अयोध्या में भगवान राम की विशाल मूर्ति का निर्माण करवाएगी योगी सरकार
अयोध्या। राम मंदिर का मुद्दा भले ही सुप्रीम कोर्ट में अटका हो लेकिन विवादित स्थल से थोड़ी ही दूर सरयू के किनारे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ भगवान राम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित करेंगे. बताया जा रहा है कि यह भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति होगी. इसके लिए सरकार एनजीटी से भी इजाजत लेगी.
भगवान राम की यह प्रतिमा योगी सरकार की ‘नव्य अयोध्या’ योजना का एक हिस्सा होगी. यही नहीं इस बार दिवाली के मौके पर जिसे भगवान राम के अयोध्या वापसी का दिन भी माना जाता है, योगी आदित्यनाथ खुद उनके स्वागत के लिए मौजूद होंगे.योजना है कि इस बार अयोध्या को दिवाली में वैसे ही सजाया जाए जैसा कि दिवाली के दिन त्रेतायुग में भगवान राम के लंका पर विजय हासिल करने के बाद सजाई गई थी.
इस मौके पर भगवान राम की अयोध्या वापसी की थीम पर एक भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी जो छोटी दिवाली के दिन दोपहर 2 बजे के आसपास अयोध्या में प्रवेश करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ और उनका मंत्रिमंडल भगवान राम का पूजना वंदन करेगा. उसके बाद राम का राज्यभिषेक भी होगा.
इस मौके पर इंडोनेशिया और थाईलैंड के कलाकार राम के अयोध्या के कलाकार राम के अयोध्या वापसी के प्रसंग का सरयू के किनारे मंचन भी करेंगे. सरयू और आसपास के इलाके की भव्य सजावट की जाएगी. राम की पैड़ी पर एक लाख इकहत्तर हजार दिए जलाए जाएंगे. गौरतलब है कि योगी के सीएम बनने के बाद अयोध्या लगातार सुर्खियों में है. सीएम योगी खुद तीन बार यहां आ चुके हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक अयोध्या और राम से जुड़े सभी स्थानों को विकसित करने की योजना बनाई गई है. योगी के सीएम बनने के बाद अब तक अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए 14 ट्रक पत्थर पहुंच चुके हैं. राम मंदिर कार्यशाला जिन पर नक्काशी का काम लगातार चल रहा है.
यूपी के प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी ने एनडीटीवी से कहा ‘ अयोध्या को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने की योजना है. इसके लिए सरकार में बहुत सारी योजनाएं बनाई हैं. मुख्यमंत्री छोटी दिवाली के दिन अयोध्या में खुद उन सभी योजनाओं की घोषणा करेंगे.’
पांच महीने में दूसरी बार बढ़ा मेट्रो का किराया
नई दिल्ली। आज से दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ गया है. मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) बोर्ड ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है जिसके बाद किराए में वृद्धि का रास्ता साफ हो गया है. दिल्ली मेट्रो के किराए में एक साल के भीतर यह दूसरी बढ़ोतरी होगी.
बढ़े हुए किराये का पहला फेज़ लागू होने से पहले मेट्रो का न्यूनतम किराया 8 रुपये होता था, जो अब दस रुपये हो गया है. जबकि अधिकतम किराया 30 रुपये होता था, जो मई में 50 रुपए किया गया और अब 3 अक्टूबर के बाद 60 रुपये हो गया है.
आज से लागू हो रहे नए किराए के अनुसार यात्रियों को 2 किमी तक के लिए 10 रुपए, 2-5 किमी तक के लिए 15 रुपए की बजाय 20 रुपए, 5-12 के लिए 20 से बढ़ाकर 30 रुपए, 12-21 किमी तक का किराया 30 की बजाय 40 रुपए और 21-32 किमी तक के लिए 40 की बजाय 50 रुपए देने होंगे वहीं 32 किमी के बाद किराया 50 रूपए की बजाय 60 रुपए देना होगा.
