मायावती और सोनिया गांधी ने लालू यादव की रैली से क्यों बनाई दूरी

नई दिल्ली। 27 अगस्त को लालू प्रसाद यादव द्वारा बिहार में पूरे विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश को झटका लगा है. असल में लालू यादव इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और बसपा प्रमुख मायावती को शामिल करना चाहते थे. लालू लगातार इन दोनों दिग्गज नेताओं के संपर्क में भी थे. लेकिन बुधवार को लालू यादव ने साफ कर दिया कि ये दोनों दिग्गज नेता रैली में शामिल नहीं होंगे.

भाजपा विरोधी इस रैली में मायावती की ओर से पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा जबकि सोनिया गांधी की ओर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और बिहार प्रभारी सी.पी जोशी शामिल होंगे.

सवाल यह है कि आखिर मायावती और सोनिया गांधी ने लालू यादव के इस बहुप्रचारित रैली से दूरी क्यों बना ली?

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इन दोनों नेताओं के लालू की रैली में शामिल होने से इसका सीधा फायदा लालू यादव को मिलेगा. जबकि बसपा और कांग्रेस को इसका कोई लाभ मिलता नहीं दिख रहा है. क्योंकि बिहार में कांग्रेस जिस हालात में है, फिलहाल उससे आगे बढ़ने की उसे कोई उम्मीद नहीं है. जबकि बसपा की भी हालत बिहार में कुछ खास नहीं है. और न ही लालू यादव का प्रभाव बिहार से बाहर अन्य राज्यों में है. संभव है कि अपने इन्हीं राजनैतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए मायावती और सोनिया गांधी फिलहाल लालू यादव की रैली को दूर से देख कर ही अपनी राजनैतिक संभावना तलाश करना चाहती हैं.

आपकी प्राइवेसी है आपका मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

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राइट टू प्राइवेसी यानी निजता का अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार माना है. नौ जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया है. नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने इस मसले पर 6 दिनों तक मैराथन सुनवाई की थी. जिसके बाद 2 अगस्त को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस जेएस खेहर कर रहे हैं. इस मामले में याचिकाकर्ता और मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से बाहर आकर बताया कि कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना है और कहा है कि ये अनुच्छेद 21 के तहत आता है.

हालांकि, आधार कार्ड वैध है या अवैध है, इस पर अभी कोर्ट ने कुछ नहीं बोला है. आधार कार्ड के संबंध में मामला छोटी खंडपीठ के पास जाएगा. प्रशांत भूषण ने बताया कि इस फैसले का मतलब ये है कि अगर रेलवे, एयरलाइन जैसे रिजर्वेशन के लिए जानकारी मांगी जाती है, तो ऐसी स्थिति में नागरिक अपने अधिकार के तहत उससे इनकार कर सकेगा. केंद्र सरकार के मसले पर भूषण ने बताया कि निश्चित तौर पर कोर्ट का ये फैसला केंद्र सरकार को बड़ा झटका है. क्योंकि केंद्र सरकार निजता को मौलिक अधिकार मानने के विरोध में थी.इस फैसले के बाद अब एक अलग बेंच गठित की जाएगी. ये बेंच आधार कार्ड और सोशल मीडिया में दर्ज निजी जानकारियों के डेटा बैंक के बारे में फैसला लेगी.

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने इस मसले पर सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा था. केंद्र का पक्ष रखते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि आज का दौर डिजिटल है, जिसमें राइट टू प्राइवेसी जैसा कुछ नहीं बचा है.तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को ये बताया था कि आम लोगों के डेटा प्रोटेक्शन के लिए कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में दस लोगों की कमेटी का गठन कर दिया है. उन्होंने कोर्ट को बताया है कि कमेटी में UIDAI के सीईओ को भी रखा गया है.

27 अगस्त की रैली में भाजपा के खिलाफ जंग की बुनियाद रखेंगे लालू

पटना। लालू यादव द्वारा बहुप्रचारित रैली 27 अगस्त को पटना में होने जा रही है. ‘भाजपा भगाओ-देश बचाओ’ का नारा दे चुके लालू इस रैली के साथ ही भाजपा के खिलाफ अपने जंग का ऐलान करने को तैयार हैं. हालांकि बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के रैली में शामिल नहीं होने से लालू यादव को थोड़ी निराशा जरूर हुई होगी.

लालू यादव की इस रैली पर भाजपा की भी नजर है. शायद यही वजह है कि लालू यादव की रैली के असर को बेअसर करने के लिए रैली से ठीक एक दिन पहले 26 अगस्त को पीएम मोदी बिहार में बाढ़ के हालात का जायजा लेने जा रहे हैं. संभव है कि मोदी इस दौरान केंद्र की ओर से बड़ी मदद का ऐलान करेंगे.

