रेलवे की ‘गोल्ड’ सर्विस शुरू, मिलेंगी ये सुविधाएं

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shatabdi express

नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने आज अपनी पहली ‘स्वर्ण’ ट्रेन (गोल्ड स्टैंडर्ड) से पर्दा हटा दिया. रेल मंत्रालय द्वारा इसे जनता को समर्पित कर दिया गया है. रेलवे की ‘स्‍वर्ण प्रोजेक्ट’ के तहत नई दिल्ली-काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस पहली ट्रेन बनी. दरअसल रेलवे ने कई प्रीमियम ट्रेनों का नवीनीकरण करने के लिए ‘स्वर्ण प्रोजेक्ट’ के तहत काम शुरू किया है. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजधानी और शताब्दी ट्रेनें भी शामिल हैं.

रेल मंत्रालय ट्रेनों में केटरिंग के लिए ट्रोली सर्विस, यूनिफॉर्म्ड स्टॉफ और यात्रियों के मनोरंजन पर हर ट्रेन पर 50 लाख रुपए खर्च करेगा. यात्रा को मनोरंजक और आरामदायक बनाने के लिए पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल के दौरान 30 प्रीमियम ट्रेनों को रेनोवेट करने के लिए 25 करोड़ का यह प्रॉजेक्ट शुरू हुआ था. इस प्रॉजेक्ट में 15 राजधानी और 15 शताब्दी ट्रेनें शामिल हैं.

सुरक्षा के लिहाज से इन ट्रेनों में आर.पी.एफ. जवानों की पर्याप्त तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सी.सी.टी.वी. कैमरों की व्यवस्था भी की गई है. प्रॉजेक्ट के तहत कोच के अंदरूनी हिस्से को आकर्षक बनाने, शौचालय व्यवस्था में सुधार और कोचों की सफाई पर भी काफी ध्यान दिया गया है. यात्रियों को ट्रेनों में फिल्म, सीरियल, म्यूजिक समेत मनोरंजन के अन्य साधन उपलब्ध कराए जाएंगे. इसके अलावा यात्री ट्रेन में वाई-फाई हॉटस्पॉट्स के द्वारा एचडी स्ट्रीमिंग का आनंद भी ले पाएंगे.

टेक्सास के चर्च में फायरिंग, 27 की मौत

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Church

वाशिंगटन। अमेरिका में पिछले एक हफ्ते में दूसरा बड़ा हमला हुआ है. इस हमले में 27 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल  भी हुए हैं. हालांकि पुलिस ने हमलावर को मार गिराया है. यह हमला टेक्सास के एक चर्च में हुआ. हमले के बाद एशिया दौरे पर निकले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर कहा है कि स्थिति पर उनकी नजर है.

हमलावर की पहचान 26 वर्षीय डेविन पैट्रीक के रूप में हुई है. वो अमेरिकी वायुसेना का पूर्व अफसर और बाइबिल टीचर था. 2014 में अपनी पत्नी और बच्चे को पीटने के आरोपों के बाद उसे अपमानित करते हुए वायुसेना से निकाल दिया गया था.

जानकारी के अनुसार हमला एक बैपटिस्ट चर्च में प्रार्थना के दौरान हुआ है. हमलावर डेविन असॉल्ट रायफल और काले रंग की टैक्टिकल ड्रेस पहने चर्च में पहुंचा और प्रार्थना कर रहे लोगों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया. टेक्सास के गर्वनर ग्रेग एबॉट ने देर रात एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमें नहीं पता कि वह संख्या बढ़ेगी या नहीं, लेकिन हमें पता है कि यह बहुत अधिक है.

गौरतलब है कि 1 नवंबर 2017 को अमरीका में न्यूयॉर्क के लोअर मैनहट्टन में एक ट्रक ड्राइवर ने पैदल चलने वालों और साइकिल लेन में टक्कर मार कर कम से कम 8 लोगों की जान ले ली थी. इसमें कई लोग घायल हुए थे.