डीएमआरसी बोर्ड की बैठक में दिल्ली सरकार के किराया निर्धारण कमेटी के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया गया. बोर्ड ने कहा कि किराया निर्धारण कमेटी (FFC) की सिफारिशों में दखल देने या बदलाव करने का बोर्ड के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने ट्वीट कर कहा कि ‘बोर्ड में 16 निदेशकों में से दिल्ली सरकार के पांच निदेशक हैं, जिन्होंने इसका विरोध किया. हालांकि केंद्र ने हठी रवैया दिखाया. यह वृद्धि काफी अनुचित है. केंद्र को आम आदमी का अधिक खयाल रखना चाहिए था.
इससे पहले, केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मेट्रो रेल किराया बढ़ोतरी मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राजनीति नहीं करने की नसीहत देते हुए कहा कि किराए में प्रस्तावित इजाफे को रोकने के लिये दिये गये उनके सुझाव कानूनसम्मत नहीं हैं.
धर्मशाला रणजी : हिमाचल और पंजाब के बीच मुकाबला रहा ड्रॉ

धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) के ग्राउंड में हिमाचल और पंजाब के बीच खेला गया चार दिवसीय रणजी मुकाबला ड्रॉ हो गया. चौथे दिन की समाप्ति तक हिमाचल ने छह विकेट के नुकसान पर 145 रन बनाए. इससे हिमाचल और पंजाब के बीच मुकाबला ड्रॉ हो गया. दूसरी पारी में पंजाब के गेंदबाज हिमाचली बल्लेबाजों पर पूरी तरह हावी रहे. हिमाचल की दूसरी पारी की शुरुआत खराब रही. पहली पारी में तिहरा शतक जड़ने वाले प्रशांत चोपड़ा दूसरी पारी में केवल 28 गेंदों पर 22 रन बनाकर चलते बने. इसके बाद लगातार अंतराल पर हिमाचल के विकेट गिरते रहे.
टी तक हिमाचल छह विकेट के नुकसान पर 85 रन बनाए. बाद में. पारस डोगरा और एपी विशिष्ट ने सातवें विकेट के लिए 64 रन जोड़ और अंत तक आउट नहीं हुए. प्रशांत चोपड़ा को उनके शानदार तिहरे शतक (338 रन) के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया. हिमाचल को इस मुकाबले के बाद जहां तीन अंक मिले हैं, वहीं, पंजाब के खाते में 1 अंक गया है.
हिमाचल को पहली और दूसरी पारी के आधार पर कुल 273 रनों की बढ़त हासिल हुई. इससे पहले, चौथे दिन पंजाब की पहली पारी 601 रनों पर सिमट गई. पंजाब की ओर से अभिषेक गुप्ता ने शानदार दोहरा शतक जड़ा. उनके अलावा अभिषेक शर्मा ने 94 रनों का योगदान दिया. हालांकि वह शतक लगाने से चूक गए.
बता दें कि मेजबान हिमाचल इस मैदान पर तीन मैच खेलेगा. पहला मैच मजबूत पंजाब के खिलाफ शुरू हो गया है. हिमाचल का दारोमदार भारतीय टीम से खेल चुके ऋषि धवन के अलावा अनुभवी पारस डोगरा, प्रशांत चोपड़ा और अंकुश बैंस पर रहेगा. 14 से 17 अक्तूबर तक मेजबानों की दूसरी टक्कर गोवा से होगी. इसके बाद हिमाचल की अगली भिड़ंत छत्तीसगढ़ से नौ नवंबर से होगी.
ये रहा शेड्यूल 6 से 9 अक्तूबर- हिमाचल बनाम पंजाब. 14 से 17 अक्तूबर-हिमाचल बनाम गोवा. 9 से 12 नवंबर-हिमाचल बनाम छत्तीसगढ़.
