बिजनेस से लेकर ग्लैमर तक, ट्रंप से कम नहीं है इवांका का रुतबा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप भारत पहुंच गई हैं. यहां वो ग्लोबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट में हिस्सा लेंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. पीएम मोदी इवांका के साथ रात में डिनर के लिए मशहूर फलकनुमा पैलेस जाएंगे. इवांका हैदराबाद में 28 से 30 नवंबर तक रहेंगी. वो करीब शाम 4.45 बजे समिट को संबोधित भी करेंगी. आइए जानते हैं, आखिर कौन हैं इवांका ट्रंप और उनका रुतबा क्या है.

इवांका ट्रंप 36 साल की हैं. वो राष्ट्रपति डोनाल्ड और इवाना ट्रंप की बेटी हैं. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के व्हॉर्टन स्कूल ऑफ बिजनेस से ग्रेजुएट किया है. वो अपने पिता का बिजनेस संभालती हैं. इवांका अब डोनाल्ड ट्रंप की सीनियर एडवाइजर भी हैं. वो ट्रंप ऑर्गनाइजेशन में एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हैं. वो ट्रंप होटल्स की को-फाउंडर भी हैं.

उन्होंने 2009 में जरेद कुशनर से शादी की. उनकी एक बेटी और दो बेटे हैं. इवांका ट्रंप ज्वेलरी कलेक्शन, फैशन स्टोर चलाती हैं. इस स्टोर में जूते, हैंडबैग्स, ज्वेलरी, फ्रेगरेंस जैसे प्रोडक्ट्स बेचे जाते हैं.

गौरतलब है कि इंवाका ट्रंप की हैदराबाद यात्रा के दौरान शहर में भिखारियों पर रोक लगा दी गई है. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि आदेश की अवहेलना करते पकड़े जाने पर दंडित किया जाएगा. इवांका के हैदराबाद दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी की गई है. इवांका की सुरक्षा में करीब 2500 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. हैदराबाद पुलिस ने इवांका समेत 150 देशों के प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए 10 हजार जवान तैनात किए हैं.

बता दें कि इवांका ट्रंप से हर कोई नहीं मिल पाएगा. उनसे मिलने वालों की एक लिस्ट तैयार की गई है. लिस्ट में जिन लोगों के नाम हैं बस वो ही लोग उनसे मिल सकते हैं. इस समिट की थीम ‘सर्वप्रथम महिलाएं, सभी के लिए समृद्धि’ रखा गया है. इसका उद्देश्य महिला उद्यमियों की सहायता करना और वैश्विक आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान करना है.

सौजन्य: आज तक

परेश रावल ने रजवाड़ों को कहा बंदर, मचा बवाल

गुजरात चुनाव में बीजेपी का वोट बैंक बढ़ाने के चक्कर में उनके ही नेता अब पार्टी के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं. दरअसल बीजेपी सांसद और फिल्म अभिनेता परेश रालव ने अपने एक विवादित बयान से पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है. उन्होंने एक सभा के दौरान सरदार पटेल का जिक्र करते हुए राजे रजवाड़े पर टिप्पणी की और कहा कि पटेल ने देश को एक किया था और राजा-रजवाड़े, जो बंदर थे, उनको सीधा किया था. इस विवादित बयान के आने के बाद अब करणी सेना ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बीजेपी परेश रावल के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराती है तो राजपूत समाज की तरफ से बीजेपी के सभी प्रत्याशियों का विरोध किया जाएगा.

हालांकि बीजेपी सांसद ने बाद में अपने बयान के लिए माफी भी मांग ली लेकिन करणी सेना की भौहें अभी भी तनी हुई है. उनका मानना है कि परेश रावल के बयान से उनके समाज की भावनाएं आहत हुई है. लिहाजा उनके खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए जाएं और राजा-रजवाड़ों के वारिसों से वे माफी मांगें. दूसरी तरफ इस बयान पर राजकोट का क्षत्रिय समुदाय भी अपने मयान से तलवार खिंचते नजर आ रहे हैं. क्षत्रिय समुदाय ने सांसद परेश रावल के पुतले जलाने का एलान किया है.

यानि गुजरात के चुनावी अखाड़े में जिस तरह से बीजेपी सांसद के बयान पर हंगामा बरपा है. उससे बीजेपी की खाट खड़ी होती दिखाई दे रही है. बयान के विवाद में फंसे बीजेपी जिनके बलबूते जीत की गारंटी दे रही है. आगे चलकर उनका साथ बीजेपी को मिल ही जाएगा, इसकी ही गारंटी नहीं है.

गुजरात: छात्र परिषद चुनाव में दलित छात्रों ने एबीवीपी को हराया

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गुजरात चुनाव में बीजेपी भले ही जीत का लाख दावा कर ले लेकिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी में हुए छात्र परिषद के चुनाव नतीजे ने बीजेपी दावे की हवा निकाल दी है दरअसल इस चुनाव में एबीवीपी को करारी हार का समना करना पड़ा है और जीत की मलाई खाने वाले ज्यादातर इंडिपेंडेंट छात्र हैं जिनमें दलित छात्रों की संख्या ज्यादा है

नेशनल हेराल्ड की रिपोर्ट की माने तो इस चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने इंडिपेंडेंट कैंडिडेट का ही समर्थन किया था. इसके अलावे बापसा और एलडीएसएफ ने भी एबीवीपी के खिलाफ इंडिपेंडेंट उम्मीदवारों का ही सपोर्ट किया था. वैसे जेएनयू, डीयू और देश की अन्य यूनिवर्सिटी की तरह गुजरात के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का नहीं बल्कि छात्र परिषद का चुनाव होता है. इसमें हर डिपार्टमेंट से दो प्रतिनिधि भेजे जाते हैं. इनमें से एक का चुनाव होता है, जबकि दूसरे को नोमिनेट किया जाता है. इस चुनाव में हुए एबीवीपी की हार का असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ना लाजमी है. ऐसे में पीएम मोदी की अगुवाई में घुम रहे बीजेपी नेताओं की फौज को इतना तो एहसास जरुर हो गया होगा कि इस बार उनकी हवा बनने से पहले ही बिगड़ती दिखाई दे रही है.

संविधान दिवस की बढ़ती लोकप्रियता

संविधान दिवस को सेलिब्रेट करने के लिए मैं अमरावती में था. महाराष्ट्र के विदर्भ में यह नागपुर के बाद दूसरा सबसे बड़ा मुख्यालय है. कार्यक्रम बामसेफ की तरफ से आयोजित किया गया था. संत गाडगेबाबा की प्रतिमा लगे यहां के सांस्कृतिक भवन में तकरीबन हजार लोगों की क्षमता वाला यह हॉल पूरी तरह भरा था. जाहिर सी बात है कि कार्यक्रम शानदार रहा. अमरावती से नागपुर एयरपोर्ट लौटते हुए रास्ते में कम से कम दर्जन भर जगहों पर संविधान दिवस का कार्यक्रम मनते देखा. यह सिर्फ महाराष्ट्र के दो शहरों का जिक्र है. जो लोग भी संविधान दिवस और उसके बाद 27 नवंबर को सोशल मीडिया से गुजरे होंगे, उन्हें यह अंदाजा हो गया होगा कि देश भर में किस धूम के साथ यह कार्यक्रम मनाया गया.

