वरुण धवन को मुंबई पुलिस ने दे डाली वार्निंग

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मुंबई। फिल्म सितारों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, न सिर्फ अपने फैन्स के प्रति बल्कि समाज के प्रति भी. फैन्स की किसी भी डिमांड को पूरा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि सुरक्षा सबसे पहले है. ऐसा ही कुछ ‘जुड़वां-2’ स्टार वरुण धवन के साथ भी हुआ.

वे ट्रैफिक सिग्नल पर अपनी फैन की रिक्वेस्ट पर इतना भावुक हो गए कि ऑटो में बैठी इस फैन के साथ सेल्फी खींचने लगे. वे खुद कार में बैठे थे. लेकिन उनके इस कारनामे को मुंबई पुलिस ने देख लिया और वरुण धवन को इसका खामियाजा चालान के तौर पर भुगतना पड़ा. चालान के साथ ही पुलिस ने उन्हें भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी है. यही नहीं, मुंबई पुलिस ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर दी है.

मुंबई पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक अखबार के स्नैपशॉट्स साझा किए गए हैं, जिसमें वरुण सड़क पर सेल्फी स्टंट करते नजर आ रहे हैं. इसमें अभिनेता कार की खिड़की से बाहर थोड़ा बाहर निकलकर ऑटो रिक्शा पर सवार अपनी एक महिला प्रशंसक के साथ सेल्फी लेते दिख रहे हैं.

ज्यादा पेंशन देने से ईपीएफओ ने किया इंकार

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कहा है कि वो छूट वाली कंपनियों के कर्मचारियों को पूरी सैलरी पर पेंशन नहीं दे सकेगा. हालांकि ऐसा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट में एक साल पहले चार अक्टूबर को दिया था. इस मामले पर ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की आज होने वाली बैठक में हंगामा होने के आसार हैं. ईपीएफओ ऐसी कंपनियों को छूट वाली कैटेगिरी में रखता है, जिनके कर्मचारियों के फंड को प्राइवेट ट्रस्ट मैनेज करता है. वो कंपनियां जिनके ट्रस्ट को ईपीएफओ मैनेज करता है उन्हें बगैर छूट वाली कंपनी कहा जाता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद ईपीएफओ ने सभी कंपनियों के कर्मचारियों को पूरी सैलरी पर पेंशन देने लगा था, लेकिन बाद में इस फैसले से पलट गया है. अभी ईपीएफओ पेंशन स्कीम सभी कर्मचारियों की सैलरी का 8.33 फीसदी अंश पेंशन में जमा करता है. इसके लिए अधिकतम सैलरी की सीमा 15 हजार रुपये है और पेंशन भी इसी सैलरी पर दी जाती है. इससे पहले अधिकतम सैलरी 6500 रुपये थी. अगर पूरी सैलरी के हिसाब से सैलरी का अंश लिया जाता है, तो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त 10 गुना ज्यादा पेंशन मिलने की संभावना है. फिलहाल ईपीएफओ ने पूरे वेतन पर योगदान स्वीकार नहीं करने की बात कही है. इसके पीछे ईपीएफओ ने दलील दी है कि कंपनी और कर्मचारियों को तय सीमा से ज्यादा वेतन पर योगदान की जानकारी फैसले के 6 महीने के भीतर देनी चाहिए थी. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की 6 महीने वाली दलील को मनमाना बताते हुए इसे खत्म करने का निर्देश दिया था. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने वाले 12 लोगों में 2 छूट वाली कंपनियों से आते हैं.

भुवनेश्वर कुमार और उनकी बचपन की दोस्त नूपुर ने कर ली शादी

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गुरुवार को टीम इंडिया के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार अपनी गर्लफ्रेंड नूपुर के हो जाएंगे. भुवी पूरे धूमधाम के साथ घोड़ी चढ़ बारात लेकर निकले. कोलकाता टेस्ट में धूम मचाने के बाद भुवनेश्वर ने अपनी शादी के लिए टीम इंडिया से छुट्टी ले ली है.

घुड़चढ़ी के बाद बारात गुरुवार सुबह करीब 11 बजे मेरठ बाइपास स्थित होटल ब्राउरा पहुंची. इस दौरान उनके करीबी दोस्तों के अलावा मेरठ, बागपत और बुलंदशहर में रहने वाले रिश्तेदारों ने जमकर जश्न मनाया. इस मौके पर मीडिया को दूर रखा गया था. बताया जाता है कि दोपहर में चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में शादी की रस्म पूरी होगी. शाम में ही इसी होटल में भुवनेश्वर की ओर से रिशेप्सन का आयोजन किया गया है. 3 अक्टूबर को भुवी ने अपनी ‘बेटर हाफ’ की फोटो शेयर की थी.