नाबालिग लड़की को निर्वस्त्र करके गांव में घुमाया

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पाकिस्तान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान शहर में एक नाबालिग लड़की के कपड़े उतार कर उसे सड़कों पर नंगा घुमाया गया. खबरों के मुताबिक बच्ची का साथ ऐसा उसके भाई के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का बदला लेने के लिए किया गया. पाकिस्तान पुलिस ने इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया है.

मुताबिक यह वाकया, 27 अक्टूबर का है जब एक 16 साल की लड़की तालाब से पानी लेकर अपने घर लौट रही थी लेकिन रास्ते में ही उसको कुछ पुरुषों ने धर दबोचा और उसके कपड़े उतार दिए. इसके बाद उसे एक घंटे तक सड़कों पर घुमाया.

इसके बाद आरोपियों ने कहा कि लड़की को उसके भाई की जगह सजा दी जा रही है, जिसका गांव की ही किसी लड़की के साथ कथित अफेयर चल रहा था. पुलिस की माने तो हमलावर उसी लड़की के परिवारवाले हैं जिससे पीड़िता के भाई का अफेयर चल रहा है और उन्होंने परिवार के सम्मान को वापस पाने के लिए यह कृत्य किया. इससे पहले लड़की के भाई पर पंचायत ने इसी मामले में 1 लाख 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था. हालांकि अभी भी सजावल नामका मुख्य आरोपी फरार है.

DRDO करवा रहा है निबंध प्रतियोगिता, आप भी लें भाग

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नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्कूल, कॉलेज, अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निबंध प्रतियोगिता 2017 आयोजित की है. यह निबंध प्रतियोगिता “डीआरडीओः उपलब्धियां और आगे का मार्ग” विषय पर आधारित है.

इस निबंध लेखन में भाग लेने वाले 60 प्रतियोगियों को पुरस्कार दिया जाएगा और इसके साथ उनके लेख को ऑनलाइन प्रकाशन के लिए भी चुना जाएगा. पुरस्कार विजेता को एक प्रमाण पत्र और 2000 रूपए का नकद इनाम दिया जाएगा. विजेताओं के नाम डीआरडीओ की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किए जाएंगे.

इस प्रतियोगिता में उम्मीदवार को निबंध लेखन के माध्यम के रूप में हिंदी या अंग्रेजी का चयन करना होगा. लेखन जमा करने की अंतिम तारिख पांच दिसंबर 2017 है. प्रतियोगिता के लिए छात्रों की दो श्रेणी निर्धारित की गई है और दोनों श्रेणी के लिए शब्द सीमा भी अलग-अलग है.

पहली श्रेणी में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक मान्यता प्राप्त स्कूल के छात्र, जैसे कक्षा 9वीं से कक्षा 12वीं तक शामिल होंगे. इन कक्षा के छात्रों को अधिकतम 1000 शब्दों में निबंध लिखना होगा, जबकि दूसरी श्रेणी में मान्यता प्राप्त कॉलेज/विश्वविद्यालय/संस्थान के ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों के लिए शब्दसीमा 2000 होगी. अन्य जानकारी के लिए आप डीआरडीओ की अधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं या इस पर क्लिक कर देखें.

‘टाइगर जिंदा है’ की शूटिंग रही चुनौतीपूर्ण- अली अब्बास जफर

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नई दिल्ली। ऑस्ट्रिया के सर्द मौसम से लेकर अबु धाबी के लीवा रेगिस्तान की गर्म जलवायु में आगामी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ की शूटिंग कर चुके निर्देशक अली अब्बास जफर ने बताया कि फिल्म की शूटिंग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितयों में की गई. एक बयान के मुताबिक सुपरस्टार सलमान खान और कैटरीना कैफ अभिनीत एक्शन-थ्रिलर फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग लीवा रेगिस्तान में हुई. उन दिनों वहां का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस था.

जफर ने कहा, “‘टाइगर जिंदा है’ के लिए रेगिस्तान में शूटिंग करना जरूरी था और इसे लीवा में शूट किया गया. तापमान बढ़ रहा था और एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग चलती कार में होनी थी, इस लिहाज से परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं.” जफर ने बताया कि अबु धाबी में फिल्म की स्थानीय टीम काफी सहायक थी. ‘टाइगर जिंदा है’ 22 दिसंबर को रिलीज होगी. यह वर्ष 2012 की ‘एक था टाइगर’ का सीक्वल है.

