दमदार मूवी है ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’, पढ़ें रिव्यू

नई दिल्ली। ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ फिल्म में निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव ने फिल्म में महिलाओं की मन में रह जाने वाले भावनाओं को परदे पर उभारा है.

अलंकृता ने सफलता पूर्वक 18 से 55 साल तक की चार महिलाओं की समानांतर कहानी दिखाई है. उम्र के अपने-अपने पड़ाव पर जिन्दगी जी रही ये चारों महिलाएं प्यार और स्वछन्दता की भूखी हैं. निर्देशक ने शायद यह बताने की कोशिश की है कि ये सिर्फ इन चार महिलाओं की ही नहीं बल्कि हर महिला की कहानी है.

इस फिल्‍म में रिहाना ( पलाबिता बोरठाकुर) बुर्के में कैद, अपने सपनों और चाहतों को परिवार की परंपराओं के बंधनों से आजाद करना चाहती हैं, वहीं दूसरी तरफ लीला (आहाना कुमरा) एक ब्यूटी पार्लर चलती है, पर उसके सपने भोपाल की तंग गलियों से निकलना चाहते हैं. तीसरी महिला हैं बुआ जी (रत्ना पाठक शाह ) जो की विधवा हैं और उन्हें अकेलेपन से छुटकारा पाने की चाहत है. चौथी महिला है शीरीन ( कोंकणा सेन) जो की कमाल की सेल्स गर्ल हैं. शीरीन तीन बच्चों की मां हैं और उन्हें सिर्फ एक महिला की तरह इस्तेमाल होना नामंजूर है.

यह फिल्‍म की चार मुख्‍य किरदार और इन्‍हीं के आसपास फिल्‍म की कहानी घूमती है. इसके अलावा फिल्‍म में एक्‍टर विक्रांत मैसी और सुशांत सिंह भी नजर आएंगे. अलंकृता श्रीवास्तव की इस फिल्‍म में जेबुनिस्सा बंगेश और मंगेश धाकड़े ने अपना संगीत दिया है और इसके सिनेमेटोग्राफर हैं अक्षय सिंह. फिल्‍म की खामियों की बात करें तो, इसे फिल्‍मकार की नहीं, बल्कि समय की कमी माना जाए क्‍योंकि इस तरह के विषय पर पहले भी फिल्‍में बन चुकी हैं और जो हाल ही की फिल्‍म याद आती है, वह है ‘पार्च्ट’. तुलना की जाए तो उस फिल्‍म में भी कहानी की आत्मा ‘ल‍िपस्टिक अंडर माई बुर्का’ जैसी ही थी, लेकिन हर फिल्‍मकार को अपनी तरह से अपनी कहानी कहने का हक है पर बतौर आलोचक मेरी मुश्किल ये हो जाती है की विषय में फिर उतना नयापन नहीं लगता.

इसके अलावा फिल्‍म की दूसरी कमी है फिल्‍म में इंटरवेल के बाद का थोड़ा सा हिस्सा, जहां फिल्‍म की कहानी की गति कम हो जाती है. इसके अलावा अगर देखें तो यह फिल्‍म समाज के सिर्फ एक वर्ग यानी मध्‍यम वर्ग या निचले माध्यम वर्ग की कहानी कहती है. अगर उच्च वर्ग की भी बात होती तो शायद रेंज और बढ़ जाती.

फिल्‍म की खूबियों की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी खूबी है इसका स्क्रीन्प्ले, जिसे काफी खूबसूरती से लिखा गया है. दूसरी मजबूत कड़ी है इस फिल्‍म के किरदार जिन्हें शानदार तरीके से गढ़ा गया है. फिल्‍म का विषय ‘पार्च्‍ड’ जैसा है पर भोपाल में घटती ये फिल्म और इसके किरदार आपको शायद ही अहसास होने देंगे की इस तरह की कहानी आप पहले भी देख चुके हैं.

कुछ लोगों को फिल्म परिवार के साथ देखने में दिक्कत हो सकती है, फिर भी इसकी बोल्ड कहानी और ट्रीटमेंट को देखने के बाद इसे साढ़े तीन स्टार मिलते हैं.

मनुवाद की उस मुस्कान का मतलब समझिए

राज्यसभा में शोर मचा था. चार बार उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सूबे की मुख्यमंत्री रही और राज्यसभा की सदस्य गुस्से में थीं. वह इसलिए गुस्से में थीं, क्योंकि उनको अपने उस समाज की बात कहने से रोका जा रहा था, जिससे वह ताल्लुक रखती थीं. सवाल है कि कोई संसद में क्यों आता है? संसद के एक सदस्य की क्या जिम्मेदारी होती है?