रिसेप्शन में शहर के प्रमुख लोगों को न्योता दिया गया है. भुवनेश्वर के पिता किरणपाल के मुताबिक 26 नवंबर को भुवनेश्वर के पैतृक गांव बुलंदशहर के लुहारली गांव में दूसरा रिशेप्सन होगा. 5 दिसंबर को दिल्ली के ताज होटल में एक और पार्टी होगी, जिसमें भारत -श्रीलंका की टीमें शिरकत करेंगी. साथ ही राजनीति, क्रिकेट और फिल्म जगत से जुड़ी बड़ी हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है.

योगी के मंत्री मोहसिन रजा की किरकिरी

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उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. रजा का निकाहनामे का रजिस्ट्रेशन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से निरस्त हो गया है. हालांकि इस मामले में मंत्री ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं हुआ है. इस मामले में जल्द ही सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी.

बता दें कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे में शादियों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया था. मुस्लिम संगठनों द्वारा सरकार की इस पहल के विरोध के बीच वक्फ और हज मंत्री मोहसिन रजा ने अपने निकाह का रजिस्ट्रेशन करवाकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब उनका ही रजिस्ट्रेशन आवेदन निरस्त हो गया है.

कहा जा रहा है कि तय सीमा में जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने से उनका आवेदन निरस्त हुआ है. अब उन्हें नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करनी होगी. रजा ने कहा कि कानून के मुताबिक, तीन महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ले लेना चाहिए लेकिन मैं व्यस्तता की वजह से सर्टिफिकेट लेने नहीं जा सका. उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे जो भी कार्रवाई जरूरी है, उसे पूरा किया जाएगा.

गौरतलब है कि रजा ने निकाह के करीब 16 साल बाद तीन अगस्त को निकाहनामे के रजिस्ट्रेशन का आवेदन दिया था. जिसके बाद अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार के कार्यालय से सर्टिफिकेट के लिए दो बार मंत्री को फोन से जानकरी दी गई लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने की वजह से निकाहनामे का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया.

हाफिज सईद की रिहाई से नाखुश है अमेरिका

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लाहौर। लाहौर हाईकोर्ट ने 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन जमात उद दावा के सरगना हाफिज सईद की 297 दिनों से चली आ रही नजरबंदी को खत्म करने का आदेश दिया है. उसके कहीं भी आने-जाने पर लगा प्रतिबंध भी हटा दिया गया है. ऐसे में हाफिज सईद गुरुवार को ही रिहा हो सकता है. अमेरिका ने इस फैसले का विरोध किया है. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका दोनों ने ही जब हाफिज सईद को आतंकी घोषित कर रखा है, तब भी उसे बाहर आने की अनुमति देना हैरान करने वाला है. गौरतलब है कि प्रतिबंधित जमात के सरगना के सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर (करीब 65 करोड़ रुपये) का इनाम रखा है.

अमेरिका के विदेश मामले की प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि हाफिज को विशेष रूप से अधिशासी आदेश संख्या 13224 के तहत वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है. इसी तरह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव यूएनएससीआर 1267 के तहत मुंबई हमले के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया था. ऐसे में हाफिज की नजरबंदी खत्म करने का फैसला समझ से परे है. इतना ही नहीं, भारत ने भी पाकिस्तान को मुंबई हमले की फिर से जांच के लिए कई बार कहा है. साथ ही हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी के खिलाफ भारत के दिए सुबूतों पर कोर्ट में सुनवाई कराने की मांग की हुई है. हाफिज सईद इसी साल जनवरी से घर में नजरबंद था.

पाकिस्तान के पंजाब सरकार की नजरबंदी और तीन महीने बढ़ाने की याचिका को बुधवार को पंजाब के न्यायिक समीक्षा बोर्ड ने खारिज कर दिया. लाहौर हाईकोर्ट के जजों वाले बोर्ड ने पिछली बार बढ़ाई गई 30 दिनों की नजरबंदी पूरी होने पर सईद को रिहा करने का आदेश दिया है. बोर्ड की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस अब्दुल समी खान ने कहा कि हाफिज सईद अगर किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो सरकार उसे रिहा कर दे. अगर पंजाब सरकार ने जल्द ही उसे किसी अन्य मामले में बंदी नहीं बनाया तो वह गुरुवार से ही पाकिस्तान में आजाद घूमेगा.

सईद के वकील एके डोगर ने बताया कि वह गुरुवार को ही नजरबंदी से आजाद हो जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि हाफिज सईद को गलत तरीके से 297 दिनों तक नजरबंद रखा गया. हाफिज ने हमेशा पाकिस्तान के लिए काम किया, लेकिन पाकिस्तान सरकार उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटा पाई. हालांकि पाकिस्तानी न्यायिक बोर्ड के फैसले से पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने भी सईद की नजरबंदी को सही साबित करने के लिए कुछ अहम सुबूत पेश किए. लेकिन बोर्ड इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय होगा नाराज अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नाराजगी की बात कहते हुए पाक की पंजाब सरकार ने मंगलवार को हाफिज की नजरबंदी को और तीन महीने जारी रखने की न्यायिक समीक्षा बोर्ड से इजाजत मांगी थी. सईद के खिलाफ अहम सुबूत पंजाब के गृह मंत्रालय ने कहा है कि अगर हाफिज सईद को अभी रिहा किया तो पाकिस्तान पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लग जाएंगे. मंत्रालय ने बताया कि हाफिज सईद को खुफिया जांच के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि हमारे पास हाफिज सईद के खिलाफ कुछ महत्वपूर्ण सुबूत हैं, जो उसकी नजरबंदी को जायज ठहराते हैं.

