ओपीनियन

पढ़िए, वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने बहुजन कैलेंडर के बारे में क्या लिखा है

 बहुजन कैलेंडर मेरी नज़र में काम की साधना का मतलब है उसमें डूब कर करते जाना। दलित दस्तक के अशोक दास अपने काम में साधक हैं। युवा अवस्था से ही उन्होंने अपना कुछ बनाने की चुनौती स्वीकार की है। उनके काम में प्रसार संख्या की...

दलित साहित्य को “दलित साहित्य” ही कहिए, जनाब

  विमर्शों की दुनिया में "दलित विमर्श" अर्थात् "दलित साहित्य" का लगभग पिछले चार- पाँच दशकों से परचम लहरा रहा है। बोधिसत्व बाबासाहब की वैचारिकी पर आधारित दलित समाज की अन्तर्वेदना-आक्रोश तथा उत्पीड़न, इच्छा, आकांक्षा को इस साहित्य में समाविष्ट किया गया है। इस...

बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म को लेकर क्या ओशो और दलाई लामा दोषी नहीं?

 बौद्ध धर्म पर पुनर्जन्म का आरोप मढ़ने वाले अक्सर तिब्बत के दलाई लामा का उदाहरण देते हैं। आधुनिक भारत के 'शंकराचार्य' अर्थात ओशो रजनीश जैसे वेदांती पोंगा पंडित ने भी बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म को प्रक्षेपति करके बुद्ध का ब्राह्मणीकरण करने का सबसे बड़ा...

आरएसएस आदिवासियों को वनवासी क्यों कहती है?

इस पर काफी लंबे समय से बड़ी बहस चलती आ रही है कि सेकुलर मायने क्या? धर्म-निरपेक्ष या पंथ-निरपेक्ष? धर्म क्या है? पंथ क्या है? अंग्रेजी में जो 'रिलीजन' है, वह हिन्दी में क्या है- धर्म कि पंथ? हिन्दू धर्म है या हिन्दू पंथ?...

किसान आंदोलन मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों है, और सरकार क्यों नहीं लेना चाहती वापस

पिछले 25 दिनों से चल रहा किसान आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने उपस्थित सबसे बड़ी चुनौती क्यों है? 1- पूरे पंजाब में यह एक जनांदोलन है। जिसे पंजाब के बहुलांश जनता का समर्थन प्राप्त है और यह समर्थन बढ़ता ही जा...

 भारत का दार्शनिक और नैतिक पतन आश्चर्यचकित करता है

 भारत का दार्शनिक और नैतिक पतन आश्चर्यचकित करता है। भारतीय दर्शन के आदिपुरुषों को देखें तो लगता है कि उन्होंने ठीक वहीं से शुरुआत की थी जहां आधुनिक पश्चिमी दर्शन ने अपनी यात्रा समाप्त की है। हालाँकि इसे पश्चिमी दर्शन की समाप्ति नहीं बल्कि अभी...

जब विश्व के दार्शनिक मानव सभ्यता का इतिहास लिख रहे थे, भारतीय दार्शनिक क्या कर रहे थे?

मानव इतिहास की महान विदुषी एरियल ड्यूरेंट जब अपने पति विल ड्यूरेंट के साथ मिलकर विश्व इतिहास और सभ्यता सहित दर्शन के विकास का अत्यंत विस्तृत लेखा जोखा लिख रही थीं, उसी दौर में बर्ट्रेंड रसल भी दर्शन का इतिहास लिख रहे थे। फ्रायड...

क्या बुद्ध और कबीर की तरह अंबेडकर भी चुरा लिए जायेंगे?

ए क महत्वपूर्ण कबीरपंथी सज्जन से मुलाक़ात का किस्सा सुनिए। एक गाँव में किसी काम से गया था, उसी सिलसिले में मालवा के दलितों के बीच फैले कबीरपंथ से परिचय हुआ। एक घर के बड़े से आँगन में कबीर पर गाने वाले और कबीर...

धर्मान्तरण से हिंदुओं को मिर्ची क्यों लगती है?

लेखकः कँवल भारती 1993 में तत्कालीन केन्द्र सरकार ने, जो कांग्रेस की थी, राजनीति में धर्म का उपयोग रोकने के लिए संसद में धर्म-विधेयक प्रस्तुत किया था। जाहिरा तौर पर कांग्रेस का मकसद भाजपा के मंदिर आन्दोलन को रोकना था। पर हुआ उल्टा। भाजपा और...

मोदी सरकार की अनदेखी से साठ लाख दलित बच्चों का भविष्य अधर में

दलित और आदिवासी समाज के लिए केंद्र की मोदी सरकार भले ही कितने भी दिखावे कर ले, हकीकत यह है कि भाजपा की सरकार दलितों और आदिवासियों को कमजोर और लाचार ही बनाए रखना चाहती है। हाल ही में आई एक खबर इस पर...

