रेलवे ने 15 अगस्त से बदला समय, ट्रेन का नया टाइम देखकर निकलें

नई दिल्ली। ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जरूरी खबर. उत्तर रेलवे ने 15 अगस्त से ट्रेनों के टाइम में परिवर्तन किया है. उत्तर रेलवे ने एक साथ 301 ट्रेनों के समय में बदलाव किया है. रेलवे ने 57 ट्रेनों का डिपार्चर टाईम (गाड़ी छूटने का समय) आगे और 58 ट्रेनों का पीछे किया गया है. इतना ही नहीं 102 ट्रेनों का अराईवल टाईम (पहुंचने का समय) आगे और 84 ट्रेनों का पीछे किया गया है. रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी रेल यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का नया समय रेलवे इंक्वायरी से पता कर लें.

जिन महत्वपूर्ण ट्रेनों का समय बदला गया है, उसने अमृतसर से चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस का समय सुबह 5 बजे से बदलकर 4:55 कर दिया गया है यानी 5 मिनट पहले कर दिया गया है. शाम 5 बजे देहरादून से छूटने वाली शताब्दी एक्सप्रेस 15 अगस्त से 4 बजकर 55 मिनट पर स्टेशन से छूटेगी. हमसफर एक्सप्रेस का समय जो पहले हजरत निजामुद्दीन से सुबह 8 बजकर 30 मिनट का था वो 8 बजकर 25 मिनट कर दिया गया है. इसके अलावा हिमाचल एक्सप्रेस का समय रात 10 बजकर 55 मिनट से बदलकर 10 बजकर 50 मिनट कर दिया गया है और ये दिल्ली से इस समय छूटेगी. हरिद्वार से चलने वाली लोकमान्य तिलक सुपरफास्ट एक्सप्रेस का समय शाम 6 बजकर 45 मिनट से बदलकर 6 बजकर 30 मिनट कर दिया गया है. यानी इस ट्रेन का छूटने का समय पूरे 15 मिनट जल्दी कर दिया गया है. गरीब रथ एसी एक्सप्रेस का समय आनंद विहार से रात 8 बजकर 55 मिनट से बदलकर 8 बजकर 40 मिनट कर दिया गया है. इसके अलावा तेजस एक्सप्रेस आनंद विहार टर्मिनल से 3 बजकर 50 मिनट की जगह 3 बजकर 45 मिनट पर छूटेगी. बाकी आप 15 अगस्त से यात्रा के दौरान अपनी ट्रेन का टाइम देखकर निकले.

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एयरो इंडिया शो पर केंद्र के फैसले से वायुसेना हैरान, कुमारस्वामी ने जताया विरोध

बेंगलुरू। आईएएफ ने एयरो इंडिया शो को बेंगलुरु से उत्तर प्रदेश शिफ्ट करने के केंद्र के प्रस्ताव पर चिंता प्रकट की है. एयरफोर्स का कहना है कि लखनऊ के बाहरी इलाके में ‘बख्शी का तालाब’ एयरपोर्ट एक छोटा सा स्टेशन है, इसमें इतनी सुविधाएं नहीं हैं कि इतने बड़े इवेंट का आयोजन किया जा सके. इस फैसले पर इसलिए भी हैरानी जताई जा रही है क्योंकि बेंगलुरु पिछले 22 सालों से एयरो इंडिया शो की मेजबानी कर रहा है.

सूत्रों के मुताबिक एयरफोर्स का कहना है कि लखनऊ में सुविधाओं के सुधार में 12-14 महीने लगेंगे. एयरफोर्स ने रनवे की मरम्मत न होने और एयरक्राफ्ट को पार्क करने और विक्रेताओं के लिए स्टेशन में जगह न होने का भी मुद्दा उठाया है. इसके साथ ही एयरफोर्स ने लखनऊ से ‘बक्शी का तालाब’ तक की सड़क यात्रा को भी ‘दु:स्वप्न’ की तरह बताया है. सूत्र ने बताया कि आईएफ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश हवाई अड्डे में आधुनिक नौवहन की सुविधाएं भी नहीं हैं. शो के लिए इतने कम वक्त में लखनऊ एयरपोर्ट को तैयार करने में अपनी अक्षमता व्यक्त करते हुए आईएफ ने कहा कि कितना भी जोर लगाने के बाद यह बेंगलुरु की सुवुधाओं का मुकाबला नहीं कर सकता. बता दें कि एयरो इंडिया बेंगलुरु में येलहंका एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित द्विवार्षिक इंटरनेशनल एयर शो और विमानन प्रदर्शनी है. रक्षा मंत्रालय द्वारा एचएएल की साझेदारी में इसका आयोजन किया जाता है. पिछले साल हुए शो 11वें संस्करण में 549 कंपनियों (270 भारतीय और 279 विदेशी) ने इसमें भाग लिया था. इसमें भाग लेने वाले 72 विमानों ने 27,678 वर्ग मील के क्षेत्र को ढका था. 51 से अधिक देशों ने इसमें हिस्सा लिया था. एयरो इंडिया के लिए आयोजन स्थल को बदलने की खबरों के बाद इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर अपनी पीड़ा प्रकट की है. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि, “मोदी सरकार ने यह निर्णय राजनीतिक कारणों से लिया है. हम इस तरह के कदम का विरोध करते हैं क्योंकि एयरोनॉटिकल साइंस में बेंगलुरु अग्रणी है. एयरो इंडिया जैसे किसी कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए इसका सबसे बड़ा एयरबेस भी है. यदि केंद्र इसको स्थानान्तरित करता है तो कर्नाटक के लोग बीजेपी को सबक सिखाएंगे.”

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पुलिस ने जारी की उमर खालिद के हमलावर की तस्वीर

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता उमर खालिद पर हमला करने वाले युवक की पहचान हो गई है. पुलिस ने घटना स्थल के आस-पास मौजूद सीसीटीवी फुटेज को खंगालने के बाद एक तस्वीर जारी किया है. जिसमें यह शख्स कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बगल में स्थित विट्टलभाई मार्ग पर 2.30 बजे एक शख्स भागता दिखाई दे रहा है. उमर खालिद पर सोमवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के बाहर हमला हुआ है. एक आदमी ने उमर पर तब हमला किया जब वो कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर अपने दोस्तों के साथ चाय पी रहे थे. हालांकि हमलावर कामयाब नहीं हो सका और मौके से फरार हो गया. घटनास्थल से एक पिस्तौल भी बरामद हुआ, जिसमें 6 जिंदा कारतूस थे. पुलिस को दिए अपने बयान में उमर खालिद ने बताया कि वह ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ नाम से चल रही एक मुहिम से जुड़े हैं और इसी के एक कार्यक्रम में शामिल होने वह कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचे थे. उमर के मुताबिक- “प्रोग्राम शुरू होने में टाइम था तो मैं दोस्तों के साथ चाय पीने चला गया. जब चाय पीकर लौट रहा था तो किसी ने पीछे से हमला किया. मेरा गला दबोचा. मुझे जमीन पर गिरा दिया और एक बंदूक निकालकर मुझ पर तान रहा था. उस वक्त मैंने उसकी बंदूक को दूर किया. दोस्तों ने पुश किया. वो भागा और भागते हुए गोली की आवाज आई.” इस घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और वहां से एक पिस्तौल बरामद किया. उमर खालिद की शिकायत पर पार्लियामेंट स्ट्रीट थान में आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है. उमर खालिद ने इस मसले पर एक ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने लिखा है कि उन्हें डराकर चुप नहीं कराया जा सकता. उमर ने गौरी लंकेश के साथ अपनी तस्वीर शेयर करते हुए ये भी लिखा कि उन्होंने ये गौरी लंकेश से सीखा है.

