निकाय चुनाव को लेकर गंभीर हैं मायावती

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लखनऊ। निकाय चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी और इसकी मुखिया मायावती गंभीर दिखाई दे रही हैं. शायद यही वजह है कि इन दिनों बसपा अध्यक्ष ने लखनऊ में अपना डेरा जमा लिया है. बीएसपी विगत दो दशक में पहली बार यूपी में निकाय चुनाव में पार्टी सिंबल पर उम्मीदवार उतारने जा रही है. खबर है कि मायावती इस बार लखनऊ में ही कैंप करेंगी और चुनावी तैयारियों एवं उम्मीदवारों के चयन पर पूरी नजर रखेंगी.

मायावती इन दिनों राजधानी लखनऊ में डटी हुई हैं और लगातार जोन और डिविजन स्तर के कार्यकर्ताओं से मीटिंग कर रही हैं. एक सीनियर बीएसपी नेता के मुताबिक हालांकि बीएसपी का बेस शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा मजूबत है, लेकिन शहरी इलाकों में अपने आधार को बढ़ाने के लिए पार्टी ने निकाय चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. हम पूरी तैयारी के साथ उतरने वाले हैं और कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

ऐसे में इस माह के अंत में प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव इन पार्टियों के लिए अपने खोए जनाधार को दोबारा हासिल करने का मौका होने के साथ-साथ चुनौती भी है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहे जा रहे इस चुनाव में मिली जीत जहां इन पार्टियों को सूबे में उम्मीद की किरण मुहैया कराएगी, वहीं एक और नाकामी उनके मनोबल पर गहरा असर डाल सकती है.

 नगरीय निकाय चुनाव को बसपा किस कदर गंभीर मान रही है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी निकाय चुनाव प्रचार के लिए बसपा के वरिष्ठ नेता लालजी वर्मा, राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री नकुल दुबे, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, पूर्व मंत्री अनन्त मिश्रा तथा शमसुद्दीन राइन जैसे दिग्गज नेताओं को उतारने जा रही है.

आदिवासी होने का दर्द

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आदिवासी

महाराष्ट्र। आठ साल की रविता ने न तो ‘एक्स-रे’ और ‘एमआरआई’ जेसे शब्द सुने हैं, न उसे उनका महत्व मालूम है. उसे मालूम है तो बस इतना कि रीढ़ की हड्डी टूटने से पैदा लकवे के इलाज के लिए कुछ जरूरी सुविधाएं हैं जो नंदूरबार के दूर-दराज के उसके इलाके के अस्पताल में मौजूद नहीं. लिहाजा, भील समुदाय की इस आदिवासी बच्ची को अपने मां-बाप के साथ 467 किलोमीटर दूर, मुंबई के जीटी अस्पताल में इलाज करवाने आना पड़ा है.

महाराष्ट्र के हजारों आदिवासी उसी की तरह चिकित्सा की बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. अकेले रविता के नंदूरबार जिले में 467 बच्चे कुपोषण और ढंग की चिकित्सा न मिलने से बीमारियों से अप्रैल से सितंबर के छह महीनों में अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं.

‘कहने को प्रदेश के बजट का प्रतिशत हिस्सा आदिवासियों के कल्याण के ‌लिए निर्धारित है, पर शायद ही यह कभी पूरा खर्च किया जाता हो’, आदिवासियों के बीच काम करने वाले पूर्व विधायक विवेक पंडित की शिकायत है कि उन्हें दूसरे श्रेणी का नागरिक समझ लिया गया है. चूंकि वे दलितों की तरह वोट बैंक नहीं हैं और सरकार पर दबाव डालने के लिए रैली और प्रदर्शन नहीं कर पाते.

दरअसल, आदिवासियों की तरफ ध्यान तब जाता है जब उनके साथ कुछ हादसा घटता है. सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए सस्ते अनाज, स्वरोजगार और मकान बनाने के लिए रियायती कर्ज, गर्भवती माताओं के लिए पोषक भोजन, रियायती कापी-किताबों और यूनिफॉर्म जैसी सुविधाएं दी हैं. उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण भी मिला है, जिसका पूरा लाभ वे नहीं उठा पा रहे. कारण भ्रष्टाचार. बोर्डिंग स्कूलों में आदिवासी छात्राओं के दैहिक शोषण की खबरें आम हैं. लैंड माफिया और बिल्डरों ने उनकी जमीनें गड़प कर ली हैं जिनकी सांठगांठ नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों से है. इस वजह से उनकी सुनवाई भी नहीं.