दो साल पहले तक ऐसा नहीं था. कुछ खास जगहों पर ज्यादा जागरूक लोगों के बीच ही ऐसे कार्यक्रम देखे जा सकते थे. लेकिन संविधान दिवस का यह कार्यक्रम अब छोटे कस्बों तक में पहुंच गया है. यह बड़ी बात है. दिल्ली में तो पिछले कुछ सालों से अम्बेडकरवादी इस दिन इंडिया गेट पर एकत्रित होते हैं और पिकनिक मनाते हैं. यहां वो पूरे परिवार के साथ पहुंचते हैं और बाबासाहेब को याद करते हैं. इस विशेष दिन इंडिया गेट पर पहुंचने वाले लोगों का काफिला दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. संभव है कि आने वाले वर्षों में यह दिन भी 14 अप्रैल की तरह देश के हर छोटे-बड़े शहर और कस्बे में मनने लगे.

यह बड़ी बात है, क्योंकि देश संविधान से चलता है और जब देश का बहुसंख्यक समाज संविधान को जानने-समझने लगता है तब यह एक नई शुरुआत जैसी होती है. क्योंकि संविधान जानने वाला व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने लगता हैं और एक जागरूक व्यक्ति देश की राजनीति को बदल सकने तक में सक्षम होता है.

हालांकि संविधान दिवस को एक विशेष वर्ग द्वारा ही सेलिब्रेट किया जाना दूसरे पक्ष पर सवाल खड़ा करता है. देश का संविधान सबका है. यहां रहने वाला हर व्यक्ति उसी संविधान के जरिए संचालित होता है. फिर एक वर्ग संविधान दिवस के सेलिब्रेशन से दूर क्यों है?

आयकर विभाग ने भेजा आम आदमी पार्टी को नोटिस

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) को आयकर विभाग ने कारण बताओ नोटिस भेजा है. आयकर विभाग ने नोटिस में आप पर चंदा नियमों के अनुकूल ना होने का आरोप लगाया है. आयकर विभाग ने आप से पूछा है कि 30.67 करोड़ रुपये आपसे क्यों न वसूले जाएं. आयकर विभाग के नोटिस पर आप ने कहा है कि हमारा चंदा पवित्र है और ये शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय खजांची दीपक बाजपाई ने कहा कि ‘आयकर का ये नोटिस बोगस और आधारहीन है. हमारा चंदा पूरी तरह पारदर्शी है और पहली बार किसी पाटी के चंदे को गैरकानूनी ठहराया गया है’ आयकर विभाग ने 7 दिसंबर को पार्टी से पक्ष रखने को कहा है.

इनकम टैक्स विभाग ने आम आदमी पार्टी पर साल 2014-15 के दौरान चंदे की जानकारी छुपाने का आरोप लगाया है. आयोग द्वारा लगाए गए आरोप-

  • आम आदमी पार्टी ने अपने खाते में 13.16 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी नहीं लिखी.
  •  आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग को दी चंदे की जानकारी में 461 दानदाताओं के नाम और पते की जानकारी नहीं दी है जिन्होंने 6.26 करोड़ रुपये दिए.
  •  जांच के दौरान पता चला कि AAP ने 36.95 करोड़ रुपये के चंदे की जानकारी वेबसाइट पर नहीं दी और पकड़े जाने पर वेबसाइट से सारी डिटेल हटा ली.
  •  AAP ने 29.13 करोड़ रुपये का चंदा चुनाव आयोग को नहीं बताया.
  •  AAP ने हवाला ऑपरेटर से 2 करोड़ रुपये का चंदा लिया.
  •  AAP ने जांच भटकाने की कोशिश की जबकि उनको अपनी सफ़ाई पेश करने के 34 मौके दिए गए.

आपको बता दें कि ये नोटिस साल 2014-15 के दौरान लिए गए चंदे के लिए आया है। इसमें अप्रैल 2014 के दौरान 2 करोड़ रुपये का चंदा भी शामिल है जिसपर काफ़ी लंबे समय से विवाद है. इससे पहले आयकर विभाग ने इस साल मई महीने में भी आप को नोटिस भेजकर पूछा था कि बही खाते में कथित जालसाजी और उसको मिले चंदे पर जानबूझकर कर चुकाने से बचने की कोशिश के लिए उसपर क्यों नहीं मुकदमा चलाना चाहिए. आयकर विभाग ने पार्टी के संयोजक, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तीन अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

तेजप्रताप यादव के बिगड़े बोल, पीएम मोदी को दे डाली धमकी

पटना। उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बेटे की शादी में घुसकर मारने के बयान के बाद पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव के एक बयान ने सोमवार को एक बार फिर बवाल मचा दिया. इस बार तेजप्रताप के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहे. राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद की जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा हटाने से भड़के तेजप्रताप यादव ने कहा कि लालूजी का मर्डर कराने की साजिश रची जा रही है और हमलोग इसका मुहंतोड़ जवाब देंगे और नरेंद्र मोदी का हम खाल उधड़वा लेंगे.

तेजप्रताप का यह बयान आने के बाद पटना का राजनीतिक पारा अचानक से चढ़ गया. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा तेजप्रताप को पागल, दिवालिया घोषित कर पागलखाने या जेल भेजेने की बात कह डाली. चौबे ने कहा कि पीएम को भद्दी गालियां देना असंवैधानिक है. इससे ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष और लालू यादव के छोटे बेटे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी आरोप लगाया कि उनके पिता की हत्या की साजिश रची जा रही है और अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार जिम्मेदार होगी.

उधर, डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने कहा कि केंद्र की सरकार ने क्या आंकलन किया है ये तो मुझे मालूम नहीं है लेकिन शायद उन्हें (लालू प्रसाद) ये लग रहा होगा कि उनका रुतबा कम हो जाएगा. मुझे तो वो डरपोक बताते थे क्या उनकी सारी हेकड़ी इसी सुरक्षा के चलते थी? वैसे भी लालू को किस बात का डर है. उनसे तो बिहार को डर लगता है.

