‘हिंदू आतंकवाद’ के लेख पर भाजपा के निशाने पर कमल हासन

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नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय अभिनेता कमल हासन इन दिनों चर्चा में हैं. कभी राजनीति में शामिल होने की अटकलों के लिए तो कभी किसी पार्टी समर्थित बयान के लिए. अब कमल हासन एक लेख के माध्यम से चर्चा के केंद्र में आ गए हैं.

दरअसल, कमल हासन ने एक तमिल साप्ताहिक पत्रिका ‘आनंदा विकटन’ में एक लेख लिखा है. जिसमें हासन ने कहा है कि दक्षिणपंथी लोग अब हिंसा पर उतारू हो रहे हैं. उन्होंने लिखा है कि राइट विंग ने अब मसल पावर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. राइट विंग हिंसा में शामिल है और हिंदू कैंपों में आतंकवाद घुस चुका है. इस लेख में उन्होंने दक्षिणपंथियों को निशाने पर लिया है.

कमल हासन लिखते हैं कि हिंदू आतंकवाद एक सच बन चुका है. आज के वक्त में कोई नहीं कह सकता कि हिंदू आतंकवाद का कोई वजूद नहीं है. पहले हिंदू कट्टरपंथी बातचीत को अहमियत देते थे और आपसी बहस से मुद्दों को सुलझाते थे लेकिन अब ये हिंसा करते हैं. हासन ने लिखा, ऐसा देखा जा रहा है कि लोगों का सच में विश्वास कमजोर हो रहा है.

हासन ने लिखा है कि दक्षिणपंथियों को अगर ‘हिंदू आतंकवादी’ कहा जाता है तो वे किस आधार पर इसे गलत कह सकते हैं. हासन ने कहा कि दक्षिणपंथियों को ये समझना चाहिए कि हिंसात्मक गतिविधियों से कभी किसी को कोई फायदा नहीं होता है. हासन ने अपने लेख में हिंसा से निपटने के लिए तमिलनाडु सरकार की आलोचना की है जबकि केरल सरकार की तारीफ की है.

भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने इस मुद्दे पर कमल हासन की आलोचना करते हुए उन्हें नैतिक तौर पर भ्रष्ट बताया है. स्वामी ने कहा कि अभी तक ‘हिंदू आतंकवाद‘ के कोई सबूत नहीं हैं. भाजपा नेता मुरलीधरन ने कमल हासन पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि हासन सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं.

एयरटेल करेगा 3जी सेवाएं बंद , 4जी पर करेगा फोकस

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नई दिल्ली। मोबाइल कंपनियों के बीच अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को जोड़ने की दौड़ में टेलिकॉम क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल आने वाले वर्षों में अपने 3जी नेटवर्क को बंद कर सकती है. 3जी बंद होने के बाद कंपनी केवल 2जी और 4जी सेवाएं ही प्रदान करेंगी. खबरों की मानें तो कंपनी 3जी नेटवर्क से जुड़े स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल 4G सेवाओं के लिए कर सकती है. यह जानकारी एयरटेल की तरफ से साझा की गई है.

एयरटेल के प्रबंध निदेशक व सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा, “कंपनी 3जी पर फिलहाल कुछ भी खर्च नहीं कर रही है. हमारा मानना है कि आने वाले 3 से 4 वर्षों में यह सर्विस 2जी के मुकाबले तेजी से बंद हो जाएगी. ऐसा इसलिए भी हैं, क्योंकि भारत में 50 फीसद फीचर फोन्स शिप किए जा रहे हैं, जिनमें 2जी सर्विस ही इस्तेमाल की जा सकती है.”

गोपाल विट्टल ने बताया कि कंपनी अपने नेटवर्क की डाटा क्षमता को बढ़ाने के लिए 4जी तकनीक में निवेश कर रही है. कंपनी 3जी सर्विस के 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड को 4जी सर्विस के लिए इस्तेमाल करेगी. कंपनी के पास कुछ पुरानी प्योर 3जी रेडियो यूनिट्स हैं, जिन्हें रिप्लेस करने की जरुरत है. इसमें कुछ समय लग सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ टेलिकॉम कंपनियों ने मॉर्डन 3जी इक्यूपमेंट्स इंस्टॉल किए हैं, जो 4जी सर्विस को सपोर्ट करते हैं.

