टीचर की शर्मनाक करतूत, छात्राओं से करवाया खेत में काम

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मयूरभंज। ओडिशा के एक सरकारी स्कूल का अजीब मामला सामने आया है. वहां के एक टीचर ने कथित रूप से तीन छात्राओं को अपने खेतों में काम पर लगा दिया था.

बताया जा रहा है कि मयूरभंज के ठाकुरमुंड इलाके में मौजूद एक सरकारी स्कूल की टीचर संगीता सरिता मुंडा ने तीन लड़कियों से अपने खेतों में काम करवाया, इसके बदले में उन्हें प्रतिदिन के 100 रुपए भी दिए . अब मामले की जांच की जा रही है.

तीनों लड़कियां आदिवासी समाज की हैं, वे स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती हैं. मामले का खुलासा उस समय हुआ जब बच्चियों के माता-पिता स्कूल में उनसे मिलने आए और बच्चियां स्कूल से गायब थी. अभिभावकों ने इसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन को दी और विरोध-प्रदर्शन किया. मामला बढ़ता देखकर शिक्षा विभाग ने मामले में जांच के आदेश दिए.

ओडिशा का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले जुलाई में एक ऐसा ही मामला सामने आया था. तब एक प्राइमरी स्कूल की महिला टीचर ने अपने छात्रा से स्कूटी साफ करवाई थी. बाद में पता लगा था कि स्कूल प्रशासन की तरफ से कई बार उसे चेतावनी दी गई है, जिसके बाद भी वो बाज नहीं आ रही थी.

पाकिस्तान में सेना और प्रदर्शनकारियों के झड़प, न्यूज चैनलों का प्रसारण बंद

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में तहरीके-ए-लब्बैक (टीएलपी) या रसूल अल्लाह नाम के इस्लामिक संगठन का 20 दिन से धरना-प्रदर्शन जारी है. धरने को खत्म कराने के लिए शनिवार सुबह पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की. प्रदर्शनकारियों से सख्ती से पेश आने पर वे भडक़ गए और पत्थरबाजी का दौर शुरू हो गया.

प्रदर्शनकारियों की तादाद ज्यादा नहीं है, लेकिन पत्थर-डंडों से छिप-छिपकर किए जा रहे हमलों ने पाकिस्तान के सुरक्षाबलों की नाक में दम कर दिया है. इस्लामाबाद में जमकर हंगामा हुआ और प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए. दरअसल,शनिवार सुबह पाकिस्तान सुरक्षाबलों ने फैजाबाद इंटरचेंज पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया था.

इसके बाद से बवाल खड़ा हो गया. वहीं, पाक सरकार मीडिया को लाइव कवरेज रोकने के आदेश दिए है, क्योंकि लोग इस पुलिस कार्रवाई से आक्रोशित हो सकते है और प्रदर्शन उग्र रूप ले सकता है. हालांकि, जियो न्यूज समेत पाकिस्तान के कई न्यूज चैनलों ने प्रसारण बंद नहीं किया है.

शनिवार सुबह पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साढ़े 8 हजार जवानों ने राजधानी इस्लामाबाद के फैजाबाद इंटरचेंज में धरने पर बैठे करीब 2000 प्रदर्शनकारियों को खदेडऩा शुरू किया. इसके बाद चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई. प्रदर्शनकारियों ने सडक़ों और बाजारों को बंद कर दिया है. यह धरना 6 नवंबर को टीएलपी नाम के छोटे से इस्लामिक संगठन ने शुरू किया था.

गुजरात चुनाव में JDU के लिए प्रचार नहीं करेंगे नीतीश कुमार

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पटना। जनता दल यूनाइटेड गुजरात के चुनावी मैदान में है लेकिन इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार नहीं करेंगे.

हालांकि जनता दल वहां पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में हर बार प्रत्याशी उतारती रही है लेकिन एक आदिवासी बहुल इलाके में छोटू भाई वसवा के अलावा कोई और विधायक नहीं बना. वसावा अब शरद गुट के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. राज्यसभा चुनावों के दौरान वासवा का वोट निर्णायक कांग्रेस प्रत्याशी अहमद पटेल की जीत में निर्णायक रहा था.

जदयू के राष्ट्रीय सचिव एए खान ने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है. इस लिस्ट में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) एवं राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह, महासचिव केसी त्यागी, बिहार सरकार के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, सांसद हरिवंश, संजय झा. अनिल सहनी, रविंद्र सिंह, विद्यासागर निषाद सहित कई बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं.

जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि पार्टी करीब 100 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी जो अधिकांश आदिवासी बहुल और पटेल लोगों के परम्परागत गढ़ में होंगे. त्यागी हाल में चुनाव आयोग के नीतीश कुमार के पक्ष में आए फैसले से उत्साहित हैं और इसके बाद उन्हें उम्मीद है कि पार्टी चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी.

गुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल ने अपनाई जनसंपर्क अभियान की रणनीति

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के लिये चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लेंगे.

आम आदमी पार्टी के गुजरात इकाई के प्रभारी गोपाल राय ने आज बताया कि केजरीवाल गुजरात में चुनाव प्रचार के लिये नहीं जायेंगे. उन्होंने बताया कि पार्टी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में आप कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं द्वारा घर-घर जाकर वोट मांगने की रणनीति अपनायी है. इसलिये राष्ट्रीय नेताओं को स्टार प्रचारक के तौर पर गुजरात जाने की कोई जरूरत नहीं है. पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं द्वारा जनसंपर्क अभियान को ही प्रचार का मुख्य आधार बनाया है.

आप ने गुजरात विधानसभा चुनाव में सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय उन चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनायी है, जहां सामाजिक एवं अन्य चुनावी समीकरणों के लिहाज से आप का संगठनात्मक ढांचा मजबूत है. इसके तहत आप ने अब तक 33 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं. इसके लिये पार्टी प्रत्याशियों की तीन सूची जारी कर चुकी है.

सूत्रों के मुताबिक आप के शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी की केन्द्रीय इकाई के नेता कुमार विश्वास सहित कुछ अन्य असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी से बचने के लिये गुजरात में स्टार प्रचारकों के इस्तेमाल के बजाय जनसंपर्क अभियान पर ही जोर दिया है. राय ने कहा कि गुजरात में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के बजाय महज 33 सीटों पर ध्यान केन्द्रित करने की रणनीति को ही आप ने अपनाया है.

दयाल सिंह कॉलेज का नाम बदलने पर एनडीए में फूट!

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नई दिल्ली। दिल्ली के दयाल सिंह इनविंग कॉलेज का नाम बदलने पर एनडीए में फूट के बादल मंडराने लगे हैं! केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने धमकी भरे लहजे में कहा है जो व्यक्ति कॉलेज का नाम बदलने में ज्यादा इच्छुक है खुद उसका नाम बदला जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि आप किसी और की विरासत को कैसे हटा सकते हैं? ये अस्वीकार्य और चौंकाने वाली बात है क्योंकि पाकिस्तान में उनके योगदान के लिए सरदार दीन दयाल कॉलेजों को चलाया जा रहा है. दरअसल अकाली सांसद कौर का ये बयान ऐसे समय में आया है जब 17 नंवबर को दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज की गवर्निंग बॉडी (जीबी) ने महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए कॉलेज का नाम बदलने का फैसला लिया. प्रस्ताव में कॉलेज को नया नाम वंदे मारतम महाविद्यालय दिया गया.

तब गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन अमिताभ सिन्हा ने कहा कि इसके बाद इवनिंग और मॉर्निंग कॉलेज के अलग-अलग नाम होंगे. साल 1958 से ही दयाल सिंह मॉर्निंग और दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज का अपना अस्तित्व रहा है. इसलिए हमें इवनिंग कॉलेज का नाम बदलना ही होगा. दयाल सिंह कॉलेज दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहला इवनिंग कॉलेज है. इसपर एक भाजपा नेता और एक वकील ने कॉलेज का नाम बदलने पर कहा है, ‘मां को सम्मान दे रहे हैं.’ सिन्हा ने आगे कहा था कि जीबी ने कॉलेज के नए नाम पर मोहर लगा दी है और डीयू के वाइंस चांसलर को मामले में जानकारी दे दी गई है. वही इसपर अंतिम निर्णय लेंगे और औपचारिक अनुमति देंगे.

गौरतलब है कि इवनिंग कॉलेज के प्रिंसिपल पवन शर्मा को 21 सितंबर को मामले में जानकारी दी गई। इसमें आधिकारिक परिषद की मीटिंग में कॉलेज को पूर्ण कॉलेज बनानी की अनुमति दी गई। कॉलेज को सुबह के वक्त शिफ्ट कर दिया गया है। जहां दोनों की क्लास और आधिकारिक कामकाज अलग-अलग होगा। दूसरी तरफ मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक कमेटी का गठन किया है जो कॉलेज को दो हिस्सों में बांटने का काम करेगी। हालांकि जीबी के इस फैसले पर कुछ छात्रों और शिक्षकों ने अपना विरोध जताया और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

