तथागत साबुन पर ऐसे निकला था योगी सरकार का गुस्सा
उत्तर प्रदेश के दलित संगठनों (डायनमिक एक्शन ग्रुप, बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, जन मंच, तथा पीयूसीएल) द्वारा मेरे नेतृत्व में 3 जुलाई, 2017 को लखनऊ प्रेस क्लब में 12 बजे से 4 बजे तक “दलित उत्पीड़न तथा समाधान” विषय पर परिचर्चा तथा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था. इसमें शामिल होने के लिए गुजरात के 43 दलित साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से तथा प्रदेश के अन्य जिलों से कई दलित आ रहे थे. गुजरात के दलित अपने साथ 125 किलो का साबुन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेंट करने के लिए भी ला रहे थे. उनका कहना था कि 5 मई को जब मुख्यमंत्री जी कुशीनगर गए थे तो वहां पर मुसहर बस्ती में दलितों को साबुन तथा शैम्पू बांटा गया था तथा उन्हें आदेशित किया गया था कि वे इससे नहा- धोकर मुख्यमंत्री जी के सामने आयें. गुजरात के दलितों ने इसे दलितों का अपमान माना था तथा इसके प्रत्युत्तर में वे मुख्यमंत्री को लखनऊ में उक्त साबुन जिसे “तथागत साबुन” का नाम दिया गया था, भेंट करना चाहते थे.
2 जुलाई, 2017 को शाम को जब साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन झांसी पहुंची तो पुलिस द्वारा गुजरात से लखनऊ आ रहे 43 दलित जिनमें 11 महिलाएं भी थीं को जबरन ट्रेन से उतार लिया गया. उन्हें रातभर पुलिस हिरासत में रखा तथा अगले दिन सवेरे गुजरात जाने वाली गाड़ी में सामान्य बोगी में भर कर अहमदाबाद भेज दिया तथा उनके द्वारा लाये गए साबुन को ज़ब्त कर लिया गया. इस प्रकार पुलिस द्वारा गुजरात से आये दलितों के जीवन तथा दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण के मौलिक अधिकार का हनन किया गया.
2 जुलाई, 2017 को ही उक्त कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 23 दलित कार्यकर्ता बाहर से लखनऊ पहुंचे थे जिन्हें नेहरु युवा केंद्र में ठहराया गया था. पुलिस ने रात में ही उन्हें नज़रबंद कर लिया तथा उन्हें 3 जुलाई की शाम तक नज़रबंद रख कर छोड़ा. इस प्रकार इन कार्यकर्ताओं के भी जीवन एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण के मौलिक अधिकार का हनन किया गया.
इसी प्रकार 3 जुलाई, 2017 को जब हम लोग घोषित कार्यक्रम के अनुसार 12 बजे प्रेस क्लब लखनऊ पहुंचे तो देखा कि वहां पर भारी मात्रा में पुलिस मौजूद थी. प्रेस क्लब के प्रबंधक श्री बी.सी. जोशी ने पूछने पर बताया कि उन्होंने प्रेस क्लब के सचिव जोखू तिवारी के कहने पर हम लोगों का प्रेस क्लब का आबंटन रद्द कर दिया है और वहां पर कोई भी कार्यक्रम न करने के लिए कहा. हम लोगों ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने कोई भी कारण नहीं बताया. इस पर हम लोग वहां पर बैठ कर अपने अग्रिम कार्यक्रम के बारे में विचार विमर्श करने लगे और तय किया कि अब हम लोग रमेश दीक्षित जी के दारुलशफा स्थित कार्यालय में जाकर बैठेंगे और अगला कार्यक्रम तय करेंगे.
इसके बाद जब हम लोग उठ कर जाने लगे तो पुलिस ने हमें जबरदस्ती बैठा लिया और कहा कि आप लोगों को गिरफ्तार किया जाता है. इस पर मैंने पूछा कि हम लोगों ने क्या अपराध किया है. इस पर उन्होंने हमें बताया कि आप लोग बिना अनुमति के प्रेस क्लब में कार्यक्रम करने जा रहे थे और आप लोगों ने धारा 144 का उल्लंघन करके यहां पर शांति भंग की है. इस पर मैंने उन्हें बताया कि हमारी जानकारी में प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता/गोष्ठी करने हेतु किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है. दूसरे धारा 144 सड़क पर लगती है न कि प्रेस क्लब के अन्दर. इस पर जब उन्होंने पूछा कि अब आप लोग कहाँ जायेंगे तो मैंने उन्हें बताया कि यहाँ पर तो आप लोगों ने दबाव डाल कर हम लोगों का कार्यक्रम रद्द करवा दिया है, अतः अब हम लोग दारुलशफा में दीक्षित जी के कार्यालय में जाकर बैठेंगे और अगला कार्यक्रम बनायेंगे. उस समय पुलिस क्लब में सीओ कैसर बाग़, सिटी मैजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, अपर जिलाधिकारी, निरीक्षक कैसबाग़ तथा अन्य कई अधिकारी मौजूद थे.