सितंबर तिमाही में भारती एयरटेल को 343 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में उसे 1,461 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हासिल हुआ था. कंपनी के ऑपरेटिंग फ्री कैश फ्लो में भी 87 फीसद की भारी गिरावट देखने को मिली है. इस बार सितंबर तिमाही में ऑपरेटिंग कैश फ्लो सिर्फ 520 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जबकि पिछले साल यह 4,179 करोड़ रुपये था. वहीं, अगर आय की बात करें तो दूसरी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 104 फीसद घटकर 21,777 करोड़ रुपये रहा. जबकि पिछले वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी को 24,650 करोड़ की आय हुई थी.

अमेरिकाः वॉलमार्ट स्टोर में फायरिंग से तीन की मौत, कई घायल

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डेनेवर। अमेरिका के डेनेवर में बुधवार को वॉलमार्ट स्टोर में फायरिंग हुई है. स्थानीय पुलिस की ओर से जो जानकारी दी गई है उसके मुताबिक घटना में कई लोगों के मारे जाने की आशंका है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी मीडिया की ओर से जो बताया गया है उसके मुताबिक अब तक एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं. पुलिस ने स्थानीय नागरिकों को इलाके से दूर रहने की सलाह दी है.

कोलारोडो के थॉरन्टॉन पुलिस की ओर से घटना के किसी भी पीडि़त के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. यह भी साफ नहीं है कि किसी हमलावर को हिरासत में लिया गया है या नहीं. थॉरन्टॉन, डेनेवर से उत्तर पश्चिम 16 किलोमीटर दूर स्थित है. थॉरन्टॉन पुलिस डिपार्टमेंट के ऑफिसर विक्टर एविला ने बताया है कि वह अभी स्टोर में मौजूद लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिशें कर रह हैं.

फायरिंग होते ही स्टोर में मौजूद कस्टमर और कर्मियों ने भागकर जान बचाई और स्टोर पूरी तरह से खाली हो गया था. पुलिस की ओर से बताया गया है कि शाम करीब 6:30 बजे गोलीबारी शुरू हुई है. स्थानीय टीवी चैनल्स की ओर से जो तस्वीरें जारी की गई हैं उनमें साफ नजर आ रहा है कि भारी तादाद में पुलिस की कारों और एंबुलेंस ने स्टोर को घेरा हुआ है.

पिंड नहीं छूट रहा नोटबंदी कांड से

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सालभर होने को आया लेकिन अब तक पुराने नोटों की गिनती का काम चालू बताना पड़ रहा है. पुराने नोटों के असली नकली होने के सत्यापन का काम भी अधूरा है. जब आंकड़े ही न हों तो नोटबंदी की सफलता विफलता की बात कैसे हो? सरकार अपने फैसले के सही होने का प्रचार कर रही है. और विपक्ष इस फैसले के भयावह असर होने के तर्क दे रही है. नोटबंदी के एक साल गुज़रने के दिन यानी आठ नवंबर को विपक्ष काला दिवस मनाएगी और सरकार जश्न. जनता इस विवाद की चश्मदीद बनेगी. वैसे शुरू से ही भुक्तभोगी जनता इस प्रकरण में मुख्य पक्ष है. सो उसे नोटबंदी के फायदे और नुकसान का हिसाब लगाने में ज्यादा दिक्कत आएगी नहीं. मसला इतना लंबा चौड़ा है कि जनता लाखों करोड़ की संख्या का अनुमान तक नहीं लगा सकती. इसीलिए इस हफ्ते कालादिवस और जश्न के दौरान होने वाले तर्क वितर्क के दौरान उसे जागरूक होने का मौका एकबार फिर मिलेगा.

काला दिवस किस तरह से यह तर्क दिए जाएंगे कि सरकार के इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठा दिया. नोटबंदी के कारण देश में बहुसंख्य मज़दूरों, और दिहाड़ी कर्मचारियों के रोज़गार चौपट होने को याद दिलाया जाएगा. किसानों को भी याद दिलाया जाएगा कि वे किस तरह परेशान हुए थे. साथ में यह भी बताने की कोशिश होगी कि सरकार के इस फैसले से फायदा किसे हुआ. विपक्ष साबित करेगा कि नोटबंदी से अमीरों को फायदा हुआ. नोटबंदी से अमीरों को फायदा पहुंचने के यही तर्क सबसे सनसनीखेज और दिलचस्प होंगे. वैसे सबसे ज्यादा यह याद दिलाने की कोशिश होगी कि नोटबंदी का ऐलान करते समय जो मकसद बताया गया था वह कितनी बार बदला गया और क्यों बदलना पड़ा.