राजद अध्यक्ष ने पीएम मोदी के इस दौरे को हवाखोरी ठहराते हुए सवाल उठाया कि आखिर पीएम मोदी अब क्यों आ रहे हैं जब बाढ़ से 400 लोग मारे जा चुके हैं. लालू ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में हर साल बाढ़ आती है और मोदी साल 2015 और 2016 में क्यों नहीं आए?

जो भी हो, यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू यादव की 27 अगस्त की रैली क्या रंग लाती है.

बाहुबली बने तेजस्वी यादव, विधानसभा में धरने पर बैठे

पटना। सृजन घोटाले को लेकर राजद लगातार नीतीश सरकार को घेरने में लगी है. इसके चलते विधानसभा का मानसून सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है. सदन में तीसरे दिन भी कोई कार्यवाही नहीं हो पाई. घोटाले का विरोध करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव अपने विधायकों के साथ विधानसभा परिसर में धरने पर बैठ गए. इस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार की इस्तीफा भी मांग लिया.

अपने विधायकों के साथ धरने पर बैठे तेजस्वी ने सृजन घोटाले में संलिप्तता और आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के इस्तीफे की मांग की. उन्होंने कहा कि ये घोटाला 1000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है.

तेजस्वी ने कहा कि घोटाला भागलपुर, भोजपुर, बांका समेत बिहार के कई जिलों में हुआ है. अधिकारी घोटाले की लीपापोती करने में लगे हुए हैं. तेजस्वी यादव ने कहा कि सृजन घोटाले के कई आरोपी विदेश भाग गए है. गरीब जनता के पैसे जदयू और भाजपा नेताओं को दिया जा रहा है. सरकार आरोपियों को बचाने में जुटी हुई है.

सीएम नीतीश कुमार और सुशील मोदी को जानकारी होने के बाद भी 10 साल तक मामले को दबा कर रखा गया. सरकार मामले को रफा दफा कराने में लगी हुई है. कई जदयू नेता भी घोटाले में संलिप्त हैं. तेजस्वी यादव के साथ तेजप्रताप समेत कई राजद नेता भी प्रतिमा के पास बैठे.

27 अगस्त की रैली से पहले ‘बाहुबली’ बने तेजस्वी यादव बिहार में जारी सियासत के बीच विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का बाहुबली अवतार देखने को मिल रहा है. इसी महीने की 27 तारीख को राजधानी पटना में होने वाली आरजेडी की रैली को लेकर पटना शहर पोस्टर और बैनर से पटने लगा है. इस क्रम में आरजेडी के नेता धर्मेंद्र यादव ने एक ऐसा फ्लैक्स पटना शहर में लगाया गया है जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. इस फ्लैक्स में तेजस्वी सुपरहिट फिल्म बाहुबली के लीड किरदार वाले गेटअप में नजर आ रहे हैं. शहर में लगे इस बड़े से फ्लैक्स में तेजस्वी यादव को बाहुबली अवतार में दिखाया जा रहा है. 27 अगस्त को पटना के गांधी मैदान में आरजेडी की ‘बीजेपी हटाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित होगी. इस रैली में गैर-एनडीए दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है.

अब 8 लाख सालाना आय पर मिलेगा ओबीसी आरक्षण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ओबीसी आरक्षण पर बड़ा फैसला किया है. केंद्रीय कैबिनेट ने क्रीमी लेयर की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दिया है. सरकार के इस एलान के बाद अब 8 लाख रुपये सालाना तक कमाने वाली अन्य पिछड़ी जातियां (ओबीसी) क्रीमी लेयर में आएंगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर यह जानकारी दी.

वित्त मंत्री ने कहा कि इस बारे में साल 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने सिफारिश की थी. इस प्रकार की सबकैटगरी बनायी जाए. इसी प्रकार की सिफारिश पार्लियामेंट की स्टैंडिंग कमेटी ने भी साल 2012-13 में की थी. मंत्री परिषद में चर्चा के बाद इसको स्वीकार किया गया. ओबीसी की सूची में सब-कैटिगरी बनाने की दिशा में एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी गई है.

अरुण जेटली ने बताया कि ओबीसी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर एक आयोग का गठन किया जाएगा. ये आयोग ओबीसी कैटिगिरी में सब-कैटेगिरी बनाने को लेकर विचार करेगी. आयोग का अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद आयोग 12 हफ्ते में इससे संबंधित रिपोर्ट सौंपेगा.

आपको बता दें कि ओबीसी आरक्षण के लिए आखिरी समीक्षा 2013 में की गई थी. सरकार के इस फैसले के चलते अब ओबीसी वर्ग के ज्यादा लोगों को नौकरियों और भर्तियों में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा.