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15 अगस्त को हरियाणा में 1500 दलित बदलेंगे धर्म

जींद। हरियाणा के जींद में 184 दिनों से धरने पर बैठे दलितों ने 15 अगस्त को धर्म परिवर्तन की बात कही है. धरने पर बैठे दलितों का आरोप है कि राज्य सरकार से संपर्क और बातचीत करने की उनकी कोशिशें नाकाम रही हैं. अपनी मांगों को लेकर सरकार की उदासनीता के बाद दलितों ने अब धर्म परिवर्तन का ऐलान किया है. पीड़ित दलितों ने बताया कि धरनास्थल पर ही वो सभी अपना धर्म परिवर्तन करेंगे. यह पूरा धरना दलित जाइंट ऐक्शन कमिटी के तहत चलाया जा रहा है. कमिटी ने कहा कि उनकी तरफ से सरकार से संपर्क और बातचीत करने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं. अब मजबूरी में उन्हें धर्म परिवर्तन जैसा कदम उठाना पड़ेगा.

दलित नेताओं ने प्रदेश सरकार पर दलितों की सुनवाई न होने और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. झांसा गांव में दलित लड़की से रेप, आसन कांड, भिवानी कांड, भटला जैसी घटनाओं को लेकर यहां के लोग आक्रोशित हैं. दलित नेताओं ने कहा कि इन मामलों में न्याय नहीं मिलने और लगातार उत्पीड़न के कारण वे धर्म परिवर्तन करेंगे. धर्म परिवर्तन की घोषणा के बाद अब तक दलित समाज की मांगों को लेकर आंख मूदंने वाली सरकार में हड़कंप मच गया है.

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भीमकवी वामनदादा कर्डक

भारत में शुरुआत से ही सिंधु संस्कृती समतावादी, मानवतादी रही है. बाद में चार हजार साल पूर्व में आर्यों ने भारत पर आक्रमण कर के वर्णभेद, जातीभेद निर्माण किया. उसके खिलाफ में तथागत बुध्द, गुरू कबीर, गुरू नानक, गुरू नामदेव, गुरू तुकाराम, गुरू गाडगेबाबा इन्होने आंदोलन किया. बाद में महात्मा फुले, छ.शाहू महाराज, डॉ.बाबासाहब आंबेडकर इन्होने जन-आंदोलन किया. डॉ.बाबासाहब के आंदोलन में अनेक कवी तथा गायकों ने योगदान दिया है. इनमें से वामनदादा कर्डक जी ने बाबासाहब के आंदोलन को गीत-गायन द्वारा पूरे भारत भर फैलाया.

जनम:- वामनदादा कर्डक का जनम 15 अगस्त 1922 मे नासिक जिले के सिन्नर तहसील में देषवंडी गांव में हुआ. उनके पिताजी का नाम तबाजी, माता का नाम सईबाई, बडे भाई का नाम सदाषिव तथा बहन का नाम सावित्री था. उनके घर खेती थी. खेतीबाडी लायक पालतु जानवर थे. लेकिन कभी कभी उनकी मॉं लकडीयों के बंडल बेचती थी. उनके पिताजी बैलों का व्यापार करते थे. वामनदादा की शादी अनुसया से हुयी. उनको मीरा नाम की लडकी भी हुई. लेकीन माँ और बेटी जल्दी ही गुजर गयी. बाद मे वामनदादा ने शांताबाई से दुसरी शादी की. बाद में वामनदादा उनकी माताजी के साथ मुंबई में मजदुरी करने के लिए आये. उन्होने मील श्रमिक का काम किया. बाद में कोयले की भंडारण में काम किया. बाद में उन्हे टाटा कंपनी में नोकरी मिल गयी. शिवडी के बीडीडी के किराया घर में रहते थे. उस समय समता सैनिक दल मजबुत था. वे उसमें शामिल हो गये. एक बार उन्हे एक आदमी ने खत पढने को कहा, लेकीन उन्हे पढना-लिखना नही आता था इसका उन्हे बहुत दुःख हुआ. उन्होने देहलवी नाम के अध्यापक से पढना-लिखना शुरू कर दिया. बाद में उनका पढना लिखना बढ गया.

शुरूआत में दादा सिनेमा में जाकर कलाकार बनना चाहते थे. उन्हे मिनर्व्हा फिल्म कंपनी में एक्स्ट्रा कलाकार का काम मिल गया. वे उस समय कारदार तथा रणजित स्टुडियों मे जाते थे. 1943 में उन्होने सर्वप्रथम डॉ.बाबासाहब आंबेडकर जी को देखा. उनके भाषण का दादा पर बहुत असर हुआ. दादा ने हिंदी-मराठी साहित्य पढा था. उस समय महाराष्ट्र में 1927 मे डॉ.बाबासाहब आंबेडकरजी ने महाड़ के चवदार तालाब के पानी के लिए सत्याग्रह शुरू कर दिया तथा 1930 में नासिक के कालाराम मंदिर प्रवेष का सत्याग्रह किया. इससे जनता में जोशो-उल्लास का निर्माण हुआ. हजारो लोग बाबा साहब जी के आंदोलन में शामिल हुए.

गायन पार्टी की स्थापना:- शुरूआती दौर में महाराष्ट्र मे पेषवाओं के जमाने में जलसे चलते थे. लेकीन बाद में महात्मा ज्योतिबा फुले के सत्यशोधक आंदोलन के लोगों ने सामाजिक परिवर्तन के जलसे चलाए. बाद में सभी गायक और कलाकार बाबासाहब के आंदोलन मे सामाजिक परिवर्तन के जंग मे शामिल हो गये. शुरूआती दौर में मुंबई में शाहीर घेंगडे बाबासाहब पर शाहीरी गीत गाते थे. उनका एक गीत मराठी में था. उसका मतलब था के, ‘‘महार का एक बच्चा बहोत होशियार, लंडन से आया बॅरिस्टर बनकर’’ यह गीत बाबासाहब को बहुत पसंद था. उस समय भीमराव कर्डक तथा केरूबा गायकवाड (अकोला) जैसे शाहीर थे. वामनदादा ने गायन पार्टी की स्थापना की थी.

उस समय डॉ.बाबासाहब आंबेडकरजी ने 1927 मे समता सैनिक दल स्थापन किया था तथा 1936 में स्वतंत्र मजदूर पार्टी की स्थापना की. बाद में 1942 मे नागपूर में शेड्यूल कास्ट फेडरेशन की स्थापना की. उस समय 1933-35 में नागपूर कामठी के विधायक बाबू हरदास इन्होने सर्वप्रथम जयभिम का नारा दिया. 1943 मे बहुचर्चित फिल्म किस्मत में गाना था ‘‘दुर हटो ए दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है.’’ दादाने उस समय गीत लिखा था, ‘‘दुर हटो ये कॉंग्रेस वालो फेडरेशन हमारा है’’ यह गीत उन दिनो बाबासाहब के आंदोलन में बहोत प्रसिध्द हुआ. दादा की कोई संतान नही थी. दादा कहते थे मुझे बाबासाहब से प्रेरणा मिली. ओर वह कहते थे मुझ जैसे गुंगे को जुबान मिली. बाद में दादा पुरे भारत में बाबासाहब के आंदोलन में गित लिखते रहे और गाते रहे. उन्होने कहा था भीम तेरे जन्म से हमारे करोड़ो परिवारों का उध्दार हुआ.

