रोजर फेडरर ने आठवीं बार जीता विंबलडन ग्रैंड स्लैम
टेनिस के स्टार रोजर फेडरर ने एकबार फिर महारथ हासिल की है. स्विट्जरलैंड के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर ने रविवार को फाइनल में क्रोएशिया के मारिन सिलिच को सीधे सेटों में मात देकर रिकॉर्ड आठवीं बार विंबलडन का पुरुष सिंगल्स खिताब जीत लिया है. ये फेडरर के करियर का 19वां ग्रैंड स्लैम खिताब है और पहले ही सबसे ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीतने के अपने रिकॉर्ड को उन्होंने और बेहतर किया है. फेडरर ने फाइनल में सिलिच को सीधे सेटों में 6-3, 6-1, 6-4 से मात देते हुए आठवीं बार विंबलडन खिताब जीता.
फाइनल में फेडरर के शानदार खेल का सिलिच के पास कोई जवाब नहीं था और सिलिच कभी भी फेडरर को चुनौती देते नजर नहीं आए. 2014 के यूएस ओपन विजेता रहे सिलिच किसी भी सेट में फेडरर की चुनौती का मुकाबला नहीं कर पाए. सिलिच ने सेमीफाइनल में अमेरिका के सैम क्वैरी को मात देकर अपने पहले विंबलडन फाइनल में पहुंचकर फेडरर के साथ भिड़ंत पक्की की थी, जबकि फेडरर ने टॉमस बर्डिच को मात देकर अपने 11वें विंबलडन फाइनल और 29वें ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई थी.
फेडरर ने फाइनल में पहला सेट 6-3 से अपने नाम किया. दूसरे सेट में तो सिलिच बिल्कुल बेअसर नजर आए और फेडरर ने आसानी से ये सेट भी 6-1 से अपने नाम कर लिया. तीसरे सेट में सिलिच ने वापसी की कोशिश की लेकिन वह आखिरी में 6-4 से फेडरर ने सेट और खिताब अपने नाम कर लिया. जिसके बाद उनकी भावुक तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहीं.
4.54 रुपये में मिलेगा अनलिमिटेड 4G इंटरनेट और कॉल: JIO
नई दिल्ली। फ्री इंटरनेट और कालिंग के लिये मशहूर रिलायंस जियो एक बार फिर से धमाकेदार ऑफर ला रहा है. जियो के धन धना धन ऑफर और समर सरप्राइज ऑफर खत्म होने वाले हैं. इससे पहले ही जियो ने अपना नया प्लान यूजर्स के लिए पेश कर दिया. इसके अलावा भी रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स के लिए कई और प्लान पेश किए हैं.
जियो ने अपने प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के यूजर्स के लिए नए प्लान पेश किए हैं. जियो के 509 रुपये के प्लान में 56 दिन की वैधता के साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉल और इंटरनेट की सुविधा मिलेगी. इसमें शर्त है कि यूजर को 4G स्पीड के साथ रोजाना 2GB डेटा मिलेगा. रोजाना की लिमिट खत्म होने के बाद स्पीड 128kbps हो जाएगी.
अगर इस प्लान में देखें तो यूजर को महज 4.54 रुपये में रोजाना में ही अनलिमिटेड वॉयस कॉल और इंटरनेट की सुविधा मिल रही है. जियो धन धना धन ऑफर के तहत यूजर को 399 रुपये में 84 दिन की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड कॉल और इंटरनेट की सुविधा दी जा रही है.
इसमें एक शर्त है कि यूजर को रोजाना 4G स्पीड के साथ केवल 1GB डेटा ही मिलेगा. एक जीबी डेटा की लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट तो चलता रहेगा लेकिन उसकी स्पीड 128kbps की हो जाएगी. रिलायंस जियो के प्रीपेड यूजर्स के लिए सबसे सस्ता रिचार्ज 19 रुपये का है. इसमें यूजर को 1 दिन की वैधता के साथ अनलिमिटेड वॉयस कॉल की सुविधा मिल रही है. वहीं 200MB डेटा भी मिलेगा. इस तरह जियो के धमाकेदार ऑफर अन्य टेलीकॉम कंपनियों के लिये परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं जिसके बाद अन्य कंपनियों के ऑफर्स में भी गिरावट होने के आसार हैं.
