अनु रानी ने भाला फेंक में जीता स्वर्ण

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गुंटूर। नेशनल रिकॉर्ड धारक अनु रानी ने राष्ट्रीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पहले दिन सोमवार को महिलाओं के भाला फेंक का स्वर्ण पदक जीता. अनु रानी ने 54.29 मी. तक भाला फेंका. हरियाणा की पूनम रानी (51.14 मी.) ने दूसरा और कर्नाटक की रश्मि शेट्टी (47.76 मी.) ने तीसरा स्थान हासिल किया.

महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज में चिंता यादव ने पहला स्थान हासिल किया. चिंता ने 10:10.22 से. का अपना सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज कराया. उत्तर प्रदेश की विजया लक्ष्मी (10:41.41 से.) दूसरे और महाराष्ट्र की वर्षा भवारी (10:48.37 से.) तीसरे स्थान पर रहीं. पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में तीनों पदक हरियाणा के एथलीटों ने जीते. जयवीर (8:53.04 से.) ने स्वर्ण, नवीन (8:57.23 से.) ने रजत और कर्मवीर (8:59.12 से.) ने कांस्य पदक जीता.

सौम्या बी ने महिलाओं की 20 किमी रेस वॉक का स्वर्ण जीता. सौम्या ने एक घंटा, 42:23.68 से. का समय निकाला. पंजाब की करमजीत कौर (एक घंटा, 44:47.69 से.) ने रजत, जबकि उत्तर प्रदेश की प्रियंका (एक घंटा, 45:44.28 से.) ने कांस्य जीता. केरल की एनवी शीना (12.78 मी.) ने महिलाओं की टिपल जंप का स्वर्ण जीता. रजत कर्नाटक की जायलिन एम लोबो (12.52 मी.) और कांस्य पदक आंध्र प्रदेश की जी कर्तिका (12.51 मी.) ने हासिल किया.

स्नैपडील को 95 करोड़ डॉलर में खरीदेगा फ्लिपकार्ट

snapdeal flipkar merge

नई दिल्ली। ऑनलाइन रिटेल मार्केट की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट ने स्नैपडील के साथ डील करने के लिए उसे अपनी नई पेशकश भेजी है. पुरानी पेशकश में संशोधन के साथ फ्लिपकार्ट अब स्नैपडील खरीदने के लिए 900 से 950 मिलियन डॉलर देने को तैयार है. यह रकम करीब 90 से 95 करोड़ डॉलर बैठेगी. यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है.

इस मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि बैंगलुरु स्थित फर्म ने स्नैपडील के ऑनलाइन मार्केटप्लेस और यूनिकॉटेम को खरीदने के लिए उक्त राशि का भुगतान करने की पेशकश की है. आपको बता दें कि साल 2015 में, स्नैपडील ने एक ई-कॉमर्स प्रबंधन सॉफ्टवेयर और पूर्ति समाधान प्रदाता यूनिकॉमर्स का अधिग्रहण किया था. हालांकि सूत्र ने अपने नाम का खुलासा न करने को कहा है कि क्योंकि इस डील पर अभी दोनों कंपनियों के बीच बातचीत जारी है. एक सूत्र ने बताया कि अब स्नैपडील का बोर्ड इस ऑफर पर विचार करेगा और संभवत: वह इसे स्वीकार भी कर ले.

गौरतलब है कि इससे पहले स्नैपडील ने इससे पहले 80 से 85 करोड़ डॉलर (करीब 5,500 करोड़ रुपये) में अधिग्रहण की फ्लिपकार्ट की पेशकश को ठुकरा दिया था. क्योंकि स्नैपडील के निदेशक मंडल का मानना था कि यह मूल्य कंपनी का सही मूल्यांकन नहीं करता है. बहरहाल, अब यदि स्नैपडील का निदेशक मंडल नई पेशकश को स्वीकार कर लेता है तो उसके बाद दोनों पक्ष बिक्री और खरीद समझौते पर बातचीत कर सकते हैं. बहरहाल, इसमें अभी कुछ सप्ताह का समय लग सकता है. फ्लिपकार्ट और स्नैपडील ने उन्हें इस संबंध में ई-मेल पर भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

डंडे में बांधकर ले जाना पड़ा महिला का शव 

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कटनी। एक तरफ सरकार डिजीटल इंडिया की बात करती है, भारत को बुलदियों पर पहुंचाने के लिए बड़ी बड़ी बातें करती है तो वहीं दूसरी और यातायत के शाधन न होने के कारण शव को डंडो में बांधकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाना पड़ रहा है.

यह मध्य प्रदेश के कटनी की है जहां के बरही थाने के एक गांव में आकाशीय बिजली गिरने से मौत  हो गयी थी. जिसके बाद महिला के शव को बांस के डंडे में कपड़े से बांधकर चार किलोमीटर तक पैदल पोस्टमार्टम के लिए लाना पड़ा. गांव से निकली महानदी पर पुल नहीं बना है. इस कारण बरसात के दिनों में गांव का सड़क मार्ग से संपर्क टूट जाता है और केवल नाव ही आने जाने का शाधन रहती है.