जब हम लोग चलने लगे तो उन्होंने हमें घेर लिया और 13.30 बजे 8 लोगों (रमेश चंद दीक्षित, राम कुमार, आशीष अवस्थी, के.के.वत्स, पी.सी. कुरील, डी.के यादव, कुलदीप कुमार बौद्ध तथा एस.आर. दारापुरी) को गिरफ्तार करके बस में बैठा कर पुलिस लाइन ले गये. वहां पर हम लोगों को पता चला कि पुलिस ने हम लोगों को धारा 151 दंड प्रक्रिया संहिता में गिरफ्तार किया था और हमारे ऊपर प्रेस क्लब से निकल कर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया था जो कि एकदम असत्य एवं निराधार है. इसके साथ ही हम लोगों को धारा 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत 20,000 के व्यक्तिगत मुचलके पर 17.30 बजे छोड़ा गया. ऐसा प्रतीत होता है पुलिस ने हम लोगों को गिरफ्तार करने के लिए हम लोगों पर पर झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप लगाया है. इस प्रकार पुलिस ने हम लोगों के ऊपर फर्जी आरोप लगा कर हमें गिरफ्तार करके हमारे जीवन तथा दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार तथा हमारे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन किया है. प्रशासन का यह कार्य हम लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन, कानून एवं सत्ता का दुरूपयोग है.
ट्रैफिक में फंसी पत्रकार ने कहा- कोई कांवड़ियों का इलाज करेगा क्या ?
ऩई दिल्ली। कावड़ यात्रा के कारण इस महीने में दिल्ली औऱ आस पास के क्षेत्रों में भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है. जगह जगह रूट डायवर्ट किया गया है तो कुछ रास्ते को बिल्कुल बंद कर दिया गया जिसके कारण यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है की सावन का महीना होने की वजह से इस वजह बड़ी संख्या में कांवड़िये दिल्ली से होकर गुजर रहे हैं. इस वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की भी स्थिति पैदा हो जाती है.
ऐसे ही एक ट्रैफिक जाम में पत्रकार राणा अय्यूब फंस गई तो उन्होंने कांवड़ियों पर अपनी अपनी भड़ास निकाली. राणा अय्यूब ने ट्वीट कर कहा, ‘ निजामुद्दीन से डोमेस्टिक हवाई अड्डा पहुंचने में दो घंटे लग गये, अपना फ्लाइट लगभग मिस ही कर चुकी थी, क्या कोई इन कांवरियों पर लगाम नहीं सकता जिन्होंने पूरा ट्रैफिक बिगाड़ रखा है.’
बता दें कि निजामुद्दीन से डोमेस्टिक एयरपोर्ट की दूरी लगभग 19 किलोमीटर है, और गुरुवार सुबह दिल्ली में झमाझम बारिश होने की वजह से भी कई इलाकों में जाम लगा हुआ था. इस वजह से कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई. लेकिन राणा अय्यूब ने जब ये ट्वीट किया तो उन्हें कई लोगों का गुस्सा भी झेलना पड़ा.
ट्विटर पर कृष्णा नाम के एक यूजर ने सड़क पर नमाज पढ़ने वाले लोगों की तस्वीर लगा कर लिखा, ‘एयरपोर्ट जा रही मैडम का रास्ता रोकते कांवड़िये.’ अजहर नाम के शख्स ने लिखा, ‘कांवडियों को दोष देना गलत है, सावन होने की वजह से आपको पता होगा कि ये कांवड़ यात्रा का मौसम है, इसी के मुताबिक आपको प्लान करना चाहिए था.’ आदित्य त्रिवेदी नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘जाम कांवड़ियों की वजह से नहीं, बारिश की वजह से लगी है, आप ट्रैफिक के मुद्दे को भी कम्युनल क्यों बनाना चाहती हैं.’
रामनाथ कोविंद बने भारत के 14वें राष्ट्रपति
नई दिल्ली। रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे. गुरुवार को हुई मतगणना के बाद उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया है. कोविंद 65.65 प्रतिशत वोटों से जीत गए हैं. यह जीत देश के साथ उत्तर प्रदेश के लिए भी बहुत अहम है. राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत पहले ही सुनिश्चित कर चुके थे. अब वो 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.
अब तक 14 में से 9 प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश ने आज देश को राष्ट्रपति भी दे दिया. अभी तक उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री तो कई बने पर राष्ट्रपति बनाने का सौभाग्य प्रदेश को हासिल नहीं हुआ था. बिहार को यह गौरव देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद दे चुके हैं. यूपीए प्रत्याशी मीरा कुमार यदि जीतती, तो वह बिहार से बनने वाली दूसरी राष्ट्रपति होतीं, साथ ही देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति भी होतीं.
जातीय समीकरण के हिसाब से भी यह राष्ट्रपति चुनाव बहुत अहम था. दलित वर्ग से आने वाले केआर नारायणन पहले राष्ट्रपति थे. उनके बाद यह दूसरी बार था, जब एक साथ दो दलित नेता राष्ट्रपति चुनाव में आने सामने थे.
देश में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बड़े बदलाव का सपना देख रही भाजपा के लिए कोविंद की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अब तक उनकी पार्टी का कोई नेता देश के सर्वोच्च पद पर नहीं बैठा था.पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद के लिए चुना था और वो जीते भी थे, लेकिन वह भाजपा या एनडीए में कभी किसी पद पर नहीं रहे थे.
एक सामान्य दलित परिवार के बेटे की देश के प्रथम नागरिक तक का उनका सफर बेहद प्रेरणास्पद है. कानपुर देहात के परौंखा गांव के रहनें वाले कोविंद को चुनाव से पहले ही 63 प्रतिशत वोटों का समर्थन प्राप्त हो चुका था. जिससे उनकी जीत लगभग तय थी. चुनाव परिणाम के बाद होने वाले जश्न और शपथ ग्रहण समारोह के लिए उनके परिजन गांव से दिल्ली पहुंच गए हैं. नए राष्ट्रपति 25 जुलाई से अपना पदभार ग्रहण कर लेंगे.