दलित शक्ति केन्द्र जाकर राष्ट्रीय ध्वज स्वीकारेंगे राहुल, रुपाणी ने मना कर दिया..

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात की सियासी जंग फतह करने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हैं. गुजरात नवसृजन यात्रा के चारों दौर की यात्रा को पूरा करने के बाद एक बार फिर शुक्रवार को सियासी रण में उतरने जा रहे हैं. दो दिवसीय दौरे के तहत राहुल गांधी इस बार दलित शक्ति केंद्र का दौरा करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे. साथ ही राहुल भारत को छुआ-छूत जैसी कुप्रथाओं से मुक्त करने के लिए भी शपथ लेंगे. बता दें कि इसी दलित शक्ति केंद्र पर विजय रुपाणी को राष्ट्रीय ध्वज पेश किया गया था, लेकिन उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया.

दलित शक्ति केंद्र द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक ये भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज, है जो 125 फुट चौड़ा और 83.3 फुट ऊंचा है. एक समय इसे गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को सौंपा जाना था और उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर ने जिस तरह से छुआ-छूत प्रथाओं को खत्म करने के लिए कदम उठाए थे उसी तरह के प्रयास करने के लिए कहा गया था. इस पेशकश पर गुजरात के मुख्यमंत्री की ओर से गांधीनगर कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने कहा कि उनके पास राष्ट्रीय ध्वज रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. इसलिए मुख्यमंत्री इस ध्वज को नहीं ले सकते हैं.

शक्ति केंद्र ने आगे कहा है कि राहुल गांधी शुक्रवार को गुजरात के दलित शक्ति केंद्र पर आएंगे. राहुल इस केंद्र से भारत के नागरिकों की ओर से पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार करेंगे और देश को छुआ-छूत से मुक्त कराने के लिए वचन देंगे. कहा गया है कि एक राजनेता के तौर पर राहुल गांधी का ये एक ऐतिहासिक कदम है और ये उन लोगों के खिलाफ लड़ाई है जो एंटी-नेशनलिज्म को बढ़ावा और राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करते हैं. मालूम हो कि गुजरात में 7 फीसदी दलित मतदाता हैं. राज्य की 182 सीटों में से 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. गुजरात में दलित मतदाताओं पर बीजेपी की मजबूत पकड़ मानी जाती है. 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी इन 13 सीटों में से 10 सीटें जीतने में सफल रही है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3 सीटें आई थी.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के दलित मतदाताओं को साधने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. गुजरात में दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का समर्थन हासिल करने के बाद राहुल गांधी अब दलित शक्ति केंद्र का दौरा कर रहे हैं. इस यात्रा के बहाने राहुल गांधी की गुजरात में बीजेपी के दलित वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश है. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी बीजेपी के खिलाफ गुजरात में मोर्चे पर हैं. उन्होंने अहमदाबाद के ओधाव औद्योगिक क्षेत्र में राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के करीब 2,000 सदस्यों को एकजुट करके संबोधित करते हुए कहा- हमें अंबेडकर के नाम पर गर्व है. जिग्नेश ने बीजेपी को दलित, गरीब और संविधान विरोधी बताया.

पीट-पीटकर, करंट लगाकर ड्राइवर अशोक से कबूल कराया गुनाह

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गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार 76 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद घर पहुंच गया. हाल ही में कोर्ट ने उसे जमानत दी है. अशोक कुमार ने रिहाई के बाद कहा, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे न्याय दिया. हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है.’

आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार ने बताया, ‘मुझे हिरासत में टॉर्चर किया गया. बिजली के करंट के झटके दिए गए. पुलिस ने थर्ड डिग्री देकर जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया. यहां तक की नशा भी दिया जाता था.’ परिजनों ने कहा, ‘हमें शुरू से ही पता था कि वह निर्दोष हैं. उसने कभी अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठाया.’ आरोपी बस कंडक्टर के वकीलों ने उसकी जमानत का आदेश जेल प्रशासन को बुधवार की शाम करीब तीन बजे के बाद सौंपा और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे देर शाम जेल से रिहा कर दिया गया. जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कानूनी दस्तावेजों की छानबीन करने के बाद अशोक को रात करीब आठ बजे रिहा कर दिया गया.’