बरही थाने के खेरवा गांव की शांति बाई (55) , 16 जुलाई को अपनी बेटी से मिलने के लिए पिपरा गांव गई थी. इसी दौरान दोपहर करीब तीन बजे आकाशीय बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. मौत की सूचना मिलने के बाद उसके परिजन उसे शाम को पिपरा से खेरबा ले गए. रात होने के कारण पुलिस ने पोस्टमार्टम नहीं कराया और परिजन को सौंप दिया. सोमवार को पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों ने शव को बांस के डंडे से कपड़े में बांधा और चार किलोमीटर तक पैदल चलकर और फिर नाव से नदी पार करके पिपरा गांव लाए.

इसके बाद पुलिस अपने वाहन से महिला के शव को बरही अस्पताल लाई जहां उसका पोस्टमार्टम कराया गया है. वहां के थाना प्रभारी ने जानकारी देते हुए बताया कि खेरबा गांव में नदी पर पुल नहीं बना है जिस कारण वहां बरसात के दिनों में वाहनों का आवागमन बिल्कुल बंद हो जाता है जिसके कारण शव को खेरबा गांव से पिपरा गांव तक पैदल लाना पड़ा.

 

मायावती ने दिया राज्यसभा से इस्तीफा

  Mayawati resign

नई दिल्ली। मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया. वे ​सदन में ​अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाने से नाराज थीं. उन्होंने कहा था- ”अगर मैं सदन में दलितों के हितों की बात नहीं उठा सकती तो मेरे राज्यसभा में रहने पर लानत है. मैं अपने समाज की रक्षा नहीं कर पा रही हूं. अगर मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है तो मुझे सदन में रहने का अधिकार नहीं है. मैं सदन की सदस्यता से आज ही इस्तीफा दे रही हूं.’’इसके बाद मायावती राज्यसभा से बाहर चली गईं.

बसपा के सतीशचंद्र मिश्रा मायावती के साथ राज्यसभा से बाहर गए. इसके बाद बसपा के सदस्यों ने ‘दलितों की हत्याएं बंद करो’ के नारे लगाए. समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने भी उनका साथ दिया.उनके सपोर्ट में कांग्रेस और तृणमूल सांसदों ने भी वॉकआउट कर दिया. मायावती का समर्थन कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने सवाल किया?, ‘एक दलित नेता को बोलने का अधिकार नहीं है? उन्‍होंने हाउस में नोटिस देकर बात करने का प्रयास किया.’ दरअसल, मायावती को तीन मिनट का वक्त मिला था. उन्होंने सात मिनट लिए. इसके बाद उनकी उपसभापति से बहस हुई.

इससे पहले, राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान मायावती ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्‍हें वहां न तो सुना जा रहा है और न ही बोलने दिया जा रहा है इसलिए उन्‍होंने राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देने का फैसला किया है. मायावती ने कहा कि सहारनपुर में हिंसा को जातीय हिंसा का नाम दिया गया है, जबकि यह दलितों को डराने-धमकाने की कार्रवाई थी. इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने शोरगुल शुरू कर दिया.

मैला ढोने से मुक्ति दिलायेंगे बायो टॉयलेट

रानीखेत। भारत में मैला ढोने की प्रथा अभी भी कई राज्यों में जारी है जिसकी खबरें आए दिन सुनने को मिलती रहती हैं पर अब विदेशी तकनीक का सहारा लेकर बायो टॉयलट भारत में शुरू होने जा रहे हैं जिससे शहरों के गहरे, प्रदूषित सीवरों से भी मुक्ति मिल सकती है. जिसके लिए जापानी तकनीक से निर्मित बायो टॉयलेट मददगार साबित होंगे. जापान में फूजी की पहाड़ी व वियतनाम में सफल प्रयोग के बाद जापानी बायो टॉयलेट के फार्मूले की शुरूआत उत्तराखंड के कुमाऊं की पर्यटक नगरी रानीखेत से की जाएगी. खास बात यह भी कि इस तकनीक से मानव अपशिष्ट से जैविक खाद भी तैयार की जाएगी.

पर्यावरण व पानी बचाने की मुहिम में जुटी जापानी कंपनी सिवादेंको ने अपने देश में नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में इसी तकनीक से प्रभावी पहल की है. इस टॉयलेट का प्रयोग करने वाले शहर सीवरेज मुक्त हो जाएंगे. घंटा भर में मानव अपशिष्ट को जैविक खाद में बदलने वाले इस टॉयलेट के 70 प्रतिशत पार्ट्स भारत में बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया गया है ताकि लागत मूल्य कम होने से सामान्य व्यक्ति भी खरीद सकेगा. फिलहाल, बायो टॉयलेट की कीमत 30 हजार से 14 लाख रुपये तक है.

