चंद्रयान-2 लॉन्चिंग: मिशन के वो 15 सबसे मुश्किल मिनट जब धड़कनें थम जाएंगी

नई दिल्ली। भारत के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 की कुछ घंटों में लॉन्चिंग होनी है. इस बेहद कठिन मिशन को लक्ष्य तक पहुंचाना किसी करिश्मे से कम नहीं होगा. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्चिंग के बाद मिशन को चांद तक पहुंचने में 40 दिन से ज्यादा का समय लगने वाला है. इस मिशन के सबसे तनावपूर्ण क्षण चांद पर लैंडिंग से पहले के 15 मिनट होंगे. खुद भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के चीफ के सिवन ने कहा है कि लैंडिंग के अंतिम 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण रहेंगे क्योंकि उस दौरान हम ऐसा कुछ करेंगे जिसे हमने अभी तक कभी नहीं किया है. याद हो कि 15 जुलाई को क्रायोजेनिक इंजन में लीकेज के कारण चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग अंतिम क्षणों में टालनी पड़ी थी.

सिवन ने कहा, ‘चंद्रमा की सतह से 30 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2 की लैंडिंग के लिए इसकी स्पीड कम की जाएगी. विक्रम को चांद की सतह पर उतारने का काम काफी मुश्किल होगा. इस दौरान का 15 मिनट काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है. हम पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग की करेंगे. यह तनाव का क्षण केवल इसरो ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए होगा.’ सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता मिलते ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा. अभी तक अमेरिका, रूस और चीन के पास ही यह विशेषज्ञता है.

चांद की सतह को छूने से पहले क्या होगा? धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3 लाख 84 हजार किलोमीटर है. लॉन्चिंग के बाद चंद्रमा के लिए लंबी यात्रा शुरू होगी. चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे. चांद की सतह पर उतरने के 4 दिन पहले रोवर ‘विक्रम’ उतरने वाली जगह का मुआयना करना शुरू करेगा. लैंडर यान से डिबूस्ट होगा. ‘विक्रम’ सतह के और नजदीक पहुंचेगा. उतरने वाली जगह की स्कैनिंग शुरू हो जाएगी और फिर 6-8 सितंबर के बीच शुरू होगी लैंडिंग की प्रक्रिया. लैंडिंग के बाद लैंडर (विक्रम) का दरवाजा खुलेगा और वह रोवर (प्रज्ञान) को रिलीज करेगा. रोवर के निकलने में करीब 4 घंटे का समय लगेगा. फिर यह वैज्ञानिक परीक्षणों के लिए चांद की सतह पर निकल जाएगा. इसके 15 मिनट के अंदर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिलनी शुरू हो जाएंगी.

देशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं. लॉन्चिंग के करीब 16 मिनट बाद जीएसएलवी-एमके तृतीय चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा. लैंडर ‘विक्रम’ का नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है. दूसरी ओर, 27 किलोग्राम ‘प्रज्ञान’ का मतलब ‘बुद्धिमता’ है. इसरो चंद्रयान-2 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारेगा.

‘बाहुबली’ जीएसएलवी मार्क-… से होगी लॉन्चिंग 4 टन तक का भार (पेलोड) ले जाने की अपनी क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ कहे जा रहे जीएसएलवी मार्क-… रॉकेट ने जीसैट-29 और जीसैट-19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है. अंतरिक्ष एजेंसी ने इसी रॉकेट का इस्तेमाल करते हुए क्रू मॉड्यूल वायुमंडलीय पुन: प्रवेश परीक्षण (केयर) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था. इसरो के प्रमुख के सिवन के मुताबिक, अंतरिक्ष एजेंसी दिसंबर 2021 के लिए निर्धारित अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ के लिए भी जीएसएलवी मार्क-… रॉकेट का ही प्रयोग करेगी.

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हापुड़ में दर्दनाक सड़क हादसा, 8 बच्चों समेत 9 लोगों की मौत

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यूपी के हापुड़ जनपद के थाना हाफिजपुर क्षेत्रान्तर्गत मेरठ-बुलंदशहर हाईवे पर रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे गांव सादकपुर के सामने एक मिनी ट्रक तथा पिकअप की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई. हादसे में पिकअप के परखच्चे उड़ गए तथा उसमें सवार आठ बच्चों समेत नौ की मौत हो गई और 10 से ज्यादा लोग घायल हैं. बताया गया है कि अधिकतर लोग एक ही खानदान के हैं. आरोपी चालक मिनी ट्रक लेकर फरार हो गया.

धौलाना के गांव सालेपुर कोटला से हाजी मेहरबान की बेटी का निकाह मेरठ के गांव जई नंगला में तय हुआ था, जिसकी बारात आ रही थी. बताया गया है गुलिस्तां का निकाह हापुड़ नगर स्थित वंश गार्डन में था. गांव से काफी तादाद में लोग निकाह समारोह मे शामिल होने के लिए आए थे.

रात को करीब साढ़े 11 बजे कुछ लोग शादी समारोह शामिल होने के बाद पिकअप से लौट रहे थे. जैसे ही उनकी गाड़ी थाना हाफिजपुर क्षेत्रान्तर्गत गांव सादिकपुर के पास पहुंची तो विपरीत दिशा से तेज गति से आ रहे मिनी ट्रक ने पिकअप में टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप बीच में फट गई और उसमें सवार करीब 20 बच्चे और लोग हाईवे पर बिखर गए.

टक्कर मारने के बाद चालक मिनी ट्रक को लेकर मौके से फरार हो गया. जबकि हाईवे पर दौड़ रहे अन्य वाहन चालकों ने हादसा देखकर पुलिस को सूचना दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को आनन-फानन में हापुड़ के नर्सिंग होम में भर्ती कराया, जहां पर आठ बच्चों समेत नौ को मृत घोषित कर दिया गया. मरने वालों की उम्र 8 से लेकर 14 साल से कम बताई जा रही है.

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मायावती ने अपने विधायक से कहा- कुमारस्वामी के पक्ष में वोट दें

बेंगलुरु। कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार सोमवार को बहुमत साबित करेगी. राज्य के बसपा के इकलौते विधायक एन महेश को पार्टी प्रमुख मायावती ने कुमारस्वामी के पक्ष में समर्थन करने के निर्देश दिए. इससे पहले एन महेश ने कहा था कि वे फ्लोर टेस्ट के दौरान तटस्थ रहेंगे. हालांकि, विश्वास मत प्रस्ताव पर बहस के दौरान भी बसपा विधायक सदन में गैर हाजिर थे. फ्लोर टेस्ट से पहले रविवार को कांग्रेस और भाजपा की विधायक दल की बैठक हुई. कुमारस्वामी के विश्वास मत प्रस्ताव पर गुरुवार और शुक्रवार को चर्चा हो चुकी है.

रविवार को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कांग्रेस-जेडीएस विधायकों के साथ ताज होटल में बैठक की. भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने फिर से कहा कि सोमवार को गठबंधन सरकार का आखिरी दिन होगा. उधर, मुंबई में मौजूद बागी विधायकों ने कहा, ”हम यहां सिर्फ गठबंधन (कांग्रेस-जेडीएस) सरकार को सबक सिखाने के लिए आए हैं. इसके अलावा कोई दूसरा मकसद नहीं है. हम यहां पैसे या किसी दूसरी चीज के लालच में नहीं आए. एक बार सबकुछ ठीक हो जाए, बेंगलुरु लौट जाएंगे.”

राज्यपाल वजुभाई वाला ने कुमारस्वामी को बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे और फिर शाम 6 बजे तक की डेडलाइन दी थी. लेकिन मुख्यमंत्री ने इस दिन विश्वास मत साबित नहीं किया. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कहा था, ”मेरे मन में राज्यपाल के लिए सम्मान है, लेकिन उनके दूसरे प्रेम पत्र ने मुझे आहत किया. मैं फ्लोर टेस्ट का फैसला स्पीकर पर छोड़ता हूं. मैं दिल्ली द्वारा निर्देशित नहीं हो सकता. मैं स्पीकर से अपील करता हूं कि राज्यपाल की ओर से भेजे गए पत्र से मेरी रक्षा करें.”

मुख्यमंत्री ने येदियुरप्पा के निजी सचिव पीए संतोष के साथ निर्दलीय विधायक एच नागेश की फोटो दिखाते हुए कहा था, ”क्या वाकई उन्हें विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में 10 दिन पहले ही पता चला? जब से कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनी, इसे गिराने के लिए माहौल बनाया जा रहा है. मुझे पहले दिन से पता था कि सत्ता ज्यादा नहीं चलेगी, देखता हूं भाजपा कितने दिन सरकार चला पाएगी? मुद्दे पर बहस होने दीजिए. आप (भाजपा) अभी भी सरकार बना सकते हैं. कोई जल्दी नहीं है. आप सोमवार या मंगलवार को भी सरकार बना सकते हैं. मैं अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल नहीं करूंगा. पहले राजनीतिक संकट पर चर्चा होगी, इसके बाद फ्लोर टेस्ट.”