गुरुग्राम के सोहना के पास स्थित अशोक कुमार के गांव घमरोज के प्रमुख लोग सुबह से भोडसी जेल के बाहर मौजूद थे. उन्होंने अशोक के बाहर निकलने के बाद उसका स्वागत किया. अशोक की मां के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे. उसकी पत्नी की तबियत अचानक खराब हो जाने के चलते उसे बुधवार सुबह अस्पताल भी ले जाना पड़ा था.

अशोक की घर वापसी की खुशी पत्नी के मायूस चेहरे पर साफ झलक रही थी. उसने कहा, ‘मुझे पहले से ही पता था वो निर्दोष हैं. उसने कभी अपने बच्चों पर हाथ तक नही उठाया. वो किसी मासूम की हत्या कैसे कर पाएगा. आज मेरे लिए होली और दीवाली का दिन है. मैं ही जानती हूं कैसे ये 76 दिन बीते है. मेरी हर रात रो के गुजरी है.’ मां ने अपनी हैसियत के हिसाब से सबसे अच्छा खाना रोटी और दाल बनाया. चूल्हे पर रोटियां सेंकती मां और बीवी दोनों ही खुश थीं. अशोक के आने से परिवार के सदस्यों की उम्मीदे बढ़ गई हैं. वो आगे भी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनके साथ गांव का सपोर्ट है. पूरा गांव उनके दुख-सुख में साथ खड़ा रहा. उनकी मदद करता रहा है. बताते चलें कि अशोक कुमार को 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिली है. अशोक पड़ोसी महेश राघव ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री के पेपर बतौर जमानत दिया. महेश ने बताया, ‘हमारे घर की दीवार एक है. मैंने अपनी जमीन की रजिस्ट्री के पेपर बतौर जमानत दिया है. गांववालों ने भी 50-100 रुपये तक का चंदा लगाकर अशोक की मदद की है.’

आरोपी के वकील मोहित वर्मा ने कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें जमानत दे दी. अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जिंदगी और स्वतंत्रता का अधिकार देता है. सीबीआई और हरियाणा पुलिस के सिद्धांतों के बीच बड़ा संघर्ष था. संदेह के लाभ के आधार पर उन्हें जमानत दी गई है. अशोक को फंसाया गया था.

नए वेतन आयोग को मंजूरी, जानिए किसे कितना फायदा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कैबिनेट की एक अहम बैठक में 15वें वित्त आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है. यह केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग पर भी काम करेगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 31 और 24 हाईकोर्ट के 1079 वर्तमान जजों के वेतन ढाई हजार रिटायर्ड जजों के पेंशन के लिए संबंधित कानूनों में बदलाव को मंजूरी दे दी. यह नया वित्त आयोग जीएसटी से हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व बांटने का नया फॉर्मूला तैयार करेगा. नया वित्त आयोग अप्रैल 2020 से लेकर अप्रैल 2025 तक काम करेगा.

रिटायर्ड जजों को भी मिलेगा फायदा कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट और 24 उच्च न्यायालयों के जजों की सैलरी को बढ़ाने का भी फैसला लिया. इससे सुप्रीम कोर्ट के 31 और हाईकोर्ट के 1079 जजों का फायदा होगा. इसके अलावा 2500 रिटायर जजों को भी पेंशन में फायदा मिलेगा. गौरतलब है कि पिछले ही दिनों सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या सरकार जजों का वेतन बढ़ाना भूल गई है? कोर्ट ने कहा था कि जजों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद नौकरशाहों से भी कम है. इसी को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने जजों के वेतन-भत्ते और पेंशन के पुनर्निधारण को मंजूरी दी. अब जजों को बढ़े हुए वेतन, भत्ते, ग्रेच्यूटी और पेंशन का लाभ 1 जनवरी 2016 से दिया जाएगा.

पीएसयू कंपनियों के लिए वेतन नीति का ऐलान वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सेंट्रल पब्लिक सेंटर एंटरप्राइजेज में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए वेतन नीति पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है. सार्वजनिक क्षेत्र के 320 सरकारी उपक्रमों के करीब 9.35 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी. इस फैसले के साथ ही इन सभी सरकारी उपक्रमों में मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच वेतन बढ़ोतरी के मुद्दे पर बातचीत शुरू हो सकेगी.

बैंकरप्सी कानून भी हुआ सख्त केंद्रीय कैबिनेट ने बैंकरप्सी कानून को सख्त करने के लिए अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके अलावा दिवालिया कानून में भी बदलाव किया जाएगा. कैबिनेट ने इसके लिए अपनी मंजूरी देते हुए कहा कि यह दोनों अध्यादेश संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाएंगे. इस अध्यादेश के लागू होने पर दिवालिया कंपनियों के प्रमोटरों की मुश्किल बढ़ सकती है.

रक्षक बना भक्षक: कर्नल ने घर बुलाकर लेफ्टिनेंट कर्नल की बेटी से किया रेप

शिमला। जब देश के रक्षक हीं, देश की बेटी के आबरु के साथ खिलवाड़ करें तो फिर देश की आबरु पर भी सवाल खड़ा हो जाता है. हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के आर्मी ट्रेनिंग कमांड में तैनात एक कर्नल को लेफ्टिनेंट कर्नल की बेटी के साथ गैंगरेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि कर्नल ने लड़की को मॉडलिंग का झांसा देकर अपने घर बुलाया और उससे रेप किया.