कोठे से छुड़ाकर बांधा सात जन्मों का बंधन
दिल्ली। आज के दौर में यह कहानी फिल्मी सी मालूम होती है पर यह भी सच है कि प्यार की ताकत के साथ लोग नयी मिसाल कायम करते हैं ऐसी ही एक मिसाल सामने आयी है. जिसमें दिल्ली के रहने वाले एक युवक को जीबी रोड के कोठे में एक नेपाली युवती से प्यार हो गया जिसके बाद युवक ने उस युवती को कोठे से छुड़ाने की कसम खा ली. उसने पुलिस व महिला आयोग से युवती को छुड़ाने की गुहार लगायी, जिसमें कामयाबी प्राप्त हुई.
बता दें कि ये फिल्मी कहानी लगने वाली घटना दो प्यार करने वालों के संघर्ष की सच्चाई है. 16 जुलाई को आर्य समाज मंदिर में ब्याह रचाने के बाद प्रेमी जोड़े ने कोर्ट मैरिज कर ली. बीते माह प्रेमी की गुहार के बाद दिल्ली महिला आयोग ने पुलिस के साथ छापेमारी कर युवती को जीबी रोड की बदनाम गलियों से बाहर निकाला था जिसके बाद राजधानी के एक आर्य समाज मंदिर में हुई इस शादी में लड़के के परिवार वालो और आसपास के लोगों ने भी हिस्सा लिया.
इससे पहले युवक ने महिला आयोग पहुंचकर बताया था कि वह जीबी रोड के कोठे पर रहने वाली एक युवती से प्यार करता है और उसके साथ जिंदगी बिताना चाहता है. जिसके बाद आयोग की टीम ने पुलिस और एनजीओ शक्तिवाहिनी के साथ मिलकर लड़की को कोठे नंबर-68 से छुड़ाया था. शादी के बाद नवदंपत्ति बुधवार को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से मिलने पहुंचा और दोनों ने बताया कि वे शादी करके बेहद खुश हैं.
नवदंपत्ति ने मालीवाल को जानकारी देते हुए बताया की जीबी रोड पर युवतियों से जबरन काम कराया जाता है. लड़की के विरोध करने पर उन्हें मारा-पीटा तक जाता है. लड़के ने कहा कि वह चाहता है कि समाज के और लोग भी आगे आएं और ऐसी महिलाओं को नया जीवन दें.
वोट बैंक साधने के लिए दलित के घर भोजन करेंगे अमित शाह
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तीन दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान एक दिन दलित के यहां भोजन करेंगे. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने बताया की अमित शाह राजस्थान के तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे है और शाह अपने प्रवास के दौरान एक दिन दलित के यहां भोजन करेंगे.
हालांकि उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि वह किस दलित के यहां और कब भोजन करेंगे तथा उनके साथ कौन-कौन से जनप्रतिनिधि होंगे. उल्लेखनीय है कि पार्टी द्वारा दलित वोट बैंक को साधने के लिये ऐसे कायर्क्रम आयोजित किये जा रहे है. इसके तहत शाह एवं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी अन्य प्रदेशों में दलितों के यहां भोजन कर चुके है.
समाचार जगत के मुताबिक पार्टी सूत्रों ने बताया कि अमित शाह के दलित के यहां भोजन करने के संबंध में पार्टी ने विभिन्न स्थानों पर चार दलित परिवारों का चयन किया है और सुरक्षा बलों की ओर से इन स्थानों का सर्वे भी कर लिया गया है. बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों के कारण अभी यह खुलासा नही किया गया है कि शाह किस दलित के यहां और कब भोजन करेंगें.
मायावती ने दोबारा लिखकर दिया इस्तीफा, हुआ मंजूर

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती का राज्यसभा से इस्तीफा मंजूर हो गया है. वह इस सिलसिले में दोबारा उपराष्ट्रपति से मिली थीं. वहां पर उन्होंने एक लाइन का इस्तीफा उनको दिया. उसके बाद इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया. दरअसल इससे पहले तीन पेज का अपना इस्तीफा उन्होंने सभापति से मिलकर दिया था लेकिन उस पर फैसला नहीं हो पाया. उसकी वजह यह बताई गई कि उनके द्वारा दिया गया इस्तीफा तयशुदा प्रारूप में नहीं था. इसलिए मायावती को दूसरी बार एक लाइन में अपना इस्तीफा तयशुदा रूप में देना पड़ा, जिसको स्वीकार कर लिया गया.
मायावती ने मंगलवार शाम को सभापति हामिद अंसारी से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा था. उन्होंने तीन पेज में अपना इस्तीफा सौंपा है. पत्र में उन्होंने मुख्य रूप से दो बातों पर आपत्ति जताई है. एक-उन्हें सत्ता पक्ष के मंत्रियों और सदस्यों ने सदन में बोलने से रोका. दूसरा-कार्य स्थगन के नोटिस पर बोलने के लिए तीन मिनट की समय सीमा किसी नियम में तय नहीं है.
इस मुद्दे पर सदन में काफी हंगामा मचा. उसके बाद बुधवार को राज्यसभा के सभापति पीजे कुरियन ने मायावती से अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की. सभापति ने कहा कि सदन की इच्छा है कि मायावती अपना इस्तीफा वापस लें.