RSS विचारक को दंगा भड़काने के आरोप में गैरजमानती वारंट जारी
कोलकाता। दंगा भड़काने के मामले में एक बार फिर आऱएसएस का नाम उछला है. इस बार आरोप संघ विचारक मनोज सिन्हा पर है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है. ममता ने संघ विचारक राकेश सिन्हा पर कानूनी चाबुक चलाकर उनकी गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगा दी है. सिन्हा पर शांति भंग करने और दंगा भडकाने के आरोप में उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर गैर जमानती वारंट जारी किया है.
सिन्हा के खिलाफ कलकत्ता के सेक्शपीयर सरानी थाने में 12 जुलाई को भारतीय अचार संहिता की धारा 153 ए1 (ए)(बी), 505(1)(बी),295ए,120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है. इन धाराओं के जरिए राकेश सिन्हा के खिलाफ दंगा भडकाने, लोगों की भावनाओं को आहत करने और भविष्य में उनके बयानों के जरिए दंगा भडकने की आशंका जताई गई है.
बता दें कि सिन्हा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसे फोटो और पोस्ट डाले थे जिससे सूबे की शांति व्यवस्था भंग हुई थी. हालांकि सिन्हा का कहना है कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है, जिससे की पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति बेपटरी हो.
बता दें की अपने अकाउंट से विवादित सामग्री हटाने के बाद उन्होंने बताया कि मेरे ट्वीटर और फेसबूक पेज पर दंगा भडकाने वाले बातों के लिखे जाने का एफआईआर में वर्णन है. जबकि मैंने अपने सोशल मीडिया साईट पर कोई विवादित फोटो नहीं डाली है. बीते कई दिनों में महज तीन फोटो डाली हैं. जिसमें एक तस्वीर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से पुरस्कार ग्रहण करते वक्त, दूसरी फोटो पीएम मोदी के साथ बुक रिलीज के एक कार्यक्रम की है और तीसरी फोटो उज्जैन के महाकाल की है.
जय प्रकाश कर्दम को मिलेगा हिंदी अकादमी सम्मान
नई दिल्ली। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी नई दिल्ली में हिंदी अकादमी द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है. इस समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश कर्दम को “विशिष्ट योगदान सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान जयप्रकाश कर्दम को हिंदी साहित्य में विशेष योगदान के लिए दिया जा रहा है.
हिंदी भवन में 20 जुलाई को हिंदी सम्मान समारोह आयोजित होगा. इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रहेंगे हैं साथ ही विशिष्ट अतिथि राजेन्द्र पाल गौतम (कला व संस्कृति मंत्री), विशेष उपस्थिति श्री वी. अब्राहम (सचिव भाषा) तथा सानिध्य मैत्रयी पुष्पा (उपाध्यक्ष हिन्दी अकादमी) आदि अतिथियों की मौजूदगी रहेगी.
20 जुलाई की शाम 5:30 बजे हिंदी अकादमी के द्वारा हिंदी भवन में आयोजित किये जा रहे सम्मान अर्पण समारोह में हिन्दी की अलग- अलग विधाओं के लिये साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है जिसमें नाटक, हास्य व्यंग्य, गद्य विधा, अनुवाद, बाल साहित्य व पत्रकारिता योगदान(इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट) सम्मान जैसे अन्य सम्मान भी दिग्गजों को दिये जायेंगे.
बीफ की पुष्टि के बाद भाजपा नेता गिरफ्तार
नागपुर। चार दिन पहले गोरक्षकों ने जिस भाजपा कार्यकर्ता की पिटाई की थी उसके पास बीफ था, इसकी पुष्टि आज 17 जुलाई को नागपुर लैब ने भी कर दी है. वहीं पुलिस ने लैब रिपोर्ट आने के बाद आरोपी सलीम शाह को गिरफ्तार कर लिया है.
बता दें की पुलिस ने बीतें शनिवार को बताया कि 12 जुलाई को सलीम शाह (34) को पीटने के आरोप में उन्होंने चार लोगों को गिरफ्तार किया था. सलीम भाजपा की कटोल इकाई का सदस्य था और जो मांस उसके पास था, उसे जांच के लिए फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया था. पुलिस अधीक्षक नागपुर देहात ने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है कि यह बीफ ही था. उन्होंने बताया कि कानून के मुताबिक पुलिस शाह के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी.