56 वर्षीय कर्नल शिमला में तैनात है. दोस्त की बेटी के साथ उसकी मुलाकात 19 नवंबर को एक कार्यक्रम में हुई थी. यहां वह मॉडलिंग कर रही थी. इस दौरान कर्नल ने उसे घर आने का न्योता दिया और कहा कि उसकी बेटी मुंबई में मॉडलिंग कर रही है. वह इस क्षेत्र में उसकी सहायता करेगी. इसी दौरान उसने दोस्त की बेटी (पीड़िता) का मोबाइल नंबर भी लिया और रात को व्हाट्सएप पर फोटो मंगवाई. दोनों की रात को फेसबुक मैसेंजर व व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत हुई. उसने 20 नवंबर को लड़की को फोन करके घर बुलाया, कहा कि उसने कोरियोग्राफर व फोटोग्राफर को बुलाया है जो उसकी फोटो खींचेगा. यह भी कहा कि उसका परिवार भी घर पर ही है.

लड़की दोपहर करीब सवा दो बजे अकेली लांगबुड स्थित कर्नल के घर पहुंची. कर्नल उसे कमरे में ले गया और वहां पहले से मौजूद एक व्यक्ति ने लड़की को धक्का देकर बेड पर धकेल दिया. इस दौरान दोनों ने उसे जबरदस्ती शराब पिलाई और कर्नल ने उसके साथ दुष्कर्म किया. लड़की ने जब इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई. पीड़िता ने घर जाकर परिजनों को आपबीती सुनाई. इसके बाद उन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज करने फैसला लिया है.

मंगलवार देर रात पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर दुष्कर्म का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस टीम ने आरोपी के घर की तालाशी ली और मौके से बेडशीट अन्य सुबूत एकत्रित कर लिए हैं. इस घटना के बाद पीड़िता गहरे सदमे में है. परिजनों से भी ज्यादा बातचीत नहीं कर रही है. 21 वर्षीय पीड़िता सेना में भर्ती होना चाहती थी. लेकिन इस हादसे के बाद से उसका मनोबल टूट गया है. मामला दर्ज कर लिया गया है. पीड़िता का मेडिकल करवाकर मामले की छानबीन की जा रही है. इस संबंध में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है. – सौम्या, पुलिस अधीक्षक शिमला.

विमान में देरी से महिला ने एयरपोर्ट पर ही केंद्रीय मंत्री को सुना दी खरी-खोटी

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नई दिल्ली। इम्फाल एयरपोर्ट से एक महिला यात्री ने केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस को जमकर लताड़ा. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. दरअसल हुआ यह कि महिला यात्री जो पेशे से डॉक्टर है उसे फ्लाइट से पटना जाना था. लेकिन वीवीआईपी मूवमेंट के चलते विमानों को उड़ान भरने में देरी हो रही थी. इस बात को लेकर महिला भड़क गई और उसने मंत्री को खरी-खोटी सुनाना शुरु कर दिया.

महिला के अनुसार उसे किसी करीबी की मृत्यु के बाद अचानक पटना जाना था. 2:45 बजे की फ्लाइट होने की बावजूद वीवीआईपी आगमन शेड्यूल हो जाने की वजह से विमान समय से उड़ान नहीं भर सके. महिला ने मंत्री से बताया कि उसने इसके लिए छुट्टी ली है और घरवालों को भी बताया है कि उसकी फ्लाइट 2:45 बजे की है.

महिला बोलते-बोलते अचानक रोने लगी और मंत्री से कहा कि अगर मैं वक्‍त पर नहीं पहुंची तो परिवारवाले अंतिम संस्‍कार कर देंगे. मंत्री इस दौरान कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं दिखे. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि बस वीवीआईपी प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है. महिला ने अल्फोंस से लिखित में देरी का कारण बताने को कहा.

सोमालिया में अल-शबाब के 100 से ज्यादा आतंकी ढेर

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वाशिंगटन। अमेरिकी सुरक्षा बलों ने सोमालिया में मंगलवार को अलकायदा से संबंधित अल-शबाब समूह के खिलाफ हवाई हमला किया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए.

अमेरिकी-अफ्रीका कमान ने एक बयान में कहा कि सोमालिया की संघीय सरकार के साथ तालमेल से अमेरिकी बलों ने सोमालिया में मंगलवार, 21 नवंबर को सोमालियाई समयानुसार सुबह साढ़े 10 बजे अल-शबाब के खिलाफ हवाई हमला कर 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया.

ये अभियान सोमालिया की राजधानी मोगादिशू से 200 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में चलाया गया.

इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने सोमालिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों पर ड्रोन हमले किए थे. ऐसा पहली बार था जब अमेरिका ने होर्न ऑफ अफ्रिका में जिहादियों का निशाना बनाया था. इसमें कई आतंकवादी मारे गए थे.

