संकट में केजरीवाल, दिल्ली में आ सकता है भाजपा का शासन

नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्वल वाली आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है. लाभ के पद के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है. इस बाबत चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है. इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली में आप की सरकार जा सकती है. भाजपा सूत्रों की माने तो भाजपा दिल्ली में दुबारा चुनाव करवाने के मूड में है.

अगर राष्ट्रपपति इस फैसले पर अपनी मुहर लगा देते हैं, तो ऐसे में आम आदमी पार्टी के इन 20 विधायकों की सदस्य ता रद्द हो जाएगी. हालांकि अभी इनके पास सुप्रीम कोर्ट में दरवाजा खटखटाने का रास्ताै बना हुआ है.

दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति 22 जनवरी को रिटायर होने जा रहे हैं. अपनी रिटायरमेंट से पहले वे सभी पेंडिंग केस को खत्म करना चाहते हैं, इसलिए आयोग जल्दी-जल्दी पुराने मामले निपटा रहे हैं. आपको बता दें कि इन विधायकों को संसदीय सचिव बनाए जाने के बाद से ही इनकी सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा था.

 

सीनियर्स ज़ीरो और जूनियर्स हीरो, जिम्बाब्वे को 10 विकेट से धो कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई

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नई दिल्ली। दक्षिण आफ्रिका के दौरे पर जहाँ सीनियर भारतीय टीम को लगातार दूसरे टेस्ट में भी हार का सामना करना पड़ा वहीँ दूसरी ओर न्यूजीलैंड में खेले जा रहे अंडर19 विश्व कप में इंडिया अंडर19 का जलवा जारी है. जिम्बाब्वे को हराते हुए इस टूर्नामेंट में भारत ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की. पृथ्वी शॉ की कप्तानी में न्यूजीलैंड में जूनियर्स जिस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं उससे एक बार फिर से अंडर19 विश्व कप भारत आने की उम्मीद जग गई है. जिम्बाब्वे से पहले भारत ने अपने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 100 रन से और दूसरे मैच में पापुआ न्यू गिनी को 10 विकेट से हराया था. जिम्बाब्वे पर जीत के साथ ही भारत ने क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह बना ली है. भारत की तरफ से सबसे बेहतरीन गेंदबाजी एक बार फिर से अनुकूल रॉय ने की और 4 विकेट चटकाए. उन्होंने 7.1 ओवर में 20 रन दिए और चार बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा. इससे पहले यानी पापुआ गिनी के खिलाफ भी अनुकूल ने 5 विकेट लिए थे. इसके अलावा भारत की तरफ से अभिषेक शर्मा और अर्शदीप सिंह ने 2-2 विकेट लिए. रियान पराग को भी एक विकेट मिला. भारत के खिलाफ जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. उनका ये फैसला सही साबित नहीं रहा और टीम के बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के सामने घुटने टेकते नजर आए. वेस्ले मधीवीरे (30), मितोन शुंबा (36) और कप्तान लियान रोचे (31) सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. इनके अलावा कोई भी बल्लेबाज 20 का आंकड़ा भी नहीं छू पाया. ये टीम किसी तरह से 154 रन तक पहुंच पाई और भारतीय टीम को जीत के लिए 155 रन का लक्ष्य मिला. इंडिया अंडर 19 टीम को जीत के लिए 155 रन का आसान लक्ष्य मिला जिसे भारतीय टीम ने बिना कोई विकेट खोए 21.4 ओवर में ही हासिल कर लिया. भारत की तरफ से ओपनर शुभम गिल ने नाबाद 90 और हार्विक देसाई ने नाबाद 56 रन की पारी खेल कर टीम को आसान जीत दिला दी. दोनों के बीच 155 रन की साझेदारी हुई. इस मैच में कप्तान पृथ्वी शॉ ओपनिंग बल्लेबाजी करने नहीं आए. शुभम गिल को उनकी नाबाद 90 रन की पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया.    

एक युवक/एक युवती के लिए 60 हज़ार रु. प्रतिवर्ष फ़ेलोशिप प्राप्त करने का अवसर.

