कर्ज से परेशान किसान, मौज में विधायक
चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को विधायकों की सैलरी में 50 हजार रुपये की बढ़ोतरी को मंजूर कर लिया गया है. अब उनकी महीने की सैलरी 1.05 लाख रुपये हो गई है. राज्य के किसान कर्ज से परेशान हैं और सूखे की मार झेल रहे हैं. सरकारी मदद के लिए वे महीनों से संघर्ष भी कर रहे हैं. फिलहाल किसान दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं.
तमिलनाडु में सैलरी हाइक के अलावा विधायकों के पेंशन में भी बढ़ोतरी हुई है. इसे 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है. वहीं लोकल एरिया फंड को भी उसी के सापेक्ष्य में बढ़ा दिया गया है. और उसे दो करोड़ से 2.6 करोड़ कर दिया गया है.
बता दें कि संसद में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब समाजवादी पार्टी के सांसद रामनरेश अग्रवाल और कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने सांसदों की सैलरी बढ़ाने की मांग की. पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने कहा, भारतीय सांसदों को विश्व में सबसे कम पैसा मिलता है.
नरेश अग्रवाल ने अपनी मांग का बचाव किया. उन्होंने कहा, यदि पत्रकार और न्यायपालिका अपनी अच्छी सैलरी की मांग नहीं करेंगे तो वे भी नहीं करेंगे. उनकी सैलरी बढ़ाने में दिक्कत क्या है? यदि जज ऐसी मांग रख सकते हैं तो सांसद क्यों नहीं? हम 7वें पे कमीशन के हिसाब से सेलरी की मांग कर रहे हैं.
मायावती चाहेंगी तो बिहार से भेजेंगे राज्यसभा: लालू यादव
पटना। कल बसपा सुप्रीमो के इस्तीफा देने के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने मायावती का साथ देने का ऐलान किया है. मंगलवार को मायावती के राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद लालू ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि मायावती ने बिल्कुल सही कदम उठाया है. लालू ने कहा की बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है, हमारी पार्टी मायावती के साथ है. अगर मायावती चाहेंगी तो हम बिहार से उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजेंगे.
पत्रकारों से बात करते हुए लालू प्रसाद ने कहा की दलितों की आवाज दबाई जा रही है, बीजेपी अहंकार में डूबी हुई है. मायावती के साथ राज्यसभा में जो व्यवहार किया गया, उससे साफ है कि बीजेपी दलित विरोधी पार्टी है.
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. मायावती का आरोप है कि सत्तापक्ष ने उन्हें दलितों पर अत्याचार का मुद्दा राज्यसभा में उठाने नहीं दिया. नाराज मायावती ने पहले चेतावानी दी थी, फिर कुछ घंटों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
वहीं मायावती के न बोलने वाले आरोप के जवाब में बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी खड़े हो गए और मायावती पर राजनीति करने का आरोप लगाने लगे. मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि मायावती सियासी फायदे के लिए उपसभापति पर हमला कर रही हैं और सीधे-सीधे धमकी दे रही हैं.
चीन के 9 करोड़ सदस्यों को फरमान, धर्म छोड़ो बनो नास्तिक
बीजिंग। दुनिया में नास्तिकों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है जिसका असर प्रत्येक देश के नागरिकों पर पड़ रहा है. पर अब ताजा मामला राजनीति से जुड़ा है जिसको लेकर विवाद भी जोर पकड़ रहा है. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक विवादित कदम उठाते हुए अपने लगभग 9 करोड़ सदस्यों को निर्देश दिया है कि वे पार्टी की एकजुटता बनाए रखने के लिए धर्म छोड़ दें. पार्टी ने सदस्यों को चेतावनी देते हुए कहा है कि धार्मिक विश्वास कैडरों के लिए एक ‘लक्ष्मण रेखा’ जैसा है और जो लोग इस निर्देश का उल्लंघन करेंगे, उन्हें दंडित किया जाएगा.