तेजस्वी यादव ने चाचा नीतीश को दिया करारा जवाब

tejashwi Yadav

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड पूरी तरह से आमने-सामने हो गई है. बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सबसे पहले नीतीश कुमार के साथ खड़े शराबमाफिया की तस्वीर प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम लोगों को दिखाई. जिसके बाद जदयू नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव की सात साल पुरानी फोटो दिखाई. जिसमें तेजस्वी यादव किसी महिला के साथ खड़ें हैं. इतना ही नहीं जदयू नेताओं ने तेजस्वी यादव के चरित्र पर भी सवाल उठाए.

उसके ठीक बाद तेजस्वी यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए संवाददाता सम्मेलन किया और जदयू नेताओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला. अब तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को चाचा संबोधित करते हुए एक ओपन लेटर लिखा है. जिसे हम हू-ब-हू नीचे दे रहे हैं…

आदरणीय नीतीश चाचा ने राजनीति का स्तर इतना गिरा दिया है कि एक लड़की के साथ तस्वीर सामने कर, मेरा राजनीतिक चरित्र हनन करने का प्रयास किया। हम तो ज़हरीली शराब माफ़िया के साथ उनकी फ़ोटो दिखा छवि कुमार को आइना दिखाने का काम कर रहे थे, फोटो मेरा दिखाया गया वह उस समय का है, जब हम राजनीति में नही आये थे, उस समय हम आईपीएल खेला करते थे। और उन IPL सीज़न में मैच के बाद सभी खिलाड़ीयों और खेल अधिकारियों के साथ “After match पार्टी” होती थी।

लेकिन नीतीश कुमार आज बिल्कुल हताश और असहज हैं। हताशा इस बात की कि उन्हें आभास हो गया है कि उन्हें पलटी मारने के राजनीतिक स्टंटबाजी में खुद ही अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार दी है। मरता क्या नहीं करता! हताशा में अपनी बची खुची इज़्ज़त भी मिटाने पर तुल गए हैं। हम सच्चे है इसलिए ख़ुद सामने आकर आरोपों जवाब दे रहे है। आपकी तरह रोबोट आगे नहीं करते। मैं मर्द का बच्चा हूँ और अपने जवाब ख़ुद देता हूँ।

* नीतीश जी खुद तो आमने सामने दो चार होने की हिम्मत नहीं, अपने बिना जनाधार के रोबोटनुमा प्रवक्ताओं में अपनी घटिया विचारों को प्रोग्राम करके अपने शब्द बुलवा रहे हैं। * मैं इन प्रवक्ताओं और उनके निम्नतम स्तर को दोष नहीं देता हूँ, ये बेचारे तो अपने पलटू राम हाई कमान के हुक्म की तामील भर कर सकते हैं। आगे बढ़ने की तो सबकी इच्छा होती है, तो ये भी MLC या MLC का renewal या किसी आयोग का सदस्य के लालच में आदेशानुसार अनर्गल बकने को मजबूर हैं। यह तो नीतीश कुमार की घटिया, नारी विरोधी सोच को दर्शा भर रहे हैं। * ये जो फोटो दिखा रहे हैं, उसमें कुछ भी नया या छुपाने वाली बात नहीं है। इस फोटो से 2010 से सभी वाकिफ़ हैं। * और मैं इससे इंकार भी नहीं कर रहा और ना ही इसे फोटोशॉप किया हुआ बता रहा हूँ। इस फोटो में बेशक़ मैं ही हूँ। * मैं आईपीएल में डेल्ही डेयर डेविल्स की टीम में था और हर मैच के बाद तब “आफ़्टर मैच पार्टियाँ” भी हुआ करती थीं। यह फोटो भी ऐसी किसी एक पार्टी का ही है। जिसमें खिलाड़ी, मशहूर हस्तियां, समर्थक, उनके परिवार इत्यादि आते थे। टीम के फैंस व प्रशंसक खिलाड़ियों या शामिल होने वाले अभिनेताओं, मशहूर हस्तियों के साथ फोटो खिंचवाते थे। ऐसे में किसी युवती ने मेरे साथ भी फोटो खिंचवा लिया तो इसमें इतनी हाय तौबा इनके घटिया स्त्री विरोधी सोच का सूचक है। * मुझसे राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए, अपना सियासी उल्लू सीधा करने के लिए ये अपनी नीच स्त्री विरोधी सोच का प्रदर्शन कर रहे हैं। * मुझपर निशाना साधने के लिए ये एक अपरिचित महिला का मात्र एक फोटो के आधार पर चरित्र हनन कर रहे हैं। * सार्वजनिक रूप से एक युवती के चित्र को दिखा, मेरे ऊपर आरोप सिद्ध करने के लिए एक युवती पर लांछन लगा रहे हैं। ये अनजान महिला सम्भवतः आज किसी की पत्नी होंगी, किसी की माँ होंगी, एक घर की इज़्ज़त, बहु होंगी।

