बर्थ-डे विशेष: असल जीवन के महानायक अमिताभ बच्चन

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अमिताभ बच्चन अर्श का सफर तय करके दोबारा फर्श पर आ चुके थे. लेकिन उनमें नियती से लड़ने का हौसला बरकरार था. इंडियन बोर्ड ऑफ इंड्रस्ट्रियल फायनेंसियल रिकंस्ट्र्क्शन ने अमिताभ की कंपनी एबीसीएल को दिवालिया करार दे दिया. इस बुरे वक्त में सहारा इंडिया के मुखिया सुब्रतो राय और उस वक्त समाजवादी नेता रहे अमर सिंह ने उनकी मदद को आगे आए. अमिताभ बच्चन ने सहारा इंडिया फायनेंस को अपना बंगला गिरवी रखकर कर्ज की रकम का इंतजाम किया.

अमिताभ बच्चन के पास फिल्में नहीं थी. कोई उन्हें नई फिल्म देने को तैयार नहीं था. स्टारडम एक झटके में खत्म हो चुका था. ऐसे मौके पर यश चोपड़ा ने उन पर भरोसा जताया और अपनी फिल्म मोहब्बतें में उन्हें रोल ऑफर किया.

अमिताभ बच्चन ने कभी कहा था, ‘उन दिनों हर वक्त मेरे सिर पर तलवार झूलती रहती थी. मैंने कई रातें जागकर बिताईं. एक सुबह मैं उठा और सीधे यश चोपड़ा के पास चला गया. मैंने उनसे कहा कि मैं दिवालिया हो चुका हूं. मेरे पास फिल्म नहीं है. मेरा घर और दिल्ली की कुछ प्रॉपर्टीज अटैच हो चुकी है. यशजी ने मेरी पूरी बात शांत होकर सुनी और अपनी फिल्म मोहब्बतें में एक रोल ऑफर किया. इसके बाद मैंने कुछ कर्मशियल एड, टेलीविजन शो और फिल्में करनी शुरू की. मैंने 90 करोड़ रुपए के कुल कर्ज को चुकता किया और एक बार फिर से नई शुरुआत की.’

2000 में वो एकबार फिर से एक्शन में दिखने लगे. स्टार प्लस के शो कौन बनेगा करोड़पति से उन्होंने बड़े पर्दे का मोह छोड़कर टेलीविजन पर अवतरित हुए. इसके पहले सीजन के 85 एपिसोड से अमिताभ बच्चन को 15 करोड़ की कमाई हुई. उसी वक्त पर उन्होंने आईसीआईसीईआई बैंक जैसे कुछ ब्रांड्स का एंडोर्समेंट कर अच्छी खासी कमाई की और कर्ज चुकता किया.

इसके बाद एक बातचीत में अमिताभ बच्चन ने कहा था, ‘मैं ये नहीं कहूंगा कि ये मेरी सेकेंड इनिंग्स है. मैं कहूंगा कि मुझे एक मौका मिला है खुद को दोबारा साबित करने का. हमलोग अब छाछ भी फूंक-फूंक कर पिएंगे. मैंने अपनी गलतियों से सबक लेना सीखा है. हम बुरे वक्त से गुजरे और अपनी असफलता को स्वीकार किया है. अब हम नई शुरुआत करना चाहते हैं.

विश्व बैंक ने घटाया भारत की आर्थ‍िक वृद्धि दर का अनुमान

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विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों की वजह से देश में निजी क्षेत्र के निवेश पर असर पड़ सकता है. इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था की वृद्ध‍ि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. विश्व बैंक ने ‘दक्षिण एशिया इकोनॉमिक फोकस’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है. विश्व बैंक ने कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्ध‍ि दर प्रभावित हुई है. बैंक ने कहा है कि जीएसटी 2018 की शुरुआत तक इकोनॉमी को परेशान कर सकता है. हालांकि इसके साथ ही इकोनॉमी में सुधार की शुरुआत भी इस दौरान हो जाएगी.

विश्व बैंक ने कहा है कि जीएसटी के बाद मैन्युफैक्चरिंग और सेवाएं काफी बड़े स्तर पर प्रभावित हुई हैं और इनमें काफी बड़े स्तर पर संकुचन हुआ है. बैंक के मुताबिक इकोनॉमी ग्रोथ से जुड़ी गतिविधियां एक क्वाटर्र में स्थ‍िर हो सकती हैं. इससे सालाना जीडीपी विकास दर 2018 में 7.3 फीसदी तक पहुंच सकती है. विश्व बैंक से पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी आर्थिक वृद्ध‍ि दर का अनुमान घटाया है. आईएमएफ ने 2017 में वृद्ध‍ि दर का अनुमान 6.7 फीसदी लगाया है. यह अनुमान कोष के पिछले अनुमान से 0.5 फीसदी कम है.

विश्व बैंक ने यह भी कहा है कि अगर सरकार की तरफ से ऐसी नीतियां लाई जाती हैं, जिससे कि सार्वजनिक खर्च में संतुलन बन सके, तो प्राइवेट इन्वेस्टमेंट बढ़ सकता है. इससे 2018 तक ग्रोथ 7.3 फीसदी तक पहुंच सकता है.