गौरतलब है कि सहारनपुर हिंसा पर सदन में न बोल पाने के कारण मायावती ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. तीन पेज का अपना इस्तीफा उन्होंने सभापति से मिलकर दिया. मायावती इस बात से नाराज थीं कि शून्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलितों पर हुए अत्याचारों पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश करने के बाद उन्हें बोलने के लिए सिर्फ तीन मिनट का समय दिया गया.
दलित समाज की चेतना कब जागेगी?
सीवर में लोगों और शहरों की गंदगी साफ़ करने वाले कर्मी सालाना सैकड़ों की संख्या में मर रहे हैं, सालाना हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मजदूरों की मजदूरी और रोजगार के ठिकाने नहीं हैं. पंद्रह लाख रोजगार इसी साल खत्म कर दिए गये. नोटबंदी के बाद से किसान मजदूर और छोटे व्यापारी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाए हैं. इस पर तुर्रा ये कि आगे बेरोजगारी और सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ता ही जाने वाला है.
इसका भारत की नैतिकता और सभ्यता से कोई संबंध है?
इसे ऐसे देखिये, आज जब इतने किसान मर रहे हैं और इतने सफाई कर्मी गटर साफ़ करते हुए मारे जा रहे हैं. सामाजिक वैमनस्य और अविश्वास बढ़ता जा रहा है. तब भी इस समाज की सामूहिक चेतना में धर्मगुरुओं, नेताओं, समाज के ठेकेदारों के मन में कोई सवाल नहीं उठ रहा है. समाज में एक आम आदमी अपने ही जैसे लोगों के रोज इस तरह मरते जाने पर कोई दुख नहीं हो रहा है.
इसका सीधा मतलब ये है कि ये एक सभ्य समाज नहीं है. भारत का समाज असल में बहुत ही स्वार्थी और विभाजित या एकदूसरे का शोषण करने वाली जमातों की एक बर्बर भीड़ है. इसमें सामूहिक हित सार्वजनिक सम्पत्ति, सामूहिक हित के साझे प्रयास या एक साझे भविष्य की कल्पना तक नहीं है.
सोचिये आज मीडिया, इन्टरनेट, कम्प्यूटर और यूरोपीय शिक्षा और ज्ञान विज्ञान के आने के बावजूद भारतीय समाज की सभ्यता की ये हालत है तो इन्होने अतीत में मध्यकाल में या प्राचीन इतिहास में क्या-क्या न किया होगा? सोचकर ही रूह कांप उठती है. कैसी हैवानियत न बरपाई होगी इन्होंने अपनी गरीब जनता और स्त्रीयों पर.
सती प्रथा, विधवाओं का शोषण, शूद्रों का उत्पीड़न, देवदासी प्रथा, हरिबोल प्रथा, बहु झुठाई प्रथा, बेगार, बंधुआ मजदूरी, दास की खरीदी विक्रय, जमीन के साथ मजदूरों तक को बेचने की परम्परा, स्त्रियों शूद्रों को शिक्षा से वंचित रखने के धार्मिक आदेश, एक ही अपराध के लिए अलग अलग जातियों के लिए अलग दंड विधान, इत्यादि न जाने कितनी ही बातें हैं जो ब्रिटिश राज के दौर में रिकार्ड की गयी हैं. अगर न की जातीं तो इन्हें भी पुराणों की गप्प में घोट पीसकर किसी मिथक या परियों की कहानी में छुपा दिया जाता.
अब इस बात को दूसरे ढंग से देखिये. ये मामला इतिहास लेखन और इतिहास बोध से भी गहराई से जुड़ता है. ऐसा असभ्य, बर्बर और पाखंडी समाज अपना इतिहास किस मुंह से लिखेगा? उस इतिहास में क्या लिखेगा?
भारत में इतिहास नहीं लिखा गया. इस सवाल का उत्तर इसी बात में छिपा है. चोर लुटेरे या हत्यारे अपना इतिहास लिखेंगे भी कैसे? अपने ही बहुसंख्य लोगों का खून चूसने वाली सत्ताएं अपना इतिहास कैसे, किसके लिए और क्यों लिखेंगी?
मेरे लिए इतिहास बोध असल में नैतिकता बोध से जुड़ा हुआ सवाल है. एक अनैतिक समाज एक स्वस्थ इतिहास बोध को न तो जन्म दे सकता है न उसे बनाये रख सकता है. इसीलिये वो अपने इतिहास से अपने ही क्रमिक विकास के चरणों से शिक्षा नहीं ले सकता और बार बार उन्ही गलतियों को दोहराता है.
(लेखक के निजी विचार हैं)शूटिंग के दौरान घायल हुई कंगना, माथे पर लगे 15 टांके
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनोट की आने वाली फिल्म ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी’ के सेट पर गंभीर रूप से चोट लग गई है.यह हादसा तब हुआ जब हैदराबाद में कंगना एक एक्शन सीन शूट कर रही थीं. जानकारी के मुताबिक, कंगना अपने को-स्टार निहार पांड्या के साथ शूटिंग कर रही थीं.