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, इसमें शीर्ष अदालत के 17 जुलाई के फैसले को चुनौती दी गई. दरअसल, कोर्ट ने 17 जुलाई को कहा था कि 15 बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनने के लिए बाध्य ना किया जाए. इन विधायकों पर व्हिप लागू नहीं होगी. कांग्रेस कर्नाटक चीफ दिनेश गुंडू राव ने याचिका दायर कर कोर्ट से फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की. इसमें कहा गया है कि कोर्ट का आदेश व्हिप जारी करने के पार्टी के अधिकार को प्रभावित करता है.

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने जेडीएस के सभी 37 विधायकों को सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया था. इनमें उनकी पार्टी के तीन बागी विधायक नारायण गौड़ा, गोपालैया और एच विश्वनाथ भी शामिल हैं. जेडीएस ने कहा है कि अगर विधायक गैर-मौजूद रहते हैं या विश्वास मत के खिलाफ वोटिंग करते हैं तो दल बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की जाएगी. जबकि, इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायक रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि वह पार्टी में हैं और सरकार के पक्ष में वोटिंग करेंगे.

कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायकों ने दिया इस्तीफा उमेश कामतल्ली, बीसी पाटिल, रमेश जारकिहोली, शिवाराम हेब्बर, एच विश्वनाथ, गोपालैया, बी बस्वराज, नारायण गौड़ा, मुनिरत्ना, एसटी सोमाशेखरा, प्रताप गौड़ा पाटिल, मुनिरत्ना और आनंद सिंह इस्तीफा सौंप चुके हैं. वहीं, कांग्रेस के निलंबित विधायक रोशन बेग ने भी इस्तीफा दे दिया. 10 जून को के सुधाकर, एमटीबी नागराज ने इस्तीफा दे दिया था.

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सूचना के अधिकार में संशोधन पर क्यों तुली है सरकार

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नई दिल्ली। विपक्ष के कड़े विरोध तथा कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस के वाक आउट के बीच सरकार ने लोकसभा में बीते शुक्रवार को सूचना का अधिकार संशोधन विधेयक 2019 पेश किया. विधेयक को नौ के मुकाबले 224 मतों से पेश करने की अनुमति दी गयी. विधेयक में यह उपबंध किया गया है कि मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्तों तथा राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं राज्य सूचना आयुक्तों के वेतन , भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन एवं शर्ते केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाएंगे.

मूल कानून के अनुसार अभी मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का वेतन मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं निर्वाचन आयुक्तों के बराबर है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम ,2005 में संशोधन करने वाले इस विधेयक को पेश किया. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के सवाल पर मोदी सरकार की प्रतिबद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है. उन्होंने जोर दिया कि सरकार अधिकतम सुशासन , न्यूनतम सरकार के सिद्धांत के आधार पर काम करती है. विधेयक के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि इसका मकसद आरटीआई अधिनियम को संस्थागत स्वरूप प्रदान करना, व्यवस्थित बनाना तथा परिणामोन्मुखी बनाना है. हालांकि दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता आरटीआई कानून में संशोधन के प्रयासों की आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे देश में यह पारदर्शिता पैनल कमजोर होगा.

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निधन, कई दिनों से चल रही थीं बीमार

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का शनिवार को 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं. शीला दीक्षित को आज सुबह बीमार होने के चलते एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज दोपहर उन्होंने अंतिम सांस ली. शीला दीक्षित वर्तमान समय में दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष थीं.

निजी जीवन और राजनीतिक सफर

शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 में कपूरथला, पंजाब में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के जीसस एंड मेरी स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से प्राप्त की.

उनका विवाह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (आईएएस) विनोद दीक्षित से हुआ था. विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे. शीला दीक्षित के दो संताने हैं. उनके पुत्र संदीप दीक्षित भी सांसद रह चुके हैं.

शीला दीक्षित पहली बार यूपी के कन्नौज से 1984 में सांसद बनीं. इसके बाद वह 1989 में कन्नौज से सांसद रहीं. सांसद रहते हुए उन्होंने लोक सभा की एस्टीमेट कमेटी के लिए सेवाएं दी थीं.

शीला दीक्षित तीन बार(1998-2013) दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. वे दिल्ली की दूसरी महिला मुख्यमंत्री थीं. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित को कांगेस पार्टी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार घोषित किया गया.

क्या भारत के ‘भद्रलोक’ को नहीं पच रही है हिमा दास और दुति चंद की सफलता

  • 2 जुलाई, 2019, एथलेटिक्स ग्रांप्री, पोलैंड, 200 मीटर, विजेताः- हिमा दास (भारत)
  • 7 जुलाई, 2019, एथलेटिक्स मीट, कुत्नो, पोलैंड, 200 मीटर, विजेताः- हिमा दास (भारत)
  • 13 जुलाई, 2019, एथलेटिक्स मीट, क्लाइनो, चेक रिपब्लिक, 200 मीटर, विजेताः- हिमा दास (भारत)
  • 17 जुलाई 2019, एथलेटिक्स मीट, टाबोर, चेक रिपब्लिक, 200 मीटर, विजेताः- हिमा दास (भारत)

ये उस बेटी की उपलब्धियां हैं, जो भारत की है. असम के सुदूर गांव में धान के खेतों से निकल कर अंतरराष्ट्रीय मैदान पर फर्राटा भरने वाली हिमा दास की गिनती आज अंतरराष्ट्रीय एथलीट के तौर पर होती है. लेकिन दुनिया को चौंकाने वाली यही हिमा दास अपने देश के तमाम लोगों के दिलों में जगह नहीं बना पाई है. क्योंकि बीते पंद्रह दिनों में विदेशी धरती पर सबको पछाड़ते हुए एक के बाद एक चार गोल्ड मेडल हासिल करने वाली हिमा दास की उपलब्धियों पर देश में कोई शोर नहीं है.

न देश की बेटी की इस शानदार उपलब्धि पर 24 घंटे के चैनल चिल्ला रहे हैं और न ही सोशल मीडिया पर ही कोई बड़ा उबाल है. बात-बात पर ट्विट करने वाले देश के कद्दावर नेता भी नदारद हैं. देश में न तो हिमा दास के जीत की बहुत चर्चा है और न ही उनके उस बड़े कदम की जिसने हिमा के कद को और बढ़ा दिया है. दरअसल हिमा ने अपने राज्य असम में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए अपनी आधी सैलरी दान में दे दी है, जो उसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से मिलती है. खुद मुफलिसी से निकली हिमा जानती है कि आपदा की मार सबसे ज्यादा गरीबों को पड़ती है.

हिमा बीते साल जुलाई में तब अचानक से सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने फिनलैंड में वर्ल्ड अंडर 20 चैम्पियनशिप की महिलाओं की 400 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया भर में तहलका मचा दिया था. बावजूद इसके 15 दिन के भीतर चार सवर्ण पदकों की उनकी धमक क्रिकेट के शोर और समाज की सोच के भीतर दब गई.

ऐसा सिर्फ हिमा दास के साथ ही नहीं हुआ. बल्कि एक और खिलाड़ी थी, जिसने इस दर्द को महसूस किया होगा. यह बात 9 जुलाई की है. भारत की स्टार धावक दुती चंद ने इटली में चल रहे वर्ल्ड यूनिवर्सियाड में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था. दुती चंद ने 100 मीटर की दौड़ को 11.32 सेकेंड में पूरा कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया था. यह महज एक जीत भर नहीं थी, बल्कि उससे कहीं ज्यादा थी क्योंकि वर्ल्ड यूनिवर्सियाड में यह कारनामा दुती चंद के पहले कोई भी महिला खिलाड़ी नहीं कर पाई थी. भारतीय पुरुषों में भी 2015 में सिर्फ शॉटपुट के खिलाड़ी इंद्रजीत सिंह यह उपलब्धि हासिल कर पाए थे. हिमा दास का बाद दुती ऐसी दूसरी भारतीय महिला एथलीट हैं जिसने किसी भी वैश्विक टूर्नामेंट में गोल्ड जीता था.

इटली से आई इस शानदार खबर के बावजूद भारतीय लोगों में कोई सुगबुगाहट देखने को नहीं मिली. क्योंकि तकरीबन हर कोई दूसरे दिन 10 जुलाई को होने वाले भारत-न्यूजीलैंड वर्ल्ड कप क्रिकेट के सेमीफाइनल की चिंता में डूबा था. दुति चंद की यह उपेक्षा तब थी, जब यूनिवर्सियाड को ओलंपिक के बाद दुनिया का सबसे बड़ा टूर्नामेंट माना जाता है और इसमें 150 देशों के खिलाड़ी शामिल होने आते हैं.