पंडित सवाल उठाते हैं कि आप कहते हैं आपके पास आदिवासी बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएं हैं. तब इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ? उनके विकास के लिए रखा धन आखिर कहां चला गया? क्या आपने यह पता लगाने की कोशिश की कि आदिवासी और आंगनवाड़ी के बच्चों को भोजन और जरूरी पोषण तत्व आखिर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?’ कहकर बॉम्बे हाई की मुख्य न्यायधीश मंजुला चेल्लूर और न्यायाधीश एन. एम. जामदार की खंडपीठ कोर्ट फटकार लगा रही थी तो महाराष्ट्र सरकार की घिघ्घी बंधी हुई थी.

यह मामला दो महीने के भीतर विदर्भ के मेलघाट पालघर और मोखाड़ा, ठाणे और अन्य आदिवासी इलाकों में कुपोषण और बीमारियों से 180 से ज्यादा मौतें होने पर उठा था. हाई कोर्ट ने सरकार को इन इलाकों में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य व शिक्षा, आदि सुविधाओं संबंधी अपनी आदेशों का पालन न करने के लिए भी झाड़ लगाई और तय किया कि अब से आदिवासी कल्याण संबंधी सभी मामलों को हर सप्ताह सुना जाएगा.

  साभार: नवभारत टाइम्स

भाजपा सांसद ने कन्हैया कुमार को बताया भगतसिंह और राष्ट्रभक्त

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Bhola singh

पटना। भाजपा सांसद भोला सिंह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भगतसिंह और राष्ट्रभक्त बताया है. सांसद के इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ता ही उनके विरोध पर उतर आए हैं. भोला सिंह बिहार के बेगूसराय से भाजपा सांसद हैं. भोला सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान कन्हैया कुमार की तुलना शहीद भगत सिंह से कर दी, जिसके बाद वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने सांसद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.

भोला सिंह कैलाशपति मिश्र के पुण्यतिथि समारोह में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया की भगत सिंह से तुलना कर दी. इतना ही नहीं उन्होंने कन्हैया कुमार को सच्चा राष्ट्रभक्त भी बताया. इसके बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया.

वहीं एमएलसी रजनीश कुमार ने मंच से ही सांसद के बयान कि निंदा कर दी. उन्होंने कहा कि जिस कन्हैया को प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देशद्रोही करार दिया है, उसे भाजपा के सांसद राष्ट्रभक्त कैसे कह सकते हैं? इसके साथ ही दर्शक दीर्घा में बैठे कुछ कार्यकर्ता सांसद विरोधी नारे लगाने लगे. इससे खिन्न होकर सांसद मंच से चले गए.

भोला सिंह कार्यक्रम छोड़ने के बावजूद अपने बयान पर अड़े रहे और विरोध कर रहे लोगों को चुनौती देते हुए बोले कि भाजपा की सरकार है, अगर कन्हैया देशद्रोही है तो उसे देशद्रोही घोषित किया जाए. ऐसा पहली बार नहीं है, जब भोला सिंह ने कुछ ऐसा कहा है, जिसकी उनकी पार्टी ही आलोचना कर रही है. भोला सिंह अक्सर अपनी ही पार्टी, उसकी योजनाओं और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं.

‘विसडम ऑफ आदिवासी’ पर जर्मनी में व्याख्यान देंगी जसिंता केरकेट्टा

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Adivasi Poet

नई दिल्ली। झारखंड की आदिवासी कवयित्री जसिंता केरकेट्टा जर्मनी की हैमबर्ग यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगी. इसका विषय ‘विसडम ऑफ आदिवासी’ है. वे अपनी कविताओं के पाठ के साथ आदिवासी संघर्षों और वर्तमान परिस्थितियों पर अपनी बात रखेंगी. जसिंता की कविताओं का संग्रह जर्मन भाषा में पिछले वर्ष प्रकाशित हो चुका है. जर्मनी में उनकी कविताएं चर्चित रही हैं. जर्मन भाषा में उनका दूसरा कविता संग्रह भी शीघ्र प्रकाशित होगा. वे बीते गुरुवार को जर्मनी के लिए रवाना हुईं.