जानकारी देते हुए, रानीखेत के नैनी निवासी जापानी कंपनी के प्रतिनिधि कमल सिंह अधिकारी ने बताया, मॉडल के रूप में तीन जैविक टॉयलेट यहां लगाए जायेंगे जिसके लिए जमीन भी तलाश ली गई है. बता दें की इस टॉयलेट के कई फायदे होंगे जिसमें मैला ढोने से मुक्ति से साथ सीवरेज की जरूरत भी नहीं होगी. पिट गड्ढे नहीं बनेंगे तो पानी व भूमि भी प्रदूषित नहीं होगी जिसके साथ पानी की बचत भी होगी. गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने सरीखी परियोजनाओं में भारी भरकम बजट से भी मुक्ति मिलेगी.

ऐसे बनेगी जैविक खाद- 

इस तरह के बायो टॉयलेट में लकड़ी का बुरादा व धान की भूसी पड़ी होती है जिसको हीटर 50 डिग्री तक तापमान में बुरादे को जलाएगा जो मानव मल को भी जलाकर राख करेगा और खास उपकरण रोटरी की मदद से उसे जैविक खाद में बदलेगा. हीटर की गर्मी मल-अपशिष्ट में मौजूद बैक्टीरिया व अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों को खत्म कर देती है. ऐसे में जो उर्वरक तैयार होता है वह साफ सुथरा व कीटाणु मुक्त होता है. जिससे यह बायो टॉयलेट आय का जरिया भी है. खाद तैयार करने के लिए लकड़ी का बुरादा और चावल की भूसी (360 रुपया प्रति कुंतल) का इस्तेमाल होता है.

सौ किलो जैविक खाद बनाने में बमुश्किल सौ रुपये की ही लागत आती है, जबकि तैयार उर्वरक तीन से चार हजार रुपये में बिक सकता है. अबुधाबी, दुबई, फिलीपींस आदि में मानव अपशिष्ट से तैयार जैविक खाद जापान से खरीदी जा रही है. इसकी कीमत 175 से 1400 रुपये प्रति किलो तक है अगर भारत सरकार इस ओर गंभीरता से ध्यान दे तो बहुत बड़ा बदलाव किया जा सकता है.

 

लड़की के मिनी स्कर्ट पहनने पर लोगों ने सरकार से की गिरफ्तारी की मांग

Women in Saudi Arbia

दुबई। मिनी स्‍कर्ट व क्रॉप टॉप पहने सऊदी युवती के एक वीडियो से सऊदी अरब में सनसनी फैल गयी है. वायरल होने वाले इस वीडियो को युवती ने खुद ही पोस्‍ट किया है. इसके बाद कुछ सऊदी जहां उसकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे वहीं कुछ उसके बचाव में हैं.

स्‍थानीय न्‍यूज वेबसाइट ने सोमवार को बताया कि रूढ़िवादी इस्‍लामिक देशों में इस युवती के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है जिसने कपड़े के लिए देश के कायदे कानून का उल्‍लंघन किया है. सऊदी में महिलाओं को सार्वजनिक तौर पर अबाया के नाम से जाना जाने वाला लंबा और ढीला वस्‍त्र पहनना होता है. साथ ही काले कपड़े से अपने बाल और चेहरे को ढकना होता है हालांकि कुछ विशेष लोगों के लिए इसमें रियायत है.

यह वीडियो पहले स्‍नैपचैट पर शेयर किया गया जिसमें उसे रियाध के उशायकिर में सुनसान ऐतिहासिक किले के भीतर टहलते हुए दिखाया गया. माना जाता है कि यह सऊदी अरब का सबसे रूढ़िवादी इलाका है. 18वीं सदी में इसी जगह पर सुन्नी वहाबी इस्लाम के प्रवर्तक पैदा हुए थे. सऊदी अरब का राज परिवार और धार्मिक संगठन सुन्नी इस्लाम के सबसे कट्टर माने जाने वाले वहाबी पंथ को मानते हैं.

ट्वीटर पर कोई युवती की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है तो कोई ड्रेस की स्‍वतंत्रता का हवाला दे इसे अपराध नहीं बता रहा है. फातिमा अल-इस्सा नाम की एक महिला ने इस वीडियो के समर्थन में लिखा, “अगर ये लड़की विदेशी होती तो अब तक उसकी कमर और आंखों के कसीदे पढ़े जाते पर चूंकि वो एक सऊदी है तो उसको गिरफ्तार करने की बातें हो रही हैं.”

जम्मू-कश्मीर की तरह कर्नाटक को भी चाहिए अपना अलग झंडा

karnataka Flag

बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार राज्य के लिए अलग झंडे और सिंबल के लिए एक्शन में आ गई है. सरकार ने 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जिसे झंडा डिज़ाइन करने और सिंबल तय करने का ज़िम्मा दिया गया है. कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद इसे कानूनी मान्यता दिलाने का काम होगा. अगर यह फ़ैसला लागू हो जाता है तो जम्मू-कश्मीर के बाद देश का दूसरा राज्य होगा, जिसका अपना झंडा होगा. यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब कुछ ही महीने में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा ने इस कदम को खारिज करते हुए कहा कि भारत एक राष्ट्र है इसके दो झंडे नहीं हो सकते.