इन दोनों खिलाड़ियों की जीत पर उपेक्षा सरीखी चुप्पी सवाल उठाती है. एक बात यह भी आ रही है कि उनकी जीत क्रिकेट के शोर में दब गई. लेकिन यह पूरा सच नहीं है. सवाल उठता है कि क्या हिमा दास और दुति चंद की पृष्ठभूमि देश के भद्र लोगों को उनकी तारीफ करने से रोकती है. क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने के बावजूद मुक्केबाज मैरीकॉम, शूटर राज्यवर्धन सिंह राठौर, शटलर साईना नेहवाल और पी.वी संधु से प्रसिद्धी में पीछे नजर नहीं आती.

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ससुराल जा रहे दलित युवक को पहले चोर समझकर पीटा

बाराबंकी में एक दलित युवक को पेट्रोल डालकर जलाने का मामला सामने आया है. ग्रामीणों ने चोरी के शक में इस घटना को अंजाम दिया. आरोपियों पर हत्या की कोशिश और एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. दरअसल कुत्तों से बचकर भाग रहे एक युवक को ग्रामीणों ने चोर समझकर पीट दिया, फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. इससे उसके कमर के नीचे का हिस्सा झुलस गया. पुलिस ने इस मामले में दो नामजद सहित चार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. घायल युवक का उपचार लखनऊ में चल रहा है.

देवा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम तिंदोला निवासी सुजीत गौतम बीती रात करीब डेढ़ बजे टाई कला गांव में स्थित अपनी ससुराल जा रहा था. राघवपुरवा गांव के बाहर कुत्तों ने उसे दौड़ा लिया. वह भाग कर गांव के अंदर पहुंचा तो गांव वालों ने चोर समझकर उसको पीटना शुरू कर दिया. इस दौरान पेशे से पेंटर सुजीत ने गांव वालों को अपनी पहचान बतायी मगर उनकी यातनाएं कम नहीं हुईं. गांव वालों ने सुजीत को बिजली के करंट के झटके भी लगाए. पीटने के बाद गांव के चार लोगों ने सुजीत पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.

जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया है. पीड़ित की पत्नी पूनम की तहरीर पर पुलिस ने उमेश यादव, श्रवण यादव समेत चार लोगों पर हत्या की कोशिश और एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है.

राजधानी लखनऊ में अपने भाई का इलाज करा रही सुजीत की बहन ने बताया कि उसके भाई और भाभी के बीच झगड़ा हुआ था. झगड़े के बाद उनकी भाभी अपने मायके चली गयी थी. रात के समय उनका भाई सुजीत ससुराल से अपनी पत्नी को लेने जा रहा था. तभी रास्ते में कुछ लोगों उसके भाई पर हमला कर दिया उन्हें मारा पीटा और बिजली के करंट के झटके लगाए. फिर उनके शरीर पर तेल डाल कर आग लगा दी. अब उनका भाई जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है.

सुजीत की पत्नी पूनम ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कहा कि उनका पति देर रात आ रहा था, तभी रास्ते में उसे चोर समझकर लोगों ने बड़ी बेरहमी से मारा-पीटा. बिजली का भी करंट लगाया और फिर तेल डाल कर आग के हवाले कर दिया.

इस मामले में बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बताया, ‘देर रात एक युवक जा रहा था, तभी उसे कुछ ग्रामीणों ने चोर समझकर मारा पीटा और जला दिया. पीड़ित को इलाज के लिए लखनऊ में भर्ती कराया गया है. इस मामले में दोषियों के खिलाफ हत्या की कोशिश और एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है. जल्दी ही बाकी दोषियों को भी गिरफ्तार करके उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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सपा-बसपा के कुछ राज्यसभा सांसद BJP में जाने को तैयार!

आने वाले कुछ दिनों में समाजवादी पार्टी को और भी कई बड़े झटके लग सकते हैं. समाजवादी पार्टी के कुछ और राज्यसभा सांसद भाजपा में जाने की तैयारी में हैं. यह सांसद भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं. अगर बात बन गई तो यह सांसद अपनी सदस्यता छोड़ कर भाजपा का दामन थाम सकते हैं. इनमें एक सांसद तो बुंदेलखंड क्षेत्र से हैं तो दूसरे मध्य यूपी से आते हैं. बसपा के कुछ सांसद भी भाजपा के प्रभाव में हैं.

असल में नीरज शेखर के सपा छोड़कर भाजपा में जाने के बाद पार्टी के दूसरे सांसदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं. वैसे तो अमर सिंह भी सपा से राज्यसभा सदस्य हैं लेकिन वह सपा छोड़ चुके हैं. अमर सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खासी तारीफ कर अपना सियासी झुकाव जाहिर कर चुके हैं.

उधर बसपा के दो सांसद भी भाजपा के संपर्क में हैं. भाजपा इनसे भी इस्तीफा दिलवा कर सीट रिक्त कराएगी. इस तरह भाजपा राज्यसभा में बहुमत के और करीब हो जाएगी. वैसे भी रिक्त सीटों पर उपचुनाव होने पर भाजपा को ज्यादा फायदा होगा. रणनीति के तौर पर रिक्त सीटों पर एक साथ चुनाव न होकर अलग अलग चुनाव होने पर भाजपा के लिए ज्यादा बेहतर स्थिति होगी.

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Noida Metro में निकली भर्तियां

नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने स्टेशन कंट्रोलर / ट्रेन ऑपरेटर, कस्टमर रिलेशन असिस्टेंट, जूनियर इंजीनियर, मेंटेनर, एकाउंट्स असिस्टेंट, ऑफिस असिस्टेंट समेत अन्य कई पदों पर आवेदन मांगे हैं. वे उम्मीदवार जो इन पदों पर आवेदन करने के लिए इच्छुक हैं, आज ही आधिकारिक वेबसाइट विजिट करें. आप इस खबर में आगे दी गई लिंक से भी अधिसूचना डाउनलोड कर सकते हैं. जरूरी जानकारी से अवगत होकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें.

पदों का विवरण :

पदों का नाम                                               पदों की संख्या स्टेशन कंट्रोलर / ट्रेन ऑपरेटर                                  09 कस्टमर रिलेशन असिस्टेंट                                      16 जूनियर इंजीनियर / इलेक्ट्रिकल                                12 जूनियर इंजीनियर / मैकेनिकल                                 04 जूनियर इंजीनियर / इलेक्ट्रानिक्स                              15 जूनियर इंजीनियर / सिविल                                     04 मेंटेनर / फिटर                                                    09 मेंटेनर / इलेक्ट्रीशियन                                           29 मेंटेनर / इलेक्ट्रोनिक और मैकेनिक                             90 मेंटेनर / रेफरी और एसी मैकेनिक                               07 एकाउंट्स असिस्टेंट                                               03 ऑफिस असिस्टेंट                                                 01              कुल पदों की संख्या                                              199

महत्वपूर्ण तिथि : ऑनलाइन आवेदन जमा करने की प्रारंभिक तिथि : 22 जुलाई, 2019 ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि : 21 अगस्त, 2019 शुल्क का भुगतान करने की तिथि : 22 जुलाई से 21 अगस्त, 2019 तक

आयु सीमा : उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 32 वर्ष तक नियमानुसार निर्धारित है.

शैक्षिक योग्यता : उम्मीदवारों की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान / विश्वविद्यालय से स्नातक / संबंधित विषयों के साथ डिग्री या डिप्लोमा होना आवश्यक है. शैक्षिक योग्यता से संबंधित अधिक जानकारी के लिए नोटिफिकेशन पढ़ें.

आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.nmrcnoida.com या www.becil.com के माध्यम से 22 जुलाई, 2019 से 21 अगस्त, 2019 तक ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं.

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भाई पर आयकर विभाग के एक्शन से भड़कीं मायावती, कहा- सबकी जांच कराए सरकार

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भाई और पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार पर आयकर विभाग की छापेमारी को राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करार दिया है. मायावती ने शुक्रवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की मोदी सरकार पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया.

मायावती ने कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले बीजेपी को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए. बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि अगर वे सोचते हैं कि वे बहुत ईमानदार हैं तो इसकी जांच होनी चाहिए कि राजनीति में आने से पहले उनके (बीजेपी नेताओं) परिवार की संपत्ति कितनी थी और वह संपत्ति अब कितनी है?

अपने भाई आनंद की बेनामी संपत्ति जब्त होने पर मायावती ने मोदी सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि शोषितों वंचितों के आगे बढ़ने इन्हें तकलीक होती है. खुद को हरिशचंद्र मानने वाली बीजेपी बताए चुनाव के वक्त उनके पास 2 हजार करोड़ रुपये कहां से आए, ये बेनामी संपत्ति नहीं?