जसिंता केरकेट्टा कविता रचना के साथ-साथ पत्रकारिता भी करती है और उरांव आदिवासी समुदाय से आती है. पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर प्रखंड में खुदपोश गांव की रहने वाली हैं. स्कूली दिनों से ही वह कविताएं लिख रही है. पत्रकारिता में आने के बाद उनके कविता सृजन में ठहराव आ गया था जिसे एक बार फिर उन्होंने गति दी है.

जसिंता की कविताओं में झारखंड और यहां के आदिवासी लोग हैं. उनकी कविताओं में आदिवासी समाज की लूट और दोहन है तो गैर आदिवासी समाज के पाखंड और षड्यंत्र पर चोट भी. हम यहां उनकी एक कविता साझा कर रहे हैं जिसमें उसने निर्दोष आदिवासियों को माओवादी कहकर दमन करने की तीखी आलोचना की है.

        दर्द ——————— मैं आंगन में बैठा था कि आकर पुलिस उठा ले गई मुझे मैंने लाख कहा कि मैं वो नहीं जो आप समझते हो उन्होंने मेरी एक न सुनी और बना दिया मुझे माओवादी, मैं याद करता हूं अपनी जवानी के दिन कैसे मैंने भूखे दिन गुजारे रात काटी कच्ची भूमि पर लेटकर हथकरघा से कपड़े बनाते हुए देखा था उन पुलिसवालों ने भी मुझे मेरे गांव में जिनके ऑर्डर पर मैं गमछे बनाता था पर फिर याद आता है वो टेबो थाना कैसे सफेद कागज पर पिटते हुए लिया गया मेरा हस्ताक्षर और कोर्ट में बना दिया गया आम ग्रामीण से एक नक्सल अपनी जीवनभर की सच्चाई और सरलता के बाद आज मैं देखता हूं अपने सीने में डंडे के दाग और आंखों में आक्रोश की आग सोचता हूं बार-बार कैसे मेरे माथे पर बांध कर माओवाद का सेहरा वो लूट ले जाएंगे मेरी ही नजरों में मेरा सम्मान ताकि मैं छोड़ कर चला जाउ जंगल में दूर तक पसरी अपनी जमीन, अपने खेत-खलिहान ताकि वो बड़ी आसानी से लूट सके मेरा अस्तित्व मेरी विरासत और मेरे पूर्वजों की धरोहर..

दुनियाभरके विद्वान शामिल सम्मेलन में भारत के अलग अलग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता भी हिस्सा लेंगे. इनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आनंद वर्धन शर्मा, महात्मा गांधी इंटरनेशनल हिंदी यूनिवर्सिटी, वर्धा से गिरीश्वर मिश्रा और उषा शर्मा, सेंटर फॉर ओरल एंड ट्राइबल लिट्रेचर, एकेडमी ऑफ लेटर्स, दिल्ली की निदेशक अनीता अब्बी, बस्तर से राजाराम त्रिपाठी अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखेंगे. यहां आदिवासी इलाकों में हो रहे खनन, आदिवासी भाषा, संस्कृति, आधुनिक हिंदी साहित्य और आदिवासी जीवन संस्कृति, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति, आदि विषयों पर बात रखी जाएगी.

सुुप्रीम कोर्ट का इन डिग्रियों को मान्यता देने से इन्कार, हजारों नौकरियों पर संकट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने डिस्टेंस के जरिये पढ़ाई करने के मामले में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की तकनीकी शिक्षा डिस्टेंस के माध्यम से नहीं की जा सकेगी. शीर्ष न्यायालय ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की तकनीकी शिक्षा दूरस्थ पाठ्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराई जा सकती. उच्च न्यायालय ने डिस्टेंस के जरिए तकनीकी शिक्षा को सही माना था.

उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से प्रबंधन, मेडिकल, इंजीनियरिंग और फार्मेसी समेत कई अन्य पाठ्यक्रम तकनीकी पाठ्यक्रमों से जुड़े छात्रों को झटका लगा है. अब छात्र इनकी पढ़ाई डिस्टेंस के माध्यम से नहीं कर पाएंगे. शीर्ष न्यायालय ने इस फैसले से पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर भी अपनी संस्तुति जाहिर की, जिसमें कंप्यूटर विज्ञान में डिस्टेंस के माध्यम से ली गई डिग्री को नियमित तरीके से हासिल डिग्री की तरह मानने से इंकार कर दिया है.

शीर्ष न्यायालय का यह फैसला इस लिहाज से अहम है कि आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ने की वजह से छात्र को व्यावहारिक ज्ञान या तो होता ही नहीं है अथवा कम होता है.