* इस महिला की इज़्ज़त से खेलने का नीतीश कुमार को क्या अधिकार है? इस महिला फैन ने कौन सा पाप कर दिया कि उनकी इज़्ज़त को नीतीश कुमार सरे आम उछलवा रहे हैं? आज इस महिला, उनके परिवार पर क्या बीत रही होगी? * एक महिला को घर की दहलीज लाँघने पर जद यू वाले चरित्र हनन करेंगे? खराब विचारों का बताएंगें? महिलाओं को किसी खेल खिलाड़ी का प्रशंसक बनने की अनुमति नहीं? * हम समाजवादी हैं। हम निम्न और मध्यम वर्ग की बात करते हैं। मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के सहूलियत के लिए ट्रेन चलवाते हैं। उनका नाम जन साधारण और गरीब रथ रखते हैं। आपकी तरह किसी ट्रेन का नाम अर्चना या उपासना एक्सप्रेस नहीं रखते। * वैसे तो बिहार का बच्चा बच्चा जानता है पर अंतरात्मा बाबू अपने मुँह से खुद बताएँ कि किसकी उपासना और अर्चना में उपासना और अर्चना एक्सप्रेस का उनके मनोमस्तिष्क से निकल धड़ाधड़ पटरी पर दौड़ने लगती है? * बिहार एक्सप्रेस या बाढ़ एक्सप्रेस तो कभी नहीं चला, ये अर्चना एक्सप्रेस और उपासना एक्सप्रेस कैसे छुक छुक दौड़ने लगी? अब नीतीश बाबू पूजा पाठ और भक्ति वाला कोण मत ही डालिएगा, वास्तविकता पूरा बिहार जानता है। * आपके सहयोगी BJP ने चुनाव में ख़ूब फ़ोटोशॉप कर ऐसी तस्वीरों का प्रयोग किया था, उनसे पूछिए उन्हें क्या मिला? * आप बिहार भवन में सामान रखवाकर द्वारका जाते है और फिर द्वारका से अंधेरे में गुड़गाँव में कहाँ जाते है उसकी जानकारी अपने प्रवक्ताओ को भी दे दीजिए। मेरी तो 6 बहने दिल्ली में रहती है। अपना स्तर उठायें नीतीश चाचा जी।

चेन्नई में भारी बारिश से अब तक 12 की मौत

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Chennai

चेन्नई। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बाद अब तमिलनाडु में बारिश का कहर जारी है. चेन्नई और आस-पास के तटीय जिलों में हो रही लगातार बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. इस भारी बारिश के चलते खबर लिखे जाने तक 12 लोगों की मौत की खबर है. तेज बारिश ने चेन्नई के मयलापुर, फोरशोर एस्टेट और तांब्रम, क्रोमपेट और पल्लवरम के दक्षिणी उपनगरों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है.