1952 के लोकसभा के चुनाव में डॉ.बाबासाहब आंबेडकरजी मुंबई से चुनाव में उम्मीद्वार थे. उस समय हजारों कवी गायक तथा कार्यकर्ताओं ने बाबासाहब का आंदोलन उत्साह के साथ चलाया. उस समय गायक कृष्ण शिंदे ये मराठा समाज से थे. वे प्रजा समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता थे. वे बाबासाहब के चुनाव में बाबासाहब के साथ थे. उन पर बाबासाहब का गहरा असर पडा. उन्होने बहोत सारे गीत गाये थे. 1956 में उन्होंने नागपूर में धम्म दिक्षा ली थी. बाद में प्रल्हादजी शिंदे, नागोराव पाटणकर, लक्ष्मण केदार, मिलिंद शिंदे, सरतापे, प्रतापसिंग बोदडे, हरेंद्र जाधव, लक्ष्मण राजगुरू, सुधिर फडके, श्रावण यषवंते, गोविंद मशालकर, नामदेव ढसाल, विठ्ठल उमप, जयवंत कुळकर्णी, पुश्पा वाघधरे, सुरेष वाडकर, अनिरूध्द वनकर, राहुल आन्वीकर, उत्तरा केळकर, अनिल खोब्रागडे, प्रकाश पाटणकर, आनंद शिंदे, मिलिंद शिंदे, सागर समदुर, गवई-मिसाळ, प्रभाकर धाकडे, आनंद षिंदे, डि.आर.इंगळे, इन जैसे कवी-गायक-संगितकारोंने बाबासाहब के आंदोलन पर बहोत गीत तयार किये ओर गाये इनसे लोगोंमे बहोत जागृती हुयी.

उस समय डॉ.बाबासाहब आंबेडकरजी नें अंग्रेज सरकार को बताकर बहोत सारे युवकों को पढाने के लिए इंग्लंड-अमेरिका भेज दिया. लेकिन उनमे से कोई भी सामाजिक आंदोलन के लिए काम में नही आया. इसलिए 1956 की आगरा की सभा में कहा था की, ‘मुझे पढे-लिखे लोगों ने धोका दिया है.’ लेकिन उस समय दादासाहब गायकवाड तथा वामनदादा कर्डक जैसे कम पढे लिखे नेताओं ने आंदोलन को आगे बढाया. उस समय बॅ.खोब्रागडेजी को बाबासाहब ने उनके पिताजी को कहकर उनके खुद के खर्चे से लंडन भेजने को कहा. बाद में बॅ.खोब्रागडेजी ने आंदोलन आगे चलाया. उस समय बाबासाहब का आंदोलन पूरे भारत में ताकत से चल रहा था. पार्टी बहोत मजबुत थी. प्रा.एन शिवराज, प्रा.बी.पी.मौर्य, जोगेन्द्रनाथ मंडल, एल.आर.बाली, अॅड.बी.सी.कांबळे, अॅड.आवळे बाबू, भैय्यासाहेब आंबेडकर, प्रा.आर.डी.भंडारे, शांताबाई दाणी, रा.सु.गवई, दादासाहब रूपवते और ना.ह.कुंभारे ये आंदोलन में शामिल थे. बाद में आंदोलन मे गुटबाजी हुयी.

बाद में भैय्यासाहब आंबेडकर तथा कांशिराम साहब ने एकता के लिए बहोत प्रयास किये. बाद में 1972 में दलित पैंथर की स्थापना हुयी.वामनदादा एक गीत में कहते है की, हम तुफानों मे के दिए है. वामन दादाजी ने निस्वार्थ सामाजिक आंदोलन चलाया. दादा एक गीत मे कहते है, ‘बताउ कितना में दादा, तुम सब यहाँ पर एकता से रहो. उन्होने सामाजिक विषमता के खिलाफ बहोत सारे गीत लिखे ओर गाये. 1956 में जब बाबासाहब आंबेडकरजी ने नागपूर में लाखो लोगों के साथ बौध्द धम्म अपनाया.

उस समय वामनदादाने गीत लिखा था, ‘वामन इस धरतीपर ऐसा हुआ ही नही, ओर पाँच लाख लोग बुध्द को शरण गये नही’. वामनदादा कहते है आजादी का मतलब हमे समझने दो, ओर दो वक्त का खाना हमे मिलने दो. दादा आगे गीत मे कहते है, मैदान मे आकर बेभान होकर दंगा मत करो, और इंसान के बेटे होकर इंसान के दुश्मन मत बनो. आगे वह गीत में कहते है महिलाओं के मुक्ती के लिए आये महात्मा फुले ओर लडकियों की पढाई हो गयी खुली. आगे पढाई के बारे मे दादा एक गीत में कहते है, तुम्हे पढाई की इच्छा हो, ओर तुम इधर-मत भटको ऐसा बच्चों को कहते हे. दादा दुसरे गीत में कहते है ‘मुझे गुस्सा नही आता यही मेरा गुनाह है’. दादा एक गीत मे ऐसा कहते है की, ‘भीम अगर तूम्हारे विचारों के पाँच लोग रहते तो उनके तलवार की धार अलग ही रहती’. वामनदादा छ.शिवाजी महाराज के बारे मे कहते है की, ‘शिवजी के राज में नही थी कुछ कमी, ओर खुशी से रहते थे हिन्दु और मुसलमान’ ऐसे महान भीमकवी का 15 मई 2004 को निधन हुआ. वामनदादा ने कोई भी संपत्ती जमा नही की. ऐसा उनका त्याग था. उनके त्याग और कार्य को अभिवादन.

सुरेश घोरपडे पूर्व न्यायाधीश

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दिल्ली में उमर खालिद पर जानलेवा हमला

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में संसद के पास स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर जेएनयू के छात्र उमर खालिद पर जानलेवा हमला हो गया. खालिद मोब लिन्चींग पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आये थे. कार्यक्रम में जाने के पहले उमर खालिद जब अपने दोस्तों के साथ बाहर चाय पी रहे थे तभी उनपर ये हमला हुआ. घटना दोपहर तकरीबन तीन बजे की है. घटना स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक जब खालिद चाय पी रहे थे तभी 5-6 युवकों ने हमला कर दिया, जिस पर खालिद के साथ मौजूद लोगों की उनके साथ हाथापाई हो गई, जिसमें रिवाल्वर गिर गया. किसी को गोली नहीं लगी, लेकिन हमलावर भागने में कामयाब रहें। पुलिस ने रिवाल्वर बरामद कर लिया है. हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना था कि उन्होंने गोली की आवाज नहीं सुनी. इस मामले में पुलिस ने उमर खालिद से शुरुआती पूछताछ के बाद उन्हें और पूछताछ के लिए पीछे के दरवाजे से बाहर लेकर चली गई. इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठ गए हैं. 15 अगस्त के ठीक पहले दिल्ली के केंद्र में संसद के पास इस तरह का हमला हमलावरों के हौंसले को भी बताता है. पूरा घटनाक्रम क्या है, यह वहां का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सामने आएगा. यह घटना दिल्ली पुलिस के लिए एक चुनौती बन गई है.

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यूपी शिया वक्फ बोर्ड ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘भारत माता की जय’ बोलना किया अनिवार्य

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड ने 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस के आयोजन पर ‘भारत माता की जय’ बोलना अनिवार्य कर दिया है. शनिवार को बोर्ड ने इस संबंध में काफी कड़े शब्दों में कहा कि अगर उनके निर्देशों को फॉलो नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने कहा, ‘शिया वक्फ बोर्ड ने एक आदेश जारी किया है जिसके तहत 15 अगस्त को वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर किए गए किसी भी कार्यक्रम में राष्ट्रगान के बाद भारत माता की जय बोलना ज़रूरी होगा. कोई भी अगर इस आदेश का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’

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रानी लक्ष्मीबाई की जान बचाने वाली योद्धाः झलकारी बाई

1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम और बाद के स्वतन्त्रता आन्दोलनों में देश के अनेक वीरों और वीरांगनाओं ने अपनी कुर्बानी दी. इतिहासकारों ने उन्हें अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें इतनी अधिक लोक मान्यता मिली कि उनकी शहादत बहुत दिनों तक गुमनाम नहीं रह सकी. अपने शासक झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के प्राण बचाने के लिए स्वयं बलिदान हो जाने वाली वीरांगना झलकारी बाई ऐसी ही एक अमर शहीद वीरांगना हैं.