जहां एक तरफ बीजेपी की सरकार ‘एक राष्ट्र और एक निशान’ की बात करती है वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक सरकार अलग झंडे की मांग करना बड़े विवाद को जन्म दे सकता है. इससे पहले जब 2012 में यह मुद्दा राज्य की विधानसभा में उठाया गया तो उस समय मंत्री गोविंद एम करजोल ने कहा था, फ्लैग कोड हमें राज्य के लिए अलग झंडे की इजाजत नहीं देता. हमारा राष्ट्रीय ध्वज देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है.

खबरों के मुताबिक कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने यह कदम इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए उठाया है. कर्नाटक में अलग झंडे की मांग काफी पहले से उठती रही है, जिसे खारिज कर दिया गया था.

दलित उद्धार के लिए सवर्ण संजीव ने छोड़ दी जाति

खगडिय़ा। समाज में अपनी ही पिछड़ी-दलित जाति के लोगों के लिए दिल्ली में बैठकर आंदोलन जैसे कुछ काम करने के बाद अपने बड़े से ड्राइंग रूम में बैठकर जातिविहीन समाज का सपना काफी लोग देखते हैं. ऐसे लोगों को संजीव डोम के बारे में पढ़कर सोचने की जरूरत पड़ेगी. संजीव उस जाति से ताल्लुक नहीं रखते जिन्हें गांवों में ‘डोम’ कहा जाता है. बावजूद इसके उन्होंने अपना सरनेम ‘डोम’ रख लिया है और शहर की अच्छी जिंदगी छोड़कर महादलित बस्ती में कुटिया डालकर रहते हैं. दरअसल यह उन जैसा दिखने की कोशिश है, ताकि वो संजीव को अपने बीच का समझ सके.

अगर संजीव की जाति की बात करें तो भारतीय जाति व्यवस्था में संजीव सवर्ण परिवार में जन्मे हैं. दिल्ली के प्रसिद्ध किरोड़ीमल कॉलेज से बीकॉम तक पढ़ाई की. पढ़ाई के बाद संजीव एक बड़े शहर की रंग-बिरंगी दुनिया में रच-बस रहे थे. उन्हें मॉडल बनना था सो वह मॉडलिंग का सपना देख रहे थे. फिर 2005 में पूस की एक रात में अचानक उनका दिमाग घूम गया. सवर्ण होकर महादलितों के साथ उठना-बैठना उनके परिचितों के लिए ‘दिमाग घूमने’ जैसा ही काम था. जिसके बाद उनके मित्रों, रिश्तेदारों का साथ भी छूट गया. जो हुआ उसकी अपनी एक कहानी है. संजीव के अंदर यह बदलाव सन् 2005 में आया. वे बताते हैं कि पूस की सर्द रात थी. गंगा किनारे बिहार के खगड़िया जिले के सुदूर गांव कन्हैयाचक में श्राद्ध का भोज चल रहा था. इस गांव में संजीव के बहन की ससुराल है सो संजीव बहन से मिलने आए थे. जाड़े की उस रात जूठे पत्तलों से खाना बटोर रहे महादलित परिवार के लोगों को देखकर संजीव सकते में आ गए. बहन से मिलकर संजीव दिल्ली तो लौटे, लेकिन मन कन्हैयाचक में उलझ गया था. उनके दिलो-दिमाग में हलचल मची रही. हर रात संजीव को वही रात याद आती. संजीव सोने लेटते तो आंखों में उस रात का दृश्य सामने आ जाता. हर रोज संजीव को वह रात परेशान करने लगी. उनके आंखों की नींद उड़ चुकी थी. आखिर संजीव से बर्दास्त नहीं हुआ और एक दिन दिल्ली से विक्रमशीला एक्सप्रेस पकड़ फिर वह कन्हैयाचक पहुंच गए. अगले दिन से संजीव ने महादलित बस्ती में उठना-बैठना शुरू कर दिया. वे कुछ उन्हें समझ रहे थे, तो कुछ समझा रहे थे. जाहिर है संजीव अपनी बहन के यहां रुके हुए थे. बहन के परिवार वालों को संजीव का महादलितों के साथ उठना बैठना रास नहीं आया. पहले तो संजीव को समझाने की कोशिश हुई. संजीव हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय कर के जिस काम के लिए आए थे, जाहिर है संजीव को मानना नहीं था. नतीजा महादलित लोगों के साथ उठने-बैठने के ‘अपराध’ में बहन की ससुराल से उन्हें निकाल दिया गया. इसके बाद वह अपने पैतृक गांव शिरोमणि टोला, नयागांव रहने लगे. हालांकि उनका मन वहीं कन्हैयाचक की डोम बस्ती में अटका था. आखिरकार संजीव उन्हीं लोगों के बीच पहुंच गए जिनकी दशा उन्हें बेचैन करती थी. संजीव ने परबत्ता के महादलित डोम टोला में रहना शुरू किया और वहीं एक झोपड़ी बना ली. अब तक तमाम बेचैनियों और परेशानियों से निकलकर संजीव यह मन बना चुके थे कि उन्हें डोम समाज के लोगों के हित के लिए, उनके जीवन स्तर, शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए काम करना है. संजीव ने जागरुकता और शिक्षा को अपना हथियार बना लिया. इसके लिए वे सबसे पहले छुआछूत से लड़े. सामने खुद वो लोग थे, जिनके बीच संजीव ने जन्म लिया था और उनका अब तक का जीवन बीता था. उस क्षेत्र में महादलित बस्ती के लोगों को गंगा की मुख्य धारा में स्नान से रोका जाता था. संजीव ने इस कुप्रथा को दूर करने के लिए 2006 में गंगा तट से परबत्ता तक कलश यात्रा निकाली. महादलित महिला-पुरुषों ने एकत्रित होकर गंगा की मुख्यधारा से जल भरा, जिसके बाद रामधुनी यज्ञ हुआ. उस वक्त यह छुआछूत पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तरह था. फिर संजीव ने 2009 से लेकर 2012 तक ‘बहिष्कृत चेतना यात्रा’ निकाली. इसमें कुछ तथाकथित बड़े दलित नेता भी आए. तब से संजीव ‘लौट चलो स्कूल की ओर’ अभियान चला रहे हैं. इस अभियान का नतीजा निकला. अब महादलित परिवार के बच्चे स्कूल जाते हैं. उन्होंने जूठन उठाना बंद कर दिया गया है. नशे के खिलाफ भी संजीव की जंग जारी है. संजीव की चर्चा धारावाहिक सत्यमेव जयते में भी हुई. काम को स्वीकृति मिलने लगी, लेकिन वे अब भी जूझ रहे हैं. कहते हैं, “मेरे जैसे बहुत सारे लोगों को बिहार के साथ- साथ अन्य राज्यों की महादलित बस्तियों में जाने की जरूरत है.”