फाइनली अपने जीजा को लॉन्च करेंगे सलमान खान
नई दिल्ली। यह बात कन्फर्म हो गई है कि बहन अर्पिता खान के पति आयुष शर्मा को सलमान खान ही लॉन्च करेंगे. लंबे समय से आयुष शर्मा की डेब्यू फिल्म को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे. आयुष को लगभग तीन साल हो गए थे इंतजार करते हुए. लेकिन अब उनका इंतजार खत्म हो चुका है. सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले उनकी पहली फिल्म बनेगी. फिल्म को अली अब्बास जफर के असिस्टेंट रह चुके अभिराज मीनावाला डायरेक्ट करेंगे. सलमान खान ने इसका ऐलान अपने ट्विटर एकाउंट पर किया है. उन्होंने लिखा हैः ढेर सारी मेहनत और लगन के लिए मुबारक हो आयुष शर्मा. तुम्हें ढेर सारी शुभकामनाएं.
अभिराज से सलमान खान की मुलाकात ‘सुल्तान के दौरान हुई थी. आयुष पिछले तीन साल से अपनी डेब्यू फिल्म के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं. ‘बजरंगी भाईजान’, ‘प्रेम रतन धन पायो’, ‘सुल्तान’ और ‘ट्यूबलाइट’ की शूटिंग के दौरान वे सलमान के साथ ही रहे थे. उन्होंने सेट पर न सिर्फ एक्टिंग स्किल ही सीखे बल्कि उन्होंने डांस और एक्शन की भी ट्रेनिंग ली. अब सलमान खान को लगने लग गया था कि वे डेब्यू के लिए तैयार हैं और उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए अपनी हरी झंडी दे दी थी.
Congrats @aaysharma Now is the time for a lot of mehnat aur lagan. Wish you all success God Bless #AayushSharma
— Salman Khan (@BeingSalmanKhan) October 9, 2017
सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि आयुष ने वर्कशॉप में जाना शुरू कर दिया है. एक्ट्रेस अभी फाइनल नहीं हुई है. फिल्म फरवरी में फ्लोर पर जाएगी. फिल्म गुजरात बेस्ड लव स्टोरी है. सलमान ने कहा है, “हां, हम आयुष की डेब्यू फिल्म प्रोड्यूस कर रहे हैं. शूटिंग फरवरी में शुरू होगी और फिल्म 2018 के अंत तक रिलीज होगी.
वीडियोः दिल्ली में नाइजीरियन युवक को खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में एक नाइजीरियन युवक को बेरहमी से पीटने का वीडियो सामने आया है. नाइजीरियन युवक को कोई और नहीं स्थानीय लोग ही लाठी-डंडों से पीट रहे हैं. स्थानीय लोग नाइजीरियन युवक को चोरी के आरोप में पीट रहे थे.
युवक की पिटाई का वीडियो भी सामने आया है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने इस घटना का वीडियो जारी किया है. बताया जा रहा है कि 24 सितंबर को लोगों ने इस नाइजीरियन युवक को पीटा था. वीडियो में दिख रहा है कि युवक के पैर पोल के सहारे रस्सी से बंधे हुए हैं. एक शख्स नाइजीरियन युवक को उलटा कर देता है, दूसरा उसके तलबे पर डंडे बरसाता है. थोड़ी देर बाद युवक पर दो-तीन लोग डंडे बरसाना शुरू कर देते हैं. वह कराहता रहता है पर लोग रहम नहीं करते हैं. वीडियो में पीछे से आवाज आ रही है कि कुछ लोग युवक की पिटाई करने से मना कर रहे हैं.
#WATCH Nigerian national tied to a pole and beaten up by locals for alleged theft in Delhi’s Malviya Nagar (24.09.2017) pic.twitter.com/3zWgbeqvN5
— ANI (@ANI) October 9, 2017
पिछले कुछ समय से दिल्ली और एनसीआर में अफ्रीकी युवकों की पिटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं. अफ्रीकी युवकों पर भारत में नशीली पदार्थों की तस्करी के भी आरोप लगते रहे हैं. इसी साल मार्च में नाइजीरिया के ही युवक पर किडनैपिंग और हत्या के आरोप लगे थे, जिसके बाद लोगों ने अंसल प्लाजा में उसकी बेरहमी से पिटाई की थी.
ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़ी अहम बातें
नई दिल्ली। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के ई-टिकट सेवा प्रदाता का कहना है कि चार्ट तैयार होने तक ऑनलाइन बुक की गई टिकट कैंसिल की जा सकती हैं. आपको बता दें कि रेलवे काउंटर पर ई-टिकट कैंसिलेशन की अनुमति नहीं होती है.
आईआरसीटीसी वेबसाइट की अनुसार दिन 12 बजे से शुरू होने वाली ट्रेनों का चार्ट एक रात पहले ही तैयार कर दिया जाता है. कैंसिलेशन की पुष्टि ऑनलाइन की जाएगी और रिफंड उस एकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाएगा जिसके माध्यम से टिकट बुक की गई थी. अगर टिकटों की आंशिक कैंसिलेशन की जाती है तो सुनिश्चित करें कि एक नया ई-रिजर्वेशन स्लिप (इलेक्ट्रोनिक स्लिप) प्रिंट करवाएं.
अगर आप ट्रेन के डिपार्चर टाइम से 48 घंटे पहले कन्फर्म्ड टिकट कैंसिल करते हैं तो एसी फर्स्ट क्लास या एग्जीक्यूटिव क्लास के लिए 240 रुपये, एसी 2 टायर या फर्स्ट क्लास के लिए 200 रुपये, एसी 3 चेयर या एसी चेयर कार या एसी 3 इकोनॉमी के लिए 180 रुपये, स्लीपर क्लास के लिए 120 रुपये और सेकेंड क्लास के लिए 60 रुपये की कटौती की जाएगी.
अगर कन्फर्म्ड टिकट 48 घंटों के भीतर और डिपार्चर के तय समय से 12 घंटे पहले तक कैंसिल की जाती है तो ऊपर बताये गये किराए का 25 फीसद कटेगा. वहीं, 12 घंटे और ट्रेन के डिपार्चर समय से चार घंटे पहले तक टिकट कैंसिल करने पर न्यूनतम कैंसिलेशन रेट का 50 फीसद काटा जाएगा. चार्ट तैयार होने के बाद ई-टिकट कैंसिल नहीं कराई जा सकती.
वर्तमान नियमों के अनुसार, तत्काल टिकट रद्द होने पर कोई भी रिफंड नहीं मिलता है. अगर ट्रेन तीन घंटे से ज्यादा देरी या ट्रेन रद्द कर दी गई हो तो यात्री रिफंड का दावा करने के लिए ऑनलाइन टीडीआर फॉर्म भर सकते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि एक से अधिक यात्री के लिए जारी ई-टिकट को ट्रेन के डिपार्चर समय से 30 मिनट पहले रद्द कराया जा सकता है. इस स्थिति में कन्फर्म टिकट यात्री को निर्धारित शुल्क काटकर रिफंड दे दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए ऑनलाइन टीडीआर फॉर्म भरना जरूरी है.
रोहिंग्या शरणार्थियों से भरी नाव डूबी, 12 की मौत
कॉक्स बाजार। बांग्लादेश और म्यांमार के बीच नफ नदी में एक नाव के डूबने से करीब 12 रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत हो गई है. अभी तक इनके शव नहीं मिल पाए हैं. गौरतलब है कि म्यांमार से बांग्लादेश आते हुए कई रोहिंग्या अपनी जान गंवा चुके हैं.
आपको बता दें कि बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी कैंप बनाने पर काम कर रहा है. इस कैंप में लगभग 8 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को जगह दी जा सकेगी. यह कैंप म्यांमार सीमा के पास ही कुतुपलोंग में बनाया जा रहा है. अभी तक के आंकड़ों के मानें, तो अभी तक 4 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं.