तमि‍लनाडु के चेन्नई में भारी बारिश लोगों के लिए मुसीबत बन रही है. कई इलाकें जलमग्न हैं. विख्यात मरीना बीच में भी सर्विस लेन तक पानी भर चुका है. मरीना बीच इलाके में सबसे ज्यादा 30 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. वहीं एक ओर जहां पावर कट की वजह से कई हिस्सों में अंधेरा छाया रहा, वहीं वॉटर लॉगिंग की वजह से थिरुवरुर इलाके के पास मनल अगाराम में एक किसान के बिजली के तारों के चपेट में आने से मौत हो गई. इस तरह 27 अक्टूबर के बाद नॉर्थ ईस्ट मॉनसून बारिश की वजह से मरने वालों की संख्या 12 हो चुकी है.

चेन्नई, थिरुवलुर और कांचीपुरम जिले में 31 अक्टूबर से ही स्कूल और कॉलेज बंद हैं. अन्ना यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास ने अपनी सेमेस्टर परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी है. वहीं सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से अपने कर्मचारियों को घर से काम करने का ऑप्शन देने को कहा है. उत्तर चेन्नई में व्यासरपदी और ओरी, मध्य चेन्नई में पश्चिम अन्ना नगर और दक्षिण चेन्नई में मदिपक्कम में बहुत ज्यादा पानी भर गया है. 10 हजार एकड़ जमीन के पानी में डूब जाने की वजह से वेदारण्यम इलाके में नमक का उत्पादन रुक गया है.

निकाय चुनाव को लेकर गंभीर हैं मायावती

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लखनऊ। निकाय चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी और इसकी मुखिया मायावती गंभीर दिखाई दे रही हैं. शायद यही वजह है कि इन दिनों बसपा अध्यक्ष ने लखनऊ में अपना डेरा जमा लिया है. बीएसपी विगत दो दशक में पहली बार यूपी में निकाय चुनाव में पार्टी सिंबल पर उम्मीदवार उतारने जा रही है. खबर है कि मायावती इस बार लखनऊ में ही कैंप करेंगी और चुनावी तैयारियों एवं उम्मीदवारों के चयन पर पूरी नजर रखेंगी.

मायावती इन दिनों राजधानी लखनऊ में डटी हुई हैं और लगातार जोन और डिविजन स्तर के कार्यकर्ताओं से मीटिंग कर रही हैं. एक सीनियर बीएसपी नेता के मुताबिक हालांकि बीएसपी का बेस शहरों के मुकाबले गांवों में ज्यादा मजूबत है, लेकिन शहरी इलाकों में अपने आधार को बढ़ाने के लिए पार्टी ने निकाय चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. हम पूरी तैयारी के साथ उतरने वाले हैं और कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

ऐसे में इस माह के अंत में प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव इन पार्टियों के लिए अपने खोए जनाधार को दोबारा हासिल करने का मौका होने के साथ-साथ चुनौती भी है. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहे जा रहे इस चुनाव में मिली जीत जहां इन पार्टियों को सूबे में उम्मीद की किरण मुहैया कराएगी, वहीं एक और नाकामी उनके मनोबल पर गहरा असर डाल सकती है.

 नगरीय निकाय चुनाव को बसपा किस कदर गंभीर मान रही है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी निकाय चुनाव प्रचार के लिए बसपा के वरिष्ठ नेता लालजी वर्मा, राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ, पूर्व मंत्री नकुल दुबे, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, पूर्व मंत्री अनन्त मिश्रा तथा शमसुद्दीन राइन जैसे दिग्गज नेताओं को उतारने जा रही है.

आदिवासी होने का दर्द

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आदिवासी

महाराष्ट्र। आठ साल की रविता ने न तो ‘एक्स-रे’ और ‘एमआरआई’ जेसे शब्द सुने हैं, न उसे उनका महत्व मालूम है. उसे मालूम है तो बस इतना कि रीढ़ की हड्डी टूटने से पैदा लकवे के इलाज के लिए कुछ जरूरी सुविधाएं हैं जो नंदूरबार के दूर-दराज के उसके इलाके के अस्पताल में मौजूद नहीं. लिहाजा, भील समुदाय की इस आदिवासी बच्ची को अपने मां-बाप के साथ 467 किलोमीटर दूर, मुंबई के जीटी अस्पताल में इलाज करवाने आना पड़ा है.