अनिल के हौसलों को नहीं रोक पाई गरीबी, 20 देशों के धावकों को पछाड़ जीता गोल्ड मेडल

यमुनानगर। जिनके हौसला बुलंद होता है उनकी उड़ानों को गरीबी की बाधा नहीं रोक पाती है. ऐसा ही एक कारनामा हरियाणा के अनिल ने कर दिखाया है. अनिल ने मॉरीशस में इतिहास रचते हुए 42 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में जीतकर गोल्ड मेडल हासिल किया है. इस जीत के साथ ही उसने अगस्त में होने वाले वर्ल्ड मैराथन चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है.

मॉरीशस में हुई मैराथन में 20 से अधिक देशों के धावकों ने हिस्सा लिया था. अनिल ने सबको पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता. अनिल ने 42 किलोमीटर की यह मैराथन 2 घंटे 20 में पूरी की.

गरीबी के कारण पिछले वर्ष 2016 में आयोजित ओलंपिक के लिए पौलेंड में होने वाली प्रतियोगिता के लिए भाग नहीं ले सका था. लेकिन इस बार रोटरी क्लब व अन्य एनजीओ के माध्यम से उसे कुछ आर्थिक मदद मिली और उसने वर्ल्ड मैराथन चैम्पियनशिप से पूर्व मॉरीशस में हुई मैराथन दौड़ में भाग लेते हुए गोल्ड मैडल हासिल कर क्वालीफाई किया.

अनिल की इस जीत से पूरे देश का नाम रोशन हुआ है. अनिल व उसकी सहायता करने वाले रोटरी क्लब के सुमित छाबड़ा व जिला बाल कल्याण अधिकारी राजेन्द्र बहल को भी बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

मॉरीशस से फोन पर की बातचीत में अनिल ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 20 से भी अधिक देशों के धावकों ने भाग लिया. उसने सभी धावकों को पछाड़ते हुए 2 घंटे 20 मिनट में 42 किलोमीटर की यह मैराथन दौड़ पूरी की. अब उसका लक्ष्य अगस्त माह में लंदन में आयोजित वर्ल्ड मैराथन चैंपियनशिप जीतकर भारत का नाम रोशन करना है. उसने फोन पर बताया कि यदि संभव हुआ तो अब वह लंदन से वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने के बाद ही वापस लौटेगा.

भाजपा सरकार में भूखे पेट सो रही हैं छात्रावास में रहने वाली आदिवासी छात्राएं

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जबलपुर। यह खबर मध्य प्रदेश के प्रमुख जिले जबलपुर की है. शहर मुख्यालय से पांच किमी दूर छपरा, करौंदी मार्ग पर एक मॉडल हाईस्कूल है. सूचना इसी स्कूल से मिली है और सूचना यह है कि इस हाईस्कूल के आवासीय विद्यालय में रहने वाली आदिवासी छात्राओं को भूखे पेट सोना पड़ रहा है. इनके लिए खाने का प्रबंध करने का जिम्मा स्वयं सहायता समूह के पास है जो लगातार इन आदिवासी छात्राओं की अनदेखी कर रहा है. छात्राओं को कच्चा खाना परोसा जा रहा है, जिसे खाकर कई छात्राएं बीमार भी हो चुकी हैं. खबर दैनिक अखबार राजस्थान पत्रिका के हवाले से सामने आई है.