बीफ की जानकारी मिलते ही भाजपा ने सलीम को अल्पसंख्यक मोर्चे के सदस्य के पद से हटा दिया. इस बात की जानकारी भाजपा नागपुर की शहरी यूनिट के अध्यक्ष राजीव पोडार ने दी. राजीव ने कहा कि उनको यह सब सुनकर काफी हैरानी हुई. राजीव ने सलीम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की. पुलिस ने बताया है कि उन्होंने केस दर्ज कर लिया है और सलीम के हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है जिसके बाद उस पर जरूरी कार्रवाही की जायेगी.
सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान चार दलितों की मौत
नई दिल्ली। एकतरफ सरकार देश में सफाई अभियान के नाम पर जगह जगह आयोजन कराती है, तरह तरह के वादे करती रहती है तो वहीं सेप्टिक टैंको में मौतें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. ताजा घटना दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी इलाके की है जहां सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने के कारण चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गयी. इस मामले में ‘लापरवाही’ को लेकर दो व्यक्तियों को आज गिरफ्तार भी किया गया.
बता दें की यह घटना कल एक निर्माणाधीन इमारत में हुई. जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि निरंजन सिंह (42) और रिधिपाल (47) नामक दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. निरंजन संबंधित इमारत का सुपरवाइजर है. टैंक की सफाई के दौरान स्वर्ण सिंह , दीपू, अनिल और बलविंदर नामक चार सफाई कर्मचारियों की की मौत हो गई थी.
सफाई के लिए सुपरवाइजर के आदेशानुसार चारो लोग एक हार्वेस्टिंग टैंक की सफाई के दौरान नीचे गये जिसमें दम घुटने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि ये कर्मचारी इलाके में टैंक की सफाई करने के लिए नीचे उतरे, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं निकले. टैंक के भीतर वे सभी जहरीली गैस की चपेट में आ गए जहां दम घुटने से सभी की मौत हो गयी.
मीरा कुमार को वोट दे सकते हैं ये बीजेपी सांसद !
नई दिल्ली। आज राष्ट्रपति चुनाव जारी है जिसके बाद नए राष्ट्रपति का नाम जल्द ही देश के सामने आ जायेगा. पर इससे पहले कई बीजेपी सांसद और विधायक अपनी पार्टी से संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं. गौरतलब है की इस चुनावी मैदान में एनडीए के रामनाथ कोविंद और कांग्रेस के नेतृत्व में 18 विपक्षी दलों ने मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया है.
पर बीजेपी को इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग होने के भी भी पूरा शक है बीजेपी को भी अंदर ही अंदर इस बात का भय जरूर होगा कि उसके कुछ सांसद और विधायक विपक्षी उम्मीदवार को वोट न दे दें. खासकर ऐसे सांसद और विधायक जो पार्टी से नाराज हैं. शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति झा आजाद जैसे सांसद अगर बीजेपी के उम्मीदवार के बजाय मीरा कुमार को वोट दे दें तो किसी को हैरत नहीं होगी.
राष्ट्रपति चुनाव में सत्ताधारी पार्टी न ही ये पता कर सकती है कि किसने किसको वोट दिया और न ही अपने उम्मीदवार को वोट देने को मजबूर कर सकती है. ऐसे में शत्रु जैसे नेता अपनी अंतर्आत्मा की आवाज सुन सकते हैं. अभी दिन पहले ही शत्रुघ्न ने बीजेपी से अलग लाइन लेते हुए बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग का विरोध कर दिया था तो इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव में भी उनका वोट मीरा कुमार को जा सकता है.
दलित बच्चियों को मंदिर में नहीं घुसने दिया
कोटा। दलितों के खिलाफ भेदभाव की घटनाऐँ मंदिरों में भी लगातार जारी है घटनाऐं कभी दक्षिणी भारत के राज्यों से आती हैं तो कभी उत्तरी भारत के भिन्न भिन्न राज्यों से. ताजा मामला राजस्थान के बूंदी जिले की है जहां 8 दलित बालिकाओं को मंदिर में प्रवेश नही करने दिए का जाने के मामले लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले में आज सर्किट हाउस परिसर दलित समाज नेताओं ने बैठक कर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में मंगलवार से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी हैं.