दीपावली का एक सच यह भी है

 Written By- संजय श्रमण आर्य जब भारत मे प्रवेश कर रहे थे तब उनके पास इन्द्र था, भारत मे वैदिक से पौराणिक काल तक आते आते उनके पास ब्रह्मा, विष्णु, शिव और अन्य हजारों पात्र आ गए। बीते दो सौ साल मे साईं बाबा...

क्या आप दीपदानोत्सव के नाम पर दीपावली मना रहे हैं?

प्रा यः हर वर्ष दीपावली आते ही दीपावली और दीपदानोत्सव को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। कुछ लोगों का मानना है कि महाराजा अशोक ने इसी दिन 84 हजार स्तूपों का अनावरण किया था, जिसकी सजावट दीपों से किया गया था, इसलिए...

तेजस्वी… आपको एक शानदार लड़ाई के लिए बधाई

Written By- लक्ष्मण यादव इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ऐ बेखबर, शहर में तेरी जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं। आपकी (तेजस्वी यादव) हार की चर्चा फिज़ाओं में है। इस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ भी आ रही हैं।...

पुस्तक समीक्षाः कब तक मैला साफ करोगे, तुम कब तक मारे जाओगे

पुस्तक समीक्षाः डॉ. पूनम तुषामड़ भारतीय समाज के सच को जानने-समझने के लिए उनकी पीड़ा को समझना आवश्यक है, जो समाज के अंतिम पायदान पर हैं या कहिए कि हाशिए पर हैं। वाल्मीकि समाज, जिसे कई संबोधनों से पुकारा जाता है उसकी पीड़ा और वेदना...

जानिए कौन हैं अमेरिका के होने वाले राष्ट्रपति जो बाइडेन

दुनिया सिमट गई है। दुनिया के एक छोड़ की खबर कुछ पलों में ही दुनिया के दूसरे कोने तक पहुंच जाती है। और बात जब अमेरिका की हो तो सभी इसके बारे में जानना चाहते हैं। फिलहाल अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा में...

अर्णब की गिरफ्तारी पर पढ़िए रवीश कुमार ने क्या लिखा है

Written By- Ravish Kumar मैं आज क्यों लिख रहा हूं, अर्णब की गिरफ्तारी के तुरंत बाद क्यों नहीं लिखा? आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला संगीन है लेकिन सिर्फ नाम भर आ जाना काफी नहीं होता है। नाम आया है तो उसकी जांच होनी...

वाल्मीकि जयंती के बहाने हिन्दूवाद

लेेखक- (कँवल भारती) उत्तरप्रदेश की भगवा दल वाली योगी सरकार ने हाथरस कांड से हुए राजनीतिक नुकसान की भरपाई के लिए प्रत्येक जिले में वाल्मीकि-जयंती (31 अक्टूबर) सरकारी स्तर पर मनाने का निर्णय लिया था। राज्य सरकार के मुख्य सचिव आर. के. तिवारी ने मंडल...

बुद्ध से कुछ मांगना मत, कुछ नहीं मिलेगा

बुद्ध की मूर्ति के आगे कभी कुछ मांगना मत, कुछ नहीं मिलेगा। ना पूजा करना, ना प्रार्थना। ना हाथ फैलाना, न झोली। कोई दया की भीख मांगे या सुख का आशीर्वाद, कुछ हासिल नहीं होगा। क्योंकि बुद्ध पुरुष हमें कुछ देते नहीं हैं। बुद्ध...

मध्यप्रदेश उपचुनाव: कौन बनेगा उपचुनाव का बादशाह

Written By- सम्राट बौद्ध 2018 के मध्यप्रदेश चुनाव के समय और चुनाव के बाद मीडिया ने एक बड़ा भ्रम खड़ा किया कि एससी-एसटी एक्ट के मुद्दे पर सवर्ण बीजेपी से नाराज हैं और वे बीजेपी के खिलाफ वोट करेंगे। इस भ्रम का सबसे ज्यादा असर...

किसानों के नाम रवीश कुमार का यह पत्र पढ़िए

सुना है आप सभी ने 25 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है. विरोध करना और विरोध के शांतिपूर्ण तरीके का चुनाव करना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है. मेरा काम सरकार के अलावा आपकी ग़लतियां भी बताना है. आपने 25 सितंबर को...
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महान सम्राट असोक की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश की आवश्यकता

महान सम्राट असोक (लगभग 304–232 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के महान शासक थे। वे पितामह चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र और सम्राट बिन्दुसार के...

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अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने क्यों भेजा है 50 करोड़ का मानहानि नोटिस, जानिये पूरा मामला

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नीतीन गडकरी से जुड़ी ‘द कारवां’ की एक रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीफ कारोबार में गडकरी...
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