पढ़ें-50 करोड़ के जगह 50 लाख वाली फिल्म ज्यादा बेहतर : नवाजुद्दीन सिद्दीकी
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

दिल्ली सरकार बुजुर्गों को कराएगी मुफ्त तीर्थयात्रा

PC-dna

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने बुजुर्गों को तोहफा दिया है. दिल्ली में रहने वाले बुजुर्गों को दिल्ली सरकार मुफ्त में यात्रा कराएगी. अरविंद केजरीवाल सरकार ने उपराज्यपाल अनिल बैजल की सभी आपत्तियों को दरकिनार कर तीर्थयात्रा योजना को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 70 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्गों को मुफ्त में तीर्थयात्रा कराई जाएगी.

इस योजना के पहले चरण में हर विधानसभा क्षेत्र से 11 हजार वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा कराई जाएगी, यानी करीब 77 हजार श्रद्धालुओं को इसका लाभ मिलेगा.

दिल्ली सरकार की इस योजना के तहत तीर्थयात्रा पर बुजुर्गों के साथ परिवार का एक सदस्य भी जा सकेगा. इस तीर्थयात्रा योजना के तहत दिल्ली सरकार ने जो रूट चुने हैं, उसमें लोगों को दिल्ली से मथुरा, फिर वृंदावन, आगरा और फतेहपुर सीकरी होते हुए वापस दिल्ली लाया जाएगा. वहीं दूसरे रूट पर दिल्लीवासियों को हरिद्वार, ऋषिकेश और नीलकंठ की यात्रा कराई जाएगी, जबकि तीसरा रूट दिल्ली से अजमेर, पुष्कर, अमृतसर और फिर बाघा बॉर्डर व आनंदपुर साहिब का है. इसके अलावा दिल्ली के लोगों को जम्मू-कश्मीर व वैष्णो देवी की भी यात्रा कराई जाएगी.

इस योजना का लाभ लेने के लिए पहले आओ पहले पाओ की पध्दति अपनानी होगी. तीर्थयात्रा योजना के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इसके लिए वृद्धि नागरिकों को एक माह के अंदर अपने क्षेत्र के विधायक, राजस्व विभाग के उपायुक्त और तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे. केजरीवाल सरकार और LG के बीच विवाद के कारण ये योजना रुकी हुई थी जो कि अब चालू की गई है.

इसे भी पढ़ें-इतिहास में पहली बार केंद्र सरकार ने SC के फैसले को मानने से इनकार कियाः केजरीवाल
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

PAK के पूर्व PM नवाज शरीफ पर हमला

लंदन में भर्ती अपनी पत्नी के साथ नवाज शरीफ

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुश्किल बढ़ती जा रही है. भ्रष्टाचार के मामले में दस साल की सजा सुनाने के बाद खबर आ रही है कि नवाज शरीफ पर हमला किया गया है. लंदन में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर गुस्साए लोगों ने हमला किया है. यह हमला उनपर तब किया गया जब वह एवेनफील्ड स्थित अपने बेटे के घर में जा रहे थे.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक युवा लोगों का एक समूह नवाज के बेटे हुसैन नवाज के अपार्टमेंट का दरवाजा तोड़ने का कोशिश कर रहे थे. कुछ लोग पहले से ही वहां प्रदर्शन कर रहे थे. एक प्रदर्शनकारी तो इतने गुस्से में था कि उसने पाकिस्तानी मुस्लिम लीग-नवाज की ब्रिटेन की शाखा के सदस्य पर सामान ढोने की ट्रॉली तक उठा कर फेंक दिया. वहीं दूसरे ने दरवाजे पर अंडे फेंके. वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से मेट्रोपॉलिटन पुलिस आलीशान एवेनफील्ड हाउस के पास प्रदर्शनकारियों पहुंची और फिर उसने छानबीन भी शुरू की. हालांकि इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. पुलिस ने बताया कि शरीफ फैमिली ने किसी भी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई है.

बता दें कि नवाज शरीफ की पत्नी कुलसुम नवाज का इलाज चल रहा है. वह लंबे समय से बीमार चल रही हैं. नवाज पर किए गए हमलों की पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों ने निंदा की है. वहीं पीटीआई यूके के प्रवक्ता ने कहा कि हुसैन नवाज के घर पर किए गए प्रदर्शन पर पीटीआई पार्टी का कोई हाथ नहीं है.