देश के प्रतिष्ठित सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन दिल्ली में युवाओं (एक युवक और एक युवती) से बाबा साहेब डॉक्टर अम्बेडकर फ़ेलोशिप के लिए आवेदन आमंत्रित करता है. सालाना 60 हज़ार रुपए की यह फ़ेलोशिप उन युवाओं को दी जाएगी, जो सामाजिक और राजनीतिक कामों में रूचि रखते हों. यह युवा किसी भी राजनीतिक दल, छात्र संगठन या राजनीतिक वैचारिक समूह से ना जुड़े हों.
इन युवाओं की एनसीआर दिल्ली के स्लम व अन्य जगहों पर दलित/आदिवासी/अल्पसंख्यक/पिछड़े वर्गों के युवाओं को बाबा साहेब अम्बेडकर और उनके आंदोलन से जोड़ने में रूचि होनी चाहिए.
ऐसे युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो:
1. किसी सामाजिक गतिविधि में सक्रिय रहे हों, और उसके प्रमाण दे सकें.
2. डॉक्टर अम्बेडकर, उनके विचारों ka ज्ञान हो और आंदोलन में हिस्सेदारी करते रहे हों.
3. कम से कम 10 क्लास तक पढ़े हों, और सामाजिक, राजनीतिक काम को भविष्य में भी करना चाहते हों.
4. अच्छे वक़्ता हों, या विचार फैलाने और संगठन बनाने में रूचि हो.
5. बच्चों व युवाओं के साथ काम करने में रूचि हो.
6. देश में चल रहे दलित, आदिवासी व अन्य तबक़ों के आंदोलन में भागीदारी करने और उनमें सहयोग करने की इच्छा हो.
7. सोशल मीडिया पर काफ़ी तेज़ हों.
8. यह एक पूर्णकालिक फ़ेलोशिप है. फ़ुलटाइम छात्र/छात्राओं के आवेदन केवल इक्सेप्शनल केस में ही स्वीकार किए जाएँगे.
जो भी युवा इस फ़ेलोशिप के इच्छुक हों, वह अपने बायोडेटा dalitonstreet@gmail.com पर भेजने का कष्ट करें. सफल उम्मीदवारों को इंटर्व्यू के लिए बुलाया जाएगा.

दलित चिंतक कांचा इलइया ने ट्रिपल तलाक पर भाजपा को बेनकाब किया

नई दिल्ली। ट्रिपल तलाक बिल को लेकर भाजपा सरकार ने जिस तरह की तेजी दिखाई है, वह काबिले गौर है. भाजपा सरकार लगातार इस मुद्दे को मुस्लिम महिलाओं की स्वतंत्रता से जोड़ कर देखने की बात कह रही है. हालांकि यही सरकार महिला आरक्षण बिल को लेकर चुप्पी साधे हुए है. तो हिन्दू महिलाओं को अधिकार दिलाने के नाम पर भी कुछ करती नहीं दिखती है.

दलित चिंतक कांचा इलैया ने यही मुद्दा उठाया है. इंडिया टुडे कॉनक्लेव साउथ में कांचा इलैया ने कहा कि ट्रिपल तलाक मामला एक मुस्लिम महिला लेकर कोर्ट पहुंची और बीजेपी सरकार ने उसका समर्थन किया, लेकिन मंदिर में महिलाओं की एंट्री के मामले को जब एक हिंदू महिला लेकर कोर्ट जाती है तो यही बीजेपी चुप रहती है. आखिर बीजेपी हिंदू महिलाओं के अधिकार पर चुप क्यों है.

कांचा इलैया के इस सवाल पर बहस तेज हो गई है. तो वहीं सरकार द्वारा ट्रिपल तलाक बिल को लेकर मुस्लिम महिलाओं की भलाई से ज्यादा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश पर से भी पर्दा उठ गया है.

संसद में भी यह मामला सामने आने पर तमाम विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया था. इसे राजनीति से प्रेरित बताया गया था. तो कई सुधार की बात भी कही गई थी, जिसकी वजह से राज्यसभा में यह बिल पास नहीं हो पाया था. जहां तक कांचा इलैया की बात है तो उनका बयान उस मामले की याद दिलाता है, जब शनि मंदिर में प्रवेश को लेकर हिन्दू महिलाओं को लंबा संघर्ष करना पड़ा था.

 

अभिनेता प्रकाश राज का मोदी-शाह पर फिर हमला, हिन्दू नहीं हैं दोनों|

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गौरी लंकेश की हत्या के बाद से ही फिल्म अभिनेता प्रकाश राज पीएम मोदी के कठोर आलोचक बन गए हैं. एक बार फिर उन्होंने पीएम मोदी पर बड़ा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनके निशाने पर मोदी के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 के में फिल्म एक्टर प्रकाश राज ने कहा कि वह मानते हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हिंदू नहीं है.

अपने बयान पर तर्क देते हुए प्रकाश राज ने कहा कि जब मोदी सरकार का कोई मंत्री किसी एक धर्म का पूरी तरह से सफाया करने की बात कहता है और प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के अध्यक्ष चुप रहते हैं तो उनके हिंदू होने पर सवाल उठाने को कैसे गलत ठहराया जा सकता है. प्रकाश राज के इस बयान पर भाजपा खेमे में विरोध शुरू हो गया है.

यह पहला मौका नहीं है जब प्रकाश राज ने मोदी को लेकर निशाना साधा है, बल्कि वो लगातार तमाम मुद्दों को लेकर पीएम मोदी और भाजपा सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं. प्रकाश राज ने पहली बार पीएम मोदी की तब खुलकर आलोचना की थी, जब गौरी लंकेश की उनके घर के बाहर हुई हत्या के बाद मोदी ने कोई टिप्पणी नहीं की. इस हमले में हिन्दू कट्टरपंथियों का नाम आने से अभिनेता ने भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया था. प्रकाश राज गौरी लंकेश के करीबी मित्र थे.