पहली बार सुखोई फाइटर जेट से हुआ ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण

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नई दिल्ली। दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस का पहली बार भारतीय वायुसेना के सुखोई-30-एमकेआई लड़ाकू विमान से परीक्षण किया गया, जो सफल रहा. इसी के साथ भारत पहला देश बन गया है, जिसके पास ज़मीन, समुद्र तथा हवा से चलाई जा सकने वाली सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है. इस विश्वरिकॉर्ड का ज़िक्र रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने डीआरडीओ को बधाई देते ट्वीट में भी किया है.

सफल परीक्षण की पुष्टि करते हुए रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में बताया गया कि मिसाइल को सुखोई-30-एमकेआई या एसयू-30 विमान के फ्यूज़लेज से गिराया गया. दो चरणों में काम करने वाला मिसाइल का इंजन चालू हुआ और वह बंगाल की खाड़ी में स्थित अपने टारगेट की तरफ बढ़ गई.

मंत्रालय का कहना है कि इस परीक्षण से भारतीय वायुसेना की हवाई युद्ध की ऑपरेशनल क्षमता खासी बढ़ जाएगी. ढाई टन वज़न वाली यह मिसाइल हथियार ले जाने के लिए मॉडिफाई किए गए एसयू-30 विमान पर ले जाया गया सबसे वज़नी हथियार है. वैसे, अब ब्रह्मोस को ज़मीन, समुद्र तथा हवा से चलाया जा सकता है, और इसी के साथ भारत के पास युद्ध की स्थिति में बेहद अहम क्रूज़ मिसाइल ट्रायड (cruise missile triad) पूरा हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्राइवेट सेक्टर में पेंशन बढ़ी

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नई दिल्ली। प्रवीण कोहली हरियाणा टूरिजम कॉर्पोरेशन से रिटायर्ड हैं. अपने 37 साल के करियर में उन्हें अपने वेतन में कभी भी उतनी अच्छी बढ़ोतरी नहीं मिली, जितनी रिटायर होने के चार साल बाद पेंशन में मिली. 1 नवंबर को कोहली की पेंशन कई गुना बढ़कर 2,372 रुपये से 30,592 रुपये हो गई. यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2016 के एक आदेश के बाद आया, जिसमें कोर्ट ने ईपीएफओ (एंप्लॉयी प्रविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन) को एंप्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) के तहत 12 याचिकाकर्ताओं की पेंशन रिवाइज करने को कहा था.

पेंशन स्कीम के 5 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं. प्राइवेट सेक्टर में सभी एंप्लॉयी अपनी बेसिक सैलरी का 12 पर्सेंट और महंगाई भत्ता ईपीएफ में जमा करता है. इसके बाद उतनी ही रकम एंप्लॉयर भी जमा करता है. एंप्लॉयर के फंड से 8.33 पर्सेंट ईपीएस के लिए जाता है. जब लोग नौकरी छोड़ने के बाद ईपीएफ निकालते हैं तो उन्हें ईपीएस नहीं दिया जाता है. इसका भुगतान सेवा निवृत्ति के बाद ही होता है.

ईपीएस योगदान पर एक सीमा भी है. वर्तमान में वेतन (बेसिक + डीए) पर सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है. इसलिए कोई भी 15 हजार रुपये का अधिकतम 8.33 पर्सेंट ही ईपीएस के लिए जमा कर सकता है, जो 1250 रुपये बैठता है. जुलाई 2001 से सितंबर 2014 के बीच, ईपीएस योगदान की सीमा 6,500 रुपये थी. ऐसे में ईपीएस के लिए अधिकतम 541.4 रुपये का ही योगदान हो सकता है. वहीं 2001 से पहले यह सीमा 5000 रुपये थी, जिसके मुताबिक योगदान 416.5 रुपये ही हो सकता था.

अब सवाल उठता है कि कोहली की पेंशन अचानक 30 हजार रुपये से ज्यादा कैसे हो गई. इसके पीछे काफी संघर्ष भी है, जिसमें उन्होंने ईपीएस के लिए एक महत्वपूर्ण संशोधन का हवाला दिया. 2005 में मीडिया रिपोर्टों में, कई निजी ईपीएफ फंड ट्रस्टी और कर्मचारियों ने ईपीएफओ से संपर्क किया और ईपीएस योगदान पर सीमा को हटाने की मांग की और इसे पूरे वेतन पर लागू करने को कहा. ईपीएफओ ने मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रतिक्रिया 1996 के संशोधन के छह महीने के भीतर आनी चाहिए थी.