हनीप्रीत ने कबूला जुर्म, खोला ये अहम राज…

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Honeypreet

नई दिल्ली। पुलिस की सख्ती और दबाव से हनीप्रीत ने कबूल कर लिया है कि राम रहीम की सजा सुनाए जाने वाले दिन पंचकूला में हिंसा की शाजिश रची थी. हनीप्रीत ने कहा कि 17 अगस्त को डेरे में एक मीटिंग हुई थी, जिसमें हिंसा की साजिश रची गई.

हरियाणा पुलिस की एसआईटी को पूछताछ के दौरान हनीप्रीत ने बताया कि हिंसा की साजिश के तहत किसको कहां भेजना है, किन इलाकों में हिंसा फैलाई जानी है, इसकी जानकारी उसे पहले से ही थी. इसके लिए मैप तैयार किए गए थे. डेरा के जिन खास विश्वासपात्रों की तैनाती की गई थी, उनके नाम और रोड मैप हनीप्रीत के एक लैपटॉप में सुरक्षित हैं.

पुलिस ने मंगलवार को पंचकूला की अदालत में हनीप्रीत का रिमांड बढ़ाए जाने के वक्त जो दलील दी, उसमें बताया गया कि उसे सिरसा में हनीप्रीत के लैपटॉप की बरामदगी करनी है. हनीप्रीत इससे पहले एक डायरी का जिक्र भी कर चुकी है. सूत्रों की मानें तो हनीप्रीत के लैपटॉप और सीक्रेट डायरी में हिंसा से संबंधित मानचित्र और डेरा के राजदारों की जानकारी है.

रोहतक के सुनारिया जेल में बंद राम रहीम से सीबीआई ने जेल में ही तीन घंटे तक पूछताछ की है. ये पूछताछ 9 अक्टूबर को की गई. राम रहीम से डेरे के साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में सवाल जवाब किए गए. राम रहीम ने आरोपों से इंकार किया है. सीबीआई राम रहीम के कुछ और सहयोगियों और डेरे के कुछ डाक्टरों से भी पूछताछ करेगी.

राम रहीम को रेप का दोषी ठहराए जाने के बाद 25 अगस्त को पंचकूला में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी जिसमें 36 लोग मारे गए थे.

राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने उत्तर भारतीयों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

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मुंबई। महाराष्ट्र में एक बार फिर क्षेत्रवादी मानसिकता के चलते महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने उत्तर भारतीयों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. यह घटना सांगली जिले की है. राज ठाकरे की अध्यक्षता वाली मनसे उत्तर भारतीयों के साथ मारपीट कर अक्सर अपनी सियासत की जमीन तैयार करने की कोशिश करती है.

इस मामले से जुड़ा वीडियो सामने आया है. जिसमें मनसे के लोग सड़क पर दिख रहे उत्तर भारतीयों को दौड़ा-दौड़ाकर लाठी-डंडों से पीटते दिख रहे हैं. दरअसल राज ठाकरे की पार्टी ने सांगली में ‘लाठी चलाओ भैय्या हटाओ’ नाम से पर-प्रांतीय हटाओ मुहिम शुरू की है.

राजठाकरे के इन गुंडों ने लोगों की पिटाई कर उसका वीडियो बनाया और मीडिया को सर्कुलेट कर दिया. पिट रहे गरीब लोगों के लिए न तो पुलिस आगे आई और न ही स्थानीय लोग.

मनसे का आरोप है कि सांगली स्थित एमआईडीसी में पर-प्रांतीयों को नौकरी दी जा रही है. यहां 80 फीसदी नौकरी सिर्फ और सिर्फ मराठी लोगों को दी जाए. खास बात यह है कि वीडियो के वायरल होने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार की तरफ से नहीं हुई है. लोगों को पीटने वाले आजाद घूम रहे हैं और सांगली में रहने वाले डरे सहमे हैं.

नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना बलात्कारः सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला नाबालिग पत्नी से शारीरिक संबंध के मुद्दे पर सुनाया है. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाना रेप हो सकता है, अगर नाबालिग पत्नी इसकी शिकायत एक साल में करती है तो.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंधों के लिए उम्र 18 साल से कम करना असंवैधानिक है. कोर्ट ने IPC की धारा 375 के अपवाद को अंसवैधानिक करार दिया. अगर पति 15 से 18 साल की पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो रेप माना जाए. कोर्ट ने कहा ऐसे मामले में एक साल के भीतर अगर महिला शिकायत करने पर रेप का मामला दर्ज हो सकता है.

दरअसल, IPC375(2) क़ानून का यह अपवाद कहता है कि अगर कोई 15 से 18 साल की बीवी से उसका पति संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नही माना जाएगा जबकि बाल विवाह कानून के मुताबिक शादी के लिए महिला की उम्र 18 साल होनी चाहिए. देश में बाल विवाह भारी संख्या में हो रहे हैं. ऐसे में राज्यों पर इन्हें रोकने की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने इस मामले को POCSO के साथ जोड़ा है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि बाल विवाह सामाजिक सच्चाई है और इस पर कानून बनाना संसद का काम है. कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता. 15 से 18 साल की बीवी से संबंध बनाने को दुष्कर्म मनाने वाली याचिका कोर्ट फैसला सुनाएगा. वहीं मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सती प्रथा भी सदियों से चली आ रही थी लेकिन उसे भी खत्म किया गया, जरूरी नहीं, जो प्रथा सदियों से चली आ रही हो वो सही हो.