 

लालू के ट्विट से भड़के योगी समर्थक

नई दिल्ली। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव अभी चारा घोटाले में जेल में सज़ा काट रहे हैं. लालू भले ही जनता से रू-ब-रू न हो पा रहे हों लेकिन उनका संदेश लगातार उनके समर्थकों तक पहुंच रहा है. लालू प्रसाद यादव समय समय पर वो ट्वीट कर अपने मन की बात लोगों तक पहुंचाते है. लेकिन इस बार लालू ने ट्वीट के ज़रिए कबीर के इस दोहे को शेयर करते हुए लिखा ‘कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हंसे हम रोये. ऐसी करनी कर चलो, हम हंसे जग रोये.’

इसके बाद से ही ट्वीटर पर उनके विरोधियों ने उनकी जमकर खिंचाई की. तरह तरह के हास्यास्पद कमैंट्स उनके इस ट्वीट पर आने लगे. जहां एक तरफ लालू के समर्थकों ने उनको ट्वीट कर “मिस यू नेताजी” कहा तो वहीं दूसरी उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रशंसक ने ये तक ट्वीट कर डाला “ललवा जब तुम पैदा हुए, भैंस रोये तुम हँसे ऐसी करनी कर चले, भैंस हँसे तुम जेल में फंसे”.

इससे पहले भी कई बार लालू अपने बेबाक ट्वीट्स के लिए ट्रोल किए जा चुके हैं. 9 जनवरी को लालू यादव ने अपने ट्वीट में लिखा था, अंधेरों को चीर कर सूरज की तरह निकलता है, लालू सच के लिए लड़ता है सर उठा कर ही चलता है. इस पर भी उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच जमकर ट्वीटर वॉर हुआ था. गौरतलब है कि लालू यादव का ट्विट उनके बेटे चला रहे हैं.

  • संपादित-पीयूष

मेवाणी ने मांगी हर दलित के लिए पांच एकड़ जमीन

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अहमदाबाद। गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी अपने इस नए बयान से एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. इस बार उन्होंने सरकार से प्रत्येक दलित के लिए 5 एकड़ जमीन की मांग की है. उनका कहना है कि 100 में से 70 दलित भूमिहीन हैं और ये एक अहम मुद्दा है.

हैदराबाद की जेल में कैद दलित नेता मंद कृष्णा मदिगा से मिलने के बाद मेवाणी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में वे कृष्णा मदिगा और अन्य समान विचारधारा वाले प्रगतिशील दलों के साथ मिलकर दलित उत्थान के लिए व्यापक गठबंधन बनाएंगे. इतना ही नहीं उन्होंने तेलंगान सरकार को मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए जल्द से जल्द मदिगा को रिहा करने की अपील भी की.

आपको बता दें कि मंद कृष्णा मदिगा, “मदिगा आरक्षण पोराता समीती के संस्थापक हैं, जिन्हें अनुसूचित जाति के वर्गीकरण के लिए विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया था. और अब उनका समर्थन करते हुए दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने तेलंगाना सरकार और पुलिस से उन्हें रिहा करने की अपील की है. मेवाणी ने कहा कि वे अपने समुदाय के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस तरह से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से किसी को बधित रखना सही नहीं है.

  • संपादित- पीयूष

यूपीएससी में निकली भर्ती, जल्दी करिए

नई दिल्ली: यूपीएससी यानि संघ लोक सेवा आयोग ने विभिन्न श्रेणियों में 23 पदों के लिए आवेदन मंगवाए हैं. इसके लिए अंतिम तारीख 1 फरवरी 2018 है. आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज की कॉपी भी अपलोड करनी है. खास बात यह है कि आवेदन केवल ऑनलाइन करना है. आइए देखते हैं किस पद के लिए कितनी सीटे हैं- मेडिकल ऑफिसर, पदः 11 योग्यताः इंडियन मेडिकल एक्ट 1956 के तहत पहली या दूसरी अनुसूची या तीसरी अनुसूची के भाग में वर्णित संबंधित डिग्री होनी चाहिए. वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 5,400 रुपये) उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल. केमिस्ट, पदः 03 योग्यताः मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी/संस्थान से केमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन होना चाहिए. अनुभव: सीएसआईआर या सरकार से मान्ययता प्राप्त लैबरोटरी में तीन साल का शोध अनुभव ओर्स या मिनरल के क्षेत्र में होना चाहिए. केमिस्ट्री मे पीएचडी करने वाले उम्मीदवार को वरीयता मिलेगी. वेतनमान: 56,100- 1,77,500 रुपये उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल. असिस्टेंट प्रोफेसर (पेडियाट्रिक सर्जरी) पद: 02 योग्यता: मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. अनुभव: पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अध्यापन का तीन साल का अनुभव संबंधित के क्षेत्र में सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर/डेमोस्ट्रेटर/रजिस्ट्रार के रूप में होना चाहिए. वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 6,600 रुपये) उम्र सीमाः अधिकतम 43 साल. डिप्टी डायरेक्टर (एक्जामिनेशन रिफॉर्म्स), पदः 01 योग्यताः इतिहास/ समाज शास्त्र/ राजनित विज्ञान/ अर्थशास्त्र/ भूगोल, लोक प्रशासन या कानून में पोस्ट ग्रेजुएशन या समकक्ष पीजी डिप्लोमा होना चाहिए. अनुभव: पांच साल का अनुभव अध्यापन/एक्जामिनेशन रिफॉर्म/ऑनलाइन एक्जामिनेशन एडमिनिस्ट्रेशन में होना चाहिए. वेतनमान: 15,600- 39,100 रुपये (ग्रेड पे 6,600 रुपये) उम्र सीमाः अधिकतम 40 साल. साइंटिस्ट, बी (हाइड्रोमेट्रोलॉजिस्ट), पदः 06                                                                                    योग्यताः फिजिक्स/केमिस्ट्री/मैथमेटिक्स/स्टैटिस्टिक्स या साइंस से जुड़े अन्य विषय में मास्ट डिग्री. अथवा इंजीनियरिंग की किसी भी शाखा में डिग्री होना चाहिए. अनुभव: तीन साल का शोध अनुभव हाइड्रोमेट्रोलॉजी के क्षेत्र में होना चाहिए. वेतनमान: 56,100- 1,77,500 रुपये उम्र सीमाः अधिकतम 35 साल.      