अगर आप बतौर संसद सदस्य ईमानदार हैं तो जाहिर है कि आपकी जिम्मेदारी देश और समाज के मुद्दे को सदन के सामने और सदन के जरिए देश के सामने रखना चाहिए. उस दिन भी यही हो रहा था. एक ईमानदार संसद सदस्य समाज के एक बड़े मुद्दे पर बोल रहा था. उसकी आवाज को अनसुना करने की कोशिश की गई तो वह जोर से बोलने लगा. तब विरोधियों के शोर के बीच उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई. आवाज बुलंद थी, दबाए नहीं दबी तो उस आवाज को बंद करने का नया तरीका ढूंढ़ा गया.

सामने शीर्ष पर बैठा शख्स मुस्कराने लगा. वह उपहास उड़ाने जैसा था. वह उस सांसद पर नहीं हंस रहा था. वह शायद उस मुद्दे पर मुस्कुरा रहा था, जिस पर सांसद बोल रही थीं. उस संसद सदस्य से वह मुस्कान बर्दाश्त नहीं हुई. वह मुस्कान उसे चिढ़ा रही थी. उसने संसद की सदस्यता ही छोड़ देने की बात कही. फिर भी वह मुस्कान कायम रही. शायद वह हैदराबाद विश्वविद्यालय की घटना पर मुस्करा रहा था. वह ऊना की घटना पर मुस्कुरा रहा था. वह डेल्टा मेघवाल पर मुस्कुरा रहा था. वह सहारनपुर पर मुस्कुरा रहा था. मनुवाद की उस मुस्कान का मतलब समझिए.

विजय यादव बने भारत ‘ए’ टीम के फील्डिंग कोच

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फरीदाबाद। भारतीय क्रिकेट के छोटे फार्मेट की ‘ए’ टीम का भारतीय क्रिकेट में खासा योगदान रहा है जिससे विराट कोहली जैसे सितारों का उदय हुआ है. इसके लिए अब नए फील्डिंग कोच का चुनाव किया गया है. दक्षिण अफ्रीका में 26 जुलाई से शुरू हो रहे दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ क्रिकेट टीम के क्षेत्ररक्षण कोच की जिम्मेदारी हरियाणा रणजी टीम के कोच व पूर्व भारतीय टेस्ट विकेटकीपर विजय यादव को सौंपी गई है. भारत ‘ए’ टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ हैं. फरीदाबाद के सेक्टर-11 निवासी 50 वर्षीय लेवल-3 कोच विजय यादव इन दिनों बेंगलुरु में अंडर-23 क्रिकेट शिविर में कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

अफ्रीकी दौरे पर भारत ‘ए’ टीम त्रिकोणीय वनडे सीरीज में भाग लेगी, जिसमें दो अन्य टीमें दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ और अफगानिस्तान की हैं. पहले इस सीरीज में तीसरी टीम ऑस्ट्रेलिया ‘ए’ थी, पर अपने बोर्ड के साथ वेतन विवाद के चलते कंगारुओं की टीम ने नाम वापस ले लिया. भारत ‘ए’ टीम दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ टीम के खिलाफ दो चार दिवसीय मैच भी खेलेगी.

मनीष पांडे 16 सदस्य भारतीय टीम के कप्तान हैं. आइपीएल में चेन्नई सुपर किंग और इस वर्ष पंजाब किंग्स इलेवन से खेलने वाले मोहित शर्मा और राहुल तेवतिया ने विजय से ही प्रशिक्षण लिया है.

 

 खालसा कॉलेज ने SC/ST छात्रों का दाखिला रोका

नई दिल्ली। मोदी सरकार में दलित भेदभाव के मुद्दे शिक्षा संस्थानो में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. ताजा मामला दिल्ली के खालसा कॉलेज का है. वाणिज्य वर्ग के स्नातकोत्तर एमकॉम में आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों का श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज ने दाखिला रोक दिया है. इस बारे में कॉलेज का कहना है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग ने उसे अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा दिया है. प्रिंसिपल ने डीयू की दाखिला समिति के चेयरमैन और कॉमर्स की विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है. पत्र में उन्होंने कहा है कि हाई कोर्ट के आदेश 20 जून 2016 ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग के निर्देशानुसार कॉलेज को अल्पसंख्यक स्टेटस के अनुसार छात्रों को प्रवेश देने की अनुमति प्रदान की है.

हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार ही वह स्नातक स्तरीय दाखिला दे रहा है, जबकि स्नातकोत्तर के लिए प्रवेश प्रक्रिया डीयू की शर्तो और नियमों के अनुसार होगी. सिख समुदाय के छात्रों को अल्पसंख्यक मानते हुए पचास फीसदी सीटें उनके लिए हैं, जबकि शेष सीटें अनारक्षित हैं. बिजनेस और कॉमर्स की दाखिला समिति के सदस्य हंसराज सुमन ने भी इस संबंध में कुलपति को पत्र लिखा है.

सुमन ने बताया कि वह जल्द ही कॉमर्स डिपार्टमेंट के इस मुद्दे को लेकर कुलपति से मिलेंगे, क्योंकि उच्च शिक्षा में दलित, ओबीसी कोटे के छात्रों को आने से रोकने का षड्यंत्र रचा जा रहा है. छात्रों के अलावा इन कॉलेजों ने दलित शिक्षकों की नियुक्तियों पर भी अल्पसंख्यक के नाम पर रोक लगा दी है. जिसके बाद से दलित और पिछड़े छात्रों को बड़ी परेशानी और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है.

नहीं मनाने दिया भीम आर्मी जिलाध्यक्ष का बर्थडे, पुलिस ने फेंका केक

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सहारनपुर। पुलिस द्वारा जातीय हिंसा के आरोप में बंद किये भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल वालिया का कल जन्मदिन था. जिसके लिए जेल प्रशासन से जन्मदिन मनाने की इजाजत मिल गयी थी. गुरुवार को कमल की बर्थडे-पार्टी के लिए उसकी मां कांति देवी, पत्नी काजल, बेटा कौशिक, कार्तिक, बेटी कीर्ति तथा भाई सचिन, विपिन व अन्य कुछ परिचित केक व मिठाई लेकर जेल पहुंचे थे. जिसके कुछ देर बाद विरोधी दल व मीडिया भी पहुंच गई.

कुछ देर बाद जेलर राजीव मिश्र ने परिजनों को जेल के अंदर जाने से साफ मना कर दिया. जेलर मिश्र ने परिजनों द्वारा लाए गए केक, मिठाई व जूस को बाहर फिंकवा दिया. इसके बाद जेलर पूरे मामले में लीपापोती करने में जुट गए. मीडिया से बातचीत में जेलर राजीव मिश्र ने कहा की जन्मदिन मनाने की इजाजत नहीं दी गयी, जेल गेट के अंदर जाने से पहले ही केक व मिठाई को फिकवा दिया गया है.

वहीं डीएम पीके पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि कमल के परिजन केक लेकर जेल पहुंचे जरूर थे, मगर उसे अंदर जाने नहीं दिया गया. गेट के बाहर ही केक को रखवा दिया था.

विदेशी मीडिया ने कोविंद और भाजपा पर कसा तंज

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के कारण भारत के प्रमुख पदों पर हमेशा से विदेशी मीडिया की नजर रही है. समय-समय पर भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के चुने जाने पर विदेशी मीडिया अपनी टिप्पणी करता रहा है. रामनाथ कोविंद के भारत के 14वें राष्ट्रपति चुने जाने पर भी तमाम देशों के अखबारों में लेख लिखे गए हैं. हालांकि ये लेख भाजपा को अखर सकते हैं, क्योंकि तमाम देशों की मीडिया ने भाजपा द्वारा रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने और फिर उनके राष्ट्रपति बनने को भाजपा की साजिश करार दिया है… तो कुछ अखबारों ने इसे दलितों को लुभाने के लिए उठाया गया कदम बताया है.

आइए कुछ अखबारों पर नजर डालते हैं-

ब्रिटेन के अखबार द टेलीग्राफ ने यह दावा किया है कि कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाना मोदी का दलितों को लुभाने और दलित समुदाय के बीच राजनीतिक वोट हासिल करने का तरीका है.

अमेरिकी दैनिक The Voice of America का कहना है की “बीजेपी” की एक सोची समझी रणनीति है, जो बार-बार देश के दलित समाज के चेहरों को आगे करके अपनी पहचान चाहती है, जबकि ये पार्टी हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडों पर काम करती है.