इसे भी पढ़ें-पाक के पूर्व PM व उनकी बेटी को जेल की सजा
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

कैंसर से जूझ रही सोनाली बेंद्रे का हैरान करने वाला वीडियो आया सामने

नई दिल्ली। हिंदी फिल्म की हीट एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे कैंसर से जूझ रही हैं. इस खबर के सामने आने के बाद फैंस के साथ-साथ बॉलीवुड इंडस्ट्री को झटका लगा था. फिलहाल सोनाली न्यूयॉर्क में इलाज करा रही हैं. इलाज के दौरान का एक वीडियो सामने आया है जो कि आपको हैरान कर सकता है कि, मौत से जूझने वाला ऐसे कैसे खुश हो सकता है.

न्यूयॉर्क से सोनाली की पहली तस्वीर सामने आई है. ये तस्वीरें खुश कर सकती हैं लेकिन जैसे ही पता चलेगा कि सोनाली अभी पूरी तरह फिट नहीं हुई हैं तो निराशा हाथ लगेगी. फिर भी जिंदगी और मौत से जूझने के बाद भी सोनाली ने इंस्टाग्राम पर प्यारा सा हंसता हुआ वीडियो शेयर किया है. बीमारी के बावजूद सोनाली की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई है.

इस वीडियो में सोनाली के बाल काटे जा रहे हैं. इलाज के चलते उन्होंने अपने बाल जरूर छोटे करवा लिए हैं. इस नए लुक में भी सोनाली काफी सुंदर लग रही हैं. इस फोटो को शेयर करते हुए सोनाली ने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट भी लिखा है.

सोनाली कहती हैं, ‘जब तक इंसान के सामने मुश्किलें ना आएं तब तक उसे अपनी शक्ति का अंदाजा ही नहीं लगता. पिछले कुछ दिनों में मुझे बहुत सारे लोगों का प्यार मिला है. ये लोग मुझे एहसास करवाते हैं कि मैं अकेली नहीं हूं.’ सोनाली की दूसरी फोटो में वो अपने पति गोल्डी बहल के साथ दिख रही हैं. गोल्डी अपनी पत्नी के माथे को चूम रहे हैं.

इसे भी पढ़ें-सोनाली के कैंसर इलाज के लिए बाबा उमड़े
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

हैवान बना पिता, बेटे का किया बुरा हाल

प्रतीकात्मक फोटो

हैदराबाद। नशे में इंसान रिश्ता भूल जाता है. एक ऐसी ही दर्दनाक घटना की वीडियो सामने आई है. इस वीडियो में एक शख्स शराब के नशे में तीन साल के अपने बेटे को बेरहमी से मारते हुए दिख रहा है. एएनआआई की मुताबिक घटना हैदराबाद इलाके की है. जिसमें कि शराबी पिता अपने बेटे को फेंक-फेंक कर मार रहा है.

पुलिस के मुताबिक, शराब के नशे में धुत शिवा गौड़ ने पहले अपनी बीवी से झगड़ा किया और फिर अपने 3 साल के बेटे पर हमला कर दिया. उसने अपने बच्चे को ज़मीन पर पटकना शुरू कर दिया. मौके पर मौजूद उसकी बीवी और बाकी लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माना. देखते ही देखते उसने अपने बेटे को ऑटो पर फेंक मारा. बच्चे के सिर और शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट लगी है. अभी बच्चे का इलाज हैदराबाद के अस्पताल में चल रहा है. डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे की हालत फिलहाल स्थिर है. ये घटना सोमवार रात दो बजे की है.

इस घटना के संबंध में जगद्गीरिगुता पुलिस को फोन आया कि श्रीनिवासनगर में एक नशे में आदमी अपने बेटे को बुरी तरह से पीट रहा है और वो किसी की बात नहीं मान रहा है. मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि 30 साल का शिवा गौड़ अपने 3 साल के बेटे रित्विक और उसकी मां को बुरी तरह से पीट रहा है. पुलिस ने इसके बाद मां और बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया. बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया गया है. आरोपी के खिलाफ न्याय अधिनियम के तहत आईपीसी धारा 324 और धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