अब जरा घर से दूर रह रहीं इन छात्राओं के खाने का मेन्यू सुन लिजिए. भोजन के नाम पर इन्हें सिर्फ दो रोटी और एक चम्मच चावल मिल रहा है. इस पूरे मामले का खुलासा छात्राओं ने खुद किया है. छात्राओं का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है. वहीं खाने की जम्मेदारी जिस स्वयं सहायता समूह और जिस ठेकेदार के पास है, उसकी दबंगई के चलते आवासीय विद्यालय के टीचर भी कुछ नहीं बोलते हैं.

अगर नियम कायदों की बात करें तो प्रशासन द्वारा आवासीय हॉस्टलों में खिलाने के लिए एक मेन्यू है. और नियम यह है कि सातों दिन का खाना उसी मेन्यू के हिसाब से देना है. मीनू के अनुसार सुबह-शाम चाय फिर नाश्ता और भरपेट भोजन दिया जाना चाहिए. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. छात्राओं का आरोप है कि मेन्यू की पूरे तौर पर अनदेखी की जाती है और चावल-दाल रोटी के अलावा कभी-कभार हरी सब्जी के रूप में चौरई की सब्जी भर ही दी जाती है.

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छात्राओं के विरोध में आने के बाद इस आवासीय विद्यालय से जुड़े सभी प्रमुख लोग सकते में हैं. उन्होंने यह कल्पना नहीं की थी कि आदिवासी छात्राएं इस कदर विद्रोह पर उतर जाएंगी. प्रिंसिपल पीएस मरावी बस इतना भर कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि छात्राओं को कच्चा भोजन परोसने के संबंध में शिकायत मिलने के बाद इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित किया गया है. लेकिन सवाल है कि क्या प्रिंसिपल और अन्य संबंधित अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहे इस जुल्म को लेकर पहले किसी ने आवाज क्यों नहीं उठाई?

गाय को बचाने में तीन मुसलमानों की जान गई

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उन्नाव। गाय को लेकर मार पिटाई की घटनाऐँ तो आए दिन हो रहीं हैं लेकिन ताजा मामला सड़क हादसे का है जिसका कारण एक गाय रही. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में तीन मुसलमानों की गाय को बचाने की कोशिश में जान चली गई. 48 वर्षीय मोहम्मद असलम, 35 वर्षीय जहांगीर आलम और 45 वर्षीय दिलशाद खान की कार उस समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई जब ड्राइवर ने सड़क पर आ गई एक गाय को बचाने के लिए गाड़ी को अचानक से दाएं घुमाया. जहांगीर, दिलशाद और असलम राजस्थान के अजमेर से ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जियारत करके वापस आ रहे थे. दुर्घटना लखनऊ से करीब 60 किलोमीटर दूर उन्नाव में हुई. कार में सवार अन्य यात्रियों का इलाज कानपुर के एक अस्पताल में चल रहा है.

दुर्घटना में घायल मोहम्मद इमरान ने द टेलीग्राफ को बताया कि गाड़ी असलम चला रहे थे. एक्सप्रेस वे पर उन्होंने गाड़ी के सामने एक गाय अचानक आ गई. असलम ने गाय को बचाने के लिए गाड़ी घुमाई जिसके बाद वो डिवाइडर से टकरा गई. ये हादसा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हुआ. खबर के अनुसार सभी मारे गए लोग बिहार के रहने वाले थे और व्यापारी थे.

उन्नाव की पुलिस एसपी नेहा पाण्डेय ने बताया कि जहांगीर, असलम और दिलशाद की कार गाय को बचाते हुए डिवाइडर से टकरा गई. नेहा पाण्डेय के अनुसार तीनों मृतक बिहार के गोपालगंज जिले के मारवाड़ी मोहल्ला के रहने वाले थे. कार में छह लोग सवार थे. सभी शनिवार (14 जुलाई) को अजमेर पहुंचे थे. बिहार वापसी से पहले वो एक दिन दिल्ली में रुके और अपनी कार की मरम्मत करवाई. दिल्ली से सभी असलम के बेटे का अलीगढ़ स्थित एक पब्लिक स्कूल में दाखिला कराने के लिए गए जहां से लौटते हुए ये बड़ा हादसा घटित हो गया.

 

मोदीराज में बिना परीक्षा पास किए बनेंगे IAS-IPS

दिल्ली। भारत की सबसे कठिन परीक्षा सिविल सर्विस को पास करके जिलाधिकारी, सचिव, पुलिस अधिकारी जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं ऐसे पद सरकारी सेवाओं में सबसे श्रेष्ठ स्थान पर हैं. पर अब निजी क्षेत्र के लोगों को बिना परीक्षा पास किये ही लाने की सेँध मारी शुरु हो चुकी है. जी हां, अब मोदी सरकार देश की सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली सिविल सेवाओं में परीक्षा के माध्यम से भर्ती के अलावा केंद्र सरकार अब लैटरल एंट्री का भी प्रावधान करने जा रही है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को इसके लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा है.

सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र के अधिकारियों को विभिन्न विभागों में उप सचिव, निदेशक और संयुक्त सचिव रैंक के पदों पर नियुक्त किया जाए. सूत्रों के मुताबिक, निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर चयन किया जाएगा.