बता दें की कोटा महावीर नगर विस्तार में 10 जुलाई को भगवान शिव की पूजा अर्चना करने गई संतोषी नगर की 8 दलित बालिकाओ को मंदिर प्रबंधन से जुङे लोगों ने प्रवेश नहीं करने दिया था. दलित समाज के लोगों ने मामले में सबंधित थाने में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है. लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कोटा पुलिस और प्रशासन द्वारा अभी तक दोषी लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है.
वहां के स्थानीय नेता पूर्व जिलाप्रमुख राकेश बोयत के साथ दलित समाज के नेताओं की बैठक की गयी जिसके दौरान जिलेभर के दलित समाज के लोगों द्वारा कलक्टर को संभागीय आयुक्त के नाम ज्ञापन दिये जाने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा कि दोषी लोगों के खिलाफ अगर कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे. उनका बड़ा सवाल यही है कि आखिर दलितों के खिलाफ इस तरह के भेदभाव की घटनाऐँ कब बंद होंगी.
‘दलितों के लिए देश नहीं, ख़ुद लड़ना होगा उन्हें’

क्या जातीय हिंसा और भेदभाव से देश और इसे भुगतने वाले दलित, दोनों एक बराबर प्रभावित होते हैं?
क्या देश के सभी नागरिकों के साथ एक समान व्यवहार करने के मामले में भारत 70 सालों में कुछ बेहतर हो पाया है या फिर हालात पहले जैसे ही हैं?
तर्क-वितर्क करने वाले बुद्धिजीवियों के लिए राष्ट्र अपने-आप में एक मिथक हो सकता है और यह आम लोगों की धारणा भी हो सकती है. यह एक वर्गीकृत संरचना से बिल्कुल कम नहीं है और ऊपरी तौर पर यह एक छद्म निष्पक्ष तस्वीर पेश करती है. इसलिए किसी ख़ास परिस्थिति में इसकी कार्रवाई पूर्वाग्रह से ग्रसित हो सकती है.

ऊना की घटना
वाकई में दलित ऐसा ही महसूस करते हैं इसलिए ऊना की घटना देश की चेतना को नहीं बदल सकती. बदलावों के लिए दलितों और उनके दर्द से जुड़ाव होना जरूरी होता है. जाति व्यवस्था ख़त्म करने पर राजनीतिक इच्छाशक्ति और उत्साह का अभाव दिखता है क्योंकि कथित ऊंची जातियों की कई पीढ़ियों ने इस व्यवस्था से फ़ायदा उठाया है. दलित अगर बराबर के नागरिक बन गए तो उन्हें क्या फ़ायदा होगा? गुजरात के ऊना में गाय मारने के आरोप में कथित गोरक्षकों ने दलितों की घंटों पिटाई की थी. इस घटना को एक साल पूरे हो चुके है. उस वक्त ऊना की घटना के बाद बहस के लिए बुलाई गए संसद के विशेष सत्र में बड़े पैमाने पर सीटें खाली रह गई थीं. ये तब था जब मौजूदा एनडीए के पास यूपीए की तुलना में अधिक सांसद हैं और दलितों की बात संसद में रखने के लिए दलित ख़ुद वहां मौजूद हैं.

भारत में छुआछूत
ये सभी दलित सांसद ये बताने में गर्व जताते रहे कि उनकी सरकार ने इस घटना के बाद पीड़ितों को कितनी मेडिकल सहायता और अन्य तरह की मदद मुहैया कराईं. यूपीए के समय में दलितों पर ज़्यादा जघन्य अपराध हुए, इस बात को साबित करने के लिए उनके पास अपने ही सबूत हैं. दुख की बात तो है कि कोई ये सवाल नहीं पूछता कि अभी तक भारत में छुआछूत इतने बड़े पैमाने पर क्यों हैं? ऊना के बाद हर कोई गोरक्षकों के अवैध तरीकों के बारे में बात कर रहा था. प्रधानमंत्री ने भी अपने पीड़ा भरे शब्द अगले दिन व्यक्त किए. उन्हें पता था कि गाय की राजनीति उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा वोट दिला सकती है. बीजेपी की राज्य सरकार इसके बाद ऐसे कड़े कानून ले आई जिससे गायों की सुरक्षा कम और गोरक्षकों की सुरक्षा ज़्यादा हो.