चीन में धार्मिक मामलों के शीर्ष नियामक के प्रमुख ने कहा कि पार्टी सदस्यों को धर्म में यकीन नहीं करना चाहिए और जिन लोगों के धार्मिक विश्वास हैं, उन्हें इसका त्याग करने के लिए कहा जाना चाहिए. आधिकारिक मीडिया की ओर से आज आई खबर के अनुसार, विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्देश पार्टी की एकजुटता को बनाए रखने के लिए है.
चीन के समाचार पत्र कियुशी जर्नल में छपे एक लेख में लिखा है कि पार्टी सदस्यों को धार्मिक विश्वास नहीं रखने चाहिए. यह सभी सदस्यों के लिए एक लक्ष्मण रेखा है. पार्टी सदस्यों को कड़े मार्क्सवादी नास्तिक होना चाहिए. उन्हें पार्टी के नियमों का पालन करना चाहिए और पार्टी में यकीन रखना चाहिए. उन्हें धर्म में यकीन रखने की अनुमति नहीं है. जिन अधिकारियों का यकीन धर्म में हैं, उन्हें इसे छोड़ने के लिए राजी किया जाना चाहिए. जो लोग ऐसा करने का विरोध करते हैं, उन्हें पार्टी संगठन की ओर से दंडित किया जाएगा. कम्यूनिस्ट पार्टी के इस बयान के बाद चीन का बड़ा तबका विरोध के सुर में है.
एशियन एथलेटिक्स की गोल्ड मेडलिस्ट मनप्रीत कौर डोप टेस्ट में फेल
नई दिल्ली। डोप टेस्ट में फेल होने से कई एथलेटिक्स अपनी जिंदगी बर्बाद कर चुके हैं ताजा मामला एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की दिग्गज गोला फेंक एथलीट मनप्रीत कौर का है जो डोप टेस्ट में फेल हो गई हैं. नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) द्वारा किए गए डोप टेस्ट में मनप्रीत को प्रतिबंधित शक्तिवर्धक डाइमेथिलबुटाइलामाइन के टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है. ये टेस्ट नाडा द्वारा पटियाला में 1-4 जून तक आयोजित हुए फेडरेशन कप के दौरान किया गया था.
देश की दिग्गज एथलीटों में शामिल मनप्रीत ने अगले महीने लंदन में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लए क्वॉलिफाई किया है. मनप्रीत को जिस उत्तेजक पदार्थ के टेस्ट में पाजिटिव पाया गया है, वह वर्ल्ड एंटी डोपिंग एंजेसी (वाडा) के तहत अनिर्दिष्ट श्रेणी में आता है, इसलिए मनप्रीत अगले महीने में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग ले पाएंगी.
हालांक मनप्रीत को नाडा के सामने सुनवाई के लिए हाजिर होना होगा और वहां खुद को निर्दोष न साबित कर पाने की स्थिति में मनप्रीत द्वारा 6-9 जुलाई तक आयोजित हुई एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान जीता गया गोल्ड मेडल छीना जा सकता है जिसके बाद उनका भविष्य खतरे में आ गया है.
‘GST के लिए रात 12 बजे संसद खुली, पर किसानों को एक मिनट नहीं देते मोदी’
बांसबाड़ा। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को राजस्थान के बांसवाड़ा पहुंचे. राहुल ने यहां किसान आक्रोश रैली को संबोधित किया. किसानों को लेकर उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी व राज्य की वसुंधरा सरकार पर जमकर निशाना साधा. राहुल ने कहा कि जीएसटी के लिए रात को 12 बजे संसद खुल सकती है, लेकिन किसानों के लिए 10 मिनट का समय सकरार संसद में चर्चा के लिए नहीं दे रही. राहुल ने प्रदेश के नेताओं से कहा कि वे राज्य सरकार पर दबाव बनाएं जिससे सरकार किसानों की सुध ले. सभा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, सीपी जोशी ने भी संबोधित किया.