जश्न का पक्ष नोटबंदी का जश्न किस तरह मनाया जाएगा इसका अंदाजा अभी लगाना मुश्किल है. वैसे भी सरकारी जश्न नोटबंदी को लेकर काला दिवस मनाने की प्रतिक्रिया में है सो जाहिर है कि नोटबंदी को घातक बताने के जो तर्क दिए जाएंगे, उनके काट के लिए सरकार की तरफ से वितर्क दिए जाएंगे. हालांकि न तो नोटबंदी के घातक साबित होने के तथ्य छुपे हुए हैं और न उसके फायदे के दावे अनसुने हैं. लिहाज़ा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह नोटबंदी का कौन सा नया फायदा सोचकर लाती है. वैसे उसके पास एक तरीका यह भी है कि वह नोटों की गिनती और सत्यापन के काम का चालू होने की बात कहकर समीक्षा की तारीख को आगे खिसका दे.

जनता के लिहाज़ से जनता यानी बहुसंख्य गरीब जनता ने तो नोटबंदी को सहा ही इसलिए था कि कुछ अमीरों को मारा जा रहा है. सो जनता को यह जानने का बड़ी बेसब्री से इंतजार है कि नोटबंदी से कितने अमीर पिटे. जनता की इस आकांक्षा को अगर सरकार या विपक्ष देख समझ रहे हों तो उन्हें भी इस मामले में अपने अपने तर्क बनाकर रख लेना चाहिए. बहुत संभव है कि जनता की आंकाक्षा के हिसाब से विपक्ष यह तर्क पेश करे कि मेहनतकश दिहाड़ी मज़दूर, किसान और छोटे कारोबारी किस बेरहमी से पिटे. और इसके जवाब में सरकार के पास बना बनाया तर्क है ही कि नोटबंदी से सिर्फ वही परेशान हुए जो बेईमान थे. इतना ही नहीं सरकार यह भी दावा कर रही है कि जो नोटबंदी के फैसले की मुखालफत करता है वह बेईमानों का तरफदार और खुद बेईमान है. इतने जबर्दस्त दावे का काट ढूंढना ही मुश्किल काम है. लेकिन सरकार का यह तर्क सुनते हुए मूक जनता नोटबंदी से बेईमानों के परेशान होने के सबूत जरूर देखना चाहेगी. बस यहीं दिक्कत है. क्योंकि एक बार यह एलान हो ही चुका है कि कुल पुराने नोटों में 99 फीसद यानी सारे पुराने नोट बदल ही गए. रही बात विपक्ष रूपी जनता की तो उनके नेता हरचंद कोशिश करेंगे कि जनता को याद दिलाया जाए कि खुद उनका क्या हाल हुआ है.

क्या कह रहे हैं जानकार और विद्वान लोग वैसे बदले माहौल में ये लोग चुप रहना ही पसंद कर रहे हैं फिर भी इशारों में तो बोल ही लेते हैं. तटस्थ भाव से किसी फैसले की समीक्षा मिलना दुर्लभ होता जा रहा है. फिर भी कुछ घंटों पहले एक समीक्षा पूर्व योजना आयोग के सदस्य रहे अरुण मायरा ने की है. उन्होंने कहा है कि जनता ने नोटबंदी के मामले में सरकार को माफ़ कर दिया. यानी मायरा ने नोटबंदी को घातक माना लेकिन सरकार को राहत दी कि सरकार को ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं क्योंकि जनता ने माफ़ कर दिया है. जनता की ओर से मायरा के जरिए सरकार को माफी के क्या मायने हैं यह खुद में एक समीक्षा की मांग करता है. लेकिन उनके इस जजमेंट में एक सुझाव तो है ही कि सरकार अगर चाहे तो नोटबंदी से जनता को हुए नुकसान के लिए माफी मांगने की मुद्रा अपना सकती है. इस तरह से नोटबंदी का जश्न मनाए जाने के दौरान हमें यह देखने को भी मिल सकता है कि सरकार नोटबंदी से तबाह हुए गरीबों और ईमानदारों को धन्यवाद ज्ञापित कर रही हो और नोटबंदी के अनुष्ठान में उनके बलिदान का महिमामंडन करके उन्हें प्रसन्न कर रही हो.