सुप्रीम कोर्ट ने यह बात तब कही जब केंद्र सरकार की तरफ से ये दलील दी गई कि ये परंपरा सदियों से चली आ रही है इसलिए संसद इसे संरक्षण दे रहा है. यानी अगर कोई 15 से 18 साल की बीवी से संबंध बनाता है तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाएगा. केंद्र सरकार ने यह भी कहा- अगर कोर्ट को लगता है कि ये सही नहीं है तो संसद इस पर विचार करेगी. सुनवाई में बाल विवाह में केवल 15 दिन से 2 साल की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए थे. सुप्रीम ने केंद्र से कहा था क्या ये कठोर सज़ा है? कोर्ट ने कहा-ये कुछ नहीं है. कठोर सज़ा का मतलब IPC कहता है, IPC में कठोर सज़ा मृत्युदंड है.

दरअसल- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बाल विवाह करने पर कठोर सजा का प्रावधान है. बाल विवाह मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून में बाल विवाह को अपराध माना गया है उसके बावजूद लोग बाल विवाह करते हैं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कि ये मैरेज नहीं मिराज है. सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हमारे पास तीन विकल्प हैं, पहला इस अपवाद को हटा दें जिसका मतलब है कि बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाता है तो उसे रेप माना जाए.

कोर्ट ने कहा- दूसरा विकल्प ये है कि इस मामले में पॉस्को एक्ट लागू किया जाए यानी बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाता है तो उस पर पॉस्को के तहत कार्रवाई हो. वहीं तीसरा विकल्प ये है कि इसमें कुछ न किया जाए और इसे अपवाद माना जाए, जिसका मतलब ये है कि बाल विवाह के मामले में 15 से 18 साल की लड़की के साथ अगर उसका पति संबंध बनाए तो वो रेप नहीं माना जाएगा.

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि बाल विवाह से बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. याचिका में कहा गया कि बाल विवाह बच्चों पर एक तरह का जुर्म है, क्योंकि कम उम्र में शादी करने से उनका यौन उत्पीड़न ज्यादा होता है, ऐसे में बच्चों को प्रोटेक्ट करने की जरूरत है.

दरअसल, अदालत उस संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कहा गया कि 15 से 18 वर्ष के बीच शादी करने वाली महिलाओं को किसी तरह का संरक्षण नहीं है. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि एक तरह लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, लेकिन इससे कम उम्र की लड़कियों की शादी हो रही है.

याचिका में कहा गया है कि 15 से 18 वर्ष की लड़कियों की शादी अवैध नहीं होती है, लेकिन इसे अवैध घोषित किया जा सकता है. याचिका में यह भी दलील दी गई है कि इतनी कम में उम्र में लड़कियों की शादी से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

क्रिकेट के दौरान दलित और सवर्णों में झड़प

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जौनपुर। जौनपुर के करदहा गांव में क्रिकेट खेलने में बच्चों के बीच हुआ विवाद बाद में दलितों व सवर्णों के बीच खूनी संर्घष में बदल गया. घटना में दोनों पक्षों से आठ लोग घायल हो गए. दलितों ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए फूलपुर क्षेत्र के विन्दा गांव मोड़ के पास जाम लगा दिया. इसके बाद पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर एक घंटे बाद जाम समाप्त कराया.

जानकारी के मुताबिक 7 अक्टूबर को दलितों और सवर्णों के बच्चों के बीच क्रिकेट खेलने के दौरान मारपीट हो गई थी. इससे दलित नाराज थे. शनिवार को ही अनिल सिंह दलित बस्ती की तरफ स्थित अपना खेत देखने गए, जहां दलितों ने उनकी पिटाई कर दी. जिससे सवर्ण आक्रोशित हो गए.

सोमवार को सुबह पिटाई करने वालों में से एक का पिता सवर्ण बस्ती की तरफ किसी कार्य से आया था, जिसको अनिल सिंह के पुत्रों ने पीट दिया. जब इस बात की जानकारी दलित बस्ती के लोगों को हुई तो वह एकजुट होकर सवर्ण बस्ती की तरफ गए. जहां सवर्णों व दलितों में जम कर मार पीट हो गई.

मारपीट में एक पक्ष से रामधनी, अजित, अनिल, डिम्पल घायल हो गये. इनका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालपुर में इलाज चल रहा है. वहीं दूसरे पक्ष से अनिल सिंह, रोशन सिंह, पवन सिंह, मदन सिंह घायल हो गए. दलितों ने चार सवर्णो के विरुद्ध नामजद तहरीर दी है.

तहरीर के बावजूद कार्रवाई न होने पर दलितों ने पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए सुबह सोमवार 10 बजे फूलपुर थाना क्षेत्र के विन्दा गांव मोड़ पर राष्ट्रीय राज मार्ग पर जाम लगा दिया. जाम की सूचना पर फूलपुर व जलालपुर पुलिस पहुंच गई .