राहुल ने कहा, आज सुबह मैं लोकसभा में था. वहां कांग्रेस ने किसानों के बारे में डिस्कशन के लिए समय मांगा था. हम चाहते थे कि लोकसभा में किसानों के बारे में चर्चा हो. जो आपके दिल में दुख है उस बारे में सदन में हम बोलना चाहते थे. बात करना चाहते थे, लेकिन हमें समय नहीं दिया गया. हमने चर्चा के लिए दो-तीन घंटे नहीं केवल 10-15 मिनट मांगे थे. हम आपके बारे में बोलना चाहते थे, लेकिन संसद में आज आपकी आवाज नहीं उठाई जा सकती.
जीएसटी के लिए संसद को 12 बजे खोला जा सकता है. मगर किसान के लिए वहां बात नहीं हो सकती. यह है एनडीए की सचाई.
राहुल ने मोदी सरकार पर रोजगार को लेकर भी तंज कसा. उन्होंने कहा, मोदी जी ने वादा किया था कि 2-3 करोड़ लोगों को रोजगार देंगे. हमने सरकार से पूछा कितने लोगों को रोजगार मिला. जवाब मिला एक लाख लोगों को रोजगार मिला. सरकार ने रोजगार नहीं दिलाया. उल्टा सरकार किसानों की जमीन ले रही है. इससे फायदा किसका हो रहा है. गरीबों, किसानों व व्यापारियों का तो फायदा नहीं हो रहा.
राहुल ने कहा, हम किसानों के साथ हैं और राज्य की भाजपा सरकार पर इतना दबाव बनाएंगे कि सरकार किसानों का कर्जा माफ करेगी. मैं इसके लिए हर जिले व निचले स्तपर पर जाने को तैयार हूं. हम सरकार में नहीं हैं. अगर होते तो इस बारे में बात करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.
मॉनसून सत्र: किसानों, दलितों के मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली। संसद में कल मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था तो मॉनसून सत्र में आज का दिन भी काफी हंगामेदार रहा. किसानों, दलितों के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा किया. हंगामे के बाद लोकसभा में सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी गई.
लोकसभा में हंगामे के बीच बुधवार को कार्यवाही शुरू हुई. विपक्षी दलों की नारेबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इसरो की उपलब्धियों की जानकारी देते रहे. एक रॉकेट से 104 सैटलाइट्स की कामयाब लॉन्चिंग का भी जिक्र किया पर सदन ज्यादा देर नहीं चल सका और कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित करना पड़ा.
वहीं, राज्यसभा में सदन की कार्यवाही की शुरुआत सांसदों की सैलरी बढ़ाने की मांग के साथ हुई. कांग्रेस और जेडीयू के नेताओं ने किसानों के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया. नेताओं ने किसानों की आत्महत्या, न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंदसौर में हुई घटना को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की.
जेडीयू नेता शरद यादव ने दाल बाहर से आयात करने का मामला उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की. वहीं कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि 150 से ज्यादा किसान संगठन जंतर-मंतर पर बैठे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्या देशव्यापी है, लेकिन सरकार मौन है. दिग्विजय ने कहा कि किसानों को कीमत के बजाए गोलियां दी जा रही हैं. इंपोर्ट ड्यूटी भ्रष्टाचार का माध्यम बन गया है. उन्होंने रूल 267 के तहत किसानों के मुद्दे पर डिस्कशन की मांग की जिसे उप सभापति ने मान लिया.
जेडीयू नेता अली अनवर ने दलितों पर अत्याचार का मामला भी उठाया. बता दें कि कांग्रेस ने दलितों के मुद्दे पर बुधवार को चर्चा के लिए नोटिस भी दे रखा है पर सरकार इस बारें में कोई चर्चा नहीं चाहती जिसके आसार दिख गये हैं.