सुधीर जैन वरिष्ठ पत्रकार और अपराधशास्‍त्री हैं… (एनडीटीवी से साभार)

‘दलित विकास के करोड़ों रूपए डकार गए नीतीश कुमार’

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नई दिल्ली। बिहार महादलित विकास मिशन में हुए ट्रेनिंग घोटाले पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर एक खबर शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘नीतीश जी कैसे मुख्यमंत्री हैं, हर दूसरे दिन इनकी नाक के नीचे घोटाले होते रहते हैं. ईमानदारी का चोला ओढ़कर घोटाले करवाते रहते हैं दलितों के विकास के करोड़ों रुपये डकार गए.’

राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भी नीतीश कुमार पर हमला बोला है. तिवारी ने एक बयान में कहा कि नीतीश सरकार घोटालों का रिकॉर्ड बना रही है. धान ख़रीद घोटाला, गर्भाशय घोटाला, मेधा घोटाला, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति का घोटाला, सृजन घोटाला और अब महादलित मिशन में घोटाला. ये घोटाले उजागर हुए हैं. और न जाने कितने घोटाले उजागर होने के इंतजार में होंगे.

शिवानंद तिवारी ने कहा कि हर घोटाला उजागर होने के बाद नीतीश कुमार का रटा-रटाया वक्तव्य होता है, जांच का आदेश दे दिया गया है, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, फिर कुछ अंतराल के बाद नया घोटाला सामने आ जाता है. बिहार के प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार का घुन लग गया है, जहां हाथ डालिए वहीं पोल मिलता है. नीतीश कुमार का रुतबा और इक़बाल लगभग समाप्त हो गया है.

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इस घोटाले में तीन आईएएस अधिकारी सहित दस लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिसके बाद से मुख्य आरोपी आईएएस एसएम राजू अपने विभाग और आवास से गायब हो गये हैं. सामान्य प्रशासन विभाग ने आईएएस एसएम राजू को उपस्थित होकर नोटिस लेने और जवाब देने का निर्देश दिया है. ट्रेनिंग घोटाले की शिकायत वर्ष 2016 में निगरानी ब्यूरो को मिली थी. इसमें अब तक चार करोड़ 25 लाख रुपये से ज्यादा की गड़बड़ी सामने आ चुकी है. आशंका जतायी गयी है कि यह राशि और भी ज्यादा हो सकती है.

महादलितों के विकास के लिए सरकार ने 2007 में महादलित विकास मिशन का गठन किया था. इस पूरे मामले में हुई अब तक की जांच में तीन तरह से की गयी धांधली सामने आयी है. जिन ट्रेनिंग सेंटरों में दलित छात्रों का नामांकन एक जिले में किया गया है, उन्हीं छात्रों का नाम दूसरे, तीसरे और चौथे ट्रेनिंग में दर्ज करवा कर पैसे निकाल लिये गये. इस तरह एक छात्र के नाम पर कई बार रुपये निकाले लिये गये. इसके अलावा कई ऐसी एजेंसियों को ट्रेनिंग सेंटर दे दिया गया, जो सिर्फ कागज पर ही मौजूद हैं. इनका हकीकत में कोई अता-पता ही नहीं है.

मनुवादियों को खटक रहा है दलित पुजारी

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नई दिल्ली। देश में सामाजिक विकास के दावे तो बहुत किए जाते हैं लेकिन हकीकत के धरातल पर आज भी दलितों को मंदिरों में पूजा करने का हक नहीं मिला है. अगर ऐसे में जब कहीं पर पुजारी की बागडोर दलित ही संभाले तो मनुवादियों के पेट में दर्द उठना लाजमी है. कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिल रहा है यूपी के फतेहपुर में, जहां समाज के ठेकेदारों को दलित का पुजारी होना आंखों में खटक रहा है. ये लोग पुजारी को हटाकर मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं.