क्या है क्रीमी लेयर? सरकारी नौकरियों और केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 फीसदी पदों को आरक्षित रखा गया है. लेकिन, आरक्षण का लाभ लेने परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए, जिसे बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है. तय सीमा से ज्यादा आय वाले लोगों को क्रीमी लेयर मान कर इससे बाहर कर दिया जाता है. मगर इस पाबंदी की वजह से कई मामलों में ओबीसी कोटा के पद उपयुक्त उम्मीदवार की कमी की वजह से खाली ही रह जाते हैं. काफी लंबे समय से क्रीमी लेयर की सीमा को बढ़ाने की मांग हो रही थी.

अब ‘खतने’ के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं ने उठाई आवाज, PM को लिखा खुला खत

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नई दिल्ली। तीन तलाक पर आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं को 1400 साल पुरानी पंरपरा के नाम पर हो रहे शोषण से मुक्ति मिली है. लेकिन अभी भी इस्लाम में कई ऐसी प्रथाएं हैं जिनकी वजह से औरत को दर्द और तकलीफ झेलनी पड़ती है. इनमें हलाला और महिलाओं के खतने जैसी प्रथाएं प्रमुख हैं.

दुनिया भर के कई समुदाय इस कुप्रथा को सदियों से करते आ रहे हैं. लेकिन अब इस कुप्रथा को रोकने के लिए कुछ महिलाओं से मोर्चा खोल दिया है और इसके खिलाफ एक जुट होकर लड़ रही हैं. तीन तलाक पर आए फैसले के बाद बोहरा समुदाय की मासूमा रानाल्वी ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के नाम एक खुला ख़त लिखकर इस खतने को रोकने की मांग की है.

मासूमा रानाल्वी ने अपने खत में लिखा स्वतंत्रता दिवस पर आपने मुस्लिम महिलाओं के दुखों और कष्टों पर बात की थी. ट्रिपल तलाक को आपने Anti-Women कहा था, सुनकर बहुत अच्छा लगा था. हम औरतों को तब तक पूरी आजादी नहीं मिल सकती जब तक हमारा बलात्कार होता रहेगा, हमें संस्कृति, परंपरा और धर्म के नाम पर प्रताड़ित किया जाता रहेगा. हमारा संविधान सभी को समान अधिकार देने की बात करता है, पर असल में जब भी किसी बच्ची को गर्भ में मारा जाता है, जब भी किसी बहु को दहेज के नाम पर जलाया जाता है, जब भी किसी बच्ची की जबरन शादी करवा दी जाती है, जब भी किसी लड़की के साथ छेड़खानी होती है या उसके साथ बलात्कार किया जाता है, हर बार इस समानता के अधिकार का हनन किया जाता है.

ट्रिपल तलाक अन्याय है, पर इस देश की औरतों की सिर्फ यही एक समस्या नहीं है. मैं आपको Female Genital Mutilation (FGM) या खतना प्रथा के बारे में बताना चाहती हूं, मैं इस खत के द्वारा आपका ध्यान इस भयानक प्रथा की तरफ खींचना चाहती हूं. बोहरा समुदाय में सालों से ‘खतना प्रथा’ या ‘खफ्ज प्रथा’ का पालन किया जा रहा है. महिलाओं का खतना एक ऐसी कुप्रथा है, जिससे न सिर्फ महिलाएं अपना मानसिक संतुलन खो देती हैं, बल्कि उनके शरीर को बेहद नुकसान भी पहुंचता है. जो लड़कियां बच भी जाती हैं, इस कुप्रथा से जुड़ी दर्दनाक यादें ताउम्र उनके साथ रहती है. बोहरा, शिया मुस्लिम हैं, जिनकी संख्या लगभग 2 मिलियन है और ये महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बसे हैं. मैं बताती हूं कि मेरे समुदाय में आज भी छोटी बच्चियों के साथ क्या होता है.

जैसे ही कोई बच्ची 7 साल की हो जाती है, उसकी मां या दादी उसे एक दाई या लोकल डॉक्टर के पास ले जाती हैं. बच्ची को ये भी नहीं बताया जाता कि उसे कहां ले जाया जा रहा है या उसके साथ क्या होने वाला है. दाई या आया या वो डॉक्टर उसके Clitoris को काट देते हैं. इस प्रथा का दर्द ताउम्र के लिए उस बच्ची के साथ रह जाता है. इस प्रथा का एकमात्र उद्देश्य है, बच्ची या महिला के Sexual Desires को दबाना.