सर्वे: नोटबंदी से 15 लाख लोगों की गई नौकरी
नई दिल्ली। एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि नोटबंदी के बाद से भारत में लगभग 15 लाख लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी हैं. अगर आंकडा लगाया जाये तो एक कमाऊ शख्स पर घर के चार लोग आश्रित रहते हैं तो इस लिहाज से पीएम नरेंद्र मोदी के एक फैसले से 60 लाख से ज्यादा लोगों को रोटी के लिए परेशान होना पड़ा है.
सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) ने सर्वे में नौकरियों का आंकड़ा पेश किया है. सीएमआईई के कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद जनवरी से अप्रैल 2017 के बीच देश में कुल नौकरियों की संख्या घटकर 405 मिलियन रह गई थी जो कि सितंबर से दिसंबर 2016 के बीच 406.5 मिलियन थी. यानी नोटबंदी के बाद नौकरियों की संख्या में करीब 1.5 मिलियन अर्थात 15 लाख की कमी आई.
देशभर में हुए हाउसहोल्ड सर्वे में जनवरी से अप्रैल 2016 के बीच युवाओं के रोजगार और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जुटाए गए थे. इस सर्वे में कुल 1 लाख 61 हजार, एक सौ सड़सठ घरों के कुल 5 लाख 19 हजार, 285 युवकों का सर्वे किया गया था. सर्वे में कहा गया है कि तब 401 मिलियन यानी 40.1 करोड़ लोगों के पास रोजगार था. यह आंकड़ा मई-अगस्त 2016 के बीच बढ़कर 403 मिलियन यानी 40.3 करोड़ और सितंबर-दिसंबर 2016 के बीच 406.5 मिलियन यानी 40.65 करोड़ हो गया. इसके बाद जनवरी 2017 से अप्रैल 2017 के बीच रोजगार के आंकड़े घटकर 405 मिलियन यानी 40.5 करोड़ रह गए. मतलब साफ है कि इस दौरान कुल 15 लाख लोगों की नौकरियां खत्म हो गईं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आठ नवंबर 2016 को लागू हुई नोटबंदी का व्यापक प्रभाव इन महीनों में पड़ा है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सितंबर से दिसंबर 2016 में खत्म हुई तिमाही में भी नोटबंदी के आंशिक प्रभाव पड़े हैं. सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2016 से अक्टूबर 2016 तक श्रमिक भागीदारी 46.9 फीसदी थी जो फरवरी 2017 तक घटकर 44.5 फीसदी, मार्च तक 44 फीसदी और अप्रैल 2017 तक 43.5 फीसदी रह गई. यानी कल-कारखानों और उद्योगों में आई मंदी की वजह से श्रमिकों को काम नहीं मिले जिससे लाखों लोगो के सामने खाने पीने का संकट गहरा गया था जिसका असर अब तक देखा जा सकता है.
संसद की कैंटीन के खाने में निकली मकड़ी
नई दिल्ली। संसद की कैंटीन के खाने में मकड़ी मिली है. लोकसभा में एक अधिकारी के मुताबिक उन्होंने संसद में खाना ऑर्डर किया था. जिसमें मकड़ी मिली. इस वजह से उनकी तबीयत भी खराब भी हो गई. दो साल पहले संसद की कैंटीन में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खाना खा चुके हैं.
घटना 18 जुलाई की है. संसद की कैंटीन में लोकसभा के क्लास वन अधिकारी श्रीनिवासन पहुंचे थे. उन्होंने खाने में पोंगल और दही चावल का ऑर्डर दिया. जैसे ही उन्होंने खाना शुरू किया. प्लेट में उन्हें बड़ी सी मकड़ी दिखी.
श्रीनिवासन ने बताया की “खाने के दो निवाले ही खाए होंगे कि मेरी तबीयत बिगड़ने लगी. उल्टियां आने लगीं. तभी मेरी नज़र प्लेट में मौजूद मकड़ी पर पड़ी तो मैं खाना छोड़कर खड़ा हो गया और कैंटीन स्टाफ से शिकायत की.’’