At least 12 dead, scores missing as boat carrying Rohingyas capsized at the mouth of Naf River dividing Bangladesh and Myanmar: AFP
— ANI (@ANI) October 9, 2017
रोहिंग्या घुसपैठ की आशंका के चलते भारत- बांग्लादेश सीमा के 140 पॉइंट पर अलर्ट बढ़ाया दिया गया है. भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बलों की 6 दिवसीय कॉन्फ्रेंस दिल्ली में बीते शुक्रवार को संपन्न हुई.
इस मौके पर बांग्लादेश की बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश यानी बीजीबी और भारत की बॉर्डर गार्डिंग फ़ोर्स बीएसएफ़ के डीजी ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें बांग्लादेश से भारत मे आने वाले रोहिंग्या मुस्लिम का मुद्दा भी शामिल था.
पिछले कुछ दिनों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिनमें रोहिंग्या मुस्लिमों ने बांग्लादेश से भारत की सीमा में दाखिल होने की कोशिश की है. ये घटनाएं त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में सामने आई हैं, लेकिन बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने उन्हें वापस बांग्लादेश की सीमा में भेज दिया है.
कांशीराम जी की कलम याद है
अपने कैडर में मान्यवर कांशीराम एक बहुत दिलचस्प किस्सा बताते थे. और इस किस्से के जरिए तमाम लोग मान्यवर की बात को समझ जाया करते थे. असल में मान्यवर कांशीराम जिन लोगों के बीच काम कर रहे थे, जिन्हें जगा रहे थे उसका बहुसंख्यक हिस्सा गरीब और कम पढ़ा-लिखा था. उन्हें उनकी ही भाषा में समझाना जरूरी था, तभी वो कांशीराम जी की बात समझ पाते.
इस लिहाज से कांशीराम जी ऐसे-ऐसे किस्से ढूंढ़ लाते, जिससे बहुजन समाज के लोग उनकी बात आसानी से समझ जाते. जैसे बाबासाहेब को वह टाई वाले बाबा कहते थे तो ऐसे ही ज्योतिबा फुले को पगड़ी वाले बाबा कह कर संबोधित किया करते थे. जब वो बहुजन समाज को इनके बारे में बताते तो ऐसे संबोधन सुनकर सभी लोग तुरंत समझ जाते कि आखिर मान्यवर किसके बारे में बात कर रहे हैं.
इसी तरह से कांशीराम जी एक कलम के जरिए भी अपनी बात बताते थे. हाथ में कलम लिए उनकी वह फोटो काफी चर्चित है. कांशीराम जी यह पूछते कि कलम चलती कैसे है, लोग बताते कि स्याही या फिर लीड से कलम चलती है. फिर कांशीराम जी उनसे यह पूछते थे कि दिखता क्या है, जाहिर सी बात है मौजूद लोग पेन के कवर को बताते थे. मान्यवर लोगों को यह समझाते थे कि पेन का काम लिखना होता है और लिखने का काम पेन की लीड करती है. यानि कि अगर पेन का कवर न हो तो भी पेन लिखता रहेगा. वह समझाते कि असली ताकत दिखने वाले कवर में नहीं बल्कि लिखने वाली स्याही में है.
मान्यवर कांशी राम साहब ने कलम दर्शन समझाते हुए कहा था की कलम का बड़ा हिस्सा यानी पचासी परसेंट काम करता है. असली ताकत उसके पास है, ऊपर का 15 परसेंट सिर्फ दिखावे के लिए है. जब पचासी पर्सेंट काम करता है तो 15 परसेंट हिस्सा उसके सिर पर सवार हो जाता है और अपनी हुकूमत का एहसास कराता है.
इसे वह बहुजन समाज से जोड़ते हुए कहते थे कि देश के 85 फीसदी मेहनतकश लोग ही देश की असली ताकत हैं. ताकत होते हुए भी वह लाचार हैं, जबकि 15 फीसदी लोगों के पास सारी ताकत है और उनका सत्ता पर कब्जा है. मान्यवर की ऐसी ही परिभाषाओं ने बहुजन समाज को उसकी ताकत का अहसास कराया, जिसके बूते बहुजन समाज सत्ता के शिखर तक पहुंच सकी.