वहां ग्रामीणों को समझा बुझा कर पुलिस ने एक घंटे बाद जाम समाप्त कराया. मामले में जौनपुर एसपी केके चौधरी ने कहा कि वर्ग संघर्ष नहीं है. दलित पक्ष की तहरीर पर आठ लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.

साभार- अमर उजाला

तो क्या इन मजबूर‍ियों के चलते बार-बार गुजरात जा रहे हैं नरेंद्र मोदी?

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इस साल के आखिर तक होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव ना केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए नाक की लड़ाई बनकर रह गई है बल्कि भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए भी यह प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है. चूंकि, दोनों सियासी महारथी इसी राज्य से आते हैं, इसलिए इन्हीं दोनों के कंधों पर गुजरात चुनाव का दारोमदार भी टिका है. मौजूदा दौर में जब प्रधानमंत्री मोदी खुद और उनकी केंद्रीय सरकार गिरती अर्थव्यवस्था के लिए अपनी ही पार्टी के सांसदों और विरोधियों के निशाने पर हैं, तब उनकी लोकप्रियता का आंकड़ा भी पैमाने पर परखे जाने की प्रतीक्षा में आ खड़ा हुआ है. शायद यही वजह है कि इन दोनों नेताओं को अब गुजरात के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. अमित शाह के बाद अब पीएम मोदी शनिवार (7 अक्टूबर) से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं. पीएम बनने के बाद पहली बार वो अपने जन्मस्थान वाडनगर भी जाएंगे.

इन दोनों नेताओं और भाजपा के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए भी गुजरात चुनाव एक लिटमस टेस्ट की तरह बन गया है क्योंकि पिछले दो दशकों से यह पश्चिमी राज्य इन्हीं के कब्जे में रहा है. उधर, 22 सालों से सत्ता के स्वाद से कोसों दूर रहने वाली कांग्रेस भी वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम और वातावरण से उत्साहित नजर आ रही है. राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत और गिरती अर्थव्यवस्था पर चौतरफा घिरी मोदी सरकार से कांग्रेसी कुनबा गुजरात में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात के सघन दौरे के साथ-साथ अब भाजपा की तरह धार्मिक लामबंदी भी शुरू कर दी है.

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल भी पिछले दो सालों से भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहे हैं. इनके अलावा आम आदमी पार्टी भी कुछ चुनिंदा सीटों पर ताल ठोकने को बेकरार है. आप कोई सीट जीते या नहीं लेकिन सत्ताधारी भाजपा का कई सीटों पर खेल बिगाड़ने में कामयाब हो सकती है. अन्य विपक्षी पार्टियों में मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी मोदी-भाजपा-संघ की तिकड़ी को दलित विरोधी ठहराकर उनके खेल को बिगाड़ने की मुहिम में जुटी हुई हैं. ऊना और वडोदरा में दलित समुदाय भाजपा के खिलाफ आवाज बुलंद किए हुए हैं. शरद यादव की अगुवाई वाले जनता दल (यू) के धड़े के कार्यकारी अध्यक्ष और गुजरात से विधायक छोटू भाई वासावा पहले ही अपने इरादे जता चुके हैं कि वो भाजपा का खेल बिगाड़ने के लिए मैदान में डटे हुए हैं.

प्रमोद परवीन का यह लेख जनसत्ता से साभार है.

दीक्षाभूमि और ड्रैगन पैलेस को नागपुर प्रशासन ने पर्यटन सूची से हटाया

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नागपुर। नागपुर की दीक्षाभूमि पर पहुंचना सभी के लिए सौभाग्य की बात होती है. ये वो जगह है जहां पर लाखों लोग आकर बाबासाहेब अम्बेडकर की धम्म क्रांति को नमन करते हैं. और उनकी प्रेरणा से लाखों लोगों की जिंदगी में एक नई उर्जा का संचार होता है. लेकिन नागपुर के कलेक्टर साहब को दीक्षाभूमि से कोई लेना देना नहीं है. उनकी मनुवादी सोच ने साफ कर दिया है कि जो संघ को पसंद हो वही करेंगे.

दरअसल, नागपुर कलेक्टर की अधिकृत बेबसाइट nagpur.nic.in पर जिन पर्यटन स्थलों का ब्योरा दिया गया है. उसमें दीक्षाभूमि और ड्रेगन पैलेस जैसे ऐतिहासिक जगहों का नाम नदारत है. बेबसाइट के जरिए कलेक्टर साहब ने नागपुर आये लोगों से गुजारिश की है कि अगर घूमना हो तो संघ मुख्यालय घूम कर आईए. यहां के सुन्दर बगीचे और तालाब को देखिए. लेकिन दीक्षाभूमि और ड्रेगन पैलेस के नाम पर जिले की सरकारी बेबसाईट ने कोई जिक्र नहीं किया है.