संसद की कैंटीन में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खाना खा चुके हैं. दो साल पहले पीएम मोदी ने सांसदों के साथ कैंटीन में खाना खाया था. अब सोचिए जिस कैंटीन में पीएम मोदी खाना खाते रहे हैं उसके खाने में ऐसी मकड़ी मिली तो इस घटना ने कैंटीन की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करेंजिस अधिकारी श्रीनिवासन के खाने की प्लेट में मकड़ी मिली थी. उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले उनके खाने में एक कीड़ा मिला था. इस बार भी उन्होंने फूड कमेटी से शिकायत की लेकिन एक्शन की बजाय सिर्फ आश्वासन मिला.संसद की कैंटीन सस्ते दामों पर अच्छा खाना परोसने के लिए जानी जाती है.
मोदी के राज में कट्टरता की ओर बढ़ रहा है भारत: न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयार्क। भारत में भाजपा सरकार आऩे के बाद जिस तरह का माहौल बना है वह अन्य देशों से भी छुपा नहीं है. अंग्रेजी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर लेख प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. संपादकीय में 2014 के बाद से भारतीय इकॉनमी को धीमा बताया गया है. अखबार में लिखा है कि 2014 में नरेंद्र मोदी को बतौर प्रधानमंत्री मिली प्रचंड जीत उनके वादों और हिंदू राष्ट्रवादी छवि की ही देन हैं जबकी सुदृढ़ इकॉनमी और लोगों के सुनहरे भविष्य को लेकर वादे करके चुनाव जीता.
अखबार के मुताबिक ‘नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रोथ काफी धीमी रही और नौकरियों को लेकर ध्यान नहीं दिया गया. उनके राज में असहिष्णुता फैलाई गई, जो धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए खतरा है. जब से मोदी ने कार्यभार संभाला तब से गौमांस के सेवन करने का आरोप लगाकर लोगों का मारा गया, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं.
संपादकीय में लिखा गया कि ‘मोदी ने इस मामले पर सिर्फ पिछले महीने ही बोला. तब कुछ नहीं कहा जब उनकी सरकार ने बूचड़खानों के लिए गाय की बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तक खारिज कर दिया था.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे एक तरह से सांस्कृतिक कलंक को लागू करने के समान बतते हुए लिखा कि इस पेशे से मुस्लिम और निचली जाति के हिंदू पारंपरिक रूप से जुड़े हैं जिनको अनदेखा करके उन पर अत्याचार लगातार जारी हैं.
जंतर-मंतर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मंदसौर से चली ऐतिहासिक किसान मुक्ति यात्रा देश के 6 राज्यों से होते हुए 13 दिनों बाद राजधानी दिल्ली पहुंच गई है. इस अवसर पर देश भर से आये किसानों ने जंतर-मंतर पर आयोजित किसान संसद में ज़ोरदार हुंकार भरी. इसके साथ ही यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है जिसे 150 से अधिक किसान संगठनों का समर्थन है. किसानों के अधिकार की इस लड़ाई का समर्थन करने के लिए देशभर से हजारों किसान पहुंचे और अपना समर्थन दिया. किसान मुक्ति संसद में दो मुख्य मांगे रखी गई. पहली, फसल का पूरा दाम मिले और दूसरी, किसानों को पूर्णरूप से कर्जमुक्त किया जाए.
तमिलनाडु के किसान नेता अय्याकन्नू के नेतृत्व में तमिलनाडु के किसानों ने किसान मुक्ति संसद को अपना समर्थन दिया. वहीं महाराष्ट्र के उन किसानों के बच्चों ने जिन्होंने आत्महत्या कर ली है, किसान मुक्ति संसद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए अपना दुख जाहिर किया. जंतर मंतर पर उपस्थित इन बच्चों में से एक अशोक पाटिल ने कहा, ‘मुझे दुख है क्योंकि मेरे पिता ने आत्महत्या की है लेकिन मैं इस देश के सभी किसानों को बताना चाहता हूँ कि आत्महत्या के विकल्प को छोड़कर हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा’.