वर्तमान समय में बहुजन समाज अपनी उस ताकत को भूलता दिख रहा है. आखिर आज किस-किस को मान्यवर की “कलम” (Pen) वाली परिभाषा याद है? इसके जरिए मान्यवर समझाना चाहते थे कि लिखता कौन है (स्याही) यानि की असली ताकत किसके हाथ में है, और दिखता कौन है (कवर) यानि बिना मेहनत किए कौन राजा बना बैठा है. बहुजन समाज के हर व्यक्ति को मान्यवर द्वारा दी गई इस परिभाषा से सीख लेते हुए अपनी ताकत को पहचानना होगा. यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. बहुजन महानायक को नमन.
दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर नहीं फूटेंगे पटाखे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर में 31 अक्टूबर तक पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा. कोर्ट ने सारे स्थायी और अस्थायी लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए है. अब 1 नवंबर से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखे बिक सकेंगे.
इससे पहले अदालत ने 12 सितंबर को पटाखों की बिक्री को लेकर राहत दी थी जिसमें अब संशोधन किया गया है. न्यायमूर्ति जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6 अक्टूबर को इस विषय पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था. कोर्ट से मांग की गई थी कि वह पिछले वर्ष के अपने उस आदेश को बहाल करे, जिसके तहत दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी.
दिल्ली-एनसीआर क्या पूरे भारत में दिवाली के मौके पर पटाखे जलाए जाते हैं. जिसमें दिल्ली जैसे महानगर टॉप पर होते हैं. इस आदेश के बाद दिल्ली-एनसीआर के लोग दिवाली पर पटाखे नहीं जला पाएंगे.गौरतलब है कि 11 नवंबर, 2016 के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि इस वर्ष 12 सितंबर को शीर्ष अदालत ने अपने उस आदेश को अस्थायी तौर पर वापस लेते हुए पटाखों की बिक्री की इजाजत दे दी थी.
इस फैसले के बाद अर्जुन गोपाल ने कोर्ट को चुनौती दी थी. उनकी ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि पटाखों की बिक्री पर रोक का आदेश जारी रहना चाहिए, क्योंकि इससे दिवाली के पहले और बाद में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है.
रमणिका गुप्ता को मिला ‘बिरसा मुंडा सम्मान’
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में अम्बेडकरवादी लेखक संघ ने ‘बिरसा मुंडा सम्मान समारोह-2017’ कार्यक्रम का आयोजन किया. कार्यक्रम में रमणिका गुप्ता को बिरसा मुंडा सम्मान दिया गया. इसके अलावा तीन युवा कहानीकार अनुपम वर्मा, रायबहादुर और विपिन चौधरी ने कहानी पाठ भी किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जयप्रकाश कर्दम सबसे पहले रमणिका गुप्ता को बिरसा मुंडा सम्मान की बधाई दी. साथ ही उन्होंने कहा कि रमणिका गुप्ता ने दलित और आदिवासियों पर बहुत काम किया है. रमणिका गुप्ता ने कहा कि अम्बेडकरवादी साहित्य दलित, आदिवासी, महिला, अल्पसंख्यक और वंचितों समुदायों के सवालों और संवेदनाओं को वाणी देने वाला साहित्य है. यह भविष्य का साहित्य होगा.
कार्यक्रम में दलित कहानीकार डा. नामदेव ने तीनों कहानीकारों को भविष्य का कहानीकार बताया. उन्होंने कहा कि तीनों कहानीकार अपने समय के सवालों को तो उठाते हैं. विषय प्रस्तुत करते हुए दलित आलोचक मुकेश मिरोठा ने कहा कि नए कहानीकारों को अच्छी कहानियों के लिए बधाई देनी चाहिए. मिरोठा ने आगे कहा कि जो लेखक अपने को वरिष्ठ मानते हैं और अपने समाज से कट गए हैं. उनको हमें मंचो पर शामिल नहीं किया जाना चाहिए.