मध्यप्रदेश के स्कूलों में दलित बच्चों के साथ भयंकर भेदभाव, रिपोर्ट

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के स्कूलों में दलित समाज के बच्चों से भेदभाव को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक आज भी मध्य प्रदेश के स्कूलों में 92 प्रतिशत बच्चों के साथ भेदभाव होता है.चाइल्ड राइट ऑब्सरवेट्री और मध्यप्रदेश दलित अभियान संघ के हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि 92फीसदी दलित बच्चों को आज भी स्कूलों में हैंडपंप और टंकी छूने पर पाबंदी है.

सर्वे के दौरान दलित बच्चों ने कहा कि जब गैरदलित बच्चे उन्हें ऊपर से पानी पिलाते हैं, तभी उनको पानी पीने को मिलता है. जबकि 28 फीसद बच्चों ने कहा कि वह घर जाकर ही पानी पीते हैं. यही नहीं, सर्वे के मुताबिक स्कूल में दलित बच्चों को क्लास में आगे बैठने की भी मनाही है. उन्हें पीछे और बीच की लाइन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, चाहे वह पढ़ने में कितना भी तेज हो.

इस सर्वे में शिक्षकों का दलित बच्चों के प्रति व्यवहार भी सामने आया है. 88 फीसद दलित बच्चों का कहना था कि शिक्षक उनके साथ भेदभाव करते हैं. तो 23 प्रतिशत बच्चों का यह भी कहना है कि शिक्षक उनसे ज्यादा सख्ती से पेश आते है.

यह सर्वे बुंदलेखंड, चंबल, महाकौशल एयर निमाड़ के 10 जिलों के 30 गाँवों के 412 दलित परिवारों के बीच किया गया है. बता दें कि मध्य प्रदेश और केंद्र में दोनों ही जगह भाजपा सरकार है. इस सर्वे का मानवीय पहलू यह भी है कि जब स्कूलों में बच्चों के साथ इतना भेदभाव होता है तो आखिर वो कैसे आगे बढ़ेंगे. आरक्षण के खिलाफ बहस करने वाले लोगों को पहले इस भेदभाव के खिलाफ लड़ना होगा.

 

आज ही के दिन पैदा हुआ था वीरप्पन, जानिए उससे जुड़े अनसुने सच

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18 जनवरी 1952 को जन्मे वीरप्पन के बारे में कहा जाता है कि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार हाथी का शिकार किया था. हाथी को मारने की उसकी पसंदीदा तकनीक होती थी, उसके माथे के बींचोंबीच गोली मारना.

एक बार वन अधिकारी श्रीनिवास ने वीरप्पन को गिरफ़्तार भी किया था. लेकिन उसने सुरक्षाकर्मियों से कहा उसके सिर में तेज़ दर्द है, इसलिए उसे तेल दिया जाए जिसे वो अपने सिर में लगा सके. उसने वो तेल सिर में लगाने की बताए अपने हाथों में लगाया. कुछ ही मिनटों में उसकी कलाइयाँ हथकड़ी से बाहर आ गईं. हालांकि वीरप्पन कई दिनों तक पुलिस की हिरासत में था लेकिन उसकी उंगलियों के निशान नहीं लिए गए.

वीरप्पन की ख़ूंख़ारियत का ये आलम था कि एक बार उसने भारतीय वन सेवा के एक अधिकारी पी श्रीनिवास का सिर काट कर उससे अपने साथियों के साथ फ़ुटबॉल खेली थी. ये वही श्रीनिवास थे जिन्होंने वीरप्पन को पहली बार गिरफ़्तार किया था.

अपराध जगत में क्रूरता के आपने कई उदाहरण सुने होंगे लेकिन ये नहीं सुना होगा कि किसी लुटेरे या डाकू ने अपने आप को बचाने के लिए अपनी नवजात बेटी की बलि चढ़ा दी हो.

