गौतम गंभीर और सुरेश रैना के पास पिच पर कार लेकर पहुंचा युवक

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नई दिल्ली। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच पालम के वायुसेना मैदान में रणजी ट्राफी मैच के दौरान सुरक्षा में उस वक्त बड़ी चूक दिखी जब मैदान में अचानक एक व्यक्ति कार लेकर घुस गया. इससे खिलाड़ी और अधिकारी दोनों हैरान रह गए. चालक कार लेकर दो बार पिच के ऊपर से गुजरा. इस मैच में गौतम गंभीर, ईशांत शर्मा, सुरेश रैना और ऋषभ पंत जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल रहे हैं. हालांकि घटना के बाद सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और गेट को बंद कर दिया ताकि आरोपी भाग ना पाए.

दिन का खेल खत्म होने से 20 मिनट पहले शाम के लगभग चार बज कर 40 मिनट पर अचानक मैदान में एक वैगन आर कार घुस गयी. इस समय उत्तर प्रदेश की टीम दूसरी पारी में बल्लेबाजी कर रही थी. जब कार स्टेडियम में पहुंची उस वक्त वहां गंभीर, इशांत और मनन शर्मा खड़े हुए दिख रहे थे जबकि कार पिच के बीच में खड़ी थी. सुरक्षा में इस बड़ी चूक से दोनों टीमों के खिलाड़ी हतप्रभ रह गए. ईशांत शर्मा ने ट्वीट किया कि आज रणजी मैच के दौरान दिल दहलाने वाला दृश्य जिसमें गौतम गंभीर साथ में इसका गवाह बना.

बीसीसीआई अपनी मान्यता प्राप्त इकाई सेना खेल संवर्धन बोर्ड (एसएससीबी) से इस घटना की रिपोर्ट मांगेगा. कार चालक की पहचान गिरीश शर्मा में हुई है. यह पता चला है कि वायुसेना मैदान में कारों को ले जाने की अनुमति पूरी जांच के बाद दी जाती है लेकिन सुरक्षाकर्मी के गेट पर खड़ा नहीं होने से यह घटना घटी. कार चालक ने परिसर में घुस कर कार को पार्किंग स्थल में ले जाने की जगह खेल के मैदान में घुसा दिया. अचानक हुई इस घटना से खिलाड़ी स्तब्ध रह गए.

वायुसेना पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस को सौंप दिया. बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना ने कहा कि बीसीसीआई इस घटना की जांच करेगी.

बेगूसराय में स्नान के दौरान भगदड़ में चार की मौत

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बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में कार्तिक पूर्णिमा मेले में स्नान के दौरान भगदड़ मचने से चार लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हो गए हैं. यह भगदड़ चकिया सिमरिया घाट पर आज सुबह कार्तिक पूर्णिमा स्नान और महाकुंभ के दौरान मची.

शनिवार को कार्तिक पूर्णिमा व महाकुंभ के मद्देनजर नदी घाट पर भारी भीड़ थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी थे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्नान के दौरान वहां कोई अफवाह फैली, जिसके बाद लोग इधर-उधर भागने लगे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नदी घाट के संकरे रास्ते पर मची भगदड़ में दर्जनों श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते भागने लगे. इसमें दबकर मरने वाली तीन महिलाओं के शव बरामद कर लिए गए हैं. उनकी पहचान की कोशिश की जा रही है.

घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है. प्रशासन ने फिलहाल चार श्रद्धालुओं के मौत की पुष्टि की है. हालांकि, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने शवों को नदी में बहा देने का आरोप भी लगाया है. लेकिन प्रशासन ने इससे इन्कार किया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक जताया है. उन्होंने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

SBI दे रहा है सबसे सस्ता लोन

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आप घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो एसबीआई आपको सबसे सस्ता होम लोन दे रहा है. एसबीआई ने होम लोन की दर में 0.5 फीसदी की कटौती की है. इस कटौती के बाद बैंक की होम लोन की दर 8.30 फीसदी हो गई है. मौजूदा समय में यह दर सबसे कम है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य बैंक भी लोन की दर में कटौती कर सकते हैं और आम आदमी को सस्ते कर्ज का तोहफा मिल सकता है.