सुशील मोदी ने कहा कि तेजप्रताप की भाषा जनता देख रही है और अभी सत्ता गई है, बाद में विधायकी भी जाएगी. सोनिया गांधी ने भी मोदी जी को मौत का सौदागर कहा था आज देख लीजिए उनका हाल. दूसरी ओर लालू प्रसाद, शरद यादव और जीतन राम मांझी की सुरक्षा कम करने या हटाने पर जदयू ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि केंद्र सरकार सुरक्षा की जरूरत के हिसाब से फैसला लेती है. जरूरत के हिसाब से सुरक्षा श्रेणी घटाया और बढ़ाया जाता है, यह रुटीन काम है. जरूरत पड़ी तो केंद्र फिर सुरक्षा बढ़ा सकती है.

BJP ने पूर्व सीएम आनंदीबेन का टिकट काटा

गुजरात। गुजरात विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर भारी घमासान के बीच बीजेपी ने अपनी छठी और आखिरी लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में 34 उम्मीदवारों का ऐलान किया गया है. इसी के साथ बीजेपी ने गुजरात की सभी 182 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. आज ही नामांकन का आखिरी दिन है. इस लिस्ट में पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल का नाम शामिल नहीं है, उनकी जगह भूपेंद्र पटेल को टिकट दिया गया है. आनंदीबेन पटेल ने पहले ही चुनाव लड़ने से मना किया था.

भारतीय जनता पार्टी की पहली सूची के बाद ही बगावत और खींचतान का जो दौर शुरू हुआ था, वो नामांकन के आखिरी दिन तक जारी है. कांग्रेस भी इस चुनौती का सामना कर रही है. आज दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन है. गुजरात में दो चरणों में ही मतदान होना है, ऐसे में आज सभी 182 सीटों पर उम्मीदवारों के नामांकन हो जाएंगे. इससे पहले 147 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा चुके थे.

फोन पर पर्चा भरने के निर्देश

इससे पहले खबर थी कि पार्टी में बगावत के सुर इतने तेज हो गए थे कि नामांकन के अंतिम दिन तक सारे उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे. कार्यकर्ताओं और नेताओं के सीधे विरोध से बचने के लिए प्रत्याशियों को फोन कर नामांकन भरने के लिए कहा गया.

बता दें कि बीजेपी ने अपनी शुरुआती पांच सूचियों में 147 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी थी. पार्टी ने चार पाटीदारों को टिकट दिए हैं, जिनमें नरणभाई पटेल, रमणभाई पटेल, वल्लभ ककड़िया और पंकज देसाई शामिल हैं.

कई नेताओं ने छोड़ी पार्टी

इससे पहले बीजेपी की पहली लिस्ट आने के बाद खुलकर बगावत सामने आई थी. पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर टिकट कटने का विरोध किया था. यहां तक कि एक मौजूदा सांसद ने अपनी पत्नी को टिकट न मिलने पर उसे निर्दलीय चुनाव लड़ाने की घोषणा कर दी तो पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने बेटे का टिकट कटने के बाद उसे निर्दलीय चुनाव लड़ाने का ऐलान किया था.

कांग्रेस में भी विरोध

कांग्रेस ने रविवार को जैसे ही 76 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की, इसके बाद कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया है. कार्यकर्ताओं ने अहमदाबाद की अमरायवाड़ी सीट से अरविंद सिंह चौहान को टिकट दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया है. नाराज कार्यकर्ताओं ने गांधीनगर स्थित पार्टी दफ्तर के बाहर पुतला जलाया और जमकर तोड़फोड़ की. कांग्रेस की तीसरी लिस्ट में बनासकांठा के 2 विधायक के नाम भी काटे गए हैं, इन दोनों ने ही राज्य सभा चुनाव में अहमद पटेल को वोट दिया था. पहले अहमद पटेल को वोट देने वाले सभी 43 विधायकों को फिर से टिकट देने का भरोसा दिया गया था. इस वजह से भी कार्यकर्ताओं में रोष है.

सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा अवसर, जल्द करें अप्लाई

  West Bengal Health Recruitment Board (WBHRB) ने ‘General Duty Medical Officer’ के पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 1 दिसंबर, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई हैं. संस्थान का नाम पश्चिम बंगाल हेल्थ रिक्रूटमेंट बोर्ड पद का नाम जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर पद की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार डिप्टी मैनेजर के 1520 पदों पर भर्तियां होनी है. योग्यता इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान MBBS की डिग्री ली हो. सैलरी 15, 600 से 42, 000 रुपये. उम्र सीमा इस पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की उम्र 36 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए. चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. अंतिम तिथि 01 दिसंबर 2017 कैसे करें आवेदन आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार West Bengal Health Recruitment Board की आधिकारिक वेबसाइट www.wbhrb.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

युवा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत की बेटियों ने जीते 5 स्वर्ण

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भारत की बेटियों ने अपना वर्चस्व कायम करते हुए एआईबीए युवा महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के अंतिम दिन पांच स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की. भारत के लिए नीतू (48 किग्रा), ज्योति गुलिया (51 किग्रा), साक्षी चौधरी (54 किग्रा), अंकुशिता बोरो (64 किग्रा) और शशि चोपड़ा (57 किग्रा) ने स्वर्ण जीते.

नीतू ने फाइनल में कजाकिस्तान की झाजिरा उराकबायेवा को 5-0 से हराया. दूसरी ओर, ज्योति ने रूस की एकातेरिना मोलचानोवा को इसी अंतर से पराजित कर अपनी टीम को दूसरा स्वर्ण दिलाया. फाइनल में साक्षी ने इंग्लैंड की इवी जेन स्मिथ को कड़े मुकाबले में 3-2 से हराकर पहला स्थान हासिल किया.

शशि ने वियतनाम की नगोक जो होंग को 4-1 से परास्त किया. स्थानीय खिलाड़ी अंकुशिता ने फाइनल में रूस की एकातेरिना डेनिक को 4-1 से हराया. अंकुशिता को टूर्नामेंट का श्रेष्ठ मुक्केबाज चुना गया.

ज्योति ने अगले साल अर्जेंटीना में होने वाली यूथ ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है. भारत को इस चैंपियनशिप में दो रजत भी मिले. भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने पदक जीतने वाली प्रत्येक खिलाड़ी को दो-दो लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है.

सावधान! निजी चैट, व्हाट्सऐप पर है सेबी की निगाह

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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपनी व्हिसलब्लोअर व्यवस्था को मजबूत करने का कदम उठाया है. सेबी ने व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे ऑनलाइन ऐप और प्राइवेट चैट ग्रुप्स आदि के जरिए निवेश के परामर्श और संवेदनशील सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं, ऐसे लोगों का भेद बताने के लिए निवेशकों और बाजार की बिचौलिया इकाइयों में काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने का फैसला किया है.