1993 में वीरप्पन की एक लड़की पैदा हुई थी. तब तक उसके गैंग के सदस्यों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी थी. जंगल में बच्चे के रोने की आवाज़ रात के अंधेरे में ढाई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है. एक बार वीरप्पन उसके रोने की वजह से मुसीबत में फ़ंस चुका था. इसलिए उसने अपनी बच्ची की आवाज़ को हमेशा के लिए बंद करने का फ़ैसला किया और उसे मार डाला.

सन् 2000 में वीरप्पन ने दक्षिण भारत के मशहूर अभिनेता राज कुमार का अपहरण कर लिया. राजकुमार 100 से अधिक दिनों तक वीरप्पन के चंगुल में रहे. इस दौरान उसने कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्य सरकारों को घुटनों पर ला दिया.

जून, 2001 में तामिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के विजय कुमार को स्पेशल टॉस्क फोर्स का प्रमुख बताया. जिन्होंने तगड़ी रणनीति तैयार की और वीरपन्न को मार गिराया.

 

भाजपा मंत्री के दफ्तर पर एक करोड़ का खर्च कितना जायज

नई दिल्ली। सरकारें पांच साल के लिए बनती हैं. जो सरकार अभी है, वह पांच साल बाद आएगी या नहीं, कोई नहीं जानता, बावजूद इसके मंत्रियों द्वारा अपने दफ्तरों पर करोड़ों का खर्च कर दिया जाता है, गोया उन्हें अब ताउम्र वहीं रहना है और ये पैसे उनके घर के हों.

भाजपा के एक केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का किस्सा भी ऐसा ही है. गोयल अपने सरकारी दफ्तर को बेहतर बनाने के लिए एक करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च कर चुके हैं, लेकिन अभी भी काम बाकी ही है. नई दिल्ली के सरदार पटेल भवन में स्थ‍ित स्टाफ कैंटीन को पिछले साल ही 52 लाख रुपये खर्च कर मॉडर्न बनाया गया था, लेकिन अब इसे केंद्रीय मंत्री विजय गोयल का ऑफिस बनाने के लिए तोड़ दिया गया है. हैरान करने वाली बात यह है कि मंत्री जी के लिए ऑफिस बनाने पर अब तक 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आ चुकी है, लेकिन अब भी यह पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है और बिल बढ़ता ही जा रहा है.

बीजेपी नेता विजय गोयल पांच महीने पहले ही केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्य मंत्री बनाए गए हैं. सितंबर 2017 तक गोयल खेल एवं युवा मामलों के मंत्री थे.

इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में लगे सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गोयल खुद दो बार इस ऑफिस के काम का मुआयना कर चुके हैं. उन्होंने इसमें कुछ बदलाव के सुझाव भी दिए जिसको अंजाम देने के लिए और रकम लगेगी यानी लागत में संशोधन होगा. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दफ्तर के लिए खर्च होने वाले करोड़ों रुपये भारत की जनता के हैं, न की भाजपा के पार्टी फंड के पैसे.

 

बिहार में नौकरी करना चाहते हैं तो यह पढ़िए

अगर आप बिहार से ताल्लुक रखते हैं या फिर बिहार में नौकरी करना चाहते हैं तो आपके लिए एक बेहतर मौका है. बिहार के मत्स्य निदेशालय ने 35 पदों पर भर्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किया है. ये भर्तियां प्रदेश के मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, दरभंगा एवं मधुबनी जिले के 35 प्रखंडो में मत्स्य प्रसार पदाधिकारी के पद पर की जाएंगी. नियुक्तियां एक साल के अनुबंध पर होगी. आरक्षण से जुड़े सभी लाभ केवल बिहार के मूल निवासियों को प्राप्त होगा. अन्य राज्यों के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी के माने जाएंगे. मत्स्य प्रसार पदाधिकारी के लिए उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा. पद, योग्यता और आवेदन की जानकारी इस प्रकार हैं :

मत्स्य प्रसार पदाधिकारी, कुल पद : 35 (सामान्य- 13) योग्यता : मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से मत्स्य विज्ञान में स्नातक की डिग्री या सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एडुकेशन, मुंबई से मत्स्य विज्ञान में दो वर्षीय पीजी डिप्लोमा किया हो.

आयु सीमा : न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 37 वर्ष. अधिकतम आयु सीमा में आरक्षित वर्ग को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार छूट मिलेगी.

वेतन : 15,000 रुपये प्रति माह.

चयन प्रक्रिया : शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा.

आवेदन शुल्क : किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं देना होगा.

आवेदन प्रक्रिया : वेबसाइटलॉगइन करें.