एसबीआई ने ऑटो लोन पर भी ग्राहकों को राहत दी है. बैंक ने ऑटो लोन पर ली जाने वाली ब्याज दर 0.05 फीसदी घटा दी है. इस कटौती के बाद अब यह 8.70 फीसदी पर आ गई है. नई दरें 1 नवंबर से लागू हो चुकी हैं. हालांकि अभी तक दूसरे बैंकों ने इस मोर्चे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की है. विशेषज्ञों का कहना है कि एसबीआई की तरफ से दर में कटौती करने के बाद अन्य बैंक भी इस राह पर आगे बढ़ सकते है.

कर्ज देने के लिए एमसीएलआर ने नया मानक तय किया गया है. मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) वो रेट होता है; जिसके नीचे बैंक कर्ज नहीं दे सकते. हालांकि कुछ खास मामलो में इस रेट से नीचे कर्ज देने की छूट होती है. इसके लिए आरबीआई की तरफ से पूर्व में ही मानक तय किए हुए हैं. एमसीएलआर को 1 अप्रैल, 2016 को नए मानक के तौर पर तय किया गया था. भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले 10 महीनों में पहली बार यह कटौती की है.

राहुल गांधी ने मानी जिग्नेश मेवाणी 90 प्रतिशत मांगें

राहुल गांधी

नवसारी। देशभर की नजरें इस बार गुजरात चुनाव पर है. भाजपा के गढ़ के रूप में विख्यात गुजरात में राहुल गांधी ने चुनावी सरगर्मियां तेज कर दी हैं. राहुल गांधी ने सबसे पहले अल्पेश ठाकोर को कांग्रेस में शामिल किया, उसके बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को भी कांग्रेस में शामिल करने के प्रयास किए. अब दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी से मुलाकात कर चुनावी हलचल तेज कर दी है.

जिग्नेश मेवाणी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच नवसारी में शुक्रवार को मुलाकात हुई. मुलाकात के बाद जिग्नेश ने कहा कि उनकी और राहुल गांधी के बीच 17 मांगों पर चर्चा हुई और राहुल गांधी ने उनकी मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करने का आश्वासन दिया है. जिग्नेश ने कहा कि जब हमने राहुल गांधी से अपनी मांगों के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि इसमें 90 प्रतिशत बातें हमारा संवैधानिक अधिकार है. इसे घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा.

कांग्रेस उपाध्यक्ष के बारे में मेवाणी ने कहा कि राहुल गांधी और भाजपा की सोच में अंतर है. भाजपा तो उनकी बात सुनती ही नहीं है. राहुल से मुलाकात से पहले जिग्नेश ने भाजपा पर जमकर हमला किया. उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता भाजपा से छुटकारा चाहती है. साथ ही जिग्नेश ने कहा कि अगर कांग्रेस उनकी मांगें मान लेती है, तो वे बाहर से समर्थन देने को तैयार हो सकते हैं.

गुजरात के ऊना में दलितों के हक को लेकर आंदोलन छेड़ने वाले जिग्नेश मेवाणी का साफ कहना है कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होंगे, लेकिन अगर कांग्रेस ने उनकी बात मान ली, तो वे कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे सकते हैं. इन दोनों युवा नेताओं की मुलाकात ने गुजरात में मोदी एंड कंपनी की राह और मुश्किल कर दी है.

भोपाल गैंगरेप: 3 आरोपी गिरफ्तार और 4 पुलिस अधिकारी निलंबित

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भोपाल। भोपाल गैंगरेप मामले में चार पुलिस अधिकारी निलंबित किए गए हैं और शहर के एसपी का तबादला कर दिया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. इस मामले में पुलिस ने अब तक 3 लोगों को अरेस्ट किया है. जीआरपी के एएसपी धर्मेंद्र सिंह ने शुक्रवार को बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी की पहचान की जा रही है.

आईजी पुलिस मकरंद देवस्कर ने बताया, रिपोर्ट दर्ज करने में देरी को लेकर टीआई रवींद्र यादव (हबीबगंज), संजय सिंह बैस (एमपी नगर), मोहित सक्सेना (जीआरपी थाना) और दो एसआई को सस्पेंड किया गया है. वहीं, सीएसपी एमपी नगर कुलवंत सिंह को हटाकर पीएचक्यू अटैच किया है.