मासूमा ने बताया कि ‘FGM महिलाओं और लड़कियों के मानवाधिकार का हनन है. महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव का ये सबसे बड़ा उदाहरण है. बच्चों के साथ ये अक्सर होता है और ये उनके अधिकारों का भी हनन है. इस प्रथा से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है.’

दलित बच्ची को मैला उठाने के लिए किया मजबूर

   

छतरपुर। भारत में समानता की बातें तो की जा रही हैं लेकिन वास्तविक रूप में दलितों के साथ आज भी भेदभाव जारी है. देश में जहां स्वच्छ भारत की बात और हाथ से मैला उठाने का विरोध हो रहा है. ऐसे में मध्यप्रदेश के छतरपुर में दलित लड़की से मल उठवाने का मामला सामने आया है.

छतरपुर जिसे के लवकुश नगर तहसील के गुधोरा में स्थित स्कूल के बाहर एक ऊंची जाति के व्यक्ति ने छह साल की दलित लड़की को उसी का मल उठाने का मजबूर किया.

दरअसल, सोमवार (21 अगस्त) को शासकीय प्राथमिक पाठशाला में पहली कक्षा में पढ़ने वाली नत्थू अहिरवार की बेटी को विद्यालय में शौचालय न होने की स्थिति में खाली स्थान पर शौच के लिए जाना पड़ा. इसे गांव के उच्च जाति के पप्पू सिंह ने देखा तो वह बालिका पर भड़क उठा. पप्पू ने बालिका से हाथों से मैला उठाकर दूसरे स्थान पर फेंकने को कहा. पहले बालिका काफी रोई, मगर बाद में उसने मैला अपने हाथों से उठाकर फेंका.

इस घटना की जानकारी बच्ची ने अपने माता-पिता को दी. इसके बाद दलित समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ वे पुलिस स्टेशन पहुंचे और पप्पू सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में पप्पू सिंह के खिलाफ गैरकानूनी अनिवार्य श्रम, जानबूझकर अपमान, अशांति भड़काने का उद्देश्य और किशोर न्याय के प्रासंगिक कानूनों (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

लवकुश नगर पुलिस स्टेशन प्रभारी जेडवाई खान ने बताया कि यह घटना सोमवार शाम की है. बच्ची अपने स्कूल शिक्षक से अनुमति लेकर सरकारी प्राथमिक स्कूल के पास खुले में शौच के लिए गई थी. आरोपी के खिलाफ एससीएससी एक्ट और किशोर अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है, आरोपी की तलाश जारी है

सरकारी गौशाला में गायों की मौत पर चुप क्यों है भाजपा-संघः मायावती

 

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि यूपी में सुशासन के बुरे हाल के कारण इंसानी जान-माल खतरे में है. यहां तक की गायों को भी दयनीय स्थिति हो गई. भ्रष्टाचार के कारण उन्हें भूखा-प्यासा तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है. अब आरएसएस या अन्य संगठन सरकार से इसका हिसाब क्यों नहीं मांग रहा है?

हाल ही में भाजपा शासित दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकारी गौशालाओं में सैकड़ों गायें मरने पर मायावती ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संघ और भाजपा के अत्याचरी लोग गौ संरक्षण के नाम पर दलित-मुस्लिम समाज के लोगों के साथ मारपीट करते हैं. यही नहीं गौ संरक्षण के नाम पर वे लोग हत्याएं भी कर देते है. भाजपा और संघ के लोग इसे ही धर्म की सेवा समझते हैं. भाजपा और संघ के लोगों ने देश में आतंक का माहौल बना रखा है.

बसपा सुप्रीमों ने सवाल उठाया है कि भाजपा शासित राज्यों हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि में सरकारी धन का गबन करके बेजुबान ‘‘गौमाताओं‘‘ पर जो क्रूरता की जा रही है, उसके प्रति भाजपा सरकार जवाबदेह क्यों नहीं है? ऐसी सरकारों की जवाबदेही आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेतागण क्यों नहीं कर रहे है? उन्होंने आगे सवाल उठाया है कि वैसे तो ’गौमाता’ को भी राममंदिर की तरह राजनीतिक, साम्प्रदायिक और जातिवादी मुद्दा बना दिया है, लेकिन गौसेवा के मामले में इतनी क्रूरता और लापरवाही क्यों?

मायावती ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की निंदा भी की. उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यालय में प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. उस बैठक की मोदी ने अध्यक्षता भी की. लेकिन देशहित के मुद्दों और गौसेवा मुद्दों पर चर्चा नहीं की. यह बहुत निंदनीय और दुखद है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार गौसेवा से संबंधित योजनाओं की स्थिति और इसमें हो रहे भ्रष्टाचार की समीक्षा करें. उन्होंने भाजपा सरकारों को नसीहत कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाकर गौशालाओं को बूचड़खाना बनने से रोके. भाजपा सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों की धार्मिक भावनायें आहत होने से रोके.

