गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)। क्या स्कूलों में दलित और आदिवासी छात्रों के लिए स्थितियां सामान्य वर्ग के बच्चों जितनी ही समान होती है? इसका जवाब है नहीं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एक स्लूक में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले दलित समाज के छात्र का उसके ही सहपाठियों द्वारा जातिगत अपमान और मारपीट करने का मामला सामने आया है।
लड़के के पिता और पेशे से राजमिस्त्री महेश कुमार का आरोप है कि उसके बेटे को बीते एक महीने से ज्यादा समय से परेशान किया जा रहा था। इसके बाद उन्होंने 8 अक्तूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, महेश कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि 6 अक्तूबर को उनके बेटे को उसके सहपाठियों ने बुरी तरह पीटा और गालियां दीं। उसके शरीर पर कई चोटें थीं। इससे उनका बेटा बेहोश हो गया था। उनका आरोप है कि उनके बेटे को सहपाठी कहते थे कि क्या तुम आंबेडकर बनना चाहते हो। वो उसे पढ़ने नहीं देना चाहते थे, जिसकी वजह से बच्चा स्कूल जाने से हिचकता था।
इस मामले में गाजियाबाद पुलिस ने परेशान करने वाले छात्रों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट 1989 की धारा 3(2) (va) सहित गैर इरादतन हत्या और धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि इस मामले से साफ है कि जहां सामान्य वर्ग के छात्र स्कूलों में सामान्य रूप से पढ़ाई करते हैं, दलित और आदिवासी छात्रों को जाति के सवाल पर कई परेशानियों और अपमान का सामना करना पड़ता है। इससे आरक्षित वर्ग के बच्चे कई बार स्कूलों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। आरक्षण के रूप में प्रतिनिधित्व इसी मर्ज की दवा है।

वीरेन्द्र कुमार साल 2020 से पत्रकारिता में हैं। दलित दस्तक में उप संपादक हैं। उनकी रुचि शिक्षा, राजनीति और खेल जैसे विषय हैं। कैमरे में भी वीरेन्द्र की समान रुचि है और कई बार वीडियो जर्नलिस्ट के तौर पर भी सक्रिय रहते हैं।