यानि बौद्ध धर्म को मानने वाले और बाबासाहेब को चाहने वालों के लिए नागपुर प्रशासन के दिल में कोई जगह नहीं है. लोकतंत्र को शर्मसार कर देने वाले नागपुर हुक्मरान को इतनी भी खबर नहीं कि महाराष्ट्र सरकार ने दीक्षाभूमि को क्लास “ए” पर्यटन स्थल का दर्जा दे रखा है. नागपुर शहर के सभी धार्मिक व पर्यटन क्षेत्रों में यह पहला स्थल है. जहां इसे ‘ए’ क्लास का दर्जा हासिल हुआ है. खैर कलेक्टर साहब को कौन समझाए. कि इनके चाहने या न चाहने से देश की संस्कृति नहीं बदलती है.

दलित तोड़ रहे हैं मरी गाय न उठाने की कसम

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नई दिल्ली। गुजरात के दलितों को यहां की सरकार इसके सपने देखने की भी इजाजत नहीं देती. तभी तो यहां के दलित अपने पारंपरिक कामों को चाहकर भी नहीं छोड़ पा रहे हैं.

दरअसल, पिछले साल उना में दलितों के साथ जिस तरह से गोरक्षकों ने मारपीट की थी. उसके बाद दलित समाज लोगों ने कसम खाई थी कि वो आज के बाद मरी हुई गायों को हटाने और गाय की खाल को निकालने का काम नहीं करेंगे. लेकिन कईयों को अपनी कसम तोड़ देनी पड़ी.

बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि नई जिंदगी की उम्मीद पाले यहां के दलित युवाओं ने कई जगहों पर रोजगार की तालाश की. उसमें से एक वढवाण तालुका का मुन्ना राठौड़ भी है, जिसे कहीं पर भी नौकरी नहीं मिली. रोजगार मिलने की जगह उन्हें जाति विशेष को लेकर जलालत मिलती थी. यानि युवाओं की ऊंची उड़ान के सपनों को सरकार पंख लगाने में नाकाम रही. अब अपनी कसमों पर लोगों के पेट की भूख भारी पड़ती दिख रही थी.

एक तो पेट की आग, उस पर समाज के ठेकेदारों की तरफ से गांव से निकाल देने की धमकी. ऐसे में अपने पुराने कामों पर लौटने के आलावा इन लोगों के पास और कोई चारा दिख नहीं रहा था. कई लोग ऐसे भी थे जो अपनी कसम की लाज बचाने के लिए गांव से निकल गए. उनमें से एक 55 साल के कनु चावड़ा थे, जो वढवाण तालुका को छोड़कर अहमदाबाद आ गए. और अब जूते बनाने का काम करते हैं. लेकिन जो लोग अपने पुराने कामों में लग गए. वो एक सवाल छोड़ गए कि ये वही गुजरात है जहां पर विकास के झूठे परचम लहराते सरकार नहीं थकती है.

पाठ्यक्रम में वीरंगाना झलकारी बाई और मातादीन भंगी को शामिल करने की मांग

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चौथी कक्षा से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई जाने वाली किताबों का पुनरीक्षण किया जा रहा है. इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने बेसिक माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के सुझाव और विचार भी मांगे है.

4 अप्रैल 2018 से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था (एनसीईआरटी) का नया पाठ्यक्रम लागू कराने जा रही है. यूपी बोर्ड ने नौवीं से बाहरवीं तक के संशोधित पाठ्यक्रम को एनसीईआरटी को भेज दिया है.

इन सब के बीच अखिल भारतीय लोधी महासभा की मांग पर यूपी के शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि पाठ्यक्रम में अवंतीबाई जल्द शामिल होंगी. दलित समाज के लोगों ने शिक्षामंत्री के इस बयान पर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि 1857 की क्रांति में वीरंगाना झलकारी बाई और मातादीन भंगी ने अहम भूमिका निभाई है. लेकिन प्रशासन उन्हें पाठ्यक्रम में शामिल क्यों नहीं कर रहा है? सिर्फ इसलिए कि वे दलित समाज से थे.

आगरा के रहने वाले गोविंद सिंह ने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री को बहुजन नायकों को भी याद करना चाहिए. वीरांगना झलकारी बाई ने लक्ष्मी बाई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी थी. मातादीन भंगी ने भी स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी थी.

गोविंद सिंह का कहना है कि प्रत्येक जिले से प्रत्येक व्यक्ति जिला अधिकारी को ज्ञापन दें और वीरंगाना झलकारी बाई और मातादीन भंगी को पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग करें. गोविंद ने आगे कहा कि मेरे समस्त साथीगण जिला अधिकारी को ज्ञापन देने जा रहे हैं. पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम की वीरंगाना झलकारी बाई और मातादीन भंगी को शामिल किया जाए. स्कूलों में पढ़ाया जाए.