सहारनपुर के दलितों से भेदभाव कर रही है यूपी सरकार

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सहारनपुर के दलित दोहरे अत्याचार का शिकार हो रहे हैं. सभी भलीभांति अवगत हैं कि 5 मई 2017 को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव के दलितों के घरों पर उस क्षेत्र के सामंतों ने हमला किया था. इसमें लगभग दो दर्जन दलित बुरी तरह से घायल हुए थे और 50 से अधिक घर बुरी तरह से जला दिए गए थे. उक्त हमले में रविदास मंदिर की मूर्ती तोड़ी गई थी और मंदिर को बुरी तरह से जलाया तथा क्षतिग्रस्त किया गया था. उस हमले में एक लड़के की मौत हो गई थी, जिसने रविदास मंदिर के अंदर कोई ज्वलनशील पदार्थ छिड़क कर मंदिर को जलाया था तथा मूर्ती तोड़ी थी. दम घुटने के कारण मंदिर से बाहर निकलते ही वो बेहोश हो गया था. इसके बाद हजारों की संख्या में लोगों ने दलित बस्ती पर हमला किया था. हमले में दो दर्जन के करीब दलित बुरी तरह से घायल हुए थे. कुछ महिलाओं के साथ बदसलूकी भी हुई और ज्वलनशील पदार्थ छिड़क कर घरों को जलाया गया. पालतू पशुओं को भी नुकसान पहुंचा था.

जिस समय दलित बस्ती पर हमला किया गया, उस समय पुलिस मौके पर मौजूद थी लेकिन उसने भी रोकने के बजाय हमलावरों को तांडव करने का खुला मौका दिया. जन मंच और स्वराज अभियान समिति की साझा जांच में यह बात सामने आई थी कि पुलिस ने दंगाइयों को मौका दिया था. पुलिस की भूमिका दलितों के प्रति दुर्भावनापूर्ण रवैये का सबूत है. इतना ही नहीं पुलिस ने दलितों के विरुद्ध पांच मुकदमे भी दर्ज कर दिए, जिनमें 9 दलितों को नामज़द किया गया. लेकिन दलितों की तरफ से केवल एक मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमे 9 लोगों को नामज़द तथा काफी अन्य को आरोपी बनाया गया था. इसके बाद पुलिस के द्वारा आठ दलितों और हमलावर पक्ष के 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद एक अन्य दलित को भी गिरफ्तार किया गया परन्तु दूसरे पक्ष से किसी अन्य की गिरफ्तारी नहीं की गई. जबकि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने जांच टीम को बताया था कि उन्होंने लगभग 40 हमलावरों को चिन्हित कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी जल्द ही की जाएगी. लेकिन उसके बाद आज तक कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुई. इसके लगभग तीन हफ्ते बाद जब मायावती शब्बीरपुर गईं, तो उस दिन जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण शब्बीरपुर से लौट रहे एक दलित लड़के की हत्या कर दी गई. इस मामले में केवल दो लड़कों की गिरफ्तारी हुई.

पुलिस के पक्षपाती रवैये का इससे बड़ा क्या सुबूत हो सकता है कि पुलिस ने पिटने वाले दलित और पीटने वाले सामंती दबंगों के साथ एक जैसा बर्ताव किया. बराबर की गिरफ्तारियां की गईं. दो दलितों तथा दो हमलावरों पर एनएसए लगा दिया गया. सभी जेल में हैं. परिस्थितियों से पूरी तरह स्पष्ट है कि दलितों ने अपने बचाव में जो भी पथराव किया, वह आत्मरक्षा में किया था. परन्तु दलितों द्वारा आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई को भी हमले के ही रूप में लिया गया और उनकी गिरफ्तारियां की गईं, जबकि आईपीसी की धारा 100 में प्रत्येक नागरिक को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार है. इस प्रकार एक तो दलितों पर अत्याचार किया गया और दूसरे पुलिस ने उन्हें आत्मरक्षा के अधिकार का लाभ न देकर गिरफ्तार किया. इस प्रकार दलित दोहरे अत्याचार का शिकार हुए हैं.

औरतों ने यह भी बताया था कि हमलावरों के पास गुब्बारे थे, जिसे फेंक कर आग लगाई गई थी. इससे स्पष्ट है कि दलितों पर हमला पूर्व नियोजित था. जांच समिति ने इसका उल्लेख जांच रिपोर्ट में भी किया, परन्तु पुलिस ने इस तथ्य को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया. प्रशासन द्वारा दलितों के घरों तथा सामान के नुकसान का आकलन कराया गया था, लेकिन अब तक जो मुआवजा दिया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही है. जो दलित नामज़द हैं और जेल में हैं उन्हें न तो सरकार की तरफ से नुकसान की भरपाई हेतु कोई मुआवजा मिला और न ही एससीएसटी एक्ट के अंतर्गत मिलने वाली अनुग्रह-राशि ही मिली. इसके इलावा गिरफ्तार हुए दलितों को निजी वकील रखने पर भी खर्च करना पड़ रहा है.