अपनी मातृभूमि झांसी और राष्ट्र की रक्षा के लिए झलकारी बाई के दिये गये बलिदान को तब के इतिहासकार भले ही अपने स्वार्णिम पृष्टों में न समेट सके हों किन्तु झांसी के लोक इतिहासकारों, कवियों एवं लेखकों ने वीरांगना झलकारी बाई के स्वतंत्रता संग्राम में दिये गये योगदान को श्रद्धा के साथ स्वीकार किया.

वीरांगना झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1820 ई० को झांसी के समीप भोजला नामक गांव में एक सामान्य कोरी परिवार में हुआ था. झलकारी बाई को औपचारिक शिक्षा ग्रहण करने का अवसर तो नहीं मिला किन्तु वीरता और साहस झलकारी में बचपन से मौजूद था. थोड़ी बड़ी होने पर झलकारी की शादी झांसी के पूरनलाल से हो गयी जो रानी लक्ष्मीबाई की सेना में तोपची था. शुरुआत में वो घेरलू महिला थी किन्तु सैनिक पति का उन पर बड़ा प्रभाव पड़ा. धीरे–धीरे उन्होंने अपने पति से सारी सैन्य विद्याएं सीख ली और एक कुशल सैनिक बन गईं.

इस बीच झलकारी बाई के जीवन में आई कठिनाइयों के दौरान उनकी वीरता और निखर कर सामने आई. इसकी भनक धीरे – धीरे रानी लक्ष्मीबाई को भी मालूम हुई. रानी झांसी ने झलकारी बाई को बुलावा भेजा. और जब झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई के सामने आईं, तो वो दोनों एक-दूसरे को देखते रह गए. दोनों की शक्लें एक-दूसरे से काफी मिलती थी. रानी ने झलकारी बाई को पहले अपनी महिला सेना में शामिल कर लिया और बाद से उनकी वीरता और साहस को देखते हुए उन्हें महिला सेना का सेनापति बना दिया.

जब रानी लक्ष्मीबाई का अग्रेंजों के विरूद्ध निर्णायक युद्ध हुआ उस समय रानी की ही सेना का एक विश्वासघाती सैनिक अंग्रेजी सेना से मिल गया और धोखे से झांसी के किले के ओरछा गेट का फाटक खोल दिया. फिर क्या था, अंग्रेजी सेना झांसी के किले में घुस पड़ी. उस समय रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेजों की सेना से घिरता हुआ देख वीरांगना झलकारी बाई ने बलिदान और राष्ट्रभक्ति की अदभुत मिशाल पेश की थी.

जैसा कि हमने बताया की झलकारी बाई की शक्ल रानी लक्ष्मीबाई से मिलती थी. रानी लक्ष्मीबाई को बचाने के लिए झलकारी बाई ने एक उपाय सोचा. अपनी सूझ बुझ और रण कौशल का परिचय देते हुए वह स्वयं रानी लक्ष्मीबाई बन गयी और असली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को सकुशल किले से बाहर निकाल दिया और खुद अंग्रेजी सेना से संघर्ष करती हुई शहीद हो गईं. अंग्रेजों को लगा कि रानी को मारकर उन्होंने युद्ध जीत लिया.

लेकिन उस धोखेबाज सैनिक के बताने पर पता चला कि यह रानी लक्ष्मीबाई नहीं बल्कि महिला सेना की सेनापति झलकारी बाई है जो अंग्रेजी सेना को धोखा देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई बन कर लड़ रही है. अंग्रेज बलिदान की इस मिसाल को देख चकित रह गए. वीरांगना झलकारी बाई के इस बलिदान को बुन्देलखण्ड तो क्या भारत का स्वतन्त्रता संग्राम कभी भुला नहीं सकता.

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हैंडपंप लगवाकर विधायक ने की दलित परिवार की मदद, पानी पिलाकर पूरी की प्रतिज्ञा

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भदोही। यूपी के भदोही जिले में स्थानीय विधायक के सहयोग से पानी की समस्या से जूझ रहे एक दलित परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है. स्थानीय विधायक की मदद के कारण 24 घंटे में घर में हैंडपंप लग गया और पानी की दिक्कत दूर हो गई. इतना ही नहीं ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्रा ने हैंडपंप से पानी निकालकर खुद पिया और परिवार के मुखिया को पिलाकर उसकी प्रतिज्ञा भी पूरी की.

दरअसल, भदोही जिले के सागरपुर बवई गांव निवासी दलित लालमणि पेयजल समस्या से जूझ रहा था. इसकी जानकारी विधायक विजय मिश्रा को हुई तो उन्होंने सहयोग किया. इससे उसके घर 24 घंटे के अंदर हैंडपंप लग गया . हालांकि हैंडपंप लगने के बाद भी लालमणि उसका पानी नहीं पी रहा था. उसकी जिद थी कि जब तक विधायक स्वयं हैंडपंप चलाकर उद्घाटन नहीं करेंगे तब तक वह पानी नहीं पिएगा.

इस प्रतिज्ञा के साथ वह पिछले हैंडपंप लग जाने के बावजूद उसका पानी नहीं पी रहा था. विधायक को जैसे ही इस बारे में जानकारी मिली, वह लालमणि के घर पहुंचे और हैंडपंप चलाकर उद्घाटन किया. इसके बाद लालमणि ने हैंडपंप का पानी ग्रहण किया. इस बात की चर्चा समूचे क्षेत्र में बनी हुई है.

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धर्मांतरित आदिवासियों को भी मिलता रहेगा आरक्षण का लाभ : केंद्र सरकार

बलिया। केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने कहा है कि केंद्र सरकार अनुसूचित जनजाति में आने वाले धर्मांतरित हिंदुओं, ईसाइयों तथा मुसलमानों को अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली सुविधा को रोकने पर विचार नहीं कर रही है. मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी. उरांव ने स्वामी करपात्री जी के जयंती समारोह में भाग लेने के बाद यहाँ संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भाजपा अनुसूचित मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पिछले दिनों दिल्‍ली में हुई बैठक में एक प्रस्‍ताव के जरिये यह मांग की गयी है कि धर्मांतरित हिंदुओं, ईसाइयों तथा मुसलमानों को अनुसूचित जनजाति के बतौर दी जाने वाली सुविधा रोक दी जाये, लेकिन केंद्र सरकार का रुख कानून के अनुसार स्पष्ट है. यह सुविधा इन धर्मांतरित समुदायों को मिलती रहेगी.

उन्‍होंने कहा “आज की संवैधानिक व्‍यवस्‍था के हिसाब से अनुसूचित जनजाति में किसी भी धर्म का व्‍यक्ति हो, वह चाहे ईसाई हो, मुस्लिम हो या हिंदू हो, उसे अनुसूचित जनजातियों को मिलने वाले अधिकार पाने का हक है. अनुसूचित जाति में धर्म परिवर्तन की स्थिति में ऐसा नहीं होता. यह कानूनी स्थिति है. मैं भारत सरकार का मंत्री हूं. मंत्री संविधान और कानून के हिसाब से चलता है.”

गौरतलब है कि भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पिछले रविवार को नयी दिल्ली में हुई बैठक में मोर्चे की झारखंड इकाई के अध्यक्ष रामकुमार पाहन ने एक प्रस्‍ताव पेश करते हुए कहा था कि अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण का लाभ धर्मांतरित आदिवासी उठा रहे हैं. इसी प्रकार दूसरे धर्म के लोग जानबूझ कर आदिवासी लड़कियों से विवाह कर वह सारा लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जो अनुसूचित जनजाति को मिलना चाहिए. उन्‍होंने प्रस्‍ताव रखते हुए कहा था कि जिस आदिवासी ने अपने मूल धर्म को त्याग दूसरे धर्म को अपना लिया है, उसे अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए. साथ ही जिस आदिवासी महिला ने किसी गैर आदिवासी से शादी कर ली है, उसे भी आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.