मायावती ने कहा कि भाजपा अपने गुप्त एजेंडे पर काम कर रही है. भाजपा सरकारों की जातिवादी और सांप्रदायिक नीतियां पूरे देश के दलित और मुस्लिम समुदाय के लोगों को गुलाम बनाकर डर के साये में रखना चाहती है. लेकिन दलित और मुस्लिम समाज के लोग अपना रास्ता खुद निकालने में सक्षम है क्योंकि उन्हें भाजपा से इंसाफ मिलने की उम्मीद न तो पहले थी और ना तो अब है. उन्होंने कहा कि भाजपा से मुकाबला करने के लिए बसपा संघर्षरत है और आने वाले दिनों में अपने इस संघर्ष को गति देगी. आने वाले बसपा भाजपा का डट के मुकाबला करेगी.

जातिवादी गुंडो ने की दलित किसान की हत्या, दलितों ने किया चक्का जाम

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बक्सर। बक्सर के लक्ष्मीपुर गांव में कुछ जातिवादी गुंडों ने दलित किसान की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी. हत्या की सूचना से इलाके में सनसनी मच गयी है. हत्या की सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाने की पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची. दलित समुदाय ने इस नृशंस हत्या के विरोध में सड़क पर जाम कर दिया.

लक्ष्मीपुर गांव के रहने वाले गुलाब राम (60) का मंगलवार की रात से अपहरण कर लिया गया था. जिसका शव गांव के ही बाजार में एक बोरिंग के पास क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया है. मृतक के बेटे बृजबिहारी राम का कहना है कि गांव के ही कुछ जातिवादियों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. यह घटना उसी विवाद में अंजाम दिये जाने की बात कही जा रही है.

हत्या की खबर पाकर सैकड़ों दलित एकत्रित हो गये. निर्मम तरीके से की गयई हत्या से लोग आक्रोशित हो उठे. इसके बाद बक्सर-चौसा मार्ग को जामकर नारेबाजी की. सड़क जाम को खाली कराने के लिए सदर एसडीओ गौतम कुमार व टाउन डीएसपी शैशव यादव पहुंचे हैं. दलित ग्रामीणों ने मांग की कि पुलिस प्रशासन जल्द से जल्द आरोपी का पता लगाकर गिरफ्तार करें.

बहरहाल पुलिस इस हत्या के कारणों के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर रही है. थानाध्यक्ष आदित्य पासवान का कहना है कि मृतक के बेटे के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी की खोज की जा रही है.

पुजारी ने पोस्टर लगवा दलितों को दी धमकी- रामायण पाठ के दौरान घर से बाहर न निकले

हमीरपुर। दलितों के साथ हमेशा से भेदभाव होता आया है और अब भी हो रहा है. लेकिन हर बार भेदभाव के तरीके अलग होते हैं. कभी दलितों को खेत में घुसने नहीं दिया जाता, कभी सवर्णों के मोहल्ले से गुजरने पर पाबंदी होती है तो कभी मंदिर में जाने से रोका जाता है. इसके अलावा भी कई तरीके से दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है.

यूपी के हमीरपुर में कुछ इसी तरह का भेदभाव सामने आने आया है. घटना हमीरपुर जिले के मौदाहा कस्बे के गदाहा गांव की हैं, जहां 10 दिन तक रामायण पाठ होना है. लेकिन इस पाठ के शुरू होने से पहले ही विवाद हो गया है.

दरअसल, इस गांव के राम जानकी मंदिर के पुजारी ने मंदिर के बाहर पोस्टर चिपका दिया है, जिसमें दलितों को रामायण पाठ के दौरान मंदिर में न आने चेतावनी दी गई है. इस पर गांव के दलित समुदायों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक कार्य से उन्हें दूर रहने को कहा गया हो. इस पर विस्तार से बताते हुए दलित समुदाय के लोगों का कहना था कि ऐसी मान्यता है कि दलित बुरा संयोग लेकर आएंगे.

मंदिर के पुजारी ने इससे पहले भी मंदिर के बाहर चेतावनी भरे अंदाज में 10 दिनों तक रामायण पाठ के दौरान घर से बाहर नहीं निकलने के लिए कहा था. इस विवाद पर बात करते हुए एक स्थानीय गुरु प्रसाद आर्य का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब दलितों को मंदिर में आने से रोका गया हो.

एसडीएम सुरेश कुमार ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जाएगी. पुजारी की भूमिका अगर इसमें पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी.