ममता बनर्जी के करीबी मुकुल रॉय भाजपा में शामिल

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी रहे और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता मुकुल रॉय ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में पार्टी में शामिल हुए.

भाजपा में शामिल होने के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुकुल राय ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्‍व में काम करने का गर्व होगा. भाजपा साम्‍प्रदायिक नहीं बल्कि धर्म निरपेक्ष है और निकट भविष्‍य में पश्चिम बंगाल में पार्टी सत्ता में आएगी. उन्होंने आगे कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि भाजपा के समर्थन के बिना तृणमूल कांग्रेस बंगाल में सत्ता में नहीं पहुंच सकती थी.

मुकुल रॉय ने कहा कि 1998 में ममता बनर्जी भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ी. 1999 में तृणमूल राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन की सहयोगी बनकर चुनाव लड़ी और ममता जी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी बनी. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुकुल रॉय के अनुभव का पार्टी को लाभ मिलेगा. प्रसाद ने कहा कि मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य रहे हैं और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. रॉय ने प्रभावशाली तरीके से माकपा के 30 वर्षों के शासन के दौरान जारी ज्यादतियोंं के खिलाफ संघर्ष किया और उस समय माकपा के आतंक को समाप्त करने में हिम्मत से लड़े.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना करने वालों में शामिल रहे मुकुल रॉय यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं. मुकुल रॉय के भाजपा में शामिल होने की अटकलें काफी दिनों से चल रही थी. पिछले माह ही राज्यसभा से उनका इस्तीफा मंजूर किया गया था. राय ने 11 अक्टूबर को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था. मुकुल राय का इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका है.

गौतम गंभीर और सुरेश रैना के पास पिच पर कार लेकर पहुंचा युवक

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नई दिल्ली। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच पालम के वायुसेना मैदान में रणजी ट्राफी मैच के दौरान सुरक्षा में उस वक्त बड़ी चूक दिखी जब मैदान में अचानक एक व्यक्ति कार लेकर घुस गया. इससे खिलाड़ी और अधिकारी दोनों हैरान रह गए. चालक कार लेकर दो बार पिच के ऊपर से गुजरा. इस मैच में गौतम गंभीर, ईशांत शर्मा, सुरेश रैना और ऋषभ पंत जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल रहे हैं. हालांकि घटना के बाद सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और गेट को बंद कर दिया ताकि आरोपी भाग ना पाए.

दिन का खेल खत्म होने से 20 मिनट पहले शाम के लगभग चार बज कर 40 मिनट पर अचानक मैदान में एक वैगन आर कार घुस गयी. इस समय उत्तर प्रदेश की टीम दूसरी पारी में बल्लेबाजी कर रही थी. जब कार स्टेडियम में पहुंची उस वक्त वहां गंभीर, इशांत और मनन शर्मा खड़े हुए दिख रहे थे जबकि कार पिच के बीच में खड़ी थी. सुरक्षा में इस बड़ी चूक से दोनों टीमों के खिलाड़ी हतप्रभ रह गए. ईशांत शर्मा ने ट्वीट किया कि आज रणजी मैच के दौरान दिल दहलाने वाला दृश्य जिसमें गौतम गंभीर साथ में इसका गवाह बना.

बीसीसीआई अपनी मान्यता प्राप्त इकाई सेना खेल संवर्धन बोर्ड (एसएससीबी) से इस घटना की रिपोर्ट मांगेगा. कार चालक की पहचान गिरीश शर्मा में हुई है. यह पता चला है कि वायुसेना मैदान में कारों को ले जाने की अनुमति पूरी जांच के बाद दी जाती है लेकिन सुरक्षाकर्मी के गेट पर खड़ा नहीं होने से यह घटना घटी. कार चालक ने परिसर में घुस कर कार को पार्किंग स्थल में ले जाने की जगह खेल के मैदान में घुसा दिया. अचानक हुई इस घटना से खिलाड़ी स्तब्ध रह गए.

वायुसेना पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस को सौंप दिया. बीसीसीआई के कार्यकारी अध्यक्ष सीके खन्ना ने कहा कि बीसीसीआई इस घटना की जांच करेगी.

बेगूसराय में स्नान के दौरान भगदड़ में चार की मौत

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बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में कार्तिक पूर्णिमा मेले में स्नान के दौरान भगदड़ मचने से चार लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों लोग घायल हो गए हैं. यह भगदड़ चकिया सिमरिया घाट पर आज सुबह कार्तिक पूर्णिमा स्नान और महाकुंभ के दौरान मची.