एक एक्शन सीन के दौरान दोनों तलवारबाजी कर रहे थे, तभी गलती से तलवार कंगना के सिर पर जा लगी और उनके सिर से खून बहने लगा. कंगना को फौरन हैदराबाद के अपोलो अस्पताल ले जाया गया. वहां भर्ती करने के बाद करने के बाद कंगना को माथे पर 15 टांके लगाए गए और पांच से छह दिनों तक आराम करने की सलाह दी गई है. कंगना अब अगले हफ्ते ही फिल्म की शूटिंग पर दोबारा लौट सकेंगी.
जानकारी देते हुए ‘मणिकर्णिका–द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने बताया की बुधवार की शाम तकरीबन चार बजे के आसपास कंगना रनौत और निहार पंड्या के बीच तलवारबाजी का सीन फिल्माया जा रहा था. सीन के मुताबिक, कंगना को झुककर निहार के तलवार के वार से बचना था, मगर टाइमिंग में गड़बड़ी के चलते कंगना समय पर ऐसा नहीं कर पाईं और कंगना को माथे पर ये चोट आई.”
कमल ने आगे बताया कि इस हादसे के बाद फिल्म की शूटिंग फौरन रोक दी गई और कंगना को कार के जरिए अपोलो अस्पताल ले जाया गया. आधे घंट की ड्राइव के बाद निर्माता कमल जैन ने कंगना को अस्पताल पहुंचकर उन्हें वहां भर्ती कराया. कमल के मुताबिक, घायल होने के बाद भी कंगना ने हौसला बनाए रखा और अगले दिन शूटिंग पर लौटकर बचा हुआ सीन पूरा करने की बात कही, मगर डॉक्टर की सलाह के अनुसार फिलहाल कंगना अब आराम करेंगी और अगले हफ्ते ही फिल्म की शूटिंग पर लौटेंगी.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपा सांसद के नेमप्लेट पर पोती कालिख
नई दिल्ली। कल राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने संसद में बयान दिया था. जिसमें उन पर हिन्दू देवी देवताओँ का अपमान किए जाने का आऱोप लगा. इस बयान को आधार बनाते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार की सुबह उनके घर के बाहर लगे नेमप्लेट पर कालिख पोत दी.
बता दें की राज्यसभा में सपा सांसद नरेश अग्रवाल के बयान पर जहां बवाल मचा है, वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं. गुरुवार को सुबह भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने नरेश अग्रवाल के आवास के बाहर लगे नेमप्लेट पर कालिख पोत दिया. इतना ही नहीं विवादित बयान के कारण अग्रवाल के आफिस के फोन पर धमकी भरे काल भी आ रहे हैं.
गौरतलब है कि बुधवार को राज्यसभा में आरोप प्रत्यारोप के दौर में नरेश अग्रवाल ने हिंदू देवी देवताओं पर विवादित टिप्पणी की थी. इस पर सत्ता पक्ष के आक्रामक तेवर ने काफी देर के लिए स्थिति अनियंत्रित कर दी थी. सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी जिसके बाद सपा नेता नरेश अग्रवाल को अपनी विवादित टिप्पणी के लिए माफी मांगनी पड़ी. इसके बाद ही सदन की कार्यवाही चल सकी.
राज्यसभा में हंगामे के दौरान ही वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नरेश अग्रवाल ने हिंदू देवी देवताओं के नाम के साथ शराब को जोड़ा है. इससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं. अगर यही बात उन्होंने सदन के बाहर कही होती तो उन पर केस दर्ज हो सकता था. तल्ख अंदाज में जेटली ने पूछा, क्या आप किसी और धर्म के बारे में इस तरह की टिप्पणी करने की धृष्टता कर सकते हैं?
इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया और सांसद को चारो और से घेरा जाने लगा जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां तक मिलने लगी हैं.
शिमला: गहरी खाई में गिरी बस, 28 की मौत
शिमला। बारिश के मौसम में पहाड़ी जनजीवन पहले से ही अस्त व्यस्त है ऐसे में एक बडे हादसे की खबर आयी है. शिमला के रामपुर इलाके में एक बस के खाईं में गिर जाने से 28 यात्रियों की मौत हो गई है. मिली जानकारी के मुताबिक बस सोलन से किन्नौर जा रही थी जहां सड़क पर ड्राईवर का संतुलन बिगड़ गया औऱ बस खाई में गिर गई.
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम मौके पर पहुंच गए हैं. कई घायलों को निकालकर पास के ही खनेरी के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है. यह हादसा शिमला के रामपुर में हुआ जहां 28 लोग मारे गये और 9 लोग घायल हैं. राहत और बचाव अभियान जारी है.
पुलिस ने बताया कि इस मार्ग पर चलने वाली ज्यादातर बसों में आम तौर पर 35 से 40 यात्री सवार रहते हैं जिनमें से ज्यादातर किन्नौर के स्थानीय लोग, कर्मचारी और छात्र शामिल हैं. चालक के वाहन पर से नियंत्रण खो देने के कारण बस रामपुर के पास सतलुज नदी के किनारे स्थित पहाड़ी से लगभग 250 मीटर गहरी खाई में गिर गयी. दुर्घटनास्थल रामपुर शहर से महज पांच किलोमीटर दूर है. मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है.
BMC की पोल खोलने वाली RJ को 500 करोड़ का नोटिस
मुंबई। अपने फनी गाने से मुंबई BMC की पोल खोलने वाली फेमस रेडियो जॉकी मलिष्का बीएमसी के नोटिस का शिकार बन गई हैं. उनका गाना वायरल होने के बाद बीएमसी ने आरजे के घर जांच की थी जहां पर कथित रूप से उन्हें डेंगू का लार्वा मिला. इसी बात को लेकर मलिष्का को नोटिस दिया गया है.