दिल्ली, गोवा और आंध्र प्रदेश की 4 सीटों पर उपचुनाव आज, केजरीवाल-पर्रिकर मैदान में

नई दिल्ली। देश के  राज्यों में 4 विधानसभा सीटों पर बुधवार को उपचुनाव हो रहे हैं. आज आंध्र प्रदेश में नंदयाल, गोवा में पणजी व वालपोई और दिल्ली में बवाना विधानसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. बवाना और पणजी सीटों पर पूरे देश की नजर रहेगी. बुधवार को मतदान शाम पांच बजे तक होगा और इसके नतीजे 28 अगस्‍त को आएंगे.

चुनाव आयोग इन सभी सीटों पर ईवीएम और वीवीपैट के जरिए मतदान करा रहा है. दिल्ली की बवाना सीट पर जहां कांग्रेस के लिए एक बड़ा मौका है, वहीं आप आदमी पार्टी के लिए खुद को साबित करने की कड़ी चुनौती है. आम आदमी पार्टी के विधायक वेद प्रकाश के इस्तीफा देने के कारण बवाना सीट खाली हुई है. इस्तीफा देने के बाद वेद प्रकाश ने भाजपा का दामन थाम लिया है. आप ने इस सीट पर रामचन्द्र को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने बवाना से तीन बार विधायक रहे सुरेन्द्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है.

सबसे मजेदार जंग इन उपचुनाव में गोवा में देखने को मिल रही है. यहां मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर पणजी विधानसभा सीट के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार है. पर्रीकर के खिलाफ सीट से कांग्रेस के गिरीश चोडांकर और गोवा सुरक्षा मंच (जीएसएम) के आनंद शिरोडकर खड़े हैं. भाजपा विधायक सिद्धार्थ कुनकालीनेकर के हाल ही में अपने पद से इस्तीफा देने के कारण पणजी विधानसभा खाली हुई है. वहीं कांग्रेस विधायक विश्वजीत राणे के त्यागपत्र देने के कारण वालपोई विधानसभा सीट रिक्त हुई है.

वोट डालने के लिए मुख्‍यमंत्री मनोहर पर्रीकर सुबह ही पहुंच गए और लाइन में लगकर वोट दिया. वोट डालने के बाद जब उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्‍होंने कहा, ‘कोई अनुमान नहीं है, लेकिन हमें अपनी जीत पर विश्‍वास है.’ हालांकि कुछ दिनों पहले जब उनसे पूछा गया, अगर वह चुनाव हार गए तो क्‍या करेंगे, तो उन्‍होंने कहा था कि फिर से केंद्र में रक्षा मंत्रालय संभाल लेंगे.

इधर आंध्र प्रदेश में तेलुगुदेशम पार्टी के विधायक भुमा नागिरेड्डी के निधन होने के कारण नांदयाल सीट खाली हुई, जिसकी वजह से यहां उपचुनाव हो रहा है. यहां उपचुनाव में मतदाताओं के बीच खासा उत्‍साह देखने को मिल रहा है. मतदान केंद्रों के बाहर लंबी-लंबी कतारे नजर आ रही हैं.

यूपी में एक हफ्ते में दो बड़े ट्रेन हादसेः रेल के 12 डिब्बे पटरी से उतरे, 74 यात्री घायल

 

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के औरैया जिला स्थित अछल्दा और पाता रेलवे स्टेशन के बीच कैफियत एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. मानव रहित फाटक पर फंसे डंपर से टकराने के चलते कैफियत एक्सप्रेस के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे में 74 लोग घायल हो गए हैं, जिसमें 4 की हालत गंभीर बनी हुई है.

रेलवे बुलेटिन के अनुसार आज हुए ट्रेन हादसे की वजह से हावड़ा नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को दूसरे मार्ग से भेजा गया है. और कानपुर नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस समेत सात रेलगाड़ियों का संचालन निरस्त कर दिया गया है. इस हादसे के बाद इस रूट से गुजरने वाली 40 रेलगाड़ियों के रूट बदले गए हैं.

रेलवे ट्रैक पर से कैफियत एक्सप्रेस के डिब्बे हटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू करा दिया जाएगा. आइए कैंसिल और रूट डायवर्ट हुए ट्रेनों की लिस्ट देखते हैं.

सुबह गृह विभाग के सचिव भगवान स्वरूप ने लखनऊ में कहा था कि यह हादसा फाटक रहित रेलवे क्रॉसिंग पर नहीं हुआ बल्कि पटरी के समानांतर सड़क पर डंपर के पलटने की वजह से हुआ है.

पिछले एक हफ्ते में उत्तर प्रदेश में यह दूसरी ट्रेन दुर्घटना है. इससे पहले 19 अगस्त को मुजफ्फरनगर में कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी. उस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई थी और 156 यात्री घायल हो गए थे.