मायावती ने कहा कि मोदी-शाह की कंपनी से मेरा सवाल कि दफ्तर बनाने के लिए अरबों खरबों रुपये कहां से आए, क्या ये बेनामी नहीं? मायावती ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने वोट खरीद कर और ईवीएम के इस्तेमाल से सत्ता हासिल की है.

उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता राजनीति में आने से पहले और अब की मौजूदा संपत्ति का आंकड़ा दें. मायावती ने लोगों से अपील की कि मेरे भाई पर कार्रवाई से डरने की जरूरत नहीं, अपने कारोबार पर ध्यान दें. RSS-BJP की कंपनी से घबराने की जरूरत नहीं.

बीजेपी पर सीधे हमला करते हुए मायावती ने कहा कि बीजेपी को वंचितों को आगे बढ़ने से तकलीफ होती है. बीजेपी को अपनी ओर भी झांककर देखना चाहिए. चुनाव के दौरान 2000 करोड़ से ज्यादा बीजेपी के खाते में आए लेकिन इसका अब तक खुलासा नहीं हुआ. इसकी भी जांच होनी चाहिए.

बता दें कि आयकर विभाग ने मायावती के भाई और पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार के 400 करोड़ रुपये के एक बेनामी प्लॉट को जब्त किया है. यह प्लॉट दिल्ली से सटे नोएडा में है.

आयकर विभाग आनंद कुमार की संपत्ति की जांच कर रहा है. आयकर विभाग को इस जांच में पता चला कि आनंद कुमार के पास नोएडा में 28328 स्क्वायर मीटर का एक बेनामी प्लॉट है. सात एकड़ में फैले इस प्लॉट की कीमत करीब 400 करोड़ रुपये है.

आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता के इस बेनामी प्लॉट को जब्त करने का आदेश 16 जुलाई को विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) ने जारी किया था. इसके बाद 18 जुलाई को आयकर विभाग ने प्लॉट को जब्त कर लिया है.

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16 बार ना के बाद कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्‍सेस देने के लिए हुआ तैयार

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कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्‍तान को आखिरकार अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद झुकना पड़ा है. अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के भारत के पक्ष में फैसला सुनाने के लगभग 24 घंटे बाद ही पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार देर रात बयान जारी कर कुलभूषण जाधव के मामले में अपना रुख साफ कर दिया. इसमें पाक मंत्रालय ने कहा है कि वह अपने देश के कानून के अनुसार भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा और इसके लिए कार्यप्रणाली पर काम हो रहा है. पाक मंत्रालय की ओर से यह भी बताया गया है कि जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के तहत उनके अधिकारों से अवगत करा दिया गया है.

पाकिस्‍तान की ओर से सबसे पहले प्रधानमंत्री इमरान खान का बयान आया था. उन्‍होंने कहा था कि कानून के हिसाब से कुलभूषण के साथ व्‍यवहार किया जाएगा. इससे साफ हो गया था कि पाक अब अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के आगे ज्‍यादा टिक नहीं पाएगा. विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले के आधार पर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के अनुच्छेद 36 के पैराग्राफ 1(बी) के तहत उनके अधिकारों के बारे में सूचित कर दिया गया है. एक जिम्मेदार देश होने के नाते पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा, जिसके लिए कार्य प्रणालियों पर काम किया जा रहा है.’

बता दें कि लगातार 16 बार पाकिस्तान ने जाधव को राजनयिक पहुंच देने से भारत को इनकार किया था. पाक की सैन्‍य कोर्ट ने कुलभूषण को फांसी की सजा भी सुना दी थी. इसके बाद भारत अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट पहुंचा और फिर अंतराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है. गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनो सदनों में बयान दिया कि पाकिस्‍तान को जल्‍द से जल्‍द कुलभूषण को रिहा कर देना चाहिए. जयशंकर ने अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक फैसला बताते हुए पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह जाधव को रिहा करे और उन्हें वापस भारत भेजे. जयशंकर ने कहा कि जाधव ना सिर्फ पाकिस्तान की अवैध हिरासत में हैं बल्कि वहां की सैन्य अदालत ने उन्हें मनगढ़ंत आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के बाद पाकिस्तान जाधव को उनके अधिकारों के बारे में अवगत कराने और उन्हें कॉन्सुलर सुविधा प्रदान करने के लिए बाध्य है.

जानिए क्‍या है वियना संधि विश्व युद्ध के बाद से दुनिया का माहौल बिगड़ा हुआ था. इसके बाद अंतरारष्ट्रीय स्तर पर शांति के प्रयास शुरू हुए. इसी प्रयास के तहत साल 1961 में पहली बार दुनिया के संप्रभु राष्ट्रों ने मिलकर यह संधि की. इसके ठीक दो साल बाद 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने ऐसी ही एक संधि की, जो ‘वियना कन्वेंशन ऑन कॉन्सुलर रिलेशंस’ के नाम से जानी जाती है. इसका ड्राफ्ट इंटरनेशनल लॉ कमीशन ने तैयार किया था. इसके एक साल बाद 1964 में इसे लागू कर दिया गया. भारत और पाकिस्तान समेत अब तक कुल 191 देश इस संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. वियना संधि का मुख्य काम है राजनयिकों को विशेष अधिकार देना. इस संधि के मुताबिक मेजबान देश अपने यहां रहने वाले दूसरे देशों के राजनयिकों को विशेष दर्जा देता है. इसके तहत किसी राजनयिक को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है, और ना ही उन्हें हिरासत में रखा जा सकता है. किसी राजनयिक पर टैक्स भी नहीं लगता है. यहां तक कि मेजबान देश किसी देश के दूतावास में भी नहीं घुस सकता. हालांकि, मेजबान को ही दूतावासों को सुरक्षा देनी पड़ती है. संधि के आर्टिकल 36 के अनुसार अगर कोई देश किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार करता है, तो संबंधित देश के दूतावास को तुरंत इसकी जानकारी देनी होगी.

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बिहार के छपरा में मॉब लिंचिंग, मवेशी चोरी के आरोप में 3 लोगों को पीटकर मार डाला

बिहार के सारण से भीड़तंत्र की गुंडागर्दी की खबर है. सारण जिले के बनियापुर इलाके में भीड़ ने शुक्रवार को तीन लोगों को पशु चोरी के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. मामले में पुलिस की जांच जारी है. बता दें कि गुरुवार को मध्य प्रदेश के नीमच में भी भीड़ ने बकरा चोरी के आरोप में तीन लोगों की बेरहमी से पिटाई कर दी थी.

मिली जानकारी के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने पशु चोरी के संदेह मात्र पर शुक्रवार की सुबह तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. बताया गया है कि स्थानीय लोगों को पशु होने की सूचना मिली. इसके बाद उन्होंने मामले में बिना कोई पुख्ता जानकारी जुटाए इन लोगों को बेहरमी से पीटना शुरू कर दिया जिससे उनकी मौत हो गई. इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी का माहौल है. वहीं मृतकों के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है.

दरअसल, नंदलाल टोला में बीती रात पिकअप से आकर पालतू पशु चोरी करने के आरोप में ग्रामीणों के हल्ला पर ग्रामीण एकत्रित हुए और इस दौरान तीन चोर ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गए जिनकी ग्रामीणों ने जमकर पिटाई की. चौथा चोर भागने में सफल रहा. ग्रामीणों ने पीकअप गाड़ी जब्त कर और घटना की सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए छपरा भेज दिया है और कई थाना की पुलिस घटनास्थल पर पहुंच मामले की जांच कर रही है.

बकरा चोरी के आरोपियों को भीड़ ने पीटा

इससे पहले 18 जुलाई यानी गुरुवार को मध्य प्रदेश के नीमच जिले में भीड़ का हिंसक रूप देखने को मिला था. यहां बकरा चोरी करने के आरोप में भीड़ ने तीन युवकों की जमकर पिटाई कर दी और उनकी मोटर साइकिल को आग के हवाले कर दिया. मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने चोरी करने वाले तीनों आरोपियों और मारपीट करने वाले 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिटी कोतवाली क्षेत्र में स्थित एक मंदिर में बुधवार को बकरा बंधा हुआ था. यहां से मोटर साइकिल सवार युवक जो बकरा खरीदी-बिक्री का काम करते हैं, वे उस बकरे को मोटर साइकिल पर रखकर ले जाने लगे. इसे देखकर लोग भड़क उठे और उन्होंने तीनों की जमकर पिटाई कर दी साथ ही उनकी मोटर साइकिल को भी आग के हवाले कर दिया.