महाराष्ट्र के हजारों आदिवासी उसी की तरह चिकित्सा की बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. अकेले रविता के नंदूरबार जिले में 467 बच्चे कुपोषण और ढंग की चिकित्सा न मिलने से बीमारियों से अप्रैल से सितंबर के छह महीनों में अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं.

‘कहने को प्रदेश के बजट का प्रतिशत हिस्सा आदिवासियों के कल्याण के ‌लिए निर्धारित है, पर शायद ही यह कभी पूरा खर्च किया जाता हो’, आदिवासियों के बीच काम करने वाले पूर्व विधायक विवेक पंडित की शिकायत है कि उन्हें दूसरे श्रेणी का नागरिक समझ लिया गया है. चूंकि वे दलितों की तरह वोट बैंक नहीं हैं और सरकार पर दबाव डालने के लिए रैली और प्रदर्शन नहीं कर पाते.

दरअसल, आदिवासियों की तरफ ध्यान तब जाता है जब उनके साथ कुछ हादसा घटता है. सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए सस्ते अनाज, स्वरोजगार और मकान बनाने के लिए रियायती कर्ज, गर्भवती माताओं के लिए पोषक भोजन, रियायती कापी-किताबों और यूनिफॉर्म जैसी सुविधाएं दी हैं. उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण भी मिला है, जिसका पूरा लाभ वे नहीं उठा पा रहे. कारण भ्रष्टाचार. बोर्डिंग स्कूलों में आदिवासी छात्राओं के दैहिक शोषण की खबरें आम हैं. लैंड माफिया और बिल्डरों ने उनकी जमीनें गड़प कर ली हैं जिनकी सांठगांठ नौकरशाहों और राजनीतिज्ञों से है. इस वजह से उनकी सुनवाई भी नहीं.

पंडित सवाल उठाते हैं कि आप कहते हैं आपके पास आदिवासी बच्चों के कल्याण के लिए कई योजनाएं हैं. तब इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ? उनके विकास के लिए रखा धन आखिर कहां चला गया? क्या आपने यह पता लगाने की कोशिश की कि आदिवासी और आंगनवाड़ी के बच्चों को भोजन और जरूरी पोषण तत्व आखिर क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?’ कहकर बॉम्बे हाई की मुख्य न्यायधीश मंजुला चेल्लूर और न्यायाधीश एन. एम. जामदार की खंडपीठ कोर्ट फटकार लगा रही थी तो महाराष्ट्र सरकार की घिघ्घी बंधी हुई थी.

यह मामला दो महीने के भीतर विदर्भ के मेलघाट पालघर और मोखाड़ा, ठाणे और अन्य आदिवासी इलाकों में कुपोषण और बीमारियों से 180 से ज्यादा मौतें होने पर उठा था. हाई कोर्ट ने सरकार को इन इलाकों में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य व शिक्षा, आदि सुविधाओं संबंधी अपनी आदेशों का पालन न करने के लिए भी झाड़ लगाई और तय किया कि अब से आदिवासी कल्याण संबंधी सभी मामलों को हर सप्ताह सुना जाएगा.

  साभार: नवभारत टाइम्स

भाजपा सांसद ने कन्हैया कुमार को बताया भगतसिंह और राष्ट्रभक्त

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Bhola singh

पटना। भाजपा सांसद भोला सिंह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को भगतसिंह और राष्ट्रभक्त बताया है. सांसद के इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ता ही उनके विरोध पर उतर आए हैं. भोला सिंह बिहार के बेगूसराय से भाजपा सांसद हैं. भोला सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान कन्हैया कुमार की तुलना शहीद भगत सिंह से कर दी, जिसके बाद वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने सांसद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.

भोला सिंह कैलाशपति मिश्र के पुण्यतिथि समारोह में जनसभा को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया की भगत सिंह से तुलना कर दी. इतना ही नहीं उन्होंने कन्हैया कुमार को सच्चा राष्ट्रभक्त भी बताया. इसके बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया.