भाजपा विधायक के बिगड़े बोल- बोला हिंदू इलाकों में मुसलमानों को नहीं दिया जाए घर

नई दिल्ली। गुजरात की एक भाजपा विधायक ने अपने जिलाधिकारी को पत्र लिख एक विवादित मांग की है. विधायक ने पत्र में लिखा है कि किसी भी मुस्लिम व्‍यक्ति को हिंदुओं के पड़ोस में घर नहीं दिया जाए.

भाजपा विधायक संगीता पाटिल ने अपने विधानसभा क्षेत्र लिम्‍बयात में ‘डिस्टर्बड एरिया एक्ट’ लागू करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है. उन्‍होंने पत्र में लिखा है कि इस इलाके के लोगों ने जनप्रतिनिधि के तौर पर मुझे चुना है, इसलिए उन्‍हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, यह मेरा दायित्‍व बनता है.

संगीता पाटिल ने मांग करते हुए लिखा कि इस एक्‍ट के लागू होने के बाद कोई भी मुस्‍लिम हिंदू के पड़ोस में घर नहीं खरीद सकेगा. फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक इसके पीछे इलाके में घटी कुछ घटनाओं को बताया जा रहा है. अन्य राजनीतिक पार्टियां पाटिल की इस मांग को गलत ठहरा रही हैं. अपनी इस मांग का बचाव करते हुए पाटिल ने आरोप लगाया कि मुसलमान हिंदू सोसायटी में घर खरीदने के लिए हर प्रकार की चालाकी का उपयोग करते हैं. इतना ही नहीं घर बुक करने के लिए वे लोगों को धमकी भी देते हैं.

पाटिल ने लिखा कि हिंदू एरिया में घर लेने के लिए मुसलमान हिंदू इलाकों में घर लेने के लिए काफी ऊंचे दाम भी देते हैं. उन्‍होंने लिखा कि सूरत के कई इलाकों में यह कानून लागू हैं, शेष इलाके में इसे जल्‍द लागू किया जाना चाहिए. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सूरत का लिम्बयात इलाका पहले केवल एक हिंदू इलाका हुआ करता था लेकिन अब वहां पर मुसलमानों का प्रभुत्व है.

पाटिल ने कहा कि जिस तरह से घर लेने के लिए मुस्लिम चालाकी दिखाते हैं और हिंदुओं को प्रताड़ित करते हैं इसलिए ही मैं चाहती हूं कि हिंदू इलाकों में डिस्टर्बड एरिया एक्ट लागू किया जाए, ताकि हिंदुओं के खिलाफ कोई हिंसा न हो पाए. उन्‍होंने लिखा कि मैं जिलाधिकारी महोदय से निवेदन करती हूं कि वे इस एक्ट को लागू करें क्योंकि इन इलाकों के रहने वालों ने मुझे अपना प्रतिनिधी बनाया है इसलिए उनकी परेशानी दूर करना मेरा कर्तव्य है.

ब्रांड Nike पर फूटा विराट कोहली का गुस्सा

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) और कप्तान विराट कोहली ने टीम के आधिकारिक प्रायोजक नाइकी द्वारा मुहैया कराई गयी निम्न स्तरीय किट पर नाखुशी व्यक्त करते हुए इस मुद्दे को सीओए के समक्ष उठाया है. भारतीय क्रिकेट टीम के साथ नाइकी 2006 से जुड़ा हुआ है और दुनिया की सबसे बड़ी खेल सामान बनाने वाली कंपनी है. बीसीसीआई के अधिकारियों राहुल जौहरी और रत्नाकर शेट्टी ने सर्वाेच्च अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के समक्ष नाइकी की शिकायत की है.

वहीं समिति के अध्यक्ष विनोद राय ने इस मसले पर ङ्क्षचता व्यक्त की है. नाइकी इंडिया ने 2016 में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने प्रायोजन को 2020 तक बरकरार रखने के लिए 370 करोड़ रूपये की राशि भुगतान की थी. नाइकी का करार एक जनवरी 2016 से 30 सितंबर 2020 तक का है और वह प्रति मैच टीम को 87 लाख 34 हजार रूपये का भुगतान करती है.

बोर्ड ने भी कहा है कि वह जल्द ही इस मसले पर नाइकी के अधिकारियों से मुलाकात कर मामले को सुलझाने का प्रयास करेगी. इस बीच भारतीय टीम की जर्सी पर स्मार्ट फोन बनाने वाली चाइनीका कंपनी ओप्पो का नाम बतौर प्रायोजक रहेगा जिसने टीम को पांच वर्षाें के लिए 1079 करोड़ रूपये का भुगतान किया है.