बाजार को चढ़ाने उतारने में लगे ऐसे व्यक्ति और समूह इंटरनेट पर ऐसी साइटों का इस्तेमाल करते हैं, जिनको गूगल जैसे सामान्यत: इस्तेमाल किए जाने वाले सर्च इंजनों के जरिए मुश्किल से पकड़ा जा सकता है. बता दें कि सेबी ने एसएमएस, व्हाट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्क, खेल और प्रतिस्पर्धा आदि के जरिए निवेश की अनाधिकृत रूप से सलाह देने पर रोक के लिए एक परिचर्चा पत्र पिछले साल जारी किया था, लेकिन अभी इस बारे में कोई पक्का नियम लागू नहीं किया है.

दो प्रमुख एक्सचेंज बीएसई और एनएसई ऐसे सिस्टम हैं जिनमें कोई भी एक टोल-फ्री फोन नंबर, ईमेल या सीधे अपनी वेबसाइट पर टिप-ऑफ सबमिट कर सकता है. गौरतलब है कि डार्क वेब प्लेटफार्मों और कई नए सुरक्षित मैसेजिंग ऐप को ट्रैक करना मुश्किल है क्योंकि नियामक और एक्सचेंज किसी भी छेड़छाड़ की गतिविधियों की जांच के लिए अपने निगरानी प्रणाली पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

शूटआउट से हफ्ते में दूसरी बार दहली दिल्ली

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नई दिल्ली। एक सप्ताह के भीतर दूसरे एन्काउंटर से देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर दहल गई. दक्षिणी दिल्ली में मूलचंद फ्लाईओवर के पास रविवार रात दिल्ली पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई है. दोनों तरफ से गोलीबारी के बाद पुलिस ने एक इनामी बदमाश को धर दबोचा है. रविवार रात ये मुठभेड़ उस वक्त हुई जब पुलिस को एक शख्स संदिग्ध हालात में दिखा. वह बाइक पर था.

पुलिस ने जब उसे रुकने को बोला तो उसने बाइक की रफ्तार बढ़ा दी. इसके बाद उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी उस पर फायरिंग की. घायल होने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पुलिस गिरफ्त में आए ईनामी बदमाश का नाम अब्दुल मुन्नार है. इसे सुपारी किलर बताया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो अब्दुल मुन्नार पर पिछले कुछ दिनों से दिल्ली पुलिस की नजर थी. अब्दुल मुन्नार उर्फ खिलाफ नाम के इस सुपारी किलर के पास से पुलिस ने एक पिस्टल और 3 कारतूस बरामद किए हैं.

जानकारी के मुताबिक, पुलिस को रविवार रात अब्दलु मुन्नार के दिल्ली के मूलचन्द इलाके में होने की जानकारी मिली थी. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछा दिया. वहीं, शातिर अब्दुल ने अपने साथी के साथ मोटर साइकिल पर सवार होकर भागने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, पीछा करने के दौरान बाइक पर सवार बदमाशों ने बैरिकेट के पास पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद मुठभेड़ में अब्दुल को धर दबोचा. पुलिस का दावा है कि मुठभेड़ के दौरान सुपारी किलर ने पुलिस पर फायरिंग करने की भी कोशिश की थी.

अब्दुल मुन्नार उर्फ खलीफा नाम के इस सुपारी किलर पर करीब दो दर्जन मुकदमे दर्ज हैं. यूपी पुलिस ने इसके सिर पर 12 हजार रुपये का इनाम भी रखा हुआ था. पुलिस के मुताबिक, अब्दुल मुन्नार उर्फ खलीफा लखनऊ के जयेश हत्याकांड का मुख्यारोपी है. एक विधायक के भांजे जयेश को मारने की सुपारी मुन्नार ने ही ली थी. इसके अलावा अब्दुल मुन्नार उर्फ खलीफा हरियाणा कैडर के एक आईएएस संजीव कुमार को मारने के सुपारी भी ले चुका था.

बताया जा रहा है कि अब्दुल ने कुछ दिन पहले ही ओखला मंडी में एक शख्स पर उसकी पत्नी से सुपारी लेकर गोली चलाई थी. मुन्नार ने उस शख्स के सिर्फ पैर पर गोली मारी थी, इसके पीछे वजह सुपारी के लिए सिर्फ आधी पेमेंट मिलना था. इससे पहले पिछले सप्ताह द्वारका मोड़ के पास मंगलवार को एक शूटआउट हुआ था. द्वारका मोड़ मेट्रो पिलर 768 के पास हुए इस शूट आउट में दिल्ली और पंजाब पुलिस शामिल थी. पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनसे 12 पिस्टल और 100 गोलियां बरामद की गई थीं.

पाकिस्तान के कानून मंत्री ने दिया इस्तीफा

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इस्लामाबाद। इस्लामिक कट्टरपंथियों के विरोध प्रदर्शनों के दबाव में आकर पाकिस्तान के कानून मंत्री जाहिद हामिद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक कट्टरपंथियों की ओर से लगातार कई दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के दबाव में जाहिद ने रविवार देर रात इस्तीफा दिया. कट्टरपंथी संगठन जाहिद पर ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा रहे थे. इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने 11 दिन से जारी अपने आंदोलन को समाप्त कर दिया. इससे पहले पाकिस्तानी सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि जाहिद इस्तीफा देते हैं तो आंदोलन वापस ले लिया जाएगा.

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे इस्लामिक समूह तहरीक-ए-लबैक के प्रवक्ता एजाज अशरफी ने कहा, ‘हमारी मुख्य मांग को स्वीकार कर लिया गया है.’ एजाज ने कहा कि सरकार कानून मंत्री के इस्तीफे का ऐलान करेगी और उसे बाद अपने आंदोलन को वापस ले लेंगे. पाकिस्तान में संवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोगों की शपथ में बदलाव के जाहिद के प्रस्ताव के विरोध में कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए थे. राजधानी इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन करते हुए इन लोगों का कहना था कि शपथ में बदलाव किया जाना ईशनिंदा के जैसा है.

सरकार के मुताबिक यह गलती मौलवी की खामी के चलते हुई थी, जिसे कट्टरपंथी मुस्लिमों के विरोध के बाद वापस ले लिया गया था. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक हामिद ने कहा कि मैं अपनी इच्छा से पद से इस्तीफा दे रहा हूं. गौरतलब है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन किए थे. इस पर सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की थी, जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे और करीब 6 लोगों की मौत हो गई थी.

तहरीक-ए-खत्म-ए-नबूवत, तहरीक-ए-लबैक या रसूल अल्लाह (टीएलवाईआर) और सुन्नी तहरीक पाकिस्तान (एसटी) के करीब 2,000 कार्यकर्ताओं ने दो सप्ताह से अधिक समय से इस्लामाबाद एक्सप्रेसवे और मुरी की घेराबंदी कर रखी थी. यह सड़क इस्लामाबाद को इसके एकमात्र हवाईअड्डे और सेना के गढ़ रावलपिंडी को जोड़ती है.