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आयरलैंड के अखबार The Irish Times ने लिखा है कि रामनाथ कोविंद भले ही भारत के दूसरे दलित राष्ट्रपति बनने जा रहें हो, लेकिन यह बात भी साफ है कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रह चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद आरएसएस के साथ अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत की थी जो की समाज में इस्लाम और ईसाई धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने का काम करता रहा है. The Irish Times ने भाजपा के इस कदम को उसकी सोची समझी साजिश कहा है.

देखना होगा कि भारतीय मीडिया इन खबरों को कितनी तव्वजो देता है.

फेसबुक पर खबरें पढ़ने के लिए देने पड़ेंगे पैसे

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नई दिल्ली। फेसबुक पर न्यूज पढ़ने वालों के लिए एक बुरी खबर है. फेसबुक यूजर से न्यूज पढ़ने का चार्ज लेने की योजना बना रहा है. यही नहीं फेसबुक के माध्यम से न्यूज दिखाने वाले मीडिया हाउस से भी फेसबुक चार्ज लेगा.  अभी तक हमलोग मजे में फेसबुक पर न्यूज पढ़ रहे हैं, लेकिन यह मौज जल्द ही खत्म होने वाली है.

फेसबुक जल्द ही न्यूज फीड में दिखने वाले खबर की संख्या सीमित करने वाला है. यानी ज्यादा और बड़े मीडिया संस्था की खबरों को पढ़ने के लिए आपको पैसे देने पड़ सकते हैं. इसके लिए फेसबुक न्यूज सब्सक्रिप्शन सर्विस शुरू कर सकता है.

फेसबुक के सोशल न्यूज पार्टनरशिप के हेड कैम्पबेल ब्राउन ने बताया कि यह फीचर अक्टूबर 2017 तक शुरू किया जा सकता है. ब्राउन ने बताया कि अक्टूबर से फेसुबक न्यूज फीड में दिखने वाले खबरों की संख्या 10 करने वाला है. इसके बाद फेसबुक न्यूज के लिए यूजर्स को पब्लिशर्स के होमपेज पर भेजेगा जहां उसे सब्सक्रिप्शन लेना होगा.

इस समय फेसबुक न्यूज का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म हो गया है. ऐसे में मीडिया संस्थान और पब्लिशर हाउस ने फेसबुक से शिकायत की है कि फेसबुक पर खबरों को शेयर करने से उन्हें घाटा हो रहा है. अब ऐसे मे फेसबुक एक पे वॉल पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से मीडिया हाउस और पब्लिशर्स के साथ फेसबुक का एग्रीमेंट होगा.  एग्रीमेंट के बाद ही न्यूज फेसबुक पर शेयर हो सकेंगी. यानी जिसका फेसबुक के साथ एग्रिमेंट होगा, वहीं फेसबुक पर खबर पब्लिश कर सकेगा.

यह सर्विस दो साल पहले गूगल के AMP को टक्कर देने के लिए शुरू की गई थी. गूगल AMP चुनिंदा मीडिया समूहों की खबरों को मोबाइल वेब ब्राउजिंग के लिए ऑप्टिमाइज करता है.

मायावती के समर्थन में सड़कों पर उतरा दलित संगठन

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कोडरमा। कोडरामा जिले के झुमरीतिलैया में मायावती के समर्थन में विरोध मार्च निकाला गया. इस विरोध मार्च में लोगों ने केद्र सरकार की अलाचोना की और मायावती के समर्थन में नारे बाजी की.

बसपा प्रमुख मायावती को राज्यसभा में बोलने से रोकने के विरोध में दलित शोषण मुक्ति मंच ने 19 जुलाई की शाम को विरोध मार्च निकाला. यह मार्च झुमरीतिलैया के पानी टंकी रोड से शुरू हुआ. विरोध मार्च मुख्य सड़कों से होते हुए झंडा पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया.

विरोध मार्च में कार्यकर्ता संसद के अंदर दलित नेताओं का अपमान करना बंद करो, जनादेश के नाम पर दादागिरी बंद करो, संसद एवं सड़कों पर लोकतंत्र को बहाल करो, सहारनपुर के दलितों को इंसाफ दो आदि नारे लगाए. विरोध मार्च का नेतृत्व मंच के संयोजक प्रेम प्रकाश, वार्ड पार्षद घनश्याम तुरी, गणपत भुईयां, शंभू पासवान, सहदेव दास, बसंती देवी कर रहे थे.

इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार भारी जनादेश के घमंड में लोकतंत्र को कुचलना चाह रही है. संसद के अंदर दलित नेता मायावती को सहारनपुर के दलितों की पीड़ा तक की बात रखने का मौका नहीं दिया. ऐसा करके सरकार अपने दलित विरोधी चेहरे को सामने लाई है. सरकार के एजेंडा में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं प्रगतिशील बौद्धिक तबके को बर्बाद करने पर तुली है.

गौरतलब है कि मायावती मानसून सत्र के दूसरे दिन सहारनपुर हिंसा पर अपनी बात रख रही थी. लेकिन राज्यसभा  के उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें बोलने का मौक नहीं दिया. इससे नाराज होकर मायावती ने सभा में इस्तीफे की पेशकश की और शाम होते-होते उन्होंने सभापति को इस्तीफा दे दिया. लेकिन उस समय उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया. दो दिन बाद मायावती ने दोबार इस्तीफा दिया और सभापति ने उसे स्वीकार कर लिया.

मध्यप्रदेश में मस्जिद जलाने की कोशिश के बाद बवाल

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भोपाल। देश में हिन्दू-मुस्लिम के बीच माहौल जिस तरह से बना हुआ है इसकी खबर अन्य देशों तक भी पहुंच चुकी है जिसकी आलोचना वहां की मीडिया कई बार कर चुकी है. हिन्दू-मुस्लिम के बीच बड़े विवादों की घटनाऐँ उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र, कश्मीर, केरल, गुजरात जैसे राज्यों के बाद मध्य प्रदेश में भी गहराने लगी है जहां एक गांव में बड़ा विवाद सामने आया है. एमपी के छिपनार गांव में गुरुवार (20 जुलाई) एक नाबालिग लड़के को मस्जिद में आग लगाने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया. गांव के मुसलमानों के करीब एक दर्जन घर क्रोधित भीड़ ने जला दिया था. गुरुवार को जब गांव की मस्जिद से धुआं निकलता दिखा तो लोगों को चिंता हुई. जब गांववाले मस्जिद में पहुंचे तो वहां एक चटाई जलती देखी.

गांव के कुछ लोगों का कहना है कि लड़का इंदौर का रहने वाला है और छिपनार में रहने वाले अपने दादा-दादी के पास आया है. लड़के को सिहोर के किशोर एवं बाल न्यायालय में पेश किया गया है. न्यायालय ने उसे कानूनी अभिरक्षा में भेज दिया है. इस महीने इसी गांव में एक मुस्लिम व्यक्ति और एक नाबालिग हिन्दू लड़की के घर से भाग जाने के बाद गांव में तनाव फैल गया था और कुछ मुसलमानों की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया था.

एसडीपीओ अनिल त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि चश्मदीद गवाहों के अनुसार लड़के ने मस्जिद में लूटपाट और आग लगाने की कोशिश की थी और उसने ये बात स्वीकार भी की थी. गांववालों के अनुसार आठ जुलाई को लड़के के दादा-दादी का घर भी भीड़ ने जला दिया था. नाबालिग लड़के पर भारतीय दंड संहिता की धारा 436 और धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार मस्जिद में केवल जली हुई चटाई मिली थी. पुलिस के अनुसार इस घटना के बाद एक बार फिर गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है.

जुलाई के पहले हफ्ते में तब तनाव फैल गया था जब एक मुस्लिम व्यक्ति एक नाबालिग हिंदू लड़की के संग घर से भाग गया था. घटना के बाद क्रोधित हिंदुओं ने मुसलमानों के कई घर जला दिए थे. बाद में युवक और नाबालिग लड़की को महाराष्ट्र से पुलिस ने पकड़ा. युवक पर पुलिस ने अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया है गांव में तनाव बना हुआ है.