Read Also-मुस्लिम पिता चिल्लाता रहा और भीड़ ने बच्चा चोर समझ कर…
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

बसपा से निकाले गए नेताओं की वापसी

लखनऊ। बसपा की ओर से ना केवल नेताओं को बाहर किया जा रहा है बल्कि बाहर निकाले गए नेताओं को फिर जोड़ा जा रहा है. इसके लिए पार्टी जोड़ तोड़ से काम कर रही है. पार्टी का कहना है कि बसपा के पुराने नेताओं को फिर वापस लाने का काम मायावती के निर्देशानुसार किया जा रहा है. फिलहाल उत्तर प्रदेश के सांसद व नेताओं को पुनः पार्टी में लाया गया है.

पार्टी से दूर हो चुके कई पुराने बसपाइयों को फिर से जोड़ने का काम आरंभ हो गया है. इसी कड़ी में देवरिया के पूर्व सांसद गोरख जायसवाल को फिर से पार्टी में शामिल किया गया है. जोनल इंचार्ज घनश्याम खरवार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बीएसपी प्रमुख मायावती के निर्देश पर ही बरहज विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके मुरली मनोहर जायसवाल, श्याम मनोहर जायसवाल और प्रीतम जायसवाल को भी दोबारा पार्टी में शामिल किया गया है.

गोरख जायसवाल बीएसपी के दिवंगत विधायक राम प्रसाद जायसवाल के पिता और मुरली मनोहर जायसवाल राम प्रसाद जायसवाल के बेटे हैं. राम प्रसाद जायसवाल एक समय में मायावती के बहुत करीबी थी. एनआरएचएम घोटाले में उन्हें जेल जाना पड़ा था लेकिन पार्टी के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई थी. जमानत पर छूटने के बाद उनका देहांत हो गया था. इसके अलावा उत्तराखंड के बसपा के दिग्गज नेता व पूर्व विधायक की भी वापसी कराई जा चुकी है.

Read Also-बसपा ने पूर्व मंत्री को पार्टी से किया बाहर
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

दलित के घर सत्तू खाने व नहाने पहुंचे तेज प्रताप

पटना। दलित के घर जाकर खाने की राजनीति लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे व राजद नेता तेज प्रताप ने भी अपना ली. बीजेपी से एक कदम आगे निकलकर तेज प्रताप ने दलित के घर ना केवल खाया बल्कि खुलेआम चपाकल से नहाया भी. इस अंदाज को देखने के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ और भी बढ़ गई. लोग फोट खींच व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने लगे. तेज प्रताप ने रिक्शा चलाकर अपने क्षेत्र का दौरा किया.

दरअसल सोमवार को तेज प्रताप अपने चुनावी क्षेत्र महुआ विधान चले गए. इस दौरान उन्होनें अपने क्षेत्र का भ्रमण किया और दिनभर की थकावट को दूर करने के लिए दलित के घर खाने व नहाने चले गए. इस दौरान तेज प्रताप ने लालू प्रसाद की अंदाज में सत्तू, प्याज, आचार व चटनी का स्वाद चखा. इस दौरान भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “अपने कर्मभूमि महुआ में कार्यक्रम सत्तू पार्टी मजा लिया. फाइव स्टार होटलों का खाना दलित के घर ले जा कर खाना और राजनीतिक डंके बजाना बीजेपी, आरएसएस वालों का काम है. हम तो किसानों के घर में पिसा हुआ सत्तू खाते हैं और खुब खुश रहते हैं.”

तेज प्रताप ने ना केवल सत्तू खाया बल्कि चपाकल पर स्नान किया. इस दौरान ली गई तस्वीरों को फेसबुक पेज पर शेयर कर लिखा कि, “सत्तू पार्टी कार्यक्रम और अपने विस क्षेत्र महुआ में दिनभर के पैदल भ्रमण के बाद थोड़ी थकावट को दूर करने के लिए करहटिया पंचायत के एक दलित के घर जा कर उनके चापाकल पर स्नान किया. बहुत मीठी अनुभूति थी गांव के चापाकल की ठंडी पानी से नहाने का…”

इसे भी पढ़ें-राजनीति में उतरेंगी लालू-राबड़ी की बहू
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

मायावती के आदेश के बाद BSP नेताओं में खलबली

लखनऊ। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे मायावती पार्टी को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठा रही हैं. मायावती ने बसपा के बागी व दागी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद इसी कड़ी में बड़ा फैसला लिया है. बसपा सुप्रीमो ने निर्देश दिया है कि पार्टी के निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार कर जल्द भेजी जाए. 75 जिलों में ऐसे नेताओं की लिस्ट बनाने की तैयारी आरंभ हो गई है. निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को मिली है.