इसके बाद ईपीएफओ के खिलाफ कई हाई कोर्ट में केस दायर किए गए. 2016 तक एक हाई कोर्ट को छोड़कर ज्यादातर सभी हाई कोर्ट ने ईपीएफओ के खिलाफ फैसला दिया और कहा कि छह महीने की समयसीमा मनमानी थी और कर्मचारियों को अनुमति दी जानी चाहिए कि वे जब चाहें अपना पेंशन अंशदान बढ़ा सकें. इसके बाद केस सुप्रीम कोर्ट में गया. दो सुनवाई के बाद केस कर्मचारियों के पक्ष में आया. इसके बाद ईपीएफओ को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को लागू करने में एक साल का समय लगा. इसके बाद नवंबर 2017 से कोहली को ज्यादा पेंशन मिलने लगी.

अपनी पेंशन को 2,372 रुपये से 30,592 रुपये कराने के लिए कोहली को 15.37 रुपये का भुगतान करना पड़ा. यह वह रकम थी जो कोहली अपने पूरे वेतन पर ईपीएस योगदान के लिए भुगतान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पेंशन की एरियर के रूप में 13.23 लाख रुपये भी मिले. ऐसे में महज 2.14 लाख रुपये भुगतान करने से कोहली को अपनी पेंशन करीब कई गुना करने का मौका मिला. ऐसे में ईपीएफओ के सभी 5 करोड़ सदस्य अब उच्च पेंशन के लिए पात्र हैं. इसमें उन सभी लोगों को शामिल किया गया है, जो 1 सितंबर, 2014 से पहले ईपीएफओ में शामिल हुए थे. इस तारीख को ही ईपीएस ने 15,000 रुपये की कैप लगाई थी.

यूपी निकाय चुनावः मेरठ में 52 जगह बदली गई वोटिंग मशीन

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मेरठ। उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव के प्रथम चरण का मतदान शुरू हुए तककरीबन छह घंटे हो गए हैं. मतदान के दौरान कहीं-कहीं हल्की नोकझोंक और मतदान केंद्रों पर ईवीएम खराब होने की खबरें आ रही हैं. मेरठ में निकाय चुनाव के दौरान 52 जगह ईवीएम में गड़बड़ी पाई गई है. यानि 52 जगह ईवीएम बदले गए हैं.

जिले में वोटर लिस्ट से नाम बदलने को लेकर वोटर जमकर हंगामा कर रहे हैं. वोटर लिस्ट से लोगों का नाम ना डाल पाने पर लोगों में भारी नाराजगी है. लोगों ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के लिए चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है. इसी बीच बसपा प्रत्याशी के पति मौजूद भीड़ में हंगामा करते हुए चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है. भीड़ पर कंट्रोल करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. ये पूरा मामला थाना लिसाड़ी गेट क्षेत्र के समर गार्डन का है.

खबरों की मानें तो मुस्लिम इलाके में ज्यादा ईवीएम में गड़बड़ी हो रही है. आपको बता दें कि मेरठ में ही कई वार्ड में मतदाताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. जब वे ईवीएम में अपने प्रत्याशी को वोट देने के लिए उसके सामने वाले बटन को दबा रहे थे तो लाइट कमल के फूल और सबसे नीचे नोटा के बटन पर जल रही थी. हालांकि अभी इस मामले में अधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं. इस ईवीएम मशीन में खराबी की वजह से कुछ देर तक वोटिंग रोकनी पड़ी थी.

रशीद नगर में वोट डालने पहुंचे तस्‍लीम का कहना है क‍ि उन्‍होंने बसपा के निशान हाथी के आगे का बटन दबाया था लेकिन लाइट भाजपा के चुनाव चिह्न कमल और नोटा के आगे जली. जब यह बात अन्य लोगों को पता चली तो इसे लेकर लिसाड़ी गेट में हंगामा हो गया. लोगों के हंगामे के बीच मतदान रोकना पड़ा. पीठासीन अधिकारी ने मतदान रोक कर दूसरी ईवीएम का इंतजाम किया, जिसके बाद वोटिंग दुबारा शुरू हुई.

रेलवे ने की एक और लापहरवाही, 160 KM गलत ट्रैक पर दौड़ी ट्रेन

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नई दिल्ली। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद रेलवे लापरवाही से बाज नहीं आ रहा है. अब ऐसा ही एक और मामला सामने आया है जहां रेल विभाग ने ट्रेन को गलत ट्रैक पर ही दौड़ा दिया. दरअसल दिल्ली से 2500 किसानों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन महाराष्ट्र के कोल्हापुर रवाना हुई. रेलवे की बड़ी लापरवाही की वजह से ये ट्रेन 160 किलोमीटर गलत रास्ते पर चलकर मध्य प्रदेश के बानमोर स्टेशन पर जा पहुंची.

इस ट्रेन को उत्तर प्रदेश के मथुरा से होकर कोटा, सूरत, मुंबई, पुणे के रास्ते कोल्हापुर जाना था लेकिन गलत सिग्नल मिलने के चलते यह गाड़ी मथुरा से आगरा, ग्वालियर होते हुए मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बानमोर स्टेशन तक जा पहुंची. जानकारी के अनुसार मथुरा स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों ने गलत सिग्नल दे दिया और फिर ट्रेन महाराष्ट्र जाने के बजाए मध्यप्रदेश पहुंच गई. जैसे ही ट्रेन बानमोर स्टेशन पर पहुंची तो यात्रियों ने ट्रेन के ड्राइवर और स्टेशन मास्टर को बताया कि हम गलत रूट पर आ गए हैं. ड्राइवर ने कहा कि हमें जहां का सिग्नल मिला हम वहीं ट्रेन लेकर आ गए.