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दाऊद के नाम पर बसपा विधायक को धमकी, ‘1 करोड़ रुपये दो वरना तुम्हारे लिए एक गोली काफी है’

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह ने उनसे एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगे जाने का दावा करते हुए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम से जान का खतरा बताया है. बलिया के रसड़ा क्षेत्र से विधायक सिंह ने रविवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि गत छह अगस्त को उन्हें मोबाइल पर अपना ई-मेल देखने का संदेश आया था. तब उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया. चूंकि आमतौर पर युवा उन्हें अपना बायोडाटा भेजते हैं, लिहाजा उन्होंने सोचा कि ऐसा ही कोई ई-मेल आया होगा, जिसे वह बाद में देख लेंगे.़

विधायक ने बताया कि आठ अगस्त को उन्हें उसी नम्बर से एक और संदेश मिला, जिसमें लिखा था कि “आखिरी चेतावनी, जीना या मरना, एक करोड़ रुपये”. ई-मेल देखने पर उन्हें उस पर दाऊद इब्राहीम की तस्वीर नजर आयी. ई-मेल में लिखा था,‘‘ आप बलिया के लोगों की सेवा कर रहे हैं. अगर आप इसे जारी रखना चाहते हैं तो एक करोड़ रुपये दो, वरना तुम्हारे लिये एक ही गोली काफी है. हम आपको किसी भी वक्त मार सकते हैं.’’

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दलित ग्राम प्रधान बिना कसूर 10 दिन से पुलिस हिरासत में

चित्रकूट। फर्जी मुठभेड़ों को लेकर बदनाम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की पुलिस अब मानवाधिकारों के हनन में भी अव्वल होती जा रही है.

एक दलित ग्राम प्रधान को पुलिस पूछताछ के नाम पर कोतवाली ले आई और बिना लिखा-पढ़ी किए पिछले 10 दिनों से हिरासत में रखे हुई है. ग्राम प्रधान के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है. यह वाकया चित्रकूट जिले की कर्वी कोतवाली का है. करारी गांव के दलित ग्राम प्रधान को हत्या के एक मामले में पूछताछ के लिए लाया कोतवाली लाया था.

करारी गांव की एक दलित महिला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अलावा उच्चाधिकारियों को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि उसने अदालत के आदेश पर 17 जुलाई, 2018 को गांव के राजाभइया सिंह के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में दोष मुक्त करने के बदले विवेचना अधिकारी ने आरोपी से कथित रूप से एक लाख रुपये की मांग की थी. इसी को लेकर आरोपी ने अपने पिता पर जमीन बेचने का दबाव बनाया, जिसको लेकर दोनों के बीच दो दिन काफी झगड़ा हुआ था और उसके पिता दादू भाई ने 31 जुलाई और एक अगस्त की दरम्यानी रात अपने खेत के बबूल के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

शिकायती पत्र के मुताबिक, पुलिस महिला के पति कल्लू, देवर कमलेश, भतीजे सुशील और गांव के दलित ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद कोरी को एक अगस्त की देर रात घर से उठा ले गई. पति, देवर और भतीजे को छह अगस्त को कथित हत्या के मामले में जेल भेज दिया है, लेकिन ग्राम प्रधान को अब भी कर्वी पुलिस अपनी हिरासत में रखे हुई है. इस मामले में पुलिस ने कोई लिखा-पढ़ी नहीं की है.

पीड़िता ने यह भी लिखा कि जिस रात पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था, उसके दूसरे दिन अदालत में उसका धारा-164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराया जाना था, जो अब तक दर्ज नहीं कराया गया है. आरोपी उसकी व उसके परिवार की हत्या के लिए खुला घूम रहा है.

दस दिन से पुलिस की हिरासत झेल रहे दलित ग्राम प्रधान कोदा प्रसाद कोरी ने रविवार को फोन पर बताया कि कोतवाल ने कथित हत्या बावत अब तक कोई पूछताछ नहीं की है और न ही थाने से एक भी दिन खाना दिया है. उसके परिजन दोनों पहर 40 किलोमीटर की दूरी तय कर कोतवाली खाना देने आते हैं.

उन्होंने फोन पर बताया कि कोतवाल ने सीधे तौर पर रिश्वत की मांग नहीं की, बल्कि कोतवाल की तरफ से उनके सरकारी जीप चालक और एक पंड़ित होमगार्ड ने कई बार एक लाख रुपये देने पर छोड़ने की बात कह चुके हैं. मैं पचास हजार रुपये तक देने को कह चुका हूं.

इस मामले में जब कोतवाल अनिल सिंह से बात की गई तो उनका कहना था, कल्लू, कमलेश, सुरेश, ग्राम प्रधान कोदा और उसके दो भाइयों रामकुमार व मिठाईलाल के खिलाफ दादू भाई सिंह की हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज है. कल्लू, कमलेश और सुशील को छह अगस्त को जेल भेज दिया गया है. ग्राम प्रधान को घटना बावत पूछताछ और दो भइयों की गिरफ्तारी के दबाव के लिए हिरासत में रखा गया है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लिखा-पढ़ी में जरूर हिरासत में नहीं लिया गया, लेकिन पुलिस अधीक्षक की जानकारी में है. जल्दी ही ग्राम प्रधान का भी चालान किया जाएगा.

दुष्कर्म पीड़िता का अदालत में अब तक बयान न दर्ज कराए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उस घटना के विवेचना अधिकारी सीओ सिटी हैं, इस बारे में वही बता सकते हैं.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहले ही 24 घंटे से ज्यादा समय तक किसी भी आरोपी को हिरासत में न रखने के दिशा-निर्देश दे चुका है, लेकिन यहां की पुलिस के लिए इसका कोई मायने नहीं है.

(ये खबर सिंडिकेट फीड से ऑटो-पब्लिश की गई है. हेडलाइन को छोड़कर क्विंट हिंदी ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.)

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स्‍वतंत्रता दिवस पर अंधविश्‍वास की परछाई

यह प्रश्न अटपटा हो सकता है. लेकिन क्या आपको मालूम है कि 14 अगस्त को पाकिस्तान में आजादी का दिवस मनाया जाता है. इसके पीछे इतिहास में कुछ कहानियां छिपी हुई है. 1929 में तत्कालीन कांग्रेस के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरु ने ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वराज की मांग की थी. उस समय 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के लिए चुना गया था. अंग्रेजो ने 14 अगस्‍त को भारत छोड़ने का निर्णय लिया था.

द्वितीय विश्वयुद्ध जो कि 1935 से 1945 के बीच हुआ, उसके बाद अंतरराष्ट्रीय संधि के दबाव में ब्रिटिश संसद में लॉर्ड माउंटबेटन को 30 जून 1948 तक सत्ता का ट्रांसफर करने का अधिकार दिया था. इस पर भारत के पहले गवर्नर जनरल बनने वाले सी. राजगोपालचारी ने कहा था कि यदि वह जून 1948 तक इंतजार करते हैं, तो ट्रांसफर करने के लिए कोई सत्ता ही नहीं बचेगी. इसीलिए 4 जुलाई 1947 को माउंटबेटन भारत को छोड़ने का बिल पेश किया, जिसे 15 दिन में ही पास कर दिया गया. जिसमें यह तय किया गया कि 15 अगस्त 1947 के पहले भारत छोड़ दिया जायेगा.

इस तरह 14 अगस्त 1947 कि बीती रात को भारत छोड़ने का निर्णय लिया गया. इसी समय भारत के दो टुकड़े हो गए, जिसका निर्णय काफी पहले लिया जा चुका था. पाकिस्तान ने उसी दिन अपने आप को आजाद कर लिया. लेकिन भारत ने एक दिन का इंतजार किया. जानते हैं क्यों?

इसकी कहानी बहुत दिलचस्प है. यह कहानी भारत के जड़ों के भीतर तक घुसे अंधविश्वास की कलई खोलता है.