बहनजी के आदेश के बाद बसपा नेताओं में खलबली मची है. किसके ऊपर गाज गिरेगी पता नहीं. वैसे पार्टी के सक्रिय नेताओं को इससे कोई डर नहीं है लेकिन अब वे भी तेजी से काम करने में जुट गए हैं.

नेताओं की स्क्रीनिंग शुरू

आरएस कुशवाहा का कहना है कि बीएसपी प्रमुख मायावती के निर्देश पर ऐसे नेताओं की स्क्रीनिंग शुरू हो गई है. लोकसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में निष्क्रिय नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. हम जल्द हीं बैठक कर सभी जिलों में ऐसे नेताओं की लिस्ट तैयार करेंगे. रिपोर्ट तैयार होने के बाद पार्टी मुख्यालय भेजा जाएगा.

तो वहीं देश के युवा वोटरों को ध्यान में रखकर बसपा सुप्रीमो ने भी एक निर्देश दिया है. मायावती ने कहा है कि अक्टूबर तक युवाओं की सक्रिय टीम तैयार की जाए. युवाओं की टीम अपने क्षेत्रों में युवाओं को जोड़ने का काम करेगी.

निष्क्रिय नेताओं की लिस्ट तैयार होने के बाद उनका बाहर निकलना तय है. वैसे भी बहनजी ने इस साल कई दिग्गज नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. पार्टी को मजबूत करने के लिए मायावती कई बड़े पदों पर बदलाव भी किया. बसपा को सशक्त बनाने के लिए मायावती ऐसे कठोर फैसलें लेने से नहीं चूकती हैं.

इसे भी पढ़ें-पार्टी की छवि बचाने को मायावती का बड़ा फैसला
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

महानगर पालिका से परेशान स्वीपर ने की खुदकुशी

प्रतीकात्मक फोटो

बेंगलुरु। एक स्वीपर के खुदकुशी के मामले में बेंगलुरु महानगर पालिका फंसा दिख रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) में काम करने वाले सफाई कर्मी ने कथित तौर पर 6 महीने से तनख्वाह ना मिलने के कारण आत्महत्या कर ली. उसके साथ काम करने वालों ने बताया कि 40 वर्षीय सुब्रमणी बतौर ‘पौरा कार्मिक’ (स्वीपर) 15 साल से ज्यादा समय से काम कर रहे हैं. सैलरी ना मिलने के कारण स्वीपर काफी परेशान था उसने आत्मदाह करने की बात कही भी थी लेकिन बीबीएमपी ने ध्यान नहीं दिया.

खबरों के अनुसार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे महानगर पालिका सुब्रमणी के साथ-साथ कई और सैकड़ों लोगों की सैलरी नहीं दे पाया. BBMP पौरा कार्मिक संघ के अध्यक्ष ओबलप्पा ने News18 को बताया सुब्रमणी सरीखे 2,000 कर्मियों को सैलरी नहीं दी गई है. बीबीएमपी ने अतिरिक्त मजदूर कहे जाने वाले इन 2,000 कर्मियों का वेतन रोक दिया है. सुब्रमणी उनमें से एक थे. उनकी दो बेटियां थीं, जिनका पेट भरने के लिए उन्होंने काफी उधार ले रखा था. ओबलप्पा ने कहा, लेनदार उन्हें परेशान कर रहे थे. ऐसे में खुद को बेबस पाकर उन्होंने अपना जीवन समाप्त कर दिया.