रेलवे ने गलती में सुधार करते हुए ट्रेन को बानमोर से ग्वालियर के रास्ते मथुरा के लिए रवाना कर दिया है. बताया जा रहा है कि ट्रेन मथुरा से वापस कोटा, सूरत, मुंबई होते हुए कोल्हापुर जाएगी. फिलहाल इस ट्रेन के गुरूवार सुबह 6 बजे तक कोल्हापुर पहुंचने की संभावना है. ट्रेन में सवार यात्री जंतर-मंतर पर आयोजित किसान यात्रा प्रोट्स्ट रैली कर महाराष्ट्र के कोल्हापुर जाने के लिए ट्रेन में बैठे थे लेकिन रेल विभाग की लापरवाही के कारण उन्हे काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

यूपी निकाय चुनावः कई बूथों पर ईवीएम हुआ खराब, मतदाताओं ने किया प्रदर्शन

चुनाव

कानपुर। उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में आज निकाय चुनाव हो रहे हैं. इन जिलों में शाम 5 बजे तक पोलिंग बूथ पर मतदान किए जाएंगें. लेकिन मतदान के बीच कई जिलों में मतदाता नाराज दिखें. कहीं वोटर लिस्ट में मतदाताओं के नाम नहीं है, तो कही ईवीएम मशीन खराब होने की खबरें आ रही है. जिसके चलते मतदाताओं ने विरोध व्यक्त किया है.

इसी क्रम में कानपुर जिले के नौबस्ता थाना इलाके के बूथ संख्या 66 पर ईवीएम खराब होने की वजह से मतदाताओं ने हंगामा किया. लोगों का आरोप था कि बटन कोई भी दबाओं वोट कमल को ही जा रहा है. इसके बाद लोगों ने मतदान का बहिष्कार कर, नारेबाजी शुरू कर दी. इस बीच निर्वाचन अधिकारी और पुलिस प्रशासन भी मौके पर मौजूद हैं.

मेरठ के बूथ संख्या 243 की ईवीएम खराब होने का भी मामला सामने आया है. जाकिर कॉलोनी के वार्ड 85 में ईवीएम खराब होने के चलते लोगों की भीड़ जमा हो गई है और लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. मतदाताओं के हंगामे को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी फौरन मौके पर पहुंचे.

इसके अलावा शामली में आचार संहिता की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं. चुनाव प्रचार वाली कप में चाय बांटी गई. फिलहाल इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है.

मणिकर्णिका फिल्म की शूटिंग के दौरान घायल हुई कंगना

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जोधपुर। मेहरानगढ़ फोर्ट में अपनी अपकमिंग मूवी मणिकर्णिका की शूटिंग के दौरान मंगलवार देर रात एक्ट्रेस कंगना रनौत घायल हो गई. उनके पांव में चोट आई है. जोधपुर में एक निजी अस्पताल में इलाज करवा कर आज दोपहर वे आराम करने के लिए मुंबई रवाना हो गई.

झांसी की रानी के जीवन पर बन रही फिल्म मणिकर्णिका में मुख्य किरदार निभा रही कंगना कई दिन से जोधपुर में इस फिल्म की शूटिंग में हिस्सा ले रही है. जोधपुर के मेहरानगढ़ फोर्ट में कल रात करीब साढ़े ग्यारह बजे एक स्टंट सीन के दौरान उनके पांव में चोट लग गई. ऊंचाई से कूदी कंगना का पांव गलत स्थान पर पड़ गया और पांव में मोच आ गई.

वहीं पर प्राथमिक उपचार के बाद रात बारह बजे उन्हें शहर के गोयल अस्पताल लाया गया. गोयल अस्पताल में करीब डेढ़ घंटे तक उनका इलाज किया गया. कंगना का इलाज करने वाले डॉ. राजेश यादव ने बताया कि उनके पांव में मोच आई है. हड्‌डी में कोई क्रेक नहीं है. कंगना के पांव पर प्लास्टर किया गया है और उन्हें एक सप्ताह तक आराम के लिए कहा गया है.

दर्द के कारण निकल आए आंसू झांसी की रानी का किरदार निभाने वाली कंगना पांव में मोच आने के बाद तेज दर्द के कारण कहरा रही थी. पांव की जांच करने के दौरान दर्द के कारण उनके आंसू निकल आए. बाद में उन्हें एक व्हील चेयर पर होटल ले जाया गया. रात को आराम करने के बाद कंगना आज दोपहर मुंबई के लिए रवाना होगी. उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान कंगना एक बार पहले भी घायल हो चुकी है.