बता दें की मलिष्का ने हाल ही में मुंबई में सड़कों के गड्ढों को लेकर बीएमसी पर निशाना साधते हुए एक गाना बनाया था. इस वीडियो से बीएमसी को काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी जिसके बाद पिछले 25 साल से BMC की कुर्सी पर बैठी शिवसेना को यह वीडियो नागवार गुजरा था.
गौरतलब है की हर साल बारिश में सड़कों पर गड्ढों की भरमार और उसमें भरे पानी से लोगों को जीना मुश्किल हो जाता है जिससे मुंबई के लोग बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं. इसी मुद्दे पर मलिष्का ने वीडियो के जरिए मुंबई के लोगों से पूछा था कि क्या उन्हें बीएमसी पर भरोसा नहीं है. वीडियो को लोगों ने काफी पसंद किया था.
इस मामले के साथ ही BMC ने डेंगू और मानसून की बीमारियों को रोकने के लिए अभियान भी शुरू कर दिया. इस लपेटे में आरजे मलिष्का का घर भी आ गया. 381B के तहत नोटिस, मलिष्का की मम्मी लिली मेंडोसा के नाम पर जारी हुआ है और इसके लिए मलिष्का की फैमिली को 2000 से 10 हजार रुपये के बीच का फाइन भी देना होगा. पर शिवसेना इतने से भी नहीं मानने वाली शिवसेना ने BMC कमिश्नर को 500 करोड़ का मानहानि का केस प्राइवेट रेडियो चैनल के खिलाफ दायर करने को कहा है.
बताया जा रहा है कि पिछले 25 साल से BMC को चला रही शिवसेना ने इसे निगम की बेइज्जती के तौर पर लिया है. पार्टी के कॉरपोरेटर किशोरी पेंडेनाकर का कहना है कि उस वीडियो में शहर की सेवा में 24 घंटे लगे रहने वाले कर्मचारियों का अपमान किया गया है. हम रेडियो चैनल के खिलाफ एक्शन लेंगे लेकिन दूसरी ओऱ आरजे के समर्थन में कई टीवी सेलेब्रिटी आ गये हैं जो आरजे की जमकर तारीफ कर रहे हैं.
गांधीजी की गोडसे से जान बचाने वाले स्वतंत्रता सेनानी का निधन
सतारा। स्वतंत्रता सेनानी भीकू दाजी भिलारे अब इस दुनिया में नहीं रहे. वह भिलारे गुरुजी के नाम से लोकप्रिय थे और 1944 में उस वक्त महात्मा गांधी की जान बचाई थी, जब पंचगनी में नाथूराम गोडसे ने उनको मारने की कोशिश की थी.
भिलारे दाजी ने बुधवार को भिलार में अंतिम सांसें ली, उनकी उम्र 98 वर्ष थी. सतारा जिले के महाबलेश्वर के भिलार गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया था कि किस तरह से उन्होंने गोडसे से बापू की जान बचाई थी. उन्होंने कहा था कि पंचगनी में महात्मा गांधी की शाम की प्रार्थना सभा में सभी को आने की इजाजत थी. उस दिन उनके साथी उषा मेहता, प्यारेलाल, अरुणा असफ सहित कई लोग मौजूद थे. तभी गोडसे चाकू लेकर उनकी ओर दौड़ा. उसने कहा कि मेरे कुछ सवाल हैं. तभी मैंने उसे रोका और उसके हाथ से चाकू छीन लिया, मगर उसे जाने दिया.
महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने भी इस बात को माना है कि भिलारे दाजी और मणिशंकर पुरोहित ने गोडसे को उसकी योजना में सफल नहीं होने दिया था. हालांकि कपूर कमीशन का इस मामले में कहना है कि 1944 की घटना की पुष्टि नहीं की जा सकती है. इस बात पर भी सवाल है कि इस तरह की कोई घटना हुई भी थी या नहीं. तुषार गांधी ने अपनी नई किताब में किताब में दावा किया है कि कैसे कट्टरपंथियों ने राष्ट्रपिता को मारने की कई कोशिशें कीं और बाद में वे कामयाब भी हो गए. हालांकि इस बात का इतिहास में कहीं जिक्र नहीं है कि भिलारे ने गोडसे के हमले में गांधीजी की जान बचाई थी.
महात्मा गांधी की जान बचाने वाले भीखू दाजी भिलारे नहीं रहे. भीखू ने दावा किया था कि उन्होंने 1944 में नाथूराम गोडसे के हमले से गांधीजी को बचाया था. भीखू कुछ वक्त से बीमार चल रहे थे.
भाजपा की करारी हार के बाद पांच नेताओं का इस्तीफा
दीव। भाजपा शासित राज्यों में भाजपा का किला अब दरकने लगा है जिसका ताजा उदहारण दमन और दीव के दीव नगर निगम चुनावों में देखने को मिला जहां पार्टी को हार के बाद बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. दीव जिला पंचायत अध्यक्ष समेत पांच लोगों ने इस हफ्ते की शुरुआत में बीजेपी से किनारा कर लिया. इस सामूहिक इस्तीफे के बाद बीजेपी की जिला पंचायत की सत्ता को करारा झटका लगा है. इस पर बीजेपी राज्य चीफ गोपाल टंडेल का कहना है कि फिलहाल किसी भी बीजेपी नेता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है लेकिन जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा.
