सम्पादकीय

दलित समाज के सबसे बड़े कलाकार का निधन, मिल चुका था पद्मश्री

यूं तो बिहार में जो भी भिखारी ठाकुर के नाम से परिचित है, वह रामचंद्र मांझी को उनकी टोली के आखिरी सदस्य के रूप में जानता था। लेकिन साल 2021 में रामचंद्र मांझी को कला में उनके योगदान के लिए जब पद्मश्री से सम्मानित...

मुस्लिम और पिछड़ों द्वारा उत्पीड़न को कैसे देखे दलित समाज?

''अपने भाई के सामने मैं गिड़गिड़ाती रही, मगर मेरा भाई रॉड से और दूसरा आदमी चाकू से मेरे पति नागराजू पर लगातार वार करते रहे। मेरे पति को कोई नहीं बचा पाया। हमने प्रेम विवाह किया था।" यह कहना है अपने पति की हत्या...

समाज को फिर से अंबेडकरवाद का पाठ पढ़ने की जरूरत

“ये कितना दुखद है कि पार्टियों को ये समझ में आ गया है कि सिर्फ जय भीम बोलने, बाबा साहेब की फ़ोटो और मूर्ति लगाने, उनका नाटक दिखाने, उनकी जयंती मनाने से भारत के 20 करोड़ अनुसूचित जाति के वोट लिए जा सकते हैं।...

शीर्ष नेतृत्व की हठधर्मिता से खत्म होता बहुजनों का राजनैतिक आंदोलन

सवाल यह है कि बसपा क्यों हार गई? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि बसपा इतनी बुरी तरह से क्यों हार गई? नतीजे बता रहे हैं कि बसपा पार्टियों में सबसे नीचे खड़ी है। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी, अनुप्रिया पटेल की पार्टी, कांग्रेस...

त्रिकोणीय हुआ यूपी चुनाव, मजबूती से उभरी बसपा

चौथे चरण के चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति बदलती नजर आ रही है। जिस बहुजन समाज पार्टी को पीछे बताया जा रहा था, वह चुपके से आगे बढ़ती जा रही है। बसपा के साथ कैडर वोटों के अलावा कई क्षेत्रों में ब्राह्मण...

जय भीम-नमो बुद्धाय के बीच क्यों छूट जाते हैं सतगुरु रविदास और कबीर

मुझमें जब से अंबेडकरी आंदोलन को लेकर चेतना आई है, तब से एक लंबा वक्त गुजर चुका है। शुरूआती सालों में इस आंदोलन को अपने से बड़ों के नजरिये से देखने के बाद बीते कुछ सालों में मैंने इस आंदोलन को अपने नजरिये...

स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा को हिला दिया है

 उत्तर प्रदेश में चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, सत्ता की लड़ाई तेज होती जा रही है। और इस राजनैतिक लड़ाई में भाजपा की हवा टाईट होती जा रही है। 11 जनवरी को मंत्री पद और भाजपा से इस्तीफा देकर स्वामी प्रसाद मौर्या...

अपनी नाकामी छुपाने के लिए दलित सीएम के पीछे पड़े मोदी

 प्रधानमंत्री पंजाब के फिरोजपुर में चुनावी रैली नहीं कर सकें। मोदी को मौसम, किसानों के विरोध और खाली कुर्सियों के कारण वापस लौटना पड़ा। लेकिन आपदा को अवसर बनाने में माहिर भाजपा ने इस पूरे मामले को भाजपा बनाम कांग्रेस बना दिया। और जो...

आखिर चरणजीत सिंह चन्नी को एक महीने में ही क्यों करनी पड़ी इस्तीफे की पेशकश?

साल 2007 में पहली बार चमकौर साहिब विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक चुने जाने वाले 58 साल के चरणजीत सिंह चन्नी ने जब 20 सितंबर 2021 को पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी तो उसकी काफी चर्चा हुई थी। यह एक...