भाजपा का दलित विरोधी चेहरा सामने लाएंगी मायावती

लखनऊ। मायावती राज्यसभा में शब्बीरपुर हिंसा के बारे में खुद को बोलने का वक्त नहीं मिलने पर चुप बैठने के मूड में नहीं हैं. बसपा इस मुद्दे पर डट कर अपने बात रखेगी और केंद्र सरकर का दलितों के प्रति यह रवैया पूरे देश की जनता को दिखाएगी. राज्यसभा सदस्य के रूप में 20 जुलाई को इस्तीफा स्वीकार होने के बाद बसपा प्रमुख मायावती अब अगले कदम पर विचार करेंगी. इसके लिए वह 23 जुलाई को नई दिल्ली में पार्टी के नेताओं के साथ रणनीति तैयार करेंगी.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने 23 जुलाई को पार्टी के राज्यसभा सांसदों, विधायकों, जोन इंचार्ज, जिलाध्यक्ष सहित पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं को दिल्ली तलब किया है. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर की इस बैठक में मायावती आगामी रणनीति तय करेगी. दलितों के मुद्दे पर राज्यसभा में बात रखने का मौका न मिलने से नाराज बसपा प्रमुख ने पिछले दिनों अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. कल इस्तीफा स्वीकार होने के बाद मायावती ने दिल्ली में ही रविवार को उत्तर प्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है.

यहां क्लिक कर देखिए वीडियो में क्या कहा मायावती ने

सूत्रों का कहना है दलितों के मुद्दे पर बसपा प्रमुख द्वारा इस्तीफा देने की बात को अब गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी है. बसपा प्रमुख ने राज्यसभा में जो बोला उसे सोशल मीडिया आदि पर वीडियो के जरिए दलितों के बीच पहुंचाकर यह संदेश देने की कोशिश है कि मायावती ही उनकी सच्ची हितैषी हैं. दलितों की लड़ाई लडऩे के लिए बसपा प्रमुख ने अपने पद की परवाह नहीं की.

दलित हित में सांसदी कुर्बान करने की छवि को उभारने के लिए पार्टी सड़कों पर भी संघर्ष करेगी. 23 जुलाई को दिल्ली में आहूत बैठक में इसकी रणनीति तैयार की जाएगी. आंदोलन से आमतौर पर दूर रहने वाली बसपा बदले हालात में संघर्ष की राह पकड़ती दिख रही है. विधानसभा में भी बसपा आक्रामक तेवर अपनाए हुए है.

कैग ने किया रेलवे के बारे में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। रेलवे सफाई और गुणवत्ता के मामले में बहुत पहले से घिरा हुआ है अब एक नया खुलासा ट्रेन के खाने को लेकर हुआ है. दरअसल ट्रेनों में और रेलवे स्टेशन पर आप जिस खाने को चाव से खाते हैं वो इंसानों के खाने लायक ही नहीं है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(कैग) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि स्टेशनों पर दूषित खाद्य पदार्थ, डिब्बा बंद, रिसाइकिल किया और उपयोग की अंतिम तारीख खत्म हो चुकी चीजें बेची जाती हैं. कैग ने यह खुलासा संसद में रखी अपनी रिपोर्ट में किया है.

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कैटरिंग पॉलिसी में लगातार बदलाव के चलते यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सुविधा में अनिश्चितता की स्थिति पैदा करता है. जांच में पता लगा कि साफ सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता वहीं जो भी चीजें यात्रियों को परोसी जाती हैं उनके बिल भी नहीं दिए जाते हैं. रेलवे और कैग की संयुक्त टीम द्वारा 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों में किए गए सर्वे के बाद ऑडिट नोटिस में कहा गया है कि ट्रेन और स्टेशन दोनों पर साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता.

इसमें कहा गया है नलों से बिना साफ किया हुए पानी का उपयोग खाने-पीने की चीजों को बनाने में किया जाता है वहीं खाली कचरे के डिब्बों को ना तो ढका जाता है और ना ही समय-समय पर साफ किया जाता है. खाने की चीजों को मक्खियों और अन्य कीड़ों से बचाने के लिए ढका तक नहीं जाता. ट्रेनों में चूहों के अलावा कॉक्रोच, मक्खियां और धूल पाई गई है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यात्रियों को खाने के बिल नहीं दिए जाते, साथ ही प्रिंटेड मेनू कार्ड भी उपलब्ध नहीं है. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने की चीजे लिखी हुई मात्रा से कम होती हैं वहीं बिना अप्रूव किया हुआ पीने का पानी बेचा जाता है. इसके अलावा ट्रेनों में बेचा जाना वाला सामान बाजार भाव से कहीं महंगा होता है और गुणवत्ता बिल्कुल खराब होती है.

3 दिवसीय अंबेडकर इंटरनेशनल कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे राहुल गांधी

बंगलुरू। दलित वोट भारत की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा बीजेपी और काग्रेंस को बहुत पहले हो चुका है. चूकिं कर्नाटक में दलित वोट की संख्या अधिक है इसलिए सभी की राजनीति के केन्द्र में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर हैं. इसको ध्यान में रखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को बंगलुरु में तीन दिवसीय बाबा साहेब बी.आर. अंबेडकर इंटरनेशनल कांग्रेस ऑन सोशल जस्टिस का उद्घाटन करेंगे.

इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के अलावा कई अन्य बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं. जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, पूर्व सांसद प्रकाश अंबेडकर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मार्टिन लूथर किंग-III मौजूद होंगे.

बता दें की इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान में कांग्रेस के किसान आक्रोश आंदोलन की शुरुआत की थी. इस आंदोलन के जरिये कांग्रेस पार्टी पूरे देश में हो रही किसानों की खुदकुशी का मुद्दा उठाएगी, यह आंदोलन पूरे देश में चलेगा. इस मौके पर राहुल गांधी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में किसान रैली को संबोधित भी किया था.

यहां उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज लोकसभा में हम किसानों के मुद्दे पर बोलना चाहते थे. प्रधानमंत्री भी सदन में मौजूद थे, लेकिन हमें बोलने नहीं दिया गया.’ उन्होंने बीजेपी पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा, ‘जीएसटी के लिए रात 12 बजे पार्लियामेंट खोला जाता है, लेकिन किसानों के लिए एक मिनट बात नहीं करने देते.’ गौरतलब है कि बीजेपी पर किसानों की अनदेखी का लगातार आरोप लग रहा है जिस पर काग्रेंस लगातार सरकार को घेर रही है.

दलित महिला की लाठी से पीट-पीट कर हत्या

मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के चिन्नौनी थाना क्षेत्र में एक 65 वर्षीय दलित महिला उच्च जाति के लोगों ने हत्या कर दी. उच्च जाति के एक ही परिवार के तीन लोगों ने मामूली विवाद के चलते लाठियों और डंडो से दलित महिला धनकुवेर देवी की हत्या कर दी. घटना के बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है.

चिन्नौनी थाना पुलिस ने एक युवक और तीन महिलाओं पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दरअसल हुसैनपुर गांव के रहने वाला विनोद चौहान बस पर कंडेक्टरी का काम करता है. बीते मंगलवार को देर रात जब वह वापस लौटा तो उसने मृतक धनकुवेर के बेटे से सिगरेट जलाने के लिए माचिस मांगी तो मृतक के बेटे ने माचिस देने से इंकार कर दिया.

बुधवार (19 जुलाई) की सुबह दलित युवक की मां धनकुवेर जब इसकी शिकायत विनोद के घर करने गई तब विनोद और उसके परिवार की तीन महिलाओं ने मिलकर महिला धनकुवेर की लाठी और डंडो से जमकर मारपीट की जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

हादसे के बाद आरोपी विनोद और उसके परिवार की महिलाओं सहित पूरा परिवार घर पर ताला लगाकर फरार हो गया है. पुलिस ने विनोद चौहान और उसके परिवार की तीनों महिलाओं के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है.

लालू को बड़ा झटका, बेटे के पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त

पटना। राजद प्रमुख लालू यादव की मुश्किलें दिन बे दिन बढ़ती जा रही हैं अब उनके परिवार के लिए एक नयी आफत आ गयी है. अब तक लालू के एक ही बेटे तेजस्वी विवाद में उलझे हुए थे लेकिन अब दूसरे बेटे तेज प्रताप भी परेशानी में आ गए हैं. दरअसल तेज प्रताप के पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त हो गया है जिस पर बीजेपी के मंत्रियों ने सवाल उठाये थे.

बता दें की राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना के बेउर इलाके में स्थित पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद करने के भारत पेट्रोलियम के निर्देश पर लगा स्टे सब जज-11 की अदालत ने वापस ले लिया है जिसके बाद कोर्ट के इस फैसले के बाद अब तेज प्रताप का पेट्रोल पंप का आवंटन रद माना जाएगा.

गौरतलब है कि भाजपा ने आरोप लगाया था कि तेज प्रताप यादव ने धोखाधड़ी कर दूसरे की जमीन को अपनी बता कर भारत पेट्रोलियम से पेट्रोल पंप लाइसेंस हासिल कर लिया है. इसके बाद भारत पेट्रोलियम ने इस मामले की जांच कर पेट्रोल पंप का आवंटन रद कर दिया था.