अंग्रेजों के जाने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गोस्वामी गणेश दास महाराज के माध्यम से उज्जैन के ज्योतिष सूर्यनारायण व्यास को हवाई जहाज से दिल्ली बुलवाया और पंचांग देखकर आजादी का मुहूर्त निकलवाया.

पूरे संसार में यह अपने आप में बिरली घटना है जब किसी ने गुलामी की बेड़ियों को खोलने के लिए भी ज्योतिष, शुभ-अशुभ, मुहूर्त, अंधविश्वास का सहारा लिया और इसकी वजह से एक दिन और अपनी गुलामी में रहना पड़ा.

ज्योतिष पंडित सूर्यनारायण व्यास ने 14 तारीख के बजाय 15 तारीख की बीती रात को शुभ लग्न बताया. इसके लिए जो पंचांग बनाया गया उसमें यह बताया गया कि यदि देश 15 तारीख को आजाद होता है तो भारत में लोकतंत्र, सुख शांति और प्रगति बनी रहेगी. 75 वर्ष के भीतर भारत विश्व गुरु बनेगा. इतना ही नहीं, पं. व्यास के कहने पर ही स्वतंत्रता की घोषणा के तत्काल बाद देर रात ही संसद को धोया गया, बाद में बताए मुहूर्त के अनुसार गोस्वामी गिरधारीलाल ने संसद की शुद्धि भी करवाई. इस हिसाब से हम पाकिस्तान से 1 दिन छोटे हो गए.

यह प्रश्न उठता है कि क्या भारत पाकिस्तान से भी ज्यादा लोकतांत्रिक सुख शांति और प्रगति वाला देश है आइए इसका विश्लेषण करते हैं.

पहला भारत में जिस प्रकार से संप्रदायिक हत्याएं हो रही हैं. लिंचिंग जैसी घटनाएं हो रही हैं. दलित और ओबीसी तथा अल्पसंख्यकों का दमन किया जा रहा है. इंसान को जानवर और जानवरों को माता का दर्जा दिया जा रहा है. इससे आप भारत में सांप्रदायिक और लोकतांत्रिक स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं.

दूसरा, भारत की न्याय व्यवस्था आज बिगड़ी हालत में बदल चुकी है. कॉलोसियम परंपराओं में अयोग्य न्यायाधीशों का दबदबा कोर्ट में बढ़ गया है. ईमानदार न्याय प्रिय न्यायाधीशों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है. और बेहद दबाव में यह काम करने के लिए मजबूर है.

अगर पाकिस्तान से तुलना करें तो पाकिस्तान में न्याय व्यवस्था कुछ मजबूती दिखाई पड़ती है. जहां पर पूर्व राष्ट्रपति को 1 घंटे खड़े रहने की सजा दी जाती है. तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री को पनामा केस में सजा दी जाती है. उसी पनामा केस की भारत में फाइलें बंद की जा चुकी है.

तीसरा भारत में जिस प्रकार से प्रेस मीडिया को दबाव में रखा जा रहा है और सोशल मीडिया को कंट्रोल किए जाने की कोशिश हो रही है. इससे नहीं लगता कि लोकतंत्र ज्यादा दिन टिक पाएगा. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में गलत कामों के लिए मीडिया में अपने प्रधानमंत्री का मजाक बनाना एक आम बात होती है.

चौथा भारत में शिक्षा व्यवस्था बेहद खस्ता हाल में पहुंच चुकी है. हजारों स्कूलों को बंद किया जा चुका है. आठवीं तक बिना पढ़े पास होने का फरमान जारी है. ऐसी स्थिति में आप समझ सकते हैं कि आम भारतीय की शिक्षा की स्थिति क्या होगी.

पांचवा, ग़रीबी में भारत विकासशील देशों की सूची में काफी पीछे है. 5 जून 2016 जनसत्ता में छपी खबर के मुताबिक भारत को विकासशील देशों की सूची से हटाकर पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ Low इनकम वाली सूची में रखा गया है. इससे आप भारत की गरीबी का अंदाजा लगा सकते हैं.

यह चंद आंकड़े हैं जो यह बताने के लिए काफी है कि पंडित ज्योति सूर्यनारायण व्यास की भविष्यवाणी और उनका पंचांग कहां तक सही है. रही बात भारत के विश्व गुरु बनने की तो शिक्षा की स्थिति के आधार पर यह कहना हास्यास्पद है. मुझे लगता था कि आज के समय में भारत अपनीs अंधविश्वास से निजात पाएं और स्वयंभू विश्व गुरु बनने के दावे से बाहर निकलें.

यह प्रश्न मुंह बाए खड़ा है दुनिया की 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय की सूची में हमारा एक ही विश्वविद्यालय शामिल क्यों नहीं है? दुनिया के अविष्कारों में भारत का एक भी अविष्कारक क्यों नहीं है. हमें अपनी आत्ममुग्धता की बीमारी से निजात पाने की जरूरत है. तभी सही मायने में भारत आजाद कहलाएगा. नहीं तो गुलामी का एक दिन कई हजार सालों के बराबर होगा.

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केरल में बाढ़ से 50 के करीब मौत, हजारों बेघर

केरल में बारिश लोगों पर कहर बनकर टूट रही है. पिछले 40 साल में यहां सबसे भीषण बाढ़ देखी गई है. 8 जिले बाढ़ की चपेट में है. सेना, नेवी से लेकर एनडीआरएफ राहत कार्य में लगे हुए हैं. बाढ़ के कारण मरने वालों का आंकड़ा 39 पहुंच चुका है. हजारों लोग बेघर हैं. लोगों को कैंप में ठहराया जा रहा है. उन्हें खाने पीने की सामग्री पहुंचाई जा रही है. उधर, इडुक्की बांध बारिश के बाद से पूरी तरह भर चुका है. यहां से हर सेकंड 5 लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा है. बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण निचले इलाकों में भी इसका असर दिखाई दे रहा है

केरल में सेना भी एक ओर से मोर्चा संभाले हुए है. आर्मी की 8 टुकड़ियां यहां लगी हैं. खासकर महिला कमांडो की टुकड़ी भी यहां राहत कार्य में जुटी हुई है. एयरफोर्स और नेवी भी केरल में राहत कार्य में जुटी हुई है. नेवी ने ऑपरेशन मदद लॉन्च कर दिया है. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 14-14 टीमें लगी हैं. फिलहाल बारिश और बाढ़ के कारण मौत का आंकड़ा 37 तक पहुंच गया है. रविवार को वयनाड में एक 58 वर्षीय महिला की मौत बिल्डिंग गिरने की वजह से हो गई. जबकि 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं.

वयनाड के कलेक्टर ए. आर अजय कुमार ने सभी स्कूल-कॉलेजों को सोमवार को बंद रखने के आदेश दिए हैं. यहां हालात स्थाई होने तक लोगों को पानी वाली जगहों पर जाने से मना किया है. पोथुनडी डैम के भी तीन दरवाजे खोल गए हैं. चुल्लीयर, वलयर और मीनकारा जलाशयों में भी पानी खतरे के निशान के ऊपर चला गया है. जिसके चलते आस-पास के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है.

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रुपये में भारी गिरावट

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नई दिल्ली। इस कारोबारी हफ्ते की शुरुआत 69.49 के स्तर पर पहुंचकर करने के बाद रुपये में गिरावट 69.61 के स्तर पर पहुंच गई. हालांकि अब रुपये में थोड़ी मजबूती आना शुरू हो गई है. फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 69.42 के स्तर पर कारोबार कर रहा है.

इस कारोबारी हफ्ते की शुरुआत रुपये ने भारी गिरावट के साथ की है. सोमवार को रुपये में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली. डॉलर के मुकाबले रुपये ने 69.49 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच कर शुरुआत की.

यह पहली बार है, जब रुपये में डॉलर के मुकाबले इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली. सोमवार को रुपये ने डॉलर के मुकाबले 66 पैसे की भारी गिरावट के साथ शुरुआत की.

शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 68.83 के स्तर पर बंद हुआ था. बता दें कि विशेषज्ञ पहले ही संभावना जता चुके हैं कि रुपया 70 के स्तर पर पर पहुंच सकता है.

इससे पहले 19 जुलाई को रुपये में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई थी. इस दौरान रुपये ने पहली बार 69 का आंकड़ा छुआ था. डॉलर की डिमांड बढ़ने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये को कमजोर किया था. 69 का स्तर छूने से एक दिन पहले रुपये ने 19 पैसे की गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की थी. 18 जुलाई को यह 68.43 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था.

विशेषज्ञ पहले ही आशंका जता चुके हैं कि रुपये में दबाव बना रहेगा. उनके मुताब‍िक डॉलर में लगातार आ रही मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल और विदेशी निवेश प्रवाह में कमी रुपये में गिरावट के लिए जिम्मेदार है.

बैंकरों ने आशंका जताई थी कि अगर रुपया 70 के स्तर पर पहुंच जाता है, तो आरबीआई के लिए इस स्थ‍िति से निपटना काफी मुश्क‍िल हो सकता है.

बैंकरों ने कहा कि भारतीय र‍िजर्व बैंक रुपये को 70 के स्तर पर पहुंचने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगा. अब जब रुपया 69.49 के स्तर पर पहुंच गया है, तो केंद्रीय बैंक कोई सुरक्षात्मक कदम उठा सकता है.

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10 बार सांसद रहने वाले पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का निधन

नई दिल्ली। लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी का निधन हो गया है. वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थे. पिछले काफी वक्त से वह कोलकाता के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे. चटर्जी 89 साल के थे. चटर्जी माकपा के दिग्गज नेता थे. वह 10 बार लोकसभा के सांसद रहे हैं. वह कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए-1 सरकार में 2004 से 2009 तक लोकसभा के अध्यक्ष रहे थे. चटर्जी सीपीआईएम के केंद्रीय समिति के सदस्य रहे थे, और उन्हें प्रकाश करात के धुर विरोधी के रूप में जाना जाता है. यूपीए-1 शासनकाल में उनकी पार्टी सीपीएम की ओर से सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद उनसे स्पीकर पद छोड़ने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. जिस कारण उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया. सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को बंगाली ब्राह्मण निर्मल चंद्र चटर्जी और वीणापाणि देवी के घर में असम के तेजपुर में हुआ था. दिग्गज नेता के निधन के बाद तमाम नेताओं ने दुख जताया है. सर्वश्रेष्ठ सांसद थे एक बार ममता बनर्जी से मिली थी हार वह पश्चिम बंगाल के बर्धमान, जादवपुर और बोलपुर से लोकसभा सांसद रह चुके थे. हालांकि, 1984 में जादवपुर में ममता बनर्जी से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था. उन्हें 1996 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिल चुका है. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘सोमनाथ चटर्जी के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ. देश और बंगाल के लिए एक बड़ी हानि है. उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति मेरी संवादनाएं हैं.’ तो वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा, ‘पूर्व सांसद और अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी भारतीय राजनीति का एक स्तंभ थे. उन्होंने हमारे संसदीय लोकतंत्र को मजबूत किया. वह कमजोर लोगों के कल्याण के लिए एक मजबूत आवाज थे. मैं उनके निधन से दुखी हूं और उनके परिवार व समर्थकों के साथ मेरी संवेदना है. चटर्जी एक संस्थान थे- राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक संस्थान थे और पार्टी लाइन से हटकर सभी सांसदों के मन में उनके लिए अपार सम्मान था. इस दुख के समय में उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं. तो वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह खबर सुनकर बेहद दुखी हूं. उन्हें लोकसभा के सबसे महानतम स्पीकर की श्रेणी में हमेशा याद रखा जाएगा.

बिहार में IAS की मुखिया बीवी रितु जायसवाल की दबंगई से दहशत में दलित

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आईएस की दबंग मुखिया पत्नी रितु जयसवाल

सीतामढ़ी। बिहार के सीतामढ़ी में इन दिनों आईएएस की मुखिया बीवी रितु जयसवाल के दलितों के साथ मारपीट का मामला गरमाया हुआ है. रितु जयसवाल पर उनके ही पंचायत के दलितों ने मारपीट औऱ डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. मामला सीतामढ़ी जिले के सोनवर्षा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले सिंहवाहिनी पंचायत का है. इस मामले में एससी-एसटी थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है. रितु जयसवाल पर प्रताड़ित करने डराने-धमकाने और जातिसूचक गाली देने का आरोप लगा है.

दरअसल बिहार सरकार ने एक योजना शुरू की है. योजना का नाम मुख्यमंत्री सात निश्चय नल जल योजना है. इस योजना के तहत प्रत्येक वार्ड को 15 हजार से 2 लाख रुपए तक वार्ड में जलापूर्ति और अन्य विकास कार्यों के लिए दिया जाता है. रितु जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने इस योजना को कमीशन के लिए अपने हिसाब से चलाने के लिए दलित समाज के वार्ड सदस्य वीरेन्द्र राम पर दबाव बनाया. आरोप के मुताबिक मुखिया का कहना था कि आप हमारे ठेकेदार से काम करवाइए और हम आपको अच्छा कमीशन भी देंगे. लेकिन रितु जायसवाल की बात दलित वार्ड सदस्य वीरेंद्र राम ने नहीं मानी और खुद अपना काम करने लगे.

वीरेंद्र राम का आरोप है कि जब उन्होंने मुखिया रितु जायसवाल की बात नहीं मानी तो मुखिया ने 5 अगस्त 2018 को उन्हें फोन करके धमकाया कि उनकी टीम (कंपनी) बिहार के बडे दबंग नेता का भतीजा का है और यदि मैं उनको ठेकेदारी नहीं दोगे तो सही नहीं होगा. वीरेन्द्र राम का कहना है कि इसके बाद उन्हें फोन पर डराया धमकाया गया. मुखिया अपने समर्थकों के साथ खुद वीरेन्द्र के दरवाजे पर आ गई.

वार्ड सदस्य वीरेन्द्र राम द्वारा दर्ज कराया गया FIR

बकौल वार्ड सदस्य वीरेन्द्र राम, “ मुखिया और उनके गुंडे हमारे टोला में काम कर रहे मजदूरों को और हमारी पत्नी जो मजदूरों से काम करा रही थी उसको पकड़ कर मारने लगी. हमारी पत्नी मुखिया जी का पैर पकड़कर रोने लगी फिर भी मुखिया जी नहीं मानी और वो और उनके समर्थक मारते रहें.” इस घटना के बाद गांव के अन्य दलितों के साथ वार्ड सदस्य वीरेंद्र राम ने SC ST थाना सीतामढ़ी में 5 अगस्त 2018 को FIR दर्ज करवाया, जिसमें एससी एसटी एक्ट के तहत रितु जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है.

रिपोर्टर ने इस मामले में जब रितु जायसवाल से संपर्क करके उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका कहना था कि जो हमारी कंपनी है वह बिहार के बड़े दबंग नेता का भतीजा का कंपनी है. और इसलिए मैं अपने गांव में दंगा फसाद नहीं चाहती थी इसलिए मैं उनको समझा रही थी लेकिन उन लोगों ने मेरे साथ बदतमीजी की. एससी-एसटी मामले में खुद को घिरता देख रितु जायसवाल ने भी अपनी तरफ से एक FIR पटना में दर्ज करवा दिया है.

गौरतलब है कि इससे पहले भी मुखिया रितु जायसवाल पर 8 बार अन्य लोगों पर भी हमला करने का आरोप है. इससे संबंधित मामला भी थाने में दर्ज है. पीड़ितों ने ‘दलित दस्तक’ को बताया की मुखिया का पति आईएएस अधिकारी है और वह बार-बार हम लोगों को धमका रहे हैं कि तुम लोग केस वापस ले लो नहीं तो इससे भी बुरा हाल होगा.