खुला जॉब का पिटारा, जानिए क्या है खास

रायपुर। जिला रोजगार कार्यालय के प्लेसमेंट कैंप में सोमवार को 2 हजार से ज्यादा लोगों को निजी क्षेत्रों में काम करने का मौका मिला. नौकरी मिलने से युवाओं के चेहरे खिल उठे. दूर-दूर से आए हुए कुछ ग्रामीणों को महज 12 वीं तक की पढ़ाई में ही 10 हजार रुपए वेतन में जॉब का सुनहरा अवसर मिला. तीन घंटे तक चले प्लेसमेंट कैंप में सबसे ज्यादा युवतियां पहुंचीं. टेली कॉलर से लेकर ऑफिस मैनेजर बनने प्रतिस्पर्धा में भाग लिया. जिला रोजगार कार्यालय की ओर से आयोजित प्लेसमेंट कैंप में 2200 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे. पहले 15 निजी कंपनियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया. इसके बाद दो और कंपनियों के जुड़ने के बाद युवाओं को अवसर प्रदान किया गया.

न्यू शांति नगर में सुबह से रजिस्ट्रेशन के लिए भीड़ उमड़ी रही. 2200 पदों के लिए सबसे ज्यादा युवतियों ने उपस्थिति दर्ज कराई. पहली पाली में दोपहर 12 बजे तक 35 युवतियां साक्षात्कार में शामिल हुईं.

रोजगार के लिए आयोजित प्लेसमेंट कैंप में पहली बार आकर नौकरी मिलने से ज्यादातर युवा खुश दिखे. शिवानंद नगर से पहुंची सुप्रिया कोसरिया ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. प्लेसमेंट कैंप में एक बड़ी कंपनी ने नौकरी पक्की की. सुप्रिया ने बताया कि कुछ महीने पहले ही पढ़ाई पूरी की थी. अब बेहतर अवसर मिला. अस्मिता दीक्षित निवासी शंकर नगर ने बीई करने के बाद ऑफिस मैनेजमेंट की नौकरी मिलने की बात कही. अस्मिता ने बताया कि वह ऑनलाइन कंसलटेंसी कंपनियों के जरिए प्रयास में लगी थी, लेकिन प्लेसमेंट कैंप आने पर एक ही बार में चयन हो गया.

टेली कॉलर का काम करने दिव्यांग भी दूर-दूर से पहुंचे. पचेड़ा से आए जीतेंद्र सोनवानी 12 वीं पास करने के बाद टेली कॉलर बनने बायोडाटा दिया, कंपनी ने एक हफ्ते में जॉइनिंग की गारंटी दी.

एक दिन में ही 1 करोड़ से ज्‍यादा लोगों ने देखा ट्रेलर

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नई दिल्‍ली। सोमवार दोपहर संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ का ट्रेलर रिलीज किया गया है और रिलीज होते ही इस फिल्‍म के ट्रेलर ने रिकॉर्ड बना दिया है. रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर स्‍टारर इस फिल्‍म की शूटिंग को लेकर भले ही निर्देशक भंसाली को कई परेशानियां झेलनी पड़ हों, लेकिन लगता है दर्शकों से मिलने वाला यह प्‍यार उनकी सारी तकलीफें भुला देगा.

ट्रेलर रिलीज के बाद से ही फिल्‍म में दीपिका और शाहिद के लुक के साथ ही रणवीर सिंह के नेगेटिव शेड वाले लुक की जबरदस्‍त तारीफ हो रही है. फिल्‍म ‘पद्मातवी’ की स्‍टारकास्‍ट ने खुद यह खबर अपने फैन्‍स के साथ साझा की है कि उनकी फिल्‍म का ट्रेलर यूट्यूब पर अब तक सबसे ज्यादा देखा जाने वाला ट्रेलर बन चुका है. कल यानी सोमवार की दोपहर 1.03 मिनट पर यह ट्रेलर रिलीज किया गया है.

रिलीज के सिर्फ 24 घंटे के भीतर ही इसे 15 मिलियन (1.50 लाख) व्‍यूज मिले हैं. ट्रेलर के आने के बाद से ही सिर्फ फैन्‍स ही नहीं बल्कि बॉलीवुड की भी कई हस्तियां भंसाली की इस फिल्‍म की तारीफ कर चुकी हैं. खुद ‘बाहुबली’ फिल्म के निर्देशक एसएस राजामौली ने भी भंसाली की तारीफ की है.‘बाहुबली’ के डायरेक्टर एसएस राजामौली ने ‘पद्मावती’ के ट्रेलर को शेयर करते हुए इसे बेहद खूबसूरत बताया है. साथ ही डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को मास्टर क्राफ्ट्समैन कहा है. सिर्फ राजामौली ही नहीं, फिल्‍ममेकर करण जौहर ने भी अपने बयान में संजय लीला भंसाली से जलने तक की बात कही है.

बैडमिंटन प्रीमियर लीग में हुई नीलामी

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वोडाफोन प्रीमियर लीग बैडमिंटन के दूसरे सीजन में हाल ही में खिलाडियों की नीलामी हुई जिसमे एचएस प्रणय सबसे महंगे बिके. उन्हें अहमादाबाद की टीम स्मैश मास्टर्स ने 62 लाख रुपय में खरीदकर अपनी टीम में शामिल किया. उसी के साथ देश की सुंदरी साइना नेहवाल और बेस्ट शटलर पी.वी सिंधु अपनी नीलामी के तहत वही टीम में बरक़रार रहीं.

