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करिश्माई कांशीराम
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देश में गरीबी अमीरी की खाई का डरावना सच जानिए
दिल्ली। आंकड़े चाहे जो कहें, भारत में आपको हर ओर गरीबी दिख जाएगी. गांव में फैली मुफलिसी और शहरों की गलियों में मौजूद बजबजाहट इसी गरीबी की कहानी कहता है. भारत का यह हाल क्यों है, एक आंकड़े से इसका खुलासा हो गया है. असल में भारत के सिर्फ एक फीसदी अमीरों के पास कुल संपदा का 73 फीसदी हिस्सा है. दावोस में एक गैर सरकारी संस्था द्वारा जारी एक नए सर्वे में यह जानकारी सामने आई है. इससे यह बात उजागर होती है कि भारत में अमीरी और गरीबी के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है.
पिछले साल के ऑक्सफेम सर्वे से यह खुलासा हुआ था कि देश के महज 1 फीसदी अमीरों के पास कुल संपदा (wealth) का 58 फीसदी हिस्सा है. इस साल इसमें 15 फीसदी की और बढ़ोतरी हो गई है.सर्वे के अनुसार साल 2017 के दौरान भारत के एक फीसदी अमीरों की संपदा में 20.9 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. यह राशि साल 2017-18 के केंद्र सरकार के कुल बजट के बराबर है.
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल देश में 17 नए अरबपति बने हैं. इसके बाद अब देश में कुल अरबपतियों की संख्या 101 हो गई है. देश के तमाम राज्यों की जनता जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का रोना रोती रहती है, वहीं भारतीय अरबपतियों की संपत्ति बढ़कर 20.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है. यह संपत्ति सभी राज्यों कि स्वास्थ्य और शिक्षा बजट के 85 फीसदी के बराबर है. सरकारें कहती हैं कि देश बढ़ रहा है लेकिन तब क्या हो जब इस बढ़त का लाभ कुछ लोगों की मुठ्ठियों में बंद हो जाए.
राजनीतिक हाशिए पर खड़े शरद यादव अब उठाएंगे दलितों की आवाज
बिहार। नीतीश कुमार से अलगाव और राज्यसभा सदस्यता जाने के बाद राजनीतिक हाशिए पर पहुंचे शरद यादव ने अब नया रास्ता चुना है. देश में चल रही दलित राजनीति के उभार के बीच शरद यादव भी अब दलितों की बात करेंगे. इसके लिए उन्होंने बिहार को चुना है. शरद यादव ने 31जनवरी को बक्सर के नंदनगांव जाने का निर्णय लिया है. यहां से वे दलित समाज के उत्पीड़न की घटना को लेकर सूबे की नीतीश-भाजपा सरकार पर हमला बोलेंगे.
दलित समाज की ओर से यहां नंदनगांव में दलित स्वाभिमान सम्मेलन का 31 जनवरी को आयोजन रखा गया है. शरद यादव इस आयोजन मेंशामिल होंगे. दलित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए यादव के साथ जयंत चौधरी भी इस आयोजन में शिरकत करेंगे. दलित स्वाभिमान सम्मेलन की जानकारी देते हुए पूर्व जदयू नेता अली अनवर ने बताया कि पुलिस-प्रशासन की दमनकारी नीति की वजह से नंदनगांव के लोगों का जीवन बेहाल है.
स्थानीय पुलिस-प्रशासन के गलत रवैये से न सिर्फ गांव के निर्दोष दलित जेल में हैं बल्कि कई अब भी भागे फिर रहे हैं. इस गांव के लोगों में पूरी तरह से दहशत का माहौल है. बेकसूर लोगों को परेशान किया जा रहा है. पुलिस रात-बेरात दबिश देकर गांववालों को परेशान कर रही है.
फिर जनता की अदालत में आप, देखिए क्या अपील की

नई दिल्ली। पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने के बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली की जनता के नाम खुला खत लिखा है. सोमवार को लिखी गई दो पन्ने की इस चिठ्ठी में सिसोदिया ने बीजेपी पर गंदी राजनीति करने और दिल्ली पर जबरन चुनाव थोपने का आरोप लगाया है. सिसोदिया ने अपनी चिट्ठी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर भी शेयर की है.
इसमें सिसोदिया ने लिखा है- “दिल्ली की जनता के लिए मेरा एक पत्र, क्या चुने हुए विधायकों को इस तरह गैर-संवैधानिक और गैर-कानूनी तरीके से बर्खास्त करना सही है? क्या दिल्ली को इस तरह चुनावों में धकेलना ठीक है? क्या ये गंदी राजनीति नहीं है?” सिसोदिया ने इस पत्र में केजरीवाल सरकार द्वारा तीन साल में कराए गए कार्यों को भी गिनाया है और लिखा है कि चुनाव होने की वजह से अब दिल्ली में आचार संहिता लागू हो जाएगी. ऐसी स्थिति में नए काम नहीं हो सकेंगे. इसके बाद फिर लोक सभा चुनाव का समय नजदीक आ जाएगा. उस वक्त भी आचार संहिता लागू हो जाएगी और दिल्ली में विकास कार्य ठप हो जाएगा.
सिसोदिया ने दावा किया है कि 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां दी थीं. इनके काम की वजह से दिल्ली के स्कूलों, अस्पतालों में आश्चर्यजनक सुधार हुआ. सिसोदिया ने लिखा है कि केंद्र की बीजेपी सरकार ने जानबूझकर ऐसा किया है क्योंकि बीजेपी केजरीवाल सरकार के कार्यों से परेशान है.
हालांकि विधायकों की बर्खास्तगी के बहाने सिसोदिया ने पार्टी द्वारा की गई उन घोषणाओं से पार्टी का बचाव भी किया है, जो अभी तक पूरी नहीं हो सकी है. सिसोदिया ने लिखा है कि अब दो साल बचे हैं इन दो सालों में बहुत काम करना था, पूरी दिल्ली में सीसीटीवी कैमरे लगाने हैं, प्री वाई-फाई देने हैं, सरकारी सेवाओं की डोरस्टोप डिलीवरी देनी है. लेकिन अब यह सब काम पूरे नहीं हो पाएंगे.
कर्ज नहीं चुकाने पर दलित को ट्रैक्टर के नीचे कुचला
उत्तर प्रदेश। सीतापुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जिले के भउरी गांव के एक दलित किसान की सिर्फ इसलिए ट्रैक्टर के नीचे कुचल कर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने लोन नहीं चुकाया था. मृतक किसान के भाई ने फायनेंस कंपनी के लोन रिकवरी एजेंट्स पर हत्या का आरोप लगाया है. हैरत की बात यह है कि पांच लाख के लोन में से किसान चार लाख रुपये वापस कर चुका था.
भउरी गांव के 45 वर्षीय ज्ञान चंद्र ने साल 2015 में फायनेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का लोन लिया था, उसने 4 लाख रुपए दिसंबर 2017 तक चुका दिए थे और बाकी पैसे भी जल्द ही चुकाने की बात कही थी. ज्ञान चंद्र की पत्नी ज्ञानवती ने बताया कि उसके पति ने इस साल जनवरी की शुरुआत में भी 35,000 रुपए कंपनी को दिए थे, लेकिन फिर भी कंपनी ने रिकवरी नोटिस जारी कर दिया. फायनेंस कंपनी के एजेंट्स बाकी रकम लेने के लिए शनिवार को ज्ञान के घर पहुंचे थे.
मृत किसान के भाई ने बताया कि उस वक्त ज्ञान खेत में काम कर रहा था और ट्रैक्टर भी उसके पास था. एजेंट्स सीधा खेत पहुंच गए और ज्ञान से बाकी पैसे मांगने लगे. एजेंट्स ने किसान से कहा कि या तो वह पैसे दे नहीं तो वे लोग ट्रैक्टर जब्त कर लेंगे. इस पर ज्ञान ने कहा कि वह जनवरी के आखिरी तक 65,000 रुपए दे देगा, लेकिन फिर भी एजेंट्स नहीं माने और ट्रैक्टर की चाबी छीन ली.
एजेंट्स को ट्रैक्टर ले जाने से रोकने के लिए ज्ञान बोनट से लटक गया, लेकिन फिर भी उन्होंने ट्रैक्टर चालू कर दिया. तभी अचानक उसका हाथ बोनट से फिसल गया और वह ट्रैक्टर के नीचे आ गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई.
सीतापुर के सहायक पुलिस अधीक्षक मारतंड प्रकाश सिंह के मुताबिक पांच एजेंट्स के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.
लेकिन यह बैंक और लोन की उस व्यवस्था पर सवाल उठाता है, जिसमें करोड़ों और अरबों के कर्जदार पर बैंक और लोन वाली कंपनियां हाथ तक नहीं डालती, जबकि गरीबों के दस और बीस हजार के लिए उन्हें ट्रैक्टर के नीचे कुचल दिया जाता है.
पीएम मोदी के झूठ को रवीश कुमार ने पकड़ा, दिखाया आईना
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने पीएम मोदी के एक बयान को लेकर उन पर फिर से निशाना साधा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कहा था कि आज के दौर में भारत का पासपोर्ट रखना गौरव की बात बन गई है। पीएम मोदी के मुताबिक-
‘जो लोग देश के बाहर रहते हैं और विदेशी दौरे पर जाते आते रहते हैं, उन्हें पता है कि आजकल भारतीय पासपोर्ट को कितने सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।’ अपने इस बयान से पीएम मोदी यह कहना चाहते थे कि केन्द्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। लेकिन उनके इसी जवाब पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया है.अपने फेसबुक वॉल पर पीएम के इस बयान का जिक्र करते हुए रवीश ने लिखा है कि क्या प्रधानमंत्री कुछ भी बोल देते हैं. बकौल रवीश-
“प्रधानमंत्री ने टाइम्स नाउ से कहा कि आज भारत के पासपोर्ट की काफी इज्ज़त है। अंग्रेज़ी वाले एंकर जुगल दिन भर तो विपक्ष विरोधी और हिन्दू मुस्लिम पत्रकारिता करते रहते हैं, थोड़ा गूगल कर लेते तो पता रहता। भारत से बाहर जाने वाले ही बता सकते हैं कि क्या पहले भारत के पासपोर्ट की इज्ज़त नहीं थी? और ये इज्ज़त होने का क्या मतलब है? क्या इस आधार पर लोगों को लौटा दिया जाता है? क्या आपको पता है कि शक्तिशाली पासपोर्ट वाले मुल्कों के मामले में भारत का स्थान एशिया में आख़िर के तीन देशों में हैं। ….
रवीश ने आखिर में लिखा है कि- अजीब हाल है। जवाब सुनकर लगा कि आज से पहले भारत ही नहीं था। कोई नाम नहीं जानता था और कोई इज्ज़त नहीं करता था।
वाराणसी में छात्रों से डरी भाजपा, सुनाया अनोखा फरमान
वाराणसी। भाजपा भले ही युवाओं के बूते केंद्र और तमाम राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही हो, अब इन्हीं युवाओं के बीच उसका विरोध शुरू हो गया है. वाराणसी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के वाराणसी दौरे के दौरान से साफ देखने को मिला. मिशन 2019 की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को वाराणसी में युवा उद्घोष कार्यक्रम को संबोधित करने पहुंचे थे. इस दौरान छात्रों को कार्यक्रम में काले कपड़े पहनने पर रोक लगा दिया गया.
कार्यक्रम से पहले ही शांति भंग की आशंका के चलते महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के करीब 25 छात्रों को हिरासत में लिया गया है. इन छात्रों को कैंट थाने में रखा गया. अपने एक दिवसीय वाराणसी दौरे पर अमित शाह करीब 17000 नए युवाओं को काशी विद्यापीठ के खेल मैदान में संबोधित करेंगे.
इस कार्यक्रम में अमित शाह के साथ सूबे के मुखिया योगी अदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, राज्यमंत्री अनुपमा जयसवाल, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय, प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल, यूपी सरकार में मंत्री अनिल राजभर और नीलकण्ठ तिवारी भी मौजूद रहे. छात्रों से ये डर भाजपा की लोकप्रियता के दावे पर सवाल खड़े करता है.
भाजपा सरकार ने जूठन को पढ़ाने पर रोक लगाई
जिस राज्य में भाजपा की सरकार बन रही है, वहां निशाने पर दलित और मुस्लिम आ रहे हैं. उत्तर प्रदेश की सहारनपुर की घटना हो या फिर गुजरात के ऊना की घटना निशाने पर लगातार दलित रहे हैं. खास बात यह कि इन घटनाओं में शामिल उपद्रवियों की सरकार अनदेखी कर देती है. ताजा मामला हिमाचल प्रदेश का है, जहां दलितों पर हमले की खबर तो नहीं है लेकिन उन्हें दूसरे तरीके से निशाना बनाया गया है.
हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की सरकार आने के बाद वहां निशाने पर दलित बुद्धिजीवि आ गए हैं. नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने दलित साहित्यकार के रुप में विख्यात ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को शिक्षण संस्थानों से हटाने का फैसला कर लिया है. ‘जूठन’ के खिलाफ यह आरोप लगाया जा रहा है कि इससे जातिवाद को बढ़ावा मिलता है.
हालांकि हिमाचल सरकार के इस फैसले के खिलाफ दलित बुद्धिजीवियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा–
मै पूछना चाहूँगा की जातिवाद की पीड़ा, दंश एवं अनादर से ‘जूठन‘ जैसी कालजयी आत्मकथा की उत्पत्ति हुई है की ‘जूठन‘ की वजह से जातिवाद पैदा होगा ? ‘जूठन‘ जैसी क्रातियों को पाठयक्रम में शामिल करने से शिक्षा व्यवस्था में प्रजातांत्रिक मूल्यों का समावेश होगा. इसके अध्ययन से विद्यार्थियों में समाज में जाति पर आधारित अमानवीय प्रथाओं को लड़ने की चेतना जाग्रत होगी जिससे सामाज ज़्यादा प्रगतिशील होगा. शायद कुछ सवर्ण समाज के शासकों को जूठन के माध्यम से अपने समाज के इस वीभत्स एवम् विकृत चेहरे को देख कर लज्जा आ गयी. अब वो इस लज्जा को सब के सामने स्वीकार तो कर नही सकते. इस लिए उन्होने इस ‘ज़ातिवाद‘ जैसे लचर आधार का सहारा लिया है. यह तो वही कहावत हो गयी की उल्टा चोर कोतवाल को डाटे . लेकिन कुछ भी हो इस प्रतिबंध से यह तो अवश्य प्रमाणित हो गया की ओम प्रकाश जी की ‘ जूठन‘ इतनी प्रभावशाली है की वह राजसत्ता को भी भयभीत कर सकती है…ओमप्रकाश वाल्मीकि जी आपकी कलम, कल्पनाशीलता एवं अदंभ साहस को शत शत नमन.
तो वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कौशल पंवार ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाया है. डॉ. कौशल कहती हैं- ये बैन पूरी तरह से गलत है. मेरा मानना है कि किसी भी साहित्य पर बैन नहीं लगाना चाहिए. सवर्ण छात्रों का कहना है कि वो जूठन पढ़ते हुए अपनमानित महसूस करते हैं. तो उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि जब दलित-पिछड़े समाज के बच्चे और तमाम महिलाएं मनुस्मृति और अन्य हिन्दू धार्मिक ग्रंथ पढ़ते हैं तो उन्हें भी तो अपमान से गुजरना पड़ता है. दूसरी बात की जूठन पर रोक के लिए गलत तथ्य पेश किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि यह उपन्यास है और आजादी के पहले का लिखा है. यह कोरा झूठ है. जूठन उपन्यास नहीं आत्मकथा है, और ये आजादी के पहले का नहीं है. यह झूठा भ्रम फैलाया जा रहा है.
गौरतलब है कि ‘जूठन’ ओमप्रकाश वाल्मीकि के निधन से वर्षों पहले लिखा गया था और वह दलित साहित्य के रुप में पूरे देश भर में लोकप्रिय है. हाल ही में बीते विश्व पुस्तक मेले में दलित साहित्य सबसे ज्यादा बिकने वाला साहित्य था और जूठन उसमें आगे रहा था. जूठन ने लगातार दलित समाज के नए युवाओं को उनके हलिया इतिहास के बारे में बताता है. लगता है भाजपा को यही बात खटक गई है. जाहिर सी बात है कि यह दलित विरोधी फैसला है. जिस तरह से भाजपा सरकार ने जूठन पर बैन का फैसला सत्ता में आने के तुरंत बाद लिया उससे साफ है कि उसकी नजर पहले से ही इस मुद्दे पर बनी हुई थी.
दलितों आदिवासियों के लिए अच्छी खबर, उच्च शिक्षा दर बढ़ी
नई दिल्ली। सामाजिक और राजनीतिक चेतना के साथ ही देश के दलित और आदिवासी वर्ग में पढऩे की ललक भी तेजी से बढ़ रही है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ताजे आंकड़े बता रहे हैं कि बीते 5 साल में उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले दलित और आदिवासी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है.
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से कराए गए एक सर्वे के मुताबिक पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश दर में कुल 21.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसमें अनुसूचित जाति की भागीदारी जो 2012-13 में 16 प्रतिशत थी, 2016-17 में बढ़ कर 21.1 प्रतिशत पर पहुंच गई. इसी तरह अनुसूचित जनजाति की 2012-13 में 11.1 प्रतिशत की भागीदारी 2016-17 में बढ़ कर 15.4 प्रतिशत पर पहुंच गई. खास बात यह है कि दोनों वर्ग में युवाओं के साथ-साथ लड़कियों ने भी उच्च शिक्षा में अपनी रुचि बढ़ाई है.
अगर इस आंकड़े को राज्यवार देखें तो तमिलनाडु पहले नंबर है, जहां दलित और आदिवासी युवाओं ने उच्च शिक्षा में सबसे ज्यादा रुचि ली है. इस लिस्ट में आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर पर और महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर है, जबकि आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश पांचवें नंबर पर है.
दलित-आदिवासियों में पढ़ाई के लिए बढ़ती ललक एक क्रांतिकारी चेतना का प्रतीक कहा जा रहा है. शिक्षा के अभाव के चलते इन वर्गों का लंबे समय तक उत्पीडऩ और शोषण होता रहा है. लेकिन राष्ट्रनिर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा इस वर्ग को शिक्षा और नौकरी में संविधान में दिलाए आरक्षण की वजह से इस वर्ग की स्थिति बेहतर हुई है. हाल तक गरीबी और सामाजिक असमानता के चलते इस वर्ग के अधिकांश बच्चे बचपन में ही स्कूल छोड़ रोजी-रोजगार में लग जाते थे, आज भी यह स्थिति बनी हुई है लेकिन इसी बीच इस वर्ग के विद्यार्थियों में पढ़ाई की बढ़ती ललक की रिपोर्ट इस समाज के लिए एक अच्छी खबर है.
देश भर में याद किए गए रोहित वेमुला
दो साल पहले 17 जनवरी को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला ने हॉस्टल के अपने कमरे में ख़ुदकुशी कर ली थी. उसके बाद रोहित वेमुला को लेकर देश भर के छात्र सड़कों पर उतर आये थे और संसद में बहस भी हुई लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी रोहित वेमुला को न्याय नहीं मिला है.
रोहित की शहादत के 2 साल बाद एक बार फिर से उनको इंसाफ दिलाने की मुहिम तेज़ हो गई है। रोहित की दूसरी पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया रोहित वेमुला की इंसाफ की मांग को लेकर एक बार फिर उबल पड़ा.
असल में रोहित की आत्महत्या हमारे आधुनिक संस्थानों पर सवाल उठाता है और यह दिखाता है कि उच्च शिक्षण संस्थान दलितों के प्रति आंतरिक रूप से असंवेदनशील है.
रोहित की आत्महत्या जिसे सांस्थानिक हत्या कहा गया वह आज भी कई सवाल खड़े करता है.
रोहित खगोल विज्ञानी और वैज्ञानिक कार्ल सैगन जैसे लेखक बनना चाहता था, लेकिन जातिवाद के जहर ने उसके सपनो को पूरा करने से पहले ही उसकी जान ले ली.
उनकी मृत्यु के दो साल बाद भी रोहित का परिवार इन्साफ की गुहार लगा रहा है.
संकट में केजरीवाल, दिल्ली में आ सकता है भाजपा का शासन
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्वल वाली आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है. लाभ के पद के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है. इस बाबत चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है. इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में आप की सरकार जा सकती है. भाजपा सूत्रों की माने तो भाजपा दिल्ली में दुबारा चुनाव करवाने के मूड में है.
अगर राष्ट्रपपति इस फैसले पर अपनी मुहर लगा देते हैं, तो ऐसे में आम आदमी पार्टी के इन 20 विधायकों की सदस्य ता रद्द हो जाएगी. हालांकि अभी इनके पास सुप्रीम कोर्ट में दरवाजा खटखटाने का रास्ताै बना हुआ है.
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति 22 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं. अपनी रिटायरमेंट से पहले वे सभी पेंडिंग केस को खत्म करना चाहते हैं, इसलिए आयोग जल्दी-जल्दी पुराने मामले निपटा रहे हैं. आपको बता दें कि इन विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के बाद से ही इनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा था.
सीनियर्स ज़ीरो और जूनियर्स हीरो, जिम्बाब्वे को 10 विकेट से धो कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई

एक युवक/एक युवती के लिए 60 हज़ार रु. प्रतिवर्ष फ़ेलोशिप प्राप्त करने का अवसर.

दलित चिंतक कांचा इलइया ने ट्रिपल तलाक पर भाजपा को बेनकाब किया

नई दिल्ली। ट्रिपल तलाक बिल को लेकर भाजपा सरकार ने जिस तरह की तेजी दिखाई है, वह काबिले गौर है. भाजपा सरकार लगातार इस मुद्दे को मुस्लिम महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़ कर देखने की बात कह रही है. हालांकि यही सरकार महिला आरक्षण बिल को लेकर चुप्पी साधे हुए है. तो हिन्दू महिलाओं को अधिकार दिलाने के नाम पर भी कुछ करती नहीं दिखती है.
दलित चिंतक कांचा इलैया ने यही मुद्दा उठाया है. इंडिया टुडे कॉनक्लेव साउथ में कांचा इलैया ने कहा कि ट्रिपल तलाक मामला एक मुस्लिम महिला लेकर कोर्ट पहुंची और बीजेपी सरकार ने उसका समर्थन किया, लेकिन मंदिर में महिलाओं की एंट्री के मामले को जब एक हिंदू महिला लेकर कोर्ट जाती है तो यही बीजेपी चुप रहती है. आखिर बीजेपी हिंदू महिलाओं के अधिकार पर चुप क्यों है.
कांचा इलैया के इस सवाल पर बहस तेज हो गई है. तो वहीं सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक बिल को लेकर मुस्लिम महिलाओं की भलाई से ज्यादा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश पर से भी पर्दा उठ गया है.
संसद में भी यह मामला सामने आने पर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था. इसे राजनीति से प्रेरित बताया गया था. तो कई सुधार की बात भी कही गई थी, जिसकी वजह से राज्यसभा में यह बिल पास नहीं हो पाया था. जहां तक कांचा इलैया की बात है तो उनका बयान उस मामले की याद दिलाता है, जब शनि मंदिर में प्रवेश को लेकर हिन्दू महिलाओं को लंबा संघर्ष करना पड़ा था.
अभिनेता प्रकाश राज का मोदी-शाह पर फिर हमला, हिन्दू नहीं हैं दोनों|
गौरी लंकेश की हत्या के बाद से ही फिल्म अभिनेता प्रकाश राज पीएम मोदी के कठोर आलोचक बन गए हैं. एक बार फिर उन्होंने पीएम मोदी पर बड़ा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनके निशाने पर मोदी के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 के में फिल्म एक्टर प्रकाश राज ने कहा कि वह मानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हिंदू नहीं है.
अपने बयान पर तर्क देते हुए प्रकाश राज ने कहा कि जब मोदी सरकार का कोई मंत्री किसी एक धर्म का पूरी तरह से सफाया करने की बात कहता है और प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के अध्यक्ष चुप रहते हैं तो उनके हिंदू होने पर सवाल उठाने को कैसे गलत ठहराया जा सकता है. प्रकाश राज के इस बयान पर भाजपा खेमे में विरोध शुरू हो गया है.
यह पहला मौका नहीं है जब प्रकाश राज ने मोदी को लेकर निशाना साधा है, बल्कि वो लगातार तमाम मुद्दों को लेकर पीएम मोदी और भाजपा सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं. प्रकाश राज ने पहली बार पीएम मोदी की तब खुलकर आलोचना की थी, जब गौरी लंकेश की उनके घर के बाहर हुई हत्या के बाद मोदी ने कोई टिप्पणी नहीं की. इस हमले में हिन्दू कट्टरपंथियों का नाम आने से अभिनेता ने भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया था. प्रकाश राज गौरी लंकेश के करीबी मित्र थे.
लालू के ट्विट से भड़के योगी समर्थक
नई दिल्ली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव अभी चारा घोटाले में जेल में सज़ा काट रहे हैं. लालू भले ही जनता से रू-ब-रू न हो पा रहे हों लेकिन उनका संदेश लगातार उनके समर्थकों तक पहुंच रहा है. लालू प्रसाद यादव समय समय पर वो ट्वीट कर अपने मन की बात लोगों तक पहुंचाते है. लेकिन इस बार लालू ने ट्वीट के ज़रिए कबीर के इस दोहे को शेयर करते हुए लिखा ‘कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हंसे हम रोये. ऐसी करनी कर चलो, हम हंसे जग रोये.’
इसके बाद से ही ट्वीटर पर उनके विरोधियों ने उनकी जमकर खिंचाई की. तरह तरह के हास्यास्पद कमैंट्स उनके इस ट्वीट पर आने लगे. जहां एक तरफ लालू के समर्थकों ने उनको ट्वीट कर “मिस यू नेताजी” कहा तो वहीं दूसरी उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रशंसक ने ये तक ट्वीट कर डाला “ललवा जब तुम पैदा हुए, भैंस रोये तुम हँसे ऐसी करनी कर चले, भैंस हँसे तुम जेल में फंसे”.
इससे पहले भी कई बार लालू अपने बेबाक ट्वीट्स के लिए ट्रोल किए जा चुके हैं. 9 जनवरी को लालू यादव ने अपने ट्वीट में लिखा था, अंधेरों को चीर कर सूरज की तरह निकलता है, लालू सच के लिए लड़ता है सर उठा कर ही चलता है. इस पर भी उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच जमकर ट्वीटर वॉर हुआ था. गौरतलब है कि लालू यादव का ट्विट उनके बेटे चला रहे हैं.
- संपादित-पीयूष
मेवाणी ने मांगी हर दलित के लिए पांच एकड़ जमीन
अहमदाबाद। गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी अपने इस नए बयान से एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. इस बार उन्होंने सरकार से प्रत्येक दलित के लिए 5 एकड़ जमीन की मांग की है. उनका कहना है कि 100 में से 70 दलित भूमिहीन हैं और ये एक अहम मुद्दा है.
हैदराबाद की जेल में कैद दलित नेता मंद कृष्णा मदिगा से मिलने के बाद मेवाणी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में वे कृष्णा मदिगा और अन्य समान विचारधारा वाले प्रगतिशील दलों के साथ मिलकर दलित उत्थान के लिए व्यापक गठबंधन बनाएंगे. इतना ही नहीं उन्होंने तेलंगान सरकार को मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए जल्द से जल्द मदिगा को रिहा करने की अपील भी की.
आपको बता दें कि मंद कृष्णा मदिगा, “मदिगा आरक्षण पोराता समीती के संस्थापक हैं, जिन्हें अनुसूचित जाति के वर्गीकरण के लिए विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था. और अब उनका समर्थन करते हुए दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने तेलंगाना सरकार और पुलिस से उन्हें रिहा करने की अपील की है. मेवाणी ने कहा कि वे अपने समुदाय के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस तरह से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से किसी को बधित रखना सही नहीं है.
- संपादित- पीयूष
यूपीएससी में निकली भर्ती, जल्दी करिए
नई दिल्ली: यूपीएससी यानि संघ लोक सेवा आयोग ने विभिन्न श्रेणियों में 23 पदों के लिए आवेदन मंगवाए हैं. इसके लिए अंतिम तारीख 1 फरवरी 2018 है. आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज की कॉपी भी अपलोड करनी है. खास बात यह है कि आवेदन केवल ऑनलाइन करना है. आइए देखते हैं किस पद के लिए कितनी सीटे हैं-
मेडिकल ऑफिसर, पदः 11
योग्यताः इंडियन मेडिकल एक्ट 1956 के तहत पहली या दूसरी अनुसूची या तीसरी अनुसूची के भाग में वर्णित संबंधित डिग्री होनी चाहिए.
वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 5,400 रुपये)
उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल.
केमिस्ट, पदः 03
योग्यताः मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी/संस्थान से केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन होना चाहिए.
अनुभव: सीएसआईआर या सरकार से मान्ययता प्राप्त लैबरोटरी में तीन साल का शोध अनुभव ओर्स या मिनरल के क्षेत्र में होना चाहिए.
केमिस्ट्री मे पीएचडी करने वाले उम्मीदवार को वरीयता मिलेगी.
वेतनमान: 56,100- 1,77,500 रुपये
उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल.
असिस्टेंट प्रोफेसर (पेडियाट्रिक सर्जरी) पद: 02
योग्यता: मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए.
अनुभव: पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अध्यापन का तीन साल का अनुभव संबंधित के क्षेत्र में सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर/डेमोस्ट्रेटर/रजिस्ट्रार के रूप में होना चाहिए.
वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 6,600 रुपये)
उम्र सीमाः अधिकतम 43 साल.
डिप्टी डायरेक्टर (एक्जामिनेशन रिफॉर्म्स), पदः 01
योग्यताः इतिहास/ समाज शास्त्र/ राजनित विज्ञान/ अर्थशास्त्र/ भूगोल, लोक प्रशासन या कानून में पोस्ट ग्रेजुएशन या समकक्ष पीजी डिप्लोमा होना चाहिए.
अनुभव: पांच साल का अनुभव अध्यापन/एक्जामिनेशन रिफॉर्म/ऑनलाइन एक्जामिनेशन एडमिनिस्ट्रेशन में होना चाहिए.
वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 6,600 रुपये)
उम्र सीमाः अधिकतम 40 साल.
साइंटिस्ट, बी (हाइड्रोमेट्रोलॉजिस्ट), पदः 06 योग्यताः फिजिक्स/केमिस्ट्री/मैथमेटिक्स/स्टैटिस्टिक्स या साइंस से जुड़े अन्य विषय में मास्ट डिग्री. अथवा इंजीनियरिंग की किसी भी शाखा में डिग्री होना चाहिए.
अनुभव: तीन साल का शोध अनुभव हाइड्रोमेट्रोलॉजी के क्षेत्र में होना चाहिए.
वेतनमान: 56,100- 1,77,500 रुपये
उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल.