जिग्नेश मेवाणी ने की निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा

गुजरात। जिग्नेश मेवाणी चुनाव गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. सोमवार को उन्होंने सोशल साइट पर यह घोषणा कर दी. मेवाणी ने घोषणा की है कि वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गुजरात के बनासकांठा जिले की वडगांव-11 सीट से चुनाव लड़ेंगे. जिग्नेश ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा, ‘निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वह वड़गांव 11 चुनावक्षेत्र से गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. आज 12 बजे वडगांव पर्चा भरने जाएंगे. भाजपा को शत्रु बताते हुए मेवाणी ने अन्य राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि वो उनके खिलाफ प्रत्याशी खड़ा न करें. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशियों से भी यही अपील की है. बकौल मेवाणी, “लड़ाई सीधी हमारे और भाजपा के बीच में होने दें. पिछले 22 साल से गुजरात में जो तानाशाही चल रही है, उसके सामने ऊना से लेकर अब तक हमने जो संघर्ष किया है , जो माहौल बनाया है, उससे न केवल गुजरात लेकिन पूरे देश की जनता वाकिफ है.”जिग्नेश ने कहा है कि वो जिन मुद्दों को लेकर संघर्ष करते आए हैं, उन्हीं मुद्दों की बात करने के लिए और इसी आवाज़ को बुलंद करते हुए गुजरात विधानसभा में भी जाएंगे. जिग्नेश की इस घोषणा के बाद राजनीति और गरमा गई है.

इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर फूटा ज्वालामुखी, उड़ान बाधित

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देनपसार (इंडोनेशिया)। पर्यटन के लिए मशहूर इंडोनेशिया के बाली द्वीप के माउंट अगुंग ज्वालामुखी में लगातार विस्फोट हो रहा है. इससे राख और धुएं का गुबार करीब छह हजार मीटर ऊपर तक उठ रहा है. ज्वालामुखी के आसपास वाले स्थान राख व धुएं से भर गए हैं. भवनों, सड़कों और कारों पर राख की मोटी परत जम गई है. दर्जनों उड़ानें रद कर दी गई हैं. बाली पहुंचे हजारों यात्री फंसे हुए हैं. इनमें अधिकतर ऑस्ट्रेलिया के हैं. इंडोनेशियाई सरकार ने ज्वालामुखी विस्फोट को देखते हुए सभी हवाई उड़ानों के लिए लाल चेतावनी जारी कर रखी है. इंडोनेशिया में आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में ज्वालामुखी में और भयंकर विस्फोट हो सकता है. माउंट अगुंग ज्वालामुखी पिछली बार 1963 में फटा था जिसमें करीब 1600 लोग मारे गए थे. हाल ही में ज्वालामुखी की सक्रियता के चलते उसके दायरे में आने वाले 7.5 किलोमीटर के रिहाइशी इलाके को प्रशासन ने पहले ही खाली करा लिया है. समुद्री तटों व मंदिरों के लिए प्रसिद्ध बाली में हर साल लगभग 50 लाख पर्यटक आते हैं. माउंट अगुंग ज्वालामुखी के सितंबर महीने से ही सक्रिय रहने के कारण पर्यटकों की तादाद काफी घट गई है.

पद्मवाती और खिल्जी से जुड़े सवाल

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पद्मावती फिल्म पर बहस अभी भी मुर्खता के दायरे में घूम रही है.

पहली बात की खिल्जी मुगल नहीं था.

दूसरी, कोई बेवकूफ ही कह सकता है कि ‘अगर राजपूत न होते तो भारत मुगलिस्तान होता’. मुगलों के पहले और मुगलों के बाद, भारत में जो भी मुस्लिम शासक आये, राजपूतों, जाटों, खत्त्रियों, ब्राह्माणो, यादव, कुर्मी, दलित सब के साथ मिलकर काम किया. हर मुस्लिम शासक के साथ, हमेशा हिन्दू खड़ा रहा है. खिल्जी प्रगतिशील शासक था. इतिहास में रानी पद्मिनी जैसा कोई पात्र है ही नही. जायसी की लिखी ‘पद्मावत’ सहित्य है इतिहास नही. पर उस साहित्यिक कृति में भी खिल्जी को क्रूर बादशाह नही दिखाया गया है. भंसाली की फिल्म इतिहास और सहित्य दोनो का विकृत रूप पेश करती है.

तीसरी, 1857 की लड़ाई में राजस्थान के बड़े राजपूत घरानो ने अन्ग्रेज़ों का साथ दिया. कई मुस्लिम और अन्य बिरादरियों के बड़े शासकों ने अन्ग्रेज़ों का साथ दिया. पर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश के कई छोटे-बड़े राजपूत ज़मिन्दार और किसान, जाटों तथा अन्य किसान बिरादरियों की तरह अन्ग्रेज़ों से लड़ते हुए शहीद हुए.

ऐतिहासिक तथ्यों एवं मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित महाकाव्य ‘पद्मावती’ के अध्ययन से ज्ञात होता है कि 14वीं सदी के दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी और ‘राजपूत सम्मान’ के प्रश्न पर कोई टकराव जैसी स्थिति नहीं रही है. महान सूफी कलमकार, इतिहासकार, भारतीय संगीत एवं खड़ी बोली के पितामाह अमीर खुसरो खिलजी के साथ चित्तौड़ अभियान में शामिल थे. अपनी फारसी भाषा में लिखी किताब ‘खज़ई-उल-फ़ुतूह’ में खुसरो अलाउद्दीन खिलजी के सैनिक अभियानों, प्रशासनिक कार्यों और जन-संसाधनों के क्षेत्र में किए गए उसके कामों का उल्लेख करते हैं. खुसरो के हिसाब से 1303 ईस्वी में चित्तौड़ के राजा ने खिलजी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था और खिलजी ने उसे माफ भी कर दिया था. खुसरो के तकरीबन 50 सालों बाद, इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी भी इन्ही तथ्यों की पुष्टि करते हैं.

बीसवीं सदी के इतिहासकार और उनकी पुस्तकें जैसे श्री किशोरी लाल सरन (‘खिलजियों का इतिहास’), इरफान हबीब (‘Northern India under the Sultanate’), बनारसी प्रसाद सक्सेना (‘The Delhi Sultanate’), भी खुसरो और बरनी द्वारा लिखे गये तथ्यों की पुष्टि करतें हैं. आश्चर्य की बात यह है की अलाउद्दीन खिलजी से जुड़ा ‘जौहर’ वाला प्रसंग दिल्ली सम्राट के रणथंभौर हमले के समय सामने आता है. रणथंभौर पर खिलजी ने हमला 1301 में किया था. चित्तौड़ की चढ़ाई 1303 में की गयी.