आवेदन भेजने का पता : निदेशक मत्स्य, मत्स्य निदेशालय, ऑफिसर्स हॉस्टल, ब्लॉक-ए, बेली रोड, पटना डाक से आवेदन फॉर्म स्वीकार होंगे : 09 फरवरी 2018 अधिक जानकारी के लिए आप यहां फोन या ईमेल कर सकते हैं. फोन : (0612)-2535800 ई-मेल : directorfisheries-bihnic.in

   

गवास्कर को क्यों याद आएं धोनी

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भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, सुनील गवास्कर और महेन्द्र सिंह धोनी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। दक्षिण अफ़्रीका दौरे पर भारतीय टीम के चयन और एक के बाद एक फैसलों ने क्रिकेट के जानकारों को हैरान कर दिया है. चाहे वो टीम के उप कप्तान और विदेशी ज़मीं पर सबसे सफल भारतीय बल्लेबाज़ों में से एक अजिंक्य रहाणे को बाहर रखना हो या पहले टेस्ट के अपने सबसे सफल गेंदबाज़ भुवनेश्वर को दूसरे टेस्ट में ना खिलाना हो या फिर मैच के चौथे दिन तीसरा विकेट गिरने के बाद रोहित शर्मा को बल्लेबाजी के लिए ना भेजना हो.

एक के बाद एक फैसलों से अब क्रिकेट के दिग्गज सुनील गवास्कर को टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की याद आने लगी है. हालिया फैसलों पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट से जुड़े हम सभी लोगों को दुआ करनी चाहिए कि ये जो कर रहे हैं वो काम कर जाए. पहले टेस्ट में वो काम नहीं किया. दूसरे टेस्ट में भी अब तक वो काम नहीं किया है.

गावस्कर टीम से इतने निराश दिखे कि उन्हें पूर्व भारतीय कप्तान महेंदर सिंह धोनी की याद आ गई. उन्होंने कहा, “काश उन्होंने संन्यास नहीं लिया होता. उन्होंने कहा कि अगर धोनी चाहते तो वो खेल सकते थे. लेकिन साफ़ है कि उन पर कप्तानी का बहुत दबाव था.” गवास्कर ने कहा कि धोनी को कप्तानी छोड़ कर बतौर विकेट कीपर बल्लेबाज़ टीम में बने रहना चाहिए था. क्योंकि ड्रेसिंग रूम में उनकी सलाह अनमोल है. शायद उन्होंने सोचा कि उनका चले जाना ही ठीक है.

तारक मेहता में आएंगे दो नए चेहरे, जानिए कौन हैं वो

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मुंबई। टीवी की दुनिया में टीआरपी में सबसे ऊपर चलने वाले धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा की गोकुलधाम सोसाइटी में दो नए किरदार नजर आने वाले हैं. गोकुलधाम में टप्पू सोनू, गोगी और गोली सभी के माता पिता हैं. पर टप्पू सेना के एक सदस्य पिंकू के माता पिता कभी भी धारावाहिक में नज़र नहीं आये. धारावाहिक में अब इन्हीं दोनों को लाने की तैयारी चल रही है.

इस कहानी को दिखाने का ट्रैक 17 जनवरी से शो में प्रारम्भ होगा. असित का कहना है, “पिंकू, टप्पू सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे सभी प्यार करते हैं. वह गोकुलधाम में सभी की मदद करता रहता है. पर अभी तक हमने उसके माता-पिता या परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को नहीं दिखाया है. दर्शक हमसे इसके बारे में पूछ- ताछ करते रहते हैं. तो हमने निर्णय लिया कि अब इस रहस्य से पर्दा उठा दिया जाये. तो कौन हैं पिंकू के माता पिता? क्यों छुपाता रहा वह उनकी पहचान? क्या है ये रहस्य? इन सब सवालों के जवाब अब जल्द मिलने वाली हैं.

 

दस रूपये के सिक्के पर फैले भ्रम पर रिजर्व बैंक आया सामने

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नई दिल्ली। दस रुपये के सिक्के को लेकर काफी भ्रम फैला हुआ है. इस भ्रम की चपेट में सबसे ज्यादा अशिक्षित और गांव के लोग आ जाते हैं और अक्सर दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार कर देते हैं. इसको लेकर अब रिजर्व बैंक सामने आया है. बैंक ने 10 रुपये के सिक्कों के सभी 14 डिजाइन को लेनेदेन के लिए वैध और मान्य बताया है. भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को यह जानकारी दी है. आरबीआई की ओर से यह बयान उस समय आया है जब कुछ व्यापारियों ने ये सिक्कें स्वीकार करने से इनकार कर दिये थे.

आरबीआई ने सिक्कों के विभिन्न डिजाइन की वैधता और मान्यता दोहराया है. अपने बयान में केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह बाजार में उन्हीं सिक्कों को डालता है जो सरकारी टकसालों में बनते हैं. साथ ही यह भी कहा कि इन सिक्कों में विशिष्ट फीचर्स होते हैं जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को दर्शाते हैं. इन्हें समय समय पर पेश किया जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक अब तक 10 रुपये के सिक्कों के 14 डिजाइन जारी कर चुका है. यह सभी वैध तथा मान्य हैं. रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों व शाखाओं से वित्तीय लेनदेन और एक्सचेंज के लिए इन्हें स्वीकार करने के लिए कहा है.