दलित पुजारी की माने तो खुद को समाज का ठेकेदार बताने वाले लोग उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हैं. मंदिर न छोड़ने की सूरत में जान से मारने की धमकी भी देते हैं. दरअसल मंदिरों की जमीन से होने वाली आमदनी से धार्मिक कार्यक्रमों को सम्पन्न कराया जाता है और इसी आमदनी पर मनुवादियों की बुरी नजरें लगी हुई है.

अब मनुवादियों की धमकी से परेशान होकर पुजारी ने खुद को और मंदिर की जमीन को बचाने के लिए पुलिस से मदद की गुहार लगाई है. इधर पुलिस ने भी भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अब देखना ये है कि दलित पुजारी की इस शिकायत पर कार्रवाई भी होती है या फिर हमेशा की तरह दलितों की आवाज को सिर्फ भरोसा ही नसीब होता है.

गरीबों के लिए नहीं, उद्योगपतियों के लिए है गुजरात मॉडलः राहुल गांधी

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भरूच। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भरूच की रैली में केंद्र और गुजरात सरकार पर निशाना साधा है. राहुल गांधी ने बिजली, पानी और किसानों की जमीन को लेकर गुजरात सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा है कि वोटिंग के दिन भाजपा को करंट लगेगा.

रैली में राहुल ने गुजरात मॉडल पर हमला किया. उन्होंने कहा कि गुजरात का मॉडल उद्योगपतियों के लिए है गरीबों के लिए नहीं. राहुल ने कहा कि गरीबों से जमीन, बिजली, पानी लो और उद्योगपतियों को दो यही मोदी जी का और विजय रुपाणी जी का गुजरात मॉडल है. इतना ही नहीं अस्पताल भी उद्योगपतियों के पास है. इलाज के लिए पैसे की जरूरत है. पैसा नहीं तो इलाज नहीं. यही गुजरात मॉडल है.’

राहुल ने कहा कि जेब में अगर पैसा नहीं है तो आपका कैंसर या दिल की बिमारी का इलाज नहीं होगा और पैसे खत्म होने के बाद आपको अस्पताल से निकालकर बाहर फेंक दिया जाएगा. यही गुजरात मॉडल है. उन्होंने कहा कि आज गुजरात का हर समाज तकलीफ और गुस्से में है. यहां पानी की बड़ी समस्या है. यही हाल बिजली और जमीन का भी है.

रैली में राहुल ने कांग्रेस में शामिल हुए अल्पेश ठाकोर के साथ साथ पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जिग्नेश का भी नाम लिया. उन्होंने कहा कि गुजरात में यही युवा आंदोलन कर रहे हैं. गुजरात में आज पांच-दस लोग ही खुश हैं औऱ वो उद्योगपति हैं.’’ राहुल ने कहा कि उद्योगपतियों को किसानों की जमीन दे दी गई लेकिन आज सड़क पर कहीं भी नैनो कार दिखाई नहीं देती.

दलित अधिकारों की रक्षा के लिए अम्बेडकर रविदास महासंघ ने निकाली महारैली

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बिहार

छपरा। अपने अधिकारों की रक्षा और अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए बिहार के छपरा में बुधवार (1 नवंबर) को अम्बेडकर रविदास महासंघ के लोगों ने सड़कों पर हल्ला बोल दिया. आरक्षण बचाओ और संविधान बचाओ के नारों के साथ हजारों की संख्या में लोग शहर के स्मारक हॉल में इकट्ठा हुए. जिसमें काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी.

इस मौके पर दलित समुदाय के लोगों का कहना था कि जहां एक तरफ देश के कोने-कोने में मनुवादियों द्वारा दलितों पर अत्याचार किया जा रहा है तो दूसरी तरफ संविधान की तरफ से दलितों को दी गई सुविधाओं में सरकार कटौती कर रही है.

इतना ही नहीं रैली में आए लोगों का कहना था कि तकनीकि शिक्षा में सरकार की तरफ से दी जाने वाली छात्रवृति में कटौती होने की वजह से उनके बच्चों को बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी है. आरक्षण में हो रही कटौती पर अम्बेडकर रविदास महासंघ के लोगों ने सरकार पर साजिश रचने का भी आरोप लगाया. इन लोगों का कहना था कि सरकार आरक्षण के नियमों में छेड़छाड़ कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था कर रही है. जो साफ तौर पर उनके साथ अन्याय है.