शनिवार को कार्तिक पूर्णिमा व महाकुंभ के मद्देनजर नदी घाट पर भारी भीड़ थी. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक इंतजाम नाकाफी थे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्नान के दौरान वहां कोई अफवाह फैली, जिसके बाद लोग इधर-उधर भागने लगे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नदी घाट के संकरे रास्ते पर मची भगदड़ में दर्जनों श्रद्धालु एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते भागने लगे. इसमें दबकर मरने वाली तीन महिलाओं के शव बरामद कर लिए गए हैं. उनकी पहचान की कोशिश की जा रही है.

घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल है. प्रशासन ने फिलहाल चार श्रद्धालुओं के मौत की पुष्टि की है. हालांकि, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने शवों को नदी में बहा देने का आरोप भी लगाया है. लेकिन प्रशासन ने इससे इन्कार किया है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे पर शोक जताया है. उन्होंने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

SBI दे रहा है सबसे सस्ता लोन

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आप घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो एसबीआई आपको सबसे सस्ता होम लोन दे रहा है. एसबीआई ने होम लोन की दर में 0.5 फीसदी की कटौती की है. इस कटौती के बाद बैंक की होम लोन की दर 8.30 फीसदी हो गई है. मौजूदा समय में यह दर सबसे कम है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अन्य बैंक भी लोन की दर में कटौती कर सकते हैं और आम आदमी को सस्ते कर्ज का तोहफा मिल सकता है.

एसबीआई ने ऑटो लोन पर भी ग्राहकों को राहत दी है. बैंक ने ऑटो लोन पर ली जाने वाली ब्याज दर 0.05 फीसदी घटा दी है. इस कटौती के बाद अब यह 8.70 फीसदी पर आ गई है. नई दरें 1 नवंबर से लागू हो चुकी हैं. हालांकि अभी तक दूसरे बैंकों ने इस मोर्चे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की है. विशेषज्ञों का कहना है कि एसबीआई की तरफ से दर में कटौती करने के बाद अन्य बैंक भी इस राह पर आगे बढ़ सकते है.

कर्ज देने के लिए एमसीएलआर ने नया मानक तय किया गया है. मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) वो रेट होता है; जिसके नीचे बैंक कर्ज नहीं दे सकते. हालांकि कुछ खास मामलो में इस रेट से नीचे कर्ज देने की छूट होती है. इसके लिए आरबीआई की तरफ से पूर्व में ही मानक तय किए हुए हैं. एमसीएलआर को 1 अप्रैल, 2016 को नए मानक के तौर पर तय किया गया था. भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले 10 महीनों में पहली बार यह कटौती की है.

राहुल गांधी ने मानी जिग्नेश मेवाणी 90 प्रतिशत मांगें

राहुल गांधी

नवसारी। देशभर की नजरें इस बार गुजरात चुनाव पर है. भाजपा के गढ़ के रूप में विख्यात गुजरात में राहुल गांधी ने चुनावी सरगर्मियां तेज कर दी हैं. राहुल गांधी ने सबसे पहले अल्पेश ठाकोर को कांग्रेस में शामिल किया, उसके बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को भी कांग्रेस में शामिल करने के प्रयास किए. अब दलित कार्यकर्ता जिग्नेश मेवाणी से मुलाकात कर चुनावी हलचल तेज कर दी है.

जिग्नेश मेवाणी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच नवसारी में शुक्रवार को मुलाकात हुई. मुलाकात के बाद जिग्नेश ने कहा कि उनकी और राहुल गांधी के बीच 17 मांगों पर चर्चा हुई और राहुल गांधी ने उनकी मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करने का आश्वासन दिया है. जिग्नेश ने कहा कि जब हमने राहुल गांधी से अपनी मांगों के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि इसमें 90 प्रतिशत बातें हमारा संवैधानिक अधिकार है. इसे घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा.

कांग्रेस उपाध्यक्ष के बारे में मेवाणी ने कहा कि राहुल गांधी और भाजपा की सोच में अंतर है. भाजपा तो उनकी बात सुनती ही नहीं है. राहुल से मुलाकात से पहले जिग्नेश ने भाजपा पर जमकर हमला किया. उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता भाजपा से छुटकारा चाहती है. साथ ही जिग्नेश ने कहा कि अगर कांग्रेस उनकी मांगें मान लेती है, तो वे बाहर से समर्थन देने को तैयार हो सकते हैं.