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कुलभूषण जाधव केस में भारतीय वकील हरीश साल्वे ने पाकिस्तान के वकील की उड़ाई धज्जियां

नई दिल्‍ली। कुलभूषण जाधव के मामले में एक बार फिर भारत और पाकिस्‍तान के बीच का अंतर साफ देखने को मिला. भारतीय वकील हरीश साल्वे ने कुलभूषण जाधव का केस अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ने के लिए जहां फीस के रूप में सिर्फ एक रुपया लिया, वहीं पाकिस्तान ने जाधव को जासूस साबित करने के लिए अपने वकील पर 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर दिए. हालांकि, इसके बावजूद भी भारत के पक्ष में आया और पाकिस्‍तान को मुंह की खानी पड़ी. एक रुपये की फीस वाले हरीश साल्‍वे ने पाकिस्‍तान के 20 करोड़ रुपये के वकील खावर कुरैशी को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में हर मोर्चे पर मात दी.

आइसीजे में कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान को मिली करारी मात के बाद सोशल मीडिया पर वकील हरीश साल्वे की जमकर तारीफ हो रही है. बता दें कि पाकिस्तान ने ICJ में जहां दो वकील बदले, वहीं साल्वे अकेले ही दोनों पर भारी पड़े और जाधव की फांसी रुकवाने में कामयाबी हासिल कर ली. पाकिस्‍तान की अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर इस हार को शायद ही प्रधानमंत्री इमरान खान पचा पाएं. दरअसल, हरीश साल्‍वे ने जहां जाधव के मामले को देश की प्रतिष्‍ठा और मान समझकर लड़ा, वहीं खावर कुरैशी ने सिर्फ इसे एक केस के रूप में लड़ा. शायद यही वजह रही कि कुरैशी को हर मोर्चे पर साल्‍वे ने पस्‍त कर दिया. आइसीजे ने 15-1 से भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है. जाधव की फांसी पर भी रोक लगा दी गई है.

वैसे बता दें कि हरीश साल्‍वे की गिनती देश के बड़े वकीलों में होती है. वह सुप्रीम कोर्ट के बड़े वकील हैं और उनका नाम देश के सबसे महंगे वकीलों में शुमार है. खबरों के मुताबिक, साल्‍वे की एक दिन की फीस करीब 35 लाख रुपये के लगभग है. इसके बावजूद उन्‍होंने जाधव का केस सिर्फ एक रुपये में लड़ा. साल्‍वे के पिता एनकेपी साल्वे पूर्व कांग्रेस सांसद और क्रिकेट प्रशासक थे. दूसरी, ओर कुरैशी की बात करें, तो कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से कानून में स्नातक वह आइसीजे में केस लड़ने वाले सबसे कम उम्र के वकील हैं. पाकिस्तान सरकार ने पिछले साल देश की संसद में बजट दस्तावेज पेश करते समय बताया था कि द हेग में अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाधव का केस लड़ने वाले वकील खावर कुरैशी को 20 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

पाकिस्‍तान अब अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के आदेश पर कितना अमल करता है, यह देखने वाली बात होगी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत के पास अपने आदेश को लागू करवाने के लिए सीधे कोई शक्ति नहीं होती. ऐसे में किसी देश को अगर लगता है कि दूसरे देश ने ICJ के आदेश की तामील नहीं की, तो वह इस पर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में गुहार लगा सकता है. इस पर फिर सुरक्षा परिषद उस आदेश को लागू करवाने के लिए उस देश के खिलाफ कदम उठा सकता है.

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UP में बेखौफ बदमाश, 2 पुलिसकर्मियों की हत्या कर 3 कैदी छुड़ाए

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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में सामूहिक हत्याकांड का बवाल अभी थमा भी नहीं कि संभल में बेखौफ बदमाशों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दे डाला. वहां कैदियों को ले जा रही पुलिस टीम पर बदमाशों ने हमला बोल दिया. पूरा इलाका गोलियों की आवाज़ से दहल गया. इस दौरान गोलीबारी के बीच हमलावर 3 कैदियों को छुड़ाकर ले गए. इस हमले में 2 पुलिसकर्मी शहीद हो गए.

सोनभद्र के बाद संभल में बदमाशों ने यूपी पुलिस को खुली चुनौती दे डाली. दरअसल, चंदौसी अदालत में पेशी के बाद कैदियों से भरी पुलिस वैन मुरादाबाद लौट रही थी. गाड़ी में हथियार बंद पुलिसकर्मी भी तैनात थे. जब पुलिस वैन संभल के थाना बनियाठेर क्षेत्र से होकर गुजर रही थी. तभी अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने वैन पर हमला बोल दिया.

बदमाशों ने कैदियों से भरी पुलिस वैन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. ये सबकुछ इतनी जल्दी में हुआ कि पुलिस वैन पर तैनात सुरक्षाकर्मी कुछ समझ भी नहीं पाए. हमले में 2 पुलिसकर्मियों को गोली लग गई. बेखौफ बदमाश इसी बीच तीन कैदियों को वैन से निकालकर साथ ले गए.

गोली लगने से घायल हुए दोनों पुलिसकर्मियों की बाद में मौत हो गई. तीन कैदियों को भगा ले जाने की वारदात से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. इलाके में सनसनी फैल गई. सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए. दोनों मृत पुलिसकर्मियों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं.

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. अब पुलिस फरार हुए कैदियों और बदमाशों की तलाश में जुट गई है. उधर, सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक सिपाहियों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का ऐलान किया है.

एक ही दिन में दो बड़ी वारदातों ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. हालांकि दोनों ही मामलों में पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है.

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मुसीबत में मायावती के भाई

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बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार मुसीबत में हैं. न्यूज 18 की एक खबर के मुताबिक आयकर विभाग ने कथित तौर पर आनंद कुमार की बेनामी संपत्ति के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा में 400 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है. बताया जा रहा है कि यह सम्पत्ति बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी की है. आयकर विभाग ने नोएडा में 28 हजार वर्ग मीटर की जमीन जब्त की है, जिसकी सरकारी कीमत 400 करोड़ है. जबकि मार्केट प्राइस में इसकी कीमत कई गुना और बढ़ जाएगी.

आनंद कुमार के खिलाफ बेनामी संपत्ती का मामला काफी पुराना है. इस मामले में 2017 में आयकर विभाग ने उनसे पूछताछ की थी. इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक आनंद कुमार ने दिल्ली के व्यवसायी एसके जैन के सहयोग से कई हजार करोड़ की बेनामी संपत्ती जुटाई थी. इस मामले में एसके जैन को बोगस कंपनी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया था. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2007 से 2012 के बीच आनंद कुमार की नेटवर्थ 7.5 करोड़ रुपए से बढ़कर 1316 करोड़ रुपए हो गई यानि की पांच साल में उनके नेटवर्थ में 1300 करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई.

बेनामी संपत्ति जब्त होने के बाद अब आने वाले दिनों में बसपा के उपाध्यक्ष आनंद कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती है. खबर है कि इनकम टैक्स विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कार्रवाई के तैयारी में हैं. इस मामले में ईडी मनी लांड्रिंग मामले में केस दर्ज किया था.

बसपा प्रमुख मायावती ने हाल ही में भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था. आनंद कुमार के इस पद पर जाने के कुछ ही महीनों बाद जिस तरह उनकी फाइल खुलने लगी है, वह बसपा के लिए एक झटका है. हालांकि ऐसा नहीं है कि सत्ता में आने के बाद सिर्फ बसपा नेताओं की संपत्ति ही बढ़ी है, बल्कि कई सांसदों की संपत्ति में भी कई गुणा इजाफा होने की बात भी सामने आते रही है. पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की संपत्ति में भी कई गुणा बढ़ोतरी को लेकर काफी विवाद हुआ था, हालांकि भाजपा के सत्ता में होने के कारण उसकी कोई जांच नहीं हुई थी. अब जबकि आनंद कुमार का नाम सामने आया है, देखना होगा कि बसपा अध्यक्ष मायावती पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अपने भाई आनंद कुमार के मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं.

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जाने T20 World Cup 2020 का Full Schedule

नई दिल्ली। T20 World Cup 2020 का Full Schedule सामने आ गया है. ICC के मुताबिक अभी कुछ टीम इसके लिए क्वालीफाई करने वाली हैं. टी20 वर्ल्ड कप 2020 की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया करेगी. उधर, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीम कम रैंकिंग के चलते सीधे क्वालीफाई करने में नाकाम रही हैं. जिसके चलते इन दो एशियाई टीमों को सुपर-12 में जगह बनाने के लिए ग्रुप स्टेज में मुकाबले जीतने होंगे.

इस टी20 वर्ल्ड कप के लिए जिन टीमों को सीधे क्वालीफाई करने का मौका मिला है, उनमें मेजबान ऑस्ट्रेलिया के अलावा भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और अफगानिस्तान की टीम का नाम शामिल हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें, किसी भी वर्ल्ड कप में मेजबान टीम सीधे क्वालीफाई करती है, जबकि बाकी टीमें रैंकिंग और क्वालीफायर जीतने के आधार पर वर्ल्ड कप में हिस्सा लेती हैं.