गैंगरेप मामले को लेकर शिवराज सिंह ने डीजीपी समेत आला पुलिस अफसरों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. सीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को फौरन एक्शन लेना चाहिए. लापरवाही से काम करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई हो. रिपोर्ट दर्ज करने में 24 घंटे क्यों लगे इसका जवाब दिया जाए.

गुरुवार को इंसानियत को शर्मसार करते हुए एक छात्रा के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था. आरपीएफ में कार्यरत अस्सिटेंट सब इंस्पेटर की 19 साल की बेटी का आरोप है कि कोचिंग क्लास से वापस घर लौटते वक्त उसके साथ 4 लोगों ने गैंगरेप किया. इस मामले में भोपाल की एसपी जीआरपी, अनीता मालवीय ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी, 394, 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

मायावती ने खोज निकाला जीत का फार्मूला

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नई दिल्ली। यूपी में हो रहे निकाय चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती इस बार कुछ नया करने को सोचा हैं. मायावती इस बार सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्म्युले को अपनाने की तैयारी में जुटी हुई हैं. दरअसल पार्टी के पदाधिकारियों ने फैसला किया है कि इस बार निकाय चुनाव में सामान्य सीट पर सामान्य वर्ग का ही उम्मीदवार उतारा जाएगा. जब कोई सामान्य वर्ग का उम्मीदवार नहीं मिलेगा तो उसी सूरत में दलित या ओबीसी प्रत्याशी पर विचार किया जाएगा.

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में संघर्ष के बाद बसपा पहली बार आधिकारिक रूप से निकाय चुनाव में उतर रही है. इससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह भी देखने को मिल रहा है. उत्साह का आलम ये है कि पार्षद की एक सीट के लिए 6-6 लोगों ने आवेदन कर रखा है. यहां तक की सामान्य वर्ग की सीट के लिए भी दलित और ओबीसी उम्मीदवारों के आवेदन आए हैं. वैसे बसपा ने पहली बार पार्टी सिंबल के जरिए इस निकाय चुनाव को लड़ने का फैसला किया है. पार्टी के इस फैसले से जाहिर है कि मायावती अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली हैं. क्योंकि उन्हें पता है कि सोशल इंजीनियरिंग के जिस फर्मूले के तहत वो जीत की मिठाई खाना चाह रही हैं. क्या पता वही फर्मूला शायद 2019 में भी बसपा का मुंह मीठा करने के काम आ जाए.

धर्म के नाम से डराना आतंक नहीं तो क्या है?-प्रकाश राज

prakash Raj

नई दिल्ली। अभिनेता कमल हासन के ‘हिंदू आतंकवाद’ वाले लेख का अभिनेता प्रकाश राज समर्थन करते नजर आ रहे हैं. प्रकाश राज ने शुक्रवार को अपने एक ट्वीट में पूछा, ‘धर्म, संस्कृति और नैतिकता के नाम पर भय फैलना आतंक नहीं है तो यह क्या है? सिर्फ पूछ रहा हूं.’

कमल हासन ने एक तमिल साप्ताहिक पत्रिका ‘आनंदा विकटन’ में एक लेख लिखा है. जिसमें हासन ने कहा है कि दक्षिणपंथी लोग अब हिंसा पर उतारू हो रहे हैं. उन्होंने लिखा है कि राइट विंग ने अब मसल पावर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. राइट विंग हिंसा में शामिल है और हिंदू कैंपों में आतंकवाद घुस चुका है. इस लेख में उन्होंने दक्षिणपंथियों को निशाने पर लिया है.

इस लेख के बाद हासन के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है. हालांकि उन्होंने इस लेख में किसी का नाम नहीं लिया है. उन्होंने कहा था, ‘पूर्व में हिंदू दक्षिण पंथी, दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ हिंसा में शामिल हुये बगैर, उनको अपनी दलीलों और जवाबी दलीलों से हिंसा के लिये मजबूर करते थे.’ हासन ने लिखा कि हालांकि ‘यह पुरानी साजिश’ विफल होनी शुरू हो गयी, तब यह समूह हिंसा में शामिल हो गये.