गुजरात के ऊना में दलितों के हक को लेकर आंदोलन छेड़ने वाले जिग्नेश मेवाणी का साफ कहना है कि वे किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होंगे, लेकिन अगर कांग्रेस ने उनकी बात मान ली, तो वे कांग्रेस को बाहर से समर्थन दे सकते हैं. इन दोनों युवा नेताओं की मुलाकात ने गुजरात में मोदी एंड कंपनी की राह और मुश्किल कर दी है.

भोपाल गैंगरेप: 3 आरोपी गिरफ्तार और 4 पुलिस अधिकारी निलंबित

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Gangrape

भोपाल। भोपाल गैंगरेप मामले में चार पुलिस अधिकारी निलंबित किए गए हैं और शहर के एसपी का तबादला कर दिया है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी. इस मामले में पुलिस ने अब तक 3 लोगों को अरेस्ट किया है. जीआरपी के एएसपी धर्मेंद्र सिंह ने शुक्रवार को बताया कि तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक आरोपी की पहचान की जा रही है.

आईजी पुलिस मकरंद देवस्कर ने बताया, रिपोर्ट दर्ज करने में देरी को लेकर टीआई रवींद्र यादव (हबीबगंज), संजय सिंह बैस (एमपी नगर), मोहित सक्सेना (जीआरपी थाना) और दो एसआई को सस्पेंड किया गया है. वहीं, सीएसपी एमपी नगर कुलवंत सिंह को हटाकर पीएचक्यू अटैच किया है.

गैंगरेप मामले को लेकर शिवराज सिंह ने डीजीपी समेत आला पुलिस अफसरों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. सीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को फौरन एक्शन लेना चाहिए. लापरवाही से काम करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई हो. रिपोर्ट दर्ज करने में 24 घंटे क्यों लगे इसका जवाब दिया जाए.

गुरुवार को इंसानियत को शर्मसार करते हुए एक छात्रा के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया था. आरपीएफ में कार्यरत अस्सिटेंट सब इंस्पेटर की 19 साल की बेटी का आरोप है कि कोचिंग क्लास से वापस घर लौटते वक्त उसके साथ 4 लोगों ने गैंगरेप किया. इस मामले में भोपाल की एसपी जीआरपी, अनीता मालवीय ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 डी, 394, 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

मायावती ने खोज निकाला जीत का फार्मूला

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नई दिल्ली। यूपी में हो रहे निकाय चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती इस बार कुछ नया करने को सोचा हैं. मायावती इस बार सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्म्युले को अपनाने की तैयारी में जुटी हुई हैं. दरअसल पार्टी के पदाधिकारियों ने फैसला किया है कि इस बार निकाय चुनाव में सामान्य सीट पर सामान्य वर्ग का ही उम्मीदवार उतारा जाएगा. जब कोई सामान्य वर्ग का उम्मीदवार नहीं मिलेगा तो उसी सूरत में दलित या ओबीसी प्रत्याशी पर विचार किया जाएगा.

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में संघर्ष के बाद बसपा पहली बार आधिकारिक रूप से निकाय चुनाव में उतर रही है. इससे कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह भी देखने को मिल रहा है. उत्साह का आलम ये है कि पार्षद की एक सीट के लिए 6-6 लोगों ने आवेदन कर रखा है. यहां तक की सामान्य वर्ग की सीट के लिए भी दलित और ओबीसी उम्मीदवारों के आवेदन आए हैं. वैसे बसपा ने पहली बार पार्टी सिंबल के जरिए इस निकाय चुनाव को लड़ने का फैसला किया है. पार्टी के इस फैसले से जाहिर है कि मायावती अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाली हैं. क्योंकि उन्हें पता है कि सोशल इंजीनियरिंग के जिस फर्मूले के तहत वो जीत की मिठाई खाना चाह रही हैं. क्या पता वही फर्मूला शायद 2019 में भी बसपा का मुंह मीठा करने के काम आ जाए.