असल तस्वीर
ऊना की घटना ने हर किसी को परेशान किया क्योंकि सबने टीवी और मोबाइल फोन पर दलितों के साथ होने वाली क्रूरता देखी. लेकिन गैर सरकारी संगठन नवसर्जन ट्रस्ट के साल 2010 के सर्वे में एक भयावह तस्वीर सामने लाई है. यह उसी गुजरात की तस्वीर है जहां ऊना की घटना हुई है. अगर सवाल उठता है गुजरात ही क्यों? तो इसलिए क्योंकि इसे एक मॉडल स्टेट की तरह पेश किया गया है. गांवों में रहने वाले 90.2 फ़ीसदी दलित हिंदू होते हुए भी मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सकते. 64 फ़ीसदी पंचायत अपने निर्वाचित दलित सदस्यों के साथ भेदभाव करते हैं. 54 फ़ीसदी राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में दलित बच्चों के लिए मिडडे मिल के वक्त अलग से लाइन लगाई जाती है.

राजनीतिक परिदृश्य
यह 1569 गावों और 98,000 लोगों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट कुछ ठोस तथ्य हैं. नवसर्जन ट्रस्ट को सौराष्ट्र के इलाके में उन 1500 से ज्यादा बच्चों के बारे में पता चला जिन्हें उनके शिक्षक, स्कूल के शौचालय साफ करने के लिए अलग से छांट कर रखे थे. ये मेहतर (साफ-सफाई करने वाले) के बच्चे थे. ये कुछ ऐसी सच्चाई हैं जो हमें टीवी या मोबाइल स्क्रीन पर नहीं दिखती है लेकिन होती हर रोज़ हैं. हालांकि ऊना की घटना ने राजनीतिक परिदृश्य में बहुत असर डाला है. दलितों के बीच साल 1980 में गुजरात के गांवों में काम करते हुए मैंने पाया था कि दलितों को मतदान केंद्र तक अमूमन नहीं पहुंचने दिया जाता था.

ऊना के बाद राजनीति
मुझे वहां दलितों के ऊपर शारीरिक हिंसा के साथ उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी देखने को मिली. और ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि वो ऊंची जातियों के वोट नहीं डालने के फरमान को नहीं मानने की हिम्मत करते थे. यह अभी भी आनंद ज़िले के धर्माज जैसे गांवों में ऐसा ही होता है.
यह गांव प्रभावशाली गैर प्रवासी भारतीयों और बैंक में सौ करोड़ से अधिक राशि जमा करने के लिए जाना जाता है. ऊना और सहारनपुर की घटना के बाद राजनीतिक दल इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जो दलित वोट बैंक पहले उप जातियों में विभाजित था, वो अब दलित पहचान के नाम पर एकजुट हो जाएगा.

एनडीए की छवि को नुक़सान
सभी राजनीतिक दल यह बात बखूबी समझते हैं कि दलित भले ही ‘अछूत’ हो सकते हैं, लेकिन उनके वोट तो काम के हैं. 16.6 फ़ीसदी दलित वोट के बिना कोई भी राजनीतिक दल बहुमत नहीं पा सकता है. इसलिए एनडीए ने पहली बार बौद्ध भिक्षुओं को दलितों को समझाने-बुझाने के काम पर लगाया है. ऊना की घटना के बाद एनडीए की छवि को नुक़सान पहुंचा है. गुजरात में दलितों की आबादी महज 7.01 फ़ीसदी है. वो अकेले अपने दम पर किसी भी बड़े दल की किस्मत बदलने की स्थिति में नहीं है. लेकिन सत्तारूढ़ बीजेपी गुजरात को लेकर आशंकित है क्योंकि यह कभी उसकी प्रयोगशाला रही है. हाल में ग़ैर-दलित वोट में बिखराव देखा गया है.
संविधान से अधिक…
हिंदू राष्ट्र का विचार लोगों की भावनाओं को छूने में कामयाब होता नहीं दिख रहा. जाट, पटेल और मराठा जैसी जो कथित ऊंची जातियां हैं, वो अपने आरक्षण को लेकर अधिक जागरूक दिख रहे हैं न कि हिंदू राष्ट्र के नाम पर बलि का बकरा बनने को लेकर. प्रभावशाली जातियों में भी जो गरीब लोग हैं, उन्हें इस बात का एहसास है कि ऊंची जाति की पहचान भी उनकी आर्थिक स्थिति नहीं सुधार पाई है. यह राजनीति है. दलित जो कि अपमान झेल रहे हैं, वो सरकार कौन बना रहा है इससे अधिक इस बात को लेकर फिक्रमंद है कि जाति और भेदभाव ख़त्म हो. अब सवाल यह है कि देश में संविधान से अधिक जाति की सत्ता क्यों है?