तमिल फिल्म अभिनेता ने लिखा, ‘चरमपंथ किसी भी तरीके से उनके लिये सफलता या विकास का मानक नहीं हो सकता जो खुद को हिंदू कहते हैं ‘ हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात करने वाले हासन ने मार्क्सवादी नेता द्वारा उठाये गये उस सवाल का जवाब भी दिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि अभिनेता ‘हिंदूवादी ताकतों द्वारा धीमी घुसपैठ के जरिये द्रविड संस्कृति को कमजोर करने’ के बारे में क्या सोचते हैं.

अब कोचीन देवस्वम बोर्ड ने बनाया दलित पुजारी

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Kerala

कोच्चि। केरल में मंदिर बोर्डों की तरफ से जातिवादी बंधनों को तोड़ने की एक और पहल सामने आई है. बीते महीने राज्य के त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा दलितों को पुजारी बनाए जाने के बाद अब कोचीन देवस्वम बोर्ड ने भी एक दलित को बोर्ड का पुजारी नियुक्त किया है.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़ बोर्ड ने मथिलाकम के रहने वाले कुझुपुली उमेश कृष्णन को पुजारी बनाया है. उमेश कोचीन देवस्वम बोर्ड के अंतर्गत आने वाले किसी भी मंदिर के पहले दलित पुजारी हैं.नियुक्ति के बाद उमेश कृष्णन ने बुधवार को महादेव मंदिर के पवित्र गर्भगृह की अपनी ज़िम्मेदारियां संभाल लीं. इस मौके पर उनके माता-पिता, पत्नी, बच्चे और अन्य रिश्तेदार मौजूद थे. पिछले 12 सालों से कई मंदिरों के पुजारी रहे उमेश कृष्णन अपनी नई भूमिका को ‘भगवान का आशीर्वाद’ बताते हैं.

इससे पहले केरल के ही त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने छह दलितों को आधिकारिक तौर पर बोर्ड का पुजारी नियुक्त किया था. मंदिर ने पहले भी ग़ैर-ब्राह्मणों को पुजारी बनाया था, लेकिन किसी दलित को पुजारी बनाए जाने का यह पहला मौक़ा था. बोर्ड ने राज्य में संचालित अपने 1,504 मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए सरकार की आरक्षण नीति का पालन करने का फ़ैसला किया था. इसके लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू जैसे नियमों का पालन किया गया था. नतीजों में अन्य समुदाय से 36 उम्मीदवार मेरिट लिस्ट में आ गए जिनमें छह दलित भी शामिल थे.

बिहार में हो रही है फोटो पॉलिटिक्स

राजनीति

पटना। बिहार में राजनीति सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं. तीन दिन पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक तस्वीर जारी की थी जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एक शराबमाफिया राकेश सिंह खड़ा था. इसके बाद शराब को लेकर आरजेडी ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा था. जिसकी प्रतिक्रिया देने के लिए आज जेडीयू नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू नेताओं ने एक तेजस्वी यादव की तस्वीर दिखाई है, जिसमें एक लड़की उनके साथ खड़ी है. जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह कहा है कि तस्वीर दिखाने का मकसद ये है कि तेजस्वी लड़की के साथ रंगरलियां मना रहे हैं. जेडीयू ने तेजस्वी पर ये भी आरोप लगाया है कि वो शराब पीते हैं और उनके ब्लड सैंपल की जांच होनी चाहिए.

वहीं, जेडीयू की तरफ से लगाए गए इन आरोपों के जवाब में तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार की पार्टी के नेता चरित्रहनन की राजनीति कर रहे हैं. शराबबंदी को लेकर हमारे आईना दिखाने के बाद नीतीश कुमार ने हताशा में ये सब किया है. उनके पास भी नीतीश के खिलाफ बहुत कुछ है.

तेजस्वी ने आगे कहा है कि हम इस नकारात्मक राजनीति का पुरज़ोर विरोध करते हैं. राज्य में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, इसलिए अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ये किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, ‘’ये फ़ोटो उस समय की है जब मैं राजनीति में नहीं आया था और मैं क्रिकेट खेला करता था. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस तस्वीर में ग़लत क्या है? ये फ़ोटो बहुत पुरानी है.’’

