सलमान ने क्यों कहा- बिग बॉस में उनका आखिरी सीजन

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ढिंचैक पूजा बिग बॉस के घर का हिस्सा बनेंगी या नहीं, इससे जुड़ी तमाम अटकलों के बीच रविवार को पूजा ने बिग बॉस के घर में एंट्री कर ही ली. उन्हें बतौर वाइल्ड कार्ड एंट्री बिग बॉस के सीजन-11 में शामिल किया गया है. हालांकि उन्हें घर में इनवाइट करते हुए सलमान खान ने जिस तरह काफी लंबी और गहरी सांस ली, उससे ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि वो इस एंट्री से कुछ ज्यादा खुश नहीं हैं.

इसके बाद जब उन्होंने ढिंचैक पूजा का पॉपुलर गाना सेल्फी मैंने ले ली आज सुना, तो उन्होंने पूछा कि ऑडियंस ने इस गाने को कैसे हिट कर दिया है? फिर उन्होंने बात को संभालते हुए कहा कि इसे हिट नहीं, सुपरहिट होना था. वैसे बिग बॉस के हर सीजन में एक वक्त ऐसा जरूर आता है, जब सलमान खान कहते हैं कि वो ये शो छोड़ रहे हैं. इसका अगला सीजन होस्ट नहीं करेंगे. बिग बॉस 8 में भी ऐसा हुआ था, सीजन-9 और सीजन-10 में सलमान को ऐसा कहते सुना गया. हालांकि इन तीनों सीजन में सलमान लगातार शो होस्ट करते आ रहे हैं.

मगर बिग बॉस के सीजन-11 में भी वो वक्त काफी जल्दी आ गया, जब सलमान ने घोषणा की कि ये उनका आखिरी सीजन है. ऐसा हुआ ढिंचैक पूजा की एंट्री के बाद. बॉलीवुड लाइफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ढिंचैक पूजा की घर में एंट्री होने से पहले उन्होंने ढिंचैंक पूजा के गाने सुने और वो ये कहने से खुद को रोक नहीं पाए कि ये बिग बॉस में उनका आखिरी सीजन है. अब देखना होगा कि ढिंचैक पूजा की बिग बॉस के घर में एंट्री और क्या-क्या नजारे दिखाती है.

ट्रेन की चपेट में आकर 5 महिलाओं की मौत, एक दर्जन से ज्यादा घायल

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पटना। छठ पर्व से ठीक पहले मुंगेर में दर्दनाक घटना में ट्रेन से कट कर चार महिलाओं की मौत हो गई. और करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए. ये महिलाएं मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड की थी जो गंगा स्नान करने मुंगेर आई थी. मंगलवार से आस्था का महापर्व छठ की शुरूआत हो रही है, ऐसे में ग्रामीण इलाके कि महिलाएं एक दिन पहले गंगा स्नान करने आती है. लौटते समय दानापुर भागलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस से कटकर इनकी मौत हो गई.

घटना के बारे में बताया जा रहा है कि लगभग एक दर्जन महिलाएं अहले सुबह गंगा स्नान के बाद अपने गांव जाने के लिए अदलपुर रेलवे ट्रैक पर कियूल जमालपुर श्रमिक एक्सप्रेस पकड़ने के लिए खड़ी थीं. तभी उसी ट्रैक पर 3401 अप भागलपुर दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस आ गई जिस ट्रैक पर महिलाएं खड़ी थीं.

ट्रेन की चपेट में आकर चार महिलाओं की मौत हो गई. मृतक सभी महिलाएं एक ही गांव आमरी की है, जिनका नाम है- रेखा देवी 39 साल, अनीता देवी 38 साल , गीता देवी 35 साल और विजो देवी 38 साल. गंभीर रूप से घायलों में मनोज रवि दास, रुक्मणी देवी, लहुंग मांझी, गिरीश शर्मा.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के समय कोहरा छाया हुआ था. सुबह 7.15 बजे भागलपुर दानापुर इंटरसिटी एक्सप्रेस बिना हार्न दिये चुपके से आई और इन महिलाओं को मौत की नींद सुला कर चली गई. घटना के बाद गंभीर रूप से घायल महिलाओं और पुरूषों को धरहरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती करया गया. फिर उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेज दिया गया.

घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने अदलपुर रेलवे ट्रैक को जामकर दिया. साथ ही जमालपुर धरहरा मुख्य मार्ग को भी घंटों जाम रखा. बाद में स्थानीय अधिकारियों ने मुआवजे का ऐलान कर जाम को हटवाया. मृतक परिवार को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई.

इस घटना की वजह से साढ़े चार घंटे तक रेलवे परिचालन बाधित हुआ, जिसकी वजह से कई एक्सप्रेस ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर खड़ी रहीं. अधिकारियों ने माना कि कुहांसे की वजह से यह दुर्घटना घटी है. लेकिन, इस घटना ने छठ पर्व के उत्साह को मातम में बदल दिया है.

ग्राम प्रधान के गुंडों ने दलित बस्ती पर किया हमला, 12 लोग घायल

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सीतापुर। उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है. सीतापुर के मानपुर थाना इलाके में नकारा गांव की दलित बस्ती पर कुछ लोगों ने धावा बोल दिया. हमलावरों ने दलित बस्ती में जमकर उत्पात मचाया. दलितों के साथ मारपीट की. उनके घरों में तोड़फोड़ की. हमले से एक दर्जन दलित बुरी तरह जख्मी हैं. पीड़ितों ने चुनावी रंजिश की वजह से ग्रामप्रधान पर हमले का आरोप लगाया है. घायलों को बिसवां सीएचसी में भर्ती कराया गया है.

मानपुर थाना क्षेत्र के नकारा गांव में रहने वाले नरेंद्र, मोतीलाल, पवन आदि ने बताया कि ग्रामप्रधान राम किशोर ने अपने आधा दर्जन साथियों के साथ शुक्रवार को उनकी बस्ती पर हमला कर दिया. सभी को लाठी डंडों से बुरी तरह पीटा. इससे पहले दिवाली की रात भी प्रधान ने धमकी दी थी. जिसकी सूचना मानपुर पुलिस को देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी.

इससे उत्साहित होकर प्रधान व उसके समर्थकों ने अगले दिन हमला कर दिया. हमले में नरेंद्र, मोतीलाल, पवन, चंद्र भाल, राम नरेश व नंद किशोर सहित कई महिलाएं भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं. बिसवां सीएचसी में भर्ती घायलों के मुताबिक प्रधान राम किशोर उन लोगों से चुनावी रंजिश मानता है. इसी की वजह से हमला किया गया है. मानपुर पुलिस जांच कर कार्रवाई की बात कह रही है.

भ्रष्टाचारी जजों-नौकरशाहों को बचाना चाहती है वसुंधरा सरकार

Vasundhara Raje

जयपुर। अगर आप राजस्थान के किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोई कमप्लेन करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पहले वसुंधरा सरकार से पूछना होगा. सरकार की इसे विवादित बिल के खिलाफ देश में सियासत गर्म होती दिख रही है.

दरअसल, राजस्थान सरकार ने अपने नए प्रस्तावित बिल में साफ कहा है कि जजों, मजिस्ट्रेटों से लेकर अन्य किसी भी सरकारी कर्मचारियों पर कोई भी केस करने से पहले सरकार की मंजूरी जरूर लेनी होगी. वहीं इस बिल में साफ लिखा है कि अगर सरकार 180 दिनों के अंदर मामले की छानबीन करने की मंजूरी देगी. नहीं तो माना जाएगा कि सरकार ने जांच की मंजूरी दे दी है.

सरकार का तरफ से लाए जा रहे नए कानून के मुताबिक मीडिया भी 6 महीने तक किसी भी आरोपी के खिलाफ न तो कुछ दिखाएगी और न ही छापेगी. और इसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा हो सकती है. इधर सरकार की तरफ से लाए जा रहे इस विवादित बिल को जयपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. आपको बता दें कि इस बिल के खिलाफ कांग्रेस ने जयपुर में रैली निकाली थी.