मंगोल आतताइयों से भारत को बचाने में खिलजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. बगदाद से लेकर यूरोप, रूस और चीन तक खूंखार मंगोलों ने लगभग पूरी दुनिया में कोहराम मचा कर कब्जा कर लिया था. बलबन दिल्ली का पहला बादशाह था जिसने मंगोलों को शिकस्त दी. उसके बाद खिलजी ने मंगोलों को परास्त कर उनके अजेय होने का मिथक तोड़ा.

खिल्जी ने एक के बाद एक लड़ाइयों में मंगोलों को हरा कर उनकी कमर तोड़ दी. जरन-मनजूर (1297-1298), सिविस्तान (1298), कीली (1299), दिल्ली (1303), अमरोहा (1305) के युद्धों में मंगोलों को मुंह की खानी पड़ी. 1306 ईस्वी में खिलजी की फौजों ने रावी नदी के तट पर मंगोलों पर निर्णायक जीत हासिल की. उसके बाद, खिलजी के सेनपतियों ने मंगोलों को अफगानिस्तान तक खदेड़ा. रणथंभौर की लड़ाई और घेरेबन्दी लम्बी चली. खून की नदियां बह निकलीं. राजा हम्मीरा का क़िला अभेद्य माना जाता था. खिलजी अपने युध्द कौशल और तकनीक की वजह से जीता. उसके पास बड़ी-बड़ी चट्टान नुमा मिसाइल फेंकने वाली मशीनें थीं. क़िले के चारों तरफ फैली खाई को खिलजी बुने हुए बोरों से भरने में कामयाब रहा. रणथंभौर की लड़ाई और घेरेबन्दी लम्बी चली. खून की नदियां बह निकलीं. राजा हम्मीरा का क़िला अभेद्य माना जाता था. खिलजी अपने युध्द कौशल और तकनीक की वजह से जीता. उसके पास बड़ी-बड़ी चट्टान नुमा मिसाइल फेंकने वाली मशीनें थीं. क़िले के चारों तरफ फैली खाई को खिलजी बुने हुए बोरों से भरने में कामयाब रहा.

दूसरी तरफ, राजपूत द्वारा रचित ‘हम्मीरा महाकाव्य’ इस बात की पुष्टि करते हैं कि हम्मीरा का सगा भाई भोज, उसका प्रमुख सेनापति रीतिपाल, खिलजी से जा कर मिल गये थे. सर्जन शाह नाम के एक बौद्ध व्यापारी का जिक्र आता है. हम्मीरा से खुन्नस के कारण, सर्जन शाह ने रणथंभौर क़िले के अन्दर खाने-पीने की सामग्री में ज़हर मिला दिया था. तो राजपूतों के पक्ष में मुस्लिम मंगोल लड़े और खिलजी के पक्ष में भोज, रितिपाल जैसे कई हिन्दू राजपूत. खिलजी का रणथंभौर और फिर चित्तौड़ पर हमला एक बड़े राजनीतिक अभियान का हिस्सा था. इस प्रक्रिया में दिल्ली के सुल्तान ने गुजरात (1304), रणथंभौर (1301), चित्तौड़ (1303), मालवा (1305), सिवाना (1308) और जालौर (1311) पर आधिपत्य जमाया.

मलिक मुहम्मद जायसी भक्ति-सूफी आन्दोलन के प्रमुख कवि थे. उनका परिवार रायबरेली, अवध के जैस क़स्बे में बसा था. 1540 ईस्वी के आस -पास जायसी ने अवधी भाषा में पद्मावत की रचना की. अनारकली और जोधा बाई की तरह, रानी पद्मिनी भी साहित्यक पात्र है. साहित्य के रूप में, जायसी की पद्मावत, तथ्य, कहानी, कल्पना का मिश्रण है. पद्मावती एक रोचक, भावनात्मक एवं प्रेम के प्रति समर्पण का अलग संसार पैदा करती है. इस संसार में प्रेम प्राथमिक है. हवस, लोलुपता, महत्वाकांक्षा अन्ततः मायाजाल का हिस्सा है. जायसी ने रणथंभौर और चित्तौड़ की अलग-अलग घटनाओं से श्रीलंका की रानी पद्मिनी के बारे में प्रचलित किन्वन्दितियों का मिश्रण कर दिया.

जायसी के महाकाव्य में खिलजी माया का प्रतिरूप है. राणा रतन सेन ‘मस्तिक्ष’ और रानी पद्मिनी हुस्न के अलावा ‘बुद्धि’ का प्रतीक हैं. जायसी लिखते हैं: राघव दूत सोई सैतानू . माया अलाउदीन सुलतानू .. प्रेम-कथा एहि भाँति बिचारहु. बूझि लेहु जौ बूझै पारहु. जायसी के संसार में माया या मस्तिष्क भी केवल बिम्ब हैं. असल में पद्मावती काव्य में जायसी दुनिया की निरन्तर बदलती हुई स्तिथियों, जहां किसी चीज़ में कोई ठहराव नहीं है, धन, वैभव, रूप, श्रृंगार, आते और जाते हैं, पर अपना सहित्यिक मत पेश करते हैं. कैसे माया और प्रेम में टकराव होता है; कैसे प्रेम सच है; पर कामना भ्रम पैदा करती है. कामना प्रेम का वस्तुकरण करती है. कामना प्रेम को आत्मगत विषय के रूप में देखने के बजाय उसे एक वस्तु बना देती है. कामना प्रेम को अपने विपरीत में बदल देती है. एक वस्तु के रूप प्रेम हाड़-मांस की चीज़ बन जाता है-एक ऐसी चीज़ जिसको सिर्फ ‘हासिल’ किया जा सकता है, ‘पाया’ नहीं जा सकता. इस प्रक्रिया में प्रेम का मानवीय पक्ष क़ुर्बान हो जाता है.

पद्मावती, क्षात्रधर्म और सामंतवाद

पद्मावती में जायसी अलाउद्दीन खिलजी को आक्रान्ता के रूप में प्रस्तुत नहीं करते. खिलजी एक आम इन्सान है, जो अपनी कामनाओं का दास है; और जो ‘भाग्य’ या प्रकृति या प्रेम जैसी भावना के नियमों से वाकिफ नहीं है. वो इस बात से भी वाकिफ नहीं है कि पद्मिनी का वस्तुकरण कैसे पद्मिनी को हक़ीक़त में उससे दूर ले जाता है! क्योंकि वस्तुकरण किसी भी आत्मगत विषय को ‘सम्पत्ति’ में तब्दील कर देता है!