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं के आह्वान पर सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों ने किसान मुक्ति संसद में हिस्सा लेकर किसानों की माँगों का भरपूर समर्थन मिला. धर्मवीर गांधी (आम आदमी पार्टी), तपन कुमार सेन (सीपीएम), शरद यादव (जेडीयू), अली अनवर (जेडीयू), मोहम्मद सलीम (सीपीएम), जितेंद्र चौधरी, सीताराम येचुरी, अरविंद सावंत (शिवसेना), बीआर पाटिल (कांग्रेस), शैलेन्द्र कुमार (जेडीयू), मोहम्मद मदरुद्ददुजा, शंकर दत्ता के अलावा कई अन्य सांसदों ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए किसान मुक्ति संसद में शामिल हुए.
किसान मुक्ति संसद में बोलते हुए, एमपी राजू शेट्टी ने सांसदों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी सांसद,संसद जाने से पहले जंतर-मंतर आएँ और किसानों की माँगों का समर्थन करें।मेधा पाटेकर ने कहा कि सरकार की किसान और आदिवासी विरोधी नीतियों से पूरा देश परेशान है और अब हम आर-पार की लड़ाई करने के लिए तैयार हैं.
जंतर-मंतर की जनसभा को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ये सरकार किसानों का हक़ नहीं देने वाली है. हमें अपना हक छीन कर लेना होगा. उन्होंने मंदसौर से आये किसानों का मंच पर बुलाकर स्वागत भी किया. सभा को सम्बोधित करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानी का दो तिहाई काम करने वाली महिलाओं ने इस किसान मुक्ति संसद को ऐतिहासिक बना दिया है. वहीं प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार बड़े पूंजीपतियों और कम्पनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को कुचलने पर उतारू है.
आपको बता दें कि अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से आयोजित किसान मुक्ति यात्रा जंतर-मंतर पहुंच गयी है. 6 जून को मन्दसौर के किसानों पर गोलीबारी हुई थी. उसके एक माह बाद 6 जुलाई से 18 जुलाई तक देश के 6 राज्यों से होते हुए किसान मुक्ति यात्रा निकाली गयी. यह यात्रा 6 जुलाई को मध्यप्रदेश के मन्दसौर से शुरू होकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली पहुंची है.
पीएम के कहने पर भी धंधा बंद नहीं कर रहे गौरक्षक: शिवसेना
मुंबई। शिवसेना ने गौरक्षकों को एक बार फिर आड़े हाथों ले लिया है. शिवसेना ने गौ रक्षा के नाम पर लगातार हो रही हिंसा मामले में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखे आर्टिकल में गौरक्षा की तुलना ‘बिजनेस’ से की है. इसमें कहा गया कि ये लोग पीएम मोदी के लगातार निर्देशों और अनुरोध के बाद भी अपनी दुकान बंद नहीं कर रहे हैं.
शिवसेना ने कहा है कि पाकिस्तान चाहता है कि भारत के हिन्दू और मुस्लिम इस तरह के तुच्छ मुद्दों पर लड़ते रहें और धर्म के नाम पर देश बंट जाए. इसके बाद उन्होंने पूछा कि उस समय “कथित गौरक्ष” कहां थे जब अमरनाथ में निर्दोष लोगों को मारा जा रहा था सबको पता है कि जिस ड्राइवर ने उस वक्त कई लोगों की जान बचाई वह खुद भी मुस्लिम था.
शिवसेना ने निशाना साधा कि किस तरह कई भाजपा शासित राज्यों में ही बीफ पर बैन नहीं है, जबकि अन्य में लगा है. शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी पूछा कि “यह गौरक्षक कौन हैं जो लोगों की जान ले रहे हैं. यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी भी इस पर सवाल करने लगे हैं. क्या पाकिस्तान एक बार फिर भारत में हिन्दू-मुस्लिम दंगा कराना चाहता है? हम भारतीय को सोचने की जरूरत है की देश किस और जा रहा है, हिंदू-मुस्लिम की लड़ाई के बीच कुछ लोग अपनी रोटियां सेंकने में लगे हैं जिनकी समझ होना बहुत जरुरी हो गया है.