बीबीएमपी कर्मचारियों के एसोसिएशन के मुताबिक, इस पहल से पहले 35,000 स्वीपर थे, अब यह संख्या 18,000 हो गई है. अतिरिक्त के रूप में वर्गीकृत स्वीपर महीने पहले आधार और बॉयोमेट्रिक विवरण देने के लिए लेकिन उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया. ओबलप्पा ने आरोप लगाया कि बीबीएमपी के अधिकारियों ने वेतन जारी करने के लिए रिश्वत की मांग की और सुब्रमणी ने उन्हें भुगतान करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा BBMP के अधिकारी सैलरी देने के लिए एक स्वीपर से 500 से 1000 रुपए तक लेते हैं. अगर वह ऐसा करने से मना करते हैं तो सैलरी रोक ली जाती है. हमारी मांग है कि अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाकर उन्हें अरेस्ट किया जाए. बेंगलुरू के मेयर संपथराज ने कहा कि वह उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे जो सुब्रमणी की मौत के जिम्मेवार हैं.

Read Also-दलित आईएएस अधिकारी को स्वीपर बना दिया!
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

सरकारी जमीन पर बनें अस्पताल मुफ्त में करें गरीबों का इलाजः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। देश की राजधानी में सरकारी जमीन पर बनें प्राइवेट अस्पताल को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. इस फैसले से गरीबों को राहत मिलेगी. राजधानी दिल्ली के मूलचंद अस्पताल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजधानी में सरकारी जमीनों पर जितने भी निजी अस्पताल बने है, उन सभी को गरीबों का मुफ्त में इलाज करना होगा.

कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि अस्पताल के कुल बेड 25 फीसदी बेड गरीबों के लिए रखने होंगे. अगर अस्पताल गरीबों को मुफ्त इलाज नहीं देते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर मूलचंद, सेंट स्टीफंस, रॉकलैंड और सीताराम भारतिया जैसे अस्पतालों पर मुख्यतौर पर पड़ेगा जिन्होंने रियायती दर पर सरकार से जमीन ली है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के दौरान कहा कि जिन अस्पतालों ने सरकार से सब्सिडी पर जमीन ली है उन्हें भी गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देनी होगी और जो अस्पताल इस नियम को नहीं मानेंगे वो कोर्ट के आदेश की अवमानना के जिम्मेदार होंगे.

Read Also-वन विभाग की जमीन पर रिसॉर्ट बनवा रहीं हैं भाजपा मंत्री की पत्नी
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

बीजेपी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किया खोखलाः नोबेल विजेता अमर्त्य सेन

नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार से सम्मामित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भारत की मौजूदा अर्थव्यवस्था को खोखला करार दिया है. अमर्त्य सेन ने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी सरकार में अर्थव्यवस्था का हाल खस्ता हो गया है. तो वहीं अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भारत की मौजूदा सरकार एक पहिए से चल रही है और उस पहिए की भी हवा निकल रही है.

शनिवार को राजकमल प्रकाशन द्वारा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशात्री अमर्त्य सेन और ज्यां द्रेज़ की नई पुस्तक ‘भारत और उसके विरोधाभास’पुस्तक पर परिचर्चा का आयोजन साहित्य अकादेमी हॉल में किया गया. लोगों से खचाखच भरे हॉल में अमर्त्य सेन और ज्यां द्रेज़ से वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार और सबा नकवी ने बातचीत की. इस दौरान मौजूदा सरकार की अर्थनीति पर बातचीत हुई.

हमें शर्मिंदा होना पड़ता है…

नोबल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने भारत की सबसे बढ़ती हुई अर्थव्यस्था होने के बावजूद भारत में विरोधाभास को चिन्हित करते हुए कहा “बीस साल पहले, इस क्षेत्र के छह देशों में, भारत श्रीलंका के बाद दूसरा सर्वश्रेष्ठ था. अब यह है दूसरा सबसे खराब देश है. वर्तमान सरकार में पिछले सरकार से ज्यादा हालत ख़राब हो गये हैं किसी भी सरकार ने स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्र के लिए कारागार उपाय नही किये, और तो और मोदी शासन में स्वास्थ और शिक्षा के क्षेत्र को बिलकुल ही नजरअंदाज किया गया है और सरकार का पूरा ध्यान गलत दिशा में चला गया है”.

उन्होंने आगे कहा “जब हमें भारत में कुछ अच्छे चीजों के होने पर गर्व होता है तो हमें साथ ही उन चीजों की भी आलोचना करना चाहिए जिनके कारण हमें शर्मिंदा होना पड़ता है.”