यह भी उल्लेखनीय है कि दलितों पर हुए हमले की घटना से एक दिन पहले ही आभास हो गया था कि महाराणा प्रताप जयंती पर दलितों पर हमला हो सकता है. ग्राम प्रधान ने इसकी सूचना पुलिस अधिकारियों तथा एसडीएम को दे दी थी, परन्तु दलितों की सुरक्षा के लिए पुलिस का कोई उचित प्रबंध नहीं किया गया. इसके साथ ही जब 9 मई को भीम आर्मी ने प्रशासन द्वारा शब्बीरपुर में हुए हमले के सम्बन्ध में वांछित कार्रवाई न करने पर विरोध जताने की कोशिश की, तो पुलिस द्वारा बलप्रयोग किया गया. इस पर भीम आर्मी के सदस्यों तथा पुलिस के बीच मुठभेड़ होने पर भीम आर्मी के संयोजक चन्द्रशेखर तथा उसके साथियों के विरुद्ध 21 मुक़दमे दर्ज कर लिए गए. इसके बाद चन्द्रशेखर सहित 40 लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया. जिनमें से 2 लोग अभी तक जेल में हैं. चन्द्रशेखर और वालिया को छोड़ कर भीम आर्मी के अन्य गिरफ्तार सदस्यों की जमानत हो चुकी है. इन दोनों की जमानत जिला स्तर से रद्द हो चुकी है और अब यह इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है. जेल में चन्द्रशेखर की सेहत बराबर गिर रही है और 28 अक्टूबर को उसे जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाना पड़ा था.

भीम आर्मी के दमन का ताज़ा उदहारण यह है कि कुछ दिन पहले जब भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली, तो उसके जेल से छूटने के पहले ही उस पर रासुका लगा दिया गया. दरअसल योगी सरकार नहीं चाहती कि चंद्रशेखर किसी भी हालत में जेल से बाहर आए, क्योंकि उसके बाहर आने पर दलितों के लामबंद होने का खतरा है. सरकार की यह कार्रवाई रासुका जैसे काले कानून का खुला दुरुपयोग है. इस कानून के अंतर्गत आरोपी को बिना किसी कारण के एक साल तक जेल में रखा जा सकता है. यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है.

साफ है कि सहारनपुर में शब्बीरपुर के दलित आत्मरक्षा में कार्रवाई करने पर भी गिरफ्तार किए गए और उनकी गिरफ्तारियां हमला करने वाले लोगों के समतुल्य ही की गईं. रासुका के मामले में भी उन्हें हमलावरों के समतुल्य रखा गया है. पीड़ित दलितों को बहुत कम मुआवजा दिया गया और जो दलित मुकदमों में नामज़द हैं, उन्हें कोई भी मुआवजा नहीं मिला. इस प्रकार शब्बीरपुर के दलित एक तरफ सामंतों के हमले का शिकार हुए हैं तो दूसरी ओर वे प्रशासन के पक्षपाती रवैये का भी शिकार हो रहे हैं. इसके अलावा भीम आर्मी के दो सदस्य अभी भी जेल में हैं और तीन दर्जन से अधिक नवयुवक पुलिस से भिड़ंत के मुकदमे झेल रहे हैं. पुलिस ने भीम आर्मी के एक पदाधिकारी की गिरफ्तारी के लिए 12000 का इनाम घोषित कर रखा है. सरकार द्वारा हमलावरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई न करने के कारण उनके हौसले बुलंद हैं और वे अभी भी दलितों को धमका रहे हैं.

-लेखक जन मंच के संयोजक और स्वराज अभियान समिति के सदस्य हैं. चौथी दुनिया से साभार

सुप्रीम कोर्ट को चुनौती है भागवत का बयानः मुस्लिम संगठन

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उडुपी। कर्नाटक के उडुपी में चल रहे धर्म संसद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत विवादित राम मंदिर पर जो बयान दिया उसके बाद मुस्लिम बोर्ड की प्रतिक्रिया आई है. बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि राम जन्मभूमि पर केवल राम मंदिर ही बनेगा और कुछ नहीं, और ये उन्हीं की अगुवाई में बनेगा जो 20-25 सालों में इसके लिए झंडा लेकर चल रहे हैं. अब बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कन्वेनर और वकील जफरयाब जिलानी ने भागवत के इस बयान को सुप्रीम कोर्ट को चुनौती करार दिया है वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के औवेसी ने भी इसे कानून का उल्लंघन करार दिया है.

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार जिलानी ने कहा है कि संविधान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च अथॉरिटी है और वो यह तय करेगी कि मंदिर कहां बनना है और कहां नहीं. देश कानून के हिसाब से चलता है और हम सब फैसले का इंतजार कर रहे हैं. भागवत का बयान संविधान और सुप्रीम कोर्ट को चुनौती है.

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि यह माहौल खराब करने की सोची समझी कोशिश हैं. जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो फिर ऐसे बयान कैसे दिए जा सकते हैं. बता दें कि आरएसएस प्रमुख ने उडुपी में कहा था कि राम मंदिर वहीं बनेगा. इसे लेकर कोई शक नहीं होना चाहिए, वहां वैसा ही भव्य मंदिर बनेगा जैसे पूर्व में बना था.