कार्यक्रम में रिदम के डायरेक्टर हंसराज सुमन ने रिदम की तरफ से रमणिका गुप्ता को बधाई दी. उन्होंने कहा कि नए कहानीकार साहित्य के लिए एक बड़ी उम्मीद जगाते हैं. इस कार्यक्रम का संचालन हेमलता यादव और अरुण कुमार ने की. हंसराज कालेज की प्रिंसिपल प्रोफसर रमा शर्मा ने रमणिका गुप्ता के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डाला.
AMU और BHU के नाम से हटाए जाएं हिंदू-मुस्लिम शब्दः UGC
नई दिल्ली। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के नाम से जल्द ही ‘मुस्लिम’ और ‘हिंदू’ शब्द हटाए जा सकते हैं. इन दोनों युनिवर्सिटी से ‘मुस्लिम’ और ‘हिंदू’ हटाने का सुझाव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दिया है.
यूनिवर्सिटी का सेक्युलर चरित्र प्रदर्शित न हो इसलिए यूजीसी ने यह सुझाव दिया है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यूजीसी ने 10 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कथित अनियमितता की शिकायतों की जांच के लिए मानव संसाधन मंत्रालय के निर्देश पर 25 अप्रैल को पांच कमेटियां गठित की थी. इसी में एक समिति ने विश्वविद्यालयों के सेक्युलर चरित्र को प्रदर्शित करने के मकसद से ये धर्मसूचक शब्द हटाने की सिफारिश की है.
एएमयू और बीएचयू के अलावा पांडिचेरी, इलाहाबाद, उत्तराखंड, झारखंड, राजस्थान, जम्मू, वर्धा, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के भी ‘शैक्षिक, शोध, वित्तीय और मूलभूत संरचना ऑडिट’ कराया गया है.
अखबार के मुताबिक, समिति को इन विश्वविद्यालयों में अकादमिक, अनुसंधान और वित्तीय संचालन के अलावा इनके बुनियादी ढांचों की ऑडिट करनी थी. ऐसे में एएमयू की ऑडिट कर रही समिति ने सुझाव दिया कि संस्थान को या तो सिर्फ ‘अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ‘ कहा जाए या फिर इसका नाम इसके संस्थापक सर सैयद अहमद खान के नाम पर रख दिया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, बीएचयू के मामले में भी ऐसी ही शिफारिश की गई है.
पैनल सदस्यों ने इस सुझाव के पीछे यह तर्क दिया है कि एएमयू, केंद्र द्वारा वित्त पोषित होने के कारण सेक्युलर संस्था है. कमेटी ने एएमयू की प्रकृति को ‘सामंती’ बताया है और कैंपस में गरीब मुस्लिमों को ऊपर उठाने के लिए कदम उठाने की जरूरत बताई है. साथ ही यूनिवर्सिटी की फीस में बढ़ोत्तरी की भी सिफारिश की है. जिससे विवि की सुविधाओं में इजाफा हो सके.
कांशीराम: जिन्होंने जाति की सियासत को हमेशा के लिए बदल दिया
कांशीराम दूसरे नेताओं की तरह सफेद खादी के कपड़े नहीं पहनते थे. संघर्ष के दिनों में सेकेंड हैंड बाजार से खरीदे पैंट शर्ट और बाद में सफारी सूट उनका पहनावा बना. दूसरे नेताओं से उनका ये फर्क सिर्फ कपड़ों तक नहीं था. कांशीराम के जीवन का हर पहलू राजनीति के दूसरे धुरंधरों से अलहदा था.
जाति के भेदभाव में गले तक डूबे समाज और नेता जहां जाति उन्मूलन की बात करते रहे कांशीराम ने खुलकर जाति की बात की. वो भी बड़े तल्ख तेवर के साथ. ‘तिलक, तराजू और तलवार, इनके मारो जूते चार’ या ठाकुर बामन बनिया चोर, बाकी सब हैं डीएसफोर’ जैसे नारे हों या आर्यावर्त को चमारावर्त बनाने की बात, कांशीराम नें ठीक वहीं पर चोट की जहां सबसे ज्यादा दर्द हो.