करण

   

केंद्र सरकार ने लिया हज सब्सिडी ख़त्म करने का फैसला

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हज सब्सिडी पूर्ण रूप से खतम करने का ऐलान कर दिया है. सरकार के इस फैसले से सियासत गरमाती दिखाई दे रही है. हालांकि, हज सब्सिडी को खत्म करने की शुरुआत 2012 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से हो गयी थी जिसके मुताबिक 2022 तक सब्सिडी खतम हो जानी चाहिए थी. खास बात यह है कि ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन करते नज़र आ रहे हैं. अपनी प्रतिक्रिया में औवेसी ने कहा है कि वो तो सन 2006 से ही कह रहे हैं कि हज सब्सिडी ख़त्म कर देनी चाहिए और इसका इस्तेमाल मुस्लिम बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए, खास तौर पर लड़कियों की शिक्षा पर. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में काम शुरू कर देना चाहिए. गरीब नवाज फाउंडेशन के अध्यीक्ष मौलाना अंसार रजा ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा “हज सब्सिडी को खत्मे करना एक अच्छाल कदम है. अब इस राशि का बच्चों की पढ़ाई पर इस्तेोमाल करने की भी बात कही गई है. लेकिन, ये जो तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं, जैसे कभी तीन तलाक तो कभी बिना मेहरम के हज…ये सब ठीक नहीं है. मुस्लिम समुदाय को जिस तरह से खौफजदा करने की कोशिश की जा रही है वह ठीक नहीं है. हज सब्सिडी को खत्मम करने में कोई हर्ज नहीं है. वैसे भी यह सिर्फ नाम के लिए था. इसका कोई फायदा नहीं मिलता था.” अल्पसंख्यक मामलों के केंद्र मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने मंगलवार को हज सब्सिडी ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले की पुष्टि की. मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, आज़ादी के बाद पहली बार 1.75 लाख मुसलमान बिना सब्सिडी के हज करेंगे. पिछले साल 1.25 लाख लोग हज गए थे. उन्होंने कहा कि सब्सिडी हटाने के फ़ैसले से सरकार के 700 करोड़ रुपये बचेंगे और ये पैसा अल्पसंख्यक की शिक्षा ख़ासकर लड़कियों की तालीम पर खर्च किया जाएगा.
   

गन्धर्व गुलाटी

तीन तलाक देकर मोदी के खिलाफ क्या बोला शख्स

बरेली। तीन तलाक पर भले ही सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने कानून बनाकर रोक लगा दिया हो, इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है. बरेली की एक घटना ने तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार और कोर्ट के सामने चुनौती खड़ी कर दी है. असल में उत्तर प्रदेश के बरेली में शौहर ने बीच सड़क पर पत्नी को तीन बार तलाक देकर सारे रिश्ते खत्म कर लिए और धमकी दी की मोदी सरकार मेरा कुछ नहीं बिगाड़ेगी.

शहर के मोहल्ला कटघर निवासी नाजरीन का निकाह वसीम के साथ हुआ था. शादी के 4 साल बाद जब नाजरीन ने बेटी को पढ़ाना चाहा तो वसीम ने इसका विरोध कर दिया. दोनों के बीच अनबन ऐसी हुई के सारे रिश्ते टूटने लगे. वसीम ने नाज़रीन को घर से बाहर निकाल दिया और बेटी को ना पढ़ाने की जिद करते हुए तलाक देने की धमकी देने लगा.

हाल ही में जब नाजरीन अपनी बेटी के साथ रिश्तेदारों के यहां से आ रही थी तभी मोटरसाइकिल पर सवार वसीम ने नाजरीन को रोका और मारपीट करने लगा. और तीन बार तलाक देकर भाग गया. इस दौरान उसने कहा कि कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

फिलहाल पीड़िता ने मेरा हक फाउंडेशन से मदद की गुहार लगाई है. फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने बताया कि पीड़िता ने आपबीती बता कर इंसाफ की गुहार लगाई है. इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग को भी पत्र भेजा गया है. इस पूरे मामले में अब केंद्र की मोदी सरकार की परीक्षा की घड़ी आ गई है कि वह पीड़िता को कैसे इंसाफ दिला पाती है.

धर्म के नाम पर युवाओं की लड़ाई में जीत किसकी

 हिन्दुत्व का झंडा बुलंद करने वाले राजनीतिक दल अपने एजेंडे में सफल होते दिख रहे हैं. देश में हिन्दुत्व के एजेंडे की सफलता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भी दिखी, जब एक दलित युवक द्वारा दलितों के घरों से देवी-देवताओं के पोस्टर हटाकर उनकी जगह डॉ. अम्बेडकर और रविदास जी की फोटो लगाने से नाराज कुछ युवकों ने युवक को लाठी डंडे से पीटा.