इस रैली के जरिए अम्बेडकर रविदास महासंघ ने जिस तरह से अपने अधिकारों को लेकर बिगुल बजाया है. खासकर जिस तरह से छपरा के सड़कों पर लोगों का जनसैलाब देखा गया है. वो इतना बताने के लिए काफी है कि ज्यादा दिनों तक सरकार अपने कानों मे तेल डालकर नहीं सो सकती. सुशील कुमार की रिपोर्ट

NTPC प्लांट में बॉयलर फटने से लगी भीषण आग, 20 की मौत और सैंकड़ों झुलसे

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NTPC

रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली के NTPC प्लांट में बड़ा हादसा हुआ है. इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं. NTPC का यह प्लांट रायबरेली के ऊंचाहार में है. बताया जा रहा है कि बॉयलर फटने से यह हादसा हुआ. मौके पर जिले का पूरा सरकारी अमला पहुंच गया है. डीएम और एसपी खुद राहत और बचाव कार्य का जायजा ले रहे हैं.

न्यूज एजेंसी ANI ने स्थानीय डीएम के हवाले से कहा है कि घायलों की संख्या 100 तक पहुंच गई है. शुरुआती जांच के आधार पर बताया जा रहा है कि बॉयलर का स्टीम पाइप फटने से यह हादसा हुआ है. अब तक करीब 4 मजदूरों के शव निकाले जा चुके हैं. यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आनंद कुमार ने 20 मजदूरों के मौत की पुष्टि की है. हालांकि बताया जा रहा है कि मृतकों की संख्या ज्यादा है.

यह हादसा बुधवार शाम करीबी साढ़े तीन बजे हुआ. हादसे के शिकार लोगों को NTPC के अस्पताल और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कुछ लोगों को स्थानीय निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया है.

इस हादसे पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है. उन्होंने प्रमुख सचिव और गृह सचिव को पूरे मामले पर नजर रखने और घायलों को तत्काल राहत और बचाव कार्य को कराने का आदेश दिया है. प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवार वालों को दो-दो लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया है. इसके अलावा घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजे का ऐलान किया है. मामूली रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपए दिए जाएंगे.

कई देशों के युवा नवंबर में नहीं काटेंगे दाढ़ी-मूंछ…

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नई दिल्ली। आपकी बढ़ी हुई दाढ़ी और मूंछे आपको एक अनोखे अभियान का हिस्सा बना सकती है. वो अभियान है “No Shave November” यानि नवंबर महीने में आप अपनी दाढ़ी और मूंछ को बढ़ा कर रखिए. सोशल मीडिया पर चल रहे इस अभियान से जुड़ जाईए. दरअसल, बुधवार से सोशल मीडिया पर दाढ़ी और मूंछे बढ़ाने वाले पोस्ट और सेल्फी आम होने वाली है. ये कोई फैशन या ट्रेंड नहीं है बल्कि ये एक ग्लोबल कॉज यानि वैश्विक अभियान है जिसे दुनियाभर में चलाया जाता है.

इस अभियान का खास मकसद दुनियाभर के पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर, टेस्टिकुलर कैंसर और सुसाइड से जुड़ी जागरुकता फैलाना है. इस आभियान से जितने ज्यादा लोग जुड़ते हैं उतना ही फंड उन पुरुषों के इलाज और स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भेजा जाता है. जो कम उम्र में ही प्रोस्टेट और टेस्टिकुलर कैंसर की बीमारी का शिकार होते हैं.

आपको बता दें कि इस अभियान की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. जहां पर कुछ युवकों ने मिलकर “MOVEMBER” नाम का अभियान चैरिटी के लिए शुरु किया था. शुरुआत में इस अभियान से केवल 80 लोग ही जुड़े थे. जिसके बाद ये अभियान पूरे ऑस्ट्रेलिया में फैल गया. उसके बाद अलग अलग देशों में कैंसर पर जागरुकता फैलाने के लिए इस अभियान को चलाया जा रहा है.

यूपीः निकाय चुनाव में किया सोशल मीडिया से प्रचार तो होगी जेल!

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने नई गाइड लाईन जारी की है. राज्य निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश निकाय चुनावों के मद्देनजर एसएमएस, फेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए चुनावी सन्देश, फोटो या वीडियो शेयर करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं.