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल द्वारा हाल ही में जारी किए मेंस टी20 विश्व कप 2020 के शेड्यूल के मुताबिक ये वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया में 18 अक्टूबर से शुरू होगा जो करीब एक महीने तक चलेगी. टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में 15 नवंबर को खेला जाएगा. वहीं, टीम इंडिया इस वर्ल्ड कप में अपना आगाज मैच 24 अक्टूबर को साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेलेगी.

T20 World Cup 2020 का पूरा शेड्यूल

पहला राउंड

18 अक्टूबर 2020

श्रीलंका बनाम क्वालीफायर ए 3 (साइमंड्स स्टेडियम)

क्वालीफायर ए 2 बनाम क्वालीफायर ए 4 (साइमंड्स स्टेडियम)

19 अक्टूबर 2020

बांग्लादेश बनाम क्वालीफायर बी 3 (होबर्ट)

क्वालीफायर बी 2 बनाम क्वालीफायर बी 4 (होबर्ट)

20 अक्टूबर 2020

क्वालीफायर ए 3 बनाम क्वालीफायर ए 4 (साइमंड्स स्टेडियम)

श्रीलंका बनाम क्वालीफायर ए 2 (साइमंड्स स्टेडियम)

21 अक्टूबर 2020

क्वालीफायर बी 3 बनाम क्वालीफायर बी 4 (होबर्ट)

बांग्लादेश बनाम क्वालीफायर बी 2 (होबर्ट)

22 अक्टूबर 2020

क्वालीफायर ए 2 बनाम क्वालीफायर ए 3 (साइमंड्स स्टेडियम)

श्रीलंका बनाम क्वालीफायर ए 4 (साइमंड्स स्टेडियम)

23 अक्टूबर 2020

क्वालीफायर बी 2 बनाम क्वालीफायर बी 3 (होबर्ट)

बांग्लादेश बाम क्वालीफायर बी 4 (होबर्ट)

सुपर 12

24 अक्टूबर 2020

ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका (पर्थ स्टेडियम)

25 अक्टूबर 2020

न्यूजीलैंड बनाम वेस्टइंडीज (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

क्वालिफायर 1 बनाम क्वालिफायर 2 (बेलेरिव)

26 अक्टूबर 2020

अफगानिस्तान बनाम क्वालिफायर ए 2 (पर्थ स्टेडियम)

इंग्लैंड बनाम क्वालिफायर बी 1 (पर्थ स्टेडियम)

27 अक्टूबर 2020

न्यूजीलैंड बनाम क्वालिफायर बी 2 (बेलेरिव)

28 अक्टूबर 2020

अफगानिस्तान बनाम क्वालिफायर बी 1 (पर्थ स्टेडियम)

ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्टइंडीज (पर्थ स्टेडियम)

29 अक्टूबर 2020

भारत बनाम क्वालिफायर ए 2 (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

पाकिस्तान बनाम क्वालिफायर ए 1 (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

30 अक्टूबर 2020

इंग्लैंड बनाम दक्षिण अफ्रीका (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

वेस्टइंडीज बनाम क्वालिफायर बी 2 (पर्थ स्टेडियम)

31 अक्टूबर 2020

पाकिस्तान बनाम न्यूजीलैंड (गाबा)

ऑस्ट्रेलिया बनाम क्वालिफायर ए 1 (गाबा)

1 नवंबर 2020

भारत बनाम इंग्लैंड (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

दक्षिण अफ्रीका बनाम अफगानिस्तान (एडिलेड)

2 नवंबर 2020

क्वालिफायर ए 2 बनाम क्वालिफायर बी 1 (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

न्यूजीलैंड बनाम क्वालिफायर ए 1 (गाबा)

3 नवंबर 2020

पाकिस्तान बनाम वेस्टइंडीज (एडिलेड)

ऑस्ट्रेलिया बनाम क्वालिफायर बी 2 (एडिलेड)

4 नवंबर 2020

इंग्लैंड बनाम अफगानिस्तान (गाबा)

5 नवंबर 2020

दक्षिण अफ्रीका बनाम क्वालिफायर ए 2 (एडिलेड)

भारत बनाम क्वालिफायर बी 1 (एडिलेड)

6 नवंबर 2020

पाकिस्तान बनाम क्वालिफायर बी 2 (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

7 नवंबर 2020

वेस्टइंडीज बनाम क्वालिफायर ए 1 (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

इंग्लैंड बनाम क्वालिफायर ए 2 (एडिलेड)

8 नवंबर 2020

दक्षिण अफ्रीका बनाम क्वालिफायर बी 1 (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

भारत बनाम अफगानिस्तान (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

T20 वर्ल्ड कप 2020 सेमीफाइनल्स

11 नवंबर 2020 – पहला सेमीफाइनल (सिडनी क्रिकेट ग्राउंड)

12 नवंबर 2020 – पहला सेमीफाइनल (एडिलेड)

T20 वर्ल्ड कप 2020 फाइनल

15 नवंबर 2020– फाइनल (मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड)

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बहुजन समाज का बहुसंख्यक वर्ग मीडिया की ताकत से अंजान क्यों ?

आज मीडिया (प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक, अखबार, पत्र, पत्रिकाएं, टीवी चैनल, फेसबुक, सोशल मीडिया आदि) की ताकत एटम बम से भी घातक सिद्ध हो चुकि है। डॉ अंबेडकर साहब भी मीडिया की ताकत को भलीभांति समझते थे। डॉ अंबेडकर साहब द्वारा अपने अछूत वर्ग के लोगों के लिए किए जा रहे कार्यों की खबर को भारतीय मीडिया नहीं छापता था। इसीलिए बाबा साहब को अपनी आवाज अपने लोगों तक पहुँचाने के लिए अखबार निकालने पड़े। गांधी जी को प्रख्यात करने और राष्ट्रपिता जैसी अधोषित उपाधि से जन सामान्य में पहचान दिलाने में हिन्दुवादि मीडिया कि अहम भुमिका थी।

मीडिया आज के दौर और भी ताकतवर बनकर उभर रहा है। आज कोई भी राजनीतिक दल मीडिया की मदद के बिना सरकार बना ही नहीं सकता। बहुजन समाज को धार्मिक आडंबरों के चकाचौंध में दिग्भ्रमित करने का काम मीडिया ही करता है। अगर व्यक्ति के पास ज्ञान है, मिशनरी लोग हैं, समाजोत्थान के लिए काम करने वाली संस्थाएं/ संगठन है, लेकिन उनकी बातों, कार्यों की जानकारी समुदाय के लोगों तक पहुंचाने, समझाने के लिए मीडिया नहीं है तो यह समय असमय ही सांसे तोड़ देती हैं।

हमारे अपने इतिहास, महापुरुषों की जानकारी को मनुवादी मीडिया हम तक क्यों पहुंचाएगा? सोचो तो सही?

डॉ अंबेडकर की मेहरबानी से बहुजन समाज का बहुत बड़ा तबका शिक्षित बन रहा है। अभी केवल शिक्षित बना है, लिखने से तो अभी भी बहुत दूर है। जब तक आप अपनी बात लिखोगे नहीं तो अपनी शिक्षा और ज्ञान का दायरा संकुचित ही रहेगा। आजकल अधिकतर युवा वर्ग सोशल मीडिया पर किसी लिखी पोस्ट शेयर कर देता है या फिर ‘जय भीम’ लिखता है या कोई स्माइली कॉपी पेस्ट कर देता है। अपने विचारों की अभिव्यक्ति लिख कर नहीं करता इस पर ध्यान देना होगा।

हमारा शिक्षित वर्ग मीडिया की ताकत को समझने भी लगा है, लेकिन दुख यह है कि वह अपनी स्वयं की भूमिका नहीं निभा रहा है। बहुजन समाज का बहुसंख्यक वर्ग यह गलत फहमी पाले बैठा है कि मनुवादी मीडिया हमारी बातों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेगा।

जब तक हम हमारा अपना मीडिया तैयार नहीं करेंगे जो आर्थिक संघर्ष से छोटे मोटे अखबारों का प्रकाशन कर रहे हैं उनको सपोर्ट नहीं करेंगे तो हम रेंगते हुए ही विकास करेंगे।

हमारे अपने अधिकतर विशेष विशेषज्ञ उच्च पदों पर विराजमान प्रशासनिक अधिकारी बहुजन समाज के प्लेटफार्म पर लेखन नहीं कर रहे हैं। जबकि मनुवादी अधिकारी अपनी लेखनी अपने वर्ग के लिए चला रहे हैं। हमारे अधिकतर उच्च अधिकारी तो सोशल मीडिया पर अपनी फोटो, माला पहने हुए या फिर मनुवादी त्यौहार पर बधाई और शुभकामनाएं देने तक सीमित है। आर्थिक सहयोग भी मनुवादी मीडिया को ही करते देखे गये हैं।

हमें लिखना होगा हमारी आवाज को हमारे लोगों तक पहुंचाना होगा, केवल जय भीम, जय भीम लिखने से उद्देश्य हल नहीं होगा। बाबा साहब ने कहा था कि Pay back to society करना है। इसका मतलब में तन-मन-धन से समाज के लिए योगदान देना है।

हमारे अपने सामाजिक समाचार पत्र हर घर-घर आनी ही चाहिए। क्या आपने अपने घर पर समाजिक समाचार पत्र आता है?