खिलजी का रतन सेन से युध्द ही नहीं हुआ

फिल्म के विपरीत, जायसी की पद्मावती में खिलजी और पद्मिनी के पति रतन सेन में कभी युध्द होता ही नहीं है. खिलजी की कामना रानी पद्मिनी का वस्तुकरण करती है. इस वस्तुकरण की वजह से पद्मिनी एक ‘सामन्ती सम्पत्ति’ में तब्दील हो जाती है. सामन्ती सम्पत्ति के रूप में, पद्मिनी को कोई भी प्राप्त करने की कोशिश कर सकता है. जायसी इस बात को दिखाते हैं कि कैसे रतन सेन की मौत, खिलजी की तलवार से नहीं, बल्कि कुम्भल्नेर के हिन्दू राजा देवपाल से मल्ल युध्द के दौरान हुई.

यूरोपीय सहित्य में सामंती-मध्ययुगीन दौर के उत्तरार्ध में वीरता की एक नई धारा उभरी. यूरोपीय कवियों और वीर रस के लोक-गीतों में भी अचानक प्रेम के पहलू उभरने लगे. वीरों की प्रेम कथायें सामने आयीं. सामन्ती-मध्ययुग का उतरार्ध प्रगतिशील-पूंजीवाद के नये बीजों के फूटने का समय था. उस समय के सहित्य में chivarlous love poetry यानी वीरों की प्रेम कथायें समान्तवाद विरोधी मानी गयीं. क्योंकि इनमें नारी, ‘हासिल करने वाली सामन्ती सम्पत्ति’ नही रह गयी. बल्कि प्रेम का पात्र बनी. पहली बार, नारी की अपनी व्यक्त्तिगत पहचान, एक प्रेमिका के रूप में ही सही बनी.

जायसी ने पद्मावती 16वीं शताब्दी में लिखी. जब भारत में भी प्रोटो-स्वस्थ पूंजीवादी पृवृत्तियां दाखिल हो कर सामन्ती ढांचे और संस्कृति से टकरा रही थीं. जायसी के समय शेरशाह सूरी दिल्ली का बादशाह था. एक दशक बाद अकबर का दिल्ली पर कब्ज़ा हुआ. शेरशाह सूरी और अकबर दोनों ने, अलग-अलग राजघराने के होते हुए भी, भारत को छोटे-छोटे राज्यों में बिखरे हुए सामन्ती समाज को बदल कर रख दिया.

राम चरित मानस की भूमिका

तुलसीदास भी 16वीं सदी के भक्ति-रस के कवि थे. उन्होंने भगवान राम की लीलायें संस्कृत के बजाय अवधी भाषा में लिख कर, भगवान को भक्ति, प्रेम और मानवीय आस्था का प्रतीक बनाया. सामन्ती प्रलापों में जकड़े काशी के पण्डित इसीलिए तुलसीदास से नफरत करते थे. बाद में 17वीं शताब्दी में, रीतिकाल के दौरान, कविता पूरी तरह सामंतवाद से परे, मानवीय, एन्द्रियवादी रंग में ढल गयी.

भरतीय इतिहास में 14वीं सदी

यूरोप की तरह, भारत में भी, 14वीं सदी से बदलाव आने शुरू हो गये थे. 1296-1316 का अलाउद्दीन खिलजी का काल अभूतपूर्व था. इलाहबाद के पास कड़ा-मानिकपुर से लेकर पंजाब में दीपलपुर तक, खिलजी ने सिंचाई और सड़क इत्यादि बनवायी. शेरशाह सूरी और अकबर से पहले, खिलजी ने बिखरे सामन्ती सैन्य बल के स्थान पर, एकीकृत सेना की नींव रखी. खिलजी ने ज़मीन का व्यापक सर्वेक्षण करवाया और राज्य का सीधे किसान से सम्बन्ध बनाने की कोशिश की.

कैम्ब्रिज इकोनॉमिक हिस्ट्री आफ इण्डिया के अनुसार, “अलाउद्दीन खिलजी की कर प्रणाली सबसे लम्बे समय तक, एक संस्था के रूप में जीवित रही. बीसवीं सदी तक भी. खिलजी ने ही तय किया था ज़मीन का कर ही किसानों से लिया जाये. बाकी सारे कर, जिनकी उत्पादकता से कोई लेना-देना नहीं है, और जो सामंत जबरन वसूलते हैं, फिजूल हैं.

खिलजी के सुधार कार्य और उसकी ‘हिन्दू-परस्ती’

खिलजी ने मंडियां बनवाईं, चीज़ों के दाम तय किए और गांव-शहर के बीच आदान-प्रदान की प्रक्रिया को तेज किया. अकबर के दो सौ साल पहले, खिलजी ने हिन्दू रानियों से शादी करने की परम्परा की नींव डाली. इस क्रम में खिलजी ने गुजरात के वाघेलों की राजकुमारी कमलदेवी और देवगिरी के राजघराने की राजकुमारी झाट्यपाली से शादी रचाई. इन रानियों को इस्लाम नहीं क़ुबूल करवाया गया. उस समय के इतिहासकारों ने इन शादियों को ‘राजनीतिक गठबंधनों’ की संज्ञा दी. पहले-पहल, खिलजी ने विरोधियों के मन्दिर और मस्जिद तुड़वाए. फिर, हिन्दू राजाओं के साथ मेल हुआ और समझौते के बिंदु निकाले गये. खिलजी ने कई मन्दिर बनवाये. 1305 में लिखे दस्तावेज़ में अमीर खुसरो लिखते हैं की खिलजी ने हिन्दू ज़मींदारों के प्रति इतनी नरमी बरती जितनी उन लोगों को भी उम्मीद नहीं थी. कुछ मुस्लिम अतिवादियों ने बादशाह के इस सौहार्दपूर्ण रूप की आलोचना की.

अलाउद्दीन खिलजी एक नया मज़हब शुरू करना चाहता था

अकबर पहला बादशाह नहीं था जिसने ‘दीन-ए-इलाही’ के बारे में सोचा. हिन्दुस्तान की धरती पर खिलजी को सबसे पहले लगा की एक नया मज़हब जो सारे विभेद मिटा दे, शुरू करना चाहिये. 14वीं सदी के अन्य मुस्लिम लेखक और उलेमा जैसे ज़ियाउद्दीन बरनी खिलजी पर कटाक्ष करते हुए लिखते हैं कि, “खिलजी को इस्लाम में आस्था उतनी ही थी जितनी एक अनपढ़-जाहिल को होती है”. बरनी खुद ही खिलजी के नये मज़हब बनाने के प्रयासों की आलोचना करता है. बरनी खिलजी पर ‘हिन्दू-परस्त’ होने का भी आरोप लगाता है. यह महत्वपूर्ण है कि 1316 में खिलजी कि मौत के बाद, उसकी हिन्दू रानी से पैदा हुई औलाद क़ुतुबुद्दीन शाह को सबसे पहले उसके अज़ीज़ सेना नायक मलिक कफूर ने गद्दी पर बैठाया.