वहीं एमएलसी रजनीश कुमार ने मंच से ही सांसद के बयान कि निंदा कर दी. उन्होंने कहा कि जिस कन्हैया को प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने देशद्रोही करार दिया है, उसे भाजपा के सांसद राष्ट्रभक्त कैसे कह सकते हैं? इसके साथ ही दर्शक दीर्घा में बैठे कुछ कार्यकर्ता सांसद विरोधी नारे लगाने लगे. इससे खिन्न होकर सांसद मंच से चले गए.

भोला सिंह कार्यक्रम छोड़ने के बावजूद अपने बयान पर अड़े रहे और विरोध कर रहे लोगों को चुनौती देते हुए बोले कि भाजपा की सरकार है, अगर कन्हैया देशद्रोही है तो उसे देशद्रोही घोषित किया जाए. ऐसा पहली बार नहीं है, जब भोला सिंह ने कुछ ऐसा कहा है, जिसकी उनकी पार्टी ही आलोचना कर रही है. भोला सिंह अक्सर अपनी ही पार्टी, उसकी योजनाओं और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं.

‘विसडम ऑफ आदिवासी’ पर जर्मनी में व्याख्यान देंगी जसिंता केरकेट्टा

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Adivasi Poet

नई दिल्ली। झारखंड की आदिवासी कवयित्री जसिंता केरकेट्टा जर्मनी की हैमबर्ग यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेंगी. इसका विषय ‘विसडम ऑफ आदिवासी’ है. वे अपनी कविताओं के पाठ के साथ आदिवासी संघर्षों और वर्तमान परिस्थितियों पर अपनी बात रखेंगी. जसिंता की कविताओं का संग्रह जर्मन भाषा में पिछले वर्ष प्रकाशित हो चुका है. जर्मनी में उनकी कविताएं चर्चित रही हैं. जर्मन भाषा में उनका दूसरा कविता संग्रह भी शीघ्र प्रकाशित होगा. वे बीते गुरुवार को जर्मनी के लिए रवाना हुईं.

जसिंता केरकेट्टा कविता रचना के साथ-साथ पत्रकारिता भी करती है और उरांव आदिवासी समुदाय से आती है. पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर प्रखंड में खुदपोश गांव की रहने वाली हैं. स्कूली दिनों से ही वह कविताएं लिख रही है. पत्रकारिता में आने के बाद उनके कविता सृजन में ठहराव आ गया था जिसे एक बार फिर उन्होंने गति दी है.

जसिंता की कविताओं में झारखंड और यहां के आदिवासी लोग हैं. उनकी कविताओं में आदिवासी समाज की लूट और दोहन है तो गैर आदिवासी समाज के पाखंड और षड्यंत्र पर चोट भी. हम यहां उनकी एक कविता साझा कर रहे हैं जिसमें उसने निर्दोष आदिवासियों को माओवादी कहकर दमन करने की तीखी आलोचना की है.

        दर्द ——————— मैं आंगन में बैठा था कि आकर पुलिस उठा ले गई मुझे मैंने लाख कहा कि मैं वो नहीं जो आप समझते हो उन्होंने मेरी एक न सुनी और बना दिया मुझे माओवादी, मैं याद करता हूं अपनी जवानी के दिन कैसे मैंने भूखे दिन गुजारे रात काटी कच्ची भूमि पर लेटकर हथकरघा से कपड़े बनाते हुए देखा था उन पुलिसवालों ने भी मुझे मेरे गांव में जिनके ऑर्डर पर मैं गमछे बनाता था पर फिर याद आता है वो टेबो थाना कैसे सफेद कागज पर पिटते हुए लिया गया मेरा हस्ताक्षर और कोर्ट में बना दिया गया आम ग्रामीण से एक नक्सल अपनी जीवनभर की सच्चाई और सरलता के बाद आज मैं देखता हूं अपने सीने में डंडे के दाग और आंखों में आक्रोश की आग सोचता हूं बार-बार कैसे मेरे माथे पर बांध कर माओवाद का सेहरा वो लूट ले जाएंगे मेरी ही नजरों में मेरा सम्मान ताकि मैं छोड़ कर चला जाउ जंगल में दूर तक पसरी अपनी जमीन, अपने खेत-खलिहान ताकि वो बड़ी आसानी से लूट सके मेरा अस्तित्व मेरी विरासत और मेरे पूर्वजों की धरोहर..