 यही नहीं हिन्दुत्व का झंडा बुलंद किए युवकों ने दलित युवक से ‘जय माता दी’ के नारे लगवाएं. मामला तब सामने आया जब इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वाइरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पिटाई करने वाले युवकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 295 ए (किसी की भी धार्मिक भावनाओं का अपमान) और एससी / एसटी अधिनियम और आईटी अधिनियम के तहत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

घटना के बारे में एसएसपी अनंत देव का कहना है कि पुखराजी में रहने वाले चार युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया. उन्हें पकड़ने के लिए टीमें भेजी गई हैं. आरोपियों का संबंध मुख्यमंत्री योगी के संगठन हिंदू युवा वाहिनी से है.

यहां बड़ा सवाल यह है कि अपना भविष्य बेहतर बनाने की उम्र में दोनों पक्ष के युवा धर्म को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं. वो न साथ आकर इस देश की गरीबी पर लड़ते हैं न ही नासूर बने जातिवाद पर. न तो खराब शिक्षा व्यवस्था पर और न स्वास्थ सिस्टम पर. फिलहाल युवाओं की लड़ाई धर्म को लेकर है, जिसकी एक इंसान की बेहतरी में कोई भूमिका नहीं होती है. जाहिर सी बात है कि यह उन लोगों की जीत है, जो सालों से धर्म के नाम पर राजनीति करते आ रहे हैं और इसी के बूते भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का दम भरते हैं.

दलित परिवार को धर्म ना बदलने पर जान से मारने की धमकी

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 नूंह। नूंह जिले के नगीना खंड के मोहलाका गांव में धर्म ना बदलने पर दलित परिवार से मार पीट का मामला सामने आया है. इस मामले में पीड़ित श्रीकिशन ने नगीना थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई है. उन्होंने गांव में ही रहने वाले इस्लाम पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है.

श्रीकिशन की शिकायत के अनुसार, वह सपरिवार पंचायत से मिली बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) प्लाट में बने घर में रह रहा है. गांव के ही रहने वाले इस्लाम ने पास में अवैध कब्जा कर रखा है. वह धमकी देता है कि अगर इस कॉलोनी में रहना है, तो इस्लाम धर्म कुबूल करना होगा. जब उन्होंने विगत 15 जनवरी को इसका विरोध किया तो इस्लाम ने अपने कुछ साथियों के साथ लाठी-डंडों से श्रीकिशन के पुरे परिवार पर हमला कर दिया और साथ ही साथ इस्लाम धर्म ना कबूलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी.

इस गांव की आबादी लगभग 3000 है, जिसमें से सिर्फ सात परिवार दलित है और बाकी सभी परिवार मुस्लिम हैं. इससे पहले भी हुकुमचंद नाम के व्यक्ति को  गांव छोड़ कर जाना पड़ा था. उनपर भी दबाव बनाया गया था के वह इस्लाम धर्म कबूल कर लें.

  • संपादन- गन्धर्व गुलाटी

बसपा से फिर निकाले गए दद्दू प्रसाद

दद्दू प्रसाद

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद को एक बार फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. दद्दू प्रसाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा कर निकाला गया है. इससे पहले 28 जनवरी 2015 को भी बसपा सुप्रीमों ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था. लेकिन बाद में 28 मार्च 2017 को दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती के आवास पर उन्हें पुन: बसपा में शामिल कर लिया गया.

बांदा जनपद के मूल निवासी दद्दू प्रसाद कांशीराम जी से प्रभावित रहे हैं. वह खुद को कांशीरामवादी कहते रहे हैं. कांशीराम जी से प्रभावित होकर ही वो बसपा में शामिल हो गए थे. बसपा की पांच साल की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री थे. साथ ही बुंदेलखंड सहित कई राज्यों के प्रभारी भी रहे. दद्दू प्रसाद पार्टी की रणनीति में बदलाव के पक्षधर रहे हैं. इसलिए वह फिर से खटकने लगे थे.

इसके बाद 10 जनवरी को बसपा के बांदा जिलाध्यक्ष ने प्रेस नोट जारी कर दद्दू प्रसाद को बसपा से निष्कासित करने की सूचना दी. उन पर आरोप लगाया गया कि वह अपने को पार्टी का बड़ा नेता बताकर बसपा के पदाधिकारियों और समर्थकों को गुमराह कर रहे हैं. पार्टी ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि दद्दू प्रसाद का बसपा से कोई लेना-देना नहीं है. बसपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा गया है कि वह दद्दू प्रसाद से कोई संबंध रखें. न ही पार्टी के कार्यक्रमों या बैठकों में बुलाएं.

अपने निष्काषन पर दद्दू प्रसाद ने दलित दस्तक से बात करते हुए कहा कि मैं 28 मार्च 2017 को बसपा को बचाने वापस गया था. बसपा मेरे खून पसीने और श्रम से बनी है. मैं सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के लिए काम करता रहूंगा. बाबासाहेब अम्बेडकर और कांशीराम जी के मिशन के लिए काम करता रहूंगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा के अंदर के लोग पार्टी को बचाना नहीं चाहते हैं और जो पार्टी को आगे बढ़ाना चाहता है, उसे निकाल दिया जा रहा है.