दिल्ली मेट्रो में रोजाना घटे 3 लाख यात्री

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नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो को किराया बढ़ाने का फैसला उल्टा पड़ता दिख रहा है. किराए में बढ़ोतरी के बाद से यात्रियों की संख्या में प्रतिदिन 3 लाख की कटौती आई है. आरटीआई से इस बात का खुलासा हुआ है. पिछले दिनों ही मेट्रो ने किराया बढ़ाया था, जिसका दिल्ली सरकार समेत कई हलकों से जोरदार विरोध किया गया था. प्रदूषण और स्मॉग की मार झेल रही दिल्ली में मेट्रो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक अहम साधन है.

अक्टूबर माह में मेट्रो मुसाफिरों की संख्या 24.2 लाख पर आ गई है जो कि सिंतबर में 27.4 लाख थी. 10 अक्टूबर को ही किराया बढ़ाने का फैसला लागू किया गया था. डीएमआरसी की ओर से RTI के जवाब में बताया गया कि सबसे व्यस्त रहने वाली ब्लू लाइन में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में 30 लाख की कमी आई है. साथ ही येलो लाइन पर भी 19 लाख यात्री घटे हैं.

दिल्ली मेट्रो ने बीते 10 अक्टूबर को किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया था. बढ़े हुए किराए के बाद अधिकतम किराया 60 रूपए और न्यूनतम किराया 10 रूपए किया गया था. अब मेट्रो में 2 किमी तक सफर करने के लिए 10 रूपए किराया देना होगा. वहीं 2 से 5 किमी तक 15 रुपए की जगह 20 रुपए और 5 से 12 किमी तक 20 रुपए की जगह 30 रुपए खर्च करने होंगे. यहीं नहीं, 12 से 21 किमी तक 30 रुपए की जगह 40 रुपए, 21 से 32 किमी तक 40 रुपए की जगह 50 रुपए का हो गया है. 32 किमी से अधिक सफर करने के लिए 50 रुपए की जगह 60 रूपए किराया देने पड़ रहे हैं.

डीटीसी में भारी कमी के चलती रोजमर्रा में यात्री मेट्रो से सफर करते हैं जिससे उन्हें सड़क जाम और बसों में आने वाली खराबी से भी नहीं जूझना पड़ता था. साथ ही पूरी तरह ऑटोमेटिक होने की वजह से मेट्रो में खराबी और देरी के मामले में कम ही दर्ज होते हैं.

अब किराए में बढ़ोतरी का फैसला मेट्रो के लिए संकट बन गया है. प्रतिदिन अगर इतनी बढ़ी संख्या में यात्री मेट्रो छोड़ अन्य संसाधनों से सफर कर रहे हैं तो इससे न सिर्फ मेट्रो को घाटा होगा बल्कि दिल्ली में प्रदूषण पर नियंत्रण करना भी मुश्किल हो सकता है.

मोहाली में श्रीलंका के खिलाफ अपना अन्तिम मैच खेलेंगे युवराज

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श्रीलंका और भारत के बीच तीन वनडे मैचों की सीरीज का दूसरा मैच मोहाली में खेला जाएगा. यह मुकाबला सिक्सर किंग युवराज सिंह का अन्तिम अन्तरराष्ट्रीय मुकाबला हो सकता है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बीसीसीआई नेहरा के बाद अब युवराज सिंह को भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई उनके घरेलू मैदान से देना चाहता है. हालांकि युवराज सिंह अभी संन्यास लेने के मूड में बिलकुल भी नहीं है. वह टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में अभ्यास कर रहे हैं. ताकि वह यो-यो टेस्ट पास करके भारतीय टीम मेंं वापसी कर सके. इसके लिए वह रणजी ट्रॉफी के मैच भी नहीं खेल रहे हैं. बीसीसीआई के अधिकारियों के एक वर्ग को युवराज का रणजी ट्रॉफी मैच नहीं खेलकर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में फिटनेस ट्रेनिंग करने का फैसला पसंद नहीं आ रहा है.

युवराज अभी तक पंजाब के पांच में से चार रणजी मैचों में नहीं खेले हैं. वह विदर्भ के खिलाफ सिर्फ एक मैच में खेले हैं जिसमें उन्होंने 20 और 42 रन बनाए हैं. बीसीसीआई के कुछ अधिकारी अब राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अभी किसी तरह की चोट के बारे में नहीं बताया है. पता चला है कि युवराज यो यो फिटनेस टेस्ट को पास करने के लिए बेताब हैं जिसमें पहले वह असफल हो गए थे, लेकिन ऐसा प्रतिस्पर्धी मैचों में नहीं खेलकर हो रहा है.