डंडों से बांध कर दलित युवक की पिटाई
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ में एक बार फिर दलित युवक की पिटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है. उच्च जाति के लोगों ने दलित किशोर को पेड़ से बाध कर डंडों से पिटाई की है. पीड़ित परिवार ने पुलिस से पूरे मामले की शिकायत की है.
जातिवादी गुंडों ने इसका वीडियो भी बना लिया है. जिसे अब सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है. वीडियों में दलित किशोर को डंडे से बांध रखा है, और अश्लील हरकत करते हुए पिटाई कर रहे हैं. इस दौरान जातिवादी गुंडों ने किशोर के कपड़े उतार कर अश्लील वीडियो बनाया. विरोध करने पर जमकर मारपीट की गई है.
ईनाडु इंडिया के मुताबिक, घटना थाना अकराबाद के पिलखना इलाके की है. बताया जा रहा है कि पीड़ित को घर से बुला कर इलाके के दबंग लोग जंगल की ओर ले गये. वहां दलित किशोर के साथ गाली गलौज, मारपीट, अश्लीलता की गई है.
थाने पहुंचे पीड़ित परिवार को पहले तो पुलिस ने भगा दिया फिर मामला बढ़ता देख शिकायत दर्ज कर ली है. हालांकि अभी भी पीड़ित परिवार को न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
जग्गा जासूस की एक्ट्रेस ने किया सुसाइड
गुरूग्राम। कुछ दिन पहले रिलीज हुई रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ की ‘जग्गा जासूस’ में नजर आई एक्टर बिदिशा बेजबरुआ ने बीते दिन गुरुग्राम में आत्महत्या कर लिया. असम की रहने वाली बिदिशा एक्टर और सिंगर थीं और हाल ही में अपने पति के साथ मुंबई से गुरुग्राम शिफ्ट हुई थी. बिदिशा जानी-मानी टीवी पर्सनलिटी थी और कई स्टेज शो भी होस्ट कर चुकी थीं.
जानकारी के अनुसार पुलिस को मौके से कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला है. इस मामले में पुलिस ने उनके पति को गिरफ्तार कर लिया है.
गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ ने बताया कि, ‘बिदिशा के पिता ने उसके पति पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह रोज बिदिशा को मानसिक रूप से परेशान करता था और उससे तंग आकर बिदिशा ने खुदकुशी कर ली. सुशांत लोक थाने में सुसाइड के लिए उकसाने का केस दर्ज हो चुका है.
यही नहीं, पुलिस उपायुक्त (पूर्व) दीपक सहारन ने बताया कि, ‘बिदिशा के पिता को कुछ अनहोनी की आशंका हो गई थी क्योंकि वह सोमवार शाम से ही फोन रिसीव नहीं कर रही थी. इसकी खबर उन्होंने पास के ही पुलिस थाने में दी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर पाया कि दरवाजा अंदर से बंद है. जब दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर गई तो उसे पंखे से लटका पाया गया.
पुलिस बिदिशा के फेसबुक और व्हाट्सऐप की जांच कर रही है. वहीं असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से केस की जांच की मांग की है. जल्दी ही बिदिशा की मौत का कारण पता लग जायेगा.
उच्च जाति की लड़की से शादी की तो सवर्णों ने पीटकर मार डाला
त्रिची। तमिलनाडु के त्रिची जिले में एक दलित कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या कर दी गई. आरोपियों ने दलित युवक पर उनके खेत में लगे प्लास्टिक नल को तोड़ने का आरोप लगाया था. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. परिजनों का आरोप है कि मृतक के उच्च जाति में शादी करने की वजह से उसकी हत्या की गई है.