यूपी निकाय चुनाव से पहले ऑर्डर पर तमंचे

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पुलिस हुसैनपुर। यूपी में हो रहे निकाय चुनाव को शांतिपूर्ण कराने का प्रशासन भले ही लाख दावा करे. लेकिन जिस तरह से बिझाड़ा हुसैनपुर में अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का भांडाफोड़ हुआ है उससे तो यही लगता है कि चुनाव में कुछ भी हो सकता है. अवैध हथियारों के बल पर बूथ भी लूटे जा सकते हैं. दरअसल एक नीजि समाचार पत्र में छपी खबरों की माने तो चुनाव के दौरान गड़बड़ी करने के मकसद से हुसैनपुर में अवैध तमंचा बनाने का काम चल रहा था. पुलिस की गिरफ्त में आए तमंचा बनाने वाले लोगों का मानना था कि चुनाव नजदीक है और ऐसे में तमन्चों की डिमाण्ड तेज हो जाती है. ये लोग तैयार किये गये तमन्चों को 1500 से 3 हजार रुपये तक में बेच दिया करते थे. इधर तमंचा बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्त में लेने के बाद पुलिस इसे बड़ी सफलता मान रही है क्योंकि पुलिस ने मौके से लगभग एक दर्जन बने तमंचे और दो देशी बन्दूकों के साथ साथ तमन्चा बनाने के काम में आने वाले कई सामान भी बरामद किए हैं. वैसे भले ही पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भी तलाश में जुट गई हो लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव शांतिपूर्ण समपन्न होने तक पुलिस के हाथ पांव फूले रहेंगे.

यूपी पुलिस ने रोकी चंद्रशेखर रावण की रिहाई

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नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि अब भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण फिलहाल जेल से नहीं निकल पाएंगे क्योंकि सहारनपुर पुलिस ने रावण के खिलाफ रासुका यानि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी है. गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि रावण की जेल से रिहाई हो जाएगी लेकिन अब ऐसा फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है.

एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक सहारनपुर एसएसपी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है. उनका कहना था कि रासुका के तहत रावण पर कार्रवाई करने की बात पहले से ही चल रही थी. लेकिन गुरुवार शाम को जिला अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण पर रासुका लगा दिया गया. इससे पहले गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चन्द्रशेखर रावण को सभी चार मामलों में जमानत दे दी थी. फिलहाल रावण अभी सहारनपुर जेल में ही बंद हैं जहां पर उनकी तबीयत नासाज चल रही है.

आपको बता दें कि भीम आर्मी की स्थापाना करने वाले चन्द्रशेखर दलित समाज में खासकर युवाओं में काफी लोकप्रिय हो गए थे. इसके बाद घटे घटनाक्रम में शब्बीरपुर में ठाकुरों और दलितों के बीच विवाद भी हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने रावण को जातीय हिंसा में साजिश रचने के आरोप में जून 2017 में गिरफ्तार कर लिया था.

NTPC ऊंचाहार कांडः सहायक महाप्रबंधक की अस्पताल में मौत, अब तक 36 लोग मरे

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लखनऊ। राष्‍ट्रीय तापीय विद्युत निगम (एनटीपीसी) के रायबरेली संयंत्र में हुई दुर्घटना में कंपनी के एक सहायक प्रबंधक की मौत हो गयी है. प्राविधिक शिक्षा एवं क्षमता विकास विभाग की सचिव भुवनेश कुमार ने एनटीपीसी ऊंचाहार बिजली संयंत्र के सहायक महाप्रबन्‍धक संजीव कुमार शर्मा के निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्‍होंने लखनऊ के एक निजी अस्‍पताल में गुरूवार शाम अंतिम सांस ली.

कुमार ने बताया कि शर्मा बुधवार की शाम एनटीपीसी के संयंत्र में बॉयलर फटने की घटना में गम्‍भीर रूप से झुलस गये थे. डाक्‍टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्‍हें बचाया नहीं जा सका. उन्‍होंने बताया कि शर्मा के शव का पोस्‍टमार्टम कराया गया है.

गौरतलब है कि ऊंचाहार स्थित एनटीपीसी के बिजली संयंत्र में बुधवार शाम बॉलयर फटने से अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल है. यह हादसा बुधवार शाम करीबी साढ़े तीन बजे हुआ. हादसे के शिकार लोगों को NTPC के अस्पताल और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कुछ लोगों को स्थानीय निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है.

इस हादसे पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है. उन्होंने प्रमुख सचिव और गृह सचिव को पूरे मामले पर नजर रखने और घायलों को तत्काल राहत और बचाव कार्य को कराने का आदेश दिया है.