इस गाइड लाईन के तहत कोई भी उम्मीदवार अपने प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. इसका मतलब साफ है कि चुनाव के दौरान फेसबुक और व्हाट्सएप पर उम्मीदवारों की तरफ से किसी भी तरह का प्रचार प्रसार नहीं होगा और कोई ऐसा करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है. इतना ही नहीं प्रत्याशी के साथ साथ व्हाट्सएप के ग्रुप एडमिन को भी जेल जाना पड़ सकता है.

चुनाव आयोग ने इसके लिए बकायदा सूबे के हर जिले के एसपी को निर्देश दिए हैं कि वो फेसबुक या व्हाट्सएप ग्रुप में चुनाव से जुड़े हुए किसी भी तरह के वाद-विवाद, चर्चा, बहस की मॉनिटरिंग करे. साथ ही उन्होंने कहा है कि वे आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं.

आपको बता दें कि प्रदेश में निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही अधिसूचना जारी की गई है. जिसके तहत सूबे के 16 नगर निगम, 198 नगर पालिका परिषद और 439 नगर पंचायतों में चुनाव तीन चरणों में संपन्न होंगे जबकि वोटों की गिनती 1 दिसंबर को होगी.

भाजपा सरकार के खिलाफ एक जुट हुए विपक्षी दल और सामाजिक संगठन

Jharkhand

रांची। आदिवासी सेना और बिरसा सेवा दल के तत्वाधान में बीते मंगलवार (31 अक्टूबर) को रांची के मोरहाबादी मैदान में भाजपा हटाओ, झारखंड बचाओ महारैली आयोजित की गई. झारखंड विकास मोर्चा के महासचिव बंधु तिर्की की पहल पर आयोजित की गई इस रैली में कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल और वाम दल सहित सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने शिरकत की.

इस महारैली में राजनीतिक दलों के अलावा कई सामाजिक संगठन भी शामिल हुए. 2019 में होनेवाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया और पांच प्रस्ताव रखे. इस प्रस्ताव में सरना कोड लागू करने, रघुवर सरकार को उखाड़ने, आरक्षण में छेड़छाड़ का विरोध करने, गोरक्षा के नाम पर हो रहे अन्याय को समाप्त करने और भूमि अधिग्रहण बिल 2013 में किये गये संशोधन के खिलाफ आंदोलन करने का फैसला किया गया.

रैली में वक्ताओं ने रघुवर सरकार को गरीब, आदिवासी और झारखंडी विरोधी बताया. उद्योगों के नाम पर आदिवासियों की जमीन और स्थानीयता के नाम पर झारखंडियों की नौकरी छीनने का साजिशकर्ता करार दिया. झारखंड विकास मोर्चा प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार झारखंड के लोगों के हालात को नजरअंदाज कर रही है. भूल रही है कि धरती की हर बड़ी लड़ाई जमीन को लेकर ही लड़ी गयी है.

उन्होंने आगे कहा कि बिरसा मुंडा जैसे आदिवासियों के पूर्वजों ने भी इसी वजह से ऐसी लड़ाई कि अंग्रेजों को भी झारखंडियों की जमीन बचाने के लिए सीएनटी, एसपीटी एक्ट बनाना पड़ा. फिर भी आजादी के बाद झारखंड के लोगों की हजारों एकड़ जमीन विकास के नाम पर छीन ली गयी. आज भी उन विस्थापितों को न्याय नहीं मिला है. 2014 के बाद से बनी सरकार ने केवल लोगों को जमीन से उजाड़ने का काम किया. लोगों की सुनने के लिए सरकार तैयार नहीं है.

झारखंड में सर्व शिक्षा अभियान में 5.5 करोड़ का घोटाला

चतरा। झारखंड में सर्व शिक्षा अभियान में साढ़े पांच करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. 181 स्कूलों में 270 कमरों के निर्माण के लिए यह राशि आवंटित की गई थी, लेकिन इसकी बंदरबांट कर ली गई. कुछ गांवों में निर्माण का काम हुआ भी तो आधा-अधूरा. कहीं प्लींथ तक तो कहीं लिंटर तक काम हुआ.