छुआछूत मुक्त समाज? क्या भारत साल 2047 तक, जब वो अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे होने का जश्न मना रहा होगा, तब क्या छूआछूत मुक्त समाज बन पाएगा? दलितों के उभार को ऐतिहासिक तौर पर हमेशा नुकसान पहुंचाया जाता रहा है. इसी सिलसिले में कभी-कभी ऊना जैसी घटना के बाद गुस्सा भी फूट पड़ता है. यह द्वंद्व बना हुआ है कि उन्हें अपमान सहते हुए भी बहुसंख्यकों से जुड़कर रहना होगा या फिर राजनीति से अलग हो र बराबरी के लिए सामाजिक संघर्ष करना बेहतर होगा? इतिहास की दीवारों पर यह बहुत साफ-साफ लिखा हुआ है. अमरीका के अफ्रीकी मूल के लोगों का संघर्ष का अनुभव भी सामने हैं. सिर्फ़ सामाजिक संघर्ष ही बराबरी और सम्मान दे सकता है. दलितों को अपने अधिकारों की लड़ाई ख़ुद लड़नी पड़ेगी. यह लड़ाई पूरा देश नहीं लड़ने वाला.
मार्टिन मैकवान का यह लेख बीबीसी हिंदी से साभार लिया हुआ है. (ये लेखक के निजी विचार है)
असली गोरक्षकों को पहचान पत्र देगी हरियाणा सरकार
हरियाणा। देश में गौ रक्षा को लेकर हत्या, मारपीट आम हो चुकी है जिसमें कई युवकों की जान जा चुकी है और सांप्रदायिक घटनाऐँ भी आये दिन होती रहती हैं. देशभर में गोरक्षकों को लेकर जारी विवाद के बीच हरियाणा की खट्टर सरकार ने बड़ा फैसला किया है.
खबरों के अनुसार हरियाणा की सरकार अब गोरक्षकों को एक खास पहचान पत्र देगी जिससे गोरक्षकों की पहचान आसानी से हो सकेगी. इससे नकली गोरक्षकों को पहचानने में भी आसानी होगी. हरियाणा सरकार जल्द ही पहचान पत्र बांटना शुरू करेगी.
बता दें कि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा और राजनीति ठीक नहीं है. पीएम ने राज्य सरकारों को नकली गोरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. पीएम ने इशारा किया था कि कुछ लोग गोरक्षा के नाम पर अपना बदला ले रहे हैं और अपराध कर रहे हैं.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नागपुर शहर में बीफ ले जाने के शक में एक शख्स की पिटाई का मामला सामने आया था. घटना भारसिंगी गांव की है जहां भीड ने एक व्यक्ति की बीफ ले जाने के शक पर बुरी तरह पिटाई कर दी. इसके अलावा भी हाल के दिनों में गोरक्षकों द्वारा बीफ के नाम पर लोगों को निशाना बनाने की कई घटना सामने आई है. कुछ में तो लोगों की जान भी जा चुकी है तो कुछ समुदायों को जानबूझकर बार बार निशाना बनाया जाता रहा है.
सवर्णों ने तोड़े दलितों के शौचालय, बाहर जाने पर दी मारपीट की धमकी
छतरपुर। एक ओर जहां जातिवाद को खत्म करने की बात की जा रही है. वहीं दूसरी तरफ आज भी कई जगहों पर ये मतभेद जारी है. ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बराखेरा गांव से आया है. गांव में कुछ सवर्णों ने दलितों के शौचालय तोड़ दिए हैं. इतना ही दलितों को बाहर शौच के लिए जाने से भी रोका जा रहा है.
दलित प्रजापति समुदाय की महिलाओं का कहना है कि ऊंची जाति के लोग शौच के लिए बाहर जाने पर हमें पीटने की धमकी दे रहे हैं. वो लोग ना तो हमें हमारे शौचालय में जाने दे रहे हैं और ना ही खुले में. ऐसी स्थिति में हम करें तो करें क्या?