भारतीय टीम में वापसी भी युवराज के लिए जरूरी है, क्योंकि उनके आईपीएल नीलामी पूल में वापसी की उम्मीद है और फे्रचाइजी टीमों के लिए भारतीय टीम से बाहर चल रहे खिलाड़ी को लेना पहला विकल्प नहीं होता. बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं है कि युवराज रिहैबिलिटेशन कर रहे हैं लेकिन हमें पता चला है कि वह यो यो टेस्ट पास करने के लिए विशेष फिटनेस ट्रेनिंग कर रहे हैं, लेकिन रणजी ट्रॉफी छोडऩा अच्छी चीज है या नहीं, इस पर युवराज को फैसला करना होगा.

कड़ी सुरक्षा के बीच घोड़ी पर बैठा दलित दूल्हा

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अजमेर। राजस्थान के अजमेर जिले में अंराई कस्बे के पास सरवर गांव में दलित समाज के युवक की बिन्दौरी (बारात) निकालने पर उच्च जातियों के साथ विवाद हो गया. गांव के कुछ मनुवादियों की गुंडागर्दी के कारण घोड़ी पर दलित की बिन्दौरी नहीं निकलने दी गई. दलित बैरवा समाज के लोगों ने जिला कलेक्टर को शिकायत की. इसके बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए. कलेक्टर के निर्देश पर नसीराबाद और किशनगढ उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, पुलिस उपाधीक्षक सहित दो थानों की पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद दलित दुल्हे की बारात शांतिपूर्वक निकाली गई.

सरवर निवासी प्रधान बैरवा की शादी होनी थी. विवाह कार्यक्रम के अनुसार बिन्दौरी निलकने लगी. आरोप है कि शादी का कार्यक्रम शुरू होने के बाद से ही गांव के कुछ मनुवादी परिवार पर बिन्दौरी नहीं निकालने का दबाव बना रहे थे. जब दलित की बिन्दौरी निकलने लगी तो मनुवादियों ने विवाद करते हुए घोड़ी पर बिन्दौरी नहीं निकालने दी.

इस पर दलित समाज के लोगों में रोष फैल गया. बैरवा समाज के लोगों ने विरोध जताते हुए जिला कलेक्टर को शिकायत कर पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई. कलेक्टर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सरवर गांव भेजा गया. यहां पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दलित समाज के दूल्हे की घोड़ी पर बिन्दौरी शांतिपूर्वक निकाली गई. इसके बाद दूल्हा और बारात रवाना हो गई.

दलित परिवार के दूल्हा प्रधान बैरवा ने प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में घोड़ी पर बिन्दौरी निकालने के बाद प्रशासन का आभार जताया. गौरतलब है कि राजस्थान में दलितों को घोड़ी पर बैठकर बारात निकालने पर दलित जाति के लोगों को पीटने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती है.

दाखिले के लिए पैसे न होने पर छात्र ने किया सुसाइड

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रांची। झारखंड के गुमला जिले के शास्त्री नगर इलाके में गरीबी की मार झेल रहे लोहरा जाति के एक छात्र ने स्कूल में दाखिले के लिए पैसे न होने के कारण सुसाइड कर लिया. गरीबी के कारण उसका अंतिम संस्कार करने के लिए उसके घर वालों के पास पैसे नहीं थे. उसके मोहल्ले के लोगों ने चंदा देकर अंतिम संस्कार करवाया.

शास्त्री नगर का रहने वाला 20 वर्षीय कृष्णा लोहरा के पास दाखिला लेने के लिए पैसे नहीं थे, जिसके कारण वो पिछले कई दिनों से परेशान चल रहा था. कृष्णा अपनी मां दुलारी देवी और एक भाई के साथ किराए के मकान में रहता था. दुलारी देवी मजदूरी कर अपने दोनों बेटों के साथ जिंदगी गुजर बसर कर रही थी. उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने बेटे को दाखिला करा सके.

कृष्णा के पिता का लगभग 12 साल पहले निधन हो चुका है. घर के हालात ऐसे थे कि कृष्णा के अंतिम संस्कार के लिए दुलारी देवी के पास पैसे तक नहीं थें. घटना की जानकारी मिलने के बाद इलाके के सीओ महेंद्र कुमार ने दो हजार रूपये दिए.

कृष्णा के भाई ने बताया कि मां कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रखंड कार्यालय गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी और उन्हें कोई भी लाभ नहीं दिया गया. दुलारी देवी के पड़ोसी ने बताया कि महिला मजदूरी करके ठीक से अपने बच्चों की देख भाल नहीं कर पा रही थी. अंतिम संस्कार के लिए पैसा कम होने के कारण मोहल्ले के लोगों ने चंदा इक्ट्ठा कर उसका अंतिम संस्कार किया.