यहां पेड़ों पर रहते हैं आदिवासी…

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पापुआ। दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों में कई जनजातियां मौजूद हैं, जो आज भी पूरी दुनिया के लिए किसी रहस्य से कम नहीं हैं. चाहे वो अफ्रीकन आदिवासी हों या फिर अमेजन की अलग-अलग जनजातियां.

ऐसी ही एक रहस्यमय जनजाति इंडोनेशिया के पापुआ प्रांत के घने जंगलों में पेड़ों पर घर बनाकर रहने वाली कोरोवाई है. इस जनजाति को नरभक्षी भी कहा जाता है. बता दें कि कोरोवाई जनजाति जिस क्षेत्र में निवास करती है, वो अराफुरा सागर से तकरीबन 150 किमी की दूरी पर स्थित है.

इन लोगों पर कई डॉक्युमेंट्री भी बनाई गई है. ऐसा कहा जाता है कि इस जनजाति के लोग अंधविश्वास को बहुत मानते हैं, जिसकी वजह इंसानों को भी खा जाते हैं. हालांकि, अब ऐसा कहा जाने लगा है कि एरिया में टूरिस्ट के आने के बाद अब इंसानी मांस खाने की प्रथा बंद हो चुकी है.

ये लोग जमीन से 6 से 12 मीटर ऊंचाई पर पेड़ों पर बने घरों में रहते हैं, ताकि इन पर कोई आक्रमण न कर सके और ये लोग बुरी आत्माओं से भी बचे रहें. इस जनजाति के लोग जीवनयापन करने के लिए शिकार करते हैं.

इनका निशाना बहुत बेहतर होता है. ये मछली पकड़ने में महारत हासिल किए होते हैं. पहली बार एक डच मिशनरी ने इस जनजाति की खोज 1974 में की थी, इससे पहले इनके बारे में कोई नहीं जानता था.

इसके बाद यहां पर लोगों का आना-जाना बढ़ता चला गया, जिसकी वजह से 90 के दशक में यहां वेश्यावृत्ति भी बढ़ने लगी. महिलाओं को जबरदस्ती खाना या किसी तरह की मूल्यवान चीज एक बदले टूरिस्ट के साथ सोने पर मजबूर किया जाता था.

हालांकि, सरकार की पहल के बाद 1999 में ये सब कुछ बंद हो गया. आज भी यहां महिलाएं मात्र बच्चे पैदा करने और घर में खाना बनाने के लिए ही रखी जाती हैं. लोगों के आने जाने के बावजूद भी इस जनजाति से जुड़े लोगों का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है.

हरिभूमि के मुताबिक यहां के लोगों को पता भी नहीं था कि उनके जंगल से बाहर भी और लोग रहते हैं. आज के समय में कुल तीन हजार कोरोवाई लोगों के होने का आंकड़ा मौजूद है.

भारत की जीडीपी में आ सकता है 6.6 फीसद सुधार: नोमुरा

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नई दिल्ली। अप्रैल से जून तिमाही के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर में 6.6 फीसद की दर से मामूली सुधार दिखने की उम्मीद है. जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान यह 6.1 फीसद रही थी, जो कि नोटबंदी के चलते प्रभावित थी. यह बात जापानी कंपनी नोमुरा की एक रिसर्च नोट में कही गई है.

नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में आर्थिक गतिविधियों, जिसने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) रोलआउट के चलते कुछ गति खो दी थी अब फिर से अपने ट्रैक पर आ रही हैं. इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जब उपभोग और सेवाओं के विकास सूचकांक (विशेषकर परिवहन) जुलाई में वापस अपनी लय में लौट आए थे तब निवेश और बाहरी क्षेत्र (एक्सटर्नल सेक्टर) के आंकड़े कमजोर रहे या उनका मार्जिन धीमा रहा. हालांकि, साल के अंत तक ग्रोथ के रिकवरी करने की उम्मीद है, क्योंकि इसे पुनर्निर्माण और बेहतर वित्तीय स्थितियों से सहायता मिलती दिख रही है.

रिसर्च नोट में कहा गया है कि जीएसटी के प्रभाव को देखते हुए और हमारे संकेतकों के अनुसार हम अप्रैल से जून तिमाही के दौरान जीडीपी विकास दर में 6.6 फीसद के साथ बेहतर रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं. यह जनवरी से मार्च के दौरान 6.1 फीसद रही थी जो कि नोटबंदी की वजह से प्रभावित हुई थी. हालांकि साल 2017 की दूसरी छमाही में हम उम्मीद कर रहे हैं कि विकास दर तेज बढ़ोतरी के साथ 7.4 फीसद हो सकती है.