हालत यह है कि ये लोग शौच जाने के लिए घर के पास मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक बराखेरा गांव में सरपंच भी पटेल समुदाय का है. मामले पर जिला पंचायत के सीईओ हर्ष दीक्षित का कहना है कि ‘एक टीम का गठन कर स्थिति को जांचने के लिए भेजा जा चुका है. रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दी जा सकती है.’
अमरनाथ यात्रियों की बस खाई में गिरी, बचाव को आए कश्मीरी मुस्लिम
श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा को गये श्रद्धालुओं पर इस साल आफत आन पड़ी है अभी बीते सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर आतंकियों द्वारा हमले में 8 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी. अब इसके बाद रविवार को जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में अमरनाथ यात्रियों को लेकर जा रही बस जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से फिसलकर खाई में गिर गई, जिससे 17 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई और 29 लोग घायल हो गए.
एक सप्ताह में हुई इन दोनों घटनाओं में एक घटना यह रही कि जब बस हादसे का शिकार हुई तो मदद के लिए घटनास्थल पर सैकड़ों मुस्लिम सबसे पहले पहुंचे, जिन्होंने लगभग एक दर्जन तीर्थयात्रियों का जीवन बचाया.
भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की भावना दिखाते हुए एक गैर सरकारी संगठन जिसमें ज्यादातर मुस्लिम स्वयंसेवक थे, घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे. रामबन-बनिहाल क्षेत्र में ये एनजीओ सड़क हादसे के पीड़ितों की मदद के लिए आगे आता है जिन्होंने कई मौके पर पंहुच कर अब तक 50 से अधिक जानें बचाई हैं.
इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीर्थयात्रियों की मौत होने पर दुख प्रकट किया और मृतकों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है. जेकेएसआरटीसी ने सड़क दुर्घटना की जांच कराने का आदेश दिया है. बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा को जाने वाले यात्रियों के साथ दो दहलाने वाली घटनाऐँ हो चुकीं हैं.
पहले घटना हमले के रुप में रही जिसमें 10 जुलाई को आतंकवादियों ने एक बस पर किया था जिसमें आठ तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी और अब दूसरी घटना सड़क हादसा रही जिसमें 17 यात्रियों की मौत हो गयी.
‘दोनों ओर से दलित उम्मीदवार होना, बाबासाहेब और बसपा की देन’

नई दिल्ली। देश में नए राष्ट्रपति चुनने के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. देश की संसद समेत सभी विधानसभा में वोटिंग की जा रही है. मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच है. लेकिन वोटिंग शुरू होते ही बसपा सुप्रीमो मायावती का एक बड़ा बयान आया है.
मायावती ने अपने बयान में कहा कि यह पहली बार है कि सत्ता और विपक्ष की ओर से दलित उम्मीदवार मैदान में उतारा गया है. जीत या हार किसी की भी हो लेकिन राष्ट्रपति दलित ही होगा. मायावती ने कहा कि यह देन बाबा साहेब अंबेडकर की है, माननीय कांशीराम जी की है और बहुजन समाज पार्टी की है.
बता दें कि मायावती की पार्टी बसपा के लोकसभा में कोई सांसद नहीं हैं, वहीं यूपी में बसपा के 19 विधायक हैं. हालांकि बसपा की ओर से राज्यसभा में 6 सासंद हैं.
गौरतलब है कि एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद मूलत: रूप से उत्तर प्रदेश से ही आते हैं, रामनाथ कोविंद दलित जाति से हैं. कोविंद के उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष ने भी दलित कार्ड चलते हुए पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था.
राष्ट्रपति चुनाव आज, मतदान शुरू
नई दिल्ली। देश के अगले राष्ट्रपति के लिए वोटिंग आज शुरू हो गई है. राष्ट्रपति चुनाव के लिए मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार के बीच है. वोटों की गिनती 20 जुलाई को दिल्ली में होगी, जहां सभी बैलेट बॉक्स लाए जाएंगे. इसी दिन नतीजों का भी ऐलान होगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो जाएगा.