एक किसान के उम्मीद की कड़ी है ‘कड़वी हवा’

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नई दिल्ली। सिनेमाघरों में यूं तो हम सिर्फ मनोरंजन के लिए ही जाते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ फिल्‍में हमें जिंदगी के बेहद अहम सच से रूबरू करा देती हैं और निर्देशक नील माधव पांडा की फिल्म ‘कड़वी हवा’ एक ऐसी ही फिल्‍म है. आज रिलीज हुई फिल्‍म ‘कड़वी हवा’ में एक्‍टर संजय मिश्रा, रणवीर शौरी और तिलोत्तमा शोम मुख्‍य भूमिका में हैं. यह सच्‍चाई से जुड़ी एक ऐसी फिल्‍म है जिसमें आपको ज्यादा तामझाम देखने को नहीं मिलेगा.

इसका नाम और भारीभरकम विषय को देखते हुए हो सकता है आप पहले से ही इस फिल्‍म को न देखने का अपना मन बना चुके होंगे, लेकिन यह फिल्म आज के दौर की एक अहम सच्‍चाई दिखाती है और इसलिए इसे एक बार तो जरूर देखना चाहिए. ऐसी फिल्में हमें हमेशा अपने समय से जोड़ती नजर आती है.

‘कड़वी हवा’ की कहानी चंबल के रेतीले गांव से शुरू होती है. फिल्म में संजय मिश्रा एक नेत्रहीन वृद्ध व्‍यक्ति हेदु की भूमिका में हैं, जबकि उनके बेटे मुकुंद के रूप में भूपेश सिंह और हेदु की बहू पार्वती के किरदार में तिलोत्तमा शोम हैं. किसान हेदु गांव में अपने बेटे, बहू और दो पोतियां के साथ रहते हैं. हेदु एक गरीब किसान है और जैसे-तैसे कर के अपनी जिंदगी की गाड़ी आगे खींच रहा है. इस गांव की जमीन बंजर होने के कारण वहां का किसान कर्जा तो ले लेता है, लेकिन फसल पैदा न होने के चलते यह कर्जा चुना नहीं पाता है. ऐसे में कर्जे से दबे किसानों की आत्‍महत्‍या का सिलसिला यहां आम हो जाता है. इन किसानों से कर्जा वसूलने का काम गुनु बाबू करते हैं और यह किरदार रणवीर शॉरी निभा रहे हैं.

वसूली का काम करने वाले गुनु को इस बीच काफी समस्या होती है, क्योंकि कभी कुछ किसान पैसे दे देते हैं तो कभी कुछ आनाकानी करते हैं, जिस वजह से गुनु चिंतित भी रहता है. यहां तक कि गांव के लोग गुनु को यमदूत के नाम से बुलाते हैं. इसी बीच जब हेदु और इस गुनु का आमना-सामना होता है, तो एक नया समीकरण सामने आता है.

हेदु और गुनु, दोनों ही मौसम के मारे हैं. इन दोनों के मिलने से क्या स्थितियां सामने आती हैं, इसी पर बनी है यह फिल्‍म. निर्देशक नील माधव पांडा ने अपनी इस फिल्‍म में संजीदगी के साथ हर सीन में बिगड़ते मौसम की भयानकता बिन कहे उकेर दी है. इस फिल्म में ऐसे-ऐसे संवाद हैं, जो आपके रोगंटे खड़े कर देंगे. इस बात में कोई शक नहीं है कि नील माधव पांडा ने अपने समय की एक बेहतरीन फिल्म बनाई है.

BPSC ने निकाली बंपर वैकेंसी, जल्द करें आवेदन

बिहार लोक सेवा आयोग ने ’63वें कंबाइंड (प्री) कंपेटेटिव एग्जामिनेशन’ के तहत भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस नोटिफिकेशन के जरिए परीक्षा के लिए योग्य उम्मीदवारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इच्छुक और योेग्य उम्मीदवार आधिकारिक नोटिफिकेशन से विस्तृत जानकारी लेकर आवेदन कर सकते हैं. संस्थान का नाम बिहार लोक सेवा आयोग पद का नाम 63वें कंबाइंड (प्री) कंपेटेटिव एग्जामिनेशन पदों की संख्या नोटिफिकेशन के मुताबिक कुल पदों की संख्या 355 है. योग्यता उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन की डिग्री ली हो. चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा. जॉब लोकेशन बिहार आवेदन शुल्क आवेदन करने का शुल्क सामान्य वर्ग के लिए 809 रुपये होगा. SC/ST और PWD उम्मीदवारों के लिए 259 रुपये है. वहीं कुछ अन्य वर्गों को भी आवेदन फीस में छूट दी गई है, जिसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में मौजूद है. उम्र सीमा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 22 साल और अधिकतम आयु 37 साल होनी चाहिए. आयु की गणना 01.08.2017 से की जाएगी. पे-स्केल 9,300 से 34,800 रुपये. महत्वपूर्ण तारीख रजिस्ट्रेशन करने और आवेदन फीस जमा करने की आखिरी तारीख 4 दिसंबर, 2017 है. कैसे करें आवेदन उम्मीदवार आवेदन करने के लिए BPSC की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जा सकते हैं. अंतिम तारीख 4 दिसंबर है.