दीव जिला पंचायत अध्यक्ष शशिकांत सोलंकी समेत उपाध्यक्ष अश्विनी बामनिया और जिला पंचायत सदस्य पूजा पंजानी, धनीबेन सोलंकी और जेंतीलाल सोमालाल ने सोमवार को दीव प्रदेश अध्यक्ष बिपिन शाह को अपना इस्तीफा दिया. शाह ने इन लोगों का इस्तीफा मंजूर करते हुए उसे टंडेल के पास भेज दिया. इसके एक घंटे बाद शाह ने भी पंचायत चुनाव के हार की जिम्मेदारी अपने सिर लेते हुए दीव यूनिट चीफ पद से इस्तीफा दे दिया.
इस महीने के शुरुआत में दीव में नगर निगम के चुनाव हुए थे जिसमें कांग्रेस ने 13 सीटों में से 10 सीटों पर अपना कब्जा जमाया. इन चुनावों में बीजेपी को केवल तीन सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा था. जिस दिन इन चुनावों के नतीजे आए थे उसी दिन हार की जिम्मेदारी लेते हुए और नैतिक कृतव्य की बात करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष किरित वजा ने इस्तीफा दे दिया था.
जानकारी देते हुए बुधवार को शशिकांत सोलंकी ने कहा की पार्टी मुझे जिला पंचायत के अध्यक्ष पद से हटाना चाहती है, जबकि मैंने नगर निगम चुनावों में पार्टी के सभी उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन किया था. हम अब बीजेपी के साथ जुड़े नहीं रह सकते इसलिए हम किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में शामिल होने के लिए जा रहे है.
70 साल से बाल्टी और ट्यूब से नदी पार कर रहे हैं इस गांव के लोग…
जादूगोडा। देश को आजाद हुए 70 साल हो गए है. आजादी से लेकर अब तक केंद्र और राज्य में भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकार रह चुकीं है. दोनों पार्टियों के अलावा विभिन्न राज्यों में स्थापित अन्य पार्टियों ने सिर्फ दस्तावेजी काम किए है. व्यवहारिकता और धरातल पर नहीं. जिसका परिणाम यह है कि आज भी भारत में आदिवासियों की परिस्थितियों में कुछ भी सुधार नहीं हुआ है. उनके लिए न तो केंद्र सरकार कुछ कर रही है और न ही राज्य सरकार. आलम यह है कि आदिवासियों को अपने हर काम के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है.
हम आपको आज ऐसे आदिवासी गांव की परिस्थितियों से अवगत कराएंगे. इस गांव में आने-जाने का कोई साधन नहीं है. यहां के लोगों को हर दिन जान हथेली पर रख कर नदी पार करनी पड़ती है. अगर वो ऐसा नहीं करें तो उन्हें आने-जाने के लिए कम से कम 20 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है. नदी के एक किनारे पर जादूगोड़ा कस्बा है जो अपनी यूरेनियम की खानों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है. वहीं नदी के दूसरी ओर स्वाशपुर गांव स्थित है. हैरानी की बात है कि इस गांव के लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए अधिकारियों ने कभी कच्चा पुल बनाने तक की भी बात नहीं सोची.
झारखंड में जमशेदपुर से महज 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव स्वाशपुर. कर्रा नदी के किनारे बसे इस गांव की करीब एक हजार की आबादी को आजादी के सात दशक बाद भी विकास की रोशनी पहुंचने का इंतजार है. गांव से मात्र 500 फीट दूर नदी के उस पार जादूगोड़ा बाजार और बच्चों का स्कूल है. यहां बच्चों के लिए स्कूल जाना हो या किसी बीमार बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाना, हर काम के लिए नदी को पार करने के अलावा कोई चारा नहीं है. नदी पार करने के लिए ट्रक की ट्यूब, बर्तन, लकड़ी के फट्टों आदि का सहारा लिया जाता है. बीमार व्यक्ति को नदी पार कराने के लिए चारपाई को बड़ी ट्यूबों के साथ बांधा जाता है. छोटे बच्चों को पतीलों या बाल्टी में बिठा कर नदी पार कराई जाती है.
ताज्जुब की बात है कि इस गांव की सुध लेने के लिए कभी कोई नेता या प्रशासन के अधिकारी क्यों सामने नहीं आए. वो भी ऐसी स्थिति में जब प्रधानमंत्री ने सांसदों से हर साल एक गांव को गोद लेकर उसे आदर्श गांव बनाने की अपील कर रखी है.
गांव के लोगों का कहना है कि कर्रा नदी का पानी प्रदूषित होने की वजह से लोगों को चर्म रोग समेत कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. स्वाशपुर के निवासी राजू महतो का कहना है कि गांव के लोग 60 साल से ऐसे ही हालात देख रहे हैं. वहीं शिवनंदन महतो का कहना है कि जादूगोड़ा से स्वाशपुर सिर्फ जीरो किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन बीच में कर्रा नदी की वजह से दोनों तरफ दो अलग-अलग दुनिया बसी दिखती हैं.
ग्रामीणों की नदी पर पुल की मांग वर्षो पुरानी है. गांव के ग्रामीण सुनंदन महतो बताते है कि यूसीआइएल कंपनी भी सीएसआर के तहत पहले नाव दी थी पर नाव में छेद हो जाने के कारण बीते दो वर्षो से वे इसी तरह बरसात में नदी को पार करते हैं. अब इंतज़ार इस बात का कि क्या सूबे के मुखिया रघुवर दास इन के लिए कुछ करेंगे या यह सिलसिला जारी रहेगा. क्योंकि भारत को आज़ाद हुये केवल 70 साल ही तो गुज़रे हैं?