कत्ल की यह घटना त्रिची जिले के थिरुपंजी गांव की है. मृतक कथीरसन (21) ऑटो चलाकर परिवार का गुजारा करता था. कथीरसन के पड़ोस में रहने वाले वी. थांगारसु और उसके बेटे टी. भास्कर, टी. सुरेश ने उस पर नल तोड़ने का आरोप लगाया.
आरोपियों ने कथीरसन को पकड़ लिया और उसके हाथ-पैर बांधकर मार्केट की ओर ले गए. आरोपियों ने कथीरसन की लोहे की रॉड से बेरहमी से पिटाई की. अपने पति को बचाने के लिए आई कथीरसन की पत्नी के साथ भी आरोपियों ने मारपीट की.
इसके बाद आरोपी कथीरसन को पुलिस के पास ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए और उसकी हत्या कर दी. कथीरसन के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तीनों आरोपी बाप-बेटों को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.

दलित संस्था के डायरेक्टर ए. काथिर के मुताबिक, कथीरसन ने 6 महीने पहले शादी की थी. कथीरसन दलित था और उसने कल्लर जाति (उच्च जाति) से संबंध रखने वाली नंदनी से शादी की थी. इस शादी से कई लोग नाराज चल रहे थे.
परिजनों का आरोप है कि आरोपियों ने कथीरसन की पिटाई के दौरान उसकी शादी को लेकर अपशब्द भी कहे थे. बहरहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.
जन्मदिन विशेषः जानिए क्यों 2008 तक अमेरिका के आतंकियों के लिस्ट में थे नेल्सन मंडेला
अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के विचारों को मानने वाले नेल्सन मंडेला को अफ्रीका के गांधी के नाम से भी जाना जाता है. 18 जुलाई 1918 को मंडेला का जन्म बासा नदी के किनारे ट्रांस्की के मवेंजो गाँव में हुआ था.
चलिए जानते है मंडेला से जुड़ी कुछ अनसुनी बातों के बारे में…
- मंडेला के माता-पिता ने उनका नाम रोहिल्हाला रखा था, मंडेला को नेल्सन नाम उनके टीचर ने दिया था.
- महज 12 साल की उम्र में मंडेला के पिता कि मौत हो गई थी.
- मंडेला अपनी फैमली में स्कूल जाने वाले इकलौते बच्चे थे.
- नेल्सन मंडेला ने अपने कॉलेज के दिनों से ही भेदभाव की लड़ाई शुरु कर दी थी. जिसके चलते उनको कॉलेज से निकाल दिया था.
- 1944 में मंडेला African National Congress में शामिल हो गए थे. वह दिन भर कहीं छिपे रहते थे और केवल रात में ही बाहर आते थे. इस वजह से मीडिया ने उनको ‘द ब्लैक पिमपर्नल’ नाम दिया था.
- अगस्त 1962 में मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने के कारण उन पर 2 साल केस चला. 12 जुलाई 1964 को उनको उम्रकैद कि सज़ा सुनाई गई. 27 साल की कैद में नेल्सन मंडेला हमेशा पतली चटाई पर सोते थे.
- 10 मई 1994 को नेल्सन मंडेला साउथ अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने.
- मंडेला ने 80 साल की उम्र में मोजाम्बिक की प्रथम महिला ग्रासा माकेल से शादी की थी.
- मंडेला भारत रत्न पाने वाले दूसरे विदेशी नगरिक थे.
- 2008 तक भी नेल्सन मंडेला का नाम अमेरिका की आतंकियों की लिस्ट में था. ऐसा इसलिए क्योंकि वो और अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के अन्य नेता एक समय पर रंगभेद के खिलाफ लड़ी गई लड़ाई का हिस्सा थे.
- लंबे समय तक सांस की बीमारी से जूझने के बाद 95 वर्ष की उम्र में नेल्सन मंडेला की मृत्यु हो गयी थी.
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