कंपनी के इस आदेश पर पटना के सबजज-11 शची मिश्रा की अदालत ने बीते दिनों स्टे लगा दिया था. लेकिन गुरुवार को सबजज-11 की अदालत ने अपने स्टे आदेश को वापस ले लिया जिसके बाद उनका लाइसेंस निरस्त हो गया है.

तो अब 2000 के नोट नहीं छापेगा RBI

2000 note

मुंबई। इन दिनों 2000 रुपए के नोटों की तंगी से बैंकर और एटीएम ऑपरेटर परेशानी में पड़ गए हैं. उनका कहना है कि सर्कुलेशन में 2000 रुपए के नोटों की संख्या काफी कम हो गई है. भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नए नोटों की सप्लाई में कमी आई है.

2,000 रुपये के नोट अब पहले की तरह आसानी से नहीं मिला करेंगे, क्योंकि सीएनबीसी आवाज को मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने दो हजार के ज्यादा नोट नहीं छापने का फैसला लिया है. सरकार दो हजार रुपये के सौ करोड़ नोट छापने की भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मांग को ठुकरा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, दो हजार रुपये के नोट छापने में भारी कटौती की गई है.

दो हजार के नोट को बढ़ावा नहीं देना चाहती सरकार सूत्रों का कहना है कि सरकार 2,000 रुपये के नोट को बढ़ावा नहीं देना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने दो हजार के ज्यादा नोट नहीं छापने का फैसला किया है. 11 अप्रैल को नोटों की छपाई के लिए प्रोडक्शन प्लानिंग की बैठक हुई थी. इस मीटिंग में रिजर्व बैंक ने 2,000 रुपये के सौ करोड़ नोट छापने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन 2,000 के नोट छापने का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया गया था.

सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में रिजर्व बैंक की तरफ से अलग-अलग नोटों की छपाई की इजाजत मांगी गई थी. बाकी सभी दूसरे नोट छापने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी. सूत्रों का कहना है कि दो हजार के नोट छापने का फैसला नोटबंदी के दौरान तात्कालिक राहत पहुंचाने के लिए था. फिलहाल, दो हजार रुपये के नोट वापस लेने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.

अमेरिकी संसद में भारत की बात रखने वाले सांसद को मस्तिष्क कैंसर

वाशिंगटन। अमेरिका के वरिष्ठ सांसद जॉन मैक्केन जो भारत के बड़े समर्थक माने जाते हैं उन्हें एक गंभीर बीमारी मस्तिष्क कैंसर ने जकड़ लिया है. हाल में अस्वस्थ हुए मैक्केन की मेडिकल जांच में यह बात सामने आई है. मैक्केन सन 2008 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे.

हाल ही में पाकिस्तान के दौरे में मैक्केन ने वहां आतंकवाद के खिलाफ और काम करने की जरूरत बताई थी. पिछले 30 सालों से सांसद 80 वर्षीय मैक्केन नवंबर के चुनाव में छठी बार सीनेट के लिए चुने गए हैं. वह अमेरिकी नौसेना के पूर्व पायलट हैं. पिछले हफ्ते बाईं आंख में आए रक्त के थक्के को हटाने के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसी दौरान हुए परीक्षणों की रिपोर्ट में कैंसर होने का पता चला है.

यह कैंसर बहुत तेजी से विकसित होने वाला है और यह अपने अंतिम चरण के नजदीक है. लेकिन शुरुआती इलाज से मैक्केन आराम महसूस कर रहे हैं. मैक्केन इस समय एरिजोना स्थित अपने आवास में आराम कर रहे हैं. कई सहयोगी सांसद उनसे मिलने पहुंचे हैं और उन्होंने वरिष्ठ सांसद के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.

मैक्केन को देखने कांग्रेस के उनके सभी साथी पहुंचे और जल्‍द स्‍वस्‍थ हो जाने की कामना की. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ‘गेट वेल सून’ कहते हुए बताया कि ‘सीनेटर जॉन मैक्‍केन हमेशा फाइटर रहे हैं.‘ वहीं पूर्व डेमोक्रेटिक राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने मैक्‍केन को अमेरिकी हीरो बताया

मैक्‍केन अमेरिकी नेवी पायलट थे. 1967 में उनके विमान को वियतनाम में गिरा दिया गया और उन्‍होंने पांच साल से अधिक का समय युद्ध बंदी के तौर पर बिताया, जहां उन्‍हें प्रताड़ित भी किया गया था. मैक्‍केन को पहले भी कैंसर था. तीन बार वे इस स्‍थिति से उबर चुके हैं.