सूत्रों की मानें तो अधिकांश विद्यालय प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष व सचिवों ने ही राशि की निकासी कर बंदरबाट कर ली. 100 से अधिक ऐसे सचिव हैं, जो सेवानिवृत हो चुके हैं. वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी बदल चुके हैं. अधूरे निर्माण और गड़बड़ी के नतीजे को भांपते हुए अधिकांश कनीय अभियंता और सहायक अभियंताओं ने या तो अपना तबादला करवा लिया या फिर खुद ही उनका तबादला हो गया.

अब जब मामला सामने आया तो शिक्षा समितियों को दी गई राशि में करीब 5.50 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं मिल रहा है. खास यह कि अतिरिक्त कमरों के निर्माण के लिए सात करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी देते हुए विद्यालयों की प्रबंध समितियों को बतौर अग्रिम पांच करोड़ 48 लाख 19 हजार 498 रुपये दिए गए थे, मगर एक भी कमरे तैयार नहीं  हो पाया.

इस अग्रिम का ही कोई हिसाब नहीं मिल रहा. झारखंड शिक्षा परियोजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अग्रिम के समायोजन को लेकर विद्यालय प्रबंधन समितियों को लगातार पत्र लिख रहे हैं, मगर उसका जवाब नहीं मिल रहा. अग्रिम के समायोजन को लेकर उपायुक्त संदीप सिंह ने सितंबर में ही सर्व शिक्षा अभियान की समीक्षा के दौरान जिला शिक्षा अधीक्षक को फटकार लगाते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उन्हें रिपोर्ट मुहैया नहीं कराया जा रहा है.

जन्मदिन विशेष: ऐश्वर्या राय के जन्मदिन पर जानें उनसे जुड़ी बातें

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नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय आज अपना 44वां जन्मदिन मना रही हैं. नीली आंखों वाली यह एक्ट्रेस अपने सिर पर दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला का ताज पहन चुकी है. ऐश्वर्या राय पढ़ाई में काफी अच्छी थीं, उनका जन्म 1 नवंबर को कर्नाटक के मेंगलोर में हुआ था. आज 44 की हुई ऐश्वर्या राय की खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई है, वह आज भी उतनी सुंदर और प्यारी लगती हैं. ऐश्वर्या को स्कूल टाइम से ही मॉडलिंग के ऑफर मिलने शुरू हो गए थे और उन्होंने अपनी सबसे पहली एड फिल्म 9वीं क्लास में की थी. वह एक पेंसिल की एड थी. 1 नवंबर 1973 को जन्मी ऐश्वर्या ने 1994 में मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया था. इस कॉम्पिटिशन में अलग-अलग देश की 87 मॉडल्स ने हिस्सा लिया था, जिनमें ऐश्वर्या ने सबको पीछे छोड़ते हुए मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया था.

इसके बाद ऐश्वर्या ने 1997 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने पहले तमिल की फिल्म इरूअर में काम किया था. इसी साल उन्होंने बॉबी देओल के साथ फिल्म और प्यार हो गया से बॉलीवुड में भी डेब्यू किया था. ऐश्वर्या ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड में अपनी पहचान बनाईं. कॉन फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी में शामिल होने वाली ऐश्वर्या राय पहली बॉलीवुड एक्ट्रेस हैं. ऐश्वर्या ने 2007 में अभिषेक बच्चन से शादी की थी, लेकिन इससे पहले उनका नाम बॉलीवुड एक्टर सलमान खान और एक्टर विवेक ओबरॉय के साथ जुड़ा था. बहुत कम लोगों को ही पता है कि ऐश्वर्या ने क्लासिकल डांस सीखा है और इसका फायदा उन्हें उनके करियर में भी हुआ. उन्होंने उमरावजान, देवदास, जोधा अकबर जैसी फिल्मों में अपना क्लासिकल डांस दिखाया है.

ऐश्वर्या को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा, तमिल, तुलू, कन्नड़, और मराठी भाषाएं भी आती हैं. उनकी मातृ भाषा तुलू है. ऐश्वर्या ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें कभी किसी पर क्रश नहीं रहा.यहां तक कि जब उनकी शादी अभिषेक से हुई तब भी उन्हें उन पर क्रश नहीं था. ऐश्वर्या राय को 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. ऐश्वर्या ने 2011 में बेटी को बेटी आराध्या को जन्म दिया था. आज उनके जन्मदिन पर हमारी तरफ से उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं.