चित्रकूट में 13 डिब्बे पटरी से उतरे, 3 की मौत और 12 घायल

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चित्रकूट। देश में एक और ट्रेन एक्सिडेंट हुआ है. यूपी में बांदा जिले के चित्रकूट के पास मानिकपुर में पटना जा रही वास्को डि गामा एक्सप्रेस की 13 बोगियां पटरी से उतर गई. इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत हो गई है जबकि 12 लोग घायल हुए हैं. उत्तर-प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आनंद कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि दुर्घटना की वजह पटरियों में दरार आना है.

रेलवे ने मृतकों के परिवार वालों को पांच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को एक लाख तथा घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेल हादसे पर गहरा दुख जताया है. सीएम योगी ने मृतकों के परिवार वालों को 02-02 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. साथ ही दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल यात्रियों को 50-50 हजार एवं मामूली रूप से घायलों को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी.

उत्तर-मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि एस-तीन से एस-11 तक शयनयान डिब्बे, दो जनरल कोच और दो अतिरिक्त कोच पटरी से उतरे. रेलगाड़ी के जो डिब्बे बेपटरी हुए हैं, उसमें एस3, एस4, एस5, एस6, एस7, एस8, एस9, एस10, एस11, दो अतिरिक्त स्लीपर कोच और दो जनरल डिब्बे हैं.

उन्होंने बताया कि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है और राहत-बचाव कार्य जारी है. मालवीय ने बताया कि दुर्घटना के बाद एक मेडिकल ट्रेन घटनास्थल के लिए तुरंत रवाना कर दी गयी. सुबह पांच बजकर 20 मिनट पर दुर्घटना राहत ट्रेन भी मौके पर रवाना कर दी गयी.

इलाहाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) मौके पर हैं जबकि उत्तर-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक पहुंच रहे हैं. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हादसे में मारे गये यात्रियों के निकटतम परिजन को पांच-पांच लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को एक-एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है.

पद्मावती विरोधः नाहरगढ़ किले पर लटका मिला शव, पत्थर पर लिख कर दी धमकी

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जयपुर। फिल्म पद्मावती के विरोध में नया हिंसक मोड़ आ गया है. जयपुर के नाहरगढ़ किले की दीवार से एक शख्स की लाश लटकी मिली है और उसके पास पत्थर पर लिखा है- हम पुतला जलाते नहीं लटकाते हैं. चेतन तांत्रिक मारा गया.

इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस हरकत में है. पुलिस ने अपने शुरुआती तफ्तीश में बताया है कि शव की पहचान कर ली गई है. उसका नाम चेतन शर्मा बताया गया है और उसके पास मुंबई का एक रेल टिकट मिला है. पुलिस इस मामले की जांच में जुट गई है, लेकिन उसने इस वारदात को पद्मावती से जोड़ने से इनकार किया है. पुलिस फिलहाल इस एंगल से जांच कर रही है कि ये मामला आत्महत्या का है या फिर हत्या का.

राजस्थान में करणी सेना, बीजेपी लीडर्स और हिंदूवादी संगठनों ने इतिहास से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है. राजपूत करणी सेना का मानना है कि ​इस फिल्म में पद्मिनी और खिलजी के बीच इंटीमेट सीन फिल्माए जाने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है. लिहाजा, फिल्म को रिलीज से पहले पार्टी के राजपूत प्रतिनिधियों को दिखाया जाना चाहिए.

विरोध मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक तक पहुंच गया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी में सरकार ने इसे रिलीज नहीं करने की बात कही. राजनाथ सिंह, उमा भारती, लालू प्रसाद यादव, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने बयान दिए कि लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए. गुरुवार को राजपूतों ने चितौड़गढ़ का किला बंद रखकर प्रदर्शन किया था.

राजस्थान की राजपूत करणी सेना के अलावा राजघराने भी फिल्म के खिलाफ हैं. इनकी मांग है कि इसे रिलीज करने के पहले उन्हें दिखाई जाए. करणी सेना ने सूर्पणखा की तरह दीपिका पादुकोण की नाक काटने, हरियाणा के बीजेपी नेता ने दीपिका और भंसाली का सिर काटने पर 10 करोड़ के इनाम का एलान किया था.

प्रेस क्लब ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय की सदस्यता छीनी

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नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का चुनाव बस दो दिन बाद है यानि पच्चीस नवंबर को. उसके ठीक पहले एक बड़ी खबर आ रही है. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय की सदस्यता सस्पेंड कर दी है. साथ ही उन्हें वोट न डालने देने का भी फैसला ले लिया है. इससे आहत जाने-माने पत्रकार और अपनी बेबाक बयानी के लिए मशहूर राम बहादुर राय ने घोषणा की है कि वह चुनाव के दिन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जाएंगे और अपना ड्यूज क्लीयर करने के बाद वोट देने की कोशिश करेंगे. अगर वोट देने से रोका गया तो वो विरोध स्वरूप वहीं पर खड़े रहेंगे.

मालूम हो कि प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के उन्हीं सदस्यों को वोट डालने दिया जाता है तो अपना सालाना फीस जमा कर देते हैं. पिछले तीन वर्षों से ऐसा संयोग रहा कि राम बहादुर राय को चुनाव के दिन दिल्ली से बाहर रहना पड़ा. इस बार वह चुनाव के दिन दिल्ली में हैं. उन्होंने अपने एक करीबी को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया भेजकर ड्यूज वगैरह के बारे में पता करवाया ताकि वोट डालने के दिन कोई दिक्कत न आए. तब पता चला कि राम बहादुर राय समेत सैकड़ों पत्रकारों की सदस्यता निलंबित कर दी गई है.

अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए चर्चित वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय का आरोप है कि प्रेस क्लब प्रबंधन की तरफ से उनसे कहा जा रहा है कि वो वोट डालने न आएं क्योंकि उनका ड्यूज तीन साल तक जमा न होने और उस पर पेनाल्टी लगे होने के कारण सदस्यता निलंबित कर वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है. राम बहादुर राय का कहना है कि प्रेस क्लब प्रबंधन तीन साल का सदस्यता शुल्क ले ले और पेनाल्टी माफ कर दे. इसके बाद स्वत: वोट देने का रास्ता खुल जाएगा लेकिन प्रेस क्लब प्रबंधन इस पर राजी नहीं है. ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने दुखी और आहत मन से विरोध करने का फैसला कर लिया है. श्री राय चुनाव के दिन वोट देने जाएंगे और ड्यूज चुकाने के बाद भी वोट न डालने देने पर विरोध स्वरूप वहीं खड़े रहकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे.

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह, जो प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के चुनाव में सेन-फरीदी-गांधी पैनल की तरफ से मैनेजिंग कमेटी मेंबर के लिए प्रत्याशी हैं, इस प्रकरण पर कहते हैं :

अगर हमारा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का प्रबंधन अपने बुजुर्ग पत्रकारों, अपने अग्रजों, अपने वरिष्ठों, अपने माननीयों का सम्मान नहीं कर सकता, इनके प्रति संवेदनशील नहीं हो सकता तो इस प्रेस क्लब के क्या मायने हैं. राम बहादुर राय जैसे जाने-माने और वरिष्ठ पत्रकार को हर हाल में वोट का अधिकार न सिर्फ दिया जाना चाहिए बल्कि सदस्यता निलंबन जैसी हरकत के लिए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के वर्तमान प्रबंधकों को माफी मांगनी चाहिए. वरिष्ठों से जुड़े मामलों में प्रेस क्लब को संवेदनशील होना चाहिए और स्वयं पहल करके किसी भी तकनीकी दिक्कत को दूर कर चीजों को आसान बनाए रखना चाहिए. नौकरशाही और तानाशाही वाली मानसिकता से काम करने वाला प्रबंधन अक्सर अहंकार से भरा होता है और वह अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता. यही अहंकार एक दिन विनाश का कारण बनता है. राय साहब जैसे बड़े पत्रकार के साथ प्रेस क्लब प्रबंधन के इस अपमान जनक हरकत को कोई भी पत्रकार उचित नहीं मानेगा और इसका बदला जरूर वोटिंग के दिन बैलट पेपर के जरिए वर्तमान प्रबंधकों/पदाधिकारियों को सबक सिखा कर लेगा.

लेखक भड़ास फ़ॉर मीडिया के संस्थापक एवं संपादक हैं.

तीन मौलवियों की पिटाई कर चलती ट्रेन से फेंका

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मेरठ। यूपी के बागपत जिले में तीन मौलवियों ने दबंगों पर चलती ट्रेन में बुरी तरह पीटने और बाहर फेंकने का आरोप लगाया है. तीनों मौलवियों को चोटें आई हैं. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. घटना बुधवार रात की है जहां ग्रामीणों ने मौलवियों के पक्ष और हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बागपत कोतवाली पर हंगामा किया. गुरुवार को पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है.

शिकायत करने वाले तीनों मौलवी बागपत जिले के ही गांव अहेड़ा के रहने वाले हैं. घायल इसरार अपने साथी रोजुद्दीन निवासी अहेड़ा गांव के एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाते हैं. बुधवार को दोनों एक अन्य मौलाना के साथ बागपत से दिल्ली मरकज मस्जिद को देखने गए थे. हादसे के वक्त वहीं से लौट रहे थे. घायल मौलवी इसरार के मुताबिक बुधवार रात वह अपने दो अन्य साथियों के साथ पैसेंजर ट्रेन से दिल्ली से घर अहेड़ा लौट रहे थे. ट्रेन में मामूली बात को लेकर दबंगों ने विवाद हो गया.

इसरार ने आगे बताया कि मामला उसी वक्त शांत हो गया था, लेकिन जैसे ही वह अहेड़ा पहुंचने वाले थे और उतरने की तैयारी कर रहे थे तभी ऊपर की सीट पर बैठे दबंगों ने गालीगलौच शुरू कर दी और ट्रेन का गेट बंद कर दिया. पिटाई शुरू कर दी. करीब सात हमलावरों ने विरोध करने पर लोहे के रॉड से पीटा और फिर बड़ा रेलवे स्टेशन पर फेंक कर फरार हो गए.

घायल मौलवियों ने पास के गांव के लोगों को मदद के लिए बुलाया. ग्रामीणों ने रात में ही तीनों मौलवियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी. फिलहाल मामले में एसपी बागपत के आदेश पर पुलिस ने सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मामल दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है. इसरार का कहना है कि वह हमलावरों के नाम नहीं जानते, लेकिन सामने आने पर पहचान सकते हैं.

दलित लेखक कांचा इलैया पर एक बार फिर से हुआ हमला

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तेलंगाना के जगतियाल जिले में दलित लेखक कांचा इलैया पर बुधवार को कोर्ट के बाहर चप्पल से हमला किया गया. प्रदर्शनकारियों ने उन पर अंडे भी फेंके. वहां मौजूद पुलिस ने यह सुनिश्चित किया वो सुरक्षित रूप से कार में बैठ जाए. यह घटना तब हुई जब वह कोरूतला कोर्ट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठने जा रहे थे.

बता दें कि कांचा इलैया की किताब ‘सामाजिका स्मगलेर्लु कोमाटोलु’ का विरोध हो रहा है. इस किताब में वैश्य समुदाय के सदस्यों को सामाजिक तस्कर कहा गया है. किताब का आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे दो तेलगु प्रभावी राज्यों में व्यापक विरोध हो रहा है. सामुदायिक संगठनों ने कांचा इलैया से माफी मांगने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया

इससे पहले सितम्बर महीने में भी उनके ऊपर हमला हुआ था. वारंगल जिले में वैश्य समुदाय के लोगों ने लेखक को निशाने पर लेकर उन पर चप्पल फेंकी थी. कांचा यहां एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे. जैसे ही प्रदर्शनकारियों को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने वहां पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी थी. प्रदर्शनकारियों के हमले से बचने के लिए कांचा को पुलिस स्टेशन में शरण लेनी पड़ी थी.

रेलवे ने 800 से अधिक पदों के लिए निकाली वैकेंसी

पूर्वी रेलवे ने Apprentice पदों के लिए भर्ती निकाली है और भर्ती के माध्यम से 863 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. इस भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 7 दिसंबर 2017 से पहले आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती में अलग-अलग पद शामिल है और उन पदों के अनुसार पदों की संख्या भी तय की गई है.

पद का विवरण- भर्ती में अलग अलग डिविजन के आधार पर आवेदन मांगे गए हैं, इसमें लिलुआ और हावड़ा स्टेशन शामिल है. सभी पदों में लिलुआ डिविजन में फिटर के 80 पद, टर्नर के 11 पद, वेल्डर के 50 पद, पेटर जनरल के 5 पद, इलेक्ट्रीशियन के 15 पद, वायरमैन के 15 पद, मशीनिस्ट के 23 पद पर आवेदन मांगे गए हैं. वहीं हावड़ा डिविजन के लिए कई पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं.

योग्यता- भर्ती में 50 फीसदी अंकों के साथ एसएससी परीक्षा पास कर चुके और संबंधित फील्ड में आईटीआई कर चुके उम्मीदवार भाग ले सकते हैं.

आयु सीमा- भर्ती में 15 से 24 साल तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं और यह उम्र 30-10-2017 के आधार पर तय की जाएगी.

जॉब लोकेशन- पश्चिम बंगाल

चयन प्रक्रिया- उम्मीदवारों का चयन 10वीं के अंक और आईटीआई परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.

आवेदन फीस- आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को 100 रुपये फीस का भुगतना करना होगा और फीस पोस्टल ऑर्डर के माध्यम से जमा की जाएगी. वहीं एससी-एसटी, दिव्यांग वर्ग के उम्मीदवारों को फीस का भुगतान नहीं करना होगा.

कैसे करें अप्लाई- इस परीक्षा में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को अपना आवेदन पत्र भरकर और सभी आवश्यक कागज साथ में सलंग्न कर रेलवे ऑफिस भेजना होगा.

बैंकॉक मंदिर विस्फोट: एक संदिग्ध महिला गिरफ्तार

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नई दिल्ली। साल 2015 में थाईलैंड के इरावन मंदिर में हुए घातक विस्फोट मामले में एक संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया है. स्थानीय मीडिया के मुताबिक बुधवार रात को पुलिस ने उस महिला को सुवर्णाभूमि हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया है. ऐसा कहा जा रहा है कि गिरफ्तार की गई महिला अपना निर्दोषता को साबित करने आयी है.

दरअसल बुधवर को सुवर्णाभूमि हवाई अड्डे पर पुलिस थाईलैंड की एक संदिग्ध महिला वान्ना सुआनसन (30) का इंतजार कर रही थी. जो तुर्की से आने वाली थी. हवाई अड्डे पर महिला के पहुंचते ही उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. तभी महिला की रिश्तेदारों ने मीडिया को बताया कि वान्ना सुआनसन अपनी निर्दोषता को सिद्ध करने के लिए थाईलैंड वापस आयी है. उसने बताया कि वह 2015 के हमले के दौरान तुर्की में ही थी.

वहीं पुलिस का कहना है कि वन्ना हमले से पहले समन्वयक के रूप में काम कर रही थी, उसने हमले में शामिल अन्य संदिग्धों को किराए पर कमरे दिए थे. जो उसके पति इमराह दावुतोग्लू के दोस्त थे. वहीं महिला के पति पर बम बनाने की सामग्री मुहैया कराने का आरोप है. यह जोड़ा अपने नवजात बेटे के साथ 17 अगस्त 2015 को हुए विस्फोट से पहले फुकेट से होते हुए तुर्की चला गया था.

यह बम एक बैक-पैक में छिपाया गया था, जिसमें विस्फोट से 20 लोगों की मौत हो गई. जिसमें 12 विदेशी भी शामिल थे. इसके साथ ही 120 से अधिक लोग उस विस्फोट के कारण घायल हो गए थे. संदिग्ध आरोपी वन्ना को गिरफ्तार करने के मामले में राष्ट्रीय पुलिस उपप्रमुख श्रीवारा रानसिब्रामनकुल ने मीडिया को बताया कि उस पर हत्या की साजिश रचने में सहयोग और बम रखने का आरोप लगा है. इसलिए उसे गुरुवार को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा. वहीं अधिकारी ने बताया कि इस मामले से जुड़े 14 और संदिग्ध फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में है.

वरुण धवन को मुंबई पुलिस ने दे डाली वार्निंग

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मुंबई। फिल्म सितारों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए, न सिर्फ अपने फैन्स के प्रति बल्कि समाज के प्रति भी. फैन्स की किसी भी डिमांड को पूरा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि सुरक्षा सबसे पहले है. ऐसा ही कुछ ‘जुड़वां-2’ स्टार वरुण धवन के साथ भी हुआ.

वे ट्रैफिक सिग्नल पर अपनी फैन की रिक्वेस्ट पर इतना भावुक हो गए कि ऑटो में बैठी इस फैन के साथ सेल्फी खींचने लगे. वे खुद कार में बैठे थे. लेकिन उनके इस कारनामे को मुंबई पुलिस ने देख लिया और वरुण धवन को इसका खामियाजा चालान के तौर पर भुगतना पड़ा. चालान के साथ ही पुलिस ने उन्हें भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी है. यही नहीं, मुंबई पुलिस ने इसकी जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर दी है.

मुंबई पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक अखबार के स्नैपशॉट्स साझा किए गए हैं, जिसमें वरुण सड़क पर सेल्फी स्टंट करते नजर आ रहे हैं. इसमें अभिनेता कार की खिड़की से बाहर थोड़ा बाहर निकलकर ऑटो रिक्शा पर सवार अपनी एक महिला प्रशंसक के साथ सेल्फी लेते दिख रहे हैं.

ज्यादा पेंशन देने से ईपीएफओ ने किया इंकार

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कहा है कि वो छूट वाली कंपनियों के कर्मचारियों को पूरी सैलरी पर पेंशन नहीं दे सकेगा. हालांकि ऐसा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट में एक साल पहले चार अक्टूबर को दिया था. इस मामले पर ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की आज होने वाली बैठक में हंगामा होने के आसार हैं. ईपीएफओ ऐसी कंपनियों को छूट वाली कैटेगिरी में रखता है, जिनके कर्मचारियों के फंड को प्राइवेट ट्रस्ट मैनेज करता है. वो कंपनियां जिनके ट्रस्ट को ईपीएफओ मैनेज करता है उन्हें बगैर छूट वाली कंपनी कहा जाता है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बाद ईपीएफओ ने सभी कंपनियों के कर्मचारियों को पूरी सैलरी पर पेंशन देने लगा था, लेकिन बाद में इस फैसले से पलट गया है. अभी ईपीएफओ पेंशन स्कीम सभी कर्मचारियों की सैलरी का 8.33 फीसदी अंश पेंशन में जमा करता है. इसके लिए अधिकतम सैलरी की सीमा 15 हजार रुपये है और पेंशन भी इसी सैलरी पर दी जाती है. इससे पहले अधिकतम सैलरी 6500 रुपये थी. अगर पूरी सैलरी के हिसाब से सैलरी का अंश लिया जाता है, तो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त 10 गुना ज्यादा पेंशन मिलने की संभावना है. फिलहाल ईपीएफओ ने पूरे वेतन पर योगदान स्वीकार नहीं करने की बात कही है. इसके पीछे ईपीएफओ ने दलील दी है कि कंपनी और कर्मचारियों को तय सीमा से ज्यादा वेतन पर योगदान की जानकारी फैसले के 6 महीने के भीतर देनी चाहिए थी. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की 6 महीने वाली दलील को मनमाना बताते हुए इसे खत्म करने का निर्देश दिया था. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने वाले 12 लोगों में 2 छूट वाली कंपनियों से आते हैं.

भुवनेश्वर कुमार और उनकी बचपन की दोस्त नूपुर ने कर ली शादी

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गुरुवार को टीम इंडिया के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार अपनी गर्लफ्रेंड नूपुर के हो जाएंगे. भुवी पूरे धूमधाम के साथ घोड़ी चढ़ बारात लेकर निकले. कोलकाता टेस्ट में धूम मचाने के बाद भुवनेश्वर ने अपनी शादी के लिए टीम इंडिया से छुट्टी ले ली है.

घुड़चढ़ी के बाद बारात गुरुवार सुबह करीब 11 बजे मेरठ बाइपास स्थित होटल ब्राउरा पहुंची. इस दौरान उनके करीबी दोस्तों के अलावा मेरठ, बागपत और बुलंदशहर में रहने वाले रिश्तेदारों ने जमकर जश्न मनाया. इस मौके पर मीडिया को दूर रखा गया था. बताया जाता है कि दोपहर में चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में शादी की रस्म पूरी होगी. शाम में ही इसी होटल में भुवनेश्वर की ओर से रिशेप्सन का आयोजन किया गया है. 3 अक्टूबर को भुवी ने अपनी ‘बेटर हाफ’ की फोटो शेयर की थी.

रिसेप्शन में शहर के प्रमुख लोगों को न्योता दिया गया है. भुवनेश्वर के पिता किरणपाल के मुताबिक 26 नवंबर को भुवनेश्वर के पैतृक गांव बुलंदशहर के लुहारली गांव में दूसरा रिशेप्सन होगा. 5 दिसंबर को दिल्ली के ताज होटल में एक और पार्टी होगी, जिसमें भारत -श्रीलंका की टीमें शिरकत करेंगी. साथ ही राजनीति, क्रिकेट और फिल्म जगत से जुड़ी बड़ी हस्तियों को भी आमंत्रित किया गया है.

योगी के मंत्री मोहसिन रजा की किरकिरी

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उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. रजा का निकाहनामे का रजिस्ट्रेशन कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से निरस्त हो गया है. हालांकि इस मामले में मंत्री ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं हुआ है. इस मामले में जल्द ही सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी.

बता दें कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सूबे में शादियों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य कर दिया था. मुस्लिम संगठनों द्वारा सरकार की इस पहल के विरोध के बीच वक्फ और हज मंत्री मोहसिन रजा ने अपने निकाह का रजिस्ट्रेशन करवाकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब उनका ही रजिस्ट्रेशन आवेदन निरस्त हो गया है.

कहा जा रहा है कि तय सीमा में जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने से उनका आवेदन निरस्त हुआ है. अब उन्हें नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करनी होगी. रजा ने कहा कि कानून के मुताबिक, तीन महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ले लेना चाहिए लेकिन मैं व्यस्तता की वजह से सर्टिफिकेट लेने नहीं जा सका. उन्होंने कहा कि इस मामले में आगे जो भी कार्रवाई जरूरी है, उसे पूरा किया जाएगा.

गौरतलब है कि रजा ने निकाह के करीब 16 साल बाद तीन अगस्त को निकाहनामे के रजिस्ट्रेशन का आवेदन दिया था. जिसके बाद अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार के कार्यालय से सर्टिफिकेट के लिए दो बार मंत्री को फोन से जानकरी दी गई लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने की वजह से निकाहनामे का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया.

हाफिज सईद की रिहाई से नाखुश है अमेरिका

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लाहौर। लाहौर हाईकोर्ट ने 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और आतंकी संगठन जमात उद दावा के सरगना हाफिज सईद की 297 दिनों से चली आ रही नजरबंदी को खत्म करने का आदेश दिया है. उसके कहीं भी आने-जाने पर लगा प्रतिबंध भी हटा दिया गया है. ऐसे में हाफिज सईद गुरुवार को ही रिहा हो सकता है. अमेरिका ने इस फैसले का विरोध किया है. ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका दोनों ने ही जब हाफिज सईद को आतंकी घोषित कर रखा है, तब भी उसे बाहर आने की अनुमति देना हैरान करने वाला है. गौरतलब है कि प्रतिबंधित जमात के सरगना के सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ डॉलर (करीब 65 करोड़ रुपये) का इनाम रखा है.

अमेरिका के विदेश मामले की प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि हाफिज को विशेष रूप से अधिशासी आदेश संख्या 13224 के तहत वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है. इसी तरह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव यूएनएससीआर 1267 के तहत मुंबई हमले के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया था. ऐसे में हाफिज की नजरबंदी खत्म करने का फैसला समझ से परे है. इतना ही नहीं, भारत ने भी पाकिस्तान को मुंबई हमले की फिर से जांच के लिए कई बार कहा है. साथ ही हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी के खिलाफ भारत के दिए सुबूतों पर कोर्ट में सुनवाई कराने की मांग की हुई है. हाफिज सईद इसी साल जनवरी से घर में नजरबंद था.

पाकिस्तान के पंजाब सरकार की नजरबंदी और तीन महीने बढ़ाने की याचिका को बुधवार को पंजाब के न्यायिक समीक्षा बोर्ड ने खारिज कर दिया. लाहौर हाईकोर्ट के जजों वाले बोर्ड ने पिछली बार बढ़ाई गई 30 दिनों की नजरबंदी पूरी होने पर सईद को रिहा करने का आदेश दिया है. बोर्ड की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस अब्दुल समी खान ने कहा कि हाफिज सईद अगर किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो सरकार उसे रिहा कर दे. अगर पंजाब सरकार ने जल्द ही उसे किसी अन्य मामले में बंदी नहीं बनाया तो वह गुरुवार से ही पाकिस्तान में आजाद घूमेगा.

सईद के वकील एके डोगर ने बताया कि वह गुरुवार को ही नजरबंदी से आजाद हो जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि हाफिज सईद को गलत तरीके से 297 दिनों तक नजरबंद रखा गया. हाफिज ने हमेशा पाकिस्तान के लिए काम किया, लेकिन पाकिस्तान सरकार उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं जुटा पाई. हालांकि पाकिस्तानी न्यायिक बोर्ड के फैसले से पहले केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने भी सईद की नजरबंदी को सही साबित करने के लिए कुछ अहम सुबूत पेश किए. लेकिन बोर्ड इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय होगा नाराज अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नाराजगी की बात कहते हुए पाक की पंजाब सरकार ने मंगलवार को हाफिज की नजरबंदी को और तीन महीने जारी रखने की न्यायिक समीक्षा बोर्ड से इजाजत मांगी थी. सईद के खिलाफ अहम सुबूत पंजाब के गृह मंत्रालय ने कहा है कि अगर हाफिज सईद को अभी रिहा किया तो पाकिस्तान पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लग जाएंगे. मंत्रालय ने बताया कि हाफिज सईद को खुफिया जांच के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि हमारे पास हाफिज सईद के खिलाफ कुछ महत्वपूर्ण सुबूत हैं, जो उसकी नजरबंदी को जायज ठहराते हैं.

दलित शक्ति केन्द्र जाकर राष्ट्रीय ध्वज स्वीकारेंगे राहुल, रुपाणी ने मना कर दिया..

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात की सियासी जंग फतह करने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हैं. गुजरात नवसृजन यात्रा के चारों दौर की यात्रा को पूरा करने के बाद एक बार फिर शुक्रवार को सियासी रण में उतरने जा रहे हैं. दो दिवसीय दौरे के तहत राहुल गांधी इस बार दलित शक्ति केंद्र का दौरा करेंगे और राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करेंगे. साथ ही राहुल भारत को छुआ-छूत जैसी कुप्रथाओं से मुक्त करने के लिए भी शपथ लेंगे. बता दें कि इसी दलित शक्ति केंद्र पर विजय रुपाणी को राष्ट्रीय ध्वज पेश किया गया था, लेकिन उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया.

दलित शक्ति केंद्र द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक ये भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज, है जो 125 फुट चौड़ा और 83.3 फुट ऊंचा है. एक समय इसे गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को सौंपा जाना था और उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर ने जिस तरह से छुआ-छूत प्रथाओं को खत्म करने के लिए कदम उठाए थे उसी तरह के प्रयास करने के लिए कहा गया था. इस पेशकश पर गुजरात के मुख्यमंत्री की ओर से गांधीनगर कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने कहा कि उनके पास राष्ट्रीय ध्वज रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. इसलिए मुख्यमंत्री इस ध्वज को नहीं ले सकते हैं.

शक्ति केंद्र ने आगे कहा है कि राहुल गांधी शुक्रवार को गुजरात के दलित शक्ति केंद्र पर आएंगे. राहुल इस केंद्र से भारत के नागरिकों की ओर से पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार करेंगे और देश को छुआ-छूत से मुक्त कराने के लिए वचन देंगे. कहा गया है कि एक राजनेता के तौर पर राहुल गांधी का ये एक ऐतिहासिक कदम है और ये उन लोगों के खिलाफ लड़ाई है जो एंटी-नेशनलिज्म को बढ़ावा और राष्ट्रीय सम्मान का अपमान करते हैं. मालूम हो कि गुजरात में 7 फीसदी दलित मतदाता हैं. राज्य की 182 सीटों में से 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. गुजरात में दलित मतदाताओं पर बीजेपी की मजबूत पकड़ मानी जाती है. 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी इन 13 सीटों में से 10 सीटें जीतने में सफल रही है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3 सीटें आई थी.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के दलित मतदाताओं को साधने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. गुजरात में दलित नेता जिग्नेश मेवाणी का समर्थन हासिल करने के बाद राहुल गांधी अब दलित शक्ति केंद्र का दौरा कर रहे हैं. इस यात्रा के बहाने राहुल गांधी की गुजरात में बीजेपी के दलित वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश है. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी बीजेपी के खिलाफ गुजरात में मोर्चे पर हैं. उन्होंने अहमदाबाद के ओधाव औद्योगिक क्षेत्र में राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के करीब 2,000 सदस्यों को एकजुट करके संबोधित करते हुए कहा- हमें अंबेडकर के नाम पर गर्व है. जिग्नेश ने बीजेपी को दलित, गरीब और संविधान विरोधी बताया.

पीट-पीटकर, करंट लगाकर ड्राइवर अशोक से कबूल कराया गुनाह

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गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार 76 दिनों तक हिरासत में रहने के बाद घर पहुंच गया. हाल ही में कोर्ट ने उसे जमानत दी है. अशोक कुमार ने रिहाई के बाद कहा, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उसने मुझे न्याय दिया. हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है.’

आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार ने बताया, ‘मुझे हिरासत में टॉर्चर किया गया. बिजली के करंट के झटके दिए गए. पुलिस ने थर्ड डिग्री देकर जुर्म कबूल करने के लिए मजबूर किया. यहां तक की नशा भी दिया जाता था.’ परिजनों ने कहा, ‘हमें शुरू से ही पता था कि वह निर्दोष हैं. उसने कभी अपने बच्चों पर हाथ नहीं उठाया.’ आरोपी बस कंडक्टर के वकीलों ने उसकी जमानत का आदेश जेल प्रशासन को बुधवार की शाम करीब तीन बजे के बाद सौंपा और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे देर शाम जेल से रिहा कर दिया गया. जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘कानूनी दस्तावेजों की छानबीन करने के बाद अशोक को रात करीब आठ बजे रिहा कर दिया गया.’

गुरुग्राम के सोहना के पास स्थित अशोक कुमार के गांव घमरोज के प्रमुख लोग सुबह से भोडसी जेल के बाहर मौजूद थे. उन्होंने अशोक के बाहर निकलने के बाद उसका स्वागत किया. अशोक की मां के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे. उसकी पत्नी की तबियत अचानक खराब हो जाने के चलते उसे बुधवार सुबह अस्पताल भी ले जाना पड़ा था.

अशोक की घर वापसी की खुशी पत्नी के मायूस चेहरे पर साफ झलक रही थी. उसने कहा, ‘मुझे पहले से ही पता था वो निर्दोष हैं. उसने कभी अपने बच्चों पर हाथ तक नही उठाया. वो किसी मासूम की हत्या कैसे कर पाएगा. आज मेरे लिए होली और दीवाली का दिन है. मैं ही जानती हूं कैसे ये 76 दिन बीते है. मेरी हर रात रो के गुजरी है.’ मां ने अपनी हैसियत के हिसाब से सबसे अच्छा खाना रोटी और दाल बनाया. चूल्हे पर रोटियां सेंकती मां और बीवी दोनों ही खुश थीं. अशोक के आने से परिवार के सदस्यों की उम्मीदे बढ़ गई हैं. वो आगे भी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं, क्योंकि उनके साथ गांव का सपोर्ट है. पूरा गांव उनके दुख-सुख में साथ खड़ा रहा. उनकी मदद करता रहा है. बताते चलें कि अशोक कुमार को 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिली है. अशोक पड़ोसी महेश राघव ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री के पेपर बतौर जमानत दिया. महेश ने बताया, ‘हमारे घर की दीवार एक है. मैंने अपनी जमीन की रजिस्ट्री के पेपर बतौर जमानत दिया है. गांववालों ने भी 50-100 रुपये तक का चंदा लगाकर अशोक की मदद की है.’

आरोपी के वकील मोहित वर्मा ने कहा कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत उन्हें जमानत दे दी. अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जिंदगी और स्वतंत्रता का अधिकार देता है. सीबीआई और हरियाणा पुलिस के सिद्धांतों के बीच बड़ा संघर्ष था. संदेह के लाभ के आधार पर उन्हें जमानत दी गई है. अशोक को फंसाया गया था.