लैंगिक समानता में भी फिसड्डी हुआ भारतः रिपोर्ट

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नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री विकास कितने भी दावे कर लें, लेकिन आए दिन आने वाली रिपोर्टें उनके विकास के दावे को साबित कर देती हैं. पहले भूख का ग्लोबल इंडेक्स में पीछे जाना. अब एक रिपोर्ट ने लैंगिक समानता पर भी भारत फिसड्डी बता दिया.

दरअसल, वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम ने दो नवंबर को ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स  2017 की सूची जारी की. इस सूची में भारत को दुनिया के 144 देशों की सूची में 108वां स्थान मिला है. पिछले साल इस सूची में भारत का 87वां स्थान था. इस सूची में आइसलैंड, नार्वे और फिनलैंड जैसे देश इस साल भी शीर्ष पर रहे. दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ऊपर बांग्लादेश 47वें पायदान पर है.

भारत की खराब रैंकिंग के लिए मुख्यतः दो कारक जिम्मेदार हैं. पहला, “स्वास्थ्य और आयु” जिसमें भारत 141वें स्थान पर है. इस मामले में चीन की हालत सबसे खराब है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में लड़कों को तरजीह देने की प्रवृत्ति की वजह से लैंगिक असमानता को बढ़ावा मिलता है.

दूसरा, “आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी” के मामले में भारत दुनिया में 139वें स्थान पर रहा. पिछले साल भारत इस मामले में 136वें स्थान पर था. इस मामले में भारत की स्थिति केवल ईरान, यमन, सऊदी अरब, पाकिस्तान और सीरिया जैसे देशों से ही बेहतर रही.

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में महिलाओं की औसत सालाना आय पुरुषों के मुकाबले काफी कम है. महिलाएं एक समान काम के लिए पुरुषों के वेतन का करीब 60 प्रतिशत ही पाती हैं. कुल कामगारों में एक-तिहाई महिलाएं हैं लेकिन इनमें 65 प्रतिशत महिलाएं दिहाड़ी मजदूरी (कामवाली, बेबी सीटर, कुक इत्यादि) करती हैं, जबकि पुरुषों के कामगार वर्ग का केवल 11 प्रतिशत ही दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करता है. सभी क्षेत्रों को मिलाकर देश में केवल 13 प्रतिशत महिलाएं ही वरिष्ठ पदों, मैनेजर और विधायी पदों पर काम कर रही हैं.

बिहार में अब हुआ शौचालय घोटाला

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पटना। बिहार में आए दिन एक नए घोटाले का खुलासा हो रहा है. बिहार महादलित विकास मिशन में हुए घोटाले के बाद अब बिहार में शौचालय घोटाला सामने आया है. शौचालय घोटाले का मामला तब सामने आया है, जब देशभर में शौचालय बनवाने की मुहीम चल रही है.

बिहार में हुए शौचालय घोटाले का खुलासा पटना के जिलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने किया है. जांच में समाने आया है कि एक एनजीओ के अकाउंट में शौचालय बनवाने के नामपर करीब 13 करोड़ की रकम दे दी गई. मामले के दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी गई है और अभी भी जांच जारी है. जानकारी के मुताबिक अभी शौचालय निर्माण एजेंसी से जुड़े खातों को खंगाला जा रहा है.

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इससे जुड़े और इसके माध्यम से कितने पैसे किसको ट्रांसफर किये गये, इसकी लगातार जांच हो रही है. जिस एजेंसी व एनजीओ को शौचालय निर्माण के लिए पैसे का भुगतान किया गया है, इसका कहीं कोई प्रूफ नहीं मिला है. इसके अलावा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) में भी इन एजेंसियों से संबंधित कोई कागजात भी नहीं है. सरकारी अधिकारी ने बताया है कि पैसों की रिकवरी के लिए आरोपियों के मकान, जमीन व अन्य संपत्ति जब्त की जाएगी.

क्या है पूरा मामला? बिहार सरकार ने साल 2013 में तय किया था कि शौचालय निर्माण का पैसा किसी एजेंसी के माध्यम से लाभार्थियों को नहीं दिया जायेगा. इसके बावजूद पीएचईडी के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता विनय कुमार सिन्हा और एकाउंटेंट बिटेश्वर प्रसाद सिंह ने वर्ष 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में पटना जिले के विभिन्न प्रखंडों में बनने वाले 10 हजार से अधिक शौचालयों का पैसा (13.66 करोड़) मई, 2016 में सीधे एजेंसी को दे दिया.