प्रीमियर लीग बैडमिंटन के इस दूसरे सीजन में के. श्रीकांत को उनकी टीम ने “राइट टू मैच’ कार्ड की मदद से अपने साथ बनाये रखा. जो आगे जाकर साइना नेहवाल के साथ अवधि वारियर्स में खेलते दिखाई देंगे. वही पीवी सिंधु अपनी टीम चेन्नई स्मैशर्स से खेलेंगी. नीलामी में आये नए कानूनों के तहत, साइना और सिंधु को पिछले सीजन की तुलना में 25% ज्यादा राशि मिलेगी और ‘राइट टू मैच’ कार्ड के जरिए सिलेक्ट हुए श्रीकांत को मिलने वाली राशि में 10% का इजाफा होगा. इस हिसाब से देखा जाए तो श्रीकांंत को 56.10 लाख मिलेंगे, सिंधु को 48.75 लाख और साइना को 41.25 लाख मिलेंगे.

डबल्स की बात करें तो नीलामी से बाहर रहकर भारत के ‘सात्विक साईराज’, रूस के ‘व्लादिमिर इवानोव’ और कोरिया के ‘ली यंग डाइ’ अपनी पुरानी टीमों में बरक़रार रहे. भारत की शीर्ष महिला खिलाड़ी की टीम दिल्ली एसर्स ने अश्विनी पोनप्पा के लिए 20 लाख लगाए वही बेंगलुरु ब्लास्टर्स ने मनु अत्रि पर 17 लाख की बोली लगाकर नीलामी की समाप्ति की.

इस दिवाली रुलाएगा प्याज

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जयपुर। पहले ही महंगाई की मार झेल रहे प्रदेश के लोगों को अब प्याज भी रुलाने वाला है. महाराष्ट्र के नाशिक में लासलगांव स्थित देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी में प्याज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में थोक व्यापारियों का कहना है कि दिवाली तक प्याज महंगा होता रहेगा.

इससे लोगों के साथ-साथ प्रदेश के किसान भी परेशानी में हैं. लासलगांव एग्रीकल्चर प्रॉड्यूस मार्केट कमिटी (एपीएमसी) के थोक प्याज व्यापारियों ने कहा कि मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते फासले की वजह से प्याज के दाम भी बढ़ रहे हैं. एपीएमसी में पिछले 10 दिनों में प्याज की कीमत औसतन 80 प्रतिशत बढ़ गई है.

सोमवार को बाजार खुलने पर इसमें 21.33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. शुक्रवार को प्याज औसतन 2,020 रुपये प्रति क्विंटल था, जो सोमवार को बढक़र 2,451 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. प्याज के थोक मूल्य में बढ़ोतरी का असर कुछ दिनों में खुदरा बिक्री पर भी दिखने लगेगी. नाशिक में खुदरा प्याज 30 रुपये प्रति किलो बिकने लगा है और कुछ दिनों में भाव 35 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है. हालांकि, देश के दूसरे हिस्सों में प्याज 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है.

अभी जो प्याज मार्केट में आ रहा है उसकी खेती मार्च-अप्रैल में हुई थी. गर्मी की फसल वाला प्याज पांच से छह महीने ही सही रह पाता है और किसान बेहतर मूल्य पाने की उम्मीद में प्याज का भंडारण करना पसंद करते हैं. यूं तो बारिश की वजह से प्याज का 20 प्रतिशत स्टॉक बर्बाद हो गया, फिर भी किसानों के पास अब भी पर्याप्त मात्रा में प्याज होगा.

शर्मनाकः पॉलिबैग और गत्तों में लपेटकर लाए 7 शहीदों के शव

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Martyr bodies

नई दिल्ली। अरुणाचलप्रदेश के तवांग में तीन दिन पहले हेलिकॉप्टर क्रैश में शहीद हुए 7 जवानों के शव पॉली बैग और गत्तों में लपेटकर गुवाहाटी तक लाए गए. रविवार को तस्वीरें वायरल होने पर विवाद छिड़ गया. सोशल मीडिया पर आलोचना और गुस्सा देख सेना को सफाई देनी पड़ी कि दुर्गम इलाके में बेहद असाधारण हालात और सीमित संसाधनों के चलते ऐसा करना पड़ा. भविष्य में शव उचित तरीके से लाए जाएंगे.

गौरतलब है कि शुक्रवार को एयरफोर्स का एमआई-17 हेलिकॉप्टर भारत-चीन बॉर्डर के पास तवांग में क्रैश हो गया था. हादसे में एयरफोर्स के पांच और सेना के दो जवानों की मौत हो गई थी. इनमें दो जवान झुंझुनं और जोधपुर के भी थे. इनके शव गत्तों और प्लास्टिक बैग में लपेटकर ले जाए गए.

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने इसकी तस्वीरें ट्विटर पर शेयर कर दीं. पनाग ने कहा कि सात जवान कल सूरज की रोशनी में अपनी मातृभूमि की सेवा में निकले और इस तरह वापस आए. मामले ने तूल पकड़ा. सूत्रों के अनुसार मामला रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण तक पहुंचा. उनके दखल पर सेना को सफाई देनी पड़ी.