लखबीर के खून के छीटे दलितों के मन से जल्दी नहीं मिटेंगे

गुस्सा सबको आता है। गुस्सा हमें भी आता है, जब कोई बाबासाहेब की प्रतिमाएं तोड़ देता है। गुस्सा हमें भी आता है जब कोई जाति के आधार पर हमारे मान-सम्मान को ठेस पहुंचाता है। हम आए दिन किसी न किसी के द्वारा अपमानित होते...

डेरा सचखंड बल्लां: दुनिया भर के चमारों को इकट्ठा करने में लगा संगठन

 दलितों की एक जाति चमार जिसे अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, ने देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। चाहे राजनीतिक आंदोलन हो, सामाजिक आंदोलन या फिर धर्म का आंदोलन, यह जाति केंद्र में रही है। इसकी खासियत यह...

भाजपा का मिशन यूपीः ध्रुवीकरण, लालच और नए वादे

 उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के लिए प्रदेश के करोड़ों युवाओं को नौकरी देने का लालच देने वाले योगी आदित्यनाथ 2022 का चुनाव सामने देखकर एक बार फिर जागे हैं। 19 अगस्त को विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री...

आखिर बसपा को क्यों नहीं मिलता करोड़ों का चंदा?

 तमाम राजनीतिक दल अक्सर बहुजन समाज पार्टी पर यह आरोप लगाते हैं कि बसपा पैसे लेकर टिकट देती है। बसपा की मुखिया मायावती जब खुद को दलित की बेटी कहती हैं तो तमाम मनुवादी दलों के मनुवादी नेता मायावती को दौलत की बेटी कह...

बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन पर हंगामा क्यों?

 बहुजन समाज पार्टी द्वारा उत्तर प्रदेश चुनाव के पहले किये जा रहे प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी यानी ब्राह्मण सम्मेलन को लेकर दलित-बहुजन समाज के एक तबके में काफी रोष है। सोशल मीडिया पर बसपा प्रमुख बहन मायावती को नसीहत देने वालों की भरमार लगी है।...

क्या बसपा के ब्राह्मण सम्मेलन से ब्राह्मणों को फर्क पड़ेगा

 बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण सम्मेलन करने की घोषणा कर दी है। इसकी शुरुआत बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र 23 जुलाई को अयोध्या से करेंगे। पहले चरण में 23 जुलाई से 29 जुलाई तक ब्राह्मण सम्मेलन होगा। सतीश चंद्र...

फादर स्टेन स्वामी की मौत और निरंकुश होती सत्ता पर उठते सवाल

जीवन भर आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष करने वाले फादर स्टेन स्वामी नहीं रहें। 84 साल की उम्र में उन्होंने बतौर कैदी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह पिछले एक महीने से कोरोना से जूझ रहे थे और जब उनकी मृत्यु हुई वो...

जातिवाद का अड्डा बनते जा रहे हैं बड़े शिक्षण संस्थान

 लगता है भारत के बड़े शिक्षण संस्थानों को खास वर्ग के लोग अपनी बपौती मानते हैं। खासकर आईआईटी जैसे संस्थानों में दलित/आदिवासी और पिछड़े वर्ग के शिक्षकों और छात्रों के साथ जिस तरह लगातार भेदभाव की खबरें लगातार आ रही है, वह इस बड़े...

क्या पंजाब में बसपा फिर दोहरा पाएगी 1992 का करिश्मा, कांशीराम ने कर दिखाया था कमाल

वह 90 का दशक था। मान्यवर कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी देश भर में तेजी से पैर पसार रही थी। दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बसपा की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी। तभी सन्...

क्या बसपा सिर्फ मायावती और सतीश चंद्र मिश्रा की पार्टी बनकर रह जाएगी?

 3 जून को जब बसपा समर्थक बहन मायावती के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के 26 साल पूरा होने का जश्न मना रहे थे, मायावती ने पिछड़े समाज के अपने दो कद्दावर नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसमें एक थे लालजी वर्मा और...

मानवाधिकार आयोग के नए अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा के खिलाफ क्यों हैं बहुजन

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अरुण मिश्रा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आय़ोग का नया अध्यक्ष बनाया गया है। मिश्रा 20 सितंबर 2020 को रिटायर हुए थे। इसके बाद 31 मई 2021 को उन्हें पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी...
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January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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