उस वक्त आनन-फानन में तीन एजेंसियों सहित कई लोगों के विभिन्न खातों में 200 से अधिक चेक काट कर डाल दिया गया. यह गबन उस वक्त किया गया, जब पीएचईडी से शौचालय निर्माण का खाता डीआरडीए में ट्रांसफर होने वाला था.

बिहार : 2019 में हावी रहेगी दलित राजनिति

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बिहार के नेताओं को एक बार फिर दलित याद आने लगे हैं. क्योंकि अब इन लोगों को लगने लगा है कि दलितों को अपने साथ किए बगैर 2019 का चुनावी बैतरनी पार कर पाना संभव नहीं है. तभी तो जेडीयू के दो बड़े नेता श्याम रजक और उदय नारायण चौधरी के बागी तेवर अपनाये जाने के बाद. नीतीश सरकार भी आउट सोर्सिंग में आरक्षण नीति लागू कर दलित की सियासत में कूद गई है.

लेकिन जेडीयू के दलित नेता श्याम रजक का इरादा कुछ और ही बयां कर रहा है. उन्होने कहा है कि एक नया मोर्चा बन गया है और इसके लिए बकायदा उन्हे बिहार सहित गुजरात और राजस्थान से भी आमंत्रण मिल रहा है. वैसे बिहार में लोक जन शक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान और हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी भी दलितों के सबसे बड़े नेता होने का दावा करते नहीं थकते है. इधर आरजेडी के दलित नेता शिवचंद्र राम की माने तो लालू प्रसाद ने ही दलितों के लिए सबसे ज्यादा काम किया है. वैसे कांग्रेस ने भी दलित के नाम पर राजनीति करने का कोई मौका नहीं छोड़ा है. यानि कुल मिलाकर बिहार में दलित सियासत. आने वाले चुनाव में सभी पार्टियों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है. अब देखना ये है कि दलितों को खुश करने के लिए सियासी थाल में कौन कौन से वादे परोसे जाएंगे. लेकिन इतना तो तय है कि कोई भी पार्टी दलितों को दरकिनार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगी.

सवर्ण महिलाओं का आंदोलन झूठा नारीवाद!

Feminism

नारीवाद की अवधारणा भारत में केवल सवर्ण महिलाओं का फैशन है, क्योंकि यहां फेमिनिज़्म पितृसत्ता का बुलेटप्रूफ़ जैकेट और ब्राह्मणवाद का हथियार है. दरअसल स्त्री अधिकारों और समानता की मुनादी करने वाली सवर्ण नारीवादी महिलाएं ब्राह्मणवादी सिस्टम की कठपुतली हैं, जिन्हें जातीय प्रिविलेज की रक्षा करने के लिए नारीवाद के नाम का झुनझुना पकड़वाया गया है. भारत में नारीवाद का पूरा डिस्कोर्स इस बात पर टिका हुआ कि वे जातिगत प्रिविलेज को बनाये रखने और उसे संरक्षित रखने में कितना सहयोग कर रहा है. इस रूप में यहां नारीवाद का पर्याय केवल सवर्ण नारीवाद और छद्म जातिवाद है.

सवर्ण महिलाओं का आंदोलन झूठा नारीवाद है, क्योंकि इसका नेतृत्व भी उनके हाथ में नहीं, बल्कि सवर्ण पुरुषों के हाथ में है. सवर्ण फेमिनिस्ट दलित-बहुजन महिलाओं के आंदोलन को सवर्ण पुरुषों के बचाव में आगे नहीं बढ़ने देती या विक्टिम ब्लेमिंग-नेमिंग-शेमिंग करने लगती हैं. ब्राह्मण-सवर्ण पुरुषों के हाथों की कठपुतली बने हुए नारीवादी आंदोलन में दलित-बहुजन महिलाएँ अपनी जाति के कारण शामिल नहीं की जाती. सवर्ण महिला में महिला नहीं होती बल्कि केवल सवर्ण होती है, इसलिए जातिगत श्रेष्ठताबोध उन्हें केवल ब्राह्मणवाद का हथियार बनाये रखता है. इसलिए जैसे ही दलित-बहुजन महिलाओं के मुद्दे सामने आते हैं, नारीवादी बगले झाँकने लगते हैं.