  • बिहार से राजीव कुमार की रिपोर्ट 

संसद मानसून सत्र: विपक्ष के विरोध के बीच राज्‍यसभा में नहीं हुआ पेश

नई दिल्‍ली। तीन तलाक बिल राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण पेश नहीं हो सका. राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने कहा कि तीन तलाक बिल को सदन में आज नहीं लिया जा सकेगा, क्योंकि इस पर आम सहमति नहीं बन पाई है.अब शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार इसे पेश कर सकती है. हालांकि यह भी उम्‍मीद जताई जा रही है कि शीलकालीन सत्र से पहले मोदी सरकार इसके लिए अध्‍यादेश ला सकती है.

विपक्ष ने बिल के संशोधनों पर सलाह ना करने का आरोप लगाया है. गुरुवार को विपक्ष की मांगों को स्वीकार करते हुए कैबिनेट ने तीन तलाक विधेयक में संशोधनों को हरी झंडी दे दी थी. तीन तलाक बिल पर यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि हमारी पार्टी की स्थिति बिल को लेकर एकदम साफ है. मैं इस बारे में और कुछ अभी नहीं कहना चाहूंगी.

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खतरे में दुनिया भर में आदिवासी समुदाय

संसाधनों के लिए अंतरराष्ट्रीय भूख की वजह से आदिवासी समुदायों के इलाके नष्ट होते जा रहे हैं. विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि दुनिया की मानवीय विविधता खोने का खतरा है.

दुनिया भर में रहने वाले 37 करोड़ आदिवासी और जनजाति समुदायों के सामने जंगलों का कटना और उनकी पारंपरिक जमीन की चोरी सबसे बड़ी चुनौती है. वे धरती पर जैव विवधता वाले 80 प्रतिशत इलाके के संरक्षक हैं लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लोभ, हथियारबंद विवाद और पर्यावरण संरक्षण संस्थानों की वजह से बहुत से समुदायों की आजीविका खतरे में हैं. ग्लोबल वॉर्मिंग का असर हालात को और खराब कर रहा है.

जनजातियां विभिन्न तरह की हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वे 90 देशों में फैली हैं, 5,000 अलग अलग संस्कृतियां और 4,000 विभिन्न भाषाएं. इस बहुलता के बावजूद या उसकी वजह से ही उन्होंने एक तरह के संघर्ष झेले हैं, चाहे वे ऑस्ट्रेलिया में रहते हों, जापान में या ब्राजील में. उनका जीवन दर कम है, गैर आदिवासी समुदायों की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम है. उनकी आबादी दुनिया की 5 प्रतिशत है लेकिन गरीबों में उनका हिस्सा 15 प्रतिशत है.

जमीन से वंचित

सर्वाइवल इंटरनेशनल की फियोना वॉटसन ने डॉयचे वेले को बताया कि विभिन्न समुदायों की सबसे बड़ी चुनौती ये हैं कि उनकी पुश्तैनी जमीन खोती जा रही है. “दुनिया भर में आदिवासी लोगों का पर्यावरण के साथ निकट रिश्ता है. उनकी आजीविका के लिए जमीन अहम है, लेकिन उनका प्रकृति से आध्यात्मिक रिश्ता भी है.”

औपनिवेशिक काल में जमीनों को हड़पने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह आज भी जारी है. विवाद और हिंसा की वजह से भी उनकी जमीन हड़पी जा रही हैं और वे रिफ्यूजी बन रहे हैं. कई बार सरकारें आदिवासी इलाकों में वहां रहने वाले लोगों की परवाह किए बगैर बांध बनाने या सड़क बनाने का फैसला लेती हैं. वॉटसन कहती हैं, “आदिवासी समुदायों को अक्सर पिछड़ा माना जाता है और इसका इस्तेमाल सरकारें और बहुराष्ट्रीय कंपनियां विकास के नाम पर उनकी जमीन का अधिग्रहण करने के लिए करती हैं.”

ब्राजील की मिसाल

एक मिसाल दक्षिणी ब्राजील का गुआरानी समुदाय है जिन्हें पशुपालन और गन्ने की खेती के लिए उनकी जमीन से खदेड़ दिया गया है.वॉटसन बताती हैं कि इस समुदाय में आत्महत्या की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है और उस इलाके की जैव विविधता पूरी तरह खत्म हो गई है. विडंबना ये है कि पर्यावरण संरक्षण संस्थाएं भी आदिवासी समुदायों से पूछे बिना उन इलाकों को संरक्षित इलाका बनवा रही हैं, जहां वे सदियों से रहते आए हैं.

आदिवासी अधिकारों पर एशिया में भी विवाद हो रहा है, जहां दुनिया की 70 प्रतिशत आदिवासी आबादी रहती है. आदिवासी मामलों के अंतरराष्ट्रीय कार्यदल के अनुसार मलेशिया का बजाऊ लाउट ग्रुप बंजारा समुदाय है जो आजीविका के लिए समुद्र पर निर्भर है. जहां वे मछली पकड़ रहे थे वह इलाका 2004 में तून सकारान मरीन पार्क बना दिया और 2009 से वहां मछली मारने पर पाबंदी है. ऑस्ट्रेलिया के वोलोनगोंग यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार इससे उनके पोषण और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ा है.

स्वनिर्णय का अधिकार

इसलिए वॉटसन कहती हैं कि आदिवासी समुदायों के लिए खुद फैसले लेने का अधिकार बहुत मायने रखता है. “ये फैसला करने का अधिकार कि वे कैसे जीना चाहते हैं, इसकी अक्सर उपेक्षा की जाती है और इससे गंभीर समस्याएं पैदा हो रही हैं.” अभी तक अंतरराष्ट्रीय तौर पर इस पर भी सहमति नहीं है कि आदिवासी की क्या व्याख्या है. इस शब्द का इस्तेमाल 2007 में संयुक्तराष्ट्र की घोषणा में किया गया और तब से दुनिया भर में आदिवासी समुदाय दिखने लगे हैं.

न्यूजीलैंड में माओरी समुदाय बहुत ही सक्रिय हो गया है. ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के जॉन मैककाफरी के अनुसार माओरी भाषा के कोर्स पूरे देश में बहुत लोकप्रिय हो गए हैं. कनाडा में भी आदिवासियों के मामलों पर मीडिया में नियमित रिपोर्ट दी जाती है और वे राष्ट्रीय बहस का हिस्सा हैं. ये उदाहरण दिखाते हैं कि दुनिया भर में आदिवासी समुदायों के साथ गहन संबंध संभव हैं. सरकारों को आदिवासी समुदायों और जनजातियों के महत्व को स्वीकार करना होगा और उनके साथ बातचीत कर भविष्य का रास्ता तय करना होगा.

आभार: अमांडा कूलसन ग्रासनर/एमजे (DW)

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बेंगलुरु में 15 अगस्त से मिलेगा ब्राह्मण फूड

बेंगलुरू। देश के आईटी हब वाले शहर बेंगलुरू में ब्राह्मण लंच बॉक्स लांच होने जा रहा है. यह 15 अगस्त से अपनी सेवाएं देगा. खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता कहने वाले एक शख्स डॉक्टर बी. कार्तिक नव्यन ने एक पोस्टर पोस्ट किया है. इसमें कहा गया है कि बेंगलुरू में 15 अगस्त से कम कीमत पर ब्राह्मण लंच बॉक्स मुहैया कराया जाएगा.

हालांकि इस ट्विट के सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया है. कई लोगों ने इसे जातिवाद फैलाने वाला कदम बताया है तो कईयों का तर्क है कि जब जैन भोजनालय, हिन्दू होटल और मुस्लिम मुगलई जैसे नामों से लोगों को दिक्कत नहीं है तो फिर ब्राह्मण लंच बॉक्स से क्या दिक्कत है? खैर कोई भी कितना भी तर्क दे, इस कदम ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

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