गुजरात में भाजपा के खिलाफ सभी पाटीदार हुए एकजुट

Hardik nikhil

अहमदाबाद। गुजरात के चुनावी आसमान में जीत का फैसला होने से पहले ही भाजपा की पतंग कटती नजर आ रही है. कभी हार्दिक को छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके नरेन्द्र पटेल और निखिल ने एक बार फिर हार्दिक का हाथ पकड़ लिया है. साथ ही दोनों पाटीदारों ने भाजपा पर खरीद फरोख्त का इल्जाम भी लगाया है.

निखिल की माने तो भाजपा पैसे के दम पर पाटीदारों को खरीदने में जुटी है. तो दूसरी तरफ पाटीदार नरेंद्र पटेल ने भी भाजपा पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाते हुए कहा है कि वरुण और रेशमा की तरह भाजपा नेताओं ने उन्हे पार्टी में शामिल होने के लिए कहा और इसके लिए बकायदा 1 करोड़ रुपए का ऑफर भी दिया. और पेशगी के तौर पर उन्हें 10 लाख रुपए भी दिए जा चुके हैं.

यानि वोट के बदले नोट का जुमला सियासत में यूं ही नहीं सुनाई देता. जब जिसे मौका मिलता है, इस जुमले के साथ हो लेता है. वैसे नरेन्द्र पटेल की तरफ से लगाए जा रहे इस इल्जाम पर गौर फरमाएं तो जेहन में एक सवाल उठना लाजमी है कि अखिर कोई न कोई तो खास वजह जरुर रही होगी, जिससे अभी तक गुजरात में चुनावी शंखनाद नहीं हुआ है. क्या पता पर्दे के पीछे शायद यही काम बाकि रह गया हो.

ट्वीटर पर वीरू ने रॉस को कह डाला दर्जी

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टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग और न्यूजीलैंड के बल्लेबाज रॉस टेलर के बीच ट्विटर पर हिंदी में बातचीत हो रही है. दरअसल, ट्विटर पर अपने मजाकिया अंदाज के लिए मशहूर वीरेंद्र सहवाग ने मुंबई वनडे में न्यूजीलैंड की टीम को 6 विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले रॉस टेलर का मजाक उड़ाया है. मुंबई में टीम इंडिया के खिलाफ पहले वनडे मैच में न्यूजीलैंड की ओर से मैच विनिंग पारी खेलने वाले रॉस टेलर भी वीरू के वार से बच नहीं पाए. रॉस टेलर ने इस मैच में 95 रनों की शानदार पारी खेली, जिसके बाद वीरू ने ट्विटर पर उन्हें ‘दर्जी’ कहते हुए उनका जमकर मजाक उड़ाया.

सहवाग ने टेलर को ट्वीट कर लिखा, ‘बहुत अच्छा खेले ‘दर्जी जी’. दिवाली के ऑर्डर्स के प्रेशर का भी आपने अच्छे से सामना किया.’ इसके बाद रॉस टेलर भी कहां पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी वीरू को जवाब दिया वो भी हिंदी में. टेलर ने सहवाग को ट्वीट कर लिखा, ‘थैंक्स वीरेंद्र सहवाग. भाई अगली बार अपना ऑर्डर टाइम पे भेज देना सो मैं आपको अगली दिवाली के पहले डिलीवर कर दूंगा. हैप्पी दिवाली.’ टेलर के हिंदी में इस ट्वीट के बाद वीरू जवाब देते हुए कहते हैं कि ‘हा..हा..हा.. मास्टरजी , इस साल पतलून ही एक बिलांग छोटी करके देना अगली दिवाली पे. रॉस था बॉस, मोस्ट स्पोर्टिंग.’

इसके बाद रॉस टेलर ने वीरू से पूछा- ‘क्या तुम्हारे दर्जी ने इस दिवाली पर तुम्हे अच्छा काम करके नहीं दिया है.’इसके बाद सहवाग रॉस टेलर को जवाब देते हुए कहते हैं कि ‘आपकी सिलाई के स्टैण्डर्ड को कोई भी नहीं पा सकता दर्जी जी. फिर चाहे वह पेंट की बात हो या पार्टनरशिप की.’ आपको बता दे कि सहवाग ने ‘टेलर’ के नाम को लेकर पहली बार मजाक नहीं उड़ाया है. उन्होंने साल 2016 में खेली गई पिछली सीरीज में ऐसा ही किया था. जब रॉस टेलर ने गलती से वीरू को टैग कर दिया था.