बांग्लादेश से भी पीछे हैं

पुस्तक के सह-लेखक ज्यां द्रेज ने कहा कि दुसरे देशों में मजदूर श्रेणी का विकास होता है लेकिन भारत में मजूदरों की स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है. इसको लेकर सरकार ध्यान नहीं देती है. बीजेपी सरकार की बीमा योजना अच्छी है लेकिन वह आम जन या जरूरतमंद तक पहुंच नहीं पाई है. पिछले कुछ वर्षों में भारत को सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने की अपनी खोज में कुछ सफलता मिली है. मगर यह सोचने वाली बात है कि 7 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के बावजूद, ग्रामीण मजदूर की आय एक ही रही है और फिर भी कोई इसके बारे में नहीं बोलता है.

आगे उन्होंने कहा अगर हम स्वास्थ्य सुविधाओं  के बारे में बात करें, तो भारत आर्थिक रूप से आगे होने के बावजूद इस क्षेत्र में बांग्लादेश से भी पीछे है, और इसका का प्रमुख कारण भारत में सार्वजनिक कार्रवाई में कमी है. आर्थिक विकास विकास को प्राप्त करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसके साथ सार्वजनिक कार्रवाई भी की जानी चाहिए.

भारत और उसके विरोधाभास किताब 2013 में अंग्रेजी में आयी ‘एन अनसर्टेन ग्लोरी इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शन’ का हिंदी अनुवाद है.किताब के अनुवादक सुपरिचित पत्रकार अशोक कुमार हैं.

दुनिया में आर्थिक वृद्धि के इतिहास में ऐसे कुछ ही उदाहरण मिलते हैं कि कोई देश इतने लम्बे समय तक तेज़ आर्थिक वृद्धि करता रहा हो और मानव विकास के मामले में उसकी उपलब्धियाँ इतनी सीमित रही हों. इसे देखते हुए भारत में आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति के बीच जो सम्बन्ध है उसका गहरा विश्लेषण लम्बे अरसे से अपेक्षित है.

इसे भी पढ़ें-‘डॉ. जेटली, नोटबंदी और GST से अर्थव्यवस्था ICU में है’
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

CM योगी को थी गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी को जेल में मारने की जानकारी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश का कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. मुन्ना बजरंगी की जेल में करीब दस गोलियां मारी गई हैं लेकिन जेल प्रशासन को पता तक नहीं. हालांकि मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने सीएम योगी को बहुत पहले इसकी जानकारी दे दी थी. इसके बावजूद भी जेल में बंद कैदी की निर्ममता से हत्या करने पर पुलिस-प्रशासन व कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.

कुछ दिन पहले ही मुन्ना की पत्नी ने एसटीएफ पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई थी कि उनके पति की जान को खतरा है. मुन्ना उस समय झांसी जेल में बंद था. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा ने कहा, “मेरे पति की जान को खतरा है. यूपी एसटीएफ और पुलिस उनका एनकाउंटर करने की फिराक में हैं. झांसी जेल में मुन्ना बजरंगी के ऊपर जानलेवा हमला किया गया. कुछ प्रभावशाली नेता और अधिकारी मुन्ना की हत्या करने का षड्यंत्र रच रहे हैं.”

इस बीच योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जेल में हत्या कैसे हो गई. इसकी जांच कराई जाएगी और इसमें जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नही जाएगा. पूरे मामले की रिपोर्ट मंगाई गई है.” ​पुलिस प्रसाशन इस मामले की जांच पड़ताल कर रहे हैं.

बता दें कि बजरंगी पर बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के अलावा दर्जनों हत्या का आरोपी है. इसके अलावा मुन्ना पर बड़ौत के पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से 22 सितंबर 2017 को फोन पर रंगदारी मांगने और धमकी देने का आरोप था. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. ऐसा माना जाता है कि एनकाउंटर के डर से उसने खुद गिरफ्तारी करवाई थी.

इसे भी पढ़ें-अब तक 44 : एनकाउंटर के नाम पर हत्याएं जारी…
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

CBSE नहीं, ये एजेंसी लेगी NET, JEE और NEET की परीक्षा

नई दिल्ली। सीबीएसई से जुड़ी बड़ा बदलाव होने जा रहा है. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा है कि नीट, जेईई मेन्स, यूजीसी नेट, प्रबंधन से जुड़ी सीमैट और फार्मेसी से जुड़ी जीपैट परिक्षाओं का आयोजन अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) कराएगी. इससे पहले सीबीएसई ये परीक्षायें कराती थी.