सेना ने कहा कि शव 13 हजार फीट की ऊंचाई पर थे. वहां तक सड़क नहीं थी. शव जल्द से जल्द हटाने थे. हेलिकॉप्टर सभी शवों का वजन नहीं उठा सकता था. असामान्य हालात और समय की कमी के चलते बॉडी बैग या ताबूत के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधनों में ही शव लपेटकर लाए गए. 6 अक्टूबर दोपहर 2 बजे गुवाहाटी बेस अस्पताल में शव पहुंचाए. उसके बाद पोस्टमार्टम सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं. पोस्टमार्टम के बाद शव पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ लकड़ी के ताबूतों में रखवाए गए.

श्रद्धांजलि के बाद पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ आश्रितों को सौंपने के लिए शव भिजवाए गए. सेना ने कहा कि शहीदों के शवों को हमेशा सम्मान दिया गया है. आगे से शव बॉडी बैग, लकड़ी के बक्से या ताबूत में ले जाना सुनिश्चित करेंगे.

…ये है केरल के पहले दलित पुजारी, जिसने 10 सालों तक पढ़ा तंत्र शास्त्र

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यादु कृष्णन

पथानामथिट्टा। केरल में पहले दलित पुजारी की नियुक्त‍ि हुई है. नियुक्ति के बाद 9 अक्टूबर को पहली बार केरल के किसी मंदिर का दरवाजा एक दलित पुजारी ने खोला. इस मंदिर का नाम है मनप्पुरम भगवान शिव मंदिर. यह केरल के तिरुवल्ला में स्थित है. पुलाया समुदाय के 22 वर्षीय कृष्णन एक दलित हैं.

कृष्णन के पिता पीके रवि और मां लीला इस अनूठी उपलब्धि से उत्साहित हैं. युवक ने तंत्र शास्त्र में दस साल का प्रशिक्षण हासिल किया. त्रावनकोर देवस्वम बोर्ड ने हाल ही में 36 गैर ब्राह्माणों को विभिन्न मंदिरों के कामकाज के लिए चयनित किया गया था. इनमें कृष्णन समेत छह दलित युवक भी शामिल थे.

कृष्णन उन छह दलित पुजारी में से एक हैं जिन्हें तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध त्रावणकोर देवस्वम मंदिर बोर्ड ने अलग-अलग मंदिरों में पुजारी के तौर पर नियुक्त किया है. यह पहली बार है कि जब केरल के मंदिर में दलित और पिछड़े वर्ग के पुजारियों को मौका दिया गया है और आरक्षण प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है.

कृष्णा ने बताया कि वह पिछले पांच सालों से एर्नाकुलम जिले के वलियाकुलंगारा देवी मंदिर के पुजारी रहे हैं और उन्हें किसी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा है. कृष्णा ने आगे कहा कि जब वो सोमवार को मंदिर से आ रहे थे तो कई श्रद्धालु भावुक हो गए.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के कमिश्नर सीपी राम राजा प्रेमा प्रसाद ने कहा कि नए पुजारियों को मंदिर का काम शुरू करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. अब लोगों की सोच बहुत बदल चुकी है. अब लोगों का सोचना है कि पुजारी को पूजा कराना आना चाहिए, मंदिर का रख-रखाव अच्छा होना चाहिए अब उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह किसी जाति का है.

बोर्ड के जरिये राज्य में 1248 मंदिर संचालित होते हैं, जिनमें विश्व प्रसिद्ध भगवान अयप्पा का सबरीमाला मंदिर भी शामिल है. त्रिशूर जिले के कोराट्टी के रहने वाला कृष्णन संस्कृत में परास्नातक के अंतिम वर्ष का छात्र है. उसने 15 वर्ष की उम्र में पहली बार घर के नजदीक मंदिर में पूजा शुरू की थी.

यूपी की चीनी मिल में गैस का रिसाव, 300 स्कूली बच्चे बीमार

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शामली

शामली। शामली में शुगर मिल में गैस रिसाव की वजह से पांच सौ बच्चे बीमार पड़ गए हैं. सभी बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दरअसल शुगर मिल के कचरे को नष्ट करने के लिए डाले गए केमिकल से गैस का रिसाव हुआ जिसके बाद बच्चे बेहोश हो गए.

गैस रिसाव से पास के ही सरस्वती विद्या मंदिर व सरस्वती जूनियर हाई स्कूल के तीन सौ बच्चे बेहोश हो गए. इस पूरे मामले में चीनी मिल की बड़ी सापरवाही सामने आयी है. यह चीनी मिल शहर के बीचो बीच स्थित है. लोग अपने घरों से बाहर निकल कर सुरक्षित जगह की ओर जा रहे हैं.

शुगर मिल से कौन सी गैस रिसाव हुई और कितना नुकसान हुआ इसका आंकलन किया जा रहा है. इस गैस का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर हुआ है. पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद है औऱ राहत एवं बचाव का कार्य जारी है.

इस मामले में जिम्मेदारी शुगर मिल की बनती है. इस मिल का नाम सर शादीलाल शुगर मिल है. अक्टूबर से नवंबर तक शुगर मिलों में मरम्मत का कार्य होना है. आज मरम्मत के दौरान ही यह हादसा हुआ. आपको बता दें शामली इलाके में से उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना मंत्री सुरेश राणा आते हैं.