दुनियाभरके विद्वान शामिल सम्मेलन में भारत के अलग अलग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता भी हिस्सा लेंगे. इनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से आनंद वर्धन शर्मा, महात्मा गांधी इंटरनेशनल हिंदी यूनिवर्सिटी, वर्धा से गिरीश्वर मिश्रा और उषा शर्मा, सेंटर फॉर ओरल एंड ट्राइबल लिट्रेचर, एकेडमी ऑफ लेटर्स, दिल्ली की निदेशक अनीता अब्बी, बस्तर से राजाराम त्रिपाठी अलग-अलग विषयों पर अपनी बात रखेंगे. यहां आदिवासी इलाकों में हो रहे खनन, आदिवासी भाषा, संस्कृति, आधुनिक हिंदी साहित्य और आदिवासी जीवन संस्कृति, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति, आदि विषयों पर बात रखी जाएगी.

सुुप्रीम कोर्ट का इन डिग्रियों को मान्यता देने से इन्कार, हजारों नौकरियों पर संकट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने डिस्टेंस के जरिये पढ़ाई करने के मामले में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की तकनीकी शिक्षा डिस्टेंस के माध्यम से नहीं की जा सकेगी. शीर्ष न्यायालय ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की तकनीकी शिक्षा दूरस्थ पाठ्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराई जा सकती. उच्च न्यायालय ने डिस्टेंस के जरिए तकनीकी शिक्षा को सही माना था.

उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से प्रबंधन, मेडिकल, इंजीनियरिंग और फार्मेसी समेत कई अन्य पाठ्यक्रम तकनीकी पाठ्यक्रमों से जुड़े छात्रों को झटका लगा है. अब छात्र इनकी पढ़ाई डिस्टेंस के माध्यम से नहीं कर पाएंगे. शीर्ष न्यायालय ने इस फैसले से पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर भी अपनी संस्तुति जाहिर की, जिसमें कंप्यूटर विज्ञान में डिस्टेंस के माध्यम से ली गई डिग्री को नियमित तरीके से हासिल डिग्री की तरह मानने से इंकार कर दिया है.

शीर्ष न्यायालय का यह फैसला इस लिहाज से अहम है कि आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ने की वजह से छात्र को व्यावहारिक ज्ञान या तो होता ही नहीं है अथवा कम होता है.

ममता बनर्जी के करीबी मुकुल रॉय भाजपा में शामिल

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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी रहे और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता मुकुल रॉय ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में पार्टी में शामिल हुए.

भाजपा में शामिल होने के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुकुल राय ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्‍व में काम करने का गर्व होगा. भाजपा साम्‍प्रदायिक नहीं बल्कि धर्म निरपेक्ष है और निकट भविष्‍य में पश्चिम बंगाल में पार्टी सत्ता में आएगी. उन्होंने आगे कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि भाजपा के समर्थन के बिना तृणमूल कांग्रेस बंगाल में सत्ता में नहीं पहुंच सकती थी.

मुकुल रॉय ने कहा कि 1998 में ममता बनर्जी भाजपा के साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ी. 1999 में तृणमूल राष्ट्रीय जनतांत्रित गठबंधन की सहयोगी बनकर चुनाव लड़ी और ममता जी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी बनी. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुकुल रॉय के अनुभव का पार्टी को लाभ मिलेगा. प्रसाद ने कहा कि मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य रहे हैं और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. रॉय ने प्रभावशाली तरीके से माकपा के 30 वर्षों के शासन के दौरान जारी ज्यादतियोंं के खिलाफ संघर्ष किया और उस समय माकपा के आतंक को समाप्त करने में हिम्मत से लड़े.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना करने वालों में शामिल रहे मुकुल रॉय यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं. मुकुल रॉय के भाजपा में शामिल होने की अटकलें काफी दिनों से चल रही थी. पिछले माह ही राज्यसभा से उनका इस्तीफा मंजूर किया गया था. राय ने 11 अक्टूबर को राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था. मुकुल राय का इस्तीफा ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका है.