मानव सांसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि एनटीए अब यूजीसी नेट की परीक्षा दिसंबर में आयोजित करेगी. नीट की परीक्षा का आयोजन हर साल फरवरी और मई में करायेगी. इसी तरह से जेईई (मेन्स) की परीक्षा हर साल जनवरी और अप्रैल में कराई जाएगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र दोनों बार परीक्षा दे सकते हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा आयोजन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सुधार है और इसे इस वर्ष से शुरू करने का निर्णय किया गया है. इस बारे में वेबसाइट पर कुछ सूचनाएं डाली जायेंगी और 2-3 दिनों में पूरी सूचना डाल दी जायेगी. उल्लेखनीय है कि नीट परीक्षा में करीब 13 लाख छात्र बैठते हैं, जबकि जेईई मेन्स में 12 लाख छात्र तथा यूजीसी नेट में 12 लाख छात्र बैठते हैं. सीमैट में एक लाख छात्र और जीपैट में 40 हजार छात्र हिस्सा लेते हैं.

प्रवेश के लिए दोनों में से उच्च प्राप्तांक पर विचार किया जाएगा मंत्री ने बताया कि इन परीक्षाओं के संदर्भ में पाठ्यक्रम, पश्नों के रूप ओर भाषा के विकल्प के बारे में कोई बदलाव नहीं किया गया है. परीक्षा की फीस में भी कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है. जावड़ेकर ने बताया कि ये परीक्षाएं कम्प्यूटर आधारित होंगी. उन्होंने कहा कि इस बारे में छात्रों को घर पर या किसी केंद्र पर अभ्यास करने की सुविधा दी जायेगी. यह मुफ्त होगा. हर परीक्षा कई तिथियों को आयोजित होगी अर्थात 4-5 दिनों तक चल सकती हैं.

 (इनपुट भाषा व एनडीटीवी से)

Read Also-विवि में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पीएचडी अनिवार्यः प्रकाश जावड़ेकर
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

मुस्लिम पिता चिल्लाता रहा और भीड़ ने बच्चा चोर समझ कर…

मेंगलुरू। व्हाट्सएप पर फैले गलत मैसेज का प्रकोप देखने को मिल रहा है. फिर एक जगह पर भीड़ ने पिता को ही शिकार बना लिया. एक मुस्लिम युवक अपने बच्चे के साथ ऑटोरिक्शा में सफर कर रहा था. बच्चा के रोने के कारण लोगों ने समझा की वह बच्चे का अपहरण कर के ले जा रहा है और बिना कुछ पूछे ही पिटाई करने लगे.

दरअसल मामला मेंगलुरू की है. गुरूवार को खालिद (30) नामक एक मुस्लिम युवक अपने दो साल के बच्चे को लेकर जा रहा था. हालांकि खालिद थोड़ा नशे में था तो वह बच्चे को डांट व जरा रहा था जिससे कि बच्चा जोर-जोर से रोने लगा. इस दौरान दो बाइक सवारों ने जब बच्चे को रोते हुए देखा तो वो उसका पीछा करने लगे.

खालिद चाय पीने के लिए जब एक रेस्टोरेंट में गया, तो वहां दोनों बाइकसवारों ने आकर बच्चे के बारे में पूछताछ की. जब खालिद कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका तो दोनों बाइकसवार उसे बच्चा-चोर, बच्चा-चोर… कहकर पीटने लगे. इसके बाद कुछ और लोग भी वहां आ गए और वे भी मारने लगे. खालिद चिल्लाता रहा कि वो उसका पिता है. किसी ने भी उसकी बात नहीं सुनी.

पुलिस को इसकी जानकारी मिलने पर खालिद को भीड़ के चंगुल से निकाला. इसके बाद थाना ले जाकर पुलिस ने उसकी खालिद की पत्नी को बुलाया और इसके बाद जांच आदि के बाद खालिद को छोड़ा गया. पुलिस के मुताबिक, खालिद किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना नहीं चाहता था, इसलिए पुलिस ने भी कोई केस दर्ज नहीं किया.