धर्म के नाम से डराना आतंक नहीं तो क्या है?-प्रकाश राज

prakash Raj

नई दिल्ली। अभिनेता कमल हासन के ‘हिंदू आतंकवाद’ वाले लेख का अभिनेता प्रकाश राज समर्थन करते नजर आ रहे हैं. प्रकाश राज ने शुक्रवार को अपने एक ट्वीट में पूछा, ‘धर्म, संस्कृति और नैतिकता के नाम पर भय फैलना आतंक नहीं है तो यह क्या है? सिर्फ पूछ रहा हूं.’

कमल हासन ने एक तमिल साप्ताहिक पत्रिका ‘आनंदा विकटन’ में एक लेख लिखा है. जिसमें हासन ने कहा है कि दक्षिणपंथी लोग अब हिंसा पर उतारू हो रहे हैं. उन्होंने लिखा है कि राइट विंग ने अब मसल पावर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. राइट विंग हिंसा में शामिल है और हिंदू कैंपों में आतंकवाद घुस चुका है. इस लेख में उन्होंने दक्षिणपंथियों को निशाने पर लिया है.

इस लेख के बाद हासन के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया गया है. हालांकि उन्होंने इस लेख में किसी का नाम नहीं लिया है. उन्होंने कहा था, ‘पूर्व में हिंदू दक्षिण पंथी, दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ हिंसा में शामिल हुये बगैर, उनको अपनी दलीलों और जवाबी दलीलों से हिंसा के लिये मजबूर करते थे.’ हासन ने लिखा कि हालांकि ‘यह पुरानी साजिश’ विफल होनी शुरू हो गयी, तब यह समूह हिंसा में शामिल हो गये.

तमिल फिल्म अभिनेता ने लिखा, ‘चरमपंथ किसी भी तरीके से उनके लिये सफलता या विकास का मानक नहीं हो सकता जो खुद को हिंदू कहते हैं ‘ हाल ही में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से मुलाकात करने वाले हासन ने मार्क्सवादी नेता द्वारा उठाये गये उस सवाल का जवाब भी दिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि अभिनेता ‘हिंदूवादी ताकतों द्वारा धीमी घुसपैठ के जरिये द्रविड संस्कृति को कमजोर करने’ के बारे में क्या सोचते हैं.

अब कोचीन देवस्वम बोर्ड ने बनाया दलित पुजारी

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Kerala

कोच्चि। केरल में मंदिर बोर्डों की तरफ से जातिवादी बंधनों को तोड़ने की एक और पहल सामने आई है. बीते महीने राज्य के त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड द्वारा दलितों को पुजारी बनाए जाने के बाद अब कोचीन देवस्वम बोर्ड ने भी एक दलित को बोर्ड का पुजारी नियुक्त किया है.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़ बोर्ड ने मथिलाकम के रहने वाले कुझुपुली उमेश कृष्णन को पुजारी बनाया है. उमेश कोचीन देवस्वम बोर्ड के अंतर्गत आने वाले किसी भी मंदिर के पहले दलित पुजारी हैं.नियुक्ति के बाद उमेश कृष्णन ने बुधवार को महादेव मंदिर के पवित्र गर्भगृह की अपनी ज़िम्मेदारियां संभाल लीं. इस मौके पर उनके माता-पिता, पत्नी, बच्चे और अन्य रिश्तेदार मौजूद थे. पिछले 12 सालों से कई मंदिरों के पुजारी रहे उमेश कृष्णन अपनी नई भूमिका को ‘भगवान का आशीर्वाद’ बताते हैं.

इससे पहले केरल के ही त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने छह दलितों को आधिकारिक तौर पर बोर्ड का पुजारी नियुक्त किया था. मंदिर ने पहले भी ग़ैर-ब्राह्मणों को पुजारी बनाया था, लेकिन किसी दलित को पुजारी बनाए जाने का यह पहला मौक़ा था. बोर्ड ने राज्य में संचालित अपने 1,504 मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए सरकार की आरक्षण नीति का पालन करने का फ़ैसला किया था. इसके लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू जैसे नियमों का पालन किया गया था. नतीजों में अन्य समुदाय से 36 उम्मीदवार मेरिट लिस्ट में आ गए जिनमें छह दलित भी शामिल थे.