हमें “अपना मीडिया अपनी आवाज” के लिए काम करना ही होगा। यह बोलना बंद करना होगा कि हमारी खबर मनुवादी मीडिया छापता ही नहीं है। अपना मीडिया स्वयं तैयार करो। वक्त की आवाज है। हमारे महापुरुषों इतिहास, संविधान की जानकारी, अपने आधिकारिक, शैक्षणिक जानकारी आदि को लिख-लिख कर अपने सामाजिक समाचार पत्र में प्रकाशित करो। पुस्तकों को प्रकाशित करो। ढोलक-मंजीरे पीटन, प्राण प्रतिष्ठा करने से, जागरण, भंडारा करने से कुछ नहीं होगा। जागरण शिक्षा का करना होगा।

बहुजन समाज के बहुसंख्यक वर्ग जब अपने मीडिया की ताकत के साथ खड़ा हो गया तो फिर बाबा साहब की उंगली के इशारे का टारगेट क्रेक करने में देर नहीं लगेगा। हाँ यह भी काफी हद तक सही है कि हमारे कुछ लोग सामाजिक समाचार पत्र/ अखबार के नाम से हमारे लोगों से पैसा लेकर चंपत हो जाते हैं। इसका प्रभाव मिशनरी संपादकों पर पड़ता है। कोई बात नहीं जो भाग जाते हैं वे भी अपने ही हैं। समाज में सभी तरह के लोग हैं। उनकी भी कुछ परिस्थिति रहती हैं। उनको आत्मग्लानि तो होती ही है। खूब लिखो खूब लिखो बहुजन की ताकत के लिए लिखो।

एक सुझाव:- बहुजन समाज (दलित वर्ग) के लोग जब भी कोई किसी प्रकार का समारोह/ कार्यक्रम/ सम्मान समारोह आदि आयोजित करें तो इनमें समाजिक समाचार पत्र के संपादक, पत्रकारों को आमंत्रित करें तथा कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति, सूचना अपने सामाजिक अखबार वालों को भी भिजवायें।

जागो जागो मीडिया की ताकत पहचानो।

“सामाजिक पत्र आएगा घर-घर गौरव संदेश लाएगा”’

डॉ गुलाब चन्द जिन्दल ‘मेघ’ इसे भी पढ़ें-एक पलंग, 4 लाशें, मौत का तरीका देखकर लोग कांप उठे

दलित पैंथर के सह संस्थापक राजा ढाले का निधन

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राजा ढाले

जाने-माने लेखक और दलित पैंथर के संस्थापकों में से एक राजा ढाले का आज (मंगलवार, 16 जुलाई) को उनके आवास पर निधन हो गया. पारिवारिक सूत्रों ने इस बात की जानकारी मीडिया को दी. वह 78 वर्ष के थे. परिवार के एक सदस्य ने बताया कि राजा ढाले रोज की तरह सुबह उठने के बाद टहलने के लिए निकले लेकिन वह घर में ही फर्श पर गिर पड़े. उन्हें तुरंत पास के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. राजा ढाले की बेटी गाथा ढाले फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) की नेता हैं.

महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले ढाले दलित पैंथर के सह-संस्थापकों में से एक थे. ये सभी लोग अमेरिका में अफ्रीकी अमेरिकियों के संगठन ब्लैक पैंथर से प्रभावित थे. इसके तर्ज पर ही इन्होंने अपनी पार्टी बनाई. अपने सामाजिक व्यक्तित्व और साहित्यिक कार्यों के लिए प्रसिद्ध राजा ढाले ने मुंबई उत्तर-पूर्व लोकसभा क्षेत्र से 1999 और 2004 लड़ा, हालांकि वह जीत नहीं सकें. सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ ही वह एक लेखक भी थे. उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों तथा विचारों को लेकर कई किताबें भी लिखी हैं. केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री और आरपीआई (ए) नेता रामदास अठावले ने राजा ढाले के निधन पर शोक जताया. ढाले का अंतिम संस्कार बुधवार को दादर के चैत्य भूमि में किया जाएगा.

स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ले रही है जान

मृतक लड़की वेदवती

आज गर्मियों की छुट्टियों के बाद कॉलेज आया तो एक दुःखद खबर मिली. जिस गांव में रहता हूँ उसके थोड़ी ऊपर जाकर दूसरे एक गांव में एक घर है जहाँ यह बालिका जिसका फ़ोटो यहाँ साझा कर रहा हूँ, (फेसबुक से साभार) इसका नाम वेदवती था. जी हाँ, ‘था’. क्योंकि यह 21 वर्षीय बच्ची अब इस दुनिया में नहीं है. यहां आकर पता चला कि 3 दिन पहले ही इसका आकस्मिक निधन हो गया. पेंटिंग का शौक रखने वाली यह बच्ची ग्राफिक एरा, देहरादून से पेंटिंग ऑनर्स में ग्रेजुएशन कर रही थी. इसकी पेंटिंग इसकी प्रोफाइल पर जाकर देखेंगे तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना बड़ा भावी कलाकर इसके भीतर छिपा था. कितनी प्रतिभा थी इस बच्ची में.

अब बात आती है इसमें खास बात क्या हुई, रोजाना ही यहाँ कोई न कोई दुनिया छोड़ जाता ही है. बिल्कुल सही सोच रहे हैं आप. जिस कारण इस बच्ची की मौत हुई उस कारण पर आपका ध्यान केंद्रित कराना इस पोस्ट का मकसद है. जहाँ मैं रहता हूँ वो उत्तराखंड का एक दुर्गम स्थान है जहाँ कोई मेडिकल फैसिलिटी नहीं है. अस्पताल के नाम पर 3-4 कमरों में चलने वाला एक आयुर्वेदिक हॉस्पिटल है, जो शाम 5 बजे बंद हो जाता है. ले देके एक छोटा सा मेडिकल स्टोर है जहाँ सभी दवाइयां मिलना असम्भव है. यदि इस क्षेत्र में कोई अच्छा अस्पताल होता तो आज यह बालिका हम सबके बीच होती.

हुआ यह कि इस बच्ची की तबियत रात 10 बजे खराब हुई, (स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे सांप ने काटा, किसी ने कहा ब्रेन हेम्ब्रेज हुआ, कुल मिलाकर वो अचानक फर्श पर गिर पड़ी) चूंकि यहाँ सबसे नजदीक बेहतर हॉस्पिटल ऋषिकेश एम्स है जो यहाँ से 90 किमी दूर है, बरसात के मौसम में 4 से 5 घण्टे में पहुंचा जाता है. जब तक इस बच्ची को हॉस्पिटल ले जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की गयी, उसे के जाया गया तो रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया, जिसकी पुष्टि एम्स के डॉक्टरो ने की. उन्होंने कहा थोड़ी देर पहले लाते तो शायद बच जाती, पर उन्हें कौन बताएं कि रात में यहाँ से ऋषिकेश पहुंचना बहुत मुश्किल है.

 टाइम से गाड़ी भी नहीं मिल पाती. और 108 तो कभी यहाँ आती ही नहीं. अब मुख्य प्रश्न यह हमारे सामने है कि यहाँ रहने वालों के साथ सबसे बड़ी समस्या यही है कि अचानक यदि किसी का स्वास्थ्य खराब हो जाये और वह भी रात को, तब अधिकांश केस में मरीज अपनी जान से चला जाता है. इसमें दोषी कौन है? इस बात के बजाए, ध्यान इस पर जाए कि किया क्या जाए? इस पोस्ट के माध्यम से उत्तराखंड सरकार से यही निवेदन है कि ऐसे दुर्गम स्थानों को चिन्हित कर एक बेहतर आधुनिक सुविधाओं से पूर्ण एक अस्पताल तो बनवाने की उचित कार्रवाई तुरन्त करें, और दूसरा 108 की 24 घण्टे व्यवस्था हर क्षेत्र में रहनी ही चाहिये, जिससे समय रहते मरीज को प्राथमिक चिकित्सा मिल सके और समय से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा सके.

यह आलेख सिर्फ मन की पीड़ा को साझा करना भर नहीं है, बल्कि लिखने का उद्देश्य यह भी है कि यह संदेश उत्तराखंड सरकार से लेकर केंद्र तक पहुंच सके. देश में हर व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए. यह देश के हर व्यक्ति का हक है. आखिर इस दिशा में सरकारें कब सोचेंगी?