गौरतलब है कि मुंबई में खेले गए सीरीज के पहले वनडे मैच में रॉस टेलर और टॉम लाथम की पारियों की बदौलत न्यूजीलैंड ने टीम इंडिया को 6 विकेट से हरा कर 3 मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 281 रनों का लक्ष्य दिया. जवाब में न्यूजीलैंड ने 49 ओवर में 284 रन बनाते हुए 6 विकेट से जीत हासिल कर ली. टॉम लाथम ने 103* रनों की पारी खेली जबकि रॉस टेलर ने 95 रन बनाए.

CBI में स्पेशल डायरेक्टर बने ये IPS, जिन्हें देख ‘लाल’ हो उठते हैं लालू

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कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने आठ आईपीएस अफसरों के प्रमोशन को मंजूरी दी है. गुजरात काडर के एडीशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को सीबीआई में स्पेशल डायरेक्टर बनाया गया है. IPS अफसर राकेश अस्थाना वही हैं, जिन्हें बहुचर्चित चारा घोटाले की जांच की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने लालू यादव के खिलाफ 1996 में चार्जशीट दायर कर गिरफ्तार करवाया था. राकेश अस्थाना का जन्म 1961 में रांची में हुआ था. इनकी प्रारंभिक शिक्षा झारखंड स्थित नेतरहाट स्कूल से हुई है. इनके पिता एचआर अस्थाना नेतरहाट स्कूल में भौतिकी के शिक्षक थे.इसके बाद रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की थी. 1978 में आईएससी करने के बाद आगरा स्थित अपने पैतृक घर चले गए.

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज में इतिहास पढ़ाना शुरू किया. 1984 में उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सीयूपीएस की परीक्षा पास कर ली और आईपीएस अधिकारी बन गए. उनको गुजरात कैडर मिला. वह धनबाद में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के एसपी रह चुके हैं. रांची में वह डीआईजी के पद पर थे. राकेश अस्थाना का नाम कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अधिकारियों की सूची में खास तौर से शामिल रहा है. 1994 में उन्होंने सनसनीखेज पुरुलिया आर्म्स ड्रॉप केस की फील्ड इंवेस्टिगेशन सुपरवाइज की थी.

उन्हें बहुचर्चित चारा घोटाले की जांच की जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ 1996 में चार्जशीट दायर की थी. 1997 में उनके समय ही लालू पहली बार गिरफ्तार हुए. उस समय उनकी उम्र 35 वर्ष थी. वो तब सीबीआई एसपी के तौर पर तैनात थे. अस्थाना को मूल रूप से लालू से पूछताछ के लिए ही जाना जाता है. 1997 को उन्होंने चारा घोटाले में लालू से 6 घंटे तक पूछताछ की थी. अस्थाना ने ही धनबाद में डीजीएमएस के महानिदेशक को घूस लेते पकड़ा था. उस समय तक पूरे देश में अपने तरीके का यह पहला मामला था, जब महानिदेशक स्तर के अधिकारी सीबीआई गिरफ्त में आये थे.

अस्थाना ने ही चर्चित गोधरा कांड की भी जांच की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आरके राघवन की अगुआई में गठित हुई एसआईटी ने भी सही माना था. अहमदाबाद में 26 जुलाई, 2008 को हुए बम ब्लास्ट की जांच का जिम्मा राकेश को ही दिया गया था. उन्होंने 22 दिनों में ही केस को सुलझा दिया था. आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण सांईं के मामले में भी अस्थाना ने जांच की थी. फरार चल रहे नारायण सांईं को हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर पकड़ा था. वर्तमान समय में अस्थाना को सीबीआई का एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया है. इस पद पर इनकी नियुक्ति 4 साल के लिए हुई है.

बैंक से ज्यादा कैश निकालने के लिए दिखाने होंगे ये दस्तावेज

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अगर आप बैंक में कैश का लेनदेन करने जा रहे हैं, तो अब आपको अपने पास ऑर्जिनिल आईडी कार्ड रखना जरूरी है. ऐसा नहीं किया, तो आप एक तय रकम से ऊपर लेनदेन नहीं कर पाएंगे. यह नया नियम उन लोगों के लिए है, जो बैंक‍ में 50 हजार रुपये व उससे ज्‍यादा की रकम में लेनदेन करने जा रहे हैं. वित्‍त मंत्रालय के राजस्‍व विभाग ने गैजेट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके जरिये मनी लॉन्ड्रिंग (रिकॉर्ड प्रबंधन) में संशोधन किया गया है. इस संशोधन के मुताबिक बैंक खाता खोलते वक्‍त और 50 हजार रुपये के लेनदेन के दौरान ग्राहक का ऑर्जिनल आईडी कार्ड वेरीफाई करना जरूरी है.

विभाग की तरफ से किया गया यह बदलाव बैंक, वित्‍तीय संस्‍थान और इंटरमीडियरीज पर लागू होगा. स्‍टॉक ब्रोकर, चिट फंड कंपनी, कॉओपरेटिव बैंक, हाउसिंग फाइनेंस इंस्‍टीट्यूट और गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों को रिपोर्टिंग एंटीटीज में शामिल किया जाता है. केंद्र सरकार की तरफ से किया गया यह बदलाव नकली आईडी कार्ड का इस्‍तेमाल करने वालों पर शिकंजा कसने के लिए है. बैंकों व अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों को इसे न सिर्फ देखना होगा, बल्‍कि इसे रिकॉर्ड में भी शामिल करना होगा.

नियम 9 के मुताबिक हर रिपोर्टिंग एंटीटी को तय सीमा से ज्‍यादा का कोई भी लेनदेन करने के दौरान अपने क्‍लाइंट की पहचान करना जरूरी होता है. इस दौरान उन्हें लेनदेन का उद्देश्‍य भी बताना होता है. बैंक खाता खोलने और 50 हजार रुपये से ज्‍यादा के लेनदेन के लिए आधार नंबर और आधिकारिक पहचान पत्र दिखाना जरूरी है.

यह नियम उन लोगों पर भी लागू होता है, जो 10 लाख और उससे ज्‍यादा की विदेशी मुद्रा का लेनदेन कर रहे हैं. नियमों के मुताबिक दो देशों के बीच हो रहे 5 लाख से ज्‍यादा के वायर ट्रांसफर और 50 लाख से ज्‍यादा की संपत्ति की खरीद भी इस श्रेणी में आते हैं. गैजेट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अगर आधिकारिक वैध दस्‍तावेज में नया पता नहीं है, तो ऐसे में बिजली, पोस्‍टपेड टेलिफोन और वाटर व पाइप्‍ड गैस बिल भी चल जाएगा. हालांकि यह दो महीने से ज्‍यादा पुराना नहीं होना चाहिए.

अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप, जल्द करें आवेदन

Scholarship

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति के मेधावी छात्रों के लिए एक खुशखबरी है. भारत सरकार ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप देने के लिए आवेदन मंगवाए है. इस स्कॉलरशिप के अंतर्गत छात्रों की पढ़ाई के दौरान होने वाले खर्च को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय देता है.

जिन भारतीय मेधावी छात्रों ने बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए, एमडी, एमए, एमकॉम, एलएलबी या 12वीं कक्षा से ऊपर पढ़ने वाले छात्रों ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में दाखिला लिया है, वे भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता शिक्षा योजना 2017-18 के तहत इस छात्रवृति के लिए आवेदन कर सकते हैं.

शैक्षिक योग्यता- इसके लिए वही छात्र पात्र हैं, जो 12 वीं पास करके उपरोक्त किसी प्रोग्राम के पहले वर्ष में हैं और जिनकी पारिवारिक आय 4.5 लाख रूपए वार्षिक आय से कम हो.

कैसे करें आवेदनः केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार होंगे.

धनराशिः छात्रवृति के तहत ट्यूशन फीस, पुस्तक व स्टेशनरी का खर्च तथा कंप्यूटर सहित अन्य सुविधाएं दी जाएंगी.

इस वेबसाइट से होगा आवेदनः https://scholarships.gov.in/

इस लिंक पर होगा रजिस्ट्रेशनः https://scholarships.gov.in/newStudentRegFrm

आवेदन करने की अंतिम तिथिः 31 अक्टूबर 2017

फॉर्म भरने से पहले अपने बैंक की पूरी जानकारी या पासबुक अपने साथ रखें. स्कॉलरशिप से जुड़ी किसी भी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर (0120 – 6619540) भी दिया गया है.

300 दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म

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बुद्धिज्म

भदोही। उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के एक गांव की दलित बस्ती में तीन दिन में 300 लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया. सारनाथ से आए बौद्ध धर्म के अनुयायी की देखरेख में पूरी कवायद की गई. उसके बाद बस्ती के लोगों ने हिंदू देवी-देवताओं के चित्र नहर में विसर्जित कर दिए.

ज्ञानपुर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित कसिदहां गांव की दलित बस्ती में रविवार को 100 लोगों ने हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया. पिछले तीन दिनों में बस्ती के कुल 300 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया है. सारनाथ से आए बुद्ध घोष राम वचन, विश्व बौद्ध महासभा के अध्यक्ष आलोक बौद्ध और अरविंद बौद्ध की देखरेख में बस्तीवासियों ने धर्म परिवर्तन किया. रविवार को जुलूस निकाल बस्ती के लोगों ने हिंदू देवी देवताओं के चित्र और प्रतिमाएं नहर में विसर्जित कर दीं.

कसिदहां दलित बस्ती निवासी एवं बौद्ध धर्म अपनाने वाले अधिवक्ता कोमल राम और सुरेंद्र कुमार ने कहा कि हिंदू धर्म शुरू से दलितों का उत्पीड़न करता आया है. उत्पीड़न से बचने के लिए धर्म परिवर्तन किया. उन्होंने आगे कहा कि हर वर्ग के लोग दलितों को प्रताड़ित करते थे. इससे परेशान होकर बस्ती के लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी उत्तर प्रदेश के नौतनवां में 20 दलित लोगों ने बौद्ध महासम्मेलन में बौद्ध धर्म अपनाया है.

अमर ऊजाला से साभार

दलाई लामा से मिलने वालों को धमकी दे रहा है चीन

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दलाई लामा

बीजिंग। विदेशी नेता सोच भी नहीं सकते थे कि निर्वासित तिब्‍बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ उनकी मुलाकात इतनी भारी पड़ेगी और उन्‍हें चीन के क्रोध का सामना करना पड़ेगा. एक चीनी अधिकारी ने कहा है कि दलाई लामा से व्यक्तिगत तौर पर मिले विदेशी नेता कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि यह मुलाकात उनके लिए चीन के गुस्से का कारण बन जाएगा.

चीन दलाई लामा को खतरनाक अलगाववादी के तौर पर देखता है जिन्‍होंने चीनी नियमों के खिलाफ उठने में असफल रहने के बाद 1959 में भारत में शरण ली थी. नोबेल शांति पुरस्‍कार विजेता दलाई लामा का कहना है कि वे केवल अपने हिमालयी पैतृक निवासस्‍थान के लिए स्वायत्ता की चाह रखते हैं.

दलाई लामा के विदेशी दौरे से चीन क्रोधित है और चीन के गुस्‍से के परिणाम के डर से कम से कम राष्ट्रीय नेता उनसे मिलने को तैयार हैं. हालांकि कुछ ने बीजिंग को यह कहते हुए समझाने का प्रयास किया है कि वे आधिकारिक तौर पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत रूप से मिल रहे हैं. कम्युनिस्‍ट पार्टी की तिब्‍बत वर्किंग ग्रुप के प्रमुख झांग यीजिओंग ने बताया कि दलाई लामा से मिलने वालों का कोई बहाना नहीं चलेगा.

1950 में चीन ने शांतिपूर्ण मुक्ति कहकर तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया और आर्थिक साधनों का उपयोग करते हुए दलाई लामा का समर्थन देने वालों को दंड दिया ताकि वे अपना समर्थन न दें. चीन ने तिब्बत में अधिकारों के दुरुपयोग के आरोपों को जोरदार तरीके से गलत करार दिया और कहा कि इसके शासन के तहत दूरदराज और पिछड़े क्षेत्र में भी समृद्धि आया है. साथ ही यह तिब्बती लोगों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का पूर्ण सम्मान करता है.

चीन ने यह भी कहा कि तिब्‍बत इसका अभिन्‍न अंग है और यह सदियों से इसका रहा है. 2006-2010 तक तिब्‍बत में काम करने वाले झांग ने बताया कि तिब्‍बती बौद्ध विशेष धर्म है जिसका जन्‍म प्राचीन चीन में हुआ. यह चीनी धर्म है. यह बाहर से नहीं आता.

राहुल गांधी से डरे मोदी का महीने में तीसरा गुजरात दौरा

Modi vs rahul नई दिल्ली। गुजरात को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह भले ही ‘ऑल इज वेल’ का दावा कर रहे हों लेकिन सच यह है कि भाजपा गुजरात चुनाव को लेकर काफी डरी हुई है. जिस तरह से गुजरात में चुनाव की तारीखों को रोक कर रखा गया है, उससे भाजपा की स्थिति को समझा जा सकता है. तो वहीं अक्टूबर महीने में पीएम मोदी तीसरी बार गुजरात जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अक्टूबर को फिर से गुजरात आएंगे. इस दौरे के दौरान वह वड़ोदरा और भावनगर जिलों में कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. गुजरात चुनाव की घोषणा को रोक लेने के समय ही कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने इसकी आशंका जाहिर की थी. अब वो बात सच हो गई है. दरअसल पिछले करीब 15 सालों में भाजपा पहली बार गुजरात में नरेंद्र मोदी के बिना चुनाव लड़ रही है. मोदी गुजरात से बाहर हैं तो राहुल गांधी लगातार गुजरात का दौरा कर भाजपा और पीएम मोदी पर निशाना साध रहे हैं. राहुल गांधी के एक के बाद एक हमले से मोदी और अमित शाह दोनों परेशान हैं. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा के गुजरात मॉडल पर लगातार सवाल उठा रहे हैं. तो साथ ही राहुल गांधी ने भाजपा और प्रधानमंत्री के विकास के दावे पर भी तंज कसा है. राहुल गांधी की गुजरात में सक्रियता को लेकर मोदी की बेचैनी को इसी से समझा जा सकता है कि पिछले गुजरात दौरे के समय मोदी का पूरा भाषण राहुल गांधी पर ही केंद्रित था. जाहिर है गुजरात चुनाव 2019 के चुनाव की रुपरेखा तय करने वाला होगा. और मोदी और शाह इसे किसी भी कीमत पर हारना नहीं चाहेंगे. फिलहाल तो गुजरात चुनाव मोदी बनाम राहुल गांधी होता दिखाई दे रहा है.

‘भुखमरी’ से मरने वाली संतोषी की मां से मारपीट

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सिमडेगा

नई दिल्ली। झारखंड के सिमडेगा ज़िले में भुखमरी से मरने वाली लड़की की मां से गांव की कुछ औरतों ने मारपीट की है. बीते शुक्रवार की रात गांव में रहने कुछ महिलाओं ने कोयली देवी से मारपीट की. महिलाओं का आरोप था कि बेटी संतोषी कुमारी की भुखमरी से मौत का आरोप लगाकर कोयली देवी ने गांव का नाम बदनाम किया है.

इसके बाद शनिवार सुबह कोयली देवी पास के गांव में रहने वाली सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू के घर चली गईं. साहू ने बताया कि कोयली देवी के साथ मारपीट करने के बाद उन्हें जबरन गांव से निकालने की कोशिश की गई. उनके सामान को घर से बाहर फेंक दिया गया था. शनिवार सुबह सुरक्षा देने की मांग करते हुए हमने इसकी सूचना उपज़िलाधिकारी को दे दी है.

ये भी पढ़ेंःमुख्य सचिव ने दिया था आधार न होने पर राशन कार्ड रद्द करने का आदेशः राज्य खाद्य मंत्री

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सिमडेगा के उप संभागीय पुलिस अधिकारी एके सिंह ने कहा, ‘हमने जलडेगा थाना इंचार्ज और ब्लॉक विकास अधिकारी को उनके गांव भेज दिया है. पता लगा कि कोयली देवी अपने घर में नहीं हैं. सुरक्षा का आश्वासन देकर उन्हें साहू के घर से वापस उनके घर लाया गया है.’

सिंह कहते हैं, ‘अभी तक कोयली देवी ने किसी महिला की पहचान नहीं की है. अगर वह कोई औपचारिक शिकायत करती हैं तो हम एफआईआर दर्ज करेंगे. हम उनके घर की सुरक्षा भी बढ़ाएंगे. अभी के लिए जलडेगा थाना इंचार्ज और ब्लॉक विकास अधिकारी उनके घर पर तैनात हैं.’

ये भी पढ़ेंः 10 साल की बच्ची की मौत की वजह बना आधार कार्ड

गौरतलब है कि कोयली देवी ने बताया था कि राशन कार्ड को आधार कार्ड से नहीं जोड़ पाने की वजह से पिछले आठ महीने से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिल रहा था. इस वजह से उनकी 11 साल की बेटी संतोषी कुमारी ने 8 दिन से खाना नहीं खाया था और बीते 28 सितंबर को भूख से उसकी मौत हो गई.

GST और डिजिटल इंडिया पर तंज कसने वाली फिल्म से घबराई भाजपा

  मर्सल

नई दिल्ली। अभिनेता विजय फिल्म ‘मर्सल’ को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है. फिल्म के डायलॉग से भारतीय जनता पार्टी और डॉक्टरों को दिक्कत होने लगी है. भाजपा के नेताओं और डॉक्टरों ने फिल्म की कुछ बातों को लेकर ऐतराज जताया है. ‘मर्सल’ दीपावली के दिन रिलीज हुई है.

दरअसल, फिल्म में ऐसे कई डायलॉग है जिसमें जीएसटी और डिजिटल इंडिया कैंपेन पर तंज कसा गया है. फिल्म के एक सीन में विजय कहते हैं, “सिंगापुर 7% जीएसटी लगाकर भी सभी को फ्री हेल्थकेयर दे रहा है, जबकि 28% लगाने वाला भारत यह सुविधाएं नहीं दे पा रहा है.”

शुक्रवार को भाजपा महासचिव एच राजा ने कहा कि पार्टी आलोचना का स्वागत करती है, लेकिन झूठ को सहन नहीं करेगी. यह सफेद झूठ है कि सिंगापुर में हेल्थ पूरी तरह फ्री है. हमारे भारत में भी शिक्षा और स्वास्थ्य गरीबों के लिए फ्री हैं. मर्शल केवल विजय की नरेंद्र मोदी के लिए नफरत का नतीजा है.

डॉक्टर पर तंज कसते हुए विजय कहते हैं, “लोग सरकारी अस्पताल में सुविधाओं के न मिलने पर निजी अस्पताल में जाते हैं. डॉक्टर इस पेशे का इस्तेमाल सिर्फ पैसा कमाने के लिए कर रहे हैं.” इस पर तमिलनाडु के डॉक्टरों ने ऐक्टर विजय की फिल्म ‘मर्सल’ खिलाफ विरोध जताने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है. राज्य के डॉक्टर ‘मर्सल’ देखने के लिए दर्शकों को सिनेमाहॉल में जाने की बजाय इसके पाइरेटेड वर्जन को देखने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि इस फिल्म में डॉक्टरों का गलत चित्रण किया गया है.

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में पीएम नरेंद्र मोदी को नसीहत दी है. भाजपा पर निशाना साधते हुए राहुल ने ट्वीट किया कि ‘मिस्टर मोदी, सिनेमा तमिल संस्कृति और भाषा की गहरी अभिव्यक्ति है. मर्सल में हस्तक्षेप करके तमिल अभिमान का ‘राक्षसीकरण’ मत कीजिए.’

तमिलनाडु भाजपा के प्रेसिडेंट थमिलीसाई सौंदरराजन ने फिल्म से इन सीन को हटाने की मांग की है. वहीं केंद्रीय मंत्री राधाकृष्णन ने भी सौंदरराजन की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि फिल्म में जीएसटी के बारे में जो झूठ फैलाए गए हैं, वैसे सीन को हटाया जाना चाहिए.