बिहार में हो रही है फोटो पॉलिटिक्स

राजनीति

पटना। बिहार में राजनीति सरगर्मियां बढ़ती जा रही हैं. तीन दिन पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक तस्वीर जारी की थी जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एक शराबमाफिया राकेश सिंह खड़ा था. इसके बाद शराब को लेकर आरजेडी ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा था. जिसकी प्रतिक्रिया देने के लिए आज जेडीयू नेताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जदयू नेताओं ने एक तेजस्वी यादव की तस्वीर दिखाई है, जिसमें एक लड़की उनके साथ खड़ी है. जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह कहा है कि तस्वीर दिखाने का मकसद ये है कि तेजस्वी लड़की के साथ रंगरलियां मना रहे हैं. जेडीयू ने तेजस्वी पर ये भी आरोप लगाया है कि वो शराब पीते हैं और उनके ब्लड सैंपल की जांच होनी चाहिए.

वहीं, जेडीयू की तरफ से लगाए गए इन आरोपों के जवाब में तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार की पार्टी के नेता चरित्रहनन की राजनीति कर रहे हैं. शराबबंदी को लेकर हमारे आईना दिखाने के बाद नीतीश कुमार ने हताशा में ये सब किया है. उनके पास भी नीतीश के खिलाफ बहुत कुछ है.

तेजस्वी ने आगे कहा है कि हम इस नकारात्मक राजनीति का पुरज़ोर विरोध करते हैं. राज्य में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, इसलिए अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ये किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा, ‘’ये फ़ोटो उस समय की है जब मैं राजनीति में नहीं आया था और मैं क्रिकेट खेला करता था. मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस तस्वीर में ग़लत क्या है? ये फ़ोटो बहुत पुरानी है.’’

यूपी निकाय चुनाव से पहले ऑर्डर पर तमंचे

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पुलिस हुसैनपुर। यूपी में हो रहे निकाय चुनाव को शांतिपूर्ण कराने का प्रशासन भले ही लाख दावा करे. लेकिन जिस तरह से बिझाड़ा हुसैनपुर में अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्री का भांडाफोड़ हुआ है उससे तो यही लगता है कि चुनाव में कुछ भी हो सकता है. अवैध हथियारों के बल पर बूथ भी लूटे जा सकते हैं. दरअसल एक नीजि समाचार पत्र में छपी खबरों की माने तो चुनाव के दौरान गड़बड़ी करने के मकसद से हुसैनपुर में अवैध तमंचा बनाने का काम चल रहा था. पुलिस की गिरफ्त में आए तमंचा बनाने वाले लोगों का मानना था कि चुनाव नजदीक है और ऐसे में तमन्चों की डिमाण्ड तेज हो जाती है. ये लोग तैयार किये गये तमन्चों को 1500 से 3 हजार रुपये तक में बेच दिया करते थे. इधर तमंचा बनाने वाले कारीगरों को गिरफ्त में लेने के बाद पुलिस इसे बड़ी सफलता मान रही है क्योंकि पुलिस ने मौके से लगभग एक दर्जन बने तमंचे और दो देशी बन्दूकों के साथ साथ तमन्चा बनाने के काम में आने वाले कई सामान भी बरामद किए हैं. वैसे भले ही पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भी तलाश में जुट गई हो लेकिन इतना तो तय है कि चुनाव शांतिपूर्ण समपन्न होने तक पुलिस के हाथ पांव फूले रहेंगे.

यूपी पुलिस ने रोकी चंद्रशेखर रावण की रिहाई

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chandrashekhar

नई दिल्ली। ऐसा लगता है कि अब भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण फिलहाल जेल से नहीं निकल पाएंगे क्योंकि सहारनपुर पुलिस ने रावण के खिलाफ रासुका यानि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी है. गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि रावण की जेल से रिहाई हो जाएगी लेकिन अब ऐसा फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है.

एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक सहारनपुर एसएसपी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है. उनका कहना था कि रासुका के तहत रावण पर कार्रवाई करने की बात पहले से ही चल रही थी. लेकिन गुरुवार शाम को जिला अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण पर रासुका लगा दिया गया. इससे पहले गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चन्द्रशेखर रावण को सभी चार मामलों में जमानत दे दी थी. फिलहाल रावण अभी सहारनपुर जेल में ही बंद हैं जहां पर उनकी तबीयत नासाज चल रही है.

आपको बता दें कि भीम आर्मी की स्थापाना करने वाले चन्द्रशेखर दलित समाज में खासकर युवाओं में काफी लोकप्रिय हो गए थे. इसके बाद घटे घटनाक्रम में शब्बीरपुर में ठाकुरों और दलितों के बीच विवाद भी हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने रावण को जातीय हिंसा में साजिश रचने के आरोप में जून 2017 में गिरफ्तार कर लिया था.