अब SC/ST को आसानी से मिलेंगे पेट्रोल पंप
नई दिल्ली। दलित वर्ग के लोगों को सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से पेट्रोल पंप देने की योजना तो काफी दिनों से है लेकिन उस पर गंभीरता से अमल नहीं होता है. अब केंद्र सरकार ने इस संबंध में नियमों का गंभीरता से लागू करना शुरु किया है. नतीजा यह है कि वर्ष 2014 से पहले 60 वर्षो में इन वर्गों को महज 11 फीसदी पेट्रोल पंप ही मिल पाए थे लेकिन पिछले तीन वर्षो में एससी एसटी व महिलाओं को 25 फीसद पेट्रोल पंप दिए गए हैं. इसी तरह से सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से अस्थायी तौर पर एससी व एसटी को दिए जाने वाले पेट्रोल पंपों से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जा रहा है जिससे दलित लोगों तक भी पेट्रोल पंप बड़ी संख्या में पंहुच सके.
यह जानकारी पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने यहां एससी एसटी व महिलाओं को दिए जाने वाले कोको (कंपनी के अधिकार वाले व कंपनी की तरफ से संचालित) पेट्रोल पंपों के आवंटन से जुड़े एक कार्यक्रम में दी. कोको योजना के तहत सरकारी तेल कंपनियां अस्थायी तौर पर अपने पेट्रोल पंप एससी व एसटी को देती है.
जानकारी देते हुए प्रधान ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों की तरफ से पेट्रोल पंप का आशय पत्र जारी किये जाने के बावजूद एससी एसटी या महिलाओं को वास्तविक तौर पर पेट्रोल पंप आवंटित होने में कई तरह की दिक्कतें आ रही थी. केंद्र सरकार ने इन दिक्कतों को अब दूर कर दिया है. इन श्रेणी के लोगों को कुल 525 पेट्रोल पंप आवंटित किये जाने हैं. 195 एससी एसटी व महिलाओं का चयन भी कर लिया गया है और इन्हें धीरे धीरे पेट्रोल पंप आवंटित किए जाएंगे. इस योजना के तहत चयनित व्यक्तियों को पेट्रोल पंप चलाने के लिए हरसंभव मदद दी जाती है जिसको पूर्णत अमल में लाया जायेगा.
कौन बनेगा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद या मीरा कुमार, रिजल्ट आज
नई दिल्ली। रायसीना हिल की गद्दी पर रामनाथ कोविंद बैठेंगे या मीरा कुमार, इसका फैसला आज शाम 5 तक हो जाएगा. राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतों की गिनती 11 बजे सुबह शुरू होगी, जिसके लिए मतपेटियां संसद भवन पहुंच चुकी हैं. मतगणना की तैयारी का जिम्मा लोकसभा के महासचिव अनूप मिश्रा के पास है.
देश के 14 वें राष्ट्रपति को चुनने के लिए 17 जुलाई को वोट डाले गये थे और करीब-करीब 100 प्रतिशत मतदान हुआ था. राष्ट्रपति चुनाव में 776 सांसदों और 4,120 विधायकों को मत डालने का अधिकार था और निर्वाचक मंडल के कुल मतों की कीमत 10,98,903 है.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का पलड़ा भारी माना जा रहा है, जिनका मुख्य रूप से कांग्रेस के नेतृत्व में 17 विपक्षी दलों की संयुक्त उम्मीदवार लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार से मुकाबला है.
बीजेपी उम्मीदवार कोविंद को एनडीए से अलग भी कई दलों ने समर्थन देने की घोषणा की है और कुल मिलाकर उन्हें 63 फीसदी वोट मिलने की उम्मीद है. अगर एनडीए के उम्मीदवार कोविंद चुनाव जीतते हैं तो वह के. आर. नारायणन के बाद देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति होंगे. मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई को समाप्त हो रहा है.
जल्द मां बन सकती हैं सनी लियोनी
मुंबई। अभिनेत्री सनी लियोनी ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि वह जल्द ही मां बन सकती हैं. सनी और उनके पति डेनियल जल्द ही ये खुशखबरी दुनिया से साझा कर सकते हैं.
सनी लियोनी ने एक एंटरटेनमेंट चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि इस समय मां बनना शारीरिक रूप से उनके लिए मुश्किल हो सकता है. उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में बहुत कुछ हो रहा है. लियोनी ने कहा, “कौन जानता है कि कुछ दिनों में मैं आपके सामने हाथ में एक बच्चे को लेकर आऊं और हर कोई शॉक्ड रह जाए कि ये बच्चा कहां से आया.”
सनी के इस बयान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह सेरोगेसी की मदद से मां बन सकती हैं. सेरोगेसी का प्रचलन फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ रहा है और कई सितारे इसकी मदद से संतान सुख हासिल कर चुके हैं.
शाहरुख खान, आमिर खान, तुषार कपूर, करण जौहर के बाद हाल ही में कॉमेडियन कृष्णा अभिषेक और उनकी पत्नी कश्मीरा सरोगेसी की मदद से जुड़वां बच्चों के पेरेंट्स बने हैं 