हाल ही में इसका एक बड़ा उदाहरण देखने में तब आया जब राया सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े यौन कुंठित 69 प्रोफ़ेसर्स की सूची जारी की, जिन्होंने अपनी छात्राओं का यौन शोषण किया था. राया की सूची में सम्मिलित लगभग सभी प्रोफ़ेसर्स ब्राह्मण-सवर्ण लेफ़्टिस्ट(इक्का-दुक्का )थे, जिन्हें पीड़ित छात्राओं के बयानों पर जारी किया गया था. सूची जारी करते ही सो कॉल्ड फेमिनिस्ट कविता कृष्णन, निवेदिता मेनन और आयशा किदवई जो सभी सवर्ण हैं, ने बाकयदा बयान देकर राया और सभी पीड़िताओं की आलोचना की. चूंकि लगभग सभी शोषित प्रोफ़ेसर्स ब्राह्मण-सवर्ण थे, ज़ाहिर तौर पर सभी फेमिनिस्टों ने अपने सवर्ण होने का फर्ज निभाया. एक अम्बेडकराइट लड़की नारीवाद का नेतृत्व करें, यह सवर्ण फेमिनिस्टों को बर्दाश्त कैसे हो सकता था. आख़िर क्यों सवर्ण नारीवादियों को उन प्रोफ़ेसर्स के बचाव में आना पड़ा? जवाब साफ है, नारीवादियों का नारीवाद दरअसल ब्राह्मणवादी व्यवस्था से अलग नहीं है.

हमारे देश में जाति का मुद्दा सभी मुद्दों पर भारी पड़ता है और नारीवाद भी उससे अछूता नहीं है. जो स्टेप बहुजन छात्रा राया सरकार ने लिया, यही कदम किसी सवर्ण लड़की ने ऊठाया होता तो क्रांतिवीर, नेशनल हीरोइन, बहादुर लड़की, क्रान्तिलीक आदि तमगों से नवाज़ दी जाती, सोशल मीडिया पर नेशनल फेस बन जाती, नारीवाद का झंडा उसके हाथों में थमा दिया जाता और पूरा मीडिया उन्हें क्रांति कहकर प्रचारित करता.

दलित-बहुजन लड़कियों को सवर्ण औरतों के समान स्पेस नहीं मिलते. अब जबकि दलित-बहुजन लड़कियों ने अपनी लड़ाई खुद लड़ना, बोलना-लिखना शुरू कर दिया है, तो सवर्ण फेमिनिस्टों को अपना आंदोलन जो कि बस हवाबाज़ी है टूटता नज़र आ रहा है इसलिए उन्हें बड़े-बड़े बयान देकर अपने पतियों, भाइयों, बॉयफ्रेंड्स की रक्षा करनी पड़ रही है. पितृसत्ता को गरिया कर अपना चेहरा चमकाने वाली फेमिनिस्ट अंततः पितृसत्ता के शरणागत ही हैं. राया सरकार की सूची से तकलीफ का सबब जनेऊ के पवित्र धागे का ही है.

ड्यू प्रोसेस फ़ॉलो करने की सलाह देने वाली सवर्ण औरतें ये बात अच्छी तरह जानती हैं कि ड्यू प्रोसेस का मतलब ब्रह्मानिकल सिस्टम में खुद को ख़त्म कर देना है जहां जाति देखकर न्याय मिलेगा. यह वही नारीवाद है जहां सवर्ण महिलाओं के साथ होने वाला शोषण राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनाया जाता है और दलित-बहुजन महिलाओं के साथ कुछ भी हो जाए तो उस पर उफ़्फ़ भी नहीं निकलती.

ये नारीवाद पितृसत्ता का पोषण करने वाला है, जो केवल ब्रह्मानिकल सिस्टम का सबपार्ट है. जब जाति के आधार पर ही महिला मुद्दों का समर्थन या विरोध होना है तो उसे नारीवाद का नाम क्यों दिया जाए? जहां वंचित वर्ग की महिलाओं की आवाज़ की इम्पोर्टेंस न हो ऐसे फेमिनिज़्म को एक मिथक ही कहा जाना चाहिए.

यह लेख दीप्ति का है.