बता दें की कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में बनी समिति ऐसे लोगों का अंतिम रूप से चयन करेगी. पिछले साल ही अगस्त में कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह बताया था कि ऐसी समिति गठित करने की कोई योजना नहीं है, जो सिविल सेवाओं में लैटरल इंट्री की संभावना पर विचार कर सके. जानकारी के अनुसार शुरूआत में निजी क्षेत्रों, शिक्षा, गैर सरकारी संगठनों से जुड़े तकरीबन 40 ऐसे लोगों का चयन किया जाएगा. अगर इस तरह का बिल पारित हुआ तो सरकारी विभागों की और अधिक बर्बादी तय है.

मुलायम के होर्डिंग से पार्टी और अखिलेश गायब

नई दिल्ली। सपा की नींव रखने वाले मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश के बीच विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है कल राष्ट्रपति चुनाव में भी मुलायम सिंह का वोट रामनाथ कोविंद को जाने की आंशका जतायी जा रही है. गौरतलब है कि इटावा को सपा का गढ़ माना जाता है जहां शिवपाल और मुलायम की जगह-जगह होर्डिंग लगी रहती हैं. ताजा लगे होर्डिंग की खास बात यह है कि इसमें अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का नाम तक नहीं है. होर्डिंग लगने के बाद इलाके में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है.

बता दें यह होर्डिंग्स यादव परिवार में कलह के बाद इटावा में बने संगठन “मुलायम के लोग” के बैनर तले लगाया गया है. इस होर्डिंग में लिखा है की गूंजे धरती और पाताल, प्रदेश के नेता हैं शिवपाल. इस होर्डिंग में न तो अखिलेश यादव की फोटो नजर आ रही है न ही पार्टी के लिए कुछ लिखा है. यहां तक की इसमें समाजवादी पार्टी का निशान तक नहीं है.

जानकारी देते हुए सपा से इस्तीफा दे चुके इटावा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील यादव ने कहा  कि हमारा और हमारे नेता मुलायम सिंह यादव और शिवपाल का सपा से कोई मतलब नहीं है. हम समय-समय पर इस तरह की मुहिम चलाते रहते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि हम 15 अगस्त को इटावा में एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं, जिसमें मुलायम सिंह और शिवपाल यादव शामिल होंगे.

 

सहारनपुर मुद्दे पर बहनजी ने राज्यसभा में कहा- इस्तीफा दे दूंगी

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नई दिल्ली। राज्यसभा में मानसून सत्र के दौरान आज बसपा प्रमुख मायावती भड़क गईं और उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा तक देने की पेशकश कर दी. असल में हुआ यूं कि बसपा प्रमुख ने राज्यसभा की कार्रवाई शुरू होते ही सहारनपुर की अपनी यात्रा का मुद्दा उठाया.

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने के दौरान कई दिक्क्तों का सामना करना पड़ा. उन्हें वहां हैलीकॉप्टर से जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसकी वजह से उन्हें गाड़ी से जाना पड़ा जिसमें कई घंटे लगे. सरकार ने उनकी सुरक्षा की भी अनदेखी की.

मायावती जब अपनी बात रख रही थीं तो राज्यसभा के उप सभापति ने उन्हें बोलने से रोका और उनकी अनदेखी की. बस फिर क्या था, बसपा प्रमुख ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्‍हें वहां न तो सुना जा रहा है और न ही बोलने दिया जा रहा है. इसके बाद हंगामा होने लगा और मायावती ने उपसभापति को कहा कि आप मुझे बोलने नहीं देंगे तो मैं सदन से इस्तीफा दे देती हूं. वह गुस्से में राज्यसभा से वॉक आउट कर गई. मायावती के समर्थन में कांग्रेस के सांसदों ने भी वॉक आउट कर दिया.

संसद कैंपस में मीडिया से बात करते हुए बहनजी ने राज्यसभा से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी. मायावती ने कहा की सहारनपुर घटना केंद्र की साजिश थी. BSP सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार हो रहा है. सरकार दलितों को बाबा साहब के नाम पर गुमराह कर रही है और दलितों के नाम पर नौटंकी कर रही है. मैं आज ही इस्तीफा दे दूंगी.

यहां क्लिक कर वीडियों में देखिए मायावती ने और क्या कहा.

मायावती ने यह भी कहा जब वो सहारनपुर में दलितों से मिलने गई और उनकी मदद करने की कोशिश की तो वहां के DM/SDM ने उनको मना कर दिया. और बड़े पैमाने पर दलितों का उत्पीड़न हो रहा है. उन्होंने इस्तीफे की भी धमकी दी और कहा कि अगर मेरी बात नहीं सुनी गयी तो मैं इस्तीफ़ा दे दूंगी.

मायावती ने राज्य सभा में सहारनपुर हिंसा को दलित कांड बताया और कहा कि यह बीजेपी की साजिश है. उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार पर घटना पर पर्दा डालने का आरोप लगाया.

सीताराम येचुरी ने सरकार पर विपक्ष की बात नहीं सुनने का आरोप लगाया. राज्यसभा में सरकार पर दलित-विरोधी होने का विपक्ष ने लगाया नारा. इस बीच हंगामे के बाद कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया.