 ‘स्मार्ट’ के नाम पर आउट डेटेड मीटर लगाने का खेल!

सांकेतिक फोटो
Written By- अजय कुमार, लखनऊ

वर्षों पहले अपने घरों में लगे बिजली के पुराने मीटर अब अतीत बनकर रह गए हैं. इस मीटर में एक लोहे की प्लेट लगी रहती थी वह प्लेट घूमती ओर उसी की रीडिंग के अनुसार आपका बिजली बिल निर्धारित किया जाता था. इस मीटर ने दशको ‘राज’ किया. हर आदमी आसानी से रीडिंग ले और देख सकता था. जमाना बदला और उसके बाद उन मीटरों का स्थान डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक मीटर ने लिया. इसको लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन दो-तीन सालों के भीतर ही बिजली विभाग को यह डिजिटल मीटर बेकार नजर आने लगे. अब इसे फिर एक बार बदला जा रहा है. अब मोदी सरकार आने वाले तीन सालो में देशभर में बिजली के सभी मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड में बदलने जा रही है. देश भर में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. इससे उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं है.

 प्रदेश का बिजली महकमा आजकल घर-घर ‘स्मार्ट मीटर’ लगाने का काम कर रहा है. इस मीटर की खूबियों का तो खूब प्रचार हो रहा है, लेकिन  इस मीटर की खामियों और पुरानी तकनीक की बातों को छुपाया जा रहा है. दरअसल, बिजली विभाग स्मार्ट मीटर बताकर घर-घर जो टू-जी और थ्री-जी टेक्नालॉजी वाले मीटर लगा रहा है. वह पुराने यानी आउट डेटेड हो चुके हैं. यूपी में कथित स्मार्ट मीटर लगाने का जिम्मा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ईईएसएल को सौंपा गया है. यह समझना जरूरी है कि विद्युत मंत्रालय ने एनटीपीसी लिमिटेड, पीएफसी, आरईसी और पावरग्रिड के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम बनाया था, जिसे ईईएसएल कहा जाता है. बल्ब-पंखे आदि बेचने के बाद इस कम्पनी के द्वारा थोक में खरीदे गए स्मार्ट मीटर को लगाने का काम उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में चल रहा है. बिजली विभाग का दावा है कि इससे बिजली चोरी रुकेगी, वितरण कंपनियों की कार्यकुशलता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को वास्तविक समय पर बिजली खपत की जानकारी मिलेगी.

  वहीं राज्य विद्युत नियामक आयोग इन स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं, जिसके चलते उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने की पावर कॉरपोरेशन की योजना अधर में नजर आ रही है. राज्य विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश में 2जी और 3जी टेक्नॉलजी के लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर पर स्टेटस रिपोर्ट पावर कॉरपोरेशन से मांगी थी. आयोग के चेयरमैन के निर्देश पर सचिव संजय कुमार सिंह ने पावर कॉरपोरेशन के एमडी से यह बताने को कहा है कि जब टू-जी और थ्री- जी टेक्नॉलजी बंद हो जाएगी, तब मीटर को अडवांस टेक्नॉलजी में बदलने पर कितना खर्च आएगा. आयोग ने पावर कॉरपोरेशन द्वारा खरीदे जा रहे मीटर मॉडम पर भी रिपोर्ट तलब की है.

  पावर कॉरपोरेशन द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल तो प्रत्यावेदन के आधार पर आयोग ने रिपोर्ट मांगी है. परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सवाल उठाया था कि जो तकनीक बंद हो रही है, उसके 40 लाख मीटर प्रदेश में क्यों लगवाए जा रहे हैं.

   उधर, ईईएसएल के अधिकारियों के अनुसार कंपनी ने उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए पिछले साल सार्वजनिक निविदा के जरिये ऐसे 40 लाख बिजली के स्मार्ट मीटर खरीदे थे, लेकिन ग्राहकों की संख्या इससे कहीं अधिक है. इसलिए अगले चरण में कंपनी जल्द ही ऐसे 50 लाख और मीटर खरीदने की योजना बना रही है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, इलाहबाद, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा जैसे शहरों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम आजकल तेजी से चल है.

सूत्र बताते हैं कि ईईएसएल बिजली वितरण कंपनियों से प्रति मीटर प्रति महीने 70 रुपए लेगी. वहीं वितरण कंपनियों को औसतन प्रति मीटर 200 रुपए का लाभ होने का अनुमान है. उत्तर प्रदेश में बिजली ‘रीडिंग’ पर 40 रुपए प्रति मीटर का खर्च आता है. वहीं बिल की कुशलता 75 से 80 प्रतिशत है. विश्लेषण से पता चलता है कि 30 प्रतिशत बिल गलत होते हैं. इससे उपभोक्ता और वितरण कंपनियों में विवाद होता है. एक अनुमान के अनुसार इसके कारण वितरण कंपनियों को प्रति मीटर 200 रुपए की लागत आती है. स्मार्ट मीटर लगने से बिजली वितरण कंपनियों को यह बचत होगी.

  कम्पनी का दावा है कि ‘स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को वास्तविक समय पर पता चलेगा कि वे कितनी बिजली की खपत कर रहे हैं. इसके अनुसार वे बिजली खपत को नियंत्रित कर सकते हैं. इससे कम बिजली खपत करने वाले उत्पादों की मांग बढ़ेगी और एक बहुत बड़ा बदलाव आएगा.

गौरतलब हो, ईईएसएल को स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एसएमएनपी) के तहत देश में 25 करोड़ परंपरागत मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाना है. एक और बात स्मार्ट मीटर लगाते समय यह दावा किया जा रहा है कि इस मीटर को लगाने की एवज में उपभोक्ताओं से कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है, उपभोक्ता का पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर फ्री में लगाया जा रहा है, साथ ही पांच साल तक मीटर में कोई गड़बड़ी होती है तो भी मीटर बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा. बताते चलें ईईएसएल ने ऐसे ही दावे एलईडी बल्ब बेचते समय भी किए थे.

 इस कम्पनी के माध्यम से पिछले तीन-चार सालों में पूरे देश में जो एलईडी बल्ब बेचे गए गए थे, वह कुछ महीनों बाद ही खराब होना शुरू हो गए. जब उपभोक्ता इन्हें बदलने के लिए पुहंचे तो इन्हें बेचने वाले नदारद थे. सभी जगहों पर ऐसी घटनाएं घटी. बहुत विवाद भी हुए लेकिन इस कम्पनी पर कुछ भी कार्यवाही नही हुई. इस कंपनी को देश भर में स्ट्रीट लाइट को एलईडी से बदलने का ठेका भी दिया गया जिसके सब कांट्रेक्ट उन्होंने ऐसे लोगो को दिए जो एक साल में ही शहर छोड़ कर भाग गए. यह कम्पनी सिर्फ एलईडी बल्ब तक ही सीमित नही है. लाखो पंखे इन्होंने खरीदे हैं और यहाँ तक कि डेढ़ टन के एसी भी हजारों की संख्या में इन्होंने खरीदे है लेकिन कही भी देखने मे नही आया कि बल्ब-पंखें आदि खरीद के बाद सर्विस की कोई व्यवस्था इस कम्पनी के पास रही हो. क्योंकि यह कम्पनी किसी तरह का उत्पादन ही नही करती है.

   वैसे सच तो यह है कि कोई चीज फ्री में नही लगाई जाती, फ्री में लगाने से पहले ही सारा केलकुलेशन बैठा लिया गया है कि पहले 6 महीने में ही आपका जो बिल बढ़ा हुआ आएगा उसी में यह राशि समायोजित कर दी जाएगी, ओर जिन घरों में यह मीटर लगाए गए हैं उन सभी घरों में जो बिल आए हैं उसमें सवा से डेढ़ गुनी अधिक खपत दिखाई दे रही है.खुले बाजार में फिलहाल सबसे सस्ता सिंगल फेज प्रीपेड बिजली मीटर अभी 8 हजार रुपये का मिल रहा है. हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाला मीटर खरीदने के लिए लोगों को 25 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं अब ये कम्पनी जो स्मार्ट मीटर लगा रही हैं उसमें किस तरह से आपसे पैसा वसूला जाएगा आप खुद ही सोच लीजिए.

   दूसरी ओर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिरकार यह मीटर सप्लाई कौन कर रहा है? कही न कही तो इनका उत्पादन किया जा रहा होगा? क्या विद्युत नियामक आयोग स्वतंत्र रूप से इन स्मार्ट मीटरों की जाँच करवा चुका है? क्योंकि सारा झोलझाल तो यही है. देश भर में इन स्मार्ट मीटर की आपूर्ति एनर्जी एफिशियेंसी सर्विसेज लिमिटेड ईईएसएल कर रहा है.

– लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।