गौरतलब है कि व्हाट्सऐप पर ऐसी अफवाहें फैलाई गई कि बच्चा चोरों का एक गैंग इलाके में सक्रिय है. इन्हीं अफवाहों के चलते पिछले कुछ महीनों के दौरान ‘बच्चा चोर’ होने के शक में भीड़ द्वारा पिटाई की 20 से ज्यादा घटनाएं सामने आ चुकी है.

Read Also-BJP मंत्री ने हत्या के आरोपियों को माला पहनाया
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

दलित नेता जिग्नेश, अल्पेश व हार्दिक पर FIR

PC-jagran.com

गांधीनगर। गुजरात के तीन युवा नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई है. कांग्रेस विधायक अल्‍पेश ठाकोर, गुजरात के दलित नेता और निर्दलीय विधायक जिग्‍नेश मेवानी और हार्दिक पटेल पर एक ही थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. न्यूज18 की खबर के मुताबिक तीनों नेताओं के खिलाफ गुजरात के गांधीनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. तीनों पर आरोप है कि इन्‍होंने जनता रेड के नाम पर जबरन एक घर में घुसकर मौजूद लोगों को धमकी दी. धमकी के बाद से वहां दहशत का माहौल है.

ऐसा कहा जा रहा है कि जहरीली शराब पीने से चार लोगों की हालत गंभीर होने के बाद से तीनों नेताओं ने गांधीनगर शराब के अड्डे पर रेड करने का दावा किया था. जिसे गांधीनगर पुलिस ने झूठा करार दिया है. पुलिस के मुताबिक तीनों नेताओं ने जनता रेड के नाम पर कुछ लोगों को धमकाने की बात सामने आई है. इसके संबंध में गांधीनगर थाने में तीनों नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.

Read Also-जिग्नेश की जान को खतरा !
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak 

BJP मंत्री ने हत्या के आरोपियों को माला पहनाया

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग को रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकार का निर्देश दिया है. इसके बावजूद भी भाजपा के मंत्री ने मॉब लिंचिंग के आरोपियों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया है. इस फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्षी दल व आम जनता इसकी निंदा कर रही है. यहां तक की झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने भी फोटो को ट्वीट कर आपत्ति जताई है.

दरअसल, पिछले साल झारखंड के रामगढ़ में एक मीट व्यापारी को पीट-पीटकर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था. बीफ ले जाने के शक में उसकी हत्या हुई थी. इस मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया था. जिनकी आजीवन कारावास की सजा पर रांची हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. इस फैसले से खुश हुए आरोपी जिसमें भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जय प्रकाश नारायण जेल से निकलकर सीधे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा के घर पहुंचे. मंत्री ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया.

सोशल मीडिया पर किरकिरी होने पर मंत्री ने सफाई दी है कि ‘मेरा न्यायिक व्यवस्था और कानून में पूरा विश्वास है. दुर्भाग्य से, मेरे कार्यों के बारे में गैर जिम्मेदार बयान दिए जा रहे हैं जबकि मैं कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा हूं. जो निर्दोष हैं वह बच जाएंगे और जो दोषी हैं उन्हें कानून के हिसाब से सजा दी जाएगी. रामगढ़ मॉब लिंचिंग मामले में रांची हाईकोर्ट जोकि इस मामले की सुनवाई कर रही है. उसने आरोपियों की सजा पर रोक लगा दी है और उनके केस की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत दी है. केस को दोबारा सुना जाएगा.’

मॉब लिंचिंग आरोपियों के साथ केंद्रीय मंत्री

बता दें कि 40 साल के अलीमुद्दीन अंसारी को रामगढ़ शहर के टंड इलाके में स्थित बाजार में 29 जून 2017 को भीड़ ने कार में बीफ ले जाने के शक में पीट-पीटकर मार डाला था. बाद में हुई फोरेंसिक जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई की कार में रखा मीट बीफ ही था. इस साल मार्च में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 लोगों को इस घटना में आरोपी माना था. हालांकि पिछले हफ्ते झारखंड हाईकोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता सहित 8 लोगों की सजा पर रोक लगा दी थी.

Read Also-गोरक्षा को लेकर फैसला सुरक्षित, सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश
  • दलित-बहुजन मीडिया को मजबूत करने के लिए और हमें आर्थिक सहयोग करने के लिये दिए गए लिंक पर क्लिक करें https://yt.orcsnet.com/#dalit-dastak