शशिकला के ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ का खुलासा करने वाली डीआईजी का ट्रांसफर

बेंगलुरू। भारत में ईमानदार अधिकारियों को अपने काम का फल कुछ इस तरह से ही मिलता है. सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरू के केंद्रीय कारागार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं का पदार्फाश करने वाली भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी डी रूपा का सोमवार को तबादला कर दिया. असल में इसकी वजह एक दिन पहले ही जेल में शशिकला को मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट का खुलासा करना रही.

उन्होंने AIADMK नेता शशिकला को जेल में मिलने वाली गैरकानूनी सुविधाओं को लेकर एक और रिपोर्ट प्रस्तुत की थी जिसमें खुलासा किया गया था कि शशिकला के व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए बैरक के पांच सेल खुले रखे गए थे जहां ताला नहीं लगाया जाता था.

इसके साथ ही रूपा ने कहा, एक पूरा कॉरिडोर शशिकला के लिए रखा गया था, वहां किसी और को जाने की अनुमति नहीं थी. पिछले सप्ताह डीआईजी डी रूपा की रिपोर्ट ने तहलका मचा दिया था. इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद शिशिकला को जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि 2 करोड़ देकर शशिकला ने अपने लिए जेल में अलग से किचन भी बनवाया है.

डी रूपा की रिपोर्ट सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने हाई लेवल इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं. वहीं जेल अधीक्षक एचएसएन राव ने इस तरह की किसी भी रिपोर्ट से इनकार किया है. सोमवार को राज्य सरकार ने डी रूपा का ट्रैफिक विंग में ट्रांसफर कर दिया.

बता दें की मुख्यमंत्री का कहना है की यह कार्रवाई रिपोर्ट को लेकर मीडिया तक जाने की वजह से की गयी है. इस रिपोर्ट की वजह से काफी विवाद पैदा हो गया है. इस पर सिद्धरमैया सरकार ने उलटे रूपा से सफाई मांगी है. अपने काम को ईमानदारी से करना डीआईजी डी रुपा को काफी मंहगा पड़ गया.

कोई भी जीतें, दलित राष्ट्रपति बनने से खुश हूंःमायावती

  Mayawati

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने बीते सोमवार को खुशी जाहिर करते हुए कहा कि चुनावी हार-जीत से परे भारत का अगला राष्ट्रपति दलित होगा. मायावती ने अपना वोट देने के बाद कहा, “जब भी चुनाव होता है कोई एक व्यक्ति जीतता है, और दूसरा हारता है. हालांकि, मैं खुश हूं कि जो भी नतीजा हो एक अनुसूचित जाति का व्यक्ति राष्ट्रपति बनने जा रहा है. यह हमारे आंदोलन और हमारी पार्टी के लिए खुशी का क्षण है.” राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्षी पार्टियों की संयुक्त उम्मीदवार पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के बीच सीधा मुकाबला है. दोनों ही दलित समुदाय से हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाला. कांग्रेस नेता ने रविवार को राष्ट्रपति चुनाव में सांसदों व विधायकों से ‘स्वविवेक से मतदान करने’ की अपील की थी. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यह ‘संकुचित विचारधारा, विभाजनकारी और सांप्रदायिक दृष्टिकोण’ को देश पर थोपने की कोशिश कर रही है.

सभी निर्वाचित सांसद और विधायक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए मतदान करने के योग्य हैं. मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई को समाप्त हो रहा है.

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्षी दलों की साझा उम्मीदवार व पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार आमने-सामने हैं.

क्रिकेटर मोहम्मद शमी को घर में घुसकर मारने की कोशिश

कोलकाता। इंडियन क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मो. शमी के साथ बदसलूकी और मारपीट की कोशिश का मामला सामने आया है. उनके कोलकाता स्थित अपार्टमेंट पर हमले की सनसनीखेज घटना सामने आई है. इस संबंध में शमी ने कोलकाता के जादवपुर पुलिस स्टेशन में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले की जांच की जा रही है.

जानकारी के अनुसार, कोलकाता के काटजू नगर में रहने वाले क्रिकेटर मो. शमी अपनी पत्नी के साथ कार से घर की तरफ जा रहे थे. रास्ते में बाइक सवार एक शख्स खड़ा था जिसे सामने से हटने को लेकर उनके ड्राइवर और आरोपी से तीखी बहस हो गई. क्रिकेटर शमी ने बीच-बचाव किया और अपने अपार्टमेंट में चले गए. लेकिन बाद में आरोपी कुछ लोगों के साथ आया.

बताया जा रहा है कि उन लोगों ने शमी के अपार्टमेंट पर हमला कर दिया. उनके केयरटेकर से लड़ने लगे, मैनेजर का कॉलर पकड़ कर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट कर दी. जिसके बाद शमी और उनकी पत्नी ने जादवपुर पुलिस स्टेशन जाकर इसकी शिकायत दर्ज करा दी. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है जिसके बाद मामला शांत हुआ.