कुछ लिखने से अवैध नहीं होंगे नोट- लेन देन से पहले रखें ध्यान

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जोधपुर। देश में नए जारी पांच सौ व दो हजार रुपए के नोट पर कुछ लिखने से ये नोट अवैध नहीं ठहराए जा सकेंगे. ऐसे नोट स्वीकार करने से बैंक इनकार नहीं कर सकते है. एक आरटीआई के जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) ने स्पष्ट कहा है कि नियमानुसार ऐसे नोट मान्य है. आरबीआई ने साफ कर दिया है कि केवल धार्मिक चिन्ह बने या राजनीतिक बातें लिखे नोट ही बिना वैल्यू के होंगे यानी रद्द हो जाएंगे. इसके अलावा और कुछ लिखे नोट लेने से बैंक इनकार नहीं कर सकते.यह है मामला…

कई बैंकों में इस बात की सूचनाएं चस्पां की गई है कि 2000 व 500 रुपए के नोट पर पेन से कुछ भी लिखा हो तो स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसको लेकर कई बार जमाकर्ताओं और बैंककर्मियों के बीच तकरार होती रहती है. आमजन को परेशानी भी होती है. राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता और आरटीआई सलाहकार रजाक के. हैदर ने भारतीय रिजर्व बैंक में आरटीआई के तहत पूछा था कि 2000 व 500 रुपए के नोट पर पेन-मार्कर से कुछ लिखे जाने अथवा स्टेपल किए जाने के बाद ऐसे नोट जमा किए जाएंगे अथवा नहीं ? आरबीआई के मुख्य लोक सूचना अधिकारी पी. विजय कुमार ने रजाक के. हैदर को भेजे जवाब में कहा है कि, सभी बैंक नोट सहित नए 500 व 2000 के नए नोटों (भारतीय मुद्रा) पर कुछ लिखने से अवैध नहीं होंगे और वह बैंक खाते में जमा करवाए जा सकते हैं.

हैदर ने यह भी पूछा था कि जिन नोट पर धार्मिक और राजनीतिक संदेश चिह्न अंकित होगा, वह स्वीकार्य होगा अथवा नहीं…? इसके जवाब में आरबीआई ने कहा है कि नोट रिफंड रूल के अंतर्गत किसी धार्मिक स्लोगन या चित्र बने नोट व राजनीतिक चिन्ह या स्लोगन लिखे नोट शून्य माने जाएंगे. हैदर ने कहा कि कई बैंकों में इस तरह की सूचनाएं लिखी हुई मिल रही है कि 2000 व 500 रुपए के नोट पर पेन से कुछ भी लिखा हो तो स्वीकार नहीं किए जाएंगे. भारतीय स्टेट बैंक में मुझे भी यह सूचना दिखाई दी थी. इस पर मैंने आरबीआई से आरटीआई लगाई थी, ताकि इस संबंध में नियमों की स्थिति स्पष्ट हो जाए. अब साफ हो गया है कि 500 व 2000 रुपए के नए नोटों पर कुछ लिखने से वह अवैध नहीं होंगे. ऐसे नोट बैंक खाते में जमा करवाए जा सकते हैं. जो बैंक नोट नहीं लेता है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

हार्दिक पटेल की जान को खतरा, मिली Y सुरक्षा

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hardik patel

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को Y श्रेणी की सुरक्षा मिली है. इंटेलिजेंस ब्यूरो ने हार्दिक पटेल पर हमले की आशंका जताई थी. आईबी के इनपुट के बाद केंद्र सरकार ने हार्दिक को Y श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है. इसके तहत हार्दिक की सुरक्षा में 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे, जिनमें 2 निजी सुरक्षा अधिकारी भी शामिल होंगे.

आरक्षण पर कांग्रेस का फार्मूला स्वीकारने के बाद हार्दिक पटेल की जान पर खतरा बढ़ गया है. जिसके कारण ये सुरक्षा दी गई है. हार्दिक ने ऐलान किया था कि हम कांग्रेस को सीधा समर्थन नहीं दे रहे हैं लेकिन हम भाजपा के खिलाफ लड़ेंगे.

गौरतलब है कि CISF देश के 60 वीआईपी की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है. यह सुरक्षा उन लोगों को मुहैया कराई जाती है जिनकी जान को खतरा होता है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और संघ प्रमुख मोहन भागवत को भी Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई है.

सेंट्रल इंटेलीजेंस और सुरक्षा एंजेसियों ने उन लोगों की लिस्ट तैयार की थी जिनकी जान के खतरा है. इस लिस्ट में हार्दिक पटेल का भी नाम शामिल था. इससे पहले हार्दिक पटेल ने सुरक्षा लेने से मना कर दिया था. हार्दिक ने आरोप लगाया था कि सरकार उन्हें सुरक्षा इसलिए देना चाहती है कि वह उनकी जासूसी करा सके.