जायसी के बाद पद्मावती के कम से कम दो और रूप सामने आये. पर कहानी में निर्णायक मोड़ ब्रिटिश लेखक जेंम्स टॉड ने अपनी मशहूर पुस्तक Annals and Antiquities of Rajasthan ने दिया. टॉड ही था जिसने पद्मावती से प्रेम प्रसंग गायब करके, पूरी दास्तान को एक वहशी मुस्लिम राजा के हवस के रूप में पेश किया. टॉड उस समय राजपूतों के इतिहास की अलग श्रृंखला बना रहा था. जिसके तहत राजपूतों का मुसलमानों से और अन्य हिन्दू जातियों से सम्बन्धों को दूर ले जाया गया. राजपूतों को कृषक समाज से अलग कर, एक शुद्ध लड़ाकू क़ौम के बतौर पेश किया जा रहा था. इसके पीछे राजस्थान के वो घराने थे जो अंग्रेजों की स्वामी भक्ति में लगे थे.

उपनिवेशवाद, फासीवाद और भंसाली की पद्मावती

फासीवाद आधुनिक समाज पर सामन्ती मूल्य थोपता है. फासीवाद की ज़मीन उपनिवेशवाद तैयार करता है. सबसे पहले अंग्रेजों ने मुगलों के समय से विकसित हो रहे आन्तरिक पूंजीवाद की भ्रूण हत्या की, उद्योग नष्ट किये. और मुगल-राजपूत-मराठा-अवध काल में पनप रही देसी आधुनिकता एवं प्रारम्भिक पूंजीवाद का गला घोंट दिया. बंगाल से लेकर पूरे भारत में समान्त्वाद को पुन: स्थापित किया. भंसाली की पद्मावती खिलजी को वैसे ही पेश करती है, जैसे जेम्स टॉड ने किया. एक बर्बर, मुस्लिम आक्रांता के रूप में. और यही आरएसएस भी चाहता है. ऐसे में भंसाली संघ का ही काम कर रहे हैं.

पद्मावती फिल्म के माध्यम से संघी राजपूतों को उकसा रहें हैं

बीजेपी गुजरात में बुरी तरह हार रही है. गुजरात में संघ परिवार की हार, लोकतन्त्र के माध्यम से सत्ता हासिल करने की उसकी कोशिश की हार है. अब इसके बाद संघ सत्ता हथियाने का गैर-लोकतान्त्रिक तरीका अपनाएगा. राजस्थान के बड़े राजपूत घराने कहतें हैं की अंग्रेज तो भारत उनको दे कर 1947 में गये थे. ये तो नेहरू बीच में लोकतन्त्र ले आया और सारा खेल खराब कर दिया. अब राजस्थान के बड़े राजपूत घराने करणी सेना का समर्थन कर रहे हैं. उसे फंडिंग कर रहे हैं. संघ तो पहले से ही माहौल को खराब करने की फिराक में था. और अब बड़े राजपूत घराने और संघ के हित फिलहाल मिल गये हैं. लेकिन राजस्थान के बाहर आम राजपूत इस आन्दोलन का समर्थन नहीं कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य-प्रदेश के राजपूत राजस्थान के बड़े राजघरानों को गद्दार मानते हैं. 1857 की पहली जंग-ए-अज़ादी में कुछ अपवादों को छोड़, राजस्थान के सभी राज घरानों ने अंग्रेजों का साथ दिया था.

भंसाली की पद्मावती राजपूत घरानों और आरएसएस को एक अस्थायी गठ बंधन में बांधती है. जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज़ डेट नज़दीक आयेगी, हिंसा को बढ़ावा दिया जायेगा. भाजपा राज सत्ता का एक हिस्सा भंसाली का समर्थन देगा. दूसरा हिस्सा करणी सेना का समर्थन करेगा. गुजरात में क्षत्रियों का एक बड़ा समूह है जो ओबीसी श्रेणी में आता है. इन गुजराती क्षत्रियों में अपनी जाति को लेकर ‘हीन भावना’ है. अभी तक यह तबका कांग्रेस की तरफ झुका था. फिल्म पद्मावती पर उन्माद इस हिस्से को भाजपा के पक्ष में गोलबंद कर सकता है. उत्तर प्रदेश में भी नगर निकाय के चुनाव हैं. भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है. यहां योगी खुद ठाकुर हैं. वो भी चाह रहे हैं की फिल्म को लेकर बवाल हो. और उत्तर प्रदेश का ठाकुर-राजपूत भाजपा के पक्ष में गोलबंद हो. मुस्लिम बारावफात त्योहार भी 1 दिसंबर के आस-पास पड़ रहा है. ऐसे में बड़े दंगे भी हो सकते हैं. कम से कम आरएसएस तो कुछ इसी तरह से सोच रहा है.

– अमरेश मिश्रा, इतिहासकार, लखन

केंद्र सरकार ने लालू और शरद की सिक्‍युरिटी घटाई

पटना। केंद्र सरकार ने राजद अध्यक्ष लालू यादव व राज्यसभा सांसद शरद यादव की सुरक्षा में कटौती कर दी है, लालू यादव को मिली जेड प्लस सुरक्षा को कम करते हुए जेड श्रेणी कर दी गई है. इसके तहत एनएसजी की 30 सदस्यीय टीम के सिक्योरिटी कवर को हटाते हुए सीआरपीएफ (करीब डेढ़ दर्जन जवान व अफसर) की सुरक्षा दी गई है. वहीं दूसरी ओर शरद यादव को मिली जेड श्रेणी की सुरक्षा को कम करते हुए ‘वाई प्लस’ कैटेगरी की सिक्योरिटी दी गई है.

गृह मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद अब राज्य के किसी वीआईपी को जेड प्लस का सिक्योरिटी कवर नहीं मिलेगा. अब 16 की जगह 15 वीआईपी के साथ ही एक्स, वाई से लेकर जेड श्रेणी तक का सुरक्षा घेरा रहेगा. इनमें सबसे अधिक वाई प्लस श्रेणी के तहत 8 वीआईपी को सीआरपीएफ के सिक्योरिटी कवर दिए गए हैं. गृह मंत्रालय के स्तर पर समीक्षा के बाद बिहार समेत देश के 8 वीआईपी की सुरक्षा में कटौती की गई है. 4 वीआईपी की जेड श्रेणी की सुरक्षा को वाई श्रेणी कर दी गई है. इनमें दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी व जामा मस्जिद के शाही इमाम शामिल हैं.

किसे कैसी सुरक्षा

जेड श्रेणी (05) : लालू प्रसाद, रामविलास पासवान, राधामोहन सिंह, राजीव प्रताप रूडी व शाहनवाज हुसैन. वाई प्लस (08): पप्पू यादव, चिराग पासवान, शरद यादव, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल व अन्य. एक्स श्रेणी (02) : सांसद वीणा देवी व उदय सिंह.