आज संसद भवन और राज्य विधानसभाओं में सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे. इससे पहले बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने समर्थन जुटाने के मकसद से राज्यों के दौरे किए. इस चुनाव में दिलचस्प बात यह है कि बिहार में महागठबंधन में साथ जेडीयू और आरजेडी ने अलग-अलग उम्मीदवारों को वोट करने का फैसला किया है. जेडीयू जहां बिहार के राज्यपाल रहे रामनाथ कोविंद का समर्थन कर रही है वहीं आरजेडी ने मीरा कुमार के समर्थन का फ़ैसला किया है.
समाजवादी पार्टी भी इस मामले में बंटी नज़र आ रही है. समाजवादी पार्टी सांसद विपक्ष के साझा उम्मीदवार के समर्थन वाली बैठक में तो मौजूद थे लेकिन कुछ दिन पहले शिवपाल यादव ने साफ कर दिया कि उनका वोट रामनाथ कोविंद को जाएगा. मुलायम भी कोविंद को ही समर्थन कर सकते हैं.
राष्ट्रपति चुनाव में कुल 4896 वोटर हैं, जिसमें 776 सांसद हैं जबकि 4120 विधायक हैं. खास बात यह है कि इस बार मध्यप्रदेश के बीजेपी विधायक नरोत्तम मिश्रा को आयोग्य ठहराए जाने की वजह से अब कुल वोट 4895 ही रह गया है. राष्ट्रपति चुनाव में कुल पड़ने वाले वोटों की संख्या दस लाख 98 हज़ार 903 है. एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को 63 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है.
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि यह पहली बार है कि दोनों ही उम्मीदवार दलित वर्ग के हैं, उन्होंने कहा कि यह बीएसपी की जीत है. बाबा साहेब अंबेडकर और कांशीराम की जीत है. उन्होंने कहा कि यह हमारी मूवमेंट के लिए जीत है. उन्होंने कहा कि कोई भी जीते राष्ट्रपति दलित होगा.
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मॉनसून सत्र जीएसटी की वर्षा के कारण नई उमंग से भरा होगा. देशवासियों की नजर इस सत्र पर है. उन्होंने उम्मीद जताई की सभी राजनीतिक दल और सांसद देशहित में फैसले लेंगे.
राष्ट्र निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर
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जैश-ए-मोहम्मद के निशाने पर मोदी और योगी
लखनऊ। यूपी विधानसभा में विस्फोटक पदार्थ मिलने के बाद जैश-ए-मोहम्मद के रिकार्डेड टेप से खलबली मच गई है. पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक नए रिकार्डेड टेप के जरिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी गई है. अब इस टेप की जांच यूपी एटीएस के साथ एनआईए कर रही है. वहीं उत्तर प्रदेश विधान भवन में विस्फोटक मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ पर आतंकवादी खतरे की आशंका के तहत सुरक्षा और कड़ी की गई है.
जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के इस टेप में प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बारूद के बजाए दवा और केमिकल से हमला करने का जिक्र है. धमकी भरा यह टेप कश्मीर बेस कैम्प से जैश-ए-मोहम्मद ने जारी किया है. जहां उत्तर प्रदेश एटीएस इस टेप को फर्जी बता रही है, वहीं आईबी से लेकर देश की बड़ी सुरक्षा एजेंसियां इस धमकी को गम्भीरता से लेते हुए जांच कर रही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी संदेश और इसके 36 घंटे के अंदर उत्तर प्रदेश विधान भवन में विस्फोटक मिलने से इस बात की आशंका गहरा जाती है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैश के निशाने पर हैं. बीते दो हफ्ते में प्रधानमंत्री मोदी तथा योगी आदित्यनाथ को यह दूसरी धमकी है.
भारत की संसद पर 2001 में आतंकी हमले का मास्टरमाइंड मसूद अजहर अपने धमकी संदेश में साफ कह रहा है कि अब हमले के लिए पारंपरिक तरीकों जैसे बंदूक, ग्रेनेड और गोलियों को छोड़कर नए और घरेलू तरीकों को अपनाना चाहिए. मसूद अजहर ने हमले के नए तरीकों के लिए खासतौर पर नए उपकरणों जैसे व्हीकल, बिजली, पेट्रोल, फर्टिलाइजर और खासतौर पर ‘दवाइयों’ को इस्तेमाल करने की सलाह दी थी. यूपी विधानसभा में कल मिला विस्फोटक पीईटीएन का दवाइयों के प्रयोग में इस्तेमाल होता है.