1992 में राम मंदिर आंदोलन के समय बीजेपी जहां हिंदुत्व कार्ड खेल रही थी, कांशीराम की बहुजन समाज पार्टी बहुत खुरदुरे तरीके से दलितों को समझा रही थी कि उसकी अपनी बिरादरी से भी कोई मुख्यमंत्री बन सकता है, ऐसा मुख्यमंत्री जो किसी बड़े पावर ग्रुप का नाम मात्र चेहरा न हो अपनी ताकत और तेवर दिखाने वाला दलित नेता हो.
1995 में कांशीराम इसमें कामयाब हो गए, जब मायावती यूपी की मुख्यमंत्री बनी. हालांकि इन तेवरों को सही से आगे न ले जाने के चलते मायावती जिस तेजी से यूपी में आईं, उसी तेजी से यूपी में सिर्फ एक जाति की नेता बनकर रह गई. दलित आंदोलन देखते ही देखते सोशल इंजीनियरिंग बनकर रह गया.
ये कांशीराम का दुर्भाग्य है कि उनकी विरासत को लोग सिर्फ मायावती तक समेट कर देखने लगते हैं. मगर कांशीराम राजनेता नहीं हैं. उनका बड़ा योगदान सबआल्टर्न इतिहास के जरिए दलितों में विद्रोह की चेतना जगाना है. कांशीराम की दलित आंदोलन में कितनी आस्था थी ये उनके अपने घरवालों को लिखे गए 24 पन्नों के खत में दिखता है. कांशीराम ने अपने खत में लिखा कि
अब कभी घर नहीं आऊंगा. कभी अपना घर नहीं खरीदूंगा. सभी रिश्तेदारों से मुक्त रहूंगा. किसी के शादी, जन्मदिन, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होऊंगा. कोई नौकरी नहीं करूंगा. जब तक बाबा साहब अंबेडकर का सपना पूरा नहीं हो जाता, चैन से नहीं बैठूंगा.
कांशीराम ने इन प्रतिज्ञाओं का पालन किया. वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुए.
इसके अलावा कांशीराम ने ज्योतिबा फुले, सावित्री बाई, झलकारीबाई और ऊदा देवी जैसे प्रतीकों को दलित चेतना का प्रतीक बनाया. उन्हें वो मान दिलाया कि किसी भी डिसकोर्स में प्रमुखता से याद किया जाए. हालांकि इसे कांशीराम की गलती या दुर्भाग्य जो भी कहा जाए कि उनकी चुनी हुई वारिस मायावती ने इन प्रतीकों को मूर्ति बनाकर सियासत चमकाने का फॉर्मूला मान लिया. सत्ता के लिए बीएसपी का मूवमेंट सत्ता में आने के दस सालों के अंदर ही ब्राह्मण शंख बजाएगा और हाथी नहीं गणेश है जैसे नारों की भेंट चढ़ गया.
ये बात बिलकुल सच है कि कांशीराम के योगदान को सिर्फ बहुजन समाज पार्टी के सफलता और विफलता से नहीं नापा जा सकता. बहुजन समाज पार्टी उनके द्वारा किए गए बड़े बदलाव का एक हिस्सा भर है. फिर भी एक समय पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे समूचे हिंदी पट्टी में तेजी से फैली यह पार्टी की गति दो दशकों के अंंदर ही सिमटती चली गई.
अगर कांशीराम आज देश की सियासत को देख रहे होते तो शायद बीएसपी को यही समझा रहे होते कि सामाजिक आंदोलन त्याग और जिद से चलते हैं, इंजीनियरिंग के फॉर्मूलों से नहीं.
अनिमेश मुखर्जी का यह लेख फर्स्टपोस्ट हिंदी से साभार है.
